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कम जमीन और कम पानी में बढ़ा मुनाफा, थ्री-लेयर मॉडल बना आकर्षण

 कोडरमा  डोमचांच प्रखंड के प्रगतिशील किसान सुमन लाल मेहता ने खेती में अनूठा उदाहरण पेश करते हुए थ्री-लेयर (मल्टीलेयर) खेती की शुरुआत की है। पथरीली मिट्टी, कम पानी वाले इस क्षेत्र में उन्होंने अपनी दो एकड़ से अधिक खेती योग्य भूमि में से करीब एक चौथाई हिस्से में इस पद्धति को अपनाया है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। थ्री-लेयर खेती के तहत जमीन के नीचे हल्दी, अदरक और गाजर जैसी फसलें लगाई गई हैं। वहीं, जमीन की ऊपरी सतह पर धनिया, साग समेत अन्य पत्तेदार सब्जियां उगाई जा रही हैं इसके अलावा खेत में बनाए गए बांस और घास-फूस के मचान पर करेला, कुंद्री, लौकी, नेनुआ और जंगली खक्सा जैसी लत्तरदार सब्जियों की खेती की जा रही है। इस पद्धति का सबसे बड़ा लाभ यह है कि एक ही भूखंड पर एक साथ तीन अलग-अलग स्तरों पर विभिन्न फसलों का उत्पादन संभव हो रहा है। सामान्यतः इन फसलों के लिए अलग-अलग भूमि और खेती की अलग पद्धति अपनानी पड़ती है, लेकिन मल्टीलेयर खेती में एक ही मौसम, एक ही जमीन और एक ही सिंचाई व्यवस्था से विविध फसलों की पैदावार ली जा रही है। खेतों में टपक सिंचाई प्रणाली का उपयोग होने से पानी की भी पर्याप्त बचत हो रही है। भीषण गर्मी में पौधों को मिल रहा प्राकृतिक संरक्षण इस खेती की खासियत यह है कि खेत में बनाए गए मचान नीचे उगाई गई फसलों के लिए प्राकृतिक तापमान नियंत्रक का काम करते हैं। मचान की छाया के कारण मिट्टी की नमी बनी रहती है और तेज धूप का सीधा असर फसलों पर नहीं पड़ता। इससे पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और झुलसने का खतरा भी कम हो जाता है। शांति देवी बताती हैं कि यह प्रयोग काफी कारगर साबित हो रहा है। इससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों को अच्छा मुनाफा भी मिलने की उम्मीद है। मिट्टी के अंदर और सतह पर लगी फसलों तक सूर्य की सीधी किरणें नहीं पहुंचतीं, जिससे पौधों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बना रहता है। मध्य प्रदेश में सीखी तकनीक, डोमचांच में प्रयोग प्रगतिशील किसान सुमन मेहता ने बताया कि मल्टीलेयर खेती की शुरुआत मध्य प्रदेश में हुई थी और अब देश के कई राज्यों में किसान इसे अपना रहे हैं। कृषि विभाग की ओर से उन्हें मध्य प्रदेश जाकर इस तकनीक को नजदीक से सीखने का अवसर मिला था। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपने खेत को तैयार किया, मचान बनाए और तीन अलग-अलग स्तरों पर फसलें लगाकर इस प्रयोग की शुरुआत की। आज उनके खेत में जमीन के अंदर, जमीन की सतह पर और मचान के ऊपर एक साथ विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन हो रहा है, जो क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।  

मुख्यालय पंचकूला में, एनएसजी जैसी ट्रेनिंग वाले कमांडो होंगे शामिल

 चंडीगढ़  हरियाणा में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पहली बार पुलिस में आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) बनाने की मंजूरी मिल गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर गृह सचिव सुधीर राजपाल ने एटीएस के गठन की अधिसूचना भी जारी कर दी, जिसका मुख्यालय पंचकूला में होगा। आतंकवादियों और आतंकी नेटवर्क से निपटने के लिए गठित एटीएस में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की तर्ज पर विशेष प्रशिक्षित कमांडो शामिल किए जाएंगे, जिनकी कमान पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी के हाथ में होगी। आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच सामान्य पुलिस की बजाय एटीएस करेगा, जिसकी अपनी कमांड, अपना मुख्यालय और अपने अलग पुलिस थाने होंगे। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने बताया कि आधुनिक तकनीक, विशेष प्रशिक्षण, मजबूत खुफिया तंत्र और अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से यह दस्ता आतंकवाद, कट्टरपंथ और संगठित आतंकी नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करेगा। जल्द ही राष्ट्रीय सुरक्षा के मानकों के अनुरूप एक सशक्त एवं पेशेवर एटीएस तैयार किया जाएगा, जो प्रदेश को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और भयमुक्त बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा। एटीएस का कार्य आतंकी घटनाओं पर प्रतिक्रिया, आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच और मुकदमा चलाना, खुफिया जानकारी जुटाना, प्रोसेस करना और शेयर करना, इंटर एजेंसी आपरेशनल कोर्डिनेशन, आतंकवाद से संबंधित डेटाबेस को बनाए रखना, संबंधित डेटा का रिसर्च और एनालिसिस और स्किल अपग्रेडेशन के लिए ट्रेनिंग देना होगा। एटीएस का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा किया जाएगा। एटीएस सीआइडी के कमांड एवं नियंत्रण में कार्य करेगा। इसकी संरचना आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बहुस्तरीय बनाई गई है। इसमें एनएसजी की तर्ज पर एक अत्यंत प्रशिक्षित विशेष कमांडो बल शामिल होगा, जो त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील अभियानों को अंजाम देगा। खुफिया एवं संचालन शाखा आतंकवादी संगठनों की पहचान, निगरानी और गिरफ्तारी के लिए उत्तरदायी होगी। आतंकवाद और उससे संबंधित अपराधों की विशेष जांच के लिए एक समर्पित एटीएस पुलिस स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जिसमें कानूनी, वित्तीय जांच तथा फारेंसिक इकाइयां कार्य करेंगी। पंचकूला और गुरुग्राम में होंगे थाने पूरे हरियाणा को कवर करने के लिए एटीएस के दो थाने बनाए जाएंगे। पंचकूला एटीएस के अधिकार क्षेत्र में पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, रोहतक, भिवानी और चरखी दादरी जिले शामिल किए गए हैं। गुरुग्राम एटीएस सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले को संभालेगा। युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं से दूर रखने के लिए अभियान तकनीकी सुदृढ़ता सुनिश्चित करने हेतु साइबर एवं टेक्निकल इंटेलिजेंस यूनिट ओपन सोर्स इंटेलिजेंस, डार्क वेब और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों की निगरानी करेगी, जबकि डेटा एनालिसिस एवं इंटरसेप्शन यूनिट आधुनिक विश्लेषण प्रणालियों के माध्यम से सूचनाओं का संग्रह और मूल्यांकन करेगी। युवाओं को कट्टरपंथी विचारधाराओं से दूर रखने के लिए डि-रेडिकलाइजेशन यूनिट समाज में जागरूकता और पुनर्वास कार्यक्रम चलाएगी। साथ ही प्रशिक्षण एवं अनुसंधान विंग समय-समय पर कौशल उन्नयन, रिफ्रेशर कोर्स तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के विकास का कार्य करेगा। सुरक्षा से कोई समझौता नहीं पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का मानना है कि राज्य की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। आतंकवाद के विरुद्ध किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं की जा सकती। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एटीएस के गठन से हरियाणा की कानून व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।  

बिलासपुर को मिलेगा नया बायपास, 75.73 करोड़ की मंजूरी; तय समय में निर्माण पूरा करने के आदेश

रायपुर. राज्य सरकार ने बिलासपुर में कोनी (सेंदरी)-मोपका बायपास सड़क के लिए 75 करोड़ 73 लाख रुपए की निविदा को मंजूरी दे दी है। इस राशि से 13.40 किलोमीटर फोरलेन सीमेंट क्रांकीट सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने लोक निर्माण विभाग के बिलासपुर संभाग क्रमांक-1 के कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित समयावधि में काम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए मापदंडों के अनुरूप सड़क का निर्माण सुनिश्चित करने की बात कही है। लोक निर्माण विभाग ने कार्यपालन अभियंता को अनुबंधित कार्य का संपादन और पर्यवेक्षण विभागीय मापदंडों के अनुसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह कार्य किसी अन्य को सब-लेट (Sub-let) नहीं किया जाएगा। कार्य संपादन के लिए पावर-ऑफ-अटॉर्नी मान्य नहीं होगी। राज्य शासन ने अनुबंध से पहले ठेकेदार से एपीएस (Additional Performance Security) की राशि का एफडीआर (Fixed Deposit Receipt) प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं।

महिला बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता: आयोग अध्यक्ष यादव

महिला बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता : आयोग अध्यक्ष यादव राज्य महिला आयोग ने केंद्रीय जेल भोपाल का किया निरीक्षण भोपाल सुधार गृह केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास और पुनर्वास का केंद्र होना चाहिए। महिला बंदियों को सम्मानजनक वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है। यह बात मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रेखा यादव ने केंद्रीय जेल भोपाल के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रत्येक महिला को उसके अधिकार, सम्मान और न्याय मिले। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती यादव एवं सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने महिला बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। आयोग ने जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। आयोग ने महिला वार्ड, चिकित्सालय, रसोई घर, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कक्ष, आर्ट एवं क्रॉफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर का अवलोकन किया। सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों द्वारा संचालित ऑर्केस्ट्रा दल ने भजन प्रस्तुत किए। आयोग की अध्यक्ष एवं सदस्य ने ऑर्केस्ट्रा की सराहना करते हुए इसे सकारात्मक मानसिक विकास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में प्रभावी पहल बताया। महिला बंदियों से संवाद के दौरान उनकी दिनचर्या, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कौशल विकास कार्यक्रमों और पुनर्वास गतिविधियों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। आयोग ने बंदियों द्वारा आर्ट एवं क्रॉफ्ट सेंटर में तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों का अवलोकन भी किया। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती यादव ने महिला बंदियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज में नई पहचान बनाने का अवसर प्रदान कर रहे हैं। राज्य महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर, केंद्रीय जेल भोपाल के अधीक्षक राकेश भांगरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

बस्तर के विकास की नई रूपरेखा: दूध, सिंचाई, रोजगार और गांवों को नई पहचान देने की तैयारी

बस्तर में दूध, खेतों तक पानी, युवाओं को काम और गांवों को नई पहचान देने की तैयारी नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रखा विकसित छत्तीसगढ़ का विजन बस्तर में आमदनी दोगुनी करने का बड़ा संकल्प: तीन साल में हर परिवार की आय 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंचाने का लक्ष्य नई दिल्ली  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में नक्सलवाद से मुक्त बस्तर की नई तस्वीर देश के सामने रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा की मार झेलने वाला बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास का मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, दुग्ध क्रांति लाने, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, पर्यटन को बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने तथा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। वहां दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, गांवों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में “डेयरी मॉडल” को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य गांवों में स्थायी आय का स्रोत तैयार करना है। इस पहल से महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा गांवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से खेती बेहतर होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान धान के साथ-साथ सब्जियां, फल तथा अन्य नकदी फसलें भी उगा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारी और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा तथा डॉक्टरों को समय पर सही जानकारी मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलेगा। उन्होंने बताया कि बस्तर में बने लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चित्रकोट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है, जबकि सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि पर्यटन रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है। पर्यटकों के आने से होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प, दुकानदारों और स्थानीय उद्यमियों को रोजगार मिलता है। बस्तर को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निवेश, सुशासन और तकनीक आधारित विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। राज्य में 435 सुधार लागू किए गए हैं और सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत बनाकर निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो आधुनिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक के जरिए विकास का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके साथ ही 341 पीएमस्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म और अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार ने एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन शुरू किए हैं। इन मिशनों से युवाओं को रोजगार, तकनीक और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे तथा छत्तीसगढ़ को नवाचार और निवेश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और निर्यात को नई गति मिली है। खेल सामग्री, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायो-एथेनॉल, गारमेंट और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन इंडस्ट्रीज को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना से राज्य के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 761.76 करोड़ रुपये का निर्यात … Read more

पूर्णिया से शुरू हुआ विस्तार, जल्द पटना तक पहुंचेगा मानसून

पटना दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने बिहार में दस्तक दे दी है। पूर्णिया के रास्ते गुरुवार को मॉनसून ने बिहार में प्रवेश लिया। मौसम विभाग के अनुसार कोसी और सीमांचल क्षेत्र के 7 जिलों में मॉनसून का प्रसार हो चुका है। इसके आगे बढ़ने की परिस्थितियां अनुकूल हैं। अगले एक-दो दिन तक इसका प्रसार थोड़ा धीमा हो सकता है, लेकिन इस सप्ताह के अंत तक यह बिहार के अधिकतर जिलों को कवर कर लेगा। पटना समेत अन्य जिलों के लोगों को मॉनसून का बेसब्री से इंतजार है। मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में दस्तक देने के बाद मॉनसून कुछ हिस्सों में आगे बढ़ गया है। इसकी उत्तरी सीमा मधुबनी से होकर गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में इसके बिहार के कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है। इस साल मॉनसून ने समय से पहले ही एंट्री ली है। मॉनसून के बिहार में प्रवेश की सामान्य तारीख 13 से 15 जून होती है। हालांकि, इस साल 11 जून को ही मॉनसून बिहार पहुंच गया। पहले दिन 7 जिलों में हुआ मॉनसून का प्रसार पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि बिहार में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आगमन हो चुका है। इसका प्रसार किशनगंज, अररिया, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और मधुबनी जिलों में हो चुका है। पटना में कब पहुंचेगा मॉनसून? मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आगामी 2-3 दिनों में मॉनसून के बिहार के शेष हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। इस सप्ताह के अंत तक मॉनसून के राजधानी पटना और दक्षिण बिहार के जिलों तक पहुंचने की पूरी संभावना नजर आ रही है। पूर्णिया में भारी बारिश से जलजमाव 24 घंटे में कहां-कितनी बारिश हुई? मॉनसून के आने से पहले ही उत्तर बिहार में भारी बारिश का दौर जारी है। बीते 24 घंटे के भीतर मिथिला, सीमांचल, कोसी, चंपारण क्षेत्र में झमाझम बारिश हुई। किशनगंज जिले के तैयबपुर में सर्वाधिक 148 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सुपौल के सरायगढ़ भपटियाही में 106 मिमी, खगड़िया के बलतारा में 70 मिमी, समस्तीपुर के हसनपुर में 67.6 मिमी, मधुबनी के लौकही में 61.2 मिमी, पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर में 58 मिमी पानी गिरा। 12 जून को 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने बिहार के 10 जिलों में शुक्रवार को भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इनमें किशनगंज, अररिया, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज जिले शामिल हैं। इसके अलावा अन्य जिलों में भी हल्के से मध्यम दर्जे की बरसात होने की संभावना है।

आज विश्व भारत को निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है

विशेष लेख प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च साधन बनाया आज विश्व भारत को निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है भोपाल  भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ क्षण ऐसे हैं जो केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं होते, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक आकांक्षाओं और विश्वास का प्रतीक बन जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के देश की जनता के निरंतर विश्वास के साथ ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त कर दीर्घकाल तक राष्ट्र का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त करना गौरवपूर्ण क्षण है। यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण के संकल्प, सेवा और सुशासन की विजय है। प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च साधन बनाया। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी एक नई पहचान स्थापित की है। आज विश्व भारत को केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति, विश्वसनीय साझेदार और भविष्य के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हुई है और यह परिवर्तन प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी सोच तथा निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है। प्रधानमंत्री मोदी जी का देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित होना केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, यह भारत की जनता के अटूट विश्वास और स्नेह का प्रतीक है। निरंतर जनसमर्थन किसी पद या प्रचार से नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, पारदर्शिता, निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की कार्य शैली से अर्जित होता है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं को सदैव "प्रधान सेवक" के रूप में प्रस्तुत किया और गरीब, किसान, महिला, युवा तथा समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सतत प्रयास किया। यही कारण है कि देश की जनता ने बार-बार उन पर अपना विश्वास व्यक्त किया। उनका सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, अथक कार्यशक्ति, दूरदर्शी सोच और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का स्पष्ट संकल्प करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है तथा उन्हें जन-जन का प्रिय नेता बनाता है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ने आत्मनिर्भरता, डिजिटल क्रांति, आधारभूत संरचना, रक्षा क्षमता, अंतरिक्ष विज्ञान और आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर जल, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम किसान सम्मान निधि और डिजिटल इंडिया जैसे अनेक कार्यक्रमों से करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। शासन की योजनाएँ पहली बार अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पारदर्शी ढंग से पहुँची हैं। भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में रहेगा अंकित भारतीय संस्कृति और आस्था के पुनर्जागरण का भी यह कालखंड इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करोड़ों भारतीयों की सदियों पुरानी आस्था की पूर्ति का क्षण था। यह केवल मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और आत्म गौरव का पुनर्स्थापन था। जम्मू-कश्मीर से संबंधित ऐतिहासिक निर्णयों ने राष्ट्रीय एकीकरण को नई मजबूती प्रदान की। विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए जम्मू-कश्मीर आज नए अवसरों की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी ने यह सिद्ध किया कि दृढ़ इच्छा शक्ति और स्पष्ट नीति के साथ कठिन से कठिन निर्णय भी राष्ट्रहित में लिए जा सकते हैं। मध्यप्रदेश को प्रधानमंत्री मोदी का विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का निरंतर लाभ प्राप्त हुआ है मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के विशेष स्नेह और मार्गदर्शन का लाभ निरंतर प्राप्त करता रहा है। प्रदेश में सड़क, रेल, सिंचाई, ऊर्जा, शहरी विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश एवं परियोजनाओं ने विकास को नई गति दी है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से गरीब, किसान, महिला और युवाओं के जीवन में बदलाव लाने वाली अनेक योजनाओं का प्रभाव प्रदेश के प्रत्येक जिले तक पहुँचा है। विंध्य क्षेत्र और विशेष रूप से मेरा गृह क्षेत्र रीवा भी इस परिवर्तनकारी यात्रा का साक्षी बना है। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट ने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई। यह परियोजना प्रधानमंत्री जी के उस विजन का प्रतीक है जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलते हैं। आज रीवा देश के ऊर्जा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और विंध्य की पहचान नई संभावनाओं से जुड़ चुकी है। विंध्य क्षेत्र में सड़क संपर्क, रेल सुविधाओं, शिक्षा संस्थानों और आधारभूत संरचना के विस्तार ने विकास के नए द्वार खोले हैं। यह क्षेत्र अब पिछड़ेपन की पहचान से आगे बढ़कर प्रगति और संभावनाओं के केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसके लिए प्रधानमंत्री जी का मार्गदर्शन और केंद्र सरकार का सतत सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के रूप में मुझे यह अनुभव करने का अवसर मिला है कि प्रधानमंत्री जी की सोच केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ भारत के व्यापक निर्माण की है। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजना ने गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं ने मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है। प्रदेश सरकार भी प्रधानमंत्री जी के इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व हमें यह विश्वास देता है कि विकसित भारत का संकल्प केवल एक सपना नहीं, बल्कि एक साकार होती राष्ट्रीय यात्रा है। उनके नेतृत्व में भारत ने आत्मविश्वास, सांस्कृतिक गौरव और विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। आज प्रत्येक भारतीय गर्व के साथ कह सकता है कि उसका देश विश्व पटल पर नई ऊँचाइयों को छू रहा है। व्यक्तिगत रूप से मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे ऐसे युग निर्माता नेतृत्व के साथ कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है। भारतीय चिंतन में आदर्श नेतृत्व का आधार सदैव लोक कल्याण और राष्ट्रहित रहा है। "प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्। नात्मप्रियं हितं राज्ञः प्रजानां तु प्रियं हितम्॥" शासक का सुख प्रजा के सुख में और उसका हित प्रजा के हित में निहित होता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनसेवा, सुशासन और राष्ट्र प्रथम की यही भावना निरंतर परिलक्षित होती है। मध्यप्रदेश और विंध्य की जनता … Read more

सोना हुआ 6 महीने में सबसे सस्ता! कीमतों में बड़ी गिरावट के पीछे क्या है कारण, जानिए Buy or Wait

 नई दिल्ली सोने का भाव टूट (Gold Rate Fall) रहा है. न सिर्फ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज और घरेलू मार्केट में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ये लगातार सस्ता हो रहा है. गुरुवार को सोने का भाव छह महीने के निचले स्तर पर आ गया है. स्पॉट गोल्ड की कीमत 21 नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर 4,022.09 डॉलर पर पहुंच गई. इसके अलावा डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर 4,116.20 डॉलर पर आ गए।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट को लेकर स्टोनएक्स के सीनियर एनालिस्ट मैट सिम्पसन ने कहा, 'Gold Rate 4,000 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) की ओर तेजी से बढ़ रहा है. बुधवार को जारी सीपीआई रिपोर्ट के बाद अमेरिकी डॉलर सूचकांक में कोई खास तेजी नहीं आई।  MCX पर भी टूटे सोना-चांदी  न सिर्फ स्पॉट मार्केट में सोने की कीमत बिखरी है, बल्कि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी गोल्ड-सिल्वर प्राइस में गिरावट आई है. 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold Rate  गुरुवार को मार्केट ओपन होने के साथ ही गिरकर 1.46 लाख रुपये पर आ गया. तो वहीं 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली 1 किलो चांदी की कीमत गिरकर 2.30 लाख रुपये के करीब आ गई. इसमें ओपनिंग के साथ ही लगभग 5000 रुपये की गिरावट आई. इसके बाद अब चांदी अपने हाई से 2.26 लाख रुपये सस्ती मिल रही है।  Gold में गिरावट की वजह क्या?  अगर सोने में गिरावट के कारणों की बात करें, तो सबसे बड़ा एक कारण नजर आता है और वो है महंगाई का जोखिम. अमेरिका में मई महीने की रिटेल महंगाई दर तीन साल के हाई 4.2% पर पहुंच गई है. दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति कहते नजर आ रहे हैं कि, 'I Love Inflation'. मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते एनर्जी प्रोडक्ट की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकियों पर महंगाई का बम फोड़ने का काम किया है।  CME फेडवॉच टूल के मुताबिक, व्यापारी दिसंबर तक अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 70% से ज्यादा संभावना जता रहे हैं. उधर ईरान के होर्मुज बंद के ऐलान के बाद अचानक तेल की कीमतों में उछाल आया है. महंगाई बढ़ने के जोखिम के चलते सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. बता दें कि गोल्ड को हमेशा महंगाई के खिलाफ बचाव के रूप में देखा जाता है, लेकिन हाई पॉलिसी रेट्स कीमती धातुओं पर दबाव डालते हैं।  Gold में खरीदारी का मौका  तमाम रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका में महंगाई और मिडिल ईस्ट में संघर्ष के चलते के कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से सोने की कीमत में बड़ी गिरावट आई है. यह गिरावट निवेशकों के लिए एक खरीदारी का मौका (Gold Buying Opportunity) बन सकती है। 

21 विभागों की भागीदारी के साथ ग्रामीण सेवा शिविर शुरू, एक ही जगह मिलेंगी सभी सरकारी सुविधाएं

जयपुर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की मंशा एवं निर्देशों की अनुपालना में प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन को राज्य सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी एवं फ्लैगशिप योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचाने के लिए 12 जून से 15 जुलाई तक "ग्रामीण सेवा शिविर-2026" का आयोजन किया जाएगा। महा-अभियान के तहत राजस्व विभाग के अतिरिक्त 21 अन्य महत्वपूर्ण विभागों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। शिविरों का समय सप्ताह के कार्य दिवसों में प्रातः 9:30 बजे से सायं 6 बजे तक (अथवा कार्य समाप्ति तक) रहेगा। मुख्यमंत्री श्री शर्मा के निर्देशानुसार शिविर में आने वाले प्रत्येक नागरिक का कार्य उसी दिन पूर्ण करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। यदि सायं 06:00 बजे तक कुछ कार्य अपूर्ण या लंबित रहते हैं, तो विभागवार उनकी सूची संधारित की जाकर समयबद्ध रूप से निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। शिविर की शुरुआत से समाप्ति तक सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए विशेष पोर्टल तैयार अभियान की पारदर्शिता और दैनिक प्रगति पर नजर रखने के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी संचार विभाग द्वारा ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है। इसमें विभागीय कार्यों की दैनिक प्रगति रिपोर्ट इस पोर्टल पर शिविर प्रभारी के माध्यम से अनिवार्य रूप से अपडेट की जाएगी। इसके साथ ही, अभियान के दौरान निष्पादित होने वाले सभी दस्तावेजों व प्रमाण-पत्रों पर "ग्रामीण सेवा शिविर-2026" की विशेष मोहर अंकित की जाएगी। अभियान में स्थानीय स्तर पर सांसदों, विधायकों, जिला प्रमुखों, प्रधानों और अन्य जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ​की और से सभी जिला कलक्टर को निर्देशित किया गया है। एक ही स्थान पर मिलेंगी विभिन्न विभागों की सेवाएं ग्रामीण सेवा शिविर में राजस्व विभाग को अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है। विभाग द्वारा राजस्व अभिलेखों एवं खातों का शुद्धिकरण, खातों का विभाजन, रास्तों संबंधी प्रकरणों का निस्तारण, नामांतरण (म्यूटेशन), सरकारी एवं चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने, भूमिहीन किसानों को भूमि आवंटन, खातेदारी अधिकार प्रदान करने, सीमाज्ञान, आबादी विस्तार एवं विभिन्न प्रकार के प्रमाण-पत्र जारी करने की कार्यवाही की जाएगी। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वीबी—जी राम जी योजना का प्रचार—प्रसार एवं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पात्र परिवारों को लाभान्वित किया जाएगा। तथा स्वयं सहायता समूहों के गठन,बैंक खाता खुलवाना और बैंक लिंकेज की प्रक्रिया को गति देगा। पंचायती राज विभाग स्वच्छता संबंधी कार्यों, आईएचएचएल ​की स्वीकृतियां,विमुक्त घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु श्रेणी के परिवारों को पट्टा वितरण, भूखण्ड आवंटन तथा जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने की सेवाएं उपलब्ध कराएगा। वन विभाग द्वारा वन भूमि संबंधी प्रकरणों का निस्तारण एवं पौधों का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग मातृ-शिशु स्वास्थ्य जांच, कैंसर एवं सिकल सेल स्क्रीनिंग, टीबी जांच, टीकाकरण तथा आयुष्मान भारत कार्ड वितरण करेगा। पशुपालन विभाग द्वारा पशु स्वास्थ्य शिविर, टीकाकरण एवं मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत बीमा पॉलिसियां वितरित की जाएगी। पेयजल विद्युत, सड़क एवं अन्य आधाभुत सुविधाओं से जुडी समस्याओं का होगा समाधान ग्रामीण सेवा शिविर में ऊर्जा विभाग द्वारा विद्युत सप्लाई,ट्रांसफार्मर एवं बिजली संबंधी शिकायतों का समाधान किया जाएगा। जबकि कृषि विभाग किसानों को विभिन्न योजनाओं एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी उपलब्ध कराएगा। आयोजना विभाग जनधन खाते, सामाजिक सुरक्षा बीमा योजनाओं, अटल पेंशन योजना एवं जनआधार से जुड़े कार्य करेगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग एनएफएसए से संबंधित लंबित प्रकरणों, ई-केवाईसी एवं आधार सीडिंग का निस्तारण करेगा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग पेंशन सत्यापन, पालनहार योजना, यूडीआईडी कार्ड, कृत्रिम अंग वितरण एवं मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से संबंधित कार्य किए जाएंगे।   इन विभागो की भी रहेगी भागीदारी शिविरों में महिला एवं बाल विकास विभाग लाडो प्रोत्साहन योजना, काली बाई भील सम्बल उड़ान योजना, पन्नाधाय सुरक्षा एवं समान केन्द्र,मुख्यमंत्री सामुहिक विवाह अनुदान योजना,वन स्टॉप सेन्टर,महिला हेल्पलाइन,शिक्षा सेतु,मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला सुरक्षा एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाएगा। श्रम विभाग निर्माण श्रमिकों के लिए टूलकिट सहायता योजना के आवेदनों का निस्तारण करेगा। आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित सहायता प्रकरणों का निस्तारण करेगा। जल संसाधन विभाग जल निकासी, जलभराव, बांधों एवं अतिक्रमण से संबंधित प्रस्ताव तैयार करेगा। परिवहन विभाग पात्र व्यक्तियों को रोडवेज बसों के लिए रियायती एवं निःशुल्क यात्रा पास जारी किए जाएंगे। सहकारिता विभाग किसानों को फसली ऋण योजनाओं के प्रति जागरूक करेगा तथा पीएम-किसान लाभार्थियों का सत्यापन करेगा। शिक्षा विभाग नामांकन वृद्धि,पालनहार योजना, छात्रवृत्ति समस्याओं के समाधान एवं विद्यालय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। आयुर्वेद विभाग की स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचेंगी गांव—गांव शिविरों में आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति विभाग निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित कर आवश्यक दवाइयों का वितरण करेगा। सैनिक कल्याण विभाग पूर्व सैनिकों की पेंशन एवं पहचान पत्र संबंधी समस्याओं का समाधान करेगा। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं भू-जल विभाग पेयजल व्यवस्था, हैंडपंप मरम्मत, जल गुणवत्ता जांच तथा पाइपलाइन लीकेज की समस्याओं का निराकरण करेगा। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा ग्रामीण सड़कों एवं राजकीय भवनों की मरम्मत सुनिश्चित की जाएगी। राज्य स्तर पर गठित होगा समन्वय प्रकोष्ठ- अभियान की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं दैनिक समीक्षा के लिए प्रमुख शासन सचिव, राजस्व के निर्देशन में राज्य स्तर पर समन्वय प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। राज्य सरकार ने आमजन से अपील की है कि वे अपने निकटतम ग्राम पंचायत मुख्यालय पर आयोजित ग्रामीण सेवा शिविरों में पहुंचकर विभिन्न योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ प्राप्त करें।

टर्मिनल से रनवे तक बदला सिस्टम: DIAL ने IGI एयरपोर्ट पर लगाए नए ड्रेनेज और पंप

नई दिल्ली देश के सबसे बड़े और व्यस्ततम एयरपोर्ट आइजीआइ की संचालन एजेंसी डायल इस बार मानसून से जुड़ी तैयारियों में कोई किंतु-परंतु या ढिलाई की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती। पिछले कुछ वर्षाें में मानसून के दौरान टर्मिनल के भीतर पानी टपकने, रनवे पर जलभराव और टर्मिनल-1 के फोरकोर्ट पर हुए हादसों ने न केवल यात्रियों को परेशान किया था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयरपोर्ट की साख को भी बट्टा लगाया था। इन पुरानी फजीहतों से कड़ा सबक लेते हुए इस बार दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने एक एडवांस प्री-मानसून प्लान तैयार किया है। हालांकि, असली चुनौती इन दावों को जमीन पर उतारने की होगी। विगत वर्षों का कड़वा अनुभव इस बार एयरपोर्ट प्रशासन की तैयारियों में जो सख्ती और जल्दबाजी दिख रही है, उसके पीछे बीते वर्षों का कड़वा अनुभव है। पूर्व में हुई कुछ गंभीर घटनाओं ने एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए थे। दो वर्ष पूर्व मानसून की शुरुआत में टर्मिनल-1 पर हुआ हादसा सबसे ज्यादा संवेदनशील रहा, जिसने स्ट्रक्चरल मेंटेनेंस की कमियों को उजागर किया था। वहीं, कुछ वर्ष पूर्व भारी वर्षा के दौरान रनवे और एयरसाइड एरिया में पानी भरने से उड़ानों के रूट डाइवर्ट करने पड़े थे, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा हुई। इसके अलावा, पिछले वर्ष टी-1 के भीतर लाउंज एरिया में पानी टपकने की तस्वीरों ने इंटरनेट मीडिया पर खूब किरकिरी कराई थी। यही वजह है कि इस बार डायल प्रशासन केवल रूटीन सफाई तक सीमित न रहकर बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव करने को मजबूर हुआ है। इस बार डायल ने कागजी दावों से इतर जमीन पर कई तकनीकी बदलाव किए हैं। टर्मिनल-1 फोरकोर्ट: यहां पहले होने वाले जलभराव और कमजोर ड्रेनेज से निपटने के लिए अत्याधुनिक साइफोनिक ड्रेनेज सिस्टम (वैक्यूम आधारित सक्शन तकनीक) और ओवरफ्लो डाउनटेक पाइप (इमरजेंसी बैकअप पाइप) लगाए गए हैं, जो पानी को छत पर जमा नहीं होने देंगे। टर्मिनल-2 की छत: स्काईलाइट और छतों से पानी का रिसाव रोकने के लिए पूरी छत की व्यापक स्तर पर वाटरप्रूफिंग की गई है और सभी जोड़ों की बारीक मरम्मत पूरी हो चुकी है। रनवे व एयरसाइड: विमानों के पहियों तक पानी भरने की पुरानी समस्या को खत्म करने के लिए हाई-कैपेसिटी डीवाटरिंग पंप स्थापित किए गए हैं और नालियों की सघन गाद सफाई (डीसिल्टिंग) का काम पूरा कर लिया गया है। बैकअप और समन्वय पर विशेष जोर इस बार डायल सिर्फ नए ड्रेनेज सिस्टम के भरोसे नहीं बैठा है, बल्कि उसने बैकअप प्लान भी तैयार किया है। आपात स्थितियों के लिए एक समर्पित क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) बनाई गई है, जो किसी भी लीकेज या जलभराव की स्थिति में तुरंत एक्शन के लिए संवेदनशील प्वाइंट्स पर 24 घंटे तैनात रहेगी। इसके साथ ही बाहरी पानी को रोकने के लिए भी व्यावहारिक कदम उठाए गए हैं। अक्सर एयरपोर्ट के आसपास बसे इलाकों का वर्षा जल बैकफ्लो मारकर एयरपोर्ट परिसर में घुस जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए डायल ने दिल्ली सरकार के साथ तालमेल बिठाकर इस बाहरी पानी को एयरपोर्ट में आने से पहले ही डाइवर्ट करने का प्लान बनाया है।