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हेयर लॉस के शुरुआती संकेत, समय रहते पहचानें वरना बढ़ सकता है गंजापन

आजकल की बिजी लाइफस्टाइल और बढ़ते स्ट्रेस के बीच हेयर लॉस होना एक बेहद कॉमन समस्या बन चुका है. लोग अक्सर उस समय अधिक परेशान हो जाते हैं, जब कंघी में बालों के गुच्छे आने लगते हैं या स्कैल्प खाली दिखने लगती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि किसी के भी बाल अचानक नहीं झड़ते, बल्कि हमारा स्कैल्प बहुत पहले ही इसके संकेत देना शुरू कर देता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यदि आप समय रहते इन शुरुआती लक्षणों को पहचान लें तो गंजेपन का शिकार होने से बच सकते हैं. आइए जानते हैं कि हेयर फॉल की शुरुआत कैसे होती है और रिकवरी के क्या ऑपशंस हैं. ये है हेयर फॉल का पहला संकेत एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब भी गंजेपन की शुरुआत होती है तो उसका सबसे पहला संकेत हेयर थिनिंग यानी बालों का पतला होना है. इस स्टेज में आपके बाल अचानक टूटने नहीं लगते बल्कि उनका डायमीटर (मोटाई) धीरे-धीरे कम होने लगता है. यदि आपको महसूस हो रहा है कि आपकी मांग (Parting) चौड़ी हो रही है या पोनीटेल पहले के मुकाबले पतली महसूस हो रही है तो समझ जाएं कि आपके बालों की सेहत बिगड़ रही है. क्या है फॉलिकल का मिनिएचराइजेशन? साइंस की भाषा में बालों के पतले होने की इस पूरी प्रक्रिया को मिनिएचराइजेशन ओएफ फॉलिकल कहा जाता है. हेल्थलाइन के मुताबिक, इस प्रोसेस में स्कैल्प के अंदर मौजूद हेयर फॉलिकल्स यानी जहां से बाल उगते हैं, वो धीरे-धीरे सिकुड़ने लगते हैं. इसके कारण हेयर फॉलिकल्स तक खून की सप्लाई और जरूरी न्यूट्रिशन नहीं पहुंच पाता. नतीजा यह होता है कि हर नए हेयर साइकिल में निकलने वाला बाल पहले से ज्यादा कमजोर, पतला और छोटा होता जाता है जो बाद में पूरी तरह टूटने लगता है और आप गंजेपन की ओर बढ़ जाते हैं. स्टेज 1 से 5 के बीच रिकवरी है पॉसिबल यदि आपके बाल पतले हो रहे हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है. साइंटिफिक फैक्ट्स बताते हैं कि जब तक मिनिएचराइज्ड फॉलिकल पूरी तरह सील या बंद नहीं हो जाते तब तक उनसे नए और घने बाल वापस पाना मुमकिन है. हेयर लॉस को मापने के लिए डॉक्टर्स नॉरवुड स्केल का इस्तेमाल करते हैं. उनके अनुसार, यदि आप स्टेज 1 से स्टेज 5 के बीच में हैं तो आपको डेफिनिटली सही ट्रीटमेंट ट्राई करना चाहिए. इस दौरान फॉलिकल्स जीवित होते हैं और डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह पर मिनोक्सिडिल, पीआरपी थेरेपी या सही डाइट से इन्हें दोबारा एक्टिव किया जा सकता है.

एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की निगरानी अब सीधे CM योगी करेंगे

लखनऊ यूपी की योगी सरकार ने यूपी में एक्सप्रेसवे और उससे जुड़ी परियोजनाओं के होने वाले कामों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला किया है। एक्सप्रेसवे बनाने के लिए बनाए गए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) का काम अवस्थापना विभाग के अधीन कर दिया गया है। अभी तक यह काम औद्योगिक विकास विभाग के अनुभाग तीन द्वारा देखा जा रहा था। अवस्थापना मंत्रालय मुख्यमंत्री के पास है। इसके बाद यह साफ हो गया है कि एक्सप्रेसवे और इससे जुड़ी परियोजनाओं का काम मुख्यमंत्री सीधे तौर पर देखेंगे। सचिव सचिवालय प्रशासन गुर्राला श्रीनिवासुलु की ओर से इस बारे में आदेश जारी कर दिया गया है। यह बदलाव क्यों किया जा रहा है, इसके बारे में भी बताया गया है। यूपी में अभी तक औद्योगिक विकास विभाग के अधीन यूपीडा का काम देखा जाता था। शासन में औद्योगिक विकास विभाग के अनुभाग तीन को यह काम आवंटित था। सचिव सचिवालय प्रशासन गुर्राला श्रीनिवासुलु की ओर से जारी आदेश में यूपीडा के काम को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। उनके इस आदेश में कहा गया है कि 18 मई 2007 को अवस्थापना विभाग का गठन किया गया और 30 जुलाई 2007 को काम भी आवंटित किए गए। अवस्थापना का काम औद्योगिक विकास अनुभाग तीन द्वारा देखा जा रहा था। बदलाव के लिए यह बताया गया कारण आदेश में कहा गया है कि अवस्थापना विकास अनुभाग का काम तय है। यूपीडा के अधीन एक्सप्रेसवे परियोजनाओं का काम औद्योगिक विकास विभाग के अनुभाग तीन को आवंटित है। निर्धारित लागत सीमा से अधिक चिह्नित अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र या सहभागिता के आधार पर क्रियान्वयन की नीति निर्धारण व समन्वय का काम अवस्थापना विकास अनुभाग को आवंटित है। इसके चलते इस काम के आवंटन में विरोधाभाष तथा संबंधित प्रत्रावलियों के निस्तारण को और आसान बनाने के लिए यूपीडा से संबंधित सभी काम तात्कालिक प्रभाव से अवस्थापना विकास अनुभाग को आवंटित कर दिया गया है। नई स्टार्टअप नीति बनेगी वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी स्टार्टअप केंद्र बनाने के लिए नई स्टार्टअप नीति-2026 तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नई नीति में भरण-पोषण भत्ता, प्रोटोटाइप अनुदान, सीड कैपिटल सहायता तथा पेटेंट एवं गुणवत्ता प्रमाणन से जुड़े प्रोत्साहनों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। सीएम ने निर्देश दिया कि महिला उद्यमियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर उद्यमियों तथा पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड क्षेत्र के स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन देने के प्रावधान शामिल किए जाएं। स्टार्टअप गतिविधियों के संचालन, प्रोत्साहन, वित्तीय प्रबंधन, निगरानी, क्षमता निर्माण तथा विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन का गठन किया जाए। प्रस्तावित नीति की समीक्षा मुख्यमंत्री ने रविवार को प्रस्तावित उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति, बड़ा बाजार, डिजिटल एवं औद्योगिक आधार, निवेशकों के अनुकूल वातावरण यूपी को अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय केंद्र बनाने की क्षमता रखते हैं। नई नीति ऐसी होनी चाहिए जो प्रदेश के युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाए। उत्तर प्रदेश को स्टार्टअप तथा नवाचार के क्षेत्र में पहचान दिलाए। मुख्यमंत्री को प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स ने बताया कि पिछले सालों में यूपी ने स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 2018 में ‘एस्पायरिंग लीडर’ श्रेणी से आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश वर्ष 2025 में भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में ‘टॉप परफॉर्मर’ श्रेणी में स्थान प्राप्त कर चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्टार्टअप्स को प्रारंभिक चरण से लेकर विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक जरूरी सहयोग उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

13 जून तक का समय, फिर आर-पार की लड़ाई! पंजाब कर्मचारियों के ऐलान से बढ़ी सरकार की चिंता

लुधियाना   पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विस यूनियन की प्रदेश स्तरीय ऑनलाइन वर्चुअल मीटिंग प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह विर्क और प्रदेश महासचिव तरसेम भट्ठल की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग में 3 जून को वित्त मंत्री की अध्यक्षता में यूनियन की मांगों को लेकर हुई मीटिंग पर विस्तार से चर्चा की गई। नेताओं ने बताया कि सरकार की तरफ से मीटिंग की कार्रवाई रिपोर्ट 48 घंटे में जारी करने का भरोसा दिया गया था परंतु निर्धारित समय में रिपोर्ट जारी न होने के बाद मीटिंग में शामिल नेताओं ने संदेह जताया कि सरकार कहीं समय बिताने की नीति तो नहीं अपना रही? लीडरशिप ने कहा कि मौजूदा भगवंत मान सरकार के पिछले साढ़े 4 साल के कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की मांगों पर कोई प्रगति नहीं हुई है, जिसके कारण कर्मचारी वर्ग का सरकार से विश्वास उठ चुका है। इसलिए फैसला किया गया कि पंजाब सरकार को तुरंत एक नोटिस जारी किया जाए और वित्त मंत्री के साथ हुई मीटिंग में विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में मांगों पर लिए गए फैसलों संबंधी संगठन की तरफ से खुद एक कार्रवाई रिपोर्ट तैयार करके जारी की जाए। नोटिस के जरिए सरकार को लिखा जाए कि वह मीटिंग में हुए फैसलों के मुताबिक 12 जून तक कर्मचारियों की मांगों को लागू करे, नहीं तो 13 जून को अगले बड़े संघर्ष का ऐलान किया जाएगा। प्रदेश प्रैस सचिव गुरप्रीत सिंह खटड़ा ने बताया कि इस ऑनलाइन मीटिंग में संगठन की प्रदेश लीडरशिप, विभागीय संगठनों की लीडरशिप और जिलों के अध्यक्ष व महासचिव शामिल हुए। इनमें रघबीर सिंह बडवाल, अनिरुद्ध मोदगिल, पिप्पल सिंह, जगदीश ठाकुर, खुशकरनजीत सिंह, तेजिंदर सिंह नंगल, विनोद सागर, गुरसेवक सिंह, हितेश शर्मा, विशालवीर, अमित कटोच, गुरप्रीत सिंह पनेसर, जैमल सिंह, मैनुअल नाहर, संगत राम बागी, अमरप्रीत सिंह, प्रताप सिंह और जसवंत सिंह मौजो शामिल थे।  पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विस यूनियन की प्रदेश स्तरीय ऑनलाइन वर्चुअल मीटिंग प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह विर्क और प्रदेश महासचिव तरसेम भट्ठल की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग में 3 जून को वित्त मंत्री की अध्यक्षता में यूनियन की मांगों को लेकर हुई मीटिंग पर विस्तार से चर्चा की गई। नेताओं ने बताया कि सरकार की तरफ से मीटिंग की कार्रवाई रिपोर्ट 48 घंटे में जारी करने का भरोसा दिया गया था परंतु निर्धारित समय में रिपोर्ट जारी न होने के बाद मीटिंग में शामिल नेताओं ने संदेह जताया कि सरकार कहीं समय बिताने की नीति तो नहीं अपना रही? लीडरशिप ने कहा कि मौजूदा भगवंत मान सरकार के पिछले साढ़े 4 साल के कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की मांगों पर कोई प्रगति नहीं हुई है, जिसके कारण कर्मचारी वर्ग का सरकार से विश्वास उठ चुका है। इसलिए फैसला किया गया कि पंजाब सरकार को तुरंत एक नोटिस जारी किया जाए और वित्त मंत्री के साथ हुई मीटिंग में विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में मांगों पर लिए गए फैसलों संबंधी संगठन की तरफ से खुद एक कार्रवाई रिपोर्ट तैयार करके जारी की जाए। नोटिस के जरिए सरकार को लिखा जाए कि वह मीटिंग में हुए फैसलों के मुताबिक 12 जून तक कर्मचारियों की मांगों को लागू करे, नहीं तो 13 जून को अगले बड़े संघर्ष का ऐलान किया जाएगा। प्रदेश प्रैस सचिव गुरप्रीत सिंह खटड़ा ने बताया कि इस ऑनलाइन मीटिंग में संगठन की प्रदेश लीडरशिप, विभागीय संगठनों की लीडरशिप और जिलों के अध्यक्ष व महासचिव शामिल हुए। इनमें रघबीर सिंह बडवाल, अनिरुद्ध मोदगिल, पिप्पल सिंह, जगदीश ठाकुर, खुशकरनजीत सिंह, तेजिंदर सिंह नंगल, विनोद सागर, गुरसेवक सिंह, हितेश शर्मा, विशालवीर, अमित कटोच, गुरप्रीत सिंह पनेसर, जैमल सिंह, मैनुअल नाहर, संगत राम बागी, अमरप्रीत सिंह, प्रताप सिंह और जसवंत सिंह मौजो शामिल थे।

यात्रीगण कृपया ध्यान दें: अमृतसर से मुंबई तक नई स्पेशल ट्रेन, रेलवे ने बढ़ाई अतिरिक्त सुविधाएं

अमृतसर गर्मी के मौसम में बढ़ती यात्रियों की संख्या और लंबी वेटिंग सूची को देखते हुए रेलवे ने अमृतसर से मुंबई के बीच नई समर स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही पंजाब में रह रहे बिहार के यात्रियों की सुविधा के लिए अमृतसर-कटिहार स्पेशल ट्रेन के संचालन की अवधि बढ़ाने के साथ अतिरिक्त फेरे भी जोड़े गए हैं।  रेलवे अधिकारियों के अनुसार अमृतसर और मुंबई (बांद्रा टर्मिनस) के बीच विशेष ट्रेन चलाए जाने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह ट्रेन जालंधर सिटी, फगवाड़ा, धंडारी कलां (लुधियाना), अंबाला कैंट, पानीपत, नई दिल्ली (सफदरजंग), मथुरा, कोटा, रतलाम, वडोदरा, सूरत और बोरीवली होते हुए बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। अमृतसर-बांद्रा टर्मिनस समर स्पेशल का शेड्यूल ट्रेन संख्या 04694/04693 अमृतसर-बांद्रा :  टर्मिनस-अमृतसर स्पेशल अमृतसर से 12, 19 और 26 जून तथा 3 और 10 जुलाई को प्रत्येक शुक्रवार रात 8:10 बजे रवाना होगी। वापसी में यह ट्रेन बांद्रा टर्मिनस से 14, 21 और 28 जून तथा 5 और 12 जुलाई को प्रत्येक रविवार सुबह 8 बजे चलेगी। इसी तरह कटिहार स्पेशल ट्रेन के भी फेरे बढ़ा दिये गए है। रेलवे ने अमृतसर और कटिहार के बीच चल रही विशेष ट्रेन के संचालन को जुलाई के अंत तक बढ़ा दिया है। ट्रेन संख्या 05736/05735 कटिहार-अमृतसर-कटिहार स्पेशल अब विस्तारित अवधि के तहत अतिरिक्त फेरों के साथ संचालित होगी। कटिहार से अमृतसर के लिए यह ट्रेन 22 जुलाई से 29 जुलाई तक प्रत्येक बुधवार को तीन अतिरिक्त फेरे लगाएगी। वहीं अमृतसर से कटिहार के लिए 17 जुलाई से 31 जुलाई तक प्रत्येक शुक्रवार को तीन अतिरिक्त फेरे संचालित किए जाएंगे। रेलवे अधिकारियोंका कहना है कि इन विशेष ट्रेनों के संचालन से पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और बिहार जाने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी तथा गर्मी के मौसम में बढ़ी हुई यात्रा मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

खाद्य सुरक्षा को मिलेगा बड़ा बल, हरियाणा सरकार 55 करोड़ की लागत से खोलेगी 8 नई टेस्टिंग लैब

करनाल. प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ जल्द ही बड़ा अभियान शुरू होगा। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने खाद्य जांच व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत प्रदेश में आठ नई खाद्य पदार्थ जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही आधुनिक उपकरणों से लैस मोबाइल जांच प्रयोगशालाएं भी सड़कों पर उतरेंगी, जहां आम नागरिक मात्र 20 रुपये में अपने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करा सकेंगे। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नामित अधिकारी पृथ्वी सिंह ने विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के उपलक्ष्य में विशेष बातचीत की। एनसीआर में 55 करोड़ से मजबूत होगा जांच तंत्र वर्तमान में विभाग के पास सिर्फ दो प्रयोगशालाएं हैं। इसी वर्ष दो नई प्रयोगशालाएं और शुरू की जाएंगी। अगले पांच वर्षों में पूरे प्रदेश में स्वीकृत सभी प्रयोगशालाओं का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी (एनसीआर) में खाद्य जांच सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए 55 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इससे फरीदाबाद, गुरुग्राम और रोहतक में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। पांच अन्य जिलों को भी मिली मंजूरी केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से नारनौल, हिसार, जींद, सिरसा और यमुनानगर में भी नई प्रयोगशालाएं बनाई जाएंगी। विभाग इन जिलों में भूमि की तलाश की जा रही है। भूमि उपलब्ध होते ही निर्माण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सबसे पहले हिसार में कार्य आरंभ किए जाने की योजना है। करनाल स्थित प्रयोगशाला को भी अत्याधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। इसके लिए करीब 25 करोड़ रुपये के आधुनिक उपकरण खरीदे जा रहे हैं। खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नई व्यवस्था के तहत प्रयोगशाला में सूक्ष्मजीव विज्ञान (माइक्रोबायोलाजी) अनुभाग स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा उच्च क्षमता वाली आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी, जो खाद्य पदार्थों में मौजूद अत्यंत सूक्ष्म स्तर की मिलावट का भी पता लगाने में सक्षम होंगी। गांव-गांव पहुंचेगी जांच सुविधा विभाग आम लोगों को सीधे इस अभियान से जोड़ेगा। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित मोबाइल खाद्य प्रयोगशालाएं तैयार की जा रही हैं। इन मोबाइल वैन के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। मोबाइल प्रयोगशालाओं के संचालन के बाद नागरिक अपने घरों में उपयोग होने वाले दूध, दाल, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों की मौके पर ही जांच करा सकेंगे। इसके लिए सिर्फ 20 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। जांच सुविधा लोगों तक पहुंचने से मिलावटखोरों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। साथ ही खाद्य सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी। जानिये सैंपल फेल होने का अर्थ नामित अधिकारी पृथ्वी सिंह ने कहा कि प्रदेश में पांच वर्षों के दौरान फेल हुए 4607 सैंपलों का मतलब सीधे तौर पर जहर या जानलेवा मिलावट होना नहीं है। इनमें से अधिकतर सैंपल तकनीकी कमियों के कारण सब-स्टैंडर्ड (अवमानक) श्रेणी में आते हैं। उदाहरण के लिए, यदि दूध में निर्धारित फैट छह प्रतिशत की जगह 5.9 प्रतिशत मिलता है या पनीर में तय मानक से नमी ज्यादा पाई जाती है, तो वह फेल माना जाता है। मिलावट का यह औसत पूरे देश में लगभग समान है। सरकारी लैब में कुछ एडवांस टेस्टों जैसे फसलों पर होने वाले पेस्टिसाइड/केमिकल स्प्रे को पकड़ने की आधुनिक मशीनें नहीं हैं। भारी बजट खर्च करके, एक-एक सैंपल की प्रामाणिक जांच के लिए ₹30 हजार रुपये तक फीस देकर बड़ी निजी लैब से टेस्ट करवाते हैं।

‘क्या मुझे खेलना बंद कर देना चाहिए?’ हरमनप्रीत कौर ने सवाल से पलट दिया माहौल

लंदन आईसीसी विमेंस टी20 विश्व कप 2026 के आगाज से पहले भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर सुर्खियों में आ गई हैं. लंदन में आयोजित 'कैप्टन्स कार्निवल' कार्यक्रम के दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे ऐसा सवाल पूछ लिया, जिसकी शायद उन्हें उम्मीद नहीं थी. हरमनप्रीत ने जिस अंदाज में जवाब दिया, उसने रिपोर्टर की बोलती बंद कर दी. 37 वर्षीय हरमनप्रीत कौर से जब पूछा गया कि क्या यह उनका आखिरी टी20 विश्व कप होगा, तो भारतीय कप्तान ने जवाब देने के बजाय ऐसा सवाल दागा कि माहौल ही बदल गया. उनका जवाब सुनकर कई लोगों को महेंद्र सिंह धोनी की याद आ गई, जो अपने करियर के दौरान ऐसे सवालों का जवाब बेहद चतुराई और सादगी से दिया करते थे. टी20 विश्व कप से पहले आयोजित कार्यक्रम में एक रिपोर्टर ने हरमनप्रीत कौर से पूछा, 'क्या यह आपका आखिरी टी20 विश्व कप होगा?' इस पर हरमनप्रीत कौर ने मुस्कुराते हुए कहा, 'क्यों?' रिपोर्टर ने जवाब दिया, 'बस पूछ रहा था.' इसके बाद भारतीय कप्तान ने पलटकर पूछा, 'क्या आपको लगता है कि मुझे खेलना बंद कर देना चाहिए?' रिपोर्टर ने तुरंत कहा, 'बिल्कुल नहीं.' इस पर हरमनप्रीत कौर ने मुस्कुराते हुए कहा, 'तो फिर आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं?' इस जवाब के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोग भी मुस्कुराने लगे और रिपोर्टर के पास कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा. हरमनप्रीत कौर का यह जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. कई प्रशंसकों ने इसे 'धोनी स्टाइल रिप्लाई' बताया है. महेंद्र सिंह धोनी भी अपने करियर में रिटायरमेंट से जुड़े सवालों का जवाब अक्सर इसी अंदाज में देते थे- कम शब्द, लेकिन सीधा असर. हरमनप्रीत ने अपने जवाब से साफ कर दिया कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान क्रिकेट पर है, न कि संन्यास पर. पिछले साल भारतीय महिला टीम ने हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में वनडे विश्व कप खिताब जीता था. इसके बाद अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह अपने करियर का सबसे बड़ा सपना पूरा करने के बाद संन्यास का ऐलान कर सकती हैं. लेकिन हरमनप्रीत ने तब भी साफ कर दिया था कि उनका क्रिकेट छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा था कि जब तक वह टीम के लिए योगदान दे सकती हैं, तब तक खेलती रहेंगी. 2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाली हरमनप्रीत कौर आज भारतीय महिला क्रिकेट की पहचान बन चुकी हैं.  वह भारत की सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं और वनडे व टी20 दोनों फॉर्मेट में 4000 से अधिक रन बना चुकी हैं, उनकी कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने कई ऐतिहासिक सफलताएं हासिल की हैं और वह आज भी टीम की सबसे अहम खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं. विमेंस टी20 विश्व कप 2026 में भारत अपने अभियान की शुरुआत 14 जून को चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ करेगा. भारतीय टीम को ग्रुप-ए में रखा गया है, जहां ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नीदरलैंड्स जैसी टीमें मौजूद हैं.

गोकशी पर सख्त कानून की मांग, शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा- गाय के वध पर पूरी तरह लगे रोक

होशियारपुर. गाय को काटने की आयु सीमा नहीं तय होनी चाहिए। न ही उसके फिटनेस का मानक हो। गाय काटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए। यह बात होशियारपुर में गोवर्धन मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कही। शंकराचार्य जी पश्चिम बंगाल सरकार के उस फैसले को आड़े हाथ लिया, जिसमें गाय काटने की आयु चौदह वर्ष हो और उसकी फिटनेस भी हो। उन्होंने भाजपा को रडार पर लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह थे और उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तब मोदी गाय काटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की वकालत करते थे और मोदी पिछले ग्यारह साल से देश के प्रधानमंत्री हैं तो गाय काटने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने पर फैसला नहीं ले पा रहे हैं। ऐसा इसलिए कि सरकार में इच्छा शक्ति की कमी है। एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य जी ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौ माता का दर्जा देना चाहिए ताकि ऐसे फिजूल बातें करने वालों के मुंह बंद हो जाए। शंकराचार्य जी ने कहा कि गाय माता में देवी देवता का वास होता है। जब कोई मुसीबत पड़ती है तो देवी देवता गाय के रूप में अवतरित होते हैं। एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य जी ने कहा हिन्दू को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है कि कोई भी गरीबी से धर्म परिवर्तन न करे।

चाणक्य नीति: इंसान की फितरत और रिश्तों की सच्चाई पर कड़ा संदेश

 क्या तुमने कभी उस सांप को देखा है, जो दूध पीने के बाद भी डसना नहीं भूलता है? इंसान बिल्कुल वैसा ही है. फर्क सिर्फ इतना है कि सांप का जहर उसके दांतों में होता है, और इंसान का जहर उसकी मुस्कुराहट में. तुम्हें लगता है कि तुम्हारे आसपास की भीड़ तुम्हारी ताकत है? लेकिन असल में यही भीड़ वो दीमक है जो तुम्हें अंदर से खोखला कर रही है. तुम जिसे अपना समझते हो, वो सिर्फ एक मुखौटा है. आज जो तुम्हारे लिए ताली बजा रहा है, वही कल तुम्हारी बर्बादी का जश्न मनाएगा. क्योंकि इस दुनिया में कोई किसी का नहीं होता है. हर कोई स्वार्थ का गुलाम है. आचार्य चाणक्य ने कहा था कि विश्वास एक ऐसी तलवार है, जिसका हैंडल दुश्मन के हाथ में होता है. तुमने विश्वास किया, मतलब तुमने खुद अपने अंत की इजाजत दे दी है. दोस्त देता है शत्रु से ज्यादा पीड़ा सोचा है, दुश्मन से ज्यादा दर्द दोस्त क्यों देता है? क्योंकि दुश्मन को तुम्हारे घर का रास्ता नहीं पता होता है, लेकिन दोस्त तुम्हारी हर कमजोरी जानता है. उसे पता है कि वार कहां करना है ताकि आवाज भी न निकले और काम भी हो जाए. तुम्हारे राज तुम्हारी सबसे बड़ी तिजोरी हैं, और तुमने उन्हें हर किसी के सामने खोल दिया है. याद रखो, जो बातें तुमने दोस्ती में कही थीं, वही बातें दुश्मनी में तुम्हारे खिलाफ हथियार बनेंगी. लोग ढूंढ़ते हैं कमियां चाणक्य नीति के मुताबिक, दुनिया तुम्हारी अच्छाई नहीं देखती है, वो तुम्हारी कमजोरी ढूंढती है. तुम जिसे अपना दुख बताते हो, वही पीछे मुड़कर तुम्हारा मजाक उड़ाता है. लोग मदद इसलिए नहीं करते कि वो तुम्हें पसंद करते हैं, बल्कि इसलिए करते हैं ताकि समय आने पर उस एहसान को वसूल सकें. ये रिश्ते नहीं, सिर्फ सौदे हैं. चाणक्य कहते थे कि कमजोर से दोस्ती मत करो, वो तुम्हारा बोझ नहीं उठा पाएगा. ताकतवर से दोस्ती मत करो, वो तुम्हें दबा देगा. तो बचा कौन? सिर्फ तुम. क्योंकि तुम अकेले आए थे, और तुम्हें अकेले ही लड़ना होगा. लोगों का आपसी मतलब हर मुस्कुराहट के पीछे एक चाल छिपी होती है. जो इंसान बहुत झुक रहा है, समझ लेना वो तुम्हारी जड़ काटने की तैयारी कर रहा है. जो ज्यादा मीठा बोलता है, वही सबसे खतरनाक होता है. इंसान की फितरत ऐसी है कि जब तक उसे फायदा मिलता है, वो साथ रहता है. जिस दिन फायदा खत्म, उसी दिन रिश्ता खत्म. जलनखोर लोग चाणक्य नीति के मुताबिक, सफल लोगों से दुनिया नफरत नहीं करती है, वो जलती है. जब वो आगे बढ़ते हैं तो लोग खुश नहीं बल्कि डरते हैं. उन्हें डर लगता है कि सफल लोग उनसे आगे निकल जाएंगे. इसलिए सफल लोगों के पास ऐसे लोग रहते हैं ताकि वह उनकी हर चाल पर नजर रख सकें. इमोशंस पर रखें काबू याद रखो, भावनाएं ही शक्ति की सबसे बड़ी दुश्मन हैं. जो इंसान ज्यादा भावुक होता है, वह जल्दी टूटता है. शेर कभी किसी पर भरोसा नहीं करता है. उसे पता है कि एक पल की लापरवाही उसकी जान ले सकती है. तुम्हें भी वैसा ही बनना होगा. भरोसा करो लेकिन इस शर्त पर कि सामने वाला कभी भी बदल सकता है. कम बोलो और ज्यादा सुनो कम बोलो, गहरा बनो, और अपने इरादों को छुपाकर रखो. समुद्र जितना शांत होता है, उतना ही खतरनाक होता है. दूरी बनाए रखो. हर किसी को अपने दिल का पता मत बताओ. पैसों की मदद मत लो पैसा वो चीज है जो दोस्त को दुश्मन और दुश्मन को दोस्त बना देती है. किसी की असलियत जाननी हो, उसे थोड़ा पैसा और थोड़ी ताकत दे दो. अगर वो नहीं बदला, तो समझो वो इंसान नहीं, देवता है. लेकिन इस दुनिया में देवता नहीं मिलते हैं. जब तक तुम्हारे पास पैसा है, लोग तुम्हारे आसपास रहेंगे. जिस दिन खाली हुए, सब गायब. इसलिए अपने आपको इतना मजबूत बनाओ कि तुम्हें किसी सहारे की जरूरत ही न पड़े. अकेलापन अकेलापन कमजोरी नहीं, सुपरपावर है. जब तुम अकेले होते हो, तुम्हारे पीछे कोई वार करने वाला नहीं होता है. सामने सिर्फ दुश्मन होता है और दुश्मन से लड़ना आसान है. जिंदगी शतरंज है. अगर तुम प्यादे हो, तो कुर्बानी तय है. अगर राजा हो, तो अपने ही वजीर से बचकर रहना होगा. इरादे मत बताओ अपने इरादे कभी किसी को मत बताओ. जब तक शिकार को पता नहीं चलता कि वो शिकार है, वो बचने की कोशिश नहीं करता है. तुम भी अपने इरादों को छुपाकर रखो.

गर्मियों में भी जरूरी है मॉइश्चराइजर, स्किन रहेगी हाइड्रेटेड और फ्रेश

गर्मी का मौसम आते ही चेहरे पर पसीना, चिपचिपाहट और ड्राइनेस जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं. पसीने से होने वाली चिपचिपाहट के कारण कई लोगों को लगता है कि गर्मियों में मॉइश्चराइजर लगाने की जरूरत नहीं होती, लेकिन सच इससे उलट है. दरअसल, तेज धूप और गर्म हवा स्किन की नमी छीन लेती है. ऐसे में गर्मियों में भी मॉइश्चराइजर लगाना बहुत जरूरी होता है. सही मॉइश्चराइजर स्किन को मुलायम और फ्रेश बनाए रखने में मदद करता है. लेकिन अगर आप सोचते हैं कि जो मॉइश्चराइजर आपने सर्दियों में लगाया था, वही आप गर्मी में भी लगा सकते हैं तो आप गलत हैं. खास बात ये है कि गर्मियों में हल्के और नॉन-स्टिकी मॉइश्चराइजर ज्यादा अच्छे माने जाते हैं. आज हम आपको ऐसे 4 तरह के मॉइश्चराइजर के बारे में बताएंगे जो गर्मी में आपकी स्किन को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकते हैं. जेल बेस्ड मॉइश्चराइजर अगर आपकी स्किन ऑयली या कॉम्बिनेशन है, तो गर्मियों में आपके लिए जेल बेस्ड मॉइश्चराइजर अच्छा ऑप्शन हो सकता है. ये स्किन पर भारी महसूस नहीं होता और जल्दी एब्जॉर्ब हो जाता है. इससे चेहरा चिपचिपा नहीं लगता और स्किन को ठंडक भी मिलती है. एलोवेरा या हायल्यूरोनिक एसिड वाले जेल मॉइश्चराइजर गर्मियों में काफी पसंद किए जाते हैं. वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइज़र गर्मी के मौसम में वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइजर स्किन को हल्का और फ्रेश महसूस कराने में मदद करते हैं. ये स्किन में नमी बनाए रखते हैं लेकिन ऑयल नहीं बढ़ाते. जिन लोगों को पसीना ज्यादा आता है, उनके लिए ऐसे मॉइश्चराइजर काफी फायदेमंद हो सकते हैं. इन्हें लगाने के बाद चेहरा ज्यादा भारी भी नहीं लगता. विटामिन-ई वाला मॉइश्चराइजर धूप और गर्मी की वजह से स्किन अक्सर गर्मियों बेजान और रूखी दिखने लगती है. ऐसे में विटामिन-ई वाले मॉइश्चराइजर स्किन को पोषण देने का काम करते हैं. ये स्किन को मुलायम रखने के साथ-साथ ड्राइनेस कम करने के लिए भी असरदार माने जाते हैं. अगर आपकी स्किन जल्दी फटने या छिलने लगती है, तो विटामिन-ई वाले मॉइश्चराइजर आपके लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है. SPF वाला मॉइश्चराइजर गर्मियों में ऐसा मॉइश्चराइजर चुनना ज्यादा बेहतर माना जाता है जिसमें SPF भी मौजूद हो. इससे स्किन को धूप की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद मिलती है. SPF वाला मॉइश्चराइजर लगाने से कई बार सनस्क्रीन लगाने की जरूरत भी कम हो जाती है. बाहर निकलने से पहले इसे लगाना फायदेमंद हो सकता है.

वास्तु टिप्स: इन जगहों पर भोजन करने से बढ़ सकता है आर्थिक नुकसान

 वास्तु शास्त्र में केवल घर की दिशाएं और कमरों का रख-रखाव ही नहीं, बल्कि हमारे खान-पान की आदतें और जगह भी सीधे तौर पर हमारी आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं. मान्यता है कि गलत जगह पर बैठकर भोजन करने से मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा नाराज हो जाती हैं, जिससे घर में दरिद्रता आती है और इंसान धीरे-धीरे कंगाल होने लगता है. आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार किन जगहों पर भोजन करने से सख्त परहेज करना चाहिए. 1. बिस्तर पर बैठकर भोजन करना आजकल बहुत से लोग बेड पर बैठकर टीवी देखते हुए या आराम करते हुए खाना पसंद करते हैं. वास्तु के अनुसार, यह सबसे बड़ा दोष है. बिस्तर सोने और आराम करने की जगह है. वहां भोजन करने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है. इससे न सिर्फ धन की हानि होती है, बल्कि व्यक्ति कर्ज के जाल में फंस सकता है और अनिद्रा जैसी बीमारियों का शिकार हो जाता है. 2. टूटे हुए बर्तनों में खाना अगर किसी बर्तन या थाली में हल्का सा क्रैक (दरार) आ गया है, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए. टूटे या चटके हुए बर्तनों में भोजन करने से घर की सुख-समृद्धि चली जाती है. इसे दुर्भाग्य और कंगाली का सीधा कारण माना जाता है. हमेशा साफ और सुरक्षित बर्तनों का ही इस्तेमाल करें. 3. अंधेरे या कम रोशनी वाली जगह पर जिस जगह पर पर्याप्त रोशनी न हो या जहां बहुत ज्यादा अंधेरा रहता हो, वहां बैठकर भोजन कभी नहीं करना चाहिए. अंधकार नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. कम रोशनी में भोजन करने से शरीर में नकारात्मकता प्रवेश करती है, पाचन तंत्र खराब होता है और आर्थिक उन्नति रुक जाती है. 4. हाथ में रखकर भोजन करना कुछ लोग जल्दबाजी में या खड़े होकर भोजन को हाथ में लेकर ही खाने लगते हैं. शास्त्र कहते हैं कि अन्न का सम्मान बैठकर और थाली को सम्मानजनक स्थान (जैसे टेबल या जमीन पर) रखकर ही करना चाहिए. हाथ में रखकर खाना खाने से अन्न का अपमान होता है, जिससे घर में दरिद्रता का वास होने लगता है. 5. श्मशान या नकारात्मक स्थानों के पास ऐसी जगहें जहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह अधिक हो (जैसे श्मशान भूमि के नजदीक या बहुत ज्यादा गंदगी वाले स्थान), वहां बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए. यह आदत मानसिक तनाव बढ़ाती है और व्यक्ति की जमा पूंजी धीरे-धीरे बीमारियों और अनचाहे खर्चों में खत्म होने लगती है.