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जंग के माहौल का बाजार पर नहीं पड़ा असर, हरे निशान में खुला सेंसेक्स-निफ्टी, निवेशकों की हुई बल्ले-बल्ले

मुंबई  अमेरिका-ईरान के बीच हुए ताजा हमलों के बीच जहां दुनियाभर के अन्‍य प्रमुख बाजारों में बड़ी गिरावट देखी गई, वहीं भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में  खुले. मार्केट खुलते ही BSE सेंसेक्‍स में 416 अंक से ज्‍यादा का उछाल दिखा, जबकि निफ्टी 50 में भी करीब 100 अंकों का उछाल देखने को मिला. सेंसेक्‍स 74,300 के पार ट्रेड करता दिखा, जबकि निफ्टी 23,300 के पार कारोबोर करता दिखा।  करेंसी मार्केट में उथल-पुथल के बीच भारतीय रुपये में आज गिरावट देखी जा रही है. बुधवार को शुरुआती कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे की गिरावट के साथ 95.56 के लेवल पर कारोबार करता दिखा।  घरेलू शेयर बाजार की अच्‍छी शुरुआत भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबार में सकारात्मक रुख देखा गया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 303.73 अंक चढ़कर 74,222.49 के स्तर पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 85.40 अंक की बढ़त के साथ 23,327.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार से पैसा निकालना बदस्तूर जारी है. एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कारोबारी सत्र यानी मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से 4,566.03 करोड़ रुपये के शेयर बेचे (ऑफलोड किए) थे।  रुपये में क्‍यों दिखी गिरावट?  मिडिल ईस्ट में युद्ध के ताजा घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के कारण बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 15 पैसे टूटकर 95.56 के स्तर पर आ गया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Interbank Foreign Exchange Market) में रुपये में शुरुआती गिरावट के बाद और कमजोरी आई. इससे पहले मंगलवार को रुपये में थोड़ी मजबूती देखी गई थी, जब यह 20 पैसे की बढ़त के साथ 95.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।  विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, इस भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय मुद्रा पर चौतरफा दबाव बना दिया है. फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि बुधवार को बाजार खुलते ही 'डॉलर-रुपया' (USD/INR) की जोड़ी में भारी कमजोरी देखी गई. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराने के लिए ईरान जिम्मेदार है और अमेरिका इस हमले का 'करारा जवाब' देगा।  कच्चे तेल में उबाल से रुपये पर बढ़ा दबाव वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' (Brent Crude) वायदा बाजार में 0.73 प्रतिशत की तेजी के साथ 92.12 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा था. बाजार विश्लेषकों और ट्रेडर्स के अनुसार, मिडिल ईस्ट में नए सिरे से शुरू हुए तनाव की वजह से भारतीय रुपया गंभीर दबाव में है. चूंकि भारत अपनी ऊर्जा (कच्चा तेल और गैस) जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली कोई भी बढ़ोतरी सीधे तौर पर देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को बढ़ा देती है. इसी वजह से घरेलू मुद्रा लगातार कमजोर हो रही है।  अमेरिका और ईरान के बीच हिंसक जवाबी कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर जवाबी हवाई हमले शुरू कर दिए हैं. इस अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने भी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर आत्मघाती ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं. इस सैन्य टकराव के चलते वैश्विक बाजार सहमे हुए हैं। 

श्रीलंका ने आखिरी पलों में किया सरेंडर, भारत ने 10 गेंदों में छीनी जीत, दांबुला में दिखा दमदार खेल

 दांबुला दांबुला में मंगलवार (9 जून) को खेले गए त्रिकोणीय वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में भारत A ने शानदार जुझारूपन दिखाते हुए श्रीलंका A को 8 रन से हरा दिया. एक समय मैच पूरी तरह मेजबान टीम की गिरफ्त में दिखाई दे रहा था, लेकिन आखिरी 10 गेंदों में चार विकेट गिरने से मुकाबला पलट गया और तिलक वर्मा की अगुआई वाली भारतीय टीम ने जीत के साथ अभियान का आगाज किया।  मैच में सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू की थी. हालांकि युवा बल्लेबाज अपनी पहली लिस्ट-A पारी में बड़ा स्कोर नहीं बना सके और 14 रन बनाकर आउट हो गए. उन्होंने अपनी छोटी पारी में तीन आकर्षक चौके लगाए, लेकिन मोहम्मद शिराज की गेंद पर मिड-ऑफ के ऊपर शॉट खेलने की कोशिश में कप्तान सहान अराचिगे को कैच थमा बैठे।  भारत A की शुरुआत बेहद खराब रही. टीम ने सिर्फ 16 रन पर वैभव सूर्यवंशी और प्रभसिमरन सिंह के विकेट गंवा दिए. इसके बाद प्रियांश आर्य ने 32 रन की तेज पारी खेली, लेकिन ऋतुराज गायकवाड़ के साथ गलतफहमी का शिकार होकर रनआउट हो गए।  69 रन पर तीन विकेट गिरने के बाद उपकप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और कप्तान तिलक वर्मा ने पारी को संभाला. दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 150 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।  ऋतुराज ने अनुभव का शानदार प्रदर्शन करते हुए 112 गेंदों पर 101 रन बनाए. यह उनके लिस्ट-A करियर का 21वां शतक रहा. उन्होंने शुरुआत में संयम बरता और बाद में रनगति बढ़ाते हुए टीम को बड़े स्कोर की ओर पहुंचाया. दूसरी ओर तिलक वर्मा ने 97 गेंदों पर 60 रन बनाए. दोनों बल्लेबाजों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य और समझदारी से बल्लेबाजी की।  पारी के अंत में आयुष बदोनी और सूर्यांश शेडगे ने तेजी दिखाई. बदोनी ने 18 गेंदों पर 24 रन बनाए, जबकि शेडगे 14 गेंदों पर 26 रन बनाकर नाबाद लौटे. दोनों के बीच 46 रन की तेज साझेदारी ने भारत A को 50 ओवर में 277/6 तक पहुंचा दिया।  श्रीलंका का दमदार रनचेज, लेकिन फ‍िर हालत खराब  लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका A ने दमदार शुरुआत की. वापसी कर रहे न‍िरोशन डिकवेला (47) और अविष्का फर्नांडो (45) ने पहले विकेट के लिए 93 रन जोड़कर भारत पर दबाव बनाया. हालांकि दोनों बल्लेबाज आयुष बदोनी की स्पिन के खिलाफ बड़े शॉट खेलने के प्रयास में आउट हो गए।  इसके बाद सदीरा समरविक्रमा ने 46 रन बनाए, जबकि कप्तान सहान अराचिगे ने 72 गेंदों पर 74 रन की बेहतरीन पारी खेली. अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखने वाले सहान ने टीम को जीत के बेहद करीब पहुंचा दिया था।  श्रीलंका को अंतिम 10 गेंदों में सिर्फ 9 रन चाहिए थे और उसके हाथ में तीन विकेट थे. तभी तेज गेंदबाज अंशुल कांबोज ने सटीक यॉर्कर पर सहान को बोल्ड कर भारत को मैच में वापस ला दिया. इसके बाद श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने दबाव में लगातार गलतियां कीं।  अंतिम ओवर में भारत ने तीन विकेट झटककर मुकाबला पूरी तरह भारत की झोली में डाल दिया. यह ओवर अरशद खान ने फेंका, 2 व‍िकेट उनको मिले, वहीं एक व‍िकेट रनआउट हुआ. श्रीलंका A की पूरी टीम 48.5 ओवर में 269 रन पर सिमट गई और भारत A ने 8 रन से रोमांचक जीत दर्ज कर ली।  गेंदबाजी में आयुष बदोनी (2/46) और अनुकुल रॉय (2/49) ने अहम भूमिका निभाई. दोनों स्पिनरों ने बीच के ओवरों में रन गति पर लगाम लगाकर भारत को मुकाबले में बनाए रखा. भारत A अब 11 जून को इसी मैदान पर अफगानिस्तान A के खिलाफ अपना अगला मुकाबला खेलेगा। 

दिल्ली-मेरठ नमो भारत की बढ़ी रफ्तार, 24 घंटे में 1.25 लाख यात्रियों के साथ बना नया कीर्तिमान

 नई दिल्ली दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर ने सबसे ज्यादा यात्रियों का नया रिकॉर्ड बनाया है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने मंगलवार को जानकारी दी कि नमो भारत ट्रेन से 8 जून को एक दिन में करीब 1,25,500 यात्रियों ने सफर किया।    यह आंकड़ा अब तक का सबसे ज्यादा है. आम दिनों में औसतन एक लाख यात्री नमो भारत ट्रेन से सफर करते हैं. NCRTC के मुताबिक, सोमवार को यात्री संख्या में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली।  क्यों बढ़ रहे हैं यात्री? NCRTC ने बताया कि कई कारणों से लोग नमो भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं. दरअसल, नमो भारत के जरिए मेरठ से दिल्ली की यात्रा का समय काफी कम हो गया है. सड़क के ट्रैफिक जाम से बचना आसान हो गया है. वहीं,  गर्मी के प्रकोप (40 डिग्री से ऊपर तापमान) के बीच पूरी तरह एयर कंडीशंड ट्रेनें ठंडक और आरामदायक साबित हो रही हैं. दिल्ली-एनसीआर में रोजाना सफर करने वाले यात्री अब नमो भारत का इस्तेमाल कर रहे हैं।  किस स्टेशन पर सबसे ज्यादा भीड़ रही? दिल्ली में सराय काले खां, न्यू अशोक नगर और आनंद विहार स्टेशन सबसे ज्यादा व्यस्त रहे. वहीं, उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद और बेगमपुल स्टेशन भी काफी भीड़ वाले रहे. इन पांचों स्टेशनों पर कुल यात्रियों में से 40 प्रतिशत से ज्यादा सवारियां होती हैं।  खास बात यह है कि यह स्टेशन मेट्रो, रेलवे, इंटर-स्टेट बस टर्मिनल और शहर की बस सर्विस से कनेक्ट हैं. इससे यात्रियों को आसानी होती है. मेरठ में लोकल मेट्रो सेवाएं भी नमो भारत के ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर चल रही हैं. इससे शहर के अंदर भी सफर आसान हो गया है।  यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए NCRTC ने हाल ही में पीक ऑवर्स में 18 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हैं. ये अतिरिक्त ट्रिप्स सुबह और शाम के पीक समय में सराय काले खां से मेरठ साउथ के बीच चलाई जा रही हैं।  NCRTC ने कहा कि नमो भारत अब दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के रोजाना के सफर का महत्वपूर्ण साधन बनती जा रही है. इससे समय की बचत, भरोसेमंद सेवा और आरामदायक यात्रा की वजह से लोग सड़क के बजाय इस ट्रेन को चुन रहे हैं. पूरी तरह एयर कंडीशंड ट्रेनें गर्मी से राहत दे रही हैं और लोगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचा रही हैं. नमो भारत रैपिड रेल अब NCR क्षेत्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मजबूत विकल्प साबित हो रही है। 

आयुर्वेद और योग को घर-घर पहुंचाने का आह्वान, आयुष मंत्री परमार बोले- स्वस्थ समाज का यही आधार

"आयुर्वेद और योग को जन-जन तक पहुँचाकर स्वस्थ समाज का निर्माण करें": आयुष मंत्री परमार मंत्री परमार की अध्यक्षता में शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन की साधारण सभा की बैठक हुई भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन की साधारण सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मंत्री परमार ने महाविद्यालय के विकास, आयुर्वेद के संवर्धन तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। आयुष मंत्री परमार ने आगामी सिंहस्थ महापर्व की दृष्टि से शासकीय धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। मंत्री परमार ने कहा कि सिंहस्थ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और जीवनशैली आधारित स्वास्थ्य पद्धतियों को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का उपयोग आयुर्वेद और योग के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा जनजागरूकता के लिए किया जाना चाहिए। मंत्री परमार ने कहा कि योग भारत की अमूल्य धरोहर है और इसे गाँव-गाँव तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने संस्थान से योग को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक योग गतिविधियाँ संचालित करने तथा लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष प्रयास करने का आह्वान किया। मंत्री परमार ने आयुर्वेद को जन-जन तक पहुँचाने के लिए इसे भारतीय रसोई (किचन) से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय भोजन परंपरा स्वयं में आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित रही है तथा दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले मसाले, औषधीय पौधे एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य संरक्षण के प्रभावी माध्यम हैं। आयुर्वेद को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए इसकी उपयोगिता को प्रत्येक घर तक पहुँचाना आवश्यक है। बैठक में पिछले वर्ष की कार्यकारिणी सभा के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन पर चर्चा की गई। मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिसर में 500 बिस्तरों वाले आयुर्वेद चिकित्सालय के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने महाविद्यालय परिसर में नवीन ऑडिटोरियम निर्माण किए जाने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने महाविद्यालय परिसर में अतिथि गृह तथा छात्रावास अधीक्षकों के आवास निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए। बैठक में उज्जैन (उत्तर) विधायक अनिल जैन कालूहेडा, उप सचिव आयुष श्रीमती रंजना देवड़ा, आयुष संचालनालय की प्रतिनिधि डॉ. वंदना बोराना, महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. जे.पी. चौरसिया, नीमा जिलाध्यक्ष डॉ अनिल सराफ, पूर्व छात्र डॉ ईश्वर सिंह सिसोदिया सहित अन्य अधिकारी, साधारण सभा के सदस्यगण एवं महाविद्यालय के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक का संचालन डॉ अजयकीर्ति जैन और आभार प्रदर्शन प्रो. नृपेन्द्र मिश्रा ने किया।  

मंत्री परमार का निर्देश: विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों और आधुनिक कौशल के अनुरूप करें तैयार

विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में कार्य करें : मंत्री परमार उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक हुई भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद की बैठक सम्पन्न हुई। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने संस्थान के शैक्षणिक, शोध, छात्र कल्याण एवं अधोसंरचनात्मक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्देश दिए। मंत्री परमार ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने जापान सहित भारत के सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों वाले देशों की भाषाओं के प्रशिक्षण पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे तथा वे विदेशों में प्रभावी संवाद स्थापित कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान को इस दिशा में नवाचारपूर्ण पहल करने के निर्देश दिए। मंत्री परमार ने छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए परिसर में सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं के लिए स्वच्छ, आधुनिक एवं पर्याप्त शौचालय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया तथा कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित और सुविधायुक्त परिसर भी उतना ही आवश्यक है। मंत्री परमार ने संस्थान परिसर में वृहद स्तर पर नीम, बरगद, पीपल, जामुन एवं आम जैसे पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों के रोपण के निर्देश दिए। उन्होंने संस्थान के हरित वसुंधरा क्लब द्वारा लुप्तप्राय वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण एवं रोपण के संकल्प की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को अनुकरणीय बताया। मंत्री परमार ने संस्थान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत शोधपत्रों के संकलन एवं संस्थान के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन का विमोचन भी किया। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा विभाग अनुपम राजन ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं कल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक में संस्थान के वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट 12 करोड़ 86 लाख 3 हजार 503 रुपये को स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही संस्थान के प्रत्येक संकाय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संचालक पदक प्रदान किए जाने तथा सामान्य परिषद के अध्यक्ष के नाम से विशेष पदक स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया। परिषद ने प्रत्येक संकाय के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के शैक्षणिक शुल्क में राहत प्रदान करने के प्रस्ताव को भी सहर्ष स्वीकृति दी। बैठक में उच्च स्तरीय शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फोरियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोप (FTIR) उपकरण के क्रय के लिये 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। साथ ही विभिन्न स्तरों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को भी परिषद द्वारा अनुमोदित किया गया। बैठक में संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल द्वारा सामान्य परिषद को अवगत कराया गया कि वर्ष 2026 में भारतीय वाणिज्य परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में संस्थान द्वारा सेज विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर परिषद ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपनी सहमति प्रदान की। बैठक में विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा अनिल पाठक, डॉ दिवा मिश्रा, माधव विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हरीश व्यास, सीए संजय श्रीवास्तव, डॉ. शैलजा दुबे, डॉ. महिपाल सिंह यादव, डॉ. ज्योति सक्सेना, डॉ. रामकृष्ण श्रीवास्तव, डॉ. सभाकांत द्विवेदी, डॉ. स्वामी स्वरूप श्रीवास्तव, डॉ. अमित जैन, डॉ. निधि चौहान, डॉ. रचना सिंह ठाकुर एवं डॉ. अमित मांडले सहित सामान्य परिषद के सदस्य उपस्थित थे।  

भारत-जर्मनी रिश्तों को मिला नया विस्तार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गिनाईं सहयोग की संभावनाएं

भारत, जर्मन संबंधों को मिला है नया आयाम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले जर्मनी के काउंसलेट जनरल हालियर भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में जर्मनी के काउंसलेट जनरल क्रिस्टोफ हालियर ने भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हालियर का पुष्प-गुच्छ और विश्व धरोहर स्मारक सांची की फ्रेम युक्त तस्वीर भेंट कर स्वागत किया।हालियर ने भोपाल की सुंदरता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी जर्मनी की यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी जर्मनी यात्रा सुखद रही थी। भारत और जर्मनी के प्राचीन काल से संबंध हैं जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब नया आयाम मिल रहा है। उद्योग और व्यवसाय जगत में दोनों देशों के संबंध मजबूत हैं। ये संबंध अब अधिक प्रगाढ़ हो रहे हैं। उद्योग और व्यवसाय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में संयुक्त रूप से ठोस कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जर्मन विद्वान मैक्समूलर ने भारतीय ग्रंथों और वेदों का जर्मनी और अन्य भाषाओं में अनुवाद किया था। वे संस्कृत के भी विद्वान थे और स्वामी विवेकानंद की नैसर्गिक प्रतिभा के कायल थे। मध्यप्रदेश में उपलब्ध प्राकृतिक और मानव संसाधनों के साथ जर्मनी की तकनीक का संगम हो, इस दृष्टि से नवम्बर 2024 में म्यूनिख जर्मनी में इण्टरैक्टिव सेशन भी आयोजित किया गया था। मध्यप्रदेश जर्मनी के साथ दोतरफा सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में जर्मन प्रतिष्ठानों द्वारा निवेश के साथ ही जर्मन भाषा के प्रशिक्षण के लिए भी सहयोग दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में जर्मन भाषा के शिक्षण की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश की दृष्टि से जर्मन के औद्योगिक संस्थानों का मध्यप्रदेश में स्वागत है। गत 2 वर्ष में निवेश के कई प्रस्तावों को क्रियान्वित किया गया है। उन्होंने अब फिर से वह समय आया है जब विश्व की प्रमुख भाषाओं का अध्ययन किसी भी देश में किया जा सकता है। मध्यप्रदेश में जर्मन के शिक्षण- प्रशिक्षण की व्यवस्थाएं अनेक उच्च शिक्षा संस्थाओं में की गई हैं। हमारे युवा भी भारतीय भाषाओं के साथ विदेशी भाषाएं सीखना चाहते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जर्मन कॉउंसलेट द्वारा पुन: जर्मनी आने के आमंत्रण पर कहा कि वे एक बार नहीं इससे अधिक बार जर्मनी आएंगे। निश्चित ही दोतरफा सहयोग का यह क्रम जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा सतत विकास के क्षेत्रों में जर्मनी के साथ साझेदारी को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर स्थित इंडो-जर्मन टूल रूम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दोनों देशों के सफल औद्योगिक सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। बैठक में जर्मन ड्यूल एजुकेशन मॉडल के माध्यम से युवाओं के कौशल उन्नयन, मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और जर्मनी के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों एवं पेशेवरों के लिए नए अवसर विकसित करने के विषय में भी सार्थक चर्चा हुई। जल संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता और जल गंगा संवर्धन अभियान जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। काउंसलेट जनरल क्रिस्टोफ हालियर ने कहा कि उन्हें मध्यप्रदेश आना अच्छा लगता है। वे यहां आकर प्रसन्न हैं। इंदौर और भोपाल में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से भेंट की है। हालियर ने जानकारी दी कि इसी वर्ष जनवरी माह में अहमदाबाद में प्रधानमंत्री मोदी से जर्मन के फेडरल चान्सलर फ्रेडरिक मर्ज ने भेंट की है। मर्ज की भारत यात्रा का उद्देश्य भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करना था। भारत की संस्कृति से जर्मन चांसलर प्रभावित हुए थे और उन्होंने अंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भी हिस्सा लिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को काउंसलेट जनरल क्रिस्टोफ हालियर ने जर्मनी की ओर से विशेष स्मृति चिन्ह भी भेंट किया। हालियर ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उन्हें दिए गए सम्मान और आत्मीयता के लिए आभार माना। इस अवसर पर जर्मन काउंसलेट सेंटर इंडिया के पदाधिकारी अविनाश कश्यप ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग पूर्ण सहयोग के लिए तत्पर रहता है। हाल ही में नागदा में जर्मन सहयोग से संचालित संस्थान की समस्या का अविलंब समाधान किया गया है। उद्योग संचालन में आने वाली किसी भी कठिनाई को मध्यप्रदेश शासन की ओर से तत्काल दूर किया जाता है। इस अवसर पर एमपी औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड में प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला भी उपस्थित थे।  

आधुनिकता के साथ संस्कृति का संगम: PM मोदी के कार्यकाल में भारत की बदलती पहचान

  भोपाल मई 2014 में जब हमारे देवतुल्य नरेंद्र मोदीजी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब देश की जनता ने केवल एक सरकार नहीं चुनी थी, बल्कि शासन की एक नई कार्यशैली और राजनीतिक संस्कृति की अपेक्षा भी व्यक्त की थी. बारह वर्ष बाद इस यात्रा को केवल योजनाओं,आंकड़ों और उपलब्धियों के आधार पर नहीं, बल्कि उस व्यापक दृष्टिकोण के आधार पर समझना अधिक उचित होगा, जिसने शासन की सोच को प्रभावित किया. यदि इन बारह वर्षों को तीन शब्दों में समेटना हो, तो वे शब्द होंगे- सेवा, सुशासन और संकल्प।  राजनीति से आगे सेवा का भाव भारतीय राजनीति में लंबे समय तक सत्ता को अधिकार और विशेषाधिकार के रूप में देखा जाता रहा. हमारे देवतुल्य नेता नरेंद्र मोदी जी ने इसे सेवा के रूप में प्रस्तुत करने का सफल प्रयास किया. उन्होंने स्वयं को कई बार प्रधान सेवक कहा. यह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि शासन की भाषा और शैली में दिखाई देने वाला दृष्टिकोण भी था. सेवा का अर्थ केवल कल्याणकारी योजनाएं चलाना नहीं है. सेवा का अर्थ है कि शासन स्वयं को जनता का संरक्षक नहीं, बल्कि उसका सेवक माने. इस दृष्टि से पिछले बारह वर्षों में शासन की प्राथमिकताओं में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की चिंता है. गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को केवल वोट बैंक के रूप में नहीं, बल्कि विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखने की सफल कोशिश की गई है।  यह वही सोच है, जिसकी जड़ें पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद में दिखाई देती है. मोदी जी की सरकार ने बार-बार यह संदेश दिया है कि विकास का वास्तविक अर्थ तब है, जब उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक पहुंचे।  सुशासन: व्यवस्था में विश्वास की पुनर्स्थापना लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं चलता, बल्कि संस्थाओं और व्यवस्थाओं पर जनता के विश्वास से चलता है. लंबे समय तक भारतीय नागरिक की एक शिकायत रही कि सरकार दूर है, प्रक्रियाएं जटिल हैं और व्यवस्था आम आदमी के लिए कठिन हैं।  पिछले बारह वर्षों में शासन की चर्चा करते समय सुशासन एक प्रमुख शब्द बनकर उभरा. सुशासन का अर्थ केवल भ्रष्टाचार कम करना या तकनीक का उपयोग बढ़ाना नहीं होता है. इसका वास्तविक अर्थ है सरकार को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और प्रभावी बनाना. डिजिटल तकनीक का उपयोग इसी दर्शन का हिस्सा था. तकनीक को केवल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि सुशासन का माध्यम माना गया. शासन और नागरिक के बीच की दूरी कम करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा निर्णयों को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास हुए।  सुशासन का एक महत्वपूर्ण पहलू निर्णय लेने की क्षमता भी है. लोकतंत्र में संवाद आवश्यक है, लेकिन अनिर्णय विकास का सबसे बड़ा शत्रु होता है. हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार की कार्यशैली में यह स्पष्ट दिखाई दिया है कि बड़े निर्णयों से बचने के बजाय उन्हें समाधान तक कैसे पहुंचाया जाए? दरअसल इसे ही निर्णायक नेतृत्व कहते हैं. यह निर्विवाद है कि निर्णय लेने की क्षमता इस शासनकाल की प्रमुख पहचान रही है।  संकल्प: विकसित भारत का सपना हर युग की राजनीति का एक केंद्रीय विचार होता है. स्वतंत्रता आंदोलन का विचार स्वराज था. स्वतंत्रता के बाद का विचार राष्ट्र निर्माण था. इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में मोदी सरकार ने विकसित भारत को राष्ट्रीय संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया. यह संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है. इसके भीतर आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव की भावना भी जुड़ी हुई है. पिछले बारह वर्षों में बार-बार यह संदेश दिया गया कि भारत को केवल विकासशील राष्ट्र के रूप में संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे विश्व की अग्रणी शक्तियों में स्थान प्राप्त करना चाहिए।  यह दृष्टिकोण भारतीय समाज में एक नए आत्मविश्वास का निर्माण करता है. लंबे समय तक भारत अपनी संभावनाओं की चर्चा तो करता था, लेकिन उन्हें प्राप्त करने का साहस कम दिखाई देता था. आज विकसित भारत का विचार एक राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में स्थापित हुआ है।  मोदीजी का आशीर्वाद मध्यप्रदेश के साथ अपने देवतुल्य, 'प्रधानसेवक' से प्रेरणा लेकर हमने भी विकसित मध्यप्रदेश का सपना देखा. यह बताते हुए मन भाव विभोर है कि मोदीजी का हर कदम पर हर निर्णय पर मार्गदर्शन, स्नेह और आशीर्वाद मिला. चाहे वर्षों से लंबित केन बेतवा और पार्वती-कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना हो या पीएम मित्र पार्क, उन्होंने आगे बढ़कर परेशानियों को दूर किया, उनके जैसा नेतृत्व दुर्लभ है।  देश के सात राज्यों में पीएम मित्र पार्क बनाने का निर्णय हुआ, तो उस सूची में मध्यप्रदेश को भी रखा गया. यह अति प्रसन्नता का विषय है कि अब तक सिर्फ मध्यप्रदेश में ही पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन हुआ है और यह गौरव का विषय रहा कि धार में पार्क के भूमिपूजन में प्रधानमंत्री जी शामिल हुए. यह सब मध्यप्रदेश से उनके विशेष लगाव का परिणाम ही है।  प्रदेश में साइबर तहसील का सफल क्रियान्वयन हो या भोपाल और इंदौर में मेट्रो रेल, सब प्रधानमंत्रीजी के स्नेह आशीर्वाद मार्गदर्शन का ही परिणाम है. आज प्रदेश में नौ एयरपोर्ट हैं, तो इसके पीछे भी उनका ही मार्गदर्शन है।  आज हमारा मध्यप्रदेश नक्सल मुक्त है, तो इसके पीछे उनका ही दिशा-निर्देश है. उन्होंने समय-समय पर समझाया तो चेताया भी. उन्होंने कहा कि गोली का जवाब गोली से दो पर जो लोग बंदूक-हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, उनके लिए बेहतर से बेहतर पुनर्वास की व्यवस्था भी हो।  उनकी सलाह चेतावनी का ही सुफल है कि आज मध्यप्रदेश लाल सलाम को आखिरी सलाम कह चुका है. आज मध्यप्रदेश में उद्योगों का जाल बिछ रहा है, लाखों करोड़ का निवेश हो रहा है, तो इसके पीछे प्रधानमंत्रीजी का ही मार्गदर्शन है. फरवरी 2025 में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में शामिल होना, उनका विशेष स्नेह ही तो दर्शाता है. उन्होंने हमें संवेदना की सीख दी है. बताया है कि नर ही नारायण हैं. वंचितों-गरीबों में नारायण के दर्शन करो. उनकी सीख ही थी कि हमने अपने शुरुआती निर्णयों में ही इंदौर के हुकुमचंद मिल के कामगारों को उनका बकाया अधिकार दिलवाने में सफलता हासिल की. कामगारों को चेक सौंपने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को प्रधानमंत्रीजी ने वर्चुअली संबोधित भी किया था।  मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में अग्रणी सरकारी कालेजों को प्रधानमंत्री … Read more

मीनाक्षी नटराजन का पर्चा रद्द, राज्यसभा की तीनों सीटों पर BJP उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत लगभग तय

भोपाल मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस (Congress) की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है, कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन पत्र मंगलवार को जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने रद्द कर दिया. इसके साथ ही प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है. मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की जीत लगभग तय मानी जा रही है. भाजपा के अन्य दो उम्मीदवार राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल भी बिना मुकाबले राज्यसभा पहुंचेंगे।  राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर और विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने नटराजन का नामांकन इस आधार पर निरस्त किया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले की जानकारी नहीं दी. मामला 2025 का बताया जा रहा है, जिसमें हैदराबाद के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक पूर्व पार्षद की निजी शिकायत पर मीनाक्षी नटराजन को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223 के तहत नोटिस जारी किया था. नटराजन वर्तमान में तेलंगाना की कांग्रेस प्रभारी भी हैं।  साढ़े चार घंटे की सुनवाई के बाद फैसला भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने इसी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई थी. केवट ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अदालत से जारी नोटिस की जानकारी अपने हलफनामे में नहीं दी, इसलिए उनका नामांकन रद्द किया जाना चाहिए. करीब साढ़े चार घंटे की सुनवाई और इंतजार के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा की आपत्ति स्वीकार करते हुए नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया।  कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया कांग्रेस ने इस फैसले को असंवैधानिक, अवैध और लोकतंत्र पर हमला बताया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी महिला सम्मान और महिला आरक्षण की बात तो करती है, लेकिन मध्य प्रदेश में जो घटनाक्रम सामने आया है, उसने भाजपा की वास्तविक सोच को देश और दुनिया के सामने उजागर कर दिया है. महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के नाम पर केवल राजनीतिक दिखावा किया जा रहा है।  उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर और निर्वाचन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. पटवारी ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी को निष्पक्षता और कानून के दायरे में काम करना चाहिए था, लेकिन जिस तरह की भूमिका सामने आई है, उससे उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने कहा, 'आज मध्य प्रदेश में हुई घटना पूरे देश के लिए एक काला अध्याय है. इसके विरोध में कल मध्य प्रदेश कांग्रेस का हर नेता और हर कार्यकर्ता चुनाव आयोग और भाजपा द्वारा किए गए इस लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ भूख हड़ताल करेगा।  नेता प्रतिपक्ष का भाजपा पर आरोप नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा को शुरू से मालूम था कि कांग्रेस के पास राज्यसभा चुनाव में 62 विधायकों का समर्थन है. इसके बावजूद कांग्रेस विधायकों के टूटने की अफवाहें फैलाई गईं और चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की गई. सिंघार ने कहा, 'जब यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस विधायक एकजुट हैं, तब नामांकन प्रक्रिया को लेकर आपत्तियों और अन्य प्रक्रियाओं का सहारा लिया गया।  मीनाक्षी नटराजन ने भी फैसले को लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा गंभीर विषय बताया. उन्होंने कहा, 'जब सदन में पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारा, तभी से हमें समझ में आने लगा था कि वे लोकतंत्र और संविधान का गला घोंटने की राजनीति कर रहे हैं. जो बात पहले वोट चोरी तक सीमित थी, वह अब सीट चोरी तक पहुंच गई है।  मीनाक्षी नटराजन ने क्या कहा? नटराजन ने कहा कि जब भाजपा को यह महसूस हुआ कि कांग्रेस विधायक एकजुट हैं और सदन विभाजित नहीं है, तब एक कानूनी नोटिस का सहारा लिया गया. उन्होंने कहा, 'हमारे दोनों अधिवक्ताओं ने अपने तर्क प्रस्तुत किए, लेकिन उन्हें सुना नहीं गया और फैसला सुना दिया गया. इससे उनकी मंशा पूरी तरह स्पष्ट हो गई है. यह केवल एक उम्मीदवार के नामांकन का मामला नहीं है, बल्कि देश में लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा एक गंभीर विषय है।  कांग्रेस के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने का आदेश कानून और स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत है. उनके अनुसार, हैदराबाद न्यायालय द्वारा जारी नोटिस BNSS की धारा 223 के अंतर्गत था, जो केवल सुनवाई का अवसर प्रदान करने की प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में न तो किसी अपराध का संज्ञान लिया गया था, न कोई समन जारी हुआ था और न ही नटराजन को किसी आपराधिक प्रकरण में आरोपी घोषित किया गया था।  कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी पार्टी? गुप्ता ने कहा, 'धारा 223 स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी प्रकरण में न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान लेने से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर उसका पक्ष सुना जाएगा. ऐसे में इसे आपराधिक प्रकरण मानना ही विधि सम्मत नहीं है.' उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस की ओर से विस्तृत लिखित जवाब, न्यायिक निर्णयों और कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया गया था, लेकिन उन तर्कों पर विचार किए बिना आदेश पारित कर दिया गया।  गुप्ता ने कहा, 'आदेश में हमारे प्रमुख कानूनी तर्कों का उल्लेख तक नहीं है. इसलिए हमारा मानना है कि यह एक नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर है, जो तथ्यों और कानून के समुचित परीक्षण के बिना पारित किया गया है. हम इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौती देंगे और न्यायपालिका के समक्ष सभी तथ्य रखेंगे हमें विश्वास है कि कानून और न्याय की जीत होगी।  नामांकन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया ने नामांकन प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि नामांकन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे. दस विधायकों के हस्ताक्षर, शपथ पत्र, रसीद और अन्य सभी जरूरी दस्तावेज पूरी तरह प्रस्तुत किए गए थे. अधिकारियों द्वारा दी गई चेकलिस्ट में भी स्पष्ट रूप से दर्ज था कि सभी दस्तावेज सही हैं और कोई कमी नहीं है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मंगलवार की कार्यवाही के दौरान जब कांग्रेस नेता दोपहर करीब दो बजे पहुंचे, तब वहां सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रोहित आर्य मौजूद थे।  धनोपिया ने कहा, 'हमने यह प्रश्न उठाया कि वे किस हैसियत से … Read more

उत्तर प्रदेश बनेगा इंडस्ट्री हब! 10 नए औद्योगिक क्षेत्रों के साथ केंद्र लाएगा जन विश्वास विधेयक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में प्लग एंड प्ले नीति के तहत 10 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जाएगी। केंद्र सरकार की मदद से स्थापित होने वाले इस औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने प्रस्ताव भेज दिया है, हालांकि अभी यह तय नहीं है कि यह औद्योगिक क्षेत्र किन जिलों में स्थापित किए जाने हैं।  पिकप भवन में उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआइआइटी) के संयुक्त सचिव डा. जय प्रकाश शिवहरे ने बताया कि केंद्र सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए ईज आफ डूइंग बिजनेस (कारोबार में सुगमता) को बढ़ावा देने को लेकर देश भर में 100 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की योजना पर काम शुरू किया है। एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों का विकास प्राथमिकता यीडा के सीईओ आर.के. सिंह के अनुसार, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास स्थित सेक्टरों का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है. एयरपोर्ट के संचालन से पहले इन क्षेत्रों में सड़क, जलापूर्ति, सीवर और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे एयरपोर्ट आधारित उद्योगों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश का केंद्र बन सकेगा।  46 नए सेक्टरों के लिए सर्विस मास्टर प्लान पर काम यमुना सिटी में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 46 नए सेक्टरों के लिए सर्विस मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है. इसके अंतर्गत जलापूर्ति, सीवर नेटवर्क, ड्रेनेज और अन्य शहरी सुविधाओं की विस्तृत योजना बनाई जाएगी. यीडा ने इसके लिए आरएफपी जारी कर आवेदन आमंत्रित किए हैं. यह योजना शहर के व्यवस्थित और टिकाऊ विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  ग्रेटर नोएडा में गरीब परिवारों के लिए बनेंगे किफायती फ्लैट ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के परिवारों के लिए किफायती आवास योजना पर तेजी से काम कर रहा है. बिरौंडा और पतवाड़ी गांव के पास जमीन चिह्नित की गई है, जहां बहुमंजिला आवासीय परियोजनाएं विकसित होंगी. लगभग 30 वर्गमीटर आकार के फ्लैटों में लिफ्ट और दैनिक जरूरतों की दुकानों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे निम्न आय वर्ग को बेहतर आवास मिल सके।  श्रमिकों को कम कीमत में बेहतर आवास देने की योजना ग्रेटर नोएडा के सीईओ रवि कुमार एनजी ने बताया कि श्रमिकों और निम्न आय वर्ग के लोगों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना प्राधिकरण का उद्देश्य है. परियोजना और नियोजन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं. जमीन चिन्हित होने के बाद योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा. इससे हजारों श्रमिक परिवारों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास का लाभ मिल सकेगा।  इसके लिए राज्यों से जुलाई तक नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना संबंधी प्रस्ताव मांगे गए हैं। पहले और दूसरे चरण में 25-25 औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि कारोबार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए जन विश्वास (प्रविधान संशोधन) विधेयक-3.0 लाने की तैयारी की जा रही है। जन विश्वास-2.0 के तहत 717 प्रकार के औद्योगिक अपराधों में सीधे जेल भेजे जाने के प्रविधान को समाप्त किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश से निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। इनवेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरन आनंद ने बताया कि निर्यात के मामले में उत्तर प्रदेश 11वें स्थान से 9वें स्थान पर आ गया है। इससे पहले उन्होंने निर्यातकों व औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जन विश्वास (प्रविधान संशोधन) विधेयक में संशोधन को लेकर उनकी राय ली।  

SBI रिपोर्ट में खुलासा: पारंपरिक अपराध कम हुए, साइबर अपराधों ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली देश में अपराध की तस्वीर बदल रही है. एक तरफ पारंपरिक अपराधों में कमी दर्ज की जा रही है, तो दूसरी तरफ इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में अपराधियों के नए तरीके सामने आ रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में कुल अपराध दर घटी है, लेकिन साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में अपराध, अर्थव्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और तकनीक के बीच के रिश्ते पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं।  SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वर्ष 2024 के दौरान 58.86 लाख संज्ञेय (Cognizable) अपराध दर्ज किए गए. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत कम है. देश की कुल अपराध दर भी घटकर प्रति लाख आबादी पर 448.3 से 418.9 रह गई है. रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक निवेश, डिजिटलीकरण और निगरानी तंत्र में सुधार इसके प्रमुख कारण हैं।  हालांकि कुल अपराध कम हुए हैं, लेकिन साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में साइबर क्राइम के मामले 1 लाख के आंकड़े को पार कर सकते हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन बैंकिंग और इंटरनेट आधारित सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं।  रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में भी थोड़ी कमी दर्ज की गई है. वर्ष 2023 में ऐसे 4.48 लाख मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 में घटकर 4.41 लाख रह गए. यह करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट है। हालांकि रिपोर्ट का कहना है कि चुनौती का स्तर अभी भी बहुत बड़ा है और इसे सफलता नहीं माना जा सकता।  एएनआई के मुताबिक, SBI का मानना है कि UPI, FASTag और डिजिटल निगरानी जैसे साधनों ने अपराधियों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है. डिजिटल ट्रेल की वजह से अपराध करने वालों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना पहले की तुलना में अधिक हो गई है. इससे अपराध करने की लागत और खतरा दोनों बढ़े हैं।  रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन क्षेत्रों में अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, वहां अपराध में हल्की गिरावट देखने को मिली है. वर्ष 2022 से 2024 के बीच CCTV कैमरों और अपराध दर के बीच नकारात्मक संबंध (-0.148) दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि निगरानी बढ़ने से अपराध कम होने की संभावना बढ़ती है।  स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देश के सभी 100 स्मार्ट शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) संचालित किए जा रहे हैं. ये सेंटर डेटा, तकनीक, निगरानी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को एक साथ जोड़ते हैं. इसका मकसद शहरी प्रबंधन को बेहतर बनाना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।  रिपोर्ट के अनुसार 100 स्मार्ट शहरों में 84,000 से अधिक CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 1,884 इमरजेंसी कॉल बॉक्स और लगभग 3,000 पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी स्थापित किए गए हैं. SBI का कहना है कि ये सुविधाएं लोगों में सुरक्षा की भावना और अपराधियों में पकड़े जाने का डर बढ़ाती हैं।  रिपोर्ट में अपराध और आर्थिक विकास के बीच दिलचस्प संबंध का उल्लेख किया गया है. अध्ययन बताते हैं कि अपराध बढ़ने से निवेश प्रभावित होता है, व्यापारिक लागत बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर पड़ता है. इससे विकास की गति धीमी हो सकती है और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है।  SBI के अनुसार प्रति लाख आबादी पर IPC/BNS अपराध दर में 1 प्रतिशत की कमी आने पर अल्पकाल में वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 0.11 प्रतिशत बढ़ सकती है. यानी अपराध कम होने का फायदा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा लाभ अर्थव्यवस्था और विकास दर को भी मिलता है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध श्रम बाजार में बाधा पैदा करते हैं और महिला कार्यबल की भागीदारी को प्रभावित करते हैं. NCRB 2024 के अनुसार पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1,20,227 मामले और 1,21,166 पीड़ित दर्ज किए गए।  वहीं NFHS-5 के आधार पर अनुमान है कि करीब 27.88 करोड़ विवाहित महिलाओं में से 24 प्रतिशत ने पिछले 12 महीनों में शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया. इसका अनुमानित वार्षिक बोझ करीब 6.69 करोड़ महिलाओं तक पहुंचता है. रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक और श्रम नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।