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TMC के बागियों को BJP में नहीं मिली जगह? सायोनी घोष-काकोली के बाद पार्टी के फैसले पर सवाल

नईदिल्ली  सयोनी घोष, यूसुफ पठान हों या काकोली घोष… सभी ने बंगाल चुनाव में टीएमसी की हार के बाद ममता का साथ छोड़ा. टीएमसी के बागी सांसदों ने एनडीए का हिस्सा बनना पसंद किया. वे सभी एसीपीआई यानी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए. यह एनसीपीआई दिल्ली में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा है. अब टीएमसी के उन बागी सांसदों को भाजपा ने ही झटका दिया है. जी हां, बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी नगर निकाय चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है. भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के उन बागी सांसदों के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया है, जो अब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का हिस्सा हैं।  बीजेपी का यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इस साल हुए विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद अब पार्टी की नजर कोलकाता और हावड़ा के नगर निकाय चुनावों पर है. इन दोनों चुनावों को बीजेपी के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है. केएमसी यानी कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम (HMC) के चुनाव दुर्गा पूजा के बाद होने की उम्मीद है. दोनों नगर निगमों के वार्डों की सीमाओं में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. इसे परिसीमन कहा जाता है. इसके तहत मतदाताओं की संख्या और इलाकों के आधार पर वार्डों की सीमाएं फिर से तय की जाती हैं।  खबर के मुताबिक, बंगाल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने हाल में कहा, ‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी का कोई गठबंधन सहयोगी नहीं है. हम कोलकाता और हावड़ा नगर निकाय चुनाव अपने दम पर लड़ेंगे और जीतेंगे.’ उन्होंने कहा कि दिल्ली में एनसीपीआई के साथ कोई राजनीतिक समझ हो सकती है, लेकिन दिल्ली और कोलकाता के बीच करीब 1,500 किलोमीटर की दूरी है. उनका कहना था कि राष्ट्रीय स्तर पर किसी पार्टी के साथ राजनीतिक संबंध होने का यह मतलब नहीं है कि पश्चिम बंगाल में भी उसी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन किया जाए।  विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी का बढ़ा आत्मविश्वास पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन के बाद बीजेपी को कोलकाता में भी अपना आधार मजबूत होने का भरोसा है. केएमसी में पहले बीजेपी की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. लेकिन विधानसभा चुनाव में कोलकाता की ज्यादातर सीटों पर लोगों ने बीजेपी को वोट दिया. केएमसी चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे बीजेपी नेता रितेश तिवारी ने कहा कि पार्टी सभी 209 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बड़ी जीत हासिल करेगी।  NCPI को अब भी गठबंधन की उम्मीद वहीं, दूसरी तरफ टीएमसी के बागी गुट वाले सांसदों की फौज वाली NCPI को अभी भी बीजेपी के साथ गठबंधन की उम्मीद है. पार्टी का तर्क है कि वह संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के साथ है. इसलिए नगर निकाय चुनाव में भी दोनों दलों के साथ आने की संभावना है. NCPI की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनकी पार्टी एनडीए की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टियों में से एक है और वह गठबंधन के सदस्य के रूप में निकाय चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि चुनाव के करीब आने पर गठबंधन को लेकर फैसला किया जाएगा, लेकिन साथ आने की पूरी संभावना है।  गौरतलब है कि बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के खराब प्रदर्शन के बाद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी. इसके बाद वे NCPI में शामिल हो गए. इसमें सयोनी घोष भी शामिल थीं. ये सांसद दिल्ली में NDA की बैठकों में भी शामिल होते रहे हैं।  बंगाल बीजेपी क्यों नहीं चाहती TMC के बागियों से गठबंधन? अब सबसे बड़ा सवाल है कि आकिर बंगाल में बीजेपी टीएमसी के बागियों संग गठबंधन क्यों नहीं चाहती? दरअसल, पश्चिम बंगाल बीजेपी के कई नेताओं का मानना है कि पार्टी को अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव लड़ना चाहिए. एक सीनियर बीजेपी नेता ने कहा कि यह बंगाल में सत्ता में आने के बाद पार्टी का पहला नगर निकाय चुनाव होगा. इसलिए बीजेपी अपने संगठन, नेताओं और कार्यकर्ताओं की ताकत को आजमाना चाहती है. उन्होंने यह भी कहा कि NCPI के कई नेता पहले TMC में थे. बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इन्हीं नेताओं के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया है. कई बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इस राजनीतिक लड़ाई में अपनी जान तक गंवाई है. ऐसे में अगर बीजेपी अब उन्हीं पूर्व TMC नेताओं के साथ हाथ मिलाती है तो पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है. इसके अलावा बीजेपी TMC नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है. पार्टी निकाय चुनाव में भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का वादा करना चाहती है. ऐसे में TMC के कुछ नेताओं के साथ गठबंधन करने पर मतदाताओं के बीच सवाल खड़े हो सकते हैं।  कई पार्टियों के बीच मुकाबले का फायदा उठाना चाहती है BJP बीजेपी के अकेले चुनाव लड़ने के पीछे राजनीतिक गणित भी है. राज्य में मुकाबला सिर्फ बीजेपी और TMC के बीच नहीं होगा. NCPI, ममता बनर्जी की TMC, TMC से अलग हुए विधायक, वाम दल और कांग्रेस भी मैदान में होंगे. बीजेपी को लगता है कि अगर वोट कई पार्टियों में बंटता है तो उसे फायदा मिल सकता है. इसी वजह से पार्टी अकेले चुनाव लड़कर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 

नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी में रोहित यादव रचेंगे इतिहास? एशियन गेम्स के टॉप-5 जैवलिन थ्रो रिकॉर्ड

नई दिल्ली भारतीय जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव के पास एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रचने का मौका होगा. नीरज चोपड़ा के चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद भारत की जैवलिन थ्रो की जिम्मेदारी रोहित यादव और यशवीर सिंह के कंधों पर होगी. रोहित हाल के महीनों में शानदार फॉर्म में रहे हैं और उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो 87.68 मीटर है. ऐसे में वह एशियन गेम्स के इतिहास में सबसे बड़े थ्रो करने वाले खिलाड़ियों की सूची में नीरज चोपड़ा और किशोर जेना के बाद अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।  नई दिल्ली में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज फाइनल में 81.10 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर शीर्ष स्थान हासिल करने वाले रोहित ने साफ किया कि वह एशियन गेम्स में किसी अतिरिक्त दबाव के साथ नहीं उतरेंगे. उनके मुताबिक भारत की ओर से जैवलिन थ्रो में हमेशा पदक की उम्मीद रहती है और वह देश के लिए मेडल जीतने की पूरी कोशिश करेंगे।  कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सातवें स्थान पर रहने वाले रोहित का मानना है कि उस प्रतियोगिता में उनकी लय सही नहीं थी. हालांकि अब उनकी तैयारी बेहतर है और वह जापान में होने वाले एशियन गेम्स में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दोहराने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।  रोहित यादव ने क्या कहा? नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी में खेलने को लेकर रोहित यादव ने कहा, "कोई दबाव नहीं है. मैं वहाँ खुलकर खेलूँगा. बड़े कॉम्पिटिशन में हमेशा दबाव होता है. जैवलिन थ्रो में हमें हमेशा मेडल मिलता है और जब भी नीरज खेलते हैं तो ऐसी उम्मीद होती है. हम भी भारत के लिए मेडल जीतने की कोशिश करेंगे।  अपने लक्ष्य के बारे में बात करते हुए रोहित ने कहा, "हमारा लक्ष्य वही दोहराना है जो हमने पहले किया है. मैं किसी और चीज़ के बारे में नहीं सोच रहा हूं. रोहित ने यह भी स्वीकार किया कि नीरज चोपड़ा की सफलता ने भारतीय जैवलिन थ्रो का स्तर पूरी तरह बदल दिया है. उनके मुताबिक नीरज को ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और डायमंड लीग जैसे बड़े मंचों पर जीतते देखकर नई पीढ़ी को लगातार प्रेरणा मिलती है।  एशियन गेम्स में जैवलिन थ्रो के टॉप-5 ऑल टाइम बेस्ट रिकॉर्ड झाओ किंगगांग (चीन) – 89.15 मीटर, इंचियोन 2014 नीरज चोपड़ा (भारत) – 88.88 मीटर, हांगझोउ 2023 नीरज चोपड़ा (भारत) – 88.06 मीटर, जकार्ता 2018 किशोर जेना (भारत) – 87.54 मीटर, हांगझोउ 2023 काजुहिरो मिजोगुची (जापान) – 81.82 मीटर, बीजिंग 1990 रोहित यादव का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो 87.68 मीटर है. अगर वह एशियन गेम्स में अपने इस प्रदर्शन के करीब भी पहुंचते हैं, तो वह सीधे इस लिस्ट के चौथे स्थान से ऊपर पहुंच सकते हैं और एशियाई खेलों के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड कायम कर सकते हैं। 

पक्षियों से होने वाली बिजली ट्रिपिंग पर लगी रोक, MP Transco ने बर्ड गार्ड और एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से पाया समाधान

बर्ड गार्ड और बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से विंध्य क्षेत्र में पक्षीजनित ट्रिपिंग नियंत्रित करने में एम पी ट्रांसको को मिली सफलता भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि जंगलों, जलाशयों और नदी तटीय क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों की गतिविधियों के कारण होने वाली ट्रिपिंग को रोकने के लिए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा विंध्य क्षेत्र में विशेष तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। रीवा, सतना, पन्ना, सीधी और सिंगरौली जिलों के पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाली 132 केवी एवं 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के टावरों पर बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर (बीएफडी), बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। 20 ट्रिपिंग से न्यूनतम तक पहुंचा आंकड़ा एमपी ट्रांसको रीवा सतना के कार्यपालन अभियंता अमित कुमार के अनुसार वर्ष 2025-26 में पक्षियों के कारण रीवा क्षेत्र की ट्रांसमिशन लाइनों में लगभग 20 ट्रिपिंग दर्ज की गई थीं। इन घटनाओं के तकनीकी विश्लेषण के बाद संवेदनशील स्थानों पर बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाने का निर्णय लिया गया। इनके उपयोग के बाद पक्षीजनित ट्रिपिंग की घटनाएं लगभग शून्य हो गई हैं। स्थानीय परिस्थितियों और पक्षियों के व्यवहार को ध्यान में रखकर किए गए ये तकनीकी उपाय प्रभावी साबित हो रहे हैं। टावर पर पक्षियों के बैठने से रोकता है बर्ड गार्ड जंगलों एवं जलाशयों के आसपास से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों के टावर पक्षियों के लिए बैठने और घोंसला बनाने का स्थान बन जाते हैं। टावर पर बैठकर पक्षियों द्वारा मलमूत्र त्यागने से यह पदार्थ इंसुलेटर डिस्क पर जमा हो सकता है। बारिश या अधिक नमी की स्थिति में इसकी विद्युत चालकता बढ़ने से फ्लैशओवर और लाइन ट्रिपिंग की स्थिति बन सकती है। इस समस्या को कम करने के लिए बर्ड गार्ड को टावर के क्रॉसआर्म के किनारों पर लगाया जाता है। इसकी संरचना पक्षियों को वहां बैठने और घोंसला बनाने में कठिनाई पैदा करती है। यह व्यवस्था कुछ स्थानों पर बंदरों को क्रॉसआर्म के किनारे तक पहुंचने से रोकने में भी सहायक होती है। बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से इंसुलेटर सुरक्षित बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर को डिस्क इंसुलेटर के ऊपरी हिस्से पर स्थापित किया जाता है। यदि पक्षी टावर के क्रॉसआर्म पर बैठकर मलमूत्र त्याग करता है, तो प्रिवेंटर के कारण यह सीधे इंसुलेटर डिस्क पर जमा नहीं हो पाता। इससे इंसुलेटर की इंसुलेशन क्षमता प्रभावित होने और परिणामस्वरूप ट्रिपिंग होने की संभावना काफी कम हो जाती है। सहायक अभियंता अजय चौरसिया ने स्थानीय पक्षियों के व्यवहार के अनुसार किया तकनीकी संशोधन कार्यपालन अभियंता अमित कुमार की पहल पर रीवा ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस में पदस्थ सहायक अभियंता अजय चौरसिया ने विंध्य क्षेत्र में पक्षियों के कारण होने वाली ट्रिपिंग की समस्या के तकनीकी अध्ययन के आधार पर महत्वपूर्ण पहल की। फील्ड की व्यवहारिक और तकनीकी आवश्यकता एवं क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों के व्यवहार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बर्ड प्रिवेंटर डिवाइसों में इन हाउस आवश्यक तकनीकी संशोधनों के साथ ट्रांसमिशन लाइनों पर उपयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप पक्षीजनित ट्रिपिंग में उल्लेखनीय कमी आई। व्यवधान मे कमी के साथ पक्षी सुरक्षा भी मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में एमपी ट्रांसको द्वारा पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों पर पक्षी सुरक्षा के विशेष उपाय किए जा रहे हैं। इसके तहत 05 नग 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के 470 टावरों तथा 133.68 किलोमीटर कुल लंबाई वाले नेटवर्क पर 210 गार्ड एवं 50 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इसी प्रकार 15 नग 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के 1,530 टावरों तथा 440 किलोमीटर कुल लंबाई वाले नेटवर्क पर 1,600 गार्ड एवं 150 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इन उपायों का उद्देश्य एक ओर पक्षियों के कारण ट्रांसमिशन लाइनों में होने वाली ट्रिपिंग की घटनाओं को कम करना, वहीं दूसरी ओर पक्षियों को विद्युत लाइनों के संपर्क में आने से बचाकर उनकी मृत्यु एवं घायल होने की घटनाओं को रोकना तथा क्षेत्र की जैव विविधता और पक्षी संरक्षण को बढ़ावा देना है। विंध्य के पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी विंध्य क्षेत्र के बाणसागर एवं रिहंद जलाशय, सोन एवं टमस नदी के तटीय क्षेत्र, संजयदुबरी टाइगर रिजर्व के आसपास के वन क्षेत्रों तथा अन्य जल निकायों में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या में आवाजाही रहती है। इन क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों की गतिविधियां अधिक होने के कारण एमपी ट्रांसको द्वारा संवेदनशील टावरों की पहचान कर चरणबद्ध रूप से बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इन तकनीकी उपायों से एक ओर पक्षियों के ट्रांसमिशन लाइनों से टकराने और विद्युत संरचनाओं के संपर्क में आने की संभावना कम होगी, वहीं दूसरी ओर पक्षीजनित फॉल्ट, ट्रिपिंग और ब्रेकडाउन में कमी आने से विंध्य क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता और उपलब्धता बेहतर होगी।  

बैंकों की देशव्यापी हड़ताल, भोपाल के एमपी नगर में कर्मचारियों ने बुलंद की आवाज

UFBU के आह्वान पर देशव्यापी बैंक हड़ताल, भोपाल के एमपी नगर प्रेस कॉम्प्लेक्स में गूंजा एकजुटता का स्वर भोपाल  यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर में अलग-अलग स्थानों पर बैंककर्मियों की हड़ताल व्यापक रूप से एवं प्रभावी ढंग से सम्पन्न हुई। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु सहित प्रमुख महानगरों से लेकर राज्य एवं जिला मुख्यालयों तक बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी न्यायोचित मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हड़ताल का प्रमुख केंद्र एमपी नगर स्थित प्रेस कॉम्प्लेक्स, पीएनबी के पास रहा, जहाँ बड़ी संख्या में बैंक के 5000 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। “5-दिवसीय बैंकिंग लागू करो”, “बैंककर्मियों के स्वास्थ्य और सम्मान से समझौता नहीं” जैसे गगनभेदी नारों के साथ आंदोलनकारियों ने सरकार एवं बैंक प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दिया कि अब टालमटोल की नीति स्वीकार्य नहीं है। हड़ताल का नेतृत्व UFBU के संयोजक श्री संजीव कुमार  मिश्रा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सुबीन सिन्हा एवं सेक्रेटरी दिनेश झा तथा भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ भोपाल सर्कल के अध्यक्ष अनिल कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर घटक दलों के वरिष्ठ कामरेड वीरू शर्मा, दीपकरत्न शर्मा, संजय कुदेशिया, नज़ीर कुरेशी, शोभित वादेल , प्रवीण मेघानी, वी.एस. नेगी एवं सुनील सिंह,संगठन मीडिया प्रभारी अरविंद पंडियार की सक्रिय भूमिका रही। इसके अतिरिक्त रजनीश पौराणिक, सुरेश बाबू मीणा,स्वप्निल चतुर्वेदी , क्षितिज तिवारी, निर्भय सिंह, मनीष भार्गव, नितिन बिखानी, विजय चौटानी, अंबरिश नंदा, राजेश नायक, जितेंद्र बग्गा, प्रियंका गुप्ता, दीपक नायर, अंकुर दुबे, सुखमीत कौर, राहुल करौलिया, कुलदीप स्वर्णकार, विजय राघवन, अमित गुप्ता, संजय सिंह, देवेंद्र दांगी, सुमित मिश्रा, हितेश कुमार, देवेश जैन, मोनिका भागवानी, कपिला मेघानी, प्रशांत रघुवंशी, रोहित यादव, अमित प्रजापति, जयंत सेन, सेतु पाठक, राहुल खरे, ब्रजेश कुशवाहा, अनिल कुमार, मुदित जोशी, कीर्ति खरे, विनीता दुबे, पूजा कुशवाहा, के के त्रिपाठी, मनीष चतुर्वेदी, विभु जोशी सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला साथियों ने बढ़-चढ़कर हड़ताल में भाग लिया, जिससे आंदोलन को और अधिक मजबूती मिली। साथ ही मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर भी  एवं AIBOC के बैनर तले बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एकजुट होकर हड़ताल में सहभागिता की। जिला एवं अंचल मुख्यालयों पर हुए प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बैंककर्मियों की मांगें केवल स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा और निर्णायक आवाज़ हैं। नेताओं ने अपने संबोधन में तर्कपूर्ण ढंग से कहा कि 5-दिवसीय बैंकिंग केवल कर्मचारियों की सुविधा का प्रश्न नहीं, बल्कि बेहतर ग्राहक सेवा, प्रभावी जोखिम प्रबंधन एवं स्वस्थ कार्य-संस्कृति के लिए अनिवार्य सुधार है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बैंकिंग क्षेत्र की जमीनी सच्चाइयों को समझते हुए कर्मचारियों की लंबित एवं न्यायोचित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए, अन्यथा आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा।UFBU के द्वारा भविष्य के दिए गए कॉल लागू रहेंगे।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? 64% हो सकता है DA, नवरात्रि-दुर्गा पूजा से पहले बढ़ेगी सैलरी!

नई दिल्ली त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें महंगाई भत्ते (Dearness Allowance)पर टिक गई हैं. देश के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनर्श जुलाई 2026 से लागू होने वाले इस भत्ते में बढ़तरी(DA Hike july 2026) का बेसब्री से इंतजार कर रहे है. इस साल 11 अक्टूबर से नवरात्रि और 20 अक्टूबर को दशहरा है. ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि क्या सरकार दुर्गा पूजा या नवरात्रि के आसपास इस तोहफे का ऐलान करेगी।  आइए आपको बताते हैं कि ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के अनुमानित आंकड़े और सरकार के पिछले पैटर्न के हिसाब से कब सरकारी कर्मचारियों के डीए पर गुड न्यूज मिल सकती है और इस बार कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है… कब तक हो सकती है महंगाई भत्ते की घोषणा? आमतौर पर सरकार जुलाई से लागू होने वाले डीए की घोषणा सितंबर या अक्टूबर में करती है. अगर नवरात्रि पर ऐलान नहीं होता है, तो सरकार दिवाली तक पर कर्मचारियों को ये तोहफा दे सकती है. अच्छी बात यह है कि महंगाई भत्ते की घोषणा जब भी होगी, भत्ते की दरें 1 जुलाई 2026 से ही लागू मानी जाएंगी. इसका मतलब है कि कर्मचारियों को पिछले महीनों का बकाया एरियर भी साथ में मिलेगा।  कितना बढ़ सकता है आपका DA? फिलहाल कर्मचारियों को बेसिक सैलरी का 60% डीए मिल रहा है. ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के जुलाई आंकड़ों के मुताबिक इंडेक्स 153.2 पर पहुंच गया है. इस आधार पर अनुमानित डीए 64% बैठता है. यानी इस बार डीए में सीधा 4% का इजाफा होने की पूरी उम्मीद है. जब तक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें पूरी तरह लागू नहीं होतीं, तब तक यह बढ़ोतरी 7वें वेतन आयोग के तहत ही दी जाएगी।  कितनी बढ़ेगी इन-हैंड सैलरी? हालांकि आपको ये समझना होगा कि 4% डीए बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि आपकी कुल टेक-होम सैलरी 4% बढ़ जाएगी. डीए का कैलकुलेशन आपकी बेसिक सैलरी पर होता है…. यहां समझिए डीए बढ़ने से अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़कर कितनी हो जाएगी.. डीए का कैलकुलेशन आपकी बेसिक सैलरी पर होता है. 4% डीए बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि आपकी कुल टेक-होम सैलरी 4% बढ़ जाएगी सिर्फ सैलरी नहीं पेंशन भी बढ़ेगा महंगाई भत्ता सिर्फ इन-हैंड सैलरी ही नहीं बढ़ाता, बल्कि इसका असर पीएफ (PF), ग्रेच्युटी और पेंशनर्श की मासिक पेंशन पर भी पड़ता है. जैसे ही सरकार कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी देगी, त्योहारी सीजन में कर्मचारियों के बैंक खातों में बढ़ी हुई सैलरी और एरियर की रकम जमा हो जाएगी. फिलहाल आपको त्योहारों से पहसे सरकार की तरफ से आने वाले एक बड़े फैसले के लिए इंतजार करना होगा।   

दिल्ली से गुरुग्राम का सफर होगा और तेज, द्वारका-महिपालपुर से हरियाणा बॉर्डर तक हाईस्पीड कनेक्टिविटी

गुरुग्राम गुरुग्राम में बढ़ते ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए सरकार जल्द ही एक तीन लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना बना रही है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसके लिए प्लान तैयार कर लिया है.  इसके बनने से दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर लगने वाला जाम काफी हद तक कम हो जाएगा. इसके लिए दिल्ली की शिव मूर्ति महिपालपुर और एम्बिएंस मॉल के पास हरियाणा बॉर्डर के बीच तीन-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा।  यह एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 2 कलोमीटर लंबा बनाया जा सकता है. दरअसल एक्सप्रेसवे के इसी हिस्से में सबसे ज्यादा जाम लगता है. सुबह-शाम दिल्ली-गुरुग्राम के बीच सफर करने वालों को इससे काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. खासकर ऑफिस आने-जाने वाले लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं.. हर दिन वे इस जाम से जूझते हैं. लेकिन नया एलिवेटेड रोड बनने से उनको सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।  181 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एलिवेटेड रोड जानकारी के मुताबिक, एलिवेटेड रोड करीब 181 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा. यह रोड तीन लेन को होगा.इसके दोनों तरफ दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाई जाएगी.सालों से इस योजना पर विचार चल रहा है. पहले सड़क चौड़ी करने और फ्लाईओवर का प्रस्ताव रखा गया. लेकिन अब एलिवेटेड रोड बनाए जाने को ट्रैफिक जाम से मुक्ति का ज्यादा बढ़िया समाधान माना गया है।  द्वारका अंडरपास के ट्रैफिक को मिलेगा नया रोड NHAI योजना बना रहा है कि तीन-लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर रंगपुरी के पास द्वारका एक्सप्रेसवे इंटरचेंज की राइट-टर्न टनल से बनाया जाए. इसे सेक्टर 10 तक बनाए जाने की प्लानिंग है. जिससे इसे द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे के बीच कनेक्ट हो सके. वहीं अंडरपास से निकलने वाले ट्रैफिक को शहर की तरफ जाने वाले एलिवेटेड सेक्शन पर भेजने का प्रस्ताव है।  राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा नया रोड नए एलिवेटेड रोड के बनने के बाद NH8 से गुजरने वाले वाहनों को अंडरपास से निकलते ही शानदार कॉरिडोर मिलेगा, जिससे उनको जाम में नहीं फंसना पड़ेगा. द्वारका एक्सप्रेसवे से आने वाले ट्रैफिक को मौजूदा सड़क के ही ऊपर से ले जाने की योजना है, ताकि लोग जाम में न फंसे. बता दें कि नया एलिवेटेड रोड मौजूदा राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा।  शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच होगा है भारी जाम इसका प्रस्ताव इस रूट पर ट्रैफिक की पूरी स्थिति देखने के बाद तैयार किया गया है. जिससे पता चला कि शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच NH8 के पूरे हिस्से पर पीक आवर्स में खचाखच जाम रहता है. सर्विस रोड पर भी बिल्कुल जगह नहीं होती. वाहन रेंग-रेंगकर चलते हैं. महिपाल फ्लाईओवर तक गाड़ियों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं. जब से द्वारका एक्सप्रेसवे खुला है, तब से ये परेशानी और भी बढ़ गई है।  वर्तमान में मिलेनियम सिटी में घुसते ही शिव मूर्ति पर जाम लग जाता है. सोनीपत, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से आने वाले वाहनों को जाम से ज्यादा जूझना पड़ता है. जिसकी वजह से एम्बिएंस मॉल की ओर जाना मुश्किल हो जाता है।  हर दिन ट्रैफिक में नहीं फंसना पड़ेगा एक सर्वे से पता चला है कि NH8 के मुख्य कैरिजवे पर हर दिन एक तरफ 1.2 लाख और दूसरी तरफ 1.6 लाख गाड़ियां होकर गुजरती हैं. सर्विस रोड और अलग-अलग इंटरचेंज रास्तों से भी हजारों गाड़ियां होकर गुजरती हैं.हालांकि दिल्ली से NH-8 पर आने वाले वाहनों को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पर जाने की परमिशन नहीं होगी. ये वाहन  मौजूदा चार-लेन वाले कैरिजवे पर ही चलेंगे. नया एलिवेटेड कॉरिडोर मुख्य रूप से द्वारका एक्सप्रेसवे अंडरपास से निकलने वाले वाहनों के लिए बनाया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा।   

PF से पैसे निकालने वालों के लिए जरूरी खबर, इमरजेंसी में कितना मिलेगा फंड? समझें नए नियम

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन ने अपने करोड़ों स्‍टेकहोल्‍डर्स के लिए PF अकाउंट में आंशिक विड्रॉल के नियमों को बेहद आसान और ट्रांसपैरेंट बना दिया है. नए नियम के तहत अब बीमारी,बच्‍चों की पढ़ाई, शादी और घर खरीदने या बनवाने जैसे कामों के लिए पैसा निकालने का नियम बदल चुका है।  पीएफ निकासी के तीन कैटेगरी ईपीएफओ की नई गाइडलाइन के अनुसार, अब एडवांस क्‍लेम को तीन कैटेगरी में बांट दिया गया है, जिसमें आवश्यक जरूरतें, आवास जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं. अब आइए जानते हैं कि नए नियम में क्‍या-क्‍या बदल चुका है और आप पीएफ अकाउंट से एक बार में कितना पैसा निकाल सकते हैं।          बीमारी के लिए कितनी बार PF का पैसा निकाल सकते हैं  अगर मेडिकल इमरजेंसी या इलाज के लिए पीएफ से एडवांस निकालना चाहते हैं तो आप जितनी बार चाहें, उतनी बार PF से पैसा निकाल सकते हैं।        बच्‍चों के पढ़ाई के लिए कितनी बार पीएफ निकाल सकते हैं  उच्‍च शिक्षा या पढ़ाई के खर्च के लिए पूरी सर्विस के दौरान ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 बार ही PF से एडवांस लिया जा सकता है।         शादी के लिए कितना निकाल सकते हैं पीएफ  अगर आप अपनी शादी, बच्‍चों की शादी या भाई-बहन की शादी कराना चाहते हैं और उसके लिए पीएफ का पैसा निकालना चाहते हैं तो आप पूरी सर्विस के दौरान 5 बार पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं।         घर के लिए कितना पीएफ निकाल सकते हैं  घर/प्लॉट खरीदना, मकान बनवाना, होम लोन की किस्त चुकाना या घर की मरम्मत/रिनोवेशन के लिए आप पीएफ से 5 बार एडवांस पैसा निकाल सकते हैं. वहीं इमरजेंसी के लिए आप सर्विस के दौरान सिर्फ 2 बाद पीएफ से एडवांस निकाल सकते हैं।  कितना निकाल सकते हैं पीएफ एडवांस?  EPFO के नए सर्कुलर के अनुसार, पात्र सदस्य संबंधित कैटेगरी की शर्तों के तहत अपने कुल EPF बैलेंस का 75% तक एडवांस के रूप में निकाल सकते हैं. हालांकि, इसके लिए सदस्‍य का 12 महीने तक ईपीएफ का मेंबर होना जरूरी है। 

MP में फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें, 15 हजार नई बसों का मेगा प्लान; 2030 तक पूरा होगा लक्ष्य

इंदौर  इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय 'यात्री परिवहन विजन समिट-2026' का औपचारिक शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि करीब दो दशकों के अंतराल के बाद राज्य सरकार सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक नया और आधुनिक मॉडल लागू करने जा रही है। इस पहल के तहत उन्नत तकनीक का उपयोग कर यात्रियों को अधिक सुगम, त्वरित और सुरक्षित आवागमन की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। सार्वजनिक परिवहन की मांग बढ़ी प्रदेश में लगातार बढ़ रही यात्रियों की संख्या का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के पास वर्तमान में 5 लाख किलोमीटर से अधिक का मजबूत सड़क नेटवर्क है। धार्मिक पर्यटन में आई अभूतपूर्व तेजी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जहां पूर्व में उज्जैन में वार्षिक आधार पर 60 से 70 लाख श्रद्धालु आते थे, वहीं हाल के दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर 8 करोड़ के पार पहुंच गया है। इस बढ़ती आवाजाही को देखते हुए सुदृढ़ सार्वजनिक परिवहन ढांचा तैयार करना बेहद अनिवार्य हो गया है। निजी ऑपरेटरों के सहयोग से 15 हजार बसों का लक्ष्य 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' के अंतर्गत वर्ष 2030 तक राज्य भर में लगभग 15 हजार नई बसों का परिचालन शुरू करने की कार्य योजना है। सरकार इस पूरी व्यवस्था में निजी बस ऑपरेटरों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगी और उन्हें नवीनतम तकनीकों से लैस करेगी। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले सेवा संकल्प माह के तहत 25 सितंबर को प्रदेशवासियों को इस नए परिवहन मॉडल की पहली आधिकारिक सौगात मिलेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों और ग्रीन मोबिलिटी को विशेष प्रोत्साहन राज्य में बड़े पैमाने पर हो रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) निर्माण का लाभ सबसे पहले प्रदेश के नागरिकों तक पहुंचाने की रणनीति तैयार की गई है। इंदौर मेट्रो के बाद अब इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और फ्लेक्स-फ्यूल बसों के संचालन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में शुरू हो रही यह सेवा नागरिकों के लिए एक नई शुरुआत होगी, जिसके तहत पारंपरिक भगवा रंग की बसें एक बार फिर आधुनिक सुविधाओं के साथ सड़कों पर सेवा देती नजर आएंगी।  

MP के डिंडोरी में साल के जंगलों पर बोरर बीटल का हमला, 1.46 लाख पेड़ काटने को मंजूरी

 डिंडोरी  मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले में साल के जंगलों पर बोरर बीटल का संक्रमण गंभीर रूप ले चुका है। हजारों हेक्टेयर जंगल में फैल चुके इस संक्रमण को रोकने के लिए अब बड़े पैमाने पर संक्रमित पेड़ों की कटाई की जाएगी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ) ने बुधवार को राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 30 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जंगल प्रभावित बोरर बीटल नामक कीट साल के पेड़ों को अंदर से खोखला कर देता है। अधिकारियों के मुताबिक इसका संक्रमण अब 30,344 हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैल चुका है। जांच के दौरान कुल 1,46,784 संक्रमित साल के पेड़ों की पहचान की गई है। इन्हें संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए हटाया जाएगा। केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद राज्य वन विभाग को बड़े स्तर पर सफाई और कटाई अभियान चलाने की अनुमति मिल गई है। विभाग के अनुसार पेड़ों की कटाई अक्टूबर तक शुरू की जाएगी। 19 लाख बीटल के सिर भी नहीं रोक सके संक्रमण संक्रमण पर काबू पाने के लिए सरकारी इनाम की व्यवस्था भी की गई थी। इसके तहत आदिवासी ग्रामीणों ने करीब 19 लाख साल बोरर बीटल के सिर एकत्र किए। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में कीटों को खत्म करने के प्रयास के बावजूद संक्रमण को रोका नहीं जा सका। वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद मिली मंजूरी कृषि मंत्रालय के प्रमुख बीएस एनीगेरी ने बताया कि विभाग को पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय से अनुमति मिल गई है और अक्टूबर तक पेड़ों की कटाई शुरू होगी। प्रस्तावित कटाई और इसके बाद किए जाने वाले वृक्षारोपण को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत वैज्ञानिक, तकनीकी और पारिस्थितिक औचित्य मांगा गया था। इसके बाद केंद्र की ओर से कटाई की मंजूरी दी गई है।

कचरे से कमाई का कमाल! पन्ना में ग्रामीण महिलाएं प्लास्टिक से बना रहीं खूबसूरत स्मृति चिन्ह

पन्ना   पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के वन गांवों में कभी झाड़ियों और जंगल के किनारे दिखाई देने वाला प्लास्टिक अब ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया बन रहा है। जिस कचरे से वन्यजीवों को खतरा पैदा होता था, उसे महिलाएं साफ करने के बाद प्रोसेस कर बैग, फोल्डर, स्टेशनरी और स्मृति चिन्ह जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों को पर्यटक अपने साथ यादगार के तौर पर ले जा रहे हैं। 2022 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट क्लीन डेस्टिनेशंस मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड ने वर्ष 2022 में पन्ना पार्क में 'प्रोजेक्ट क्लीन डेस्टिनेशंस' शुरू किया था। इसका उद्देश्य बढ़ते प्लास्टिक कचरे से निपटने के लिए केवल समय-समय पर सफाई अभियान चलाना नहीं, बल्कि एक स्थायी और सामुदायिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था तैयार करना था। यह पहल 14 ग्राम पंचायतों के 30 गांवों में लागू की गई। अब तक इन क्षेत्रों से 45 टन से अधिक कचरा एकत्र कर उसकी छंटाई और वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेसिंग की जा चुकी है। प्लास्टिक से तैयार हो रहे उपयोगी प्रोडक्ट कचरे की छंटाई के बाद करीब 42 प्रतिशत गैर-पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक इकोकारी को भेजा जाता है। यह एक सामाजिक उद्यम है, जो प्लास्टिक को उपयोगी सामग्री में बदलने का काम करता है। इसके बाद गांवों की वर्कशॉप में महिलाएं प्रोसेस किए गए प्लास्टिक से अलग-अलग उत्पाद तैयार करती हैं। इसके लिए पारंपरिक चरखे और हथकरघे का इस्तेमाल किया जाता है। इस तरह प्लास्टिक कचरे को उत्पाद में बदलने के साथ पारंपरिक कारीगरी को भी नए पर्यावरणीय उद्देश्य से जोड़ा गया है। महिलाओं के लिए रोजगार से आगे की पहल इस प्रोजेक्ट का मकसद केवल महिलाओं को काम या वेतन उपलब्ध कराना नहीं है। इसके जरिए ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर मिल रहे हैं। वहीं पर्यटकों के लिए तैयार किए गए स्मृति चिन्ह पन्ना के जंगलों और उन समुदायों से जुड़ी याद बन रहे हैं, जो इनके संरक्षण में योगदान दे रहे हैं। इस मॉडल में पर्यटन से पैदा होने वाला कचरा उसी गंतव्य के आसपास एकत्र होता है। फिर उसे स्थानीय स्तर पर अलग कर प्रोसेस किया जाता है और पारंपरिक शिल्प के जरिए नए उत्पाद में बदला जाता है। इसके बाद वही उत्पाद पर्यटन अर्थव्यवस्था में वापस पहुंचता है। 2025 में बांधवगढ़ तक पहुंचा मॉडल पन्ना में शुरू हुआ यह प्रयोग अब आगे बढ़ चुका है। 2025 में मध्य प्रदेश ने इस मॉडल को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों तक विस्तार दिया। राज्य का ग्रामीण पर्यटन मिशन अब 100 से अधिक गांवों को कवर करता है और 300 से अधिक महिलाओं के स्वामित्व वाले होमस्टे और नेचर भ्रमण स्थलों को समर्थन दे रहा है। इसमें प्राणपुर भी शामिल है, जिसे भारत के पहले हथकरघा शिल्प गांव के रूप में प्रमोट किया जा रहा है। यहां महिलाएं हथकरघा कैफे भी संचालित करती हैं। स्वच्छ वातावरण के लिए मिला SKOCH Silver Award इस प्रोजेक्ट को 2025 में स्वच्छ वातावरण के लिए SKOCH Silver Award से सम्मानित किया गया। राज्य सरकार ने उद्योग मानकों के अनुरूप पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन यानी ESG फ्रेमवर्क अपनाने का भी उल्लेख किया है। मध्य प्रदेश की जिम्मेदार पर्यटन रणनीति में प्लास्टिक-मुक्त वन्यजीव क्षेत्र, इलेक्ट्रिक-व्हीकल मोबिलिटी, कम-कार्बन आर्किटेक्चर और सामुदायिक आजीविका को एक साथ जोड़ा जा रहा है। ऐसे में पन्ना का मॉडल सिर्फ सफाई अभियान नहीं, बल्कि संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आ रहा है।