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PM मोदी और मेलोनी ने साथ बिताया खास वक्त, डिनर और कोलोसियम विजिट ने बढ़ाई दोस्ती की चर्चा

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को इटली पहुंचे। रोम पहुंचने के बाद उन्हें PM जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। PM मोदी ने X पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं ने साथ में डिनर भी किया। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। इसके बाद मोदी और मेलोनी ने रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा भी किया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर मोदी के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘वेलकम टु रोम, माय फ्रेंड।’ PM मोदी ने कहा कि आज होने वाली औपचारिक बातचीत में भारत-इटली दोस्ती को और मजबूत करने पर चर्चा जारी रहेगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोदी इटली में कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से भी मुलाकात करेंगे। अपनी पांच देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को वह रोम पहुंचे, जहां इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. मेलोनी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "Welcome my friend ." दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी और इटली पीएम मेलोनी की मुलाकातें औपचारिक कूटनीतिक मुलाकातों से कहीं ज्यादा अहमीयत रखता है. पिछले कुछ वर्षों में दोनों नेताओं ने भारत-इटली संबंधों को एक नई दिशा दी है. कभी सीमित व्यापारिक रिश्तों तक सिमटे दोनों देशों के संबंध अब रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, AI और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे बड़े रणनीतिक मुद्दों तक पहुंच चुके हैं।  प्रधानमंत्री मोदी रोम पहुंचते ही अपना एजेंडा भी बताया. उन्होंने एक एक्स पोस्ट में बताया, "इस दौरे में भारत और इटली के बीच सहयोग को कैसे मजबूत किया जाए, इस पर फोकस किया जाएगा, जिसमें इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर खास ध्यान दिया जाएगा।  मोदी-मेलोनी की पहली मुलाकात बाली में इस नई साझेदारी की शुरुआत नवंबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में हुए G20 शिखर सम्मेलन से मानी जाती है. उस वक्त मेलोनी हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री बनी थीं. दोनों नेताओं की पहली मुलाकात में यह साफ हो गया था कि भारत और इटली नए दौर की शुरुआत करना चाहते हैं. इसी बैठक में ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और इटैलियन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की भारत में भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी।  भारत-इटली में स्ट्रेटेजिक पार्टनर्शिप इसके बाद मार्च 2023 में मेलोनी भारत आईं और रायसीना डायलॉग में चीफ गेस्ट बनीं. यही वह मोड़ था जहां दोनों देशों के रिश्तों को आधिकारिक तौर पर "स्ट्रेटेजिक पार्टनर्शिप" का दर्जा मिला. इस दौरान रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए. इसके तहत दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, सिक्योर इंटेलिजेंस शेयरिंग और आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. इटली की बड़ी रक्षा कंपनियों को भारत में सैन्य उपकरणों के को-प्रोडक्शन का रास्ता भी खुला।  भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा इटली सितंबर 2023 में नई दिल्ली में हुए G20 सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के रिश्ते एक और स्तर ऊपर पहुंच गए. इटली भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर यानी IMEC का हिस्सा बना. इस कॉरिडोर का मकसद भारत को यूरोप से जोड़ने वाला नया व्यापारिक और समुद्री नेटवर्क तैयार करना है. इसी दौरान माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट भी फाइनल हुआ, जिससे भारतीय छात्रों, रिसर्चर्स और स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए इटली में अवसर बढ़े।  AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स पर करार जून 2024 में इटली में आयोजित G7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की फिर मुलाकात हुई. यहां बातचीत का फोकस भविष्य की टेक्नोलॉजी पर रहा. दोनों देशों ने AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, टेलीकॉम और क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन को लेकर सहयोग बढ़ाने का फैसला किया. साथ ही इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी राइट्स यानी पेटेंट और डिजाइन से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए।  जी-20 में मेलोनी-मोदी की मुलाकात इसके बाद नवंबर 2024 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में हुए G20 सम्मेलन में दोनों देशों ने 2025-2029 के लिए फाइव ईयर जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान लॉन्च किया. यह अब तक का सबसे बड़ा रोडमैप माना गया, जिसमें रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, शिक्षा, व्यापार और वैश्विक सहयोग समेत 10 बड़े सेक्टर शामिल किए गए।  नवंबर 2025 में साउथ अफ्रीका के जोहोन्सबर्ग में हुए G20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी की मुलाकात में आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद अहम समझौता हुआ. दोनों देशों ने "इंडिया-इटली जॉइंट इनीशियेटिव टू काउंटर फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म" लॉन्च किया, जिसका मकसद आतंकवादी संगठनों की फंडिंग पर लगाम लगाना था।  दिल्ली में हुए हाई-प्रोफाइल आतंकी हमले के बाद मेलोनी ने भारत के साथ खुलकर एकजुटता दिखाई थी. इस पहल के तहत दोनों देशों ने आतंकियों को मिलने वाली अवैध फंडिंग और क्रॉस-बॉर्डर वित्तीय नेटवर्क को रोकने, संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर निगरानी बढ़ाने और एफएटीएफ और ग्लोबल काउंटरटेररिज्म फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी तालमेल मजबूत करने पर सहमति जताई।  "इंडो-मेडिटेरेनियन कॉरिडोर" पर करार अब मई 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की यह रोम यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा करने वाली मानी जा रही है. इस दौरान "इंडो-मेडिटेरेनियन कॉरिडोर" की अवधारणा को औपचारिक रूप दिया गया है. इसका मकसद हिंद महासागर से लेकर यूरोप तक समुद्री व्यापार और रणनीतिक कनेक्टिविटी को मजबूत करना है. साथ ही AI को लेकर भी बड़ा समझौता हुआ है, जिसमें इटली के "एल्गोर-एथिक्स" मॉडल और भारत की "ह्युमन सेंट्रिक एआई" सोच को साथ लाने की कोशिश की गई है।  विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और इटली की यह बढ़ती नजदीकी सिर्फ दो देशों के रिश्तों की कहानी नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी है. एक तरफ भारत यूरोप में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहता है, वहीं इटली एशिया में भारत को एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में देखता है। 

4000 करोड़ की बड़ी सौगात! आरा-कोईलवर क्षेत्र में रेल और सड़क कनेक्टिविटी का होगा विस्तार

 आरा  दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाली दिल्ली-हावड़ा मेन लाइन पर जल्द ही बड़े स्तर पर आधारभूत ढांचे का विस्तार देखने को मिल सकता है।रेल मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरा जंक्शन होकर गुजरने वाले इस अत्यंत व्यस्त रेलखंड को आधुनिक और अधिक सक्षम बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।योजना के तहत लगभग 3500 से 4000 करोड़ रुपये की लागत से दो नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। इसके साथ ही कोईलवर में सोन नदी पर देश का दूसरा चार लेन रेल पुल भी बनाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के पूरा होने के बाद वर्तमान दो लाइन वाले रेलखंड को चार लाइन में विकसित किया जाएगा। इसमें एक लाइन पैसेंजर ट्रेनों के संचालन के लिए, एक लाइन मालगाड़ियों के लिए तथा दो लाइन एक्सप्रेस ट्रेनों की आवाजाही के लिए निर्धारित की जाएगी। इससे ट्रेनों के परिचालन में काफी आसानी होगी और यात्रियों को समय पर ट्रेन सेवा का लाभ मिल सकेगा। सोन नदी पर बनेगा नया पुल   इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा कोइलवर में सोन नदी पर नए रेल पुल का निर्माण है। यह पुल मौजूदा रेल पुल के समानांतर बनाया जाएगा। पूर्व मध्य रेलवे ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी से पहले परियोजना की तकनीकी और व्यवहारिकता रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। संभावना जताई जा रही है कि इसी माह जांच रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंप दी जाएगी। नए पुल के निर्माण के बाद पुराने और नए पुल को मिलाकर कुल चार रेल लाइनें उपलब्ध हो जाएंगी। इससे एक ही समय में तीन-तीन ट्रेनों का आवागमन संभव हो सकेगा। वर्तमान में केवल दो लाइन होने के कारण अप और डाउन दिशा में एक-एक ट्रेन ही एक समय में गुजर पाती है, जिससे ट्रेनों के परिचालन पर भारी दबाव बना रहता है। समय पालन में होगी बड़ी राहत हावड़ा-पटना-डीडीयू रेलखंड भारतीय रेल के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। इस रूट से प्रतिदिन बड़ी संख्या में एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, पैसेंजर और मालगाड़ियां गुजरती हैं। ट्रेनों का दबाव अधिक होने के कारण अक्सर परिचालन प्रभावित होता है और समय पालन बनाए रखना रेलवे के लिए चुनौती बन जाता है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि चार लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सकेगा। इससे मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों के कारण एक्सप्रेस ट्रेनों की गति प्रभावित नहीं होगी। वहीं लंबी दूरी की ट्रेनों को भी समय पर चलाने में सहायता मिलेगी।  आरा, पटना और आसपास के क्षेत्रों को मिलेगा लाभ  इस परियोजना से आरा, बक्सर, बिहिया, डुमरांव और पटना सहित पूरे शाहाबाद क्षेत्र को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। रेल ढांचे के मजबूत होने से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। साथ ही यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और कम विलंब वाली ट्रेन सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस परियोजना को अंतिम मंजूरी केंद्रीय कैबिनेट से मिलनी है। रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में पूर्व मध्य रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।  

जयपुर में सूर्यवंशी का रौद्र रूप, 93 रन की विस्फोटक पारी से बने कई महारिकॉर्ड

 जयपुर  राजस्थान रॉयल्स (RR) की टीम ने (19 मई) को लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) को जयपुर में 7 व‍िकेट से मात दी। राजस्थान की टीम ने वैभव सूर्यवंशी, यशस्वी जायसवाल और ध्रुव जुरेल की पार‍ियों की बदौलत 5 गेंद शेष रहते हुए जीत हास‍िल की. इस मैच में जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स की प्लेऑफ खेलने की उम्मीद बरकरार हैं. इस जीत के साथ राजस्थान की टीम 13 मैचों में 7 जीत और 6 हार के  साथ पॉइंट टेबल में चौथे नंबर पर है. बेंगलुरु, गुजरात और हैदराबाद की टीम पहले, दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।  मैच में टॉस यशस्वी जायसवाल ने जीता और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था. पहले खेलते हुए लखनऊ की टीम ने 220/4 का स्कोर बनाया. म‍िचेल मार्श ने शानदार 96 रनों की पारी खेली।  10 छक्के, 7 चौके और 38 गेंद में 93 रन  वैभव सूर्यवंशी( Vaibhav Sooryavanshi) का तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा. राजस्थान रॉयल्स के इस 15 वर्षीय बल्लेबाज ने मंगलवार (19 मई)  लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ ऐसी विस्फोटक पारी खेली, जिसने पूरे सवाई मानसिंह स्टेडियम को झूमने पर मजबूर कर दिया।  221 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी राजस्थान रॉयल्स को वैभव सूर्यवंशी और कार्यवाहक कप्तान यशस्वी जायसवाल ने धमाकेदार शुरुआत दिलाई. दोनों बल्लेबाजों ने सिर्फ 39 गेंद में 75 रन जोड़कर मैच का रुख बदल दिया।  जायसवाल के आउट होने के बाद भी वैभव नहीं रुके. उन्होंने हर गेंदबाज की जमकर धुनाई की और महज 38 गेंद में 93 रन ठोक दिए. इस दौरान उनके बल्ले से 10 लंबे छक्के और 7 चौके निकले. उनका स्ट्राइक रेट 244 से ज्यादा का रहा।  इसके बाद वैभव ने ध्रुव जुरेल के साथ 105 रन की साझेदारी कर राजस्थान को जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया. जीत का काम अंत में ध्रुव जुरेल ने पूरा किया, जिन्होंने नाबाद 53 रन बनाए. राजस्थान ने 19.1 ओवर में 225 रन बनाकर मुकाबला 7 विकेट से अपने नाम कर लिया।  इससे पहले लखनऊ सुपर जायंट्स की तरफ से म‍िचेल मार्श ने 57 गेंद में 96 रन की विस्फोटक पारी खेली थी. वहीं जोश  इंग्ल‍िस  ने 29 गेंद में 60 रन बनाए. दोनों ने पहले विकेट के लिए 109 रन जोड़े. कप्तान ऋषभ पंत ने भी 35 रन का योगदान दिया, जिसकी बदौलत लखनऊ ने 220/5 का बड़ा स्कोर खड़ा किया।  हालांकि मैच की पूरी चमक वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी के नाम रही. इस पारी के साथ उन्होंने IPL 2026 में ऑरेंज कैप भी अपने नाम कर ली. वैभव अब 13 मैचों में 579 रन बना चुके हैं. उनका औसत 44.53 और स्ट्राइक रेट 236.32 का है, जो IPL इतिहास में 500 से ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में सबसे ज्यादा है।  एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट (500+ रन) 236.3*: वैभव सूर्यवंशी (2026) 204.8 : आंद्रे रसेल (2019) 202.0 : अभिषेक शर्मा (2026) 196.2 :निकोलस पूरन (2025) 191.5 : ट्रेविस हेड (2024) वैभव अब एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में भी दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं।  एक IPL सीजन में सबसे ज्यादा छक्के 59 : क्रिस गेल (2012) 53* : वैभव सूर्यवंशी (2026) 52: आंद्रे रसेल (2019) 51 : क्रिस गेल (2013)   वैभव सूर्यवंशी ने IPL में तीसरी बार एक पारी में 10 या उससे ज्यादा छक्के लगाए हैं. इस मामले में अब उनसे आगे सिर्फ क्रिस  हैं, जिन्होंने ऐसा चार बार किया था. इस जीत के साथ राजस्थान की टीम अब 14 अंकों के साथ पॉइंट टेबल में चौथे नंबर पर पहुंच गई है।  राजस्थान की पारी की हाइलाइट्स  221 के रनचेज में राजस्थान रॉयल्स ने भी काउंटर अटैक किया. दोनों ने म‍िलकर 6 ओवर में 71  रन जड़ द‍िए. हालांक‍ि पावरप्ले के ही अगले ओवर में इस मैच के कप्तान यशस्वी जायसवाल (43) आकाश स‍िंंह का श‍िकार बन गए।  हालांकि इसके बाद वैभव सूर्यवंशी की आंधी आई, एक समय वैभव जहां 10 गेंदों पर 5 रन बनाकर खेल रहे थे, उसके बाद उन्होंने 23 गेंदों पर पचास जड़ द‍िया. वहीं उन्होंने आकाश के एक ओवर में 26 रन भी जड़े. इसके बाद वैभव ने ध्रुव जुरेल के साथ म‍िलकर मयंक यादव के ओवर में 29 रन कूट द‍िए. कुल म‍िलाकर इस मैच में लखनऊ के गेंदबाज असहाय नजर आए. हालांकि वैभव अपने शतक से 7 रन से चूक गए और 93 रन बनाकर आउट हो गए. उन्होंने 38 गेंदों की पारी में 7 चौके और 10 छक्के मारे.  वहीं ध्रुव जुरेल (53 नाबाद) और डोनोवान फरेरा (16)  नाबाद जीत द‍िलाकर लौटे. लखनऊ का प्लेऑफ खेलने का सपना पहले ही खत्म हो चुका है।  लखनऊ की पारी की हाइलाइट्स  लखनऊ की टीम ने इस मैच में धुआंधार बल्लेबाजी की. जोश इंग्ल‍िस (60) और म‍िचेल मार्श ने पहले व‍िकेट के लिए 109/1 रन जोड़ लिए. जोश को यशराज पुंजा ने क्लीन बोल्ड किया. इसके बाद आए न‍िकोलस पूरन (16) और ऋषभ पंत (35) ने भी कुछ आकृर्षक शॉट खेले. म‍िचेल मार्श ने लखनऊ की टीम की ओर से सबसे ज्यादा 96 रन (57 गेंद) बनाए. यशराज पुंजा ने सबसे ज्यादा 2 और जोफ्रा आर्चर को एक सफलता म‍िली। 

चारधाम यात्रा पर बढ़ती मौतों ने बढ़ाई चिंता, ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी पर उठे सवाल

देहरादून  उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा 19 अप्रैल को शुरू हुई थी. यानि इस यात्रा को 30 दिन पूूरे हो चुके हैं. इस दौरान आधिकारिक तौर पर यात्रा में शामिल 55 लोगों की मृत्यु हो चुकी है. ज़्यादातर मौतों की मुख्य वजह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, विशेषकर दिल की बीमारियां और ऊंचाई पर होने वाली बीमारियां।  इसमें 30 लोगों की मृत्यु केदारनाथ यात्रा के रास्ते में हुई तो 10 लोगों की मौत बदरीनाथ यात्रा के दौरान हुई तो यमनोत्री और गंगोत्री धाम के रास्ते में 8 और 7 मौतों का आंकड़ा बताया जा रहा है।  उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार चार धाम यात्रा में मौतों में 70–75% तक मामले खराब स्वास्थ्य यानि प्री‑एक्सिस्टिंग हार्ट डिज़ीज, हाई ब्लडप्रेसर, डायबिटीज, पल्मोनरी एडिमा आदि के कारण होते हैं. कई वृद्ध यात्री या फिटनेस कम वाले लोग ऊंचाई, थकान और तनाव के कारण अचानक हार्ट अटैक, स्ट्रोक या फेफड़ों में सूजन से मर जाते हैं।  आमतौर पर लोग यहां के चार धामों की यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करते हैं. इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है. चूंकि ये यात्रा हाई अल्टीट्यूड पर ही ज्यादा होती है, लिहाजा लोगों को हृदय संबंधी दिक्कतों से भी जूझना होता है. सलाह दी जाती है कि हृदय संबंधी दिक्कतों वाले इन यात्राओं से बचें. आगे ये जानेंगे कि आखिर ऊंचाई वाली जगहें क्यों दिल संबंधी बीमारियों वालों के लिए जानलेवा भी बन जाती हैं।  उत्तराखंड के चारों धाम ऊंचाई वाली जगहों पर ही हैं. सभी पहाड़ों की ऊंचाई पर हैं, उनमें मौसम भी ठंडा और बर्फीला रहता है, चाहे यमुनोत्री हो या फिर बद्रीनाथ. वहां गर्मी के मौसम में भी इर्द गिर्द के पहाड़ों पर बर्फ ढंकी नजर आती है. लेकिन ऊंचाई वाली जगहें कैसे हृदय स्वास्थ्य पर असर डालती हैं।  अधिक ऊंचाई पर रहना अगर उन व्यक्तियों के लिए फायदेमंद होता है, जिनका हृदय स्वास्थ्य अच्छा होता है. तो उन लोगों के लिए खतरनाक जो मौजूदा तौर पर हृदय जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हों. बहुत से श्रद्धालु बिना पहले से डॉक्टरी जांच, फिटनेस टेस्ट या ऊंचाई के अनुकूलन के बिना सीधे चार धाम के लिए निकल पड़ते हैं।  हाई अल्टीट्यूड यानि उच्च ऊंचाई किसे माना जाता है? – समुद्र तल से 6,560 फीट से नीचे का कोई भी स्थान कम ऊंचाई वाला माना जाता है. इससे ऊपर की यात्रा मध्यम ऊंचाई और उच्च ऊंचाई वाली मानी जाती है. समुद्र तल से 6,560 से 9,840 फीट के बीच वाले स्थानों को मध्यम ऊंचाई वाला माना जाता है. समुद्र तल से 9,840 फीट से ऊपर की जगहें उच्च ऊंचाई वाली होती हैं. ये वो जगहें हैं जहां आपका शरीर ऊंचाई से संबंधित महत्वपूर्ण प्रभावों का अनुभव करने लगता है।  भारत में हाई अल्टीट्यूड एरिया के पैरामीटर्स क्या हैं? – भारतीय सेना उच्च ऊंचाई (एचए) क्षेत्रों को 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर के क्षेत्रों के रूप में परिभाषित करती है। इन्हें ऊंचाई के आधार पर तीन चरणों में वर्गीकृत किया गया है: स्टेज I: 9,000–12,000 फीट (2,750–3,657 मीटर) चरण II: 12,000-15,000 फीट (3,657-4,572 मीटर) चरण III: 15,000 फीट से ऊपर (4,572 मीटर) चार धाम की यात्रा किन ऊंचाइयों से गुजरती है? – छोटा चार धाम के दर्शन के लिए 4000 मीटर से भी ज्‍यादा ऊंचाई तक की चढ़ाई करनी होती है. इसमें कहीं ज्यादा ऊंचाई वाली जगहें होती हैं तो कहीं ज्यादा ऊंचाई वाली जगहें. इसलिए ये यात्रा मुश्किल मानी जाती है।  चार धाम यात्रा गढ़वाल हिमालय में ऊंचाई पर होती है, इसलिए इसे उच्च ऊंचाई वाली यात्रा कहा जाता है. चार धाम यात्रा के चार तीर्थस्थल इन ऊंचाइयों पर हैं. भारतीय सेना के हाई अल्टीट्यूड वाले पैरामीटर्स के हिसाब से भी ये सारी जगहें हाई अल्टीट्यूड एरिया हैं।  यमुनोत्री: 3,291 मीटर गंगोत्री: 3,415 मीटर केदारनाथ: 3,553 मीटर बद्रीनाथ: 3,300 मीटर केदारनाथ: 11,700 फीट गंगोत्री: 10,200 फीट हाई अल्टीट्यूड वाले इलाके आमतौर पर कैसे होते हैं? – उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आमतौर तापमान काफी ठंडा होता है. ज्यादा बारिश होती है, तेज हवाएं चलती हैं. कम वायु दबाव होता है और हवा में ऑक्सीजन का स्तर भी कम होने लगता है।  इस ऊंचाई के लिए कई तरह के दिशा निर्देश दिए जाते हैं 1. धीरे-धीरे चढ़ो 2. एक दिन में कम ऊंचाई से सीधे 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर जाने से बचें 3. एक बार 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर सोने की ऊंचाई को प्रतिदिन 1,600 फीट (500 मीटर) से अधिक नहीं बढ़ाएं 4. प्रत्येक 3,300 फीट (1,000 मीटर) पर अनुकूलन के लिए एक अतिरिक्त दिन की योजना बनाएं. उच्च ऊंचाई आपके शरीर को कैसे प्रभावित करती है? – जब आप अधिक ऊंचाई पर होते हैं, तो पतली हवा के कारण आपके फेफड़ों को कम ऑक्सीजन प्राप्त होती है. यह आपके फेफड़ों और हृदय पर इसलिए ज्यादा जोर बढ़ा देता है क्योंकि आपके शरीर के बाकी हिस्सों को भी लगातार ऑक्सीजन युक्त रक्त की जरूरत होती है. जिसकी मात्रा पर अशर पड़ने लगता है. इसी वजह से बहुत अधिक ऊंचाई पर बहुत से स्वस्थ लोगों को भी चक्कर आना, सिरदर्द और थकान जैसे दिक्कतें होने लगती हैं।  अगर कोई हृदय संबंधी दिक्कतों से गुजर रहा है तो इस ऊंचाई पर क्या अनुभव करता है? – यदि आप किसी हृदय संबंधी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का अनुभव करते हैं तो अधिक ऊंचाई का आपके शरीर पर और भी अधिक प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों को आमतौर पर ऊंचाई वाले स्थान पर पहुंचने के तुरंत बाद हृदय गति और रक्तचाप दोनों में बढोतरी महसूस होगी. ये समस्याएं आमतौर पर रात में और ज्यादा हो जाएंगी।  अधिक ऊंचाई पर रहने से हृदय स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी होता है क्या? – इस बात के प्रमाण हैं कि अधिक ऊंचाई पर रहने से हृदय स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं. हार्वर्ड स्कूल ऑफ ग्लोबल हेल्थ के एक अध्ययन में पाया गया कि अधिक ऊंचाई पर रहने वाले व्यक्तियों में इस्केमिक हृदय रोग से मरने की संभावना कम होती है. उनकी जीवन प्रत्याशा आमतौर पर लंबी होती है।  क्या हृदय रोग से पीड़ित रोगी अधिक ऊंचाई पर यात्रा कर सकते हैं? – जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया कि … Read more

SC का बड़ा फैसला, रेलवे पर ₹15 हजार करोड़ का सरचार्ज बरकरार; पुरानी दलील नहीं आई काम

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे बड़े बिजली उपभोक्ताओं में से एक भारतीय रेलवे को बड़ा वित्तीय झटका दिया है. अदालत ने साफ किया है कि रेलवे बिजली कानून के तहत कोई विशेष दर्जा पाने का हकदार नहीं है. उसे अन्य औद्योगिक इकाइयों की तरह ही अपनी बिजली खपत पर सभी तरह के सरचार्ज देने होंगे. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने रेलवे की आठ अपीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. कोर्ट ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के पुराने फैसले को सही ठहराया है. इस फैसले से राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन रेलवे के बजट पर इसका बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका है।  रेलवे पर क्यों फूटा 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बम? भारतीय रेलवे हर साल करीब 33 अरब यूनिट से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करती है. इस बड़े फैसले के बाद रेलवे को बैकडेटेड एरियर यानी पुराना बकाया भी चुकाना होगा. राज्यों के हिसाब से यह क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज 50 पैसे से लेकर 2.5 रुपये प्रति यूनिट तक है।  सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की डिस्कॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे रेलवे के ओपन एक्सेस इस्तेमाल की अवधि और क्षेत्र के हिसाब से बकाया राशि का आकलन करें. रेलवे के आंतरिक अनुमानों के अनुसार यह कुल बकाया राशि कम से कम 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. यह रकम रेलवे के चालू वित्त वर्ष के बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकती है।  10 साल पुराने कानूनी दांवपेंच में कहां मात खा गई रेलवे?     रेलवे साल 2015 से अदालत में यह दलील दे रही थी कि वह एक ‘डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ है. इस रणनीति के पीछे रेल मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय का साल 2014 का एक पत्र था।      रेलवे का दावा था कि रेलवे एक्ट 1989 की धारा 11 के तहत उसे खुद का बिजली नेटवर्क और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बनाने का अधिकार प्राप्त है. इसलिए वह ग्रिड से सीधे बिजली लेते समय किसी भी तरह का सरचार्ज देने के लिए उत्तरदायी नहीं है।      सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कानूनन डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी होने के लिए दूसरों को बिजली बेचना जरूरी है, जबकि रेलवे पूरी बिजली खुद ही कंज्यूम करती है।  रेलवे डिस्ट्रीब्यूटर है या सिर्फ एक कंज्यूमर? सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि रेलवे का पूरा ओवरहेड इक्विपमेंट और ट्रैक्शन सबस्टेशन उसका आंतरिक सिस्टम है. यह कोई पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम नहीं है. बिजली कानून के तहत लाइसेंसी कहलाने के लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए।      पहली शर्त यह कि आपके पास डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम हो.     दूसरी यह कि आप किसी तीसरे पक्ष को बिजली की सप्लाई करते हों. रेलवे जो भी बिजली खरीदती है, उसका इस्तेमाल केवल इंजनों, सिग्नलों और स्टेशनों को चलाने में होता है. वह इसे किसी बाहरी उपभोक्ता को नहीं बेचती है. इसी आधार पर कोर्ट ने रेलवे को बिजली कानून की धारा 2(15) के तहत सिर्फ एक कंज्यूमर माना है।  क्या अब फेल हो जाएगी रेलवे की महा-बचत योजना? रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य मोहम्मद जमशेद के अनुसार, इस अदालती आदेश में रेलवे की पूरी वित्तीय बचत को खत्म करने की क्षमता है. रेलवे ने साल 2015 के आसपास एक बड़ी नीतिगत पहल शुरू की थी. इसके तहत ओपन एक्सेस से सस्ती बिजली खरीदकर एक दशक में 41,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बचाने का लक्ष्य था. यह नया फैसला उस पूरी योजना पर पानी फेर सकता है।  रेलवे ने अपने ब्रॉड-गेज नेटवर्क का लगभग 100% इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा कर लिया है. इस मिशन पर करीब 46,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. डीजल पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बचाने की यह मुहिम अब ओपन एक्सेस मार्केट के महंगे सरचार्ज के जाल में फंस गई है। 

MP में रेलवे का मेगा प्रोजेक्ट, 4329 करोड़ की चौथी लाइन से भोपाल-इटारसी सफर होगा और तेज

भोपाल   मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बीना के बीच जल्द ही ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने जा रही है. इटारसी भोपाल बीना के बीच बनने जा रही चौथी रेल लाइन के काम ने तेजी पकड़ ली है. चौथी रेल लाइन को केन्द्रीय बजट में स्वीकृति मिलने के बाद इसके सर्वे का काम पूरा हो गया है. रेल्वे अधिकारियों के मुताबिक इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है, जो जल्द ही पूरी कर ली जाएगी. 237 किलोमीटर लंबे रूट की इस परियोजना के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 100 करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया गया है।  237 किलोमीटर रूट पर बनेंगे 39 बड़े पुल इटारसी भोपाल बीना तीनों बड़े जंक्शन हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों को रेल लाइन से जोड़ते हैं. तीनों बड़े स्टेशनों के बीच कुल लंबाई 237 रूट किलोमीटर है. इन रूट पर लगातार यात्री गाड़ियों और मालगाड़ियों के संचालन का दबाव बढ़ रहा है. इसको देखते हुए इटारसी से बीना तक चौथी रेल लाइन का काम शुरू होने जा रहा है. इस परियोजना के पूरे होने के बाद ट्रेन 9 सुरंगों से होकर गुजरेगी. इसके अलावा 4 महत्वपूर्ण पुलों का भी निर्माण किया जाएगा।  4329 करोड़ होंगे खर्च इस रूट में 39 बड़े पुल, 151 छोटे पुल, 43 रोड ओवर ब्रिज और 39 रोड अंडर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा. इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 4329 करोड़ रुपए हैं. परियोजना के लिए समय सीमा 4 साल निर्धारित की गई है।  रेल रूट से जुड़ेगी हेरीटेज साइट चौथी रेल लाइन का काम पूरा होने से मध्यप्रदेश और आसपास के दूसरे राज्यों के प्रमुख हेरीटेज साइज और ईकोटूरिज्म साइट की कनेक्टीविटी और बेहतर होगी. खासतौर से वर्ल्ड हेरीटेज साइट सांची, भीमबेटिका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अलावा दूसरे कई टूरिस्ट स्पॉट्स तक पहुंचना और आसान हो जाएगा. यह नया रेल कॉरिडोर इटारसी से शुरू होकर भोपाल होते हुए बीना तक जाएगा. इस रूट पर सीहोर, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर जिले सीधे तौर से जुड़ेंगे।  उत्तर से दक्षिण भारत की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी इस रेल लाइन का काम पूरे होने से ट्रेफिक का दबाव कम होगा ओर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी. भोपाल रेल मंडल के डीसीएम नवल अग्रवाल ने बताया, '' इस परियोजना के पूरे होने से 15.2 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता सालाना विकसित होगी. इसका फायदा क्षेत्र में उद्योग और लॉजिस्टिक को मिलेगा. इस रूट पर 25 जोड़ी यात्री ट्रेनों के अलावा करीबन 200 मालगाड़ियों का संचालन और बढ़ेगा. इस परियोजना को चार चरणों में पूरा किया जा रहा है. पहला बीना से सुमेर, दूसरा सुमेर से रानी कमलापति स्टेशन, तीसरा रानीकमलापति रेल्वे स्टेशन से बरखेड़ा और बरखेड़ा से इटारसी तक रहेगा. इसके लिए भूमि अधिग्रहण काम चल रहा है। 

बीजापुर के ग्राम गमपुर में स्वास्थ्य विभाग का विशेष अभियान बना ग्रामीणों के लिए राहत

रायपु दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र ग्राम गमपुर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कठिन परिस्थितियों के बीच पहुंचकर जनसेवा का सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। बीजापुर जिले के उप स्वास्थ्य केंद्र डोडीतुमनार की टीम ने जंगल और खराब रास्तों की चुनौतियों के बावजूद गांव में यूनिवर्सल हेल्थ स्क्रीनिंग सर्वे सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान कुल 771 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई। स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों की सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ मलेरिया, टीबी, एनीमिया, उच्च रक्तचाप और गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच भी की। सर्वेक्षण के दौरान 5 मलेरिया मरीजों की पहचान कर तुरंत उपचार शुरू किया गया। वहीं 2 संभावित टीबी मरीजों और 1 हाई रिस्क गर्भवती महिला को आगे की जांच और उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। जांच के दौरान 1 उच्च रक्तचाप और 2 एनीमिया से पीड़ित मरीजों को भी चिन्हित किया गया। उन्हें आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श उपलब्ध कराया गया। स्वास्थ्य टीम ने ग्रामीणों को साफ-सफाई, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच और संक्रामक बीमारियों से बचाव के बारे में भी जागरूक किया। ग्रामीणों ने बताया कि पहली बार उनके गांव के पास इतने बड़े स्तर पर स्वास्थ्य जांच सुविधा उपलब्ध हुई है, जिससे लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। टीम के लगातार प्रयासों से ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण सफलता मिल रही है। ग्राम गमपुर में चलाया गया यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि यह भी दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य विभाग लोगों तक सेवाएं पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

260 खिलाड़ी ले रहे 8 खेलों का प्रशिक्षण, खेल के साथ योग और सामान्य ज्ञान पर भी जोर

रायपुर जिला प्रशासन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से बीजापुर में आयोजित 15 दिवसीय ग्रीष्मकालीन खेल शिविर में बच्चों की खेल प्रतिभाओं को नई दिशा मिल रही है। एजुकेशन सिटी में आयोजित इस आवासीय शिविर में जिले के दूरस्थ क्षेत्रों से आए बच्चे उत्साह के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। कलेक्टर  विश्वदीप और जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी मती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य ग्रामीण और सुदूर अंचलों के बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर उनकी खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है। शिविर में जिले के चारों विकासखंडों से आए 260 खिलाड़ी शामिल हैं। बीजापुर स्पोर्ट्स अकादमी के प्रशिक्षकों द्वारा बच्चों को दो पालियों में वालीबाल, फुटबॉल, सॉफ्टबॉल, तीरंदाजी, बैडमिंटन, तैराकी, एथलेटिक्स और कबड्डी सहित 8 खेलों का नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को खेलों के नियम, अनुशासन, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी भी दी जा रही है। प्रतिदिन योग सत्र आयोजित कर बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। खेल गतिविधियों के साथ बच्चों को सेंट्रल लाइब्रेरी में सामान्य ज्ञान और शैक्षणिक गतिविधियों से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। शिविर में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे चलकर स्पोर्ट्स अकादमी में प्रवेश देकर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह ग्रीष्मकालीन खेल शिविर बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी विकसित कर रहा है।

ईरान युद्ध के बीच भारत की नई चाल, पाकिस्तान के गठजोड़ को काउंटर करने की तैयारी

नई दिल्ली ईरान जंग ने मौजूदा वर्ल्‍ड ऑर्डर को उलट-पुलट कर रख दिया है. होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और LPG लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. मौजूदा संकट को देखते हुए अब तमाम देश एनर्जी सप्‍लाई के लिए अल्‍टरनेटिव रूट डेवलप करने की कोशिश में जुटे हैं. इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देशों के आपसी रिश्‍ते भी बदलने लगे हैं. पुराने समीकरण ध्‍वस्‍त हो रहे हैं तो नए गुट बन रहे हैं. पाकिस्‍तान ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर इस्‍लामिक NATO की नींव रखने का काम किया है. इन तीनों देशों का लक्ष्‍य संकट के समय एक-दूसरे का साथ देना है. हालांकि, अभी तक यह बस जुबानी जमाखर्च ही साबित हुई है. दूसरी तरफ, इस त्रिकोणीय गठजोड़ के अपने सामरिक महत्‍व भी हैं. अब भारत ने कथित इस्‍लामिक NATO का जवाब अपने अंदाज में तैयार कर लिया है. दिलचस्‍प बात यह है कि इसमें इजरायल की भी एंट्री मानी जा रही है. बता दें कि कुछ दिनों पहले ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू की UAE यात्रा की बात सामने आई थी. हालांकि, इसे खारिज कर दिया गया है. इटली के सामरिक मामलों के एक्‍सपर्ट मानते हैं कि भारत, UAE और इजरायल का गठजोड़ पश्चिम एशिया में शांति के लिए X फैक्‍टर साबित हो सकता है।  इटली के जियोपॉलिटकल एक्‍सपर्ट सर्गियो रेस्टेली ने ‘टाइम्‍स ऑफ इजरायल’ में लिखे लेख में भारत, UAE और इजरायल के त्रिकोणीय गठजोड़ की बात कही है. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक रणनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है. भू-राजनीतिक विशेषज्ञ सर्गियो रेस्टेली ने The Times of Israel में प्रकाशित अपने लेख में कहा है कि भारत को संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और ईरान के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने की कला विकसित करनी होगी. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को खाड़ी देशों को भरोसा दिलाते हुए ईरान के साथ संवाद के दरवाजे खुले रखने चाहिए और साथ ही इजरायल के साथ सहयोग को भी मजबूत करना चाहिए. रेस्टेली के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया UAE यात्रा ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में संघर्षों ने वैश्विक शक्तियों की विदेश नीति की परीक्षा लेनी शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि भारत और यूएई के संबंध अब केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेश, बुनियादी ढांचा, रक्षा, खाद्य सुरक्षा, तकनीक और समुद्री संपर्क जैसे क्षेत्रों तक फैल चुके हैं।  भारत के लिए यूएई और इजरायल का महत्‍व इतालवी एक्‍सपर्ट ने यूएई को ऐसा साझेदार बताया जो क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को व्यवहारिक परियोजनाओं में बदलने की क्षमता रखता है. उनके मुताबिक, अबू धाबी भारत की पश्चिम एशिया नीति का अहम स्तंभ बनता जा रहा है. रेस्टेली लिखते हैं कि भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता घरेलू आर्थिक मुद्दा भी है, क्योंकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान का असर महंगाई, औद्योगिक उत्पादन और घरेलू बजट पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि भारत के इजरायल के साथ रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, जल प्रबंधन और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं. वहीं, यूएई पूंजी, भौगोलिक पहुंच और क्षेत्रीय स्वीकार्यता प्रदान करता है. रेस्टेली के अनुसार, यूएई और इजरायल मिलकर पश्चिम एशिया में एक नए व्यावहारिक ढांचे का निर्माण कर रहे हैं, जो नारों की बजाय बुनियादी ढांचे, इनोवेशन और स्थिरता पर आधारित है।  ईरान भारत के लिए बेहद महत्‍वपूर्ण सर्गियो रेस्टेली ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी पश्चिम एशिया नीति को किसी एक धुरी तक सीमित नहीं कर सकता. उनके मुताबिक, ईरान भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से. उन्होंने चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) को भारत-ईरान साझेदारी का सबसे ठोस उदाहरण बताया. रेस्टेली ने कहा कि ईरानी विदेश मंत्री अब्‍बास अरागची (Abbas Araghchi) की दिल्ली यात्रा ने यह संकेत दिया कि भारत तेहरान के साथ गंभीर संवाद बनाए रखना चाहता है. उनके अनुसार, संकटग्रस्त क्षेत्र में सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की क्षमता ही जिम्मेदार कूटनीति की पहचान है. लेख में कहा गया कि यूएई भारत की उभरती पश्चिम एशिया रणनीति का मुख्य आधार है, इजरायल तकनीक और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोगी है, जबकि ईरान संपर्क और क्षेत्रीय संकट प्रबंधन के लिए आवश्यक साझेदार बना रहेगा. रेस्टेली ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा ने यह स्पष्ट किया कि भारत अब केवल तेल आयातक देश के रूप में नहीं, बल्कि अपने हितों और रणनीतिक विकल्पों के साथ एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में पश्चिम एशिया में अपनी भूमिका तय कर रहा है। 

गुणवत्ता सुधार की दिशा में बड़ा कदम, 252 संस्थाओं की मॉनिटरिंग अब मोबाइल ऐप से होगी

क्वालिटी ऑडिट मोबाइल ऐप : संस्थाओं की गुणवत्ता सुधार की नई डिजिटल पहल मध्यप्रदेश में 252 सामाजिक संस्थाओं की निगरानी अब मोबाइल ऐप से भोपाल  मध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक अभिनव पहल के रूप में क्वालिटी ऑडिट मोबाइल एप लागू किया गया है। यह पहल डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन की जनकल्याणकारी सोच को आगे बढ़ाती है। साथ ही विभागीय मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों ने इस व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी रूप से स्थापित किया है। प्रदेश में संचालित शासकीय एवं अशासकीय संस्थाएं जैसे दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र, वृद्धाश्रम, दिव्यांगजनों के संचालित विशेष विद्यालय और नशा मुक्ति केंद्र समाज के कमजोर वर्गों को आश्रय और सेवाएं प्रदान करते हैं। वर्तमान में 252 संस्थाओं के सुचारू संचालन और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा लिया गया है। एमपीएसईडीसी के सहयोग से विकसित यह मोबाइल ऐप निरीक्षण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाता है। इस ऐप की कार्यप्रणाली एक व्यवस्थित प्रक्रिया पर आधारित है, जिसकी शुरुआत जिला अधिकारी द्वारा विभागीय पोर्टल पर लॉगइन करने से होती है। इसके बाद स्थानीय निकाय में पदस्थ सामाजिक सुरक्षा अधिकारी को पोर्टल पर पंजीकृत कर यूजर आईडी प्रदान की जाती है, जो उन्हें एसएमएस के माध्यम से प्राप्त होती है। निरीक्षण कार्य को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए निरीक्षण दल का गठन किया जाता है और उसकी जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जाती है। अगले चरण में संबंधित संस्था का चयन कर सामाजिक सुरक्षा अधिकारी को निरीक्षण के लिए असाइन किया जाता है। अधिकारी मोबाइल ऐप डाउनलोड कर आवश्यक अनुमतियां प्रदान करते हैं तथा लोकेशन ऑन कर लॉगइन करते हैं। इसके बाद जिस संस्था का निरीक्षण किया जाना है, उसका चयन कर निरीक्षण प्रक्रिया प्रारंभ होती है। निरीक्षण के दौरान मोबाइल ऐप के माध्यम से संस्था के न्यूनतम 5 फोटो लिए जाते हैं, जिनके साथ विस्तृत विवरण और रिमार्क दर्ज किए जाते हैं। ऐप में निर्धारित प्रश्नों के उत्तर संस्था की वास्तविक स्थिति के आधार पर भरे जाते हैं, जिससे मूल्यांकन निष्पक्ष और तथ्यात्मक बनता है। निरीक्षण के आधार पर अंत में संस्था को ग्रेडिंग प्रदान की जाती है और रिपोर्ट को सबमिट कर निरीक्षण पूर्ण किया जाता है। पूरी प्रक्रिया के बाद निरीक्षण रिपोर्ट संचालनालय और जिला स्तर पर ऑनलाइन उपलब्ध हो जाती है। जिला अधिकारी इन रिपोर्टों और ग्रेडिंग का परीक्षण कर संस्थाओं में आवश्यक सुधार सुनिश्चित करते हैं। इससे न केवल निगरानी व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि संस्थाओं के संचालन में निरंतर सुधार भी देखने को मिलता है। राज्य शासन इन संस्थाओं में रहने वाले दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य जरूरतमंदों को बेहतर जीवन स्तर, सुरक्षित वातावरण और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित कर रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली अनुदान राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने में भी यह एप महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुल मिलाकर, यह मोबाइल ऐप मध्यप्रदेश में सामाजिक क्षेत्र की संस्थाओं के लिए एक आधुनिक और प्रभावी निगरानी तंत्र के रूप में उभरा है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से शासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सेवा प्रदायगी में पारदर्शिता बनी रहे और प्रत्येक हितग्राही तक गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं पहुंचें। यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है, बल्कि संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम भी है।