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ग्लोबल तनाव से बाजार में हाहाकार! ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच निवेशकों के करोड़ों स्वाहा

मुंबई  जिसका डर था वही हुआ… भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को एक बार फिर बड़ी गिरावट आई है. ईरान और इजरायल के बीच मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले औऱ क्रूड की कीमतों में अचानक तेज उछाल के बीच सेंसेक्स-निफ्टी भी सहमे हुए नजर आए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला Sensex खुलने के साथ ही करीब 800 अंक फिसल गया, तो नहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का Nifty भी 250 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर खुला. इस गिरावट के बीच तमाम बड़ी कंपनियों के शेयर बिखरे हुए नजर आए और हर ओर लाल रंग में कारोबार शुरू हुआ।  खुलते ही बिखरे सेंसेक्स-निफ्टी  सोमवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,243 की तुलना में 822 अंकों की तेज गिरावट लेकर 73,421 के लेवल पर ओपन हुआ और फिर अचानक फिसलते हुए 73,318 पर जा पहुंचा. एनएसई के निफ्टी की चाल भी सेंसेक्स के जैसी ही नजर आई और ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स भी अपने पिछले शुक्रवार के बंद 23,366 की तुलना में 286 अंक फिसलकर 23,080 पर खुला।  रिलायंस समेत इन शेयरों में तगड़ी गिरावट  शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के बीच कई बड़ी कंपनियों के शेयर खुलने के साथ ही बुरी तरह टूट गए. बीएसई लार्जकैप पर नजर डालें, तो Eternal Share (2.50%), TCS Share (2.10%), M&M Share (2.05%), HDFC Bank (1.50%) और Reliance Share (1.25%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे।   मिडकैप कैटेगरी में शामिल Ashok Leyland Share (3%), Muthoot Finance Share (2.63%), Godrej Properties Share (2.60%) और UPL Share (2%) की गिरावट में कारोबार कर रहे थे।  बाजार में गिरावट के ये कारण शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण ईरान-इजरायल के बीच फिर से शुरू हुई तेज जंग है. इसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत (Brent Crude Price) करीब 4 फीसदी की उछाल के साथ 96 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है. तो वहीं WTI Crude Price भी करीब इतनी ही बढ़त के साथ 94 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है।  अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पहले ही कच्चे तेल की कीमतें दुनिया को डरा रही थीं. अब ईरान और इजरायल में नए सिरे से भीषण जंग ने अचानक क्रूड की कीमतों में आग लगा दी है. ईरान ने होर्मुज की तरह ही खास बॉब अल मंदेब समुद्री रूट को बंद करने की धमकी भी दी है। 

ट्रंप की मनाही बेअसर! इजरायल ने ईरान पर बरसाए बम, जवाबी हमले से दहला येरूशलम

वॉशिंगटन/तेल अवीव हिज्बुल्लाह पर इजरायल के हमले के बाद ईरान ने 8 अप्रैल के बाद पहली बार इजरायल पर मिसाइल हमले किए। जिसके बाद आज सुबह इजरायल ने भी ईरान में जमीन से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए हैं। इसके बाद एक बार फिर से युद्ध छिड़ने की आशंका काफी तेज हो गई है। इजरायल डिफेंस फोर्स ने कहा है कि कुछ देर पहले इजरायली वायु सेना ने पश्चिमी और मध्य ईरान में ईरानी आतंकी शासन के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। खास बात ये है कि इजरायल ने तब हमला किया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू से हमला नहीं करने को कहा था इसीलिए सवाल ये हैं कि अगर ये जंग फिर शुरू होता है तो क्या अमेरिका, इजरायल के साथ खड़ा रहेगा? इसके अलावा मिसाइलों के आदान प्रदान के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित शांति समझौते में मुश्किलें आ सकती हैं। ट्रंप उम्मीद कर रहे थे कि इस मामले को दबाकर रखा जाए। उन्हें उम्मीद होगी कि यह मामला अप्रैल 2024 जैसा ही रहेगा जब इजराइल और ईरान ने एक-दूसरे पर हमले किए थे लेकिन कुछ दिनों बाद मामला शांत हो गया और यह बड़े संघर्ष में नहीं बदला जिसकी उस समय चिंता थी। लेकिन इस बार मामला अलग तरीके का है। इजरायल-ईरान के बीच क्या टूट गया युद्धविराम? डोनाल्ड ट्रंप को अभी भी उम्मीद हो सकती है कि ईरान और इजरायल एक बार फिर से युद्ध में नहीं फंसेगे लेकिन ऐसा होना मुश्किल है। ट्रंप ने कुछ देर पहले ही फाइनेंशियल टाइम्स से कहा था कि वो ईरान युद्ध से जुड़े सारे फैसले वही लेते हैं। ट्रंप ने सोमवार को फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास ईरान के साथ डील मानने के अलावा 'कोई चारा नहीं' होगा। ट्रंप ने कहा 'फैसले मैं ही लेता हूं, सारे फैसले मैं ही लेता हूं, वह फैसले नहीं लेते।' लेकिन इजरायल ने ईरान पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला कर साबित कर दिया है कि ट्रंप सारे फैसले नहीं लेते हैं। ईरान-अमेरिका जंग में पिस रही दुनिया, होर्मुज के बाद बाब अल मंडेब बंद करने की धमकी FT के मुताबिक ट्रंप ने यह भी कहा कि रविवार को इजरायल पर हुए ईरानी मिसाइल हमले का 'डील पर कोई असर नहीं' पड़ेगा। ट्रंप के साथ बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने यह साफ कर दिया होगा कि भले ही ट्रंप इजरायल से शांति बनाए रखना चाह रहे हों लेकिन इजरायल अपनी मर्जी से काम करेगा। इसीलिए ट्रंप के लिए स्थिति काफी मुश्किल होने वाली है। ईरान और इजरायल को फिर से युद्धविराम के लिए मनाना आसान नहीं होगा। इजरायली पीएम नेतन्याहू पहले से ही युद्धविराम समझौतों से नाराज थे। उन्हें युद्धविराम की शर्तें भी पसंद नहीं हैं लेकिन असल सवाल ये है कि क्या ईरान अगर नये सिरे से हमले करता है तो क्या अमेरिका, इजरायल की मदद करेगा? ट्रंप अब क्या कर सकते हैं? ट्रंप के पास नाजुक युद्धविराम को बचाने का बहुत कम रास्ते बचे हैं। वो अब बेंजामिन नेतन्याहू पर भारी प्रेशर बना सकते हैं कि वो ईरान के अगले हमलों का जवाब ना दें। लेकिन ऐसा होना नामुमकिन की तरह है। इजरायल पर यमन की तरफ से भी हमले किए गये हैं और इजरायल हिज्बुल्लाह पर हमले जारी रखेगा। इसके अलावा ट्रंप अगर युद्ध में फिर से शामिल होता है तो ईरान के हमले मध्य पूर्व के देशों जैसे सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, कतर पर फिर से शुरू हो जाएंगे। 8 अप्रैल से चल रहे युद्धविराम के बीच ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता फिर से हासिल कर ली है। इसीलिए आगे का रास्ता बहुत मुश्किल नजर रहा है कि युद्धविराम जारी रह सके। अभिजात शेखर आजाद

धार्मिक स्थलों को पर्यटन केंद्र बनाने की योजना, अमरोहा में बड़े प्रोजेक्ट पर तैयारी

 अमरोहा प्रदेश सरकार पर्यटन के विकास पर अधिक जोर दे रही है। उसके द्वारा धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनपद के सात धार्मिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव प्रशासन ने विधानसभा वार तैयार किया है। 2225 लाख से उनकी तस्वीर को बदला जाएगा। इस बार एक गुरुद्वारा को भी प्रस्ताव में शामिल किया गया है। सभी के प्रस्ताव मंजूरी के लिए पर्यटन विभाग को भिजवा दिए गए हैं। उसकी मंजूरी मिलने और शासन से धनराशि आवंटित होने के बाद धार्मिक स्थलों पर कार्य शुरू किया जाएगा। धार्मिक स्थलों के प्रति पर्यटक आकर्षित हों और प्रदेश की आय में बढ़ोतरी हो, इसके लिए सरकार द्वारा प्रत्येक जनपद के मुख्य धार्मिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने का कार्य चल रहा है। राज्य योजना अंतर्गत पर्यटन विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। इसके लिए पर्यटन विभाग हर वित्तीय वर्ष में जिला प्रशासन से धार्मिक स्थलों के प्रस्ताव मांगता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में विधानसभा वार सात धार्मिक स्थलों का प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा गया है। इसमें नौगावां सादात विस क्षेत्र में स्थित वारसपुर कलां का शिव मंदिर, गुरुकुल कन्या चोटीपुरा का वेद मंदिर, खजूरी गांव में स्थित बाबा बालक राम मंदिर, गुरुद्वारा सिंह सभा गुरुनानक दरबार खंडसाल कलां, हसनपुर विस क्षेत्र के ग्राम ढबारसी में स्थित प्राचीन शिव मंदिर, ग्राम बिजनौरा स्थित शिव मंदिर व अमरोहा में वासुदेव मंदिर पर लाइट एवं साउंड शो के प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। जिन पर करीब 2225 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। वर्ष 2025-26 में तीन परियोजनाओं को मिली थी मंजूरी पर्यटन विभाग की राज्य योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 283.27 लाख की तीन परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी। इसमें नाैगावां विस क्षेत्र में बाबा लालचंद्र मंदिर जकड़ी, अमरोहा विस क्षेत्र के गांव रेहरा में प्रज्ञा बुद्ध बिहार, हसनपुर में चामुंडा देवी मंदिर शामिल हैं। वर्ष 2023-24 में चार परियोजनाएं हुई थी मंजूर वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य योजनांतर्गत चार परियोजनाएं मंजूर हुई थी। इनमें हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित शिव मंदिर ग्राम फूलपुर बीझलपुर, नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र में शिव मंदिर मेला स्थल गांव गजस्थल, अमरोहा विस क्षेत्र में वासुदेव मंदिर व मंडी धनौरा क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिव मंदिर पत्थरकुटी शामिल हैं। जिन पर पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने के लिए 445.93 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। वर्ष 2024-25 में दो ही परियोजनाओं को मिली थी मंजूरी राज्य योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में जनपद में 139.80 लाख रुपये की दो ही परियोजनाओं को मंजूरी मिली थी। जिसमें हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में मोहल्ला हाेलीवाला स्थित शिवाला मंदिर परिसर, नौगावां सादात विस क्षेत्र में स्थित ग्राम बहलोलपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर शामिल हैं। धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए प्रस्ताव बनाकर मंजूरी के लिए पर्यटन विभाग को भेजे गए हैं। जिनकी मंजूरी और धनराशि मिलने के बाद उनके विकास का कार्य कराया जाएगा।   अश्वनी कुमार मिश्र, सीडीओ  

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान से जल संरक्षण बना जनआंदोलन, रोजगार और ग्रामीण समृद्धि को मिली नई गति

रायपुर  जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित वर्षा और बढ़ते जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को लेकर एक व्यापक जनअभियान आकार ले रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत संचालित ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से प्रदेशभर में जल संरक्षण, रोजगार सृजन, हरित विकास और आजीविका संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। जल संरक्षण अब केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह जनभागीदारी से संचालित एक व्यापक सामाजिक पहल के रूप में विकसित हो रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें तालाब, डबरियां, चेकडैम, जल संवर्धन संरचनाएं, स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच, खेत तालाब और अन्य जल संरक्षण कार्य शामिल हैं। इन परिसंपत्तियों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में भूमि में रोकना, भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता को सुदृढ़ करना है। इन कार्यों के माध्यम से प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस प्रकार जल संरक्षण का यह अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम भी बन रहा है। जल संरक्षण से आजीविका का सृजन राज्य सरकार ने जल संरक्षण को सीधे ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। समाज के संवेदनशील और कमजोर वर्गों की निजी भूमि पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इन परिसंपत्तियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के अवसर मिल रहे हैं। इसी प्रकार ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं। इन जल संरचनाओं को स्वयं सहायता समूहों, विशेषकर महिला समूहों की आजीविका से जोड़ने की पहल की गई है, जिससे जल संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी मॉडल विकसित हो रहा है। पहाड़ियों पर ट्रेंच, मैदानों में जल संचयन प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में ढलान और पहाड़ी भूभागों पर स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (SCT) का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तेज बहाव को रोककर उसे भूमि में समाहित होने का अवसर देती हैं। इससे मिट्टी का कटाव कम होता है, भू-जल स्तर में सुधार होता है और वृक्षारोपण को आवश्यक नमी उपलब्ध होती है। जल संरक्षण और वृक्षारोपण के इस समन्वित प्रयास से हरित आवरण में वृद्धि हो रही है तथा पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिल रही है। तकनीक से जल संरक्षण को नई दिशा ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की एक प्रमुख विशेषता आधुनिक तकनीकों का उपयोग है। कार्यों की वैज्ञानिक योजना और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप तथा वाटरशेड सिद्धांतों का उपयोग किया जा रहा है। भू-जल स्तर की निगरानी के लिए जलदूत प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से खुले कुओं के जल स्तर का नियमित मापन किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर जल स्तर की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर जल बजट तैयार करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। पारदर्शिता और जनभागीदारी का मॉडल मनरेगा के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली विकसित की गई है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने गांव में स्वीकृत और पूर्ण कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। रोजगार दिवस, आवास दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के माध्यम से भी लोगों की भागीदारी और निगरानी को बढ़ावा दिया जा रहा है। भागीदारी से साझेदारी की ओर जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण का यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है। ग्राम सभाओं, जागरूकता अभियानों और सामुदायिक प्रयासों के माध्यम से जल संरक्षण को लोगों के दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान आज यह दिखा रहा है कि जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़कर ग्रामीण विकास का एक स्थायी और समावेशी मॉडल विकसित किया जा सकता है। यह अभियान केवल पानी बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि गांवों में समृद्धि, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय संतुलन की नई नींव रख रहा है।

रूस-चीन रक्षा साझेदारी मजबूत, एयर डिफेंस यूनिट विजिट से नई हलचल

मॉस्को रूस और चीन के बीच बढ़ते सैन्य संबंधों ने भारत की चिंता को बढ़ा दिया है। रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हफ्ते पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की एक निरीक्षण टीम ने रूस के पूर्वी सैन्य जिले में कई ठिकानों का दौरा किया। इसमें सुदूर-पूर्वी ज्यूइश ऑटोनॉमस रीजन में मौजूद एयर डिफेंस मिसाइल यूनिट भी शामिल थी। यह दौरा यह दौरा दशकों पुराने 'भरोसा बढ़ाने वाले तंत्र' के तहत किया गया। इसी दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन और रूस को कुदरती सहयोगी और पार्टनर बताया और जोर दिया कि उनके बीच बढ़ता सैन्य सहयोग किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ नहीं है। रूसी समाचार एजेंसी TASS ने जिला कमांड के प्रेस ऑफिस का हवाला देते हुए बताया कि 2-3 जून को PLA का यह निरीक्षण दौरा चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के बीच हुए समझौतों के तहत एक सामान्य जांच प्रक्रिया थी। सीमावर्ती इलाकों में सैन्य क्षेत्र में भरोसा बढ़ाने पर 1996 का समझौता और सीमावर्ती इलाकों में सैन्य बलों में आपसी कटौती पर 1997 का समझौता उस कूटनीतिक ढांचे का हिस्सा थे, जो बाद में 'शंघाई फाइव' तंत्र और अंततः चीन और रूस के नेतृत्व वाले 'शंघाई सहयोग संगठन' (SCO) ब्लॉक में बदल गया। रूस ने चीनी सेना को मिलिट्री बेस का दौरा क्यों कराया? रूसी पक्ष ने PLA के इस दौरे को इस बात का सबूत बताया कि तीन दशक पहले बनाए गए तंत्र आज भी असरदार और प्रासंगिक हैं। TASS ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "निरीक्षण के दौरान, चीनी प्रतिनिधिमंडल ने पुष्टि की कि रूसी संघ ने अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाया है और चीन के साथ समझौतों के तहत स्थापित निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता की तारीफ की।" चीनी सेना ने रूस की तारीफ की रूसी समाचार वेबसाइट इजवेस्टिया के अनुसार, चीनी टीम का नेतृत्व कर रहे सीनियर कर्नल लियू जिन्सॉन्ग ने कंट्रोल सिस्टम की पारदर्शिता और संगठन व लॉजिस्टिक्स के मामले में मिले सहयोग की तारीफ की। लियू ने कहा, "दोनों पक्षों के रणनीतिक नेतृत्व में… हम आपसी समझ बनाएंगे और दोनों देशों के बीच दोस्ती को और मजबूत करेंगे।" उन्होंने यह भी कहा, "और खासकर इन पांच देशों के बीच हुए समझौते के दायरे में, हम इस क्षेत्र का विकास करना जारी रखेंगे और अपने आपसी फायदे वाले सहयोग को और मजबूत करेंगे।" रूसी प्रेस रिपोर्टों के अनुसार, चीनी प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सैन्य जिले में 'इटरनल फ्लेम मेमोरियल कॉम्प्लेक्स' पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की। हम स्वाभाविक सहयोगी और साझेदार हैं। हम पड़ोसी हैं। पड़ोसी चुने नहीं जाते। हम बस चीन के साथ काम करते हैं और दोस्त हैं – किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि एक-दूसरे के हितों के लिए। रूस ने एयर डिफेंस यूनिट की जानकारी छिपाई लेकिन मीडिया रिपोर्टों में इस दौरे के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई, जिसमें शामिल विशिष्ट एयर-डिफेंस यूनिट के बारे में भी कोई ब्योरा नहीं था। 1996 और 1997 के समझौते, चीन और सोवियत संघ के बीच दशकों तक चली सीमा पर तनाव और 1969 में उत्तर-पूर्वी चीन के हेइलोंगजियांग प्रांत में उसुरी नदी के पास हुई सशस्त्र झड़पों के बाद हुए थे। उस समय परमाणु शक्ति संपन्न ये पड़ोसी देश एक-दूसरे को गहरे शक की नजर से देखते थे – यह स्थिति 1990 के दशक की शुरुआत तक बनी रही। रूस-चीन सैन्य सहयोग उच्चतम स्तर पर पिछले दशक में, चीन और रूस ने नियमित संयुक्त अभ्यास, प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक बॉम्बर गश्त, कई क्षेत्रों में नौसैनिक अभ्यास और सेनाओं के बीच लगातार बेहतर होते आदान-प्रदान के जरिए अपने रक्षा सहयोग का विस्तार किया है। पुतिन ने 20 मई को चीन की 25वीं आधिकारिक यात्रा के दौरान बीजिंगमें कहा कि चीन के साथ संबंध "अभूतपूर्व उच्च स्तर" पर पहुंच गए हैं। गुरुवार को सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान बोलते हुए, रूसी नेता ने उन सुझावों को खारिज कर दिया कि उन्होंने यूक्रेन युद्ध के बाद चीन के प्रति "कोई यू-टर्न" लिया है। उन्होंने कहा, "हम स्वाभाविक सहयोगी और साझेदार हैं। हम पड़ोसी हैं। पड़ोसी चुने नहीं जाते।" रूस-चीन दोस्ती से भारत को कैसे खतरा? भारत सैन्य साजोसामान के लिए लंबे समय से रूस पर निर्भर है। आज भी भारतीय सेना के लगभग 50% से 90% सैन्य उपकरण और हथियार रूस (या पूर्व सोवियत संघ) से आते हैं। यह रूसी साजोसामान भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना की रीढ़ हैं। एयर डिफेंस के मामले में भी भारत बहुत हद तक रूसी सिस्टमों का इस्तेमाल करता है। इनमें अत्याधुनिक S-400 मिसाइल सिस्टम से लेकर इगला-एस MANPADS, कुब (KUB) और पेचोरा (Pechora) एयर डिफेंस सिस्टम प्रमुख हैं। ऐसे में इन सिस्टमों तक चीन की पहुंच भारत के लिए खतरे की बात है। चीन इस डिफेंस सिस्टम की कमजोरियों का पता लगा सकता है। इसके अलावा चीन के साथ संघर्ष की स्थिति में रूस खुद को तटस्थ बना सकता है, जिससे भारत के लिए जरूरी सैन्य साजोसामान की आपूर्ति में समस्या आ सकती है।  

वैष्णो देवी दर्शन के लिए IRCTC का बजट टूर पैकेज, होटल और भोजन शामिल

नई दिल्ली हर साल लाखों श्रद्धालु माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए कटरा आते हैं। यदि आप भी माता रानी के मंदिर जाने की योजना बना रहे हैं, तो भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) आपके लिए एक शानदार और किफायती टूर पैकेज लेकर आया है। इस पैकेज की सबसे खास बात यह है कि तीन लोगों के लिए मात्र ₹8,500 के बजट में भी आपको प्रीमियम सुविधाएं मिलेंगी। राजधानी एक्सप्रेस से आरामदायक सफर IRCTC के इस "माता वैष्णोदेवी" पैकेज के तहत, तीर्थयात्री नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से जम्मू तक ट्रेन नंबर 12425/12426 नई दिल्ली-जम्मू तवी राजधानी एक्सप्रेस से यात्रा करेंगे। यह ट्रेन यात्रा बेहद आरामदायक होगी क्योंकि यात्रियों के पास एसी 3-टियर या एसी 2-टियर में यात्रा करने का विकल्प होगा। यह पैकेज विशेष रूप से वीकेंड के लिए है यानी अब आप अगले वीकेंड के अभी से प्लान कर सकते हैं। यह ट्रेन नई दिल्ली से हर शुक्रवार और शनिवार को है। ट्रेन रात 8:40 बजे रवाना होगी। कटरा में AC होटल और भोजन की व्यवस्था पैकेज की कीमत में केवल ट्रेन टिकट ही शामिल नहीं है, बल्कि कटरा पहुँचने पर यात्रियों के रहने और खाने का पूरा प्रबंध IRCTC द्वारा किया जाएगा। माता के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को कटरा में एसी होटल (ताज विवंता या समकक्ष) में ठहराया जाएगा। भोजन की बात करें तो, पैकेज में एपीएआई (APAI) प्लान शामिल है, जिसका मतलब है कि आपको नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना (फिक्स्ड मेनू पर) मिलेगा। इसके अलावा, राजधानी एक्सप्रेस में ऑन-बोर्ड कैटरिंग की सुविधा भी पैकेज का हिस्सा है। इस पैकेज में न केवल ट्रेन टिकट शामिल है, बल्कि कटरा पहुंचने पर यात्रियों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था IRCTC ने की है। माता के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को कटरा में एक एसी होटल (ताज विवांता या समकक्ष) में ठहराया जाएगा। भोजन के संबंध में, पैकेज में APAI योजना शामिल है। यानी आपको नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना (एक निश्चित मेनू के अनुसार) मिलेगा। इसके अतिरिक्त, राजधानी एक्सप्रेस में ऑन-बोर्ड कैटरिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। किराया और टूर प्लान यदि आप तीन लोगों के साथ यात्रा कर रहे हैं (ट्रिपल ऑक्यूपेंसी), तो 3AC क्लास में किराया मात्र ₹8,420 प्रति व्यक्ति है। डबल ऑक्यूपेंसी के लिए यह ₹10,005 और सिंगल ऑक्यूपेंसी के लिए ₹13,815 प्रति व्यक्ति है। 5-11 वर्ष के बच्चों के लिए बेड सहित किराया ₹7,465 है। 2AC क्लास में दरें थोड़ी अधिक हैं। 5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों को पूरी बर्थ/सीट आवंटित की जा रही है। अतः, संशोधित नियमों के अनुसार पूरा वयस्क किराया लागू होगा। यह पूरा टूर 3 रात और 4 दिन का है। दिल्ली से जम्मू पहुंचने के बाद, यात्रियों को नॉन-एसी साझा वाहनों में कटरा ले जाया जाएगा। रास्ते में सरस्वती धाम से यात्रा पर्ची प्राप्त की जाएगी। होटल में चेक-इन और नाश्ते के बाद, यात्रियों को बाणगंगा में छोड़ा जाएगा, जहां से वे ट्रेकिंग शुरू कर सकते हैं। अगले दिन, वापसी यात्रा में, उन्हें जम्मू में कंद कंदोली मंदिर, रघुनाथजी मंदिर और बाग-ए-बहू उद्यान के दर्शन का अवसर भी मिलेगा। महत्वपूर्ण बातें माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर तीर्थयात्रियों के लिए ऑनलाइन यात्रा पंजीकरण (आरएफआईडी कार्ड के लिए) करना अनिवार्य है। जम्मू और कश्मीर में प्रीपेड मोबाइल नेटवर्क काम नहीं कर सकते हैं, इसलिए पोस्टपेड नंबर साथ रखना उचित होगा। इस पैकेज में वीआईपी दर्शन या प्राथमिकता प्रवेश शामिल नहीं है। ट्रेन के समय में बदलाव हो सकता है, इसलिए यात्रा से पहले पुष्टि कर लें।  

सोक पिट, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, कंटूर ट्रेंच, आजीविका डबरी और नवा तरिया जैसी संरचनाएं बढ़ा रही जल संचयन क्षमता

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में जशपुर जिला एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है। जिले में मनरेगा तथा जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए विभिन्न नवाचार आधारित संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वर्षा जल संचयन को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण आजीविका को भी नई मजबूती मिल रही है। जशपुर जिले में वर्षा जल के अधिकतम संचयन और भू-जल पुनर्भरण के उद्देश्य से घरों, शासकीय संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर बड़ी संख्या में सोक पिट बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं से उपयोग किए गए जल का पुनर्भरण संभव हो रहा है तथा जलभराव की समस्या में भी कमी आ रही है। पहाड़ी एवं ढलान वाले क्षेत्रों में वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच और कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया जा रहा है। ये संरचनाएं वर्षा जल के तीव्र बहाव को नियंत्रित कर मिट्टी के कटाव को रोकने के साथ जल को भूमि में समाहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इससे भू-जल स्तर में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए जिले में आजीविका डबरी निर्माण कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में 495 आजीविका डबरियां निर्माणाधीन हैं। इन डबरियों में वर्षा जल संग्रहित होने से किसानों को रबी एवं ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई सुविधा मिलेगी, वहीं सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। जल संरक्षण के क्षेत्र में ‘नवा तरिया’ अभियान भी उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। नए तालाबों के निर्माण और पुराने जलाशयों के जीर्णाेद्धार से जल भंडारण क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके सकारात्मक प्रभाव कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन गतिविधियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। जशपुर जिले में 5 प्रतिशत मॉडल को भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के कम से कम 5 प्रतिशत हिस्से को जल संरक्षण संरचनाओं से आच्छादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल से वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। कलेक्टर  रोहित व्यास ने जल संरक्षण कार्यों में सभी विभागों और ग्रामीण समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए कहा है कि जल संरक्षण केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी से संचालित जन आंदोलन है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है। जशपुर जिले में संचालित ये नवाचार आधारित जल संरक्षण प्रयास जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। साथ ही ये पहल कृषि उत्पादन बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मॉनसून की दस्तक से पहले मौसम का बदला मिजाज, कई राज्यों में तेज हवाओं की चेतावनी

नई दिल्ली दिनभर भीषण गर्मी के बाद कई दिनों से शाम के समय आंधी-तूफान और बारिश का क्रम जारी है। ये सिलसिला उत्तर भारत के कई राज्यों में देखा जा रहा है। हालांकि, अभी मॉनसून केरल से आगे बढ़कर महाराष्ट्र पहुंचा है। देश की राजधानी दिल्ली तक मॉनसून 25 जून के बाद ही पहुंचेगा और इसके बाद यहां से देश के दूरे इलाकों में जाएगा। इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटे के अंदर 11 राज्यों में आंधी-तूफान और बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 80 की स्पीड से हवाएं चल सकती हैं। IMD के मुताबिक केरल के अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों में बारिश का अलर्ट है। अगले 2 से 5 दिनों में मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों की तरफ आगे बढ़ सकता है। वहीं 8 से 12 जून के बीच राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और ओडिशा समेत कई इलाकों में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली-NCR में कल कैसा रहेगा मौसम  दिल्ली-NCR (8 जून से 11 जून) दिल्ली-एनसीआर में भीषण गर्मी से राहत बनी रहेगी। फिलहाल अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। कहीं-कहीं आंधी, गरज-चमक, बारिश तथा तेज सतही हवाएं चलने की संभावना बनी रहेगी। 8 जून को तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। 9 जून, 10 जून और 11 जून को अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान क्रमशः 26, 27 और 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। उत्तर प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम यूपी (8 जून से 12 जून): आजमगढ़, मऊ, देवरिया, जौनपुर, वाराणसी, संतरकरीबनगर, मिर्जापुर, प्रयागराज, सोनभद्र, कौशांबी, प्रतापगढ़, अमेठी, अयोध्या, गोंडा समेत पूर्वांचल के कई जिलों में मौसम विभाग ने गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती है। IMD के अनुसार, पूर्वी यूपी में 10-12 जून को बारिश/गरज-चमक की संभावना है। बिहार में कल कैसा रहेगा मौसम  बिहार (8 जून से 12 जून): सारण, बक्सर, कैमूर, औरंगाबाद, रोहतास, गया, नालंदा, वैशाली, पटना, शेखपुरा, जमुई, लखीसराय में 8 जून को आंधी-बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। भागलपुर और बांका में भारी बारिश की संभावना है। IMD के मुताबिक, 9-10 जून को राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम मध्य प्रदेश (8 जून): विदिशा, रायसेन (भीमबेटका और सांची सहित), नर्मदापुरम (पचमढ़ी), हरदा, खंडवा (ओंकारेश्वर) और शहडोल जिलों में मध्यम स्तर की गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि और 70 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। श्योपुर (कूनो नेशनल पार्क), देवास, सीहोर, मुरैना, राजगढ़, उज्जैन (महाकालेश्वर), शिवपुरी, आगर, शाजापुर, इंदौर, खरगोन, बैतूल, छिंदवाड़ा, सिवनी, भोपाल (बैरागढ़), नरसिंहपुर, सागर, सतना (चित्रकूट), मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली जिलों में हल्की गरज-चमक के साथ 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। राजस्थान में कल कैसा रहेगा मौसम  राजस्थान (8 जून से 11 जून): कोटपूतली, बहरोड़, बीकानेर, डूंगरगढ़, झालावाड़ में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के कुछ भागों में आंधी- बारिश की गतिविधियां अभी एक-दो दिन जारी रहने की संभावना है। इसके बाद भी पूर्वी राजस्थान में छुटपुट स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। आठ जून से आंधी बारिश की गतिविधियों में कमी होने तथा तापमान में 2-3 डिग्री बढ़ोतरी होने का अनुमान है। पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में आठ से 11 जून तक कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान 44-46 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। महाराष्ट्र में कल कैसा रहेगा मौसम महाराष्ट्र (8 जून से 15 जून): विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश, सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी में बारिश का अनुमान है। 9 जून तक इन क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। विभाग ने नागरिकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों, टिन शेड, विद्युत ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभों और खुले बिजली के तारों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। केरल में कल कैसा रहेगा मौसम केरल (8 जून से 10 जून): मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। पत्तनमथिट्ठा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, त्रिशूर और पलक्कड़ के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ है। 8 से 10 जून तक केरल में गरज के साथ बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। तमिलनाडु में कल कैसा रहेगा मौसम तमिलनाडु (8 जून): इरोड, सलेम, धर्मपुरी, कृष्णागिरी, तिरुपत्तूर, वेल्लोर, रानीपेट, तिरुप्पुर, मदुरै, विरुधुनगर, कन्याकुमारी, तेनकासी और तिरुनेलवेली में गरज-चमक के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान है। नीलगिरी, थेनी और दिंडीगुल जिलों के साथ-साथ कोयंबटूर जिले के घाट क्षेत्रों में बारिश होगी। गरज-चमक, बिजली गिरने और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं की चेतावनी है। आंध्र प्रदेश में कल कैसा रहेगा मौसम आंध्र प्रदेश (8 जून से 17 जून): आंध्र प्रदेश में मानसून की शुरुआत अनंतपुर, तिरुपति और चित्तूर क्षेत्र से हुई है और अगले दो से तीन दिनों में इसके राज्य के अन्य हिस्सों में भी तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून के सक्रिय होने से खेती-किसानी को बड़ा लाभ मिलेगा। आने वाले सात दिनों के दौरान रायलसीमा क्षेत्र में बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। फिलहाल कुछ स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है, लेकिन सातवें दिन यानी 13-14 जून के आसपास तटीय आंध्र प्रदेश में भी वर्षा की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

ग्रामीण विकास उपविधि 2026 का ड्राफ्ट तैयार, नक्शा शुल्क में बड़ा बदलाव प्रस्तावित

लखनऊ जिला पंचायतों में नक्शा पास करने पर अधिक शुल्क लिए जाने पर आपत्ति जताई गई है। पंचायती राज विभाग नक्शा पास करने के लिए नई भवन निर्माण विकास उपविधि का प्रारूप तैयार करते हुए इस पर सुझाव मांगे हैं। इसमें ज्यादा विकास शुल्क लेने के प्रस्ताव पर आपत्ति है। पिछड़े व बाढ़ प्रभावित जिलों में विकास शुल्क न्यूनतम रखे जाने की मांग की गई है।पंचायती राज विभाग ने इसे लागू करने से पहले हितधारकों बिल्डर, आर्किटेक्ट, जिला पंचायतों व शासन के अधिकारियों से विचार-विमर्श किया। प्रमुख सचिव, पंचायती राज अनिल कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को हुई बैठक में बिल्डर व आर्किटेक्ट ने कहा कि जिला पंचायतों का विकास शुल्क अधिक है और इसे कम किया जाए। पिछड़े व बाढ़ प्रभावित जिलों में इसे न्यूनतम रखा जाए। फिलहाल शासन ने मंगलवार तक उन्हें सुझाव देने का समय दिया है। वहीं जिला पंचायतों से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे व स्टेट हाईवे जो विकास प्राधिकरणों, नगर निगम व नगर पालिका परिषद की सीमा से तीन किलोमीटर के दायरे में जिला पंचायतों के क्षेत्र में आएंगे, वहां 25 प्रतिशत अधिक विकास शुल्क वसूला जाएगा। वहीं इस उपविधि के अनुसार प्रदेश के जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। ए श्रेणी के जिलों में 750 प्रतिशत वर्ग मीटर, श्रेणी दो के जिलों में 500 रुपये व श्रेणी तीन के जिलों में 250 रुपये प्रति वर्ग मीटर विकास शुल्क का प्रस्ताव है। जिला पंचायतों में नक्शा पास कराने को नई मॉडल भवन उपविधि होगी लागू पंचायती राज विभाग जिला पंचायतों की ओर से नक्शा पास करने के लिए नई भवन निर्माण उपविधि को जल्द लागू करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में सुनियोजित विकास होने के साथ जिला पंचायतों की आय भी बढ़ेगी। पंचायती राज विभाग की ओर से तैयार की गई इस उपविधि का नाम उत्तर प्रदेश जिला पंचायतों के लिए मॉडल भवन निर्माण एवं विकास उपविधि- 2026 होगा। पंचायती राज विभाग की ओर से तैयार की गई इस प्रस्तावित उपविधि पर हितधारकों की शनिवार को बैठक भी बुलाई गई है। जिसमें इस उपविधि पर चर्चा होगी। बिल्डर, आर्किटेक्ट और जिला पंचायतों के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। प्रमुख सचिव, पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से इसकी तैयारी की जा रही है। सभी हितधारकों से इस उपविधि पर सुझाव मांगे जाएंगे। आवास विभाग उपविधि की तरह ही पंचायती राज विभाग ने भी अपनी उपविधि तैयार की है। जिला पंचायतें नक्शा पास करने के लिए समन शुल्क, भवन के क्षेत्रफल आदि के आधार पर शुल्क तय होगा। आवासीय और वाणिज्यिक भवनों के नक्शे की स्वीकृति का शुल्क अलग- अलग होगा। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के मुताबिक प्रस्तावित उपविधि को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है । जिला पंचायतों को नक्शा पास करने से अभी 70 करोड़ की आय हो रही है जो आगे बढ़कर 210 करोड़ रुपए हो जाएगी।

ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर की सहभागिता, रोजगार मांग पंजीयन और जॉब कार्ड अद्यतन के कार्य संपन्न

रायपुर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्रामीण परिवारों को समयबद्ध रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जशपुर जिले की सभी ग्राम पंचायतों में रोजगार दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता करते हुए रोजगार की मांग दर्ज कराई तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। रोजगार दिवस के दौरान ग्राम पंचायतों में विशेष शिविर आयोजित कर ग्रामीणों को मनरेगा के तहत रोजगार प्राप्त करने की प्रक्रिया, जॉब कार्ड निर्माण एवं संशोधन, कार्य मांग पंजीयन, मजदूरी भुगतान प्रणाली तथा योजना के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, रोजगार सहायकों, तकनीकी सहायकों और पंचायत कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान आगामी कार्यों के लिए रोजगार मांग आवेदन प्राप्त किए गए तथा पात्र परिवारों के नवीन जॉब कार्ड बनाने और पुराने जॉब कार्डों के अद्यतन का कार्य भी किया गया। पंचायत स्तर पर प्राप्त शिकायतों और समस्याओं का त्वरित निराकरण करते हुए ग्रामीणों को योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया। जल संरक्षण कार्यों पर विशेष फोकस रोजगार दिवस में मनरेगा के अंतर्गत संचालित जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्यों की जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई। बताया गया कि जिले में सोक पिट, कंटूर ट्रेंच, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच (WAT), नवा तरिया, आजीविका डबरी, तालाब निर्माण एवं वृक्षारोपण जैसे कार्यों के माध्यम से एक ओर रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भू-जल संवर्धन को भी बढ़ावा मिल रहा है। इन कार्यों से जल स्तर में सुधार, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहायता मिल रही है। मनरेगा के माध्यम से जिले में विकास और आजीविका सशक्तिकरण के दोहरे उद्देश्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर विशेष जोर कार्यक्रम के दौरान महिलाओं, युवाओं तथा कमजोर वर्गों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को मनरेगा एवं आजीविका संवर्धन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी देते हुए उन्हें विभिन्न स्वरोजगार और रोजगारोन्मुखी योजनाओं से जोड़ने के प्रयास किए गए। जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे रोजगार दिवस का उद्देश्य प्रत्येक इच्छुक ग्रामीण परिवार को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना, योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा ग्राम स्तर पर विकास कार्यों में जनभागीदारी को मजबूत करना है। रोजगार दिवस के माध्यम से ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी मिलने के साथ-साथ उनकी समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रभावी मंच उपलब्ध हो रहा है।