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47.2°C से तप रहा खजुराहो, लेकिन अब प्री-मानसून देगा राहत; 6 जून तक बारिश के आसार

भोपाल  पूरे देश में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है. हर कोई बारिश का इंतजार कर रहा है. इसी बीच मौसम विभाग से भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है. अनुमान है कि 29 मई से मध्य प्रदेश में प्री मानसून की दस्तक दे सकता है. भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर देखने को मिलेगा। 29 मई से प्री मासनून की बारिश प्री मानसून सबसे पहले केरल में दस्तक देगा. वहीं 29 मई को प्री मानसून के मध्य प्रदेश में पहुंचने के स्ट्रॉन्ग चांसेस हैं. जिससे प्रदेश के कई इलाकों में तेज आंधी और हवाएं चलेंगी. भोपाल सहित कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है. मौसम विभाग का कहना है कि, प्रदेश के चंबल इलाके के ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, दतिया, भिंड, दतिया, शिवपुरी में बारिश होगी. वहीं टीकमगढ़, निवाड़ी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट में भी बारिश हो सकती है. बारिश होने से तापमान में भी गिरावट आएगी. पारा 2 से 3 डिग्री नीचे जाने का अनुमान है। ​आगामी दिनों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, ''मध्य प्रदेश में मानसून आमतौर पर 15 जून के आसपास पहुंचना शुरू होता है और 22 जून तक ग्वालियर-चंबल के कुछ इलाकों को छोड़कर ज्यादातर जिलों में पहुंच जाता है. 7-8 जून के बाद प्रदेश में जो बारिश शुरू होगी, उसे प्री-मानसून गतिविधि कहा जाता है. ऐसे में माना जा रहा है की 29 मई से प्री मानसून की गतिविधियां शुरु हो सकती हैं। भीषण गर्मी से जूझ रहा मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश में नौतपा की शुरुआत के साथ ही भीषण गर्मी की शुरुआत हो गई है. मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, राज्य के अधिकांश जिले भीषण गर्मी की चपेट में हैं और आगामी दिनों में राहत के आसार फिलहाल कम दिख रहे हैं. प्रदेश में चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की है। जल्द मिलेगी नौतपा की गर्मी से राहत रीवा, सतना, पन्ना, छतरपुर और निवाड़ी में तीव्र हीटवेव का असर रहेगा. वहीं टीकमगढ़ में दिन में हीट वेव के साथ वार्म नाईट और छिंदवाड़ा में हीट वेव के साथ वार्म नाईट की चेतावनी जारी की गई है. इनके साथ ही शिवपुरी, भिंड, मुरैना और श्योपुरकलां में भी सीवियर हीट वेव चलेगी, जबकि ग्वालियर और दतिया में वार्म नाईट के साथ के साथ तीव्र हीट वेव का प्रभाव रहेगा। आगामी दिनों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी ​प्रदेश में तीव्र हीटवेव को देखते हुए मौसम विभाग ने आगामी दो से तीन दिनों के लिए कई जिलों में हीट वेव और सीवियर हीट वेव का अलर्ट जारी किया है. इनमें टीकमगढ़, निवाड़ी, पन्ना, सतना और भिंड जैसे जिलों के लिए रेड और आरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इसके साथ ही सागर, विदिशा, राजगढ़, रायसेन, दमोह, कटनी, सीधी और सिंगरौली सहित कई अन्य जिलों में भी गुरुवार और शुक्रवार को भी भीषण गर्मी जारी रहने की संभावना है।

दिसंबर 2028 से पहले भोपाल मेट्रो को बड़ा झटका, भदभदा से भेल कॉरिडोर में आईं कई अड़चनें

भोपाल शहर को आधुनिक यातायात व्यवस्था से जोड़ने के लिए तैयार की जा रही मेट्रो की 'ब्लू लाइन' (भदभदा से रत्नागिरी-भेल) का काम तेजी से आगे तो बढ़ रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई ऐसी अड़चनें सामने आने लगी हैं जो इसकी रफ्तार को धीमा कर सकती हैं। अधिकारियों ने पहले इस लाइन को ऑरेंज लाइन (एम्स से करोंद) से पहले पूरा करने के संकेत दिए थे, मगर अब इसके दिसंबर 2028 के टारगेट टाइमलाइन पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। जमीन के नीचे छिपी चुनौतियां मेट्रो रूट पर अंडरग्राउंड पाइपलाइनों और अन्य यूटिलिटी नेटवर्क को शिफ्ट करने में काफी वक्त लग रहा है। इसके चलते कई इलाकों में ब्रॉडबैंड और इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। भदभदा और जवाहर चौक जैसे व्यस्त इलाकों में संकरी सड़कों के कारण ट्रैफिक को डायवर्ट करना पड़ा है, जिससे रोजाना लंबा जाम लग रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आने वाले मानसून सीजन में ये मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। निर्माण स्थलों के पास उड़ती धूल और ध्वनि प्रदूषण ने सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। मेट्रो परियोजना का मकसद सिर्फ तेज सफर कराना नहीं है, बल्कि शहरी गतिशीलता को बदलना और ट्रैफिक के दबाव को स्थायी रूप से कम करना है। जहां भी एलिवेटेड कॉरिडोर बन रहे हैं, वहां सड़कों को दो से तीन मीटर तक चौड़ा किया जा रहा है ताकि भविष्य में ट्रैफिक सुगम हो सके। क्या ऑरेंज लाइन से सबक लेगा प्रबंधन? सड़क किनारे काम कर रहे न्यू मार्केट के व्यापारियों को डर है कि अगर काम में लंबा खिंचाव हुआ तो व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। तुलनात्मक रूप से देखें तो ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर को ही बनने में 5 साल से अधिक का समय लग गया और पूरी लाइन अब भी अधूरी है। ऐसे में ब्लू लाइन के टुकड़ों-टुकड़ों में हो रहे निर्माण से डेडलाइन टूटने का जोखिम बढ़ गया है। काटे गए दशकों पुराने पेड़ झीलों के शहर भोपाल में विकास की रफ्तार अब पेड़ों पर भारी पड़ने लगी है। मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के ब्लू लाइन एलिवेटेड कॉरिडोर का रास्ता साफ करने के लिए ऐतिहासिक मिंटो हॉल यानी पुरानी विधानसभा के ठीक सामने लगे दशकों पुराने छायादार पेड़ों को काट दिया गया है। मुसाफिरों का आसरा खत्म ये पेड़ महज हरियाली का हिस्सा नहीं थे, बल्कि पास के व्यस्त बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों के लिए तपती गर्मियों में कुदरती छतरी का काम करते थे। अब वहां सिर्फ सन्नाटा और कंक्रीट का मलबा नजर आता है। 'सब नियमों के तहत हुआ' पेड़ों की कटाई को लेकर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि यह काम जरूरी था। एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए खाली जगह की जरूरत होती है। अफसरों के मुताबिक, पेड़ों को काटने के लिए सभी जरूरी कानूनी अनुमतियां ली गई थीं। नुकसान की भरपाई के लिए अब कैपिटल प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेशन को दोबारा पौधारोपण की जिम्मेदारी दी गई है। ब्लू लाइन प्रोजेक्ट: एक नजर में यह कटाई 12.9 किलोमीटर लंबे ब्लू लाइन प्रोजेक्ट का हिस्सा है। यह लाइन भदभदा चौराहे से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहे तक जाएगी।   कॉरिडोर का नाम       ब्लू लाइन (Blue Line) कुल दूरी                   12.9 किलोमीटर स्टेशनों की संख्या     13 एलिवेटेड स्टेशन समय सीमा               2025 में काम शुरू, 3 साल का लक्ष्य रूट                        भदभदा से रत्नागिरी तिराहा विकास बनाम पर्यावरण पर्यावरणविदों का मानना है कि भले ही काटे गए पेड़ों की संख्या कम हो, लेकिन ऐतिहासिक इमारतों के पास से हरियाली का गायब होना चिंताजनक है। यह मामला एक बार फिर शहर के बुनियादी ढांचे के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच के तनाव को उजागर करता है। जहां एक ओर मेट्रो शहर में यातायात को आधुनिक बनाएगी, वहीं दूसरी ओर पुराने पेड़ों के कटने से भोपाल की ग्रीन सिटी वाली छवि पर सवाल उठ रहे हैं।

क्षेत्रीय तनाव के बीच ब्रह्मोस बना चर्चा का केंद्र, विरोधी खेमे में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली भारत की एक कूटनीतिक चाल से इस्‍लामिक NATO के खलीफ तुर्की का दम घुटने लगना है. तुर्की ने जिस तरह से आतंकवादियों के पनाहगार पाकिस्‍तान का साथ दे रहा है, उससे भारत को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने और उसे बदलने पर मजबूर होना पड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की एक्‍सपर्ट पाकिस्‍तान में मौजूद थे. इससे भारत की चिंता और भी बढ़ गई. इसके बाद तुर्की को उसके ही आंगन में घेरने की कवायद शुरू कर दी गई. अब इसका असर दिखने लगा है. तुर्की की बौखलाहट बढ़ गई है. दरअसल, भारत ने भूमध्‍य सागर में अपनी डिफेंस डिप्‍लोमेसी को रफ्तार के साथ धार देना भी शुरू कर दिया है. अभी तो बस शुरुआत भर है, लेकिन उससे ही इस्‍लामिक NATO के इस खलीफा का दम निकलने लगा है. भारत तुर्की के तीन पड़ोसी देशों के साथ अपने रक्षा संबंधों को लगातार नई ऊंचाई दे रहा है. इन तीनों देशों ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की खरीद में दिलचस्‍पी भी दिखाई है. ब्रह्मोस का नाम सुनकर ही तुर्की में घबराहट है. तुर्की की मीडिया में इस बात की ड‍िमांड भी बढ़ गई है कि इससे पहले कि ग्रीस की हाथों में ब्रह्मोस जैसी मिसाइल और मॉडर्न वेपन सिस्‍टम पहुंचे, उसपर अटैक कर देना चाहिए। पिछले कुछ सालों में भारत ने भूमध्‍य सागर में तुर्की के तीन पड़ोसी देशों – अर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर काम करना शुरू किया है. खासकर रक्षा के क्षेत्र में तीनों देशों ने भारत के साथ संबंधों को नया आयाम देने की गंभीर कोशिश की है. तुर्की के मनमाने रवैये से परेशान अर्मेनिया के भारत के साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं. अर्मेनिया को भारत से कई तरह के मॉडर्न वेपन सिस्‍टम भी मिले हैं. दूसरी तरफ, साइप्रस और ग्रीस भी भारत के साथ रक्षा संबंधों को बढ़ाने में जुटे हैं. कुछ दिनों पहले ही साइप्रस के प्रधानमंत्री निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स भारत के दौरे पर आए थे. इस दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को स्‍ट्रैटजिक पार्टनरशिप का दर्जा देने पर सहमति जताई है. इसके साथ ही साइप्रस और भारत के बीच रक्षा संबंध आने वाले दिनों में और भी मजबूत होने की संभावना प्रबल हो गई है. भारत और ग्रीस के बीच भी स्‍ट्रैटजकि पार्टनरशिप को लेकर एग्रीमेंट हुआ है. एथेंस ने ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में अपनी दिलचस्‍पी दिखाई है। तुर्की में बौखलाहट इस्‍लामिक NATO के जरिये भारत की घेरेबंदी करने की साजिश कर रहा है तुर्की अब भारत की कूटनीति के सामने पस्‍त होता दिख रहा है. दरअसल, तुर्की की ग्रीस से पुरानी रंजिश रही है. अब जब यह खबर सामने आई कि ग्रीस भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी कर रहा है तो तुर्की की सांस उखड़ने लगी है. अंकारा में बौखलाहट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तुर्की की मीडिया में ग्रीस पर पहले ही अटैक करने की सलाह दी जाने लगी है. तुर्की के एक्‍सपर्ट और नीति-नर्माताओं को इस बात का डर है कि यदि ग्रीस के पास ब्रह्मोस मिसाइल आ गई तो रीजन में सिक्‍योरिटी कैलकुलेशन पूरी तरह से बदल जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की के साथ ही पूरी दुनिया ने देखा कि ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने किस तरह से पाकिस्‍तान के तमाम एयर डिफेंस सिस्‍टम को भेदते हुए तबाही ट्रेलर दिखाया था। इस वजह से ब्रह्मोस बेहद खास     दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल: ब्रह्मोस लगभग Mach 2.8 से 3 की रफ्तार से उड़ती है, यानी आवाज की गति से करीब तीन गुना तेज।     भारत-रूस की संयुक्त परियोजना: इसे भारत के DRDO और रूस की NPO Mashinostroyenia ने मिलकर विकसित किया है।     मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च क्षमता: ब्रह्मोस को जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है।     ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक: लॉन्च के बाद इसे लगातार कंट्रोल करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे दुश्मन के लिए इसे रोकना मुश्किल हो जाता है।     बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान: यह समुद्र की सतह से सिर्फ 5 से 10 मीटर ऊपर उड़ सकती है, जिससे रडार पर पकड़ना कठिन होता है।     उच्च सटीकता के साथ हमला: ब्रह्मोस दुश्मन के ठिकानों और युद्धपोतों पर बेहद सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।     दो चरण वाला इंजन सिस्टम: पहले चरण में सॉलिड बूस्टर और दूसरे चरण में लिक्विड रैमजेट इंजन इस्तेमाल होता है, जो इसे सुपरसोनिक गति देता है।     भारी वारहेड ले जाने की क्षमता: यह करीब 200 से 300 किलोग्राम तक का पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है।     दुश्मन के लिए इंटरसेप्ट करना मुश्किल: इसकी तेज गति, कम ऊंचाई वाली उड़ान और बदलते फ्लाइट पाथ इसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बनाते हैं।     भारत का सफल रक्षा निर्यात हथियार: फिलीपींस ब्रह्मोस खरीदने वाला पहला विदेशी देश बना और अब कई अन्य देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। अर्मेनिया और साइप्रस को भी मिलेगा ब्रह्मोस? तुर्की के दो और पड़ोसी देश भारत के अहम साझीदार हैं – अर्मेनिया और साइप्रस. इन दोनों देशों ने भी नई दिल्‍ली के साथ अपने संबंधों को स्‍ट्रैटजिक लेवल पर अपग्रेड किया है. अर्मेनिया पहले से ही भारतीय हथ‍ियारों का बड़ा खरीदार बना हुआ है. वहीं, साइप्रस के प्रधानमंत्री निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स कुछ दिनों पहले ही भारत की यात्रा पर आए थे. इस दौरान दोनों देशों ने डिफेंस सेक्‍टर में साझीदारी को लेकर सहमति जताई है. ग्रीस और अर्मेनिया की तरह ही साइप्रस ने भी भारत से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल खरीदने की चाहत दिखाई है. उम्‍मीद है कि आने वाले दिनों, महीनों या कुछ वर्षों में ग्रीस, अर्मेनिया और साइप्रस के पास ब्रह्मोस मिसाइल होगी. इस तरह तुर्की तीन तरफ से यानी पूरब, पश्चिम और दक्षिण तीन दिशाओं से ब्रह्मोस मिसाइल की नोक पर होगा. और इसी बात से तुर्की में खलबली मची हुई है. तुर्की के एनालिस्‍ट और वहां की मीडिया पहले ही ग्रीस पर अटैक करने की बात करने लगे हैं।