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होर्मुज संकट के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति बदली, वैकल्पिक स्रोतों पर जोर

नई दिल्ली  ईरान और अमेरिका के बीच एमओयू साइन होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने तक भारत ने जून में रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है. भारतीय रिफाइनरियों ने खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने से पहले अपना 'ऑयल स्टोरेज' सुरक्षित करने की रणनीति अपनाई. मैरीटाइम और कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म क्लेपेर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, जून में 19 तारीख तक भारत ने रूस से औसतन 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया, जबकि मई में यह 19.1 लाख बैरल प्रतिदिन था. इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. संयुक्त अरब अमीरात से आयात जून में 6.36 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो मई के रिकॉर्ड 6.44 लाख बैरल प्रतिदिन से थोड़ा कम है. वहीं, वेनेजुएला 2.09 लाख बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा. सऊदी अरब की आपूर्ति 3.84 लाख बैरल प्रतिदिन रही. भारत ने 60% तक घटाई अमेरिकी तेल खरीद दूसरी ओर, अमेरिका से तेल आयात घटकर केवल 91 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया, जबकि मई में यह 2.52 लाख बैरल प्रतिदिन था. रूस से रियायती दरों पर मिलने वाला तेल भारत के लिए फायदे का सौदा बना हुआ है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात से बढ़ी खरीद ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अनिश्चितता के बीच आपूर्ति संतुलित करने में मदद की. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और कच्चे तेल, एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG) के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है. अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई. होर्मुज दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल खपत के परिवहन का प्रमुख समुद्री मार्ग है और सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे खाड़ी देशों के निर्यात के लिए बेहद अहम माना जाता है. हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद पिछले सप्ताह के अंत से होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति धीरे-धीरे बहाल होने लगी है. होर्मुज के खुलने को लेकर अनिश्चितता बरकरार फिर भी, ईरान द्वारा इजरायल पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाने के बाद स्थिति को अब भी नाजुक माना जा रहा है. लेबनान पर इजरायल के ताजा हमलों के बाद ईरानी सेना ने शनिवार को फिर से होर्मुज बंद करने की घोषणा की. इस तरह यह समुद्री मार्ग जहाजों की आवाजाही के लिहाज से अब भी पूरी तरह खुल नहीं सका है. क्लेपेर में मॉडलिंग के सीनियर मैनेजर सुमित रितोलिया ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से भारत को सबसे तेज राहत एलपीजी आपूर्ति में मिलेगी, जबकि कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति सामान्य होने में अधिक समय लग सकता है. उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों के व्यवधान के दौरान भारत ने तेल और गैस आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों और अन्य समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लिया है. रितोलिया के अनुसार, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का फिर से खुलना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा मील का पत्थर होगा, लेकिन भारत पर इसका असर अलग-अलग ईंधनों पर अलग तरीके से पड़ेगा.' उन्होंने कहा कि एलपीजी सबसे ज्यादा प्रभावित ईंधन रहा, जबकि कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति अपेक्षाकृत स्थिर बनी रही. क्योंकि भारत ने रूस, ब्राजील और वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ा दिया था. भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर सुमित रितोलिया का अनुमान है कि जुलाई की शुरुआत से धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बनने पर सबसे पहले फंसे हुए कार्गो को निकाला जाएगा और शिपिंग गतिविधियां बहाल की जाएंगी. इसके बाद खाड़ी देशों का निर्यात धीरे-धीरे बढ़ेगा. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत नेचुरल गैस और लगभग 65 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है. ईरान युद्ध से पहले भारत के लगभग आधे कच्चे तेल, दो-तिहाई एलएनजी और करीब 90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति खाड़ी देशों से होती थी. हाल के दिनों में होर्मुज में भारत के लिए स्थिति सामान्य होने के संकेत भी मिले हैं. भारत के झंडे वाले तीन तेल टैंकर, जिनमें 8.6 लाख टन से अधिक कच्चा तेल था, और एक भारतीय एलएनजी जहाज ने अमेरिका-ईरान समझौते के बाद सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया है. रितोलिया ने कहा कि रूस का कच्चा तेल अब भी भारत की आयात रणनीति का प्रमुख आधार बना हुआ है. जून में रूस से आयात 23.5 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहने का अनुमान है और यह नया रिकॉर्ड बना सकता है. उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी कीमतों और आपूर्ति सुरक्षा के कारण होर्मुज सामान्य होने के बाद भी रूस भारत के लिए अहम आपूर्तिकर्ता बना रहेगा. भारत ने वेनेजुएला से भी तेल की खरीद बढ़ाई भारतीय रिफाइनरियों ने मार्च के बाद से अटलांटिक बेसिन और वेनेजुएला से भी खरीद बढ़ाई है ताकि खाड़ी क्षेत्र की सीमित आपूर्ति की भरपाई की जा सके. जून में वेनेजुएला से आयात 3 से 4 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है, हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों और उत्पादन सीमाओं के कारण दीर्घकालिक स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. सबसे बड़ा बदलाव एलपीजी क्षेत्र में देखा गया है. खाड़ी आपूर्ति बाधित होने के बाद अमेरिका भारत के लिए बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है. पिछले साल हुए दीर्घकालिक समझौते ने इसमें मदद की, हालांकि लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत बढ़ गई है. सुमित रितोलिया के अनुसार, होर्मुज सामान्य होने के बाद खाड़ी देशों की बाजार हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ेगी, लेकिन भारत की आयात रणनीति पहले की तुलना में अधिक विविध बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि होर्मुज के फिर से खुलने से माल ढुलाई लागत कम होगी, आपूर्ति जोखिम घटेंगे और वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होगा. हालांकि, शिपिंग कंपनियों, बीमा कंपनियों और व्यापारियों का भरोसा पूरी तरह लौटने में अभी कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं.

ट्रेन यात्रियों के लिए राहत, AI तकनीक से 94% सटीकता के साथ टिकट कन्फर्मेशन का अनुमान

नई दिल्ली ट्रेन से यात्रा का प्लान बनाते समय सबसे बड़ी टेंशन बर्थ कंफर्म होने की होती है। इस मामले में रेलवे से यात्रियों के लिए बड़ी राहत वाली खबर आई है। भारतीय रेलवे ने अपने आधिकारिक रेलवन एप को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से लैस कर दिया है। अब यात्रियों को वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। रेलवे के अनुसार, एप में जोड़ा गया नया एआई आधारित फीचर टिकट कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाता है और इसकी सटीकता लगभग 94 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी सरकारी रेलवे एप में यात्रियों को वेटिंग टिकट की स्थिति के बारे में एआई आधारित पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सुविधा का उद्देश्य यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद करना है। यदि किसी यात्री का टिकट वेटिंग में है, तो एप उपलब्ध आंकड़ों और पूर्व रिकॉर्ड के आधार पर यह अनुमान बताएगा कि टिकट कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। एआई मॉडल लाखों पुराने रिजर्वेशन रिकॉर्ड, टिकट कैंसिलेशन के पैटर्न, विभिन्न रूटों पर यात्रियों की मांग, मौसम, छुट्टियों और त्योहारों के दौरान होने वाली अतिरिक्त भीड़ जैसे कई कारकों का विश्लेषण करता है। इसके बाद सिस्टम संभावित परिणाम का आकलन करता है। रेलवे का दावा है कि हालिया परीक्षणों और समीक्षा में इस तकनीक ने लगभग 94 प्रतिशत तक सटीक परिणाम दिए हैं। हालांकि रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल एक पूर्वानुमान है, कोई अंतिम गारंटी नहीं। टिकट का वास्तविक कन्फर्मेशन सीटों की उपलब्धता, कैंसिलेशन और चार्ट तैयार होने तक होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा। इसलिए यात्रियों को एआई के अनुमान को केवल एक मार्गदर्शक के रूप में देखना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रेलवे सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब यात्रियों को वेटिंग टिकट के कारण होने वाली अनिश्चितता से काफी हद तक राहत मिलेगी और वे समय रहते वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था भी कर सकेंगे। उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ पीआरओ डॉ. अमित मालवीय का कहना है कि भविष्य में एआई आधारित सेवाओं का दायरा और बढ़ाया जाएगा, जिससे यात्रियों को अधिक सटीक और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जा सके। रेलवन एप में जोड़ी गई यह नई सुविधा भारतीय रेलवे के तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

चार दिवसीय धार्मिक उत्सव में तीन दिन मंदिर के कपाट रहेंगे बंद

 गुवाहाटी पूर्वी भारत के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक अंबुबाची मेला 2026 के लिए असम सरकार और कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुवाहाटी की ऐतिहासिक नीलाचल पहाड़ी पर स्थित माँ कामाख्या मंदिर में इस वर्ष देश-विदेश से 8 लाख से अधिक श्रद्धालुओं, साधु-संतों और तांत्रिक साधकों के जुटने की उम्मीद है। देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र और स्त्री शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला यह चार दिवसीय उत्सव 22 जून को 'प्रवृत्ति' के साथ शुरू होगा और 26 जून को 'निवृत्ति' के साथ समाप्त होगा। इस दौरान तीन दिनों तक मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद रहेंगे और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, स्वास्थ्य और भोजन के विशेष प्रबंध किए गए हैं असम की पर्यटन मंत्री अजंता नियोग ने मेले की व्यवस्था को लेकर कहा, "यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक अंबुबाची मेला है। भारत और विदेश से लाखों लोग यहां आते हैं। हम श्रद्धालुओं को पीने का पानी, भोजन, चिकित्सा सेवाएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर तरह से तैयार हैं। हमने निचले स्थानों पर शिविर और भोजन की व्यवस्था की है। लगभग 8 लाख लोगों के आने की उम्मीद है, इसलिए इस आयोजन का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। हम श्रद्धालुओं से अनुरोध करते हैं कि वे मेले के दौरान सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे तक कामाख्या मंदिर अवश्य आएं।" असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की मेले के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, असम सरकार ने भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा, परिवहन और आवास सुविधाओं के लिए 24 विभागों में 4.55 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। मंदिर अधिकारियों ने सभी ऑफलाइन विशेष दर्शन काउंटरों को भी बंद कर दिया है। विशेष दर्शन के इच्छुक श्रद्धालुओं को ऑनलाइन पास बुक करना होगा, जबकि सामान्य दर्शन नि:शुल्क रहेंगे। अंबुबाची मेले का महत्व मां कामाख्या मंदिर में साल में एक बार अंबुबाची मेला लगता है। । इस मेले से बहुत ही प्राचीन और गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि इस वार्षिक मेले के दौरान मां कामाख्या अपने मासिक धर्म यानी रजस्वला से गुजरती हैं। यही कारण है कि इस दौरान देवी मां को पूरा आराम दिया जाता है और मंदिर के मुख्य कपाट तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं। इन तीन दिनों में मंदिर परिसर में किसी तरह की कोई पूजा-अर्चना, आरती या अन्य कोई भी धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते। चौथे दिन, खास शुद्धिकरण अनुष्ठान करने के बादमंदिर के पट भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस साल अंबुबाची मेले की शुरुआत 22 जून 2026 से हो रही है, जो 26 जून तक चलेगा।

यूपी में नया सिस्टम: देर से रजिस्ट्रेशन पर शुल्क और SDM की अनुमति जरूरी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जन्म और मृत्यु (Birth and Death) पंजीकरण को लेकर नई नियमावली लागू हो गई है। प्रदेश सरकार ने रजिस्ट्रेशन सिस्टम को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और व्यवस्थित बनाने के लिए उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमावली-2026 लागू कर दी गई है। चिकित्सा अनुभाग-7 द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जन्म, मृत्यु अथवा मृत-जन्म की सूचना अब घटना के 21 दिन के भीतर देना अनिवार्य होगा। नई नियमावली के तहत जन्म या मृत्यु पंजीकरण के लिए 21 दिन के अंदर सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है। जन्म के लिए 21 दिन बाद लेकिन 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर 20 रुपये विलंब शुल्क देना होगा। 30 दिन से एक वर्ष तक की देरी होने पर संबंधित अधिकारी की अनुमति के साथ 50 रुपये शुल्क लगेगा, जबकि एक वर्ष से अधिक विलंब होने पर एसडीएम, जिला मजिस्ट्रेट अथवा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश पर 100 रुपये शुल्क देकर पंजीकरण कराया जा सकेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जन्म प्रमाणपत्र में किसी प्रकार के संक्षिप्त नाम स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। नई व्यवस्था में ऑनलाइन पंजीकरण, रिकॉर्ड के स्थायी संरक्षण, त्रुटि संशोधन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है। क्यों जरूरी है जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र शिशु के जन्म पर उसका पंजीकरण कराकर जन्म प्रमाण लेना और किसी व्यक्ति की मृत्यु पर उसका पंजीकरण कराकर मृत्यु प्रमाण पत्र लेना बेहद जरूरी होता है। दरअसल, ये पंजीकरण ही परिवार में किसी नए सदस्य के आगमन या किसी सदस्य के प्रस्थान की अधिकारिक सूचना होते है। ये दोनों प्रमाण पत्र बुनियादी कानूनी दस्तावेज हैं। जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) किसी व्यक्ति की पहचान, उम्र और नागरिकता पहला प्रमाण है। स्कूल में एडमिशन से लेकर नौकरी तक हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) कानूनी रूप से मृत्यु प्रमाणित करने, संपत्ति, बीमा या पेंशन आदि के दावों के लिए अनिवार्य होता है।

RBI हॉलिडे कैलेंडर: मुहर्रम और वीकेंड के चलते जून में कई दिन बंद रहेंगे बैंक

नई दिल्ली अगर अगले सप्ताह बैक से जुड़े कामकाज करने के लिए ब्रांच जाने की योजना बना रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, आज 22 जून से 28 जून 2026 के बीच चार दिन बैंक बंद रहेंगे। बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इस महीने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और धार्मिक छुट्टियों के कारण कुल 11 छुट्टियों की लिस्ट जारी की है। इसमें दूसरे शनिवार, चौथे शनिवार और सभी रविवार की छुट्टियां भी शामिल हैं। हालांकि, कुछ बैंक की छुट्टियां राज्यों या क्षेत्रों के हिसाब से अलग होती हैं लेकिन सरकारी राष्ट्रीय छुट्टियों के दिन देश भर में बैंक की शाखाएं बंद रहेंगी। अगले हफ्ते कब-कब है छुट्टियां RBI के हॉलीडे कैलेंडर के मुताबिक अगले सप्ताह 25, 26, 27 और 28 जून को बैंक बंद रहेंगे। 25 और 26 जून को मुहर्रम के कारण देश के कई इलाकों में बैंक बंद रहेंगे। 25 जून को विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 26 जून को अगरतला, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना, रायपुर, रांची और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 27 जून को पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे क्योंकि यह चौथा शनिवार है और 28 जून को रविवार है। जून 2026 का छुट्टियों का कैलेंडर 15 जून को यंग मिजो एसोसिएशन (YMA) की स्थापना के उपलक्ष्य में आइजोल में बैंक बंद रहेंगे। राजा संक्रांति के कारण भुवनेश्वर में भी इस दिन बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 25 जून को मुहर्रम के कारण विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा, 26 जून को मुहर्रम के कारण अगरतला, आइजोल, बेलापुर, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, नई दिल्ली, पटना, रायपुर, रांची और श्रीनगर में बैंक का कामकाज बंद रहेगा। वहीं, 29 जून को संत गुरु कबीर जयंती मनाने के लिए शिमला में बैंक बंद रहेंगे। इसी तरह, 30 जून को रेमना नी नामक क्षेत्रीय सार्वजनिक अवकाश के कारण आइजोल में बैंक बंद रहेंगे। शनिवार और रविवार को छुट्टियां रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, सभी शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड बैंक महीने के हर दूसरे और चौथे शनिवार और हर रविवार को अनिवार्य रूप से बंद रहते हैं। इसका मतलब है कि इन दिनों ग्राहक ब्रांच में मिलने वाली सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे। बता दें कि इस महीने में कुल चार रविवार हैं, इसलिए बैंक 7, 14, 21 और 28 जून को बंद रहेंगे। रविवार के अलावा बैंक 13 जून (दूसरा शनिवार) और 27 जून (चौथा शनिवार) को भी बंद रहेंगे।

बड़े भवनों में सोलर पैनल और ईवी चार्जिंग अनिवार्य, राजस्थान सरकार का नया ग्रीन नियम

जयपुर राजस्थान में भवन निर्माण सेक्टर में ऊर्जा दक्षता (एनर्जी एफिशिएंसी) और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जाएगा. मॉल, होटल, कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स हो या मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, इन्हें ऊर्जा बचाने वाले और पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा. राजस्थान सरकार ने एनर्जी कंजर्वेशन और सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड-2026 लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है. इसके लागू होने के बाद बिजली बचाने, सोलर एनर्जी अपनाने और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी. यही नहीं, इन नियमों का पालन करने के बाद भवन में अतिरिक्त निर्माण की अनुमति भी मिल जाएगी.    योजना के बारे में समझिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम योजना पर काम कर रहा है. ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने इसे अंतिम रूप देने के निर्देश दिए है. इसके तहत छत का आधा हिस्सा सोलर प्लांट के लिए रखना होगा. बड़े भवनों में ईवी चार्जिंग स्टेशन और अलग पार्किंग अनिवार्य होगा. साथ ही उल्लंघन करने पर भवन मालिकों को जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.   इन कर्मशियल बिल्डिंग पर लागू होगा नियम ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने समीक्षा बैठक में बताया कि यह कोड मुख्य रूप से उन व्यावसायिक भवनों पर लागू होगा, जिनका बिल्ड अप एरिया 2000 वर्ग मीटर या कनेक्टेड लोड 100 किलोवाट या उससे अधिक हो. कनेक्टेड डिमांड 120 केवीए या उससे अधिक हो. पहली बार मिलेगी ऐसी छूट पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए नियमों में पहली बार विशेष वित्तीय व तकनीकी लाभ प्रस्तावित किए गए हैंय कोड के प्लस मानकों का पालन करने वाले भवनों को 5 प्रतिशत और सुपर बिल्डिंग कोड मानकों को पूरा करने वाले भवनों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिल्ट एरिया रेश्यो दिए जाने का प्रावधान है. इसे और अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाने के लिए बहुमूल्य सुझाव भी मांगे गए हैं.

INS दूनागिरी, INS अग्रय और INS संशोधक की एंट्री से भारत की रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा

नई दिल्ली  पाकिस्तानी नौसेना समंदर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए चीन से हंगोर क्लास की पनडुब्बी लेकर आई है। ऐसे में भारत ने भी पनडुब्बियों को डुबो देने वाले तीन घातक स्वदेशी युद्धपोत नीले समंदर में उतार दिए हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में तीन नए युद्धपोतों INS दुनागिरि, INS अग्रय और INS संशोधक को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने दुश्मनों को स्पष्ट संकेत दिया कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य जरूरी है और भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा, 'भारत ने हमेशा से समुद्र को सहयोग का माध्यम माना है। लेकिन भारत ये भी जानता है कि शांति की रक्षा के लिए सामर्थ्य आवश्यक है। समृद्धि की रक्षा के लिए सुरक्षा आवश्यक है। भविष्य के निर्माण के लिए आत्मनिर्भरता अनिवार्य है। आज INS अग्रय, INS दूनागिरी और INS संशोधक इसी भावना के प्रतीक बनकर भारतीय नौसेना में शामिल हुए हैं।' समंदर में ताकत बढ़ा रही भारतीय नौसेना कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में आयोजित एक खास समारोह में इन तीनों वॉरशिप को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इनमें एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह और तीसरा सर्वे वेसेल लार्ज संशोधक है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब एक ही दिन में तीन वॉरशिप नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नीलगिरी क्लास का पहला स्टेल्थ फ्रिगेट INS नीलगिरी, डिस्ट्रॉयर INS सूरत और पनडुब्बी INS वागशीर भारतीय नौसेना में शामिल किए गए थे। नेवी को मिला P17A क्लास का पांचवा वॉरिशप इसी साल 30 मार्च को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित पांचवां गाइडेड स्टेल्थ फ्रिगेट दूनागिरी भारतीय नौसेना को सौंपा था। दूनागिरी, पूर्ववर्ती INS दूनागिरी का आधुनिक स्वरूप है, जो लींडर क्लास का फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना का हिस्सा रहा। यह 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया पी17ए श्रेणी का पांचवां वॉरशिप है। पहले चार जहाजों के निर्माण से मिले अनुभव के आधार पर इसका निर्माण समय 93 महीनों से घटाकर 80 महीने कर दिया गया। INS दूनागिरी की खासियत     INS दूनागिरी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली लगी है, जो एंटी-शिप और एंटी-सर्फेस युद्ध में बेहद प्रभावी मानी जाती है।     यह वॉरशिप बराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल आधुनिक एयर डिफेंस गन स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम मल्टी-फंक्शन रडार जैसी अत्याधुनिक सिस्टम से लेस हैं।     यह फ्रिगेट दुश्मन के हमलों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है।     INS दूनागिरी लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं और इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।     6,700 टन वजनी यह युद्धपोत 30 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है। INS अग्रेह की खासियत     दुश्मन की सबमरीन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी। साल 2019 में 16 वॉरशिप के निर्माण का कांट्रेक्ट दिया गया था, जिनमें आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं। इसी परियोजना के तहत निर्मित अग्रेह को भी नौसेना में शामिल किया गया है। इससे पहले आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस अंजदीप को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।     INS अग्रेह की खासियत है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है।     यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तकरीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है।     तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है। INS संशोधक की खासियत     संशोधक की खासियत है कि यह समुद्र तल की स्कैनिंग करना, सुरक्षित नेविगेशन रूट के लिए समुद्री चार्ट तैयार करने के साथ-साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे करना है।     जीआरएसई, कोलकाता में निर्मित इस जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।     इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के नेवल डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।     110 मीटर लंबा और लगभग 3,800 टन वजनी यह जहाज दो डीजल इंजनों से संचालित होता है।     यह 25 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहने में सक्षम है और इसकी अधिकतम रफ़्तार 18 नॉट है।     भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद संशोधक देश की समुद्री सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र के मैप और सुरक्षित नेविगेशन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नेतन्याहू सरकार की छवि पर उठे सवाल, जनता में बढ़ा असंतोष

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच भले ही समझौता हो गया है, लेकिन अभी भी मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है। इजरायल लेबनान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इस बीच एक चौंकाने वाले सर्वे रिपोर्ट सामने आया है। सर्वेक्षण के अनुसार, इजरायली जनता ने साफ संकेत दिया है कि हालिया पश्चिम एशिया संघर्ष और अमेरिका-ईरान समझौते के बाद ईरान मजबूत होकर उभरा है, जबकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार की छवि बुरी तरह धूमिल हुई है। हिब्रू विश्वविद्यालय और अगम संस्थान के सहयोग से 17 से 20 जून के बीच कराए गए सर्वेक्षण में 3,644 लोगों ने भाग लिया। न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, सर्वे में शामिल 92.1 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ईरान ने संघर्ष जीत लिया या इजरायल की तुलना में उसे ज्यादा फायदा हुआ। 82.9 प्रतिशत इजरायलियों ने कहा कि इस युद्ध और उसके परिणामों से इजरायल की दीर्घकालिक सुरक्षा कमजोर हुई है। खास बात यह है कि यह धारणा केवल विपक्षी समर्थकों तक सीमित नहीं है। नेतन्याहू के दक्षिणपंथी राजनीतिक आधार वाले मतदाताओं में भी 93.1 प्रतिशत ने ईरान को मजबूत बताते हुए इसे इजरायल की हार माना। अमेरिका-ईरान समझौते का भारी विरोध इतना ही नहीं, सर्वेक्षण में अमेरिका-ईरान समझौते को इजरायलियों का भारी बहुमत विरोध करता दिखा। 63.2 प्रतिशत लोगों ने समझौते का विरोध किया, जबकि केवल 12.1 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया। नेतन्याहू सरकार की छवि पर सबसे गंभीर प्रहार यह रहा कि 72.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने प्रधानमंत्री के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की सफलता वाले दावों पर भरोसा नहीं जताया। 56.4 प्रतिशत लोगों ने युद्ध प्रबंधन को 'विफल' या 'खराब' करार दिया। स्विट्जरलैंड में फिर शुरू हुई अमेरिका-ईरान वार्ता यह सर्वेक्षण ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी और ईरानी अधिकारी रविवार को स्विट्जरलैंड में दीर्घकालिक समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। अस्थायी समझौते को स्थायी बनाने के लिए हो रही इन वार्ताओं में तेहरान का परमाणु कार्यक्रम, तेल निर्यात और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे हैं। ये वार्ताएं लेबनान में जारी तनाव के बीच हो रही हैं। दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों और हिजबुल्लाह के बीच झड़पों के बाद शुक्रवार को घोषित युद्धविराम का दोनों पक्ष उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में स्थायी युद्धविराम वार्ता की सफलता के लिए जरूरी है, जबकि अमेरिका अगले 60 दिनों में व्यापक समझौते की उम्मीद जता रहा है।

भारत में बुलेट ट्रेन का विस्तार, 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी

 नई दिल्ली देश को अगले साल के मध्य में पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस बुलेट ट्रेन के लिए काम कई सालों से जारी है। इस बीच, देश के सात नए बुलेट ट्रेन हाई स्पीड कॉरिडोर को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत, दिल्ली से वाराणसी एक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनेगा, जिसमें बुलेट ट्रेन महज दो घंटे में ही दिल्ली से लखनऊ पहुंचा देगी। वहीं, दिल्ली से वाराणसी के लिए महज तीन घंटे 15 मिनट का ही समय लेगा। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और यह हवा से बातें करेगी। मुंबई से अहमदाबाद ( एक घंटे 57 मिनट), मुंबई से पुणे (48 मिनट), बेंगलुरु से चेन्नई (73 मिनट्स), बेंगलुरु से हैदराबाद (2 घंटे 10 मिनट), पुणे से हैदराबाद (2 घंटे 8 मिनट), दिल्ली से लखनऊ (2 घंटे), दिल्ली से वाराणसी (3 घंटे 15 मिनट), दिल्ली से सिलिगुड़ी (6 घंटे) का समय लेगा। इन सात रूट्स पर हाई स्पीड बुलेट ट्रेन चलेगी। दिल्ली से वाराणसी तक लगभग 812 किलोमीटर लंबा रूट होगा। इस पर हाईस्पीड बुलेट ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जबकि संचालन की स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्ण्व ने कहा, ''पीएम मोदी ने सात नए कॉरिडोर का फैसला लिया है। इसके तहत मुंबई से पुणे 170 किलोमीटर के कॉरिडोर पर सफर सिर्फ 48 मिनट में पूरा होगा। अच्छा इकनॉमिक कॉरिडोर बन जाएगा। पुणे से हैदराबाद जोकि 500 किलोमीटर है लगभग, दो घंटे 8 मिनट में पूरा हो जाएगा। महाराष्ट्र में दो लाख करोड़ का निवेश हो रहा है।'' वहीं, लखनऊ से अयोध्या हाईस्पीड रूट की लंबाई 124 किलोमीटर होगी। दिल्ली से वाराणसी रूट पर चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए राज्य में कई शहरों में स्टेशन रखे गए हैं, ताकि आसपास के रहने वाले लोगों को फायदा मिल सके। दिल्ली, नोएडा, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी में स्टेशन का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि, आखिरी फैसला बाद में लिया जाएगा। जापान की मदद से बन रही बुलेट ट्रेन बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है। 508 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने रखी थी। यह परियोजना जापान की शिंकान्सेन तकनीक और आर्थिक मदद से बनाई जा रही है। शुरुआत में इसे 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन महाराष्ट्र में भूमि अधिग्रहण और अन्य मंजूरियों में देरी की वजह से इसमें तय समय से ज्यादा लग गया। वर्तमान में निर्माण तेजी से चल रहा है और अधिकांश भूमि अधिग्रहण तथा वैधानिक मंजूरियां पूरी हो चुकी हैं। अगले साल अगस्त में शुरू हो सकती है बुलेट ट्रेन रेल मंत्रालय के अनुसार, गुजरात में कई हिस्सों पर ट्रैक, स्टेशन और वायाडक्ट का काम तेजी से चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि भारत को 15 अगस्त 2027 को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है। पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक होगा, उसके बाद वापी से सूरत तक का सेक्शन होगा। वहीं, मुंबई तक पूरी लाइन 2028-29 तक चालू किए जाने की संभावना है। पूरी तरह शुरू होने पर मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब 2 से 3 घंटे रह जाएगा, जो अभी 6-7 घंटे से अधिक है।

डीएमसी मॉल में आम प्रदर्शनी, लोगों ने खरीदा नहीं सिर्फ फोटो खींचे

धनबाद  धनबाद के डीएमसी माल में आमोत्सव लगा हुआ है। बहुत अधिक नहीं लेकिन 10 स्टाल लगे थे। इन्हीं में एक स्टाल पर बोर्ड टंगा था इसे छुना मना है। बोर्ड देख लोग आते, कीमत पूछते और फिर आम को उठाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ते तभी एक भारी आवाज आती। इसे मत छुओ यह मियांजाकी है। कीमत तीन लाख रुपये प्रति किलो। यानी एक आम की कीमत भी 1200 से 1500 रुपये। धनबाद में पहली बार आमोत्सव का आयोजन हुआ और उसमें भी मियांजाकी, खरीदने की हिम्मत किसी में नहीं थी, लेकिन देखने और उसकी तस्वीर लेने का तांता लगा हुआ था। मियांजाकी का यह क्रेज यहां देखने को मिला। जापान का यह आम धनबाद के लिए बहुत खास बना हुआ है। मां धरती फाउंडेशन की ओर से इसकी खेती धनबाद में की जा रही है। फाउंडेशन की ओर से इसे पहली बार धनबाद के बाजार में उतारा गया है। जेएसएलपीएस की ओर से आयोजित किया गया आमोत्सव धनबाद में ग्रामीण विकास शाखा और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड सोसाइटी की ओर से पहली बार आयोजित किए गए आमोत्सव में जिले के ग्रामीण इलाकों से आए किसानों ने अपने आमों को यहां प्रदर्शित किया और उसकी बिक्री भी की। आमोत्सव का उद्घाटन उपायुक्त आदित्य रंजन, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार और उपविकास आयुक्त सन्नी राज ने संयुक्त रूप से किया। उपायुक्त रंजन ने बताया कि इस आयोजन का मकसद धनबाद के आम की बागवानी से जुड़े किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि धनबाद में अभी बहुत अधिक मात्रा में आम की पैदावार नहीं हो रही है, लेकिन योजना है कि मनरेगा के तहत पांच एकड़ में आम के पौधे लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि धनबाद के आम को अन्य प्रदेशों में भी भेजने की योजना है। इसके अलावा धनबाद के बाजारों को सुदृढ़ भी किया जाएगा। टुंडी में आम्रपाली की खेती टुंडी के मछियारी पंचायत से आई अनीता मरांडी ने बताया कि इस बार आम्रपाली आम बहुत अच्छे हुए हैं। सबसे अधिक भीड़ भी उनके ही स्टाल पर रही। उन्होंने बताया कि टुंडी में आम की सामूहिक खेती की गई है। इस बार बरसात में और अधिक पौधे लगाने की योजना है। उन्होंने बताया कि जो पैदावार हो रही है, उसकी खपत धनबाद में ही है।