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रेस्टोरेंट ने जबरन जोड़ा सर्विस चार्ज, हाईकोर्ट के वकील ने लड़ी लड़ाई; मिला ₹5,000 मुआवजा

 चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने अवैध तरीके से सर्विस चार्ज वसूलने पर एक रेस्टोरेंट को सेवा में लापरवाही का दोषी ठहराया है। जीरकपुर निवासी और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील राहुल गोयल की शिकायत पर उपभोक्ता आयोग ने बठिंडा स्थित कैपर रूफटाप बिस्ट्रो रेस्टोरेंट को पांच हजार रुपये हर्जाना भरने के निर्देश दिए हैं। रेस्टोरेंट ने एडवोकेट गोयल के बिल में उनकी मर्जी के बिना 129 रुपये सर्विस चार्ज लगा दिया था। ऐसे में उन्होंने रेस्टोरेंट के खिलाफ चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया। गोयल ने शिकायत में बताया कि पांच अक्टूबर 2025 को वह इस रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे। जब उन्होंने बिल देखा तो पता चला कि उसमें 129 रुपये सर्विस चार्ज जोड़े गए थे। शिकायतकर्ता का कहना था कि उन्हें पहले इस बारे में जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी की ओर से 2022 में जारी की गई सिफारिशों के मुताबिक कोई भी रेस्टोरेंट ग्राहक से अपनी मर्जी मुताबिक सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकते हैं और न ही इसे बिल में जोड़ा जा सकता है। सर्विस चार्ज पूरी तरह से स्वैच्छिक होते हैं। वहीं, रेस्टोरेंट की ओर से आयोग के समक्ष कोई पेश नहीं हुआ। ऐसे में आयोग ने एकतरफा सुनवाई करते हुए ग्राहक के हक में फैसला सुनाया। गोयल ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को वस्तु या सेवा की निर्धारित कीमत से अधिक राशि चुकाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

प्रधानों की नियुक्ति बनाम अदालत का सवाल: पंचायत व्यवस्था पर असमंजस गहराया

जौनपुर ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकार के निर्णय पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद की शुक्रवार को आई सख्त टिप्पणी के बाद प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों की धड़कन बढ़ गई हैं। अदालत ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए सरकार से चुनाव की स्पष्ट समय सीमा पूछे जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने यह निर्णय पर्याप्त कानूनी और संवैधानिक विचार-विमर्श के बाद लिया था। यदि सरकार का फैसला न्यायिक कसौटी पर नहीं टिक पाया तो पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों, नई योजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक निर्णयों पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर भी असमंजस की स्थिति है। अब सबकी नजर 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। बहरहाल इस मुद्दे पर जब प्रधानों से उनकी राय ली गई तो अलग-अलग मत सामने आए।     सरकार का निर्णय बिल्कुल ठीक था। प्रशासन को प्रशासक बनाए जाने के बाद उनकी जिम्मेदारी जनता के प्रति नहीं होती। हमारी समझ से जब तक सरकार पूरी चुनावी तैयारी नहीं कर लेती है, चुनाव का कोई औचित्य नहीं है। -विजय सिंह, प्रधान गैरवाह।     यह सरकार और कोर्ट के बीच गतिरोध में प्रधान व आम जनता परेशान है। अब इसे सरकार की तय करे कि उसे करना क्या है। हम चुनाव के लिए तब भी तैयार थे और अब भी हैं। -राम प्रकाश दुबे, अध्यक्ष प्रधान संघ, सुइथाकलां।     सरकार के समक्ष व्यावहारिक कठिनाई थी जिसके चलते यह निर्णय लेना पड़ा। सरकार ने जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाया। अब कोर्ट के निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है। -बलराम बिंद, प्रधान, ईशापुर।     पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय न होने से सरकार को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा, जो जनता के हित मे था। अब कोर्ट का क्या रुख है और उस पर सरकार क्या निर्णय लेती है इसे देखना होगा। -राम सकल वर्मा, प्रधान, सारी जहांगीर पट्टी।     सरकार का निर्णय आम जनता के हित में था। विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो इसलिए सरकार द्वारा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया गया, रही बात कोर्ट की तो उसका जवाब सरकार ही दे सकती है। -राजन यादव, प्रधान, समसुद्दीनपुर।  

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा घटनाक्रम, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि

 अयोध्या उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रभु श्री राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद ने अब तक का सबसे बड़ा रूप ले लिया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास (ट्रस्ट) के महामंत्री चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. पिछले कई दिनों से चल रही सियासी और धार्मिक बयानबाजी के बीच, ट्रस्ट ने खुद आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इन दोनों बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफे प्राप्त होने की पुष्टि की है।  आगामी बैठक में होगा इस्तीफे पर अंतिम फैसला ट्रस्ट की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर परिसर में सुनी जा रही अप्रिय और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से पूरा न्यास स्तब्ध, आहत और अत्यंत दुखी है. समस्त रामभक्तों और रामसेवकों के प्रतिनिधि के रूप में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. न्यास ने स्पष्ट किया है कि महामंत्री चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्र से त्यागपत्र प्राप्त हो चुका है, जिस पर न्यास अपनी आगामी बैठक में विचार कर अंतिम निर्णय लेगा।  चांदी की ईंटें और आभूषण सुरक्षित अफवाहों पर विराम लगाते हुए और देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए ट्रस्ट ने कहा कि जिन भक्तों ने प्रभु श्री राम की सेवा में चांदी की ईंटें, सोने के आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तुएं न्यास के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से सौंपी थीं, वे सभी वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका एक-एक पैसे का पूरा हिसाब उपलब्ध है।  दानपात्र चोरी मामले में FIR दर्ज वहीं, मंदिर के दानपात्रों से राशि गायब होने की घटना को लेकर ट्रस्ट ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के विशेष जांच दल (SIT) से एक अंतरिम प्रतिवेदन (प्रारंभिक रिपोर्ट) प्राप्त हुई है. इस रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट के निवेदन पर पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक FIR दर्ज कर ली गई है और दोषियों के खिलाफ वैधानिक व कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी है।  भ्रामक अफवाहों से बचने की अपील प्रेस विज्ञप्ति के अंत में ट्रस्ट ने बेहद कड़े शब्दों में कहा है कि कुछ असामाजिक, अधार्मिक और स्वार्थी तत्व इस पूरे विवाद की आड़ में सनातन धर्म पर लांछन लगाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।  ट्रस्ट ने सभी रामभक्तों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर प्रसारित की जा रही भ्रामक और निराधार अफवाहों से स्वयं बचें और समाज के अन्य लोगों को भी इसका शिकार होने से बचाएं. ट्रस्ट को पूरा विश्वास है कि विवाद के ये बादल जल्द छटेंगे और सत्य का प्रकाश सबके सामने आएगा। 

PM मोदी का सेशल्स दौरा शुरू, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने गर्मजोशी से किया स्वागत

विक्टोरिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय यात्रा पर सेशेल्स पहुंच चुके हैं। एयरपोर्ट पर सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ पैट्रिक हर्मिनी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका स्वागत किया। अपने स्वागत से गदगद पीएम मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति का आभार भी जताया। पीएम मोदी ने कहा कि सेशेल्स हिंद महासागर में हमारा एक अहम समुद्री साझेदार और करीबी दोस्त है। मैं इस यात्रा को लेकर उत्साहित हूं, जिसका मकसद हमारे पुराने रिश्तों को और मजबूत करना और दोनों देशों के लोगों के फायदे के लिए सहयोग बढ़ाना है। वह सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर वहां की राजकीय यात्रा कर रहे हैं। एयरपोर्ट पर भारतीय समुदाय के लोगों ने भी उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान कच्छ के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ सेशेल्स नेशनल बोटैनिकल गार्डन पहुंचे, जहां उन्होंने पौधा लगाया और वहां मौजूद सेशेल्स के मूल निवासी एल्डाब्रा जाइंट कछुओं को खाना खिलाया। मोदी 29 जून को सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। यह समारोह देश की आजादी के 50 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय संबंधोंपर चर्चा करेंगे। इसके अलावा वह सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को संबोधित करेंगे और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। सेशेल्स में पीएम मोदी का कार्यक्रम पीएम मोदी अपनी यात्रा के दौरान सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लेंगे और संबंधों को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री ने यात्रा पर रवाना होने से पहले एक बयान में कहा कि सेशेल्स भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और ‘विजन महासागर’ तथा ‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति भारत की साझा प्रतिबद्धता का प्रमुख साझेदार है। उन्होंने कहा कि वह दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से होने वाली द्विपक्षीय वार्ता को लेकर उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि हम मिलकर अपने-अपने लोगों की प्रगति को आगे बढ़ाने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेंगे। मैं सेशेल्स जा रहा हूं, जहां मैं उनके राष्ट्रीय दिवस समारोह में हिस्सा लूंगा। इस साल यह और भी खास है क्योंकि यह स्वर्ण जयंती समारोह है। इस वर्ष भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ भी है। दोनों देशों के संबंध पारस्परिक विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे आत्मीय संबंधों पर आधारित हैं। भारतीय युद्धपोत और सैनिक भी सेशेल्स पहुंचे सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले 2015 में सेशेल्स की यात्रा की थी। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे और ऐसा करने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर दोनों देशों को जोड़ने वाले मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं का प्रतीक है। सेशेल्स कहां स्थित है? सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में स्थित और लगभग 455 वर्ग किलोमीटर में फैले 115 द्वीपों का एक द्वीपीय देश है। यह मेडागास्कर के उत्तर-पूर्व और मुख्य भूमि अफ्रीका (केन्या) से लगभग 1,600 किलोमीटर पूर्व में स्थित है यह अपनी प्राचीन सफेद रेत वाले समुद्र तटों, मूंगा चट्टानों और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए मशहूर है। सेशेल्स में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक यहां के समुद्र तटों और प्रकृति को देखने आते हैं। सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया है, जो माहे द्वीप पर स्थित है। भारत-सेशेल्स संबंध भारत और सेशेल्स के बीच साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक तथा लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर आधारित लंबे समय से घनिष्ठ साझेदारी रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी के रूप में सेशेल्स का भारत के ‘विजन महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र प्रगति) तथा ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में विशेष स्थान है। भारत और सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती (पायरेसी) की रोकथाम, गश्त और समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों के रक्षा बल आपस में घनिष्ठ सहयोग करते हैं। भारत ने सेशेल्स के कोस्ट गार्ड को कई नौसैनिक जहाज और डोर्नियर विमान सौंपे हैं। भारत के लिए सेशेल्स का महत्व सेशेल्स हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा करने और हिंद महासागर क्षेत्र में 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देने के लिए भारत का एक प्रमुख समुद्री और रक्षा साझेदार है। भारत और सेशेल्स समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और आतंकवाद को रोकने के लिए लगातार एक साथ काम कर रहे हैं। सेशेल्स का एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) बहुत बड़ा है, जो समुद्री संसाधनों, तेल और गैस की खोज और बेहतर आर्थिक उपयोग के लिए भारत के लिए महत्वपूर्ण है। सेशेल्स की लगभग 11% आबादी भारतीय मूल की है, जो आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं। सेशेल्स के कछुए लंबी उम्र के लिए मशहूर दुनिया में कछुओं की 360 से ज्यादा प्रजातियां हैं। इनमें से सेशेल्स में पाया जाने वाला अल्डाब्रा जायंट कछुआ सबसे प्रसिद्ध प्रजातियों में से एक है। यह प्रजाति अपनी बेहद लंबी उम्र (औसत उम्र 150 साल) के लिए जानी जाती है। दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर जोनाथन भी इसी प्रजाति का कछुआ है। जोनाथन की उम्र करीब 194 साल मानी जाती है। उसका जन्म लगभग 1832 में हुआ था। वह 1882 में करीब 50 साल की उम्र में सेशेल्स से सेंट हेलेना भेज दिया गया था। वैज्ञानिक उसकी लंबी उम्र का राज जानने के लिए उसके डीएनए का अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि उसकी कोशिकाएं इंसानों की कोशिकाओं की तरह तेजी से बदलाव नहीं करतीं। इससे उम्र बढ़ने और लंबी जिंदगी से जुड़े नए रहस्यों का पता चल सकता है। कछुओं के ज्यादा जीने के पीछे 2 मुख्य कारण 1. धीमी रफ्तार: … Read more

नव्य, दिव्य और भव्य होगा सिंहस्थ 2028′, CM डॉ. मोहन यादव बोले- तैयारियां तेज़ी से जारी

नव्य, दिव्य और भव्य सिंहस्थ के लिए तेजी से चल रही हमारी तैयारी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ही हमारा संकल्प करीब 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे, हर दिन करीब 4 करोड़ श्रद्धालु कर सकेंगे अमृत स्नान शिप्रा नदी पर हो रहा 853.46 करोड़ रूपए से 22 नए पुलों का निर्माण सिंहस्थ हमारी आस्था का महासंगम, उज्जैन और करीबी जिलों में चल रहे हैं 25 हजार करोड़ के विकास कार्य अधोसंरचना विकास कार्यों पर केंद्रित लघु फिल्म का हुआ प्रदर्शन उज्जैन में सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प पर हुई वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हर 12 साल में होने वाला सिंहस्थ भारत का ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह हमारी अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, दर्शन, पीढ़ियों से चली आ रही विरासत, अटूट आस्था और हमारी आध्यात्मिक परम्पराओं का महासंगम है। इस धार्मिक उत्सव में मां शिप्रा के जल में स्नान करने से पापों का शमन होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिंहस्थ : 2028 को नव्य प्रारूप में भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इसके लिए हमारी सभी तरह के प्रबंधन एवं तैयारियां तेजी से जारी हैं। हम सब मिलकर पूरी निष्ठा, लगन और समर्पण से काम करेंगे, तभी सिंहस्थ : 2028 एक नई मिसाल कायम करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को उज्जैन में 'सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प' विषय पर हुई एक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत् शुभारंभ किया। कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ : 2028 के महाआयोजन से जुड़े सभी प्रशासनिक, पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम और अन्य निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों एवं अन्य जनों से कहा कि सिंहस्थ केवल एक मेला नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बिन्दु है। यह हमारी परम्पराओं, विरासत का भव्य प्रतीक है। इसकी गरिमा बनाए रखने हम सभी की जिम्मेदारी है। इसीलिए अधिकारी-कर्मचारी-स्वयंसेवी संगठन-जनप्रतिनिधि सभी लोग एक टीम की तरह सेवा भावना से कार्य करें, क्योंकि टीम वर्क ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ही हमारा संकल्प है। सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और त्वरित राहत व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन और इसके आस-पास के सभी जिलों में वर्तमान में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक की लागत के विभिन्न श्रेणी के कई विकास कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों के पूरा होने पर उज्जयिनी सम्राट विक्रमादित्य के काल का वैभव पुन: प्राप्त कर धार्मिक, आध्यात्मिक और आर्थिक समृद्धि का एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के दौरान करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का उज्जैन आने का अनुमान है। शिप्रा के नवीन घाटों और मौजूदा घाटों पर 24 घंटे में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकेंगे। सभी श्रद्धालु मां शिप्रा के जल से ही स्नान कर सकें, इसके लिए हमारी सरकार हर तरह के प्रबंध कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत बदल रहा है। देशभर में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली है। विरासत से विकास का अनुष्ठान चल रहा है। हमारी धार्मिक और ऐतिहासिक नगरियां देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को लालायित कर रही हैं। उज्जैन काल और महाकाल की नगरी है। सौभाग्यशाली लोगों को ही उज्जैन आने का अवसर मिलता है। सिंहस्थ 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए उज्जैन में दूरगामी दृष्टि के साथ अधोसंरचना विकास के कार्य जारी हैं। यहां किए जा रहे कार्य परमात्मा के आशीर्वाद से हो रहे हैं। सिंहस्थ के सफल आयोजन के लिए हर बार पिछली चुनौतियों को लेकर मंथन हुआ है। यह कार्यशाला भी इसी उद्देश्य के लिए आयोजित की गई है। सिंहस्थ : 2028 के लिए समितियों का होगा गठन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 1980 के सिंहस्थ में उन्होंने स्वयं भी स्काउट एंड गाइड वॉलेंटियर के रूप में श्रद्धालुओं की सेवा की थी। वर्ष 1992 में सिंहस्थ समिति की बैठकों में शामिल होने का अवसर भी मिला। सिंहस्थ समितियों में हर वर्ग के अनुभवी लोगों को शामिल कर उनके सुझाव लिए जाते हैं। आगामी सिंहस्थ के लिए सभी समितियों का गठन होना है। उन्होंने कहा कि यह हम सभी का सिंहस्थ है। पहले के सिंहस्थ में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था कराने की चुनौती थी। लेकिन वर्ष 2022 के बाद उज्जैन शहर में होटल निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और अधोसंरचना विकास के अनेक कार्य शुरू हुए। श्रद्धालुओं के सुविधाजनक आवागमन के लिए अब कोई सड़क ऐसी नहीं बच रही है, जिसे चौड़ा न किया गया हो। शिप्रा नदी पर घाटों का निर्माण कार्य जारी है। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल परियोजना शिप्रा में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार ने देवस्थानों पर सुविधाएं विकसित करने का काम कर रही है। शिप्रा में पक्के घाटों के निर्माण से मिट्टी का कटाव थमेगा, साथ ही नदी की धारा अविरल और एक जैसी बनी रहेगी। विकसित की जा रही है बेहतर रोड कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन आने-जाने के लिए आसपास के सभी शहरों तक बेहतर रोड कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है। पड़ोसी राज्यों से भी चर्चा कर श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे। दूसरी ओर रेलवे लाइन के विकास कार्य भी आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब फतेहाबाद का ट्रैक चालू हो गया है और नागदा जाने के लिए रेलगाड़ियों को अब उज्जैन आने की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री और केन्द्रीय रेल मंत्री ने उज्जैन में एक नए रेलवे स्टेशन की सौगात दी है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के जरिए पिछले सिंहस्थ आयोजनों में उज्जैन में सेवाएं दे चुके सभी अनुभवी अधिकारियों और नागरिकों से जो भी सुझाव मिलेंगे, हम उन सुझावों पर बेहतर अमल कर सिंहस्थ : 2028 का सफल आयोजन सुनिश्चित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में सिंहस्थ 2028 को लेकर की जा रही तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ में देश विदेश से आने … Read more

छत्तीसगढ़ में खुल सकेंगी माइक्रो ब्रुअरी, ₹10 लाख लाइसेंस फीस; जानें क्या हैं नए नियम

रायपुर  छत्तीसगढ़ में अब स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर का दौर शुरू होने जा रहा है। राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी (Micro Brewery) स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद राज्य में पहली बार निवेशकों को माइक्रो ब्रुअरी संचालित करने के लिए लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से पर्यटन, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई गति मिलेगी, निजी निवेश आकर्षित होगा और आबकारी विभाग के राजस्व में भी वृद्धि होगी।छत्तीसगढ़ में बीयर पसंद करने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब राज्य में अलग-अलग फ्लेवर वाली फ्रेश (क्राफ्ट) बीयर का स्वाद मिल सकेगा। राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा। रेस्तरां में बनेगी फ्रेश बीयर : नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी ऐसे रेस्तरां या होटल परिसर में स्थापित की जा सकेगी, जहां सीमित मात्रा में बीयर तैयार कर उसी स्थान पर ग्राहकों को परोसी जाएगी। यहां तैयार होने वाली बीयर को क्राफ्ट बीयर कहा जाता है, जो अपने ताजे स्वाद, गुणवत्ता और विभिन्न फ्लेवर के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय मानी जाती है। अभी तक छत्तीसगढ़ में इस तरह की व्यवस्था नहीं थी और उपभोक्ताओं को केवल बड़े ब्रांडों की औद्योगिक स्तर पर बनी बीयर ही उपलब्ध होती थी। सरकार का कहना है कि इससे लोगों को नया विकल्प मिलेगा और होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सरकार की आय भी बढ़ेगी। माइक्रो ब्रुअरी में सीमित मात्रा में ताजा बीयर तैयार की जाती है और उसे उसी परिसर में मौजूद रेस्तरां या ग्राहकों को परोसा जाता है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी पहले से चल रही हैं। खासकर बेंगलुरु को देश की 'क्राफ्ट बीयर कैपिटल' माना जाता है। अब छत्तीसगढ़ भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है। लाइसेंस के लिए 10 लाख फीस होगी। 4 हजार वर्गफीट परिसर जरूरी होगा। छोटे बैच में होगी तैयार : माइक्रो ब्रुअरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बीयर छोटे-छोटे बैच में तैयार की जाती है। उत्पादन सीमित होने के कारण गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स, यीस्ट और अन्य प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जाता है। चूंकि यह बीयर तैयार होने के तुरंत बाद ग्राहकों को परोसी जाती है, इसलिए इसका स्वाद सामान्य बीयर की तुलना में अधिक ताजा और बेहतर माना जाता है। साथ ही उपभोक्ताओं को विभिन्न फ्लेवर और विशेष किस्मों की बीयर का विकल्प भी मिलता है। नए मानक तैयार : राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए कुछ अनिवार्य मानक भी तय किए हैं। इसके अनुसार लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कम से कम 4,000 वर्गफीट क्षेत्रफल वाला परिसर होना आवश्यक होगा। इसके अलावा अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और अन्य वैधानिक शर्तों को पूरा करना अनिवार्य रहेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित रेस्तरां और माइक्रो ब्रुअरी एक ही परिसर में संचालित किए जा सकेंगे, जिससे ग्राहकों को ताजा तैयार की गई क्राफ्ट बीयर का अनुभव मिल सके। 10 लाख का लाइसेंस : नई व्यवस्था के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर वर्ष 10 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा। प्रत्येक इकाई को प्रतिदिन अधिकतम 1,000 लीटर क्राफ्ट बीयर उत्पादन की अनुमति दी जाएगी। तैयार बीयर पर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित उत्पाद शुल्क भी लागू होगा। उद्योग से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि एक गिलास क्राफ्ट बीयर की कीमत लगभग 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है। हालांकि अंतिम कीमत स्थान, ब्रांड और फ्लेवर के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। पर्यटन को बढ़ावा : सरकार का मानना है कि यह नीति केवल शराब उद्योग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे राज्य के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलेगा। देश के कई राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी मॉडल पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। छत्तीसगढ़ में भी होटल, रेस्तरां और पर्यटन स्थलों पर इस तरह की इकाइयों के खुलने से नए निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है।  साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आबकारी विभाग का कहना है कि माइक्रो ब्रुअरी नीति लागू होने से राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। लाइसेंस शुल्क, उत्पाद शुल्क और इससे जुड़े अन्य करों के माध्यम से सरकार को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। वहीं होटल और रेस्तरां उद्योग को अपने कारोबार का विस्तार करने का नया अवसर मिलेगा। कमाई बढ़ाने की स्कीम : नई आबकारी नीति के इस फैसले को राज्य में आतिथ्य और पर्यटन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि राज्य में कितने निवेशक माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने में रुचि दिखाते हैं और छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर लोगों के बीच कितनी लोकप्रिय हो पाती है। सामान्य बीयर से कैसे अलग होगी क्राफ्ट बीयर क्राफ्ट बीयर छोटे बैच में तैयार की जाती है, इसलिए इसके स्वाद, गुणवत्ता और ताजगी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इसमें बेहतर गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इसका स्वाद सामान्य फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होता है। इसमें अलग-अलग फ्लेवर भी मिलते हैं और इसे ताजा परोसा जाता है। 4 हजार वर्गफीट जगह होना जरूरी सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। ब्रुअरी और उससे जुड़े रेस्तरां का कुल क्षेत्रफल कम से कम 4 हजार वर्गफीट होना चाहिए। इसके अलावा भवन में फायर सेफ्टी, मशीनों की सुरक्षा और अन्य सभी जरूरी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। सालाना 10 लाख रुपए देनी होगी लाइसेंस फीस नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर साल 10 लाख रुपए लाइसेंस फीस देनी होगी। एक माइक्रो ब्रुअरी को प्रतिदिन अधिकतम 1 हजार लीटर क्राफ्ट बीयर बनाने की अनुमति होगी। पहले जहां सालाना लाइसेंस फीस 25 लाख रुपए थी, उसे घटाकर 10 लाख रुपए कर दिया गया है।हालांकि, लाइसेंस लेने के साथ ही कारोबारियों को लाइसेंस फीस का 25% हिस्सा … Read more

पुनर्वासित युवाओं से मिले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप, जाना हाल-चाल

रायपुर : पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप गांवों के विकास में सहभागी बनने का किया आह्वान, सिंचाई व्यवस्था के दिए निर्देश रायपुर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा  नारायणपुर प्रवास के दौरान पुनर्वास केंद्र पहुंचकर हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा से जुड़े युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने युवाओं से पुनर्वास केंद्र में मिल रही सुविधाओं, प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की और उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप दस्तावेज और सुविधाओं की ली जानकारी           उप मुख्यमंत्री शर्मा ने युवाओं से आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों और शासकीय सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य हर पुनर्वासित युवक-युवती को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी सुविधाएं देना है। पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप पूर्व साथियों को प्रेरित करने की अपील            गृह मंत्री शर्मा ने युवाओं से कहा कि वे जेल में बंद अपने पूर्व साथियों से मिलकर उन्हें भी पुनर्वास योजना का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विकास और शांति का रास्ता ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का आधार है। पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप कौशल विकास की सराहना, सिंचाई के निर्देश            उप मुख्यमंत्री ने केंद्र में चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण की जानकारी ली। महिलाओं द्वारा मोटर वाहन ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में दिखाई जा रही भागीदारी की सराहना की।  सर्वे कराकर खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था कराएं         चर्चा के दौरान युवाओं ने खेतों में सिंचाई के लिए बोर की जरूरत बताई। इस पर शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहीदों के परिवारों और पुनर्वासित युवाओं का सर्वे कराकर उनके खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि वे खेती से स्थायी आजीविका कमा सकें। पेसा अधिनियम को और सशक्त बना रही सरकार          उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पेसा अधिनियम को और प्रभावी बनाने का काम लगातार हो रहा है। बस्तर के जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज से हैं और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने को कहा। साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहभागी बनने का आह्वान किया। बस्तर को शांति-विकास की नई दिशा देने का समय: केदार कश्यप               वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बस्तर के निर्माण तक आदिवासी समाज का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। अब समय बस्तर को शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा देने का है। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने वाले युवाओं ने इस बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब सभी को मिलकर क्षेत्र और समाज के समग्र विकास के लिए काम करना चाहिए।             इस मौके पर पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

अजमेर में खीरे की खेती परियोजना को लेकर मंत्री के सब्सिडी लाभ पर हितों के टकराव के सवाल उठे

अजमेर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय के अधीन आने वाली एक योजना से लगभग 99 लाख रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी मिली है। यह सब्सिडी उन्हें राजस्थान में उनके खीरे के खेत के लिए दी गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पैसा जिस बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया, मंत्री महोदय खुद उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। साइनबोर्ड खोलता है राज: क्या है पूरा मामला? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के अजमेर स्थित पीह में एक विशाल खेत है, जहां कृत्रिम तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस बने हैं। यहां लगे सफेद साइनबोर्ड पर लिखा है, "राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त।" बोर्ड पर लाभार्थी का नाम 'भागीरथ चौधरी' और 50% सब्सिडी की रकम '99,60,000 रुपये' लिखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को यह सब्सिडी कुछ महीने पहले उसी मंत्रालय की योजना से मिली है, जिसमें वह खुद मंत्री (MoS) हैं। यह पैसा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना "हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और फसल के बाद के प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास" के तहत दिया गया है। 2025 में इस योजना के तहत जिन 467 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली, उसमें मंत्री जी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट भी शामिल है। मंजूरी में 'सुपरफास्ट' स्पीड: प्रोजेक्ट और लोन की फुल डिटेल साइनबोर्ड के मुताबिक, प्रोजेक्ट की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है। इसमें प्रमोटर का शेयर 49.8 लाख रुपये है। चौधरी ने इस प्रोजेक्ट के लिए HDFC बैंक से 1.49 करोड़ रुपये का लोन लिया था। मार्च 2026 में NHB से अंतिम मंजूरी मिलने के कुछ ही हफ्तों के भीतर 99 लाख रुपये से ज्यादा की सब्सिडी सीधे उनके HDFC बैंक के लोन खाते में क्रेडिट कर दी गई। मंत्री जी ने 15 अप्रैल 2025 को आवेदन किया था और सिर्फ 14 दिनों के भीतर ही इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। जबकि, नियमों के मुताबिक मंजूरी से पहले साइट का संयुक्त रूप से निरीक्षण होना अनिवार्य है। सवालों के घेरे में क्यों है यह सब्सिडी? जिस बोर्ड (NHB) ने इस सब्सिडी को पास किया है, भगीरथ चौधरी उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। हालांकि अंतिम मंजूरी देने वाली कमेटी में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते हैं। अप्रूवल से एक महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को दी गई संपत्ति की घोषणा में मंत्री ने अपनी पीह वाली कृषि भूमि का जिक्र तो किया है, लेकिन इस पेंडिंग NHB प्रोजेक्ट की कोई जानकारी नहीं दी। हालांकि, उनके एक सहयोगी का कहना है कि इसका "खुलासा किया जाएगा।" भगीरथ चौधरी ने इससे पहले 2018 में भी इस योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन तब हार्ड कॉपी जमा करने में देरी के चलते उनका आवेदन रिजेक्ट हो गया था। क्या है मंत्रालय की यह योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक खेती (मुनाफे के लिए) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना है। इसके तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर जैसी 3 सब्जियों और गुलाब व आर्किड सहित 8 प्रकार के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट की अधिकतम 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। एक परिवार के लिए सब्सिडी की अधिकतम सीमा 1 करोड़ रुपये तय है। प्रोजेक्ट पूरा होने के तीन महीने के भीतर सब्सिडी की रकम लोन अकाउंट में जमा कर दी जाती है। हितों के टकराव को लेकर जब मीडिया संस्थान ने केंद्रीय मंत्री भगीरथ चौधरी से संपर्क किया और सवालों की सूची भेजी, तो उनके कार्यालय ने ईमेल मिलने की पुष्टि की, लेकिन मंत्री की तरफ से कोई जवाब या टिप्पणी नहीं आई।  

दक्षिण बिहार के गया, नवादा और औरंगाबाद में नई सोलर परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी

 पटना  ग्रीन इनर्जी के क्षेत्र में बिहार की स्थिति यह है कि सोलर इनर्जी के क्षेत्र में गतिविधियां अधिक है। अपेक्षाकृत कम क्षमता वाले सोलर इनर्जी यूनिट उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार स्थित जिलों में अधिक आ रहे। अब तक की सबसे बड़ी यूनिट लखीसराय के कजरा में लगी है जिसकी क्षमता 185 मेगावाट है। यह कजरा की प्रथम यूनिट है। बिजली कंपनी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार साेलर इनर्जी के क्षेत्र में अभी 367.1 मेगावाट की कुल क्षमता की अलग-अलग यूनिट पर काम हो रहा है। गयाजी में कई यूनिट पर हो रहा काम दक्षिण बिहार के गयाजी जिले में कई यूनिटों पर काम हो रहा है। इनमें एक यूनिट गयाजी के शेरघाटी में है जिसकी क्षमता 10 मेगावाट है। गयाजी के ही आमस में 15 मेगावाट और 10 मेगावाट वाली अलग यूनिट, बहेरा में 15 मेगावाट क्षमता की यूनिट अस्तित्व में आने वाली है। इसी तरह नवादा जिला स्थित अकबरपुर में 10 मेगावाट, दरियापुर में तीन मेगावाट की सोलर यूनिट अस्तित्व में आ रही है। औरंगाबाद में 20 मेगावाट की सोलर यूनिट आ रही। उत्‍तर बिहार के कई ज‍िलों में चल रहा काम पटना के बिक्रम में नहर किनारे दो मेगावाट की सोलर यूनिट कमीशंड है। उत्तर बिहार की बात करें तो पश्चिम चंपारण के रामनगर में पांच मेगावाट, मुडेरा में 10 मेगावाट, दरभंगा के मुंदरपुर में 1.6 मेगावाट, सुपौल में फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट0.5 मेगावाट यूनिट पर काम हो रहा। कजरा के बाद सबसे अधिक क्षमता 50 मेगावाट वाली यूनिट बांका में है। बांका में इसके अतिरिक्त दो अन्य यूनिट पर काम हो रहा। इसमें एक की क्षमता 15 और एक की 10 मेगावाट है। यानी वहां 75 मेगावाट क्षमता की सोलर इनर्जी उपलब्ध होगी। बांका के बौंसी में पांच मेगावाट क्षमता की एक यूनिट अलग से है।  

अनानास की खेती ने बदली किसान अरुण साहू की किस्मत, मेड़ से शुरू हुआ सफर बना लाखों की कमाई का जरिया

मेड़ पर लगाए थे कुछ पौधे… आज हर साल 2.5 लाख की कमाई   रायगढ़ के किसान अरुण सॉ ने अनानास की खेती से बदली तकदीर, बने प्रेरणा स्रोत रायपुर कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है। शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल           अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं। कम लागत, बेहतर मुनाफा              अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है। प्ररोहों की बिक्री से भी आय               फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।           अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।