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टेक्नोलॉजी आधारित पारदर्शी सार्वजनिक वितरण प्रणाली से गरीबों को मिलेगा अधिक लाभ – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा SARTHAK-PDS फेज-2 के लिए 25,530 करोड़ रुपये की मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे गरीब कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह निर्णय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को तकनीक आधारित, अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार गरीबों तक योजनाओं का लाभ शत-प्रतिशत पारदर्शिता के साथ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। SARTHAK-PDS फेज-2 के माध्यम से  एआई-इनेबल्ड लाभार्थी रजिस्ट्री, जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड टैगिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और आधुनिक सप्लाई चेन प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं से राशन वितरण प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी। इससे पात्र हितग्राहियों तक सस्ते अनाज और खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय केवल तकनीकी उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को राशन परिवहन, हैंडलिंग तथा उचित मूल्य दुकानों के संचालन में बढ़ती लागत के लिए आर्थिक सहयोग देकर वितरण व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाएगा। राशन दुकानों के डीलरों के पारिश्रमिक में वृद्धि का प्रावधान जमीनी स्तर पर व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएगा। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च 2031 तक संचालित होने वाली यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के करोड़ों हितग्राहियों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि AI, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे नवाचारों के उपयोग से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनविश्वास को नई मजबूती मिलेगी तथा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को और बल मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल  राशन वितरण को आधुनिक बनाने का नहीं, बल्कि गरीबों के जीवन में भरोसा, सुविधा और सुशासन को और मजबूत करने का निर्णय है। उन्होंने गरीब कल्याण को समर्पित इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

मंत्री काश्यप से युवा उद्यमी रत्नेश ने की सौजन्य भेंट

भोपाल  सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने भोपाल के युवा स्टार्टअप उद्यमी एवं प्रमाणित टी टेस्टर आरिन रत्नेश की अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स अब वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने और युवाओं को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। भोपाल स्थित स्टार्टअप कंपनी हरितिमा फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फ्रांस को 46 हजार आईस्ड टी प्रीमिक्स पैक्स का सफल निर्यात किए जाने पर आरिन रत्नेश ने मंत्री काश्यप से उनके कार्यालय में सौजन्य भेंट की तथा उन्हें अपने उत्पादों की श्रृंखला भेंट कर आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह तथा उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार भी उपस्थित थे। मंत्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को ऐसे अवसर उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने नवाचारों को सफल व्यवसाय में परिवर्तित कर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकें। उन्होंने कहा कि आरिन रत्नेश की उपलब्धि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स में वैश्विक प्रतिस्पर्धा की अपार क्षमता है। मंत्री काश्यप ने बताया कि प्रदेश सरकार स्टार्टअप्स को निवेशकों से जोड़ने, विपणन अवसर उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश स्टार्टअप सेंटर द्वारा आरिन रत्नेश को वर्ष 2025 में नई दिल्ली में आयोजित India International Trade Fair (IITF-2025) में मध्यप्रदेश पवेलियन के माध्यम से अपने उत्पादों के प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया गया था। इससे उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिली और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संभावनाओं को विस्तार मिला। श्री आरिन रत्नेश ने राज्य शासन एवं एमएसएमई विभाग द्वारा प्राप्त सहयोग और प्रोत्साहन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी सहायता और उचित मंच मिलने से उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है तथा ऐसे युवा उद्यमियों की सफलता मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप राज्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।  

डिजिटल तकनीक से मरीजों को समयबद्ध, सुगम एवं बेहतर उपचार का हो प्रदाय

भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सेवा प्रदायगी की दक्षता को और अधिक मजबूत करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित न रहकर मरीजों को समयबद्ध, सुगम एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का माध्यम बने। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय में डिजीटल तकनीक के उपयोग से सशक्तीकरण की प्रस्तावित कार्ययोजना की समीक्षा की और प्रावधानों पर गहन विमर्श किया। उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पतालों में जांच, पंजीयन, प्रिस्क्रिप्शन, दवा वितरण, भर्ती एवं डिस्चार्ज जैसी सेवाओं को आपस में डिजिटल रूप से जोड़ा जाए, जिससे मरीजों को एकीकृत एवं सहज स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस ने प्रदेश में प्रस्तावित डिजिटल हेल्थ ट्रांसफॉर्मेशन एवं स्वास्थ्य सेवा सुदृढ़ीकरण की चरणबद्ध कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि ओपीडी, आईपीडी, वाइटल्स, प्रिस्क्रिप्शन, फार्मेसी, लैबोरेटरी इंफॉर्मेशन सिस्टम (एलआईएस), रेडियोलॉजी इंफॉर्मेशन सिस्टम (आरआईएस) और डिस्चार्ज सेवाओं को चरणबद्ध रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। कार्ययोजना के अनुसार पोर्टल एवं सॉफ्टवेयर विकास, अस्पतालों की आवश्यकताओं का निर्धारण, मरीजों की डिजिटल यात्रा (पेशेंट जर्नी) का निर्धारण और चिकित्सकीय टेम्पलेट्स को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। ओपीडी, वाइटल्स, प्रिस्क्रिप्शन एवं फार्मेसी मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए व्यापक प्रशिक्षण एवं जिला स्तरीय ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए जाएंगे। आईपीडी एडमिशन एवं डिस्चार्ज मॉड्यूल सहित अस्पतालों में डेमो वर्जन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे डॉक्टर एवं नर्सिंग स्टाफ प्रणाली का अभ्यास कर सकें। अगले चरण में चयनित मेडिकल कॉलेजों एवं जिला अस्पतालों में प्रथम पायलट चरण प्रारंभ करने का प्रस्ताव है। इसके साथ लैबोरेटरी इंफॉर्मेशन सिस्टम (एलआईएस) के एकीकरण, प्रशिक्षण सत्रों तथा जिला स्तरीय स्वास्थ्य समीक्षा केंद्रों की स्थापना की दिशा में कार्य किया जाएगा। इसके पश्चात अन्य मेडिकल कॉलेजों एवं जिला अस्पतालों तक व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा तथा रेडियोलॉजी इंफॉर्मेशन सिस्टम (आरआईएस) का एकीकरण किया जाएगा। विभिन्न मॉड्यूल्स को चरणबद्ध रूप से लाइव करने तथा दिसंबर तक प्रदेशव्यापी रोलआउट की तैयारी की जाएगी। डिजिटल हेल्थ सिस्टम के माध्यम से जांच, पंजीयन, दवा वितरण एवं उपचार संबंधी सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा, जिससे मरीजों को अस्पतालों में अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित एवं सुगम सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। साथ ही डेटा आधारित मॉनिटरिंग एवं जवाबदेही व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्रदेश में हीमोडायलिसिस सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए भी विशेष तैयारी योजना प्रस्तुत की गई। योजना के अंतर्गत पुराने एवं जर्जर हो रहे उपकरणों को चरणबद्ध रूप से प्रतिस्थापित करने और आवश्यकता अनुसार नई मशीनों एवं सुविधाओं को सशक्त करने की दिशा में कार्य किया जाएगा, जिससे गंभीर किडनी रोगियों को बेहतर एवं निरंतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

सेंधवा में जनशिक्षकों का सामूहिक इस्तीफा, शिक्षा विभाग कि कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बड़वानी बड़वानी जिले के विकासखंड सेंधवा में शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत जनशिक्षकों ने सामूहिक रूप से अपने पद से त्यागपत्र सौंप दिया है। इस घटनाक्रम से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जनशिक्षकों ने जिला पंचायत CEO को संबोधित पत्र में अधिकारियों पर मानसिक दबाव, अपमानजनक व्यवहार और अवकाश अवधि में भी लगातार कार्य कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। 27 जून 2026 को दिए गए पत्र में जनशिक्षकों ने उल्लेख किया कि शासन द्वारा 1 मई से 30 मई तक अवकाश घोषित होने के बावजूद उनसे विभागीय कार्य कराए गए। उन्होंने दावा किया कि लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद भी अधिकारियों द्वारा लगातार लापरवाही के आरोप लगाकर दबाव बनाया गया। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा शिक्षकों और जनशिक्षकों के लिए अपमानजनक शब्दों का उपयोग किया जाता है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। जनशिक्षकों ने कहा कि भारत सरकार के महत्वपूर्ण कार्य जैसे S.I.R. और जनगणना जैसे कार्य भी शिक्षा विभाग द्वारा सफलतापूर्वक कराए जाते रहे हैं, इसके बावजूद सम्मान नहीं मिल रहा। मानसिक प्रताड़ना और लगातार दबाव से परेशान होकर सेंधवा विकासखंड के 17 जनशिक्षकों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। पत्र में जिला प्रशासन से त्यागपत्र स्वीकार कर उन्हें कार्यमुक्त करने की मांग की गई है। इस सामूहिक इस्तीफे ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली और अधिकारियों के रवैये पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

24 परगना से मालदा तक कार्रवाई, बकरीद से पहले घुसपैठियों पर शिकंजा

कलकत्ता एक ओर जहां पूरे देश में बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं तो दूसरी ओर बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों में हलचल मची हुई है. कई स्टेट बॉर्डर के पॉइंट्स पर कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बड़े-बड़े ग्रुप इकट्ठा होने लगे हैं जो अपने वतन वापस जा रहे हैं।  अपने वतन लौट रहे अवैध बांग्लादेशी प्रवासी            एक बांग्लादेशी प्रवासी महिला रोजीना बीबी ने बताया कि वो डरी हुई हैं. उन्हें कहा, 'हम सात साल पहले अपने पति सैदुल के कैंसर के इलाज के लिए भारत आए थे, क्योंकि इलाज की प्रक्रिया लंबी चली, इसलिए परिवार गैर-कानूनी तौर पर यहीं रह गया. लेकिन नए कानूनी आदेश ने पूरी स्थिति ही बदल दी है. नए निर्देशों के तहत सरकारी कार्रवाई के डर से उनके मकान मालिक ने हाल ही में उनसे घर खाली करने को कहा जिससे उनके पास वापस जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।    बंगाल सरकार का सख्त एक्शन पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'बांग्लादेशी यहां क्यों रहें? वो केंद्र सरकार द्वारा दी गई हर सुविधा का लाभ उठा रहे हैं. वो गरीबों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं से फायदा उठा रहे हैं. उन्हें नागरिकता देकर, वोटर आईडी और आधार कार्ड जारी करके और मतदाता के रूप में पंजीकृत करके, यहां उनके वोट मांगे जा रहे थे… ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अलग किया जाएगा. गृह मंत्री पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. बेहतर होगा यदि वो स्वेच्छा से अपने देश लौट जाएं… अन्यथा सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।  हकीमपुर चेक पॉइंट पर प्रवासियों की भीड़                     उत्तरी 24 परगना के बशीरहाट सब-डिवीजन में स्थित हकीमपुर चेकपॉइंट पर, मंगलवार सुबह सौ से ज्यादा बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं इकट्ठा हुए. ये सभी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके वापस अपने देश लौटना चाहते है।  दलाल की मदद से आए भारत              हकीमपुर चेकपॉइंट के पास अपने दो बच्चों के साथ बैठीं 36 वर्षीय सबीना खातून ने बताया कि सालों पहले वह दलालों के जरिए गैर-कानूनी तौर पर भारत में दाखिल हुई थी और बाद में एक भारतीय नागरिक से शादी कर ली. और उसने अपने पति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके RG कर अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया था. अब नए कानून ने उन्हें एक दिल तोड़ने वाले मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. क्योंकि उसका पति एक भारतीय नागरिक है, इसलिए वह उनके साथ नहीं जा सकता. सबीना और उसके बेबस बच्चे सीमा पर अकेले इंतजार कर रहे हैं. "सतखिरा में मेरा परिवार तो है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे मिल पाएंगे," सबीना अपने बच्चों की ओर देखते हुए आंखों में आंसू भरकर कहती है. उसका सवाल है, 'क्या मेरे बच्चे कभी अपने पिता को दोबारा देख पाएंगे?' बॉर्डर चेकपॉइंट के पास जमा हुई भारी भीड़ बंगाल में जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है. इसके साथ ही होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचती नजर आ रही है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।  1. अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कड़े निर्देश दिए हैं. मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में 'होल्डिंग सेंटर' बनाए गए हैं. पकड़े गए संदिग्ध घुसपैठियों को जेल भेजने के बजाय 30 दिनों तक इन सेंटर्स में रखकर उनकी पहचान और बायोमेट्रिक जांच की जाएगी. इसके बाद उन्हें बीएसएफ (BSF) को सौंपकर उनके देश वापस भेजा जाएगा. डर के कारण कई घुसपैठिए वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे हैं।  2. सीएए (CAA) के तहत नागरिकता: बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों के लिए सीएए (CAA) सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं. इन सेंटर्स के माध्यम से उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।  3. 5 रुपये में 'माछ-भात' योजना और नई पाबंदियां: चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करते हुए, नई सरकार ने पूरे राज्य में 400 कैंटीन खोलने का फैसला किया है, जहाँ 5 रुपये में मछली-चावल (माछ-भात) मिलेगा. इसके अलावा, स्कूल, कॉलेज और मंदिरों के 1 किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।  4. टीएमसी (TMC) नेताओं पर जनता का आक्रोश: वसूली, भ्रष्टाचार और बाहुबल के आरोपों के चलते टीएमसी नेताओं के खिलाफ आम लोगों में भारी गुस्सा है. कुछ नेताओं के घरों से भारी मात्रा में कैश मिला है, तो कई नेताओं को जनता द्वारा पीटे जाने और कोर्ट में 'चोर-चोर' के नारे लगने की खबरें हैं।  5. टीएमसी में भारी टूट और बगावत की अटकलें: टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार और पार्टी के दो विधायक मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए, जिससे टीएमसी में बड़ी बगावत की अटकलें तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि 60 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं और टीएमसी के 12 से 20 सांसद एक साथ बीजेपी में जाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) से बचा जा सके।  जो CAA के दायरे से बाहर हैं, उन्हें माना जाएगा घुसपैठिया     बीएसएफ के सीनियर अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक मीटिंग में बोलते हुए सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के दायरे से बाहर हैं, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा. उन्हें पुलिस गिरफ्तार करके बीएसएफ को सौंप देगी.  इसके साथ ही राज्य सरकार ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की पहल शुरू कर दी है, जिससे संदिग्ध अवैध प्रवासियों को कुछ वक्त के लिए वहां रखा जा सके और उन विदेशी कैदियों को रिहा किया जा सके, जो देश-निकाला या अपने देश वापसी का इंतजार कर रहे हैं। 

दिग्विजय सिंह के बयान से बढ़ा सियासी विवाद, BJP ने साधा निशाना

 भोपाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता से कहीं ज्यादा खतरनाक बहुसंख्यक सांप्रदायिकता होती है। भोपाल में बुधवार को पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बयान दिया, जिसके बाद राजनीति गरमा गई है। नेहरू के विचारों का हवाला देकर कही यह बात नेहरू के विचारों का हवाला देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू मानते थे कि सांप्रदायिकता समाज में नफरत फैलाती है। उन्होंने आगे कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग की सांप्रदायिकता से ज्यादा खतरनाक बहुसंख्यक सांप्रदायिकता होती है और आज देश के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है।  

HDFC Bank पर बढ़ा संकट! ₹45 करोड़ ट्रांजैक्शन मामले की जांच से शेयर बाजार में मचा हड़कंप

मुंबई भारत के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC (HDFC Bank) को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आने के बाद शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। बुधवार को बैंक के शेयर करीब 2% तक टूट गए और इंट्राडे कारोबार में ₹761 के स्तर तक पहुंच गए। गिरावट की वजह एक कथित आंतरिक जांच बताई जा रही है, जिसमें ₹45 करोड़ के भुगतान को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। यह मामला बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियमों के पालन को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। हालांकि, HDFC बैंक ने पेमेंट संबंधित गड़बड़ी की आशंकाओं और मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आइए जरा विस्तार से इस मामले की गहराई को समझते हैं।  रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Maharashtra State Road Development Corporation) यानी MSRDC से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक ने इस सरकारी एजेंसी को तय ब्याज दर से ज्यादा रिटर्न देने के लिए कथित तौर पर एक अलग व्यवस्था बनाई। कहा जा रहा है कि अतिरिक्त ब्याज सीधे खाते में देने के बजाय इसे मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया और रोड सेफ्टी कैंपेन के नाम पर कुछ वेंडर्स के जरिए भुगतान किया गया। बताया जा रहा है कि बैंक के मार्केटिंग विभाग की FY25 की इंटरनल ऑडिट के दौरान इस लेनदेन पर सवाल उठे। ऑडिट रिपोर्ट में विभाग की कार्यप्रणाली को असंतोषजनक बताया गया, जिसके बाद बैंक की ऑडिट कमेटी ने आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू करने का फैसला लिया। इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि कथित फैसलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक के CEO शशिधर जगदीशन (Sashidhar Jagdishan) उन चर्चाओं में शामिल थे, जिनमें MSRDC को अतिरिक्त रिटर्न देने के विकल्पों पर विचार हुआ था। हालांकि, अभी तक बैंक की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक गलती स्वीकार नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार साल 2021 में HDFC बैंक ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट को आकर्षित करने की कोशिश की थी। उस समय बैंक सेविंग अकाउंट पर लगभग 3.5% ब्याज दे रहा था, जबकि दूसरी वित्तीय संस्थाएं 6% या उससे ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रही थीं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि MSRDC ने लगभग 6.01% रिटर्न की मांग रखी थी, जिसके बाद बैंक के अंदर विशेष व्यवस्था तैयार की गई। बताया जा रहा है कि बैंक ने कुछ समय के लिए 4.5% तक का स्पेशल इंटरेस्ट रेट भी मंजूर किया था, लेकिन अपेक्षित डिपॉजिट नहीं आने के बाद यह व्यवस्था बंद कर दी गई। इसके बाद कथित तौर पर अतिरिक्त ब्याज को मार्केटिंग स्पेंड के जरिए एडजस्ट करने की योजना बनाई गई। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कई दस्तावेज लीगल और कंप्लायंस टीम से बिना मंजूरी के तैयार किए गए थे। साथ ही RBI के नियमों के संभावित उल्लंघन की बात भी कही गई है। नियमों के मुताबिक बैंक किसी खास ग्राहक को अलग से तय ब्याज दर नहीं दे सकते। वहीं, बैंक की एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन पॉलिसी के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है। फिलहाल, इस मामले बैंक ने खारिज कर दिया है। मामले पर बैंक का आधिकारिक बयान HDFC बैंक ने बुधवार को ₹45 करोड़ पेमेंट मामले को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बैंक ने कहा कि उसके पास मजबूत आंतरिक निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं, जो सभी प्रक्रियाओं को तय नियमों के तहत संचालित करते हैं। बैंक के प्रवक्ता ने कहा, “हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर लगाए गए किसी भी गलत काम या जिम्मेदारी से जुड़े आरोपों को सख्ती से खारिज करते हैं। सभी मामलों को स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संभाला जाता है और किसी भी आंतरिक समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।” बैंक की यह सफाई उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ने ₹45 करोड़ के भुगतान की औपचारिक आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू की है। शेयर परफॉर्मेंस हालिया इंटरनल जांच से जुड़ी खबरों के बाद निवेशकों में थोड़ी चिंता बढ़ी है, जिसका असर शेयर पर साफ दिखाई दिया। HDFC बैंक के शेयर में आज 27 मई 2026 दबाव देखने को मिला और NSE पर यह स्टॉक 2.22% की गिरावट के साथ ₹761.60 पर बंद हुआ। इस खबर के सामने आने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बैंकिंग सेक्टर में भरोसा सबसे बड़ा आधार माना जाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिर भी इस पूरे मामले ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग पारदर्शिता पर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

नई दिल्ली में अवशेषों का 29 मई को सार्वजनिक दर्शन, 31 मई को मंगोलिया में ऐतिहासिक प्रदर्शनी का होगा आयोजन

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष पहल पर सांची स्तूप से भगवान बुद्ध के परम शिष्य अरिहंत, सारिपुत्र एवं महामोद्ल्यायन के पवित्र अवशेष सार्वजनिक दर्शन के लिये मंगोलिया भेजे जा रहे हैं। राजाभोज विमान तल पर गुरुवार, 28 मई को इन पवित्र अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ विशेष विमान द्वारा नई दिल्ली के लिए रवाना किया जाएगा। पहल संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार), पर्यटन और संस्कृति, महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया और इंटरनेशनल बौद्ध कन्फेडरेशन (IBC) के संयुक्त समन्वय से आयोजित की जा रही है। इस ऐतिहासिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करना, साझा आध्यात्मिक विरासत को मजबूत करना और बौद्ध तीर्थ पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है। यह पहल केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली में अवशेषों का सार्वजनिक दर्शन अपर मुख्य सचिव संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व और सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में 29 मई को पवित्र अवशेषों को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा जाएगा। इस अवसर पर ‘महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया’ के पूज्य भिक्षु पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे। भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से 30 मई को मंगोलिया के लिए होंगे रवाना पवित्र अवशेषों को 30 मई के दिन भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया के लिए रवाना किया जाएगा।इस पवित्र यात्रा के दौरान धार्मिक परंपराओं की पवित्रता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये मध्यप्रदेश पर्यटन और महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया का एक प्रतिनिधि दल अवशेषों के साथ रहेगा। मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में 31 मई को पवित्र अवशेषों का होगा सार्वजनिक दर्शन मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में 31 मई 2026 से शुरू होने वाली यह प्रदर्शनी अनुमानित रूप से 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं, भिक्षुओं और पर्यटकों को आकर्षित करेगी। इससे भारत के बौद्ध तीर्थ सर्किट, विशेषकर सांची जैसे स्थलों में वैश्विक रुचि बढ़ेगी और मंगोलिया की अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ाव भी और मजबूत होगा। भारत की बौद्ध विरासत को मंगोलिया जैसे बौद्ध परंपरा से जुड़े देश में ले जाकर यह भारत की “बौद्ध धर्म की जन्मभूमि” के रूप में भूमिका को और सशक्त करती है तथा अंतर्राष्ट्रीय तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देती है। मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर मध्यप्रदेश के लिए यह वैश्विक मंच पर अपने बौद्ध सर्किट को स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या, प्रवास अवधि और सांस्कृतिक सहभागिता में वृद्धि होगी। यह पहल दोनों देशों के मठों, सांस्कृतिक संस्थानों और संग्रहालयों के बीच निरंतर सहयोग के नए मार्ग भी खोलेगी, जिससे साझा विरासत पर आधारित दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंध विकसित होंगे। सांची स्तूप: यूनेस्को विश्व धरोहर और आस्था का वैश्विक केंद्र यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'सांची स्तूप' विश्व के सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन बौद्ध स्थलों में से एक है।यहाँ संरक्षित पवित्र अवशेषों को भगवान बुद्ध के प्रतीक स्वरूप अत्यंत श्रद्धा और पूजनीय भाव से देखा जाता है। भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्य सारिपुत्र और महामौद्गल्यायन थे, जिन्हें बुद्ध का "अग्र युग्म" माना जाता था। सारिपुत्र को प्रज्ञा (बुद्धिमत्ता) में और मौद्गल्यायन को अलौकिक शक्तियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त था। दोनों ही शिष्य बौद्ध संघ के अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ थे और उन्होंने धम्म के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई।इनकी शिक्षाएँ आज भी बौद्ध दर्शन और साधना परंपरा में अत्यंत सम्मान के साथ स्मरण की जाती हैं।विशेष बात यह है कि सांची के 30 किमी के दायरे में कई ऐसे महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल मौजूद हैं, जो भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की गूंज आज भी संजोए हुए हैं।  

भ्रष्टाचार और लापरवाही पर गिरी गाज, राजस्व विभाग में सख्त कार्रवाई

पटना  बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने भ्रष्टाचार को लेकर कड़ा रुख अपना रखा रहा है। भ्रष्टाचार को लेकर नीतीश कुमार की तरह सम्राट सरकार भी जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इसी के तहत आज बुधवार को 14 अंचल अधिकारियों (सीओ) पर कार्रवाई की गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने एक साथ 14 सीओ पर एक्शन लेते हुए सस्पेंड कर दिया गया है। 14 अंचल अधिकारियों पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने लिया एक्शन मिली जानकारी के मुताबिक, मिली जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग मामलों में ये कार्रवाई की गई है। ये कार्रवाई भ्रष्टाचार के मामले में, काम में लापरवाही के मामले में, काम में अनियमितता को लेकर भी कार्रवाई की गई है। मंत्री दिलीप जायसवाल ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े 14 अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई की है। दानापुर, पाटलिपुत्र, राघोपुर सहित 14 सीओ के खिलाफ हुई कार्रवाई मंत्री दिलीप जायसवाल ने पत्थरघट के सीओ राकेश कुमार, पाटलिपुत्र के सीओ अनुज कुमार, दानापुर के सीओ चंदन कुमार, सिसवन के सीओ पंकज कुमार, राघोपुर के अंचल अधिकारी संजीव कुमार त्रिवेदी सहित 14 सीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की है। लापरवाही और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: मंत्री दिलीप जायसवाल इस मामले पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लापरवाही और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि दो ढाई महीने तक विभाग में हड़ताल चली। इस वजह से पूरे विभाग में करीब 37 लाख आवेदन लंबित थे। जब मैंने इस विभाग का कार्य संभाला तो इसे एक चुनौती के रूप में लिया। अच्छा काम करने वालों को सम्मानित किया जाएगा: दिलीप जायसवाल दिलीप जायसवाल ने कहा कि हम सीओ के कामों की समीक्षा कर रहे हैं। जो अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। और जो काम में लापरवाही कर रहे हैं, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।

योगी सरकार का बड़ा कदम: ‘चहक’ और ‘कलांकुर’ से निखरेगी बच्चों की शुरुआती शिक्षा

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के बाद अब प्री-प्राइमरी शिक्षा के ढांचे को भी जड़ से मजबूत करने में जुट गई है। राज्य के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल और गतिविधि आधारित आधुनिक शिक्षण सामग्री का वितरण शुरू कर दिया गया है। ‘चहक-1, 2, 3’, ‘कदम’, ‘कलांकुर’, और 'बिग बुक' जैसी विशेष तौर पर तैयार सामग्रियों के माध्यम से अब प्रदेश के लाखों नौनिहालों को उनकी शुरुआती शिक्षा का एक नया, रचनात्मक और बेहतर माहौल मिलने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के विजन को मिली गति योगी सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके तहत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को बच्चों के सीखने की मुख्य बुनियाद माना गया है। उत्तर प्रदेश में अब आंगनबाड़ी केंद्रों को सिर्फ पोषण और बुनियादी देखभाल तक सीमित न रखकर, उन्हें आधुनिक और गतिविधि आधारित शिक्षा के जीवंत केंद्रों के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है 'चहक' और 'कलांकुर' से निखरेगी बच्चों की रचनात्मकता विशेषज्ञों के अनुसार, 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के मानसिक, भाषाई और सामाजिक विकास के लिए सबसे संवेदनशील समय होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए 'चहक' श्रृंखला की पुस्तिकाएं बच्चों में भाषा के विकास और बुनियादी दक्षताओं को बढ़ाएंगी, जबकि ‘कदम’ और ‘कलांकुर’ जैसी सामग्री उनकी सोच, जिज्ञासा और रचनात्मकता को नई उड़ान देगी। इसके साथ ही, बड़ी तस्वीरों वाली 'बिग बुक' और 'टीचर गाइड' के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी शिक्षण की आधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। किताब वितरण ऐप' से होगी डिजिटल मॉनिटरिंग पूरी वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए योगी सरकार ने तकनीक का सहारा लिया है। इस अभियान के तहत सामग्री के वितरण की रीयल-टाइम निगरानी के लिए ‘किताब वितरण ऐप’ लागू किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से लेकर डायट मेंटर्स और प्रधानाध्यापकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे सीधे शासन स्तर पर यह ट्रैक किया जा सके कि किस बालवाटिका तक सामग्री पहुंच चुकी है। प्री-प्राइमरी शिक्षा को मिला नया संस्थागत स्वरूप उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब प्री-प्राइमरी शिक्षा को इतने व्यापक पैमाने पर एक मजबूत संस्थागत स्वरूप दिया जा रहा है। पहले जहाँ सरकारी तंत्र का पूरा ध्यान केवल प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर केंद्रित रहता था, वहीं अब बच्चों की शुरुआती नींव को मजबूत करने पर समान प्राथमिकता दी जा रही है। 'ऑपरेशन कायाकल्प' और 'निपुण भारत' जैसी बड़ी योजनाओं की सफलता के बाद, प्री-प्राइमरी स्तर पर किया जा रहा यह सुधार आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को देश के शिक्षा मॉडल में सबसे आगे खड़ा कर सकता है। कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह कदम ग्रामीण और वंचित परिवारों के बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगा, जिन्हें अब निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बचपन में ही आधुनिक और रचनात्मक शिक्षा का अधिकार मिल रहा है।