samacharsecretary.com

भारत-अमेरिका ट्रेड समझौता जल्द हो सकता है फाइनल, सर्जियो गोर का बड़ा बयान

नई दिल्ली  ईरान युद्ध और तेल संकट के बीच भारत के लिए एक अच्‍छी खबर आ रही है. पिछले करीब एक साल से अटकी अमे‍रिकी ट्रेड डील के फाइनल होने को लेकर उम्‍मीदें अब बढ़ गई हैं. अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों या महीने में भारत-अमेरिका ट्रेड डील को पूरा किया जा सकता है. दोनों देशों के बीच इस डील को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है और अब इस पर अंतिम फैसला करने का वक्‍त आ गया है।  भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है. पिछले महीने भारत का एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन गया था और अब अगले महीने अमेरिका की टीम दिल्ली आएगी, ताकि बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके. सर्जियो गोर ने कहा कि इस डील पर बातचीत शुरू हुए करीब डेढ़ साल हो चुके हैं, लेकिन बड़े व्यापार समझौतों में समय लगता है. फिलहाल अब ऐसा लग रहा है कि जल्‍द ही दोनों देशों की ट्रेड डील को अंतिम मुकाम तक पहुंचाया जा सकेगा।  दिल्ली में अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सालाना शिखर सम्मेलन में बोलते हुए, गोर ने विश्वास जताया कि यह समझौता आने वाले हफ्तों और महीनों में पूरा हो जाएगा. उन्‍होंने कहा कि व्यापार डेढ़ साल से चल रहा है, लेकिन अगर तुलना करें तो यूरोपीय संघ को इसमें लगभग 19 साल लगे थे. हमें विश्वास है कि आने वाले हफ्तों और महीनों में यह ट्रेड डील अंतिम रूप ले लेगा।  इस समझौते का क्‍या होगा फायदा  सर्जियो गोर ने बताया कि राष्‍ट्रपति ट्रंप का टारगेट द्विपक्षीय व्यापार को इस तरह से आसान बनाना है, जिससे अमेरिकी कारोबारियों और वर्कर्स के लिए लाभकारी अवसर पैदा हों. हमारा मौजूदा अंतरिम व्‍यापार समझौता अंतिम रूप देने के लिए विचाराधीन है, जिससे दोनों देशों के लिए तरक्‍की के दरवाजे खुलेंगे।  उन्‍होंने कहा कि हम इस डील को फाइनल करने के लिए उत्‍सुक हैं, जिससे मार्केट पहुंच का विस्‍तार होगा, बाधाएं कम होंगी और दोनों देशों के व्‍यवसायों के लिए ज्‍यादा निश्चितता पैदा होगी. अगर यह डील सही ढंग से होती है तो यह सप्‍लाई चेन को मजबूत करेगा, नए निवेशों को बढ़ावा देगा और समावेशी विकास को गति देगा. जिससे उद्योगों, श्रमिकों और अर्थव्यवस्थाओं को बड़ा लाभ होगा।  दोनों देशों के बीच बातचीत जारी  अंतरिम समझौते के बारीक पहलुओं पर चर्चा करने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल पिछले महीने वाशिंगटन गया था. अब उम्मीद है कि तकनीकी चर्चाओं के अगले दौर के लिए अमेरिकी  प्रतिनिधिमंडल अगले महीने भारत का दौरा करेगा. इसी शिखर सम्मेलन के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आगामी अमेरिकी दौरे की पुष्टि की और राजदूत के समय-सीमा संबंधी आशावाद का समर्थन किया।  23 मई को मार्को रुबियो आ रहे भारत  जब उनसे पूछा गया कि क्या द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए अमेरिका के मुख्य व्यापार वार्ताकार विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ उनकी आगामी भारत यात्रा पर जाएंगे, तो गोयल ने स्पष्ट किया कि वह उनके साथ नहीं आ रहे हैं, लेकिन अगले महीने उनके आने की कुछ योजना है. रुबियो 23 मई से भारत की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू करने वाले हैं, जो देश की उनकी पहली यात्रा होगी और इसमें व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग शामिल होगा। 

चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में 18 जून को उपचुनाव

नई दिल्ली राज्यसभा की 24 खाली हो रही सीटों पर चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया गया है. चुनाव आयोग ने आज द्विवार्षिक चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. दस राज्यों की 24 सीटों पर 18 जून को मतदान होगा. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह रिटायर हो रहे हैं. वहीं, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं।  18 जून को होगी वोटिंग  चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के मुताबिक एक जून को नोटिफिकेशन जारी होगा. 8 जून तक नामांकन भरा जा सकेगा. 9 जून को नामांकन की जांच होगी. 11 जून को नामांकन वापस लिया जा सकेगा. अगर जरूरी हुई तो 18 जून को वोटिंग होगी. वोटिंग सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होगी. 18 जून को मतगणना होगी और 20 जून तक राज्यसभा का चुनाव पूरा कर लिया जाएगा।  11 बीजेपी से और 4 कांग्रेस के सांसद हो रहे रिटायर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन, और रवनीत सिंह बिट्टू आदि का कार्यकाल हो रहा है समाप्त।  कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात से चार-चार सीटें होंगी खाली हो रही हैं. राजस्थान और मध्य प्रदेश से तीन-तीन सीटें खाली होने जा रही हैं. मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और झारखंड से एक-एक सीट खाली होंगी . इनके अलावा झारखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र से एक-एक सीटों पर उपचुनाव भी हो सकता है. 22 रिटायर होने वाले सांसदों में 11 बीजेपी के हैं जबकि कांग्रेस के चार सांसद हैं।  चुनाव आयोग ने साफ निर्देश दिया है कि मतदान के दौरान केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए गए विशेष बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा. किसी अन्य पेन के उपयोग की अनुमति नहीं होगी. साथ ही चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी ताकि मतदान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जा सके।  राजनीतिक तौर पर इन चुनावों को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा में संख्या बल कई बड़े विधेयकों और राजनीतिक रणनीतियों पर असर डालता है. ऐसे में आने वाले दिनों में विभिन्न दल उम्मीदवारों के चयन और समर्थन जुटाने की कवायद तेज कर सकते हैं।  किस राज्य की कितनी सीटों पर चुनाव? आंध्र प्रदेश: 4 गुजरात: 4 कर्नाटक: 4 मध्य प्रदेश: 3 राजस्थान: 3 झारखंड: 2 मणिपुर: 1 मेघालय: 1 अरुणाचल प्रदेश : मिजोरम :1 नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 8 जून है. केंद्रीय मंत्रियों पर तलवार लटकी केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. इसी तरह अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन मंत्रालय में राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन मध्य प्रदेश से राज्य सभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल भी 21 जून को समाप्त हो रहा है. माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रवनीत सिंह को पार्टी दोबारा राज्य सभा भेज सकती है।  वहीं कूरियन को केरल चुनाव के मद्देनजर सरकार में लाया गया था. अब देखना होगा कि बीजेपी उन्हें फिर से राज्य सभा भेजती है या नहीं. केंद्रीय मंत्रिपरिषद में इन दोनों मंत्रियों का बना रहना इस बात पर निर्भर करेगा कि वे फिर से राज्य सभा में आते हैं या नहीं।  खरगे और दिग्विजय का क्या होगा? कर्नाटक से संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को तीन सीटें मिल सकती हैं. इनमें से एक पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का चुना जाना तय माना जा रहा है. वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस को एक सीट जीतने के लिए जोर लगाना पड़ेगा. हालांकि उसके पास केवल छह सरप्लस वोट हैं. ऐसे में किसी वरिष्ठ नेता पर दांव लगाया जा सकता है. खुद दिग्विजय सिंह फिर से राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं. राज्य में दो सीटें बीजेपी और एक कांग्रेस को मिल सकती है. बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन भी दौड़ में हैं. राजस्थान में बीजेपी को दो और कांग्रेस को एक सीट मिल सकती है। बीजेपी की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा का नाम चल रहा है।  गुजरात में कांग्रेस जीरो कांग्रेस को बड़ा झटका गुजरात में लगने जा रहा है. अभी गुजरात से राज्यसभा की 11 सीटों में कांग्रेस के केवल एक ही सदस्य हैं. शक्तिसिंह गोहिल विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे हैं. वे 21 जून को रिटायर हो रहे हैं. वर्तमान में एक सीट जीतने के लिए 46 वोट चाहिए जबकि कांग्रेस के पास केवल 12 विधायक हैं. यानी कांग्रेस का गुजरात से अपना कोई भी उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव में नहीं जीत सकता. यह पहली बार होगा जब गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य से कांग्रेस का राज्य सभा में कोई भी सदस्य नहीं होगा. हालांकि झारखंड में कांग्रेस की उम्मीदें सत्तारूढ़ जेएमएम पर टिकी हैं. पार्टी को उम्मीद है कि जेएमएम यह सीट कांग्रेस को दे देगा. इस चुनाव में एनडीए की स्थिति वर्तमान स्तर पर ही रहने की संभावना है. हालांकि टीडीपी की सीटें बढ़ सकती हैं. बीजेपी के अभी राज्य सभा में 113 सांसद हैं और एनडीए के 148 सांसद हैं. इस दौर के चुनाव के बाद बीजेपी की संख्या कमोबेश इसी के आसपास रहेगा।  बीजेपी के 11 सांसद हो रहे रिटायर केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कूरियन और रवनीत सिंह बिट्टू समेत 11 बीजेपी सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसके अलावा कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी कार्यकाल समाप्त होने को है। ऐसे में कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश में चार-चार सीटें खाली हो रही हैं। झारखँड, तमिलनाडुऔर महाराष्ट्र की एक-एक सीटों पर उपचुनाव हो सकताहै। 11 सांसदों में से 11 बीजेपी के और चार कांग्रेस के सांसद रिटायर हो रहे हैं। रवनीत सिंह बिट्टू केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण और रेलवे राज्य मंत्री हैं। 21 जून को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। माना जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए बिट्टू को फिर से राज्यसभा भेजा जा सकता है। फिलहाल वह राजस्थान से सांसद हैं। वहीं जॉर्च कूरियन की वापसी … Read more

भीषण गर्मी में राहत: कोंकण की पारंपरिक ‘फूटी कढ़ी’ बन सकती है नेचुरल कूलर

चिलचिलाती धूप, गर्म हवा के थपेड़े और 45 डिग्री के पार जाता तापमान… देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. घर से बाहर निकलते ही शरीर पसीने से भर जाता है, जिसकी वजह से कुछ ही देर में थकान होने लगती है. धूप गला सुखाकर सारी एनर्जी छीन लेती है. इस तपिश भरे मौसम में लोगों को सिर्फ AC या ठंडा पानी पीने से ही राहत नहीं मिलती है. ऐसे में वो लोग देसी चीजों से शरीर को अंदर से ठंडा रखने की कोशिश करते हैं. अगर आप भी गर्मी से परेशान हैं, तो मशहूर शेफ संजीव कपूर की बताई कोंकण की ट्रेडिशनल ड्रिंक फूटी कढ़ी आपके लिए किसी  नेचुरल कूलर की तरह काम करेगी. शेफ संजीव ने बताया कि पीढ़ियों से कोंकण इलाके में लोग गर्मियों के दौरान इस हल्की खट्टी और रिफ्रेशिंग ड्रिंक को पीते आ रहे हैं. कोकुम से बनने वाली ये देसी ड्रिंक न सिर्फ स्वाद में शानदार होती है, बल्कि शरीर को ठंडा रखने और गर्मी से राहत दिलाने में भी मददगार मानी जाती है. फूटी कढ़ी बनाने के लिए इंग्रेडिएंट्स:     15-20 कोकुम की पंखुड़ियां     2-3 हरी मिर्च बारीक कटी हुई     2-3 बड़े चम्मच ताजा हरा धनिया     1 बड़ा चम्मच चीनी     स्वादानुसार नमक     2 छोटी चम्मच घी     1 छोटी चम्मच राई     आधी छोटी चम्मच हींग बनाने का तरीका:  1. सबसे पहले कोकुम की पंखुड़ियों को एक बाउल में डालें और उसमें 3 कप पानी मिलाकर लगभग 35-40 मिनट के लिए छोड़ दें. 2. अब इस पानी को छान लें. इसमें हरी मिर्च, धनिया, चीनी और नमक डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. 3. एक पैन में घी गर्म करें. उसमें राई डालें. जब राई चटकने लगे तो उसके बाद उसमें हींग डालकर हल्का सा भून लें. 4. इस तड़के को कोकुम वाले मिक्स में डालें और अच्छी तरह मिला लें. 5. अब इसे गिलास में बर्फ डालकर ठंडा-ठंडा सर्व करें. गर्मियों में क्यों फायदेमंद है ये ड्रिंक? 1. कोकुम की तासीर ठंडी मानी जाती है, इसलिए ये गर्मी और लू से राहत दिलाकर शरीर को अंदर से ठंडा रखने में मदद कर सकता है. 2. गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी ड्रिंक्स शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती हैं. 3. फूटी कढ़ी एक बहुत ही हल्की ड्रिंक है और पचाने में आसान होती है. इसे खाने के साथ लेने से पेट को आराम मिल सकता है. 4. तेज गर्मी में होने वाली थकान और सुस्ती को कम करने के लिए भी ये ड्रिंक काफी फायदेमंद मानी जाती है.  

‘संस्कारी बहू’ का बोल्ड अवतार, बिकिनी फोटो में निमृत अहलूवालिया ने बढ़ाया इंटरनेट का पारा

मुंबई  निमृत कौर अहलूवालिया टेलीविजन की लोकप्रिय एक्ट्रेसेस में से एक हैं. टीवी पर वो संस्कारी और सभ्य किरदार निभाने के लिए जानी जाती हैं। इन दिनों एक्ट्रेस फ्लोरिडा में वेकेशन पर हैं, जहां Beach पर फैन्स को उनका बोल्ड अवतार देखने को मिला।  समंदर किनारे निमृत कौर ब्राउन बिकीनी सेट में अपनी बोल्डनेस से पारा हाई करती नजर आईं। एक्ट्रेस बिकिनी में आत्मविश्वासी और स्टाइलिश दिख रही थीं. उन्होंने बिकीनी ब्रा के साथ मैचिंग बॉटम्स पहने थे, जिससे उनका लुक ग्लैमरस लग रहा था।          समुद्री एहसास बढ़ाने के लिए उन्होंने शेल चोकर नेकपीस भी पहना था, जो Beach के मूड से बिल्कुल मेल खा रहा था। लुक पूरा करने के लिए निमृत ने स्टाइलिश ब्राउन हैट भी पहना था, जिससे उनका Beach लुक ट्रेंडी और नैचुरल लग रहा था।          टीवी की संस्कारी बहू को बिकिनी में देखकर फैन्स के होश उड़ गए हैं. एक ने लिखा कि ये तो नहीं सोचा था. दूसरे ने कहा कि मैम गर्मी बढ़ा दी।  बिकिनी पहनकर निमृत ने अपना टोन्ड फिगर भी फ्लॉन्ट किया, जिसे देखकर फैन्स सन्न रह गए. एक ने लिखा कि आपने कितना वजन घटा लिया।  अन्य फैन ने कहा कि UFF… मार ही डाला. कई फैन्स ने फायर इमोजी बनाई. कुछ लोगों ने निमृत को ग्लैमरस बताकर उनकी तारीफ की। एक्ट्रेस के वर्कफ्रंट की बात करें, तो उन्हें टीवी पर छोटी सरदारनी शो के लिए जाना जाता है. वो बिग बॉस 16 का हिस्सा भी बनी थीं. आखिरी बार उन्हें 2022 में खतरा खतरा खतरा शो में देखा गया था. 

नायब सैनी बोले: पंजाब-हरियाणा सिर्फ पड़ोसी नहीं, एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं

 चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने पंजाब और हरियाणा के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों राज्यों के संबंध को सिर्फ पड़ोसी राज्यों का रिश्ता नहीं, बल्कि “नाखून और उंगली” जैसा बताया। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पंजाब की राजनीति को लेकर भी लगातार चर्चा तेज है। एक इंटरव्यू के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पंजाब को करीब से समझने और देखने का मौका मिला है। उन्होंने बताया कि पंजाब ओबीसी मोर्चा का प्रभारी रहते हुए उन्होंने पूरे प्रदेश का दौरा किया और शायद ही कोई ऐसा चुनाव रहा हो, जहां उन्हें जाने का अवसर न मिला हो। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने पंजाब और हरियाणा के सामाजिक व सांस्कृतिक जुड़ाव को बेहद मजबूत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की जमीन एक है, छत एक है और दोनों का सफर भी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “पंजाब-हरियाणा का रिश्ता सामान्य नहीं है, यह नाखून और उंगली का रिश्ता है।” उनके इस बयान को दोनों राज्यों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने राजनीतिक स्तर पर पंजाब की मौजूदा सरकार पर निशाना साधने से भी परहेज नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की सोच आम आदमी पार्टी से अलग है। मुख्यमंत्री का आरोप था कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने आम लोगों को अपमानित करने का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब की जागरूक जनता भ्रष्टाचार में लिप्त आम आदमी पार्टी को बाहर का रास्ता दिखाएगी। साथ ही कहा कि अगर पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है तो सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान हरियाणा की उपलब्धियों का भी जिक्र किया और कहा कि प्रदेश ने खेल, कृषि, उद्योग और विकास के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। वहीं, पंजाब और हरियाणा के रिश्ते पर दिया गया उनका “नाखून और उंगली” वाला बयान अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

चुनाव होंगे समय पर या दिसंबर तक टलेंगे? राजस्थान हाईकोर्ट आज करेगा साफ

 जयपुर राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय (नगर पालिका/नगर निगम) के चुनाव समय पर होंगे या दिसंबर तक के लिए टल जाएंगे, इस पर आज तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है. राज्य सरकार और इलेक्शन कमिशन के चुनाव टालने वाले प्रार्थना पत्र पर राजस्थान हाईकोर्ट आज (22 मई) अपना बड़ा फैसला सुना सकता है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले में बीते 11 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित (Reserve) रख लिया था, जो आज कोर्ट रूम में सुनाया जा सकता है. क्या है पूरा मामला और सरकार क्यों मांग रही है समय? दरअसल, हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को एक साथ 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सख्त आदेश दिए थे कि 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में पंचायत और निकाय चुनाव करा लिए जाएं. हालांकि, भजनलाल सरकार ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाकर इस समय-सीमा में चुनाव कराने को व्यावहारिक रूप से असंभव बताया और दिसंबर 2026 तक का समय मांग लिया. सरकार ने चुनाव टालने के पीछे कोर्ट के सामने प्रशासनिक और व्यावहारिक दलीलों की पूरी लिस्ट रखी थी:- सरकार का तर्क है कि मई-जून में राजस्थान में भयंकर लू (Heatwave) चलती है, जबकि जुलाई से सितंबर तक भारी बारिश और कृषि कार्यों में ग्रामीण मतदाता व्यस्त रहते हैं.  शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 68 हजार से ज्यादा मतदान केंद्र बनेंगे, जिनके लिए 3.4 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल संभव नहीं है. महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि वार्डों के आंतरिक सीमांकन पर दो अलग-अलग फैसलों और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट न आने के कारण आरक्षण तय करने में देरी हुई. 11 मई की सुनवाई में कोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार पिछली सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने सरकार की इन दलीलों पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था- 'सरकार का रवैया ठीक नहीं है और उन्हें चुनाव की तैयारियों के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका है.' जब सरकार ने मौसम और ओबीसी आयोग का हवाला दिया, तो बेंच ने साफ कहा कि आदेश निकायों को लेकर था, तो फिर पंचायत चुनाव क्यों नहीं कराए गए? और ओबीसी आयोग क्या कर रहा है, यह कोर्ट के सामने विषय नहीं है. कोर्ट ने सरकार के 'गर्मी-बरसात' वाले तर्कों को स्वीकार न करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. 'जनता परेशान, सिस्टम बेहाल: विपक्ष हमलावर दूसरी तरफ, पूर्व कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया है. उन्होंने इस मामले में एक अवमानना याचिका (Contempt Petition) भी दायर की है, जिस पर जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच में अगली सुनवाई 26 मई को होनी है. संयम लोढ़ा ने कहा, 'राजस्थान की जनता को उनके वोट देने के संवैधानिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है. चुनाव न होने से पंचायतों और निकायों में भारी अव्यवस्था है, स्थानीय स्तर पर विकास के सारे काम पूरी तरह ठप हैं। लोग परेशान हैं और पूरा सिस्टम बेहाल है.' आज के फैसले पर टिकी सबकी नजरें यदि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की बेंच आज सरकार के प्रार्थना पत्र को खारिज कर देती है, तो सरकार और राज्य चुनाव आयोग को तुरंत चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. वहीं, यदि कोर्ट से राहत मिलती है, तो प्रदेश में स्थानीय सरकार के गठन के लिए जनता को दिसंबर तक का इंतजार करना पड़ेगा.

LAC सुरक्षा को मिलेगी नई ताकत, लखनऊ में बनेगा उत्तरी थिएटर कमांड

लखनऊ चीन पर नजर रखने के लिए लखनऊ में स्थापित मध्य कमांड को ही उत्तरी थिएटर कमांड बनाया जाना तय है। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश के किबिथू तक फैली वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के 3,488 किलोमीटर क्षेत्र की देखरेख की जिम्मेदार होगी। यह चीन के साथ भारत की वास्तविक सीमा है। दो दिन पूर्व सीडीएस अनिल चौहान की लखनऊ यात्रा को इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने सेवानिवृत्त सैन्य अफसरों के साथ थिएटराइजेशन पर गंभीर चर्चा की थी। उम्मीद जताई जा रही है कि तीन प्रस्तावित थिएटर कमांडों की स्थापना 30 मई को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के रूप में जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल समाप्त होने से पहले हो जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार उत्तरी थिएटर कमांड का नेतृत्व एक सेना जनरल करेंगे। उत्तरी मोर्चे पर अधिक जमीनी सैनिकों की आवश्यकता होने की उम्मीद है, इसलिए सेना अधिकारी थिएटर का नेतृत्व कर सकता है। ठोस शुरुआत 2019 में थिएटर कमांड बनाने की आधिकारिक और ठोस शुरुआत 2019 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद बनने और सशस्त्र बलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद हुई। जुलाई 2024 में रक्षा मंत्रालय ने लखनऊ को उत्तरी थिएटर कमांड के आधार के रूप में नामित किया। 4 और 5 सितंबर 2024 को पहला संयुक्त कमांडर सम्मेलन (जेसीसी) लखनऊ में आयोजित किया गया था। उसमें तय हुआ था कि थिएटर कमांड के कमांडर-इन-चीफ और वाइस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, सेना प्रमुखों (जनरल, एयर चीफ मार्शल और एडमिरल) की तरह चार सितारा रैंक के अधिकारी होंगे। थिएटर कमांड के मुख्य चरण कारगिल समीक्षा समिति 1999- कारगिल युद्ध के तुरंत बाद बनी इस समिति ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए 'इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड' की सिफारिश की थी। अंडमान निकोबार कमांड 2001- इस सिफारिश के तहत पहला कदम 2001 में उठाया गया। भारत की एकमात्र त्रि-सेवा कमांड अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थापित की गई। शेकातकर समिति 2016- इस समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में तीनों सेनाओं की एकजुटता और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में थिएटर कमांड बनाने का सुझाव दिया था। सीडीएस की नियुक्ति वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेनाओं को एक साथ लाने की प्रक्रिया को हरी झंडी दी। देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने इन कमांड्स को धरातल पर उतारने की मूल योजना (प्रस्तावित 5 थिएटर कमांड) तैयार की।

वास्तु शास्त्र: तिजोरी रखने की सही दिशा और धन वृद्धि के महत्वपूर्ण नियम

हर व्यक्ति चाहता है कि उसका पर्स पैसों से भरा रहे. तिजोरी में हमेशा धन की वृद्धि होती रहे. लेकिन सभी के साथ ऐसा नहीं होता है. कई लोगों के पास धन प्राप्ति के अवसर ही नहीं होते तो कई के पास धन तो आता है, लेकिन टिकता नहीं है. वहीं, कुछ लोग अपनी मेहनत के अनुसार धन की प्राप्ति न होने से परेशान रहते हैं. तो चलिए जानते हैं कि कौन सी ऐसी दिशाएं हैं जो आपकी तिजोरी और पर्स को हमेशा धन से भरा रखने में आपकी मदद कर सकती हैं. और कौन सी ऐसी दिशाएं हैं जो आपकी जेब खाली करा सकती हैं. धन के लिए मुख्य दिशाएं धन के लिए प्रमुख रूप से तीन दिशाएं महत्वपूर्ण हैं. उत्तर, दक्षिण-पूर्व और पश्चिम दिशा. इन तीनों दिशाओं में यदि आप अपना पैसा या तिजोरी रखने हैं तो धन वृद्धि के लिए अच्छा है. उत्तर दिशा को हमेशा रोशनी से भरा रखना भी धन वृद्धि के लिए बेहतर उपाय है. वहीं, साउथ-ईस्ट दिशा में व्यक्ति को रोज के खर्चे के लिए कुछ पैसे अवश्य रखने चाहिए. धन वृद्धि के लिए पश्चिम दिशा में उत्तर दिशा की तरफ खुलने वाली तिजोरी का होना सबसे बेहतर है. पश्चिम आपकी इच्छा पूर्ति की दिशा है. ज्यादातर अमीर घरों में लोग इन्हीं तीन जगहों पर पैसा या मूल्यवान चीजें रखने के लिए तिजोरी बनवाते हैं. कहां न बनाएं तिजोरी? जहां तिजोरी गलती से भी नहीं बनानी चाहिए वह दिशा साउथ-साउथ-वेस्ट दिशा है. यहां रखा धन न तो सही समय पर आपके काम आएगा और व्यर्थ ही बर्बाद होगा. इसलिए इस दिशा में किसी भी व्यक्ति को तिजोरी या पैसा रखने की गलती नहीं करनी चाहिए.  वेस्ट-नॉर्थ-वेस्ट दिशा में भी कभी तिजोरी न बनाएं. यहां भी तिजोरी या किसी भी प्रकार से धन रखना ठीक नहीं है. तीसरी दिशा ईस्ट-साउथ-ईस्ट दिशा है जहां धन या तिजोरी का होना धन वृद्धि में बाधक बन सकता है.

जहां चलता था भतीजे का दबदबा, वहां TMC के झंडे तक नहीं बचे

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के फलता को तृणमूल कांग्रेस का गढ़ कहा जाता था। यह लोकसभा सांसद और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के संसदीय क्षेत्र में भी आता है। इसकी बड़ी वजह यहां पर जहांगीर खान के प्रभाव को माना जाता था। अब नौबत यह है कि खुद जहांगीर अंत समय में चुनावी मैदान छोड़कर चले गए और नतीजा यह हुआ कि टीएमसी पूर्व सीएम बनर्जी के भवानीपुर के बाद एक और गढ़ गंवाने की कगार पर है। कुछ दिनों में बदले हालात 29 अप्रैल को जब पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान होना था, तो उसमें फलता भी शामिल था। उस दौरान क्षेत्र के हर हिस्से में टीएमसी के झंडे और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद थे। अब कुछ ही दिनों में स्थिति बदल गई है और अब जगह दूसरे दलों के झंडों से लदी हुई है। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी एक झंडा भी नजर नहीं आ रहा था। वहीं, इस सीट पर बाहुबली छवि वाले जहांगीर खान भी चुनाव से हटने के बाद क्षेत्र से नदारद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वह गुरुवार को हुए मतदान में भी शामिल नहीं हुए। अखबार से बातचीत में स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें आखिरी बार मंगलवार को देखा गया था। खास बात है कि मंगलवार को ही खान ने चुनाव से हटने का फैसला किया था। अभिषेक बनर्जी का चलता था सिक्का जहांगीर खान को डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से उन्हें 89 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे। अब जब खान ने चुनाव से नाम वापस लिया, तो टीएमसी ने इससे किनारा किया और खान का निजी फैसला बताया। बंपर वोटिंग हुई गुरुवार को सीट पर पुनर्मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हुआ जहां 86 फीसदी से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इस दौरान केंद्रीय बलों की भारी तैनाती रही। यह पुनर्मतदान 29 अप्रैल के चुनाव से जुड़े विवाद के कारण हुआ, जब कई मतदान केंद्रों से शिकायतें सामने आईं कि ईवीएम पर इत्र जैसे पदार्थ और चिपकने वाली टेप लगाई गई थीं। भाजपा और लेफ्ट में मुकाबला खान के हटने के बाद इस सीट पर टीएमसी के पास दावेदारी ही नहीं बची। ऐसे में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के देबांग्शु पांडा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के शंभूनाथ कुर्मी के बीच माना जा रहा है। सीट पर कांग्रेस की तरफ से अब्दुर रज्जाक मोल्ला चुनाव लड़ रहे हैं। भवानीपुर गंवाया 4 मई को जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में ममता बनर्जी के भवानीपुर सीट से हारने की खबर आई। खास बात है कि उन्हें अब बंगाल के मुख्यमंत्री बने शुभेंदु अधिकारी ने ही 15 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। इससे पहले वह 2021 के चुनाव में अधिकारी के सामने नंदीग्राम सीट से भी हार का सामना कर चुकी हैं।

‘जीजा, अब क्या करना है…’ चैट से खुला राज, हनीट्रैप गैंग से जुड़ा पुलिसवाला पकड़ा गया

इंदौर मध्य प्रदेश में इंदौर के चर्चित हनीट्रैप 2026 मामले में अब जांच और भी गहरी होती जा रही है। इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने गुरुवार को इंटेलिजेंस शाखा में तैनात हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक विनोद शर्मा पर हनीट्रैप नेटवर्क की साजिश में शामिल होने और आरोपियों को रणनीतिक सलाह देने के गंभीर आरोप हैं। सूत्रों के अनुसार, आरोपी महिलाएं उसे ‘जीजा’ कहकर बुलाती थीं और कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो, फोटो और चैट शेयर कर आगे की ब्लैकमेलिंग रणनीति पर सलाह लेती थीं। पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की फोरेंसिक जांच करवा रही है। SIT ने संभाली जांच, पांच मोबाइल जब्त डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के अनुसार पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है। अब तक पांच मोबाइल फोन जब्त किए जा चुके हैं, जिनकी साइबर और फोरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क किन-किन नेताओं, कारोबारियों और अफसरों तक पहुंचा था। साथ ही रेशु चौधरी से जुड़े जमीन खरीदी-बिक्री के एक अहम कॉन्ट्रैक्ट को भी जब्त करने की कोशिश की जा रही है। विदेश में पढ़ी रेशु ने बढ़ाईं राजनीतिक नजदीकियां जांच में सामने आया है कि मकरोनिया (सागर) निवासी रेशु चौधरी विदेश में पढ़ाई कर चुकी है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान वह दिल्ली में बड़े नेताओं के संपर्क में आई और बाद में इन्हीं संपर्कों का इस्तेमाल कर मध्य प्रदेश के प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाई।बताया जा रहा है कि उसने राजनीति और हाईप्रोफाइल नेटवर्किंग के जरिये खुद को स्थापित करने की कोशिश की और धीरे-धीरे प्रॉपर्टी कारोबार से भी जुड़ गई। तीन साल में खड़ा हुआ हाईप्रोफाइल नेटवर्क पुलिस के अनुसार इस पूरे गिरोह की कथित मास्टरमाइंड अलका दीक्षित है। श्वेता जैन के साथ आने के बाद नेटवर्क तेजी से फैलता चला गया। UPSC-MPPSC प्रोफाइल से बनाई हाईप्रोफाइल पहचान रेशु सोशल मीडिया प्रोफाइल में खुद को कभी UPSC प्री क्वालिफाइड, तो कभी MPPSC प्री-2016 पास बताती थी। कुछ जगह उसने रेवेन्यू सर्विस में चयनित होने तक का दावा किया था। वर्ष 2016 में उसने “ब्रह्मपुत्र IAS एकेडमी” नाम से कोचिंग संस्थान भी शुरू किया था, जो बाद में बंद हो गया। राजनीति में एंट्री की तैयारी, लेकिन सपना अधूरा सूत्रों के मुताबिक, भोपाल के एक बड़े भाजपा नेता के संपर्क में आने के बाद रेशु ने नरयावली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी। उसने क्षेत्र में बड़े-बड़े होर्डिंग लगवाकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई थी। हालांकि 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदीप लारिया को प्रत्याशी बना दिया और रेशु की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अधूरी रह गईं। अब SIT पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हाईप्रोफाइल हनीट्रैप मामले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।