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50 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी डील पर TDS नियमों की जांच तेज, बागपत में खंगाले जा रहे दस्तावेज

लखनऊ यूपी में जमीन-मकान की खरीद-फरोख्त पर नजर रखी जा रही है। आयकार की नजर है। बागपत में बीते वर्षों में मिली खामियों और सर्वे की कार्रवाई के बाद आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही रजिस्ट्री कार्यालयों के रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है। टीडीएस देयता, रजिस्ट्री संबंधी विवरण और वित्तीय लेनदेन के ब्योरे में दर्ज प्रविष्टियों की बारीकी से जांच की जा रही है। आयकर विभाग की आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण इकाई के अधिकारी हर पहलू की समीक्षा कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर वर्तमान अवधि तक के रिकॉर्ड को जांच के दायरे में लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, जमीन के बैनामे के समय संपत्ति के मूल्य के आधार पर टीडीएस देयता निर्धारित होती है। इसके लिए पैन कार्ड नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है। हालांकि जांच में सामने आया कि कई मामलों में इन औपचारिकताओं का पालन नहीं किया गया। इसी लापरवाही को देखते हुए जनपद की विभिन्न तहसीलों के रजिस्ट्री कार्यालयों का सर्वे किया गया। यदि बैनामा की गई संपत्ति का मूल्य 30 लाख रुपये या उससे अधिक है तो संबंधित सब रजिस्ट्रार कार्यालय को स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी) के तहत इसकी सूचना आयकर विभाग को देनी होती है। निर्धारित प्रारूप में यह विवरण तय समय सीमा के भीतर जमा करना अनिवार्य है। वहीं 50 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की संपत्ति के सौदे में खरीदार को विक्रेता के भुगतान से एक प्रतिशत टीडीएस काटना होता है। नियमों के तहत फार्म 60 भरना अनिवार्य यदि किसी संपत्ति का सौदा 10 लाख रुपये या उससे अधिक का है और संबंधित व्यक्ति के पास पैन कार्ड नहीं है तो आयकर नियमों के तहत फार्म-60 भरना अनिवार्य है। इसमें सौदा करने वाले व्यक्ति की पहचान और निवास संबंधी विवरण दर्ज किए जाते हैं। इन मामलों की जानकारी एसएफटी फाइलर द्वारा फार्म-61 और फार्म-61ए के माध्यम से आयकर विभाग को भेजी जाती है। ये खामियां आईं सामने आयकर व्यवस्था में किसानों की कृषि आय को कर से छूट प्राप्त है। जांच में पाया गया कि कुछ बिल्डरों ने इस प्रावधान का लाभ उठाने के लिए नगरीय क्षेत्र की कृषि भूमि के करोड़ों रुपये के सौदे किए। कई मामलों में न तो टीडीएस काटा गया और न ही पैन कार्ड का विवरण दर्ज किया गया। पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) की देयता को भी नजरअंदाज किया गया। आयकर विभाग की जांच में ऐसे कई सौदे सामने आए, जिनमें बाद में टीडीएस और कैपिटल गेन टैक्स की देयता निर्धारित की गई।

केसरी हनुमान मंदिर पर प्रशासन की कार्रवाई, तिलक मार्केट में आस्था बनाम सुरक्षा का मुद्दा गरमाया

छिंदवाड़ा   शहर के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध केसरी नंदन हनुमान मंदिर को जिला प्रशासन से मिले एक नोटिस से बवाल मच गया है. यहां दीवारों पर मान्यता के नारियल हटाने के नोटिस से मंदिर प्रबंधन और भक्तों में खासी नराजागी देखी जा रही है. वहीं एसडीएम सुधीर कुमार जैन ने नारियल की मालाओं में आग लगने का खतरा बताते हुए इन्हें हटाने का 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है।  हजारों की संख्या में लटके हुए हैं नारियल छिंदवाड़ा में बाल रूप में विराजमान भगवान हनुमान का केसरी नंदन हनुमान मंदिर कई मायनों में प्रसिद्ध है. यहां वर्षों से मन्नत की परंपरा चली आ रही है, जिसमें भक्तगण मन्नतों के नारियल मंदिर में चढ़ाते हैं, जिन्हें बाद में गुच्छों में लटका दिया जाता है. लगातार मंदिर में नारियल चढ़ाने और उतारने का सिलसिला चलता रहता है, जिससे यहां हजारों की तादाद में नारियस एकत्रित हो गए हैं. मंदिर में ये बड़ी संख्या में लटके हुए दिखते हैं, और एसडीएम सुधीर कुमार ने 4 जून को इसी पर आपत्ति जताते हुए नोटिस भेजा है, जिसपर सोमवार को मंदिर प्रबंधन की प्रतिक्रिया सामने आई है।  एसडीएम के नोटिस में क्या लिखा कार्यालय अनुविभागीय दंडाधिकारी छिंदवाड़ा द्वारा मंदिर के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और ट्रस्ट को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें कहा गया, '' मंदिर परिसर की दीवारों पर टंगे नारियलों को हटाकर सुरक्षित स्थान पर रख दें क्योंकि मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और पूजन में अगरबत्ती, धूप बत्ती और आरती का उपयोग किया जाता है. मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश और निगम के लिए अलग-अलग मार्ग नहीं हैं, पास ही घनी आबादी क्षेत्र है. ऐसे में मंदिर की दीवारों पर बड़ी संख्या में नारियल टांगे होने से आगजनी की संभावना बनी रहती है, जिससे जन हानी भी हो सकती है. इन मालाओं को हटाकर अन्य सुरक्षित स्थान पर आस्था पूर्वक रखा जावे और 7 दिनों के अंदर कार्रवाई पूरी कार्यालय को सूचित किया जाए।  पुजारी ने कहा- लोगों की आस्था से जुड़ा है मामला एसडीएम ने नोटिस मिलने के बाद केसरी नंदन हनुमान मंदिर के उपाध्यक्ष अनिल मालवी ने ईटीवी भारत से कहा, '' एसडीएम कार्यालय द्वारा एक नोटिस प्राप्त हुआ है, जिसमें यहां दीवारों पर कई सालों से सैकड़ों हजारों की संख्या में टंगे हुए नारियलों को हटाने का आदेश दिया गया है. लेकिन हम यहां से नारियल हटाकर रखेंगे कहां? ये भक्तों की आस्था का सवाल है. हमारे पास इन्हें रखने की कोई जगह नहीं है. हम इन्हें नहीं हटा पाएंगे। 

परीक्षा कॉपी देखने में आ रही दिक्कत पर CBSE का जवाब, जानिए किसे मिलेगी एक्सेस

लुधियाना. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों के बाद कॉपियों की री-चैकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए खुले 'पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल' पर ‘रोल नंबर नॉट फाऊंड’ का मैसेज आने से विद्यार्थियों और अभिभावकों में भारी बेचैनी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर पोर्टल के काम न करने की उड़ रही अफवाहों और तकनीकी खराबी के दावों के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सी.बी.एस.ई.) ने स्थिति को पूरी तरह साफ किया है। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि सी.बी.एस.ई. का 'पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल' ठीक से काम नहीं कर रहा है और कई विद्यार्थियों को 'रोल नंबर नॉट फाऊंड' (रोल नंबर नहीं मिला) का मैसेज दिखाई दे रहा है। विद्यार्थियों और अभिभावकों की इसी बढ़ती बेचैनी को देखते हुए सी.बी.एस.ई. ने साफ तौर पर बताया है कि यह कोई तकनीकी खराबी या पोर्टल की गड़बड़ी नहीं है। असल में नियमों के मुताबिक जिन विद्यार्थियों ने पहले चरण में अपनी 'उत्तर पुस्तिकाओं की आंसर कॉपी' के लिए सफलतापूर्वक आवेदन नहीं किया था, केवल उन्हें ही यह मैसेज दिखाई दे रहा है। बोर्ड ने पहले ही अपनी गाइडलाइंस में यह स्पष्ट कर दिया था कि कॉपियों की दोबारा जांच और पुनर्मूल्यांकन के अगले चरण का फायदा केवल वही विद्यार्थी उठा सकते हैं जिन्होंने इससे पिछले चरण यानी अपनी स्कैन की हुई कॉपियों की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया था। इसलिए जिन विद्यार्थियों ने पहला चरण छोड़ दिया, वे इस चरण के लिए पात्र नहीं हैं। 3.8 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच के लिए मिले आवेदन सी.बी.एस.ई. ने बताया कि वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने की यह विंडो 2 से 7 जून तक पूरी तरह ओपन और एक्टिव थी। इस तय समय के दौरान विद्यार्थियों ने इस सुविधा का जमकर फायदा उठाया। आंकड़ों की बात करें तो इस 6 दिनों की अवधि में 1.6 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने 3.8 लाख से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच के लिए सफलतापूर्वक आवेदन सबमिट किए। आई.आई.टी. और साइबर टीम के कड़े पहरे में चला पोर्टल इतने बड़े पैमाने पर आए आवेदनों के बावजूद पोर्टल बिना किसी रुकावट के चलता रहा, क्योंकि इसके पीछे एक बहुत ही मजबूत तकनीकी टीम काम कर रही थी। इस पूरे सिस्टम की देखरेख और मैनेजमैंट का जिम्मा सरकारी तकनीकी एजैंसियों के साथ-साथ देश के प्रतिष्ठित आई.आई.टी. की टीमों के हाथों में था। इतना ही नहीं, किसी भी तरह के ऑनलाइन खतरे, हैकिंग या फर्जी ट्रैफिक से पोर्टल को सुरक्षित रखने के लिए विशेष साइबर सिक्योरिटी टीमों ने चौबीसों घंटे इस पर पैनी नजर रखी। साथ ही, सी.बी.एस.ई. की समर्पित टीमों ने हेल्पलाइन नंबर और शिकायत निवारण माध्यमों से उन विद्यार्थियों की हर संभव मदद की जिन्हें फॉर्म भरने में कोई परेशानी आ रही थी। बोर्ड ने एक बार फिर दोहराया है कि वह विद्यार्थियों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और एक पारदर्शी, सुरक्षित और आसान व्यवस्था देने के लिए प्रतिबद्ध है।

नर्सिंग कर्मियों में आक्रोश, रेणू भाटिया को पद से हटाने की मांग; हरियाणा में कामकाज प्रभावित

कुरुक्षेत्र. हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणू भाटिया की ओर से नर्सिंग ऑफिसर्स पर की गई टिप्पणी से देशभर के नर्सिंग ऑफिसर्स विरोध में उतर आए हैं। कुरुक्षेत्र अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने सोमवार को दो घंटे हड़ताल कर नारेबाजी की। हरियाणा नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन की प्रधान विनीता कुमारी ने मंगलवार से विरोधस्वरूप प्रदेश में 10 से 12 बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक का आह्वान कर दिया है। रोहतक पीजीआइएमएस की ओर से दो दिनों तक नर्सिंग स्टाफ द्वारा काले बिल्ले लगाकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का एलान किया गया है। पद से हटाने की मांग जारी साथ ही ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिख चेयरपर्सन को हटाने और केस दर्ज करने का अनुरोध किया है। चेयरपर्सन रेणू भाटिया रविवार को डॉक्टर द्वारा नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में पीड़िता से मिलने एलएनजेपी अस्पताल पहुंची थीं। उन्होंने कहा था कि ऐसे चिकित्सक जिस पर पहले भी आरोप लगे हों, उसके पास नाबालिग को अकेला क्यों छोड़ा गया। उन्होंने नर्सिंग स्टाफ पर सवाल उठाए थे। ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष रिंकी डांग ने पत्र में कहा कि एलएनजेपी अस्पताल में चिकित्सक पर दुष्कर्म के आरोप हैं। चिकित्सक पर आरोप है कि उसने महिला मरीज की जांच के दौरान महिला अटेंडेंट या किसी दूसरे हेल्थकेयर प्रोफेशनल की मौजूदगी सहित तय प्रोटोकाल का पालन नहीं किया। 'तुरंत पद से हटाया जाए' नर्सिंग प्रोफेशन पर गलत, बेबुनियाद और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की थी। इससे नर्सों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। नर्सिंग समुदाय ने नर्सों के सम्मान की रक्षा और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिए हैं। उन्होंने मांग की कि चेयरपर्सन रेणू भाटिया को तुरंत पद से हटाया जाए।

सचिवों की समिति की बैठक में बड़ा निर्देश: ई-फाइल प्रक्रिया होगी सरल, शिकायतों का होगा त्वरित निस्तारण

जयपुर मुख्य सचिव श्री वी.श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में सचिवों की समिति (Committee of Secretaries) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव एवं शासन सचिव उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति, बजटीय प्रावधानों के विरुद्ध निधियों के उपयोग तथा जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचे। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब समाप्त करने के लिए ई-फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-फाइल को जिन विभिन्न स्तरों से होकर गुजरना पड़ता है, उनकी संख्या यथासंभव कम की जाए ताकि निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए तथा प्रशासन अधिक दक्ष एवं उत्तरदायी बन सके। उन्होंने विभागों को लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर विशेष ध्यान देने के लिए भी कहा। बैठक में मुख्य सचिव ने वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान जैसे जनभागीदारी आधारित अभियानों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी जनजागरूकता एवं आउटरीच कार्यक्रम आयोजिंत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समाज की सक्रिय भागीदारी अभियान की सफलता की कुंजी है तथा विभागों को स्थानीय स्तर पर व्यापक संवाद एवं सहभागिता को बढ़ावा देना चाहिए। मुख्य सचिव ने राजस्थान सम्पर्क पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायतों का निपटारा निर्धारित समय सीमा में उचित माध्यम से किया जाए। साथ ही, पोर्टल एवं हेल्पलाइन पर कार्यरत शिकायत निवारण अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए ताकि शिकायतों के प्रभावी एवं त्वरित समाधान की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके। उन्होंने विधानसभा सदस्यों द्वारा पूछे गए लंबित प्रश्नों के उत्तर भी शीघ्र एवं तथ्यपरक रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की कार्य रिपोर्टों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अंतर्विभागीय विषयों पर प्रभावी सहयोग एवं संवाद से योजनाओं के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने इज़ ऑफ डूइंग बिज़नस के संबंध में प्रदेश की डी-रेगुलेशन सेल एवं राजनिवेश पोर्टल के उत्कृष्ट प्रदर्शन सहित विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।

स्मार्ट सिटी की ओर दिल्ली, CSIR-CRRI और SPA के साथ सड़क सुधार पर बड़ा समझौता

नई दिल्ली  राजधानी की सड़कों को धूल मुक्त, सुरक्षित और स्मार्ट बनाने की दिशा में सरकार ने सीएसआईआर-सीआरआरआई और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) से समझौता किया है। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि पीडब्ल्यूडी के साथ इस समझौते के तहत दिल्ली में रोड एसेट मैनेजमेंट सिस्टम (आरएएमएस) लागू किया जाएगा, जिसके जरिए सड़कों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और उनकी स्थिति, मरम्मत की जरूरत तथा यातायात दबाव का वैज्ञानिक आकलन के साथ प्लानिंग की जा सकेगी। डेटा आधारित रोड मैनेजमेंट सीएम ने कहा, सरकार केवल नई सड़कें बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि ऐसा अर्बन रोड इकोसिस्टम विकसित कर रही है जो पर्यावरण-अनुकूल, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हो। बढ़ते ट्रैफिक, वायु प्रदूषण और जलभराव जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अब सड़कों का रखरखाव पारंपरिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और डेटा आधारित प्रणाली से किया जाएगा। सीएम के मुताबिक, नई व्यवस्था से सड़कों के रखरखाव और मरम्मत की योजना डेटा आधारित होगी, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और रोड स्ट्रक्चर की गुणवत्ता में सुधार होगा। सड़कों के किनारे वैज्ञानिक तरीके से ग्रीन एरिया विकसित किया जाएगा, स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने तथा मिकैनाइज्ड रोड स्वीपिंग और डस्ट कंट्रोल के उपायों को लागू किया जाएगा। समझौते के तहत सड़कों के स्लोप और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को भी वैज्ञानिक आधार पर विकसित किया जाएगा। समझौते की मुख्य बातें…     सड़कों के स्लोप और स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम को पुनर्गठित किया जाएगा।     पेवमेंट डिजाइन में तकनीक का इस्तेमाल होगा, जो भूजल रिचार्ज में सहायक हो।     सड़क इंजीनियरिंग, पेवमेंट टेक्नोलॉजी, रोड सेफ्टी और एसेट मैनेजमेंट पर काम होगा।     एसपीए शहरी डिजाइन, स्ट्रीट एस्केप प्लानिंग, पब्लिक स्पेस डिवेलपमेंट, अर्बन लैंडस्केपिंग पर काम करेगी।     सड़कों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन रोड डिवेलपमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा। आधुनिक रोड मॉडल पर जोर पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, यह समझौता रोड स्ट्रक्चर को आधुनिक, वैज्ञानिक और भविष्य की आवश्यकताओं के हिसाब से विकसित करेगा। सड़कों के लिए एक इंटीग्रेटेड अर्बन रोड डिवेलपमेंट मॉडल विकसित किया जाएगा। वहीं, मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, सरकार सड़कों के किनारे स्थानीय और पर्यावरण-अनुकूल वृक्षों, झाड़ियों तथा घास के रोपण के माध्यम से डस्ट पॉल्यूशन कम करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है।  

युगांडा से आए यात्रियों पर नजर, इबोला संक्रमण के खतरे को लेकर बढ़ाई गई निगरानी

भिलाई. युगांडा से आए 3 नए यात्रियों की ट्रेसिंग की गई. तीनों यात्री 7 जून को दुर्ग पहुंचे थे. वर्तमान में कुल 7 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में रखा गया है. विभाग के अनुसार सभी यात्रियों में इबोला संक्रमण के कोई लक्षण नहीं हैं और न ही किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने का इतिहास मिला है. एहतियात के तौर पर सभी को 21 दिनों के लिए होम आइसोलेशन में रखा गया है. स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रतिदिन सुबह और शाम फोन के माध्यम से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रही है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इबोला वायरस के प्रमुख लक्षणों में बुखार, उल्टी, पेट दर्द, जोड़ों में दर्द, अत्यधिक थकान, सिरदर्द और गंभीर दस्त शामिल हैं. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क या उसके शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैल सकता है. दुर्ग स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जिले में इबोला का कोई संक्रमित मरीज नहीं मिला है. सभी यात्रियों की नियमित निगरानी की जा रही है और किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

यातायात नियम उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई, काली फिल्म और VIP नंबर प्लेट पर सबसे ज्यादा चालान

 जयपुर महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में चलाए जा रहे विशेष यातायात एवं कानून पालन अभियान के तहत राजस्थान पुलिस ने आठवें दिन व्यापक कार्रवाई करते हुए 8,448 वाहन चालकों के विरुद्ध कार्रवाई की। अभियान का उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना, यातायात नियमों की पालना सुनिश्चित करना तथा आमजन में जिम्मेदार वाहन संचालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। डीजी ट्रैफिक श्री अनिल पालीवाल के पर्यवेक्षण में चल रहे अभियान के बारे में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ बी एल मीणा ने बताया कि अभियान के दौरान पुलिस ने वाहनों में अवैध संरचनात्मक परिवर्तन, अनधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर एवं स्ट्रोब लाइट, प्रेशर हॉर्न, काली फिल्म, वाहनों पर अनधिकृत शब्द एवं चिन्ह तथा नियम विरुद्ध नम्बर प्लेट लगाने जैसे उल्लंघनों पर विशेष कार्रवाई की।  ब्लैक फिल्म और वीआईपी स्टाइल नंबर प्लेट का सबसे ज्यादा क्रेज आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि प्रदेश में लोग सबसे ज्यादा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। पूरे राज्य में सबसे ज्यादा 3,264 कार्रवाई वाहनों के शीशे पर लगी काली फिल्म के खिलाफ की गई। नियम विरुद्ध और वीआईपी स्टाइल में नंबर प्लेट लगाने वाले 2,079 वाहन चालक पुलिस के हत्थे चढ़े। अपनी गाड़ियों पर अवैध रूप से पद, जाति या अनाधिकृत शब्द लिखने वाले 1,204 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। बिना अनुमति के गाड़ी की चेसिस या बॉडी को मॉडिफाई कराने वाले 861 वाहनों पर भी डंडा चला है। बत्तीबाज़ों और प्रेशर हॉर्न पर भी कड़ा प्रहार सड़कों पर बेवजह रौब झाड़ने और शोर मचाने वालों को भी पुलिस ने नहीं बख्शा। राज्यभर में 544 ऐसे मामले सामने आए जहां गाड़ियों पर अनाधिकृत रूप से लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर या हूटर लगे हुए थे। वहीं, ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले 496 प्रेशर हॉर्न और एयर हॉर्न के खिलाफ भी पुलिस ने सख्त एक्शन लिया है। पटाखे की ध्वनि करती बुलेट गाड़ियों के विरुद्ध भी कार्यवाही की जा रही है। अभियान में कोटा शहर सर्वाधिक 572 कार्रवाइयों के साथ प्रथम स्थान पर रहा, जबकि अजमेर में 416, बाड़मेर में 340, चित्तौड़गढ़ में 311 तथा भरतपुर में 309 कार्रवाइयाँ दर्ज की गईं। वहीं भीलवाड़ा में 281, झुंझुनूं में 257, जयपुर ग्रामीण में 247 तथा उदयपुर में 215 कार्रवाई कर नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए गए। जयपुर यातायात पुलिस ने भी अभियान में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए 320 मामलों में कार्रवाई की, जबकि जोधपुर ट्रैफिक पुलिस ने 180 और जयपुर ग्रामीण पुलिस ने 247 मामलों में नियम उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा ने सभी पुलिस इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की पालना सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान निरंतर जारी रखे जाएं। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी भी है। राजस्थान पुलिस का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता बढ़ाकर सुरक्षित और अनुशासित यातायात व्यवस्था स्थापित करना है।

महिलाओं के लिए बड़ी राहत, यूपी सरकार देगी आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ

लखनऊ  महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ट्रिपल तलाक और एसिड अटैक जैसी गंभीर सामाजिक कुरुतियों और आपराधिक कृत्यों से प्रभावित महिलाओं को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें आवास और हेल्थ इंश्योरेंस कवर प्रदान करने की तैयारी कर रही है. योगी सरकार इन महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ देने की दिशा में काम कर रही है।  इसके साथ ही निराश्रित महिलाओं को भी इन योजनाओं के दायरे में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महिला कल्याण विभाग ने इस संबंध में कार्रवाई तेज कर दी है. विभाग ट्रिपल तलाक और एसिड अटैक से प्रभावित महिलाओं के साथ-साथ निराश्रित महिलाओं का विस्तृत और सत्यापित डेटा एकत्र कर रहा है, ताकि पात्र लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा सके. सरकारी स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देशों और शासनादेश को तैयार करने की प्रक्रिया भी जारी है।  प्राप्त आंकड़ों के आधार पर पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा. योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र महिला जानकारी के अभाव या प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे. इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है. हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिया था।  उन्होंने कहा था कि ट्रिपल तलाक या एसिड अटैक जैसी परिस्थितियों का सामना कर चुकी और जिनके पास स्थायी आवास नहीं है, ऐसी महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर उपलब्ध कराया जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए हैं कि इन महिलाओं और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।  बता दें कि एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक इलाज, कई सर्जरी और पुनर्वास की आवश्यकता होती है. वहीं ट्रिपल तलाक से प्रभावित अनेक महिलाएं आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना करती हैं. ऐसे में आवास और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराकर योगी सरकार उनके जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयासरत है। 

किसानों से लेकर मेट्रो तक, मोहन सरकार ने लिए कई अहम फैसले; 15 जून तक पूरे होंगे तबादले

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में किसानों, अधोसंरचना विकास, प्रशासनिक सुधार और कृषि क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार कश्यप ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने कृषि, परिवहन, उर्वरक वितरण और ग्रामीण विकास को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई प्रस्ताव भी पारित किया। प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष पूरे होने पर बधाई प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई प्रस्ताव पारित किया गया। मंत्री चैतन्य कुमार कश्यप ने कहा कि बीते 12 वर्ष भारत के विकास, सुशासन और जनकल्याण की दृष्टि से ऐतिहासिक रहे हैं। उन्होंने बताया कि 5 जून से 21 जून तक प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से सरकार जनता तक पहुंचकर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी दे रही है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का फैसला राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को रसायन-मुक्त खेती के लाभों की जानकारी दी जाएगी और उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा। 15 जून तक पूरी होगी तबादला प्रक्रिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य सरकार की नई तबादला नीति के तहत विभागीय स्थानांतरण की प्रक्रिया 15 जून तक हर हाल में पूरी कर ली जाए। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं को समयबद्ध तरीके से व्यवस्थित करना है। भोपाल मेट्रो परियोजना को मिली अतिरिक्त वित्तीय सहायता कैबिनेट ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त राशि मिलने से परियोजना के कार्यों में तेजी आएगी और राजधानी भोपाल में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी। कपास उत्पादक किसानों को राहत किसानों को राहत देने के उद्देश्य से सरकार ने कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क में कमी करने का फैसला लिया है। अब कपास पर प्रति गठान लगने वाला मंडी शुल्क एक रुपये से घटाकर 50 पैसे कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से कपास उत्पादक किसानों और कृषि व्यापारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा तथा कृषि विपणन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उर्वरक वितरण पर रहेगी विशेष निगरानी खरीफ सीजन की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रत्येक जिले में उर्वरक वितरण की निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय लिया है। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्रों के विधायक और मंत्री भी समन्वय की भूमिका निभाएंगे ताकि किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा सके और किसी प्रकार की कमी या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो। मंडी टैक्स बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किया गया कैबिनेट ने मंडी टैक्स को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार इस निर्णय से प्रतिवर्ष लगभग 835 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। इस राशि का उपयोग कृषि मंडियों के अधोसंरचना विकास, ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार तथा गोसंवर्धन से जुड़े कार्यों पर किया जाएगा। अगले कृषि सीजन की तैयारियां अभी से शुरू राज्य सरकार ने आगामी कृषि सीजन को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारियां शुरू करने का निर्णय लिया है। उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और कृषि से जुड़ी अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को खेती के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और कृषि कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें।