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भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत, सचिन दवे बोले- मां वाग्देवी मंदिर की पहचान हुई पुनर्स्थापित

भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला :   भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर मानकर इसकी सदियों पुरानी पहचान को पुनर्स्थापित किया – सचिन दवे  धार भोजशाला से जुड़ा विवाद वर्षों से भारतीय इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र में रहा है। आज हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय, जिसमें भोजशाला को वाग्देवी अर्थात मां सरस्वती का मंदिर माना गया, ने इस विषय को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह फैसला केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं  की भावनाओं, ऐतिहासिक मान्यताओं और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा हुआ विषय बन गया है। कई लोगों के लिए यह भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का क्षण है। आज धार शहर के साथ ही मध्यप्रदेश और सम्पूर्ण भारतवर्ष के सभी सुधिजन इस फैसले पर हर्ष व्यक्त कर रहे हैं, जो की भोजशाला की गरिमा की पुनःस्थापना और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का परिचायक है। ज्ञातव्य है की भोजशाला मध्य प्रदेश के धार शहर में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है। माना जाता है कि इसका संबंध परमार वंश के महान राजा भोज से है, जिन्हें भारतीय इतिहास में विद्या, कला और संस्कृति के संरक्षक के रूप में याद किया जाता है। राजा भोज केवल एक शासक नहीं थे, बल्कि वे एक महान विद्वान, साहित्यकार और स्थापत्य प्रेमी भी थे। इतिहासकारों के अनुसार, भोजशाला उस काल में शिक्षा, संस्कृत अध्ययन और विद्या साधना का प्रमुख केंद्र थी। यहां मां वाग्देवी अर्थात सरस्वती की आराधना की जाती थी और देशभर से विद्वान अध्ययन एवं शास्त्रार्थ के लिए यहां आते थे। भोजशाला की वास्तुकला और वहां पाए गए अनेक शिलालेख, मूर्तियां तथा पुरातात्विक अवशेष इसकी प्राचीन सांस्कृतिक पहचान की ओर संकेत करते हैं। संस्कृत भाषा के शिलालेख, देवी सरस्वती से जुड़े प्रतीक और मंदिर शैली की संरचना लंबे समय से यह दावा मजबूत करते रहे हैं कि यह स्थान मूल रूप से एक मंदिर और विद्या केंद्र था। इसी कारण बड़ी संख्या में लोग इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति का प्रतीक मानते हैं। सभी जानते ही हैं की समय के साथ यह स्थल विवाद का विषय बन गया अथवा बना दिया गया। विभिन्न समुदायों द्वारा इस स्थान को अलग-अलग धार्मिक पहचान से जोड़ा गया और यही कारण रहा कि यह मामला अदालत तक पहुंचा। वर्षों से इस विषय पर कानूनी लड़ाई चल रही थी। अनेक याचिकाएं दायर की गईं, पुरातत्व सर्वेक्षण की मांग हुई, ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और विभिन्न पक्षों ने अपने-अपने दावे अदालत के सामने रखे। अंततः विस्तृत सुनवाई और तथ्यों के अध्ययन के बाद हाईकोर्ट का यह निर्णय सामने आया है जिसने सभी आशंकाओं पर पूर्णविराम लगते हुए भोजशाला को माँ वाग्देवी का मंदिर मानकर इसकी सदियों पुरानी पहचान को पुनर्स्थापित किया है।  यह फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक हैं क्योंकि यह केवल एक भवन की पहचान तय करने का विषय नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ा हुआ मामला है। लंबे समय से जो लोग भोजशाला को मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानते रहे, उनके लिए यह निर्णय आस्था और विश्वास की पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश और देशभर के सनातन समाज में इस निर्णय के बाद प्रसन्नता और संतोष का वातावरण दिखाई  दे रहा है। भोजशाला का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं है, बल्कि यह भारतीय शिक्षा और ज्ञान परंपरा का भी प्रतीक है। प्राचीन भारत में शिक्षा को आध्यात्मिकता और संस्कृति से जोड़ा जाता था। मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं होते थे, बल्कि वे ज्ञान, कला, संगीत, साहित्य और दर्शन के केंद्र भी होते थे। भोजशाला इसी परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए यह फैसला भारतीय सभ्यता के उस गौरवशाली अध्याय की याद दिलाता है, जब भारत विश्व में ज्ञान और संस्कृति का अग्रणी केंद्र था। इस पूरे विवाद में पुरातत्व विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए अध्ययन और विभिन्न ऐतिहासिक प्रमाणों ने इस स्थल की प्राचीनता और सांस्कृतिक महत्व को समझने में मदद की। अदालत ने भी अपने निर्णय में तथ्यों, ऐतिहासिक साक्ष्यों और प्रस्तुत दस्तावेजों को गंभीरता से परखा। यही कारण है कि यह फैसला केवल भावनाओं पर आधारित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक विस्तृत न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम कहा जा रहा है। हालांकि, ऐसे संवेदनशील मामलों में समाज की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। भारत विविधताओं का देश है, जहां अनेक धर्म, परंपराएं और मान्यताएं साथ-साथ रहती हैं। इसलिए किसी भी न्यायिक निर्णय के बाद सामाजिक सौहार्द बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। लोकतंत्र की शक्ति इसी में है कि सभी पक्ष कानून और संविधान का सम्मान करें तथा शांति और भाईचारे की भावना बनाए रखें। इतिहास को समझना और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ सामाजिक समरसता भी उतनी ही आवश्यक है। भोजशाला का मुद्दा यह भी दर्शाता है कि भारत में सांस्कृतिक विरासत को लेकर लोगों की भावनाएं कितनी गहरी हैं। आज का भारत केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति की ओर नहीं बढ़ रहा, बल्कि अपनी ऐतिहासिक जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को भी पुनः समझने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में भोजशाला जैसे विषय लोगों को अपने अतीत, अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हैं। कई इतिहासकारों और सांस्कृतिक चिंतकों का मानना है कि भारत के प्राचीन शिक्षा केंद्रों, मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। भोजशाला का महत्व इसी कारण और बढ़ जाता है क्योंकि यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। यदि इस स्थल का संरक्षण और अध्ययन व्यवस्थित रूप से किया जाए, तो यह आने वाले समय में भारतीय इतिहास और संस्कृति के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। अंततः, भोजशाला पर आया यह फैसला अनेक लोगों के लिए गौरव, संतोष और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का क्षण है। यह निर्णय भारतीय इतिहास, आस्था और न्यायिक प्रक्रिया के संगम का उदाहरण बनकर सामने आया है। साथ ही, यह हमें यह भी याद दिलाता है कि किसी भी सभ्यता की शक्ति केवल उसके वर्तमान में नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक स्मृति और ऐतिहासिक चेतना में भी निहित होती है। भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के लिए अपनी विरासत का सम्मान करना केवल … Read more

मुजफ्फरपुर में फार्मर रजिस्ट्री अभियान तेज,पीएम किसान और सब्सिडी योजनाओं से जोड़ने की पहल

 मुजफ्फरपुर  कम जमीन वाले किसान भी हैं तो अनिवार्य रूप से फार्मर रजिस्ट्री (Bihar Farmer Registry 2026) कराएं। यह जरूरी नहीं है कि जिनके पास बीघा और एकड़ में जमीन है वही किसान है। किसी ने एक या दो कट्ठा भूमि भी खेती के लिए खरीदी है। अगर उनके नाम पर जमाबंदी है तो अनिवार्य रूप से फार्मर रजिस्ट्री कराएं, ताकि उन्हें उर्वरक, धान अधिप्राप्ति, पीएम किसान सम्मान निधि योजना समेत सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उक्त बातें गुरुवार को डीएम सुब्रत कुमार सेन ने प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री अभियान, जनगणना और सहयोग शिविर के बारे में जानकारी दी और इसमें अधिक से अधिक लोगों को भागीदार बनने की अपील की। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक कुल दो लाख 74 हजार 321 किसानों का फार्मर रजिस्ट्री के तहत निबंधन किया जा चुका है। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े किसानों की संख्या एक लाख 41 हजार 185 है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुक किसानों की कुल संख्या चार लाख 16 हजार 805 है। वहीं, अब तक चार लाख 55 हजार 975 किसानों का ई-केवाईसी पूरा किया जा चुका है। पीएम किसान योजना से जुड़े दो लाख 93 हजार 899 किसानों का ई-केवाईसी कार्य भी पूर्ण हो चुका है। सहयोग सेल का किया गया गठन डीएम ने कहा कि सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय-तीन योजना के अंतर्गत सबका सम्मान जीवन आसान के तहत सहयोग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। 19 मई से इसकी शुरुआत होगी। आम नागरिकों की सुविधा के लिए सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100 जारी किया गया है, जो निःशुल्क है। शिविरों की मानिटरिंग के लिए उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में सहयोग सेल का गठन किया गया है। करीब सात लाख परिवारों तक पहुंचे प्रगणक डीएम ने जनगणना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि एक लाख नौ हजार 797 परिवारों ने स्वगणना किया। मकानों की सूचीकरण प्रक्रिया एवं संबंधित सर्वेक्षण कार्य दो से 31 मई तक चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में कुल 9151 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक हैं। इनमें से 9015 एचएलबी में कार्य प्रगति पर है। अब तक जिले में कुल छह लाख 80 हजार 493 परिवारों को कवर किया गया है। वहीं, कुल 32 लाख 25 हजार 610 आबादी की गणना की जा चुकी है। जिला जनगणना कोषांग का गठन स्थानीय संयुक्त भवन में किया गया है। जिला सांख्यिकी पदाधिकारी को प्रभारी बनाया गया है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे सरकार द्वारा संचालित अभियान में सक्रिय सहभागी बनें, सहयोग करें तथा सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

208 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास,महराजगंज में बोले सीएम योगी, विकास की रफ्तार नहीं रुकेगी

 महराजगंज  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश के विकास का ग्रोथ इंजन बना है। विकास की प्रक्रिया बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके व बिना झुके चलती रहेगी। 2017 के पहले प्रदेश का विकास रुका था। माफिया गरीबों की संपत्तियों पर कब्जा कर रहे थे। सपा, बसपा व कांग्रेस के शासनकाल में अयोध्या में श्रीराम मंदिर व बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण नहीं हो पाता। यह पार्टियां कार्य में स्वयं बांधा बनी थी। इसी के चलते पश्चिम बंगाल की जनता ने भी इन्हें उखाड़ फेंका। मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ शुक्रवार नौतनवा में 208 करोड़ रुपये से अधिक की 79 परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के चलते डीजल, पेट्रोल व एलपीली की सप्लाई पर व्यापक असर पड़ा है। प्रतिदिन भारत सरकार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। कहा कि इस समय विपक्ष के नाकारात्मक नेरेटिव से बचना है। हमें प्रधानमंत्री के साथ खड़े रहना है। छाेटे-छोटे प्रयास कर हम डीजल व पेट्रोल के दुरुपयोग को रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार में तेजी से विकास हो रहा है। सड़कें बेहतर हुईं हैं। शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर कार्य हुए हैं। महराजगंज सहित प्रदेश के सभी जिलों में मंदिरों का भी कायाकल्प कराया गया है। पहले यह रुपया कब्रिस्तान के बाउंड्रीवाल के निर्माण के लिए खर्च किया जाता था। पूर्ववर्ती सरकारों ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास पर ध्यान नहीं दिया। इंसेफलाइटिस से पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में नौनिहाल प्रभावित होते थे। अब डलब इंजन की सरकार में उत्तर प्रदेश बीमारू प्रदेश नहीं रह गया है। यहां के लोगों को पहचान का संकट नहीं है। देश में सबसे अधिक एक्सप्रेस -वे, मैट्रो, एयरपोर्ट यूपी में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत व नेपाल दोनों मित्र देश के रूप में साझी विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों के बीच रोटी-बेटी का संबंध है। दोनों देशों के बीच बिना किसी बांधा के आवागमन होता है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र का विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नौतनवा विधानसभा में भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी को पहली बार विजय मिली। उसी कर्ज को चुकाने के लिए जो भी प्रस्ताव यहां के विधायक व सांसद द्वारा दिया जाता है, उसे तत्काल स्वीकृत दी जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले की सरकारों ने वनटांगिया परिवारों की कभी सुधि नहीं ली, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें भूमि का मालिकाना हक दिलाने के साथ ही सभी अधिकार प्रदान किए। इससे पहले नौतनवा के विधायक ऋषि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। जिले के प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह, सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया, पूर्व विधायक बजरंग बहादुर सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय, जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल, पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी नौतनवा चेयरमैन बृजेश मणि त्रिपाठी, ब्लाक प्रमुख राकेश मद्धेशिया सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

ईंधन बचत की पहल: बिहार सीएम और मंत्रियों ने कम किए सरकारी वाहनों के इस्तेमाल

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को नो व्हीकल डे मनाया। मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास लोकसेवक आवास से पैदल चलकर 4 कस्तुरबा गांधी मार्ग सचिवालय स्थित अपने दफ्तर पहुंचे। सम्राट चौधरी के साथ उनके सुरक्षाकर्मी और सीएम कार्यालय के अधिकारी, कर्मी भी पैदल ही पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाकर बिहार की जनता को बड़ा संदेश दिया है कि यदि आवश्यक नहीं हो तो गाड़ियों के इस्तेमाल से बचें और डीजल, पेट्रोल की खपत पर नियंत्रण करें। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के असर के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के बाद पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश भी पैदल चलकर अपने ऑफिस आए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने सही कहा है। वर्तमान हालातों में इंधन की खपत पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है। इससे पार्यावरण की शुद्धता बनी रहेगी और स्वास्थ्य के ख्याल से भी अच्छा रहेगा। उन्होंने बिहार के आम जनों से अपील की कि सप्ताह में एक दिन गाड़ियों के उपयोग से बचें। आवास से अपने दफ्तर पैदल जाते पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश इससे पहले गुरुवार और बुधवार को मुख्यमंत्री ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या में कटौती की। बुधवार को मुख्यमंत्री मात्र तीन गाड़ियों के काफिले के साथ अपने ऑफिस में पहुंचे। सीएम का अनुसरण करते हुए कई मंत्री भी एक या दो गाड़ी के साथ ही कार्यालय आए। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा एक मात्र कार से आए। वे इलेक्ट्रिक कार से पहुंचे। गुरुवार को सीएम सम्राट चौधरी दरभंगा जाने के लिए पटना एयरपोर्ट पर पहुंचे तो उनके साथ एक अपनी और एक सुरक्षा कर्मियों की गाड़ी थी।     बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज अपने आवास से सचिवालय पैदल ही गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सीएम ने अपना काफिला 3 वाहन तक समेट दिया है। बाकी मंत्री और नेता भी कम वाहनों के साथ चलने लगे हैं। कुछ ट्रेन से आते-जाते दिखे हैं।      गुरुवार को सम्राट कैबिनेट के खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने ट्रेन की सवारी की। उन्हें गया जी जाना था तो ट्रेन का सहारा लिया। वंदे भारत ट्रेन से वे गया जी पहुंचे जहां से स्थानीय गाड़ी से आगे निकले। उन्होंने कहा कि ईंधन संरक्षण केवल एक आह्वान नहीं, बल्कि हमारी साझा जिम्मेदारी है। ट्रेन यात्रा से न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत हुई, बल्कि हम आम यात्रियों के बीच घुलमिलकर उनके मुद्दों को समझने का अवसर भी मिला। उन्होंने कहा कि यह यात्रा ईंधन बचत के साथ सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन देने का प्रयास है। बिहार सरकार विभिन्न योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे रही है। यह उसी दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है। सीएम की पहल का बड़ा असर वैशाली में दिखा। वैशाली डीएम वर्षा सिंह ने शनिवार को नो व्हीकल डे घोषित किया है। डीएम ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव के कारण ईंधन बचत जरूरी है। शनिवार को सरकारी कर्मी वाहन का प्रयोग नहीं करेंगे। जनता से भी अपील की गई है कि कम से कम वाहन का प्रयोग करें। बस, ऑटो का इस्तेमाल ज्यादा करें। अनावश्यक यात्रा से बचने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है।

साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन! लुधियाना से पकड़ा गया अंतरराष्ट्रीय गिरोह, 132 आरोपी दबोचे गए

लुधियाना. पंजाब के लुधियाना में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 132 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अब तक के सबसे बड़े साइबर अपराध मामलों में से एक माना जा रहा है। पुलिस कमिश्नरेट लुधियाना की ओर से साइबर अपराध थाना में मामला दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का नेटवर्क यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक फैला हुआ था तथा विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर बड़े स्तर पर ठगी की जा रही थी। यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत की गई है। पुलिस ने शहर के अलग-अलग इलाकों में एक साथ छापेमारी कर कई अवैध कॉल केंद्रों का भंडाफोड़ किया। 1 करोड़ की राशि रिकवर कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब एक करोड़ सात लाख रुपये नकद, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन और 19 वाहन बरामद किए हैं। इसके अलावा 300 से अधिक बैंक खाते भी फ्रीज किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग को भी जांच में शामिल किया गया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह विदेशी नागरिकों को नकली संदेश और वायरस अलर्ट दिखाकर डराता था। जानें कैसे डराते थे लोगों को संदेश के बाद स्क्रीन पर खुद को माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का तकनीकी सहायता केंद्र बताकर सहायता नंबर दिखाया जाता था। जैसे ही पीड़ित संपर्क करता, उसे इंटरनेट आधारित प्रणाली के जरिए ठगों से जोड़ दिया जाता था। इसके बाद आरोपित पीड़ितों से एक विशेष सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाकर उनके संगणक और बैंक संबंधी जानकारी तक पहुंच बना लेते थे। गिरोह के सदस्य कई बार खुद को बैंक अधिकारी बताकर पीड़ितों को यह कहकर डराते थे कि उनका खाता खतरे में है। फिर अलग-अलग तरीकों से उनसे पैसे ऐंठे जाते थे। गिरोह के सदस्य खुद को बैंक अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते थे कि उनका बैंक खाता असुरक्षित है। इसके बाद उनसे कई तरीकों से पैसे ऐंठे जाते थे, जिनमें – घर से नकदी उठवाना सोना खरीदवाकर उसकी डोरस्टेप पिकअप अमेजन और एप्पल गिफ्ट कार्ड खरीदवाना फर्जी विदेशी खातों में वायर ट्रांसफर करवाना पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य अवैध माध्यमों से पहुंचाई जाती थी। हर एक दिन में 8 से 10 कॉल संभालता था प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरोह का हर संचालक प्रतिदिन आठ से दस कॉल संभालता था। कर्मचारियों को तय वेतन के साथ प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त भुगतान भी दिया जाता था। लुधियाना पुलिस ने कहा कि मामले में डिजिटल साक्ष्यों, हवाला नेटवर्क और अन्य आरोपितों की पहचान को लेकर जांच अभी जारी है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संगठित साइबर अपराध और अवैध वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

केरलम में वीडी सतीशन जमीनी योद्धा का सम्मान

•    डॉ. सुधीर सक्सेना  वदासरी दामोदरन (वीडी) सतीशन अब साक्षर-राज्य केरलम के मुख्यमंत्री होंगे। दस दिनों की माथा-पच्ची और रायशुमारी के उपरांत अंततः 14 मई को दिल्ली में उनके नाम का ऐलान हो गया। गुरुवार की सुबह सुश्री दीपा दासमुंशी के वरिष्ठ पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन तथा वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की मौजूदगी में इस आशय की घोषणा से अंततः अटकलों का कुहासा छंट गया और यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी नेतृत्व अपने जमीनी योद्धा का चयन करने के मूड में है और केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला कुर्सी की दौड़ में पिछड़ गये हैं। यह ऐलान इसलिये भी मानीखेज था, क्योंकि यह खबर छनकर आ रही थी कि निर्वाचित विधायकों का बहुमत वेणुगोपाल के साथ है, जिन्हें पार्टी में दिल्ली की किल्ली के नजदीक माना जाता है। लेकिन बुधवार की शाम पहले पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के माकन, दासमुंशी और वासनिक से विमर्श ने सतीशन का नाम आगे कर दिया। इसके बाद घड़ी के कांटे तेजी से घूमे। गुरुवार की सुबह राहुल गाँधी ने केसी वेणुगोपाल से चर्चा की। तकरीबन तीस मिनट की बातचीत में राहुल अपने निकट सहयोगी को दौड़ से हटने के लिये मनाने में सफल रहे और इसके कुछ घंटो बाद विधिवत वीडी के नाम की घोषणा कर कर दी गयी। 31 मई, सन 1964 को नेत्तूर में जनमे सतीशन खाँटी कांग्रेसी नेता हैं। छात्र जीवन में वह एनएसयूआई से जुड़ गये। सन 1986-87 में वह महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। यूनिवर्सिटी आफ केरल से उन्होंने एलएलएम किया और हाईकोर्ट में दस साल प्रैक्टिस। सन 1996 में उन्होंने परवूर से असेंबली का पहला चुनाव लड़ा, लेकिन 'प्रथम ग्रासे मक्षिकापातः' की तर्ज पर वह सीपीआई के पी. राजू से हार गये। सन 2001 के चुनाव में उन्होंने राजू हिसाब चुकता किया और इसके बाद क्रमशः केएम दिनकरन, रवीन्द्रन, शारदा मोहन और एमटी निक्सन जैसे नेताओं को हरा कर लगातार असेंबली में पहुंचे। सन 2021 में रमेश चेन्निथला के स्थान पर नेता प्रतिपक्ष बने और तदंतर विधानसभा के भीतर और बाहर अपनी सक्रियता से सबका ध्यान आकृष्ट किया। केरलम के कांग्रेस नेताओं में वह संघर्ष, साख और सक्रियता  के मामले में सबसे आगे हैं। कोट्टायम के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक निजाम सैयद के मुताबिक सतीशन इज द बेस्ट च्वॉयस फॉर चीफ मिनिस्टरशिप। जनभावनाओं का ज्वार उनके साथ है और कार्यकर्ता उनके पीछे।  आखिर क्या वजह है कि निजाम व अन्य मलयाली पत्रकार सतीशन को 'सर्वोत्तम पसंद' निरूपित कर रहे हैं वजह साफ है। सतीशन जमीनी योद्धा है और आडंबर से कोसों दूर। वह कुशल और प्रभावशाली वक्ता हैं और उन्हें सुनना 'सांद्र अनुभव' से गुजरना है। वह लेखक तो नहीं, अलबत्ता गंभीर पाठक हैं और साहित्यिक जलसों में उन्हें आग्रहपूर्वक बुलाया जाता है। आधुनिक मलयाली साहित्य में उनकी गहरी रूचि है और वह जेन-जी में बेहद लोकप्रिय है। उन्हें सियासी नजूमी भी माना जा सकता है, क्योंकि चुनावों में उनकी भविष्यवाणियाँ खरी उतरती रही हैं। इस दफा  तो उन्होंने सार्वजनिक ऐलान कर कर दिया  था कि यदि यूडीएफ को सौ से कम सीटें मिलीं तो वह राजनीति सन्यास ले लेंगे। केरलम में काँग्रेसनीत गठबंधन को जिताने में उन्होंने रात-दिन एक कर दिया। पार्टी में उन्हें 'टास्क मास्टर' माना जाता है और इसके चलते वह प्रियंका और राहुल के विश्वासपात्र बनकर उभरे। मासांत में वह अपना 62वीं वर्षगांठ बतौर सीएम मनायेंगे। उनका टास्क मास्टर होना यकीनन उम्मीदें जगाता है। त्रिवेंद्रम और दिल्ली में चले दस दिनी घटनाक्रम ने यह भी दर्शा दिया कि महत्वाकांक्षी शशि थरूर के नाम पर कहीं कोई विचार नहीं किया गया। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।राष्ट्रीय , अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गहरी समझ रखते हैं । भोपाल में निवास )

101 साल बाद भी याद है नीमूचाणा कांड: किसानों पर गोलियां और गांव को जलाने की दर्दनाक कहानी

 अलवर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब के जलियांवाला बाग की क्रूरता से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन राजस्थान की धरती पर भी एक ऐसा ही खौफनाक मंजर देखा गया था. अलवर रियासत के नीमूचाणा गांव में आज से ठीक 101 साल पहले यानी 14 मई 1925 को हुआ नरसंहार राजस्थान के इतिहास का सबसे काला अध्याय है. इस नृशंस कांड की 101वीं बरसी पर आज भी पूरा इलाका उन 250 से ज्यादा शहीद किसानों को याद कर भावुक है जिन्होंने दोहरे लगान और दमनकारी नीतियों के खिलाफ अपनी जान न्यौछावर कर दी थी. दोहरे लगान और शोषण के खिलाफ गूंजी थी आवाज तत्कालीन समय में अलवर रियासत के किसान भारी टैक्स, बेगार प्रथा और जंगली सूअरों द्वारा फसलों की बर्बादी से बेहद त्रस्त थे. इसी शोषण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए किसान नीमूचाणा गांव में शांतिपूर्वक तरीके से इकट्ठा हुए थे. किसानों की इस एकजुटता से बौखलाई रियासत की फौज ने पूरे गांव को चारों तरफ से घेर लिया और निहत्थे ग्रामीणों पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं. इस फायरिंग में 250 से अधिक किसान मौके पर ही शहीद हो गए और 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए. क्रूरता यहीं नहीं रुकी, फौज ने गांव के करीब 150 घरों को आग के हवाले कर दिया जिससे भारी संख्या में मवेशी भी जिंदा जल गए. महात्मा गांधी ने कहा था 'दूसरा जलियांवाला बाग' इस भयानक नरसंहार की गूंज तत्कालीन समय में पूरे देश में सुनाई दी थी. अजमेर के 'तरुण राजस्थान' और कानपुर के 'प्रताप' अखबार ने इस खबर को प्रमुखता से छापा. महान स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी खुद पैदल चलकर पीड़ितों का दर्द बांटने नीमूचाणा पहुंचे थे. वहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस घटना की विभीषिका को देखते हुए इसे 'दूसरा जलियांवाला बाग' करार दिया था. सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी बंबई की एक जनसभा में इस दमनकारी नीति की तीखी आलोचना की थी. इस देशव्यापी आक्रोश के आगे झुकते हुए आखिरकार अलवर रियासत को दोहरा लगान और बेगार प्रथा को वापस लेना पड़ा था. आज भी मौजूद हैं गोलियों के निशान नीमूचाणा गांव की पुरानी हवेलियों और दीवारों पर आज भी गोलियों के निशान उस खौफनाक दिन की गवाही देते हैं. दुखद बात यह है कि इस ऐतिहासिक बलिदान के 100 साल से अधिक बीत जाने के बाद भी इस जगह को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं मिल सका है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिलते हैं लेकिन धरातल पर कोई ठोस काम नहीं हुआ. अब ग्रामीण अपने स्तर पर ही हर साल कैंडल मार्च निकालकर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं. वर्तमान में बानसूर से विधायक देवी सिंह शेखावत केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टी से हैं, ऐसे में ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब इस ऐतिहासिक स्थल को वह गौरव और सम्मान जरूर मिलेगा जिसका यह हकदार है.

कोर्ट परिसर में सुरक्षा जांच के दौरान बड़ा खुलासा, 2 युवक चाकू समेत गिरफ्तार; 8 संदिग्ध हिरासत में

रायपुर. राजधानी रायपुर के न्यायालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अपराधों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पुलिस ने शुक्रवार को बड़ा आकस्मिक चेकिंग अभियान चलाया। यह विशेष अभियान न्यायालय की अनुमति से डीसीपी सेंट्रल जोन एवं क्राइम के निर्देश पर संचालित किया गया। अभियान में मध्य जोन के विभिन्न थानों का स्टाफ, एसीसीयू, पुलिस लाइन के 100 से अधिक जवान और बीडीएस टीम शामिल रही। पुलिस ने न्यायालय परिसर में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए व्यापक तलाशी अभियान चलाया। चेकिंग के दौरान परिसर में संदिग्ध रूप से घूमते और उपद्रव की आशंका वाले 6 लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। सभी आरोपियों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में कार्रवाई के बाद एसीपी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इन लोगों पर हुई कार्रवाई – आशुतोष साहू उर्फ अमन, निवासी दलदल सिवनी विराज सेन्द्रे, निवासी आमापारा भुवनेश्वर चौधरी उर्फ बिट्टू, निवासी न्यू राजेन्द्र नगर गोलू नेताम उर्फ कामता, निवासी कुशालपुर पवन कोसरिया, निवासी खरोरा दुन्नो कुल्हरिया, निवासी न्यू राजेन्द्र नगर दो युवकों को चाकू के साथ किया गया गिरफ्तार अभियान के दौरान दो युवकों के पास से अवैध चाकू भी बरामद किए गए। पुलिस ने मयंक सोनी और विनोद सारथी को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1-1 चाकू जब्त किया। दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में आर्म्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक न्यायालय परिसर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे भी इस तरह के विशेष चेकिंग अभियान लगातार चलाए जाएंगे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

स्वच्छ परिवहन की ओर बड़ा कदम, दिल्ली में चलेंगी हाइड्रोजन से चलने वाली बसें

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पहली बार, हाइड्रोजन गैस से चलने वाली बसों का संचालन शुरू हो गया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने दिल्ली मेट्रो को दो ऐसी अत्याधुनिक बसें सौंपी हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन 15 मई यानी आज से सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में एक एकीकृत हाइड्रोजन चालित शटल बस सेवा शुरू की। यह पहल आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सहयोग से की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छ, टिकाऊ और आधुनिक शहरी परिवहन को बढ़ावा देना है। यह सेवा अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने में सहायक होगी। इन बसों में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और सीसीटीवी प्रणाली लगी होगी। यह वास्तविक समय की निगरानी, सुरक्षा और समयबद्धता सुनिश्चित करेगी। यह शटल सेवा सभी कार्य दिवसों (सोमवार से शुक्रवार, राजपत्रित अवकाशों को छोड़कर) में चलेगी। सेवा का समय सुबह 8:30 बजे से 12:30 बजे तक और दोपहर 3:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक रहेगा। कनेक्टिविटी और मार्ग यह सेवा सेंट्रल सचिवालय और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इसका लक्ष्य सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में स्थित प्रमुख सरकारी कार्यालयों को भी जोड़ना है। यह सरकारी अधिकारियों और आम जनता को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। यह सेवा कार्तव्य भवन, विज्ञान भवन, निर्माण भवन, अकबर सड़क और बड़ौदा हाउस जैसे प्रमुख स्थलों को कवर करेगी। नेशनल स्टेडियम, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट्स और इंडिया गेट भी इस मार्ग में शामिल होंगे। डीएमआरसी बस संचालन, कंडक्टर, टिकटिंग और यात्री सहायता की जिम्मेदारी संभालेगा। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड ड्राइवरों की व्यवस्था करेगा। साथ ही वह हाइड्रोजन ईंधन सहायता भी उपलब्ध कराएगा। सेवा की फ्रीक्वेंसी हर 30 मिनट पर एक बस होगी। एक बस दक्षिणावर्त और दूसरी वामावर्त दिशा में चलेगी। किराया नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड, यूपीआई और नकद भुगतान के माध्यम से लिया जाएगा। इसमें 10 रुपये और 15 रुपये की किफायती स्टेज आधारित टिकट दरें निर्धारित हैं।  

रोटी बनाते समय भूलकर भी न करें ये गलती, घर की बरकत हो सकती है प्रभावित

किचन को घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, क्योंकि यहीं से पूरे परिवार की सेहत और खुशहाली तय होती है. हम अपनी दिनचर्या में रसोई के काम तो बखूबी निपटाते हैं, लेकिन अक्सर महिलाएं अनजाने में रोटी बनाते वक्त कुछ ऐसी गलतियां कर बैठती हैं, जो घर की सुख-समृद्धि को नजर लगा सकती हैं.  वास्तु शास्त्र और पुरानी मान्यताओं के अनुसार, कछ छोटी सी चूक भविष्य में बड़े आर्थिक और मानसिक संकट का कारण बन सकती है. जानते हैं रसोई में रोटियां बनाते वक्त कौन सी गलती नहीं करनी चाहिए. क्यों नहीं गिननी चाहिए रोटियां? धार्मिक और वास्तु दृष्टिकोण से रोटियों की गिनती करना वर्जित माना गया है. इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण और मान्यताएं छिपी हैं: अन्नपूर्णा का अनादर: अन्न को देवता माना गया है. जब हम रोटियां गिनकर बनाते हैं, तो यह मां अन्नपूर्णा का अनादर माना जाता है, जिससे घर की बरकत धीरे-धीरे कम होने लगती है. ग्रहों पर प्रभाव: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रोटी का संबंध सूर्य और मंगल ग्रह से होता है. रोटियों की गिनती करना इन ग्रहों की स्थिति को प्रभावित कर सकता है, जिससे परिवार में क्लेश बढ़ सकता है. बरकत में कमी: ऐसी मान्यता है कि जिस घर में रोटियां गिनकर बनाई जाती हैं, वहां कभी भी संचित धन में वृद्धि नहीं होती, ऐसे घर में आर्थिक तंगी बनी रहती है. रसोई से जुड़े अन्य जरूरी नियम जिनका पालन है आवश्यक अक्सर हम अनजाने में कुछ अन्य गलतियां भी करते हैं, जिन्हें सुधारना बेहद जरूरी है: थाली में 3 रोटियां न रखें: कभी भी किसी की थाली में एक साथ 3 रोटियां न परोसें. पुरानी मान्यताओं के अनुसार, 3 रोटियां मृतक के भोग के लिए रखी जाती हैं. जीवित व्यक्ति को हमेशा 1, 2 या 4 रोटियां परोसना ही शुभ होता है. पहली और आखिरी रोटी का नियम: हिंदू धर्म में पहली रोटी हमेशा गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा है. ऐसा करने से घर के वास्तु दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है. मेहमान का सत्कार: घर आए मेहमान या घर के सदस्य से कभी यह पूछकर रोटी न सेकें कि आप कितनी रोटियां खाएंगे?. खिलाते समय रोटियां गिनना खिलाने वाले और खाने वाले दोनों के लिए अशुभ और अपमानजनक माना जाता है. बासी आटे का परहेज: कई लोग रात का बचा आटा सुबह इस्तेमाल करते हैं. वास्तु के अनुसार बासी आटा राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है और स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होता है. बर्तन खाली न रखें: रोटी बनाने के बाद तवे को कभी भी ऐसे ही खाली या गंदा न छोड़ें. उसे साफ करके और उचित स्थान पर रखें.