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जीत के जश्न के बीच अचानक गिर पड़ा टेनिस स्टार, फ्रेंच ओपन में दिखा डराने वाला मंजर

 पेरिस याकूब मेनसिक ने फ्रेंच ओपन 2026 में जीत तो हासिल कर ली, लेकिन मैच खत्म होने के बाद जो दृश्य कोर्ट पर देखने को मिला, उसने खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक सभी को चिंता में डाल दिया. लगभग पांच घंटे तक चले मुकाबले के बाद 20 साल का यह युवा टेनिस स्टार कोर्ट पर ही गिर पड़ा और दर्द से तड़पता नजर आया।  पेरिस की झुलसा देने वाली गर्मी, 33 डिग्री तापमान और बिना किसी छांव के खेला गया यह मुकाबला किसी परीक्षा से कम नहीं था. कोर्ट-6 पर खेले गए इस मुकाबले में मेनसिक ने मारियानो नावोन को 6-3, 2-6, 6-4, 1-6, 7-6 (11) से हराया. मुकाबला 4 घंटे 41 मिनट तक चला और आखिरी पल तक दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला।  पांचवें सेट का टाईब्रेकर शुरू होते-होते मेनसिक का शरीर जवाब देने लगा था. तेज गर्मी और लंबे मुकाबले की वजह से उनके पैरों में बुरी तरह क्रैम्प्स आने लगे. वह मुश्किल से चल पा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. दर्द में कराहते हुए भी वह हर पॉइंट के लिए लड़ते रहे।  टाईब्रेकर में स्कोर 13-11 पहुंचा और जैसे ही मेनसिक ने फोरहैंड विनर लगाकर मैच खत्म किया, वह तुरंत क्ले कोर्ट पर गिर पड़े. जीत का जश्न मनाने की ताकत भी उनके अंदर नहीं बची थी. वह पीठ के बल लेट गए, दोनों हाथों से चेहरा ढक लिया और कुछ देर तक बिल्कुल नहीं उठ पाए।  विपक्षी खिलाड़ी ने बढ़ाया हौसला कुछ सेकेंड बाद याकूब मेनसिक दर्द से अपना पैर पकड़ लिया और मदद का इशारा करने लगे. स्टेडियम में मौजूद दर्शक पूरी तरह खामोश हो गए. हारने के बावजूद मारियानो नावोन ने शानदार खेल भावना दिखाई. वह तुरंत नेट पार करके मेनसिक के पास पहुंचे और उनकी हालत का हाल जाना।  अंपायर भी तेजी से नीचे उतरे और फिजियो को बुलाया गया. करीब एक मिनट तक मेनसिक कोर्ट पर ही पड़े रहे, जिसके बाद मेडिकल टीम पहुंची. उन्हें बर्फ दी गई और धूप से बचाने के लिए छाता लगाया गया. करीब 10 मिनट तक उनका इलाज चलता रहा. हालांकि हालत खराब होने के बावजूद मेनसिक ने व्हीलचेयर लेने से मना कर दिया. वह धीरे-धीरे खुद चलकर कोर्ट से बाहर गए, लेकिन उनकी चाल साफ बता रही थी कि शरीर पूरी तरह टूट चुका है।  अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या मेनसिक तीसरे दौर में खेलने के लिए फिट हो पाएंगे. अगले मुकाबले में उनका सामना दुनिया के नंबर-8 खिलाड़ी एलेक्स डी मिनौर से होना है. दरअसल, इस साल फ्रेंच ओपन में खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ विरोधी खिलाड़ी नहीं, बल्कि पेरिस की खतरनाक गर्मी भी बन गई है. हीटवेव की वजह से कई खिलाड़ी शारीरिक परेशानियों से जूझ रहे हैं।  पूर्व फाइनलिस्ट कैस्पर रूड ने भी खुलासा किया कि उन्हें पहले दौर के मैच में हीटस्ट्रोक जैसा महसूस हुआ था. रूड ने कहा कि चौथे सेट में उन्हें चक्कर आने लगे थे और वह खुद को 'जॉम्बी की तरह' महसूस कर रहे थे। 

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी बोले- शिक्षा, संगठन और संस्कार समाज विकास की सबसे बड़ी ताकत

शिक्षा, संगठन और संस्कार से ही समाज की प्रगति संभव: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ​जांजगीर-चांपा के कापन और बलौदा में सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए वित्त मंत्री ​अघरिया और स्वर्णकार समाज के सामुदायिक भवनों का लोकार्पण ​10वीं और 12वीं के मेधावी छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित ​रायपुर छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी आज जांजगीर-चाम्पा जिले के कापन और नगर पंचायत बलौदा में आयोजित सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कापन में अखिल भारतीय अघरिया समाज के क्षेत्रीय सभा सह सामुदायिक भवन का उद्घाटन किया। वहीं, बलौदा के जंगलवा डबरी में स्वर्णकार समाज के 'स्वर्ण मंडपम' सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। ​शिक्षा और संस्कारों से सशक्त बनेगी नई पीढ़ी         कापन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री चौधरी ने कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, "शिक्षा समाज की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है। नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा, संस्कार और अवसर उपलब्ध कराकर ही समाज को आगे बढ़ाया जा सकता है।" ​उन्होंने आगे कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकजुटता, सकारात्मक सोच और सामुदायिक भावना को मजबूत करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। एकजुटता ही समाज की वास्तविक शक्ति          कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि अघरिया समाज शिक्षा, कृषि और सामाजिक विकास के क्षेत्र में हमेशा अग्रणी रहा है। किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकजुटता में ही निहित होती है। वहीं, पूर्व संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े ने कहा कि यह नवनिर्मित भवन सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन के लिए एक सशक्त मंच साबित होगा। ​बलौदा में 'स्वर्ण मंडपम' का लोकार्पण             नगर पंचायत बलौदा में आयोजित स्वर्ण मंडपम सामुदायिक भवन के लोकार्पण समारोह में वित्त मंत्री ने स्वर्णकार समाज द्वारा सामाजिक विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, पूर्व सांसद श्रीमती कमला देवी पाटले, पूर्व विधायक चुन्नीलाल साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

Giribala Singh Arrest: 6 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद CBI ने किया गिरफ्तार

भोपाल  ट्विशा शर्मा केस में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है।छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ के बाद सीबीआई की टीम ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को सीबीआई की टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा है। वहां उनका मेडिकल करवाया जाएगा। इसके सीबीआई कोर्ट में उनकी पेशी होगी। पूछताछ के बाद हुई गिरफ्तारी दरअसल, एमपी हाईकोर्ट ने देर रात उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद सुबह साढ़े 10 बजे के करीर सीबीआई की टीम उनके घर में प्रवेश की थी। उसके बाद से लगातार उनसे पूछताछ चल रही थी। पूछताछ के दौरान गिरिबाला सिंह ने अपने खराब स्वास्थ्य का भी हवाला दिया था। इस दौरान गिरिबाला सिंह के वकीलों ने डॉक्टरों के पर्चे भी प्रस्तुत किए। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती गिरिबाला सिंह पूछताछ के दौरान घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती थी। उनसे तमाम सवाल सीबीआई ने पूछे हैं जो ट्विशा के केस से संबंधित हैं। सीबीआई के अधिकारियों के साथ-साथ घर में एसआईटी की टीम भी मौजूद है। इसके साथ ही सीबीआई की तकनीकी टीम भी घर में मौजूद है। एजेंसी घर का पूरा वर्चुअल री-कंस्ट्रक्शन कर रही है इससे पहले CBI ने कटारा हिल्स स्थित घर में ट्विशा शर्मा के अंतिम घंटों को फिर से रचने के लिए 'टनल व्यू' जांच पद्धति का इस्तेमाल किया. जांच एजेंसी घर का पूरा वर्चुअल री-कंस्ट्रक्शन कर रही है, ताकि ट्विशा के आखिरी समय की हर गतिविधि को समझा जा सके और यह पता लगाया जा सके कि कौन कब घर में आया या गया. इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल और इंटरनेट रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है।  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने रद्द की थी जमानत याचिका CBI ने इस सप्ताह की शुरुआत में मध्यप्रदेश पुलिस से  ट्विशा मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है. पेशे से वकील समर्थ सिंह इसके बाद से फिलहाल सीबीआई की हिरासत में हैं.  इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को उनकी बहू ट्विशा शर्मा की दहेज मृत्यु के मामले में दी गई अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी. बुधवार को जारी आदेश में निचली अदालत द्वारा 15 मई के आदेश के जरिए दी गई राहत को रद्द कर दिया गया था. अदालत ने यह टिप्पणी की कि जमानत देते समय केस डायरी और गवाहों के बयानों से जुड़े अहम तथ्यों पर ठीक से विचार नहीं किया गया था।  ट्विशा शर्मा केस की टाइमलाइन     ट्विशा शर्मा ने 12 मई को ससुराल में दी थी जान     13 मई को परिजनों ने आरोप लगाया कि उसकी हत्या हुई     गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह पर एफआईआर की मांग को लेकर परिजनों ने किया प्रदर्शन     इसके बाद परिजनों ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की     भोपाल कोर्ट से याचिका हो गई खारिज     परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर सीएम से मुलाकात की     दोबारा पोस्टमार्टम के लिए परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई     हाईकोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम के आदेश दिए     सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी     दिल्ली एम्स की टीम ने ट्विशा शर्मा के शव का किया पोस्टमार्टम     सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में संज्ञान लिया     इसके बाद ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने सरेंडर किया     सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की     हाईकोर्ट से गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत खारिज समर्थ सिंह को भी लेकर पहुंची थी सीबीआई दरअसल, गिरिबाला सिंह पूछताछ से पहले सीबीआई की टीम समर्थ सिंह को भी लेकर घर पहुंची थी। बताया जाता है कि गिरिबाला और समर्थ सिंह को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ की गई थी। कोर्ट में पेशी के बाद गिरिबाला सिंह को सीबीआई रिमांड पर ले सकती है। उठ रहे हैं कई सवाल वहीं, ट्विशा शर्मा की मौत को लेकर कई सवाल हैं। इसमें सबसे अहम सवाल उसकी मौत की टाइमिंग को लेकर है। पुलिस की डायरी में मौत की टाइमिंग कुछ और है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में कुछ और टाइम दर्ज है। ऐसे में तमाम तकनीकी साक्ष्यों की जांच को इकट्ठा कर रही है। एसआईटी ने भी अभी तक की जांच रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी है। इसके बाद सीबीआई अपने तरीके से जांच कर रही है। ट्विशा शर्मा मौत मामला: अब तक की बड़ी बातें      12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में ट्विशा शर्मा मृत पाई गईं थी.     शुरुआती जांच में मौत का कारण फांसी बताया गया, लेकिन परिवार ने साजिश और दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया.     पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और क्रूरता की धाराओं में मामला दर्ज हुआ.     मामले की गंभीरता और विवाद के बाद जांच सीबीआई को सौंप दी गई.      सीबीआई ने भोपाल पहुंचकर केस दोबारा दर्ज किया और सभी दस्तावेज, डिजिटल सबूत व फोरेंसिक रिपोर्ट अपने कब्जे में ली     एजेंसी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पूरे घर की जांच और क्राइम सीन को समझने की प्रक्रिया शुरू की     जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल सबूत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं     सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई को केस सौंपा     सीबीआई ने पति और सास से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए और जांच को आगे बढ़ाया।     ताजा कार्रवाई में सीबीआई ने सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया, जिससे मामले में जांच तेज हो गई है जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने भोपाल की एक सत्र अदालत द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया. उन्होंने यह टिप्पणी की कि निचली अदालत केस डायरी, गवाहों की गवाही और व्हाट्सअप बातचीत जैसे अहम सबूतों की ठीक से जांच करने में नाकाम रही।  हाई कोर्ट ने मामले की समीक्षा करने के बाद पाया कि इस आदेश में गंभीर कमियां थीं. बेंच ने यह भी पाया कि ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी में दर्ज गवाहों की अहम गवाही … Read more

लॉन्च तो हो गया, लेकिन डिलीवरी अभी दूर! Ultraviolette Tesseract अब 2027 में मिलेगा

  नई दिल्ली 15 महीने पहले अल्ट्रावायलेट (Ultraviolette) ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर टेसेरैक्ट (Tesseract) को लॉन्च किया था. इस स्कूटर की लॉन्चिंग के वक्त कंपनी ने बताया था कि इसकी डिलीवरी 2026 की पहली तिमाही में शुरू होगी. बाद में इस तारीख को आगे बढ़ाकर 2026 की दूसरी तिमाही कर दिया गया। हालांकि, अब कंपनी ने एक बार फिर अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर अल्ट्रावायलेट टेसेरैक्ट की उपलब्धता की तारीख को आगे बढ़ा दिया है. ये उन लोगों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जो इस स्कूटर को बुक कर डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं. अब कंपनी ने इस स्कूटर की नई तारीख 2027 की पहली तिमाही रख दी है कितनी है कीमत? अल्ट्रावायलेट टेसेरैक्ट को कंपनी ने मार्च 2025 में लॉन्च किया था. उस वक्त कंपनी ने इसकी इंट्रोडक्टरी कीमत 1.2 लाख रुपये एक्स शोरूम रखी थी. एक साल से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी ये स्कूटर लोगों तक पहुंच नहीं पाया है. इसकी वजह स्कूटर का डिजाइन है। अल्ट्रावायलेट अपने पहले इलेक्ट्रिक स्कूटर को बेहतर बनाने के लिए उसमें कई बदलाव कर रही है. लॉन्चिंग के बाद कंपनी इस स्कूटर लोगों के फीडबैक के लिए कई शहरों में लेकर गई. उसके बाद कंपनी ने इसमें बदलाव करने शुरू किए है, जिससे स्कूटर को सभी के लिए एक बेहतर प्रोडक्ट के तौर पर पेश किया जा सके। मिलेंगे दमदार फीचर्स कंपनी ने बताया है कि स्कूटर ज्यादा यूजर फ्रेंडली और प्रैक्टिकल होगा. अल्ट्रावायलेट का कहना है कि जनवरी 2027 में जब इसकी डिलीवरी शुरू होगी, तो लोगों को एक बेहतर प्रोडक्ट मिलेगा. रिवाइज्ड अल्ट्रावायलेट टेसेरैक्ट 100V आर्किटेक्चर के साथ आएगा. ये इस फीचर के साथ आने वाला भारत पर पहला स्कूटर होगा। इस स्कूटर में 15kW का मोटर मिलेगा, जो 20.11 बीएचपी की पावर प्रदान करेगा. स्कूटर 6kWh तक की बैटरी के साथ आएगा, जो 261 किलोमीटर तक की रेंज सिंगल चार्ज में देगा. कंपनी की मानें तो ये स्कूटर 125Km प्रति घंटे की टॉप स्पीड पर दौड़ सकेगा. इसमें 30 लीटर का बूट स्पेस और 7-इंच का टचस्क्रीन इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलेगा।

अब और ताकतवर हुई ED, सरकार ने बढ़ाई ताकत; भ्रष्टाचारियों की बढ़ेंगी मुश्किलें

नई दिल्ली व‍िपक्ष बार-बार शोर मचाता है क‍ि ईडी को सरकार ने व‍िपक्षी नेताओं के पीछे छोड़ रखा है. इसके बावजूद सरकार ने ऐलान कर द‍िया है क‍ि जो घालमेल करेगा, वो नपेगा. सरकार ने ईडी की ताकत अचानक बढ़ा दी है. दरअसल सरकार ने ईडी में बड़े स्तर पर कैडर र‍िस्‍ट्रक्‍चर‍िंग को मंजूरी दे दी है.इसका सीधा मतलब है कि बड़ी संख्‍या में ईडी में अफसरों की तैनाती की जाएगी. यह बढ़ोतरी कोई छोटी मोटी नहीं है, बल्‍क‍ि दोगुनी तीन गुनी हो गई. अब ईडी में बड़े अफसरों से लेकर जमीन पर जाकर रेड मारने वाले अधिकारियों तक, सबकी फौज बड़ी होने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत सबसे ज्यादा बढ़ोतरी डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, एनफोर्समेंट ऑफिसर और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पदों में की गई है. सरकार का कहना है कि बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को देखते हुए ED की क्षमता मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया गया है. यह आदेश सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है और इसका खर्च ED के मौजूदा बजट से ही उठाया जाएगा। क्‍या होने जा रहा?     एडिशनल डायरेक्टर के पद 10 से बढ़ाकर 24 किए गए हैं।     जॉइंट डायरेक्टर के पद 28 से बढ़ाकर 49 किए गए हैं.     डिप्टी डायरेक्टर के पद 148 से बढ़ाकर 267 कर दिए गए हैं.     असिस्टेंट डायरेक्टर के पद 255 से बढ़ाकर 531 किए गए हैं.     एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 355 से बढ़ाकर 606 किए गए हैं.     असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पद 425 से बढ़ाकर 803 कर दिए गए हैं.     इसके अलावा ED की लीगल टीम में भी भारी मैनपावर द‍िया गया है. एडजुडिकेशन, सिस्टम, सिक्योरिटी और सपोर्ट स्टाफ कैडर में भी कई नए पद मंजूर किए गए हैं. ग्राउंड फोर्स हुई डबल से भी ज्यादा! इस आंकड़े को ध्यान से देखिए. सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कहां हुई है? डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर, एनफोर्समेंट ऑफिसर और असिस्टेंट एनफोर्समेंट ऑफिसर के पदों पर. ये वो लोग होते हैं जो सिर्फ फाइलों में साइन नहीं करते, बल्कि कोर्ट-कचहरी की दौड़ भाग संभालते हैं, मनी लॉन्ड्रिंग के सुराग ढूंढते हैं, रेड मारने जाते हैं और आरोपियों से पूछताछ की कमान संभालते हैं। इसके अलावा, बात सिर्फ अधिकारियों तक सीमित नहीं है। सरकार ने ईडी के लीगल, एडजुडिकेशन, सिस्टम, सिक्योरिटी और सपोर्ट स्टाफ कैडर कैडर में भी कई नए पद मंजूर किए हैं. यानी कि अब अगर ईडी किसी पर हाथ डालेगी, तो उसके पास कोर्ट में केस लड़ने के लिए वकीलों की फौज भी बड़ी होगी और डेटा खंगालने के लिए डिजिटल सिस्टम के उस्ताद भी ज्यादा होंगे। लेकिन अचानक इतनी ताकत क्यों? सरकार का इसके पीछे सिंपल तर्क है। देश में आर्थिक अपराधों का ग्राफ और डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए होने वाले हेर-फेर के मामले तेजी से बढ़े हैं. पीएमएलए और फेमा के तहत दर्ज होने वाले मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है. सरकार का कहना है कि बढ़ते मामलों और जांच के दायरे को देखते हुए ईडी की कार्यक्षमता को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया था. अब जब मैनपावर बढ़ गई है, तो मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा से जुड़े मामलों की जांच में और तेजी आएगी। टाइमिंग बेहद खास यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईडी को लेकर देश में एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है. विपक्ष के तमाम नेता चाहे वो कांग्रेस के हों, आप के हों, टीएमसी के हों या आरजेडी के हमेशा यह आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना से कर रही है। चुन-चुनकर विपक्षी नेताओं के घरों पर रेड मारी जाती है, उन्हें परेशान किया जाता है, ताकि विपक्ष को कमजोर किया जा सके. इन आरोपों की तपिश के बीच सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि एजेंसियां कमजोर नहीं होंगी, बल्कि उन्हें और धारदार बनाया जाएगा. राजनीति अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन आर्थिक अपराधों पर कार्रवाई अब और तेज और आक्रामक होगी।

न्यायपालिका पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, बोला- जजों को पवित्र मानने की जरूरत नहीं

चेन्नई “इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है। भ्रष्ट जज कल भी थे और आज भी हैं।” ये बातें खुद हाईकोर्ट ने कही है। सुनकर भले ही हैरत हो लेकिन मद्रास हाईकोर्ट की एक बेंच ने हाल ही में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बातें कही हैं। इस दौरान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में फैले भ्रष्टाचार पर आधारित तमिल फिल्म 'करुप्पु' पर प्रतिबंध लगाने से साफ इनकार कर दिया। बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट में आर एस तमिलवेंदम नाम के वकील ने फिल्म पर रोक लगाने के लिए एक याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि निर्देशक आरजे बालाजी के निर्देशन और सुपरस्टार सूर्या और तृषा अभिनीत फिल्म 'करुप्पु' में अदालतों और कानूनी व्यवस्था का बेहद आपत्तिजनक चित्रण किया गया है। उन्होंने दलील दी थी कि फिल्म पूरी न्यायिक प्रणाली को बदनाम करती है। भ्रष्ट जज पहले भी थे और आज भी हैं- HC हालांकि याचिका को सिरे से खारिज करते हुए जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार हैं। HC ने कहा, "इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है। भ्रष्ट जज पहले भी थे और आज भी हैं। जजों के साथ 'होली काउ' जैसा व्यवहार करने की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट और जजों को आम आदमी की आलोचना से ऊपर नहीं माना जा सकता।” इस दौरान हाईकोर्ट ने देश पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसपी भरूचा के उस बयान का भी जिक्र दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के लगभग 20 फीसदी जज भ्रष्ट हैं। वहीं HC ने वरिष्ठ वकील शांति भूषण और प्रशांत भूषण के बयानों का भी जिक्र किया। हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह ऐसे बढ़ा चढ़ा कर दिखाई गई छवि का पूरी तरह समर्थन नहीं करती, लेकिन सच से आंखें भी नहीं मूंद सकती। कोर्ट ने कहा, “हम न्यायिक भ्रष्टाचार के मामलों से अच्छी तरह वाकिफ हैं और हमारे सामने ऐसे उदाहरण आते रहे हैं। मद्रास हाईकोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए ऐसे जजों को नौकरी से बर्खास्त कर बाहर का रास्ता भी दिखाती रहती है।” 'करुप्पु' पर क्या है बवाल? रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म की कहानी 'सेवन वेल्स' नाम की एक काल्पनिक कोर्ट के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में दिखाया गया है कि उस अदालत का जज बेहद भ्रष्ट है और वह एक वकील के साथ मिलकर अदालत के कामकाज और फैसलों को अपनी उंगलियों पर नचाता है। जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने आदेश में दर्ज किया कि उन्होंने खुद यह फिल्म देखी है और इसे बैन किया जाना सही नहीं। याचिकाकर्ता की इस दलील पर कि फिल्म में सिस्टम को बहुत खराब दिखाया गया है, हाईकोर्ट ने बेहद मजेदार अंदाज में टिप्पणी की। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक HC ने कहा, "यह सच है कि फिल्म में सिस्टम का चित्रण काफी बढ़ा-चढ़ाकर किया गया है। लेकिन तमिल फिल्मों को बनाने का अंदाज ही यही है। हमारी फिल्मों में हीरो अकेला ही अपने एक दर्जन गुंडों को धूल चटा देता है। तमिल सिनेमा में सब कुछ मेलोड्रामैटिक होता है। इसलिए, 'करुप्पु' को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।"

कैंसर से जंग लड़ रहीं पंकज भदौरिया, फैंस से बोलीं- प्रार्थनाओं की जरूरत है

मुंबई मास्टरशेफ पंकज भदौरिया को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपना हेल्थ अपडेट देकर लोगों से दुआएं करने की प्रार्थना की है। पंकज के पोस्ट पर कई लोगों के कमेंट्स दिख रहे हैं जो उनके ठीक होने की विशेज भेज रह हैं। बता दें कि कुछ रोज पहले वह फुल बॉडी चेकअप के लिए गई थीं। इससे जुड़ा पोस्ट उन्होंने सोशल मीडिया पर डाला था। बता दें कि पंकज भदौरिया 2010 के मास्टरशेफ सीजन 1 की विजेता रह चुकी हैं। कुछ दिन पहले करवाया था चेकअप पंकज ने 17 मई को पोस्ट किया था कि उन्होंने प्रिवेंटिव चेकअप करवाया है। उन्होंने लिखा था, 'मैं अपने फुल बॉडी चेकअप के लिए गई थी। मुझे लगता है कि अगर आप 45 साल से ऊपर हैं तो आपको हर साल यह चेकअप करवाना जरूरी है, या अगर आपके पेरेंट्स 45 साल से ऊपर हैं तो इसको पढ़िए। हेल्थ सिर्फ बीमारी ठीक करना नहीं, बल्कि इसके शुरू होने से पहले बचाव करना भी है। रेग्युलर हेल्थ चेकअप से हेल्थ प्रॉब्लम जल्दी पता चल जाती हैं, आउटकम सही रहता है और आपको मेंटल पीस मिलती है। लक्षणों का इंतजार मत कीजिए, बाद में आपका भविष्य आपको धन्यवाद कहेगा। ' नहीं मिला स्टेज का अपडेट पंकज भदौरिया को किस स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर है, अभी इससे जुड़ी जानकारी नहीं मिल पाई है। उनके इंस्टापेज पर कई सारे कमेंट्स दिख रहे हैं। मास्टरशेफ गुरकीरत ने लिखा है, बहुत सारा प्यार, अच्छी वाइब्स और हीलिंग एनर्जी भेज रहा हूं। उनकी फॉलोअर ने लिखा है, आप जल्दी ठीक हो जाएंगी। एक फैन ने लंबा नोट लिखा है, आप जल्दी ठीक हो जाएंगी। आप वॉरियर हैं और मैंने आपकी जर्नी देखी है। आप यह युद्ध जीतेंगी। आज के समय में अगर अच्छा डॉक्टर और परिवार का साथ मिले तो कैंसर को हराना मुश्किल नहीं है। मैं भी स्टेज 3 कैंसर सर्वाइवर हूं और 5 साल हो गए हैं। बहादुरी से लड़िए आप जल्दी ठीक होंगी। टीचर से शेफ बनी थीं पंकज पंकज भदौरिया साल 2010 में मास्टरशेफ की विनर थीं। उन्होंने कुकिंग के लिए पैशन के चलते अपना 16 साल पुराना टीचिंग करियर छोड़ दिया था। पंकज लखनऊ में इंग्लिश की टीचर थीं। पंकज दिल्ली से हैं। पंकज भदौरिया के इंस्टाग्राम पेज पर 2.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इस पर वह लोगों के साथ रेसिपीज और किचन टिप्स साझा करती रहती हैं। लखनऊ में पंकज की कुलिनरी अकैडमी भी है।

पीएम सूर्य घर योजना से बड़ी राहत! 39,975 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची ₹311 करोड़ से ज्यादा सब्सिडी

पीएम सूर्य घर योजना में 39 हजार 975 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची 311 करोड़ से अधिक की सब्सिडी योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयंत्र लगाने पर मिल रही 78 हजार की सब्सिडी भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्रान्तर्गत आने 16 जिलों में पीएम सूर्य घर योजना के तहत अब तक कुल 39 हजार 975 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं। इनके खातों में 311 करोड़ 64 लाख से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। पीएम सूर्य घर योजना में एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है। कहां करें आवेदन पीएम सूर्य घर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in अथवा उपाय ऐप, वॉट्स ऐप चेटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है। कंपनी से प्राप्त जानकारी में बताया गया है कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है।  

किसके पास कितने वोट? राज्यसभा चुनाव में गणित बिगड़ा तो बदल सकता है पूरा समीकरण

नई दिल्ली राज्यसभा की 24 सीटों के चुनाव में संख्याबल के बावजूद विपक्षी दलों में अपने उम्मीदवार की जीत का भरोसा पैदा नहीं हो पा रहा है। पिछले कई मौकों पर बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग ने भाजपा विरोधी खेमे को कई बड़े झटके दिए हैं। इस बार भी मध्य प्रदेश, झारखंड एवं कर्नाटक में काग्रेस और उसके सहयोदी दलों को क्रॉस वोटिंग की चिंता सता रही है। झारखंड की 2 सीटों पर चुनाव झारखंड में सत्तारूढ़ झामुमो और उसकी सहयोगी कांग्रेस के पास खाली हो रही दोनों सीट जीतने के लिए पर्याप्त नंबर हैं, लेकिन भाजपा के द्वारा चुनाव लड़ने की तैयारी से समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में दो राज्यसभा सीटों के चुनाव में एक सीट की जीत के लिए 28 वोट चाहिए। झामुमो के नेतृत्व वाली INDIA गठबंधन की सरकार के पास 56 विधायक हैं। यानी दोनों सीटें जीती जा सकती हैं। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 24 विधायक हैं। यानी चार सीटों की क्रॉस वोटिंग से तो मामला पलट ही सकता है, एक दो वोट इधर उघर होने पर दूसरी वरीयता से दूसरी सीट का फैसला होगा। कर्नाटक में रोचक हुआ चुनाव कर्नाटक में कांग्रेस में सरकार के भीतर खींचतान जारी है। ऐसे में, वहां की चार सीटों का चुनाव रोचक है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के पास 135 व भाजपा-जदएस के पास 85 विधायक हैं। एक सीट के लिए 45 वोट की जरूरत है। इसमें कांग्रेस तीन एवं भाजपा के एक सीट जीतने के आंकड़े हैं, लेकिन भाजपा दूसरी सीट के लिए उतरती है तो उसे बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग करानी पड़ेगी या फिर मामला दूसरी वरीयता के वोटों पर जा सकता है। मध्य प्रदेश में चाहिए 58 वोट मध्य प्रदेश में तीन सीटों के चुनाव में एक सीट के लिए 58 वोट की जरूरत है। भाजपा के पास दो सीट जीतने के बाद भी 48 वोट अतिरिक्त हैं। यानी उसे एक और सीट जीतने के लिए दस और वोटों का जुगाड़ करना होगा। कांग्रेस के पास 62 वोट हैं। यानी आसानी से एक सीट आ सकती है, लेकिन अगर भाजपा एक ज्यादा उम्मीदवार उतारती है तो क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ जाएगा। गौरतलब है कि इस बार कांग्रेस से दिग्विजय सिंह की सीट खाली हो रही है। वह फिर से लड़ते हैं तो भाजपा दांव खेल सकती है। पिछली बार दिग्विजय सिंह के चलते हुए राज्यसभा सीट के विवाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ दी थी। सिंधिया अब भाजपा में हैं। भाजपा यहां पर बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। इन राज्यों में चुनाव 18 जून को होने वाले चुनाव में आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीट, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीट, झारखंड की दो सीट तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश एवं मिजोरम की एक-एक सीट शामिल हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु से राज्यसभा की एक-एक सीट के लिए उपचुनाव भी होगा। जिन 26 सीटों के लिए चुनाव और उपचुनाव हो रहा है उनमें एनडीए के पास 18 सीटें हैं और इनमें भी 12 सीटें भाजपा की हैं। इसके अलावा चार सीटें कांग्रेस, तीन वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और एक झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास हैं। भाजपा की खाली होने वाली सीटों में गुजरात से तीन, कर्नाटक, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान से दो-दो और अरुणाचल प्रदेश, झारखंड और मणिपुर से एक-एक सीट शामिल हैं।

बाबा केदार के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, जानिए हेलिकॉप्टर यात्रा का खर्च और रूट

हरिद्वार वर्ष 2026 की केदारनाथ यात्रा ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. कपाट खुलने के शुरुआती 35 दिनों में ही रिकॉर्ड 9 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं. हर रोज करीब 30,000 लोग केदारनाथ पहुंच रहे हैं. ऐसे में अगर आप भारी भीड़, लंबे जाम और 16 किलोमीटर की थका देने वाली पैदल चढ़ाई से बचना चाहते हैं, तो हवाई सफर (By Flight/Air) आपके लिए सबसे बेस्ट और आरामदायक विकल्प है. आइए जानते हैं दिल्ली और देहरादून से केदारनाथ धाम तक के हवाई सफर के दोनों बड़े विकल्प, रूट और खर्च का पूरा ब्योरा। दिल्ली से देहरादून (फ्लाइट द्वारा) आपकी हवाई यात्रा देश की राजधानी से शुरू होगी.  दिल्ली से उत्तराखंड के लिए सीधी फ्लाइट्स उपलब्ध हैं। फ्लाइट रूट: दिल्ली (DEL) से देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट (DED). समय: मात्र 50 मिनट से 1 घंटे 10 मिनट. खर्च: एडवांस बुकिंग पर आने-जाने (राउंड ट्रिप) का किराया लगभग ₹6,800 से ₹7,800 प्रति व्यक्ति आता है। देहरादून से आगे केदारनाथ के लिए हवाई विकल्प देहरादून पहुंचने के बाद आपके पास बाबा के धाम तक पहुंचने के लिए दो बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं:  बेस कैंप से हेलीकॉप्टर सेवा देहरादून एयरपोर्ट पर उतरने के बाद आप सड़क मार्ग से सीधे नीचे दिए गए प्रमुख बेस कैंप हेलीपैड पर पहुंच सकते हैं, जहां से नियमित हेलीकॉप्टर सेवाएं दी जाती हैं: प्रमुख लोकेशंस: गुप्तकाशी (Guptkashi), सिरसी (Sirsi) और फाटा (Phata). समय: हेलीपैड से मंदिर तक का सफर महज 10 से 15 मिनट का होता है। खर्च: आने-जाने का कुल किराया (Return Ticket) लगभग ₹5,500 से ₹8,500 प्रति व्यक्ति के बीच होता है (यह आपके द्वारा चुने गए हेलीपैड पर निर्भर करता है). जरूरी नोट: हेलीकॉप्टर टिकटों में होने वाली धोखाधड़ी से बचें.  इसकी बुकिंग सिर्फ और सिर्फ IRCTC की आधिकारिक हेलीयात्रा वेबसाइट से ही कराना सही रहता है. विकल्प 2: देहरादून से डायरेक्ट चार्टर सेवा अगर आप बिना किसी कतार और बिना किसी झंझट के प्रीमियम सफर चाहते हैं, तो देहरादून से सीधे प्राइवेट चार्टर सर्विस ले सकते हैं। रूट प्लान: प्राइवेट चार्टर सेवा प्रदाता सीधे देहरादून से केदारनाथ के लिए उड़ान भरते हैं. इसके अलावा आप अपनी पसंद के अनुसार यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ (चार धाम) या फिर सिर्फ केदारनाथ और बद्रीनाथ (दो धाम) का कस्टमाइज्ड ट्रिप भी बुक कर सकते हैं। केदारनाथ के मुख्य आकर्षण: क्या देखें? हवाई सफर से उतरते ही आप सीधे बाबा के धाम पहुंचेंगे, जहां आपको इन मुख्य स्थलों के दर्शन जरूर करने चाहिए: ऐतिहासिक मंदिर व भीम शिला: 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भव्य मंदिर.  इसके ठीक पीछे स्थित भीम शिला ने 2013 की भीषण बाढ़ के पानी को दो हिस्सों में बांटकर मंदिर की रक्षा की थी। आदि शंकराचार्य समाधि: मुख्य मंदिर के ठीक पीछे स्थित, जहां महान संत आदि शंकराचार्य ने मात्र 32 वर्ष की आयु में मोक्ष प्राप्त किया था। भैरव नाथ मंदिर: मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है.  इन्हें केदारनाथ का रक्षक माना जाता है, जो सर्दियों में कपाट बंद होने के बाद इस पूरे क्षेत्र की रक्षा करते हैं. रुद्र मेडिटेशन केव (मोदी गुफा): मंदिर परिसर से 2 किमी दूर बनी एक भूमिगत गुफा, जहां साल 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने 17 घंटे ध्यान लगाया था.