samacharsecretary.com

ऑपरेशन के बीच युवक की मौत, हिसार के 4 डॉक्टरों पर लापरवाही का मामला दर्ज

बरवाला/हिसार. कस्बे के डा. अनंतराम जनता अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही के कारण आपरेशन के दौरान युवक नवदीप (31) की मौत हो गई। पता चलने पर स्वजन ने अस्पताल परिसर में हंगामा कर शव लेने से इन्कार कर दिया। सूचना मिलने पर बरवाला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और काफी देर तक स्वजन को समझाते रहे। मृतक के स्वजन लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करवाने की मांग पर अड़े रहे। पुलिस ने अस्पताल के चार चिकित्सकों के खिलाफ केस दर्ज किया। स्वजन ने उसके बाद शव उठाया। जानकारी के अनुसार गांव भैणी बादशाहपुर निवासी सुरेश चंद्र के बेटे नवदीप को पित्त की थैली में पथरी की शिकायत थी। नवदीप मुनीम का काम करता था। दर्द के चलते स्वजन उसे 29 जून को बरवाला के डॉ. अनंतराम जनता अस्पताल में लेकर आए। आरोप है कि चिकित्सक अनंतराम ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि उनके पास अनुभवी चिकित्सकों की पूरी टीम है। दूरबीन विधि से बेहतर उपचार करने का दावा किया उन्होंने दूरबीन विधि से बेहतर उपचार करने का दावा किया और कहा कि आपरेशन के महज दो घंटे बाद मरीज को छुट्टी दे दी जाएगी। पूरे उपचार के लिए 20 हजार लगेंगे। स्वजन ने नवदीप को 30 जून की सुबह 11 बजे अस्पताल में भर्ती कराया और रुपये जमा करवा दिए। शाम करीब साढ़े चार बजे नवदीप को आपरेशन थियेटर में ले जाया गया। ऑपरेशन टीम में डा. अनंत राम, डा. प्रवीण कुमार गोयल, डा. अभिषेक ढांडा और शिव कुमार कौशिक शामिल थे। स्वजन का आरोप है कि शाम करीब सात बजे चिकित्सकों ने उनसे अचानक दो यूनिट खून लाने को कहा। उन्हें तुरंत ब्लड सेंटर से खून लाकर दे दिया। कुछ देर बाद चिकित्सकों ने दोबारा दो यूनिट खून और फिर चार यूनिट प्लाज्मा मंगवाया। रात करीब 12 बजे चिकित्सकों ने फिर से दो यूनिट खून लाने को कहा, लेकिन जब स्वजन खून लेने जाने लगे, तो चिकित्सकों ने उन्हें रोक दिया। चिकित्सकों से क्या पूछा? जब चिकित्सकों से पूछा कि इतना खून क्यों लग रहा है और क्या कोई दिक्कत है, तो चिकित्सकों ने कहा कि सुबह तक बिल्कुल ठीक हो जाएगा, अभी बेहोशी की हालत में है। बुधवार तड़के ढाई बजे स्वजन को नवदीप की मौत का पता चला। जब पिता ने नवदीप के शव को देखा, तो सामने आया कि चिकित्सकों ने दूरबीन से उपचार करने की बात कहकर उसके पेट के दाहिनी तरफ बड़ा आपरेशन किया हुआ था। नवदीप की मौत के बाद स्वजन ने हंगामा कर दिया। मृतक के पिता सुरेश चंद ने आरोप लगाया है कि चिकित्सकों और लैब स्टाफ की लापरवाही के कारण ही उनके बेटे की जान गई है। उन्होंने पुलिस से चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और चिकित्सकों के एक विशेष बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की। बाद में पुलिस ने जब चिकित्सकों पर केस दर्ज किया तो स्वजन शव का पोस्टमार्टम करवाने पर राजी हुए। पीत की थैली में कई थी पथरियां डॉ. अनंतराम बरवाला ने कहा कि नवदीप के पेट में पीत की थैली में कई पथरी थी। अस्पताल के चिकित्सकों ने उसका आपरेशन शुरू किया। आपरेशन के दौरान पता चला कि पीत की थैली के पास काफी पस थी। जिस दूर करना था। पस को अलग करने का काम किया गया। इस दौरान काफी खून बहने लगा। युवक को कई यूनिट ब्लड चढ़ाई गई। हमें दुख है कि हम मरीज की जान को नहीं बचा पाए। बरवाला थाना प्रभारी दलबीर सिंह ने कहा कि अस्पताल में आपरेशन के बाद युवक की मौत के मामले में जांच जारी है। स्वजन के बयान पर डा. अनंतराम बरवाला समेत अन्य चिकिस्तकों पर केस दर्ज किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से कृषि विभाग के मार्गदर्शन का किसानों को मिल रहा लाभ

कम लागत, दोगुना फायदा: जशपुर के किसान ने गेहूं की खेती से बढ़ाई आमदनी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से कृषि विभाग के मार्गदर्शन का किसानों को मिल रहा लाभ खरीफ के साथ रबी फसल अपनाकर किसान बन रहे आत्मनिर्भर, बढ़ रही आय रायपुर,   मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड के ग्राम सोगड़ा निवासी किसान श्री कीना राम इस पहल का सफल उदाहरण हैं। सीमित कृषि भूमि होने के बावजूद उन्होंने खरीफ के साथ रबी सीजन में गेहूं की खेती अपनाकर अपनी आय में वृद्धि की है। किसान श्री कीना राम ने बताया कि कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्होंने रबी फसल की खेती शुरू की। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) योजना के तहत उन्हें एक एकड़ भूमि के लिए उन्नत किस्म का गेहूं बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया गया। उन्होंने खेत की अच्छी तैयारी कर पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद का उपयोग किया तथा समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार प्रबंधन किया। इसका परिणाम यह रहा कि फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप बहुत कम रहा और गेहूं का अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ। श्री कीना राम ने बताया कि उनके पास कुल 0.800 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे केवल खरीफ सीजन में धान की खेती करते थे और रबी सीजन में खेत खाली छोड़ देते थे। इससे उन्हें गेहूं बाजार से खरीदना पड़ता था। अब रबी में गेहूं की खेती करने से परिवार के लिए गुणवत्तापूर्ण अनाज उपलब्ध होने के साथ अतिरिक्त उत्पादन बेचकर आय भी प्राप्त हो रही है। उन्होंने बताया कि धान के बाद गेहूं की खेती से खाली समय और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है, खेती की लाभप्रदता बढ़ी है तथा रबी में पड़ती भूमि भी समाप्त हो गई है। इससे परिवार की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। किसान श्री कीना राम ने अन्य किसानों से भी खरीफ के साथ रबी सीजन में गेहूं, दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कम लागत और कम समय में बेहतर आमदनी प्राप्त करने के लिए रबी फसल एक बेहतर विकल्प है। साथ ही उन्होंने कृषि विभाग एवं छत्तीसगढ़ शासन का मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

पंजाब के फिरोजपुर में नहर कटाव से 400 एकड़ फसल डूबी, भारी नुकसान से किसान परेशान

फिरोजपुर. फिरोजपुर जिले के ममदोट क्षेत्र में गुरुवार को लक्ष्मण नहर में कटाव आने से सैकड़ों किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। गांव राहू के हिठाड़ के निकट नहर टूटने के बाद तेज बहाव का पानी आसपास के खेतों में फैल गया, जिससे करीब 400 एकड़ में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई। अचानक खेतों में पानी भरने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। घटना के बाद प्रभावित किसानों और ग्रामीणों में गहरा रोष देखने को मिला। ग्रामीणों के अनुसार, नहर में अचानक अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण पानी का दबाव बढ़ गया और नहर में कटाव आ गया। इसके बाद तेज बहाव का पानी सीधे खेतों में पहुंच गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में खेत पानी से भर गए और धान की फसल डूब गई। किसानों का कहना है कि कई खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। किसानों ने सिंचाई विभाग पर लगाए आरोप प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया कि घटना की जानकारी देने के बावजूद काफी देर तक सिंचाई विभाग और प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। किसानों ने यह भी कहा कि कटाव वाले स्थान पर तत्काल मरम्मत शुरू नहीं होने से पानी लगातार खेतों में फैलता रहा। ग्रामीणों का कहना है कि धान के मौसम में लक्ष्मण नहर में पहले भी कई बार इसी तरह कटाव की घटनाएं हो चुकी हैं। उनका दावा है कि हर बार किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। किसानों का कहना है कि यदि नहर की समय-समय पर मजबूती से मरम्मत और निगरानी की जाए तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। राहत कार्य शुरू करने की रखी मांग किसानों ने यह भी मांग उठाई कि जब तक नहर में पानी की आपूर्ति बंद नहीं होगी, तब तक कटाव को पूरी तरह भरना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों से कई बार पानी रोकने और राहत कार्य शुरू करने की मांग की गई, लेकिन तत्काल कार्रवाई नहीं हो सकी। प्रभावित किसानों ने सरकार और सिंचाई विभाग से मांग की है कि नहरों में पानी छोड़ने से पहले उनकी क्षमता और स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाए। साथ ही कटाव वाले हिस्सों की समय रहते मरम्मत कराई जाए, ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह के नुकसान का सामना न करना पड़े। किसानों ने प्रभावित फसलों का जल्द सर्वे कराने, नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजा देने की भी मांग की है।

दुर्ग में 1149 म्यूल अकाउंट पकड़े गए, करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से जुड़े ट्रांजैक्शन उजागर

दुर्ग. दुर्ग जिले में साइबर ठगी का जाल अब म्यूल अकाउंट के जरिए संगठित रूप ले चुका है। मामूली कमीशन या लालच देकर लोगों के बैंक खातों का उपयोग अवैध लेनदेन के लिए किया जा रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि जिले में सैकड़ों बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपए की ठगी को अंजाम दिया गया है। सुपेला, दुर्ग, पुरानी भिलाई, नेवई, छावनी, मोहननगर, भिलाई भट्ठी, नंदिनी, पद्मनाभपुर, उतई, वैशालीनगर व साइबर थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों में 1149 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल सामने आया है। मोहन नगर के एक मामले में 111 खातों के जरिए बड़े स्तर पर ऑनलाइन ठगी हुई। एक अन्य प्रकरण में 22 खातों से 10 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी दर्ज की गई। सुपेला क्षेत्र में 105 खातों के जरिए एक करोड़ रुपए से ज्यादा का फर्जी ट्रांजेक्शन हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि नेटवर्क बेहद संगठित और व्यापक है। दुर्ग जिले में साइबर अपराध की काली कमाई छिपाने के लिए म्यूल खातों के प्रयोग का बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस का यह बड़ा अभियान चलाकर प्रारंभिक जांच में सामने आया है। कि बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध से अर्जित धनराशि को छिपाने, विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने आदि के लिए किया जा रहा था

ISRO Headquarters Bomb Threat: बेंगलुरु मुख्यालय खाली, धमकी के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानीबेंगलुरु में स्थित इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के हेडक्वार्टर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया गया। मौके पर पुलिस और बम स्क्वाड हेडक्वार्टर में जांच-पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक, ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के ऑफिस को धमकी भरा ईमेल आया था। इसके बाद इसरो के कैंपस को खाली कराया गया। कई टीमें संदिग्ध वस्तुओं की जांच की। अधिकारियों के अनुसार इसरो को धमकी भरा मेल गाजियाबाद से भेजा गया था। वहां पर उस व्यक्ति का पता लगाकर उसे पकड़ लिया गया है। कैंपस खाली करवाकर सर्च ऑपरेशन पुलिस के मुताबिक एहतियात के तौर पर सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया और इमारत की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली और बाद में धमकी को झूठा करार दिया गया है। पुलिस ने ईमेल भेजने वाले से पूछताछ कर रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में न्यू बीईएल रोड पर स्थित 'अंतरिक्ष भवन' में स्थित है। 29 जून को बम धमकी के फर्जी ईमेल भेजने वाला पकड़ा गया इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कई संगठनों और एक एयर इंडिया की उड़ान को बम की धमकी वाले फर्जी ईमेल भेजने के आरोप में एक व्यक्ति को पकड़ा है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि यह व्यक्ति गाजियाबाद का निवासी है। 36 वर्षीय आरोपी 2008 से मानसिक बीमारी का इलाज करा रहा है। 29 जून को भेजे गए इन ईमेल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय  सहित कई उच्च सुरक्षा प्रतिष्ठानों में बम होने का दावा किया गया था। नई दिल्ली से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की उड़ान के लिए भी एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया। इससे तत्काल सुरक्षा जांच शुरू हुई और कई एजेंसियों को सतर्क किया गया। पुलिस ने बताया कि सभी संबंधित संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों को सूचित किया गया था। मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया और धमकियां फर्जी पाई गईं। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें ईमेल के डिजिटल ट्रेल को ट्रैक किया गया। तकनीकी जांच के दौरान, पुलिस ने दो मेल खातों का विश्लेषण किया। इन खातों का उपयोग ईमेल भेजने के लिए किया गया था। ईमेल ट्रेल की विस्तृत जांच से जांचकर्ताओं को खातों से जुड़े एक मोबाइल नंबर तक पहुंचने में मदद मिली। तकनीकी निगरानी का उपयोग करते हुए, पुलिस दल ने 30 जून को संदिग्ध को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के संयोग नगर में खोज निकाला। पुलिस मौके पर पहुंची और उसके निवास पर संदिग्ध निशांत त्यागी की जांच की। पुलिस के अनुसार, त्यागी ने ओपन स्कूलिंग के माध्यम से अपनी शिक्षा पूरी की थी। उसने 2010 में स्नातक डिग्री कार्यक्रम में दाखिला लिया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया। मानसिक स्वास्थ्य और आगे की जांच प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह कथित तौर पर 2008 से मानसिक बीमारी से पीड़ित है। वह वर्षों से विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में इलाज करा रहा है। उसके परिवार के सदस्यों ने भी पुलिस को उसके लंबे चिकित्सा इतिहास के बारे में बताया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई। ईमेल भेजने के पीछे के मकसद और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है, जिसके परिणाम के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसरो का गतिविधियों का होता है प्रबंधन इसरो का मुख्यालय होने के कारण इस इलाके की सुरक्षा व्यवस्था काफी चाक चौबंद रहती है। बेंगलुर से इसरो की सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष गतिविधियों का प्रबंधन किया जाता है। इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। मूल इकाई (INCOSPAR) के रूप में यह 1962 में अस्तित्व में आया था और 1972 में इसे अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अंतर्गत लाया गया। अंतरिक्ष भवन जो कि इसरो का प्रशासनिक केंद्र है। यह लगभग 4.3 एकड़ (17,400 वर्ग मीटर) के परिसर में फैला हुआ है। इसरो के मुख्यालय को उड़ाने की धमकी देने वाले शख्स की गिरफ्तारी के बाद बेंगलुरु पुलिस उत्तर प्रदेश पुलिस के संपर्क में है। अरेस्ट किए गए शख्स से पूछताछ करने के साथ उसका बैकग्राउंड खंगाला जा रहा है। 

CM विष्णु देव साय बोले- मानवता, सेवा और संवेदना का जीवंत केंद्र है सोठी आश्रम

मानवता, सेवा और संवेदना का जीवंत केंद्र है सोठी आश्रम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री साय ने भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम में सेवा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास कार्यों का किया अवलोकन सिद्धि विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान सोठी स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम पहुँचे। आश्रम आगमन पर संस्था के पदाधिकारियों एवं आश्रमवासियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने आश्रम प्रमुख सुधीर देव से संस्था की सेवा गतिविधियों, चिकित्सा सुविधाओं तथा पुनर्वास कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा आश्रम द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम केवल एक सेवा संस्थान नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और समर्पण का जीवंत केंद्र है। यहाँ वर्षों से समाज के उपेक्षित और जरूरतमंद लोगों की गरिमा के साथ सेवा की जा रही है, जो भारतीय संस्कृति के 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के आदर्श को साकार करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान समाज में संवेदनशीलता, सेवा और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रेरणादायी कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित सिद्धि विनायक मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने संस्था के संस्थापक स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके सेवा भाव को नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आश्रम के लिए नई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि यह एम्बुलेंस आश्रमवासियों एवं जरूरतमंद मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री साय ने आश्रम परिसर का भ्रमण कर सेवा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने आश्रमवासियों से आत्मीय भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उन्हें उपहार भी भेंट किए। इस दौरान उन्होंने गौशाला में गौमाता की पूजा-अर्चना कर हरा चारा अर्पित किया और गौसेवा का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का निरीक्षण कर ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, बिलिंग कक्ष, एक्स-रे कक्ष, आईसीयू तथा ऑपरेशन थियेटर सहित विभिन्न इकाइयों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सालय में उपचाररत मरीजों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने पर बल दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने धनवंतरी जनकल्याण समिति सोसायटी, रायपुर द्वारा संचालित निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग इनिशिएटिव वाहन का भी अवलोकन किया। उन्होंने वाहन के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पहुँचाई जा रही कैंसर जांच सेवाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि समय पर जांच और उपचार गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है तथा ऐसी पहल जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब,सांसद श्रीमती कमलेश देवी जांगड़े, विधायक जगदलपुर किरण सिंह देव, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन, आश्रम के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

CM विष्णु देव साय के निर्देश पर शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत, सरकार का अहम फैसला

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल से अब अल्पावधि ऋण सुविधा उपलब्ध ई-कोष से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से कर्मचारियों को मिलेगा त्वरित, पारदर्शी एवं सुरक्षित ऋण रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के शासकीय कर्मचारियों के लिए अल्पावधि ऋण (Short Term Credit) की सुविधा प्रारंभ की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को आकस्मिक वित्तीय आवश्यकताओं के समय त्वरित, सरल एवं पारदर्शी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें असुविधाजनक अथवा अनौपचारिक वित्तीय स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े। यह सुविधा राज्य शासन की ई-कोष (e-Kosh) प्रणाली से एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार शासकीय कर्मचारियों के कल्याण और उनकी आर्थिक सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आवश्यकता के समय कर्मचारियों को त्वरित, सरल और पारदर्शी वित्तीय सहायता उपलब्ध हो, इसी उद्देश्य से अल्पावधि ऋण सुविधा प्रारंभ की गई है। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से यह सुविधा सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध होगी। हमारी सरकार सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से कर्मचारियों के हितों को निरंतर सुदृढ़ कर रही है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कर्मचारियों के हितों के संरक्षण और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यह अल्पावधि ऋण सुविधा कर्मचारियों को आवश्यकता के समय त्वरित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी तथा उन्हें सम्मानजनक एवं सुविधाजनक वित्तीय विकल्प प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी एवं सुरक्षित है। कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर (Employee Corner) के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। ऋण से संबंधित सभी शर्तें, ब्याज दर, ईएमआई, शुल्क तथा की फैक्ट स्टेटमेंट (Key Fact Statement-KFS) जैसी आवश्यक जानकारियां पहले से उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि कर्मचारी पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी अपनी पात्रता के अनुसार अल्पावधि ऋण के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के उपरांत ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण तथा सहमति (Consent) की प्रक्रिया पूर्ण होने पर ऋण स्वीकृति एवं वितरण की प्रक्रिया त्वरित रूप से पूरी की जाएगी। ऋण की मासिक किस्तों का भुगतान वेतन से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। वित्त विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure-SOP) के अनुसार पूरी व्यवस्था में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता एवं डिजिटल प्रमाणीकरण के उच्च मानकों का पालन किया जाएगा। कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग केवल उनकी सहमति से किया जाएगा तथा सभी लेन-देन सुरक्षित डिजिटल माध्यम से संपन्न होंगे। इस पहल से कर्मचारियों को आकस्मिक चिकित्सा, शिक्षा, पारिवारिक अथवा अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सकेगी। इससे उनकी आर्थिक सुरक्षा सुदृढ़ होगी तथा औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक उनकी पहुंच और अधिक सुगम बनेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वित्त विभाग की यह पहल कर्मचारी हितैषी शासन, सुशासन और डिजिटल प्रशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मध्य प्रदेश में बड़ा फैसला, घरों में कारोबार खोलने का रास्ता साफ; Combined Land Use लागू

भोपाल  प्रदेश सरकार अब हर तरह के लैंडयूज में उसके सभी प्रकार का इस्तेमाल और गतिविधियों की राह खोलने जा रही है। सिर्फ भूमि उपयोग के अनुसार, तय गतिविधियां ही प्रतिबंधित रहेंगी। भूमि और भवनों का मिश्रित उपयोग की अनुमति होगी, चाहे वो हॉरीजॉन्टल हो या वर्टिकल हो। इससे अब प्रतिबंधित को छोड़कर आवासीय क्षेत्र में कमर्शियल और औद्योगिक गतिविधियां भी चल सकेंगी। हालांकि आवासीय क्षेत्र में गोदाम, प्रदूषणकारी उद्योग, बूचडख़ाने, कबाडख़ाने, संक्रामक रोग अस्पताल, थोक व्यापार, सुअर पालन, दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, बड़े परिवहन टर्मिनल आदि को प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ एफॉर्डेबल हाउसिंग संबंधी नियमों में भी संशोधन कर इनके ज्यादा संछया में निर्माण का रास्ता खोला जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग इसके लिए भूमि विकास नियमों में संशोधन कर रहा है। संशोधन के ड्राट का गजट नोटिफिकेशन कर 15 दिन में सुझाव और आपढिायां मांगी गई हैं। इसके बाद इसे लागू किया जाएगा। प्रदेश में ज्यादा बनेंगे एफॉर्डेबल आवास सरकार अब ज्यादा एफॉर्डेबल आवास बनाने का रास्ता खोलने जा रही है। इसके लिए भूमि विकास नियमों में संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर दिया गया है। इस ड्राफ्ट के अनुसार, एफॉर्डेबल आवासों का निर्माण तीन तरह से हो सकेगा। इसमें भूखंड विकास, छलैट, समूह गृह निर्माण के साथ अब एकल स्वामित्व वाले भूखंड पर ऊर्धवाधर वृद्धिशील आवास को भी जोड़ा जा रहा है। बनेंगी हाईराइज इमारतें संशोधन में उपलब्ध जमीन के अनुसार, प्रति हेलटेयर आवासीय इकाइयों के अधिकतम घनत्व संबंधी प्रावधान को खत्म किया जाएगा। इसके तहत अधिकतम चार हेलटेयर क्षेत्र में अधिकतम चार मंजिला भवन निर्माण और 350 ईडय्ल्यूएस और 260 एलआइजी आवास निर्माणों की ही अनुमति थी। लेकिन अब संख्या का बंधन खत्म हो जाएगा। एकल स्वामित्व वाले भूखंड में किसी मकान को ऊपर की ओर बढ़ाने की भी अनुमति मिल सकेगी। स्वतंत्र एफॉर्डेबल हाउस परियोजनाओं में आवासीय इकाई का अधिकतम निर्मित क्षेत्र 60 वर्ग मीटर तक हो सकेगा। इसके लिए एफएआर भी 3 तक मिलेगा। मकान और दुकान का होगा एक साथ उपयोग अब मकान और दुकान एक ही स्थान पर हो सकेंगे। राज्य सरकार ने टीएंडसीपी (Town and Country Planning) के नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत घरों में दुकानें और कार्यालय खोलने की मंजूरी दी जाएगी। किस तरह मददगार साबित होगा यह बदलाव टीएंडसीपी आयुक्त श्रीकांत बनोठ ने बताया कि सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं। इन बदलावों से व्यापारियों को नई मंजूरी मिलेगी। अब वे अपने घरों में कारोबार कर सकेंगे। इससे न केवल व्यापारियों, बल्कि आम जनता को भी लाभ होगा। रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे। भूमि विकास नियम 2012 में अहम बदलाव टीएंडसीपी ने भूमि विकास नियम 2012 के नियम 36 में बदलाव किया है। इससे मिक्स लैंड यूज और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (Transit Oriented Development) को शामिल किया गया है। इसके अलावा, नियम 37 में भी बदलाव किया गया है। इससे अब आवासीय (residential) क्षेत्रों में लगाए गए प्रतिबंध (restrictions) को हटा दिया गया है। इसमें विद्युत, तेल, जल और अन्य मशीनी शक्ति के उपयोग शामिल है। ऐसे में अब यह संभावना बढ़ गई है कि आने वाले समय में मोहल्लों और कॉलोनियों में छोटे-मोटे उद्योगों का भी विस्तार हो सकता है। किस क्षेत्र में कौन सी गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी -आवासीय क्षेत्र : हानिकारक और खतरनाक उद्योग, भारी विनिर्माण उद्योग, गोदाम, प्रदूषणकारी उद्योग, बूचड़ख़ाने, कबाड़ख़ाने, संक्रामक रोग अस्पताल और अन्य। -वाणिज्यिक क्षेत्र : भारी उद्योग, खतरनाक और विषाक्त रसायनों का भंडारण, विस्फोटक भंडारण, थोक भंडारण डिपो, हानिकारक और खतरनाक उद्योग और अन्य। -औद्योगिक क्षेत्र : पूरी तरह से आवासीय टाउनशिप, विद्यालय, हानिकारक और खतरनाक उद्योग, भारी विनिर्माण उद्योग, गोदाम, प्रदूषणकारी उद्योग कसाईखाना, तेल डिपो, पेट्रोलियम, संक्रामक बीमारी वाले अस्पताल व अन्य। -कृषि क्षेत्र : शहरी आवासीय अभिन्यास, शहरी वाणिज्यिक परिसर, बड़े वाणिज्यिक परियोजनाएं, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, बड़े मॉल और अन्य। -ग्रामीण आबादी, चारदीवारी शहरी क्षेत्र : हानिकारक-घातक उद्योग, असंगत भारी औद्योगिक गतिविधियों, हानिकारक और खतरनाक उद्योग भारी विनिर्माण उद्योग, गोदाम व अन्य। जल निकाय, तालाब क्षेत्र : भूमि भराव, स्थायी निर्माण, औद्योगिक अपशिष्ट, डंपिंग, अतिक्रमण, खनन गतिविधियां, सुअर पालन, दुग्ध एवं मुर्गी पालन, दाह संस्कार, श्मशान, विद्युत दाह संस्कार। वाणिज्यिक क्षेत्रों पर असर वाणिज्यिक क्षेत्रों में अब खतरनाक रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों को अनुमति नहीं मिलेगी। हालांकि, ग्रीन श्रेणी के उद्योगों को अनुमति मिल सकती है। इससे ट्रैफिक और पार्किंग की समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे पहले यूपी में मिली थी मंजूरी बता दें की माकान में व्यापार करने की मंजूरी इससे पहले यूपी में दी गई थी। यहां फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट बैठक में लिया गया था। इसमें लोग बिना किसी बड़ी कानूनी प्रक्रिया के अपने घर के साथ व्यापार की मंजूरी दी गई थी।

Apple विवाद: ‘जय श्री राम’ पर जवाब नहीं, ‘सलाम वालेकुम’ पर प्रतिक्रिया के दावे से उज्जैन में विरोध प्रदर्शन

उज्जैन धार्मिक नगरी उज्जैन में तकनीक और आस्था आमने-सामने आ गए हैं। यहां एप्पल की वॉइस असिस्टेंट फीचर सिरी (Siri) अब हिंदू संगठनों के निशाने पर है। आरोप है कि सिरी जय श्री राम या जय माता दी बोलने पर कोई जवाब नहीं देती, जबकि सलाम वालेकुम कहने पर तुरंत प्रतिक्रिया देती है।ज्योतिषाचार्य, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने इसे धार्मिक भेदभाव बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। मांग की गई है कि एप्पल अपने फीचर्स में सुधार करे, अन्यथा आईफोन का बहिष्कार किया जाएगा। सिरी सलाम वालेकुम पर तुरंत प्रतिक्रिया देती है- पवन पाठक दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी एप्पल का वॉइस असिस्टेंट सिरी उज्जैन में विवादों में घिर गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित पवन पाठक का दावा है कि उन्होंने 10 से 15 आईफोन पर इसकी जांच की। उनका कहना है कि जय श्री राम या जय माता दी बोलने पर सिरी कोई स्पष्ट जवाब नहीं देती या शांत रहती है, जबकि सलाम वालेकुम पर तुरंत प्रतिक्रिया देती है। वीएचपी के जिला अध्यक्ष राजेश आंजना ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे पत्र में इसे सुनियोजित जिहाद करार दिया है। साथ ही हिंदू मानदंडों और आस्था पर कुठाराघात बताया है। पत्र के जरिए प्रदेश भर में खुले एप्पल के स्टोर को बंद करने की मांग की गई है।  'एप्पल की डेटा फीडिंग में पक्षपात' पंडित पाठक ने इसे एप्पल की डेटा फीडिंग में पक्षपात बताया। उन्होंने कहा कि भारत एप्पल के लिए एक बड़ा बाजार है और यहां करोड़ों यूजर्स हैं। ऐसे में सभी धर्मों का समान सम्मान होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसमें सुधार नहीं किया गया तो उपभोक्ताओं से आईफोन का बहिष्कार करने की अपील की जाएगी। 'धार्मिक भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा' मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज ने भी इसका समर्थन किया। स्थानीय आईफोन यूजर्स में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि तकनीक में किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। विश्व हिंदू परिषद, जिला उज्जैन और बजरंग दल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।  फिलहाल इस पर एप्पल की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई  विहिप का कहना है कि जब तक एप्पल इस कथित तकनीकी खामी को दूर नहीं करता, तब तक प्रदेश में आईफोन के सभी स्टोर्स बंद कराए जाएं। फिलहाल एप्पल की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, उज्जैन से उठा यह विरोध अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है और बड़े आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।  

स्मार्ट पुलिसिंग में एआई बनेगा ‘फोर्स मल्टीप्लायर’, अपराध रोकथाम में मिलेगी नई गति

 जयपुर  29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दूसरे दिन गुरुवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 'एआई फॉर स्मार्ट पुलिसिंग एंड पब्लिक सेफ्टी' विषय पर प्लेनरी सत्र आयोजित किया गया। सत्र की अध्यक्षता ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गोपेश अग्रवाल ने की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम एआई के उपयोग से पुलिसिंग अब प्रतिक्रियात्मक (रिएक्टिव) से निवारक (प्रिवेंटिव) स्वरूप की ओर बढ़ रही है। इससे अपराधों में कमी आई है तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया समय भी घटा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश के सभी राज्यों की पुलिस एआई का उपयोग कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को मानव संसाधन के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पुलिसिंग में 'फोर्स मल्टीप्लायर' के रूप में देखा जाना चाहिए। स्वदेशी और जिम्मेदार एआई इस्तेमाल से सुरक्षित होगी पुलिसिंग सत्र के पैनलिस्ट डॉ. अमनदीप कपूर, निदेशक, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, जयपुर ने कहा कि एआई के किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने एआई, ब्लॉकचेन, डेटा कंप्यूटिंग, सीसीटीएनएस 2.0, ई-साक्ष्य, एजेंटिक एआई, एज-आधारित एलएलएम, म्यूल हंटिंग ऐप तथा डार्क वेब जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि ये तकनीकें आधुनिक पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एवं व्यापक स्तर पर एआई के उपयोग के लिए संप्रभु, जिम्मेदार और स्वदेशी एआई का विकास आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बीपीआरएंडडी इस दिशा में प्रशिक्षण प्रदान करने तथा आवश्यक प्रणालियां विकसित करने का कार्य कर रहा है। संतुलित और सुरक्षित एआई अपनाने पर विशेषज्ञों ने दिया जोर पैनलिस्ट कोम्मी किशोर, पुलिस अधीक्षक, एलुरु (आंध्र प्रदेश) ने कहा कि वर्तमान समय में सभी पुलिस बलों का एआई से परिचित होना आवश्यक है। उन्होंने पुलिस द्वारा उपयोग में लाई जा रही विभिन्न जांच संबंधी एप्लीकेशंस का उल्लेख करते हुए भाषा अनुवाद की उपयोगिता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई के उपयोग से दोषसिद्धि (कन्विक्शन) की दर में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में एआई के बढ़ते उपयोग के बीच बहुत तेजी और बहुत धीमी गति से आगे बढ़ने के बजाय संतुलित एवं चरणबद्ध तरीके से इसे अपनाना आवश्यक है। बिना उचित नियमन के नवाचार जोखिमपूर्ण हो सकता है तथा पुलिस जांच में 'एल्गोरिद्मिक बायस' से बचना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य पुलिसिंग को प्रोएक्टिव बनाना होना चाहिए, केवल प्रिडिक्टिव नहीं। डेटा फ्यूजन सेंटर से मजबूत होगी जांच व्यवस्था पैनलिस्ट सलमान ताज, निदेशक, सीडीटीआई, हैदराबाद ने कहा कि पुलिसिंग से संबंधित अधिकांश डेटा विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बिखरा हुआ है, जिसे एकीकृत कर डेटा फ्यूजन सेंटर के माध्यम से एक स्थान पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीडियो एनालिटिक्स में एआई का उपयोग पुलिस जांच को अधिक सटीक और प्रभावी बना सकता है। उन्होंने एआई डेटा की संप्रभुता को सुरक्षित एवं विश्वसनीय उपयोग के लिए अनिवार्य बताया। सत्र के समापन पर विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद हुआ। अंत में राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) श्री विजय कुमार सिंह ने सभी पैनलिस्टों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। सत्र में एआई आधारित स्मार्ट पुलिसिंग, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना तथा आधुनिक जांच प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार एवं संतुलित उपयोग पर विशेष बल दिया गया।