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स्ट्रीट वेंडर्स के लिए बड़ी राहत, मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम तेज, 30 जून तक विशेष अभियान

भोपाल  सड़कों और फुटपाथों पर दुकान चलाकर अपनी आजीविका चलाने वाले छोटे कारोबारियों (पथ विक्रेताओं) को डिजीटल, वित्तीय और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। 'प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि' (पीएम स्वनिधि) योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरे प्रदेश में 1 जून से 30 जून तक एक विशेष महा-अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जहां एक ओर जिला मुख्यालयों पर उत्सव का माहौल रहेगा, वहीं दूसरी ओर नगरीय निकायों में 'सेवाएं आपके द्वार' की तर्ज पर काम होगा। बताई जाएंगी प्रेरक कहानियां ना के सफल लाभार्थियों और उनके परिवारों की प्रेरक सफलता की कहानियों को साझा किया जाएगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले पथ विक्रेताओं को सम्मानित कर अन्य हितग्राहियों को आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य योजना के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ पहुंचाना है। प्रदेश में राज्य शासन, नगरीय निकायों और ऋणदाता संस्थाओं के सहयोग से अब तक 10 लाख से अधिक पथ विक्रेताओं को योजना का लाभ मिल चुका है। लोक कल्याण मेलों में मिलेगी वित्तीय और डिजिटल सहायता नगरीय निकाय स्तर पर आयोजित लोक कल्याण मेलों के माध्यम से पथ विक्रेताओं को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें- – बिना गारंटी के 15 हजार रुपये तक का ऋण – न्यूनतम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता – क्रेडिट कार्ड संबंधी जानकारी – डिजिटल लेन-देन के लिए मार्गदर्शन – बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच जैसी सुविधाएं शामिल हैं। बैंकर्स-वेंडर्स बैठकें और शिकायतों का समाधान अभियान के दौरान बैंकर्स और पथ विक्रेताओं की विशेष बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे बैंकिंग सेवाओं की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हो सके। वहीं नगरीय निकाय सहायता केंद्रों के माध्यम से वेंडर्स की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित निराकरण भी किया जाएगा। दूरस्थ क्षेत्रों में लगेंगे स्वनिधि कैंप सेंसस टाउन स्तर पर “स्वनिधि कैंप” आयोजित कर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पथ विक्रेताओं को योजना से जोड़ा जाएगा। विशेष शिविरों में नए और छूटे हुए पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उनका पंजीयन कराया जाएगा तथा ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र वेंडर योजना के लाभ से वंचित न रहे।  

गर्भवती महिलाओं के लिए हीट अलर्ट! गर्मी और उमस से प्रभावित हो सकता है शिशु का विकास

 नई दिल्ली ज्यादा गर्मी और उमस भरा मौसम गर्भ में पल रहे बच्चे को भी नुकसान कर सकता है. इसका सीधा असर उसके शारीरिक विकास पर पड़ने का खतरा है. इससे बच्चा ठिगनेपन का शिकार हो सकता है. जर्नल Science Advances में पब्लिश हुई स्टडी में यह दावा किया गया है. स्टडी में कहा गया है कि केवल बढ़ती गर्मी ही नहीं बल्कि उमस भी होने वाले बच्चे की सेहत के लिए बड़ा खतरा है. अगर इसको काबू करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो साल 2025 तक दक्षिण एशिया में होने वाले बच्चों में ठिगनेपन के मामले लाखों में बढ़ सकते हैं।  यह रिसर्च दक्षिण एशिया के लगभग दो लाख बच्चों पर की गई है. इसमें अधिकतर बच्चे भारत के थे. रिसर्च में प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा गर्मी और उमस का संबंध बच्चों में होने वाली स्टंटिंग ( ठिगनेपन) से पाया गया है। . क्या है स्टंटिंग? ये क्यों होती है  दिल्ली AIIMS में पीडियाट्रिक विभाग में डॉ. हिमांशु भदानी बताते हैं कि जब किसी बच्चे का शारीरिक विकास ठीक तरीके से नहीं होता है तो इसको स्टंटिंग कहते हैं. इसमें बच्चे की लंबाई उसके उम्र के हिसाब से कम रह जाती है. इसको आम भाषा में ठिगनापन भी कहते हैं. ये समस्या सिर्फ शारीरिक विकास तक ही सीमित नहीं रहती है, बल्कि इसमें बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और उसकी सीखने की क्षमता भी सामान्य बच्चों की तुलना में कम रहती है. इसका कारण कुपोषण होता है।  गर्मी और उमस का प्रेग्नेंसी पर असर रिसर्च में बताया गया है कि जब कोई गर्भवती महिला बहुत उमस और गर्मी वाले तापमान में रहती है तो उसके शरीर पर इसका असर पड़ता है. इससे डिहाइड्रेशन से लेकर हीट स्ट्रोक का रिस्क होता है. लंबे समय तक गर्म तापमान में रहने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए काफी मेहनत करता है.इससे शरीर पर ज्यादा प्रेशर पड़ने लगता है।  इसका एक असर महिला के प्लेसेंटा पर होता है. शरीर पर बढ़े प्रेशर के कारण प्लेसेंटा में ब्लड सर्कुलेशन सामान्य की तुलना में कम होने लगता है. इससे गर्भ में पल रहे बच्चे तक जरूरी पोषण नहीं पहुंच पाता और ऑक्सीजन भी कम जाता है. इससे उसकी ग्रोथ पर असर पड़ता है क्योंकि बच्चे को जरूरत के हिसाब से पोषण नहीं मिल पाता है।  गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में सबसे ज्यादा खतरा इस रिसर्च में दावा किया गया है कि प्रेग्नेंसी की आखिरी तीमाही यानी 28 वें हफ्ते से लेकर 40 वें हफ्ते तक गर्मी का असर बच्चे पर ज्यादा होता है. क्योंकि ये वो समय होता है जब बच्चे को पोषण की जरूरत ज्यादा होती है और उसका विकास हो रहा होता है.अगर इसी समय जरूरत के हिसाब से पोषण न मिले तो इसका असर बच्चे पर होता है।  भारत के इन राज्यों पर ज्यादा असर स्टडी में पाया गया कि भारत में बिहार, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश के इलाकों में रहने वाली महिलाओं में ये रिस्क अधिक है.ऐसा इसलिए क्योंकि इन इलाकों में उमस और गर्मी अधिक रहती है. रिसर्च में यह भी कहा गया है कि अभी तक जलवायु परिवर्तन का असर केवल आम लोगों पर देखा जा रहा था, लेकिन अब गर्भ में पल रहे बच्चे भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।  इस समस्या से बचने के लिए क्या किया जाना चाहिए रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान भी बताया है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस समस्या से बचने के लिए पहला कदम यह है कि गर्भवती महिलाओं को ज्यादा गर्म और उमस भरे वातावरण से बचाएं, साथ ही तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देने की जरूरत है. अगर ऐसा न किया गया तो इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ी पर होगा. साल 2025 तक दक्षिए एशिया में ठिगनेपन के लाखों मामले बढ़ जाएंगे। 

Parimal Nathwani को हरी झंडी, झारखंड राज्यसभा चुनाव में मुकाबला हुआ और दिलचस्प

रांची  झारखंड राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को बड़ी राहत मिली है. उनके नामांकन पर कांग्रेस की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों पर बुधवार को हुई सुनवाई पूरी हो गई. रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नाथवानी की ओर से दिए गए जवाब को संतोषजनक माना और उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी दे दी।  दरअसल, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान नाथवानी के दस्तावेजों में कुछ बिंदुओं को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं. कांग्रेस ने उनके नामांकन की वैधता पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने मामले को सुनवाई के लिए रखा था. सुनवाई के दौरान नाथवानी की ओर से सभी आपत्तियों का बिंदुवार जवाब प्रस्तुत किया गया. इसके बाद निर्वाचन पदाधिकारी उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नजर आए।  बता दें, इस आपत्ति के बाद परिमल नाथवानी का नामांकन पहले होल्ड पर रखा गया था और इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज था. माना जा रहा था कि नाम और दस्तावेजों में कथित विसंगतियों को लेकर उनकी उम्मीदवारी पर संकट आ सकता है, लेकिन अब स्थिति साफ हो गई है।  झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए अब मुकाबला और रोचक हो गया है. चुनावी मैदान में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी, इंडिया गठबंधन के 2 उम्मीदवारों और अन्य दावेदारों के बीच राजनीतिक गणित पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. नाथवानी की एंट्री ने पहले ही चुनाव को दिलचस्प बना दिया था और अब उनका नामांकन वैध पाए जाने के बाद मुकाबला और भी रोमांचक हो गया है। 

पारंपरिक खेती से आगे बढ़ रहे किसान, मालवा-निमाड़ में उद्यानिकी और नवाचार आधारित फसलों पर बढ़ा फोकस

मालवा-निमाड़ लंबे समय तक सोयाबीन और पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहे मालवा-निमाड़ में अब खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किसान आय बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए फल, सब्जी, औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इंदौर संभाग की रबी 2025-26 समीक्षा और खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में सामने आए जिला-वार प्रस्तुतिकरणों से स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में फसल विविधीकरण अब नीति और व्यवहार दोनों स्तरों पर गति पकड़ रहा है। कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम मूल्य वाली फसलों के बजाय अधिक मूल्य वाली फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इसका रकबा बढ़ाने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही वैज्ञानिक खेती, नई तकनीकों और कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ रहे किसान आलीराजपुर : फलों और सब्जियों के नए क्लस्टर आलीराजपुर में आम, सीताफल और पपीता जैसी फल फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही भिंडी और टमाटर जैसी सब्जियों के उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिले में नए बागवानी क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक किसानों को उन्नत खेती और बेहतर बाजार से जोड़ा जा सके। झाबुआ : तरबूज से बनी नई पहचान झाबुआ ने तरबूज उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। बढ़ते उत्पादन और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। तरबूज अब जिले की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो चुका है। बड़वानी : केले से बढ़ रही समृद्धि बड़वानी में केले की खेती किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय बन गई है। यहां उत्पादित केले की मांग देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच रही है। इसके अलावा किसानों को मिलेट्स उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। खरगोन : सफेद मूसली बना आय का नया आधार खरगोन में सफेद मूसली जैसी औषधीय फसल किसानों की आय का नया स्रोत बनकर उभरी है। वहीं हाईब्रिड मक्का उत्पादन को आधुनिक कृषि नवाचार के रूप में अपनाया जा रहा है, जिससे उत्पादकता और आमदनी दोनों में वृद्धि हो रही है। खंडवा : चिया और कुसुम की बढ़ती खेती खंडवा में चिया, कोदो और कुटकी जैसी फसलों का रकबा बढ़ रहा है। बाजार में अच्छे दाम मिलने से किसानों का इन फसलों की ओर रुझान बढ़ा है। साथ ही कुसुम की खेती को बढ़ावा देकर फसल विविधीकरण को नई दिशा दी जा रही है। धार : ब्लूबेरी के साथ नए प्रयोग धार जिले में ब्लूबेरी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह फसल क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली बागवानी के नए प्रयोग के रूप में उभर रही है और किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रही है। बुरहानपुर : ड्रिप सिंचाई से बढ़ा मुनाफा बुरहानपुर में ड्रिप सिंचाई तकनीक के माध्यम से केले की खेती को नई दिशा मिली है। पानी की बचत, बेहतर उत्पादन और कम लागत के कारण किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि दर्ज की जा रही है। सोयाबीन के विकल्पों पर बढ़ा जोर बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त ने सोयाबीन के विकल्प के रूप में अरहर पूसा-16 के उत्पादन को बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने खेतों में केवल बीटी कपास पर निर्भर रहने के बजाय कपास की अन्य प्रजातियों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए, ताकि कीट प्रकोप की समस्या को कम किया जा सके। उन्होंने किसानों को जैविक खाद के उपयोग, मिट्टी परीक्षण और वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता बताई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को समय पर बीज और उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं तथा कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए। मालवा-निमाड़ में उभरता यह कृषि परिवर्तन संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्र की पहचान केवल सोयाबीन उत्पादक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि विविध और उच्च मूल्य वाली फसलों के केंद्र के रूप में भी स्थापित हो सकती है।  

लखनऊ के इकाना स्टेडियम की जांच के आदेश, LDA खंगालेगा निर्माण और रखरखाव से जुड़े सभी पहलू

 लखनऊ लखनऊ का इकाना स्टेडियम… वही मैदान जहां चौके-छक्कों की गूंज सुनाई देती है, जहां हजारों दर्शक मैच का रोमांच देखने पहुंचते हैं. लेकिन इस बार चर्चा क्रिकेट की नहीं, बल्कि जांच की हो रही है. कारण है- लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का एक फैसला।  एलडीए ने इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण, संचालन, रखरखाव और अनुबंध की शर्तों की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित कर दी है. यानी अब स्टेडियम में रिकॉर्ड और फाइलें खंगाली जाएंगी. एलडीए यह पता लगाना चाहता है कि स्टेडियम का संचालन उन शर्तों के मुताबिक हो रहा है या नहीं, जिनके आधार पर इसका अनुबंध किया गया था।  सवाल सिर्फ इमारत का नहीं है. जांच का दायरा काफी बड़ा रखा गया है. समिति यह देखेगी कि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार हुआ या नहीं. रखरखाव व्यवस्था कैसी है. अनुबंध की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं. स्टेडियम परिसर में विकसित खेल सुविधाएं और अन्य ढांचागत परियोजनाएं किस स्थिति में हैं. यानि सिर्फ पिच नहीं, पूरे सिस्टम का निरीक्षण  होगा।  एलडीए ने समिति को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे. इस रिपोर्ट में निर्माण की गुणवत्ता, रखरखाव की स्थिति और अनुबंध से जुड़े सभी पहलुओं का विस्तृत ब्योरा होगा. इसके बाद एलडीए रिपोर्ट की स्टडी करेगा और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।  फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है और किसी तरह की अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन अगर समिति की रिपोर्ट में किसी प्रकार की लापरवाही, निर्माण संबंधी कमी या अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन की बात सामने आती है, तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।  इकाना स्टेडियम सिर्फ लखनऊ ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों में गिना जाता है. यहां अंतरराष्ट्रीय मैचों से लेकर आईपीएल तक के बड़े मुकाबले आयोजित होते हैं. ऐसे में स्टेडियम की निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा और रखरखाव को लेकर किसी भी तरह की जांच स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

राज्य कांग्रेस को जल्द मिल सकता है नया अध्यक्ष, दावेदारों के नामों से बढ़ी सियासी हलचल

रायपुर  छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई हैं। दरअसल, वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है। ऐसे में पार्टी के भीतर नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति होनी तय है। कई बड़े नामों पर चर्चा हो रही हैं। इस बार किसे युवा चेहरे को मौका मिलने की आशंका जताई गई है। माना जा रहा है कि संगठन को नई ऊर्जा देने के लिए नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में यह कदम उठाया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं। जिसमें पूर्व मंत्री और खरसिया विधायक उमेश पटेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत कई अन्य नाम चर्चा में है। खास बात यह है कि उमेश पटेल को संगठनात्मक अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलित चेहरा माना जाता है। जबकि विधायक देवेंद्र यादव को एक ऊर्जावान और जनाधार वाले युवा नेता के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा टीएस सिंहदेव भी इस रेस में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह सरगुजा, कोरबा और जांजगीर-चांपा जैसे क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रहे हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है। वहीं, मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज की दावेदारी को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा है। आदिवासी समाज में उनकी मजबूत पकड़ और संगठन में सक्रिय भूमिका उनके पक्ष में मानी जा रही है। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी हाईकमान युवा और अनुभवी चेहरों के बीच संतुलन बनाते हुए जल्द ही बड़ा फैसला ले सकता है।

Monsoon Update: बिहार-झारखंड में जल्द होगी जोरदार बारिश, जानिए यूपी और दिल्ली में कब देगा दस्तक

भोपाल  मॉनसून ने 4 जून को केरल में दस्तक देने के बाद तेज रफ्तार बरकरार रखी है. वो अब तक 14 राज्यों के पार निकल गया है. भारत मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून अगले 3-4 दिनों में छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा पहुंच सकता है.दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल बने हुए हैं। अगले 3-4 दिनों में मॉनसून महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के बाकी हिस्सों, पश्चिम बंगाल के कुछ और हिस्सों और छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ेगा।  बुधवार को भारत मौसम विभाग ने ये पूर्वानुमान जारी किया. अगले 5-7 दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत और उप हिमालयी क्षेत्र पश्चिम बंगाल में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश (7-20 सेमी) होने की संभावना है. साथ ही केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी भारी बारिश हो सकती है।  मॉनसून दिल्ली-यूपी कब पहुंचेगा मॉनसून ने मंगलवार को सभी उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों को कवर कर लिया था.भारत मौसम विभाग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मॉनसून पिछले सात दिनों में पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गोवा पहुंच चुका है. मॉनसून दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यो में 25 जून तक पहुंच सकता है. जबकि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड समेत पहाड़ी राज्यों में मॉनसून जून के अंत तक या जुलाई में पहुंच सकता है।  दिल्ली, यूपी में कल से झमाझम बारिश मॉनसून अभी भले ही उत्तर भारत न पहुंचा हो, लेकिन दिल्ली, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गुरुवार से दो दिन बारिश का अलर्ट है. मौसम विभाग का कहना है कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत वेस्ट यूपी, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में गुरुवार से बारिश देखने को मिल सकती है. दिल्ली में बारिश के साथ गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. इस दौरान तेज हवाएं भी चलेंगी।  दिल्ली एनसीआर में पिछले हफ्ते भी दो दिन तेज बारिश देखने को मिली थी. जबकि मंगलवार रात को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी आई थी. दिल्ली एनसीआर में 11-12 जून को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश का अलर्ट है।  केरल में ऑरेंज अलर्ट मॉनसून सीजन के पहले हफ्ते में केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और बंगाल के कुछ क्षेत्रों में जबरदस्त बारिश हो रही है. केरल के अलपुझा और एर्नाकुलम जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है. केरल के कोल्लम, पथनमिट्टा, कोट्टायम, त्रिशूर, मल्लपुरम, कोझिकोड और कन्नूर जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।  तेलंगाना भी भारी बारिश तेलंगाना के विकाराबाद, महबूबनगर, नारायणपेट और जोगुलांबा गडवाल में भी भारी बारिश हो रही है. हालांकि मौसम विभाग ने इस साल मजबूत अल नीनो की भविष्यवाणी की है, जो मॉनसूनी बारिश के लिए खतरा साबित हो सकता है. बारिश में कमी से जून-जुलाई के दौरान तापमान दो डिग्री तक ज्यादा रह सकता है। 

8th Pay Commission Update: कर्मचारियों की बढ़ सकती है चांदी, नया फॉर्मूला लागू हुआ तो मिल सकता है भारी एरियर

नई दिल्ली भारत के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठनों और पेंशनर संघों की आयोग के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें चल रही हैं, जिनमें वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर, भत्तों और पेंशन सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। 8वें वेतन आयोग में अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो लेवल-14 के कर्मचारियों का 20 महीने में अनुमानित एरियर करीब 53 लाख के पार पहुंच सकता है। 15 जून 2026 तक आयोग को ज्ञापन सौंपने की अंतिम तिथि तय की गई है, जबकि 22-23 जून को लखनऊ में भी महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी कितनी बढ़ेगी और उन्हें कितना एरियर (Arrears) मिल सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग को रिपोर्ट जमा करने के लिए दिए गए 18 महीने के समय को देखते हुए इसका क्रियान्वयन 2027 की दूसरी छमाही में हो सकता है। नवंबर 2025 में आयोग का कार्यकाल तय किया गया था और अगर यह मई 2027 तक रिपोर्ट सौंपता है, तो उसके बाद कैबिनेट की मंजूरी और अन्य प्रक्रियाओं में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है। इस स्थिति में अगस्त या सितंबर 2027 तक नई सैलरी लागू होने की संभावना है। चूंकि 7वें वेतन आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है, इसलिए कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर मिलने की उम्मीद है। अगर लागू होने में लगभग 20 से 21 महीने की देरी होती है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त बड़ी राशि मिल सकती है। वेतन स्तर (Pay Level) सामान्य प्रारंभिक बेसिक वेतन प्रमुख पद (Common Designations) लेवल 11 ₹67,700 उप सचिव (Deputy Secretary), ग्रुप-A में पदोन्नत वरिष्ठ सेक्शन अधिकारी, डिप्टी डायरेक्टर, कार्यकारी अभियंता (Executive Engineer), डिप्टी कमांडेंट लेवल 12 ₹78,800 निदेशक (Director), संयुक्त निदेशक (Joint Director), केंद्रीय संस्थानों में प्रोफेसर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लेवल 13 ₹1,23,100 कुछ संगठनों में संयुक्त सचिव स्तर के पद, वरिष्ठ निदेशक, मुख्य अभियंता (Chief Engineer), उच्च ग्रेड के वैज्ञानिक लेवल 14 ₹1,44,200 वरिष्ठ संयुक्त सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (Additional Director General) स्तर के अधिकारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, बड़े विभागों के प्रमुख लेवल 11 से 14 के कर्मचारी, जो आमतौर पर ग्रुप-A अधिकारी होते हैं, इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा लाभ पाने वालों में शामिल हो सकते हैं। इनमें डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर, प्रोफेसर, चीफ इंजीनियर, वैज्ञानिक, वरिष्ठ संयुक्त सचिव और अन्य उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। वर्तमान में लेवल 11 का शुरुआती बेसिक वेतन ₹67,700, लेवल 12 का ₹78,800, लेवल 13 का ₹1,23,100 और लेवल 14 का ₹1,44,200 है। अगर 8वें वेतन आयोग में 2.0 से लेकर 2.86 तक का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो इन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, लेवल 11 के कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर पर ₹1.35 लाख और 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लगभग ₹1.94 लाख तक पहुंच सकती है। इसी तरह लेवल 14 के अधिकारियों की बेसिक सैलरी ₹4 लाख रुपये के करीब तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही 20 महीने के एरियर की गणना की जाए तो कई कर्मचारियों को लाखों रुपये का एकमुश्त भुगतान मिल सकता है। 8वें वेतन आयोग (2.0 फिटमेंट फैक्टर) पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,35,400 ₹67,700 ₹13,54,000 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,57,600 ₹78,800 ₹15,76,000 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,46,200 ₹1,23,100 ₹24,62,000 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹2,88,400 ₹1,44,200 ₹28,84,000 8वें वेतन आयोग (2.15 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,45,555 ₹77,855 ₹15,57,100 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,69,420 ₹90,620 ₹18,12,400 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,64,665 ₹1,41,565 ₹28,31,300 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,10,030 ₹1,65,830 ₹33,16,600 8वें वेतन आयोग (2.28 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,54,356 ₹86,656 ₹17,33,120 लेवल 12 ₹78,800 ₹1,79,664 ₹1,00,864 ₹20,17,280 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹2,80,668 ₹1,57,568 ₹31,51,360 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,28,776 ₹1,84,576 ₹36,91,520 8वें वेतन आयोग (2.57 फिटमेंट फैक्टर) के आधार पर 20 माह के संभावित एरियर लेवल वर्तमान बेसिक वेतन (रु.) संशोधित बेसिक वेतन (रु.) बेसिक वेतन में वृद्धि (रु.) 20 माह का अनुमानित एरियर (रु.) लेवल 11 ₹67,700 ₹1,73,989 ₹1,06,289 ₹21,25,780 लेवल 12 ₹78,800 ₹2,02,516 ₹1,23,716 ₹24,74,320 लेवल 13 ₹1,23,100 ₹3,16,367 ₹1,93,267 ₹38,65,340 लेवल 14 ₹1,44,200 ₹3,70,594 ₹2,26,394 ₹45,27,880 2.86 फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 11-14 के कर्मचारियों को मिलने वाले 20 महीनों के अनुमानित एरियर लेवल वर्तमान मूल वेतन संशोधित मूल वेतन मूल वेतन में वृद्धि 20 महीनों का एरियर 11 67,700 1,93,622 1,25,922 25,18,440 12 78,800 2,25,368 1,46,568 29,31,360 13 1,23,100 3,52,066 2,28,966 45,79,320 14 1,44,200 4,12,412 2,68,212 53,64,240   ध्यान देने वाली बात यह है कि एरियर केवल बढ़ी हुई बेसिक सैलरी पर मिलता है। महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) जैसे अन्य भत्तों पर एरियर नहीं दिया जाता, क्योंकि नए वेतन आयोग में इनकी दरें अलग से संशोधित की जाती हैं। इसलिए कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फिटमेंट फैक्टर की रहने वाली है। 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। अगर रिपोर्ट 2027 में लागू होती है और कर्मचारियों को 20 महीने का एरियर मिलता है, तो लाखों सरकारी कर्मचारियों के खातों में बड़ी रकम आ सकती है। अब सभी की नजर आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले महीनों में तस्वीर पूरी तरह साफ कर देगा।

ओरछा के हरदौल बैठका से जुड़ा है महेश केवट का परिवार, अब राज्यसभा उम्मीदवार बनकर चर्चा में

ओरछा  निवाड़ी जिले के ओरछा कस्बे के वार्ड नंबर 12 स्थित हरिशंकरी मुहल्ले में रहने वाले महेश केवट के राज्यसभा जाने का रास्ता लगभग साफ है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद यदि कांग्रेस को कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो महेश केवट मध्य प्रदेश से केवट, माझी, मल्लाह, रैकवार, भोई समाज के पहले राज्यसभा सांसद होंगे। पत्नी हार गई थी नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव महेश केवट 2000 से लेकर 2005 तक ओरछा नगर परिषद के उपाध्यक्ष भी रहे। महेश की पत्नी ने ओरछा नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। बीजेपी ने कर दिया था निष्कासित, 2022 के नगर परिषद ओरछ़ा के चुनाव में उस समय स्थानीय बीजेपी नेतृत्व ने महेश केवट पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों में उन्हें निष्कासित कर दिया था। महेश के साथ उन कार्यकर्ताओं को निष्कासित किया गया था जिन्होंने भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ा था। महेश के साथ करीब दर्जन भर भाजपाई और पार्टी से बाहर किए गए थे। लेकिन, महेश और निवाड़ी विधायक अनिल जैन ने भोपाल में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में महेश केवट के निष्कासन की फाइल निकलवाई तो यहां कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। महेश ने पार्टी को यह जानकारी दी कि उन्होंने और उनके परिवार के किसी सदस्य ने बागी होकर चुनाव नहीं लड़ा है। बल्कि सोशल मीडिया में कई ऐसे पत्र वायरल हुए जिनमें महेश के निष्कासन के आदेश में कुछ और नाम जोड़कर उन्हें भी बीजेपी से निष्कासित बताया गया। इसके बाद पार्टी ने अधिकारिक तौर पर 2023 में महेश के निष्कासन को समाप्त करने का आदेश तत्कालीन प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी की तरफ से जारी किया गया। हरदौल बैठका पर सेवा करता है परिवार महेश केवट के परिवार के सदस्य ओरछा के फूलबाग में स्थित हरदौल बैठका की सेवा करते हैं। लाला हरदौल बुन्देलखंड के लोकदेवता हैं। महेश के छोटे भाई हरदौल बैठका में आज भी नियमित सेवा कार्य करते हैं। महेश सीमेंट व्यवसायी हैं। ऐसे बीजेपी की नजर में आए महेश केवट हेमंत खंडेलवाल के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के संगठन और सरकार के विभिन्न बोर्ड, निगम मंडलों में नए ऐसे चेहरों को शामिल करने पर मंथन चल रहा था कि ऐसे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए जो अब तक किसी अहम जिम्मेदारी पर न रहे हों। यह भी तय हुआ कि उन जातियों में से नेताओं को छांटा जाए जिन वर्गों की राजनीतिक भागीदारी बहुत कम रही हो। ऐसे में मल्लाह, केवट, मांझी समाज से शिवपुरी भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजू बाथम और महेश केवट के नाम सामने आए। सीताराम बाथम पहले कई पदों पर रह चुके थे। ऐसे में महेश केवट को मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष के लिए चुना गया। जैसे ही महेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बने उसके तुरंत बाद उनके विरोधी भाजपाई एक्टिव हुए और उन्हें भाजपा से निष्कासित नेता बताते हुए उनके निष्कासन के आदेशों को सोशल मीडिया पर शेयर कराना शुरु कर दिया। इसके बाद भोपाल में एक दिन निवाड़ी भाजपा के नेताओं, विधायक, जिलाध्यक्ष सहित चुनिंदा पदाधिकारियों की भोपाल में प्रदेश अध्यक्ष ने बैठक ली। इस बैठक में तत्कालीन जिलाध्यक्ष अखिलेश अयाची से कहा गया कि आप महेश के निष्कासन के मामले का पटाक्षेप कीजिए। सोशल मीडिया पर पूरी जानकारी विस्तार से लिखिए। उसके बाद तत्कालीन जिलाध्यक्ष ने अपने फेसबुक पर सिर्फ लेटर पोस्ट कर दिया। राज्यसभा के लिए कैसे चुने गए बीजेपी ने एमपी में बीजेपी के कब्जे वाली दो सीटों पर राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग और प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल को घोषित किया। रजनीश को वीडी शर्मा की सिफारिश पर उम्मीदवार बताया गया। इसके बाद सीएम डॉ मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल ने यह तय किया कि उम्मीदवार सामाजिक जातिगत समीकरणों के हिसाब से उतारा जाएगा। कई नामों पर विचार-मंथन हुआ लेकिन, जब जीत के लिए जरूरी 58 विधायकों के आंकड़े को लेकर टेंशन दिखी तो तय किया गया कि ऐसे केंडिडेट को उतारा जाए जिसकी उम्मीदवारी मात्र से बड़ा संदेश जाए। यूपी चुनाव में महेश की भूमिका होगी अहम अगले साल फरवरी- मार्च में यूपी में विधानसभा के चुनाव होने हैं। चूंकि ओरछा तीन तरफ से एमपी-यूपी के बॉर्डर पर लगा हुआ है। बुन्देलखंड के मुख्य शहर झांसी की ओरछा से दूरी मात्र 15 किलोमीटर है। ओरछा में धार्मिक स्थल के साथ ही बडे़ होटल भी हैं। ऐसे में यूपी सरकार और राजनीतिक दलों की बैठकें और नेताओं का आना-जाना होता रहता है। यूपी की राजनीति में अकेले भाजपा ही नहीं, सपा बसपा में भी केवट निषाद समाज के नेता बडे़ पदों पर रहे हैं। ऐसे में अब महेश केवट का उपयोग पार्टी यूपी के चुनाव में करेगी। झांसी से लेकर पूरे गंगा किनारे केवट समाज में महेश भाजपा के प्रचारक के तौर पर काम करेंगे। यूपी में केवट समाज की राजनीतिक पकड़ समझिए सबसे पहले बीजेपी में निषाद समाज का दबदबा देखिए     डॉ संजय निषाद : निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वर्तमान में योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।     साध्वी निरंजन ज्योति: फतेहपुर से लोकसभा सांसद और केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुकी हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष हैं।     जयप्रकाश निषाद: पूर्वांचल (गोरखपुर क्षेत्र) में भाजपा संगठन के बेहद मजबूत स्तंभ हैं। भाजपा में क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्न दायित्वों को संभालने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (मत्स्य एवं पशुधन विभाग) के पद पर रह चुके हैं। वे बीजेपी के राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं।     बाबूराम निषाद : बाबूराम निषाद हमीरपुर से जिला अध्यक्ष, भाजयुमो क्षेत्रीय अध्यक्ष, भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष, बुंदेलखंड के क्षेत्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) रहने के बाद वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं।     भगवान दास निषाद: बुंदेलखंड और कानपुर क्षेत्र के पुराने भाजपा नेता हैं। पार्टी संगठन में विभिन्न जिला व क्षेत्रीय पदों पर रहने के साथ-साथ इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के तहत मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष (दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री) बनाकर समाज के संगठनात्मक प्रतिनिधित्व को मजबूत किया गया था। अब सपा में समाज की हिस्सेदारी     रामभुआल निषाद: … Read more

भारत के लिए रूस की मेहरबानी! कच्चे तेल पर भारी छूट, वैश्विक बाजार में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली ईरान जंग की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता जा रहा है. उधर अमेर‍िका चाहता है क‍ि भारत वेनेजुएला और यूएस से तेल खरीदे. यह देखकर रूस ने भारत को बड़ा ऑफर द‍िया है. रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक रूस ने भारत को सस्‍ते दाम पर तेल बेचना शुरू कर द‍िया है. इतना ही नहीं, चीन को भी वही ऑफर म‍िल रहा है।  रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताबिक, रूसी यूराल्स क्रूड अब भारतीय और चीनी बंदरगाहों पर ब्रेंट ऑयल के मुकाबले सस्‍ते में बिक रही है. तेल कारोबार से जुड़े चार लोगों ने बताया क‍ि एशियाई रिफाइनरियों की ड‍िमांड अचानक कम हो गई है, इससे रूसी तेल पूरी मात्रा में नहीं न न‍िकल पा रहा है. मौका देखकर रूस ने भारत को यह बड़ा ऑफर द‍िया है. सूत्रों ने बताया क‍ि मार्च से भारत और चीन को यह सस्‍ता तेल म‍िल रहा है. पहले ब्रेंट क्रूड के मुकाबले रूसी तेल प्रीमियम पर बिक रहा था, क्योंकि मिड‍िल ईस्‍ट में जंग की वजह से तेल की सप्‍लाई बाध‍ित हुई थी. लेकिन अब रूसी क्रूड की मांग कम हो गई है क्योंकि एशियाई रिफाइनरियों ने अपने भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर द‍िया है. दूसरे विकल्प ढूंढ ल‍िए हैं और कुछ मामलों में उत्पादन भी घटाया है।  क‍ितना सस्‍ता तेल मिल रहा सूत्रों ने बताया. जुलाई और अगस्त में भारत के लिए डिलीवरी वाली यूराल्स की खेपें इस महीने ब्रेंट के मुकाबले प्रति बैरल 2 से 3 डॉलर की छूट पर बिकी हैं, जबकि अप्रैल और मई में यह प्रीमियम 7 से 8 डॉलर था. सूत्रों ने बताया. उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, जब कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल उत्पादन घटा था, तब यूराल्स 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रही थी. पिछले साल जून से अगस्त में छूट करीब 1 से 3 डॉलर प्रति बैरल थी।  चीन ने कर द‍िया था मना चीन और भारत के बाजार एक-दूसरे के काफी करीब चलते हैं, लेकिन चीन की खरीद कम होने से सभी ग्रेड्स पर असर पड़ता है. चीन भारत से कम यूराल्स खरीदता है, लेकिन रूसी हल्के ग्रेड्स जैसे ईएसपीओ ब्लेंड, आर्कटिक और सखालिन क्रूड ज्यादा लेता है. कुछ मामलों में चीनी खरीदारों ने जून डिलीवरी वाली रूसी तेल की खेप लेने से मना कर दिया, एक सूत्र ने बताया, जिससे विक्रेता कीमत तय करने में कमजोर हो जाते हैं क्योंकि अन्यथा यह तेल फ्लोटिंग स्टोरेज में चला जाएगा. कुछ चीनी छोटी, स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें टीपॉट्स कहा जाता है, कमजोर मुनाफे के कारण उत्पादन घटा रही हैं जिससे कच्चे तेल की कीमतें और कम हो गई हैं।