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गन्ना खेती को बढ़ावा: चौड़ी कतार विधि पर हरियाणा में बढ़ी सब्सिडी, किसानों को राहत

 पंचकूला हरियाणा सरकार ने गन्ने की खेती को प्रोत्साहित करने व किसानों को अधिकाधिक लाभ प्रदान करने की योजना तैयार की है। 'गन्ना प्रौद्योगिकी मिशन' के अंतर्गत अब जो किसान चार फीट की दूरी पर चौड़ी कतारों में गन्ना रोपण करेंगे, उन्हें हरियाणा सरकार की ओर से पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। पहले यह राशि किसानों को तीन हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मिलती थी। दो हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से इसमें बढ़ोतरी की गई है। हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कहा कि हरियाणा का किसान केवल अन्न पैदा करने वाला नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता का सशक्त आधार भी है, इसलिए किसान को मजबूत करना भाजपा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने बताया कि पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट में की थी, जिसे राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। 15 अक्टूबर से करें आवेदन श्याम सिंह राणा ने बैठक में कहा कि बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि को प्राप्त करने के लिए गन्ना उत्पादक किसानों को पोर्टल के माध्यम से 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक आवेदन करना होगा। फरवरी 2027 के अंत तक भौतिक सत्यापन करने के बाद संबंधित किसान को प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि किसानों को एकल-आंख विधि से भी गन्ने की बिजाई करने पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाकर पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की गई है, जो कि पहले तीन हजार रुपये प्रति एकड़ थी। उन्होंने बताया कि प्रदेश की प्रत्येक सहकारी चीनी मिल अपने क्षेत्र के किसानों को शुगरकेन हार्वेस्टर मशीन उपलब्ध करवाएगी, ताकि किसानों की फसल कटाई पर लागत कम हो सके। किसान अक्टूबर से दिसंबर तक पौध लगा सकते हैं कृषि मंत्री के अनुसार टिश्यू कल्चर के माध्यम से गन्ने की उत्पादकता में वृद्धि की जाएगी। इस विधि से तैयार हुई गन्ने की पौध को किसानों को मुफ्त उपलब्ध करवाया जाएगा। करनाल सहकारी चीनी मिल द्वारा यह पौध तैयार होगी। इस मिल से किसान अक्टूबर से दिसंबर तक पौध ले सकते हैं। राणा ने कहा कि इन सभी पहल से किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार और निदेशक राज नारायण कौशिक समेत कई अधिकारी शामिल हुए।

स्वास्थ्य व्यवस्था होगी मजबूत, MP में बड़े पैमाने पर डॉक्टरों की नियुक्ति

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) इंदौर की ओर से मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित किया गया है। आयोग की ओर से जारी इस चयन परिणाम अब तक का सबसे बड़ा रिजल्ट माना जा रहा है, क्योंकि 1832 पदों के लिए 4 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। दो इंटरव्यू पैनल ने 45 दिनों के भीतर उम्मीदवारों का साक्षात्कार करवाया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद महीनेभर में आयोग की ओर से दो भाग में रिजल्ट बनाया गया, जिसमें 87 प्रतिशत मुख्य भाग का परिणाम निकाला है। आयोग ने मेडिकल ऑफिसर पद के लिए 27 जनवरी से इंटरव्यू रखे थे। इसमें 1832 पदों के लिए 4047 उम्मीदवार को बुलाया गया था। ये प्रक्रिया 10 अप्रैल तक चली। शुक्रवार को आयोग ने साक्षात्कार में चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 87 फीसद (1649 पद) मुख्य भाग शामिल है। वेटिंग लिस्ट में 186 उम्मीदवार बता दें कि, 1649 उम्मीदवारों में से 384 सामान्य से हैं, जबकि 225 एससी, 642 एसटी, 197 ओबीसी और 201 ईडब्ल्यूएस पद हैं। लेकिन, 1220 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। जबकि, 186 उम्मीदवारों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है।   13 फीसदी पदों पर दूसरी सूची में आएगा परिणाम आयोग ने स्पष्ट किया है कि, शासन के निर्देशों के तहत फिलहाल 87 प्रतिशत पदों का परिणाम घोषित किया गया है, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों की चयन प्रक्रिया अलग से पूरी होगी। इन पदों का परिणाम बाद में जारी किए जाएंगे। भर्ती में कुछ पद विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी आरक्षित रखे गए हैं। आयोग के अनुसार, चयन पूरी तरह मेरिट एवं आरक्षण नियमों के आधार पर हुआ है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद और आरक्षण का पेंच अब इस मामले में अधिकारियों का मानना है कि, मेडिकल ऑफिसर के इतने बड़े स्तर पर चयन होने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर होने के साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने की संभावना बढ़ी है। आयोग के ओएसडी रवींद्र पंचभाई का कहना है कि, ओबीसी आरक्षण के चलते 13 फीसदी प्रावधिक भाग का रिजल्ट नहीं निकाला गया है। डिप्टी सीएम ने दिए थे जल्द भर्ती करने के निर्देश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए उप स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विभाग को निर्देश दिए थे। उन्होंने बीते एक साल में कई बार विभाग की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देशित किया था कि, रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नए चिकित्सकों की भर्ती होनी चाहिए।

रायपुर-बिलासपुर समेत कई शहरों के अधिकारी बदले

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई वरिष्ठ इंजीनियरों के तबादला आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के तहत राज्य के विभिन्न निकायों में पदस्थ कार्यपालन और सहायक अभियंताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।     ​      राज्य शासन द्वारा जारी सूची के अनुसार लाल महेंद्र प्रताप सिंह कार्यपालन अभियंता को नगर निगम रायपुर से  नगर निगम बिलासपुर भेजा गया है। इसी प्रकार दिनेश नेताम कार्यपालन अभियंता को कवर्धा से स्थानांतरित कर संयुक्त संचालक कार्यालय दुर्ग में पदस्थ किया गया है।    ​       अभियंताओं की नई पदस्थापना में बृजेश वास्तव सहायक अभियंता को कोण्डागांव से बिलासपुर और ललित कुमार त्रिवेदी सहायक अभियंता को भी बिलासपुर में प्रभारी कार्यपालन अभियंता की कमान सौंपी गई है। दुर्ग क्षेत्र में भी बदलाव किए गए हैं, जिसके तहत सी.बी. परगनिहा सहायक अभियंता को दुर्ग से धमतरी, हेमन्त कुमार साहू सहायक अभियंता को भिलाई-चरौदा से नगर निगम दुर्ग और चन्द्रशेखर सारथी सहायक अभियंता को रायगढ़ से नगर पालिका चांपा भेजा गया है। वहीं नवा रायपुर में पदस्थ गगन वासन अब नगर निगम जगदलपुर में सहायक अभियंता के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। ​रिसाली कार्यपालन अभियंता को मिला अतिरिक्त प्रभार    ​ प्रशासनिक कार्यों को गति देने के लिए नगर पालिक निगम रिसाली के कार्यपालन अभियंता सुनील दुबे को उनके वर्तमान कार्यों के साथ-साथ संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास (क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग) के अधीक्षण अभियंता का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

अवैध निकासी और वेतन घोटाले के बाद सख्ती, कोडरमा में तबादला लिस्ट तैयार

कोडरमा जिला मुख्यालय में लंबे समय से एक ही कार्यालय और एक ही पद पर जमे कर्मियों के स्थानांतरण की तैयारी तेज हो गई है। मुख्य सचिव के निर्देश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। संवेदनशील पदों पर तीन वर्षों से अधिक समय से कार्यरत कर्मियों की सूची तैयार की जा रही है और माना जा रहा है कि अगले सप्ताह बड़े पैमाने पर तबादला आदेश जारी हो सकता है। जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में विभिन्न जिलों में कोषागार के माध्यम से अवैध निकासी और वेतन घोटाले के मामले सामने आने के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। इसके बाद सभी जिलों को निर्देश जारी करते हुए डीडीओ, लेखा, कोषागार और वेतन प्रसंस्करण से जुड़े कर्मियों का अनिवार्य स्थानांतरण करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि एक ही पद या कार्यालय में दीर्घकालीन पदस्थापन पर रोक लगाई जाए। साथ ही 30 मई तक आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इधर, कोडरमा जिला मुख्यालय में कई कर्मी पांच वर्षों से अधिक समय से एक ही कार्यालय में कार्यरत हैं। कुछ कर्मियों का अन्यत्र स्थानांतरण होने के बावजूद प्रतिनियुक्ति के जरिए उन्हें फिर से पसंदीदा पदों पर बनाए रखा गया है। ऐसे में मुख्य सचिव के आदेश के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। इस संबंध में मंगलवार को जिला स्थापना समिति की बैठक बुलाई गई है, जिसमें स्थानांतरण सूची को अंतिम रूप दिया जा सकता है। वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाने को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव ने संविदा और एकमुश्त मानदेय पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों से दूर रखने का निर्देश दिया है। इसके अलावा वेतन भुगतान में अनियमितताओं की पहचान के लिए एआई आधारित डेटा एनालिटिक्स प्रणाली लागू करने, रिस्क बेस्ड सैंपलिंग के जरिए संदिग्ध मामलों की जांच कराने तथा पिछले पांच वर्षों में असामान्य बजट मांगों की समीक्षा करने का आदेश दिया गया है।

नायब सिंह सैनी ने शुरू की नई डिजिटल सुविधा, किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत

 चंडीगढ़  हरियाणा में अब भवनों के निर्माण के लिए नक्शों की अनुमति ऑनलाइन तरीके से मिलेगी। इसके अलावा, किसानों को उनके वाट्सएप पर जे-फार्म भेजे जाएंगे, जिनके आधार पर वे 72 घंटे के भीतर अपनी फसल की पेमेंट प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को इन दोनों योजनाओं की शुरुआत की। हरियाणा सरकार ने 25 अप्रैल को चालू रबी खरीद सीजन के दौरान एमएसपी पर बेची गई गेहूं, सरसों व चना की फसलों के जे-फार्म किसानों के वाट्सएप पर भेजने की घोषणा की थी। छह मई तक 5 लाख 78 हजार किसानों द्वारा अपनी उपज मंडियों में बेची गई। इन किसानों को 13 लाख 77 हजार जे-फार्म जारी किए गए हैं। यह सुविधा प्रदेश में पहली बार शुरू की गई है। अब किसानों को अपना जे-फार्म लेने के लिए आढ़तियों के पास नहीं जाना पडे़गा। आसानी से मिलेगा अप्रूवल हरियाणा ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम के अंतर्गत डिजिटल प्लेटफार्म काम करेगा, जिसके माध्यम से आम नागरिकों को घर बैठे ही प्लाट और निर्माण से जुड़ी मंजूरी बिना किसी देरी के आसानी से मिल सकेंगी। पहले चरण में, पुरानी नगर पालिकाओं या कोर क्षेत्रों में प्लांड रिहायशी प्लाटों की ऑनलाइन मंजूरी शुरू की गई है। इस सिस्टम से समय की बचत होगी, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और काम की जवाबदेही तय होगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्लेटफार्म की शुरुआत करते हुए कहा कि अब आम आदमी को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी व सरल बनेगी। नया सिस्टम लागू होने से पहले आर्किटेक्ट्स और नगर निकाय अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने जानकारी दी कि जे-फार्म किसानों को वाट्सएप पर भेजकर योजना की शुरुआत की जा चुकी है। भविष्य में फसल की बिक्री के बाद समस्त जे-फार्म किसानों को उनके वाट्सएप नंबर पर ही मिलेंगे। किसानों की कितने हुई आवक? मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गेहूं खरीद के लिए मंडियों में व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रदेश में एक अप्रैल से सात मई तक 84 लाख 18 हजार टन गेहूं की आवक हुई है। इसमें से 83 लाख 75 हजार टन गेहूं की बिक्री हेतु किसानों का बाायोमीट्रिक सत्यापन हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब तक 82 लाख 55 हजार टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। एक सवाल के जवाब में नायब सिंह सैनी ने कहा कि बाायोमीट्रिक सत्यापन के लिए किसानों को कोई परेशान नहीं थी, बल्कि विपक्षी दलों के नेताओं को ज्यादा दिक्कत थी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक केएम पांडुरंग, शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक चंद्रशेखर खरे और मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीन आत्रे शामिल रहे।

WFI ने विनेश फोगाट को नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट से किया OUT

नई दिल्ली  भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने शनिवार को विनेश फोगाट को कारण बताओ नोटिस भेजा है। डब्ल्यूएफआई ने विनेश पर अनुशासनहीनता, डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। साथ ही संघ ने विनेश को 26 जून 2026 तक घरेल टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित किया है।  पहलवान विनेश फोगाट की मैट पर वापसी फिलहाल अधर में लटक गई है. भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने उन्हें 10 से 12 मई तक गोंडा में होने वाले नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से रोक दिया है।  यह वही टूर्नामेंट है, जिसके जरिए विनेश फोगाट कुश्ती के मैट पर कमबैक करने वाली थीं. लेकिन वापसी से पहले ही डब्ल्यूएफआई ने विनेश पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए 15 पन्नों का कारण बताओ नोटिस थमा दिया।  डब्ल्यूएफआई ने विनेश फोगाट पर अनुशासनहीनता, एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन,भारतीय कुश्ती की छवि खराब करने और महासंघ के नियमों का पालन न करने जैसे आरोप लगाए हैं. महासंघ ने साफ कहा है कि विनेश 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए पात्र नहीं होंगी।  डब्ल्यूएफआई ने ये फैसला इसलिए किया है क्योंकि विनेश ने रिटायरमेंट से वापस आने वाले खिलाड़ियों को छह महीने नोटिस पीरियड में गुजारने के यूडब्ल्यूडब्ल्यू डोपिंग रोधी नियम का पालन नहीं किया। इस नियम के तहत संन्यास से वापसी कर रहे खिलाड़ियों को छह महीने बिना किसी टूर्नामेंट में उतरे गुजराने होते हैं। डब्ल्यूएफआई ने थमाया 15 पेज का नोटिस डब्ल्यूएफआई ने विनेश को 15 पेजों का नोटिस थमाया है और कहा है कि उन्होंने ने जो आचरण किया है उससे राष्ट्रीय स्तर पर काफी बदनामी हुई है, साथ ही इससे भारतीय कुश्ती की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। नोटिस में विनेश पर डब्ल्यूएफआई के संविधान, यूडब्ल्यूडब्ल्यू इंटरनेशनल कुश्ती के नियम और डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं। महासंघ ने विनेश से चार आरोपों को लेकर जवाब मांगा है जिसमें पेरिस ओलंपिक-2024 में उनका डिस्क्वालिफाई होना भी शामिल है। विनेश का फाइनल मुकाबले से पहले वजन तय सीमा से ज्यादा था जिसके चलते वह अयोग्य घोषित कर दी गई थीं और पदक से चूक गई थीं। इसके अलावा विनेश से डोपिंग नियमों के तहत अपने ठिकानों की जानकारी न देने, मार्च 2024 में हुईं ट्रायल्स में दो वजन वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने को लेकर भी जवाब मांगा है। विनेश को लेकर क्यों सख्त हुआ WFI? डब्ल्यूएफआई के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत संन्यास के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ियों को कम से कम 6 महीने पहले नोटिस देना जरूरी होता है. महासंघ का दावा है कि विनेश फोगाट ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की. इसी वजह से उन्हें फिलहाल किसी भी घरेलू टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।  नोटिस में पेरिस ओलंपिक 2024 के वजन विवाद, एंटी-डोपिंग नियमों से जुड़े मामलों और ट्रायल्स में दो अलग-अलग वेट कैटेगरी में खेलने जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया गया है. यह मामला सिर्फ एक नोटिस तक सीमित नहीं है।  पिछले कुछ समय से विनेश फोगाट और डब्ल्यूएफआई के बीच लगातार तनातनी चल रही है. हाल ही में विनेश ने आरोप लगाया था कि महासंघ जानबूझकर उनकी वापसी रोकने की कोशिश कर रहा है और उन्हें नेशनल रैंकिंग चैम्पियनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन तक नहीं करने दिया गया. हालांकि बाद में अंतिम दिन उनका रजिस्ट्रेशन स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन अब उन्हें टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया है।  …तो एशियन गेम्स से भी होगी छुट्टी? डब्ल्यूएफआई ने हाल ही में चयन के लिए नए नियम लागू किए हैं. इन नियमों के मुताबिक केवल वही पहलवान एशिय गेम्स के लिए ट्रायल्स में हिस्सा ले पाएंगे, जिन्होंने 2025 या 2026 में आयोजित प्रतियोगिताओं में मेडल जीता हो. चूंकि विनेश फोगाट ने पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद कोई प्रोफेशनल मुकाबला नहीं खेला है, इसलिए फिलहाल उनका एशियन गेम्स तक पहुंचने का रास्ता भी मुश्किल नजर आ रहा है।  विनेश फोगाट लंबे समय से भारतीय कुश्ती की सबसे चर्चित और सफल खिलाड़ियों में रही हैं. लेकिन अब उनकी वापसी से पहले ही डब्ल्यूएफआई के साथ बढ़ता विवाद भारतीय कुश्ती में एक नए बड़े विवाद का रूप लेता दिख रहा है. अब सबकी नजरें इस बात पर है कि क्या विनेश इस फैसले को चुनौती देंगी और क्या डब्ल्यूएफआई उनके जवाब के बाद अपना रुख बदलेगा या नहीं।  अभी हिस्सा नहीं ले सकतीं विनेश महासंघ ने खासतौर पर ये बताया है कि विनेश 26 जून से पहले किसी भी घरेलू टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकती हैं। इसमें नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट जो गोंडा में होना है वो भी शामिल है। 10 से 12 मई के बीच होने वाला ये टूर्नामेंट विनेश की वापसी के तौर पर देखा जा रहा था। नोटिस में लिखा है, "महासंघ अपने आप में इस बात से संतुष्ट होना चाहता है कि आपने किसी भी तरह के डोपिंग रोधी नियम का उल्लंघन नहीं किया जिससे आने वाले टूर्नामेंट में महासंघ की छवि पर असर पड़े।" विनेश के पास नोटिस का जवाब देने के लिए 14 दिनों का समय है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को लेकर हरियाणा सरकार की खास तैयारी, CM नायब सैनी का बड़ा बयान

चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 12 ज्योतिर्लिंग की चर्चा करते हुए भारत सरकार द्वारा 11 मई को बनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर प्रकाश डाला है। नायब सैनी ने विचार रखते हुए कहा कि हमारे देश में अनेक ऐसे पूजनीय स्थल हैं, जो हमारी आस्था और संस्कृति को मजबूत बनाते हैं। गुजरात स्थित श्री सोमनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि यह भारत के आध्यात्मिक संकल्प का जीवंत प्रतीक है। भगवान शिव के 12 आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान रखने वाला सोमनाथ मंदिर, भारत के पवित्र भूगोल में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह प्रत्येक भारतीय के जीवन में रचा-बसा हुआ है, जिसके बिना वह अपने अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकता। भारत सरकार 11 मई तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रही है, जो सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व है। हरियाणा सरकार इस पर्व को उसी भव्यता, आध्यात्म और उत्साह से मनाएगी, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की है। इस मंदिर ने सदियों तक आक्रमण और पुनर्निर्माण का अद्वितीय इतिहास देखा है। वर्ष 1026 में हुए आक्रमण के बाद भी हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ, जो भारतीय समाज की अटूट आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है। स्वतंत्रता के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और 11 मई 1951 को इसका प्राण-प्रतिष्ठा समारोह सम्पन्न हुआ। इस पर्व को मनाने का यही मूल उद्देश्य है कि कितने ही उतार-चढ़ाव आए, परंतु सोमनाथ हमारी अटूट आस्था का प्रतीक बना रहा और बना रहेगा। यह भारतीय जन मानस के हृदय में वास करता है। यह पर्व उन असंख्य महान विभूतियों को स्मरण करने का भी है, जो सोमनाथ मंदिर पर क्रूर हमलों के बावजूद उनके सम्मुख डटकर खड़े रहे। 1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी, सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में उन्हें सोमनाथ मंदिर की दुर्दशा व्यथित कर रही थी। 13 नवंबर 1947 को दीपावली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया था कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। उनके आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नये उत्साह से भर दिया। दुर्भाग्यवश सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पावन अवसर पर सोमनाथ के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है, क्योंकि बीते 75 वर्षों में यह मंदिर केवल पुनर्निर्माण का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास और अटूट आस्था का सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने अध्यक्ष होने के नाते भी इस विरासत को संजोकर रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। आज सोमनाथ मंदिर भव्य वास्तुकला, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय संगम है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ा एक जीवंत तीर्थ है, जो हर दिन लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर के धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों को विश्वविख्यात कर हिंदू धर्म को प्रखर प्रतिनिधित्व दिया है। उन्होंने विकास भी विरासत भी के मूल मंत्र से प्रेरित होकर सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन तक आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। साथ ही, उनकी पारंपरिक पहचान को भी बरकरार रखा है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व ने हिंदू धर्म को पुनर्जीवित किया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस अदभुत धार्मिक शक्ति के दर्शन मात्र से ही आपको अविस्मरणीय अनुभूति होगी।

वर्ष 2015-17 की तुलना में 2021-23 की सर्वे रिपोर्ट में काफी कम दर्ज की गई मृत्यु दर

लखनऊ योगी सरकार की 102 एंबुलेंस सेवा (मदर एंड चाइल्ड सर्विसेस) गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। पहले गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलने से उनकी जान को खतरा रहता था। ऐसे में योगी सरकार ने 102 एंबुलेंस सेवा का सुदृढ़ीकरण कर मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। योगी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि वर्तमान में 102 एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम घटकर 7 मिनट रह गया है। इसका मतलब यह है कि आपात स्थिति में मात्र सात मिनट में चिकित्सीय सुविधा प्राप्त हो रही है। रिस्पांस टाइम में उत्तर प्रदेश पूरे देश में नंबर एक पर है।  2,270 एंबुलेंस के जरिये रोजाना 40 हजार से अधिक गर्भवती हो रहीं लाभान्वित   अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, स्वास्थ्य अमित घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी ने मातृ मृत्यु अनुपात को कम करने के लिए बड़े कदम उठाये। इसके लिए जहां प्रदेश के शहरी से लेकर ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों को सुदृढ़ किया गया, वहीं 102 एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम को कम करने के लिए विभिन्न कदम उठाए गये। उसके नतीजे आज सबके सामने हैं। सीएम योगी की दूरदर्शी सोच और मॉनीटरिंग का ही असर है कि वर्तमान में एंबुलेंस सेवा 102 का रिस्पांस टाइम मात्र 7:06 मिनट है जबकि वर्ष 2016 में रिस्पांस टाइम 11:28 मिनट था। यह रिस्पांस टाइम अचानक कम नहीं हुआ बल्कि सीएम योगी के विगत नौ वर्षों में लगातार किए गये प्रयासों और पहलों से संभव हो पाया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सीएम योगी ने 2019 और 2023 में खटारा हो चुकी क्रमश: 1,554 और 674 एंबुलेंस को हटाकर नई स्वास्थ्य तकनीक से लैस एंबुलेंस की खरीद की। इसके अलावा सेवा को बेहतर करने के लिए 306 अतिरिक्त नई एंबुलेंस को जोड़ा गया। वर्तमान में प्रदेश में कुल 2,270 एंबुलेंस सेवा 102 संचालित हैं। इसके जरिये प्रदेश में औसतन रोजाना 40,524 जच्चा-बच्चा को सहायता प्रदान की जा रही है।  प्रदेश में बेहतर एंबुलेंस सेवा से मातृ मृत्यु अनुपात में दर्ज की गई कमी  राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि 102 एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम में कमी आने से प्रदेश में मातृ मृत्यु अनुपात में काफी कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस) के अनुसार वर्ष 2015-17 में प्रदेश की मातृ मृत्यु अनुपात 216 प्रति लाख दर्ज की गयी थी, जो कम हो करके वर्ष 2021-23 में 141 प्रति लाख पहुंच गई है। पूरे देश में सबसे कम रिस्पांस टाइम उत्तर प्रदेश का मिशन निदेशक के अनुसार, सीएम योगी के प्रयासों का ही नतीजा है कि साल दर साल एंबुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम कम होता गया। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस सेवा 102 का रिस्पांस टाइम वर्ष 2016 में 11:28 मि., वर्ष 2017 में 12:01 मि. और वर्ष 2018 में 11:21 मि. दर्ज किया गया। वहीं वर्ष 2020 में 13:42 मि. और वर्ष 2021 में 12:02 मि. रिस्पांस टाइम दर्ज किया। वर्ष 2020 और 2021 का रिस्पांस टाइम वैश्विक कोरोना बीमारी के समय का है। इसके बाद वर्ष 2022 में 7:01 मिनट और वर्ष 2023 में 7:02 मिनट दर्ज किया गया है। वहीं वर्तमान में रिस्पांस टाइम 7:06 मिनट है। सबसे बड़ी बात यह है कि पूरे देश में एंबुलेंस सेवा का सबसे कम रिस्पांस टाइम उत्तर प्रदेश का ही है, जबकि उत्तर प्रदेश देश भर में सबसे अधिक 25.74 करोड़ जनसंख्या वाला राज्य है। उत्तर प्रदेश एंबुलेंस सेवा के रिस्पांस टाइम 7:06 मिनट के साथ देशभर में पहले स्थान पर है। वहीं दूसरे स्थान पर 7:57 मिनट के साथ राजस्थान, तीसरे स्थान पर 10:45 मिनट के साथ केरल है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के साथ ही सुशासन, सुरक्षा और विकास के एक नवयुग का आरंभ हो गया है। पश्चिम बंगाल अब सच्चे अर्थो में 'आमार सोनार बांग्ला' बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन एवं पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी के नेतृत्व में यह राज्य अब अपने पुराने गौरव और वैभव को प्राप्त कर समग्र विकास, निवेश, सुशासन एवं जनकल्याण के नए-नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कोलकाता के बिग्रेड परेड ग्राउंड में पश्चिम बंगाल की नवगठित राज्य सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। समारोह में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह, केन्द्रीय रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह, अन्य वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्रीगण, एनडीए शासित विभिन्न राज्यों के विभिन्न मुख्यमंत्री एवं अतिविशिष्ट जनों की गरिमामय उपस्थिति में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में  सुवेन्दु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल  आर.एन. रवि ने  सुवेन्दु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद एवं नई सरकार के 5 अन्य मंत्रीगण को भी पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री  सुवेन्दु अधिकारी को लोक कल्याण के इस नए दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए समर्पित मैदानी कार्यकर्ताओं एवं राज्य की जागरूक जनता को भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं हैं।  

बिहार को बड़ी सौगात: रक्सौल एयरपोर्ट से नेपाल तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी, जल्द शुरू होंगी फ्लाइट्स

रक्सौल (पूच) भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के बहुप्रतीक्षित रक्सौल एयरपोर्ट परियोजना को लेकर शनिवार को बड़ी जानकारी सामने आई। पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने अधिकारियों के साथ प्रस्तावित एयरपोर्ट एवं तिलावे नदी क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने के बाद कहा कि रक्सौल एयरपोर्ट का रनवे पटना एयरपोर्ट से करीब 360 मीटर बड़ा होगा। उन्होंने दावा किया कि यह एयरपोर्ट आकार और सुविधाओं के मामले में उत्तर बिहार का महत्वपूर्ण हवाई केंद्र बनेगा। निरीक्षण के बाद एसएसबी मुख्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सांसद ने कहा कि यदि सभी कार्य तय समयसीमा के अनुसार पूरे हुए तो अगले लगभग 20 महीनों में रक्सौल से हवाई सेवा शुरू हो सकती है। बड़े विमानों की लैंडिंग के अनुरूप बनेगा रनवे सांसद डॉ. जायसवाल ने बताया कि प्रस्तावित एयरपोर्ट का रनवे तिलावे नदी के उस पार तक विस्तारित किया जाएगा, ताकि बड़े विमानों की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सके। उन्होंने कहा कि बड़े रनवे के कारण विमानों को इमरजेंसी ब्रेकिंग की आवश्यकता कम पड़ेगी, जिससे एयरपोर्ट तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित और आधुनिक होगा। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट निर्माण के लिए कुल 139 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शेष भूमि अधिग्रहण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। कंसल्टेंट चयन के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है और अगले तीन महीनों में विस्तृत डिजाइन एवं तकनीकी नक्शा तैयार होने के बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सांसद ने कहा कि निर्माण एजेंसी को एयरपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद दो महीने तक तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा मानक जांच एवं ट्रायल लैंडिंग की प्रक्रिया चलेगी। उत्तर बिहार और नेपाल सीमा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ सांसद ने कहा कि रक्सौल एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि उत्तर बिहार एवं भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के आर्थिक, व्यापारिक और पर्यटन विकास का नया केंद्र बनेगा। एयरपोर्ट बनने से नेपाल आने-जाने वाले यात्रियों, व्यापारियों एवं पर्यटकों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही स्थानीय लोगों को पटना जाकर विमान सेवा लेने की मजबूरी समाप्त होगी। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट परियोजना के साथ-साथ बेतिया-रक्सौल और मोतिहारी-रक्सौल फोरलेन सड़क परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद क्षेत्र की कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। वर्ष 2016 में मिली थी स्वीकृति डॉ. जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पीएम पैकेज के तहत एयरपोर्ट परियोजना के लिए 250 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि भूमि अधिग्रहण एवं नीतिगत कारणों से परियोजना लंबे समय तक अटकी रही। वर्ष 2023 में भूमि अधिग्रहण की अनुमति मिलने के बाद परियोजना ने गति पकड़ी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की पहल से रक्सौल का सपना अब साकार होता दिख रहा है। सांसद ने कहा कि वर्ष 2026 रक्सौल और चंपारण के विकास के लिए विशेष वर्ष साबित होगा। उन्होंने बताया कि दो माह के भीतर रेलवे क्रॉसिंग संख्या 33 एवं 34 पर आरओबी निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। साथ ही रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे परियोजना को भी गति मिलने की संभावना है। इस अवसर पर रक्सौल विधायक प्रमोद कुमार सिन्हा, नरकटिया विधायक विशाल कुमार, सुगौली के राकेश गुप्ता उर्फ बबलू गुप्ता, पूर्व विधायक उमाकांत सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक कुमार पांडेय, एसडीओ मनीष कुमार, एसडीपीओ मनीष आनंद सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।