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भाजपा का बूथ स्तर पर बड़ा अभियान, MP में ‘बूथ गौरव दिवस’ के तहत होंगे विशेष कार्यक्रम

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में एक बड़ा अभियान शुरू का फैसला किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार आगामी 23 जून से 6 जुलाई तक पूरे देश सहित मध्य प्रदेश में 'डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्मरण पक्ष' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश भाजपा इस पखवाड़े को जमीनी स्तर पर 'बूथ गौरव दिवस' और विशेष वैचारिक व्याख्यानों के रूप में मनाने जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर गठित केंद्रीय संचालन टोली में मध्य प्रदेश के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह को शामिल किया है, जो राज्य में इन सभी कार्यक्रमों की सीधी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। धारा 370 की समाप्ति और 'राष्ट्र प्रथम' पर केंद्रित विशेष व्याख्यान इस पखवाड़े का सबसे मुख्य वैचारिक केंद्र धारा 370 की समाप्ति रहेगा। व्याख्यानों और सम्मेलनों के माध्यम से कार्यकर्ताओं और जनता को बताया जाएगा कि कैसे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाकर डॉ. मुखर्जी के अखंड भारत के सपने को साकार किया गया है। इन विशेष व्याख्यानों के जरिए यह संदेश घर-घर पहुँचाया जाएगा कि 'राष्ट्र प्रथम' अब केवल एक भावना नहीं, बल्कि देश की जीवनधारा बन चुका है। तीन प्रमुख विषयों पर जिला कार्यकर्ता सम्मेलन राज्य के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर जिला कार्यकर्ता सम्मेलनों की रूपरेखा तैयार की गई है। इन सम्मेलनों में तीन अलग-अलग प्रबुद्ध वक्ताओं द्वारा डॉ. मुखर्जी के सामाजिक एवं राजनीतिक योगदान, एक केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी कार्यशैली और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उनके ऐतिहासिक योगदान पर केंद्रित विशेष व्याख्यान दिए जाएंगे। युवा मोर्चा के नेतृत्व में 'बाहरी परिसर' छात्र सम्मेलन प्रदेश के सभी प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों के बाहर युवा पीढ़ी और छात्रों को इस विचारधारा से जोड़ने के लिए छात्र सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार यह सभी कार्यक्रम शैक्षणिक परिसरों की सीमा से बाहर (आउटसाइड कैंपस) आयोजित होंगे, जिसकी पूरी कमान और नेतृत्व भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिम्मे सौंपा गया है। शहरों में नामकरण, प्रतिमा अनावरण और महा-वृक्षारोपण अभियान इस पखवाड़े के दौरान मध्य प्रदेश के प्रत्येक नगर और शहर में किसी प्रमुख चौराहे, उद्यान अथवा मार्ग का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जाएगा और उनकी प्रतिमा या चित्र का अनावरण भी होगा। इसके साथ ही, चूंकि राज्य में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ प्रत्येक बूथ पर प्रभावी रूप से व्यापक वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जाएगा।

भोपाल मंडल के 15 स्टेशनों की बदलेगी तस्वीर, यात्रियों को मिलेंगे सिनेमाघर और गेमिंग जोन

भोपाल  यदि आप एक व्यापारी हैं, स्टार्टअप चलाते हैं या निवेश के लिए किसी बड़े और गारंटीड फुटफॉल (ग्राहकों की भारी मौजूदगी) वाले स्थान की तलाश में हैं, तो भारतीय रेलवे आपके लिए एक बेहतरीन मौका लेकर आया है। पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने 'अमृत भारत स्टेशन योजना' के तहत पुनर्विकसित हो रहे 15 रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध वाणिज्यिक स्थानों (कमर्शियल स्पेस) के उपयोग के लिए बिज़नेस प्रपोजल मांगे हैं। यानी अब रेलवे स्टेशन सिर्फ ट्रेनों के आने-जाने का जरिया नहीं, बल्कि शहर के बड़े आर्थिक और व्यापारिक केंद्र (सिटी सेंटर) बनने जा रहे हैं। ड्राइव-इन सिनेमा से लेकर गेमिंग जोन तक रेल प्रशासन पारंपरिक दुकानों के ढर्रे से अलग हटकर ऐसे आधुनिक और यात्री-केंद्रित व्यावसायिक प्रस्तावों को बढ़ावा दे रहा है, जो स्टेशन परिसर को हाई-टेक लुक दे सकें। उद्यमी नीचे दी गई श्रेणियों या किसी अन्य नए आइडिया पर अपने प्रस्ताव दे सकते हैं। मनोरंजन और गैजेट्स: ड्राइव-इन सिनेमा, गेमिंग जोन, बाल मनोरंजन केंद्र और डिजिटल एक्सपीरियंस सेंटर। सुविधाएं और आतिथ्य: आधुनिक प्रतीक्षालय/लाउंज, पर्यटन एवं आतिथ्य सेवाएं और मल्टीफंक्शनल कॉम्प्लेक्स। बैंकिंग और टेक: डिजिटल बैंकिंग यूनिट, ई-लॉबी और हाई-टेक एटीएम। भोपाल मंडल के ये 15 स्टेशन बनेंगे 'बिजनेस हब' अमृत भारत योजना के तहत जहां नर्मदापुरम और शाजापुर स्टेशनों का पुनर्विकास पूरा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण कर चुके हैं, वहीं 13 अन्य स्टेशनों पर काम तेजी से जारी है। इनमें शामिल हैं। हरदा, खिरकिया, बनापुरा, इटारसी, साँची, विदिशा, गंजबासौदा, अशोकनगर, गुना, रुठियाई, शिवपुरी, ब्यावरा-राजगढ़ और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) स्टेशन पर बिजनेस सेंटर विकसित किए जाएंगे। टेंडर और ई-नीलामी से अलॉट होगी जगह, ऐसे करें शुरुआत पारदर्शी प्रक्रिया : इच्छुक कारोबारी संबंधित स्टेशन के मंडल वाणिज्य निरीक्षक से सीधे संपर्क कर सकते हैं। वे वहां उपलब्ध खाली स्थानों का निरीक्षण और सर्वेक्षण कर अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं। ऐसे होगा चयन : प्राप्त सभी प्रस्तावों का रेलवे बोर्ड की नीतियों के अनुसार परीक्षण किया जाएगा। जो प्रस्ताव व्यवहार्य पाए जाएंगे, उन्हें ई-नीलामी या टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।     अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत स्टेशन केवल यात्री सुविधाओं के केंद्र ही नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश एवं आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे। रेलवे पारंपरिक व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ नवाचारी व्यावसायिक अवधारणाओं का स्वागत ही नहीं बल्कि बढ़ावा दे रहा है जिससे शहर के विकास में रेलवे और अधिक योगदान दे सके। – सौरभ कटारिया, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, भोपाल मंडल  

LPG यूजर्स अलर्ट! इंडेन, HP और भारत गैस ने जारी की चेतावनी, 30 जून से पहले करें यह काम

नई दिल्ली सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि 30 जून 2026 के बाद इंडेन, भारत गैस और HP गैस के एलपीजी कनेक्शन काट दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने ऐसी कोई लास्ट डेट घोषित नहीं की है, लेकिन जिन इलाकों में PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां एलपीजी से PNG में शिफ्ट होने का दबाव जरूर बढ़ गया है। क्या है नया LPG-PNG नियम? केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत जहां PNG नेटवर्क उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे PNG अपनाने के लिए कहा गया है। साथ ही "नो ड्यूल कनेक्शन पॉलिसी" लागू की गई है। इसका मतलब है कि अगर किसी उपभोक्ता के घर में PNG कनेक्शन सक्रिय है, तो वह नया LPG कनेक्शन नहीं ले सकता और कई मामलों में LPG कनेक्शन सरेंडर करना पड़ सकता है। क्या 30 जून डेड लाइन है? मार्च 2026 के आदेश में PNG अपनाने के लिए 90 दिन का समय दिया गया था, जो जून के अंत में पूरा हो रहा है। हालांकि, अभी तक पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह नहीं कहा है कि 30 जून के बाद सभी LPG कनेक्शन स्वतः बंद कर दिए जाएंगे। यानी 30 जून को देशभर में LPG कनेक्शन काटे जाने की खबर पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन जिन क्षेत्रों में PNG उपलब्ध है, वहां भविष्य में LPG सप्लाई पर प्रतिबंध या सीमाएं लगाई जा सकती हैं। 10 लाख से ज्या परिवारों ने छोड़ा LPG पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार मार्च 2026 से अब तक 10.02 लाख PNG कनेक्शन एक्टिव किए गए और 3.22 लाख अतिरिक्त कनेक्शनों का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हुआ। इस दौरान लगभग 9.94 लाख नए उपभोक्ताओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इतना ही नहीं, करीब 1 लाख परिवार LPG छोड़कर PNG अपना चुके हैं। सरकार PNG को क्यों बढ़ावा दे रही है? सरकार का मानना है कि PNG लगातार गैस सप्लाई देता है और सिलेंडर बुकिंग की जरूरत नहीं होती। यह सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर है साथ ही डिलीवरी और परिवहन लागत कम करता है। HPCL और Indian Oil की सलाह HPCL ने उपभोक्ताओं से कहा है कि PNG "सुविधाजनक और निर्बाध" ऊर्जा समाधान है। वहीं इंडियन ऑयल ने भी पेट्रोलियम मंत्रालय के संदेश को साझा करते हुए PNG को क्लीन और ग्रीन फ्यूल बताया है। उपभोक्ताओं को क्या करना चाहिए? अगर आपके क्षेत्र में PNG सुविधा उपलब्ध है स्थानीय गैस डिस्ट्रिब्यूटर कंपनी से संपर्क करें और PNG कनेक्शन के लिए आवेदन करें। LPG और PNG दोनों कनेक्शन एक साथ रखने के नियमों की जानकारी लें। किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और आधिकारिक सूचना का इंतजार करें। क्या अभी LPG सिलेंडर बंद हो जाएंगे? नहीं। फिलहाल इंडेन, भारत गैस और HP गैस के घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति जारी है। सरकार ने सिर्फ PNG को बढ़ावा देने और दोहरे कनेक्शन को रोकने की नीति अपनाई है। किसी भी बड़े कदम से पहले आमतौर पर अलग से आधिकारिक सूचना जारी की जाएगी।

IPL में ट्रेड का धमाका! हार्दिक पांड्या के RR जाने की चर्चा, MI को मिल सकता है नया कप्तान

मुंबई  इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें संस्करण को खत्म हुए अभी एक महीना भी नहीं हुआ है कि आगामी संस्करण से पहले होने वाले ट्रेड की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कुछ दिन पहले सामने आया था कि दिल्ली कैपिटल्स ऋषभ पंत को वापस अपनी टीम में चाहती है, जो 27 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक वैल्यू के साथ LSG में गए थे. अब हार्दिक पांड्या को लेकर खबर आई है कि उनका और मुंबई इंडियंस का साथ छूट सकता है. MI और RR के बीच ट्रेड की चर्चा अभी शुरूआती दौर में है।  2015 में अपने पहले IPL संस्करण से लेकर 2021 तक हार्दिक पांड्या मुंबई इंडियंस के लिए खेले थे, लेकिन 2022 में गुजरात जायंट्स में कप्तान के रूप में शामिल हुए. GT को पहले ही साल अपनी कप्तानी में खिताब जिताने के बाद अगले साल (2023) उन्होंने टीम को फाइनल तक पहुंचाया. लेकिन 2024 में उनकी MI में वापसी हुई, टीम ने रोहित शर्मा को हटाकर हार्दिक को कप्तान बनाया लेकिन यहां वह सफल नहीं रहे. 2024 में MI अंक तालिका में सबसे नीचे पायदान पर रही, 2025 में टीम प्लेऑफ तक पहुंची और 2026 में टीम 9वें नंबर पर रही।  यशस्वी को लेना चाहती है मुंबई इंडियंस रिपोर्ट के अनुसार ट्रेड के जरिए मुंबई इंडियंस यशस्वी जायसवाल को अपनी टीम में चाहती है, इसके लिए वह अपने कप्तान को राजस्थान में जाने देगी. ये बातचीत अभी शुरूआती दौर में हैं. MI में रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग जोड़ी को लेकर पिछले सीजन काफी दिक्कतें हुई थी, अगर जायसवाल आते हैं तो ये अच्छी जोड़ी बन सकती है क्योंकि दोनों इंटरनेशनल में भी साथ में ओपन कर चुके हैं. सिर्फ हार्दिक नहीं, एक और बड़ा खिलाड़ी है जो मुंबई से अलग हो सकता है।  सूर्यकुमार हो सकते हैं बाहर, ये खिलाड़ी बन सकता है कप्तान BCCI ने सूर्यकुमार यादव को टी20 की कप्तानी से हटा दिया है, यहां तक की उनकी टी20 टीम में जगह भी नहीं बन रही. संभव है कि IPL 2027 में वह मुंबई इंडियंस में भी न दिखे. पिछले संस्करण उन्होंने 13 पारियों में 270 रन ही बनाए. हालांकि कई अन्य टीमें उन्हें खरीदकर कप्तान बनाने पर विचार कर सकती है।  मुंबई इंडियंस नए कप्तान के रूप में तिलक वर्मा को चुन सकती है, जो हाल ही में BCCI द्वारा नेशनल टी20 टीम के उपकप्तान चुने गए हैं. इन सभी पर फैसला MI की रिव्यू मीटिंग में होगा, जो अगले हफ्ते होगी।   

Heatwave के बीच बारिश का कहर, 7 राज्यों में अगले एक हफ्ते तक भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी

नई दिल्ली उत्तर भारत के कई राज्यों में भीषण गर्मी जारी है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले चार से पांच दिनों तक विदर्भ, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश और अगले दो दिनों तक छत्तीसगढ़ में हीटवेव चलने की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, अगले 48 घंटे के दौरान दक्षिण पश्चिम मॉनसून के महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा के बाकी हिससों, छत्तीसगढ़, झारखंड व बिहार के कुछ इलाकों में पहुंचने के लिए स्थितियां अनुकूल हैं। इसके अलावा, इस हफ्ते पूर्वोत्तर भारत, उप हिमलयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश होने वाली है। आज 22 जून को मेघालय में कहीं-कहीं से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन सात राज्यों में अगले सात दिनों तक बहुत भारी बारिश पूर्वोत्तर भारत में अगले सात दिनों तक बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग के अनुसार, 22-28 जून के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बहुत भारी बारिश होगी। इसमें से 22-26 जून के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में आंधी तूफान और बिजली गिरने की भी चेतावनी है। 23-28 जून के दौरान अरुणाचल प्रदेश, 22-24 जून और 24-28 जून के दौरान असम, मेघालय में, 22-23 जून और 26-28 जून के दौरान नगालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा में कहीं-कहीं भारी बारिश होगी। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल में भी बारिश बरसात दक्षिण भारत की बात करें तो तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल में 22-28 जून के दौरान, उत्तरी कर्नाटक में 22-25 जून के दौरान, दक्षिणी कर्नाटक में 23-24 जून के दौरान, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम में 22-24 जून और 28 जून को रायलसीमा में 22-25 जून और 28 जून को कहीं-कहीं या छिटपुट बारिश होने वाली है। तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप और तेलंगाना में 22-28 जून के दौरान, उत्तरी अंदरूनी कर्नाटक में 26-28 जून, दक्षिणी कर्नाटक में 22 जून, 25-28 जून के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश, यनम में 25-27 जून के दौरान रायसीमा में 26-27 जून के दौरान बहुत भारी बरसात होगी। जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश में बारिश का अलर्ट वहीं, पूर्वी भारत की बात करें तो 22-28 जून के दौरान अंडमान-निकोबार द्वीप, पश्चिम बंगाल, सिक्किम में, 22-23 जून और 26-28 जून के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, 28 जून को बिहार में, 22-23 जून के दौरान ओडिशा में काफी ज्यादा व्यापक बारिश होगी। 24-25 जून के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, 22-28 जून के दौरान झारखंड, 22-27 जून के दौरान बिहार, 24-28 जून के दौरान ओडिशा में कहीं कहीं बारिश होगी। वहीं, उत्तर भारत की बात करें तो 22 जून को जम्मू कश्मीर, लद्दाख में काफी ज्यादा व्यापक बारिश होगी। 23-28 जून के दौरान जम्मू कश्मीर, लद्दाख, 22-28 जून के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में कहीं कहीं छिटपुट बारिश होगी। 22-26 जून के दौरान जममू कश्मीर, 22-25 जून के दौरान उत्तराखंड में कहीं-कहीं तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने वाली हैं। साथ ही, 22-26 जून के दौरान हिमाचल प्रदेश में तेज हवाएं चलने वाली हैं। 22-26 जून के दौरान हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब में, 24 जून को पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी राजस्थान में कहीं-कहीं आंधी तूफान, बिजली गिरने और तेज आंधी चलने की संभावना है। साथ ही, 25-28 जून के दौरान पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी राजस्थान में तेज हवाएं चलने वाली हैं। 22 जून को हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, लद्दाख में कहीं-कहीं ओले गिरेंगे।

रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू का डंका विदेशों तक, GI टैग मिलने से बढ़ा सम्मान

रतलाम   मध्य प्रदेश को देश विदेश में पहचान दिलाने वाली रतलाम की बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को जीआई टैग मिल गया है. इससे पहले रतलाम की सेव और रियावन सिल्वर लहसुन को भी जीआई टैग मिला था. रतलाम मध्य प्रदेश का ऐसा पहला जिला है जहां की चार-चार यूनिक प्रोडक्ट को जीआई टैग मिला है. GI टैग मिलने से रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी के उत्पादक किसानों को फायदा मिलेगा और मांग बढ़ने से इनके बेहतर दाम भी किसानों को मिल सकेंगे।  भारत सरकार से मिला GI टैग, किसानों को फायदा उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक मंगल सिंह डुडवे ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, '' सैलाना क्षेत्र में उगाई जाने वाली बालम ककड़ी और रतलाम जिले के बांगरोद के गराडू को भारत सरकार से जीआई टैग मिल गया है. वर्तमान में रतलाम जिले में बालम ककड़ी लगभग 100 हेक्टेयर और गराडू लगभग 120 हेक्टेयर में बोए जा रहे हैं. इन फसलों के उत्पादन से जिले के बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं. अब इन्हें रतलाम के नाम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल सकेगी. दोनों फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को फायदा मिलेगा और जिले के अन्य किसान भी इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे।  क्यों खास है रतलाम की बालम ककड़ी? सैलाना क्षेत्र के आदिवासी अंचल में उगाई जाने वाली एक खास किस्म की ककड़ी जिसे बालम ककड़ी के नाम से जाना जाता है. अपने खास स्वाद और भीतर से निकलने वाले केसरिया और हरे रंग के लिए प्रसिद्ध है. वैसे तो ककड़ी को सलाद के रूप में उपयोग किया जाता है लेकिन इस बालम ककड़ी को लोग नाश्ते के तौर पर खाने में उपयोग करते हैं. बालम ककड़ी के खास स्वाद का आनंद बारिश के मौसम में केवल एक महीने के लिए ही लेने को मिलता है. अगस्त से सितंबर महीने के बीच बालम ककड़ी की बहार आती है।  रतलाम के नाम से जाना जाएगा मालवी गराडू रतलाम के बांदगरोद, खेतलपुर, सेजावता और धमोतर क्षेत्र में उगाया जाने वाला यह खास किस्म का कंदमूल फ्राई करके स्नैक्स के रूप में उपयोग किया जाता है. गराडू अपने बेहतरीन स्वाद, अंदर से मुलायम व बाहर से कुरकुरा होने की वजह से लोगों को खूब पसंद आता है. ठंड के मौसम में आने वाले इस फल के स्वाद का आनंद लेने के लिए देश के बड़े शहरों सहित दुबई तक से आर्डर आते हैं. गराडू विटामिन मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है. वैसे तो मालवा के अन्य जिलों में भी गराडू की खेती की जाती है लेकिन रतलाम के आसपास के गांव में उत्पादित किए जाने वाले गराडू की साइज और क्वालिटी अच्छी होती है इसलिए रतलाम के गराडू की मांग अधिक बनी रहती है।  क्या होता है जीआई टैग? जीआई टैग (GI Tag) यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग. जैसा की नाम से समझ आता है यहा किसी उत्पाद का 'भौगोलिक संकेतक' होता है. यह टैग प्रमाणित करता है कि वह उत्पाद उसी स्थान से आया है, जिसका दावा किया जा रह है.जीआई टैग आमतौर पर उत्पादके विशिष्ट भौगोलिक मूल स्थान, पारंपरिक गुणवत्ता और ख्याति के आधार पर दिया जाता है।  रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी को जीआई टैग दिलवाने के प्रयास मध्य प्रदेश शासन के एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने शुरू किए थे. इसके बाद अब रतलाम जिले के पास चार-चार यूनिक प्रोडक्ट के जीआई टैग मौजूद है। 

मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में छाई ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’, 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री को मिली सराहना

अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव मुंबई में प्रदर्शित हुई 64 योगिनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित डॉक्यूमेंट्री का अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के बीच 64 कैनवास से 15,000 किलोमीटर की आध्यात्मिक यात्रा से सिनेमा तक का सफर भोपाल 19वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 मुंबई में कलाकार एवं साधक डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की 64 योगिनी प्रदेश के मितावली स्थित मंदिर पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Y64 – व्हिस्पर्स ऑफ द अनसीन’ का प्रदर्शन हुआ। संस्कृति विभाग एवं काली ट्रस्ट के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों के लिए पहली बार प्रदर्शित की गई। मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (Mumbai International Film Festival – MIFF) दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा फिल्म समारोह है। यह विशेष रूप से वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों को समर्पित है। इस अवसर पर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अतिरिक्त सचिव प्रभात ने डॉ. बीना उन्नीकृष्णन एवं उनकी टीम को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार दीपक नारायण, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर सुदीप्ति चावला, डॉ. बीना उन्नीकृष्णन, सिनेमैटोग्राफर प्रदीप सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति रही। हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं 64 योगिनी मंदिर: अपर मुख्य सचिव शुक्ला मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा सामान्य प्रशासन शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश के मितावली (मुरैना), जबलपुर और खजुराहो के 64 योगिनी मंदिर हमारी पुरातन स्थापत्य कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मितावली का 64 योगिनी मंदिर, जिसने भारत की पुरानी संसद भवन की वास्तुकला को प्रेरित किया, यह आज यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूचि में भी शामिल है। ‘Y64 – Whispers of the Unseen’ जैसी परियोजना इस अद्वितीय विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचा रही है। डॉ. बीना उन्नीकृष्णन की कलात्मक यात्रा के माध्यम से यह फिल्म युवाओं को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए सृजनशीलता, साहस, आत्म-अन्वेषण और स्त्री शक्ति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों से परिचित कराती है। 64 योगिनियों ने मुझे इस कार्य के लिए चुना, यह मेरा सौभाग्य : डॉ. बीना उन्नीकृष्णन डॉ. बीना उन्नीकृष्णन ने बताया कि लगभग साढ़े बारह वर्ष पूर्व उन्होंने 64 योगिनियों के चित्रांकन की प्रक्रिया को केवल एक दस्तावेज़ के रूप में संजोने की शुरुआत की थी, लेकिन समय के साथ यह प्रयास समर्पण, धैर्य और आत्म-परिवर्तन की प्रेरणादायक सिनेमाई यात्रा बन गया। इस वर्ष उन्होंने 64 मूल चित्रों के साथ भारत के 14 शहरों में लगभग 15,000 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर हजारों लोगों को योगिनी परंपरा से परिचित कराया तथा कला, संस्कृति और अध्यात्म पर व्यापक संवाद स्थापित किया। उन्होंने कहा “जब मैंने यह यात्रा शुरू की थी, तब मैं केवल उत्तर खोजती एक कलाकार थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह एक पुस्तक, प्रदर्शनी, हजारों किलोमीटर की यात्रा और अंततः एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का रूप ले लेगी। योगिनियों ने मुझे भय से परे जाना और अपने स्त्रीत्व तथा अदृश्य मार्ग पर विश्वास करना सिखाया। मैं हमेशा कहती हूँ कि मैंने योगिनियों को नहीं चुना, बल्कि योगिनियों ने मुझे चुना है। उन्होंने बताया कि यह डॉक्यूमेंट्री केवल योगिनी मंदिरों के इतिहास और रहस्य को नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आह्वान को पूरा करने के लिए आवश्यक साहस और समर्पण की कहानी भी प्रस्तुत करती है। इस उपलब्धि के लिए उन्होंने मध्यप्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। विरासत और संस्कृति का अद्भुत संगम है फिल्म 64 योगिनि मंदिरों से प्रेरित यह अनूठी फिल्म, संस्कृति, अध्यात्म और विरासत का अद्भुत संगम है। कंकाली ट्रस्ट और मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से निर्मित यह डॉक्यूमेंट्री भारत के योगिनी मंदिरों से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उत्सव भी है। यह डॉक्यूमेंट्री दर्शकों को ऐसे संसार में ले जाती है, जहाँ कला, आस्था, इतिहास और आत्म-परिवर्तन एक-दूसरे से जुड़कर एक अद्वितीय अनुभव का निर्माण करते हैं। 

मोहन कैबिनेट में नए चेहरे, पुराने मंत्रियों पर संकट! 3 सीनियर मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने जा रही इस नई कैबिनेट में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 23 से 30 जून के बीच यह विस्तार हो सकता है। इस बड़े फेरबदल में बेहतर परफॉर्मेंस न देने वाले 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है, जबकि 7 से 8 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट की संख्या 31 है, जबकि 4 पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट के कुछ बेहद सीनियर मंत्री मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी वरिष्ठता के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन की कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।  इसके अलावा, सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले जनजातीय कल्याण मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकार को फटकार लगा चुका है। विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी पर भी गाज गिर सकती है। इन नए चेहरों की हो सकती है एंट्री नए चेहरों की बात करें तो सागर से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी कैबिनेट में वापसी की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार केवल मंत्रियों के चेहरे ही नहीं बदलेंगे, बल्कि लगभग सभी मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया जाएगा। सीएम बोले- परफॉर्मेंस बनेगा आधार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य आधार मंत्रियों का कामकाज रहेगा। अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मंत्रियों व विधायकों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होती है, जिसमें शीर्ष नेतृत्व के सुझाव भी शामिल रहते हैं। बीजेपी के सामने प्रमुख राजनीतिक समीकरण जानकारों के अनुसार इस फेरबदल के जरिए बीजेपी कई राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण साधना चाहती है।     बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ाना: क्षेत्र की सीमित हिस्सेदारी से उपजी नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ से नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है।     महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना: महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए रीती पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को अवसर मिल सकता है।     ओबीसी समीकरण और 2028 की तैयारी: आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।     निकाय चुनाव की तैयारी: अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए संगठन सीटों की स्थिति, प्रत्याशी चयन, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति पर फीडबैक जुटा रहा है।     सिंधिया खेमे और मूल संगठन में संतुलन: मौजूदा कैबिनेट में सिंधिया समर्थक नेताओं की मजबूत मौजूदगी है। फेरबदल में पार्टी को यह प्रभाव बनाए रखते हुए संगठन के पुराने नेताओं को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देना होगा। इन मंत्रियों पर हटने का खतरा समीक्षा रिपोर्ट और विवादों के आधार पर कुछ मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:     विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के बाद वे आलोचनाओं के केंद्र में रहे। मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां और संगठन की नाराजगी भी सामने आई। पूर्व में भी उनके कुछ बयान पार्टी के लिए असहजता का कारण बने थे।     दिलीप अहिरवार: पहली बार विधायक बने अहिरवार को कैबिनेट में जगह मिली थी। हालांकि हालिया समीक्षा में उनके कामकाज को अपेक्षित स्तर का नहीं माना गया, जिससे उनकी स्थिति कमजोर बताई जा रही है।     प्रतिमा बागरी: उनका नाम जाति प्रमाण पत्र संबंधी विवाद में चर्चा में रहा है, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जांच समिति से रिपोर्ट मांगी है। उनके भाई की गिरफ्तारी का मामला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना।     राधा सिंह: पहली बार विधायक बनीं राधा सिंह के विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। इसके बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।     एदल सिंह कंषाना : रेत खनन और माफिया को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। उनके स्टाफ के सदस्य तबादलों के एवज में रिश्वत मांगते के खुफिया कैमरे में कैद हुए। इन मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव     प्रहलाद पटेल: उन्हें संगठन या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। राज्य मंत्रिमंडल में बने रहने पर उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त विभाग भी दिए जा सकते हैं।     कैलाश विजयवर्गीय: विभागों में बदलाव संभव है, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका और जिम्मेदारियां क्या होंगी इसे लेकर अभी संशय की स्थिति है।     तुलसीराम सिलावट: विभागीय पुनर्संतुलन के तहत उनके विभाग में बदलाव की संभावना बताई जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार एन के सिंह कहते हैं कि एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव देश के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में हैं, जिन्होंने सपने में भी मुख्यमंत्री बनने की कल्पना नहीं की थी। पार्टी ने उन्हें तीसरी या चौथी पंक्ति से उठाकर इतने बड़े पद पर बैठाया है। उनके साथ प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज नेता काम कर रहे हैं, जो अनुभव और कद में उनसे कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में इन नेताओं का असहज होना लाजमी है। यह उस समय का पॉलिटकल कंपल्शन या मजबूरी थी। यह चल रहा था और आगे भी चल सकता है। नए चेहरों की एंट्री: कौन हैं दावेदार? संभावित नए चेहरों में सागर के प्रदीप लारिया प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी चर्चा में है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम … Read more

सरकार का बड़ा फैसला: 48 लाख लोगों की होगी मुफ्त रजिस्ट्री, कपास पर मंडी शुल्क घटा और सामान्य शुल्क बढ़ा

भोपाल  स्वामित्व योजना में 48 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त में रजिस्ट्री कराने राज्य सरकार ने पंचायत उपकर और पंजीयन शुल्क माफ करने का अध्यादेश जारी कर दिया है। इसके लिए विधानसभा में दोनों ही विभागों से संबंधित मामलों में विधेयक भी सरकार मानसून सत्र के दौरान ला सकती है। इसके साथ ही 9 जून को कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले के आधार पर कपास पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से घटाकर 0.50 प्रतिशत करने और मंडी में लगने वाले सामान्य शुल्क को एक से 1.50 प्रतिशत करने का नोटिफिकेशन भी सरकार ने जारी कर दिया है। मोहन यादव सरकार ने 2 जून को हुई कैबिनेट बैठक में 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के अंतर्गत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है। इससे सरकार पर 3800 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आने वाला है। अलग-अलग विभाग न जारी किए नोटिफिकेशन इस निर्णय पर अमल के लिए राज्य सरकार के पंजीयन और पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने अलग-अलग अध्यादेश के नोटिफिकशन जारी कर दिए हैं। पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत उपकर के रूप में ली जाने वाली राशि ऐसे मामलों में माफ किए जाने और पंजीयन विभाग ने पंजीयन व मुद्रांक शुल्क माफ किए जाने का नोटिफिकेशन किया है। नौ जून को हुई कैबिनेट में तय किया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस की कमी पूरी करने एवं पंजीयन की कार्यवाही होगी। इसके बाद नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे। आयुक्त भू संसाधन की कमेटी पूरी कराएगी प्रोसेस योजना के क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना का परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है। कपास पर ली जाने वाली मंडी फीस कम करने के आदेश 9 जून को मोहन कैबिनेट ने कपास पर ली जाने मंडी फीस को 1% से घटाकर 0.5% करने का निर्णय लिया था। इसके बाद किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। इसमें कहा गया है कि कपास की कीमत के हर 100 रुपए पर मंडी फीस 0.50 रुपए यानी 50 पैसे होगी। सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय जिनिंग मिलों को मजबूती मिलेगी और रोजगार बढ़ेगा। प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग मिलें है, जिनकी प्रोसेसिंग कैपिसिटी लगभग 13 लाख मीट्रिक टन है। महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में रुकेगा पलायन प्रदेश में कपास पर मंडी फीस की दर में कमी किए जाने से जिनिंग मिलों का महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में पलायन रुकेगा। इन्हें प्रदेश में ही व्यवसाय करने को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे रोजगार में तथा जीएसटी संग्रहण में वृद्धि होगी। जिनिंग मिलों की इनपुट लागत में कमी आएगी और उनकी आर्थिक व्यवहारिता में वृद्धि होगी। महाराष्ट्र सरकार पहले ही 0.5 प्रतिशत फीस ले रही है जिसके चलते एमपी का जिनिंग मिल कारोबार प्रभावित हो रहा था। नोटिफाइड उपज के हर 100 रुपए पर डेढ़ रुपए लगेगा मंडी शुल्क इसके साथ ही कृषि उपज मंडियों में लगने वाले सामान्य मंडी शुल्क को एक रुपए से बढ़ाकर एक रुपए 50 पैसे किया गया है। इससे 500 करोड़ रुपये की आय होगी। 9 जून को हुए कैबिनेट के फैसले के बाद किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अधिसूचित कृषि उपज की कीमत के हर 100 रुपए पर मंडी टैक्स 1 रुपए के स्थान पर 1.50 रुपए वसूला जाएगा। इस राशि से जिलों में कोल्डस्टोरेज, वेयरहाउस प्रोसेस्ड यूनिट्स एवं लॉजिस्टिक सुविधाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। इस शुल्क राशि में से 50 पैसे व्यापार विकास निधि के अंश के रूप में किसानों के कल्याण में उपयोग किया जायेगा। इसमें निराश्रित शुल्क को यथावत् 20 पैसे रखा जाएगा। बाकी आय का उपयोग किसान सड़क निधि एवं कृषि अनुसंधान तथा अधोसंरचना विकास में किया जाएगा।

महिलाओं के खाते में 4500 रुपये ट्रांसफर! भगवंत मान सरकार ने किया बड़ा ऐलान, जानें किसे मिलेगा लाभ

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रदेश की महिलाओं के लिए एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने ऐलान करते हुए कहा कि 'मावां-धीयां सत्कार योजना' के तहत महिलाओं के खातों में एक साथ तीन महीने की सत्कार राशि एक जुलाई को पहुंच जाएगी. योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं के खातों में एडवांस राशि के साथ अप्रैल से देय बकाया रकम सीधे ट्रांसफर की जाएगी।   इस योजना के तहत अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए 4,500 रुपये और सामान्य श्रेणी की महिलाओं के लिए 3,000 रुपये की पहली किस्त (तीन महीने की आर्थिक सहायता के बराबर) एक जुलाई को उनके बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी।  किन महिलाओं को कितना मिलेगा लाभ? राज्य सरकार की इस योजना के तहत सामान्य श्रेणी की महिलाओं को मासिक 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये मिलेंगे.  दरअसल, मान ने रविवार को प्रदेश के चनार्थल कलां गांव में 'लोक मिलनी' (जन-संवाद) कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित किया और इसी दौरान योजना के तहत राशि देने का ऐलान किया.  उन्होंने कहा, 'एक जुलाई को महिला लाभार्थियों को उनके मोबाइल फोन पर सूचनाएं प्राप्त होंगी, जिनमें उनके खातों में जमा की जा रही आर्थिक सहायता के बारे में जानकारी दी जाएगी।  महिलाएं सम्मान की हकदार मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वित्तीय सहायता शायद महिलाओं को अमीर न बनाए, लेकिन यह निश्चित रूप से उन्हें सम्मान, स्वाभिमान और आत्म-विश्वास देगी। महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं क्योंकि वे स्वयं जीवन की स्रोत हैं। माताओं-बहनों के आशीर्वाद दुनिया की हर चुनौती को पार करने में मदद करते हैं। घरेलू दर्जे को सुधारने, लिंग समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक तथा आर्थिक फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत करना बहुत जरूरी है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो परिवार खुशहाल होते हैं और समाज आगे बढ़ता है। एसआईआर पर भी दी प्रतिक्रिया एक अन्य मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि भारत चुनाव आयोग द्वारा चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पंजाब सरकार किसी भी असली वोट को काटने नहीं देगी। मैं लोगों को सचेत करना चाहता हूं कि भाजपा वैध वोटों को काटने के लिए एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकती है, जैसा कि चुनाव वाले अन्य राज्यों में हुआ है। हालांकि, हम पूरी तरह से सतर्क हैं और भगवा पार्टी के नापाक इरादों को सफल नहीं होने देंगे। पंजाब के हर असली मतदाता की रक्षा की जाएगी। राहुल महाजन तीन महीने की राशि एक साथ खाते में बता दें कि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 'मावां-धीयां सत्कार योजना' की घोषणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान की थी. इस योजना के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 9300 करोड़ रुपये का आवंटित किया है. प्रदेश सरकार का दावा है कि इस योजना का लाभ राज्य की करीब 97 फीसदी वयस्क महिलाओं को मिलेगा. इस योजना को सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से लागू कर दिया था, इसलिए अप्रैल, मई और जून की बकाया राशि भी लाभार्थियों के खाते में जमा की जाएगी।    फतेहगढ़ साहिब में 'लोक मिलनी' को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "नौ दिन बाद पहली जुलाई को 18 साल से अधिक उम्र की महिला लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर उनके खातों में वित्तीय सहायता जमा होने के नोटिफिकेशन प्राप्त होंगे। जनरल श्रेणी से संबंधित महिलाओं को ₹1,000 प्रति माह, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह मिलेंगे। यह पैसा बिना किसी मध्यस्थ के सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। जो महिलाएं पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रही हैं, वे भी इस योजना के पात्र होंगी। पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस पहल का लाभ मिलने की उम्मीद है और पंजाब सरकार ने इसके लिए ₹9,300 करोड़ का बजट प्रावधान किया है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "यह वित्तीय सहायता शायद महिलाओं को अमीर न बनाए, लेकिन यह निश्चित रूप से उन्हें सम्मान, स्वाभिमान और आत्म-विश्वास देगी। महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं क्योंकि वे स्वयं जीवन की स्रोत हैं। माताओं-बहनों के आशीर्वाद दुनिया की हर चुनौती को पार करने में मदद करते हैं। घरेलू दर्जे को सुधारने, लिंग समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक तथा आर्थिक फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत करना बहुत जरूरी है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो परिवार खुशहाल होते हैं और समाज आगे बढ़ता है।" एक अन्य मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "भारत चुनाव आयोग द्वारा चल रही एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान पंजाब सरकार किसी भी असली वोट को काटने नहीं देगी। मैं लोगों को सचेत करना चाहता हूं कि भाजपा वैध वोटों को काटने के लिए एस.आई.आर. प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकती है, जैसा कि चुनाव वाले अन्य राज्यों में हुआ है। हालांकि, हम पूरी तरह से सतर्क हैं और भगवा पार्टी के नापाक इरादों को सफल नहीं होने देंगे। पंजाब के हर असली मतदाता की रक्षा की जाएगी।" मुख्यमंत्री ने कहा, "मुझसे पहले के मुख्यमंत्री कभी भी आम लोगों से नहीं मिले। वे तापमान चेक करने के बाद ही अपने आलीशान घरों से बाहर आते थे। दूसरी तरफ मैं 24 घंटे लोगों के लिए मौजूद रहता हूं। जनता की सेवा मेरे लिए कोई कभी-कभी की जाने वाली गतिविधि नहीं है, यह मेरी जिम्मेदारी है।" पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "इन नेताओं ने अपने सरकारी पदों का दुरुपयोग करके अथाह संपत्ति इकट्ठी की और बड़े-बड़े महल बनाए। उनकी आलीशान रिहायशों की दीवारें ऊंची थीं और उनके दरवाजे आम लोगों के लिए बंद रहते थे। वे जनता की पहुंच से दूर रहे और आखिरकार लोगों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। जब नेता लोगों की बात सुनना बंद कर देते हैं तो लोग भी आखिरकार उन नेताओं को सुनना बंद कर देते हैं।" "पंजाब के लोगों ने उन लोगों को बार-बार नकारा है, जिन्होंने उन्हें बारी-बारी से लूटा। इन नेताओं ने आम लोगों को लंबे समय तक मूर्ख बनाया, लेकिन पंजाबी … Read more