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रुदौली में जनसभा के दौरान बोले रामभक्तों पर सवाल उठाने वालों का दोहरा चरित्र उजागर

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। रुदौली विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग आज रामभक्तों के अपमान की बात कर रहे हैं, वही पहले राम का नारा लगाने वालों और कारसेवकों पर गोली चलवाते थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के दोहरे चरित्र को जनता भलीभांति जानती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के दोहरे चरित्र को देखो, कहती है कि राम भक्तों का अपमान हुआ है। कारसेवकों और रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले लोग उपदेश देने चले हैं। हमने ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी जांच बैठाई। एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी। मैं सभी से कहूंगा कि कोई भी अनर्गल टिप्पणी न करें, जो रामभक्तों को आहत करे सपा-कांग्रेस पर बरसे सीएम योगी योगी कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए 500 वर्षों तक संघर्ष किया गया है। कांग्रेस ने मंदिर निर्माण रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था और सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम के अस्तित्व तक पर सवाल उठाए गए थे। आज वही लोग अयोध्या और रामभक्तों की चिंता जताने का दिखावा कर रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। उन्होंने कहा कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। अगर किसी के पास चंदा या चढ़ावा चोरी से संबंधित कोई सबूत है तो वह जांच एजेंसी को सौंपे। जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो वह किसी भी कीमत पर नहीं बचेगा। अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आए- योगी उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि जांच रिपोर्ट आने तक अनर्गल बयानबाजी से बचें और किसी के चरित्र हनन का प्रयास न करें। उन्होंने कहा कि अयोध्या और रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने वाली बातें नहीं होनी चाहिए। जनता को भी ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए जो अयोध्या को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर बन न पाए, इसके लिए कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट में बेशर्मी के साथ कहा था कि राम तो हुए ही नहीं। वही कांग्रेस आज अयोध्या पर बहुत मचल रही है। कह रही है कि रामभक्तों का अपमान हुआ। झलकारी बाई की 22 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण इससे पहले मुख्यमंत्री ने मां कामाख्या धाम में पूजा-अर्चना की। उन्होंने राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का लोकार्पण किया और वीरांगना झलकारी बाई की 22 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया। साथ ही 378 करोड़ रुपये से अधिक की 126 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।

274 राजस्व गांवों और 6 वार्डों में विकास कार्यों पर अस्थायी रोक, सुनियोजित टाउनशिप पर जोर

 पटना  पटना के निकट प्रस्तावित ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप पाटलिपुत्र क्षेत्र में जमीन मालिकों को भी विशेष परिस्थितियों में राहत मिलेगी। जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और लीज की अनुमति दी गई है। शहरी क्षेत्र की जमीन के लिए मालिकों को बाजार मूल्य या एमवीआर का दो गुना भुगतान मिलेगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि के लिए यह राशि बाजार मूल्य या MVR के चार गुना के बराबर होगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि के लिए तय मुआवजा राशि पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। पुनपुन नपं के छह वार्डाें की जमीन के लिए एमवीआर से दो गुना भुगतान इस व्यवस्था का लाभ पटना जिले के नौ प्रखंडों के 274 राजस्व गांवों को मिलेगा। इनमें दनियावां, धनरुआ, फतुहा, मसौढ़ी, नौबतपुर, पटना ग्रामीण, फुलवारी, पुनपुन और संपतचक प्रखंड शामिल हैं। वहीं पुनपुन नगर पंचायत के छह वार्डों की जमीन के लिए एमवीआर से दो गुना भुगतान का प्रावधान किया गया है। पटना मास्टर प्लान-2031 के तहत जोनल प्लान तैयार करने के उद्देश्य से इन 274 राजस्व गांवों और पुनपुन नगर पंचायत के छह वार्डों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण, विकास और भवन निर्माण संबंधी कार्यों पर तत्काल प्रभाव से 30 मार्च 2027 तक रोक लगाई गई है ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप में नौ प्रखंड के 274 गांव व 6 वार्ड यह फैसला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के सुनियोजित विकास और भविष्य की आधारभूत संरचना को ध्यान में रखकर लिया गया है। जोनल प्लान तैयार होने के बाद आगे की विकास योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। परियोजना में सबसे अधिक 85 राजस्व गांव पुनपुन प्रखंड से शामिल किए गए हैं। इसके अलावा फतुहा के 70, नौबतपुर के 49, धनरुआ के 24, मसौढ़ी के 14, संपतचक के 10, दनियावां और फुलवारी के आठ-आठ तथा पटना ग्रामीण के छह राजस्व गांव इस योजना का हिस्सा होंगे।

डिजिटलीकरण, क्षमता विस्तार और सुस्थिर खनन पहलों की समीक्षा की

हैदराबाद  एनएमडीसी के वरिष्ठ प्रबंधन ने दोणिमलै कॉम्प्लेक्स की हाल ही में हुई एक यात्रा के दौरान परिचालन दक्षता को मजबूत करने, जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने और कर्मचारियों तथा आसपास के समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से कई रणनीतिक पहलों की समीक्षा की । इस दौरे से प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने का अवसर मिला, जो दोणिमलै को भविष्य के लिए तैयार खनन परिसर में बदलने में मदद कर रही हैं । साथ ही, एनएमडीसी को भारत के सबसे बड़े और जिम्मेदार लौह अयस्क उत्पादक के रूप में सुस्थापित करती है । इस यात्रा के दौरान प्रबंधन ने कुमारस्वामी खदान से 10 एमटीपीए और दोणिमलै परिसर से 17 एमटीपीए के उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से चल रही क्षमता-विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास की पहलों की समीक्षा की । इन पहलों से एनएमडीसी के 100 एमटीपीए खनन कंपनी बनने के विजन में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है । प्रबंधन ने 35% तक Fe युक्त लौह अयस्क, लौह अयस्क स्लाइम्स और निम्न श्रेणी के लौह-युक्त पदार्थों जैसे बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (बीएचजे) और बैंडेड हेमेटाइट क्वार्ट्जाइट (बीएचक्यू) के उपयोग के लिए पहलों की भी समीक्षा की । परंपरागत रूप से, इन संसाधनों का सीमित उपयोग किया जाता था और मूल्यवान लौह सामग्री होने के बावजूद इन्हें अपशिष्ट के रूप में माना जाता था । लाभकारी और वैज्ञानिक खनिज प्रसंस्करण के माध्यम से, एनएमडीसी इन कम उपयोग किए गए संसाधनों को मूल्यवान कच्चे माल में बदल रहा है, मौजूदा खदानों से अधिक लौह अयस्क को पुनः प्राप्त कर रहा है, जबकि अपशिष्ट उत्पादन को कम कर रहा है । यह पहल खनन की सुस्थिर प्रथाओं का समर्थन करती है, खनिज संरक्षण में सुधार करती है, खनन कार्यों के पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करती है और भारत के इस्पात क्षेत्र की कच्ची सामग्री की बढ़ती आवश्यकताओं में योगदान करती है । कुमारस्वामी खदान में नई लागू की गई स्वचालित गेट प्रबंधन प्रणाली दौरे के दौरान समीक्षा का एक अन्य महत्वपूर्ण बिन्दु था । डिजिटल प्रणाली ने रियल टाइम निगरानी और सामग्री की आवाजाही के सत्यापन को सक्षम बनाकर लौह अयस्क प्रेषण में पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत बनाया  है । यह पहल यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि खनिज संसाधनों को उनके इच्छित गंतव्यों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाया जाए, साथ ही मैनुअल हस्तक्षेप को कम किया जाए और परिचालन संबंधी निगरानी में सुधार लाया जाए । एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कार्यपालक निदेशकों के साथ मिलकर हाल ही में विकसित बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का उद्घाटन किया, जिनमें हाई-राइज टावर शामिल हैं, जो कर्मचारी कल्याण और सामुदायिक विकास के प्रति एनएमडीसी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता  है । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, एनएमडीसी का मानना है कि सतत विकास उत्पादन लक्ष्यों से परे होता है और इसमें कर्मचारियों के लिए बेहतर जीवन-स्तर बनाना, स्थानीय समुदायों का समर्थन करना और पर्यावरण प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित रखना शामिल है । इस अवसर पर बोलते हुए, एनएमडीसी के सीएमडी श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा, "हमारा दृष्टिकोण ऐसे खनन संचालन का निर्माण करना है, जिस पर भावी पीढ़िया गर्व कर सकें । भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में, हम दोणिमलै को एक मॉडल खनन परिसर बनाने की आकांक्षा रखते हैं, जो जिम्मेदार खनन, नवाचार और कर्मचारी कल्याण के उच्चतम मानकों को दर्शाता है । जैसे-जैसे एनएमडीसी अपने 100 एमटीपीए विजन की ओर बढ़ रहा है, हम भारत के इस्पात उद्योग को उच्च-गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध हैं । साथ ही, हम प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से हर संसाधन के मूल्य को अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, यहां तक कि निम्न श्रेणी के अयस्क को उत्पादक परिसंपत्तियों में बदल रहे हैं, साथ ही सुस्थिर और जिम्मेदार खनन प्रथाओं को बढ़ावा दे रहे    हैं ।

19 जून से 5 जुलाई तक तबादलों की मंजूरी, सभी विभागों में प्रक्रिया तेज

जयपुर राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर लगा बैन हट गया है. सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग ने आदेश जारी कर 19 जून से ट्रांसफर-पोस्टिंग की अनुमति दी है. इसके साथ ही लंबे समय से बैन हटने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और अधिकारियों को राहत मिली है. आदेश के मुताबिक, तबादलों की अनुमति 5 जुलाई तक रहेगी. इस दौरान सभी विभाग अपने स्तर पर तबादला प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. अब तेज होगी ट्रांसफर की प्रक्रिया सरकार ने 16 दिनों के लिए ट्रांसफर विंडो खोली है. ऐसे में आदेश जारी होने के साथ ही तबादलों को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है. अब विभिन्न विभागों में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है. यह आदेश राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ निगमों, मंडलों, बोर्डों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा. चिकित्सा विभाग में बैन, थर्ड ग्रेड टीचर्स का इंतजार लंबा हालांकि, थर्ड ग्रेड टीचर्स को अभी लंबा इंतजार करना होगा. इस बार भी शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रृंखला के अध्यापकों को तबादलों की प्रक्रिया से बाहर रखा गया है. इसके अलावा संभावित वर्षाकाल को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों पर तबादला प्रतिबंध अगले आदेश तक यथावत रहेगा. इन कर्मचारियों को दी जाएगी प्राथमिकता सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि तबादलों में एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, मेडिकल बोर्ड या सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े और किडनी सहित अन्य प्राणघातक रोगों से पीड़ित कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके साथ ही दिव्यांग कर्मचारी, दीर्घावधि सेवा वाले कर्मचारी तथा राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को भी प्राथमिकता मिलेगी.

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, ट्रांसफर बैन हटा; 5 जुलाई तक जारी रहेगी तबादला प्रक्रिया

जयपुर   भजनलाल सरकार ने तबादलों से प्रतिबंध हटा दिया है । 19 जून से 5 जुलाई तक यह प्रतिबंध हटाया गया है । प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के मुताबिक शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी के वेतन श्रृंखला के शिक्षकों और वर्षा काल में संभावित बीमारियों के दृष्टिगत चिकित्सा विभाग के कार्मिकों के लिए स्थानांतरण पर प्रतिबंध अग्रिम आदेशों तक यथावत रहेगा ।यह आदेश प्रदेश के सभी निगमों, मंडलों, बोर्ड और स्वायत्तशाषी संस्थाओं पर भी लागू होगा । राजस्थान की भजनलाल सरकार ने कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर लंबे समय से लागू प्रतिबंध को अस्थायी रूप से हटा दिया है. सरकार के इस फैसले के बाद राज्यभर के हजारों कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए तबादलों का रास्ता खुल गया है. प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 19 जून से 5 जुलाई 2026 तक तबादले किए जा सकेंगे. इस अवधि के दौरान विभिन्न विभागों में प्रशासनिक आवश्यकताओं और कर्मचारियों की मांग के आधार पर स्थानांतरण किए जाएंगे।  हालांकि सरकार ने कुछ श्रेणियों को इस प्रक्रिया से फिलहाल बाहर रखा है. शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी अध्यापकों पर तबादला प्रतिबंध जारी रहेगा. इसके अलावा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों के तबादलों पर भी अग्रिम आदेश तक रोक बरकरार रखी गई है. ऐसे में इन दोनों वर्गों के कर्मचारियों को अभी तबादला प्रक्रिया का लाभ नहीं मिल सकेगा।  इन कर्मचारियों को दी जाएगी प्राथमिकता सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और गंभीर बीमार कर्मचारियों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाएगा. इसके साथ ही राजकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के मामलों को भी विशेष वरीयता देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें एक ही स्थान या निकटवर्ती क्षेत्र में पदस्थापित करने पर विचार किया जा सके. यह आदेश राज्य के सभी विभागों के साथ-साथ निगमों, बोर्डों, मंडलों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर भी लागू होगा।  सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एकल महिला, विधवा, परित्यक्ता, दिव्यांग और गंभीर बीमार कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी भाजपा विधायक दल की बैठक में भी उठा था तबादले का मुद्दा तबादला बैन हटाने का फैसला अचानक नहीं लिया गया है. पिछले कुछ समय से जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की ओर से लगातार इस मुद्दे को उठाया जा रहा था. हाल ही में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में भी तबादलों का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था. कई विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रशासनिक जरूरतों का हवाला देते हुए कर्मचारियों के तबादलों पर लगी रोक हटाने की मांग की थी. विधायकों का कहना था कि लंबे समय से तबादले बंद होने के कारण कई विभागों में कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कर्मचारियों को भी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक कारणों से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इससे पहले मंत्रिमंडल की बैठकों में भी कई मंत्रियों ने तबादला बैन हटाने की पैरवी की थी।  लगातार मंथन और विभिन्न विभागों से फीडबैक लेने के बाद लिया निर्णय सरकार स्तर पर लगातार मंथन और विभिन्न विभागों से फीडबैक लेने के बाद आखिरकार प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया गया. सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे विभागों में रिक्त पदों के संतुलन, कार्यकुशलता बढ़ाने और कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान में मदद मिलेगी. अब 5 जुलाई तक राज्यभर में तबादलों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है और विभिन्न विभागों में स्थानांतरण संबंधी गतिविधियां बढ़ सकती हैं। 

मिशन में समाज के सभी वर्ग सक्रिय सहभागिता करें : राज्यपाल पटेल

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन में मध्यप्रदेश ने हासिल की बहुआयामी उपलब्धियां : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु सिकल सेल उन्मूनल मिशन भावी पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ऐतिहासिक पहल केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में किया सराहनीय कार्य प्रधानमंत्री मोदी ने शहडोल से लांच किया था राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन आनुवंशिक रोगों की जांच की उपलब्धि में मध्यप्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण राष्ट्रपति ने म.प्र. में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन में हुई सामुदायिक भागीदारी को सराहा मिशन में समाज के सभी वर्ग सक्रिय सहभागिता करें : राज्यपाल पटेल सिकल सेल मुक्त मध्यप्रदेश का हमारा संकल्प जन सहयोग से होगा साकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस का हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम ओंकारेश्वर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि अन्तर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। मैं इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों की सराहना करती हूं। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन अंतर्गत मध्यप्रदेश ने जो बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु शुक्रवार को खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि यह संतोष की बात है कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ करते समय जो अनेक बड़े लक्ष्य देश के सामने रखे गए थे, उनमें से स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया। मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जाँच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिये जा चुके हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया और पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किये हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन को लॉन्च किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का गंभीर प्रयास का दृढ़ संकल्प था बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम का समुचित response देने की दूरदर्शी सोच भी थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे बताया गया है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन प्रारंभ किया। इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा गया, इसे जनजातीय स्वास्थ्य का मुद्दा, आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता और प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की चुनौती के साथ ही सामाजिक आचरण में बदलाव के मिशन के रूप में देखा गया। इस मिशन की पृष्ठभूमि में अनेक स्तरों पर किये गये वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। ICMR, Tribal Health Research Institutes, AIIMS, NHM, WHO और विभिन्न राज्य सरकारों ने इस विषय के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किया हैं। इनसे मुख्य रूप से यह आंकलन सामने आया कि:-     भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं।     लाखों लोग सक्रिय रोग से पीड़ित हैं।     सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत की जनजातीय क्षेत्र में है।     अनेक परिवार पीढ़ियों से इस रोग से प्रभावित थे लेकिन उन्हें बीमारी का नाम तक मालूम नहीं था। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि अध्ययनों से यह भी पता चला कि भारत के जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। फलस्वरूप, देश में पहली बार सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, Genetic Science और डिजिटल मॉनिटरिंग को एकसाथ जोड़कर यह राष्ट्र व्यापी अभियान प्रारंभ किया गया। देश के 17 राज्यों में चलाये जा रहे इस अभियान के प्रति राज्यों ने भी पूरी तत्परता से भागीदारी की है। राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे इस मिशन की परिकल्पना ने प्रभावित किया है। इसलिए मैं इस मिशन के तीन प्रमुख आयामों का उल्लेख करना चाहूंगी:     पहलाः बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग करना।     दूसराः व्यापक स्क्रीनिंग करके समय रहते रोग की पहचान करना।     तीसराः प्रबंधन की समग्रता को सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य देखभाल की निरंतरता बनाये रखना। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहल के लिहाज से देखें तो देश में पहली बार इतनी बड़ी जनसंख्या की आनुवंशिक स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग के साथ की जा रही है। मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किये जा चुके हैं और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक यानी carrier भी पहचाने जा चुके हैं। वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौती को समझने की आवश्यकता है। सिकल सेल के वाहक लोगों में इस रोग के लक्षण नहीं होते इसलिए उन्हें इसकी भविष्य की गंभीरता का कोई अंदाज नहीं लग पाता। अधिकांशतः वाहकों को यह नहीं पता होता कि वे अनजाने ही अपनी संतान को ये रोग दे सकते हैं। संतोष की बात है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में पिछले कुछ वर्षों में सिकल सेल से जुड़े रोगियों और वाहकों की पहचान के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल पर सराहनीय कार्य किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेरे संज्ञान में लाया गया है कि बहुस्तरीय प्रयासों के क्रम में मध्यप्रदेश में सभी प्रभावित लोगों, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के लिए पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट आधारित जाँच सुविधा को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक विस्तारित किया … Read more

अयोध्या को बदनाम मत करो, 500 साल इंतजार किया तो 15 दिन और कर लो’, चढ़ावा चोरी मामले पर योगी का जवाब

अयोध्या  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज यानी शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे. राम मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर में कथित दान चोरी के मुद्दे पर विपक्ष को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि अयोध्या को बदनाम मत करो. अयोध्या का विकास कुछ लोगों से नहीं पच रहा. जब 500 साल इंतजार किया तो 15 दिन और एसआईटी रिपोर्ट का इंतजार कर लो. रुदौली में कामाख्या मंदिर के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने कहा कि वे लोग उपदेश दे रहे हैं जिन्होंने जय श्रीराम का नारा लगाने पर राम भक्तों पर गोली चलवाई थी. वे लोग ज्ञान दे रहे हैं, जिन्होंने राम मंदिर ना बने इसके लिए कोर्ट में वकीलों की फ़ौज खड़ी कर दी थी. मुख्यमंत्री का इशारा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की तरफ था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि SIT जांच कर रही है. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. अपराधियों को ऐसे सजा मिलेगी जो इतिहास बनेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी के पास सबूत हो तो SIT को मुहैया कराए. किसी के बहकावे में ना आएं. इन लोगों ने अयोध्या को सकरी गलियों में धकेल कर रखा था, आज अयोध्या का नाम हो रहा है, इन्हें अच्छा नहीं लग रहा है.  SIT अपना काम कर रही है. किसी को अगर SIT से कोई शिकायत रहेगी तो उसको भी SIT से पूछने का मौका दिया जाएगा. जांच के दौरान किसी भी तरह की बयानबाजी से बचें. किसी का चारित्रिक हनन नहीं किया जाना चाहिए. दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाएगा।  आज विपक्ष रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहा है उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक राम मंदिर निर्माण का विरोध किया. भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए, जबकि समाजवादी पार्टी की सरकार में रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाईं. इतना ही नहीं, जय श्रीराम के उद्घोष पर लाठियां बरसाई गईं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यही लोग रामभक्तों के सम्मान की बात कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार ने एसआईटी का गठन किया है और यह जांच पूरी निष्पक्षता से होगी. उन्होंने रामभक्तों से मर्यादा और धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, “जब हमारे पूर्वजों ने प्रभु श्रीराम के जन्मस्थान के लिए 500 वर्षों तक मर्यादा के साथ संघर्ष और इंतजार किया है, तो अब 15 दिन और धैर्य रखिए।  बाबर से प्यार करते हैं अखिलेश मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी. उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास कोई दस्तावेजी प्रमाण है तो उसे एसआईटी को सौंपे और जांच पूरी होने तक कोई भी अनावश्यक बयानबाजी न करें. साथ ही उन्होंने लोगों से अयोध्या और राम मंदिर को बदनाम करने वाले दुष्प्रचार के बहकावे में न आने की भी अपील की. मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबर को प्यार करने वाले अखिलेश यादव राम मंदिर की बात कर रहे हैं। 

भोपाल में विकास कार्यों पर फिर सवाल, करोड़ों का फुटपाथ तैयार; लोगों के लिए पहुंचना बना चुनौती

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहले 90 डिग्री वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी. अब राजधानी का एक और निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गया है. इस बार मामला किसी पुल का नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए फुटपाथ का है।  शहर के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्याकरण के तहत फुटपाथ का निर्माण कराया गया. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि फुटपाथ के किनारे इतनी ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी गई कि अब वहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया है. यानी जिस सुविधा को पैदल यात्रियों के लिए बनाया गया, उसका इस्तेमाल करना ही चुनौती बन गया है।  स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, सड़क किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगा दी गई है. कई जगहों पर रेलिंग के साथ पहले से बनी दीवार भी मौजूद है. ऐसे में फुटपाथ पूरी तरह घिरा हुआ नजर आता है।  सबसे बड़ी समस्या यह बताई जा रही है कि कई हिस्सों में फुटपाथ पर चढ़ने या एंट्री करने के लिए पर्याप्त रास्ता ही नहीं छोड़ा गया. नतीजा यह कि लोग फुटपाथ का इस्तेमाल करने के बजाय सड़क पर चलने को मजबूर हैं।  रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद फुटपाथ तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचा है।  ऐसे में यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है. लोगों का सवाल है कि जब फुटपाथ का उद्देश्य ही पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता देना है, तो फिर उसके इस्तेमाल में ऐसी बाधाएं क्यों खड़ी की गईं? फुटपाथ बना या पिंजरा? निर्माण पर उठ रहे सवाल लोगों का आरोप है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जिसमें पैदल यात्रियों की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया. उनका कहना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया गया. लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि फुटपाथ तक पहुंचना ही मुश्किल हो जाए तो फिर उस पर खर्च किए गए सरकारी धन का क्या मतलब रह जाता है।  रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच-बीच में पर्याप्त प्रवेश द्वार या गैप बनाए जाएं, ताकि लोग आसानी से फुटपाथ का उपयोग कर सकें. उनका कहना है कि पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए. फिलहाल यह निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।   

मीठापुर CSC, रिवर फ्रंट और जिग-जैग पार्क समेत कई योजनाएं शुरू, शहर को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को नगर विकास एवं आवास विभाग की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इस दौरान राज्यभर में 286 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं को जनता को समर्पित किया गया. मुख्यमंत्री ने 238.75 करोड़ रुपये की लागत से 114 योजनाओं का उद्घाटन किया. वहीं 47.48 करोड़ रुपये की 43 नई योजनाओं का शिलान्यास भी किया. इनमें पटना स्मार्ट सिटी और पटना नगर निगम की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं. पटना स्मार्ट सिटी की 93 करोड़ की परियोजनाएं शुरू पटना स्मार्ट सिटी के कुल 9 प्रोजेक्ट्स को कार्यक्रम में शामिल किया गया. इनमें 6 परियोजनाओं का उद्घाटन और 3 का शिलान्यास हुआ. इन परियोजनाओं पर कुल 93.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. इस दौरान रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, ग्रीन एरिया डेवलपमेंट, गार्डन और वॉकिंग पाथवे जैसी परियोजनाओं को जनता के लिए खोल दिया गया. साथ ही शहर के 12 प्रमुख स्थानों पर नए वेरिएबल मैसेज डिस्प्ले बोर्ड लगाने की भी सौगात दी गई. मीठापुर में शुरू हुआ कॉमन सर्विस सेंटर कार्यक्रम की सबसे चर्चित परियोजनाओं में मीठापुर का नया कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) रहा. 10.68 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस आधुनिक भवन में कई सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी. करीब 26 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बने इस G+3 भवन में बैंक, कॉमर्शियल सेवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी. यहां ओपन एयर कैफे और ओपन एयर थिएटर भी बनाया गया है. सबसे बड़ी बात यह है कि भविष्य में यह क्षेत्र मेट्रो नेटवर्क से भी जुड़ जाएगा, जिससे लोगों की आवाजाही आसान होगी. छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बना सेंटर मीठापुर इलाके में कई शिक्षण संस्थान हैं. इसी वजह से यहां छात्रों और स्थानीय लोगों की जरूरतों को देखते हुए इस सुविधा केंद्र का निर्माण किया गया है. भवन के प्रत्येक फ्लोर पर पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए गए हैं. इसके अलावा इलाके में सड़क, ड्रेनेज और जलापूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है. गंगा किनारे जिग-जैग पार्क का उद्घाटन पटना के लोगों को गंगा किनारे एक नया आकर्षण भी मिला है. मुख्यमंत्री ने दीघा से सभ्यता द्वार तक विकसित रिवर फ्रंट परियोजना का उद्घाटन किया. जेपी गंगा पथ पर 32.14 करोड़ रुपये की लागत से बने रिवर फ्रंट को जनता के लिए खोला गया. इसके साथ ही जुहू चौपाटी की तर्ज पर तैयार 550 मीटर लंबे जिग-जैग पार्क का भी उद्घाटन किया गया. यह पार्क कुर्जी मोड़ से एलसीटी घाट तक विकसित किया गया है. इसके निर्माण पर 2.54 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. पार्क में लगाए गए 2700 से ज्यादा पौधे जिग-जैग पार्क में हरियाली पर विशेष ध्यान दिया गया है. यहां 2700 से अधिक पौधे लगाए गए हैं. लोगों के टहलने और बैठने के लिए पर्याप्त खुली जगह छोड़ी गई है. पार्क में बेंच भी लगाए गए हैं ताकि लोग गंगा किनारे आराम से समय बिता सकें. डिलीवरी बॉय और ऑटो चालकों को मिला AC लाउंज पटना में पहली बार गिग वर्कर्स के लिए विशेष एसी लाउंज बनाए गए हैं. मुख्यमंत्री ने इनका भी उद्घाटन किया. ये लाउंज गांधी मैदान गेट नंबर-4 और इनकम टैक्स गोलंबर के पास बनाए गए हैं. इनका निर्माण चेन्नई मॉडल पर किया गया है. इन लाउंज में डिलीवरी बॉय, कूरियर कर्मी, ऑटो चालक और बाइक राइडर्स मुफ्त में आराम कर सकेंगे. मोबाइल चार्जिंग और ठंडे पानी की सुविधा प्रत्येक लाउंज में करीब 15 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. दोनों लाउंज में एक साथ 30 लोग आराम कर सकेंगे. यहां मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, ठंडे पीने के पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होंगी. जीविका दीदियों को भी इससे जोड़ा जाएगा, जो लोगों को छाछ, आम पन्ना और अन्य पारंपरिक पेय पदार्थ उपलब्ध कराएंगी. बिहार की पहली स्वचालित बाइक पार्किंग बनेगी पटना में पार्किंग की समस्या दूर करने के लिए प्री-फैब्रिकेटेड टू-व्हीलर रोटरी पार्किंग सिस्टम का शिलान्यास भी किया गया. करीब 4.65 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह पार्किंग बिहार की पहली स्वचालित बाइक पार्किंग होगी. इसे मौर्यालोक, बोरिंग रोड और कदमकुआं वेंडिंग जोन के पास बनाया जाएगा. यह पार्किंग सटल डॉली सिस्टम और हाइड्रोलिक तकनीक से संचालित होगी. 250 नई दुकानों का भी शिलान्यास मुख्यमंत्री ने आधुनिक डिजाइन वाली दुकानों की परियोजना का भी शिलान्यास किया. इसके तहत 50 नई आधुनिक दुकानों और 200 प्री-फैब्रिकेटेड दुकानों का निर्माण किया जाएगा. इस परियोजना पर करीब 7.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे. दुकानों में बिजली, एलईडी लाइटिंग, ड्रेनेज, प्लंबिंग और ऊर्जा बचत से जुड़ी सुविधाएं होंगी. सभी दुकानों का डिजाइन एक जैसा रखा जाएगा, ताकि पूरा बाजार क्षेत्र व्यवस्थित और आकर्षक दिखे. पटना के विकास को मिलेगी नई रफ्तार नगर विकास विभाग की इन परियोजनाओं से पटना की आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी. रिवर फ्रंट, स्मार्ट सुविधाएं, पार्किंग सिस्टम, गिग वर्कर्स लाउंज और कॉमन सर्विस सेंटर जैसी योजनाएं शहर को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं.

भीलवाड़ा, जोधपुर, बीकानेर समेत सभी जिलों में सुबह 6 बजे से योग कार्यक्रम, तैयारियों के निर्देश जारी

 जयपुर 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून, 2026 का आयोजन रविवार को प्रातः 6.00 बजे से राज्य में जिला मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालय एवं ग्राम पंचायत स्तर पर किया जायेगा। राज्यभर में कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए जिला प्रभारी मंत्रिगण एवं बोर्ड, आयोग एवं निगम के अध्यक्ष एक दिन पूर्व, 20 जून को ही जिला मुख्यालय पहुंचेंगे। प्रमुख शासन सचिव नवीन जैन ने बताया कि उपमुख्यमंत्री सुश्री दिया कुमारी अजमेर तथा डॉ. प्रेमचन्द बैरवा भीलवाड़ा जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ दौसा जिले में, मंत्री मदन दिलावर जोधपुर में, मंत्री किरोडी लाल अलवर में, मंत्री गजेन्द्र सिंह बीकानेर, मंत्री जोगाराम पटेल जयपुर जिले में, मंत्री सुमित गोदारा श्रीगंगानगर जिले में, मंत्री कन्हैयालाल नागौर में, मंत्री जोराराम कुमावत बाडमेर में, मंत्री हेमन्त मीणा उदयपुर, मंत्री सुरेश सिंह रावत भरतपुर जिले में, मंत्री बाबूलाल खराड़ी बांसवाडा जिले में, मंत्री अविनाश गहलोत चूरू जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आम जनता के साथ योगाभ्यास करेंगे। इसी प्रकार राज्यमंत्री गौतम कुमार (स्वतंत्र प्रभार) कोटा जिले में, राज्यमंत्री श्री हीरालाल नागर (स्वतंत्र प्रभार) टोंक जिले में, राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा (स्वतंत्र प्रभार) पाली में, राज्यमंत्री संजय शर्मा (स्वतंत्र प्रभार) सीकर में, राज्यमंत्री ओटा राम देवासी झालावाड में, राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई सिरोही में, राज्यमंत्री विजय सिंह कोटपूतली-बहरोड में, राज्यमंत्री जवाहरसिंह बेढम करौली में एवं राज्यमंत्री डॉ. मंजू बाघमार चित्तौडगढ जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में शामिल होंगे। इसी प्रकार राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी जैसलमेर जिले में, राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष औंकार सिंह लखावत हनुमानगढ़ में, राज्य स्तरीय सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजोर सवाई माधोपुर में, राज्य स्तरीय अनु. जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष राजेन्द्र नायक अध्यक्ष, प्रतापगढ़ में, राज्य जीव जन्तु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवन्त सिंह विश्नोई धौलपुर में, देवनारायण बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश भडाना जालौर में, श्रीयादे माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद टांक बांरा में, राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष सी. आर. चौधरी डूंगरपुर में तथा विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार झुन्झुनू जिले में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन में शामिल होंगे। ब्यावर, राजससमन्द, फलौदी, खेरथल-तिजारा, डीग, डीडवाना-कुचामन, बालोतरा, सलुम्बर एवं बून्दी जिलों में स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहकर अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।