samacharsecretary.com

चुनावी झटके के बाद बदला राजनीतिक गणित, कांग्रेस के सहयोगी ही सरकार के लिए बने मददगार

नई दिल्ली लोकसभा में परिसीमन विधेयक पर झटका लगने के बाद केंद्र सरकार ने अब नई रणनीति के साथ वापसी की तैयारी शुरू कर दी है. हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति का गणित बदल दिया है और इसी बदले हुए समीकरण के बीच सरकार अपने दो बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट परिसीमन (डिलिमिटेशन) और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ बिल को आगे बढ़ाने में जुट गई है।  इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि संसद में पहले विपक्षी एकता की वजह से अटक गए परिसीमन बिल को अब नए स्वरूप में लाने की तैयारी चल रही है. गृह मंत्रालय इस संबंध में नए विधेयक पर काम कर रहा है. माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पहले जैसी नहीं रही, जिसका फायदा सरकार उठाना चाहती है।  बदले राजनीतिक हालात के बाद नई रणनीति दरअसल, जिस विपक्षी मोर्चे ने संसद में एकजुट होकर सरकार की राह रोकी थी, अब उसी खेमे में दरार की चर्चाएं तेज हैं. बीजेपी की नजर खास तौर पर डीएमके और टीएमसी की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर है. पार्टी को उम्मीद है कि कुछ क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय स्तर पर भले विपक्ष के साथ रहें, लेकिन विशेष मुद्दों पर सरकार का समर्थन कर सकते हैं।  सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हालिया विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. इन चुनावों में विपक्षी दलों को लगे झटकों के बाद बीजेपी अब क्षेत्रीय दलों के साथ नए सिरे से बातचीत की कोशिश कर रही है. पार्टी का मानना है कि संसद में कुछ मुद्दों पर समर्थन जुटाने के लिए नए राजनीतिक समीकरण बनाए जा सकते हैं।  बीजेपी की नजर खास तौर पर तमिलनाडु की राजनीति पर है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने डीएमके के साथ भी संपर्क साधा है और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ विधेयक के मौजूदा मसौदे में बदलाव के संकेत दिए हैं, ताकि दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर किया जा सके।  डीएमके ने रखी अपनी शर्तें डीएमके के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी का रुख हमेशा तमिलनाडु के हितों को ध्यान में रखकर तय होता है. पार्टी का मानना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनकी संसदीय हिस्सेदारी कम नहीं होनी चाहिए।  इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर केंद्र सरकार यह भरोसा दिलाती है कि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा और संसद में उनकी आवाज कमजोर नहीं पड़ेगी, तो प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है. हालांकि उन्होंने बीजेपी के साथ किसी राजनीतिक गठजोड़ की संभावना को फिलहाल समय से पहले बताया।  वन नेशन-वन इलेक्शन पर भी काम जारी उधर, ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ विधेयक पर भी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. फिलहाल यह प्रस्ताव 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास है. समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी का कहना है कि रिपोर्ट पर तेजी से काम हो रहा है और निर्धारित समय के भीतर इसे संसद को सौंप दिया जाएगा।  बीजेपी नेताओं का मानना है कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती है. इसके तहत विभिन्न राज्यों की विधानसभा चुनाव समयसारिणी को धीरे-धीरे लोकसभा चुनावों के साथ समायोजित किया जा सकता है।  विपक्ष ने उठाए सवाल उधर कांग्रेस ने साफ किया है कि परिसीमन जैसे संवैधानिक महत्व के मुद्दे पर सरकार को सभी दलों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार को पहले सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और अपने प्रस्ताव लिखित रूप में सामने रखने चाहिए।  कांग्रेस का आरोप है कि पिछली बार सरकार ने कुछ क्षेत्रीय दलों से अनौपचारिक बातचीत तो की, लेकिन मुख्य विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया. पार्टी का कहना है कि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।  बंगाल की राजनीति पर भी नजर सूत्रों के अनुसार बीजेपी पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी करीबी नजर बनाए हुए है. पार्टी नेताओं का मानना है कि बंगाल चुनाव रिजल्ट के बाद टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और आंतरिक मतभेद भविष्य में संसद के भीतर नए राजनीतिक समीकरण पैदा कर सकते हैं।  हालांकि ममता बनर्जी लगातार बीजेपी पर राजनीतिक दबाव और प्रताड़ना के आरोप लगाती रही हैं. उनका कहना है कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन टीएमसी इससे डरने वाली नहीं है।  बड़ा सियासी मुद्दा बन सकते हैं दोनों बिल राजनीतिक जानकारों का मानना है कि परिसीमन और ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ दोनों ही मुद्दे आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रह सकते हैं. एक ओर केंद्र सरकार इन्हें प्रशासनिक सुधार और चुनावी खर्च कम करने से जोड़ रही है, वहीं विपक्षी दल इन्हें संघीय ढांचे और राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़े संवेदनशील मुद्दे के रूप में देख रहे हैं. ऐसे में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इन दोनों प्रस्तावों पर देशभर में व्यापक राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।   

मुख्यमंत्री का जीरो टॉलरेंस संदेश, अशिष्ट व्यवहार करने वाले अफसर पर गिरी गाज

मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश : जनता से अशिष्ट व्यवहार पर जीरो टॉलरेंस, दुर्ग जनपद सीईओ निलंबित मुख्यमंत्री की दोटूक : सुशासन में जवाबदेही सर्वोपरि, जनता से अशिष्ट व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं रायपुर   सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में आम जनता से अशिष्ट व्यवहार और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दुर्ग संभागायुक्त को दिए थे। मुख्यमंत्री साय के निर्देशों के परिपालन में कमिश्नर दुर्ग ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत दुर्ग, रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। संभागायुक्त दुर्ग द्वारा जारी निलंबन आदेश में उल्लेखित है कि कलेक्टर दुर्ग से प्राप्त प्रस्ताव एवं ग्राम थनौद में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में पाण्डेय द्वारा आम जनता से अशिष्ट व्यवहार संबंधी वीडियो क्लिप के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने शासन द्वारा आयोजित सुशासन तिहार एवं शिविर में कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही तथा अशिष्टतापूर्ण व्यवहार किया। यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के विपरीत है। इस संबंध में संभागायुक्त दुर्ग द्वारा पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, किंतु उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब समाधानकारक नहीं पाया गया। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के तहत प्रत्येक शासकीय सेवक को सदैव पूर्ण रूप से सत्यनिष्ठ एवं कर्तव्यपरायण रहना है तथा ऐसा कोई कार्य नहीं करना है, जो शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय हो। नियम 3-क के खण्ड (क) के अनुसार, कोई भी शासकीय सेवक अपने पदीय कृत्यों के पालन में अशिष्टता से कार्य नहीं करेगा।  लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन तंत्र आम नागरिकों के प्रति उत्तरदायी होता है, इसलिए प्रत्येक लोकसेवक द्वारा आम नागरिकों से शिष्ट व्यवहार को आचरण संहिता का महत्वपूर्ण घटक माना गया है। तदनुसार रूपेश कुमार पाण्डेय को कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही एवं कदाचरण के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।  निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

इंदौर के जल संकट पर एक्शन मोड में सीएम डॉ. यादव, हालात की समीक्षा के लिए बुलाई अहम बैठक

इंदौर के जल संकट की स्थिति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक ली अधिकारियों को दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश संकटग्रस्त वार्डों में विशेष जलापूर्ति योजना लागू की जाए जल चोरी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश पाइप-लाइन लीकेज और वितरण हानि को सुधारने के निर्देश नागरिकों को राहत मिले, हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  इंदौर स्थित संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर शहर में उत्पन्न जल संकट की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की तथा अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 24×7 जल नियंत्रण कक्ष के माध्यम से प्रतिदिन सुबह एवं शाम जलापूर्ति की समीक्षा की जाए। संकटग्रस्त वार्डों में विशेष जलापूर्ति योजना लागू कर प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर राहत प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि नल से जल सप्लाई के समय में असमानता और विसंगतियों को तत्काल दूर किया जाये। साथ ही सभी क्षेत्रों में संतुलित जल वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शासकीय महाविद्यालयों, छात्रावासों तथा अन्य आवासीय संस्थानों में जल उपलब्धता की विशेष चिंता करने के निर्देश दिए। साथ ही जल चोरी करने वालों एवं मोटरों के माध्यम से अवैध रूप से पानी खींचने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने को कहा। जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शहर की बड़ी जल टंकियों का पूर्ण क्षमता से उपयोग सुनिश्चित किया जाए। निजी एवं नगर निगम के टैंकरों की मिनट-टू-मिनट मॉनिटरिंग की जाए। पाइपलाइन लीकेज एवं वितरण हानि को तत्काल सुधारकर जल की बर्बादी रोकी जाए। इउन्होंने कहा कि भोपाल से वरिष्ठ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी पूर्व में भी इंदौर का दौरा कर चुके हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पुनः भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और नागरिक समितियों के साथ नियमित संवाद तथा समन्वय बनाए रखने तथा जल संकट की स्थिति से संबंधित जानकारी एवं प्रतिवेदन मुख्यमंत्री कार्यालय को निरंतर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक गोलू शुक्ला, विधायक श्रीमती मालिनी गौर, विधायक मधु वर्मा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।  

1 साल बाद फिर पटरी पर लौटेंगी ट्रेनें, दिल्ली से जम्मू-कश्मीर का सफर होगा आसान

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर जाने वाले यात्रियों की परेशानी अब दूर होगी। पिछले वर्ष भारी वर्षा और बाढ़ के कारण रावी नदी का पानी बहुत बढ़ गया था। तेज बहाव की वजह से कठुआ और माधोपुर के बीच पुल का एक पिलर क्षतिग्रस्त हो गया था। इस कारण सुरक्षा के कारणों से ट्रेनों के परिचालन को रोक दिया गया था। कई ट्रेनें पिछले एक साल से निरस्त थीं। इससे जम्मू कश्मीर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब क्षतिग्रस्त पुल को ठीक कर दिया गया है। निरस्त ट्रेनें चलाने की घोषणा कर दी गई है। स्पेशल ट्रेनों के संचालन में होगी आसानी 30 मई को उत्तर रेलवे के रेलवे संरक्षा आयुक्त दिनेश चंद देशवाल ने पुल का निरीक्षण और गति परीक्षण करने के बाद ट्रेन संचालन को मंजूरी दे दी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह पुल पठानकोट-जम्मू-श्रीनगर रेल मार्ग का अहम हिस्सा है। इसके खुलने से जम्मू-कश्मीर आने-जाने वाले यात्रियों और मालगाड़ियों को सीधा लाभ होगा। कटड़ा और जम्मू जाने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिलेगी। इस पुल की बहाली से ट्रेनों का संचालन समय पर होगा, साथ ही अमरनाथ यात्रा व ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान विशेष ट्रेनों के संचालन में आसानी होगी। इन निरस्त ट्रेनों का शुरू हो रहा परिचालन     काठगोदाम-जम्मूतवी गरीबरथ (12207/12208)     गाजीपुर सिटी-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा (14611/14612)     भावनगर-एमसीटीएम ऊधमपुर जन्मभूमि एक्सप्रेस(19107/19108)     तिरुपति-जम्मूतवी हमसफर एक्सप्रेस (22705/22706)     दुर्ग-एमसीटीएम ऊधमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12549/12550)     साबरमती -श्री माता वैष्णों देवी कटड़ा एक्सप्रेस (19415/19416)     दुर्ग-एमसीटीएम ऊधमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20847/20848)     कोटा- एमसीटीएम ऊधमपुर एक्सप्रेस (20985/20986) 15 जून से शुरू होगा इन ट्रेनों का संचालन     दिल्ली सराय रोहिल्ला-जम्मूतवी दुरंतो एक्सप्रेस (12265)     कालका-श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा एक्सप्रेस (14503/14504)     दिल्ली सराय रोहिल्ला -एमसीटीएम ऊधमपुर एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22401/22402)     सुबेदरागंज-एमसीटीएम ऊधमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22431/22432)  

RCB बनी IPL चैंपियन तो खुल गया खजाना! ट्रॉफी के साथ मिले इतने करोड़ रुपये

अहमदाबाद   रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने आईपीएल 2026 में इतिहास रचते हुए चैंपियन का ताज अपने सिर सजा लिया है. अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मैच में आरसीबी ने गुजरात टाइटंस को 5 विकेट से मात देकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा किया. पिछले सीजन आरसीबी ने फाइनल में पंजाब किंग्स को हराकर पहली बार आईपीएल ट्रॉफी उठाई थी. अब रजत पाटीदार की इस टीम ने टाइटल को डिफेंड किया है. इस ऐतिहासिक खिताबी जीत के बाद चैंपियन बेंगलुरु पर पैसों की बारिश हुई. आइए जानते हैं आरसीबी को कितने करोड़ का इनाम मिला. साथ ही यह भी जानेंगे की रनरअप गुजरात टाइटंस और नौ टीमों की झोली में कितने करोड़ रुपये आए।  विजेता आरसीबी को मिले कितने करोड़? आईपीएल 2026 की चमचमाती ट्रॉफी उठाने के साथ ही चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को ₹20 करोड़ की भारी-भरकम इनामी राशि दी गई. यह आरसीबी के इतिहास का एक और सुनहरा पन्ना है, जहां टीम ने न सिर्फ फैंस का दिल जीता, बल्कि लगातार दूसरी बार खिताब जीतने का कारनामा किया. मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बाद आरसीबी इस उपलब्धि को नाम करने वाली टीम बनी है. फाइनल मुकाबला हारने के बावजूद उप-विजेता रही गुजरात टाइटंस खाली हाथ नहीं लौटी. शुभमन गिल की कप्तानी वाली इस टीम को ₹13 करोड़ रुपये मिले।  प्लेऑफ की बाकी टीमों पर भी बरसा पैसा BCCI ने सिर्फ फाइनल खेलने वाली टीमों को ही नहीं, बल्कि प्लेऑफ तक का सफर तय करने वाली बाकी दोनों टीमों को भी करोड़ों के इनाम से नवाजा. क्वालिफायर-2 में हारने वाली राजस्थान की टीम को ₹7 करोड़ मिले. एलिमिनेटर मैच में बाहर होने वाली हैदराबाद की टीम को ₹6.5 करोड़ की इनामी राशि मिली. बीसीसीआई ने आईपीएल 2026 के लिए कुल ₹46.5 करोड़ से ज्यादा का प्राइज पूल तैयार किया था, जो शीर्ष 4 टीमों के बीच बांटा गया. पांचवें से दसवें स्थान पर रहने वाली टीमों को कोई आधिकारिक प्राइज मनी नहीं मिलती है।  कैसे बंटता है यह पैसा? आईपीएल के नियमों के मुताबिक, जो भी प्राइज मनी टीम जीतती है, वह सीधे किसी एक की जेब में नहीं जाती. इसका एक तय गणित है. कुल इनामी राशि का आधा हिस्सा (जैसे आरसीबी के ₹20 करोड़ में से ₹10 करोड़) टीम के सभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ में बराबर या उनके प्रदर्शन के आधार पर बांट दिया जाता है. बाकी का आधा हिस्सा फ्रेंचाइजी के मालिकों के खाते में जाता है।  पहले सीजन से 316 की बढ़ोतरी साल 2008 में जब आईपीएल का पहला सीजन खेला गया था, तब शेन वॉर्न की कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स ने खिताब जीता था और उन्हें सिर्फ ₹4.80 करोड़ मिले थे. आज 18 साल बाद 2026 में प्राइज मनी 316.67% बढ़कर ₹20 करोड़ हो चुकी है, जो दिखाता है कि यह लीग दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग क्यों है. इसके अलावा ऑरेंज कैप और पर्पल कैप जीतने वाले खिलाड़ियों को भी ₹10-10 लाख रुपये के नकद पुरस्कारों के साथ-साथ अन्य व्यक्तिगत अवॉर्ड्स के रूप में करीब ₹1 करोड़ तक की अतिरिक्त राशि दी गई है। 

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से मजबूत हो रही सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्य : सीएम विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सामाजिक समरसता, सादगी और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त कर रही : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बेमेतरा में सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, नवदंपतियों को दिया आशीर्वाद विधायक दीपेश साहू ने सामूहिक विवाह में शामिल होकर प्रस्तुत की प्रेरणादायी मिसाल, बैलगाड़ी में निकली बारात बनी आकर्षण का केंद्र रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बेमेतरा में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद प्रदान कर उनके सुखद एवं समृद्ध वैवाहिक जीवन की कामना की।  मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना समाज में समानता, सामाजिक समरसता, सादगी और सकारात्मक मूल्यों को सशक्त करने का प्रभावी माध्यम बन रही है। यह योजना बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार की संवेदनशील सोच को प्रतिबिंबित करती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन सामाजिक एकता और सहभागिता की भावना को मजबूत करते हैं। सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए यह योजना सम्मानजनक और गरिमापूर्ण विवाह का अवसर प्रदान कर रही है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का वातावरण निर्मित हो रहा है। उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कृतियों और सामाजिक मूल्यों का मिलन होता है। इस अवसर पर बेमेतरा विधायक दीपेश साहू भी वैवाहिक बंधन में बंधे। मुख्यमंत्री साय ने विधायक साहू के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए सामूहिक विवाह जैसे आयोजन का हिस्सा बनना और सादगीपूर्ण तरीके से विवाह करना समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बैलगाड़ी में बारात निकालकर विधायक दीपेश साहू ने हमारी समृद्ध लोक परंपराओं, सांस्कृतिक जड़ों और सामाजिक समरसता को सम्मान देने का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह संदेश देता है कि आधुनिक जीवनशैली और सार्वजनिक दायित्वों के बीच भी अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़ाव बनाए रखा जा सकता है। मुख्यमंत्री साय ने नवदंपतियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन विश्वास, प्रेम, सम्मान और पारस्परिक सहयोग की मजबूत नींव पर आगे बढ़ता है। उन्होंने प्रभु राम से सभी नवदंपतियों के सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय दाम्पत्य जीवन की प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी जोड़े समाज और परिवार के लिए प्रेरणादायी जीवन का उदाहरण बनें।

UP में 1645 विस्थापित परिवारों के लिए बड़ा दिन, योगी सरकार देगी जमीन का अधिकार

 बिजनौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को बिजनौर के आलमपुर गौंरी, अफजलगढ़, धामपुर में एक बड़े कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान से विस्थापित 1645 परिवारों को जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण पत्र वितरित करेंगे. सरकार वंचित, शोषित और विस्थापित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें अधिकार दिलाने के लिए यह कदम उठा रही है. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के हाथों 50 पूर्व सैनिकों व पट्टाधारकों को भी लाभ मिलेगा. इसके अलावा, वह प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के लाभार्थियों को आवंटन पत्र और चेक सौंपकर स्थानीय लोगों को बड़ी विकास योजनाओं से जोड़ेंगे।  बिजनौर में भव्य कार्यक्रम और कैफे का उद्घाटन इस भव्य आयोजन के दौरान सीएम योगी महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं द्वारा संचालित 'विदुर प्रेरणा कैफे' का भी उद्घाटन करेंगे. सरकार का मुख्य उद्देश्य इन विस्थापित और वंचित परिवारों को नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में सुरक्षा, सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है, जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके।  पहले भी विस्थापितों को मिले अधिकार उत्तर प्रदेश सरकार इससे पहले भी कई वंचित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ चुकी है. अप्रैल के महीने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से विस्थापित हुए 331 परिवारों को जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण पत्र बांटा था. इसके अलावा, चंदन चौकी (पलिया) में आयोजित कार्यक्रम में नदियों के कटान से प्रभावित पूर्वी उत्तर प्रदेश के 2350 परिवारों और थारू जनजाति के 4356 परिवारों को भूमि अधिकार पत्र आवंटित किए गए थे।  पुनर्वास के लिए करोड़ों की आर्थिक मदद इसी सिलसिले में मार्च महीने में बहराइच की ग्राम पंचायत सेमरीहना में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. वहां सीएम योगी ने भरथापुर गांव के 118 लाभार्थियों को पुनर्वास सहायता, कृषि भूमि और अन्य संपत्तियों के समकक्ष मूल्य के रूप में प्रति लाभार्थी 15 लाख रुपये की दर से 21.55 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की थी. साथ ही 136 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास, शौचालय और आवासीय पट्टे भी दिए गए थे। 

युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ी पहल, खेल सुविधाओं के उन्नयन पर सरकार का जोर : ओ.पी. चौधरी

युवा प्रतिभाओं को मिलेगा बेहतर मंच, खेल सुविधाओं के उन्नयन पर जोर : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी रायगढ़ स्पोर्ट्स क्लब में टेनिस कोर्ट का किया निरीक्षण, युवा खिलाड़ियों से की मुलाकात रायपुर, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने आज रायगढ़ स्पोर्ट्स क्लब पहुंचकर टेनिस कोर्ट का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध खेल सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने खेल अधोसंरचना के बेहतर विकास एवं खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री चौधरी ने क्लब में अभ्यास कर रहे युवा बैडमिंटन खिलाड़ियों से आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल केवल शारीरिक फिटनेस का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त साधन भी है। मंत्री चौधरी युवा खिलाड़ियों को पूरी लगन और समर्पण के साथ अभ्यास जारी रखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि रायगढ़ की प्रतिभाओं में अपार संभावनाएं हैं। उचित मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाओं के माध्यम से ये खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और खेल अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उनका उद्देश्य है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवाओं को समान अवसर मिलें तथा वे अपनी प्रतिभा का सर्वोत्तम प्रदर्शन कर सकें। इस अवसर पर क्लब के पदाधिकारी, खेल प्रेमी एवं खिलाड़ी उपस्थित रहे। खिलाड़ियों ने वित्त मंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए और खेल सुविधाओं के विस्तार को लेकर चर्चा की।

बिजली, स्वास्थ्य बीमा, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और महिला बैंक खातों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

एनएफएचएस-6 की ताजा रिपोर्ट में यूपी की बड़ी छलांग: 8 साल में बदली सामाजिक विकास की तस्वीर बिजली, स्वास्थ्य बीमा, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और महिला बैंक खातों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी योगी सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तीकरण मानकों में सुधार परिवार नियोजन अभियान रहा सफल, प्रजनन दर 2.74 से घटकर 2.2 हुई संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंची स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत पहुंचा लखनऊ  राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश में सामाजिक विकास की बदलती तस्वीर को सामने रखा है। वर्ष 2015-16 और 2023-24 के बीच के आंकड़ों की तुलना बताती है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के व्यापक क्रियान्वयन, महिला कल्याण कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचे के विकास का असर अब राष्ट्रीय स्तर के सर्वेक्षणों में भी दिखाई देने लगा है। सबसे पहले यदि बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो बिजली और स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। वर्ष 2015-16 में जहां केवल 71 प्रतिशत घरों तक बिजली की पहुंच थी, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 95.8 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार स्वास्थ्य बीमा या किसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जुड़े परिवारों का प्रतिशत 6.1 से बढ़कर 37.2 प्रतिशत पहुंच गया है। आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी पहलों ने लाखों परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच उपलब्ध कराया है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता भी 96.4 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 97.9 प्रतिशत (ग्रामीण) पहुंच गई है, जो जीवन स्तर में सुधार का संकेत है। जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2015-16 के 2.74 से घटकर 2023-24 में 2.2 रह गई है। यह आंकड़ा जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। परिवार नियोजन के किसी भी साधन का उपयोग करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 45.5 से बढ़कर 63.8 प्रतिशत हो गया है। वहीं ऐसी महिलाएं जो बच्चों के जन्म में अंतर तो रखना चाहती थीं परंतु परिवार नियोजक साधनों का उपयोग नहीं कर पा रहीं थीं, उनकी संख्या में भी काफी गिरावट आई है। यह 18 प्रतिशत से घटकर 10.8 प्रतिशत रह गई है। किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है। 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की युवतियों में मां बनने अथवा गर्भवती होने का प्रतिशत 4 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत हो गया है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। सरकारी अस्पतालों के विस्तार, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रियता, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और जननी सुरक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का असर अब आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। वर्ष 2015-16 में केवल 26.4 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था के दौरान चार या उससे अधिक बार स्वास्थ्य जांच कराती थीं, जबकि अब गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 70.6 तक पहुंच गया है। संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत हो गई है, जो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। टीकाकरण के क्षेत्र में भी प्रदेश ने बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 2015-16 में 12 से 23 माह आयु वर्ग के केवल 51.1 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 81.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मिशन इंद्रधनुष और नियमित टीकाकरण अभियानों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों में गंभीर बीमारियों का खतरा कम हुआ है और बाल स्वास्थ्य में सुधार आया है। कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। बच्चों में बौनापन यानी उम्र के अनुसार कम ऊंचाई की समस्या 46.2 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत पर आ गई है। इसी प्रकार कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 39.5 से घटकर 34.5 प्रतिशत रह गया है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, पोषण अभियान और आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है। महिला सशक्तीकरण के मोर्चे पर सर्वेक्षण ने सबसे सकारात्मक तस्वीर पेश की है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 10 वर्ष या उससे अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 32.9 से बढ़कर 42.5 प्रतिशत हो गया है। वहीं वित्तीय आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है। स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत पहुंच गया है। जनधन योजना, स्वयं सहायता समूहों और मिशन शक्ति जैसे कार्यक्रमों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े संकेतकों में भी सुधार दर्ज हुआ है। पति द्वारा शारीरिक अथवा यौन हिंसा का सामना करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 34.4 से घटकर 28.5 प्रतिशत रह गया है। यह बदलाव महिलाओं में बढ़ती जागरूकता, शिक्षा, आर्थिक सशक्तीकरण और सरकारी सहायता तंत्र की मजबूती का परिणाम माना जा रहा है। प्रदेश के विकास की यह तस्वीर आने वाले वर्षों में और बेहतर होने की उम्मीद जगाती है।

इंदौर में हुई तकनीक आधारित सुशासन की नई पहल- मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सुशासन की दिशा में वरदान साबित हो रहा विज्ञान – मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में हुई तकनीक आधारित सुशासन की नई पहल- मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर शहर में खोले जाएंगे तीन नए थाने, पुलिस बल की पूर्ति भी की जाएगी- मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की घोषणा सरकार हर जिले में स्थापित कर रही है पुलिस बैंड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ के तहत 18 अत्याधुनिक हाईटेक ड्रोन्स किए लोकार्पित, 10 पुलिस वाहनों को दिखाई हरी झंडी ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ मोबाईल एप का किया शुभारंभ इंदौर मध्यप्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन की पहल के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ का लोकार्पण तथा ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने 18 अत्याधुनिक हाईटेक ड्रोन्स का और 10 पुलिस वाहनों का लोकार्पण कर इन्हें इंदौर पुलिस के बेड़े में शामिल कराया। यह ड्रोन्स पुलिस की तीसरी आंख के रूप में हर वक्त कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और भी अधिक प्रभावी बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर इंदौर शहर में तीन नए पुलिस थाने खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की कमी की पूर्ति भी क्रमबद्ध रूप से की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम हर साल पुलिस विभाग के 22 हजार 500 पदों पर भर्ती कर रहे हैं। लगभग सभी पदों पर भर्ती जारी है। हम प्रदेश के हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना भी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार हमेशा पुलिस विभाग के साथ है। परन्तु नागरिकों को बेवजह परेशानी या अपने पदीय कर्तव्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक लोगों के हित में है, तो एक चुनौती भी है, इसलिए इसका बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रोन पुलिस का कान्सेप्ट इंदौर से ही आया है। अब यह एक मिसाल बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास के समन्वय को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारी सरकार 'विरासत से विकास' के मार्ग पर चल रही है। उन्होंने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने जिस इंदौर को सेवा, सुशासन और जनकल्याण के जीवन मूल्यों से जोड़ा था, अपनी श्रम साधना से सींचा था, आज वही शहर नवाचार और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बन रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान वास्तव में सुशासन की दिशा में 'लोक कल्याणकारी राज्य' के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार तकनीक से लोगों की तकदीर बदलने, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और लोकसेवा का नया अध्याय लिखने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ और ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ जैसे नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को नई ताकत प्रदान करेंगे। आज इंदौर में हुआ यह नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को बेहतर काम करने की नई ऊर्जा देगा तथा नागरिक सुविधाओं को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल स्मार्ट और सुरक्षित इंदौर की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है, जो तकनीक और सुशासन के बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी। आज लोकार्पित ड्रोन्स कानून व्यवस्था की स्थापना में पुलिस के लिए सहायक होंगे, वहीं ट्रेफिक साथी ऐप वाहन चालकों के लिए बेहद कारगर साबित होगा। इस ऐप के जरिए वाहन चालक पार्किंग की बेहतर लोकेशन जान सकेंगे। पुलिस कमिश्नर इंदौर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इंदौर पुलिस के बेड़े में 18 ड्रोन्स शामिल किए जा रहे हैं। अब इंदौर पुलिस भीड़ के समुचितप्रबंधन में इन अत्याधुनिक ड्रोन्स के बेहतर उपयोग करने के लिये तैयार हो गई है। इन ड्रोन्स से 2 किलोमीटर का दायरा कवर होगा। उन्होंने कहा कि अब हम न सिर्फ ट्रैफिक बल्कि अपराधों पर भी नजर रख सकेंगे। इसका प्रयोग इंदौर में रंगपंचमी पर निकली गैर और बसंत पंचमी पर भोजशाला में कानून व्यवस्था के लिए किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इंदौर पुलिस ने 4 हजार 370 लोगों को नि:शुल्क हेलमेट बांटे हैं। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, पूर्व मंत्री एवं विधायिका सुउषा ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं विधायक महेन्द्र हार्डिया, विधायक रमेश मेंदोला, विधायिका मालिनी गौड़, विधायक मधु वर्मा, विधायक मनोज पटेल, विधायक राकेश शुक्ला सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।