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राज्य में अब कुल 21 विशेष अदालतें, मामलों की तेज सुनवाई और निपटारे पर जोर

 चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और नशे से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में 13 नई फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। न्याय प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन अदालतों का गठन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज मामलों की शीघ्र सुनवाई और लंबित मामलों के बोझ को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। राज्य सरकार के मुताबिक फरीदाबाद, गुरुग्राम, पंचकूला, रोहतक, यमुनानगर और फतेहाबाद जिलों में एक-एक अतिरिक्त विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्णय लिया है। वहीं, फतेहाबाद में पहले से स्थापित अदालतों के अतिरिक्त दो नई और सिरसा में छह नई कोर्ट स्थापित करने का फैसला किया है। इन अदालतों को विशेष रूप से नशा तस्करी, मादक पदार्थों की अवैध बिक्री, परिवहन और संबंधित अपराधों की सुनवाई के लिए अधिकृत किया गया है। राज्य में पहले से ही आठ फास्ट ट्रैक स्थापित हैं। इस प्रकार राज्य में अब कुल 21 अतिरिक्त फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें राज्य में कार्य करेंगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन अदालतों में अपर सत्र न्यायाधीश स्तर के न्यायिक अधिकारियों को विशेष न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाएगा। यह नियुक्तियां पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से की गई हैं। सरकारी अधिकारियों के अनुसार राज्य में नशा तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान बड़ी संख्या में एनडीपीएस मामलों का पंजीकरण हुआ है। ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे, आरोपियों को शीघ्र सजा दिलाने व न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। जानकार कहते हैं कि नई अदालतों के गठन से लंबित मामलों का बोझ कम होगा, गवाहों के बयान समय पर दर्ज हो सकेंगे और जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत मामलों का तेजी से निपटारा संभव हो सकेगा। इससे राज्य सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को भी मजबूती मिलेगी।  

दिल्ली एयरपोर्ट पर KZF आतंकियों की गिरफ्तारी, पंजाब में बड़े धमाके की साजिश से जुड़े तार

चंडीगढ़  पंजाब पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट से दो वांधित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पंजाब पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट पर प्रतिबंधित खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) से जुड़े दो वांछित संचालकों को गिरफ्तार किया। इन्हें मलेशिया से डिपोर्ट किया गया था। अंबाला के गुरविंदर सिंह और पटियाला के मंजीत सिंह नाम के इन दो आरोपियों को डिपोर्ट कराने का काम पंजाब पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों और रॉयल मलेशिया पुलिस की मदद से पूरा किया। उन्हें बुधवार को दिल्ली लाया गया था। पंजाब डीजीपी ने किया पोस्ट पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफार्म पर एक पोस्ट में बताया कि गुरविंदर और मंजीत, KZF समर्थित उस टेरर मॉड्यूल के मलेशिया-स्थित मुख्य सदस्य थे जो पंजाब में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लाइनों समेत रेलवे के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की साजिश में शामिल थे। डी.जी.पी. ने बताया कि ये दोनों के.एफ.जे. से जुड़े एक टेररिस्ट मॉड्यूल से जुड़े थे। पंजाब पुलिस पहले ही इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर चुकी है, जो पंजाब में रेलवे लाइनों पर IED ब्लास्ट में शामिल था, जिसने 23 जनवरी को सरहिंद ब्लास्ट किया था और 27 अप्रैल को पटियाला में धमाके की कोशिश की थी। इन मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था और उनके पास से RPG लॉन्चर, IED, RDX, हैंड ग्रेनेड जैसे खतरनाक हथियार बरामद किए गए थे। गौरव यादव ने आगे कहा कि जांच के दौरान यह भी पता चला कि मलेशिया से काम कर रहे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स  हैंडलर इस सबके पीछे हैं, जो इस सब की फंडिंग भी कर रहे थे। ये दोनों डिपोर्ट किए गए आरोपी विदेशी अकाउंट के ज़रिए पंजाब में बैठे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स एक्टिविस्ट की 'टेररिस्ट फंडिंग' में अहम भूमिका निभा रहे थे, ताकि पंजाब में टेररिस्ट हमले करके शांति भंग की जा सके। दोनों आरोपियों को पटियाला कोर्ट में पेश किया गया है और पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड हासिल किया गया है। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने एक्स पर बताया कि इससे पहले, पंजाब पुलिस ने उस टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था जो 23 जनवरी, 2026 को फतेहगढ़ साहिब के सरहिंद के पास रेलवे फ्रेट कॉरिडोर लाइन पर हुए IED धमाके और 27 अप्रैल, 2026 को पटियाला जिले के शंभू के पास उसी कॉरिडोर पर धमाके की कोशिश के लिए जिम्मेदार था। हथियारों का जखीरा बरामद डीजीपी ने लिखा कि जांच के दौरान, चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और भारी मात्रा में मिलिटेंट हार्डवेयर बरामद किया गया, जिसमें RPG लॉन्चर, IED, RDX, हैंड ग्रेनेड और गोला-बारूद के साथ हाई-एंड पिस्तौलें शामिल थीं। उन्होंने लिखा,     इस अंतरराष्ट्रीय साजिश की आगे की जांच में मलेशिया से काम कर रहे KZF हैंडलर्स और फाइनेंशियल फैसिलिटेटर्स (आर्थिक मदद पहुंचाने वालों) की भूमिका का पता चला। डिपोर्ट किए गए आरोपी पंजाब में KZF ऑपरेटिव्स को विदेशी खातों के जरिए टेरर फंड पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते पाए गए, जिससे राज्य में आतंकवादी हमलों को अंजाम देने और शांति व कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की योजनाओं को बढ़ावा मिला। दोनों आरोपियों को 18 जून, 2026 को पटियाला की सक्षम अदालत में पेश किया गया और आगे की पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया। बड़े नेटवर्क का पता लगाने और साजिश में शामिल सभी लोगों की पहचान करने के लिए जांच जारी है।- गौरव यादव, पंजाब डीजीपी  

MP Weather Update: बारिश से पहले बढ़ी बेचैनी, उमस ने किया बेहाल; मौसम विभाग ने दी अहम चेतावनी

भोपाल  देशभर में भीषण गर्मी से परेशान लोग बड़ी शिद्दत से दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से मानसून की प्रगति में एक 'अस्थायी ठहराव' देखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 18 जून 2026 तक मानसून की उत्तरी सीमा हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, रांची और मुजफ्फरपुर पर ही टिकी हुई है। आखिर वातावरण में नमी बढ़ने के बावजूद मानसून की रफ्तार क्यों थम गई है और मध्यप्रदेश में इसका क्या असर होने वाला है, आइए विस्तार से समझते हैं। मध्यप्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा प्रदेश के कई हिस्सों को कवर कर चुकी है और आने वाले 4-5 दिनों में इसके और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। क्यों थम गई मानसून की रफ्तार? मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून की गति धीमी होने के पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल की खाड़ी का खामोश होना है। इस समय खाड़ी में कोई मजबूत निम्न दाब क्षेत्र नहीं बन पा रहा है, जो मानसूनी हवाओं को आगे धकेलने के लिए ऊर्जा देता है। इसके अलावा अन्य प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:     जेट स्ट्रीम का प्रभाव उपोष्ण पश्चिमी जेट का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।     प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक है और साल के उत्तरार्ध में अल नीनो परिस्थितियां बनने की संभावना है।     वहीं मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन भी फिलहाल हिंद महासागर में मानसून को सहारा नहीं दे पा रहा है।     सिस्टम की कमी: मध्य भारत में फिलहाल किसी मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) का अभाव है। मध्यप्रदेश में प्री-मानसून ने पकड़ी भारी रफ्तार भले ही मानसून की आधिकारिक एंट्री में थोड़ा ठहराव आया हो, लेकिन मध्यप्रदेश में मानसूनी सक्रियता तेजी से बढ़ रही है। प्रदेश में उमस का ग्राफ अचानक बहुत ऊपर चला गया है, जो इस बात का सीधा संकेत है कि मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं है। शाम के समय दर्ज की गई सापेक्षिक आर्द्रता के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं     बैतूल: 90 प्रतिशत     रायसेन: 77 प्रतिशत     पचमढ़ी: 73 प्रतिशत     भोपाल: 64 प्रतिशत खजुराहो-नौगांव में पारा 41 पार, पर तपन हुई कम वातावरण में बादलों और नमी की मौजूदगी के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है। पूर्वी मध्यप्रदेश में खजुराहो 41.4°C और नौगांव 41.0°C सबसे गर्म दर्ज किए गए, जबकि पश्चिमी हिस्से में दतिया 41.2°C में तेज गर्मी रही। हालांकि, नमी बढ़ने से रातें अब भी गर्म बनी हुई हैं, जहां खजुराहो में न्यूनतम तापमान 28.0°C और सतना में 27.9°C दर्ज किया गया। शैलेन्द्र कुमार नायक, मौसम, जलवायु एवं पर्यावरण विश्लेषक, भोपाल पिछले 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश? सिवनी: 22.6 मिमी श्योपुर: 20.4 मिमी बैतूल: 16.6 मिमी रीवा: 13.0 मिमी राजगढ़: 13.0 मिमी भोपाल: 14.0 मिमी सतना: 12.0 मिमी सागर: 8.7 मिमी अगले 2 से 3 दिनों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विश्लेषक शैलेंद्र नायक के अनुसार, इसे 'ब्रेक मानसून' कहना गलत होगा, यह सिर्फ एक छोटा सा विराम है। मध्यप्रदेश में मानसून के स्वागत के लिए माहौल पूरी तरह अनुकूल हो चुका है। अगले 48 से 72 घंटों के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और वर्षा की गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। जैसे ही बंगाल की खाड़ी या विदर्भ के ऊपर कोई चक्रवाती घेरा मजबूत होगा, मानसून पूरी ताकत से एमपी में दाखिल हो जाएगा। इन जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग ने भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, इंदौर, नीमच, मंदसौर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, अनूपपुर, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना समेत कई जिलों में गरज-चमक और बारिश की चेतावनी जारी की है।     प्रदेश में मानसून की गतिविधियां तेज होने लगी हैं।     भोपाल सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना।     कुछ जिलों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।     अगले 2 दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के आसार।     किसानों और आम नागरिकों को मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

धुस्सी बांध सड़क परियोजना शुरू, जालंधर के ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत; सीचेवाल ने जताई खुशी

 जालंधर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज जालंधर दौरे के दौरान शाहकोट में सतलुज नदी के धुस्सी बांध पर बनने वाली 35 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का शिलान्यास किया। गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक बनने वाली यह सड़क क्षेत्र के दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ेगी। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के लंबे प्रयासों और मान सरकार की इस पहल से बाढ़ प्रभावित इलाके के हजारों लोगों को राहत मिलेगी। इससे उनकी वर्षों पुरानी मांग भी पूरी हो गई है। बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि इससे लोगों का सफर आसान होगा। भारी सुरक्षा के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री भगवंत मान शुक्रवार को विशेष रूप से जालंधर दौरे पर पहुंचे। इस दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। जालंधर में सतलुज नदी के पूरे किनारे को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। इसी कड़ी सुरक्षा के बीच उन्होंने शाहकोट पहुंचकर धुस्सी बांध सड़क का शिलान्यास किया। 35 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण इस प्रोजेक्ट के तहत सतलुज नदी के धुस्सी बांध पर गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक एक मजबूत और पक्की सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह सड़क लगभग 35 किलोमीटर लंबी होगी। इसके बनने से पूरे क्षेत्र और आसपास के लोगों की आवाजाही में बड़ा सुधार होगा, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी। संत सीचेवाल के प्रयासों की सराहना इस शिलान्यास समारोह के दौरान राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल विशेष रूप से मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे। इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए संत सीचेवाल लंबे समय से लगातार प्रयास कर रहे थे। स्थानीय लोग उनके इन प्रयासों को बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं। 2023 की बाढ़ के बाद उठी थी मांग सीचेवाल ने इस मौके पर 2023 की पुरानी आपदा को याद करते हुए कहा कि मंडाला छन्ना के पास अचानक धुस्सी बांध टूट गया था। बांध टूटने के कारण पूरे इलाके में बाढ़ आ गई थी, जिससे लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। तभी से बांध को मजबूत करने और उस पर पक्की सड़क बनाने की मांग लगातार उठ रही है। दर्जनों गांवों को मिलेगा सीधा फायदा संत सीचेवाल ने आगे बताया कि गिदड़पिंडी से फिल्लौर तक बनने वाली यह पक्की सड़क क्षेत्र के दर्जनों गांवों को आपस में सीधे जोड़ेगी। इससे लोगों का सफर आसान होगा और बांध की मजबूती भी बढ़ेगी। इस इलाके की यह मांग पिछले कई सालों से लंबित थी, जिसे अब भगवंत मान सरकार ने पूरा कर दिया है। पिछली सरकारों के प्रति स्थानीय लोगों में था रोष इस मौके पर मंडाला छन्ना, गट्टा मुंडी कासू, गिदड़पिंडी समेत आसपास के कई गांवों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्थानीय निवासियों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे कई सालों से इस सड़क के निर्माण की मांग कर रहे थे, लेकिन पिछली किसी भी सरकार ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया। मान सरकार का जताया आभार ग्रामीणों ने खुशी जताते हुए कहा कि मौजूदा मान सरकार द्वारा इस सड़क का नींव पत्थर रख दिया गया है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, जिससे क्षेत्रवासियों को वर्षों पुरानी समस्या से निजात मिलेगी और उनका जीवन अधिक सुगम हो जाएगा।  

बिजली उत्पादन में बढ़ेगी दक्षता, मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विकसित किया मॉनिटरिंग मॉडल

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल मुख्यालय एवं विद्युत गृहों के विशेषज्ञ अभियंताओं की संयुक्त समन्वय टीम गठित भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने ताप एवं जल विद्युत गृहों की वार्षिक रखरखाव (Annual Overhaul ) एवं पूंजीगत ओवरहॉल (Capital Overhaul ) गतिविधियों के उपरांत इकाइयों के अधिक सुरक्षित, दक्ष एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि कंपनी का विश्वास है कि मशीनों की तरह कार्य प्रणालियों का भी समय-समय पर मूल्यांकन एवं पुनर्विचार आवश्यक होता है। इससे न सिर्फ बेहतर समाधान उभर कर आते हैं बल्कि कंपनी भी नवाचार के साथ निरंतर विकसित होकर आगे बढ़ने के लिए तत्पर होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञता, सहभागिता एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए विद्युत उत्पादन की विश्वसनीयता को नई मजबूती प्रदान करेगी। 4 ताप व 10 जल विद्युत गृह से होता है 5492 मेगावाट बिजली उत्पादन वर्तमान में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के चार ताप विद्युत गृह अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया द्वारा कुल 4570 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। पावर जनरेटिंग कंपनी के 10 जल विद्युत गृहों गांधीसागर, पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह, रानी अबंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी, बाण सागर जल विद्युत गृह के टोंस, सिलपरा, देवलोंद, झिन्ना जल विद्युत गृह, बिरसिंगपुर जल विद्युत गृह, राजघाट जाल विद्युत गृह एवं मड़ीखेड़ा जल विद्युत गृह द्वारा कुल 915 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। रतागुरडिया ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट से कुल सात मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 5492 मेगावाट है। कैसे होगी निगरानी इस तकनीकी निगरानी व्यवस्था में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा मुख्यालय एवं संबंधित विद्युत गृहों के अनुभवी व युवा अभियंताओं को सम्मिलित करते हुए यूनिटवार समन्वय टीम गठित की हैं। यह टीम ओवरहॉल कार्यों की योजना, निरीक्षण, मूल्यांकन एवं अनुपालन की सतत निगरानी करेंगे, जिससे किसी भी संभावित तकनीकी कमी अथवा परिचालन बाधा की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा। इन टीमों के गठन में विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समूह में शामिल अभ‍ियंता अपने स्वयं के विद्युत उत्पादन इकाई के ओवरहॉल कार्यों से संबद्ध न हों। इससे निरीक्षण प्रक्रिया में निष्पक्षता, व्यापक तकनीकी मूल्यांकन एवं बेहतर सुझावों का समावेश सुनिश्चित होगा। क्या होती है वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल प्रक्रिया विद्युत उत्पादन इकाइयों में वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल एक निर्धारित एवं व्यापक रखरखाव प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखना, संभावित खराबियों को रोकना तथा संयंत्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। वार्षिक ओवरहॉल सामान्यतः प्रत्येक एक से दो वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें महत्वपूर्ण उपकरणों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत एवं क्षतिग्रस्त पुर्जों का प्रतिस्थापन किया जाता है। वहीं पूंजीगत ओवरहॉल एक विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सामान्यतः चार से छह वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें प्रमुख मशीनों को खोलकर उनकी व्यापक मरम्मत, उन्नयन तथा तकनीकी सुधार किए जाते हैं, जिससे संयंत्रों की आयु एवं दक्षता में वृद्धि होती है। निरंतर निगरानी और विश्लेषण करेगी टीम गठित समन्वय टीम ओवरहॉल अवधि के दौरान संबंधित विद्युत गृहों का नियमित भ्रमण करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि पिछली ओवरहॉल अवधि के बाद आई विभिन्न तकनीकी ट्रिपिंग के मूल कारणों का उचित विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तकनीकी कार्यों की गतिविधियों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी ओवरहॉल गतिविधियों का दैनिक प्रगति प्रतिवेदन तैयार किया जाए एवं विद्युत गृह में गठित गुणवत्ता नियंत्रण दल द्वारा उसका सत्यापन किया जाए।  

सिकंदरा थाना क्षेत्र के रवैय मुसहरी गांव में तनाव, पुलिस ने महिला को भीड़ से बचाकर अस्पताल पहुंचाया

जमुई जमुई जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र स्थित रवैय मुसहरी गांव में शुक्रवार सुबह एक युवक की मौत के बाद अंधविश्वास और अफवाहों ने तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी। युवक की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने एक महिला को डायन बताकर उसके साथ मारपीट की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को भीड़ के चंगुल से मुक्त कराकर इलाज के लिए अस्पताल भेजा। मृतक की पहचान रवैय मुसहरी निवासी भीम मांझी के 22 वर्षीय पुत्र मुश्क मांझी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार उसकी तबीयत पिछले कुछ दिनों से खराब चल रही थी। शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई, जिसके बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। महिला को पकड़कर गांव लाए, फिर की मारपीट जानकारी के अनुसार, कुछ ग्रामीणों ने युवक की मौत के लिए एक महिला को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया। आरोप है कि ग्रामीण जानसिहडीह गांव निवासी अर्जुन मांझी की पत्नी अनवा देवी को पकड़कर रवैय मुसहरी ले आए और उसके साथ मारपीट की। घटना के दौरान गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। किसी ने मामले की सूचना सिकंदरा थाना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने महिला को अस्पताल भेजा पुलिस ने महिला को भीड़ से सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। बताया जा रहा है कि मारपीट में महिला को चोटें आई हैं। वहीं ग्रामीणों और मृतक के कुछ परिजनों का आरोप है कि महिला ने मोहल्ले के कई लोगों को पानी पिलाया था, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौत के कारणों की जांच जारी सिकंदरा थाना पुलिस ने बताया कि युवक की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें और कानून को अपने हाथ में न लें। घटना के बाद गांव में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।  

जल संरक्षण और सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए सरायकेला-खरसावां में नई योजना की शुरुआत

  कुचाई सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड अंतर्गत छोटासेगोई पंचायत के कुलाचाकी गांव में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 48 लाख रुपये की लागत से बनने वाले चेकडैम (वीयर) जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया. खरसावां विधायक दशरथ गागराई की धर्मपत्नी और समाजसेवी बासंती गागराई और विधायक प्रतिनिधि अर्जुन उर्फ नायडू गोप ने संयुक्त रूप से शिलापट्ट का अनावरण कर योजना की आधारशिला रखी. चेकडैम से किसानों को मिलेगा लाभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजसेवी बासंती गागराई ने कहा कि चेकडैम निर्माण से क्षेत्र में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा. राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उतार रही है. उन्होंने कहा कि चेकडैम बनने से वर्षा जल का संचयन होगा, जिससे भू-जल स्तर में सुधार आएगा और कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसका सीधा लाभ क्षेत्र के किसानों को मिलेगा तथा खेती-किसानी को नई मजबूती मिलेगी. किसान हित योजनाओं और चेकडैम निर्माण पर जोर विधायक प्रतिनिधि अर्जुन गोप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार कार्य कर रही है. स्थानीय विधायक दशरथ गागराई भी क्षेत्र के विकास के लिए सचेत हैं. इस योजना से किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगी. कृषि को बढ़ावा मिलेगा. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. उन्होंने संवेदक को समय सीमा में पूरी गुणवत्ता के साथ चेक डैम का निर्माण करने को कहा. कार्यक्रम में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि शामिल हुए इस मौके पर धर्मेंद्र सिंह मुंडा, सचिव मुन्ना सोय, मुखिया करम सिंह मुंडा, कारू मुंडा, राहुल सोय, नरेश मुंडा, बनवारी लाल सोय, संवेदक राकेश कुमार, पंकज कुमार, नित्यानंद शर्मा, गोवर सिंह मुंडा, जोन मुंडा, गुरूचरण मुंडा, रीसा गागराई, बुधू सोय, दुर्गाचरण गागराई, लखन मुंडा, निरंजन लेंका, कृष्णा हेंब्रम, संजय हेंब्रम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे.

रुदौली में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण के दौरान सीएम योगी बोले 15 दिन रुकें, जांच करेगी सच उजागर

लखनऊ राम मंदिर में चढ़ावा की चोरी की खबरों और एसआईटी जांच के बीच शुक्रवार को पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार बयान दिया। अयोध्या के रुदौली विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे सीएम योगी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए लोगों से कहा कि आपने राम मंदिर के लिए 500 सालों तक इंतजार किया है। 15 दिन और इंतजार कर लीजिए। ट्रस्ट के कहने पर एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी दूध का दूध पानी का पानी करेगी। कोई अपराधी होगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। अयोध्या और रामभक्तों को बदनाम करने की कोशिश न की जाए। सीएम योगी ने 15 दिनों तक किसी तरह की बयानबाजी नहीं करने की अपील करते हुए कहा कि अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं। सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला करते हुए कहा कि राम भक्तों और जयश्रीराम का नारा लगाने पर लाठी गोली चलाने वाले आज उपदेश देने चले हैं। कहा कि अयोध्या के बारे में जो समाचार पत्रों में देखने सुनने को मिला। उसके बाद ट्रस्ट के कहने पर हमने एसआईटी जांच बैठाई है। एसआईटी पूरे दूध का दूध पानी का पानी करेगी। कोई सबूत हो तो एसआईटी को दे दें सीएम योगी ने कहा कि जब तक जांच हो रही है कोई भी ऐसी अनर्गल बात न हो जो राम भक्तों की भावना को आहत करती हो। यह भी कहा कि किसी के पास इससे संबंधित दस्तावेजी सबूत हो तो एसआईटी को दे दें वह जांच करेगी। प्रभु श्रीराम ने मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा दी है, ऐसे में सभी को मर्यादा का पालन करना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि जांच के बीच बयानबाजी होती है तो जांच प्रभावित करती है। जांच के बाद किसी को कोई बात कहनी होगी तो एसआईटी से कह सकते हैं। अयोध्या को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या और श्रीराम जन्मभूमि को बदनाम करने वालों के बहकावे में न आएं। यह लोग नहीं चाहेंगे कि अयोध्या को सम्मान मिले। यह लोग अयोध्या को बदनाम करना चाहते हैं। अयोध्या और यहां के लोगों को अपमानित करते हैं। हम इनके बहकावे में कत्तई न आएं। इन लोगों का आचरण पहले से ही सभी के सामने है। राम भक्तों को बदनाम करने वाले बाबर को मानने वाले लोग कहा कि जो लोग रामभक्तों को अपमानित करते थे, अपराधियों के कब्र पर जाकर फातिया पढ़ते थे। जिन लोगों ने अब तक राम जन्मभूमि में दर्शन नहीं किया, अपने विधायकों को भी जाने से रोका, वह लोग बाबर को मानने वाले लोग हैं। उनके ही विधायक मनोज पांडेय ने जब सभी विधायकों को अयोध्या लाने की बात कही तो उन्हें अखिलेश ने फटकार दिया था। मनोज पांडेय को धुतकार कर भगा दिया था। आज मनोज पांडेय हमारी सरकार में मंत्री हैं। अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा कि यह लोग कभी अयोध्या नहीं आए और अयोध्या को बदनाम करने के लिए क्या-क्या कर रहे हैं, इसे देखते रहिए। उन लोगों की सोच कब्रिस्तान और कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने तक ही सीमित रही है। हम लोग अयोध्या के विकास में लगे हैं। आज एक ही विधानसभा में 126 परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हो रहा है। कांग्रेस का दोगला चरित्र कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वह लोग दोगले चरित्र के हैं। उन लोगों ने अयोध्या में राम मंदिर न बनने पाए, इसके लिए एड़ी चोटी का दम लगा दिया था। अयोध्या की पहचान का संकट खड़ा किया था। आज कांग्रेस बोल रही है कि राम भक्तों का अपमान हो गया। जब कांग्रेस कहती थी कि राम है ही नहीं, तब अपमान नहीं होता था? श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करने वाली कांग्रेस आज राम भक्तों के नाम पर मचल रही है।

जेनेवा में भारत ने पाकिस्तान और OIC को घेरा, UNHRC में PoK पर दिया करारा जवाब

 जेनेवा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है. भारत ने पाकिस्तान के सभी आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का ये प्रोपेगैंडा उसकी अपनी घरेलू नाकामियों और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन को छिपाने की एक सोची-समझी साजिश है।  दरअसल, पाकिस्तान ने UNHRC में कश्मीर में कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया और जम्मू-कश्मीर को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे।  इसके जवाब में UN में भारत की स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा किए गए दावों पलटवार करते हुए कहा, 'भारत को पाकिस्तान और OIC द्वारा हमारे खिलाफ दिए गए बयानों का जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा है. हम पाकिस्तान के बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं और हम OIC द्वारा जम्मू-कश्मीर के संदर्भ को भी पूरी तरह खारिज करते हैं।  OIC के कोऑर्डिनेटर पद का गलत इस्तेमाल अनुपमा सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान द्वारा OIC कोऑर्डिनेटर की भूमिका का गलत इस्तेमाल केवल उसके इस धोखे को और पुख्ता करता है. भारत की ऐसे किसी भी प्रोपेगैंडा को कोई अहमियत देने की इच्छा नहीं है. जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. एकमात्र अनसुलझा मुद्दा पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों की वापसी है।  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का ये झूठा प्रचार उसके अवैध कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे दमन की कड़वी सच्चाई को दुनिया के सामने आने से कभी नहीं छिपा सकता।  भारत ने मानवाधिकार परिषद के सामने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर की दयनीय स्थिति को मजबूती से रखा. अनुपमा सिंह ने कहा कि रावलकोट में चल रही त्रासदी, सैकड़ों निर्दोष नागरिकों की हत्या और वहां की गई बेरहम कार्रवाई उस सिस्टम का नतीजा है जो जबरदस्ती के अवैध कब्जे पर बना है. दशकों से सेना के कब्ज़े, डेमोग्राफिक इंजीनियरिंग और बुनियादी आजादी से इनकार के कारण वहां के हालात बदतर हो चुके हैं।  'अधिकारों का मांग वालों पर चलाई गोलियां' काउंसिल में बात रखते हुए भारतीय राजनयिक ने कहा कि वहां हालात ऐसे मोड़ पर आ गए हैं, जहां आम जनता द्वारा रोटी, बिजली, अधिकारों और सम्मान की मांग का जवाब गोलियों और बेरहमी से दिया जाता है. एक अवैध और गैर-कानूनी कब्जा सिर्फ ताकत के दम पर ही कायम रखा जा सकता है. उन्होंने पाकिस्तान को एक 'फ्रेंकस्टीन स्टेट' का जीता-जागता उदाहरण बताया जो अपने ही बनाए आतंकवाद से परेशान है।  Pak ने आतंकवाद को बनाया सरकारी नीति अनुपमा सिंह ने कहा कि ये वही देश है, जिसके मौजूदा रक्षा मंत्री आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने और उन्हें तैनात करने की डींगें मारते हैं जो वहां की एक सरकारी नीति है. इसके बावजूद पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है, जो एक बड़ा विरोधाभास है।  सिंधु जल संधि पर भारत का रुख इसके साथ ही उन्होंने सिंधु जल संधि को पुरानी बताते हुए कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश सद्भावना और दोस्ती पर आधारित सहयोग की उम्मीद नहीं कर सकता।  जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर, टेक्नोलॉजी में तरक्की और टिकाऊ स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरत के कारण 1960 में हुई इस संधि की प्रासंगिकता पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है. अंत में भारत ने पाकिस्तान को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि भारतीय इलाकों पर नजर रखने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने घर को ठीक करे, क्योंकि इस काउंसिल में उसके दिखावे का आकर्षण खत्म हो चुका है। 

पंजाब में सतलुज सफाई परियोजना को कोर्ट की हरी झंडी, विरोध में उतरी संघर्ष समिति

 रूपनगर  सतलुज नदी पर स्थित अगमपुर पुल के निकट डी-सिल्टिंग मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के ताजा आदेशों को लागू करने से पहले विभाग को मौके की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए व कानून और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही कार्य किया जाना चाहिए। जिससे आगामी बरसाती मौसम में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी या नुकसान का सामना न करना पड़े। ये मांग संघर्ष समिति के सदस्यों ने करते हुए कहा कि प्रशासन पहले इस क्षेत्र का सीमांकन कर उसे पूरी तरह स्पष्ट करे और तारबंदी करने के बाद ही डी-सिल्टिंग का कार्य शुरू किया जाए। जिससे कि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। संघर्ष समिति ने यह भी सवाल उठाया कि सतलुज नदी का पानी पुल के पिल्लर नंबर-1 की ओर ही अधिक दबाव के साथ क्यों बह रहा है। क्या इसका कारण पुल के ऊपरी क्षेत्र में पूर्व में हुए अवैध खनन के कारण नदी की प्राकृतिक धारा का बदल जाना है। यदि ऐसा है तो विभाग इस तथ्य को सार्वजनिक करने से क्यों बच रहा है। 30 जून को दी गई थी डी-सिल्टिंग की अनुमति सदस्यों ने करते हुए कहा कि 8 जून को दिए गए अंतरिम स्थगन आदेश में संशोधन करते हुए हाईकोर्ट ने पुल के पिलर नंबर-1 की मरम्मत व पुल से 35 से 50 मीटर अपस्ट्रीम तक सीमित क्षेत्र में 30 जून 2026 तक डी-सिल्टिंग की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 30 जून के बाद न्यायालय की अनुमति के बिना किसी प्रकार की डी-सिल्टिंग नहीं की जाएगी। इसके साथ ही रूपनगर के उपायुक्त को स्वयं मौके पर निगरानी रखने, अवैध खनन पर रोक सुनिश्चित करने व अगली सुनवाई से पहले स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालती आदेश के बाद संघर्ष समिति ने कहा कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार और संबंधित विभागों को कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सार्वजनिक करने चाहिए। संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरदेव सिंह माजरी टिब्बा, यशवीर चंद भलाण, पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा, एडवोकेट विशाल सैनी, सुरजीत सिंह ढेर, बलवीर सिंह शाहपुर, कीर्ति किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वीर सिंह बड़वा, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता धर्मपाल सैनी माजरा व निहंग जत्थेबंदियों के प्रमुख बाबा अच्छर सिंह महाकाल ने संयुक्त रूप से कहा कि विभाग द्वारा अदालत के समक्ष नए खसरा नंबर प्रस्तुत किए गए हैं। ऐसे में सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाए कि पुल से 35 से 50 मीटर तक डी-सिल्टिंग का वास्तविक क्षेत्र कौन-सा है। 2020 की पीडब्ल्यूडी विभाग की रिपोर्ट पर सरकार ने क्या कार्रवाई की पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने वर्ष 2020 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उस समय स्वयं विभाग ने स्वीकार किया था कि अवैध खनन के कारण पुल के पिलर 20 से 25 फीट तक उजागर हो चुके थे और पुल की सुरक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित करने की सिफारिश की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि उस रिपोर्ट के बाद सरकार ने क्या कार्रवाई की, समिति का गठन हुआ या नहीं और पिछले छह वर्षों में पुल की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए। उन्होंने मांग की कि यदि वर्ष 2020 में पिल्लर 20 से 25 फीट तक उजागर हो चुके थे तो वर्ष 2026 में उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही पुल की वर्तमान स्थिति, नदी की जलधारा की दिशा तथा डी-सिल्टिंग के संभावित प्रभावों की पूरी जानकारी भी जनता के सामने रखी जाए।