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नया घर बनाते समय इन 5 वास्तु नियमों का रखें ध्यान, मिलेगा सुख-शांति और आराम

नया घर बनाना हर किसी का सपना होता है. लोग चाहते हैं कि उनका घर देखने में सुंदर हो और परिवार के लिए आरामदायक भी हो, इसलिए घर बनवाने से पहले लोग डिजाइन, बजट, कमरों की जगह और दूसरी कई जरूरी चीजों की प्लानिंग करते हैं. इसके साथ ही बहुत से लोग वास्तु से जुड़ी बातों का भी ध्यान रखते हैं. उनका मानना है कि अगर घर सही तरीके से बनाया जाए, तो रहने में आसानी होती है और मन भी अच्छा रहता है. अगर आप भी नया घर बनवाने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले इन 5 बातों के बारे में जरूर जान लें. 1. प्लॉट खरीदते समय दिशा देख लें वास्तु के अनुसार, घर बनाने से पहले प्लॉट की दिशा देखना जरूरी माना जाता है. कई लोग उत्तर और पूर्व दिशा वाले प्लॉट को अच्छा मानते हैं. वहीं, दक्षिण दिशा वाले प्लॉट को लेने से बचने की सलाह दी जाती है. 2. मुख्य दरवाजा सही जगह बनवाएं घर का मुख्य दरवाजा ऐसी जगह होना चाहिए, जहां से घर में आने-जाने में आसानी रहे. वास्तु के अनुसार, उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में मुख्य दरवाजा बनाना सही माना जाता है. वहीं, दक्षिण और पश्चिम के बीच वाले हिस्से में मुख्य दरवाजा बनाने से बचने की सलाह दी जाती है. 3. टॉयलेट कहां बन रहा है, इस पर भी ध्यान दें घर बनाते समय टॉयलेट की जगह पहले से तय कर लें. वास्तु के अनुसार, मुख्य दरवाजे के ठीक सामने टॉयलेट नहीं होना चाहिए. इसके अलावा, घर के बीच वाले हिस्से और उत्तर-पूर्व दिशा में भी टॉयलेट बनाने से बचने की सलाह दी जाती है. पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा को इसके लिए बेहतर माना जाता है. 4. सीढ़ियां और नौकर का कमरा सही जगह बनाएं अगर घर में नौकर का कमरा बना रहे हैं, तो उसे उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं बनाना चाहिए. साथ ही, घर के बिल्कुल बीच में सीढ़ियां बनाने से भी बचने की सलाह दी जाती है. इसके लिए दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा को सही माना जाता है. 5. लिफ्ट लगाने से पहले जगह सोच ले अगर आपके घर में लिफ्ट लगने वाली है, तो उसकी जगह भी पहले तय कर लें. वास्तु के अनुसार, उत्तर दिशा में लिफ्ट लगाने से बचना चाहिए. इसकी जगह उत्तर-पश्चिम दिशा को बेहतर माना जाता है. आखिर लोग वास्तु की बातें क्यों मानते हैं? वास्तु शास्त्र भारत की पुरानी परंपरा का हिस्सा है. बहुत से लोग मानते हैं कि इससे घर में अच्छा माहौल बना रहता है, हालांकि ऐसा साबित करने वाला कोई पक्का वैज्ञानिक सबूत नहीं है, इसलिए घर बनाते समय सिर्फ वास्तु ही नहीं बल्कि घर की मजबूती, अच्छी हवा, धूप और सेफ्टी का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए.

PGI चंडीगढ़ में पानी की बोतलों पर MRP से ज्यादा कीमत, अतिरिक्त वसूली का मामला सामने आया

चंडीगढ़. पीजीआई की न्यू ओपीडी और कार्डियक सेंटर में बनी कैंटीन में ठेकेदारों की ओर से पानी की बोतलों पर एमआरपी बढ़ाकर लोगों से लूट का खेल चल रहा है। मरीजों व तीमारदारों पहले की इलाज के चलते पैसों की किल्लत झेल रहे होते हैं, लेकिन मजबूरी का फायदा उठा कर कैंटीन संचालक उनकी जेब पर सेंधमारी कर रहे है। न्यू ओपीडी और कार्डियक सेंटर में बनी कैंटीन में 20 रुपये की पानी की बोतल पर 30 रुपये वसूले जा रहे हैं। पूरे शहर में पानी की बोतल 20 रुपये में उपलब्ध है और ऑनलाइन 15 रुपये में उपलब्ध है। इस प्रकार के कई मामलों की शिकायतें पीजीआई प्रशासन के पास पहुंच चुकी है, लेकिन कैंटीन संचालकों पर किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हर दिन पीजीआई में इलाज के लिए पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से 12 से 15 हजार मरीज आते हैं। मरीजों के साथ ही तीमारदारों की संख्या भी इतनी ही है। यानी हर दिन अस्पताल में 28 से 30 हजार लोग आ रहे हैं। ऐसे में कैंटीन संचालकों की ओर से हजारों लोगों को लूटने का काम किया जा रहा है। बाहर से आने वाले लोगों को आस पास खाने पीने का सामान कहा मिलेगा इसकी जानकारी नहीं होती है, इसका फायदा उठाकर ही कैंटीन संचालक लोगों की जेब पर डाका डाल रहे है। ओवरचार्जिंग के बहुत सारे वीडियो इंटरनेट पर भी वायरल हो चुके है। प्रिंट रेट पर पानी बेचा जा रहा- वीडियो बनाने वाले लोग फ्री बहुत है। 20 रुपये प्रिंट रेट वाली बोतल के 20 और 30 रुपए वाली प्रिंट वाली बोतल के 30 रुपये लिए जा रहे है। पीजीआइ के टेंडर के मुताबिक प्रिंट रेट पर पानी बेचा जा रहा है। -पवन छाबड़ा, कैंटीन संचालक, कार्डियक सेंटर, पीजीआई प्रीमियम पानी है – 20 रुपये में बिकने वाला पानी सामान्य पानी है, जो हर जगह 20 का ही मिलता है। इसके साथ जो पानी की बोतल 30 रुपये की बेची जा रही है। वही प्रीमियम पानी है। -धीरज धवन, कैंटीन संचालक, न्यू ओपीडी, पीजीआई ब्रांच को कार्रवाई के दिए निर्देश- मामला संज्ञान में आ गया है। संबंधित ब्रांच को कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए गए है। नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। -पंकज राय, डिप्टी डायरेक्टर, पीजीआई विक्रेता के खिलाफ की जा सकती है कार्रवाई – उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ एडवोकेट संदीप भारद्वाज बताते हैं कि किसी भी उत्पाद की मूल एमआरपी या लेबल में बदलाव कर अधिक कीमत वसूलना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में खरीद का बिल सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य होता है। हर उपभोक्ता को खरीदारी के समय बिल अवश्य लेना चाहिए और उस पर दर्ज कीमत का मिलान उत्पाद पर अंकित एमआरपी से करना चाहिए। यदि अधिक कीमत वसूली गई है तो बिल और उत्पाद की फोटो सुरक्षित रखकर उपभोक्ता आयोग या संबंधित विभाग में शिकायत की जा सकती है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

भारतीय थाली में क्यों नहीं पूरा होता 60 ग्राम प्रोटीन का डेली टारगेट, जानिए कारण

हम भारतीय अपने खाने-पीने के शौकीन मिजाज और थाली के रंगों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. दाल, चावल, रोटी, सब्जी, अचार और रायता हमारी पारंपरिक थाली देखने में जितनी भरपूर लगती है, उतनी ही स्वादिष्ट भी होती है. लेकिन जब बात सेहत और खासकर प्रोटीन की आती है, तो हमारी यही ट्रेडिशनल थाली रोज की जरूरतों को पूरा करने में पीछे छूट जाती है. ICMR के अनुसार, एक एडल्ट को रोजाना लगभग 60 ग्राम प्रोटीन (Daily Protein Target) की जरूरत होती है. आइए जानते हैं कि आखिर हमारी रोज की थाली इस टारगेट को हासिल करने में क्यों चूक जाती है.  कार्बोहाइड्रेट की बहुत ज्यादा मात्रा हमारी थाली का सबसे बड़ा हिस्सा रोटी, चावल, पोहा या आलू जैसी चीजों से घिरा होता है. ये सभी चीजें कार्बोहाइड्रेट्स का मुख्य स्रोत हैं, जो हमें तुरंत एनर्जी तो देती हैं, लेकिन इनमें प्रोटीन की मात्रा बहुत कम होती है. अमूमन भारतीय घरों में थाली का 70 से 80% हिस्सा सिर्फ कार्ब्स से भरा होता है, जिससे प्रोटीन के लिए जगह ही नहीं बचती.   Daily Protein Target: दाल-रोटी और चावल को प्रोटीन का इकलौता जरिया मानना  हमारे यहां माना जाता है कि रोज दाल-चावल खा लिया, तो प्रोटीन की कमी नहीं होगी. लेकिन ऐसा नहीं है. दालों में लगभग 20% प्रोटीन होता है, और इसके साथ भारी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट भी होता है. अगर कोई सिर्फ दाल से अपने दिनभर का 60 ग्राम प्रोटीन का टारगेट पूरा करना चाहे, तो उसे दिन में 7 से 8 कटोरी दाल पीनी पड़ेगी, जो हजम करना नामुमकिन है. इसके अलावा, हमारे प्रोटीन का 60% हिस्सा गेहूं और चावल से आता है, जिसे हमारा शरीर पूरी तरह और आसानी से सोख नहीं पाता. वेजिटेरियन खाने में ‘कम्पलीट प्रोटीन’ की कमी भारत की एक बहुत बड़ी आबादी शुद्ध शाकाहारी है. चिकन, मटन, मछली और अंडों में ‘कम्पलीट प्रोटीन’ होता है, जो शरीर आसानी से सोख लेता है. इसके विपरीत, शाकाहारी स्रोतों जैसे अनाज और बीन्स को शरीर पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता. जब तक आप अनाज और दालों को सही रैशीओ में मिलाकर (जैसे खिचड़ी या दाल-चावल) न खाएं, तब तक शरीर को सही प्रोटीन (Daily Protein Target) नहीं मिलता.  पकाने का ट्रेडिशनल तरीका भारतीय खाना बनाने का तरीका ऐसा है जिसमें मसालों को खूब भूनना और सब्जियों व दालों को देर तक उबालना शामिल है. बहुत ज्यादा तापमान पर बार-बार खाना पकाने और गर्म करने से भोजन में मौजूद प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों (Nutrients) की क्वालिटी कम हो जाती है.  स्नैक्स में अनहेल्दी चीजें चुनना हम सुबह और रात के खाने पर तो ध्यान दे देते हैं, लेकिन शाम की नाश्ते में हमारा झुकाव समोसा, कचौरी, बिस्कुट, नमकीन या चाय पर जाकर टिक जाता है. इन स्नैक्स में सिर्फ मैदा, तेल और चीनी होती है. अगर इसकी जगह मुट्ठी भर मूंगफली, मखाना, भुना चना या उबला अंडा शामिल किया जाए, तो प्रोटीन का टारगेट आसानी से पूरा हो सकता है.  अपनी थाली को प्रोटीन से भरपूर कैसे बनाएं? रोजाना 60 ग्राम प्रोटीन (Daily Protein Target) पूरा करना इतना भी मुश्किल नहीं है. बस अपनी थाली में छोटे-छोटे बदलाव करें:     पनीर और टोफू: अपने दोपहर या रात के खाने में 50-100 ग्राम पनीर या टोफू शामिल करें.      सोयाबीन: सोया चंक्स प्रोटीन का पावरहाउस हैं. इनकी सब्जी या पुलाव बनाकर खाएं.      सत्तू और छाछ: गर्मियों में सत्तू का शरबत और खाने के साथ गाढ़ी छाछ या दही का इस्तेमाल बढ़ाएं.      अंडे और लीन मीट: अगर आप नॉन-वेजिटेरियन हैं, तो उबले अंडे और ग्रिल्ड चिकन को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं.   

रायपुर मौसम अपडेट: छाए बादल, कल से तेज होगा मानसून का असर

रायपुर. छत्तीसगढ़ में कुछ इलाकों में बादल बरस रहे हैं, तो कहीं भीषण गर्मी का दौर जारी है. रायपुर में बारिश नहीं हो रही है. आज से आषाढ़ मास शुरू हो रहा है, जिससे लोगों को बारिश की उम्मीदें हैं. राजधानी में मंगलवार सुबह से ही आसमान में बादल नजर आ रहे हैं. मौसम विभाग ने एक जुलाई से पूरे प्रदेश में वर्षा की गतिविधि में वृद्धि होने की संभावना जताई है. मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों में सभी संभागों में कुछ जगहों पर देर रात से मध्यम वर्षा हुई. आंकड़ों के अनुसार सक्ती, कोंटा, नानगुर, भोपालपटनम, तोकापाल, तिल्दा, मुंगेली में 3-3 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई. वहीं मर्रीबंगला देवरी, नारायणपुर, जगरगुंडा, जगदलपुर में 2-2 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई. हरदीबाजार, मनोरा, चंद्रपुर, नवागढ़, पेंड्रा, छुरिया, खरसिया, खैरागढ़, भोथिया, गंगालूर में 1-1 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई. मौसम विज्ञानी के अनुसार समुद्र तल पर मौसमी द्रोणिका पंजाब से हरियाणा और उत्तरप्रदेश से होते हुए बिहार तक स्थित है. एक चक्रवाती परिसंचरण उत्तरी तेलंगाना और आस-पास के इलाकों में बना हुआ है और अब यह समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है. एक पूर्व पश्चिम द्रोणिका पूर्वी उत्तर प्रदेश से बिहार, अधो हिमालय पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम से होते हुए मणिपुर तक 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इनके प्रभाव से प्रदेश में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षाहोने की संभावना है. एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ वज्रपात और भारीवर्षा की चेतावनी दी गई है. रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? रायपुर में आज बादल छाए रह सकते हैं. मौसम विभाग ने तेज हवाएं और बारिश की संभावनाएं जताई है. मंगलवार को अधितकम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के करीब रह सकता है.

सिख मंत्रियों और विधायकों की पेशी के बाद अकाल तख्त का सख्त रुख, AAP-अकाली दल को दिए 8 बड़े संदेश

अमृतसर  पंजाब की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा मामला गरमाया हुआ है जिसने सियासत से लेकर धर्म तक हलचल मचा दी है. दरअसल, श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार को एक महीने के भीतर बेअदबी कानून में संशोधन करने का आदेश दिया है. 29 जून को पंजाब के सभी दलों के सिख विधायक और कैबिनेट मंत्री नंगे पैर अकाल तख्त पहुंचे और लिखित सफाई के साथ पांच सिंह साहिबानों के सामने पेश हुए. आम आदमी पार्टी के विधायकों ने यहां तक कबूला कि उन्होंने बिना पढ़े ही मसौदा साइन कर दिया. आखिर क्या है अकाल तख्त, कैसे मुख्यमंत्री को दे सकता है आदेश और क्यों बड़ी से बड़ी हस्ती भी झुक जाती है… अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में सिख मंत्रियों-विधायकों की पेशी के बाद ये साफ हो गया कि सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, वह पंथ को नजरअंदाज नहीं कर सकती। सभी दलों के विधायक एक सामान्य सिख की तरह अकाल तख्त पर पेश हुए।  इस दौरान जत्थेदार के सवालों के आगे बेअदबी कानून को विधायकों की बिना पढ़े मंजूरी से जहां AAP सरकार एक्सपोज हुई। वहीं जत्थेदार ने सरकार को पंजाब में पंथ की अहमियत का भी पाठ पढ़ाया। जत्थेदार ने अकाली दल को भी घेरा तो कांग्रेस खुद को कानून से किनारे करने की कोशिश करते दिखी। पेशी के दौरान ही मीडिया मैनेजमेंट तक को लेकर जत्थेदार ने सरकार घेर ली। हालांकि आखिर में जत्थेदार ने 6 एतराज जताते हुए कहा कि कानून बनाना और सजा देना सरकार का काम है लेकिन ये एतराज दूर होने चाहिए। इसके लिए एक महीने का टाइम दिया। तब तक कानून होल्ड करने को कहा। पेशी से बाहर निकले पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार संधवां और वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि जब अकाल तख्त से लिखित एतराज आएंगे तो सरकार उस पर चर्चा करेगी। उसके बाद कानून में बदलाव पर फैसला लेंगे। जानिए, अकाल तख्त में हुई पेशी के असल मायने क्या हैं, इसका आने वाले चुनाव पर क्या असर पड़ेगा।  श्री अकाल तख्त में मंत्रियों-MLA की पेशी के 8 मायने:- 1. पंजाब में पंथ सुप्रीम, राजनीति धर्म के की नैतिकता माने श्री अकाल तख्त साहिब में बेअदबी कानून को लेकर सिख एमएलए व मंत्रियों की पेशी के दौरान अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज स्पष्ट मैसेज दे दिया कि पंजाब में सिख पंथ (धर्म) सुप्रीम है। उन्होंने पेशी के समय स्पष्ट कहा कि सिख इतिहास और दर्शन में 'मीरी-पीरी' (राजनीति और धर्म) का सिद्धांत सर्वोपरि रहा है, जिसके तहत राजनीति हमेशा धर्म के नैतिकता के दायरे में चलती है। जत्थेदार गड़गज ने कहा कि आज राजनीति धर्म के पास आई है, जब राजनीति धर्म के साथ चलती है तो इंसाफ होता है। पूरी कैबिनेट व एमएलए का नंगे पैर अकाल तख्त के सामने हाजिर होना यह साबित करता है कि सिख मामलों में आज भी पंजाब की कोई भी चुनी हुई सरकार सर्वोच्च धार्मिक सत्ता श्री अकाल तख्त से ऊपर नहीं है। 2. अकाल तख्त के आगे सियासी ताकत बेअसर पेशी के दौरान जत्थेदार ज्ञानी गड़गज ने नेताओं को श्री अकाल तख्त की पावर दिखाई और साफ कर दिया कि यहां पर जो वो कहेंगे उसके हिसाब से ही प्रोसिडिंग चलेगी। जब सुखपाल खैहरा कह रहे थे तो उसी दौरान आम आदमी पार्टी के कुछ विधायकों व मंत्रियों ने खड़े होकर विरोध करना शुरू किया तो जत्थेदार गड़गज ने दो टूक कह दिया कि यह विधानसभा नहीं है, श्री अकाल तख्त साहिब है। यहां ये व्यवहार नहीं चलेगा बैठ जाओ। जत्थेदार ने जैसे ही दबका मारा सभी बैठ गए। उन्होंने सुखपाल खैहरा को भी बोलने से रोका। जब खैहरा ने प्रार्थना की तो उसे एक मिनट का समय दिया। टाइम पूरा होते ही खैहरा को भी रोक दिया। यही नहीं जब आप सरकार के मंत्री गुरमीत सिंह खुडि्डयां सरकार के पक्ष में बोलने लगे तो जत्थेदार ने उन्हें भी टोकर बैठा दिया। 3. AAP सरकार एक्सपोज, बिना पढ़े कानून को मंजूरी पेशी के दौरान जत्थेदार ज्ञानी गड़गज ने कानून के संबंध में एक-एक विधायक से सवाल किए। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने कहा कि उन्होंने इस पर सहमति दी थी। लेकिन ज्ञानी गड़गज ने जब पूछा कि उन्होंने कानून पढ़ा था तो ज्यादातर ने कह दिया कि नहीं पढ़ा। विधायक मनजीत सिंह ने कहा कि उन्होंने कानून पढ़ा है तो जत्थेदार ने उनसे कस्टोडियन की परिभाषा पूछ ली। जिस पर उन्होंने कहा कि अगर कोई पागल या बच्चा बेअदबी करता है तो उसके माता पिता कस्टोडियन होंगे और उन्हें सजा दी जाएगी। इस पर ज्ञानी गड़गज ने कटाक्ष करते हुए कहा कि शाबाश ऐसे बुद्धिमान सभी होने चाहिए। कई विधायकों का इस तरह कहना कि उन्होंने कानून पढ़ा ही नहीं, सरकार के लिए भारी शर्मिंदगी का कारण बन गया है। विधायकों के इस कबूलनामे से आप सरकार पूरी तरह से एक्सपोज हो गई कि विधायक व मंत्री कानून पास करने से पहले उसे पढ़ते नहीं हैं। 4. पंथ में सरकार का हस्तक्षेप मंजूर नहीं जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने सरकार को आगाह कर दिया कि पंथ से जुड़े मामलों में कोई दखलंदाजी स्वीकार नहीं होगी। पंथ को क्या करना है और क्या नहीं करना है यह सरकार तय नहीं करेगी। जत्थेदार ने कहा कि सिख होने के नाते सुझाव दे सकते हैं, उन्हें मानना या न मानना वो पंथ तय करेगा। जत्थेदार ने 'बीड़' की जगह 'स्वरूप' शब्द का इस्तेमाल करने और वेबसाइट पर पवित्र स्वरूपों का रिकॉर्ड डालने के लिए 'यूनिक नंबर' जारी करने पर तकनीकी एतराज जताया है। इसका सीधा मायना यह है कि पंजाब विधानसभा या कोई भी सेक्युलर कोर्ट सिख रहित मर्यादा और पंथक शब्दावली को डिक्टेट नहीं कर सकती। यह अधिकार केवल अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) जैसी पंथक संस्थाओं के पास सुरक्षित है। सरकार केवल गुनहगारों को सजा देने के लिए क्रिमिनल एक्ट बना सकती है, मर्यादा तय करने के लिए नहीं। 5.अकाली दल के रवैये पर सवाल सुनवाई के दौरान ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने बेअदबी कानून का विरोध न करने पर अकाली दल के रवैये पर भी सवाल खड़े किए। ज्ञानी गड़गज ने अकाली विधायक गनीव कौर मजीठिया से सवाल पूछा कि आपने इसका विरोध किया?, तो उन्होंने … Read more

मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व में टूटा पर्यटन का रिकॉर्ड, 10 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे; मंगलवार से बंद रहेंगे पार्क

उमरिया मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्वों में इस पर्यटन सत्र में वन्यजीव प्रेमियों का उत्साह देखने को मिला है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में इस बार 10 लाख से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी कर बाघों और अन्य वन्य प्राणियों का दीदार किया है। वहीं मंगलवार को शाम को सफारी के बाद प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के द्वार पर्यटकों के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही जंगल में तीन महीने का विश्राम काल शुरू हो जाएगा। एक अक्टूबर से टाइगर रिजर्व के गेट खुलेंगे। बांधवगढ़ में पहुंचे 2 लाख से ज्यादा पर्यटक बांधवगढ़ में दो लाख से ज्यादा पर्यटकों ने बाघों के दीदार किए हैं, जबकि मध्य प्रदेश के छह टाइगर रिजर्व बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा और संजय धुबरी में इस साल आठ लाख से ज्यादा पर्यटकों के पहुंचने की जानकारी मिली है। हालांकि अधिकृत आंकड़े एक जुलाई तक ही उपलब्ध हो पाएंगे। तीन माह बंद रहेंगे पार्क बरसात के तीन महीने- जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान जंगल में बाघ सहित अन्य वन्यजीवों को शांत वातावरण मिलेगा। इस अवधि में टाइगर रिजर्व प्रबंधन सफारी मार्गों की मरम्मत, पर्यटकों की सुविधाओं में सुधार और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी करेगा। विश्राम अवधि वन्यजीवों के प्रजनन और प्राकृतिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान जंगल में मानवीय दखल कम होने से वे प्राकृतिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकेंगे। इसलिए बंद होते हैं पार्क बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि वर्षाकाल में सुरक्षा की दृष्टि से पार्क बंद किए जाते हैं। वर्षाकाल में जंगल के अंदर के कच्चे रास्तों में वाहनों के फंसने का खतरा रहता है। दूसरी तरफ वन्य प्राणी भी अधिक हिंसक हो जाते हैं। बफर में जारी रहेगा पर्यटन अलबत्ता, टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां जारी रहेंगी। यहां पर्यटक बारिश के मौसम में हरियाली से भरपूर जंगल, झरनों और वन्य प्राणियों की गतिविधियों का आनंद उठा सकेंगे। वहीं पार्क बंद होने के बाद जंगल और पर्यटन पर निर्भर रहने वाले प्रदेश के लगभग 20 हजार परिवारों का आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। कूनो भी 30 सितंबर तक बंद होगा उधर, श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क के गेट मंगलवार शाम से आगामी तीन महीने के लिए पर्यटकों के लिए बंद हो जाएंगे। चीता परियोजना शुरू होने के बाद से यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। यहां लंबे समय से दिखाई नहीं दिए जंगली कुत्ते, दुर्लभ जंगली बिल्ली (कैरोल) विलुप्त प्रजाति के उल्लू, काले हिरण से लेकर कई प्रकार के अन्य वन्यजीव नजर आने लगे हैं। कूनो नेशनल पार्क में कुल 49 चीते हैं। इनमें से 32 कूनो की धरती पर जन्मे शावक हैं। 19 खुले जंगल में हैं। कूनो के जंगल के रास्ते पर आया चीता, करीब एक घंटे रुकी रही सफारी  कूनो नेशनल पार्क के अंदर चीता सफारी से जंगल भ्रमण कर रहे पर्यटक तब खुशी से झूम उठे जब अचानक जंगल से निकलकर एक चीता उनके रास्ते के सामने आ गया और रास्ते पर ही बैठा रहा, इस दौरान करीब एक घंटे तक सफारी के पहिए थम गए, पर्यटक आनंदित हो उठे, उन्होंने नजारे को अपने मोबाइल के कैमरे में रिकार्ड कर लिया, अब चीता का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।  

Punjab Lecturer Recruitment 2026: 1013 पदों पर निकली भर्ती, 1 जुलाई से रजिस्ट्रेशन; जानें योग्यता और पूरी डिटेल

लुधियाना  पंजाब शिक्षा भर्ती निदेशालय ने पंजाब लेक्चरर भर्ती 2026 की विस्तृत अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें लेक्चरर पदों के लिए 1,013 रिक्तियों की घोषणा की गई है। इनमें 1013 रिक्तियां शामिल हैं, जिनमें 829 नियमित नई रिक्तियां और 184 बैकलॉग रिक्तियां शामिल हैं। ये रिक्तियां भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, भूगोल, हिंदी, इतिहास, गणित, राजनीति विज्ञान और पंजाबी सहित 12 विषयों में हैं। पंजाब लेक्चरर कैडर भर्ती 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 जुलाई 2026 से 31 जुलाई 2026 तक खुली रहेगी। संबंधित विषय में मास्टर डिग्री और बी.एड. वाले उम्मीदवार नीचे दी गई जानकारी, पात्रता, पाठ्यक्रम और ऑनलाइन आवेदन की समय सारिणी देख सकते हैं।     शैक्षणिक योग्यता: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री, जिसमें 55% अंक (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 50%) प्राप्त किए हों।     आयु सीमा: पंजाब सरकार के मानदंडों के अनुसार आयु सीमा 18 से 37 वर्ष है। साथ ही, इस भर्ती अभियान में राज्य मंत्रिमंडल द्वारा ऊपरी आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट प्रदान की गई है।     शामिल विषय: अंग्रेजी, पंजाबी, हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, गणित, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और भूगोल। पंजाब शिक्षा भर्ती निदेशालय ने अंग्रेजी, पंजाबी, हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान और अन्य विषयों में 1,013 रिक्तियों के लिए पंजाब नियमित और बैकलॉग रिक्तियों हेतु विस्तृत अधिसूचना जारी की है। उम्मीदवार दोनों अधिसूचनाओं के लिए संपूर्ण नियम और शर्तें विभाग की आधिकारिक वेबसाइट erd.punjab.gov.in पर देख सकते हैं।     पंजाब लेक्चरर कैडर भर्ती 2026 की अधिसूचना में कुल 1,013 पदों को शामिल किया गया है – जिनमें 829 नियमित रिक्तियां और 184 लंबित रिक्तियां शामिल हैं – ये रिक्तियां 12 विषयों से संबंधित हैं। आवेदन का लिंक 1 जुलाई 2026 से erd.punjab.gov.in पर सक्रिय हो जाएगा और 31 जुलाई 2026 तक उपलब्ध रहेगा। पंजाब लेक्चरर कैडर भर्ती 2026: अवलोकन पंजाब राज्य में सरकारी स्कूलों में लेक्चरर के पदों को भरने के लिए शिक्षा भर्ती निदेशालय, पंजाब द्वारा भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। त्वरित संदर्भ के लिए नीचे दी गई तालिका में इस भर्ती प्रक्रिया के मुख्य विवरण दिए गए हैं। 12 विषयों में होगी भर्ती इस भर्ती के तहत 12 अलग-अलग विषयों में लेक्चररों की नियुक्ति की जाएगी। सबसे अधिक 210 पद हिस्ट्री विषय के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा इंग्लिश के 141, पॉलिटिकल साइंस के 131, मैथ्स के 105, पंजाबी के 99, कॉमर्स के 98, फिजिक्स के 58, इकोनॉमिक्स के 50, केमिस्ट्री के 41, बायोलॉजी के 37, हिंदी के 29 और जियोग्राफी के 14 पदों पर भर्ती की जाएगी। 10वीं में पंजाबी भाषा पास होना अनिवार्य आवेदकों के लिए शैक्षणिक योग्यता के तहत संबंधित विषय में मास्टर डिग्री के साथ न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक और किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से बीएड डिग्री अनिवार्य है। इसके अलावा यह शर्त भी रखी गई है कि उम्मीदवार ने मैट्रिक (10वीं) स्तर पर पंजाबी भाषा को अनिवार्य या वैकल्पिक विषय के रूप में उत्तीर्ण किया हो। आवेदन करने वाले उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना भी आवश्यक है। 18 से 37 वर्ष की आयु के युवा कर सकेंगे आवेदन इस भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि, पंजाब सरकार के नियमों के अनुसार आरक्षित श्रेणियों जैसे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), दिव्यांग उम्मीदवारों और सरकारी कर्मचारियों को ऊपरी आयु सीमा में नियमानुसार छूट प्रदान की जाएगी। दो चरणों में होगी परीक्षा, नहीं होगी नेगेटिव मार्किंग योग्य उम्मीदवारों का चयन पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 300 अंकों की ऑफलाइन ओएमआर आधारित लिखित परीक्षा आयोजित होगी, जो दो भागों में विभाजित होगी। इस परीक्षा में कोई नकारात्मक अंकन (नेगेटिव मार्किंग) नहीं होगा। मेरिट सूची में स्थान पाने के लिए उम्मीदवारों को दोनों सेक्शन में अलग-अलग न्यूनतम कट-ऑफ अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को दूसरे चरण में दस्तावेज सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) के लिए बुलाया जाएगा। प्रोबेशन पीरियड में मिलेगा फिक्स वेतन भर्ती प्रक्रिया में अंतिम रूप से चयनित होने वाले लेक्चरर्स को शुरुआत के 3 साल के प्रोबेशन पीरियड के दौरान ₹34,500 से ₹35,400 प्रति माह का एक निश्चित मूल वेतन दिया जाएगा। इस शुरुआती अवधि में कोई भी सरकारी भत्ता जैसे डीए या एचआरए देय नहीं होगा। 3 साल का प्रोबेशन सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को नियमित वेतनमान के साथ सभी सरकारी भत्तों का लाभ मिलने लगेगा।   विवरण विवरण संगठन शिक्षा भर्ती निदेशालय, पंजाब डाक व्याख्याता पद (नए पद) नई रिक्तियां 829 लंबित रिक्तियां 184 कुल रिक्तियां 1013 अधिसूचना दिनांक 18.06.2026 Application Start Date 1- 31 July 2026 Application Mode Online Official Website erd.punjab.gov.in Notification Regular Vacancy Notice: Download PDF Backlog Vacancy Notice: Download PDF Revised Notification Revised Schedule Notice for 829 Posts Revised Schedule Notice for 184 Posts Join our Telegram Channel for the Latest Updates Punjab Lecturer Cadre Vacancy 2026 The 1013 vacancies (regular and backlog) are distributed across 12 subjects under the new Lecturer Cadre. History and Political Science carry the highest number of posts among the listed subjects, while Geography has the fewest. Candidates should check the subject-wise distribution of the Punjab Lecturer Vacancy below before applying. Subject Regular Vacancies Backlog Vacancies Total Vacancies English 111 30 141 Punjabi 71 28 99 Hindi 25 4 29 History 200 10 210 Political Science 118 13 131 Math 91 14 105 Economics 35 15 50 Commerce 71 27 98 Chemistry 28 13 41 Biology 25 12 37 Physics 46 12 58 Geography 8 6 14 Total 829 184 1,013        

33 केवी लाइन विस्तार मामले में हाईकोर्ट का नोटिस, हाथी प्रभावित क्षेत्र पर सरकारों से जवाब तलब

बिलासपुर. रायगढ़ जिले के हाथी प्रभावित धरमजयगढ़ वन क्षेत्र में नियम और मानकों का उल्लंघन कर 33 केवी लाइन विस्तार को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और बिजली कंपनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय सुनवाई के दौरान राज्य और केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने नोटिस स्वीकार किया, जबकि निजी कंपनी को नियमानुसार नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। राज्य सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की मोहलत दे दी है। जवाब मिलने के बाद एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को रिजॉइंडर दाखिल करने की अनुमति दी। सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि निजी कंपनी की ओर से जवाब पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उस जवाब पर भी प्रत्युत्तर सबमिट करने की छूट दी। जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को तय की गई है। वन स्वीकृति के बिना किए जाने का दावा याचिका में बताया है कि धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भालूपखना स्थित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना के लिए आवश्यक वन स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना वन एवं राजस्व भूमि में गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की गईं तथा 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार में भी नियमों की अनदेखी की गई। याचिका में दावा किया गया है कि भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण कार्य के दौरान सीएसपीडीसीएल के नए पोल लगाए गए। आरोप है कि इन्हीं खंभों का उपयोग करते हुए निजी परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन भी ले जाई गई, जिससे अलग से वन भूमि डायवर्सन और वैधानिक अनुमतियों की आवश्यकता से बचा जा सके। आरोपों के अनुसार, परियोजना प्रबंधन ने पूर्व में ट्रांसमिशन लाइन एवं अन्य संरचनाओं के लिए वन विभाग तथा जिला प्रशासन के समक्ष अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त होने से पहले ही निर्माण कार्य कर लिया गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से 11 केवी लाइन के नवीनीकरण के नाम पर ऐसा ढांचा तैयार किया गया, जिसका लाभ सीधे निजी जल विद्युत परियोजना को मिला। इससे सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग और प्रक्रिया संबंधी पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं। पूर्व में खारिज हुई थी याचिका उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता ने पहले भी इसी मुद्दे पर याचिका दायर की थी। उस याचिका में सुरक्षा राशि जमा करने से छूट की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने छूट संबंधी आवेदन खारिज करते हुए 7 मई 2026 को याचिका निरस्त कर दी थी। हालांकि अदालत ने नियमों के अनुसार सुरक्षा राशि जमा कर नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता विवेक कुमार पांडेय ने नई जनहित याचिका प्रस्तुत की।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज सरगुजा और रायगढ़ दौरा, रामगढ़ महोत्सव में होंगे शामिल

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज सरगुजा और रायगढ़ के दौरे पर रहेंगे. सुबह 11 बजे वे मुख्यमंत्री निवास में खेल एवं युवा कल्याण विभाग की बैठक लेंगे. इसके बाद सरगुजा जिले के उदयपुर के लिए रवाना होंगे और दोपहर 12:50 बजे झिरमिति स्टेडियम हेलीपैड पहुंचेंगे. दोपहर 1 बजे वे 50 वर्षों की गौरवशाली परंपरा वाले रामगढ़ महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे. भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ी आस्था के इस आयोजन में मुख्यमंत्री सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी शिरकत करेंगे. कार्यक्रम के बाद दोपहर 2:30 बजे रायगढ़ के लिए रवाना होंगे और शाम 5 बजे रायगढ़ से वापस रायपुर लौटेंगे. ‘सहयोग केंद्र’ में आज मंत्री श्यामबिहारी सुनेंगे समस्याएं ​रायपुर. भारतीय जनता पार्टी के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित प्रदेश कार्यालय में सहयग केंद्र जारी है. आज मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल मंगलवार 30 जून को सहयोग केंद्र में उपस्थित रहेंगे. वह कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद के माध्यम से आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करेंगे.

तुष्टिकरण छोड़कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में खुलकर बोलें सपा अध्यक्ष: सीएम योगी

रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने का देर-सबेर सार्वजनिक पश्चाताप करेंगे अखिलेश: सीएम योगी मुरादाबाद नगर, मुरादाबाद देहात एवं कुंदरकी विधानसभा क्षेत्रों, नगर निगम व मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की 365 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 63 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुष्टिकरण छोड़कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में खुलकर बोलें सपा अध्यक्ष: सीएम योगी कुंदरकी उप चुनाव में जनता ने बता दिया कि अब बाबर का नहीं, रामराज ही चलेगा: मुख्यमंत्री गुरु जम्भेश्वर मंदिर कॉरिडोर का होगा विकास, लाइनपार क्षेत्र का नाम बदलकर 'दाऊ दयाल खन्ना नगर' किया जाएगा मुरादाबाद  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि क्या उन्हें कुछ सद्बुद्धि आई है या जनता की आंख में धूल झोंक रहे हैं। वह कह रहे हैं कि उनकी सरकार बनी तो अयोध्या को चमकाएंगे, जबकि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार पहले ही अयोध्या का अभूतपूर्व विकास कर चुकी है। वहां अब उनके सहयोग की कोई आवश्यकता नहीं। लेकिन, इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने आखिरकार अयोध्या को स्वीकार किया। यह भाजपा की वैचारिक विजय है। देर-सवेर सपा मुखिया भी भगवान श्रीराम का संकीर्तन करते दिखाई देंगे और रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने के पाप का सार्वजनिक पश्चाताप करेंगे। मुख्यमंत्री सोमवार को मुरादाबाद में मुरादाबाद नगर, मुरादाबाद देहात एवं कुंदरकी विधानसभा क्षेत्रों, नगर निगम व मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की 365 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 63 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दानवीर भामाशाह जी की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और व्यापारी कल्याण दिवस पर व्यापारियों को सम्मान पत्र वितरित किए। सीएम ने कार्यक्रम स्थल में लगे स्टाल्स का निरीक्षण किया। उन्होंने एक नन्ही बच्ची को गोद में लेकर चम्मच से दूध पिलाकर दुलारा और उसे खिलौना भी दिया। सीएम योगी ने नगर निगम की कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में बोलें अखिलेश यादव मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या को डबल इंजन सरकार पहले ही नई पहचान दे चुकी है। फोरलेन सड़क संपर्क, रेलवे की डबल लाइन, महर्षि वाल्मीकि के नाम पर एयरपोर्ट, निषादराज के नाम पर रैन बसेरे, माता शबरी के नाम पर भोजनालय और राम की पैड़ी जैसे कार्य सरकार ने कराए हैं। अब समय मथुरा-वृंदावन और बांके बिहारी क्षेत्र के विकास का है। अखिलेश यादव वास्तव में धार्मिक आस्था का सम्मान करना चाहते हैं तो उन्हें खुलकर मथुरा-वृंदावन और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पक्ष में बोलना चाहिए। तुष्टिकरण से उबरना चाहिए। तभी जनता उनके बदले हुए रुख पर विश्वास करेगी। समाजवादी पार्टी की सोच बाबरी वाली मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की बाबरी सोच है। यह समाज को जाति, क्षेत्र व भाषा के नाम पर बांटने का काम करती है। संभल का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि यदि समाज जागरूक रहता तो वहां के प्राचीन हरिहर मंदिर, 67 तीर्थों और 19 प्राचीन कुओं पर किसी प्रकार का अतिक्रमण या क्षति नहीं होती। समाज को अपनी विरासत और संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना चाहिए। बाबर का नहीं, रामराज ही चलेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू व उपद्रव नहीं होते। कुंदरकी विधानसभा उपचुनाव में जनता ने साबित कर दिया कि अब बाबर का नहीं, रामराज ही चलेगा। लोगों ने विकास व सुशासन के पक्ष में मतदान किया और भाजपा प्रत्याशी ठाकुर रामवीर सिंह को विजयी बनाया। पहले सरकारी धन कब्रिस्तानों की बाउंड्री बनाने और तुष्टीकरण की राजनीति पर खर्च होता था, जबकि आज वही धन मंदिरों के पुनरुद्धार, धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, रामायण वाटिका, संविधान वाटिका और सेना के शौर्य को सम्मानित करने वाले कार्यों पर लगाया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम, नैमिषारण्य, विदुर कुटी और मथुरा-वृंदावन सहित अनेक धार्मिक स्थलों का अभूतपूर्व विकास किया गया है। प्रदेश में विरासत और विकास दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। नो कर्फ्यू, नो दंगा यूपी में सब चंगा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब "नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा” की स्थिति है। सरकार अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। कोई बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ करेगा, व्यापारी का अपहरण करेगा, नौजवान की नौकरी में सेंध लगाएगा या किसान के अधिकारों का हनन करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। समाजवादी पार्टी की साइकिल पंक्चर हो चुकी मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की राजनीतिक जमीन लगातार कमजोर हुई है। जनता ने विकास व सुशासन को चुना है। अराजकता व तुष्टीकरण की राजनीति को नकार दिया। सपा की साइकिल अब पंक्चर हो चुकी है, उसकी गति समाप्त हो गई है। अब उसके आगे बढ़ने की कोई संभावना नहीं बची है। यदि विपक्ष राम का नाम लेता है तो यह भी सकारात्मक परिवर्तन है और इससे उसका भविष्य में भला ही होगा। गुरु जम्भेश्वर मंदिर कॉरिडोर का होगा विकास मुख्यमंत्री ने मुरादाबाद के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सरकार गुरु जम्भेश्वर के प्राचीन मंदिर के कॉरिडोर विकास का कार्य करेगी। यह स्थल प्रदेश की धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है और सरकार इसके संरक्षण एवं विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी। गुरु जम्भेश्वर के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना और मंदिर परिसर के समग्र विकास से मुरादाबाद की नई पहचान बनेगी। लाइनपार क्षेत्र का नाम होगा दाऊ दयाल खन्ना नगर मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के वरिष्ठ नेता और मुरादाबाद की विभूति दाऊ दयाल खन्ना को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए घोषणा की कि लाइनपार क्षेत्र का नाम बदलकर 'दाऊ दयाल खन्ना नगर' किया जाएगा। वर्ष 1983 में गठित श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति में उनके पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ अध्यक्ष थे, जबकि दाऊ दयाल खन्ना महासचिव के रूप में पूरे आंदोलन से जुड़े रहे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित किया। सरकार उनके योगदान को सम्मान देने के लिए यह निर्णय ले रही है। दानवीर भामाशाह का जीवन त्याग व राष्ट्रभक्ति की मिसाल मुख्यमंत्री ने कहा कि दानवीर भामाशाह का जीवन त्याग, राष्ट्रभक्ति और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। हल्दीघाटी युद्ध के बाद जब महाराणा प्रताप के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया और उनके पास संसाधन नहीं बचे। तब भामाशाह ने अपनी … Read more