samacharsecretary.com

बहादुरी का बड़ा सम्मान! दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों शौर्य चक्र पाएंगे छत्तीसगढ़ के 3 जवान

बालोद/भानुप्रतापपुर. छत्तीसगढ़ के तीन जवानों को आज नई दिल्ली में राष्टपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्रतिष्ठित वीरता सम्मान शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा. असम रायफल में पदस्थ जवान भोजराम साहू को मणिपुर में आंतकियों के साथ मुठभेड़ में प्रदर्शित अदम्य साहस और वीरता के लिए यह सम्मान प्रदान किया जाएगा. वहीं छत्तीसगढ़ में नक्सल अभियानों के दौरान उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख भी इस सम्मान से अलंकृत होंगे.  आतंकियों ने पर भारी पड़े भोजराम साहू असम राइफल्स के जवान भोजराम साहू ने बताया कि 15 नवंबर, 2024 को मणिपुर के टेंगनोपाल में आतंकियों के घुसने की सूचना मिली थी. करीब 9:30 बजे आतंकियों के साथ मुठभेड़ हो गई, जिसमें भोजराम साहू को एक गोली भी लगी थी. लेकिन उनका हौंसला नहीं टूटा, जवाब कार्रवाई में भोजराम ने फायरिंग नहीं रोकी. फलस्वरूप आतंकियों को मैदान छोड़कर भागना पड़ा. इस कार्रवाई में 3 आतंकियों की मौत हुई थी. बता दें कि भोजराम साहू, बालोद जिले के आदिवासी विकास खण्ड डौंडी के गांव ढोर्रीठेमा के रहने वाले हैं. वह असम रायफल में पदस्थ हैं. नक्सली मोर्चे पर ‘राम-लक्ष्मण’ ने निभाई अहम भूमिका छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों में अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले पुलिस अधिकारी निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख को आज ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया जाएगा. राजनांदगांव और बस्तर के दुर्गम जंगलों में वर्षों से नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व कर रहे दोनों जांबाज अफसरों ने कई सफल ऑपरेशनों को अंजाम दिया है. बस्तर में जहां भी उनकी तैनाती रही, वहां उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर रहकर सुरक्षा बलों का नेतृत्व किया और नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की. नक्सल एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर मिली पहचान पुलिस महकमे में दोनों अधिकारियों को नक्सल एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाना जाता है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निरीक्षक लक्ष्मण केवट अब तक 97 नक्सलियों के खिलाफ सफल अभियानों का हिस्सा रहे हैं, जबकि निरीक्षक रामेश्वर देशमुख 56 नक्सलियों के विरुद्ध हुई कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. 29 नक्सलियों के सफाए वाला ऐतिहासिक ऑपरेशन दोनों अधिकारियों की बहादुरी का सबसे बड़ा उदाहरण 16 अप्रैल 2024 को देखने को मिला, जब कांकेर जिले के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र के हापाटोला जंगल में सुरक्षा बलों ने एक बड़े अभियान को अंजाम दिया. इस अभियान में 15 महिला नक्सलियों सहित कुल 29 नक्सली मारे गए थे. छत्तीसगढ़ के नक्सल विरोधी इतिहास में इसे सबसे सफल अभियानों में से एक माना जाता है. ऑपरेशन के दौरान दोनों अधिकारियों ने स्वयं जंगल के भीतर मोर्चा संभालते हुए जवानों का नेतृत्व किया था. पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान निरीक्षक लक्ष्मण केवट को अब तक 6 राष्ट्रपति पुलिस पदक सहित सीआरपीएफ और बीएसएफ के कई वीरता सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. वहीं निरीक्षक रामेश्वर देशमुख को भी उनके उत्कृष्ट साहस और सेवा के लिए राष्ट्रपति द्वारा दो बार सम्मानित किया जा चुका है. अब शौर्य चक्र मिलने के साथ उनके नाम एक और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान जुड़ जाएगा. “लक्ष्य सिर्फ ऑपरेशन नहीं, शांति स्थापित करना है” सम्मान की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए लक्ष्मण केवट ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करना और लोगों का विश्वास जीतना है. उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ ऑपरेशन चलाना नहीं है, बल्कि इलाके में शांति स्थापित कर लोगों का विश्वास लौटाना है. हमने अनेक सफल अभियान चलाए हैं, लेकिन सबसे बड़ी सफलता क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करना है.” वर्तमान में लक्ष्मण केवट पाखंजूर में पदस्थ हैं, जबकि रामेश्वर देशमुख भानुप्रतापपुर थाना प्रभारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों तक जान जोखिम में डालकर देश की सुरक्षा और शांति के लिए कार्य करने वाले इन दोनों अधिकारियों को मिलने वाला शौर्य चक्र न केवल उनकी बहादुरी का सम्मान है, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए भी गौरव का क्षण है.  छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण : SP निखिल राखेचा इस गौरवपूर्ण पल को लेकर पुलिस अधिक्षक निखिल आकाश राखेचा ने कहा कि कांकेर पुलिस के साथ पूरे छत्तीसगढ़ की पुलिस के लिए गौरव का विषय है कि कांकेर जिले के दो निरीक्षकों को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है. आने वाले समय में पूरे छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए यह प्रेरणा स्रोत भी रहेगा कि कांकेर जैसे जिले में रहकर लोग इस तरह के उत्कृष्ट कार्यों को अंजाम दे सकते हैं.

समय पर जांच और जोखिम की पहचान से सुरक्षित मातृत्व संभव: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

गर्भावस्था में समय पर जांच एवं उच्च जोखिम स्थितियों की शीघ्र पहचान से सुरक्षित मातृत्व होता है सुनिश्चित: उप मुख्यमंत्री शुक्ल प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने पर 9 जून को प्रदेश में विशेष मातृत्व स्वास्थ्य शिविर होंगे आयोजित शिविर का लाभ लेने की अपील भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व प्रत्येक महिला का अधिकार है। राज्य सरकार गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने प्रदेश की सभी गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों से अपील की है कि वे 9 जून को आयोजित विशेष प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान शिविरों में पहुंचकर निःशुल्क जांच, परामर्श एवं उपचार सुविधाओं का लाभ अवश्य लें। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था दी समय पर जांच एवं उच्च जोखिम स्थितियों की शीघ्र पहचान से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा है कि इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में संचालित करते हुए प्रत्येक गर्भवती महिला तक गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में और कमी लाई जा सके। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में 2.94 लाख उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उचित उपचार का किया गया प्रबंधन प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के अंतर्गत मध्यप्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभियान के तहत पंजीकृत 14.31 लाख गर्भवती महिलाओं में से 10.25 लाख महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) की गई, जो कुल पंजीकृत गर्भवतियों का लगभग 72 प्रतिशत है। जांच के दौरान 2.94 लाख महिलाओं को उच्च जोखिम गर्भावस्था (हाई रिस्क प्रेगनेंसी-एचआरपी) के रूप में चिन्हित किया गया, जिनमें से 2.60 लाख अर्थात 88 प्रतिशत महिलाओं को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक उपचार, प्रबंधन एवं रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। अपर मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सुश्री दिशा प्रणय नागवंशी ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के सफलतापूर्वक 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 9 जून को प्रदेश के सभी जिलों में विशेष पीएमएसएमए शिविर आयोजित किए जाएंगे। राज्य के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला चिकित्सालयों, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। विशेष शिविरों में गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व एवं प्रसवोत्तर जांच, नवीन एवं छूटी हुई गर्भवतियों का पंजीयन, उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की पहचान, उपचार एवं नियमित फॉलोअप सुनिश्चित किया जाएगा। महिलाओं की रक्तचाप, वजन, बीएमआई, मेडिकल एवं प्रसूति इतिहास की जांच के साथ ही आवश्यक प्रयोगशाला परीक्षण भी किए जाएंगे। अभियान के अंतर्गत हीमोग्लोबिन, यूरिन एल्बुमिन एवं शुगर, एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, सिफलिस, मलेरिया, सिकल सेल स्क्रीनिंग, ब्लड ग्रुपिंग और ओजीटीटी जैसी महत्वपूर्ण जांचें उपलब्ध कराई जाएंगी। आवश्यकता अनुसार सोनोग्राफी एवं विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आयरन-फोलिक एसिड, कैल्शियम सहित आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों तथा सुमन हेल्प डेस्क की सक्रिय भागीदारी रहेगी। जरूरतमंद महिलाओं के लिए 108 एम्बुलेंस के माध्यम से निःशुल्क परिवहन सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेशभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी संचालित किया जाएगा। ग्राम स्तर पर प्रचार-प्रसार, सोशल मीडिया अभियान, वीएचएसएनडी, जन आरोग्य समितियों, स्व-सहायता समूहों एवं पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।  

बूढ़ी मां संग आई बेटी ने बीटेक की पढ़ाई करने के लिए लगाई गुहार, मुख्यमंत्री ने किया आश्वस्त

किसी भी निर्धन या जरूरतमंद की शिक्षा को बाधित नहीं होने देगी सरकारः मुख्यमंत्री बूढ़ी मां संग आई बेटी ने बीटेक की पढ़ाई करने के लिए लगाई गुहार, मुख्यमंत्री ने किया आश्वस्त  पुलिस की अनसुनी व कब्जे से जुड़ी शिकायतों में हीलाहवाली पर सीएम योगी सख्त, अफसरों को कड़ी मॉनीटरिंग करने का निर्देश    लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान प्रदेश भर से आए लोगों से उन्होंने व्यक्तिगत मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और समस्याओं के निराकरण का निर्देश दिया। एक बच्ची ने मुख्यमंत्री से उच्च शिक्षा के लिए मदद की गुहार लगाई, जिस पर उन्होंने लखनऊ के किसी संस्थान में प्रवेश दिलाने का आदेश दिया। पुलिस की अनसुनी व अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायतों पर सख्त सीएम योगी ने अफसरों को मॉनीटरिंग कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का आदेश दिया।  बूढ़ी मां संग आई बेटी, खुश होकर लौटी  लखनऊ की एक बच्ची अपनी बूढ़ी मां के साथ पहुंची। उसने बताया कि इंटरमीडिएट अच्छे अंक से उत्तीर्ण किया है। वह आगे बीटेक करना चाहती है, लेकिन धन के अभाव में दिक्कत हो रही है। सीएम योगी ने उसकी मार्कशीट देखी, फिर कहा कि पढ़ाई पर ध्यान दो। आपका प्रवेश किसी अच्छे संस्थान में कराया जाएगा। सरकार किसी भी निर्धन या जरूरतमंद की शिक्षा को बाधित नहीं होने देगी। सकारात्मक संदेश पाकर प्रफुल्लित बेटी व मां ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।  अवैध कब्जे की शिकायत पर अफसरों से बोले- ‘मॉनीटरिंग कर पीड़ितों को न्याय दिलाइए’  विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों ने मुख्यमंत्री से पुलिस की हीलाहवाली व अवैध कब्जे को लेकर उचित कार्रवाई न होने की शिकायत करते हुए प्रार्थना पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री ने हर प्रकरण को सुना, फिर शासन के अफसरों को प्रार्थना पत्र देते हुए कहा कि इन मामलों की मॉनीटरिंग करिए। पीड़ित को न्याय और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराइए। सीएम ने पीड़ितों को जल्द ही समाधान के लिए आश्वस्त किया।  पहले जनपद, मंडल के अधिकारियों से अवश्य मिलिए  कुछ फरियादी ऐसे भी आए, जो सीधे ‘जनता दर्शन’ में पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूछा कि आपने जनपद के किस अधिकारी के समक्ष अपनी बात रखी। इस पर कुछ फरियादियों ने कहा कि हम सीधे यहीं आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गर्मी बेतहाशा पड़ रही है। आप सभी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और सबसे पहले अपनी शिकायतें जनपद, मंडल स्तर के अधिकारियों से करें। कई समस्याओं का समाधान वहीं से हो जाएगा।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया शुभारंभ, वरिष्ठ नागरिकों के साथ खेली कैरम-लूडो

बुजुर्गों को मिला अपनापन और सम्मान का नया ठिकाना, अंबिकापुर में शुरू हुआ ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया शुभारंभ, वरिष्ठ नागरिकों के साथ खेली कैरम-लूडो योग, स्वास्थ्य जांच, पुस्तकालय, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता की मिलेगी सुविधा रायपुर, वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्ण, सुरक्षित एवं आनंदमय वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में सरगुजा जिले में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा स्थापित ‘सियान गुड़ी’ (वरिष्ठ नागरिक डे-केयर सेंटर) का शुभारंभ सोमवार को वित्त एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी ने समाज कल्याण एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की उपस्थिति में किया। इस अवसर पर वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से नई पीढ़ी को दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुखद जीवन को ध्यान में रखते हुए सियान गुड़ी की स्थापना की गई है, जहां उन्हें आवश्यक सुविधाओं के साथ आत्मीय और सकारात्मक वातावरण मिलेगा। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि वर्तमान समय में व्यस्त जीवनशैली के कारण कई बार बुजुर्ग स्वयं को अकेला महसूस करते हैं। ऐसे में सियान गुड़ी उनके लिए सामाजिक जुड़ाव, स्वास्थ्य संरक्षण और मनोरंजन का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेगा। उन्होंने बताया कि केंद्र में योग एवं प्राणायाम, फिजियोथेरेपी, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, पुस्तकालय, पारिवारिक परामर्श, सांस्कृतिक गतिविधियां, इंडोर गेम्स, स्वल्पाहार और भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। 25 सीटर क्षमता वाले इस डे-केयर सेंटर का संचालन सप्ताह में छह दिन प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक किया जाएगा। शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधियों ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ कैरम और लूडो खेलकर आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर बुजुर्गों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया तथा व्हीलचेयर और छड़ी का वितरण भी किया गया। यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मनेंद्रगढ़ रोड में स्थापित इस केंद्र का संचालन समाज कल्याण विभाग के सहयोग से अनामिका वेलफेयर सोसायटी, अंबिकापुर द्वारा किया जाएगा। 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक यहां दिनभर स्वास्थ्य, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का लाभ उठा सकेंगे। कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि , कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल तथा विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

ट्विशा मामले की जांच घेरे में! फंदे की पहचान का रिकॉर्ड गायब, जांच की जानकारी पहुंचने के भी आरोप

भोपाल  एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अब मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस बीच, सीबीआई जांच से पहले हुई स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह द्वारा जबलपुर हाईकोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जांच से जुड़े बेहद गोपनीय और अहम तथ्य पहले ही उन तक पहुंच रहे थे। इसी का फायदा उठाकर वह समय रहते अग्रिम जमानत लेने में कामयाब हो गई थीं, जिसे बाद में 27 मई को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। शुरुआती जांच में पुलिस की बड़ी लापरवाही ट्विशा के परिजनों की ओर से भोपाल कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट अंकुर पांडे का आरोप है कि शुरुआत में ही मृतका की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को संदिग्ध माना जाना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, 13 मई 2026 की सुबह सब इंस्पेक्टर (SI) दिनेश शर्मा ने फंदे की रस्सी तो जब्त की, लेकिन लिखापढ़ी में उस व्यक्ति का स्पष्ट विवरण ही दर्ज नहीं किया गया जिसने रस्सी की पहचान की थी। इसके अलावा, उस महत्वपूर्ण रस्सी को तुरंत फॉरेंसिक जांच के लिए एम्स अस्पताल भेजने के बजाय सब इंस्पेक्टर ने अपनी निजी कार में रख दिया था और बाद में उसे जांच के लिए भेजा गया। इतनी बड़ी लापरवाही के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा, केस डायरी का हिस्सा रहे जब्ती से जुड़े दस्तावेज भी आरोपियों तक पहुंच गए थे। कानूनी नियमों के मुताबिक, उस समय समर्थ और गिरिबाला आरोपी नहीं थे, इसलिए उन्हें इन दस्तावेजों को देखने का कोई अधिकार नहीं था। इसके बावजूद अग्रिम जमानत याचिका के साथ इन गोपनीय दस्तावेजों को अदालत में दाखिल कर दिया गया, जिससे साफ है कि जांच की जानकारी लीक हो रही थी। मनोचिकित्सक से पूछताछ और मेडिकल पर्चे की जांच केस को आगे बढ़ाते हुए सीबीआई की टीम ने अब ट्विशा का इलाज करने वाले प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से विस्तृत पूछताछ की है। दरअसल, आरोपी पक्ष ने भोपाल कोर्ट में कुछ ऐसे मेडिकल दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें दावा किया गया था कि ट्विशा मानसिक रूप से परेशान थी और उसका मनोरोग का इलाज चल रहा था। सीबीआई अब इन मेडिकल पर्चों की असलियत खंगाल रही है। जांच एजेंसी ने डॉक्टर से पूछा कि ट्विशा कब-कब इलाज के लिए आई थी, उसे क्या समस्याएं थीं और काउंसलिंग के दौरान उसने अपनी निजी जिंदगी को लेकर क्या बातें साझा की थीं। इस पूछताछ पर डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी ने सीबीआई से संपर्क की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीज की गोपनीयता और उसके अधिकारों को देखते हुए वह काउंसलिंग की व्यक्तिगत बातों का खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं कर सकते। पूर्व जज की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन अलर्ट मामले में गिरफ्तारी के बाद 29 मई को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को भोपाल की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। शुरुआत में दोनों को जेल के अस्पताल वार्ड में वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने के आरोप लगे थे, जिसके बाद जेल प्रबंधन ने उन्हें सामान्य बैरक में शिफ्ट कर दिया है। अदालत के निर्देश के बाद जेल में गिरिबाला सिंह की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उनकी बैरक के पास अतिरिक्त प्रहरियों की तैनाती के साथ ही सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बढ़ाने की मुख्य वजह यह है कि गिरिबाला सिंह जब 15 जुलाई 2021 से 28 फरवरी 2023 तक भोपाल जिला कोर्ट में जज के पद पर तैनात थीं, तब उन्होंने जिन अपराधियों को सजा सुनाई थी, उनमें से 29 कैदी वर्तमान में इसी जेल में बंद हैं। ऐसे में किसी भी अनहोनी या आपसी रंजिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

यूपी: प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की प्रगति का होगा नया आकलन सिस्टम

लखनऊ उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में इस समय गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं। 20 मई से स्कूल बंद हैं और 15 जून तक बंद रहेंगे। 16 जून को सत्र का पहला दिन होगा। इस दिन स्कूलों में छात्र-छात्राओं का स्वागत तो होगा ही, नए शैक्षिक सत्र से परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से तीन तक के विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का नियमित आकलन करने के लिए निपुण तालिका तैयार करना अनिवार्य कर दिया गया है। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत लागू की जा रही यह व्यवस्था बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। निपुण तालिका के माध्यम से शिक्षकों को प्रत्येक छात्र की सीखने की प्रगति का रिकॉर्ड तैयार करना होगा। इसमें पढ़ना, लिखना, समझना तथा गणितीय दक्षताओं से संबंधित विभिन्न बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन से छात्र निर्धारित दक्षताओं को प्राप्त कर चुके हैं और किन्हें अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की आवश्यकता है। इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अभिभावक अपने बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक प्रगति को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इस व्यवस्था में परीक्षा परिणामों के बजाय बच्चों द्वारा अर्जित दक्षताओं के आधार पर प्रगति का आकलन किया जाएगा। 27 दिनों का दिया गया है ग्रीष्मकालीन अवकाश इस साल प्रदेश के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में 20 मई से 15 जून तक के लिए ही विद्यालय बंद रखे गए हैं। इस तरह इस बार छात्रों को कुल 27 दिन ग्रीष्मकालीन अवकाश मिले हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन्स और आधिकारिक आदेश के मुताबिक 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद 16 जून 2026 से सभी स्कूल दोबारा खोल दिए जाएंगे। इस दिन से बच्चे पहले की तरह नियमित रूप से अपनी कक्षाओं में लौटेंगे। स्कूलों को इस शेड्यूल के हिसाब से तैयारी करने का आदेश दिया है। नए सत्र के लिए स्कूल परिसरों को पहले से साफ-सुथरा और व्यवस्थित कर लिया जाएगा। सत्र के पहले दिन हमेशा की तरह विद्यालय में विद्यार्थियों का स्वागत किया जाएगा। क्या बोले बेसिक शिक्षा अधिकारी गोरखपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) धीरेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि निपुण तालिका के प्रभावी क्रियान्वयन से प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर शिक्षक कमजोर छात्रों की पहचान कर उन पर विशेष ध्यान दे सकेंगे।

भीषण गर्मी में राहत, पीएचईडी के विशेष अभियानों से जलापूर्ति सुधरी

जयपुर  भीषण गर्मी के बीच प्रदेशवासियों को स्वच्छ, पर्याप्त एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील नेतृत्व एवं दूरदर्शी निर्देशों का सकारात्मक असर पूरे राजस्थान में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के अनुरूप जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) द्वारा संचालित विशेष राज्यव्यापी अभियानों ने पेयजल व्यवस्थाओं को नई मजबूती प्रदान की है तथा हजारों परिवारों को राहत पहुंचाई है। सात विशेष अभियानों में 19 हजार से अधिक कार्य, पेयजल व्यवस्थाओं में ऐतिहासिक सुधार 5 अप्रैल से 6 जून तक आयोजित सात विशेष राज्यव्यापी अभियानों के दौरान प्रदेशभर में कुल 19,072 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इनमें 3,766 हैंडपंपों की मरम्मत, 2,236 पाइपलाइन लीकेज की दुरुस्ती, 1,219 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान, 1,390 बाधित जलापूर्ति मामलों का निस्तारण, 290 कम अवधि की जलापूर्ति, 688 कम सप्लाई, 181 प्रदूषित जल तथा 29 समय-सारणी संबंधी शिकायतों का समाधान शामिल है। इसके अतिरिक्त 7,466 अन्य सुधारात्मक कार्यों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया गया। एक दिन में 3 हजार से अधिक कार्य, विशेष टीमों ने दिखाई तत्परता शनिवार को आयोजित सातवें विशेष अभियान के दौरान विभागीय विशेष टीमों ने जिलों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्थाओं का व्यापक निरीक्षण कर समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया। अभियान के तहत 689 खराब हैंडपंप पुनः चालू किए गए, 592 पाइपलाइन लीकेज दुरुस्त किए गए, 241 प्रेशर संबंधी समस्याओं का समाधान किया गया तथा 246 क्षेत्रों में बाधित जलापूर्ति बहाल की गई। इसके अलावा 60 कम अवधि की जलापूर्ति, 144 कम सप्लाई और 60 प्रदूषित जल संबंधी शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया गया। कुल मिलाकर एक ही दिन में 3,077 पेयजल संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए गए। अवैध जल कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई, जल संरक्षण को मिला नया बल जल संसाधनों के संरक्षण एवं प्रभावी प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने अवैध जल उपयोग के खिलाफ भी व्यापक कार्रवाई की। सातवें अभियान के दौरान 426 अवैध जल कनेक्शन हटाए गए, जिनमें होटल, ढाबे, सरस डेयरी बूथ एवं कृषि कार्यों में उपयोग किए जा रहे अवैध कनेक्शन शामिल थे। गौरतलब है कि सात अभियानों के दौरान अब तक कुल 1,827 अवैध जल कनेक्शन हटाए जा चुके हैं, जिससे जल की बर्बादी पर प्रभावी अंकुश लगा है और आमजन के लिए उपलब्ध पेयजल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को मिली नई मजबूती हैंडपंपों एवं पाइपलाइनों की मरम्मत के साथ-साथ 619 अन्य पेयजल सुधार कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया गया है। इन प्रयासों से हजारों परिवारों को गर्मी के इस कठिन दौर में राहत मिली है और पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता एवं उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। 30 जून तक जारी रहेंगे विशेष अभियान उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान लगातार संचालित किए जा रहे हैं। आमजन को बेहतर पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा गर्मी के मौसम में जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से ये अभियान 30 जून तक निरंतर जारी रहेंगे।

लखनऊ पहले, इंदौर दूसरे, पटना तीसरे स्थान पर स्वच्छता फीडबैक रैंकिंग में

 पटना  स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 के तहत शहरों की साफ-सफाई और नागरिक सुविधाओं को लेकर लोगों से ऑनलाइन सिटिजन फीडबैक लिया जा रहा है। रविवार दोपहर तक जारी आंकड़ों में पटना ने सात लाख से भी अधिक सिटिजन फीडबैक के साथ देशभर में तीसरा स्थान हासिल कर राज्य का मान बढ़ाया है। वहीं, बिहार के अन्य तीन स्मार्ट सिटी इस मामले में काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं। सबसे अधिक 9,03,240 सिटिजन फीडबैक के साथ लखनऊ पहले स्थान पर है। दूसरे स्थान पर इंदौर है, जहां से 8,63,752 लोगों ने अपनी राय दी है। पटना को अब तक 7,05,036 सिटिजन फीडबैक मिले हैं और वह देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि बिहार के शीर्ष-300 शहरों में पटना अकेला शहर है, जिसने उल्लेखनीय भागीदारी दर्ज कराई है। पटना को छोड़ दें तो राज्य के अन्य तीन स्मार्ट सिटी नागरिक भागीदारी के मामले में काफी पीछे हैं। मुजफ्फरपुर को अब तक केवल 6,003 फीडबैक मिले हैं। भागलपुर में यह संख्या 4,828 रही, जबकि बिहारशरीफ की स्थिति सबसे कमजोर दिखी और वहां केवल 901 लोगों ने फीडबैक दिया। बता दें कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 के सिटीजन फीडबैक में पटना ने देशभर में चौथा स्थान हासिल किया था। रैंकिंग तय करने में अहम योगदान स्वच्छता सर्वेक्षण में नागरिकों की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शहर की सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालय, सड़क सफाई और अन्य सुविधाओं पर लोगों की राय के आधार पर रैंकिंग तय की जाती है। पटना नगर निगम प्रशासन भी अधिक से अधिक लोगों से ऑनलाइन फीडबैक देने की अपील कर रहा है, ताकि शहर की वास्तविक स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर तरीके से सामने आ सके। स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक किए गए कार्यों का मूल्यांकन किया जा रहा है। वर्तमान में चल रहा फील्ड असेसमेंट निगम के लिए अहम माना जा रहा है। इस दौरान सिटीजन फीडबैक पोर्टल भी सक्रिय है। पोर्टल व एप के माध्यम से नागरिक दे सकते हैं फीडबैक पोर्टल cf.sbmurban.org या स्वच्छता एमओएचयूए एप के माध्यम से नागरिक फीडबैक दे सकते हैं। एक मोबाइल नंबर से केवल एक बार फीडबैक दर्ज होगा। केंद्रीय टीम के आन-फील्ड सत्यापन के दौरान भी नागरिकों से यही प्रश्न पूछे जा रहे हैं, जिसके अंक स्वच्छता सर्वेक्षण के कुल स्कोर में जोड़े जाएंगे। पूछे जा रहे 13 महत्वपूर्ण सवाल स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत शहरवासियों से साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े 13 प्रश्न पूछे जा रहे हैं। इनमें घर-दुकान से कचरा उठाव, सूखा-गीला कचरा पृथक्करण, नियमित सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति, आरआरआर (रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल) सेंटर की जानकारी तथा शिकायत निवारण व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं। 12,500 अंकों पर तय होगी नगर निकायों की रैंकिंग नगर निकायों की रैंकिंग कुल 12,500 अंकों के आधार पर तय होगी। इसमें ओडीएफ, वाटर प्लस एवं गार्बेज फ्री सिटी जैसे सर्टिफिकेशन के लिए 2,000 अंक निर्धारित किए गए हैं। वहीं, आन-ग्राउंड असेसमेंट को सबसे अधिक महत्व देते हुए इसके लिए 9,500 अंक तय किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नागरिकों की सहभागिता और संतुष्टि को ध्यान में रखते हुए सिटीजन फीडबैक के लिए 1,000 अंक निर्धारित किए गए हैं।

बिल्डिंग मालिक का फूटा गुस्सा, TMC से मांगा मुख्यालय खाली करने का जवाब

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। खबर है कि तृणमूल कांग्रेस का मुख्यायल जिस भवन में है, उसके मालिक ने पार्टी से जगह खाली करने के लिए कहा है। इस संबंध में पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। खास बात है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब टीएमसी में बगावत जारी है और विधायक पहले ही दो गुट तैयार कर चुके हैं। टीएमसी के मौजूद मुख्यालय का पता A/P-1/A कैनाल साउथ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां के संपत्ति मालिक मोंटू साहा है और वह चाहते हैं कि टीएमसी उनकी संपत्ति को खाली कर दे। उनका कहना है कि टीएमसी के साथ कराया गया समझौता साल 2025 में ही खत्म हो गया है और वह पार्टी से लंबे समय से जगह खाली करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन उसपर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पुलिस में शिकायत जगह खाली नहीं करने को लेकर जारी विवाद के बाद साहा अपने बेटे अमित के साथ रविवार को प्रॉपर्टी पर पहुंचे थे। वह टीएमसी नेताओं से बात करने पहुंचे थे, लेकिन वहां कोई भी पदाधिकारी मौजूद नहीं था। ऐसे में उन्होंने पुलिस का रुख किया है। खबर है कि पिता पुत्र कुछ घंटों तक इंतजार करने के बाद पुलिस स्टेशन के लिए रवाना हुए थे। क्या है प्लान उन्होंने संकेत दिए हैं कि पार्टी को प्रॉपर्टी से बाहर निकालने के लिए कानूनी मदद ली जा सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अमित का कहना है, 'पिछले साल के आखिर में जब कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया, तो हमने उनसे कई बार संपर्क किया और कहा कि हमें हमारी बिल्डिंग वापस चाहिए। इस बिल्डिंग में मरम्मत का काम होना है और हमें अपने बिजनेस के लिए भी इसकी जरूरत है।' अमित ने कहा, 'उन्होंने हमसे कहा था कि वे जुलाई तक बिल्डिंग खाली कर देंगे, लेकिन हमें यह अभी वापस चाहिए। पिछले कुछ समय से पार्टी का कोई भी व्यक्ति इस बारे में बात करने के लिए उपलब्ध नहीं है। हमारे पास पुलिस के पास जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था।' रिपोर्ट के अनुसार, टीएएमसी के एक नेता का कहना है कि साहा ने संपत्ति किराये पर देकर कोई एहसान नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि इसके बदले में कई कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए हैं। TMC हेडक्वार्टर्स खास बात है कि टीएमसी के असली मुख्यालय पर भी विवाद जारी है। तृणमूल भवन नाम से पहचाने वाली इस बिल्डिंग पर बागी विधायक जावेद खान ने अपना दावा पेश कर दिया है। उनका कहना है कि तृणमूल भवन जिस जमीन पर बना हुआ है, वह उनके परिवार की है। उन्होंने कहा था, 'मेरे पास यह साबित करने के लिए पूरे सबूत हैं कि तोपसिया रोड प्लॉट मेरे परिवार का है।' दरअसल, यहां रिनोवेशन का काम शुरू होने के बाद टीएमसी 2022 में साहा की प्रॉपर्टी में शिफ्ट हुई थी। साहा परिवार का कहना है कि यह जगह टीएमसी को साल 2022 में किराये पर दी गई थी। इससे पहले साहा यहां अरब रेसीडेंसी नाम का होटल चलाते थे।

राज्यसभा की दौड़ में नथवाणी की एंट्री, भाजपा नेताओं की मौजूदगी में भरा पर्चा

रांची. झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। सोमवार को उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। नामांकन के दौरान भाजपा के कई विधायक उनके साथ विधानसभा पहुंचे। झरिया से भाजपा विधायक रागिनी सिंह समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी ने उनके प्रति भाजपा के समर्थन के संकेत और मजबूत कर दिए। विधानसभा में नथवाणी को लेकर हटिया विधायक नवीन जायसवाल पहुंचे।  परिमल नथवाणी झारखंड से वर्ष 2008 और 2014 में राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वर्तमान में वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस बार वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे हैं। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने अपना आधिकारिक उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है और नथवाणी को समर्थन देने की रणनीति बनाई है। बताया जा रहा है कि भाजपा के साथ-साथ सहयोगी दलों जदयू, लोजपा और आजसू के विधायकों को भी उनके प्रस्तावक बनने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में उनकी दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है। हेमंत सोरेन से मुलाकात बनी चर्चा का विषय नामांकन से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और परिमल नथवाणी की मुलाकात भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही। हालांकि दोनों पक्षों ने इसे केवल शिष्टाचार भेंट बताया है। वहीं JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नथवाणी के प्रस्तावक की भूमिका में नहीं है। बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नथवाणी के चाहने वाले झामुमो में भी हैं। कारण कि झारखंड के लिए उनका कार्यकाल अच्छा रहा है। मैं पुराना झारखंडी हूं … मैं पुराना झारखंडी हूं। मुझे विश्वास है कि मुझे जीत मिलेगी। सत्तापक्ष का भी साथ मिलेगा। मेरे दो कार्यकाल के काम को पूरा झारखंड देखा है। सबसे लेंगे सहयोग। सबसे मिलना आवश्यक है। हमने झारखंड के लिए जो काम किया है, उसके भरोसे वोट मांगेगे। -परिमल नथवाणी, राज्यसभा प्रत्याशी, झारखंड दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मीडिया सलाहकार प्रणव झा को मैदान में उतारा है। महागठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन कांग्रेस के विधायकों को एकजुट बनाए रखना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्रॉस वोटिंग होती है तो चुनाव के नतीजों पर इसका असर पड़ सकता है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि परिमल नथवाणी को भाजपा और उसके सहयोगी दलों का पूरा समर्थन मिलता है, तो उनकी जीत की संभावनाएं काफी बढ़ सकती हैं। उन्हें जीत के लिए केवल कुछ अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। नामांकन प्रक्रिया के साथ ही राज्यसभा चुनाव के लिए राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी गणित, संभावित क्रॉस वोटिंग और अंतिम समय में बनने वाले नए समीकरणों पर सभी की नजरें टिकी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में और भी दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। स्थानीयता और राज्य के मुद्दे पर भी हैं.. नामांकन करना और जीतना दोनों अलग है। भाजपा के ही सभी विधायकों का भी उन्हें समर्थन मिलेगा, यह भी कहा नहीं जा सकता। स्थानीयता और राज्य के मुद्दे पर भी हैं। भाजपा ने किसी दलित को राज्यसभा नहीं भेजा?  -सुप्रियो भट्टाचार्य, महासचिव, झामुमो