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एमपी हाई कोर्ट में नई टाइमिंग लागू, शुक्रवार से सुबह 10 बजे बैठेंगी बेंचें

जबलपुर हाई कोर्ट की स्थापना के बाद दूसरी बार न्यायालयीन समय बढ़ाया गया है। हाई कोर्ट में अब पंद्रह मिनट अधिक कार्य होगा। सुबह 10.15 की जगह अब हाईकोर्ट में सुनवाई सुबह 10 बजे से शुरू हो जाएगी। नया नियम शुक्रवार से ही लागू हो जाएगा। हाई कोर्ट के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (न्यायिक) समीर कुलश्रेष्ठ ने मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के निर्देश पर इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में हाई कोर्ट के काम का समय सुबह 10.30 से सायं 4.30 तक था। इस बीच विश्राम की अवधि 1.30 से 2.30 बजे तक थी। तीन जनवरी 2022 को इसमें संशोधन किया गया था। संशोधित समय के अनुसार सुबह 10.15 से सायं 4.30 तक न्यायालयीन कार्य हो रहा था। विश्राम की अवधि दोपहर 1.30 से 2.15 तक है। नए आदेश के तहत भोजनावकाश या कोर्ट उठने के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। कामकाज सुबह दस बजे शुरू होगा।  

लघु वनोपज प्रसंस्करण से हजारों महिलाओं को मिला सम्मानजनक रोजगार और आय का स्थायी जरिया

रायपुर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में वन धन विकास केंद्र महिलाओं की आर्थिक आजादी और आत्मनिर्भरता का एक सशक्त आधार बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और प्रधानमंत्री जनमन योजना के सफल क्रियान्वयन से राज्य में अब तक 155 वन धन विकास केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें 139 सामान्य क्षेत्रों में और 16 केंद्र विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय समूह (पीव्हीटीजी) क्षेत्रों में संचालित हैं। संग्रहण से प्रसंस्करण तक का सफर        इन केंद्रों ने पारंपरिक लघु वनोपज संग्रहण को आधुनिक प्रसंस्करण से जोड़कर एक नई दिशा दी है। यहाँ न केवल वनोपजों का संग्रहण होता है, बल्कि उनका प्राथमिक प्रसंस्करण और उच्च गुणवत्ता वाले हर्बल उत्पादों का निर्माण भी किया जा रहा है। इस पहल ने हजारों महिलाओं को उनके गांव के समीप ही स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया है। हजारों समूहों को मिला आर्थिक संबल            वन धन विकास केंद्रों की सफलता का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है। लगभग 4 हजार 900 महिला स्व-सहायता समूह इन केंद्रों से सीधे जुड़े हैं। करीब 55 हजार महिला सदस्य गांवों और हाट-बाजारों में संग्रहण एवं प्रसंस्करण के कार्य में संलग्न हैं। पिछले पांच वर्षों में संग्रहण कार्य के लिए महिलाओं को लगभग 4 करोड़ रुपये का कमीशन वितरित किया गया है। हर्बल उत्पादों से बढ़ी आय       प्राथमिक संग्रहण के साथ-साथ मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। लगभग 1,300 महिला समूहों की 17,000 महिलाएं हर्बल उत्पाद निर्माण से जुड़ी हैं। इस विशिष्ट कार्य के लिए अब तक करीब 1 करोड़ रुपये का कमीशन महिलाओं को दिया गया है। तैयार उत्पादों की आपूर्ति आयुष विभाग को की जा रही है। इसी कड़ी में 4 केंद्रों ने 25.17 लाख रुपये का शुद्ध लाभांश अर्जित कर एक मिसाल पेश की है। स्थानीय संसाधनों से सशक्तिकरण  वन धन विकास केंद्रों की यह मुहिम न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से वनांचल की अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर रही है। यह पहल लोकल फॉर वोकल और आत्मनिर्भर भारत के सपने को छत्तीसगढ़ के जंगलों में हकीकत में बदल रही है।

विद्युत सेवाओं में सुधार और उपभोक्ता संतुष्टि पर सरकार का फोकस : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल विद्युत समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा “संपर्क अभियान : 2026” के अंतर्गत बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये आयोजित विशेष शिविर का शुभारंभ ग्वालियर के तानसेन नगर जोन के नवीन पार्क स्थित कैंप से किया। शुभारंभ कार्यक्रम में हिस्सा लेने ऊर्जा मंत्री इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन से पहुंचे। इस शिविर में उपभोक्ताओं की बिलिंग, मीटर, विद्युत कनेक्शन एवं अन्य शिकायतों का मौके पर समाधान सुनिश्चित किया जायेगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि प्रत्येक उपभोक्ता को सरल, सुगम एवं बेहतर विद्युत सेवाएं उपलब्ध हों। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि लोगों के हित में लगाये जा रहे विद्युत शिविरों का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि विद्युत विभाग खुद आपके दरवाजे तक आ रहा है। इसी तरह उन्होंने समाधान योजना का लाभ उठाने की भी लोगों से अपील करते हुए बताया कि यह योजना कल 15 मई तक के लिए और है। अगर उपभोक्ता बकाया राशि एक मुफ्त जमा नहीं कर सकते हैं, तो वह किस्तों में भी बकाया राशि का भुगतान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह चुनावी योजना नहीं है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रतिनिधि के रूप में इस सेवक ने इस योजना की शुरुआत की है, ताकि आपको लाभ मिल सके। ऊर्जा मंत्री ने लोगों से बिजली का बिल भरने की अपील करते हुए कहा अगर घर में आटा नहीं है, तो रोटी कैसे बनेगी, आटे के लिए पैसा तो खर्च करना ही पड़ेगा ना। बिजली का उपभोग करने के लिए हमें बिजली का बिल तो जमा करना पड़ेगा। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि अगर बिजली के बिल जमा नहीं किया, तो इसका असर बिजली कंपनियों पर पड़ेगा और आपको महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी। हमारी बिजली कंपनियां भी एक हाथ से बिजली खरीदती हैं और दूसरे हाथ से उसे बेचती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय था, जब शहर में कई-कई घंटे के लिए प्रतिदिन बिजली की कटौती रहती थी, लेकिन आज ऐसा नहीं है और यह सब आपके वोट की ताकत के कारण ही हुआ है। उन्होंने केम्प में तानसेन नगर जोन के कर्मचारियों को हेलमेट वितरित किए। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने को उप नगर ग्वालियर स्थित लोको बिरखा कोली का बाड़ा, वार्ड क्रमांक 31 में चल रहे सड़क प्रगति कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि क्षेत्र के समग्र विकास, बेहतर यातायात व्यवस्था एवं नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए आपका सेवक निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने वार्ड 32 के गांधी नगर में सीवर समस्या का निरीक्षण करते हुए यथाशीघ्र समाधान के निर्देश नगर निगम अधिकारियों को दिए। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने उप नगर ग्वालियर के शब्द प्रताप आश्रम क्षेत्र में सीवर सुपर सकर मशीन द्वारा चल रहे सफाई कार्य तथा मोहिते गार्डन क्षेत्र में नाले की सफाई कार्य का निरीक्षण भी किया। क्षेत्र में अपने भ्रमण के दौरान ऊर्जा मंत्री रेशम मील पुरानी लाइन में  पातीराम गडरिया जी के निवास पर पहुंचे तथा स्नेहपूर्वक भोजन ग्रहण किया।  

अनुशासनहीनता पर भाजपा कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस

गुना  भारतीय जनता पार्टी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर अनर्गल टिप्पणी करने पर स्थानीय कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है ।बता दें भाजपा के कैंट मंडल उपाध्यक्ष कृष्णपाल यादव को पार्टी के जिला महामंत्री संतोष धाकड़ ने सोशल मीडिया अकाउंट पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट डालने को संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है ।नोटिस में यादव से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है ।नोटिस में कहा गया है कि मंडल उपाध्यक्ष के पी यादव पिछले कई दिनों से पार्टी विरोधी कार्य करते हुए लगातार पार्टी के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल रहे हैं जिससे पार्टी की छवि धूमिल हो रही है,वरिष्ठ संगठन के संज्ञान लेने के बाद यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है तथा अगर तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पार्टी सख्त कार्रवाई करेगी

हाई कोर्ट ने कार्तिकेय चौहान को दी मोहलत, राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि केस में अगली सुनवाई तय

जबलपुर  हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई हुई। मामला एमपी-एमएलए कोर्ट, भोपाल के विशेष मजिस्ट्रेट द्वारा मानहानि के प्रकरण में जारी समन को चुनौती से संबंधित है। सुनवाई के दौरान भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह के अधिवक्ता ने बताया कि प्रकरण में जरूरी अधीनस्थ कोर्ट का आदेश-पत्र व दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से आदेश-पत्र व दस्तावेज प्रस्तुत सहमति व्यक्त की गई। लिहाजा, हाई कोर्ट ने माेहलत प्रदान करते हुए अगली सुनवाई 17 जुलाई को निर्धारित कर दी। उल्लेखनीय है कि भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विरु0 एमपी-एमएलए कोर्ट भोपाल में मानहानि का परिवाद दायर किया था। परिवाद में कहा गया था कि 2018 में राहुल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। उस समय झाबुआ में हुई चुनावी सभा में राहुल गांधी ने एक भाषण के दौरान कथित तौर पर पनामा पेपर्स लीक का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान और उनके बेटे कार्तिकेय का नाम लिया था। राहुल गांधी ने तुलना करते हुए कहा था कि पाकिस्तान में नवाज शरीफ पर कार्रवाई हुई, लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं हुआ। इस बयान को लेकर कार्तिकेय सिंह चौहान ने इसे अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने बताया था। विशेष मजिस्ट्रेट द्वारा परिवाद की सुनवाई करते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया गया था। समन व परिवाद को निरस्त कराने राहत चाहते हुए राहुल गांधी ने हाई कोर्ट की शरण ली थी। उन्होंने आरोपों को नकारते हुए परिवाद को बेबुनियाद बताया। हाई कोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता का पक्ष सुनने के लिए उन्हें नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने निर्देश जारी किए थे। याचिकाकर्ता राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा व अजय गुप्ता ने पक्ष रखा।  

सभी विभागों की जिम्मेदारियां तय : 30 मई तक पूर्ण करने के निर्देश

भोपाल मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने राज्य स्तरीय समिति की बैठक में बाढ़ राहत एवं बचाव संबंधी निर्देश दिये हैं कि जरूरत पड़ने पर सभी विभाग उन्हें दी गई जिम्मेदारियों के अनुरूप कलेक्टर के समन्वय में बाढ़ राहत और बचाव संबंधी कार्य करेंगे। उन्होंने विभाग प्रमुखों से कहा है कि वे निर्धारित एसओपी के अनुसार 30 मई तक सभी जरूरी व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित कर लें। मुख्य सचिव  जैन गुरुवार को मंत्रालय में वर्षा पूर्व बाढ़ से बचाव संबंधी आवश्यक प्रबंधों की राज्य स्तरीय बैठक में समीक्षा कर रहे थे। गृह विभाग इस कार्य के लिए नोडल होगा। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाना सहित सहित अन्य विभाग प्रमुख वीडियो कॉफ्रेंसिंग से बैठक में शामिल हुए। सेना के अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। बैठक में राहत आयुक्त  विवेक पोरवाल ने विगत वर्षों की बाढ़ और बारिश की स्थिति तथा विभागों को सौंपे गए कार्यों की जानकारी का प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्य सचिव  जैन ने अगले 15 दिनों में सौंपे गये दायित्वों को पूरा करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में उसी तरह का सिस्टम विकसित किया जाये, जिससे जनहानि न हो। उन्होंने ग्रामीण विकास, लोक निर्माण, नगरीय विकास, राजस्व, गृह, कृषि, जल संसाधन, पीएचई, स्वास्थ्य, ऊर्जा और मौसम विभाग को मिलकर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि मौसम की सटीक जानकारी के लिए पहले से चिन्हित स्थानों पर केंद्र स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जाएं ।उन्होंने कहा कि मौसम का अलर्ट सिस्टम भी पहले से बेहतर हुआ है और सभी संबंधित विभाग इस तरह की सूचनाओं के आदान प्रदान के साथ त्वरित कार्यवाही सिस्टम विकसित करें। मानसून पूर्व बाढ़ एवं अतिवृष्टि से निपटने के लिए हुई राज्य स्तरीय बैठक में गृह विभाग को सेना से समन्वय, बाढ़ बचाव उपकरणों की तैयारी, प्रशिक्षित तैराकों की सूची और नियंत्रण कक्ष से समन्वय की जिम्मेदारी दी गई। राजस्व विभाग को सभी कलेक्टर को चेक-लिस्ट अनुसार तैयारी, आपदा की स्थिति में क्षति आकलन और समय पर राहत वितरण सुनिश्चित करने का कार्य सौंपा गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को अस्थायी शिविरों के लिए भवन चयन, जर्जर भवनों के चिन्हांकन की कार्रवाई, निचले क्षेत्रों से आबादी का स्थानांतरण और खुले बोरवेल/कुओं की सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं। लोक निर्माण विभाग को पुलों पर बेरियर, जर्जर भवनों की मरम्मत और चेतावनी बोर्ड लगाने का कार्य सौंपा गया है। परिवहन विभाग को बसों की फिटनेस जांच, ओवरलोडिंग पर नियंत्रण और बाढ़ में सुरक्षित यातायात की व्यवस्था सुनिश्चित करने का दायित्व मिला है। नगरीय विकास विभाग को नालों की सफाई, निचली बस्तियों को खाली कराने और जर्जर भवनों की मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग को बांधों की मजबूती, जल निकासी, पूर्वानुमान और बाढ़ संभावित गांवों का चिन्हांकन करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। स्वास्थ्य विभाग को बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में चिकित्सा, दवाएं, टीकाकरण और महामारी रोकथाम के लिए आवश्यक सामग्री की व्यवस्था के साथ सर्पदंश के उपचार में प्रयुक्त एंटीवेनम की पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को स्वच्छ पेयजल, शुद्धिकरण, क्लोरीन टैबलेट वितरण और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। कृषि विभाग को खाद-बीज का भंडारण, समय पर वितरण और कीट-व्याधि पर निगरानी का दायित्व दिया गया है। पशुपालन विभाग को पशु चिकित्सा दल, दवाएं, चारे का भंडारण और मृत पशुओं के सुरक्षित निपटान की जिम्मेदारी सौंपी गई है। खाद्य विभाग को खाद्यान्न और आवश्यक राहत सामग्री का भंडारण, मूल्य निर्धारण और वितरण की व्यवस्था करना होगी। ऊर्जा विभाग को राहत स्थलों पर विद्युत आपूर्ति, वैकल्पिक व्यवस्था, फील्ड टीम गठन और पब्लिक सूचना की जिम्मेदारी दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग को महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, परामर्शदाताओं की मदद से सुरक्षित निष्क्रमण की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। मौसम विभाग को मानसून के दौरान वर्षा की दैनिक जानकारी और मौसम का पूर्वानुमान प्रतिदिन गृह, जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकारण को नियमित रूप से देनी होगी। दूरदर्शन तथा आकाशवाणी को भारी वर्षा तथा बाढ़ की स्थिति में जिला प्रशासन या राज्य शासन के निर्देश पर पूर्व चेतावनी और स्थानीय लोगों को सही जानकारी देने के लिए कहा गया है। मुख्य सचिव  जैन ने कहा कि हालांकि पहुंच विहीन क्षेत्रों की संख्या अब न के बराबर रह गई है और आगामी एक माह में लोक निर्माण विभाग रह गए क्षेत्रों में भी आवश्यक पुल पुलियों का निर्माण कर सकता है। उन्होंने राहत आयुक्त से कहा कि राहत और बचाव कार्यों के लिये आवश्यक धनराशि का बेहतर उपयोग करें।  

महंगाई ने तोड़ी 42 महीनों की सीमा, जानिए किन चीजों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े

नई दिल्ली महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर यानी WPI (Wholesale Price Index) बढ़कर 8.30 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले करीब 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्च 2026 में यह आंकड़ा 3.88 फीसदी था. बाजार को उम्मीद थी कि महंगाई करीब 5.50 फीसदी रह सकती है, लेकिन असली आंकड़े ने सभी अनुमान पीछे छोड़ दिए. इससे साफ है कि देश में लागत और ईंधन से जुड़ा दबाव तेजी से बढ़ रहा है।  वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले DPIIT द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र रहा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर भारत के थोक बाजार पर दिखाई दिया है।  ईंधन और तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अप्रैल महीने में फ्यूल एंड पावर कैटेगरी की महंगाई मार्च के 1.05 फीसदी से बढ़कर सीधे 24.71 फीसदी पर पहुंच गई. यह उछाल बेहद बड़ा माना जा रहा है। कच्चे तेल की थोक महंगाई 88 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है. वहीं, पेट्रोल की कीमतों में 32.40 फीसदी और डीजल में 25.19 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. घरेलू LPG गैस भी महंगी हुई है और इसकी महंगाई दर 10.92 फीसदी रही।  विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान संकट और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. इससे कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े और इसका असर सीधे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में बदलाव का असर घरेलू कीमतों पर जल्दी दिखता है।  खाने-पीने की चीजों से राहत हालांकि राहत की बात यह रही कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई अभी ज्यादा नहीं बढ़ी है. अप्रैल में फूड इन्फ्लेशन बढ़कर 2.31 फीसदी रही, जबकि मार्च में यह 1.85 फीसदी थी. प्याज और आलू जैसी जरूरी सब्जियों के दाम अभी भी पिछले साल के मुकाबले कम बने हुए हैं. इससे आम लोगों को थोड़ी राहत मिली है।  लेकिन दूसरी ओर प्राइमरी आर्टिकल्स यानी कच्चे सामान की महंगाई 6.36 फीसदी से बढ़कर 9.17 फीसदी हो गई. वहीं, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई भी 3.39 फीसदी से बढ़कर 4.62 फीसदी पहुंच गई है. इसका मतलब है कि फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान की लागत भी बढ़ रही है।  अन्य सेक्टर्स पर दबाव Core WPI यानी खाने-पीने की चीजों और ईंधन को छोड़कर बाकी वस्तुओं की महंगाई भी बढ़कर 5 फीसदी पर पहुंच गई है, जो 43 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्च में यह 3.7 फीसदी थी. इससे यह संकेत मिल रहा है कि महंगाई का दबाव अब सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है बल्कि बाकी सेक्टरों में भी फैलने लगा है।  अब बाजार और आम लोगों की नजरें मई महीने के आंकड़ों पर टिकी हैं. DPIIT के अनुसार मई 2026 के WPI आंकड़े 15 जून को जारी किए जाएंगे. अगर तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। 

आखिरकार हुआ ऐलान: वीडी सतीशन के हाथों में केरल की कमान

तिरुवनन्तपुरम केरलम में 10 साल के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस ने आखिरकार मुख्यमंत्री के नाम पर अपनी फाइनल मुहर लगा दी है. वीडी सतीशन नए मुख्यमंत्री होंगे, जिनके नाम का ऐलान गुरुवार को दिल्ली में केरलम की प्रभारी दीपा दास मुंसी ने किया. चार मई को आए चुनाव नतीजे के बाद से मुख्यमंत्री की रेस में केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्निथला के नाम चल रहे थे, लेकिन सियासी बाजी सतीशन के हाथ लगी।  केरल के सीएम को लेकर दस तक शह-मात का खेल चलता रहा, जो किसी  किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं रहा. एक तरफ दिल्ली दरबार में राहुल गांधी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल हैं, तो दूसरी तरफ केरल विधानसभा में अपनी धारदार बहस से सरकार की नाक में दम करने वाले वीडी सतीशन थ।  सतीशन ने जिस तरह केरल में अपनी पकड़ मजबूत की है, उसने यह साफ कर दिया है कि राज्य की जमीनी सियासत में फिलहाल उनका पलड़ा भारी है. केरलम जीत के हीरो भी सतीशन को माना जाता है. जमीनी पकड़ ही वीडी सतीशन की कांग्रेस के संकटमोचक और राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले वेणुगोपाल पर भारी पड़ी।  दिल्ली की 'पकड़' पर भारी पड़ी जमीनी 'हकीकत' केरलम के मुख्यमंत्री के चुनाव करने में कांग्रेस ने ऐसे ही दस दिन नहीं लगाया बल्कि काफी मंथन और मशक्कत के बाद वीडी सतीशन के नाम पर अपनी फाइनल मुहर लगी है. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नीत UDF की करारी हार के बाद केरलम के कांग्रेस में एक बड़े बदलाव की मांग उठी थी. उस वक्त तक केरलम में केसी वेणुगोपाल का दबदबा निर्विवाद माना जाता था।  केसी वेणुगोपाल को हाईकमान का 'आंख और कान' कहा जाता है, दिल्ली की राजनीति में उनकी पकड़ा है, लेकिन हार के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में यह संदेश गया कि अब पुराने चेहरों और 'ग्रुप पॉलिटिक्स' से काम नहीं चलेगा.  यहीं से वीडी सतीशन का उदय हुआ. सतीशन ने पार्टी के भीतर उस 'ग्रुपिज्म' (A और I ग्रुप) को चुनौती दी, जिसे वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला जैसे नेता नियंत्रित करते थे।  केरल कांग्रेस में कोई भी बड़ा फैसला वीडी सतीशन और प्रदेश अध्यक्ष के.सुधाकरन की मर्जी के बिना नहीं होता.  वेणुगोपाल अभी भी दिल्ली में शक्तिशाली हैं और टिकट बंटवारे में उनकी भूमिका अहम रहती है, लेकिन केरल के 'कैप्टन' अब सतीशन ही हैं।  हालांकि वेणुगोपाल राहुल गांधी के करीब हैं, लेकिन राहुल गांधी खुद राज्यों में मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व चाहते थे।, सतीशन की साफ-सुथरी छवि और पांच बार विधायक रहने के अनुभव को राहुल ने वेणुगोपाल की सिफारिशों के ऊपर तरजीह दी।  कैसे सतीशन केरल की रेस में सब पर भारी पड़े? सतीशन ने साबित कर दिया है कि दिल्ली की करीबी आपको पद दिला सकती है, लेकिन जनता और कार्यकर्ताओं का विश्वास आपको 'नेता' बनाता है। केरल में वेणुगोपाल की 'रिमोट कंट्रोल' वाली राजनीति पर सतीशन की 'डायरेक्ट एक्शन' वाली सियासत फिलहाल भारी पड़ती दिख रही है। सतीशन के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह गई कि उन्हें युवा विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का भरपूर समर्थन मिला, जो बदलाव चाहते थे. केरलम में कांग्रेस को सत्ता में वापसी कराने में वीडी सतीशन का अहम रोल था. वेणुगोपाल का नाम सीएम के लिए जब उछला तो केरलम के अलग-अलग जिलों से सतीशन के पक्ष में आवाज उठने लगी. कांग्रेस हाईकमान ने जमीनी हकीकत को समझते हुए वेणुगोपाल के दिल्ली तो वीडी सतीशन को सूबे की सियासत में रखने का फैसला किया।  वेणुगोपाल को सीएम बनाने का फैसला करने पर दो सीटों पर उपचुनाव होता. केसी वेणुगोपाल लोकसभा सांसद हैं, जिनको अपनी सीट से इस्तीफा देना पड़ता. इसके बाद उन्हें विधानसभा सदस्यता के लिए किसी मौजूदा विधायक की सीट खाली करानी पड़ती. इस तरह एक लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने पड़ते. सतीशन को लिए ऐसा कुछ नहीं करना है, जिसके चलते ही हाईकमान की पहली पसंद बने।  केरल की सामाजिक इंजीनियरिंग में सतीशन फिट वीडी सतीशन  और केसी वेणुगोपाल दोनों ही 'नायर' समुदाय से आते हैं, जो केरल की राजनीति में एक प्रभावशाली जाति मानी जाती है. पारंपरिक रूप से नायर वोट कांग्रेस के आधार रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी की पैठ और एलडीएफ (LDF) की नीतियों के कारण इसमें बिखराव देखा गया था।  सतीशन पिछले पांच बार से नायर बहुल सीट से चुनाव जीतकर आ रहे हैं, जिसके चलते उनकी सियासी पकड़ कांग्रेस के दूसरे नेताओं से ज्यादा नायर समाज पर मानी जाती है. सतीशन को सीएम बनाकर कांग्रेस इस बड़े वोट बैंक को फिर से अपने पाले में पूरी तरह एकजुट कर सकती है. ऐसे में कांग्रेस के भीतर अन्य नायर नेताओं  रमेश चेन्निथला जैसे) के साथ सत्ता के संतुलन को भी बनाए रखना आसान होगा।  सतीशन को मुस्लिम लीग का खुला समर्थन केरलम की सियासत में सत्ता की चाबी अक्सर ईसाई और मुस्लिम समुदायों के हाथ में होती है. सतीशन की सबसे बड़ी ताकत उनकी मजबूत धर्मनिरपेक्ष छवि है. उन्होंने ईसाई समुदायों के विभिन्न संप्रदायों के साथ गहरे संबंध विकसित किए हैं. चर्च के कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी और बाइबिल के प्रति उनके ज्ञान ने उन्हें अल्पसंख्यकों के बीच एक 'भरोसेमंद हिंदू नेता' के रूप में स्थापित किया है।  कांग्रेस की सबसे मजबूत सहयोगी  इंडिया युनियन मुस्लिम लीग (IUML) के साथ सतीशन के मधुर संबंध हैं. मुस्लिम लीग शुरू से ही वीडी सतीशन को सीएम बनाने के पैरोकारी करती रही है. इसकी एक वजह यह भी है कि मुस्लिम लीग नहीं चाहती थी कि कोई दिल्ली से आकर सीएम बने बल्कि सतीशन को सीएम बनाने के मजबूती से बात रख रही थी।  वीडी सतीशन ने केरलम का चुनाव सिर्फ कांग्रेस के नाम पर नहीं बल्कि यूडीएफ के नाम पर लड़ा था. ऐसे में कांग्रेस ने कोई नया राजनीतिक प्रयोग करने के बजाय वीडी सतीशन के नाम पर मोहर लगाने का काम किया. इस तरह एक तीर से कांग्रेस ने उन तमाम समीकरण को साधने की कवायद की है, जो उसका अपना सियासी आधार है. मुस्लिम लीग यूडीएफ गठबंधन को स्थिरता प्रदान करते हैं,जिससे मुस्लिम मतदाताओं में यह संदेश जाता है कि कांग्रेस एक ऐसे नेता को आगे बढ़ा रही है जो सबको साथ लेकर चल सकता है।  'नेहरूवादी वामपंथ' … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव तैयारियों की कर रहे नियमित समीक्षा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सिंहस्थ: 2028 महापर्व आयोजन की तैयारियों को लेकर निरंतर निरीक्षण जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर शिप्रा नदी के 29 किलोमीटर क्षेत्र में नव निर्माणाधीन घाटों से 24 घंटे करोड़ों श्रद्धालुओं को शिप्रा में स्नान कराने के बाद सुरक्षा और सुविधा के साथ गंतव्य तक पहुंचाया जा सकेगा। सिंहस्थ के लिए सभी विभागों ने निर्माणाधीन विकास कार्यों की गति तेज कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की समीक्षा कर जानकारी प्राप्त कर आवश्यक निर्देश दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर सिंहस्थ के लिए विकास कार्य प्रगतिरत है। सिंहस्थ में विश्व भर से आने वाले श्रद्धालुओं को वाहन पार्किंग के साथ ही स्नान के लिए घाट तक पहुंचाने के लिए सुविधाजनक एप्रोच रोड का निर्माण किया जा रहा है। व्यवस्थित पार्किंग क्षेत्र और घाट तक सुविधाजनक आने जाने के मार्ग होने से आवश्यक प्रबंधन करने में सुविधा होगी। हाल ही में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने उज्जैन पहुंचकर सिंहस्थ की तैयारियों का जायजा लिया है। 18 स्थान एप्रोच रोड के लिए हुए चिन्हित सिंहस्थ: 2028 के तहत नियमित निरीक्षण में संभागायुक्त सह सिंहस्थ मेला अधिकारी  आशीष सिंह, कलेक्टर उज्जैन  रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के दल मेला क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थानों में की जाने वाली व्यव्स्थाओं का निरंतर जायजा ले रहे हैं। अधिकारी दल ने  विक्रांत भैरव मंदिर के समीप स्थित ब्रिज से निरीक्षण प्रारंभ कर करीब 5 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण किया। उन्हेल रोड ब्रिज के समीप तक शिप्रा नदी पर निर्माणाधीन नवीन घाट को जोड़ने के लिए प्रस्तावित 18 स्थानों को एप्रोच रोड के लिए चिन्हित किया है। संवरने लगा है उज्जैन सिंहस्थ : 2028 महापर्व के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर विश्व भर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुविधाजनक रूप से मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में स्नान करवाने और श्रद्धालुओं की मेजबानी के लिए उज्जैन संवरने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नियमित रूप से सिंहस्थ तैयारियों की जानकारी प्राप्त कर निर्देश देते है। हाल ही में प्रशासनिक अधिकारियों ने द्वितीय चरण में शिप्रा किनारे पैदल 36 किलोमीटर भ्रमण किया। अधिकारी दल ने इस दौरान शिप्रा घाट से जोड़कर बनाए जाने वाले प्रस्तावित मार्गों के लिए 140 स्थान चिन्हित कर तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री  मोदी के आह्वान पर किया अमल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आह्वान और मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर पेट्रोल-डीजल की मितव्ययिता के नियम का अनुसरण करते हुए अधिकारी बस में सवार होकर निरीक्षण के लिए पहुंचे। सिंहस्थ : 2028 के लिए निर्माणाधीन विकास कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रस्तावित मार्ग चिन्हित करने के लिए नियमित निरीक्षण के तहत अधिकारियों की टीम सुबह पेट्रोल-डीजल बचाने का संदेश देते हुए एक ही बस में यात्रा कर निरीक्षण स्थल पहुंचे। अधिकारी दल ने विभिन्न स्थानों का निरीक्षण किया। भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन सिंहस्थ : 2028 के अंतर्गत निर्माणाधीन नए घाट और सभी घाटों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले प्रस्तावित एप्रोच रोड के लिए स्थान चिन्हित किए। निरीक्षण में अधिकारियों ने लाल पुल ब्रिज के नीचे स्थित घाट क्षेत्र से निरीक्षण शुरू करते हुए गऊघाट, वेधशाला के पीछे, वाकणकर ब्रिज के समीप, जीवन खेड़ी,  शनि मंदिर के समीप पुराने और निर्माणाधीन नवीन घाट तक पहुंच मार्ग तैयार करने के लिए प्रस्तावित स्थानों को चिन्हित किया। निरीक्षण के दौरान शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर स्थान चिन्हित किए । एप्रोच रोड निर्माण के लिए शिप्रा नदी के किनारों पर निर्माणाधीन नवीन घाट और पुराने घाट भी शामिल किए गए है। घाट से 200 मीटर एरिया में जो स्थान चिन्हित किए है उन स्थानों पर श्रद्धालुओं को घाट तक आने और जाने के लिए प्रस्तावित एप्रोच रोड का निर्माण सुविधाजनक और सहज हो, इस उद्देश्य से स्थान चिन्हित किए गए हैं। पुलिस विभाग के माध्यम से इन चिन्हित स्थानों पर भीड़ नियंत्रण और यातायात प्रबंधन को लेकर प्लान तैयार किया जाएगा।  

किन्नर अखाड़े में बड़ा विवाद: महामंडलेश्वर पद छीना गया, उज्जैन में मचा हड़कंप

उज्जैन इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर पद को लेकर विवाद सामने आया है। तेलंगाना की मां काली नंद गिरि ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी गुरु और अखाड़े की प्रमुख मां सतीनंद गिरि से रिश्ता तोड़ने का ऐलान किया है। इसके जवाब में मां सतीनंद गिरि ने भी वीडियो जारी कर कहा कि मां काली नंद गिरी ने गुरु-शिष्य परंपरा और अखाड़े के नियमों का उल्लंघन किया है, इसलिए उन्हें महामंडलेश्वर पद और अखाड़े की सदस्यता से बर्खास्त कर दिया गया है।  जानकारी के अनुसार मार्च 2026 में उज्जैन में इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में देशभर से अखाड़े के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए थे। बैठक के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के साथ कुछ लोगों को महामंडलेश्वर की उपाधि भी दी गई थी। इनमें तेलंगाना की मां काली नंद गिरि का नाम भी शामिल था। बताया जा रहा है कि मां काली नंद गिरि करीब दो महीने तक इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर रहीं। हालांकि अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में उन्होंने कहा कि उनका मां सतीनंद गिरि से कोई संबंध नहीं है। वीडियो में उन्होंने कहा कि वे मेरी गुरु नहीं हैं। उनके गुरु अलग हैं और मेरे गुरु अलग हैं। हमने उनसे रिश्ता तोड़ दिया है और अब हमारा उनसे कोई लेना-देना नहीं है। मां काली नंद गिरि के इस बयान के बाद अखाड़े में विवाद गहरा गया। इसके बाद मां सतीनंद गिरि ने भी वीडियो जारी कर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मां काली नंद गिरि को दो महीने पहले महामंडलेश्वर बनाया गया था लेकिन उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का पालन नहीं किया और अखाड़े के नियमों का भी उल्लंघन किया। इसी कारण उन्हें इंटरनेशनल किन्नर अखाड़े से हटा दिया गया है। मां सतीनंद गिरि ने स्पष्ट किया कि अब मां काली नंद गिरि न तो उनकी शिष्या हैं, न अखाड़े की सदस्य और न ही महामंडलेश्वर। मामले को लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।