samacharsecretary.com

रांची में वन मेला, स्थानीय उत्पाद और आदिवासी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

रांची  झारखंड की जैव विविधता को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ है। देश और दुनिया को इसके संरक्षण प्रयास और इसमें हुई वृद्धि से परिचित कराने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग अक्टूबर में राष्ट्रीय स्तर पर मेला का आयोजन कर रहा है। दुनिया भर के पर्यावरणविद, आदिवासी अर्थव्यवस्था पर काम करने वाले लोगों को झारखंड की वन संपदा और इससे जुड़े आजीविका के प्रयासों से परिचित कराया जाएगा। मेले में लगने वाले स्टाल में राज्य के वनवासी क्षेत्र में रहने वाले युवा और उद्यमी अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे। वन मेला में वेलनेस उत्पादों में हुए नवाचार को भी दिखाया जाएगा। राज्य में वनोत्पाद से होने वाला कारोबार करीब 1500 करोड़ रुपए का है। राष्ट्रीय वन मेला के जरिए इसके अंतर्राष्ट्रीय चेन को विकसित कर करीब 3000 करोड़ के कारोबार का लक्ष्य बनाया जाएगा एक ही जगह तुलसी-आंवला से लेकर महुआ और करंज तक के उत्पाद होंगे वन मेला में लघु वन उपज और इसके औषधीय महत्व को दिखाने वाले स्टाल होंगे। एक ही जगह लोगों को सौंदर्य प्रसाधन से लेकर स्वास्थ्य में उपयोगी शहद भी मिलेगा। मेले में आने वाले विशेषज्ञों का अलग से सत्र भी होगा, जिसमें युवाओं को उत्पाद बनाने और इसकी मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा हरित उद्योग को बढ़ावा देने और इसमें युवा के साथ महिलाओं की खास भागीदारी की योजना पर मेले में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया के मेले का मुख्य उद्देश्य ही ग्रामीणों और वनवासियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और उनकी आमदनी बढ़ाना है। बाहर के उद्यमी और स्टार्टअप को प्रोत्साहन राष्ट्रीय वन मेले में स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने वाले बैंक, वित्तीय संस्थाओं को भी आमंत्रित किया गया है। इसमें वनोत्पाद पर काम करने वाले राज्य से बाहर के उद्यमियों को भी बुलाया गया है। राज्य में वनोत्पाद के क्षेत्र में रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था के नए स्रोत बनाने के लिए मेले में राज्य सरकार की तैयारियां भी दिखाई जाएंगी।  

एडीए बोर्ड बैठक: जूता मंडी और ग्रेटर आगरा में तय हुई नई दरें, बड़े फैसले पास

आगरा आगरा विकास प्राधिकरण की 152वीं बोर्ड बैठक में बुधवार को ग्रेटर आगरा और जूता मंडी में भूमि की दरों पर मुहर लगाई गई। ग्रेटर आगरा में आवासीय भूखंड 33 हजार रुपये और जूता मंडी में भूतल पर 78 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मिल सकेंगे। इसके अलावा एडीए की सीमा में 98 नए गांवों को भी शामिल किया जाने का फैसला हुआ। मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप की अध्यक्षता में एडीए बोर्ड बैठक में बुधवार को कई अहम फैसले हुए। ग्रेटर आगरा और जूता मंडी के अलावा ताजनगरी फेज-2 के जर्जर ईडब्ल्यूएस आवासों को गिराने और आवंटियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्णय हुआ। वहीं, इनर रिंग रोड के टोल प्लाजा को मानसून से पहले चालू करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में शहर के विकास, सीमा विस्तार और नई योजनाओं को लेकर कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गए।   बैठक में हुए यह निर्णय….. ग्राम रायपुर-रहनकलां में प्रस्तावित ग्रेटर आगरा योजना में आवासीय भूखंड (प्लॉट) की दर 33 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर होगी। वहीं, ग्रुप हाउसिंग के लिए यह दर आवासीय से डेढ़ गुना लगभग 50 हजार और व्यावसायिक भूखंडों के लिए 66 हजार रुपये वर्ग मीटर होगी। सार्वजनिक सुविधाओं वाले भूखंड आवासीय दर पर ही मिलेंगे। ताजनगरी फेज-2 में प्राधिकरण द्वारा बनाए गए दुर्बल आय वर्ग के भवनों को गिराया जाएगा। आईआईटी रुड़की और पीडब्ल्यूडी की जांच में इन भवनों को जर्जर और खतरनाक घोषित किया गया है। मंडलायुक्त ने निर्देश दिए हैं कि यहां रहने वाले आवंटियों की सहमति लेकर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए और उसके बाद इन जर्जर इमारतों को ध्वस्त कर यहां नई प्लानिंग की जाए। 98 गांव होंगे शामिल, 21 किए जाएंगे बाहर: प्राधिकरण के विकास क्षेत्र का दायरा अब और बढ़ जाएगा। एडीए की सीमा में 98 नए गांवों को शामिल करने के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। वहीं, पहले से अधिसूचित 19 पूरे गांव और 2 आंशिक गांवों को एडीए की सीमा से बाहर किया जाएगा। – मौजा पट्टी पचगई में पीपीपी मॉडल पर एक इंटरनेशनल इंडोर स्टेडियम बनाया जाएगा, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। – खेरिया मोड़ के पास खाली पड़ी नजूल की जमीन को कब्जे में लेकर उसकी बाउंड्री कराई जाएगी। खेल विभाग के साथ मिलकर इसका इस्तेमाल खेल गतिविधियों के लिए होगा। – ककुआ-भांडई आवासीय योजना में कन्वेंशन सेंटर बनाने के लिए एजेंसी से अनुबंध की प्रक्रिया चल रही है। बोर्ड सदस्यों ने दिए ये सुझाव – बैठक में बोर्ड सदस्य शिवशंकर शर्मा और नागेंद्र दुबे गामा ने कई जनहित के मुद्दे उठाए। प्राधिकरण में नक्शा (मानचित्र) आवेदन के बाद हर हाल में एक महीने के भीतर उसका निस्तारण किया जाए। – ऐसी कॉलोनियां जो सहकारी आवास समितियों ने पास कराई थीं, लेकिन अब समितियां वजूद में नहीं हैं, उनका सर्वे कर उन्हें नगर निगम को हस्तांतरित किया जाएगा। – पुराने शहर में एएसआई संरक्षित स्मारकों से 100 मीटर के बाहर एनओसी की बाध्यता खत्म करने के मुद्दे पर भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मानसून से पहले शुरू होगा टोल प्लाजा मंडलायुक्त ने इनर रिंग रोड के दूसरे चरण में बन रहे नए टोल प्लाजा की भी समीक्षा की। इसका 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। उन्होंने एनएचएआई से एमओयू कर बारिश से पहले हर हाल में गुणवत्ता के साथ इसका निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल, एडीए उपाध्यक्ष एम. अरुन्मौली, सचिव संजय कुमार, मुख्य अभियंता संजीव कुमार आदि मौजूद रहे।  

दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री घोटालों पर कार्रवाई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम

पटना  बिहार में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े, दाखिल-खारिज में गड़बड़ी और अंचल कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार पर अब सरकार सख्त हो गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के अधीन एक विशेष सेल का गठन किया है, जो जमीन विवाद, फर्जी दस्तावेज, अवैध रजिस्ट्री और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करेगा। इस फैसले के बाद जमीन माफियाओं और बिचौलियों में हड़कंप मचा हुआ है। अब सीधे होगी जांच और कार्रवाई सरकार की ओर से बनाए गए इस विशेष सेल में DSP से लेकर इंस्पेक्टर, SI और ASI स्तर तक के अधिकारियों की तैनाती की गई है। यानी यह टीम सिर्फ शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मौके पर जांच, छापेमारी और कानूनी कार्रवाई भी करेगी। बताया जा रहा है कि कई जिलों में सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री, फर्जी जमाबंदी और गलत तरीके से दाखिल-खारिज कराने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं मामलों को देखते हुए सरकार ने यह सख्त फैसला लिया है। अंचल कार्यालयों में फैली घूसखोरी पर शिकंजा राज्य में लंबे समय से लोगों की शिकायत रही है कि जमीन की रजिस्ट्री, म्यूटेशन, रसीद कटाने और दाखिल-खारिज के लिए कार्यालयों में रिश्वत देनी पड़ती है। कई जगह बिचौलियों का नेटवर्क भी सक्रिय बताया जाता रहा है। अब सरकार का दावा है कि नए सेल की निगरानी से ऐसे मामलों पर लगाम लगेगी। भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। यह विशेष सेल आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU के अधीन काम करेगा। EOU पहले से ही आर्थिक अपराध और बड़े घोटालों की जांच के लिए जानी जाती है। ऐसे में जमीन से जुड़े मामलों में भी तकनीकी जांच और डिजिटल निगरानी को मजबूत किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और जमीन कब्जाने वाले नेटवर्क का खुलासा आसान होगा। साथ ही लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आ सकती है। आम लोगों को मिल सकती है बड़ी राहत सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को मिलेगा। खासकर वे लोग जो जमीन के कागजात, दाखिल-खारिज या रजिस्ट्री को लेकर महीनों दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। नई निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद पारदर्शिता बढ़ने और भ्रष्टाचार कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार का यह बड़ा कदम जमीन माफियाओं और भ्रष्ट नेटवर्क पर कितना असर डाल पाता है।

पेड़ों की कटाई पर हरियाणा कोर्ट नाराज, गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट पर उठाए बड़े सवाल

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गुरुग्राम मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई स्वीकार नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी 'यदि सांस लेने के लिए ऑक्सीजन ही नहीं होगी तो वर्ल्ड बैंक भी आपकी मदद नहीं करेगा।' दरअसल गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (जीएमआरएल) की ओर से मेट्रो विस्तार परियोजना के लिए 489 और पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई थी। कंपनी ने अदालत को बताया कि इससे पहले करीब 1700 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी जा चुकी है और बदले में 7300 पौधे लगाए गए हैं। जीएमआरएल की ओर से कहा गया कि यह लगभग 28 किलोमीटर लंबी मेट्रो विस्तार परियोजना है, जिसकी लागत 5000 करोड़ रुपये से बढ़कर 7000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। परियोजना के लिए वर्ल्ड बैंक से वित्तीय सहायता पर बातचीत चल रही है और यदि समय पर कार्य नहीं हुआ तो यह सहायता प्रभावित हो सकती है। कंपनी ने दलील दी कि गुरुग्राम में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को देखते हुए यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है। हालांकि अदालत ने पूछा कि जब मेट्रो का ट्रैक एलिवेटेड है और पिलर सीमित जगह लेते हैं तो फिर इतने अधिक पेड़ काटने की जरूरत क्यों है। अदालत ने निर्देश दिया कि न्यूनतम संख्या में ही पेड़ों की कटाई की जाए। साथ ही संबंधित डीएफओ को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए कि 489 प्रस्तावित पेड़ों में से जितने अधिक संभव हों, उन्हें बचाया जाए ताकि क्षेत्र में हरित आवरण बना रहे। जीएमआरएल की ओर से कहा गया कि मेट्रो के एलिवेटेड स्टेशन, पिलर और डिपो निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई जरूरी है। कंपनी ने दावा किया कि वह “एक के बदले दस” के अनुपात में पौधारोपण कर रही है और अब तक 7300 पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनकी “100 प्रतिशत सर्वाइवल रेट” है। यह पौधा रोपण केएमपी हाईवे के पास लगभग 21 किलोमीटर दूर किया गया है। इस पर हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि अदालत पहले ही कह चुकी है कि प्रतिपूरक पौधरोपण यथासंभव पांच किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल पौधे लगाने का दावा पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि शहर को “कंक्रीट जंगल” बनने से बचाया जाए। हालांकि अदालत ने परियोजना के राष्ट्रीय महत्व और सार्वजनिक हित को देखते हुए सशर्त राहत देते हुए 489 पेड़ों की कटाई पर लगी रोक में आंशिक ढील दे दी। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया कि न्यूनतम संख्या में ही पेड़ काटे जाएं और जिन पेड़ों को बचाया जा सकता है, उन्हें हर हाल में संरक्षित किया जाए। अदालत ने जीएमआरएल को पहले किए गए वनीकरण कार्य की मासिक सर्वाइवल रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट में कोई कमी पाई गई या समय पर रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई तो मामले को स्वत सूचीबद्ध कर सुनवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इन्वेस्ट यूपी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों संग बैठक की। इस दौरान उन्होंने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी 5.0) की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री जी को बताया कि 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जीबीसी 5.0 के अंतर्गत हर जनपद में निवेश हो, इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। उन्होंने जनपदों की पर कैपिटा  इनकम बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि इसके लिए मैन्युफेक्चरिंग पावर को बढ़ावा देना आवश्यक है। इस अवसर पर इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों ने विगत दिनों लीड्स 2025 रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को मिले एग्जेम्प्लर अवार्ड को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समर्पित किया। अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने इस पुरस्कार के लिए इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों को बधाई दी।  मुख्यमंत्री के समक्ष जीबीसी के दौरान पूरे आयोजन का विस्तार से ब्योरा प्रस्तुत किया गया। इसमें स्टेज डिजाइन से लेकर पाथवे, एग्जीबिशन लेआउट को भी प्रस्तुत किया गया। एग्जीबिशन को 8 जोन में विभाजित किया गया है। पहला जोन- व्हाई यूपी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के बदले परिदृश्य को विस्तार से दिखाया जाएगा। जोन 2 में इंफ्रास्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन, जोन 3 में डिफेंस व एयरोस्पेस, जोन 4 में ईवी एवं ग्रीन एनर्जी सस्टेनिबिलिटी, जोन-5 में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफेक्चरिंग, जोन-6 में टेक्सटाइल्स, जोन-7 में टूरिज्म तथा जोन-8 में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में यूपी में आए सार्थक बदलाव को विस्तार से प्रदर्शित किया जाएगा।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर में भूमि की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके सापेक्ष हमें भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देना होगा। इसके अलावा उन प्रोजेक्ट्स में, जहां वर्षों पूर्व भूमि आवंटित की गई, लेकिन अब तक निवेश नहीं हुआ है। ऐसे प्रोजेक्ट्स के बारे में भी अद्यतन जानकारी हासिल की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण विषय एफडीआई को आमंत्रित करना है। इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रयास करने होंगे। इसके साथ ही पब्लिक से जुड़े मुद्दे हमारी प्राथमिकता में होने चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि एमओयू करते समय संस्थानों की पूरी पड़ताल/जानकारी अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। निवेशकों से जितना अच्छा व्यवहार होगा, समय से उनकी समस्याओं का निस्तारण करेंगे तो वह प्रदेश के लिए ब्रांड अंबेस्डर की तरह कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री जी ने लैंडबैंक बढ़ाने पर जोर दिया। इनवेस्टमेंट पर दिए जाने वाले इंसेंटिव्स को इवेंट बनाकर निवेशकों का सम्मान करें और उनका मनोबल बढ़ाएं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक औद्योगिक राज्य की छवि से आगे बढ़कर रक्षा निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का उभरता हुआ राष्ट्रीय हब बन रहा है।  मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत होने वाले उत्तर प्रदेश रक्षा व एफडीआई कॉन्क्लेव 2026 का प्रस्तुतिकरण भी किया गया। बताया गया कि “उत्तर प्रदेश रक्षा और एफडीआई कॉन्क्लेव 2026” प्रदेश की नई औद्योगिक रणनीति का बड़ा मंच साबित होगा, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) में रक्षा एवं एयरोस्पेस उद्योगों को आकर्षित करना, वैश्विक निवेशकों को जोड़ना और उद्योग, सरकार तथा रक्षा संस्थानों के बीच समन्वित इकोसिस्टम विकसित करना है।  कॉन्क्लेव लखनऊ में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें रक्षा मंत्रालय, डीपीएसयू, वैश्विक OEMs, रक्षा विशेषज्ञ, MSMEs और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाया जाएगा। एजेंडा में उत्तर प्रदेश की रक्षा विनिर्माण क्षमता, एयरोस्पेस निवेश, रोजगार प्रोत्साहन नीति 2024, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डीपीएसयू की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत पैनल चर्चाएं प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री जी और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के संबोधन के साथ बी2जी और बी 2बी इंटरैक्शन भी आयोजित किए जाने की योजना है।   कॉन्क्लेव के अपेक्षित परिणामों में निवेश समझौते (एमओयू), कॉरिडोर विस्तार का रोडमैप, टेस्टिंग एवं सर्टिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, उद्योग-सरकार साझेदारी और निवेशकों को स्पष्ट पॉलिसी सपोर्ट शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं बल्कि यूपी में एक दीर्घकालिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है।  प्रस्तुतिकरण में उत्तर प्रदेश की रणनीतिक ताकतों को विस्तार से रेखांकित किया गया है। इसमें बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, कुशल कार्यबल, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, अनुसंधान एवं विकास सहयोग और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को प्रमुख आधार बताया गया। साथ ही डीआरडीओ, एचएएल, बीईएल, बोइंग, एयरबस, टाटा, अदाणी जैसी संस्थाओं और कंपनियों की संभावित भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यूपी अब रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण के लिए तेजी से पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री को इन्वेस्ट यूपी की विभिन्न डेस्क के कामकाज से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेस्क उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावी निवेश क्षेत्रों में शामिल है। इस डेस्क के अंतर्गत 8,050 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आवेदन प्राप्त हुए हैं। ऑटोमोबाइल डेस्क में 722 करोड़ रुपये के निवेश आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। जीसीसी डेस्क के अंतर्गत लगभग 2,487 करोड़, स्टील एंड सीमेंट डेस्क में लगभग 12,232 करोड़, टेक्सटाइल्स डेस्क में लगभग 1,321 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।  बैठक में कंट्री डेस्क के कामकाज की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री को बताया गया कि जापान से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये, सिंगापुर से 40 हजार करोड़ रुपये, जर्मनी और यूके से 5 हजार करोड़ रुपये, ताइवान से 3 हजार करोड़ रुपये, यूएई से 2,074 करोड़ रुपये और दक्षिण कोरिया से 1,600 करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। बताया गया कि सिंगापुर और जापान बिजनेस मिशन ट्रिप भी अगस्त में प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने इन मिशन ट्रिप्स को अच्छे तरीके से संपन्न करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य इन मिशन ट्रिप्स के जरिए उत्तर प्रदेश को एशिया के बड़े विनिर्माण और टेक्नोलॉजी निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के 86वें सम्मेलन में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी, 45 करोड़ की परियोजनाओं को मिली स्वीकृति

नवा रायपुर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का 86वाँ मंडल सम्मेलन बुधवार को नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंडल मुख्यालय में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने की। बैठक में प्रदेशभर में आवासीय एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। सम्मेलन में लगभग 45 करोड़ रुपये की विभिन्न निर्माण परियोजनाओं को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि रायपुर जिले के तिल्दा स्थित दीनदयाल आवास कॉलोनी, कोहका में व्यवसायिक सह आवासीय प्रकोष्ठ भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत 76 आवासीय एवं व्यावसायिक भवन बनाए जाएंगे, जिसकी अनुमानित लागत 10.37 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसी प्रकार स्ववित्तीय अटल विहार योजना के अंतर्गत जशपुर जिले के गिनाबहार क्षेत्र में 97 आवासीय भवनों के निर्माण एवं 7 एकड़ भूमि विकास कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें 6 एमआईजी, 64 एलआईजी और 27 ईडब्ल्यूएस भवन शामिल हैं। इस परियोजना की अनुमानित लागत 17.51 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, मुंगेली जिले के सारधा (लोरमी) क्षेत्र में स्ववित्तीय योजना के तहत 200 ईडब्ल्यूएस भवनों के निर्माण और 5 एकड़ भूमि के बाह्य विकास कार्य को भी मंजूरी मिली। इस परियोजना पर लगभग 16.94 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सम्मेलन में निर्माण कार्यों में जीएसटी भुगतान प्रणाली और रॉयल्टी क्लीयरेंस प्रमाण पत्र की वर्तमान व्यवस्था में एकरूपता लाने के लिए समान मानक प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत सीधी भर्ती में दिव्यांगजनों के आरक्षण संबंधी पदों के चिन्हांकन को समाज कल्याण विभाग की 25 फरवरी 2026 की अधिसूचना के अनुरूप लागू रखने का निर्णय भी लिया गया। मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को राज्य शासन के कर्मचारियों के अनुरूप पुनरीक्षित महंगाई भत्ता देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। साथ ही क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन और रख-रखाव के लिए पीपीपी मोड पर एजेंसी नियुक्त करने हेतु निविदा प्रपत्र एवं लाइसेंस अनुबंध प्रारूप का अनुमोदन किया गया। सम्मेलन में यह जानकारी भी दी गई कि मंडल द्वारा वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में करीब 317 करोड़ रुपये मूल्य की 1647 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। बैठक में मंडल आयुक्त अवनीश कुमार शरण, आवास एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव डी.एस. भारद्वाज, लोक निर्माण विभाग के प्रतिनिधि जी.आर. रावटे, वित्त विभाग के प्रतिनिधि निखिल अग्रवाल तथा हुडको के प्रतिनिधि हितेश बरोट सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पंजाब में डबल हीट अटैक से लोग परेशान, दिन-रात बढ़ी गर्म हवाओं की मार

चंडीगढ़. चंडीगढ़. पिछले 4 दिनों से रोजाना बढ़ रहा तापमान अब लोगों के लिए परेशानी बन गया है। लगातार बढ़ रहा तापमान बुधवार को मई महीने में चंडीगढ़ में 5वां सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। चंडीगढ़ में पारा 44 डिग्री को पार कर 44.4 डिग्री पर पहुंच गया। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक लू ने लोगों से घरों, ऑफिस और दुकानों से बाहर निकलने से बचने की अपील की है। दोपहर ही नहीं, रात में भी गर्मी का असर महसूस हो रहा है, क्योंकि पारा 25 डिग्री से नीचे नहीं जाने वाला है। मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी राहत नहीं मिलने वाली है क्योंकि तापमान लगातार बढ़ता रहेगा। सुबह 10 बजे ही 40 डिग्री, 3 घंटे तक 43 से ऊपर तापमान बुधवार को सुबह 10 बजे ही तापमान 40 डिग्री को पार कर गया था। दोपहर 1 बजे तापमान 43 डिग्री को पार कर गया और दोपहर 2:45 बजे तापमान 44.4 डिग्री तक पहुंच गया। शाम 4 बजे के बाद ही पारा 43 डिग्री से नीचे गिरने लगा। जानें आने वाले दिनों में कैसे रहेंगे हालात 19 मई- फाजिल्का, मुक्तसर, फरीदकोट, बठिंडा और मानसा जिलों में लू का यलो अलर्ट रहेगा। इन जिलों में दिन के समय तेज गर्म हवाएं चलने की संभावना है। 20 मई- लू का असर और बढ़ सकता है। इस दिन अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर, फिरोजपुर, फाजिल्का, मुक्तसर, फरीदकोट, मोगा, बठिंडा, मानसा, बरनाला, संगरूर, लुधियाना, जालंधर, कपूरथला, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली और पटियाला सहित अधिकांश जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। 21 मई- पंजाब के ज्यादातर हिस्सों में गर्म हवाओं का असर बना रहेगा। अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर, मोहाली, पटियाला, लुधियाना, मोगा, बठिंडा, मानसा, संगरूर, फिरोजपुर, फरीदकोट और फाजिल्का जिलों में लू का यलो अलर्ट रहेगा। 22 मई- राहत मिलने के आसार कम दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग ने राज्य के अधिकतर जिलों में लू की स्थिति बने रहने की संभावना जताई है। खासकर सीमावर्ती और मालवा क्षेत्र के जिलों में गर्मी ज्यादा परेशान कर सकती है। लू से रखें खुद का ध्यान विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण बिजली की मांग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है।

धमतरी हादसे का LIVE VIDEO वायरल, पिकअप की चपेट में आने से युवक की मौत

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आज एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है, जहां एक बाइक सवार युवक तेज रफ्तार पिकअप के नीचे आ गया। इस घटना में युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जिसका वीडियो भी सामने आया है। यह घटना मगरलोड थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, मृतक की पहचान यशवंत निषाद के रूप में हुई है, जो कि अमलीडीह का रहने वाला था। गुरुवार सुबह 11 बजे वो मगरलोड थाना क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी अचानक बाइक से गिर गया और पिकअप ने उसे कुचल दिया। इस हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी आया सामने घटना का सीसीटीवी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि किस तरह से युवक हादसे का शिकार हुआ। वीडियो में दिख रहा है कि युवक अचानक चलती बाइक के साथ गिर गया और बाजू से गुजर रहे पिकअप ने उसके सिर को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरु कर दी है। 

डॉक्टरों की हड़ताल खत्म: सरकार-IMA बैठक में बनी सहमति, नई SOP 10 दिन में

जयपुर राजस्थान के लाखों सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और आम मरीजों के लिए गुरुवार की सुबह राहत की खबर लेकर आई है. पिछले कई दिनों से चल रहा मेडिकल गतिरोध अब पूरी तरह खत्म हो गया है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) राजस्थान और अन्य चिकित्सा संगठनों ने राज्य सरकार के साथ हुई एक हाई-लेवल बैठक के बाद राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के बहिष्कार को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया है. इस फैसले के बाद प्रदेश के सभी प्राइवेट अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में आरजीएचएस (RGHS) के तहत मिलने वाली मुफ्त इलाज और ऑपरेशन की सुविधाएं दोबारा शुरू हो गई हैं. स्वास्थ्य मंत्री की बैठक में बनी बात बुधवार देर शाम डॉक्टरों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने सूबे के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा और चिकित्सा विभाग की प्रधान सचिव गायत्री राठौड़ के साथ सचिवालय में लंबी बैठक की. बैठक में डॉक्टरों ने आरजीएचएस स्कीम के नियमों में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और अस्पतालों के करोड़ों रुपये के पेंडिंग पेमेंट्स का मुद्दा उठाया. डॉक्टरों की दलीलों को सुनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने तुरंत एक्शन लिया और अफसरों को दो-टूक निर्देश जारी किए. 10 दिन में बदलेंगे नियम, जारी होगी नई SOP आईएमए राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा और सचिव डॉ. एनके अग्रवाल ने बताया कि सरकार का रुख बेहद सकारात्मक रहा है. स्वास्थ्य मंत्री ने आरजीएचएस प्रशासन को सख्त आदेश दिया है कि डॉक्टरों द्वारा सौंपे गए सुझावों को शामिल करते हुए अगले 10 दिनों के भीतर योजना की नई और संशोधित गाइडलाइन जारी की जाए. इसके अलावा, नियमों को आसान बनाने और क्लेम की कड़ियों को पारदर्शी रखने के लिए एक जॉइंट कमेटी भी बनाई जाएगी, जिसमें आरजीएचएस अधिकारियों के साथ-साथ आईएमए के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. अस्पतालों को मिलेगा बकाया पैसा, प्राइवेट एम्बुलेंस पर कड़ाई बैठक में सरकार ने डॉक्टरों को लिखित आश्वासन दिया है कि निजी अस्पतालों का जितना भी जायज बकाया पैसा अटका हुआ है, उसे जल्द से जल्द बजट जारी करके क्लियर किया जाएगा. साथ ही, भविष्य के पेमेंट्स के लिए एक तय टाइमलाइन बनाई जाएगी ताकि अस्पतालों को बार-बार चक्कर न काटने पड़ें. सरकार के इस ठोस कदम के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर तुरंत काम पर लौटने का ऐलान कर दिया. अब किसी भी मरीज को प्राइवेट अस्पतालों से बिना इलाज के खाली हाथ नहीं लौटना पड़ेगा.

पश्चिमी सिंहभूम में माओवादी नेटवर्क पर बड़ा असर, कई सरेंडर

गुवा पश्चिमी सिंहभूम जिले के गोइलकेरा और सारंडा क्षेत्र में कभी माओवादी संगठनों का गहरा प्रभाव था. इन्हीं जंगलों से कई ऐसे नाम उभरे, जिन्होंने बाद में संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं. इनमें सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल, गादी मुण्डा उर्फ गुलशन, नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा और सुलेमान हांसदा जैसे नाम शामिल हैं. कभी गरीबी और अभाव में जीवन बिताने वाले ये युवक बाद में माओवादी संगठनों के सक्रिय कमांडर बन गए. मजदूरी से माओवादी कमांडर बनने तक का सफर गोइलकेरा क्षेत्र का रहने वाला सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल सामान्य आदिवासी परिवार से जुड़ा था. ग्रामीणों के अनुसार उसका बचपन गरीबी, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच बीता. शुरुआती दिनों में वह मजदूरी और जंगल आधारित काम करके परिवार चलाता था. धीरे-धीरे वह इलाके में सक्रिय माओवादी संगठन के संपर्क में आया. स्थानीय युवाओं को पुलिस कार्रवाई, विस्थापन और सरकारी उपेक्षा का हवाला देकर संगठन से जोड़ा जाता था. सागेन भी इसी प्रचार से प्रभावित हुआ और बाद में हथियारबंद दस्ते का हिस्सा बन गया. समय के साथ वह माओवादी संगठन का विशेष क्षेत्र समिति सदस्य बना. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ 123 मामले दर्ज हैं और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था. लगातार सुरक्षा अभियानों और संगठन की कमजोर स्थिति के बाद उसने आत्मसमर्पण का फैसला लिया. गादी मुण्डा बना एरिया कमांडर रांची जिले के बुंडू क्षेत्र का निवासी गादी मुण्डा उर्फ गुलशन भी गरीब ग्रामीण परिवार से जुड़ा था. युवावस्था में रोजगार और स्थायी आय की कमी के कारण वह उग्रवादी नेटवर्क के संपर्क में आया. शुरुआत में उसने संगठन के लिए संदेश पहुंचाने और ग्रामीण नेटवर्क तैयार करने का काम किया. बाद में वह हथियारबंद दस्ते में शामिल हो गया और धीरे-धीरे एरिया कमांडर के पद तक पहुंच गया. पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ 48 मामले दर्ज हैं. उस पर भी पांच लाख रुपये का इनाम था. जंगलों में लगातार चल रहे अभियान, सुरक्षा कैंपों की स्थापना और संगठन के भीतर बढ़ते अविश्वास के कारण उसका प्रभाव कमजोर पड़ गया. अंततः उसने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया. नागेंद्र मुण्डा रहा सक्रिय माओवादी चेहरा खूंटी जिले के अड़की क्षेत्र का निवासी नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा उर्फ मुखिया लंबे समय तक सक्रिय माओवादी कमांडर रहा. ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े नागेंद्र पर शुरुआती दिनों में उग्रवादी विचारधारा का प्रभाव पड़ा. संगठन ने उसे हथियार प्रशिक्षण दिया और जंगल अभियानों में शामिल किया. धीरे-धीरे वह संगठन का भरोसेमंद सदस्य बन गया. पुलिस के अनुसार वह पुलिस कैंपों पर हमले, विस्फोट और हथियार लूट जैसी घटनाओं में शामिल रहा. उसके खिलाफ 38 मामले दर्ज थे और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था. लगातार घेराबंदी, जंगलों में नए सुरक्षा कैंप और सप्लाई नेटवर्क टूटने के कारण उसकी गतिविधियां कमजोर हो गईं. इसके बाद उसने आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन में लौटने का फैसला लिया. सुलेमान हांसदा ने भी छोड़ा हथियार सुलेमान हांसदा उर्फ सुनीया हांसदा पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा क्षेत्र के हतनाबुरू गांव का निवासी है. आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े सुलेमान को स्थानीय माओवादी नेटवर्क ने अपने साथ जोड़ लिया था. शुरुआत में वह जंगल के रास्तों की जानकारी देने, राशन पहुंचाने और सूचनाएं उपलब्ध कराने का काम करता था. बाद में वह सक्रिय दस्ते का हिस्सा बन गया. उसके खिलाफ 13 मामले दर्ज हैं और उस पर पांच लाख रुपये का इनाम था. हाल के वर्षों में सारंडा क्षेत्र में लगातार पुलिस और सीआरपीएफ अभियान चलाए गए. सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी और संगठन की कमजोर होती स्थिति के बीच सुलेमान ने भी हथियार छोड़ने का फैसला लिया. पुलिस द्वारा उसके परिजनों को संरक्षण में लेकर रांची भेजे जाने के बाद उसके आत्मसमर्पण की प्रक्रिया तेज हुई.