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15 हजार राशन कार्डधारकों की बढ़ी मुश्किलें, जीवित होने का प्रमाण नहीं दिया तो अटक सकता है राशन

 दतिया सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन प्राप्त करने वाले हजारों हितग्राहियों के लिए जून माह बेहद महत्वपूर्ण है। शासन के निर्देश पर जिले में पांच वर्ष पहले कराई गई ई-केवाईसी को दोबारा अपडेट करने का अभियान चलाया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा के भीतर बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराने वाले हितग्राहियों को राशन वितरण में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खाद्य विभाग के अनुसार जिले में 55 हजार से अधिक ऐसे हितग्राहियों की पहचान की गई है, जिनकी पुरानी ई-केवाईसी अब अमान्य मानी जा रही है। अब तक लगभग 35 हजार हितग्राहियों (MP Ration Beneficiary) का पुन: सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 15 हजार से अधिक हितग्राही अभी भी प्रक्रिया से बाहर हैं। विभाग ने दतिया के सभी उचित मूल्य दुकान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र परिवारों को जागरूक कर जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूर्ण कराएं। शिकायतों के बाद उठाया कदम विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया (MP Ration Distribution Update)का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों के नाम पर राशन जारी हो रहा है, वे वास्तव में पात्र और जीवित हैं। कई मामलों में मृत्यु, स्थानांतरण अथवा अपात्रता के बावजूद नाम सूची में बने रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। दोबारा बायोमेट्रिक सत्यापन से ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी और वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचेगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य को आधार कार्ड के साथ उचित मूल्य दुकान पर पहुंचकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। पीडीएस मशीन में जिन सदस्यों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उनके लिए ई- केवाईसी कराना अनिवार्य है। किन लोगों को तुरंत करानी होगी ई-केवाईसी  पीडीएस मशीन में जिन हितग्राहियों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से दोबारा ई-केवाईसी करानी होगी। इसके लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले या राज्य से बाहर रहने वाले हितग्राही भी देश की किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। खाद्य विभाग ने अपील की है कि जून माह के भीतर ई-केवाईसी जरूर करा लें, ताकि राशन वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिलता रहे। फैक्ट फाइल कुल हितग्राही : 5,32,413 अब तक पूर्ण ई-केवाईसी : 4,39,898 शेष हितग्राही : 15,489 पुन: सत्यापन वाले हितग्राही : 55 हजार से अधिक ब्लॉकवार शेष ई-केवाईसी  दतिया : 5,489 सेवढ़ा : 5,419 भांडेर : 4,541 पारदर्शिता और प्रभावी होगी रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले अथवा राज्य से बाहर रह रहे हितग्राही देश के किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर अपनी ई- केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए मूल राशन दुकान पर उपस्थित होना आवश्यक नहीं है। दोबारा सत्यापन से राशन वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। -जिला खाद्यआपूर्ति अधिकारी, दतिया

उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी! MP पुलिस में दोबारा शुरू हुई डायरेक्ट भर्ती प्रक्रिया

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए बड़ी सौगात देते हुए पुलिस विभाग में खेल कोटे से सीधी भर्ती प्रक्रिया को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गृह विभाग ने ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। संशोधित नियमों की अधिसूचना 15 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रतिवर्ष पुलिस विभाग में खेल कोटे से 60 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इनमें उप निरीक्षक (एसआई) के 10 और आरक्षक (कांस्टेबल) के 50 पद शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल तथा विश्व कप या विश्व चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। पहले मुख्य रूप से पदक विजेताओं को ही प्राथमिकता मिलती थी।  संशोधित नियमों के अनुसार उत्कृष्ट खिलाड़ियों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, ऊंचाई संबंधी शारीरिक मापदंड, लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) से भी छूट प्रदान की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा द्वारा हर वर्ष नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। उप निरीक्षक पद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले अथवा सहभागिता करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। वहीं आरक्षक पद के लिए राष्ट्रीय खेलों और अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी आवेदन कर सकेंगे।  इस निर्णय से खिलाड़ियों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे खेल गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इसे खिलाड़ियों के हित में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय बताया है।  

IPL 2027 की संभावित तारीखों का खुलासा, 10 मार्च से आगाज के संकेत; BCCI सचिव का बड़ा बयान

मुंबई  देश के ज्यादातर हिस्सों में मई के महीने में पड़ने वाली भीषण गर्मी और मौसम के बदलते मिजाज से खिलाड़ियों और दर्शकों को बचाने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है. बीसीसीआई अगले साल से इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) को तय समय से थोड़ा पहले शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया ने पीटीआई (PTI) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में खुलासा किया कि बीसीसीआई भविष्य के आईपीएल सीज़नों के लिए 10 मार्च से 15 मई के बीच की समय-सीमा (विंडो) को ध्यान में रखकर योजना बना रहा है।  इंटरनेशनल कैलेंडर के चलते मैचों की संख्या 74 ही रहेगी बीसीसीआई सचिव ने शेड्यूल में बदलाव की बात तो कही, लेकिन इसके साथ ही यह भी पूरी तरह साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर की व्यस्तताओं और पाबंदियों के कारण आईपीएल के मैचों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी. मैचों की कुल संख्या 74 ही बनी रहेगी और इसे बढ़ाकर 94 करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. आमतौर पर देखा जाए तो आईपीएल मार्च के आखिरी हफ्ते में शुरू होकर मई के बिल्कुल अंत तक चलता है, लेकिन सैकिया का मानना है कि टूर्नामेंट को थोड़ा पहले शुरू करने से मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ियों और पैसा खर्च करके स्टेडियम आने वाले दर्शकों, दोनों को ही बड़ी राहत मिलेगी।  मई के आखिरी हफ्ते की गर्मी और प्री-मानसून बनी वजह इंटरव्यू के दौरान देवजीत सैकिया ने इस फैसले के पीछे की वजह समझाते हुए कहा, "इस साल आईपीएल लगभग 28 या 29 मार्च को शुरू हुआ था और इसका समापन 31 मई को हुआ. हम इस बात पर लगातार चर्चा कर रहे हैं कि टूर्नामेंट के आखिरी दिनों में यानी 15 मई के बाद देश के कई हिस्सों में अचानक बारिश होने लगती है या प्री-मानसून सीजन दस्तक दे देता है, जिससे मैच प्रभावित होते हैं. दूसरी तरफ, मई के अंत में गर्मी का पारा भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जो न तो खिलाड़ियों की फिटनेस के लिए अच्छा है और न ही स्टैंड्स में बैठकर मैच देख रहे प्रशंसकों के लिए आरामदायक होता है।  शेड्यूल को दो हफ्ते पहले खिसकाने पर चल रही है चर्चा सैकिया ने आगे बताया कि बीसीसीआई मई के अंतिम दिनों में होने वाले बढ़ते तापमान और तपिश के प्रभाव को कम करने के लिए पूरे टूर्नामेंट के शेड्यूल को करीब दो हफ्ते पहले खिसकाने की रणनीति पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से बीसीसीआई और हमारी आईपीएल गवर्निंग काउंसिल के बीच यह बातचीत चल रही है कि क्या हम टूर्नामेंट को मार्च के आखिरी हफ्ते के बजाय मार्च की शुरुआत में ला सकते हैं, ताकि सीजन का समापन मई के मध्य तक आसानी से किया जा सके।  सैकिया ने कहा कि उन्हें खिलाड़ियों और फ़ैन्स से IPL मैचों के दौरान भारत के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में गर्मी को लेकर शिकायतें भी मिली हैं. "मुझे फ़ैन्स और खिलाड़ियों से बहुत सी शिकायतें मिल रही हैं, क्योंकि सभी खिलाड़ी इतनी गर्मी में खेलने के लिए तैयार या अभ्यस्त नहीं होते हैं. उन्होंने कहा, "इसलिए, टूर्नामेंट के लिए अच्छा माहौल बनाने के लिए हम इसे 15 मई तक खत्म करना चाहते हैं. अभी हमारा पहला लक्ष्य यही है, और अगले साल होने वाले IPL के 20वें एडिशन के लिए यही मुख्य चिंता का विषय है, जो एक बड़ा इवेंट होगा। उन्होंने कहा, "आने वाले सालों में क्या स्थिति होगी, यह मुझे नहीं पता, लेकिन अभी मुझे इसे 74 से बढ़ाकर 94 करने की कोई संभावना नहीं दिखती, क्योंकि इसके लिए न सिर्फ़ भारत के बारे में सोचना होगा, बल्कि ICC के दूसरे क्रिकेट खेलने वाले देशों, खासकर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, साउथ अफ़्रीका और वेस्ट इंडीज़ के खिलाड़ियों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।  "हम बाइलेटरल मैचों और दूसरे मल्टी-कंट्री टूर्नामेंट्स को भी खराब नहीं करना चाहते." सैकिया इस बात से संतुष्ट थे कि वेस्ट एशिया में संकट के बावजूद BCCI इस साल IPL का 19वां एडिशन सफलतापूर्वक पूरा कर पाया. साइकिया ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय घरेलू टूर्नामेंट मार्च के पहले हफ़्ते तक खत्म हो जाएं, यह सुनिश्चित करना क्यों ज़रूरी है।  उन्होंने कहा, "अगर आप हमारे घरेलू क्रिकेट को देखें, तो यह एक मज़बूत सिस्टम है. हम अगस्त के आखिर में ईरानी ट्रॉफ़ी और दूसरे मैचों के साथ शुरुआत करते हैं और यह रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल तक चलता है, जो मार्च के महीने में होता है. हमारे घरेलू क्रिकेट का सीज़न पहले से ही लगभग 7-8 महीने लंबा होता है. हमें कुछ मैचों को इस तरह से एडजस्ट करना होगा कि घरेलू क्रिकेट 10 मार्च तक खत्म हो जाए, ताकि हम तुरंत (IPL) शुरू कर सकें। 

कार खरीदारों के लिए खुशखबरी, 15 जुलाई से लागू होगा नया नियम, टैरिफ सिर्फ 10%

 नई दिल्ली 15 जुलाई से भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट प्रभाव में आएगा. इस एफटीए (FTA) के तहत भारत और यूके के बीच कई सामानों पर टैरिफ कम या जीरो होगा. ऑटोमोबाइल वर्ल्ड के लिए भी ये ट्रेड एग्रीमेंट बहुत मायने रखता है. क्योंकि इस एफटीए के बाद कई प्रीमियम कारों पर भारत में टैरिफ कम हो जाएगा।  इसका सीधा का मतलब है कि भारत में प्रीमियम कारें सस्ती होंगी. यूनाइटेड किंगडम के डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस एंड ट्रेड के मुताबिक ब्रिटिश ऑटोमोबाइल कंपनियों की भारत में पहुंच आसान हो जाएगी. इन कारों पर कोटा के तहत टैरिफ 100 फीसदी से घटकर 10 फीसदी पहुंच जाएगी।  इस एग्रीमेंट के बाद ब्रिटिश कार कंपनियों को भारत में बेहतर एक्सेस मिलेगा. वहीं कई भारतीय कंपनियों के लिए यूके में तमाम मौके खुल जाएंगे. भारतीय कंपनियों के लिए टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, इलेक्ट्ऱ़ॉनिक्स, फार्मा और दूसरे सेक्टर में एक बड़ा बाजार मिलेगा।  सस्ती होंगी कारें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लागू करने का ऐलान 17 जून को किया गया है और बिजनेसेस को 28 दिनों का वक्त तैयारी करने के लिए दिया गया है, जिससे वे अपने सिस्टम को तैयार कर लें और जरूरी रजिस्ट्रेशन कर लें. यूके सरकार इसको भारत का अब तक का सबसे व्यापक व्यापार समझौता बता रही है।  यूके सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक ऑटोमोबाइल टैरिफ कोटा के तहत 100 फीसदी से घटकर 10 फीसदी आएगा. हालांकि, ये कोटा क्या और कितना होगा, इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है. यानी इस टैरिफ कटौती के साथ ब्रिटिश कंपनियां कितनी गाड़ियां एक साल में भारत ला  भारत और यूके की इस डील का असर काफी पहले से दिखने लगा है. कंपनियों ने अपनी गाड़ियों की कीमतें कम करनी शुरू कर दी हैं. जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने 5 मई को दो रेंज रोवर मॉडल्स की कीमतों में कटौती का ऐलान किया था, जो यूके से इंपोर्ट की जाती हैं।  कई कारें हुईं सस्ती कंपनी ने रेंज रोवर एसवी (Range Rover SV) की कीमत 75 लाख रुपये घटाकर 3.50 करोड़ रुपये कर दी है. पहले ये कार 4.25 करोड़ रुपये की कीमत पर आती थी. वहीं रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी की कीमतों में 40 लाख रुपये की कटौती की गई थी. इस कार की कीमत 2.75 करोड़ रुपये से घटाकर 2.35 करोड़ रुपये कर दी गई है।  इसके अलावा ब्रिटिश सुपरकार निर्माता कंपनी मैकलारेन (McLaren) भी अपनी कारों की कीमतों को 38 फीसदी तक कम करने की तैयारी कर रही है. मैकलारेन 750एस कूपे की कीमत 3 करोड़ रुपये कम होने की उम्मीद है. ये कार पहले 7.94 करोड़ रुपये की कीमत पर आती थी, जो घटकर 4.94 करोड़ रुपये हो सकती है।  इसके अलावा 750एस स्पाइडर की कीमत 3.32 करोड़ रुपये घटकर 5.46 करोड़ रुपये हो सकती है. दूसरी कंपनियों ने अभी कीमतों में कटौती का ऐलान नहीं किया है. आने वाले दिनों में हमें इनके बारे में भी जानकारी मिल सकती है।  टैक्स कटौती और कोटा एफटीए के तहत पहले साल 3000सीसी के ऊपर के इंजन वाली पेट्रोल और 2500सीसी के ऊपर वाली डीजल कारों पर टैरिफ को 110 परसेंट से घटाकर 30 परसेंट किया जाएगा. ये रेट 10 हजार गाड़ियों के लिए होगा।  वहीं 1500सीसी से 3000सीसी तक वाली पेट्रोल और 2500सीसी तक इंजन वाली डीजल कारों पर टैरिफ 66 फीसदी से घटकर 50 फीसदी हो जाएगा. इसके लिए 5000 कारों का कोटा होगा. 1500सीसी इंजन तक वाली कारों पर भी 50 परसेंट टैरिफ पहले साल होगा. इसमें भी 5000 कारों का कोटा होगा। 

खुले बोरवेल वालों की खैर नहीं! MP सरकार का सख्त फैसला, लापरवाही पर होगी कानूनी कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने खुले और असुरक्षित बोरवेल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों पर अमल करते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग ने बोरवेल सुरक्षा को लेकर एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है. इस नई व्यवस्था का मकसद बोरवेल से जुड़े खतरों को कम करना और लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।  खुला बोरवेल छोड़ना पड़ेगा भारी नई SOP के अनुसार किसी भी व्यक्ति या संस्था को बिना मंज़ूरी के नया बोरवेल खोदने की इजाज़त नहीं होगी. निर्माण से पहले संबंधित विभाग से जरूरी मंजूरी लेना अनिवार्य है. इसके अलावा अगर इस्तेमाल के बाद बोरवेल को खुला छोड़ दिया जाता है या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता है, तो ज़िम्मेदार व्यक्ति के ख़िलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इन नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल, दोनों का प्रावधान किया गया है।  खुले बोरवेल की शिकायत अब ऐप से करें इसके अलावा सरकार ने लोगों की भागीदारी बढ़ाने और निगरानी को मजबूत करने के लिए 'PARAKH' ऐप भी लॉन्च किया है. इस ऐप के जरिए नागरिक खुले, छोड़े गए या खतरनाक बोरवेल की जानकारी सीधे प्रशासन को दे सकते हैं. शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग तुरंत जांच करेगा और कार्रवाई करेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस नए सिस्टम से बोरवेल से जुड़े हादसों में कमी आएगी और सुरक्षा के मामले में जवाबदेही तय होगी।  नया बोरवेल खोदने से पहले रजिस्ट्रेशन और अनुमति अनिवार्य होगी, जबकि खुले या सूखे बोरवेल को समय सीमा में बंद नहीं करने पर जुर्माने के साथ जेल की कार्रवाई भी की जाएगी। हादसा होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन का खर्च भी संबंधित जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी से वसूला जाएगा। 90 दिन में बोरवेल बंद कर पोर्टल पर डालना होगा फोटो अब तक बोरवेल हादसों में सिर्फ मामूली धाराओं में कार्रवाई होती थी, लेकिन अब नियम बेहद सख्त कर दिए गए हैं। नए नियम के तहत यदि बोरवेल में पानी नहीं निकलता है तो जमीन मालिक को 90 दिनों के भीतर उसे मिट्टी या कंक्रीट से स्थायी रूप से बंद करना होगा और उसकी फोटो पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। पहली बार 10 हजार, दूसरी बार 25 हजार जुर्माना पहली बार लापरवाही पर 10,000 और दूसरी बार पकड़े जाने पर 25,000 रुपए का जुर्माना व जेल होगी। यदि खुला बोरवेल मिलने पर कोई दुर्घटना होती है तो मकान/जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी पर सीधे FIR दर्ज होगी। यही नहीं, रेस्क्यू ऑपरेशन में आने वाला लाखों का खर्च भी दोषी से ही वसूला जाएगा। 'परख एप' (PARAKH) से सीधे शिकायत कर सकेंगे नागरिक अपने आस-पास खुले पड़े बोरवेल की फोटो खींचकर इस एप पर शिकायत कर सकते हैं। सरकारी जमीन पर लापरवाही मिलने पर अफसरों पर भी कार्रवाई होगी। बोरवेल में गिरने से कई मासूमों की जा चुकी है जान  बता दें कि पिछले कुछ सालों में मध्य प्रदेश में खुले और असुरक्षित बोरवेल की वजह से कई मासूम बच्चों की जान गई है. सीहोर, विदिशा, सागर, रीवा और राजगढ़ जैसे जिलों में बच्चों के बोरवेल में गिरने की घटनाओं ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था. कई मामलों में घंटों या दिनों तक बचाव अभियान चलाने पड़े, फिर भी कुछ बच्चों को बचाया नहीं जा सका. इन दुखद घटनाओं के बाद सरकार ने बोरवेल की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है. अब बिना मंजूरी के बोरवेल खोदने और बोरवेल को खुला छोड़ने के काम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. सरकार का मानना ​​है कि नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और मॉनिटरिंग सिस्टम से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और लोगों, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।  तीन दिन में फाइल नहीं भेजी तो कार्रवाई नए हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए हर स्तर पर टाइम लाइन तय कर दी गई है।     3 दिन में भेजना होगी फाइल: आवेदन मिलते ही कार्यपालन यंत्री को 3 कार्यदिवस के भीतर फाइल सहायक यंत्री को भेजनी होगी।     3 दिन में मौका ए मुआयना: उपयंत्री (Sub-Engineer) 3 दिन के अंदर गांव जाकर गूगल मैप और 'घन' पोर्टल की मदद से जगह की मार्किंग करेंगे।     1 हफ्ते में अंतिम रिपोर्ट: सारी रिपोर्ट मिलने के बाद 1 सप्ताह के भीतर कार्यपालन यंत्री कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति के सामने प्रस्ताव रखेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए क्या है खास?     पानी की उपलब्धता को प्राथमिकता: जिन गांवों में नल कनेक्शन नहीं हैं और 300 मीटर के दायरे में प्रति व्यक्ति 55 लीटर पानी नहीं मिल रहा है, वहां विभाग खुद नया बोरवेल खोदेगा।     बजट की कमी नहीं बनेगी रोड़ा: अगर सरकारी बजट कम पड़ता है तो कलेक्टर की सहमति से विधायक निधि, सांसद निधि या खनिज मद से पैसा PHE विभाग को ट्रांसफर किया जा सकेगा।     कारण बताना होगा अनिवार्य: यदि जिला समिति ग्रामीणों की हैंडपंप की मांग को खारिज करती है तो विभाग को लिखित में कारण बताना होगा कि आवेदन क्यों रिजेक्ट हुआ। शुद्ध पानी की गारंटी और नया विकल्प     जांच के बाद ही मिलेगा पानी: नया हैंडपंप खोदने के बाद पानी का सैंपल सरकारी लैब भेजा जाएगा। BIS मानकों के तहत पानी शुद्ध होने और कीटाणुशोधन (Bleaching) के बाद ही इसे जनता को सौंपा जाएगा।     सिंगल फेज मोटरपंप का विकल्प: जहां पानी का स्तर ज्यादा गहरा है और हैंडपंप काम नहीं कर सकता, वहां ग्राम पंचायत की सहमति से सिंगल फेज मोटरपंप लगाया जा सकेगा, जिसका रख-रखाव पंचायत करेगी।

ATS का बड़ा ऑपरेशन: कई राज्यों में फैले आतंकी मॉड्यूल पर शिकंजा, 6 गिरफ्तारी, पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज

भोपाल  तारीख 11 जून… वक्त तड़के का था और भोपाल का काजी कैंप अभी नींद में था। तभी अचानक एटीएस की एक विशेष टीम चुपचाप इलाके में दाखिल हुई। न कोई सायरन, न कोई हलचल। कुछ ही मिनटों में नन्हें बी की मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद फराज को हिरासत में ले लिया गया। ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि स्थानीय पुलिस तक को इसकी भनक नहीं लगी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ठीक उसी समय, भोपाल से करीब 1000 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भी एटीएस की टीमें एक और संदिग्ध पर शिकंजा कस रही थीं। आखिर ऐसा क्या सुराग मिला था जिसने दो राज्यों में एक साथ यह हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन शुरू करवा दिया? इसके पीछे के चेहरे कौन थे और इस पूरे नेटवर्क का मकसद क्या था? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की अंदरूनी कहानी।  सबसे पहले समझते हैं कि मामला क्या था?  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) देशभर में संदिग्ध गतिविधियों, विदेशी एप्लीकेशनों, डार्क वेब नेटवर्क और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय समूहों की लगातार निगरानी करती है। इसी दौरान एनआईए को भोपाल के काजीकैंप क्षेत्र निवासी मोहम्मद फराज तथा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं।प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की निगरानी शुरू की गई और आगे की जांच की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) को सौंपी गई। एटीएस ने 11 जून की तड़के कार्रवाई करते हुए मोहम्मद फराज को भोपाल से हिरासत में लिया। वहीं, उत्तर प्रदेश एटीएस और एसटीएफ की मदद से नईम अब्दुल्ला को देवबंद से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। दोनों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया। बाद में 16 जून को फराज को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया, जबकि नईम अब्दुल्ला 20 जून तक एटीएस रिमांड पर है। अब जानते हैं इस कथित नेटवर्क का उद्देश्य क्या था? जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से प्राप्त कट्टरपंथी साहित्य और जिहादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने का आरोप था। उनका उद्देश्य बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना था। जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें देशविरोधी गतिविधियों, सामाजिक अशांति, टारगेट किलिंग और हिंसक घटनाओं के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था। साथ ही शरिया कानून के समर्थन में वैचारिक अभियान चलाने के संकेत भी मिले हैं। अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं? इस मामले में अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हाल-फिलहाल में बिहार के मधुबनी जिले से इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया है। उसे भोपाल लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से 20 जून तक एटीएस रिमांड पर भेजा गया है।  फराज ने क्या-क्या उगला? फराज की पूछताछ में कई चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। वह मध्यप्रदेश के बाहर भी अपना स्लीपर सेल खड़ा कर रहा था। इसके लिए उसे नईम और पाकिस्तान के साथ एक खाड़ी देश में बैठे हैंडलर डायरेक्शन दे रहे थे। फराज की पूछताछ के बाद एटीएस ने धार निवासी हाजी अहजर को गिरफ्तार किया है। एमपी एटीएस ने हरियाणा के नूंह से भी एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वह भी फराज के संपर्क में कई महीनों से था और जिहादी नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर खड़ा करने का प्रयास कर रहा था। हालांकि नूंह में हिरासत में लिए गए युवक की अधिकृत गिरफ्तारी अभी नहीं की है। विदेशी फंडिंग और डिजिटल उपकरणों की जांच एटीएस ने फराज और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों को हो रही विदेशी फंडिंग की भी बहुत गहनता से जांच कर रही है। इसी जांच में गिरोह का खुलासा हुआ है। वहीं उसके पास से बरामद मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स की जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, गरीब और बैचलर युवकों का ब्रेनवॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने का टास्क फराज को मिला था। फराज के संपर्क में अब तक करीब आधा दर्जन युवकों  के होने का पता चला है। पुलिस उन सभी युवकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल खंगालने के साथ उनकी हर गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। टेलीग्राम-वाट्सएप ग्रुप से युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा था। शनिवार से ही उसका परिवार काजीकैंप स्थित मकान में ताला बंद कर फरार हो गया है। वहीं कॉलोनी की जिस क्लीनिक पर फराज काम करता था, उसमें भी शनिवार से ताला लटका हुआ है।  डार्क एप्स और सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच के दायरे में सूत्रों के अनुसार, आरोपी कुछ डार्क एप्स के माध्यम से संदिग्ध समूहों के संपर्क में था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि उसने गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां आरोपी के डिजिटल नेटवर्क तथा संभावित विदेशी संपर्कों के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही हैं।   आगे जांच की दिशा क्या होगी? अब तक पांच राज्यों में इस कथित मॉड्यूल के नेटवर्क से जुड़े तार मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्धों की गिरफ्तारी हो सकती है। फिलहाल नईम अब्दुल्ला, शाकिर और इजहार-उल-हक एटीएस रिमांड पर हैं। जांच एजेंसियां मोहम्मद फराज, नईम अब्दुल्ला, शाकिर मेव और इजहार-उल-हक को इस नेटवर्क की प्रमुख कड़ियों के रूप में देख रही हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।  

सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन हुआ निरस्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की “जीरो टॉलरेंस” नीति अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और विधि के शासन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के साथ राज्य शासन ने सोम डिस्टिलरीज समूह की इकाइयों द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत विभिन्न आबकारी लाइसेंसों के नवीनीकरण संबंधी आवेदन निरस्त कर दिए हैं। नवीनीकरण के आवेदनों के निरस्तिकरण का यह निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उस स्पष्ट और दृढ़ प्रशासनिक नीति का प्रतिबिंब है, जिसके तहत भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार, नियमों के उल्लंघन, राजस्व अपवंचन तथा जनहित के प्रतिकूल किसी भी गतिविधि के प्रति पूर्णतः जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाया जा रहा है। प्रदेश सरकार का स्पष्ट मानना है कि निवेश, उद्योग और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ कानून का कठोर एवं निष्पक्ष अनुपालन भी उतना ही आवश्यक है। आबकारी आयुक्त, द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी लाइसेंस का नवीनीकरण स्वचालित अथवा अधिकार स्वरूप प्राप्त होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए संबंधित संस्था के समग्र आचरण, विधिक अनुपालन, लाइसेंस की शर्तों के पालन, नियामकीय पात्रता, उपलब्ध अभिलेखों की सत्यता और सार्वजनिक हित से जुड़े पहलुओं का समग्र परीक्षण किया जाना आवश्यक है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915, उससे संबंधित नियमों, उपलब्ध अभिलेखों तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का विस्तृत परीक्षण किया गया। निर्णय प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य भी महत्वपूर्ण रहे कि संबंधित समूह से जुड़े मामलों में पूर्व में अवैध शराब परिवहन, कूटरचित परमिटों के उपयोग, शासकीय राजस्व को क्षति पहुँचाने तथा आबकारी कानूनों के गंभीर उल्लंघन से संबंधित प्रकरण न्यायालयों के समक्ष विचारित हुए थे। उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों, जांच प्रतिवेदनों और न्यायिक अभिलेखों का परीक्षण करते हुए संबंधित पक्ष के समग्र आचरण और विधिक अनुपालन की समीक्षा की गई। इसके उपरांत नवीनीकरण आवेदनों को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। माननीय उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि लाइसेंस नवीनीकरण के प्रकरणों का परीक्षण उपलब्ध तथ्यों, विधिक प्रावधानों तथा संबंधित पक्ष के आचरण के आधार पर स्वतंत्र एवं कारणयुक्त तरीके से किया जाना चाहिए। न्यायालय द्वारा नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार प्रदान नहीं किया गया था। इसी विधिक दृष्टिकोण के अनुरूप सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रकरण का परीक्षण कर निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पष्ट मंशा के अनुरूप मध्यप्रदेश में विकास और निवेश की गति को तेज करने के साथ-साथ पारदर्शी, जवाबदेह और नियम आधारित प्रशासन सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का लक्ष्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहाँ ईमानदार उद्यमों और नियमों का पालन करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन मिले, जबकि कानून और जनहित के विरुद्ध कार्य करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और विधिक अनुशासन को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। शासन की यह नीति न केवल कानून के शासन को मजबूत कर रही है, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी सुदृढ़ बना रही है कि प्रदेश में प्रत्येक निर्णय विधिसम्मत, निष्पक्ष और जनहित सर्वोपरि की भावना के साथ लिया जा रहा है। सोम डिस्टिलरीज प्रकरण में लिया गया यह निर्णय प्रदेश सरकार की “जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट इल्लीगल एक्टिविटीज” नीति का एक सशक्त उदाहरण है। यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि मध्यप्रदेश में किसी भी व्यक्ति, संस्था या प्रतिष्ठान को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा तथा नियमों के उल्लंघन, अवैध गतिविधियों और सार्वजनिक हित के प्रतिकूल आचरण के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।  

महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! मावां-धीयां सत्कार योजना की रकम जल्द होगी जारी, जानें पात्रता और तारीख

चंडीगढ़  पंजाब सरकार मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत महिलाओं को एडवांस राशि देने की तैयारी कर रही है। योजना का लाभ 1 जुलाई से शुरू करने के लिए वित्त विभाग अंतिम चरण की तैयारियों में जुटा है। सरकार तिमाही या छमाही आधार पर भुगतान करने के विकल्प पर विचार कर रही है। इसके चलते लाभार्थी महिलाओं के खातों में एडवांस राशि के साथ अप्रैल से देय बकाया रकम भी सीधे ट्रांसफर की जा सकती है।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस योजना की घोषणा 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विधानसभा के विशेष सत्र में की थी। इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। सरकार का दावा है कि इससे राज्य की करीब 97 फीसदी वयस्क महिलाओं को लाभ मिलेगा। योजना के तहत अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1500 रुपये प्रतिमाह और सामान्य व अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। यह राशि डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में पहुंचेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि योजना तिमाही आधार पर लागू होती है तो महिलाओं के खातों में एक साथ 4,000 से 6,000 रुपये तक एडवांस राशि भेजी जा सकती है। चूंकि सरकार ने योजना का लाभ 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना है इसलिए अप्रैल, मई और जून की बकाया राशि भी लाभार्थियों को दिए जाने की तैयारी है। महिलाओं की सहायता के लिए गांवों और मोहल्लों में महिला सत्कार सखियां तैनात की गई हैं। ये घर-घर जाकर आवेदन प्रक्रिया में मदद कर रही हैं ताकि पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ समय पर पहुंच सके। क्या है मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना? मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण महिला कल्याण योजना है. इस योजना की घोषणा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब बजट 2026–27 के दौरान की थी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये और दलित महिलाओं को 1,500 रुपये की सहायता दी जाएगी. योजना की राशि महिलाओं के बैंक खाते में Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।  योजना के लिए कौन-कौन पात्र हैं, किसे मिलेगा लाभ? मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना के लिए महिला पंजाब की निवासी होनी चाहिए. साथ ही योजना के लिए केवल वे महिलाएं पात्र हैं जिनकी उम्र 18 या उससे ज्यादा है. इसके अलावा आर्थिक सहायता पाने के लिए आधार कार्ड बैंक अकाउंट के साथ जरूर लिंक होना चाहिए।  जरूरी डॉक्यूमेंट मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना के लिए अप्लाई करने के लिए महिला के पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक (फोटोकॉपी), पंजाब का रिहायशी प्रमाण पत्र वोटर आईडी या राशन कार्ड और आधार से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर जरूर होना चाहिए।  कैसे करें अप्लाई? मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना के लिए आवेदन ऑफलाइन किया जा सकता है. पात्र महिलाएं आंगनवाड़ी केंद्रों, सेवा केंद्रों, या नगर निगम कार्यालयों में जाकर आवेदन कर सकती हैं. अन्य जानकारी पाने के लिए आप योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://mukhyamantrimawandhiyansatkaryojana.com/ पर विजिट कर सकते हैं।  प्रतिनिधियों को खाते खुलवाने के निर्देश आम आदमी पार्टी ने अपने सभी जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र महिलाओं के बैंक खाते जल्द खुलवाना सुनिश्चित करें। कई इलाकों से खाते खुलवाने में आ रही दिक्कतों की शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंची थीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को बैंकों के प्रतिनिधियों से समन्वय कर समस्याओं का समाधान कराने के निर्देश दिए। यह जानना जरूरी     योजना का लाभ लेने के लिए महिला की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।     महिला का पंजाब की स्थायी निवासी होना और उसके पास वैध वोटर आईडी व आधार कार्ड होना जरूरी है।     एक ही परिवार की एक से अधिक पात्र महिलाएं अलग-अलग लाभ प्राप्त कर सकेंगी।     सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी पेंशन के अतिरिक्त यह राशि मिलेगी।     सरकारी नौकरी करने वाली या सेवानिवृत्त कर्मचारी इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगी।     आयकर दाता महिलाएं तथा वर्तमान या पूर्व सांसद और विधायक भी योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे।     पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है। महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों, सेवा केंद्रों और विशेष पंजीकरण शिविरों में आवेदन कर सकती हैं।  

मेट्रो और फ्लाइओवर प्रोजेक्ट्स से बढ़ी परेशानी, भोपाल में 15 किलोमीटर तक ट्रैफिक का दबाव

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों बड़े बुनियादी ढांचागत विकास के दौर से गुजर रही है, लेकिन मानसून की आहट के बीच यही विकास आम जनता के लिए जी का जंजाल बन गया है। शहर में करीब 15 किलोमीटर के दायरे में मेट्रो रेल, सड़कों और फ्लाइओवर का काम सक्रिय रूप से चल रहा है। इस भारी निर्माण कार्य के कारण सबसे बड़ी समस्या विभिन्न जिम्मेदार विभागों जैसे मेट्रो कॉर्पोरेशन, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के बीच आपसी समन्वय की कमी के रूप में सामने आ रही है। विभागों में आपस में मढ़ा जा रहा दोष बीते मंगलवार को भेल क्षेत्र में लगे भीषण जाम को लेकर मेट्रो अधिकारियों और ट्रैफिक पुलिस के बीच तीखी बहस देखने को मिली। ट्रैफिक पुलिस ने जहां जाम के लिए मेट्रो निर्माण को जिम्मेदार ठहराया, वहीं एमपीएमआरसीएल के अधिकारियों ने इन आरोपों पर हैरानी जताई। मेट्रो अधिकारियों का दावा है कि वे 2 जून को लिखे पत्र और प्रशासन के साथ पूर्व में हुई बैठकों के अनुसार सभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। इन प्रमुख इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर वर्तमान में करौंद से मंडी, भदभदा से रंगमहल और रत्नगिरि से जेके रोड जैसे व्यस्त रूटों पर एलिवेटेड मेट्रो का काम चल रहा है। इसके साथ ही अयोध्या बायपास, कोलार और शाहपुरा क्षेत्रों में फ्लाइओवर और सड़कों के चौड़ीकरण का काम एक साथ चलने से पूरा शहर ट्रैफिक के मोर्चे पर ब्लॉक हो गया है। स्थानीय निवासी राजेश के मुताबिक, करौंद से ऑफिस पहुंचने में अब रोजाना 40 मिनट से ज्यादा का समय बर्बाद हो रहा है। भोपाल मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी, जुलाई से दोनों ट्रैक पर संचालन भोपाल मेट्रो को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अपनी धीमी रफ्तार और कम फ्रीक्वेंसी के कारण चर्चा में रही भोपाल मेट्रो जल्द ही नए अंदाज में दिखाई देगी। मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है और जुलाई से इसके पूरी क्षमता के साथ संचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद न केवल मेट्रो की गति बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों के फेरे भी बढ़ जाएंगे और यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार सुभाष नगर से एम्स तक करीब सात किलोमीटर लंबे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके बाद अब कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। संभावना है कि अगले सप्ताह यह टीम भोपाल पहुंचकर पूरे सिस्टम का परीक्षण करेगी। यदि निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिल जाती है तो जुलाई से नए सिस्टम के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। भोपाल मेट्रो एक सीमित व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। वर्तमान में सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण मेट्रो केवल एक ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। अभी ट्रेनें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीमित समय के लिए चलाई जा रही हैं और उनकी फ्रीक्वेंसी लगभग 75 मिनट रखी गई है। इससे कई लोग मेट्रो का नियमित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अभी सुभाष नगर से एम्स तक डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही है। यानी जिस ट्रैक से ट्रेन आगे जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। अप ट्रैक का उपयोग नहीं हो पाने के कारण मेट्रो की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यही वजह है कि ट्रेनों की संख्या और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं। सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यह सिस्टम तय करता है कि ट्रेन किस गति से चलेगी, ट्रेनों के बीच कितना अंतर रहेगा और किसी भी आपात स्थिति में किस प्रकार नियंत्रण किया जाएगा। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के बिना एक साथ कई ट्रैक पर सुरक्षित संचालन संभव नहीं होता। भोपाल मेट्रो में अब जो तकनीक लागू की जा रही है, वह दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक व्यवस्था पर आधारित है। इस तकनीक के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि मेट्रो दोनों ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेगी। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर थोड़ी देर में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे मेट्रो की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और यात्री संख्या में इजाफा होगा।  कई यात्रियों का कहना है कि 75 मिनट का इंतजार सार्वजनिक परिवहन के लिए काफी लंबा समय है। ऐसे में लोग बस, ऑटो या निजी वाहनों को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन नए सिस्टम के बाद यह स्थिति बदल सकती है। मेट्रो प्रबंधन की योजना है कि सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया टाइम टेबल जारी किया जाए। इसमें सुबह और शाम के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खासतौर पर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और नियमित यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो शहर के प्रमुख सार्वजनिक परिवहन साधनों में शामिल हो सकती है। भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल लगभग 30 किलोमीटर लंबे रूट पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में केवल सीमित हिस्से में संचालन हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। ऐसे में सिग्नलिंग सिस्टम का पूरा होना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यात्रियों को अब CMRS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद भोपाल मेट्रो न सिर्फ तेज रफ्तार से दौड़ेगी, बल्कि अधिक ट्रेनों और बेहतर समय-सारिणी के साथ शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने का काम भी करेगी।

मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी, अल-नीनो का खतरा बरकरार; आने वाले 5 महीने रहेंगे चुनौतीपूर्ण

नई दिल्ली भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 जून की शुरुआत में केरल पहुंचा, लेकिन सामान्य से थोड़ा देरी से. शुरुआती बारिश कई जगहों पर कमजोर रही है. मौसम वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि अभी तो अल-नीनो का पूरा असर नहीं दिखा है, लेकिन आने वाले जुलाई से नवंबर तक के महीने देश के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।  भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल पूरे मॉनसून सीजन के लिए औसत से कम बारिश का अनुमान लगाया है – लगभग 90-92 प्रतिशत लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA). इसका मतलब है कि देश के कई हिस्सों में सूखा जैसी स्थिति बन सकती है, खासकर जून के बाद।  अल-नीनो क्या है और यह भारत को कैसे प्रभावित करता है? अल-नीनो एक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. सामान्य परिस्थितियों में पूर्वी प्रशांत ठंडा रहता है. ट्रेड विंड्स पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं. लेकिन अल-नीनो में ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उल्टी दिशा में चलने लगती हैं. इससे भारत की ओर आने वाली नमी वाली हवाएं प्रभावित होती हैं।  दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ जाता है. भारत में मॉनसून देश की कुल वार्षिक बारिश का करीब 70 प्रतिशत लाता है. अगर यह कम हुआ तो कृषि, जल संसाधन, बिजली उत्पादन और समग्र अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है. 2026 में वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो जून में कमजोर रहेगा, लेकिन जुलाई-अगस्त में मध्यम और सितंबर तक मजबूत हो सकता है. NOAA और IMD जैसे संगठनों के अनुसार, जुलाई-अगस्त में अल-नीनो विकसित होने की संभावना 80-90 प्रतिशत से ज्यादा है।  पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर अल-नीनो वर्षों में भारत को औसत से कम बारिश मिली है. 2009 में कमजोर अल-नीनो के बावजूद बारिश मात्र 78 प्रतिशत रह गई थी, जो 37 साल का सबसे कम स्तर था. 2015-16 के मजबूत अल-नीनो में भी सूखे की स्थिति बनी।  हालांकि कुछ सालों में सकारात्मक भारतीय महासागर द्विध्रुव (Positive IOD) ने अल-नीनो के निगेटिव असर को कुछ हद तक कम किया, लेकिन 2026 में IOD अभी न्यूट्रल है. बाद में पॉजिटिव होने की उम्मीद है, जो थोड़ी राहत दे सकता है लेकिन पूरी सुरक्षा नहीं।  मॉनसून की शुरुआत कमजोर जून 2026 के पहले दो हफ्तों में कई राज्यों में बारिश सामान्य से काफी कम रही. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 70-80 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. मध्य भारत और कुछ उत्तरी हिस्सों में भी कमी है. IMD के अनुसार, जून महीने में भी नीचे औसत बारिश रहने की संभावना है. मॉनसून की देरी और कमजोर शुरुआत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है।  अभी अल-नीनो का पूरा कहर नहीं दिखा क्योंकि यह अभी विकसित हो रहा है. असली असर जुलाई से सितंबर के बीच दिखेगा, जब मॉनसून अपने चरम पर होता है. अगर अल-नीनो मजबूत हुआ तो अगस्त-सितंबर में बारिश और भी कम हो सकती है. इससे जलाशयों में पानी की कमी, नदियों का सूखना और भूजल स्तर गिरना जैसी समस्याएं बढ़ेंगी।  कृषि और किसानों पर संभावित प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी काफी हद तक कृषि पर निर्भर है. करीब 50-60 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती से जुड़ी हुई है. खरीफ सीजन (जून-सितंबर) में धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दालें आदि फसलें बोई जाती हैं. कम बारिश से इन फसलों की पैदावार घट सकती है।  पिछले अल-नीनो वर्षों में सूखे से किसानों की आय घटी, कर्ज बढ़ा और आत्महत्या की घटनाएं भी बढ़ीं. 2026 में अगर बारिश 90 प्रतिशत या उससे कम रही तो खाद्यान्न उत्पादन में 10-15 प्रतिशत की कमी आ सकती है. इससे खाद्य सुरक्षा चुनौती बनेगी. सरकार को आयात बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा।  मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. इन इलाकों में वर्षा आधारित खेती ज्यादा है. छोटे किसान जिनके पास सिंचाई की सुविधा नहीं है, वे सबसे ज्यादा परेशान होंगे. पशुपालन भी प्रभावित होगा क्योंकि चारे की कमी हो सकती है।  जल संकट और अन्य क्षेत्रों पर असर कम बारिश का मतलब जल संकट गहराना है. कई शहरों और गांवों में पहले से पानी की समस्या है. मॉनसून कमजोर रहा तो पीने के पानी, सिंचाई और उद्योगों के लिए पानी की कमी बढ़ेगी. बिजली उत्पादन भी प्रभावित होगा क्योंकि हाइड्रो पावर प्लांट पानी पर निर्भर हैं।  गर्मी पहले से ही रिकॉर्ड तोड़ रही है. अल-नीनो से तापमान और बढ़ सकता है. लू की लहरें लंबी और तीव्र हो सकती हैं, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ेंगी. बुजुर्गों, बच्चों और मजदूरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।  महंगाई और विकास दर कृषि उत्पादन घटने से सब्जी, अनाज और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं. खाद्य मुद्रास्फीति बढ़ने से RBI की मौद्रिक नीति प्रभावित होगी. विकास दर पर भी दबाव पड़ेगा. अगर GDP ग्रोथ 7 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे गई तो नौकरियां कम होंगी. ग्रामीण अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार हो सकती है।  सरकार पहले से तैयारी कर रही है. कॉन्टीजेंसी प्लांस बनाए जा रहे हैं. 200 से ज्यादा जिलों में सूखा राहत कार्यों की योजना है. फसल बीमा योजना (PMFBY) को मजबूत किया जा रहा है. लेकिन चुनौती बड़ी है।  ऐतिहासिक उदाहरण और सीख 1950 के बाद कई अल-नीनो वर्ष आए हैं. 1997-98 का सुपर अल-नीनो सबसे मजबूत था, लेकिन कुछ मामलों में भारत को अप्रत्याशित रूप से अच्छी बारिश मिली. 2015 में भारी सूखा पड़ा. इन अनुभवों से पता चलता है कि अल-नीनो तय करता है लेकिन IOD, हिमालयी बर्फ, स्थानीय मौसम व्यवस्था आदि भी भूमिका निभाते हैं।  2026 में सुपर अल-नीनो की आशंका है, जो अक्टूबर-फरवरी तक मजबूत रह सकता है. इसका असर 2026 के मॉनसून के अलावा 2027 की शुरुआत तक भी रह सकता है।  सभी उम्मीदें निराशाजनक नहीं हैं. अगर पॉजिटिव IOD विकसित हुआ तो यह अल-नीनो का कुछ असर कम कर सकता है. बेहतर मौसम पूर्वानुमान, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और किसानों को समय पर सलाह देने से नुकसान कम किया जा सकता है. वैज्ञानिक कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे उतार-चढ़ाव बढ़ रहे हैं. लंबे समय में हमें जल संरक्षण, सूखा प्रतिरोधी फसलें और माइक्रो इरिगेशन पर … Read more