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छत्तीसगढ़ के किसान की बदली किस्मत, सागौन खेती से कमाए 9.69 लाख रुपए

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों की आय दोगुनी करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री (कृषि-वानिकी) एवं निजी भूमि पर वृक्षारोपण को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार की इसी दूरगामी पहल का एक बेहद सफल और प्रेरणादायी परिणाम बालोद जिले के किसान अनिल जाजू की सफलता के रूप में सामने आया है। नवा रायपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ग्राम पलारी (तहसील गुरूर) निवासी कृषक अनिल जाजू को उनकी निजी भूमि पर तैयार किए गए सागौन वृक्षों के एवज में 9.69 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक प्रदान किया।  एग्रोफॉरेस्ट्री और जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के जोखिमों से उबारने के लिए वृक्ष आधारित कृषि प्रणाली अपनाने हेतु प्रेरित कर रही है।  उन्होंने कहा कि एग्रोफॉरेस्ट्री किसानों के लिए दीर्घकालिक आय का मजबूत माध्यम बन रही है। साथ ही एक पेड़ माँ के नाम अभियान के जरिए जनभागीदारी से हरित छत्तीसगढ़ निर्माण को भी गति मिल रही है। 'एक पेड़ माँ के नाम अभियान वन मंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से अब जनभागीदारी से पूरे प्रदेश को हरा-भरा बनाने की मुहिम को एक नई और अभूतपूर्व गति मिल रही है। 24 वर्षों की मेहनत का  फल मीठा मिला, किसान अनिल जाजू की यह सफलता अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन केस-स्टडी है। वर्ष 2001 में अपनी 3.35 हेक्टेयर निजी भूमि पर सागौन के पौधे लगाए थे। लगभग 24 वर्षों तक देखरेख और संरक्षण के बाद वर्ष 2025 में उन्होंने वृक्ष कटाई नियम 2022 के तहत अनुमति लेकर सागौन वृक्षों की कटाई कराई। वन विभाग की देखरेख में कुल 173 सागौन वृक्षों की कटाई की गई, जिससे 949 नग लकड़ी प्राप्त हुई। इसका कुल आयतन 33.24 घनमीटर दर्ज किया गया। वन विभाग द्वारा निर्धारित दर पर लकड़ी का क्रय किया गया और इसके बदले लगभग 9.69 लाख रूपए की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में जमा कराई गई। ’पर्यावरण और आर्थिक समृद्धि का अनूठा संगम’ जाजू की यह शानदार सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण किया जाए, तो यह किसानों के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह काम करता है। इससे न केवल किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनते हैं, बल्कि प्रदेश के हरित आवरण में भारी वृद्धि होती है। जलवायु परिवर्तन के खतरों से लड़ने में मदद मिलती है। स्थानीय स्तर पर जैव विविधता का संरक्षण होता है। किसानों को वन विभाग का निरंतर सहयोग मिलता है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण करने वाले इच्छुक किसानों को पौधों के चयन से लेकर तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशासनिक प्रोत्साहन और आवश्यक सहायता लगातार मुहैया कराई जा रही है। शासन का मुख्य ध्येय यही है कि अधिक से अधिक किसान एग्रोफॉरेस्ट्री मॉडल को अपनाएं और अपनी बंजर या खाली जमीनों को मुनाफे के जंगल में बदल सकें।

एनटीपीसी क्षेत्र में रातभर चला अवैध खनन, 15 फीट गहरे गड्ढे मिले

पटना पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित एनटीपीसी थाना क्षेत्र के ढीबर गांव के पास गंगा किनारे अवैध मिट्टी खनन का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां लगातार तीन रातों तक अवैध मिट्टी कटाई होती रही, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जिस जगह मिट्टी की कटाई की जा रही है, वहीं से एनटीपीसी प्लांट के लिए पानी की सप्लाई भी होती है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और पुलिस की गश्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रातभर चलता रहा अवैध खनन स्थानीय लोगों के अनुसार, ढीबर गांव के दियारा इलाके में लगातार रातभर गंगा बालू और मिट्टी की कटाई की जा रही थी। लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना की मिलीभगत से यह अवैध खनन हो रहा है, जिससे खनन माफियाओं का मनोबल बढ़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को सबकुछ पता होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। एसडीपीओ की छापेमारी, लेकिन माफिया फरार मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ रामकृष्णा ने देर रात मौके पर छापेमारी की। हालांकि, छापेमारी की भनक लगते ही सभी खनन माफिया मौके से फरार हो गए। छापेमारी के दौरान खेतों में करीब 15 फीट तक गहरे गड्ढे पाए गए। इसके बाद एसडीपीओ ने तुरंत खनन विभाग को इसकी जानकारी दी। पहले भी हो चुके हैं हादसे स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे पहले बारिश के दौरान खेतों में बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से कई लोगों की डूबकर मौत हो चुकी है। अब एनटीपीसी डैम के पास खुदाई होने से ग्रामीण किसी बड़े हादसे की आशंका से डरे हुए हैं। किसान रातभर कर रहे खेतों की रखवाली अवैध मिट्टी कटाई से परेशान किसान अब रातभर जागकर अपने खेतों की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर यह अवैध खनन चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। रोज लाखों की कमाई का आरोप एक स्थानीय व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जिस जमीन से मिट्टी काटी जा रही है, उसे एनटीपीसी ने अधिग्रहित कर रखा है। हालांकि, मुआवजा नहीं मिलने के कारण किसान अभी भी उस जमीन पर खेती कर रहे हैं।  उसने बताया कि खनन माफिया एक ट्रिप मिट्टी 800 रुपये में बेचते हैं। इसमें 300 रुपये ट्रैक्टर मालिक को दिए जाते हैं, जबकि 500 रुपये माफिया के पास बचते हैं। बताया गया कि करीब 20 ट्रैक्टर लगाए गए हैं और हर ट्रैक्टर लगभग 20 ट्रिप मिट्टी की ढुलाई करता है। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 400 ट्रिप मिट्टी बेची जा रही है और माफिया रोज लगभग दो लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। स्थानीय व्यक्ति ने यह भी आरोप लगाया कि छह दिनों तक लगातार मिट्टी कटाई हुई और माफियाओं ने लगभग “50 प्रतिशत पर थाना मैनेज” कर रखा था। एसडीपीओ ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी एसडीपीओ रामकृष्णा ने बताया कि ढीबर दियारा में मिट्टी कटाई की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की गई थी। मौके पर कोई व्यक्ति नहीं मिला, लेकिन मिट्टी कटाई के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अवैध कटाई से पर्यावरण समेत कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अब पुलिस खुद इस पूरे इलाके की निगरानी करेगी। एसडीपीओ ने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी अवैध मिट्टी कटाई हो रही हो तो तुरंत सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने खनन माफियाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि नियम और कानून के तहत ही कोई काम किया जाए। अगर कोई अवैध गतिविधि पाई गई तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

भर्ती प्रक्रिया में सुधार की तैयारी, 5 जून तक मांगे जाएंगे सुझाव

भोपाल  राज्य सरकार प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए भर्ती करने वाली दो एजेंसियों के भर्ती नियमों में बदलाव करने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए मप्र लोक सेवा आयोग और मप्र कर्मचारी चयन मंडल के भर्ती नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट तैयार किया है और पांच जून से इसको लेकर प्रदेश के लोगों से सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार अब मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को छोड़कर सभी सरकारी भर्तियां कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) के माध्यम से होंगी। नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे और 2013 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। सरकार ने 5 जून 2026 तक आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। पात्रता परीक्षा और स्कोर कार्ड पर होगी भर्ती नियमों में बदलाव के लिए तैयार ड्राफ्ट में कहा गया है कि अब भर्ती प्रक्रिया “पात्रता परीक्षा” और “स्कोर कार्ड सिस्टम” पर आधारित होगी। ईएसबी हर साल तीन प्रकार की पात्रता परीक्षाएं आयोजित करेगा जो सामान्य पात्रता परीक्षा, तकनीकी पात्रता परीक्षा और शिक्षक पात्रता परीक्षा के रूप में होंगी। पात्रता परीक्षा में तय न्यूनतम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को ही स्कोर कार्ड जारी किया जाएगा, जिसका उपयोग विभिन्न सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए किया जा सकेगा। सामान्य और तकनीकी पात्रता परीक्षा का स्कोर कार्ड रिजल्ट जारी होने वाले वर्ष के बाद अगले दो वर्षों की 31 दिसंबर तक वैध रहेगा, शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवार जीवनभर पात्र माने जाएंगे, लेकिन नौकरी आवेदन के लिए उनका स्कोर कार्ड भी सीमित अवधि तक ही मान्य रहेगा। एक स्कोर से कई भर्तियों में आवेदन नई व्यवस्था के तहत अभ्यर्थियों को बार-बार प्रारंभिक परीक्षाएं नहीं देनी पड़ेंगी। एक बार अच्छा स्कोर आने पर उसी स्कोर कार्ड के आधार पर कई विभागों की भर्तियों में आवेदन किया जा सकेगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने का दावा किया गया है। ऐसा होगा परीक्षा पैटर्न सामान्य पात्रता परीक्षा में 100 प्रश्न होंगे, जिन्हें चार हिस्सों में बांटा जाएगा। इसमें सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान एवं योजनाएं, गणित, तार्किक क्षमता, डेटा विश्लेषण और कंप्यूटर ज्ञान से प्रश्न पूछे जाएंगे। तकनीकी पात्रता परीक्षा में भी 100 प्रश्न होंगे, जिनमें 25 प्रश्न सामान्य विषयों से और 75 प्रश्न संबंधित तकनीकी विषय से होंगे। पीएससी परीक्षा के नियम तैयार, लागू करने से पहले मांगे सुझाव उधर राज्य शासन ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं को संचालित करने के लिए नए प्रारूप नियमों को तैयार किया है और इन्हें लागू करने से पहले 5 जून 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने बताया कि राज्य शासन द्वारा "मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा नियम 2026" अधिसूचित किया जाना प्रस्तावित है। प्रस्तावित नियमों के प्रारूप विभाग की वेबसाइट gad.mp.gov.in पर उपलब्ध है। प्रस्तावित नियमों के संबंध में यदि किसी व्यक्ति, संस्था या हितधारक को कोई आपत्ति या सुझाव देना हो तो वे 5 जून 2026 तक लिखित रूप में अपने सुझाव ई-मेल sogad1@mp.gov.in पर प्रेषित कर सकते हैं। साथ ही सुझाव gad.mp.gov.in पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से भी विभाग को दिए जा सकते हैं। समयावधि के बाद प्राप्त होने वाले सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

सुशासन तिहार 2026: बालोद के राहुद में जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हुए हजारों हितग्राही, 1428 आवेदन निपटाए गए

रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम राहुद में गुरुवार को शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ग्राम पंचायत राहुद सहित राहुद कलस्टर में शामिल आसपास के 18 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया।  इसके अंतर्गत गुण्डरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, पूर्व विधायक वीरेन्द्र साहू, जनपद अध्यक्ष पुरूषोत्तम चंद्राकर, जनपद उपाध्यक्ष नीतेश मोंटी यादव, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती कांति सोेनेश्वर सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर हितग्राहियों को कृषि विभाग अंतर्गत मृदा स्वास्थ्य कार्ड, मत्स्य पालन प्रसार योजना अंतर्गत जाल एवं आईस बॉक्स का वितरण किया गया। इसी तरह समाज कल्याण विभाग अंतर्गत श्रवण यंत्र एवं छड़ी, स्वामित्व योजना अंतर्गत अधिकार अभिलेख पत्र का वितरण किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास निर्माण पूर्णता प्रमाण पत्र एवं केसीसी कार्ड का वितरण किया। इसके अलावा शिविर में राज्य शासन के निर्देशानुसार दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने हेतु मेडिकल बोर्ड लगाया गया था। इस दौरान मेडिकल बोर्ड में शामिल विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा शिविर में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने पहुँचे दिव्यांगजनों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी बनाया गया। शिविर में अतिथियों के द्वारा नन्हें-मुन्हें बच्चों को स्वादिष्ट खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। इसके अलावा गर्भवती माताओं को सुपोषण किट भेंटकर उनके गोदभराई के रस्म को पूरा किया गया। ग्राम राहुद में आयोजित शिविर में आज विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 1838 आवेदन प्राप्त हुए थे जिसमें से 1428 आवेदनों को मौके पर निराकरण सुनिश्चित किया गया।  शिविर को संबोधित करते हुए विधायक कुंवर सिंह निषाद ने विभिन्न विभाग के अधिकारियों को सुशासन तिहार के दौरान आम जनता से प्राप्त आवेदनों का समुचित निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। जिससे सुशासन तिहार का आयोजन सार्थक हो सके। उन्होंने शिविर में उपस्थित लोगों को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के संबंध में जानकारी देते हुए इसके रोकथाम के कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की शपथ भी दिलाई। बालोद जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर ने आम नागरिकों को सुशासन तिहार के उद्देश्यों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केेन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। सुशासन तिहार के दौरान शासन-प्रशासन के लोग आम जनता के बीच पहुँचकर इनके वास्तविक समस्याओं का पड़ताल कर रहे हैं।  शिविर में अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी सुशासन तिहार के उद्देश्यों के संबंध में सभी विभाग के अधिकारियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ आम जनता से प्राप्त आवेदनों का समुचित निराकरण भी सुनिश्चित करने को कहा। इस मौके पर विभिन्न विभागों के द्वारा शिविर में आज अपने-अपने विभागों से संबंधित कुल आवेदन एवं उनके निराकरण की स्थिति के अलावा आम नागरिकों को शासन के जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में जानकारी दी। शिविर में आज ग्रामीण महिलाओं द्वारा नीर चेतना अभियान के अंतर्गत पानी के महत्व के संबंध में आम जनता को जानकारी प्रदान करने हेतु नुक्कड़ नाटक की भी प्रस्तुति दी।

ट्विशा मामले में जांच तेज, गिरिबाला सिंह की नियुक्ति भी जांच के घेरे में

भोपाल  देशभर में सुर्खियां बने मॉडल ट्विशा शर्मा डेथ केस में जांच लगातार तेज होती जा रही है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह अब भी फरार है, जबकि उसकी अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है। दूसरी ओर, ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुलिस ने जहां पति व मुख्य फरार आरोपी समर्थ की गिरफ्तारी पर इनाम बढ़ाकर 30 हजार कर दिया है, वहीं उसकी सास गिरिबाला सिंह को पद से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने ट्विशा की सास गिरीबाला सिंह को भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी किया है। विभागीय स्तर पर उनकी नियुक्ति की जांच की भी बात कही गई है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई प्रशासनिक समीक्षा के बाद की गई है।     समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर कल हाईकोर्ट में सुनवाई     घटना के 9 दिन बाद भी मुख्य आरोपी पति फरार     आरोपी की तलाश में 6 पुलिस टीमें और SIT गठित     समर्थ सिंह पर इनाम 10 हजार से बढ़ाकर 30 हजार किया गया     पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में चोट के कई निशान मिलने का दावा     गिरीबाला सिंह को उपभोक्ता आयोग से हटाने की कार्रवाई शुरू     मामले की CBI जांच की मांग को लेकर अलग याचिका की तैयारी आरोपी पति ने हाईकोर्ट में लगाई याचिका दूसरी ओर मॉडल ट्विशा की मौत में मुख्य आरोपी बनाए गए अधिवक्ता समर्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। संभवत: शुक्रवार को इस पर सुनवाई हो सकती है। इसके पूर्व भोपाल जिला अदालत उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। बता दें कि इसकी मामले में समर्थ की मां को पहले ही अग्रिम जमानत मिल चुकी है। परिजनों के वकील ने आरोप लगाया है कि इस पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और वे जमानत रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश बना वन्य जीव संरक्षण का ग्लोबल रोल मॉडल, CM डॉ. यादव का बड़ा दावा

मध्यप्रदेश वैश्विक वन्य जीव संरक्षण का बना रोल मॉडल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वनस्पति और वन्यजीवों की विविधता हमारी पूंजी, इसे संजोकर रखना हमारा कर्तव्य जल, जंगल और जमीन की उर्वरता बचाने में प्रदेश है देश में नम्बर वन केन्द्र सरकार ने दिया मध्यप्रदेश को चीता स्टेट बनने का अवसर जंगल और राष्ट्रीय उद्यानों के निकट ही बनाए जा रहे हैं वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय वन मंत्री यादव ने एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का किया शुभारंभ प्रकृति के संरक्षण को केवल नीति नहीं, बल्कि संस्कृति बनाएंगे : केन्द्रीय मंत्री यादव प्रचार साहित्य, नेशनल रिपोर्ट्स का विमोचन कर 5 रुपए का डाक टिकट भी किया लाँच आईआईएफएम में नव स्थापित डेटा ड्रिवन लैब का हुआ लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर आईआईएफएम में राज्यस्तरीय कार्यक्रम एवं चीता संरक्षण पर मीडिया वर्कशाप में की सहभागिता भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जैव-विविधता में हमारा प्रदेश, देश में एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में विकसित किया जा रहा है। हमारे पास 'टाइगर स्टेट', 'लेपर्ड स्टेट', 'चीता स्टेट', 'वल्चर स्टेट', 'घड़ियाल स्टेट', 'वुल्फ स्टेट' का टाइटल है। सालों पहले देश की धरती से चीते लुप्त हो चुके थे। हम देश की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में पहचाने जाने वाले चीतों को प्रदेश की धरती में वापस ले आये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को चीता स्टेट बनने का गौरव देने के लिए केन्द्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि चीतों ने पालपुर कूनो और गांधी सागर अभयारण्य को अपना घर मान लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अब कुल 53 चीते हैं। मध्यप्रदेश वैश्विक वन्यजीव संरक्षण का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक रोल मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस के अवसर पर भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम एवं चीता संरक्षण पर मीडिया वर्कशाप को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश 'मोगली लैंड' और 'सफेद शेरों की धरती' के नाम से भी जाना जाता है। लगभग 100 साल के बाद मध्यप्रदेश की धरती पर जंगली भैंसे का पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना की गई है। दुर्लभ प्रजाति के 33 कछुए और 53 घड़ियाल कूनो नदी में छोड़े गए हैं। हलाली डेम क्षेत्र में 5 लुप्तप्राय गिद्धों को उनके नैसर्गिंक वातावरण में मुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 हजार से अधिक वनस्पतियां, करीब 500 पक्षियों की प्रजातियां और 180 से अधिक मछलियों की प्रजातियां मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तो मध्यप्रदेश के जंगलों में 100 से ज्यादा हाथी भी विचरण कर रहे हैं। कार्यक्रम में केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव, मंत्रालय के केन्द्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केन्द्रीय वन मंत्री यादव ने एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल जैव-विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन एवं वन्य जीव संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता एवं जन-जागरुकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर चीता संरक्षण पर केंद्रित ब्रोशर, भारत की बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट-2026 एवं अन्य प्रचार साहित्य का विमोचन कर अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस की स्मृति में डाक विभाग का 'माय स्टैम्प' (5 रुपए का डाक टिकट) भी लाँच किया गया। अतिथियों द्वारा आईआईएफएम में नवस्थापित डेटा संचालित प्रयोगशाला (डेटा ड्रिवन लैब) का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही इंटरनेशनल बिग कैट्स अलायंस (आईबीसीए) की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म, प्रदेश की जैव-विविधता विरासत स्थलों पर केंद्रित लघु फिल्म, मप्र राज्य जैव-विविधता बोर्ड द्वारा संरक्षित तपोवन भूमि स्थलों पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय वन मंत्री यादव ने प्रदेश के वन विभाग के मैदानी अमले के लिए न्यू बाइक्स एवं रेस्क्यू व्हीकल को हरी झंडी दिखाकर लोकार्पित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आईआईएफएम परिसर में विभिन्न राज्यों के जैव-विविधता बोर्ड द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आकर्षक स्वागत नृत्य करने वाले जनजातीय कलाकारों में प्रत्येक को इनाम स्वरूप 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस 2026 मध्यप्रदेश में मनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का दिन हमें जैव-विविधता के क्षेत्र में काम करने के लिए चिंतन और कार्य करने की प्रेरणा देता है। 'प्रोजेक्ट चीता' विश्व में वन्यजीवों के पुनर्स्थापन का एक चमत्कारिक उदाहरण है। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों का पुनर्स्थापन कार्य सफलतापूर्वक संपन्न करना एक चुनौती पूर्ण कार्य था। प्रदेश के वन विभाग ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों का नया घर तैयार किया है। हमारा वन अमला हाथियों के प्रबंधन के लिए बुलेटिन निकालने जैसे नवाचार भी कर रहा है। चंबल और कूनो नेशनल पार्क में घड़ियालों के संरक्षण का कार्य भी तेजी से हो रहा है। मां नर्मदा का वाहन मगर है, इनके संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार ने प्रदेश की धरती पर 100 साल बाद 8 जंगली भैंसों की वापसी कराई है। इससे हमारे कान्हा नेशनल पार्क की जैव-विविधता समृद्ध हुई है। असम सरकार के सहयोग से हमें जंगली भैंसे मिले हैं। दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों का भी संरक्षण किया गया है। भोपाल से छोड़े गए गिद्ध ने उज्बेकिस्तान तक का सफर तय कर लिया है। जल संरक्षण के लिये चलाया जा रहा महाअभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण की दिशा में भी तेजी से कार्य कर रही है। प्रदेश में गुड़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक 3 महीने का जल संरक्षण महाभियान चल रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्य हो रहा है। राज्य में अब तक 3000 करोड़ रुपये की लागत से 56 हजार जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और निर्माण, 827 बावड़ी, 1200 से अधिक तालाब, 212 नदियों में साफ-सफाई के कार्य किए गए हैं। इस महाभियान में प्रदेश के 18 लाख लोगों ने अपनी भागीदारी की है। जल और जंगल के संरक्षण तथा जमीन उर्वरता बचाए रखने में मध्यप्रदेश देश में नंबर वन है। प्रदेश में 2 लाख … Read more

मंत्री टंक राम वर्मा का सख्त निर्देश, कॉलेज स्टाफ समय पर पहुंचे महाविद्यालय

शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ अनिवार्य रूप से निर्धारित समय पर महाविद्यालय में उपस्थित रहें-मंत्री टंक राम वर्मा ​उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा का औचक निरीक्षण  व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश, छात्रों के लिए बनेगा ‘हेल्प डेस्क’ ​रायपुर       राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने और आगामी शिक्षा सत्र से पहले व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिए सरकार पूरी तरह मुस्तैद है। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने मोपका निपनिया महाविद्यालय का औचक निरीक्षण किया। मंत्री  के इस कदम से जहां लापरवाह कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है, वहीं छात्र हित में सरकार की संवेदनशीलता एक बार फिर खुलकर सामने आई है। ​लापरवाही पर बरती जाएगी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति     ​निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय की प्राचार्य अनुपस्थित पाई गईं। साथ ही, स्टाफ की उपस्थिति में भी भारी कमी देखने को मिली; वहां केवल 03 सहायक प्राध्यापक और कार्यालयीन स्टाफ के महज 02 कर्मचारी ही उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, मौके पर महाविद्यालय के वित्तीय लेखा-जोखा (एकाउंट्स) की जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो सकी, जिस पर  मंत्री वर्मा ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ​सरकार का साफ संदेश है  शासकीय संस्थाओं में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ​साफ-सफाई और अनुशासन पर कड़े निर्देश     ​महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता का अभाव दिखने पर मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े शब्दों में फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ अनिवार्य रूप से निर्धारित समय पर महाविद्यालय में उपस्थित रहें। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण मिले, इसके लिए साफ-सफाई की व्यवस्था तुरंत दुरुस्त की जाए। ​नए सत्र से पहले छात्र-सुविधाएं होंगी सर्वोपरि: बनेगा ‘हेल्प डेस्क’   ​ नवीन शिक्षा सत्र जल्द ही प्रारंभ होने वाला है, इसलिए सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि नए प्रवेश लेने वाले और पुराने छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। कॉलेज में आने वाले छात्र-छात्राओं की समस्याओं के त्वरित निराकरण और मार्गदर्शन के लिए तत्काल एक 'हेल्प डेस्क' (Help Desk) स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। ​इसके साथ ही, उन्होंने आगामी सत्र के मद्देनजर कॉलेज में पेयजल, बैठक व्यवस्था और अन्य सभी आवश्यक छात्र-सुविधाओं को समय सीमा के भीतर पूर्ण करने की कड़ी हिदायत दी है। ​जनता और छात्रों के प्रति सजग सरकार    ​उच्च शिक्षा मंत्री का यह औचक निरीक्षण  केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि धरातल पर उतरकर काम करने में विश्वास रखती है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों के महाविद्यालयों में भी शहरी क्षेत्रों की तरह उच्च स्तरीय सुविधाएं और कड़ा प्रशासनिक अनुशासन सुनिश्चित किया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल हो सके।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत सुशासन तिहार 2026 के समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों से किया सीधा संवाद रायपुर सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत बलौदबाजार जिले के करहीबाजार में आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं से मिल रहे लाभों की जानकारी ली। शिविर में मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 के तहत अनेक उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत प्रदान की गई। हितग्राहियों ने बताया कि योजना से उन्हें आर्थिक राहत मिली है और लंबित बिजली बिल की चिंता काफी हद तक कम हुई है। बालोदबाजार जिले के ग्राम बिटकुली निवासी आशाराम को 11 हजार 625 रुपये, बाबूलाल को 14 हजार 922 रुपये, जगदीश को 9 हजार 832 रुपये, श्रीमती बुधयारिन को 8 हजार 467 रुपये तथा चोवाराम को 13 हजार 325 रुपये की छूट प्राप्त हुई। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान बताया कि पहले बढ़े हुए बिजली बिल के कारण आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था, लेकिन मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना से उन्हें बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि अब वे बिना किसी अतिरिक्त बोझ के नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आम जनता को राहत पहुंचाना और उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करना है। उन्होंने कहा कि सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी सहायता साबित हो रही है।

ट्विशा शर्मा का फिर होगा पोस्टमॉर्टम, पति समर्थ सिंह करेगा सरेंडर

भोपाल /जबलपुर जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा का दोबारा पोस्टमॉर्टम करने की मंजूरी दे दी है. ट्विशा के परिजनों ने शव का दोबारा पीएम कराने के लिए अर्जी दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस को यह आदेश दिया है।  शादी के पांच महीने बाद हुई ट्विशा की मौत गौरतलब है कि मॉडल ट्विशा शर्मा की मुलाकात अपने पति समर्थ सिंह से एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी. समर्थ पेशे से क्रिमिनल लॉयर है. दिसंबर 2025 में दोनों की धूमधाम से शादी हुई थी, लेकिन शादी के महज 5 महीने बाद ही 12 मई 2026 को ट्विशा की संदिग्ध मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि ट्विशा की सास और पति ने मिलकर उसकी हत्या की है. वह दोबारा शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग कर रहे हैं. इस वजह से वह एम्स से शव भी नहीं ले रहे हैं।   आरोपी समर्थ सिंह के वकील ने अग्रिम जमानत याचिका वापस लेने का फैसला लिया. इस दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है. इसके साथ ही कोर्ट का पूरा ध्यान अब दूसरे पोस्टमार्टम की याचिका पर केंद्रित हो गया है, क्योंकि न्यायाधीश ने समय की गंभीरता को देखते हुए कहा कि दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर सबसे पहले सुनवाई की जानी चाहिए।  कोर्ट में दूसरे पोस्टमार्टम की मांग को लेकर तीखी बहस देखने को मिली. याचिकाकर्ता की तरफ से जहां दूसरे पोस्टमार्टम की जरूरत पर जोर दिया गया, तो  वहीं दूसरी तरफ दूसरे पक्ष के वकील ने इसका कड़ा विरोध किया।  उन्होंने तर्क दिया कि AIIMS द्वारा किया गया पहला पोस्टमार्टम पर्याप्त है और दोबारा पोस्टमार्टम की मांग करना चिकित्सा बिरादरी का अपमान है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह मांग जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाने और डॉक्टरों की क्षमता पर अविश्वास जताने जैसा है. हालांकि, बहस के बाद कोर्ट ने सेकंड पोस्टमार्टम पर सहमति जता दी है।  कोर्ट में क्या दलील दी गई? ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की तरफ से पेश होते हुए उनके वकील ने दूसरी बार पोस्टमॉर्टम कराने की मांग का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि AIIMS के डॉक्टरों द्वारा पोस्टमॉर्टम पहले ही किया जा चुका है और इसलिए एक और जांच की क्या ज़रूरत है, इस पर सवाल उठाया।  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उन डॉक्टरों की ईमानदारी का बचाव किया जिन्होंने पोस्टमॉर्टम किया था, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि किसी बात को नज़रअंदाज़ किया गया है, तो दूसरी राय ली जा सकती है. उन्होंने कहा, "डॉक्टरों की निष्पक्षता बेमिसाल है, लेकिन अगर पीड़ित परिवार को लगता है कि कुछ छूट गया है, तो दूसरी राय ली जा सकती है।  अंतिम संस्कार में किसी भी तरह की देरी का विरोध करते हुए, गिरिबाला सिंह के वकील ने यह भी दलील दी कि शव को सड़ने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए. वकील ने कहा, "वह हमारे परिवार की बहू थी. उसका अंतिम संस्कार करना हमारा फ़र्ज़ है। 

‘स्पाइडर मैन: ब्रांड न्यू डे’ में जेंडाया का अनुभव, टॉम हॉलैंड के साथ सेट को बताया घर जैसा

हॉलीवुड स्टार जेंडाया और टॉम हॉलैंड फिल्मी दुनिया के मशहूर कपल हैं। दोनों पार्टनर होने के साथ-साथ को स्टार्स भी हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने टॉम हॉलैंड के साथ अपनी आगामी फिल्म 'स्पाइडर मैन: ब्रांड न्यू डे' की शूटिंग के दौरान के अनुभव साझा किये। 'स्पाइडर मैन' में काम करना सपनों जैसा एक्ट्रेस जेंडाया ने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, 'फिल्म 'स्पाइडर मैन: ब्रांड न्यू डे' में काम करना मेरे लिए एक सपने जैसा है। यहां मुझे हर दिन अपने सबसे अच्छे दोस्त और सबसे करीबी व्यक्ति के साथ काम करने का मौका मिलता है। हम अपने पेट डॉग को भी काम पर लाते हैं। यह एक पारिवारिक माहौल जैसा है। हम इन फिल्मों को देखते हुए बड़े हुए हैं। इस फिल्म के सेट पर घर लौटने जैसा महसूस होता है 'द ओडिसी' में भी टॉम हॉलैंड के साथ नजर आएंगी जेंडाया ने अपनी और टॉम की दूसरी फिल्म 'द ओडिसी' के बारे में भी काफी कुछ कहा। उन्होंने बताया कि इसमें टॉम के साथ उनका कोई एक्शन सीन नहीं है जिससे उन्हें टॉम को सेट पर काम करते देखने का मौका मिलता है। उन्हें इस फिल्म पर काम करते देख उन्हें गर्व महसूस होता है। बता दें, 'द ओडिसी' 17 जुलाई को रिलीज होने वाली है। इसमें जेंडाया ने एथेना का किरदार निभाया है जो ज्ञान की देवी है और ओडीसियस की रक्षक भी। शादी की अफवाह हॉलीवुड कपल जेंडाया और टॉम हॉलैंड की डेटिंग की खबरें बीते काफी वक्त से सुर्खियों में है। चर्चा थी कि दिसंबर 2024 में दोनों ने सगाई कर ली। रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल दोनों गुपचुप तरीके से शादी कर चुके हैं। हालांकि, अब तक ना टॉम और ना ही जेंडाया ने इस पर कोई भी बयान दिया है।