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Chandigarh Master Plan 2031: आज दिल्ली में बड़ा मंथन, ऊंची इमारतों, FAR और फ्रीहोल्ड प्रस्ताव पर होगी चर्चा

चंडीगढ़  शहर के भविष्य से जुड़े कई अहम फैसलों पर आज दिल्ली में मंथन होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में चंडीगढ़ के मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित बदलावों के साथ पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने, व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने और मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इन फैसलों का सीधा असर शहर के विकास, संपत्ति व्यवस्था और नगर निगम के कामकाज पर पड़ सकता है। यूटी प्रशासन की ओर से गृह सचिव रामनदीप बराड़, मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, वित्त सचिव दीपर्वा लाकरा और उपायुक्त निशांत कुमार यादव के बैठक में शामिल होने की संभावना है। अधिकारी प्रस्तावों पर प्रस्तुति देंगे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के साथ इनमें बदलाव या नए सुझाव भी दिए जा सकते हैं। मास्टर प्लान में ऊंची इमारतों का रास्ता होगा साफ मास्टर प्लान-2031 में संशोधन को लेकर प्रशासन ने ड्राफ्ट अधिसूचित कर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित बदलावों में चिन्हित परिधीय और फेज-3 क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाकर 3.0 करने का प्रावधान है। वहीं चयनित बाहरी सेक्टरों, फेज-3 और औद्योगिक क्षेत्रों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों को मंजूरी देने का प्रस्ताव है। औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में बड़े प्लाटों को विभाजित करने, फेज-1 से बाहर स्कूल-कालेज और सांस्कृतिक संस्थानों के लिए एफएआर व ऊंचाई सीमा में राहत देने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा चिन्हित इलाकों में हाईराइज और मिश्रित भू-उपयोग के जरिए बढ़ती आवासीय जरूरतों को पूरा करने की योजना है। प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, गृह मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित संशोधनों को हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत मास्टर प्लान में बदलाव की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। फ्रीहोल्ड से करोड़ों की संपत्तियां होंगी अन-लॉक लीजहोल्ड व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने का प्रस्ताव भी बैठक में महत्वपूर्ण रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर में करोड़ों रुपये की संपत्तियां अनलाक होंगी। संपत्ति मालिकों को राहत मिलने के साथ प्रशासन का राजस्व भी बढ़ेगा और कारोबार करना आसान होगा। यूटी प्रशासन ने मई में इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर गृह मंत्रालय को भेजा था। पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को मालिकाना हक की उम्मीद पुनर्वास कालोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने का प्रस्ताव भी लंबे समय से लंबित है। प्रशासन ने इस संबंध में भी गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। इस पर फैसला होने से हजारों परिवारों की संपत्तियों से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। मेयर का कार्यकाल ढाई साल करने पर भी नजर मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने का प्रस्ताव भी बैठक में अहम रहेगा। नगर निगम के मौजूदा सदन का कार्यकाल समाप्त होने की ओर है और आने वाले महीनों में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में मेयर का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला निगम के कामकाज के साथ-साथ आगामी राजनीतिक बदलाव पर भी असर डाल सकता है। मंजूरी मिली तो आगे बढ़ेगी प्रक्रिया प्रशासन की नजर अब दिल्ली में होने वाली बैठक के फैसले पर है। अधिकारियों का कहना है कि सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद संबंधित प्रस्तावों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में चंडीगढ़ के विकास और प्रशासन से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी सुझाव आने की संभावना है।  

इंदौर में भारत-वेस्टइंडीज T20 का रोमांच, 1000 से 12,500 रुपये तक टिकट; ऐसे करें ऑनलाइन बुकिंग

  इंदौर इंदौर शहर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच हो रहा है। अगर आप भी इस बार मैच का लुफ्त उठाना चाहते हैं तो ऑनलाइन टिकट ले सकते हैं। इस मैच के लिए मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने टिकट दर घोषित कर दी है। सबसे महंगा टिकट 12500 रुपए का होगा, जबकि सबसे सस्ता 1000 रुपए का रहेगा। यह टिकट ऑनलाइन मिलेंगे। एक व्यक्ति अधिकतम चार टिकट खरीद सकेगा। ये रहेंगी टिकट की दरें 1000- ईस्ट गैलरी ग्राउंड फ्लोर 1100- वेस्ट गैलरी ग्राउंड फ्लोर 1250- ईस्ट गैलरी सेकंड फ्लोर 1350 – वेस्ट गैलरी सेकंड फ्लोर 1400- ईस्ट गैलरी फस्र्ट फ्लोर (रेगुलर) 1500- वेस्ट गैलरी फस्र्ट फ्लोर (रेगुलर) 1700- ईस्ट गैलरी फस्र्ट फ्लोर (प्रीमियम) 1800 – वेस्ट गैलरी फस्र्ट फ्लोर (प्रीमियम) 5500- साउथ पैवेलियन थर्ड फ्लोर 6500- साउथ पैवेलियन लोअर 7500- साउथ पैवेलियन सेकंड फ्लोर 8500- साउथ पैवेलियन फस्र्ट फ्लोर 11000- साउथ पैवेलियन फस्र्ट फ्लोर फूड बॉक्स हॉस्पिटैलिटी 12500- साउथ पैवेलियन लोअर लाइव हॉस्पिटैलिटी यहां से बुक कर सकते हैं टिकट ऑनलाइन टिकट बिक्री के लिए डिस्ट्रिक्ट बाय जोमैटो को अधिकृत किया है। दर्शक डिस्ट्रिक्ट मोबाइल ऐप और वेबसाइट के माध्यम से टिकट खरीद सकेंगे। टिकटों की कीमत 1000 से शुरू होकर 12500 तक रखी गई है। ईस्ट गैलरी ग्राउंड फ्लोर का टिकट सबसे कम 1000 रुपए है, जबकि साउथ पैवेलियन लोअर लाइव हॉस्पिटैलिटी टिकट की कीमत 12500 रुपए है। साउथ पैवेलियन फस्र्ट फ्लोर 8500, सेकंड फ्लोर 7500 और थर्ड फ्लोर 5500 रुपए होगा। वहीं ईस्ट और वेस्ट गैलरी की अलग-अलग श्रेणियों के टिकट 1100 से 1800 रुपए के रखे गए हैं। टिकट सिंगल या अलग-अलग कैटेगरी के मिश्रित विकल्प में भी खरीदे जा सकेंगे। साइबर ठगों से सावधान रहने की चेतावनी मैच के टिकट के लिए MPCA और क्राइम ब्रांच ने संयुक्त रूप से एक एडवाइजरी जारी की है। ठगी करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया, टेलीग्राम और WhatsApp पर मैच के फर्जी टिकट बेचने वाले कई संदिग्ध लिंक सक्रिय हो सकते हैं। इसलिए पुलिस और MPCA ने दर्शकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत लिंक पर क्लिक न करें और न ही जल्दबाजी में कोई भुगतान करें। टिकट बुक करने के लिए केवल आधिकारिक ऐप और वेबसाइट से ही सत्यापन के बाद टिकट खरीदें, ताकि कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार न हो।

बिना स्वतंत्र जांच कर्मचारी को हटाना गलत, MP हाई कोर्ट ने गृह विभाग का फैसला पलटा

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए गृह विभाग के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत एक महिला असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (ADPPO) को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था. महिला को प्रोबेशन यानी परिवीक्षा अवधि के दौरान ‘नैतिक अधमता’ (Moral Turpitude) के आधार पर सर्विस से हटाया गया था. हाई कोर्ट ने विभाग के इस फैसले को सही नहीं माना और बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया।  आशुतोष शुक्ला और सिद्धार्थ पांडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पूजा गुप्ता के खिलाफ पहले दहेज उत्पीड़न से जुड़ा एक मामला दर्ज हुआ था. इस मामले की सुनवाई के बाद दिसंबर 2015 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष पूजा गुप्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा।  इसके बावजूद मध्य प्रदेश के गृह विभाग ने पूजा गुप्ता को नौकरी से हटा दिया. विभाग का कहना था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप ‘नैतिक अधमता’ की कैटेगरी में आते हैं. विभाग ने यह फैसला उस समय लिया, जब ट्रायल कोर्ट उन्हें पहले ही मामले में बरी कर चुका था।  मामला पहुंचा हाई कोर्ट जब मामला हाई कोर्ट पहुंचने पर अदालत ने विभाग के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई. हाई कोर्ट ने कहा कि किसी शख्स के खिलाफ ‘नैतिक अधमता’ का निष्कर्ष केवल प्रशासनिक अधिकारी अपनी ओर से नहीं निकाल सकता. खासकर तब, जब इससे जुड़े आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया हो।  वहीं, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस मामले में गृह विभाग ने बर्खास्तगी से पहले कोई स्वतंत्र जांच नहीं की थी. विभाग ने केवल पुराने मामले के आरोपों के आधार पर महिला कर्मचारी को नौकरी से हटा दिया. हाई कोर्ट के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई सही प्रोसेस के बिना नहीं की जा सकती है।  पूजा गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने भर्ती परीक्षा और आवेदन के समय अपने खिलाफ दर्ज मामले की पूरी जानकारी विभाग को दी थी. उन्होंने मामले और बाद में आए बरी होने के फैसले को भी छिपाया नहीं था. हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद पूजा गुप्ता की नौकरी बहाल होने का रास्ता साफ हो गया है। 

Haryana Land Registry Scam: ₹999 करोड़ के टैक्स घोटाले का CAG ने किया खुलासा

चंडीगढ़. हरियाणा में वर्ष 2023-24 में करों में हेराफेरी से सरकारी खजाने को 999 करोड़ रुपये का ‘फटका’ लग गया। बिक्री कर, मूल्य वर्धित कर (वैट), जमीन की रजिस्ट्री के दौरान स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस, उत्पाद शुल्क व परिवहन कर की वसूली के 7144 मामलों में अनियमितताएं साामने आई हैं। कृषि भूमि के नाम पर 266 आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक प्लाटों की रजिस्ट्री कर दी गईं, जिससे सरकारी खजाने को 34 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क का नुकसान हुआ। इन रजिस्ट्रियों में सरकार को 49.60 करोड़ का शुल्क मिल पाया, जबकि मिलने चाहिए थे 83.68 करोड़ रुपये। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) द्वारा विधानसभा में रखी गई रिपोर्ट में यह खामियां सामने आई हैं। संबंधित विभागों ने 5769 मामलों में 814 करोड़ रुपये की कम वसूली को स्वीकार भी किया है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण पंचकूला में नियंत्रक अधिकारी द्वारा नियमों का पालन न करने से 5.43 करोड़ के सरकारी धन का संदिग्ध दुर्विनियोग हुआ। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कार्य अनुबंध/निर्माण सेवाओं पर लेखापरीक्षा में छूट और रियायती दरों का गलत लाभ उठाने, अग्रिमों एवं अचल परिसंपत्तियों पर कर का भुगतान न करने तथा ब्याज के कम भुगतान से 389 करोड़ की चपत लगी। इनपुट टैक्स क्रेडिट में 37.69 करोड़ की अनियमितताएं मिली। कर के कम भुगतान, टर्नओवर को छिपाने, इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान न होने और ब्याज के कम उद्ग्रहण से 4.83 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जीएसटी मामलों में कर निर्धारण को अंतिम रूप देते समय अंतिम स्टाक के संदर्भ में सत्यापन नहीं किया, इस कारण पांच डीलरों से 6.67 करोड़ का कर नहीं लिया जा सका। कर निर्धारण प्राधिकारी ने वस्तुओं की बिक्री पर लागू कर की दर से कम टैक्स लगाया, जिसके परिणामस्वरूप 3.31 करोड़ के कर और 2.47 करोड़ के ब्याज की वसूली नहीं हो पाई। जमीन की रजिस्ट्रियों में स्टांप शुल्क को लेकर ऐसे चला ‘खेल’ स्टांप शुल्क वसूली के 59 मामलों में सहयोग करारों के गलत वर्गीकरण/अवमूल्यांकन के परिणामस्वरूप 30.65 करोड़ का कम स्टांप शुल्क मिला। 53 दस्तावेजों में बंधक विलेख पंजीकृत किए गए थे, जिनमें पंजीकरण फीस या तो कम ली गई, या बिल्कुल भी नहीं ली गई। इसके परिणामस्वरूप 9.43 करोड़ का स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस नहीं ली जा सकी। दस मामलों में साधारण बंधक दस्तावेजों के गलत वर्गीकरण के परिणामस्वरूप 50.27 लाख का नुकसान हुआ। इस प्रकार 9.93 करोड़ के स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस का उद्ग्रहण नहीं हुआ हो सका। 24 समझौता डिक्रियां, जो वास्तविक नहीं थी, नाममात्र स्टांप शुल्क लेकर पंजीकृत की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप 4.90 करोड़ का नुकसान हुआ। पंजीकरण प्राधिकारियों ने भूमि विनिमय के 32 विलेखों को पंजीकृत करते समय 16.10 लाख का स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस उद्ग्रहित की, जबकि इन पर 1.92 करोड़ का स्टांप शुल्क बनता था। कारण यह कि इन भूमि का विनिमय अलग-अलग राजस्व संपदाओं या आवासीय भूमि के अंतर्गत आता था। इसके परिणामस्वरूप 1.76 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कैग की ओर से दिया गया निगरानी तंत्र बनाने का सुझाव कैग ने सरकार को सुझाव दिया है कि लेखापरीक्षा के लिए करदाताओं के विस्तृत अभिलेख प्राप्त करने और उपलब्ध कराने के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाए। इससे कर अधिकारियों द्वारा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। विभाग रिटर्न और लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट की सत्यता की जांच करे तथा रिटर्न में पाई गई विसंगतियों या अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई करे।

जालंधर में टूल्स कंपनी पर छापा, पुलिस और मालिक आमने-सामने; जमकर हुई बहस

जालंधर. जालंधर के कपूरथला चौक के नजदीक स्थित गोल्डन टूल्स की दुकान पर देर रात उस समय हंगामा हो गया, जब एक कंपनी के प्रतिनिधियों ने दुकान मालिक पर कंपनी के नाम से कॉपी सामान बेचने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की। कंपनी की ओर से मामले की सूचना संबंधित थाने की पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। कंपनी के प्रतिनिधियों और पुलिस की मौजूदगी में दुकान से कथित तौर पर कॉपी सामान को जब्त किया गया। इस दौरान दुकान मालिक और पुलिस के बीच बहस भी हुई। पूरी घटना का वीडियो कंपनी के प्रतिनिधियों ने बना लिया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। वहीं, दुकान मालिक ने कंपनी के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वह कोई कॉपी सामान नहीं बेच रहा था। उसके पास दुकान में मौजूद सामान के सभी बिल हैं और उस पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस और कंपनी की ओर से की गई कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। मामले में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। 

CG के सुकमा में रिश्वतखोरी पर कार्रवाई, 10 हजार लेते BEO गिरफ्तार

सुकमा. सुकमा के कोंटा में शिक्षा विभाग से जुड़ी एक कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर हलचल मचा दी। एंटी करप्शन ब्यूरो ने खंड शिक्षा अधिकारी चंद्र कुमार यारदा को कथित तौर पर 10 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोप है कि एक शिक्षिका के करीब 16 लाख रुपए के लंबित एरियर्स का बिल आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत मांगी गई थी। जानकारी के मुताबिक, शिक्षक मंगलराम की पत्नी वर्ष 1991 में शिक्षिका के पद पर नियुक्त हुई थी। लंबे समय से उनके एरियर्स का मामला लंबित था। शिक्षक के अनुसार पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद एरियर्स की राशि करीब 16 लाख रुपए बनी। इसके बाद फाइल पर बीईओ के हस्ताक्षर जरूरी थे। शिक्षक जब साइन कराने के लिए बीईओ कार्यालय पहुंचे तो हस्ताक्षर नहीं किए गए। मंगलराम का कहना है कि वे करीब एक महीने से साइन कराने कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। इसी दौरान बीईओ द्वारा एरियर्स की राशि में 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की गई। कमीशन की रकम करीब 80 हजार रुपए होने के कारण शिक्षक ने मामले की शिकायत ACB के जगदलपुर कार्यालय में की। शिकायत के सत्यापन के बाद बनाई कार्रवाई की योजना शिकायत मिलने के बाद ACB ने पहले मामले का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने के बाद टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे ACB की टीम तीन-चार वाहनों में कोंटा स्थित बीईओ कार्यालय पहुंची। टीम ने शिक्षक को 10 हजार रुपए देने के लिए भेजा। जैसे ही बीईओ चंद्र कुमार यारदा ने रकम ली, ACB की टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान ACB की टीम ने बीईओ कार्यालय में मौजूद दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की। टीम द्वारा मामले से जुड़े अन्य कागजात और फाइलों को खंगाला गया। देर शाम तक कार्यालय में कार्रवाई जारी रही। ACB के मुताबिक शिक्षक मंगलराम ने एरियर्स में साइन करने के एवज में अधिकारी द्वारा पैसे मांगने की शिकायत जगदलपुर कार्यालय में की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते बीईओ को रंगे हाथ पकड़ा गया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

बारिश की हर बूंद सहेजने में छत्तीसगढ़ अव्वल, ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीसरे चरण में देश में प्रथम

रायपुर : बारिश की हर बूंद सहेजने में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी, ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीसरे चरण में देश में प्रथम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल खेत का 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण के लिए देने की किसानों की अनूठी पहल बनी मिसाल जल संचय जन भागीदारी के तीन चरणों में प्रदेश में 28 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पंजीयन सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल मुख्यमंत्री साय ने हर राज्य के लिए ‘कैच द रेन’ प्लान, स्टेट वाटर अवार्ड्स और त्रैमासिक समीक्षा का दिया सुझाव रायपुर बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने जनभागीदारी का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाने में सफल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। *जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, जनअभियान बनाया : मुख्यमंत्री साय* मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं। इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है। किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है। उन्होंने कहा कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है। *कोरिया से निकला ‘5 प्रतिशत मॉडल’, किसान स्वयं दे रहे जमीन* मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है। इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके। इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। खेत में ही वर्षा जल को रोकने से भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। लंबे समय में इससे खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और जल सुरक्षा बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। *JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम* जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पहले दो चरणों में देश में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद तीसरे चरण में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के प्रथम चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं। इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा। दूसरे चरण JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया। अब तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है। इस प्रकार अभियान के अलग-अलग चरणों में छत्तीसगढ़ ने बड़े पैमाने पर जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाओं को विकसित और दर्ज किया है। इन प्रयासों का मूल उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बाहर जाने से रोकना, स्थानीय स्तर पर उसका संचयन करना और अधिक से अधिक पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना है। *छत्तीसगढ़ के पांच जिले देश के टॉप-10 में* राज्य स्तर की उपलब्धि के साथ ही छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल … Read more

पंजाब में मानसून मेहरबान! अगले 3 दिन भारी बारिश के आसार, चंडीगढ़ में भी छाए रहेंगे बादल

अमृतसर  पंजाब में एक बार फिर मानसून एक्टिव हो रहा है। मौसम विभाग ने 3 से 5 सितंबर तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान उत्तरी और पूर्वी पंजाब के जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं 6 सितंबर को पूरे राज्य में किसी तरह की विशेष चेतावनी नहीं है और मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। हालांकि मौसम विभाग की तरफ से बुधवार भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया था। लेकिन बारिश कुछ चुनिंदा जिलों तक ही सीमित रही। हिमाचल से सटे कुछ जिलों के अलावा लुधियाना और जालंधर में पॉकेट रेन रिकॉर्ड हुई। इससे तापमान जो कुछ दिनों से सामान्य से ऊपर बना हुआ था, सामान्य के करीब पहुंच गया है। आज 20 जिलों में बारिश की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब के 20 जिलों में बारिश का अनुमान है। पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और मोहाली में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा गुरदासपुर, अमृतसर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और मोहाली में कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा, बरनाला और मानसा में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। रात को चंडीगढ़-मोहाली में बारिश मंगलवार को चंडीगढ़ में रात में एक एमएम बारिश हुई है। इसी तरह पंचकूला और मोहाली में भी रात को बारिश हुई। दिन में लुधियाना, पटियाला और चमकौर साहिब में बारिश रिकॉर्ड की गई थी। वहीं, आज सुबह से बादल छाए हुए हैं। मौसम ठंडा बना हुआ है। अब बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी मानसून की ट्रफ बठिंडा के ऊपर से गुजर रही है, जिससे पंजाब के मौसम पर इसका असर बना हुआ है। इस सिस्टम के कारण पंजाब के कुछ हिस्सों, खासकर बठिंडा और आसपास के इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक बनी दूसरी ट्रफ भी मानसून को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर रही है। चंडीगढ़ में भी इसके असर से बादल छाने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि इस जानकारी में चंडीगढ़ के लिए सीधे भारी बारिश का संकेत नहीं है। बिजली की मांग में आई कमी बारिश होने से बिजली की मांग में कमी आई है। गुरुवार सुबह बिजली की मांग 12,789 मेगावाट है। राज्य में 4,793 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। बाहर से करीब 7,997 मेगावाट बिजली ली जा रही है। तय शेड्यूल 7,961 मेगावाट था, यानी करीब 36 मेगावाट ज्यादा बिजली ली जा रही है। बिजली ग्रिड की फ्रीक्वेंसी 49.89 हर्ट्ज है। हालांकि पिछले चार दिनों में सुबह के समय यह 15 हजार मेगावाट तक पहुंच गई थी। आज भी 4 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी  3 सितंबर: वीरवार को पठानकोट, होशियारपुर, मोहाली और रूपनगर में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। हालांकि अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, फिरोजपुर, मोगा, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिंडा, बरनाला, संगरूर, मानसा, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब और नवांशहर में कोई विशेष चेतावनी नहीं है। 4 सितंबर: शुक्रवार को बारिश का दायरा थोड़ा बढ़ सकता है। पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राज्य के बाकी जिलों में कोई विशेष चेतावनी नहीं है। 5 सितंबर: शनिवार को भी पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली में येलो अलर्ट रहेगा। इन जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। 6 सितंबर: रविवार को पंजाब के सभी जिलों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। किसी भी जिले के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। ऐसे में लगातार बारिश की संभावना वाले जिलों को रविवार को राहत मिल सकती है। बुधवार को बठिंडा सबसे गर्म इससे पहले बुधवार को पंजाब में मौसम अधिकांश हिस्सों में शुष्क रहा। राज्य में सबसे अधिक तापमान बठिंडा में 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे की तुलना में 1.4 डिग्री अधिक रहा। फिरोजपुर में 35.7, पटियाला में 35.5, रूपनगर में 34.8, अमृतसर में 34.2 और लुधियाना में 34.0 डिग्री तापमान रहा। मोहाली में अधिकतम तापमान 33.7, नवांशहर के बललोवाल सौंखड़ी में 33.5, जालंधर में 33.3 और गुरदासपुर में 32.5 डिग्री दर्ज किया गया। चंडीगढ़ में तापमान 34.7 डिग्री रहा, जो सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक था। बारिश की बात करें तो अधिकांश जिलों में वर्षा नहीं हुई। लुधियाना और पठानकोट के थीन बांध क्षेत्र में केवल 1.0 मिलीमीटर हल्की बारिश दर्ज की गई। राज्य का औसत अधिकतम तापमान पिछले दिन के मुकाबले 0.1 डिग्री बढ़ा, लेकिन यह सामान्य के आसपास रहा।  

यूपीकॉस: भरोसे की नींव पर तैयार हो रही नई व्यवस्था, आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा सम्मान

यूपीकॉस: भरोसे की नींव पर खड़ी नई व्यवस्था लखनऊ   किसी भी सरकार की संवेदनशीलता परखने के लिए यह देखने की जरूरत नहीं कि वह अपने राज्य के ताकतवर तबके के लिए क्या करती है, यह देखना जरूरी है कि वह अपने सबसे कमजोर, सबसे अनदेखे और सबसे मौन नागरिक के लिए क्या सोचती है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाला कर्मचारी दफ्तर में सबसे पहले आता है और सबसे बाद में जाता है, लेकिन व्यवस्था में उसका स्थान हमेशा सबसे अंतिम पायदान पर रहा है। न उसे स्थायी कर्मचारी जैसा सम्मान मिलता, न सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, न भविष्य निधि की निश्चितता। वह विभाग, एजेंसी और खुद अपने बीच बंटा हुआ एक ऐसा व्यक्ति था, जिसकी पीड़ा सुनने वाला कोई संस्थागत तंत्र नहीं था। यही वह शून्य था, जिसे भरने का प्रयास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) गठित करके किया है।  एक लंबे इंतज़ार का अंत आउटसोर्स कर्मचारी बरसों तक शासन-प्रशासन की भूल-भुलैया में अपनी पहचान तलाशता रहा। हर महीने वेतन कब आएगा, यह सवाल उसके लिए स्थायी बना रहा। उसे इस बात का भी यकीन नहीं था कि उसकी तकलीफ कभी किसी दहलीज़ तक पहुंचेगी भी या नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का उद्घाटन इसी लंबी प्रतीक्षा को विराम देने वाला क्षण है। यह केवल एक नए निगम की स्थापना भर नहीं, बल्कि उस अदृश्य कर्मचारी वर्ग को औपचारिक पहचान और संस्थागत सहारा देने की पहल है, जो अब तक व्यवस्था के हाशिए पर खड़ा रहकर काम करता आया। पुरानी व्यवस्था की टूटी कड़ियां 2017 से पहले के दौर को देखें तो एक असहज तस्वीर उभरती है। तब आउटसोर्स कर्मचारी को संसाधन समझा ही नहीं जाता था। ठेके देने का काम अक्सर उन्हीं एजेंसियों को मिलता, जिनके तार सत्ता के गलियारों से जुड़े रिश्तेदारों और करीबियों तक जाते थे। भर्ती के नाम पर, वर्दी के नाम पर, और अन्य छोटी-छोटी सुविधाओं के नाम पर शोषण की कहानियां आम बात थीं। पूरा ढांचा तीन हिस्सों में टूटा हुआ था- कार्मिक, एजेंसी और विभाग। किसी समस्या के साथ कर्मचारी जब एक दरवाज़े पर पहुंचता, तो उसे दूसरे दरवाज़े की ओर मोड़ दिया जाता। न वेतन समय पर मिलने की गारंटी, न ईपीएफ-ईएसआई को लेकर कोई स्पष्टता, न सेवा अधिकारों की कोई ठोस रूपरेखा। इस प्रशासनिक ढिलाई ने लाखों परिवारों को स्थायी अनिश्चितता में जीने पर मजबूर कर दिया था। बोझ से संपत्ति तक का वैचारिक सफर समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्तियों तक शासन की नीतियों, योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ पहुंचाने को अपना विजन बनाने वाली योगी सरकार ने इस सोच को जड़ से बदलने का मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। योगी सरकार में आउटसोर्स कर्मी अब बोझ नहीं, राज्य की मानव पूंजी के रूप में देखा जा रहा है। यही वैचारिक बदलाव यूपीकॉस की बुनियाद है। इसके दायरे और गहराई को आंकड़ों से इसे और गहराई से समझा जा सकता है। साढ़े तीन लाख से ज़्यादा आउटसोर्स कर्मचारी सीधे इसके दायरे में आएंगे, और जब उनके परिवारजनों को जोड़ें तो यह संख्या 17 से 20 लाख के बीच पहुंच जाती है। यह अकेले किसी वर्ग विशेष की बात नहीं, बल्कि प्रदेश की सामाजिक बुनावट के एक बड़े हिस्से की तक़दीर बदलने वाला निर्णय है। हर महीने की पांचवीं तारीख तक पारिश्रमिक सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित होगा, जिससे पूरी व्यवस्था में किसी पड़ाव पर भी बिचौलियों के लिए कोई स्थान नहीं होगा और भुगतान संबंधित तमाम विसंगतियों पर लगाम लगेगी। सुरक्षा कवच जो जीवन बदल देगा इससे भी आगे बढ़कर बनाई गई व्यवस्था इस फैसले को असल मायनों में इंसानी बनाती है। किसी दुर्घटना, हादसे या आपदा की स्थिति में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण मिलेगा। यह प्रावधान उस डर को खत्म करता है, जो हर आउटसोर्स कर्मचारी के भीतर हमेशा से बना रहा कि किसी अनहोनी की सूरत में उसका परिवार बेसहारा हो जाएगा। ईपीएफ और ईएसआई का योगदान अब निश्चित रूप से जमा होगा। सरकार खुद एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, ताकि कर्मचारी की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े। यह व्यवस्था उस आर्थिक दबाव को सीधे कम करती है, जो अब तक कर्मचारी अकेले उठाता आया था। नौकरी को लेकर छाई असुरक्षा भी अब समाप्त होने जा रही है। कोई भी एजेंसी अब किसी कर्मी को अपनी मर्ज़ी से बर्खास्त नहीं कर सकेगी। ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले सरकार को जानकारी देनी होगी, और उचित जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।  परिवार तक फैला भरोसे का दायरा असली सामाजिक सुरक्षा वही है, जिसमें कोई भी कर्मचारी अपने पूरे परिवार को संरक्षण के दायरे में पाता है। बेटे की पढ़ाई के लिए आठ लाख रुपये तक और बेटी की पढ़ाई के लिए दस लाख रुपये तक की मदद, दो बेटियों की शादी के लिए आठ से दस लाख रुपये तक का सहयोग, और कर्मचारी के आकस्मिक निधन जैसी अप्रिय स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये तक की व्यवस्था- ये सभी प्रावधान मिलकर एक पारिवारिक सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं। मातृत्व अवकाश जैसे वैधानिक लाभ भी अब सुनिश्चित किए गए हैं। यूपीकॉस पोर्टल और वेबसाइट का शुभारंभ इस पूरी संरचना को डिजिटल पारदर्शिता से जोड़ता है, जहां हर कर्मचारी की समस्या को सुनने और सुलझाने के लिए एक स्थायी संस्थागत तंत्र मौजूद रहेगा। मुख्यमंत्री की सोच श्रम के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है। यूपीकॉस इसी सम्मान भावना का प्रतिबिंब है, ठीक वैसे ही जैसे योगी सरकार के वे तमाम फैसले हैं, जिन्होंने किसानों, नौजवानों, महिलाओं व कर्मचारियों के साथ ही समाज के हर तबके के वंचित लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। 2017 में जो वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन मात्र तीन सौ रुपये थी, वह आज बढ़कर पंद्रह सौ रुपये हो चुकी है। रसोइयों के मानदेय में भी इज़ाफा किया गया है। ये सभी निर्णय मिलकर उस नीति की तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें समाज के सबसे उपेक्षित वर्गों तक सम्मान और सुरक्षा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। भरोसे की जीत यूपीकॉस केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं है, यह एक सामाजिक वादा है। यह इस विश्वास की पुनर्स्थापना है कि … Read more

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहा खास संयोग, 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र में जन्मेंगे कान्हा; जानें पूजा का समय

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी आते ही देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं.भक्त इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं. रात के समय उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं.धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था.इस वजह से जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के पूजा मुहूर्त को खास महत्व दिया जाता है. इस साल 4 सितंबर, शुक्रवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।  जन्माष्टमी की तारीख क्या है? साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी.इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करेंगे. दिनभर व्रत और भक्ति के बाद रात में कान्हा के जन्म के समय विशेष पूजा की जाती है।  जन्माष्टमी के मौके पर घरों और मंदिरों में कृष्ण की झांकियां सजाई जाती हैं. कई जगह बाल गोपाल को पालने में झुलाने और उनका विशेष श्रृंगार करने की परंपरा है. रात 12 बजे के आसपास मंदिरों में जन्मोत्सव शुरू होता है. आरती के साथ भक्त भगवान के जन्म की खुशी मनाते हैं।  मथुरा में कब होगा कृष्ण जन्मोत्सव? श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव विशेष रूप से भव्य होता है. यहां आधी रात के समय भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है।  मथुरा के लिए पंचांग के अनुसार निशीथ पूजा का शुभ समय रात 11:56 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा.इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा, अभिषेक और आरती की जाएगी।  निशीथ काल को जन्माष्टमी की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण का प्राकट्य हुआ था।  जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस बार जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र की मौजूदगी भी रहेगी.कृष्ण जन्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का विशेष स्थान है।  पंचांग गणना के अनुसार रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात करीब 11:04 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है. वहीं अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात करीब 12:13 बजे तक रहेगी. ऐसे में जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है।  जन्माष्टमी का व्रत कब खोलें? जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में भक्त भगवान कृष्ण के जन्म तक व्रत रखते हैं. मथुरा की गणना के अनुसार व्रत का पारण 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे के बाद किया जा सकता है. हालांकि अलग-अलग परंपराओं में व्रत खोलने के नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार पारण कर सकते हैं।  5 सितंबर को दही हांडी और नंदोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन यानी 5 सितंबर, शनिवार को दही हांडी और नंदोत्सव मनाया जाएगा. भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी माखन चोरी की लीलाओं की याद में कई स्थानों पर दही हांडी का आयोजन किया जाता है।  दही से भरी मटकी को ऊंचाई पर लटकाया जाता है.  गोविंदा की टोलियां मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ती हैं. वहीं ब्रज क्षेत्र में कृष्ण जन्म के बाद नंदोत्सव की परंपरा भी बड़े उत्साह के साथ निभाई जाती है।  जन्माष्टमी पर क्या है खास? इस बार जन्माष्टमी का पर्व इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 4 सितंबर को अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा. रात में निशीथ काल के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मथुरा-वृंदावन में इस मौके पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम होंगे।