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Suspended CSP नेहा पच्चीसिया की तलाश तेज, 13 दिन से फरार; गृह ग्राम में भी पुलिस को नहीं मिला पता

कटनी  निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया पुलिस की पकड़ से दूर है। सीएसपी सहित उनके करीबी क्षितिज राज व मारूफ अहमद के खिलाफ कुठला थाने में मामला दर्ज हुए 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक तीनों में से किसी को भी पकड़ा नहीं जा सका। गृह ग्राम में भी पुलिस के हाथ लगी निराशा बहुचर्चित जमीन की सौदेबाजी और भ्रष्टाचार के मामले में फरार निलंबित सीएसपी की तलाश में मंगलवार को टीम राजगढ़ जिले के पचोर स्थित सीएसपी के गृह ग्राम पहुंची, लेकिन वहां भी पुलिस को सीएसपी का कोई सुराग नहीं मिला। टीम ने परिजनों से जानकारी ली और उसके बाद खाली हाथ वापस लौट आई। रमेश लोधी के दर्ज कराए गए कथन दूसरी तरफ इसी मामले से जुड़े हत्या के आरोप में झिंझरी जेल में कैद रमेश लोधी को एसआईटी जिला न्यायालय लेकर पहुंची, जहां पर उसके कथन दर्ज कराए गए। जमानत अर्जी खारिज, दस हजार का इनाम घोषित सीएसपी की जिला अदालत से अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद भी पुलिस अब तक तीनों आरोपितों तक नहीं पहुंच सकी है। मामले में पुलिस ने सीएसपी सहित तीनों आरोपितों पर दस हजार रूपये का इनाम भी घोषित किया और लुक आउट नोटिस भी जारी कर दिया है। क्या है मामला? दरअसल, कटनी जिले के कुठला थाना में 19 अगस्त को दर्ज अपराध क्रमांक 738/2026 ने पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरीं। शिकायतकर्ता आकाश लोधी ने आरोप लगाया कि करीब 1.07 करोड़ रुपये मूल्य की पैतृक जमीन की रजिस्ट्री तत्कालीन सीएसपी नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों ने दबाव बनाकर कराई। आरोप है कि जमीन के बदले केवल 15 लाख रुपये का चेक दिया गया, जबकि बाद में रजिस्ट्री निरस्त कर जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम दर्ज करा दी गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि जहां जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.46 लाख रुपये था, वहीं दस्तावेजों में इसकी कीमत महज 18.20 लाख रुपये दर्शाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की कमान पहले कटनी एएसपी कमल मौर्य ने संभाली। बाद में जांच जबलपुर एएसपी अनु बेनीवाल को सौंपी गई और इसके बाद कटनी जिले में एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच के लिए आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया, जिसकी जिम्मेदारी एएसपी अंजना तिवारी को सौंपी गई। जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7(सी), 12 और 13 भी जोड़ी गईं, जिससे मामला और गंभीर हो गया। जांच के बीच एसआईटी ने सील किए गए सीएसपी कार्यालय की सील खोलकर तलाशी ली और वहां से महत्वपूर्ण कागजी दस्तावेजों के साथ डिजिटल साक्ष्य जब्त किए। इन साक्ष्यों की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है, ताकि पूरे मामले और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ा जा सके। इस बीच प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश लीला लोधी की अदालत ने नेहा पच्चीसिया और क्षितिज राज बारापत्रे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, केस डायरी और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद दोनों को राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायालय के इस आदेश के बाद पुलिस के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी का रास्ता और मजबूत हो गया है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि एफआईआर दर्ज होने के 14 दिन बाद भी इनाम घोषित होने, लुकआउट नोटिस जारी होने, एसआईटी के गठन और लगातार दबिश के बावजूद आखिर तीनों आरोपी पुलिस की पहुंच से बाहर कैसे हैं? यही सवाल अब पूरे मामले की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर भी खड़े हो रहे हैं। आरोपियों पर इनाम घोषित उधर, फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस ने नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। साथ ही इनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किए गए, ताकि देश छोड़कर भागने की किसी भी कोशिश को रोका जा सके। हालांकि, इन सभी कार्रवाइयों के बावजूद तीनों आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।  जमीन सौदे और पद के दुरुपयोग का है मामला     निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद के खिलाफ जमीन सौदे और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों में एफआईआर दर्ज है।     आरोप है की हत्या के मामले में आरोपित परिवार पर जमीन के सौदे को लेकर दबाव बनाया गया और कम कीमत में रजिस्ट्री करा ली गई। जांच के दौरान जमीन की कीमत और भुगतान को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आने की बात भी कहीं जा रही है।  

राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए जीतू पटवारी का CM मोहन यादव को पत्र, नेहरू स्टेडियम देने की मांग

इंदौर  12 सितंबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी मध्य प्रदेश के  में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भाग लेंगे। कांग्रेस यह आयोजन नेहरू स्टेडियम में करना चाहती है। इसके लिए प्रस्ताव दिया गया है लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार दो सितंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर स्टेडियम उपलब्ध कराने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक कार्यक्रम या सभा नहीं है। इसमें विद्यार्थियों और युवाओं के साथ सीधा संवाद होगा। कार्यक्रम में शिक्षा, युवाओं के अधिकार, रोजगार, अवसर और भविष्य से जुड़े मुद्दों को चर्चा होगी। राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष के रूप में युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इंदौर का स्टेडियम उपलब्ध कराया जाए ‘छात्रों की गूंज’ का उद्देश्य भी विद्यार्थियों को अपनी बात रखने का मंच देना और शिक्षा एवं भविष्य से जुड़े सवालों पर खुला संवाद स्थापित करना है। इंदौर को आयोजन के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यह प्रदेश का प्रमुख शैक्षणिक और युवा केंद्र है। राहुल गांधी के संवैधानिक पद का भी उल्लेख करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष के विद्यार्थियों के साथ संवाद के लिए इंदौर का नेहरू स्टेडियम उपलब्ध कराया जाना आयोजन के महत्व के अनुरूप होगा। प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि प्रस्ताव पर संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने और स्टेडियम उपलब्ध कराने की अनुमति देने के लिए निर्देशित किया जाए।  

Raisen Jail Firing: कैदी ने जेल प्रहरी पर चलाई गोली, हालत गंभीर; भोपाल किया गया रेफर

रायसेन  रायसेन जिला जेल में बुधवार को सुबह एक कैदी ने जेल प्रहरी को गोली मार दी। यह गोली प्रहरी की कमर के नीचे लगी है, गंभीर हालत में उसे भोपाल रैफर किया गया है। पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है कि इस कैदी के पास जेल में कट्टा कैसे पहुंचा। रायसेन जिला जेल में बुधवार की सुबह 9 बजे जब सभी कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात थे। तभी नीलेश ठाकुर नाम का आरोपी, जिस पर पहले से ही 307 और 302 के मुकदमे चल रहे हैं। उसने जेल के भीतर कट्टे से जेल प्रहरी दिग्विजय सिंह पर फायर कर दिया। यह गोली जेल प्रहरी के कमर के नीचे धंस गई। डाक्टरों ने जांच के बाद गंभीर हालत में भोपाल के एम्स अस्पताल रेफर कर दिया है।  भागने की फिराक में था कैदी बताया जा रहा है कि कैदी नीलेश जेल का गेट खुलवाकर भागने की फिराक में था। तभी उसने जेल प्रहरी पर गोली चला दी। यह भी बताया जा रहा है कि स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन कार्यक्रम होने वाला था। इसी कार्यक्रम के लिए फलों की टोकरी लेकर कैदी नीलेश गेट पर आया था तभी उसने गोली चला दी। नीलेश रायसेन जिले के बरेली के पास दिमाड़ा गांव का रहने वाला है। वह विचाराधीन कैदी है। एसडीओपी प्रिभा शर्मा के बताया कि नीलेश ठाकुर का आपराधिक रिकार्ड रहा है। मामले की जांच की जा रही है। एम्स भोपाल रेफर किया रायसेन जिला अस्पताल के चिकित्सक अभिषेक सागर के मुताबिक मरीज की पीठ के ऊपरी भाग में गोली लगी है। एक्सरे- में गोली फेफड़े के निचले भाग में नजर आ रही है। फेफड़े में पानी भी जमा होना शुरू हो गया है। मरीज की जान खतरे में है, इसलिए उसे एम्स भोपाल रेफर कर दिया है। एसपी आशुतोष गुप्ता बोले- कट्टा जेल में कैसे गया, जांच होगी घटना के बाद से ही जिला जेल में बड़े अधिकारियों का जमावड़ा है। एसपी अशुतोष गुप्ता समेत कई बड़े अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए थे। एसपी आशुतोष गुप्ता ने कहा कि चूंकि घटना जेल के भीतर हुई है, इस मामले में जेल अधिकारियों के साथ जांच की जाएगी। गुप्ता ने आरोपी के आपराधिक रिकार्ड वाला बताया और कहा कि उस पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज है। गुप्ता ने यह भी कहा कि जेल के भीतर कट्टा कैसे गया इसकी भी जांच की जा रही है। जेल के स्टाफ से भी पूछताछ की जाएगी।

सफाईकर्मियों के प्रदर्शन में हंगामा, हरियाणा में ठेकेदार से भिड़े कर्मचारी; सरकारी वाहन में तोड़फोड़

हिसार/पानीपत. हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल 28वें दिन भी जारी है। 27वें दिन मंगलवार को वैकल्पिक सफाई व्यवस्था के विरोध में टकराव के मामले सामने आए। कैथल के सीवन में सफाई व्यवस्था का निरीक्षण कर लौट रहे नगर पालिका अधिकारियों की सरकारी जीप पर सफाई कर्मचारियों व उनके स्वजन द्वारा कस्सी से कथित हमला किया गया। वार से जीप का पिछला शीशा टूट गया और कनिष्ठ अभियंता व लिपिक बाल-बाल बच गए। जींद में चार दिन बाद कूड़ा उठाने पहुंचे ठेकेदार के कर्मचारियों का हड़तालियों ने विरोध किया और हाथापाई हुई। हिसार में कचरा उठान के दौरान पुलिस से टकराव में पांच पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें आईं। फतेहाबाद में पुलिस सुरक्षा में उठान कराया गया। बढ़ती अव्यवस्था के बीच कई सामाजिक संगठन अब हड़ताल के तौर-तरीकों पर सवाल उठाने लगे हैं। उनका कहना है कि मांगों को लेकर आंदोलन के अधिकार के साथ आमजन की सुविधाओं और सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान रखना भी जरूरी है। बारिश और बाजारों में कचरे से बढ़ी परेशानी यमुनानगर में हड़ताल के 27वें दिन बारिश के कारण डंपिंग प्वाइंटों का कचरा बहकर गलियों और मोहल्लों तक पहुंचा। पानीपत के पालिका बाजार में कचरा डाले जाने से दुकानदार परेशान रहे, हालांकि निजी एजेंसियों ने करीब 300 टन कचरा उठाया। भिवानी में घर-घर कचरा उठान प्रभावित है। अंबाला कैंट में 250 कर्मचारी हड़ताल पर हैं और वैकल्पिक व्यवस्था भी कमजोर पड़ गई है। कैथल में पुलिस की मौजूदगी में डंपिंग प्वाइंटों से कचरा उठाया गया, जबकि रोहतक में कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर सरकार का पुतला फूंका। हिसार में उठान के दौरान पुलिस से टकराव हिसार में नगर निगम के 667 सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। मंगलवार को सेक्टर 9-11 और अर्बन एस्टेट में कचरा संग्रहण कराया गया। अर्बन एस्टेट में हड़ताली कर्मचारियों ने इसका विरोध किया। उन्हें पकड़ने के दौरान करीब पांच पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें लगीं और कई कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया। फतेहाबाद में नगर परिषद ने पुलिस सुरक्षा में डोर-टू-डोर कचरा उठवाया। 15 वाहनों के साथ पुलिस बल तैनात रहा और करीब 50 कर्मचारियों ने लगभग 150 टन कचरा उठाया। कार्यालय में कूड़ा डालने के मामले में 15 कर्मियों के खिलाफ शिकायत दी गई है। झज्जर में छह दिन बाद फिर लगे कूड़े के ढेर झज्जर में 125 टन कचरा उठाए जाने के छह दिन बाद फिर ढेर लग गए हैं। कर्मचारियों ने दिन में सरकार का पुतला फूंका और शवयात्रा निकाली।

सरहिंद नहर में दरार से मचा हड़कंप, रूपनगर के गांवों में भरा पानी; अलर्ट जारी

रूप नगर. श्री चमकौर साहिब के नजदीकी गांव भैरों माजरा के पास बुधवार सुबह सरहिंद नहर अचानक एक किनारे से टूट गई। इससे आसपास के कई गांवों में पानी घुसने से लोगों में दहशत का माहौल बन गया। नहर फटने के कारण तीन मोटरसाइकिलें पानी के तेज बहाव में बह जाने की भी सूचना है। हालांकि, इस घटना में जानी नुकसान होने से बचाव हो गया। जानकारी के अनुसार, क्षेत्रवासियों ने कुछ दिन पहले नहर के किनारे छोटी-सी खड्ड से पानी रिसता हुआ देखा था। इसकी सूचना संबंधित विभाग को भी दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि विभाग ने समय रहते मौके पर पहुंचकर रिसाव को बंद करने के लिए कार्रवाई की होती तो नहर का किनारा टूटने से रोका जा सकता था। बताया जा रहा है कि बाद में लोगों की मदद से मोटरसाइकिल बचा ली गईं। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे एक किनारा टूटा और पानी तेजी से आसपास के क्षेत्र में फैलने लगा। इसी दौरान गांव भैरों माजरा के कुछ युवक जिम जाने के लिए मोटरसाइकिलों पर निकले थे। अचानक पानी के तेज बहाव और जमीन धंसने के कारण वे गिर पड़े और उनकी मोटर साइकिलें हाथ से छूटकर पानी में बह गईं। युवकों ने किसी तरह खुद को सुरक्षित बचा लिया। घटना के बाद इलाके में संबंधित विभाग के प्रति लोगों में रोष देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने समय रहते विभाग को स्थिति से अवगत करवा दिया था, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। उधर, घटना की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज जसवीर सिंह गढ़ी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मिलकर नहर के किनारे को भरने तथा पानी के बहाव को रोकने के प्रयासों में जुट गए। प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

नारायणपुर में शिक्षा को मिला नया आयाम, छात्रों की प्रतियोगी परीक्षा तैयारी पर भी फोकस

नारायणपुर. जिला मुख्यालय में छात्रों के लिए संचालित कोचिंग, लाइब्रेरी और जिम की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया. सीईओ ठाकुर ने आकस्मिक निरीक्षण कर छात्रों की उपस्थिति और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए नवीन और उपयोगी पुस्तकों की स्थिति देखी गई. लाइब्रेरी में पढ़ाई का बेहतर माहौल और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया. जिम में विद्यार्थियों के लिए जरूरी खेल और व्यायाम सामग्री की जरूरत भी जानी गई. अधिकारियों ने छात्रों और शिक्षकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं. छात्रों की जरूरत के अनुसार मूलभूत सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया. इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर तैयारी का माहौल देना है. कोचिंग के साथ लाइब्रेरी और जिम जैसी सुविधाओं को भी मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है. प्रशासन की कोशिश है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को बाहर जाने की मजबूरी कम हो. अब इन व्यवस्थाओं में सुधार और सुविधाओं की उपलब्धता की वास्तविक तस्वीर आगामी निरीक्षण में सामने आएगी.

संजय शर्मा पर ED का शिकंजा, फर्जी टोल वसूली से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ठिकानों पर छापेमारी

नरसिंहपुर मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर से बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां तेंदूखेड़ा राजमार्ग में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने छापा मारा है। बताया जा रहा है कि शराब कारोबारी रामलाल झारिया के ठिकानों पर दबिश दी गई है। रामलाल झारिया पूर्व विधायक संजय शर्मा का करीबी बताया जा रहा है। फिलहाल ईडी के अधिकारी दस्तावेजों की जांच पड़ताल में जुटे हुए हैं। घर और कार्यालय में मौजूद कागजात खंगाल रहे है। NHAI के अलग-अलग टोल प्लाजा पर फर्जी टोल वसूली से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ED ने बुधवार को PMLA की धारा-17 के तहत एक साथ 14 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। इसी सिलसिले में दिल्ली से आई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने तेंदूखेड़ा से पूर्व कांग्रेस विधायक संजय शर्मा के नरसिंहपुर हाईवे स्थित कार्यालय पर छापेमारी की। जानकारी के अनुसार, करीब आधा दर्जन गाड़ियों से पहुंची टीम ने जिले में उनके अलग-अलग कार्यालयों में जांच शुरू की है। बताया जा रहा है कि ED की टीम तेंदूखेड़ा और देवरी स्थित कार्यालयों में भी पहुंची है। अधिकारी कार्यालय के अंदर दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय फर्जी टोल वसूली मामले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता स्थित परिसरों पर तलाशी ले रहा है। यह खबर अभी आई है। इसे सबसे पहले आप लल्लूराम डॉट कॉम (Lalluram.com) पर पढ़ रहे हैं। जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इस खबर को अपडेट कर रहे हैं। इस न्यूज से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए पेज को रिफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें। फर्जी रसीद बनाकर रकम डायवर्ट करने का आरोप ED के अनुसार टोल वसूली में अनधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन के इस्तेमाल से फर्जी टोल रसीदें तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इसके जरिए टोल से वसूली गई रकम को NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक फॉरेंसिक परीक्षण और NHAI के रिकॉर्ड की जांच में अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। तलाशी के दौरान डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े लाभार्थियों और अपराध से अर्जित रकम का पता लगाया जा रहा है। 14 राज्यों में एक साथ कार्रवाई ED की लखनऊ जोनल ऑफिस की टीमों ने PMLA की धारा 17 के तहत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्यप्रदेश, NCR और कोलकाता समेत कई स्थानों पर सर्चिंग शुरू की है। मामले की जांच 22 जनवरी 2025 की FIR संख्या 17 और 19 मई 2025 को दर्ज ECIR संख्या ECIR/ASZO/04/2025 के आधार पर की जा रही है। ED अब टोल वसूली में कथित गड़बड़ी से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। नरसिंहपुर-छिंदवाड़ा हाईवे के टोल में गड़बड़ी का आरोप ED की छापेमारी में नरसिंहपुर-छिंदवाड़ा नेशनल हाईवे पर टोल वसूली में गड़बड़ी सामने आने की जानकारी है। बताया जा रहा है कि इस मार्ग की टोल वसूली का काम संजय शर्मा की कंपनी के पास है। संजय शर्मा कांग्रेस से विधायक रहे हैं। ED ने NHAI के टोल प्लाजा पर फर्जी टोल वसूली और रकम की हेराफेरी के मामले में कार्रवाई शुरू की है। जांच एजेंसी के मुताबिक, टोल वसूली में अनधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर फर्जी टोल रसीदें तैयार की जा रही थीं। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए टोल से वसूली गई रकम को NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किया गया। फॉरेंसिक परीक्षण और NHAI के रिकॉर्ड की जांच में अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि होने की बात ED ने कही है। एमपी-यूपी समेत कई राज्यों में ईडी की सर्चिंग ED की टीमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता समेत कई स्थानों पर परिसरों की तलाशी ले रही हैं। कार्रवाई PMLA की धारा 17 के तहत की जा रही है। तलाशी का मकसद फर्जीवाड़े से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाना, नेटवर्क से जुड़े लाभार्थियों की पहचान करना और अपराध से अर्जित रकम का पता लगाना है। ED कथित फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है। FIR और ECIR के आधार पर जांच यह जांच 22 जनवरी 2025 की FIR संख्या 17 और 19 मई 2025 को दर्ज ECIR संख्या ECIR/ASZO/04/2025 के आधार पर की जा रही है। ED की कार्रवाई को लेकर अभी जांच जारी है। शर्मा पर राहुल के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की बड़ी जिम्मेदारी दो दर्जन से अधिक सीआरपी के जवान मौके पर मौजूद हैं। स्थानीय पुलिस को इसकी कोई जानकारी नहीं है। जानकारी के मुताबिक, इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की बड़ी जिम्मेदारी संजय शर्मा को सौंपी गई है।

दिशा सालियान मौत मामले में बड़ा ट्विस्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर CBI करेगी जांच

मुंबई  दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत के करीब छह साल बाद मामले में बड़ा मोड़ आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर को दिशा सालियान की मौत की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में FIR दर्ज करने और जांच CBI को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया है। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर CBI जांच और FIR दर्ज करने की मांग की थी। उनकी याचिका में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोप लगाए गए थे। हालांकि, कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि आदित्य ठाकरे या किसी अन्य व्यक्ति को दोषी ठहरा दिया गया है। जांच के दौरान सबूत मिलने पर ही किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी। CBI को क्या-क्या करना होगा? सतीश सालियान की ओर से पेश अधिवक्ता नीलेश ओझा ने कोर्ट के आदेश के बाद बताया कि अदालत ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उनके मुताबिक, कोर्ट ने CBI को सतीश सालियान का बयान दर्ज करने, FIR रजिस्टर करने और जांच के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। इसके अलावा मालवणी पुलिस स्टेशन को मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड CBI को सौंपने का निर्देश दिया गया है। ओझा के मुताबिक, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में जिस व्यक्ति के खिलाफ सबूत मिलेगा, उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सिर्फ नाम या आरोप के आधार पर किसी को आरोपी नहीं बनाया जाएगा। ओझा ने यह भी कहा कि अगर CBI जांच के बाद कोई नेगेटिव रिपोर्ट दाखिल करती है तो सतीश सालियान को उस रिपोर्ट पर आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा। छह साल पुराने मामले में क्यों आया नया मोड़? दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। मुंबई पुलिस ने शुरुआत में इसे दुर्घटना से हुई मौत की रिपोर्ट (ADR) के तौर पर दर्ज किया था और जांच के बाद इसे आत्महत्या का मामला बताया था। बाद में महाराष्ट्र सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया था। पुलिस और SIT की ओर से पहले अदालत में कहा गया था कि जांच में किसी तरह की आपराधिक साजिश या फाउल प्ले का सबूत नहीं मिला। 2025 में पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट को यह भी बताया था कि पोस्टमॉर्टम और अन्य जांच से यौन या शारीरिक हमले के संकेत नहीं मिले। लेकिन सतीश सालियान ने बाद में अपनी बेटी की मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए ताजा जांच और FIR की मांग की। उनका आरोप था कि उनकी बेटी के साथ बलात्कार और हत्या हुई और मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच को प्रभावित किया गया। ये आरोप अभी आरोप मात्र हैं और जांच के अधीन हैं। हाईकोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए थे गंभीर सवाल अगस्त में सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए थे। अदालत ने पूछा था कि जब परिवार की ओर से मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया गया था तो FIR दर्ज करने में क्या बाधा थी? अदालत ने यह भी सवाल किया था कि 14वीं मंजिल से गिरने के मामले में मेडिकल रिपोर्ट और चोटों से जुड़े पहलुओं की पर्याप्त जांच हुई थी या नहीं। 28 अगस्त को सुनवाई के दौरान अदालत ने CrPC की धारा 174 के तहत हुई लंबी जांच की कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि ऐसी जांच किसी व्यक्ति को आपराधिक मामले में ‘क्लीन चिट’ देने का विकल्प नहीं हो सकती और मामले को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। इसी सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 2 सितंबर को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। बिना सबूत किसी को भी आरोपी न माना जाए' हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक जांच में किसी के खिलाफ ठोस सबूत न मिल जाएं, तब तक किसी को भी आरोपी न माना जाए। अदालत ने कहा, "अगर कोई गंभीर अपराध (कॉग्निज़ेबल ऑफ़ेंस) बनता है, तो इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए। अगर कोई गंभीर अपराध नहीं बनता है, तो जजों ने जांच अधिकारी (I.O.) को आदेश दिया है कि वे सक्षम अदालत में मामले को बंद करने की उचित प्रक्रिया शुरू करें।" दिशा के पिता को प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने की इजाजत दी गई है। CBI दर्ज करेगी FIR, वरिष्ठ अधिकारी संभालेंगे जांच हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में संबंधित प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की जाएगी। इसके बाद CBI जांच को आगे बढ़ाएगी। हाईकोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिया है कि जांच के लिए किसी वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी को नियुक्त किया जाए, ताकि मामले की जांच निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से हो सके। दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई में एक बिल्डिंग से गिरने के बाद हुई थी। उस समय पुलिस ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत के रूप में दर्ज किया था। बाद में मामले को लेकर कई सवाल और आरोप सामने आए तथा दिशा के पिता ने स्वतंत्र जांच की मांग की। सतीश सालियान का बयान भी दर्ज होगा CBI जांच के दौरान दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज किया जाएगा। उनके आरोपों और उन परिस्थितियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली जाएगी। हाईकोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका था कि किसी मामले में कानूनी रूप से उचित जांच और प्रक्रिया का पालन जरूरी है, ताकि परिवार को मामले में उचित निष्कर्ष और न्यायिक रूप से स्वीकार्य क्लोजर मिल सके। आदित्य ठाकरे को लेकर कोर्ट का अहम रुख मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे का नाम राजनीतिक और कानूनी बहस के दौरान सामने आता रहा है। हालांकि, CBI जांच का आदेश दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आदित्य ठाकरे या किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी … Read more

MP में OBC-EWS छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति का मामला SC पहुंचा, 100% भुगतान पर सरकार से जवाब तलब

जबलपुर  मध्य प्रदेश में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की पूरी फीस प्रतिपूर्ति नहीं मिलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश शासन और भोपाल स्थित पिछड़ा वर्ग कल्याण आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामला खरगोन निवासी डॉ. दिनेश चंद्र पाटीदार से जुड़ा है। उन्होंने बीडीएस की पढ़ाई के बाद वर्ष 2014 में हरियाणा के अंबाला स्थित एक डेंटल कॉलेज में तीन वर्षीय एमडीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। संबंधित योजना के तहत दूसरे राज्य में पढ़ाई करने वाले पात्र विद्यार्थियों की फीस की प्रतिपूर्ति उनके गृह राज्य द्वारा किए जाने और बाद में केंद्र सरकार से उसका पुनर्भुगतान होने का प्रावधान बताया गया है। 21 लाख रुपये फीस जमा की, छात्रवृत्ति में मिले सिर्फ 84,380 रुपये डॉ. पाटीदार के अनुसार, एमडीएस की पढ़ाई के दौरान उन्होंने कॉलेज को सात लाख रुपये प्रतिवर्ष, यानी तीन वर्षों में कुल 21 लाख रुपये फीस के रूप में जमा किए। हालांकि, मध्य प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से उन्हें पूरी फीस के बजाय केवल 84,380 रुपये छात्रवृत्ति के रूप में दिए गए। फीस प्रतिपूर्ति की राशि को लेकर उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में यह दिया तर्क याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि केंद्र प्रायोजित पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों की पूरी फीस प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। ऐसे में राज्य सरकार केवल धन की कमी का हवाला देकर पात्र विद्यार्थी की प्रतिपूर्ति रोक नहीं सकती। मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रदेश के ऐसे मेडिकल और डेंटल विद्यार्थियों को भी उम्मीद जगी है, जिन्हें पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तहत पूरी फीस प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाई है। हालांकि, मामले में अंतिम राहत सुप्रीम कोर्ट के आगे के आदेश और सरकार के जवाब पर निर्भर करेगी।

E20 Petrol से माइलेज घटा या गाड़ी हुई खराब? गोवा सरकार ने शिकायत के लिए खोला रास्ता

पणजी E20 पेट्रोल को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच गोवा सरकार ने विधानसभा में बड़ा दावा किया है. मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि राज्य में E20 पेट्रोल शुरू होने के बाद अब तक किसी ग्राहक, वाहन मालिक, ऑटोमोबाइल एसोसिएशन या गैराज की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है. मुख्यमंत्री के पास सिविल सप्लाई और कंज्यूमर अफेयर्स विभाग भी है. उन्होंने कहा कि अगर किसी वाहन मालिक को E20 पेट्रोल से जुड़ी कोई परेशानी है, तो वह सिविल सप्लाई विभाग में शिकायत कर सकता है।  विधानसभा में विधायक वेन्जी वेगास, विजय सरदेसाई और क्रूज सिल्वा ने E20 पेट्रोल का मुद्दा उठाया था. विधायकों ने खास तौर पर 2023 से पहले बने वाहनों को लेकर चिंता जताई. उनका कहना था कि ऐसे वाहनों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से माइलेज कम हो रहा है, परफॉर्मेंस घट रहा और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ रहा है. टैक्सी चालकों और बाइक चलाने वालों पर इसका असर ज्यादा पड़ने की बात भी कही गई. विधायकों ने मांग की कि ग्राहकों को बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल या अनब्लेंडेड पेट्रोल चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए।  मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में कहा कि E20 पेट्रोल केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है और इसे सेंट्रल पॉलिसी के तहत लागू किया गया है. गोवा में भी इस पॉलिसी को 2023 से लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि अभी तक कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है, लेकिन इसके बावजूद सरकार स्थिति पर नजर रखेगी. मुख्यमंत्री ने सिविल सप्लाई विभाग को स्थिति की जांच, निगरानी और पेट्रोल की टेस्टिंग करने के निर्देश देने की बात कही  अपने लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि गोवा में E20 पेट्रोल तीन सरकारी तेल कंपनियों के जरिए बेचा जा रहा है. साल 2025 से राज्य के 157 रिटेल आउटलेट्स पर इसकी सप्लाई की जा रही है. सरकार का कहना है कि E20 की सेफ्टी को लेकर अलग-अलग संस्थानों की स्टडी और फील्ड ट्रायल हो चुके हैं. इनमें ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स (SIAM), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और IIP जैसी संस्थाएं शामिल हैं।  5 फीसदी तक घट सकता है माइलेज मुख्यमंत्री ने यह भी माना कि जिन वाहनों को E10 पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन किया गया है, उनमें माइलेज में कुछ कमी आ सकती है. उनके मुताबिक E10 कम्प्लायंट व्हीकल्स में E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद माइलेज में करीब 3 से 5 फीसदी तक गिरावट आ सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि वाहन कंपनियां E20 पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की वारंटी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।  सरकार के मुताबिक देश में 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया वाहन और करीब 3 करोड़ कारें ब्लेंडेड फ्यूल पर चल रही हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक इंजन फेल होने की ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है, जिसे सीधे ब्लेंडेड पेट्रोल से जोड़ा जा सके. उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोल में मिलावट और फ्यूल की क्वॉलिटी जांच के लिए हाल के दिनों में देशभर के पेट्रोल पंपों पर 30,000 से ज्यादा क्वालिटी चेक किए गए हैं।  शिकायत मिलने पर होगी जांच गोवा सरकार का कहना है कि फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर राज्य में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है. हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि अगर वाहन मालिकों या ग्राहकों को माइलेज, परफॉर्मेंस या किसी अन्य तरह की परेशानी महसूस होती है, तो वे सिविल सप्लाई विभाग तक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके बाद मामले की जांच और फ्यूल की टेस्टिंग की जाएगी।