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बकायेदारों पर निगम की बड़ी कार्रवाई की तैयारी, मुंगेर में 72 घंटे का अल्टीमेटम जारी

मुंगेर. वर्षों से होल्डिंग टैक्स और यूजर चार्ज बकाया रखने वाले बड़े बकायेदारों पर अब नगर निगम ने सख्ती शुरू कर दी है। नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता के निर्देश पर निगम प्रशासन ने अंतिम नोटिस जारी करते हुए तीन दिनों के भीतर बकाया राशि जमा करने का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर संपत्ति सील करने से लेकर कुर्की-जब्ती, चल-अचल संपत्ति की बिक्री और बैंक खाते फ्रीज करने तक की कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम द्वारा जारी नोटिस के अनुसार तोपखाना बाजार स्थित नेशनल अस्पताल व मु. गुलाम मोईन उद्दीन सहित संबंधित पक्षों पर वर्ष 2011-12 से 2026-27 तक का 20.76 लाख रुपये होल्डिंग टैक्स बकाया है। इसके अलावा 36 हजार रुपये यूजर चार्ज भी पेंडिंग है। इस प्रकार कुल बकाया राशि 21.12 लाख रुपये पहुंच गई है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तीन दिनों के भीतर राशि जमा नहीं होने पर 12 जून से बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 158 के तहत विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। साथ ही जिन्होंने नोटिस नहीं लिया है उन्हें डाक से भी भेजा गया है। चस्पा भी कर दिया गया है। होटल संचालकों को भी चेतावनी वार्ड संख्या-26 स्थित होटल मुरारी पैलेस के स्वामी रामेश्वर बजाज एवं ज्वाला बजाज को भी अंतिम नोटिस भेजा गया है। होटल पर वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक 5.18 लाख रुपये होल्डिंग टैक्स तथा 12 हजार रुपये यूजर चार्ज बकाया है। कुल मिलाकर 5.30 लाख रुपये की देनदारी बताई गई है। निगम ने होटल प्रबंधन को भी जल्द से जल्द बकाया राशि जमा करने का निर्देश दिया है। अन्यथा उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम सूत्रों के अनुसार, दो अन्य शैक्षणिक संस्थानों को भी बकाया कर भुगतान के लिए नोटिस जारी किया गया है। निगम प्रशासन अब बड़े बकायेदारों की सूची तैयार कर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। राजस्व बढ़ाने के लिए तेज हुआ अभियान नगर निगम का कहना है कि शहर के विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं के संचालन के लिए कर संग्रह बेहद जरूरी है। ऐसे में लंबे समय से बकाया रखने वालों के खिलाफ अब किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। निगम की इस कार्रवाई से बड़े बकायेदारों में हड़कंप मच गया है। वहीं, प्रशासन का दावा है कि अभियान से राजस्व वसूली में तेजी आएगी और वर्षों से पेंडिंग करोड़ों रुपये की राशि वसूलने का रास्ता साफ होगा।

पटना केस में नया मोड़, खान सर की कानूनी टीम FIR क्वैशिंग पर कर रही विचार

 पटना पटना कोचिंग विवाद से जुड़े मामले में शिक्षक और यूट्यूबर फैसल खान (खान सर) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि उनकी कानूनी टीम अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। इस संभावित कदम ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। कानूनी और राजनीतिक गलियारों में भी इस पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ‘FIR खत्म, तो खत्म होगा पूरा विवाद?’ हाईकोर्ट में दांव लगाने की तैयारी जानकारी के अनुसार, खान सर की ओर से FIR Quashing Petition दाखिल करने पर विचार किया जा रहा है। इस याचिका के जरिए हाईकोर्ट से एफआईआर रद करने की मांग की जाती है। कानूनी टीम मामले के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन कर रही है। यदि याचिका दायर होती है तो यह केस का सबसे अहम मोड़ साबित हो सकता है। कोर्ट पहले याचिका की वैधता और आधारों की जांच करेगा। इसके बाद आगे की सुनवाई का रास्ता तय होगा। कब रद होती है FIR? जानिए हाईकोर्ट के पास कितनी बड़ी ताकत कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, हर एफआईआर को रद नहीं किया जा सकता। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में हाईकोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है। यदि मामला झूठा या निराधार प्रतीत हो तो राहत मिल सकती है। कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग की स्थिति भी अहम आधार मानी जाती है। समझौता होने या गंभीर अपराध के तत्व न मिलने पर भी सुनवाई संभव है। अंतिम फैसला तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही होता है। बढ़ता दबाव या बड़ी रणनीति? हर कदम पर टिकी हैं सबकी निगाहें कोचिंग विवाद पहले से ही चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब हाईकोर्ट जाने की खबर ने उत्सुकता और बढ़ा दी है। कई कानूनी जानकार इसे बचाव पक्ष की बड़ी रणनीति मान रहे हैं। अगर याचिका दाखिल होती है तो कई नए कानूनी सवाल उठ सकते हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियां भी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में मामला और दिलचस्प हो सकता है। खान सर को बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर फिलहाल लगी ब्रेक इस बीच खान सर को अदालत से महत्वपूर्ण राहत मिली है। अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले से उन्हें तत्काल कानूनी सुरक्षा मिल गई है। पिछले कुछ दिनों से पुलिस कार्रवाई की चर्चाएं तेज थीं। इसी बीच अग्रिम जमानत की मांग को अदालत ने स्वीकार किया। फिलहाल अगली सुनवाई तक राहत बरकरार रहेगी। अब सबकी नजर हाईकोर्ट पर, क्या बदल जाएगी केस की पूरी कहानी? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या FIR रद कराने की याचिका वास्तव में दाखिल होगी। यदि ऐसा होता है तो हाईकोर्ट के सामने पूरे मामले की कानूनी जांच होगी। याचिका मंजूर होने पर केस की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। वहीं, राहत न मिलने पर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल हर पक्ष अगली कानूनी चाल का इंतजार कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी ज्यादा चर्चा में रह सकता है।

ट्रैफिक समस्या के चलते रुका अंडरपास निर्माण, जालंधर के 3 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर सवाल

जालंधर. अर्बन एस्टेट फाटक पर बन रहे अंडरपास को लेकर नई अपडेट सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, अर्बन एस्टेट के रेलवे क्रॉसिंग नंबर-7 पर करीब 3 करोड़ रुपए के बनाए जा रहे व्हीकल अंडरपास का निर्माण फिलहाल रोक दिया गया है। दरअसल, इस अंडरपास को लेकर इलाके के लोगों द्वारा विरोध जताया जा रहा था। लोगों ने इसके डिजाइन और सुरक्षा को लेकर आपत्तियां जताई। इसके बाद से नगर निगम ने रेलवे को पत्र लिखा और इसके काम को रुकवा दिया गया।  लोगों ने जताई आपत्तियां आपको बता दें कि अंडरपास के डिजाइन को लेकर लोगों द्वारा आपत्तियां जताई जा रही हैं। इसी के चलते अर्बन एस्टेट रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी ने बिना स्थानीय राय के बन रहे इस अंडरपास प्रोजेक्ट को रोकने की मांग की है। इलाका निवासियों का कहना है कि 'U' आकार के बन रहे इस अंडरपास पर केवल छोटे वाहन ही गुजर सकेंगे। यहां इस अंडरपास पर भारी ट्रैफिक की समस्या रहेगी वहीं दुर्घटनाओं का भी खतरा बना रह सकता है। यही नहीं इस अंडरपास के पास एक बड़ी सीवरेज लाइन गुजरती है। बारिश के दिनों में यहां पर जलभराव व लीकेज की समस्या भी रह सकती है। इसके लिए DRM कार्यालय में शिकायत की गई। जिसके बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है। सर्वे के बाद 5 सदस्यी कमेटी करेगी बैठक बताया जा रहा है कि, इस अंडरपास से जुड़े मामले की समीक्षा के लिए तहसीलदार की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इस 5 सदस्यी कमेटी में डीआरएम कार्यालय का प्रतिनिधि, पीडब्ल्यूडी का एक्सईएन स्तर का अधिकारी, नगर निगम कमिश्नर कार्यालय का प्रतिनिधि और अर्बन एस्टेट की वेलफेयर सोसायटी का प्रतिनिधि शामिल होगा। प्रोजेक्ट पर अंतिम फैसला लेने से पहले ये कमेटी संयुक्त बैठक करेगी। बैठक से पहले संबंधित विभागों के अधिकारी पहले मौके का सर्वे करेंगे। उसके बाद कमेटी की बैठक होगी। फिर इस मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।   अंडरपास बनने से किसे होगा फायदा जानकारी के मुताबिक, इस अंडरपार के बनने से अर्बन एस्टेट फेज-1 और 2, फेज-1 के स्कूल और व्यावसायिक इलाके, गढ़ा, कैंट, एजीआई, जमशेर, सुभाना क्षेत्र, सुभाना रोड और गीता मंदिर के आसपास के रिहायशी इलाकों के लोगों फायदा होगा। अब तक हुए ये काम आपको बता दें कि, अंडरपास के लिए नकोदर लाइन के नीचे खुदाई का काम पहले ही किया जा चुका है। इसके अलावा रेलवे ने कंक्रीट बॉक्स तैयार करने के लिए लोहे का ढांचा भी बनाना शुरू किया था। लोगों का इसको लेकर विरोध होता देखकर इस काम को रोक दिया गया। सीधी बात करें तो अब तक एक फीट कंक्रीट भी नहीं डाली गई है।

गांव की राजनीति में बड़ा उलटफेर, महिला सरपंच को अविश्वास प्रस्ताव से हटाया गया

आरंग. विकासखंड आरंग के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गुज़रा में सियासी भूचाल आ गया है। ग्राम पंचायत की महिला सरपंच बिंदू बंजारे (पति स्व. कोमल बंजारे) के खिलाफ उपसरपंच और पंचों की ओर से पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव को प्रशासनिक स्तर पर मंजूर कर ली गई है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी आरंग ने इस संबंध में विधिवत आदेश और ज्ञापन जारी कर दिया है। सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए आगामी 17 जून 2026 को दोपहर 1 बजे ग्राम पंचायत भवन गुज़रा में पंचों का विशेष सम्मेलन (बैठक) आहूत किया है। वित्तीय अनियमितता और भाई के दखल समेत लगे कई गंभीर आरोप ग्राम पंचायत के उपसरपंच एवं पंचों द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 21 तथा छत्तीसगढ़ पंचायत राज नियम 1994 के प्रावधानों के तहत एक विस्तृत शिकायती आवेदन सौंपकर सरपंच पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 6 लाख की वित्तीय अनियमितता की आशंका: पंचों का आरोप है कि पंचायत में लगभग 6 लाख रुपये की शासकीय राशि स्वीकृत और आहरित की गई, लेकिन यह राशि किस कार्य के लिए निकाली गई, इसका कोई विवरण नहीं दिया गया। पूछने पर गोलमोल जवाब दिए गए। पारिवारिक हस्तक्षेप (भाई का दखल): प्रस्ताव पत्र में आरोप लगाया गया है कि सरपंच द्वारा पंचायत की बैठकों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपने सगे भाई को अनुचित रूप से शामिल किया जाता है, जो न तो वहां के निवासी हैं और न ही कोई निर्वाचित प्रतिनिधि। कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही: शिकायत के अनुसार, सरपंच नियमित रूप से पंचायत क्षेत्र में न रहकर अपने मायके ग्राम बिमचा (जिला महासमुंद) में निवास करती हैं। इसके कारण ग्रामीणों को जाति, निवास, राशन कार्ड और आधार जैसे आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन और प्रमाणन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पानी टैंकर और मोटर पंप के नाम पर फर्जीवाड़ा: आरोप है कि पंचायत में पेयजल आपूर्ति के लिए आज तक पानी टैंकर नहीं आया, जबकि 17 व 18 अक्टूबर 2025 को क्रमशः 11,000 और 29,750 की राशि पानी टैंकर सप्लाई के नाम पर निकाल ली गई। इसी तरह 12 अगस्त 2025 को पुराने मोटर पंप और सिंटेक्स टंकी को “नवीन निर्माण/मरम्मत” दिखाकर 32,000 की राशि आहरित कर ली गई। रिकॉर्ड छिपाने और पंचों से दुर्व्यवहार का आरोप: पंचों ने बताया कि जब भी वे पंचायत के अभिलेख (पासबुक/रजिस्टर) देखने की इच्छा व्यक्त करते हैं, तो सचिव और सरपंच द्वारा उन्हें साफ मना कर दिया जाता है, जो कि पंचायती राज व्यवस्था के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। तहसीलदार मंदिरहसौद बने पीठासीन अधिकारी अविश्वास प्रस्ताव पत्र पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अनुविभागीय अधिकारी (रा.) एवं विहित प्राधिकारी, आरंग (अभिलाषा पैकरा) ने 8 जून 2026 को दो महत्वपूर्ण आधिकारिक पत्र जारी किए हैं। सरपंच बिंदू बंजारे को आधिकारिक नोटिस जारी कर सूचित किया गया है कि वे 17 जून 2026 को दोपहर 1 बजे ग्राम पंचायत भवन गुज़रा में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। इसके साथ ही पंचायत सचिव को निर्देश दिया है कि सभी सदस्यों को 7 दिन पूर्व बैठक की सूचना तामिल कराकर पावती कार्यालय को भेजें। आधिकारिक आदेश (क्रमांक 511): निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से सम्मेलन संपन्न कराने के लिए विनोद साहू (तहसीलदार, मंदिरहसौद) को पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) नियुक्त किया गया है। वे इस पूरी बैठक की अध्यक्षता करेंगे और की गई कार्यवाही की रिपोर्ट सीधे कलेक्टर (पंचायत शाखा) रायपुर और एसडीएम कार्यालय को सौंपेंगे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना प्रभारी मंदिरहसौद को भी पत्र जारी किया है, ताकि बैठक की तिथि (17 जून) को पर्याप्त महिला एवं पुरुष पुलिस बल की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा वरिष्ठ आंतरिक लेखा परीक्षक एबल सिंह सिदार को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रतिलिपि भेजी गई है। अब पूरे आरंग क्षेत्र की नजरें 17 जून को होने वाले इस सम्मेलन पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि गुज़रा पंचायत की कमान बिंदू बंजारे के हाथ में रहेगी या उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ेगी।

विकास, तकनीकी नवाचार और किसान कल्याण के लिए 13 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति

कपास पर मंडी फीस की दर 1% से घटाकर 0.5% करने का अनुमोदन विकास, तकनीकी नवाचार और किसान कल्याण के लिए 13 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 13,565.84 करोड़ रूपये की स्वीकृति आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं और कार्य के लिए 235 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति कृषक कल्याण के लिए मंडी शुल्क एक रुपये से 1.50 रुपये किए जाने का निर्णय अब जिलों में कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउस, प्रसंस्करण इकाईयों एवं लॉजिस्टिक सुविधाओं को मिलेगा प्रोत्साहन एम.पी. स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन और मार्कफेड को 8,600 करोड़ रूपये की शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराए जाने की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे, तकनीकी विकास और किसान कल्याण से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 13 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति के साथ कई बड़े एवं महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई गई है। बैठक में भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित कुल लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण को मिलाकर 13,565.84 करोड़ रूपये की पुनरीक्षित राशि की स्वीकृति दी गई। अब भोपाल शहर के यातायात नेटवर्क को बड़ा विस्तार मिलेगा। इसके साथ ही राज्य में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को सुदृढ़ करने के लिए आगामी 5 वर्षों 2026-2031 के लिए आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं और कार्य योजना के लिए 235 करोड़ 63 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। कृषि और व्यापार जगत को गति देने के लिए मंत्रि-परिषद ने कपास पर मंडी फीस की दर को 1% से घटाकर 0.5% करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे स्थानीय जिनिंग मिलों को मजबूती मिलेगी और रोजगार बढ़ेगा। किसान हित में सामान्य मंडी शुल्क को एक रूपये से बढ़ाकर एक रूपये 50 पैसे किया गया है। शुल्क के रूप में प्राप्त होने वाली 500 करोड़ रूपये की अनुमानित अतिरिक्त आय का उपयोग सीधे किसान सड़क निधि और कृषि अनुसंधान के विकास में किया जाएगा। आगामी रबी और खरीफ विपणन सत्रों में फसलों के सुचारू उपार्जन को सुनिश्चित करने के लिए MPSCSC और मार्कफेड को 8,600 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति देने की भी बड़ी मंजूरी दी गई है। यह फैसले प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक उन्नति की दिशा में सशक्त कदम साबित होंगे। भोपाल मेट्रो की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 13,565.84 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की मूल लागत 6,941.40 करोड़ में 3,092.22 करोड़ रूपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर संशोधित कुल लागत 10,033.62 करोड़ रूपये के प्रस्ताव पर स्वीकृति प्रदान की है। मंत्रि-परिषद ने इसके अतिरिक्त उद्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 3,532 करोड़ 22 लाख रूपये की भी स्वीकृति प्रदान की है। इसमें भारत शासन और राज्य शासन द्वारा 995 करोड़ 9 लाख रूपये की अतिरिक्त इक्विटी और केन्द्रीय करों के लिए 84 करोड़ 54 लाख रूपये का अतिरिक्त अधीनस्थ ऋण, वित्तपोषण एजेंसी बैंकों से ऋण निधि के विरुद्ध 1,620 करोड़ 64 लाख रूपये का अतिरिक्त PTA/आंतरिक ऋण, मध्यप्रदेश शासन से भूमि की लागत और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के लिए 138 करोड़ 38 लाख रूपये का अतिरिक्त अधीनस्थ ऋण तथा मध्यप्रदेश शासन से राज्य करों के लिए 446 करोड़ 35 लाख रूपये एवं IDC की लागत के लिए 246 करोड़ 41 लाख रूपये का अतिरिक्त अनुदान शामिल है। आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं और कार्य के लिए 235 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंतर्गत राज्य आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं के लिए अनुदान और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि तक निरंतर संचालन के लिए 235 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार राज्य आई.टी. संवर्ग परामर्श सेवाओं के लिए अनुदान योजना के लिए 180 करोड़ 20 लाख रूपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना के अंतर्गत शासन के विभिन्न विभागों, निगमों, प्राधिकरणों एवं परियोजनाओं को तकनीकी परामर्श सेवाएँ प्रदान करने के लिए राज्य स्तरीय आई.टी. संवर्ग का गठन किया गया है। योजना से प्राप्त अनुदान का उपयोग विशेषज्ञों की नियुक्ति, प्रशिक्षण, क्षमता-विकास एवं विभागीय आवश्यकताओं के अनुरूप परामर्श सेवाओं के लिए किया जाता है। यह योजना वर्तमान में शासन की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रक्रिया की आधारभूत आवश्यकता है तथा भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), बिग डाटा एनालिटिक्स, ब्लॉक चेन तकनीक एवं सायबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में राज्य की तैयारियों को सुदृढ़ करने के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। मंत्रि-परिषद द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य योजना के लिए 55 करोड़ 43 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना से VBTC प्रशिक्षण केंद्र द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आईटी, ई-गवर्नेस, सायबर सुरक्षा तथा डेटा प्रबंधन विषयों पर नियमित प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी तकनीकी दक्षता और प्रशासनिक कार्य कुशलता में वृद्धि की जायेगी। एमपीएसईडीसी जैसी नोडल एजेंसियों को सहायक अनुदान उपलब्ध कराकर विभिन्न आईटी एवं ई-गवर्नेस परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य, संभाग और जिला स्तर पर आयोजित कार्य शालाओं एवं सेमिनारों के माध्यम से विभागीय क्षमता संवर्धन तथा आईटी जागरुकता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही 'ई-गवर्नेस उत्कृष्टता पुरस्कार" के माध्यम से विभागों एवं अधिकारियों के नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश को ई-गवर्नेस के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में सहायता मिलेगी। कपास पर मंडी फीस की दर 1% से घटाकर 0.5% करने का अनुमोदन मंत्रि-परिषद ने कपास जिनिंग मिलों की आवश्यकता को देखते हुए कपास पर मंडी फीस की दर 1% से घटाकर 0.5% करने का अनुमोदन दिया है। प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग मिलें है, जिनकी प्रसंस्करण क्षमता लगभग 13 लाख मीट्रिक टन है। प्रदेश में कपास पर मंडी फीस की दर में कमी किए जाने से जिनिंग मिलों के द्वारा अन्य पड़ोसी राज्यों में पलायन की अपेक्षा प्रदेश में ही व्यवसाय करने को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे रोजगार में तथा जी.एस.टी संग्रहण में वृद्धि होगी। जिनिंग मिलों की इनपुट लागत में कमी आएगी और उनकी आर्थिक व्यवहारिता में वृद्धि होगी। वे प्रतिस्पर्धात्मक बाजार में अपनी स्थिति सुदृढ़ बनाए रखने में सक्षम होगी। एम.पी. स्टेट सिविल सप्लाईज कारपोरेशन और मार्कफेड को 8,600 … Read more

घर का सपना होगा पूरा? PM आवास योजना के लिए नया सर्वे अभियान शुरू, बन रही नई लिस्ट

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लाभार्थियों की पहचान को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास (P&RD) विभाग ने पहली बार सेल्फ-सर्वे सिस्टम लागू किया है, जिसके तहत पात्र नागरिक खुद अपने घर से आवेदन कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य उन शिकायतों को कम करना है, जिनमें अक्सर आरोप लगाए जाते थे कि आवास योजना के लाभार्थियों के चयन में पक्षपात, राजनीतिक हस्तक्षेप या गलत जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। अब लाभार्थियों को किसी मध्यस्थ या स्थानीय सिफारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि वे सीधे डिजिटल माध्यम से अपनी पात्रता दर्ज करा सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा। नई व्यवस्था के तहत इच्छुक आवेदकों को अपने मोबाइल फोन में ‘AwaasPlus 2024’ और ‘AadhaarFace RD’ ऐप डाउनलोड करने होंगे। इसके बाद आधार बेस्ड पहचान सत्यापन पूरा कर डिजिटल आवेदन जमा करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद सरकार द्वारा नियुक्त सर्वेक्षक संबंधित परिवार के घर पहुंचकर दी गई जानकारी की जांच करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि आवेदक योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करता है या नहीं। इस प्रक्रिया के जरिए सरकार फर्जी दावों को रोकने और सही लाभार्थियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। खास बात यह है कि यह मॉडल पहले से कई राज्यों में लागू है और अब पश्चिम बंगाल ने भी इसे अपनाने का फैसला किया है। सरकार ने यह भी ध्यान रखा है कि तकनीकी जानकारी या स्मार्टफोन की कमी के कारण कोई पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रह जाए। ऐसे लोगों के लिए डोर-टू-डोर सर्वे की व्यवस्था की गई है। सर्वेक्षक गांव-गांव जाकर उन परिवारों की जानकारी एकत्र करेंगे, जो स्वयं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवार केवल तकनीकी बाधाओं के कारण लाभ से वंचित न हों। सरकार का दावा है कि इस पहल से आवास योजना का दायरा और अधिक व्यापक तथा समावेशी बनेगा। लाभार्थियों की लिस्ट तैयार करने में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने तीन-स्तरीय सत्यापन प्रणाली भी लागू की है। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि सर्वे किए गए कम से कम 10% परिवारों का दोबारा सत्यापन ब्लॉक या सब-डिवीजन स्तर के अधिकारियों से कराया जाए। इसके अलावा ब्लॉक स्तर के अधिकारी स्वतंत्र रूप से 5% मामलों की जांच करेंगे, जबकि जिला स्तर के अधिकारी 2% आवेदनों का प्रत्यक्ष सत्यापन करेंगे। इस बहु-स्तरीय जांच व्यवस्था का मकसद किसी भी तरह की गड़बड़ी, त्रुटि या गलत चयन को रोकना है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष के अनुसार, प्रत्येक ग्राम पंचायत में सर्वे टीमों का गठन कर दिया गया है और लाभार्थियों की पहचान का काम शुरू हो चुका है। यह सर्वेक्षण 20 जुलाई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि नई सेल्फ-सर्वे प्रणाली से सही लाभार्थियों की पहचान आसान होगी, शिकायतें कम होंगी और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचेगा, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। यह कदम ग्रामीण आवास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

रामकथा मंच से सीएम योगी का संदेश, लव जिहाद और लैंड जिहाद पर समाज को किया आगाह

 लखनऊ  मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने दो-टूक कहा कि जिनके मन में भारत के प्रति आस्था, निष्ठा नहीं है और जो संस्कारों का सम्मान नहीं कर सकते, ऐसे लोगों के लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं हो सकती। प्रभु श्रीराम से द्रोह करने वालों को धरती पर जगह नहीं मिली। लव व लैंड जिहाद के प्रति आगाह करते हुए सीएम ने कहा कि इसके विरुद्ध समाज को एकजुटता के साथ खड़ा होना होगा। तोड़ने वाली ताकतें जाति, भाषा, क्षेत्र के नाम पर विभाजित करने की चेष्टा करेंगी, लेकिन भारत की संत शक्ति समाज को एकजुट कर देश को आगे ले जाना चाहती हैं। व्यासपीठ द्वारा जिस मर्म को समझाने का प्रयास किया गया, हमें उसे आत्मसात करना होगा। कथा केवल सुनने की नहीं, बल्कि अंगीकार करने की महत्वपूर्ण कड़ी का हिस्सा है। मुख्यमंत्री मंगलवार को राजधानी में 9 दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन समारोह में रामभक्तों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रामकथा का श्रवण भी किया। कथा का वाचन तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा किया गया। सीएम योगी ने श्रद्धालुओं से कहा कि जो भी प्रभु के सान्निध्य में आया, वह दैवीय आपदा से मुक्त रहता है। उन्होंने कामना की कि हर श्रद्धालु का जीवन सुख व समृद्ध के साथ बढ़ता रहे। राम नाम में हर समस्या का समाधान मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों ने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को जन्म-मरण का प्रश्न बनाया था। संत इसका श्रेय नहीं चाहते थे, वे सिर्फ इसलिए अभियान से जुड़े क्योंकि भारतीय परंपरा, विरासत में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम सभी के आदर्श हैं और राम नाम में जीवन की हर समस्या का समाधान है। राजनीति व पूर्वाग्रह से ग्रसित कुछ चुनिंदा नामों को छोड़ दें तो हर भारतवासी, जिसके अंदर भारत का डीएनए है, उसने भगवान राम के आदर्शों को जीवन का हिस्सा बनाया है। मर्यादा पुरुषोत्तम का नाम उत्तर से दक्षिण व पूरब से पश्चिम तक हर भारतीय को जोड़ने का सामर्थ्य रखता है। अदालत ने भी माना- सैकड़ों वर्षों से अन्याय सीएम ने कहा कि 491 वर्ष तक श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन चलता रहा। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय की फुल बेंच के न्यायमूर्तियों ने अपने फैसले में कहा कि जहां रामलला विराजमान हैं, वहीं रामजन्मभूमि है। इसे लेकर साक्ष्य-प्रमाण और विद्वानों के वक्तव्य भी दिए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायमूर्ति ने स्वामी रामभद्राचार्य जी के बारे में कहा कि जब मैंने उनके वक्तव्य को सुना तो लगा कि सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय हो रहा था। संतों की साधना राष्ट्र कल्याण व लोकमंगल के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि संतों की साधना राष्ट्र कल्याण व लोकमंगल के लिए है। जगद्गुरु श्रीरामभद्राचार्य जी द्वारा स्थापित भारत का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट में है और वह उसके कुलाधिपति हैं। इस उम्र में वह आराम कर सकते थे, लेकिन राष्ट्रमंगल की कामना के साथ प्रभु की कथा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। देश-दुनिया में कोई भी भक्त बुलाता है तो प्रभु की कृपा को जन-जन तक पहुंचाते हैं। इसके पीछे उनका उद्देश्य है कि भगवान राम के विराट आदर्शों से भक्त थोड़ा भी अंश जीवन में अंगीकार कर लें तो उनका, समाज व देश का कल्याण हो सकता है। नकारात्मक ताकतें आएंगी तो तहस-नहस करेंगी मुख्यमंत्री ने कहा कि रावण और उसके राक्षसों की आर्याव्रत में घुसपैठ थी। खर-दूषण के आतंक से दंडकारण्य त्रस्त था। ताड़का, मारीच व सुबाहु ने बस्तर के वनों, नगरों को उजाड़ दिया था। जब भी नकारात्मक ताकतें वर्चस्व में आएंगी तो तहस-नहस करेंगी। शिक्षण संस्थानों व शोध केंद्रों को वैसे ही बंजर करेंगी, जैसे खर-दूषण व ताड़का द्वारा किया जाता था। सीएम ने मारीच व शकुनि पर किया कटाक्ष सीएम ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र प्रभु श्रीराम को अपनी कथा की रक्षा के बहाने ले गए और उनकी ताकत को देखना चाहा। उनका सबसे पहला मुकाबला ताड़का से हुआ। मारीच व सुबाहु का भी अंत हुआ। पहले मारीच ने रावण को समझाने का प्रयास किया था, लेकिन रावण ने उसे मारने की धमकी दी, तब मारीच ने कहा कि यदि मरना ही है तो रावण के हाथों नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के हाथों मरूंगा ताकि उद्धार हो जाए। सीएम ने कटाक्ष किया कि मारीच रिश्ते में रावण का मामा लगता था। मामा व चाचा अनुचित व्यवस्था में पड़ते हैं तो कुसंग की तरफ ले जाते हैं, सन्मार्ग की तरफ नहीं। दुर्योधन के मामा शकुनि ने महाभारत करा दिया। लव जिहाद रोकने पर दिया बल सीएम ने कहा कि रावण ने मां जानकी का अपहरण किया। भगवान राम ने यत्न कर उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ा। नारी गरिमा की रक्षा लव जिहाद को रोकने के लिए आदर्श उदाहरण हो सकता है। केरल उच्च न्यायालय ने 2009 व 2011 में रिलीजियस डेमोग्राफी को चेंज करने की साजिश पर चिंता व्यक्त की, लेकिन उस समय भी ध्यान नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश में हमने 2020 में सख्त कानून बताया, फिर भी इस पर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है। लैंड जिहाद से जुड़े थे खऱ-दूषण सीएम ने कहा कि हर कालखंड में नकारात्मक ताकतें आएंगी, लेकिन इसके मुकाबले के लिए समाज की सज्जन शक्ति को मिलकर तैयार रहना होगा। मारीच, खर-दूषण, सुबाहु भी लैंड जिहाद से जुड़े थे। जबरन जमीन पर कब्जा कर रहे थे। हमें लैंड जिहाद से जुड़े लोगों से मुकाबले को भी तैयार रहना होगा। खाली जमीन पर तंबू गाड़ने की प्रथा बंद होनी चाहिए। रामद्रोहियों को धरती पर जगह नहीं मिली सीएम ने कहा कि शिव हों या राम, हम जिसे भी मानते हैं, उनके आदर्शों को जीवन का हिस्सा बनाएं। उनके अनुरूप जीवन जीने और बनने का प्रयास करें और परिवार के सदस्यों को उन आदर्शों से प्रेरणा लेने को प्रेरित करें। जिसने भी राम को जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ। जिसने राम का द्रोह किया, उसे धरती पर जगह नहीं मिली। मारीच, रावण समेत रामायण काल के अनेक उदाहरण हैं, जो उच्च कुल व श्रेष्ठ व्यवस्था में जन्म लेने के बाद भी पशुवत मारे जाते हैं, क्योंकि उन्होंने राम के साथ द्रोह किया। राम की संगति में पूज्य हो गए हनुमान व विभीषण सीएम ने कहा कि पवनसुत हनुमान या विभीषण भगवान राम की संगति में आने के बाद पूज्य हो गए। गांव के … Read more

योगी सरकार की नई पहल, पीड़ित महिलाओं को आवास और स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर लगातार नए कदम उठा रही है। इसी क्रम में योगी सरकार ने तीन तलाक(Triple Talaq) तथा एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार इन पीड़ित महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना(PM Housing Scheme), मुख्यमंत्री आवास योजना (Chief Minister Housing Scheme), आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से लाभान्वित करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं को भी इन सभी योजनाओं का लाभ देने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही महिला कल्याण विभाग तीन तलाक एवं एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के साथ निराश्रित महिलाओं का विस्तृत डाटा एकत्रित किया जा रहा है, ताकि पात्र महिलाओं को योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जा सके। लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा शासन स्तर पर इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और शासनादेश (जीओ) तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है। महिला कल्याण विभाग द्वारा पीड़ित महिलाओं का सत्यापित विवरण एकत्रित किया जा रहा है। इसके आधार पर लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा। योगी सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी पात्र महिला को केवल जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित न रहना पड़े। इसके लिए विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। योगी ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को दिए थे निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि जिन महिलाओं को तीन तलाक या एसिड अटैक जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है और जिनके पास स्थायी आवास नहीं है, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही इन महिलाओं और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़कर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ दिया जाए। मालमू हो कि एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता होती है। वहीं, तीन तलाक से प्रभावित कई महिलाएं आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करती हैं। ऐसे में आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों उपलब्ध कराकर योगी सरकार उनके जीवन को अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।

रिहायशी इलाके में धमाका-आग: जयपुर पटाखा फैक्ट्री हादसे से मची अफरा-तफरी

जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर के खो नागोरियान इलाके में एक घर के अंदर चल रही पटाखा फैक्ट्री में मंगलवार सुबह अचानक आग लग गई. इस भीषण हादसे में 3 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 5 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं. इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और दमकल व प्रशासन की टीमें मौके पर राहत कार्य में जुटी हैं. रिहायशी इलाके में हुआ हादसा आयशा नगर के तलाई क्षेत्र में यह पटाखा फैक्ट्री घनी आबादी के बीच एक मकान में चल रही थी. बताया जा रहा है कि घर में रखे किसी ज्वलनशील पदार्थ ने अचानक आग पकड़ ली. आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर काम कर रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला. घायलों को SMS अस्पताल किया गया रेफर हादसे में झुलसे 5 लोगों को तुरंत रेस्क्यू कर अस्पताल ले जाया गया. इनमें से कई लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसे देखते हुए उन्हें जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया है. डॉक्टरों की टीम घायलों के इलाज में जुटी हुई है. दमकल की दो गाड़ियां बुझा रही हैं आग घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग ने मोर्चा संभाल लिया. मौके पर सिविल डिफेंस की टीम भी रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है. फिलहाल दमकल की दो गाड़ियां लगातार आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं ताकि आग को आस-पास के घरों तक फैलने से रोका जा सके. आधिकारिक आंकड़ों का इंतजार जयपुर जिला कलेक्टर संदेश नायक और एडीएम सहित आला अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और हालात की निगरानी कर रहे हैं. कलेक्टर संदेश नायक ने बताया कि घर के अंदर रखे किसी ज्वलनशील पदार्थ के कारण यह हादसा हुआ. उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल मौतों और घायलों का आधिकारिक आंकड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही एक प्रेस रिलीज के जरिए जारी किया जाएगा.

श्रीराम कथा समापन में बोले योगी आदित्यनाथ: राम नाम से एकजुट हुआ देश

लखनऊ सीतापुर रोड स्थित ब्रज की रसोई परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। सीएम ने कहा कि भारत की धरती कोई धर्मशाला नहीं है। जो भारत की संस्कृति, विरासत और मूल्यों का सम्मान करेगा, वही यहां सम्मानपूर्वक रह सकेगा। जो भारत की आत्मा और उसके संस्कारों को स्वीकार नहीं कर सकता, उसके लिए यहां कोई स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री ने पद्म विभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि चित्रकूट में देश के पहले दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने सेवा और समर्पण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस आयु में भी वे विश्राम करने के बजाय लोकमंगल और राष्ट्रकल्याण के लिए देश-विदेश में श्रीराम कथा के माध्यम से जनजागरण का कार्य कर रहे हैं। श्रीराम के नाम ने पूरे देश को एक जुट बनाए हैं योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन किसी व्यक्ति, संगठन या दल का आंदोलन नहीं था, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का विषय था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का नाम वह सूत्र रहा, जिसने उत्तर से दक्षिण तक पूरे देश को एकजुट बनाए रखने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों का थोड़ा-सा अंश भी अपने जीवन में उतार ले, तो उसका ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र का भी कल्याण संभव है। कंस और मारीच का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री ने पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास और धर्मग्रंथ हमें सज्जन शक्ति को संगठित करने तथा अधर्म और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कंस और मारीच के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत संगति और स्वार्थपूर्ण सलाह हमेशा समाज और राष्ट्र को नुकसान पहुंचाती है। संत समाज सदैव लोगों को जोड़ने का काम करता है सीएम योगी ने कहा कि कुछ शक्तियां समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर बांटने का प्रयास करती हैं, जबकि संत समाज सदैव लोगों को जोड़ने और राष्ट्र को मजबूत करने का कार्य करता है। मुख्यमंत्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम और संतों का सानिध्य व्यक्ति को जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को नमन करते हुए उनके आगामी साधना पर्व की सफलता तथा राष्ट्र कल्याण की कामना की। साथ ही उपस्थित श्रद्धालुओं को जय श्रीराम के उद्घोष के साथ शुभकामनाएं भी दीं।