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बकरीद से पहले ताजमहल विवाद: संरक्षित स्मारक के भीतर आयोजन की जांच शुरू

आगरा आगरा के ताजमहल में भजन-कीर्तन किए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। बकरीद से एक दिन पहले सामने आए इस वीडियो में कुछ लोग ताजमहल की मुख्य गुंबद के नीचे बैठकर भजन-कीर्तन करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। एएसआई अधिकारी कलन्दर बिन्द ने बताया कि वायरल वीडियो की जानकारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को भेज दी गई है और मामले की जांच कराई जा रही है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वीडियो कब का है और इसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता और घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। ताजमहल में भजन-कीर्तन का वीडियो वायरल करीब एक मिनट दो सेकंड के वीडियो में भगवा वस्त्र पहने कुछ लोग भजन-कीर्तन करते नजर आ रहे हैं। वहीं आसपास बैठे अन्य लोग तालियां बजाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति भी यह कहता सुनाई दे रहा है कि ताजमहल में भजन-कीर्तन हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।  आगरा के ताजमहल में पर्यटकों के भजन-कीर्तन करने का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें 30-35 लोग मुख्य मकबरे के नीचे चमेली फर्श पर बैठकर कीर्तन करते दिख रहे हैं। ये वीडियो एक मिनट दो सेकेंड का है। CISF के हवाले ताजमहल की सुरक्षा ताजमहल देश के सबसे संवेदनशील और संरक्षित स्मारकों में गिना जाता है। इसकी आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ के पास है, जबकि बाहरी सुरक्षा व्यवस्था उत्तर प्रदेश पुलिस और ताज सुरक्षा पुलिस संभालती है। परिसर में प्रवेश से पहले पर्यटकों की एयरपोर्ट जैसी जांच की जाती है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे, मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनिंग और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रहती है। ऐसे में वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्मारक के भीतर इस तरह का आयोजन कैसे हुआ। ताजमहल को लेकर कई बार उठे विवाद ताजमहल को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुके हैं। कुछ हिंदुत्ववादी संगठन ताजमहल को तेजोमहालय बताते हुए यहां धार्मिक अनुष्ठान कराने की मांग करते रहे हैं। पूर्व में ताजमहल परिसर में भगवा झंडा फहराने और शिव चालीसा पाठ करने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। शाहजहां उर्स के दौरान भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवाद होते रहे हैं। जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसियां वायरल वीडियो के बाद लोगों का कहना है कि यदि संरक्षित स्मारक के भीतर इस प्रकार का आयोजन हुआ है तो यह सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन दोनों के लिए गंभीर विषय है। फिलहाल एएसआई और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं।

57 हजार किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित, अगस्त तक जारी करने का लक्ष्य

चंडीगढ़  हरियाणा में अब 45 दिन के अंदर बोरवेल लगाने की अनुमति दी जाएगी। जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण ने भूजल निकालने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति देने से जुड़े कार्यों को सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल कर लिया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। पदाभिहित अधिकारी के रूप में मुख्य तकनीकी अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि निर्धारित समयावधि में अनापत्ति प्रमाणपत्र और अनुमति जारी कर दी जाए। 45 दिन में बोरवेल की अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी मुख्य जल विज्ञानी के पास अपील की जा सकेगी। अगर फिर भी अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ तो द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी के रूप में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मामले को निपटाएंगे। वहीं, प्रदेश में अब भी 57 हजार किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें से 13 हजार 360 किसान पूरा शुल्क जमा करा चुके हैं, जिन्हें अगस्त अंत तक ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। 31 दिसंबर 2023 तक किए गए आवेदनों के लिए मांग नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पूरी लागत राशि जमा करा चुके उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 4241 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 9119 किसानों को छह महीने में बिजली कनेक्शन जारी कर दिए जाएंगे। 10 बीएचपी तक आवेदन करने वालों को आफ-ग्रिड सोलर पंप दिए जा रहे हैं। इसके अलावा एक जनवरी 2024 से 31 जनवरी 2026 के बीच आवेदन करने वाले 43 हजार 527 किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन लंबित हैं। इनमें उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के 16 हजार 323 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 27 हजार 204 किसान शामिल हैं।  

LG–सांसद बैठक: DDA बनाएगा 3 हजार पार्किंग स्थल, जाम से मिलेगी राहत

नई दिल्ली  राजधानी में पार्किंग और उसकी वजह से लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। LG तरनजीत सिंह संधू ने DDA को दिल्ली में तीन हजार पार्किंग जगहों की पहचान करके काम शुरू करने का निर्देश दिया है। LG ने बुधवार को इसे लेकर सभी सात लोकसभा सांसदों और DDA के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाई लेवल बैठक की है। बैठक में राजधानी के विकास, नागरिक सुविधाओं और जमीनी स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार को लेकर चर्चा हुई।  LG की सांसदों के साथ हुई बैठक में बताया गया कि पार्किंग की समस्या से निजात के लिए DDA अगले एक साल के भीतर दिल्ली भर में 3 हजार से ज्यादा खाली भूखंडों की पहचान करेगा, जिनका इस्तेमाल सरफेस पार्किंग के रूप में किया जाएगा। फिलहाल 232 खाली पड़े DDA के प्लॉट को पार्किंग में बदलने को लेकर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि इन भूखंडों की पहचान के बाद करीब एक लाख गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था की जा सकेगी। पार्किंग के लिए जिन 232 जगहें चिह्नित की गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा 98 जगह द्वारका जोन में हैं। इसके अलावा 53 उत्तर जोन, 30 रोहिणी जोन, 28 पूर्वी जोन और 23 दक्षिण जोन में है। LG तरनजीत सिंह संधू ने सातो सांसदों के साथ की बैठक DDA अधिकारियों का कहना है कि इससे पार्किंग संकट कम होने के साथ ट्रैफिक जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी। बैठक में पार्किंग और ट्रैफिक के अलावा अतिक्रमण, खाली पड़ी DDA जमीनों के इस्तेमाल और DDA पार्कों की देखरेख जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सभी सांसदों ने अवैध कब्जा और अतिक्रमण को बड़ी समस्या बताते हुए कार्रवाई में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया। सूत्रों की मानें तो LG और सांसदों के साथ बैठक अब नियमित आयोजित की जाएगी। बैठक में मौजूद साउथ दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि बैठक में हमने DDA की अतिक्रमण वाली जमीनों को खाली करने के साथ-साथ साउथ दिल्ली में 69 एफ्लुएंट कॉलोनियों को नियमित करने, ग्रामसभा की जमीन पर गांव वासियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने और ग्राम सभा की खाली पड़ी जमीन पर पार्कों के विकास का मुद्दा उठाया।  

ग्रामीण महिलाओं ने बदली गांव की तस्वीर, जीविका दीदियां बन रहीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

बगहा/पश्चिम चंपारण. मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों को सशक्त बनाने के लिए एक से बढ़कर एक योजनाएं शुरू कीं। उनको आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में की गई पहल का प्रभाव अब जमीन पर दिखने लगा है। बगहा-दो प्रखंड में जीविका समूह से जुड़ीं महिलाएं सिर्फ पोशाक नहीं सिल रहीं, बल्कि अपने श्रम और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। 30 हजार सेट पोशाक तैयार करने का लक्ष्य आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक तैयार करने का जिम्मा मिलने के बाद यहां की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ सामाजिक बदलाव की वाहक भी बन रही हैं। बगहा दो प्रखंड के 370 आंगनबाड़ी केंद्रों के करीब 15 हजार बच्चों के लिए 30 हजार सेट पोशाक तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्य में जीविका समूह की करीब 150 महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बच्चों की जरूरत और निर्धारित मानकों के अनुसार चार, पांच और छह वर्ष आयु वर्ग के लिए पोशाक तैयार की जा रही है। लड़कों के लिए हाफ शर्ट और फुल पैंट, जबकि लड़कियों के लिए दो शर्ट और स्कर्ट तैयार किए जा रहे हैं। सिलाई और फिनिशिंग से रोजगार इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए विभाग की ओर से कपड़ों की कटिंग कर जीविका कार्यालय को उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि सिलाई और फिनिशिंग का कार्य महिलाएं कर रही हैं। प्रत्येक तैयार सेट पर 55 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बन रहा है। अब तक 13,274 सेट पोशाक तैयार की जा चुकी है। महिला सशक्तीकरण के केंद्र बने गांव दुधौरा, सेमरा, हरनाटांड़ और वाल्मीकिनगर स्थित चार सिलाई केंद्र आज महिला सशक्तीकरण के केंद्र बन चुके हैं। यहां मशीनों की आवाज केवल उत्पादन का संकेत नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों की पहचान बन गई है। जीविका दीदी सावित्री देवी का कहना है कि पहले उनकी भूमिका केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थी, लेकिन प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में आर्थिक सहयोग भी कर रही हैं। हरनाटांड़ सिलाई केंद्र की जीविका दीदी कलावती देवी इस बदलाव की प्रेरक बनकर उभरी हैं। वे महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। उनके प्रयासों से कई महिलाएं कौशल सीखकर आज नियमित आय अर्जित कर रही हैं। अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा – बगहा-दो प्रखंड की यह पहल ग्रामीण विकास की नई दिशा दिखा रही है। जीविका समूहों को केवल स्वरोजगार तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। यदि अवसर, प्रशिक्षण और जिम्मेदारी मिले तो ग्रामीण महिलाएं रोजगार सृजन और सामाजिक बदलाव की सबसे मजबूत धुरी बन सकती हैं। – हिमांशु कुमार सैनी, बीपीएम( ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर), बगहा दो प्रखंड

भीषण गर्मी के बीच फतेहगढ़ साहिब में अकेले रह रहे बुजुर्ग की संदिग्ध मौत

फतेहगढ़ साहिब. पंजाब में पड़ रही अत्यधिक भीषण गर्मी के बीच जिला फतेहगढ़ साहिब के अंतर्गत आते गांव बागड़ियां से एक बेहद दुखद समाचार सामने आया है। यहाँ बंद कमरे में अत्यधिक गर्मी और सफोकेशन (घुटन) होने के कारण एक 68 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। मृतक की पहचान अमरीक सिंह के रूप में हुई है, जो घर में बिल्कुल अकेले रहते थे।घटना के संबंध में जानकारी देते हुए थाना मुलेपुर के सहायक थानेदार जगरूप सिंह ने बताया कि बुजुर्ग अमरीक सिंह अपने घर के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करके सोए हुए थे। 4 दिन तक दरवाजा नहीं खोला, तो पड़ोसियों और गांव वालों को किसी अनहोनी का शक हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर कमरे का कुंडा (दरवाजा) तोड़ा। अंदर जाने पर ग्रामीणों के होश उड़ गए; बुजुर्ग अमरीक सिंह का शव पड़ा हुआ था और उनका पूरा शरीर गर्मी के कारण पसीने से बुरी तरह तर-बतर था। सूचना मिलते ही थाना मुलेपुर की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। जगरूप सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखने से यही प्रतीत होता है कि कमरे में वेंटिलेशन न होने और अत्यधिक गर्मी व घुटन के कारण बुजुर्ग की जान गई है। हालांकि, मौत के असली और सटीक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल फतेहगढ़ साहिब में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अगली कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

जंगल के पानी में जहर की आशंका! दल्लीखोली में मोर, सिवेट और पक्षियों की मौत से हड़कंप

खैरागढ़. खैरागढ़ जिले के ग्राम दल्लीखोली– लछना के जंगल से सामने आए एक भयावह घटनाक्रम ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। जंगल के भीतर स्थित एक जलस्रोत के आसपास बड़ी संख्या में पक्षियों और जंगली जानवरों के शव मिलने से वन विभाग सहित वन्यजीव प्रेमियों में चिंता और आक्रोश का माहौल है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया। जानकारी के अनुसार, वन्यजीव एवं प्रकृति प्रेमी मुकेश वर्मा दोपहर के समय बर्ड वॉचिंग और नेचर फोटोग्राफी के लिए दल्लीखोली के जंगल पहुंचे थे। जंगल के भीतर भ्रमण के दौरान उन्हें सबसे पहले एक ग्रेटर रैकेट- टेल्ड ड्रॉन्गो मृत अवस्था में दिखाई दिया। जब उन्होंने आसपास का क्षेत्र देखा तो वे स्तब्ध रह गए। जलस्रोत के किनारे कई पक्षी और वन्यजीव मृत पड़े थे। मुकेश वर्मा ने घटनास्थल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। वायरल वीडियो में एक नर मोर, दो मादा मोर, तीन एशियन पाम सिवेट सहित कई दुर्लभ पक्षियों के शव दिखाई दे रहे हैं। इनमें रुफस ट्रीपाई, ओरिएंटल मैगपाई रॉबिन और जंगल आउलेट जैसे पक्षियों भी मृत मिलने की बात सामने आई है। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है। कि एक ही स्थान पर इतने अलग-अलग वन्यजीवों की मौत आखिर कैसे हुई। मुकेश वर्मा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आशंका जताई है कि जंगल के जलस्रोत में किसी जहरीले रसायन या पदार्थ को मिलाया गया हो सकता है। संभावना जताई जा रही है कि दूषित पानी पीने के बाद इन बेजुबान वन्यजीवों की मौत हुई होगी हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीम तत्काल सक्रिय हो गई है। विभाग द्वारा घटनास्थल से पानी और अन्य नमूनों को जांच के लिए संग्रहित किया गया है। मृत वन्यजीवों का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी भी की जा रही है. ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

सिद्धारमैया ने सौंपा इस्तीफा, बोले- पार्टी ने जो कहा वही किया; अब DK शिवकुमार होंगे CM

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है. बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल इसे जल्द ही स्वीकार कर लेंगे. सत्ता परिवर्तन के इस बड़े कदम के बीच सिद्धारमैया ने यह भी साफ किया कि राज्य में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत बरकरार है, इसलिए संविधान के अनुसार नई सरकार बनाने का अधिकार भी उनकी पार्टी को ही मिलना चाहिए. इस बड़े सियासी उलटफेर के दौरान उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का आभार जताया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का यह अवसर प्रदान किया था. अब पूरे राज्य की नजरें राजभवन और अगले मुख्यमंत्री के चेहरे पर टिक गई हैं। कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे सत्ता हस्तांतरण के विवाद पर आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने निर्णायक कदम उठा लिया है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी. बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था, ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था. कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ‘डेक्‍कन हेराल्‍ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान सिद्दारमैया से कहा कि पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पुराने वादे का सम्मान जरूरी है. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताए जा रहे हैं. राहुल गांधी ने दोनों नेताओं (सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार) से संयुक्त और अलग-अलग बैठकें कर पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की। बताया जाता है कि बैठक के दौरान सिद्दारमैया ने यह तर्क दिया कि 2025 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ था, लेकिन राहुल गांधी अपने रुख पर कायम रहे. पार्टी नेतृत्व ने यह भी कहा कि सिद्दारमैया पहले ही आठ वर्षों से अधिक समय तक मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं, इसलिए अब दूसरे नेताओं को अवसर देने का समय है. सूत्रों के मुताबिक, बाद में सिद्दारमैया ने वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला से चर्चा की, जिन्होंने भी हाईकमान के निर्देश को मानने की सलाह दी. शाम को सिद्दारमैया ने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने करीबी सहयोगियों से मुलाकात की। कुछ मंत्रियों ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी, लेकिन सिद्धारमैया ने साफ कहा कि वह अब और इंतजार नहीं करेंगे. सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया ने अपने सहयोगियों से कहा, ‘मैं शुरू से कहता आया हूं कि राहुल गांधी जब कहेंगे, मैं इस्तीफा दे दूंगा. अब जब उन्होंने कहा है, तो मैं तुरंत पद छोड़ दूंगा। कांग्रेस के लिए अहम कांग्रेस नेतृत्व इस फैसले को पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक नियंत्रण के लिहाज से अहम मान रहा है. 2014 के बाद कांग्रेस कई राज्यों में क्षेत्रीय नेताओं पर नियंत्रण बनाए रखने में संघर्ष करती रही है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता साझा करने के वादों के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन नहीं हो सका था. ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान का यह कदम पार्टी के भीतर स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व के फैसले सर्वोपरि होंगे।  इस्तीफा देने के प्रेस को संबोधित करते हुए भावुक हुए सिद्धारमैया सीएम सिद्दारमैया का इस्तीफा: कर्नाटक के राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है. कांग्रेस आलाकमान के निर्देशानुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए सिद्धारमैया काफी भावुक नजर आए. उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘हाई कमान के पहले ही इस्तीफा देने के लिए कहने के बाद, मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है. मुझे पूरा भरोसा है कि जब राज्यपाल आएंगे, तो वे इसे स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि यह संविधान के अनुसार ही किया जाना है.’ सिद्धारमैया ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है और संवैधानिक रूप से नई सरकार बनाने का अधिकार भी कांग्रेस को ही मिलना चाहिए. इस अवसर पर उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का मौका दिया।

EPFO का बड़ा बदलाव! अब UPI से होगा PF Withdrawal, 75% लिमिट ने सबको चौंकाया

नई दिल्ली  देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO जल्द ही एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। EPFO 3.0 के तहत PF निकालने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाली है। अब तक PF का पैसा निकालने के लिए लंबी प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य सीधे UPI के जरिए अपने बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। इससे न केवल पेपरवर्क कम होगा, बल्कि PF निकालने में लगने वाला समय भी काफी घट जाएगा। आइए इसके बारे में जरा विस्तार से समझते हैं। सरकार और EPFO का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाना है, ताकि कर्मचारियों को अपने ही पैसे के लिए बार-बार ऑफिस के चक्कर न लगाने पड़ें। खास बात यह है कि इस सुविधा की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और इसे जल्द शुरू किया जा सकता है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट घोषित नहीं की गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर EPFO सदस्य अपने खाते से कितना पैसा निकाल पाएंगे? नई व्यवस्था के अनुसार सदस्य अपने कुल EPF बैलेंस का लगभग 50% से 75% तक हिस्सा निकाल सकेंगे। हालांकि, पूरा पैसा निकालने की अनुमति हर स्थिति में नहीं होगी। EPFO के नियमों के मुताबिक कम से कम 25% राशि खाते में बनी रहना जरूरी होगा, ताकि भविष्य के लिए एक सुरक्षा फंड बचा रहे, यानी अगर किसी सदस्य के खाते में 4 लाख रुपये हैं, तो वह अधिकतम करीब 3 लाख रुपये तक निकाल सकता है, जबकि कम से कम 1 लाख रुपये खाते में रहने होंगे। इसके अलावा EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा भी बढ़ा दी है। पहले जहां केवल 1 लाख रुपये तक का क्लेम जल्दी सेटल होता था, अब यह सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने और बनाने जैसी जरूरतों के लिए सदस्य अब ज्यादा रकम कम समय में निकाल पाएंगे। कई मामलों में पैसा सिर्फ 3 दिनों के भीतर खाते में पहुंच सकता है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में बताया कि UPI आधारित PF निकासी सिस्टम का परीक्षण पूरा हो चुका है। नई सुविधा के तहत सदस्य अपने खाते में उपलब्ध निकासी योग्य राशि को देख पाएंगे और UPI PIN की मदद से तुरंत ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगा, जिसके बाद सदस्य चाहे तो ऑनलाइन पेमेंट करें या ATM से कैश निकाल लें। EPFO 3.0 का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को छोटे-छोटे खर्चों या आपातकालीन जरूरतों के लिए लंबे इंतजार का सामना नहीं करना पड़ेगा। वर्तमान में PF क्लेम प्रोसेस में कई बार हफ्तों का समय लग जाता है, लेकिन नई व्यवस्था इसे डिजिटल बैंकिंग जितना आसान बना सकती है। देश में EPFO के 7 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं और यह बदलाव करोड़ों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आ सकता है। खासकर युवाओं और डिजिटल पेमेंट इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। आने वाले समय में PF निकालना उतना ही आसान हो सकता है, जितना आज UPI से किसी को पैसे भेजना है।

BJP में बड़ा मंथन! राज्यसभा चुनाव और कैबिनेट विस्तार को लेकर दिल्ली में अहम बैठकें

भोपाल मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती नजर आ रही हैं। संगठन में नई नियुक्तियों और आगामी राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अब मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने भी सियासी गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। इसी बीच मुख्यमंत्री Mohan Yadav का अचानक दिल्ली दौरा कई नए राजनीतिक संकेत दे रहा है। सूत्रों की मानें तो भाजपा नेतृत्व आने वाले दिनों में संगठन और सरकार दोनों स्तर पर बड़े फैसले ले सकता है। राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक बैठकों का दौर पहले से ही जारी है, वहीं प्रदेश मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और विस्तार को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री मोहन यादव का दिल्ली पहुंचना राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। दिल्ली पहुंचकर मुख्यमंत्री ने पार्टी और केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Arjun Ram Meghwal से भी सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की जानकारी स्वयं अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए साझा की। आज नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय विधि और न्याय (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल जी से सौजन्य भेंट की। हालांकि इस मुलाकात को औपचारिक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मान रहे हैं। माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव, संगठनात्मक बदलाव और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर दिल्ली में लगातार मंथन चल रहा है। प्रदेश भाजपा में पिछले कुछ दिनों से जिस तरह नियुक्तियों और बैठकों का सिलसिला बढ़ा है, उसने यह संकेत जरूर दे दिए हैं कि पार्टी आने वाले समय में बड़े राजनीतिक फैसलों की तैयारी में जुट चुकी है। अब सबकी नजर दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगली राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है।

पैरोल खत्म, सीधे जेल पहुंचे आसाराम; राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा में नहीं दी राहत

 जोधपुर नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम एक बार फिर जोधपुर सेंट्रल जेल की सलाखों के पीछे पहुंचने वाले हैं. राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ से बड़ा कानूनी झटका लगने के बाद आसाराम गुरुवार को एयर इंडिया की दिल्ली-जोधपुर फ्लाइट से जोधपुर पहुंच गए हैं. कोर्ट के आदेश के मुताबिक, वे सिविल एयरपोर्ट से सीधे जोधपुर सेंट्रल जेल जा रहे हैं, जहां कुछ ही देर में वे जेल प्रशासन के सामने सरेंडर करेंगे. हाईकोर्ट की डबल बैंच ने बरकरार रखी थी सजा एक दिन पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की याचिका पर अपना अहम फैसला सुनाया था. जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की डबल बैंच ने निचली अदालत द्वारा दी गई 'अंतिम सांस तक आजीवन कारावास' की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा था. कोर्ट ने आसाराम को आंशिक राहत देते हुए सामूहिक दुष्कर्म की धाराओं से भले ही बरी कर दिया हो, लेकिन मुख्य मामले में उम्रकैद की सजा पर कोई ढील नहीं दी थी. इसके साथ ही अदालत ने उन्हें तुरंत सरेंडर करने के सख्त निर्देश दिए थे. पैरोल खत्म, अब सीधे जेल का रास्ता आसाराम पिछले कुछ समय से खराब सेहत और इलाज के आधार पर मिली पैरोल पर जेल से बाहर चल रहे थे. हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद उनकी बाहर रहने की उम्मीदें पूरी तरह टूट गईं. दिल्ली से जोधपुर सिविल एयरपोर्ट उतरते ही सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस बल मुस्तैद हो गए, ताकि कानून-व्यवस्था की कोई स्थिति न बिगड़े. एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही आसाराम का काफिला सीधे सेंट्रल जेल के लिए रवाना हो गया. अब कानूनी विकल्पों के तौर पर आसाराम के पास सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का रास्ता बचा है, लेकिन फिलहाल उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल की उसी कोठरी में वापस लौटना होगा जहां वे साल 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद से बंद हैं.