samacharsecretary.com

भिलाईनगर में मासूम पर बरसे लात-घूंसे, वीडियो सामने आते ही 6 नाबालिगों पर कार्रवाई

भिलाई नगर. नेवई थाना अंतर्गत कुछ नाबालिगों ने मिलकर 7 वर्ष के बच्चे की बेरहमी से पिटाई कर दी। पहले उसे नग्न कराया, फिर डांस करवाया। इसके बाद उससे ही अश्लील हरकतें कराई। बाद में लात- घूसों और डंडों से उसे जमकर पीटा। पुलिस के अनुसार यह वीडियो 7 दिन पुराना है, जो अब वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक नाबालिग गला दबाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है, जबकि बाकी नाबालिग लात-घूसों और डंडों से उसे मारते नजर आ रहे हैं। पूरी घटना का वीडियो भी उन्होंने ही बनाकर वायरल किया है। सभी नाबालिग बच्चे एक ही गांव के रहने वाले हैं और एक-दूसरे को अच्छे से जानते हैं। फिलहाल मामले में पुलिस ने 6 नाबालिगों को हिरासत में लेकर बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया है।

वाहन चालकों के लिए बड़ा बदलाव, मध्यप्रदेश में बिना OTP नहीं मिलेगा PUC सर्टिफिकेट

भोपाल. मध्यप्रदेश में अब पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट बनवाने के लिए मोबाइल ओटीपी सत्यापन अनिवार्य (OTP Verification) कर दिया गया है। भोपाल सहित पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिना ओटीपी सत्यापन के किसी भी वाहन का पीयूसी प्रमाण पत्र (PUC Certificate) जारी नहीं किया जाएगा। नई प्रणाली लागू होने से उन वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ सकती है, जिनके वाहन रिकॉर्ड में पुराना, गलत या बंद मोबाइल नंबर दर्ज है। ऐसे वाहन मालिकों को पहले परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर अपडेट कराना होगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर लागू हुई व्यवस्था सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने यह नई व्यवस्था लागू की है। डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किरण शर्मा के अनुसार, जैसे ही किसी पीयूसी केंद्र पर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज किया जाएगा, सिस्टम वाहन डेटाबेस से वाहन मालिक का मोबाइल नंबर प्राप्त करेगा। इसके बाद उसी नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। वाहन प्रदूषण जांच में पास होने के बाद ओटीपी सत्यापन पूरा होने पर ही पीयूसी प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। फर्जी पीयूसी पर लगेगी रोक परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग कर कई वाहनों के पीयूसी सर्टिफिकेट बनाए जा रहे थे। वास्तविक वाहन मालिक की पहचान और मोबाइल सत्यापन नहीं होने के कारण रिकॉर्ड की शुद्धता पर सवाल उठते थे। नई व्यवस्था में वाहन के पंजीयन रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर पर ही ओटीपी जाएगा। इससे गलत जानकारी देकर या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पीयूसी बनवाना आसान नहीं होगा। वाहन मालिकों के लिए क्या बदलेगा? पीयूसी बनवाने के लिए मोबाइल ओटीपी अनिवार्य होगा। वाहन रिकॉर्ड में सही मोबाइल नंबर दर्ज होना जरूरी रहेगा। ओटीपी सत्यापन नहीं होने पर सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा। गलत या पुराना नंबर होने पर रिकॉर्ड अपडेट कराना पड़ेगा। भविष्य में पीयूसी एक्सपायर होने से पहले मोबाइल अलर्ट मिलेगा। फर्जी जानकारी के आधार पर पीयूसी बनवाने पर रोक लगेगी। भोपाल में रोज 2500 पीयूसी सर्टिफिकेट भोपाल आरटीओ डॉ. जितेंद्र शर्मा के अनुसार, राजधानी में लगभग 60 पीयूसी केंद्र संचालित हो रहे हैं। यहां प्रतिदिन करीब 2500 पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। पूरे मध्यप्रदेश में 550 से 600 पीयूसी केंद्रों के माध्यम से रोजाना 22 हजार से 25 हजार तक पीयूसी प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। प्रदेश में कुल वाहनों की संख्या लगभग 2.5 करोड़ बताई जा रही है, जबकि भोपाल में 20 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। वाहन मालिकों को मिलेगा एक्सपायरी अलर्ट परिवहन विभाग भविष्य में ऐसी व्यवस्था भी शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत पीयूसी की वैधता समाप्त होने से पहले वाहन मालिकों को मोबाइल संदेश भेजा जाएगा। इससे वाहन मालिक समय रहते सर्टिफिकेट का नवीनीकरण करा सकेंगे और नियम उल्लंघन से बच पाएंगे।

ग्राम पंचायत स्तर पर बड़े बदलाव, IAS–RAS अधिकारियों को मिली विशेष शक्तियां

 जयपुर राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की समस्याओं, विशेषकर जमीन से जुड़े मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जनकल्याण शिविर के अन्तर्गत प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर दिनांक 12 जून से 15 जुलाई तक 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' का वृहद स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। संभागीय आयुक्त और जिला कलक्टरों को मिले विशेष अधिकार इस महा-अभियान के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ने प्रशासनिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया है। अभियान की अवधि के लिए समस्त संभागीय आयुक्तों और जिला कलक्टरों को विशेष रूप से प्राधिकृत किया गया है। इसके तहत वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में 'नॉन-फील्ड' (कार्यालयों/गैर-क्षेत्रीय पदों पर) कार्यरत तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को तुरंत प्रभाव से तहसीलों या उप-तहसीलों के रिक्त पदों पर पदस्थापित कर सकेंगे राज्यभर में 12 जनवरी से शुरू हो रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' अभियान में मौके पर ही समस्या समाधान के लिए राज्य सरकार ने कई अधिकारियों की शक्तियों को शिविर प्रभारियों व अन्य अधिकारियों को डेलीगेट कर दी है। ये आदेश 12 जून से 15 जुलाई तक प्रभावी होंगे। शिविर प्रभारी आईएएस, आरएएस को मिली ये शक्तियां आदेशों के अनुसार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने एवं राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने की जिला कलक्टर की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दे दी गई हैं।   राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के अंतर्गत उपखण्ड अधिकारी की शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251-ए व उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत अन्य खातेदार की जोत में से होकर भूमिगत पाइपलाइन बिछाने या नया मार्ग खोलने या विद्यमान मार्ग को चौड़ा करने के लिये उपखण्ड अधिकारियों को प्रदत्त शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्व अभिलेख की त्रुटियों के शुद्धिकरण के प्रकरणों के निस्तारण हेतु उपखण्ड अधिकारी की  शक्तियां भी शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दी गई हैं। शिविरों में नियुक्त तहसीलदार/नायब तहसीलदार को मिली शक्तियां राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 53 की उप-धारा (1) व (2) एवं उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत भूमि के बंटवारे की तहसीलदार की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को दी गई हैं। राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 251 (1) के तहत रास्ते तथा अन्य निजी सुखाचार के अधिकार के तहत तहसीलदार की शक्तियां शिविरों के लिए नियुक्त  समस्त नायब तहसीलदारों को प्रदान की गई हैं। नामान्तरकरण के मामलों की ग्राम पंचायत की शक्तियां और राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम 18 के अन्तर्गत तहसीलदार की शक्ति व राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (अधिनियम संख्या 15, वर्ष 1956) की धारा 128 के परन्तुक एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/36 दिनांक 04.09.1982 के तहत अविवादित सीमा ज्ञान के मामलो को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां शिविर में नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को प्रदत्त की गई हैं। ऐसे तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को  राज्य सरकार राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251 एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/34 दिनांक 14.09.1982 के तहत मार्गाधिकार या अन्य सुखाचार के वास्तविक उपयोग में विघ्न डाले जाने के मामलों को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां भी दे दी गई हैं। समय अवधि 15 दिन से 7 दिन की राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम के खण्ड (ख) के द्वितीय परन्तुक में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये भूमि आवंटन के लिये आवेदन प्रस्तुत किये जाने के लिये जारी उद्घोषणा के लिये निर्धारित पन्द्रह दिवस की कालावधि को कम कर सात दिन कर दिया गया है। भूमि आवंटन की राज्य सरकार की पॉवर कलेक्टर को राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 102क के अन्तर्गत आबादी विस्तार हेतु आरक्षित भूमि को स्थानीय निकायों के अधीन किये जाने की राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियां  जिला कलक्टर को दी गई है।  

रेस कोर्स स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड पर सरकार का कब्जा, कानूनी लड़ाई की तैयारी

नई दिल्ली लगभग 15.20 एकड़ में फैला जयपुर पोलो ग्राउंड रेस कोर्स इलाके में स्थित है। जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय ने 1930 के आसपास दिल्ली पोलो क्लब को यह भूमि उपहार स्वरूप दी थी। वे खुद भी पोलो के मशहूर खिलाड़ी थे। तब से यह मैदान पोलो की धड़कन बना रहा। बेशक, दिल्ली का यह ग्राउंड उनके सपनों का विस्तार था। एक ऐसा मैदान, जो बिलियर्ड टेबल जितना चिकना हो। यहां राजकुमारों, सेना अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की टापें गूंजी। 1975 में ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स (अब किंग चार्ल्स) ने यहां मैच खेला। लेकिन इतिहास सिर्फ विजयों का नहीं, दर्द का भी गवाह है। नवाब इफ्तिखार अली खान पटौदी सीनियर यहां 5 जनवरी 1952 को पोलो खेलते हुए घोड़े से गिर गए थे और उनकी मृत्यु हो गई थी। उस दिन उनके बेटे, क्रिकेट लीजेंड मंसूर अली खान पटौदी का 11वां जन्मदिन था। वे वहां मौजूद थे। यह घटना दिल्ली के पटौदी की त्रासदी से प्रिंस चार्ल्स के मैच तक, अनगिनत किस्सों का मैदान खेल इतिहास की एक दुखद कड़ी बनी। फिर भी मैदान खिलाड़ियों का आकर्षण बना रहा। जिंदल पैंथर्स, पद्मनाभ सिंह जैसी टीमों ने यहां रोमांचक मुकाबले खेले। सांसों का हिस्सा  यह ग्राउंड सिर्फ खेल का मैदान नहीं, दिल्ली की सांसों का हिस्सा रहा। हरे-भरे पेड़ों और खुली हवा से घिरा जयपुर पोलो ग्राउंड प्रदूषण की मार झेलती राजधानी को थोड़ी राहत देता था। जयपुर पोलो ग्राउंड अब स्मृतियों की धूल में सिमट जाएगा। फिर भी, जो विरासत एक बार रची जाती है, वह कभी पूरी तरह मिटती नहीं। वह हवा में, कहानियों में और उन दिलों में बसती है, जिन्होंने कभी यहां घोड़ों की गति महसूस की। जयपुर के और भी प्रतीक  इस बीच, राजधानी में में जयपुर के कई अन्य महत्वपूर्ण प्रतीक भी मौजूद हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर में जयपुर स्तंभ है। यह करीब 145 फीट ऊंचा है। जब देश की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित हुई, उस खुशी में जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह द्वितीय ने इसे ब्रिटिश सरकार को भेंट किया था। नई दिल्ली के निर्माण के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने रायसीना क्षेत्र को चुना था। उन दिनों यह क्षेत्र जयपुर राज्य की संपत्ति था। महाराजा ने यह क्षेत्र ब्रिटिश सरकार को सौंपा और इस भेंट को जीवंत बनाए रखने के लिए वायसराय हाउस (वर्तमान राष्ट्रपति भवन) में जयपुर स्तंभ का निर्माण करवाया गया। इस पर महाराजा द्वारा भेजा गया चांदी का शुभकामना प्रतीक लगा है, जिस कारण इसे जयपुर स्तंभ कहा जाता है। जयपुर से कनॉट प्लेस तक जयपुर रियासत के राजा जय सिंह द्वितीय ने कनॉट प्लेस में राजधानी के सबसे प्राचीन हनुमान मंदिर का 1724 में जीर्णोद्धार करवाया था। उन्होंने हनुमान मंदिर से सटे शिव मंदिर की महत्ता को देखते हुए उसका भी जीर्णोद्धार कराया। जय सिंह द्वितीय ने ही कनॉट प्लेस के पास संसद मार्ग पर जंतर मंतर का निर्माण करवाया था। यह एक खगोलीय वेधशाला है, जिसका निर्माण 1724 में हुआ था। राजस्थान मामलों के जानकार और लेखक गोपेन्द्र नाथ भट्ट ने बताया कि कनॉट प्लेस के पास स्थित राजा बाजार भी जयपुर महाराजा के अधिकार क्षेत्र में था। IPA ने कहा, कानूनी लड़ाई जारी रहेगी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएडडीओ) ने शनिवार को दिल्ली के रेस कोर्स क्षेत्र स्थित 15.20 एकड़ के जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा अपने हाथ में ले लिया। यह कार्रवाई 20 मई को जारी बेदखली आदेश के बाद की गई, जिसमें एलएंडडीओ ने जमीन को वृहद सार्वजनिक उद्देश्य और जनहित के लिए आवश्यक बताते हुए कब्जा मागा था। हालांकि, आदेश में जमीन के प्रस्तावित उपयोग का उल्लेख नहीं किया गया था। इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) ने इस कार्रवाई को गलत, मनमाना और कानून के विपरीत बताया है। आईपीए के वकील मेजर (सेवानिवृत्त) निर्विकार सिह ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए एसोसिएशन फिलहाल कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं करेगी।  

सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 80% लाभुकों का वेरिफिकेशन पूरा

पटना  राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के 95 लाख 82 हजार पेंशनधारियों ने अब तक जीवन प्रमाणीकरण कराया है। समाज कल्याण मंत्री डाॅ.श्वेता गुप्ता के मुताबिक अब तक राज्य के करीब 80 प्रतिशत लाभुकों ने जीवन प्रमाणीकरण करा लिया है। मंत्री ने शेष पेंशनधारियों से जल्द जीवन प्रमाणीकरण कराने की अपील की उन्होंने राज्‍य के शेष पेंशनधारियों से पंचायत स्तरीय शिविर या नजदीकी काॅमन सर्विस सेंटर के माध्यम से निशुल्क जीवन प्रमाणीकरण कराने की अपील की है, ताकि सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि उन्हें निर्बाध रूप से मिलती रहे। समाज कल्याण विभाग द्वारा सभी पात्र लाभुकों तक संबंध‍ित योजनाओं को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इन योजनाओं की प्रखंड व पंचायत स्तर तक निगरानी ककायी जा रही है, ताकि सही लाभुक को योजना लाभ मिल सके। वहीं 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग जिन्हें पेंशन नहीं मिलती है, विभाग ने उनसे शीघ्र ही आवेदन करने की अपील की है। सबसे अधिक पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्वी चंपारण में लाभुक विभाग के आंकड़े के मुताबिक सबसे अधिक मधुबनी जिले में 4 लाख 78 हजार लाभुकों ने जीवन प्रमाणीकरण कराया है। इसके बाद पूर्वी चंपारण में 4 लाख 47 हजार, पटना में 4 लाख 43 हजार, मुजफ्फरपुर में 4 लाख 24 हजार लाभुकों ने प्रमाणीकरण कराया है।   इसी तरह समस्तीपुर में 4 लाख 10 हजार और दरभंगा जिले में 3 लाख 80 हजार लाभुकों ने अपना जीवन प्रमाणीकरण कराया है। सबसे कम शेखपुरा जिले में 62 हजार लाभुकों ने जीवन प्रमाणीकरण कराया है। इसके बाद शिवहर में 67 हजार, अरवल में 76 हजार और लखीसराय में 96 हजार लोगो ने जीवन प्रमाणीकरण कराया है।  

गुरदासपुर में चुनावी नतीजे पर ब्रेक, EVM खराब होने से दो केंद्रों पर फिर से वोटिंग

गुरदासपुर. गुरदासपुर जिले के दीनानगर नगर परिषद चुनाव में तकनीकी खराबी के कारण रुकी चुनावी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अब वार्ड नंबर 6 के बूथ नंबर 9 पर दोबारा मतदान कराया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग पंजाब के निर्देशों के बाद प्रशासन ने पुनर्मतदान की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मतदान 15 जून को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और मतदान समाप्त होने के बाद मतों की गिनती कर परिणाम घोषित किया जाएगा। जिला चुनाव अधिकारी एवं उपायुक्त आदित्य उप्पल ने बताया कि नगर परिषद दीनानगर के वार्ड नंबर 6 के बूथ नंबर 9 पर 13 जून को मतदान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीन में तकनीकी खराबी आ गई थी। मदान शुरू होने से पहले आई थी दिक्कत जानकारी के अनुसार मतदान शुरू होने के कुछ समय बाद ही पहली मशीन में तकनीकी समस्या आ गई थी। इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दूसरी मशीन उपलब्ध करवाई और शेष मतदान उसी मशीन पर कराया गया। प्रशासन ने उस समय मतदान प्रक्रिया को सुचारु रखने का प्रयास किया, ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि वास्तविक समस्या उस समय सामने आई जब मतदान समाप्त होने के बाद दोनों मशीनों में दर्ज मतों को जोड़कर परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों के अनुसार पहली मशीन की डिस्प्ले तकनीकी रूप से काम नहीं कर रही थी, जिसके कारण उसमें दर्ज मतों की संख्या प्राप्त नहीं की जा सकी। इस वजह से कुल मतों की सही गणना संभव नहीं हो सकी और मतगणना रोकनी पड़ी। चुनाव आयोग को भेजी गई थी रिपोर्ट मामले की विस्तृत रिपोर्ट राज्य चुनाव आयोग को भेजी गई थी। आयोग ने तकनीकी स्थिति की समीक्षा करने के बाद निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए संबंधित बूथ पर पुनर्मतदान कराने का निर्णय लिया। प्रशासन का कहना है कि पुनर्मतदान के दौरान सभी आवश्यक तकनीकी और सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं ताकि मतदान प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। अधिकारियों ने मतदाताओं से निर्धारित समय पर मतदान केंद्र पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की है। अब वार्ड नंबर 6 के उम्मीदवारों और मतदाताओं की नजरें 15 जून को होने वाले पुनर्मतदान पर टिकी हैं। मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद ही इस वार्ड के चुनावी मुकाबले का अंतिम फैसला सामने आएगा।

दुर्ग को मिलेगा आधुनिक बहुद्देशीय स्टेडियम, निर्माण कार्य शुरू; जमीन का सीमांकन पूरा

दुर्ग. दुर्ग ब्लॉक के खेलगांव खम्हरिया में 15 करोड़ की लागत से संभागीय स्टेडियम निर्माण होगा। जिसकी स्वीकृति सरकार की ओर से की गई है। प्रथम किस्त 4 करोड़ लोकनिर्माण विभाग को मिल चुका है। स्टेडियम निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राजस्व एवं लोक निर्माण अधिकारियों की उपस्थिति में स्टेडियम के सीमा रेखा का सीमांकन कार्य की आरआई व पटवारी के माध्यम से किया गया। ज्ञातव्य हो कि ग्राम खम्हरिया में 16 एकड़ शासकीय भूमि खेल अधोसंरचना निर्माण हेतु जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग दुर्ग के नाम से आवंटित किया जा चुका है। स्टेडियम निर्माण के अंतर्गत 400 मीटर का एथलेटिक्स सिंथेटिक टैंक विथ फुटबाल एवं सिटिंग गैलरी भी शामिल हैं। इसके साथ ही साथ 2 करोड़ की लागत से बैडमिंटन इंडोर स्टेडियम एवं 80 लाख का प्रशासनिक भवन का निर्माण होगा। चूंकि खेलगांव खम्हरिया दुर्ग भिलाई एवं रिसाली निगम से मात्र 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर है जिससे दुर्ग ग्रामीण, दुर्ग शहर भिलाई, रिसाली निगम सहित आस पास गांव के खिलाड़ी एथलेटिक्स फुटबाल एवं बैडमिंटन के खिलाड़ियों को इसका लाभ मिलेगा। संभाग का यह पहला स्टेडियम होगा। राजस्व विभाग से आरआई उतई सर्किल घनश्याम चंद्राकर, पटवारी विवेक देवांगन, लोकनिर्माण विभाग से सिविल इंजीनियर वाय के सोनवानी, सुष्मिता चंद्राकर सरपंच ग्राम पंचायत खम्हरिया श्रीमती दुलारी देशलहरे, हरीश कुर्रे (पंच) आशीष चंद्राकर एवं ग्रामवासियों में अनिल चतुर्वेदी, बालकदास, बी. आर. साहू सहित ग्रामवासियों की उपस्थिति में सीमांकन कार्य की प्रक्रिया शुरू हुई। स्टेडियम की जमीन का चिन्हांकन कर रहे सरकारी अधिकारियों को जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले ग्रामीणों व महिलाओं ने पत्थर से मारने की भी धमकी भी दे रहे थे। जिसके कारण अगला जमीन चिन्हांकन का कार्य पुलिस फोर्स की उपस्थित में होगा, क्योंकि इस स्टेडियम निर्माण को लेकर कई बार वाद विवाद व मारपीट जैसी बड़ी घटनाएं घट चुकी है।

डिजिटल गवर्नेंस को नई उड़ान, चंडीगढ़ में स्थापित होगा AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

चंडीगढ़. प्रशासन द्वारा आईटी पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने की तैयारी की जा रही है । इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा, क्योंकि इससे सरकारी सेवाएं अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बन सकेंगी। प्रशासन के अनुसार, एआई तकनीक के उपयोग से जन्म प्रमाणपत्र, शिकायत निवारण, ट्रैफिक प्रबंधन और नगर सेवाओं जैसी सुविधाओं में सुधार आएगा । शहरवासियों की शिकायतों का तेजी से समाधान होगा और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह बनेगी।ट्रैफिक जाम, सफाई व्यवस्था, पानी और बिजली जैसी सेवाओं की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। यह केंद्र युवाओं, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए भी नए अवसर लेकर आएगा। यहां एआई, साइबर सुरक्षा, ब्लाकचेन और अन्य उभरती तकनीकों पर शोध, प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह पहल चंडीगढ़ को देश के प्रमुख एआई और स्मार्ट गवर्नेंस हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रशासन ने क्या कहा? प्रशासन के अनुसार, यह सेंटर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इंडिया एआई स्टार्टअप फाइनेंसिंग पिलर योजना के तहत स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान लागू कर सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। यह केंद्र सरकार, शिक्षण संस्थानों और उद्योग जगत के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाएगा। यहां शहरी और प्रशासनिक चुनौतियों के समाधान के लिए व्यावहारिक एआई आधारित तकनीकों का विकास किया जाएगा। साथ ही स्टार्टअप्स को को-वर्किंग स्पेस, इन्क्यूबेशन सपोर्ट, मेंटरशिप और निवेशकों से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्ताव के अनुसार, सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अलावा ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग और इंटरनेट आफ थिंग्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर भी काम किया जाएगा। इसके लिए हाई-परफार्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, उन्नत प्रयोगशालाएं और रिसर्च एवं प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए विशेष सैंडबॉक्स वातावरण तैयार किए जाएंगे । साझा फंडिंग मॉडल पर बनेगा प्रोजेक्ट परियोजना के वित्तपोषण के लिए साझा मॉडल अपनाया जाएगा। इसमें लगभग 40 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार के इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयद्वारा, 40 प्रतिशत चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा और शेष 20 प्रतिशत उद्योग एवं शैक्षणिक साझेदारों के सहयोग से जुटाई जाएगी। प्रशासन पहले शहर के विभिन्न विभागों में ऐसी समस्याओं और जरूरतों की पहचान करेगा, जिन्हें एआई आधारित समाधानों के माध्यम से दूर किया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल चंडीगढ़ को देश के अग्रणी एआई और टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।प्रशासन पहले से ही स्टार्टअप पालिसी के जरिए उद्यमियों और नवाचार को बढ़ावा दे रहा है।

पश्चिमी विक्षोभ के असर से बदला मौसम, 4–5 दिन और बारिश के आसार

 लखनऊ प्रदेश में आंधी बारिश का दौर लगातार जारी है.  बरसात के बीच लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है.  शनिवार को भी राज्य के कई स्थानों में बरसात हुई.  राजस्थान में प्री मानसून अच्छी बरसात हो रही है. कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई. बरसात के कारण कई जगहों के तापमान में गिरावट हुई.  प्रदेश में जैसलमेर में तापमान सर्वाधिक 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि शुक्रवार की तुलना में करीब 3.4 डिग्री सेल्सियस कम हुआ.   राजधानी जयपुर में भी सुबह से ही सूरज और बादल की आंख मिचौली चल रही है.  लोगों का उमस से हाल बेहाल है.  लेकिन तापमान में पिछले दिनों की तुलना गिरावट हुई है.   बदला मौसम का मिजाज मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम का मिजाज बदला हुआ है.  वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ हरियाणा और आसपास के क्षेत्र में परिसंचरण तंत्र के रूप में सक्रिय है.  इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नम हवाओं के कारण प्रदेश में आंधी-बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं. तेज मेघगर्जन के साथ आंधी-बारिश पिछले 24 घंटे में बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में तेज मेघगर्जन, आंधी के साथ बारिश दर्ज की गई.  सीकर के दांतारामगढ़ में सबसे ज्यादा 50 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई. आज भी बीकानेर, जयपुर, भरतपुर, अजमेर, जोधपुर और कोटा संभाग के कुछ क्षेत्रों में तेज आंधी के साथ बारिश की संभावना जताई गई है.  इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं.  अगले 4 से 5 दिन तक प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है.

प्रति प्रसव 600 रुपये की दर से बढ़ा भुगतान, 25 हजार ममता कार्यकर्ताओं को फायदा

 पटना चालू वित्तीय वर्ष में ममता कार्यकर्ताओं को बतौर प्रोत्साहन राशि 6.60 करोड़ रुपये मिलेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अंतिम पूरक अनुदान में भी प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था हो सकती है। उल्लेखनीय है कि बिहार की ममता कार्यकर्ता को अभी प्रति प्रसव 600 रुपये दिए जा रहे हैं। उसे ही प्रोत्साहन राशि कहा जाता है। राज्य के मेडिकल कालेज, सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल और रेफरल अस्पतालों के साथ ममता कार्यकर्ता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेवा दे रही हैं। राज्‍य में 25 हजार ममता कार्यकर्ता संस्थागत प्रसव, सुरक्षित मातृत्व, और प्रसवोत्तर देखभाल में वे सहायता कर रहीं। अभी उनकी संख्या लगभग 25000 है। उनके सहयोग से स्वास्थ्य मानकों में सुधार हुआ है और संस्थागत प्रसव के प्रति रुझान बढ़ा है। प्रतिदान यह कि इस योजना से हजारों ग्रामीण महिलाओं को नियमित रोजगार मिला है। यह योजना वर्ष 2008 में शुरू हुई थी। तब ममता कार्यकर्ता को प्रति प्रसव 100 रुपये मिलते थे। 2016-17 से 2024-25 के मध्य तक यह राशि 300 रुपये रही। विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2025 में छह अगस्त को स्वास्थ्य विभाग ने संकल्प जारी कर प्रोत्साहन राशि 600 रुपये कर दी गई। प्रोत्साहन राशि का इतिहास यह योजना वर्ष 2008 में शुरू हुई थी। उस समय ममता कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव 100 रुपये मिलते थे। वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक यह राशि 300 रुपये रही। विधानसभा चुनाव से पहले 6 अगस्त 2025 को स्वास्थ्य विभाग ने संकल्प जारी कर इसे बढ़ाकर 600 रुपये कर दिया। ममता कार्यकर्ता की तीन प्रमुख भूमिकाएं     प्रसव में सहयोग : गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रेरित करना और प्रसव के दौरान सहायता करना।     जच्चा-बच्चा देखभाल : प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां और नवजात की देखभाल, पोषण और स्वच्छता की जानकारी देना।     जागरूकता फैलाना : ग्रामीण महिलाओं को सुरक्षित प्रसव, स्तनपान और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करना। 2026-27 में जिला/संस्था वार प्रोत्साहन राशि (रुपये में) सिविल सर्जन कार्यालय-राश‍ि गया (1): 14,57,000 गया (2): 23,91,000 पूर्वी चंपारण: 16,93,000 सारण: 25,04,000 समस्तीपुर: 25,04,000 मधुबनी: 23,56,000 दरभंगा: 20,07,000 पश्चिम चंपारण: 21,82,000 कटिहार: 28,08,000 सीतामढ़ी: 23,56,000 भागलपुर: 25,04,000 बक्सर: 15,84,000 जमुई: 14,11,000 बांका: 16,23,000 औरंगाबाद: 10,02,000 सहरसा: 20,07,000 पूर्णिया: 25,31,000 नवादा: 13,65,000 अरवल: 5,66,000 शिवहर: 12,29,000 खगड़िया: 14,83,000 किशनगंज: 15,85,000 लखीसराय: 13,20,000 नालंदा: 15,40,000 बेगूसराय: 18,89,000 सिवान: 13,65,000 रोहतास: 13,65,000 वैशाली: 20,64,000 मुजफ्फरपुर: 22,38,000 कैमूर: 18,89,000 सुपौल: 11,91,000 मधेपुरा: 11,91,000 गोपालगंज: 12,96,000 भोजपुर: 13,20,000 शेखपुरा: 7,40,000 जहानाबाद: 6,70,000 मुंगेर: 11,91,000 अररिया: 11,45,000 मेडिकल कॉलेज व अस्पताल मेडिकल कॉलेज, बेतिया: 8,14,000 भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान, पावापुरी: 99,000 जेएलएनएमसीएच, भागलपुर: 3,49,000 एएनएमएमसीएच, गया: 6,98,000 राजकीय मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, पूर्णिया: 2,93,000 प्रभावती अस्पताल, गया: 1,05,000 गुरु गोविंद सिंह सदर अस्पताल, पटना सिटी: 80,000