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फिक्स्ड डिपॉजिट में बड़ा बदलाव संभव, RBI के प्रस्ताव से ग्राहकों को मिल सकता है ज्यादा ब्याज

 नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक ने एक ड्राफ्ट नियम प्रस्‍तावित किया है. इसके तहत अब आपके फिक्‍स डिपॉजिट और बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्‍याज को अधिक लचीलापन बनाया जाएगा. बैंक मनमाने तरीके से ब्‍याज दर नहीं दे सकते हैं और पहले से ही उन्‍हें अपने वेबसाइट पर ब्‍याज दरों के बारे में जानकारी देनी होगी. अगर ये नियम लागू होते हैं तो FD निवेशकों के लिए अलग-अलग बैंकों की ब्‍याज दरों की तुलना करना आसान हो जाएगा।  RBI ने इन ड्रॉफ्ट नियम को सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया है. इनका उद्देश्य बैंकों को रुपये में मिले बड़े डिपॉजिट्स की ब्याज दर तय करने की अधिक स्वतंत्रता देना और जमा ब्याज दरों के खुलासे में एकरूपता लाना है. 20 जून तक अपनी राय दे सकते हैं।  इस नियम से क्या बदलने वाला है? इन प्रस्तावित नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पारदर्शिता लाना है. RBI ने प्रस्ताव दिया है कि सभी बैंक हर कारोबारी दिन शुरू होने से पहले अपनी वेबसाइट पर जमा योजनाओं की ब्याज दरें दिखा सकते हैं. इस नियम के अनुसार, जमा पर देय ब्याज दरें बैंक की वेबसाइट पर कारोबारी दिन शुरू होने से पहले घोषित ब्याज दरों के अनुसार ही होंगी।  इसका मतलब है कि बैंक FD और अन्य जमा योजनाओं की ब्याज दरें पहले से सार्वजनिक करेंगे, जिससे ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की योजनाओं की तुलना करने में आसानी होगी. यह कदम ब्याज दरों को लेकर अस्पष्टता कम करेगा और FD में निवेश करने वाले ग्राहकों के लिए अधिक स्पष्टता लाएगा।  बल्क डिपॉजिट क्या होते हैं? प्रस्तावित बदलाव मुख्य रूप से बल्क डिपॉजिट से जुड़े हैं. बल्क डिपॉजिट वे बड़ी राशि वाले जमा होते हैं, जो व्यक्ति, कंपनियां, संस्थान और हाई नेटवर्थ (HNI) ग्राहक बैंकों में जमा करते हैं. नए मसौदे के तहत बैंक अपनी फंडिंग जरूरतों और नकदी की स्थिति के आधार पर इन बड़े जमाओं पर अलग-अलग ब्याज दरें दे सकेंगे।  RBI के अनुसार, बैंकों को बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दरें देने की स्वतंत्रता होगी. अगर किसी बैंक को अधिक धन जुटाने की जरूरत होगी, तो वह बड़े जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए ज्यादा ब्याज दर दे सकता है. वहीं पर्याप्त नकदी वाले बैंक कम ब्याज दर भी दे सकते हैं।  FD निवेशकों पर इसका क्या असर होगा? सामान्य रिटेल FD निवेशकों पर इसका तत्काल प्रभाव सीमित हो सकता है क्योंकि प्रस्ताव सीधे तौर पर रिटेल FD नियमों में बदलाव नहीं करता है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसका असर पूरे डिपॉजिट मार्केट पर पड़ सकता है।  सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) श्वेता शास्त्री के अनुसार, पहले लगभग सभी बैंकों की FD दरें एक जैसी होती थीं, लेकिन आगे चलकर जमा राशि, अवधि और बैंक की फंडिंग जरूरत के आधार पर ब्याज दरों में उल्लेखनीय अंतर दिखाई दे सकता है. उनका सुझाव है कि FD रिन्यू कराने से पहले निवेशकों को अलग-अलग बैंकों की दरों की तुलना करनी चाहिए और बड़ी राशि जमा करने की स्थिति में बेहतर ब्याज दर के लिए बैंक से बातचीत भी करनी चाहिए. हालांकि केवल सबसे ऊंची ब्याज दर को देखकर निवेश नहीं करना चाहिए।  एफडी में निवेश से पहले देखें ये चीजें      समय से पहले FD तोड़ने पर लगने वाला जुर्माना      स्वीप-इन FD सुविधा     जरूरत पड़ने पर धन की उपलब्धता      ब्याज भुगतान का विकल्प (मासिक, तिमाही या मैच्योरिटी पर)     वर्तमान FD ब्याज दरें कौन दे रहा एफडी पर ज्‍यादा रिटर्न      सुर्वोदय स्‍माल फाइनेंस बैंक – 8.10% तक     उत्‍कर्ष स्‍माल फाइनेंस बैंक – 8.10% तक     जाना स्‍माल फाइनेंस बैंक – 7.77% तक  

BYD का बड़ा दांव, Seal U हाइब्रिड से मिलेगी 1200KM तक की ड्राइविंग रेंज

 नई दिल्ली चीनी इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी बीवाईडी (BYD) ने भारत में अपनी नई हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को पेश कर दिया है. कंपनी ने डीएम-आई सुपर प्लग-इन हाइब्रिड ईवी (DM-i Super Plug-in Hybrid EV) को इंट्रोड्यूस किया है. इस टेक्नोलॉजी के साथ पहली कार कंपनी बीवाईडी सील यू (BYD Seal U) को लॉन्च करेगी।  ये ब्रांड की पहली कार होगी, जो प्लग-इन हाइब्रिड टेक्नोलॉजी के साथ भारत में आएगी. अब तक भारत में कंपनी ने सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों को लॉन्च किया है, लेकिन अब ब्रांड का फोकस हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर भी है. रिपोर्ट्स की मानें, तो हाइब्रिड कार को कंपनी इस साल के अंत तक लॉन्च कर सकती है।  बैटरी और इंजन दोनों मिलेंगे बात करें डीएम-आई सुपर प्लग-इन हाइब्रिड ईवी टेक्नोलॉजी की, तो इसमें बैटरी-मोटर के साथ एक इंजन भी मिलेगा. हालांकि, ये टेक्नोलॉजी कार को ईवी मोड में चलाने पर फोकस करेगी. कार में 1.5 लीटर का डायरेक्ट इंजेक्शन, टर्बो पेट्रोल इंजन मिलेगा. इसमें डुअल इलेक्ट्रिक मोटर और 18.3kWh की बैटरी दी जाएगी।  बीवाईडी का दावा है कि कार में दुनिया की बेस्ट थर्मल एफिशिएंसी मिलेगी. कंपनी की मानें, तो कार 4.8 लीटर पेट्रोल में 100 किलोमीटर का सफर करेगी. वहीं इलेक्ट्रिक मोटर 97.5 फीसदी की इफिशिएंकी के साथ आएगा. दोनों को मिला दें, तो कार फुल टैंक और फुल चार्ज में 1200 किलोमीटर तक का सफर कर सकती है।  कैसे काम करेगी टेक्नोलॉजी? जब बैटरी पूरी तरह से चार्ज होगी तो कार ईवी मोड में चलेगी. इस मोड में कार 70 किलोमीटर तक चल सकती है. सामान्य स्थिति में कार का पेट्रोल इंजन एक पावर जनरेटर की तरह काम करेगा, जो कार को ईवी मोड में चलने में मदद करेगा. वहीं ज्यादा पावर लोड होने पर इंजन सीधे कार को पावर देना शुरू कर देगा।  ये पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटिक होगी. यानी ये कार प्योर ईवी, सीरीज हाइब्रिड और पैरेलल हाइब्रिड मोड में ऑटोमेटिक स्विच करेगी, जिससे ड्राइवर को मोड्स मैन्युअली बदलने नहीं पड़ेंगे. दूसरी ईवी कारों की तरह ही इसमें भी वी2एल कैपेबिलिटी मिलेगी. इसका मतलब है कि कार का इंजन ना सिर्फ कार को पावर देगा बल्कि इससे तमाम इलेक्ट्रिक अप्लायंस भी चल सकेंगे। 

Crude Oil Price Alert: तेल बाजार में बड़ी गिरावट की आशंका, Fitch की रिपोर्ट ने बढ़ाई हलचल

 नई दिल्ली वेस्ट एशिया तनाव के चलते दुनिया को डराने वाले कच्चे तेल की कीमतें क्रैश हो सकती हैं. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि फिच रेटिंग्स ने अनुमान जाहिर करते हुए कहा है कि वैश्विक तेल बाजार दुनिया की कुल तेल-गैस जरूरत के 20% को पूरा करने के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट पर बारीकी से नजर रख रहा है।  एजेंसी ने लंबे समय से बंद Hormuz Strait के जुलाई 2026 के अंत तक फिर से खुलने का अनुमान जताया है और उम्मीद जताते हुए कहा है कि ऐसा होने पर Oil-Gas सप्लाई चेन में रुकावट खत्म होते ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी।   70 डॉलर पर आ जाएगा कच्चा तेल! Fitch Ratings की एक रिपोर्ट में होर्मुज स्ट्रेट के जुलाई 2026 के अंत तक फिर से खुलने के सवाल पर कहा है कि इसका जवाब संभवतः हां है. एजेंसी के ऑयल आउटलुक के मुताबिक, वैश्विक तेल खपत के लगभग पांचवें हिस्से को संभालने वाला यह स्ट्रेटिजिक समुद्री रूट 5 महीने की क्लोजिंग बंद के बाद फिर से खुलेगा।  फिच के मुताबिक, ऐसा होने पर कच्चे तेल की कीमतों में आने वाली तेज गिरावट का जिक्र करते हुए एजेंसी ने कहा कि जुलाई में होर्मुज ओपन होने के बाद सितंबर से ब्रेंट क्रूड की कीमत (Brent Crude Oil Price) गिरकर करीब 70 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है।  तेजी से बहाल होगी ऑयल सप्लाई फिच ने अपनी रिपोर्ट में तर्क देते हुए कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा उछाल मुख्य रूप से उत्पादन क्षमता में स्थायी कमी के बजाय सप्लाई चेन में आई रुकावट से जुड़ा है. एजेंसी का मानना ​​है कि युद्ध की वजह से क्षेत्रीय तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को कोई खास नुकसान नहीं हुआ है, जिससे शिपिंग रूट्स सामान्य होने पर मिडिल ईस्ट में प्रोडक्शन भी तेजी से बहाल हो सकता है।  Fitch के अनुमानों पर नजर डालें, तो ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत मई-जुलाई के दौरान 100-110 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जबकि अगस्त में यह घटकर करीब 80 डॉलर पर आ जाएगी और सितंबर में Brent Crude Price  70 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकता है।  'अनिश्चितता अभी कम नहीं हुई' ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने तेल की कीमतें क्रैश (Crude Oil Price Crash) होने का अनुमान जताने के साथ ही कहा है कि अनिश्चितता का स्तर अभी भी काफी ऊंचा बना हुआ है. अगर होर्मुज उम्मीद से पहले खुल जाता हैं, तो तेल की कीमतें गिरेंगी, लेकिन अगर लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकता है. इससे भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख आयातकों के लिए ऊर्जा लागत में वृद्धि होगी और महंगाई का खतरा बढ़ेगा। 

चुनाव से पहले सियासी हलचल, क्या कैप्टन की घर वापसी बदल देगी पंजाब का राजनीतिक समीकरण?

चंडीगढ़ पंजाब की सियासत इस समय एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है. शिरोमणि अकाली दल के भीतर मचे घमासान और भारतीय जनता पार्टी के जमीनी संघर्ष के बीच, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पटियाला के महाराजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की एक बार फिर कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं. दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक के राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि पंजाब की राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी पुरानी पार्टी का हाथ थाम सकते हैं. हालांकि, इस खबर के बीच शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुलाकात हुई है. कैप्टन सिंह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए थे. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के लोकसभा सांसद अमर सिंह के एक बयान ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है।  चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी की संभावना पर बेहद सधा हुआ और गंभीर बयान दिया. उन्होंने कहा, “कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बेहद वरिष्ठ नेता हैं. उन्होंने लंबे समय तक पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की है और पार्टी सहित सरकार में कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. हम उनके सामने काफी जूनियर हैं. इसलिए, अगर उनकी वापसी या इस विषय पर किसी भी तरह की चर्चा की आवश्यकता है, तो उसे सीधे हमारा शीर्ष नेतृत्व ही हैंडल करेगा.” सांसद अमर सिंह का यह बयान साफ इशारा करता है कि कैप्टन की वापसी की फाइल अब सीधे दिल्ली दरबार में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के टेबल पर पहुंच चुकी है।  पंजाब विधानसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर? अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी औपचारिक रूप से हो जाती है, तो आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की पूरी बिसात ही बदल जाएगी. साल 2022 के चुनाव से ठीक पहले जिस तरह अपमानजनक ढंग से कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था और उसके बाद कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी, उस गलती को सुधारने का मौका अब पार्टी के पास होगा।  हिंदू और सिख वोट बैंक का अनूठा समन्वय कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के इकलौते ऐसे नेता माने जाते हैं जिनकी पकड़ सिखों के साथ-साथ राज्य के शहरी हिंदू मतदाताओं पर भी समान रूप से मजबूत है।  जमीनी कैडर में नया जोश: नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य प्रांतीय नेताओं की आपसी कलह के कारण जो पारंपरिक कांग्रेस कार्यकर्ता आज घर बैठा है या उदासीन है, कैप्टन का नाम सामने आते ही वह दोबारा सड़कों पर सक्रिय हो जाएगा।  राष्ट्रवाद और पंजाब की सुरक्षा का नैरेटिव: सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब में सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है. कैप्टन की फौजी पृष्ठभूमि और राष्ट्रवाद की मुखर छवि कांग्रेस को अकाली दल और भाजपा के मुकाबले एक मजबूत बढ़त दिलाएगी।  क्या पंजाब में ‘आप’ को टक्कर सिर्फ कांग्रेस ही देगी? वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के सामने मुख्य चुनौती पेश करने के मामले में कांग्रेस सबसे आगे खड़ी दिख रही है. अकाली दल इस समय गंभीर आंतरिक कलह और नेतृत्व के संकट से जूझ रहा है, जबकि भाजपा अभी भी शहरी इलाकों से निकलकर पंजाब के ग्रामीण और किसान बहुल क्षेत्रों में अपनी मजबूत पैठ नहीं बना पाई है. राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, ‘पंजाब की जनता पारंपरिक रूप से एक मजबूत और स्थापित चेहरे को पसंद करती है. पिछले चुनाव में आप को एक बड़े विकल्प के रूप में मौका मिला था, लेकिन एंटी-इंकंबेंसी और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर घिरी सरकार के सामने विपक्ष का स्पेस पूरी तरह खाली है. कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस में आते ही यह लड़ाई सीधे तौर पर आप बनाम कांग्रेस के द्विपक्षीय मुकाबले में तब्दील हो जाएगी, जहां कांग्रेस का पलड़ा बेहद भारी हो सकता है।  पंजाब का इतिहास गवाह है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को जब-जब राजनीतिक रूप से कमतर आंका गया, उन्होंने उतनी ही मजबूती से वापसी की है. भले ही उनकी उम्र इस समय एक फैक्टर हो, लेकिन पंजाब की जनता के बीच उनकी राजनीतिक साख और प्रशासनिक अनुभव का कोई सानी नहीं है. अब देखना यह होगा कि दिल्ली में बैठी कांग्रेस की टॉप लीडरशिप पंजाब के प्रांतीय नेताओं के विरोध को दरकिनार कर कैप्टन की घर वापसी पर कब अंतिम मुहर लगाती है. इस फैसले पर ही पंजाब की भावी सत्ता का भविष्य निर्भर करेगा। 

BMW ने दिया झटका, 1 जुलाई से भारत में महंगी होंगी लग्जरी कारें

 नई दिल्ली कारों की कीमतें लगातार बढ़ रही है. अलग-अलग ब्रांड्स अपनी गाड़ियों की कीमतों को समय-समय पर 2026 में बढ़ा चुके हैं. अब बीएमडब्लू (BMW) ने अपनी कारों की कीमतों में इजाफे का ऐलान किया है. 1 जुलाई से कंपनी की कारें महंगी होने वाली है. इनकी कीमतों में 2 फीसदी इजाफा किया गया है।  ये बीएमडब्लू और मिनी रेंज की सभी कारों पर लागू होंगी. गाड़ियों की कीमतों में इस इजाफे की वजह रुपये की गिरती कीमत और लॉजिस्टिक के बढ़ते दाम हैं. जिसकी वजह से कंपनी 1 जुलाई से अपनी गाड़ियों की कीमत 2 फीसदी बढ़ा रही है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स।  क्यों महंगी हुई बीएमडब्लू कारें? बीएमडब्लू ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और सीईओ, हरदीप सिंह बरार ने बताया, 'जबरदस्त डिमांड और बेहतरीन प्रोडक्ट रेंज होने की वजह से लग्जरी मोबिलिटी स्पेस में बीएमडब्लू ग्रुप इंडिया नई माइलस्टोन बना रही है. मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौतियों के बीच अपने प्रीमियम स्टैंडर्ड को बनाए रखने के लिए हम अपने पोर्टफोलियो की कीमतें 2 फीसदी बढ़ा रहे हैं।  कंपनी कई कारों को भारत में लोकली तैयार करती है. भारत में प्रोड्यूस होने वाली कारों की लिस्ट में बीएमडब्लू 2 सीरीज कूपे, बीएमडब्लू 3 सीरीज लॉन्ग व्हीलबेस, बीएमडब्लू 5 सीरीज लॉन्ग व्हीलबेस, बीएमडब्लू 7 सीरीज, बीएमडब्लू एक्स1, एक्स 3, एक्स 5, एक्स 7, बीएमडब्लू एम340आई और बीएमडब्लू आईएक्स1 लॉन्ग व्हीलबेस शामिल हैं।  इसके अलावा कंपनी की बीएमडब्लू आई5 एम60, बीएमडब्लू आई7, बीएमडब्लू आई7 एम70, बीएमडब्लू आईएक्स, बीएमडब्लू एम440आई कन्वर्टिबल, बीएमडब्लू एम2 कूपे, बीएमडब्लू एम4 कंपटीशन, बीएमडब्लू एम5 और बीएमडब्लू एक्सएम भारत में सीबीयू के तौर पर मिलती हैं।  फ्री सर्विस ऑफर कर रही कंपनी हाल में ही कंपनी ने समर सर्विस कैंपेन 2026 का ऐलान किया था. इसके तहत कंपनी कई सारी सर्विसेस कॉम्प्लिमेंटरी ऑफर कर रही थी. इसमें एयर कंडीशनिंग फिल्टर की जांच, एयर फिल्टर और टायर कंडीशन शामिल हैं. वहीं नॉन-इलेक्ट्रिक मॉडल्स के लिए कंपनी फ्री बैटरी चेकअप भी ऑफर कर रही है।  कंपनी ये इंस्पेक्शन किसी भी फॉल्ट को पहले पकड़ने के लिए कर रही है, जिससे कंज्यूमर्स को परेशानी का सामना ना करना पड़े. बेसिक चेक के साथ कंपनी सर्विस पर डिस्काउंट भी दे रही है. कंज्यूमर्स 10 फीसदी की छूट एसी फुमिगेशन सर्विस पर दे रही है. वहीं एयर कंडीशनिंग रिपेयरिंग पर कंपनी 25 फीसदी तक की छूट लेबर चार्ज पर दे रही है। 

MP ट्रांसको की बड़ी उपलब्धि, इन-हाउस ओवरहॉलिंग से 400 केवी सर्किट ब्रेकर पर बचाए 50 लाख रुपये

एमपी ट्रांसको ने बिरसिंहपुर फीडर के 400 केवी सर्किट ब्रेकर की इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर बचाए 50 लाख रुपये भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के अभियंताओं ने 400 केवी सब स्टेशन कटनी में स्थापित बिरसिंहपुर नंबर-2 फीडर के 400 केवी एबीबी निर्मित सर्किट ब्रेकर की सफलतापूर्वक इन-हाउस ओवरहॉलिंग कर कंपनी को लगभग 50 लाख रुपये की बचत कराई है। अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री आर.सी. शर्मा की पहल पर अभियंताओं एवं तकनीकी कर्मचारियों द्वारा लगभग एक सप्ताह तक सतत प्रयास कर यह कार्य पूर्ण किया गया। बिरसिंहपुर के महत्वपूर्ण फीडर में लगा है यह ब्रेकर यह सर्किट ब्रेकर बिरसिंहपुर ताप विद्युत गृह से आने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण 400 केवी फीडर पर स्थापित है, जिसके माध्यम से लगभग 350 मेगावॉट विद्युत का पारेषण होता है। प्रदेश की विद्युत व्यवस्था की दृष्टि से यह फीडर अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण फीडर पर स्थापित सर्किट ब्रेकर की सफल ओवरहॉलिंग ने न केवल इसकी विश्वसनीयता बढ़ाई है, बल्कि विद्युत आपूर्ति की निर्बाधता और ग्रिड सुरक्षा को भी सुदृढ़ किया है। फर्स्ट जेनरेशन का है ब्रेकर लगभग 20 वर्ष पुराने फर्स्ट जनरेशन सर्किट ब्रेकर के स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध न होने के बावजूद कटनी डिवीजन की टीम ने अपनी तकनीकी दक्षता और अनुभव का परिचय देते हुए इसका निरीक्षण, परीक्षण, मरम्मत एवं आवश्यक पार्ट्स का प्रतिस्थापन किया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस संभाग दमोह एवं कटनी का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। ऊर्जा मंत्री ने की सराहना ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इसे कंपनी की तकनीकी क्षमता, संसाधनों के कुशल उपयोग, लागत नियंत्रण एवं आत्मनिर्भर कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए संबंधित अभियंताओं एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि कंपनी के अभियंता अपनी विशेषज्ञता के बल पर महत्वपूर्ण उपकरणों के रखरखाव एवं पुनर्संचालन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।  

कागज नहीं, प्लास्टिक करेंसी! RBI की चर्चा के बीच जानिए कितने टिकाऊ होते हैं ये नोट

 नई दिल्ली भारत में भी अब 'प्लास्टिक' के नोट आने वाले हैं, जैसे कई दूसरे देशों में छापे जाते हैं. खास मैटेरियल से बने ये नोट जल्दी से फटते नहीं हैं और अगर पानी में गिर जाए तो खराब नहीं होते हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बता दिया है कि इस तरह के नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी शुरुआती फेज में है. अभी भले ही इसमें टाइम लगेगा, लेकिन भारत के करेंसी नोट भी अलग मैटेरियल के होंगे. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये नोट प्योर प्लास्टिक से बनाए जाएंगे या फिर कुछ अलग मैटेरियल के होंगे और इस पर कितना काम हो चुका है? अभी आरबीआई का क्या कहना है? हाल ही में आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पॉलिमर से बने नोट लाने का प्रस्ताव केंद्रीय बैंक के समक्ष विचाराधीन है और फिलहाल यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है. पॉलिमर नोट लाने के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और आरबीआई इसे लेकर आकलन कर रहा है. इस पर जैसे ही कोई निर्णय होता है, उसकी जानकारी दी जाएगी. दरअसल, सरकार इस पर लंबे वक्त से काम कर रही है।  इससे पहले इससे पहले फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोटों को देश के पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर जारी किया जाएगा. इस परीक्षण के लिए कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर का चयन किया गया था. हालांकि, तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कारण इस पहल को बाद में रोक दिया गया था।  किस मैटेरियल के होंगे ये नोट? जिन नोटों की चर्चा हो रही है, उन्हें पॉलिमर नोट कहा जाता है. ये कागज के बजाय एक विशेष प्रकार की पतली और लचीली प्लास्टिक फिल्म से बने मुद्रा नोट होते हैं. ये आम कागजी नोटों (जो कपास और लिनन से बनते हैं) की तुलना में कई गुना अधिक मजबूत होते हैं. ये पानी में भीगने या वॉशिंग मशीन में धुल जाने पर भी खराब नहीं होते हैं. ये नोट थोड़े चिकने होते हैं।  इन नोट्स को बनाने में BOPP यानी पॉलीप्रोपाइलीन का इस्तेमाल किया जाता है. पॉलिमर नोटों में पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) ही वह मुख्य आधार है, जो इन्हें पारंपरिक कागजी नोटों से अलग बनाता है. इन्हें प्लास्टिक का कहा जा सकता है, लेकिन ये पूरी तरह से प्लास्टिक के नोट नहीं होते हैं जबकि ये उसी मैटेरियल का सबसे अच्छा रूप है. पॉलिमर नोट आम प्लास्टिक (जैसे कैरी बैग या पीवीसी) से काफी अलग होते हैं. इसकी परत आम प्लास्टिक की तरह मोटी या सख्त नहीं, बल्कि कागज जितनी पतली होती है. यह सामान्य प्लास्टिक की तरह जेब की गर्मी या धूप से आसानी से पिघलता या सिकुड़ता नहीं है।  इस प्लास्टिक फिल्म पर स्याही को रोकने के लिए खास तरह की लेयर की कोटिंग की जाती है, इस पर छपाई टिकी रहती है. पॉलिमर नोटों की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में हुई थी. इसके बाद से यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड और सिंगापुर जैसे कई अन्य देशों ने भी अपनी मुद्रा के लिए पॉलिमर तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया है. अब भारत भी इस पर विचार कर रहा है। 

वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले बढ़ा तनाव, ईरान-अमेरिका विवाद ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली फीफा वर्ल्ड कप के 23वें संस्करण (FIFA World Cup 2026) को शुरू होने में अब 2 दिन बचे हैं. इससे पहले एक और विवाद खड़ा हो गया है. ईरान फुटबॉल फेडरेशन (FFIRI) ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनकी टीम के वर्ल्ड कप के ग्रुप मैचों के टिकेटों का आवंटन रद्द कर दिया है. बता दें कि इस बार 3 देश मिलकर टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहे हैं, जिसमें USA भी है।  ईरान फुटबॉल फेडरेशन का कहना है कि डिप्लोमेटिक विवाद के कारण अमेरिका ईरानी दर्शकों को फीफा वर्ल्ड कप के मैच देखने से रोकने की कोशिश कर रहा है. बता दें कि इससे पहले अमेरिका में इराक फुटबॉल टीम के एक खिलाड़ी को एयरपोर्ट पर डिटेन कर लिया था, जिसे 7 घंटे पूछताछ के बाद छोड़ा था।  मंगलवार को बयान जारी करते हुए ईरान फुटबॉल फेडरेशन ने कहा, "फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब 2 दिन बचे हैं. अमेरिका ने एक बार फिर ग्रुप स्टेज में ईरान फुटबॉल टीम के तीनों मैचों के वेन्यू पर ईरानी समर्थकों के आने में बाधा डालने का काम किया है।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के लिए कई प्रशासनिक मुश्किलें भी खड़ी की हैं, जैसे उन्होंने कुछ सपोर्ट स्टाफ के सदस्यों को वीजा देने से मना कर दिया. बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच अभी रिश्ते बिल्कुल भी अच्छे नहीं है।  फीफा के नियमों के मुताबिक हर मैच के लिए 8 प्रतिशत टिकट ईरान को मिलने चाहिए. ईरान ने आरोप लगाया है कि टिकट का ये हिस्सा टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले फेडरेशन को दिए जाते हैं, जिससे वह अपने माध्यम से समर्थकों को इन्हें बांट सके।  ईरान फुटबॉल फेडरेशन के मुताबिक उन्होंने अपने ग्रुप मैचों की टिकट बिक्री शुरू कर दी थी, जो अमेरिका में होने वाले हैं. लेकिन अमेरिका ने उन्हें मिलने वाला कोटा वापस ले लिया है, और अभी ईरान अपने समर्थकों को एक भी टिकट नहीं देने की स्थिति में है. ईरान फुटबॉल टीम ग्रुप 'जी' में है, जिसमें उनका सामना बेल्जियम, इजिप्ट और न्यूजीलैंड से होगा। 

सूर्यकुमार की छुट्टी, हार्दिक की एंट्री तय? BCCI के फैसले ने बढ़ाई चर्चा

नई दिल्ली   हाल ही में इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया गया. टीम में कुछ नए चेहरों को भी जगह दी गई है, लेकिन सबसे बड़े बदलाव के रूप में सूर्यकुमार को यादव कप्तानी और टीम से बाहर करना रहा, लेकिन इसी बीच स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या की वनडे टीम में वापसी तय हो गई है. पंड्या टीम इंडिया में वापसी के लिए पूरी तरह फिट हो चुके हैं. बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की खेल विज्ञान टीम ने उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ धर्मशाला में शुरू होने वाली तीन मैच की वनडे सीरीज में खेलने की मंजूरी दे दी है. 32 साल के पंड्या पीठ में ऐंठन के कारण मुंबई इंडियन्स के लिए आईपीएल के कई मैच नहीं खेल पाए थे और दो जून से सीओई में हैं।  बीसीसीआई के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, ‘‘दो जून को सीओई में आने से पहले हार्दिक विदेश में छुट्टियां मना रहे थे. अगले पांच दिन में उन्होंने मैच जैसी कई स्थितियों में तैयारी की और 10 ओवर (पूरा कोटा) तक गेंदबाजी भी की.’’ सूत्र ने कहा, ‘‘उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई और जानकारी के मुताबिक सीओई में स्ट्रेंथ और अनुकूलन कोच ने अलग-अलग पैमानों पर उनकी फिटनेस को मंजूरी दे दी है।  बैटिंग के साथ बॉलिंग भी करेंगे हार्दिक पंड्या सोमवार को भारत के सहायक कोच सितांशु कोटक ने कहा था कि भले ही उनके पास पंड्या की फिटनेस के बारे में कोई ताजा जानकारी नहीं है लेकिन उन्हें लगता है कि यह ऑलराउंडर ठीक है. पंड्या भारत की सीमित ओवरों की टीम के लिए एक अहम खिलाड़ी हैं क्योंकि वह अपनी तेज गेंदबाजी और डेथ ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी से टीम को संतुलन देते हैं।  सबसे अच्छी बात यह है कि पंड्या ट्रेनिंग सत्र में 10 ओवर गेंदबाजी कर रहे हैं जिसका मतलब है कि वह 50 ओवर के क्रिकेट की चुनौतियों के लिए तैयार हैं. हालांकि यह साफ नहीं है कि पंड्या चंडीगढ़ में दूधिया रोशनी में होने वाले ट्रेनिंग सत्र के लिए टीम से जुड़ेंगे या सीधे धर्मशाला पहुंचेंगे जैसा कि पहले तय किया गया था। 

जनजातीय अध्ययन में नई पहचान बना रहा DAVV इंदौर, शोध और नवाचार को मिल रही नई दिशा

जनजातीय अध्ययन को नई दिशा दे रहा इंदौर का डीएवीवी जनजातीय समाज, संस्कृति और विकास के अध्ययन-शोध के लिए विशेष पाठ्यक्रम; युवाओं के लिए शोध के अवसर डीएवीवी में एमए, एमबीए और पीएचडी में प्रवेश प्रारंभ इंदौर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज द्वारा जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपराओं और विकास के विविध आयामों को समझने के लिए एक अभिनव शैक्षणिक पहल की गई है। विश्वविद्यालय में जनजातीय अध्ययन एवं जनजातीय विकास पर केंद्रित विशेष पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को जनजातीय समुदायों के जीवन, ज्ञान परंपराओं, चुनौतियों और विकास की संभावनाओं से परिचित कराना है। यह पहल विद्यार्थियों में जनजातीय समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के साथ उन्हें ऐसे ज्ञान और कौशल से सुसज्जित करती है, जिससे वे भविष्य में जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण और विकास में सार्थक योगदान दे सकें। स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज में एम.ए. (जनजातीय अध्ययन), एम.बी.ए. (जनजातीय विकास एवं प्रबंधन) तथा पीएचडी (जनजातीय अध्ययन) जैसे विशिष्ट कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के इतिहास, संस्कृति, जीवन-पद्धति, पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक चुनौतियों तथा विकास संबंधी मुद्दों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। वर्तमान में जनजातीय समुदायों से जुड़े विषयों पर अध्ययन और शोध की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ जनजातीय विकास की नीतियों, योजनाओं और प्रबंधन से जुड़ी व्यावहारिक समझ भी प्रदान करते हैं। इससे छात्र शोध, शिक्षण, सामाजिक विकास, नीति निर्माण तथा प्रशासनिक क्षेत्रों में बेहतर कॅरियर के अवसर बढ़ जाते हैं। स्कूल ऑफ ट्राइबल स्टडीज द्वारा संचालित ये पाठ्यक्रम न केवल मध्यप्रदेश बल्कि देश के उच्च शिक्षा परिदृश्य में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। जनजातीय अध्ययन के प्रति रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह पाठ्यक्रम समाज के एक महत्वपूर्ण वर्ग को निकट से समझने और उनके विकास में सार्थक योगदान देने का अवसर उपलब्ध कराते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों से इन विशेष पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने और समय पर प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की है।