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8th Pay Commission में पेंशनर्स की बल्ले-बल्ले! 3.8 फिटमेंट फैक्टर से कितनी बढ़ेगी पेंशन, जानें गणना

नई दिल्ली क्‍या आठवें वेतन आयोग में केंद्रीय कर्मचारियों को सैलरी में 30% की बढ़ोतरी से ही संतोष करना होगा? क्‍या पेंशनर्स को भी उनके पेंशन में इतनी ही बढ़ोतरी से संतोष करना होगा. 8वें वेतन आयोग की देश के अलग-अलग शहरों में हो रही बैठकों के बीच 3.833 फिटमेंट फैक्‍टर का प्रस्‍ताव दे चुके संगठन AINPSF यानी ऑल इंडिया NPS फेडरेशन को आशंका है कि आयोग ज्‍यादा फिटमेंट फैक्‍टर की सिफारिश शायद ही करे।  संगठन के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष डॉ मंजीत पटेल तो 2.10 फिटमेंट फैक्‍टर पर भी कैलकुलेशन कर अपने सदस्‍यों की राय मांग रहे हैं. 7वें वेतन आयोग की तुलना में 8वें वेतन आयोग के लिए उनका कैलकुलेशन सैलरी और पेंशन में करीब 31% की बढ़ोतरी की संभावना जता रहा है।  8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ जाएगी सैलरी और पेंशन?  इस सवाल का पक्‍का जवाब तो फिलहाल 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के पास भी नहीं है. देशभर में बैठकों का दौर समाप्‍त होने के बाद आयोग आकलन करेगा और तभी अपनी सिफारिशें तैयार करेगा. बहरहाल, अलग-अलग संगठन उम्‍मीदें लगाए बैठे हैं. इधर, डॉ मंजीत सिंह पटेल ने 100 रुपये के मूल वेतन पर सातवें वेतन आयोग और आठवें वेतन आयोग के लिए कैलकुलेशन सामने रखा है. उनका आकलन बताता है कि सैलरी 31.25% बढ़ सकती है. और पेंशन भी इसी अनुपात में बढ़ाई जा सकती है।  100 रुपये के मूल वेतन पर कैलकुलेशन का फॉर्मूला सैलरी 225 रुपये से बढ़कर 257 रुपये होने में या फिर 158 रुपये से बढ़कर 210 रुपये होने में, कहां ज्‍यादा लाभ दिख रहा है आपको? डॉ पटेल ने अपनी पोस्‍ट में यही लिखा है. इस संबंध में हमने जब उनसे बात की तो उन्‍होंने बताया कि 100 रुपये के मूल वेतन पर मोटा-मोटी कैलकुलेशन किया गया है. उन्‍होंने समझाया पहले सातवें वेतन आयोग का कैलकुलेशन समझ लें       छठे वेतन आयोग में मान लीजिए किसी की सैलरी 100 रुपये थी.      तब DA बढ़कर 125% पहुंच गया था.      यानी बेसिक + DA मिलाकर सैलरी बनी- 225 रुपये      7वां वेतन आयोग हुआ तो 2.57 फिटमेंट फैक्‍टर लागू हुआ तो सैलरी हो गई 100 x 2.57= 257 रुपये      वास्‍तविक बढ़ोतरी= 257-225 = 32 रुपये      इसे 225 रुपये के आधार पर प्रतिशत में निकाला जाए तो ये महज 14.22% बढ़ोतरी हुई.  अब इसी तरह 8वें वेतन आयोग का कैलकुलेशन देखिए      7वें वेतन आयोग में किसी की सैलरी 100 रुपये मान लीजिए     DA बढ़कर 60% पहुंच गया है.     यानी बेसिक + DA मिलाकर सैलरी बनी- 160 रुपये      अब अगर 2.10 फिटमेंट फैक्‍टर लागू होता है तो सैलरी हो जाएगी: 210 रुपये      वास्‍तविक बढ़ोतरी= 210-160 = 50 रुपये     अब इसे 210 रुपये के आधार पर प्रतिशत में निकाला जाए तो बढ़ोतरी होगी- करीब 31.25% डॉ पटेल ने कहा कि अगर 8वें वेतन आयोग में व्‍यवहारिक तौर पर 2.10 फिटमेंट फैक्‍टर लागू होता है तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को 31% की बढ़ोतरी से ही संतोष करना पड़ सकता है।  31% बढ़ोतरी पर किस लेवल के कर्मचारियों की कितनी हो जाएगा सैलरी?  लेवल 1 कर्मचारी की शुरुआती बेसिक सैलरी ₹18,000 है. इस पर 60% DA यानी ₹10,800 जोड़ने पर कुल रकम ₹28,800 बनती है. अब यदि इस ₹28,800 पर 31% बढ़ोतरी की जाए, तो ये राशि करीब ₹37,728 प्रति माह हो जाएगी।  लेवल 5 में कर्मचारी की शुरुआती बेसिक सैलरी ₹29,200 होती है. इस पर 60% DA जोड़ने के बाद रकम ₹46,720 बनती है और अगर इसमें 31% बढ़ाया जाए, तो यह अनुमानित रूप से ₹61,203 प्रति माह हो जाएगी।  इसी तरह लेवल 10 की एंट्री बेसिक सैलरी ₹56,100 है. 60% DA के साथ यह ₹89,760 बनती है और इस पूरी राशि में 31% जोड़ने पर अनुमानित रकम करीब ₹1.18 लाख प्रति माह पहुंचती है।  लेवल 14 में एंट्री बेसिक पे ₹1,44,200 प्रति माह है. 60% DA के साथ यह रकम ₹2,30,720 होती है, जबकि इस कुल राशि में 31% जोड़ने पर अनुमानित वेतन ₹3,02,243 प्रति माह पहुंचेगा।  लेवल 18 में कैबिनेट सचिव स्तर की निर्धारित बेसिक सैलरी ₹2,50,000 प्रति माह है. 60% DA के बाद यह ₹4,00,000 हो जाती है और इस रकम पर 31% की गणितीय बढ़ोतरी के बाद कुल अनुमानित राशि ₹5,24,000 प्रति माह बनती है।  किस संगठन ने फिटमेंट फैक्‍टर और मिनिमम सैलरी पर क्‍या प्रस्‍ताव दिया है?  कर्मचारियों के संगठनों के संयुक्‍त प्रतिनिधि NC-JCM स्‍टाफ साइड (National Council of the Joint Consultative Machinery) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. वहीं, AINPSEF (All India New Pension Scheme Employees Federation) और AIDEF (All India Defence Employees' Federation) ने भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. FNPO (Federation of National Postal Organisations) की भी यही मांग है. कुछ संगठनों ने व्यवहारिक तौर पर कम फिटमेंट फैक्‍टर का भी प्रस्‍ताव दिया है।  IRTSA (Indian Railways' Technical Supervisors' Association) ने 2.92 के न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर और 52,560 रुपये न्यूनतम सैलरी (Multiple with minimum at Rs 52,560) का प्रस्ताव रखा है।  दिल्‍ली गवर्नमेंट स्‍कूल टीचर्स ने 2.62 फिटमेंट फैक्टर और 47,210 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. वहीं चेन्नई GPO पेंशनर्स ने 3.77 फिटमेंट फैक्टर और 68,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है. भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये मिनिमम सैलरी का प्रस्ताव रखा है। 

Thar लवर्स के लिए बड़ी खबर! Mahindra ला रही है अपडेटेड SUV, लॉन्च टाइमलाइन आई सामने

 नई दिल्ली महिंद्रा थार (Mahindra Thar) को कंपनी ने अक्टूबर 2025 में पहला अपडेट दिया था. पहले अपडेट के लगभग एक साल बाद कंपनी इसे दोबारा अपडेट कर सकती है. रिपोर्ट्स की मानें, तो महिंद्रा अपनी ऑफ-रोडर को इस महीने यानी सितंबर में ही अपडेट कर सकती है. हालांकि, महिंद्रा ने आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी नहीं दी है।  इस एसयूवी का अपडेट सितंबर के अंत तक लॉन्च हो सकता है. महिंद्रा इस कार के अपडेट में डिजाइन में कुछ बदलाव कर सकती है, जिससे इसे मौजूदा मॉडल से थोड़ा अलग किया जा सके. फिलहाल कार का लुक वही है जो 2020 में लॉन्च के वक्त था।  क्या होगा नई महिंद्रा थार में खास?  अपडेटेड थार को कंपनी ज्यादा अपस्केल और ट्रेंडी लुक दे सकती है, जिससे ये रिफ्रेश लगेगी. एसयूवी में रिवाइज्ड ग्रिल, रिडिजाइन बंपर्स, बदले हुए हेडलैम्प्स और फ्रेश एलॉय व्हील डिजाइन मिलेगा. हाल में ही एसयूवी को टेस्ट करते हुए देखा गया है, जिसमें पांच स्लॉट वाली ग्रिल थी। . इसके अलावा अपडेटेड थार में एलईडी हेडलैम्प्स और नया पांच डबल स्पोक एलॉय व्हील मिलेगा. कंपनी इस कार के इंटीरियर को भी अपडेट कर सकती है, जिसमें मल्टीपल स्टाइलिंग और फंक्शनल बदलाव किए जा सकते हैं. महिंद्रा इस कार में नई अपहोल्स्ट्री दे सकती है।  कार में नए टेक फीचर्स, कम्फर्ट और कन्वीनियंस फीचर्स मिलेंगे. इसमें 10.25 इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, वेंटिलेटेड सीट्स और वायरलेस स्मार्टफोन चार्जर मिलेगा. इसके अलावा कार में पैसिव कीलेस एंट्री भी दी जा सकती है, जिससे कार में घुसना और निकलना आसान होगा।  इंजन में नहीं होगा कोई बदलाव नई थार के इंजन में बदलाव की उम्मीद नहीं है. इसमें वहीं तीन इंजन ऑप्शन मिलेंगे, जो मौजूदा थार में आते हैं. एसयूवी में 1.5 लीटर का डीजल, 2.2 लीटर का डीजल और 2.0 लीटर का पेट्रोल इंजन मिलेगा. कंज्यूमर्स को 6 स्पीड मैन्युअल और 6 स्पीड ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन का विकल्प मिलेगा।  कार ऑल व्हील ड्राइव के साथ आएगी. थार का 1.5 लीटर डीजल इंजन 117 एचपी की पावर और 300 एनएम का टॉर्क प्रोड्यूस करता है. वहीं 2.2 लीटर के डीजल इंजन के साथ 130 एचपी की पावर और 300 एनएम का टॉर्क मिलता है. जबकि 2.0 लीटर के पेट्रोल इंजन के साथ 150 एचपी की पावर और 300 एनएम का टॉर्क मिलता है। 

Private School Teachers: समान वेतन और पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली  देश के प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों के लिए एक समान वेतन, पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ की मांग से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले पर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। आपको बता दें कि गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर में जवाब दायर करने के लिए कहा है। इस याचिका में प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट के बाद सुरक्षा के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की गई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) को भी नोटिस जारी किया। इस मामले पर अब चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका ऑल-इंडिया टीचर्स फेडरेशन की नेशनल कोऑर्डिनेटर लिगीमोल जॉर्ज ने अपने वकील दीपक प्रकाश के जरिए दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि वह एक तय समय-सीमा के भीतर प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने पर विचार करे। संवैधानिक आदेश को आगे बढ़ाने का काम करते हैं शिक्षक याचिकाकर्ता का कहना है कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक आर्टिकल 21A के तहत संवैधानिक आदेश को आगे बढ़ाने में एक जरूरी सार्वजनिक काम करते हैं, लेकिन उनके लिए अभी भी कोई व्यापक और समान कानूनी ढांचा नहीं है। वर्तमान में राज्य के कानूनों, संस्थानों के तौर-तरीकों और नौकरी की शर्तों पर निर्भर है। यही कारण है कि एक रैंक के शिक्षकों को अलग-अलग लाभ मिल रहे हैं। मेडिकल और इंश्योरेंस की भी मांग याचिका में नेशनल प्राइवेट स्कूल टीचर्स वेलफेयर बोर्ड, रिटायरमेंट के बाद पेंशन जैसी सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, बीमा और परिवार के लिए लाभ सुनिश्चित करने के लिए एक सरकारी तंत्र बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इसकी कमी से देश भर के लाखों शिक्षक बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बिना किसी लाभ के रिटायर हो रहे हैं शिक्षक याचिका में कहा गया है कि बड़ी संख्या में प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक बिना पर्याप्त पेंशन लाभ, चिकित्सा सहायता, बीमा सुरक्षा, विकलांग होने पर मिलने वाली सहायता के रिटायर हो जाते हैं। इन कमियों के कारण शिक्षक बुढ़ापे और अन्य आपातकालीन स्थितियों में कठिनाई का सामना करते हैं। याचिका में प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों की स्थिति की तुलना उन नौकरीपेशा वालों से की गई है जिनके लिए खास कल्याणकारी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। जैसे कि भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों, बीड़ी श्रमिकों, सिनेमा श्रमिकों, मछुआरों, पत्रकारों, असंगठित श्रमिकों और अन्य कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी व्यवस्थाओं का जिक्र किया गया है। याचिका में अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 38, 39, 41, 42 और 43 का भी हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता ने आधिकारिक UDISE+ 2023–24 डेटा का सहारा लिया है। याचिका में कहा गया है कि भारत में लगभग 14.72 लाख स्कूल, 98 लाख से अधिक शिक्षक और लगभग 24.8 करोड़ छात्र हैं। इनमें से 37,30,047 शिक्षक मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत हैं।

TMC के बागियों को BJP में नहीं मिली जगह? सायोनी घोष-काकोली के बाद पार्टी के फैसले पर सवाल

नईदिल्ली  सयोनी घोष, यूसुफ पठान हों या काकोली घोष… सभी ने बंगाल चुनाव में टीएमसी की हार के बाद ममता का साथ छोड़ा. टीएमसी के बागी सांसदों ने एनडीए का हिस्सा बनना पसंद किया. वे सभी एसीपीआई यानी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए. यह एनसीपीआई दिल्ली में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा है. अब टीएमसी के उन बागी सांसदों को भाजपा ने ही झटका दिया है. जी हां, बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी नगर निकाय चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है. भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के उन बागी सांसदों के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया है, जो अब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का हिस्सा हैं।  बीजेपी का यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इस साल हुए विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बाद अब पार्टी की नजर कोलकाता और हावड़ा के नगर निकाय चुनावों पर है. इन दोनों चुनावों को बीजेपी के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है. केएमसी यानी कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम (HMC) के चुनाव दुर्गा पूजा के बाद होने की उम्मीद है. दोनों नगर निगमों के वार्डों की सीमाओं में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. इसे परिसीमन कहा जाता है. इसके तहत मतदाताओं की संख्या और इलाकों के आधार पर वार्डों की सीमाएं फिर से तय की जाती हैं।  खबर के मुताबिक, बंगाल प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने हाल में कहा, ‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी का कोई गठबंधन सहयोगी नहीं है. हम कोलकाता और हावड़ा नगर निकाय चुनाव अपने दम पर लड़ेंगे और जीतेंगे.’ उन्होंने कहा कि दिल्ली में एनसीपीआई के साथ कोई राजनीतिक समझ हो सकती है, लेकिन दिल्ली और कोलकाता के बीच करीब 1,500 किलोमीटर की दूरी है. उनका कहना था कि राष्ट्रीय स्तर पर किसी पार्टी के साथ राजनीतिक संबंध होने का यह मतलब नहीं है कि पश्चिम बंगाल में भी उसी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन किया जाए।  विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी का बढ़ा आत्मविश्वास पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन के बाद बीजेपी को कोलकाता में भी अपना आधार मजबूत होने का भरोसा है. केएमसी में पहले बीजेपी की स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. लेकिन विधानसभा चुनाव में कोलकाता की ज्यादातर सीटों पर लोगों ने बीजेपी को वोट दिया. केएमसी चुनाव की जिम्मेदारी संभाल रहे बीजेपी नेता रितेश तिवारी ने कहा कि पार्टी सभी 209 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बड़ी जीत हासिल करेगी।  NCPI को अब भी गठबंधन की उम्मीद वहीं, दूसरी तरफ टीएमसी के बागी गुट वाले सांसदों की फौज वाली NCPI को अभी भी बीजेपी के साथ गठबंधन की उम्मीद है. पार्टी का तर्क है कि वह संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के साथ है. इसलिए नगर निकाय चुनाव में भी दोनों दलों के साथ आने की संभावना है. NCPI की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उनकी पार्टी एनडीए की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टियों में से एक है और वह गठबंधन के सदस्य के रूप में निकाय चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि चुनाव के करीब आने पर गठबंधन को लेकर फैसला किया जाएगा, लेकिन साथ आने की पूरी संभावना है।  गौरतलब है कि बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के खराब प्रदर्शन के बाद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी. इसके बाद वे NCPI में शामिल हो गए. इसमें सयोनी घोष भी शामिल थीं. ये सांसद दिल्ली में NDA की बैठकों में भी शामिल होते रहे हैं।  बंगाल बीजेपी क्यों नहीं चाहती TMC के बागियों से गठबंधन? अब सबसे बड़ा सवाल है कि आकिर बंगाल में बीजेपी टीएमसी के बागियों संग गठबंधन क्यों नहीं चाहती? दरअसल, पश्चिम बंगाल बीजेपी के कई नेताओं का मानना है कि पार्टी को अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव लड़ना चाहिए. एक सीनियर बीजेपी नेता ने कहा कि यह बंगाल में सत्ता में आने के बाद पार्टी का पहला नगर निकाय चुनाव होगा. इसलिए बीजेपी अपने संगठन, नेताओं और कार्यकर्ताओं की ताकत को आजमाना चाहती है. उन्होंने यह भी कहा कि NCPI के कई नेता पहले TMC में थे. बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इन्हीं नेताओं के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया है. कई बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इस राजनीतिक लड़ाई में अपनी जान तक गंवाई है. ऐसे में अगर बीजेपी अब उन्हीं पूर्व TMC नेताओं के साथ हाथ मिलाती है तो पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है. इसके अलावा बीजेपी TMC नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है. पार्टी निकाय चुनाव में भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का वादा करना चाहती है. ऐसे में TMC के कुछ नेताओं के साथ गठबंधन करने पर मतदाताओं के बीच सवाल खड़े हो सकते हैं।  कई पार्टियों के बीच मुकाबले का फायदा उठाना चाहती है BJP बीजेपी के अकेले चुनाव लड़ने के पीछे राजनीतिक गणित भी है. राज्य में मुकाबला सिर्फ बीजेपी और TMC के बीच नहीं होगा. NCPI, ममता बनर्जी की TMC, TMC से अलग हुए विधायक, वाम दल और कांग्रेस भी मैदान में होंगे. बीजेपी को लगता है कि अगर वोट कई पार्टियों में बंटता है तो उसे फायदा मिल सकता है. इसी वजह से पार्टी अकेले चुनाव लड़कर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 

नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी में रोहित यादव रचेंगे इतिहास? एशियन गेम्स के टॉप-5 जैवलिन थ्रो रिकॉर्ड

नई दिल्ली भारतीय जैवलिन थ्रोअर रोहित यादव के पास एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रचने का मौका होगा. नीरज चोपड़ा के चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद भारत की जैवलिन थ्रो की जिम्मेदारी रोहित यादव और यशवीर सिंह के कंधों पर होगी. रोहित हाल के महीनों में शानदार फॉर्म में रहे हैं और उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो 87.68 मीटर है. ऐसे में वह एशियन गेम्स के इतिहास में सबसे बड़े थ्रो करने वाले खिलाड़ियों की सूची में नीरज चोपड़ा और किशोर जेना के बाद अपना नाम दर्ज करा सकते हैं।  नई दिल्ली में इंडियन एथलेटिक्स सीरीज फाइनल में 81.10 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर शीर्ष स्थान हासिल करने वाले रोहित ने साफ किया कि वह एशियन गेम्स में किसी अतिरिक्त दबाव के साथ नहीं उतरेंगे. उनके मुताबिक भारत की ओर से जैवलिन थ्रो में हमेशा पदक की उम्मीद रहती है और वह देश के लिए मेडल जीतने की पूरी कोशिश करेंगे।  कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सातवें स्थान पर रहने वाले रोहित का मानना है कि उस प्रतियोगिता में उनकी लय सही नहीं थी. हालांकि अब उनकी तैयारी बेहतर है और वह जापान में होने वाले एशियन गेम्स में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दोहराने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।  रोहित यादव ने क्या कहा? नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी में खेलने को लेकर रोहित यादव ने कहा, "कोई दबाव नहीं है. मैं वहाँ खुलकर खेलूँगा. बड़े कॉम्पिटिशन में हमेशा दबाव होता है. जैवलिन थ्रो में हमें हमेशा मेडल मिलता है और जब भी नीरज खेलते हैं तो ऐसी उम्मीद होती है. हम भी भारत के लिए मेडल जीतने की कोशिश करेंगे।  अपने लक्ष्य के बारे में बात करते हुए रोहित ने कहा, "हमारा लक्ष्य वही दोहराना है जो हमने पहले किया है. मैं किसी और चीज़ के बारे में नहीं सोच रहा हूं. रोहित ने यह भी स्वीकार किया कि नीरज चोपड़ा की सफलता ने भारतीय जैवलिन थ्रो का स्तर पूरी तरह बदल दिया है. उनके मुताबिक नीरज को ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और डायमंड लीग जैसे बड़े मंचों पर जीतते देखकर नई पीढ़ी को लगातार प्रेरणा मिलती है।  एशियन गेम्स में जैवलिन थ्रो के टॉप-5 ऑल टाइम बेस्ट रिकॉर्ड झाओ किंगगांग (चीन) – 89.15 मीटर, इंचियोन 2014 नीरज चोपड़ा (भारत) – 88.88 मीटर, हांगझोउ 2023 नीरज चोपड़ा (भारत) – 88.06 मीटर, जकार्ता 2018 किशोर जेना (भारत) – 87.54 मीटर, हांगझोउ 2023 काजुहिरो मिजोगुची (जापान) – 81.82 मीटर, बीजिंग 1990 रोहित यादव का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो 87.68 मीटर है. अगर वह एशियन गेम्स में अपने इस प्रदर्शन के करीब भी पहुंचते हैं, तो वह सीधे इस लिस्ट के चौथे स्थान से ऊपर पहुंच सकते हैं और एशियाई खेलों के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड कायम कर सकते हैं। 

पक्षियों से होने वाली बिजली ट्रिपिंग पर लगी रोक, MP Transco ने बर्ड गार्ड और एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से पाया समाधान

बर्ड गार्ड और बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से विंध्य क्षेत्र में पक्षीजनित ट्रिपिंग नियंत्रित करने में एम पी ट्रांसको को मिली सफलता भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि जंगलों, जलाशयों और नदी तटीय क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों की गतिविधियों के कारण होने वाली ट्रिपिंग को रोकने के लिए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा विंध्य क्षेत्र में विशेष तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। रीवा, सतना, पन्ना, सीधी और सिंगरौली जिलों के पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाली 132 केवी एवं 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के टावरों पर बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर (बीएफडी), बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। 20 ट्रिपिंग से न्यूनतम तक पहुंचा आंकड़ा एमपी ट्रांसको रीवा सतना के कार्यपालन अभियंता अमित कुमार के अनुसार वर्ष 2025-26 में पक्षियों के कारण रीवा क्षेत्र की ट्रांसमिशन लाइनों में लगभग 20 ट्रिपिंग दर्ज की गई थीं। इन घटनाओं के तकनीकी विश्लेषण के बाद संवेदनशील स्थानों पर बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाने का निर्णय लिया गया। इनके उपयोग के बाद पक्षीजनित ट्रिपिंग की घटनाएं लगभग शून्य हो गई हैं। स्थानीय परिस्थितियों और पक्षियों के व्यवहार को ध्यान में रखकर किए गए ये तकनीकी उपाय प्रभावी साबित हो रहे हैं। टावर पर पक्षियों के बैठने से रोकता है बर्ड गार्ड जंगलों एवं जलाशयों के आसपास से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों के टावर पक्षियों के लिए बैठने और घोंसला बनाने का स्थान बन जाते हैं। टावर पर बैठकर पक्षियों द्वारा मलमूत्र त्यागने से यह पदार्थ इंसुलेटर डिस्क पर जमा हो सकता है। बारिश या अधिक नमी की स्थिति में इसकी विद्युत चालकता बढ़ने से फ्लैशओवर और लाइन ट्रिपिंग की स्थिति बन सकती है। इस समस्या को कम करने के लिए बर्ड गार्ड को टावर के क्रॉसआर्म के किनारों पर लगाया जाता है। इसकी संरचना पक्षियों को वहां बैठने और घोंसला बनाने में कठिनाई पैदा करती है। यह व्यवस्था कुछ स्थानों पर बंदरों को क्रॉसआर्म के किनारे तक पहुंचने से रोकने में भी सहायक होती है। बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से इंसुलेटर सुरक्षित बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर को डिस्क इंसुलेटर के ऊपरी हिस्से पर स्थापित किया जाता है। यदि पक्षी टावर के क्रॉसआर्म पर बैठकर मलमूत्र त्याग करता है, तो प्रिवेंटर के कारण यह सीधे इंसुलेटर डिस्क पर जमा नहीं हो पाता। इससे इंसुलेटर की इंसुलेशन क्षमता प्रभावित होने और परिणामस्वरूप ट्रिपिंग होने की संभावना काफी कम हो जाती है। सहायक अभियंता अजय चौरसिया ने स्थानीय पक्षियों के व्यवहार के अनुसार किया तकनीकी संशोधन कार्यपालन अभियंता अमित कुमार की पहल पर रीवा ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस में पदस्थ सहायक अभियंता अजय चौरसिया ने विंध्य क्षेत्र में पक्षियों के कारण होने वाली ट्रिपिंग की समस्या के तकनीकी अध्ययन के आधार पर महत्वपूर्ण पहल की। फील्ड की व्यवहारिक और तकनीकी आवश्यकता एवं क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों के व्यवहार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बर्ड प्रिवेंटर डिवाइसों में इन हाउस आवश्यक तकनीकी संशोधनों के साथ ट्रांसमिशन लाइनों पर उपयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप पक्षीजनित ट्रिपिंग में उल्लेखनीय कमी आई। व्यवधान मे कमी के साथ पक्षी सुरक्षा भी मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में एमपी ट्रांसको द्वारा पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों पर पक्षी सुरक्षा के विशेष उपाय किए जा रहे हैं। इसके तहत 05 नग 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के 470 टावरों तथा 133.68 किलोमीटर कुल लंबाई वाले नेटवर्क पर 210 गार्ड एवं 50 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इसी प्रकार 15 नग 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के 1,530 टावरों तथा 440 किलोमीटर कुल लंबाई वाले नेटवर्क पर 1,600 गार्ड एवं 150 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इन उपायों का उद्देश्य एक ओर पक्षियों के कारण ट्रांसमिशन लाइनों में होने वाली ट्रिपिंग की घटनाओं को कम करना, वहीं दूसरी ओर पक्षियों को विद्युत लाइनों के संपर्क में आने से बचाकर उनकी मृत्यु एवं घायल होने की घटनाओं को रोकना तथा क्षेत्र की जैव विविधता और पक्षी संरक्षण को बढ़ावा देना है। विंध्य के पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी विंध्य क्षेत्र के बाणसागर एवं रिहंद जलाशय, सोन एवं टमस नदी के तटीय क्षेत्र, संजयदुबरी टाइगर रिजर्व के आसपास के वन क्षेत्रों तथा अन्य जल निकायों में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या में आवाजाही रहती है। इन क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों की गतिविधियां अधिक होने के कारण एमपी ट्रांसको द्वारा संवेदनशील टावरों की पहचान कर चरणबद्ध रूप से बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इन तकनीकी उपायों से एक ओर पक्षियों के ट्रांसमिशन लाइनों से टकराने और विद्युत संरचनाओं के संपर्क में आने की संभावना कम होगी, वहीं दूसरी ओर पक्षीजनित फॉल्ट, ट्रिपिंग और ब्रेकडाउन में कमी आने से विंध्य क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता और उपलब्धता बेहतर होगी।  

बैंकों की देशव्यापी हड़ताल, भोपाल के एमपी नगर में कर्मचारियों ने बुलंद की आवाज

UFBU के आह्वान पर देशव्यापी बैंक हड़ताल, भोपाल के एमपी नगर प्रेस कॉम्प्लेक्स में गूंजा एकजुटता का स्वर भोपाल  यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर में अलग-अलग स्थानों पर बैंककर्मियों की हड़ताल व्यापक रूप से एवं प्रभावी ढंग से सम्पन्न हुई। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु सहित प्रमुख महानगरों से लेकर राज्य एवं जिला मुख्यालयों तक बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी न्यायोचित मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हड़ताल का प्रमुख केंद्र एमपी नगर स्थित प्रेस कॉम्प्लेक्स, पीएनबी के पास रहा, जहाँ बड़ी संख्या में बैंक के 5000 से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। “5-दिवसीय बैंकिंग लागू करो”, “बैंककर्मियों के स्वास्थ्य और सम्मान से समझौता नहीं” जैसे गगनभेदी नारों के साथ आंदोलनकारियों ने सरकार एवं बैंक प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दिया कि अब टालमटोल की नीति स्वीकार्य नहीं है। हड़ताल का नेतृत्व UFBU के संयोजक श्री संजीव कुमार  मिश्रा मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सुबीन सिन्हा एवं सेक्रेटरी दिनेश झा तथा भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ भोपाल सर्कल के अध्यक्ष अनिल कुमार श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर घटक दलों के वरिष्ठ कामरेड वीरू शर्मा, दीपकरत्न शर्मा, संजय कुदेशिया, नज़ीर कुरेशी, शोभित वादेल , प्रवीण मेघानी, वी.एस. नेगी एवं सुनील सिंह,संगठन मीडिया प्रभारी अरविंद पंडियार की सक्रिय भूमिका रही। इसके अतिरिक्त रजनीश पौराणिक, सुरेश बाबू मीणा,स्वप्निल चतुर्वेदी , क्षितिज तिवारी, निर्भय सिंह, मनीष भार्गव, नितिन बिखानी, विजय चौटानी, अंबरिश नंदा, राजेश नायक, जितेंद्र बग्गा, प्रियंका गुप्ता, दीपक नायर, अंकुर दुबे, सुखमीत कौर, राहुल करौलिया, कुलदीप स्वर्णकार, विजय राघवन, अमित गुप्ता, संजय सिंह, देवेंद्र दांगी, सुमित मिश्रा, हितेश कुमार, देवेश जैन, मोनिका भागवानी, कपिला मेघानी, प्रशांत रघुवंशी, रोहित यादव, अमित प्रजापति, जयंत सेन, सेतु पाठक, राहुल खरे, ब्रजेश कुशवाहा, अनिल कुमार, मुदित जोशी, कीर्ति खरे, विनीता दुबे, पूजा कुशवाहा, के के त्रिपाठी, मनीष चतुर्वेदी, विभु जोशी सहित बड़ी संख्या में पुरुष एवं महिला साथियों ने बढ़-चढ़कर हड़ताल में भाग लिया, जिससे आंदोलन को और अधिक मजबूती मिली। साथ ही मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों पर भी  एवं AIBOC के बैनर तले बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने एकजुट होकर हड़ताल में सहभागिता की। जिला एवं अंचल मुख्यालयों पर हुए प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बैंककर्मियों की मांगें केवल स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा और निर्णायक आवाज़ हैं। नेताओं ने अपने संबोधन में तर्कपूर्ण ढंग से कहा कि 5-दिवसीय बैंकिंग केवल कर्मचारियों की सुविधा का प्रश्न नहीं, बल्कि बेहतर ग्राहक सेवा, प्रभावी जोखिम प्रबंधन एवं स्वस्थ कार्य-संस्कृति के लिए अनिवार्य सुधार है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बैंकिंग क्षेत्र की जमीनी सच्चाइयों को समझते हुए कर्मचारियों की लंबित एवं न्यायोचित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए, अन्यथा आंदोलन को और अधिक व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा।UFBU के द्वारा भविष्य के दिए गए कॉल लागू रहेंगे।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? 64% हो सकता है DA, नवरात्रि-दुर्गा पूजा से पहले बढ़ेगी सैलरी!

नई दिल्ली त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें महंगाई भत्ते (Dearness Allowance)पर टिक गई हैं. देश के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनर्श जुलाई 2026 से लागू होने वाले इस भत्ते में बढ़तरी(DA Hike july 2026) का बेसब्री से इंतजार कर रहे है. इस साल 11 अक्टूबर से नवरात्रि और 20 अक्टूबर को दशहरा है. ऐसे में हर कोई जानना चाहता है कि क्या सरकार दुर्गा पूजा या नवरात्रि के आसपास इस तोहफे का ऐलान करेगी।  आइए आपको बताते हैं कि ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के अनुमानित आंकड़े और सरकार के पिछले पैटर्न के हिसाब से कब सरकारी कर्मचारियों के डीए पर गुड न्यूज मिल सकती है और इस बार कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद की जा रही है… कब तक हो सकती है महंगाई भत्ते की घोषणा? आमतौर पर सरकार जुलाई से लागू होने वाले डीए की घोषणा सितंबर या अक्टूबर में करती है. अगर नवरात्रि पर ऐलान नहीं होता है, तो सरकार दिवाली तक पर कर्मचारियों को ये तोहफा दे सकती है. अच्छी बात यह है कि महंगाई भत्ते की घोषणा जब भी होगी, भत्ते की दरें 1 जुलाई 2026 से ही लागू मानी जाएंगी. इसका मतलब है कि कर्मचारियों को पिछले महीनों का बकाया एरियर भी साथ में मिलेगा।  कितना बढ़ सकता है आपका DA? फिलहाल कर्मचारियों को बेसिक सैलरी का 60% डीए मिल रहा है. ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के जुलाई आंकड़ों के मुताबिक इंडेक्स 153.2 पर पहुंच गया है. इस आधार पर अनुमानित डीए 64% बैठता है. यानी इस बार डीए में सीधा 4% का इजाफा होने की पूरी उम्मीद है. जब तक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें पूरी तरह लागू नहीं होतीं, तब तक यह बढ़ोतरी 7वें वेतन आयोग के तहत ही दी जाएगी।  कितनी बढ़ेगी इन-हैंड सैलरी? हालांकि आपको ये समझना होगा कि 4% डीए बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि आपकी कुल टेक-होम सैलरी 4% बढ़ जाएगी. डीए का कैलकुलेशन आपकी बेसिक सैलरी पर होता है…. यहां समझिए डीए बढ़ने से अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी बढ़कर कितनी हो जाएगी.. डीए का कैलकुलेशन आपकी बेसिक सैलरी पर होता है. 4% डीए बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि आपकी कुल टेक-होम सैलरी 4% बढ़ जाएगी सिर्फ सैलरी नहीं पेंशन भी बढ़ेगा महंगाई भत्ता सिर्फ इन-हैंड सैलरी ही नहीं बढ़ाता, बल्कि इसका असर पीएफ (PF), ग्रेच्युटी और पेंशनर्श की मासिक पेंशन पर भी पड़ता है. जैसे ही सरकार कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी देगी, त्योहारी सीजन में कर्मचारियों के बैंक खातों में बढ़ी हुई सैलरी और एरियर की रकम जमा हो जाएगी. फिलहाल आपको त्योहारों से पहसे सरकार की तरफ से आने वाले एक बड़े फैसले के लिए इंतजार करना होगा।   

दिल्ली से गुरुग्राम का सफर होगा और तेज, द्वारका-महिपालपुर से हरियाणा बॉर्डर तक हाईस्पीड कनेक्टिविटी

गुरुग्राम गुरुग्राम में बढ़ते ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए सरकार जल्द ही एक तीन लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना बना रही है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसके लिए प्लान तैयार कर लिया है.  इसके बनने से दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर लगने वाला जाम काफी हद तक कम हो जाएगा. इसके लिए दिल्ली की शिव मूर्ति महिपालपुर और एम्बिएंस मॉल के पास हरियाणा बॉर्डर के बीच तीन-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा।  यह एलिवेटेड कॉरिडोर करीब 2 कलोमीटर लंबा बनाया जा सकता है. दरअसल एक्सप्रेसवे के इसी हिस्से में सबसे ज्यादा जाम लगता है. सुबह-शाम दिल्ली-गुरुग्राम के बीच सफर करने वालों को इससे काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. खासकर ऑफिस आने-जाने वाले लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं.. हर दिन वे इस जाम से जूझते हैं. लेकिन नया एलिवेटेड रोड बनने से उनको सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।  181 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एलिवेटेड रोड जानकारी के मुताबिक, एलिवेटेड रोड करीब 181 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा. यह रोड तीन लेन को होगा.इसके दोनों तरफ दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाई जाएगी.सालों से इस योजना पर विचार चल रहा है. पहले सड़क चौड़ी करने और फ्लाईओवर का प्रस्ताव रखा गया. लेकिन अब एलिवेटेड रोड बनाए जाने को ट्रैफिक जाम से मुक्ति का ज्यादा बढ़िया समाधान माना गया है।  द्वारका अंडरपास के ट्रैफिक को मिलेगा नया रोड NHAI योजना बना रहा है कि तीन-लेन वाले एलिवेटेड कॉरिडोर रंगपुरी के पास द्वारका एक्सप्रेसवे इंटरचेंज की राइट-टर्न टनल से बनाया जाए. इसे सेक्टर 10 तक बनाए जाने की प्लानिंग है. जिससे इसे द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे के बीच कनेक्ट हो सके. वहीं अंडरपास से निकलने वाले ट्रैफिक को शहर की तरफ जाने वाले एलिवेटेड सेक्शन पर भेजने का प्रस्ताव है।  राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा नया रोड नए एलिवेटेड रोड के बनने के बाद NH8 से गुजरने वाले वाहनों को अंडरपास से निकलते ही शानदार कॉरिडोर मिलेगा, जिससे उनको जाम में नहीं फंसना पड़ेगा. द्वारका एक्सप्रेसवे से आने वाले ट्रैफिक को मौजूदा सड़क के ही ऊपर से ले जाने की योजना है, ताकि लोग जाम में न फंसे. बता दें कि नया एलिवेटेड रोड मौजूदा राजोकरी फ्लाईओवर के समानांतर चलेगा।  शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच होगा है भारी जाम इसका प्रस्ताव इस रूट पर ट्रैफिक की पूरी स्थिति देखने के बाद तैयार किया गया है. जिससे पता चला कि शिव मूर्ति और हरियाणा बॉर्डर के बीच NH8 के पूरे हिस्से पर पीक आवर्स में खचाखच जाम रहता है. सर्विस रोड पर भी बिल्कुल जगह नहीं होती. वाहन रेंग-रेंगकर चलते हैं. महिपाल फ्लाईओवर तक गाड़ियों की लंबी लाइनें लगी रहती हैं. जब से द्वारका एक्सप्रेसवे खुला है, तब से ये परेशानी और भी बढ़ गई है।  वर्तमान में मिलेनियम सिटी में घुसते ही शिव मूर्ति पर जाम लग जाता है. सोनीपत, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से आने वाले वाहनों को जाम से ज्यादा जूझना पड़ता है. जिसकी वजह से एम्बिएंस मॉल की ओर जाना मुश्किल हो जाता है।  हर दिन ट्रैफिक में नहीं फंसना पड़ेगा एक सर्वे से पता चला है कि NH8 के मुख्य कैरिजवे पर हर दिन एक तरफ 1.2 लाख और दूसरी तरफ 1.6 लाख गाड़ियां होकर गुजरती हैं. सर्विस रोड और अलग-अलग इंटरचेंज रास्तों से भी हजारों गाड़ियां होकर गुजरती हैं.हालांकि दिल्ली से NH-8 पर आने वाले वाहनों को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड पर जाने की परमिशन नहीं होगी. ये वाहन  मौजूदा चार-लेन वाले कैरिजवे पर ही चलेंगे. नया एलिवेटेड कॉरिडोर मुख्य रूप से द्वारका एक्सप्रेसवे अंडरपास से निकलने वाले वाहनों के लिए बनाया जा रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा।   

PF से पैसे निकालने वालों के लिए जरूरी खबर, इमरजेंसी में कितना मिलेगा फंड? समझें नए नियम

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन ने अपने करोड़ों स्‍टेकहोल्‍डर्स के लिए PF अकाउंट में आंशिक विड्रॉल के नियमों को बेहद आसान और ट्रांसपैरेंट बना दिया है. नए नियम के तहत अब बीमारी,बच्‍चों की पढ़ाई, शादी और घर खरीदने या बनवाने जैसे कामों के लिए पैसा निकालने का नियम बदल चुका है।  पीएफ निकासी के तीन कैटेगरी ईपीएफओ की नई गाइडलाइन के अनुसार, अब एडवांस क्‍लेम को तीन कैटेगरी में बांट दिया गया है, जिसमें आवश्यक जरूरतें, आवास जरूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं. अब आइए जानते हैं कि नए नियम में क्‍या-क्‍या बदल चुका है और आप पीएफ अकाउंट से एक बार में कितना पैसा निकाल सकते हैं।          बीमारी के लिए कितनी बार PF का पैसा निकाल सकते हैं  अगर मेडिकल इमरजेंसी या इलाज के लिए पीएफ से एडवांस निकालना चाहते हैं तो आप जितनी बार चाहें, उतनी बार PF से पैसा निकाल सकते हैं।        बच्‍चों के पढ़ाई के लिए कितनी बार पीएफ निकाल सकते हैं  उच्‍च शिक्षा या पढ़ाई के खर्च के लिए पूरी सर्विस के दौरान ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 बार ही PF से एडवांस लिया जा सकता है।         शादी के लिए कितना निकाल सकते हैं पीएफ  अगर आप अपनी शादी, बच्‍चों की शादी या भाई-बहन की शादी कराना चाहते हैं और उसके लिए पीएफ का पैसा निकालना चाहते हैं तो आप पूरी सर्विस के दौरान 5 बार पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं।         घर के लिए कितना पीएफ निकाल सकते हैं  घर/प्लॉट खरीदना, मकान बनवाना, होम लोन की किस्त चुकाना या घर की मरम्मत/रिनोवेशन के लिए आप पीएफ से 5 बार एडवांस पैसा निकाल सकते हैं. वहीं इमरजेंसी के लिए आप सर्विस के दौरान सिर्फ 2 बाद पीएफ से एडवांस निकाल सकते हैं।  कितना निकाल सकते हैं पीएफ एडवांस?  EPFO के नए सर्कुलर के अनुसार, पात्र सदस्य संबंधित कैटेगरी की शर्तों के तहत अपने कुल EPF बैलेंस का 75% तक एडवांस के रूप में निकाल सकते हैं. हालांकि, इसके लिए सदस्‍य का 12 महीने तक ईपीएफ का मेंबर होना जरूरी है।