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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वें वेतन आयोग के सामने CGEGIS में 10 गुना बीमा कवर बढ़ाने का प्रस्ताव

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग सिर्फ वेतन और भत्तों तक सीमित नहीं है। कर्मचारी संगठनों ने इसके सामने कई दूसरे मुद्दे भी रखे हैं, जिनमें CGEGIS (Central Government Employees Group Insurance Scheme) में बदलाव की मांग प्रमुख है। कर्मचारियों का कहना है कि CGEGIS के तहत मिलने वाला बीमा कवर मौजूदा समय की महंगाई और परिवार की बढ़ती जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। खास बात यह है कि इस योजना की बीमा राशि में लंबे समय से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। कर्मचारी संगठनों के अनुसार, ग्रुप C कर्मचारियों के लिए करीब ₹1.50 लाख का बीमा कवर आज भी बना हुआ है, जिसे पुराने वेतन आयोग की सिफारिशों से जोड़ा जाता है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। CGEGIS को नए सिरे से तैयार करने की मांग 8वें वेतन आयोग के सामने दिए गए ज्ञापनों में कर्मचारी संगठनों ने CGEGIS को नए सिरे से तैयार करने की मांग की है। MSA (Ministerial Staff Association) ने बीमा कवर को मौजूदा दरों से कम से कम 10 गुना बढ़ाने का सुझाव दिया है। संगठन का तर्क है कि आज के समय में किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को मिलने वाली यह राशि पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं देती। ग्रुप A के लिए ₹3 करोड़ तक का बीमा FNPO (Federation of National Postal Organisations) ने भी योजना में बड़े बदलाव की मांग करते हुए ग्रुप C के लिए ₹1 करोड़, ग्रुप B के लिए ₹1.50 करोड़ और ग्रुप A के लिए ₹3 करोड़ तक का बीमा कवर सुझाया है। इसके लिए अलग-अलग मासिक योगदान का प्रस्ताव भी रखा गया है। पहले के वेतन आयोगों में चर्चा पर खत्म हुई बात कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पहले के वेतन आयोगों में भी CGEGIS के योगदान और बीमा राशि को बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा हुई थी, लेकिन योजना में अपेक्षित बदलाव नहीं हो सका। FNPO ने सुझाव दिया है कि पहले 7वें वेतन आयोग से जुड़े प्रस्तावित बीमा स्तरों को लागू किया जाए और उसके बाद महंगाई तथा वेतन में बदलाव के आधार पर इसे समय-समय पर बढ़ाया जाए। संगठन ने महंगाई भत्ते के एक निश्चित स्तर तक पहुंचने पर बीमा कवर में स्वतः बढ़ोतरी का सुझाव भी दिया है असमय मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सहायता CGEGIS में बीमा के साथ बचत का हिस्सा भी शामिल होता है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में बीमा सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि कर्मचारी की असमय मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता मिल सके। इसी वजह से बीमा और बचत के अनुपात में बदलाव की मांग भी उठी है। हालांकि, इन सभी मांगों पर अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल, केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजर इस बात पर है कि 8वां वेतन आयोग CGEGIS को लेकर क्या सिफारिश करता है और क्या दशकों से चली आ रही इस व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

UP के 1.19 लाख बुजुर्गों को राहत, 45-45 दिन में मिलेगी ₹1,500 की पेंशन किस्त

 बाराबंकी  वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों के लिए नई किस्त प्रणाली लागू कर दी गई है। अब तीन माह की 3000 रुपये की पेंशन राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से दो बराबर किस्तों में भेजी जाएगी। 1.19 लाख वृद्धावस्था पेंशन लाभार्थी हैं और इनके खातों में पेंशन की राशि आनी शुरू हो गई है। नई व्यवस्था में 80 वर्ष से अधिक उम्र के लाभार्थियों को मिलने वाली 3000 रुपये की त्रैमासिक पेंशन में राज्य और केंद्र सरकार का योगदान बराबर रहेगा। दोनों की ओर से 1500-1500 रुपये दिए जाएंगे। वहीं, 80 वर्ष से कम उम्र के लाभार्थियों की पेंशन में राज्य सरकार का योगदान 2400 रुपये और केंद्र सरकार का अंश 600 रुपये होगा। यह पात्रता, करें आवेदन जिला समाज कल्याण अधिकारी डॉ. नीलम सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में 46 हजार 80 और शहरी क्षेत्र में 56 हजार 460 रुपये वार्षिक आय होनी चाहिए। परिवार रजिस्टर नकल, आधार कार्ड, बैंक पास बुक, शैक्षिक योग्यता यदि हो, पासपोर्ट साइज फोटो लगेगा। एकीकृत सामाजिक पेंशन पोर्टल (एसएसपीवाई.यूपी.जीओवी.इन) पर आवेदन किया जाता है। कोई व्यक्ति जिसकी 60 वर्ष की उम्र पूरी हो चुकी है, वह आवेदन कर सकता है। नई किस्त प्रणाली के मुख्य बिंदु     तीन माह की कुल पेंशन : 3,000 रुपये     भुगतान : दो किस्तों में     प्रत्येक किस्त : 1500 रुपये     प्रत्येक किस्त 1.5 माह यानी 45 दिन में जारी होगी     भुगतान : डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में     भुगतान की स्थिति : एसएमएस और पोर्टल पर उपलब्ध     पात्रता के लिए : आयु प्रमाण और आधार से लिंक बैंक खाता जरूरी     80 साल से अधिक उम्र के लाभार्थी     राज्य सरकार : 1500 रुपये     केंद्र सरकार : 1500 रुपये     80 साल से कम उम्र के लाभार्थी     राज्य सरकार : 2400 रुपये     केंद्र सरकार : 600 रुपये  

वरिंदर सिंह बाजवा के निधन से SAD में शोक, सुखबीर बादल ने कहा- ‘पार्टी ने सच्चा नेता खो दिया’

होशियारपुर. शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य वरिंदर सिंह बाजवा का शनिवार को निधन हो गया। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही अकाली दल के खेमे में शोक की लहर दौड़ गई। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बाजवा के निधन को अकाली दल के लिए बड़ी क्षति बताया। वरिंदर सिंह बाजवा लंबे समय से अकाली राजनीति से जुड़े रहे और पार्टी में उन्होंने विभिन्न स्तरों पर अपनी जिम्मेदारी निभाई। वरिष्ठ नेता के तौर पर पार्टी के संगठनात्मक मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। राज्यसभा सदस्य के रूप में भी उन्होंने पंजाब और पार्टी से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनके राजनीतिक अनुभव और संगठन के भीतर मजबूत पकड़ के कारण उन्हें अकाली दल के महत्वपूर्ण नेताओं में गिना जाता था। बाजवा के निधन की सूचना मिलने के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल शनिवार को मॉडल टाउन स्थित उनके आवास पर पहुंचे। सुखबीर बादल ने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और उनके साथ दुख साझा करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पार्टी ने अनुभवी स और समर्पित नेता खो दिया है। कार्यकर्ताओं में भी शोक बाजवा के निधन की खबर फैलते ही अकाली दल के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पार्टी से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर दुख जताया। नेताओं ने कहा कि बाजवा ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में पार्टी को मजबूती देने के लिए लगातार काम किया। उनका सहज व्यवहार और कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ाव लंबे समय तक याद रखा जाएगा। राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि बाजवा का निधन ऐसे समय में हुआ है, जब पंजाब की राजनीति में अकाली दल एक बार फिर अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में पार्टी के अनुभवी नेता का निधन संगठन के लिए भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ी क्षति है। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी बाद में साझा की जाएगी। बाजवा के निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त करते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई।

मुख्य लाइन जाम कर सहायक गलियों में सीवर ओवरफ्लो कराने की साजिश, नगर निगम ने भेलूपुर थाने में दी तहरीर

​ वाराणसी  काशी की छवि को योजनाबद्ध तरीके से धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। सीवर लाइनों की सफाई के दौरान शिवाला, सरायनंदन, नगवा समेत आधा दर्जन वार्डों में मुख्य सीवर लाइनों के भीतर बालू की बोरियां, लकड़ी का बुरादा, पत्थर, प्लाई और प्लास्टिक की सामग्री ठूंसी हुई मिली है। प्रथम दृष्टया यह किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत हो रहा है। मुख्य मार्ग की सीवर लाइन जाम होने के कारण सहायक गलियों में सीवर का पानी ओवरफ्लो करने लगा, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ और जलभराव का दृश्य बना। नगर निगम प्रशासन ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए अज्ञात अराजक तत्वों के खिलाफ एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज कराने हेतु पुलिस को लिखित तहरीर सौंप दी है।  महापौर अशोक कुमार तिवारी एवं नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने शनिवार को पार्षदों व अधिकारियों के साथ शिवाला वार्ड में अग्रवाल रेडियों के समीप मौका मुआयना किया। इस दौरान महापौर ने कहा कि नगर निगम और जलकल विभाग की टीमें दिन-रात सड़कों पर मुस्तैद रहकर जलजमाव निस्तारण में जुटी हुई हैं। इसके बावजूद पिछले दस दिनों से सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर नगर निगम को टारगेट कर जलभराव की भ्रामक फोटो व वीडियो प्रसारित की जा रही हैं। जबकि धरातल पर सच्चाई यह है कि दर्जनों जलभराव वाले प्वाइंट्स को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और निचले इलाकों से पानी पंपों के जरिए लगातार निकाला जा रहा है। ​महापौर ने बताया कि शुक्रवार की रात शिवाला क्षेत्र में सीवर लाइन सफाई के दौरान करीब 12 बोरी बालू निकाली गई। सीवर लाइन में इस प्रकार बालू भरी बोरियां मिलना सीधे तौर पर साजिश की ओर इशारा करता है, जो गहन जांच व विवेचना का विषय है। निगम प्रशासन क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहा है ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। वहीं, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने इस कृत्य के पीछे अवांछनीय तत्वों का हाथ होने की आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि निगम इस साजिश का पर्दाफाश करने में पूरी ताकत से जुटा है। उन्होंने सम्मानित शहरवासियों से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति सीवर लाइन या सरकारी परिसंपत्तियों के साथ ऐसी छेड़छाड़ करता दिखे तो तुरंत नगर निगम को सूचित करें। ​जलकल विभाग ने भेलूपुर थाने में दर्ज कराई प्राथमिकी की तहरीर ​अधिशासी अभियंता (जोन-2), जलकल विभाग, इस प्रकरण में अज्ञात लोगों के खिलाफ भेलूपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए तहरीर दी है है। तहरीर में शिवाला वार्ड संख्या-75 के अंतर्गत कूड़ा घर रत्नाकर पार्क के पास अग्रवाल रेडियों के निकट जलभराव समस्या के निस्तारण हेतु मुख्य सीवर लाइन सफाई के दौरान अत्यधिक मात्रा में बालू से भरे बोरे पाए गए। इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि अज्ञात लोगों द्वारा मुख्य सीवर लाइन को चोक कर जलकल विभाग एवं शहर की छवि धूमिल करने की नीयत से यह साजिश रची गई है। ​मौके पर मौजूद प्रमुख जन प्रतिनिधि व अधिकारी: निरीक्षण के दौरान उपसभापति नरसिंह दास, पार्षद सुरेश चौरसिया, चंद्रनाथ मुखर्जी, मदनमोहन तिवारी, विजय द्विवेदी, महेंद्र पटेल, इंद्रदेव सिंह, मनीष गुप्ता, सोमनाथ यादव, अक्षयवर सिंह, अतुल पांडेय, रविंद्र कुमार सिंह, जलकल के महाप्रबंधक अनूप सिंह एवं सचिव सुधीर वर्मा सहित कई अन्य अधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने 5,826 मीटर ऊंची रुद्रगैरा चोटी पर फहराया तिरंगा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ‘बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश लेकर पर्वतारोहण अभियान पर निकलीं लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने माउंट रुद्रगैरा की 5,826 मीटर ऊंची चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। 10 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे शिखर पर पहुंचीं पूर्वा ने कठिन बर्फीले और चट्टानी रास्तों, कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच यह उपलब्धि हासिल की। अब उनका अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करना है। सीएम योगी से मुलाकात कर सौंपा था ‘बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश मई 2018 में पूर्वा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का बैनर सौंप चुकी हैं। सीएम योगी ने शुभकामनाएं देकर उनका हौसला बढ़ाया था। पूर्वा ने रुद्रगैरा फतह का श्रेय परिवार के सहयोग और सीएम की प्रेरणा को दिया। अभियान में शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा की भी अहम भूमिका रही। क्योंकि उन्हीं के मार्गदर्शन में पूर्वा ने गंगोत्री में विशेष प्रशिक्षण लिया। गंगोत्री से दो दिन का सफर, फिर 1,300 मीटर की कठिन चढ़ाई पूर्वा, शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा ने 7 सितंबर को सुबह 9 बजे गंगोत्री से ट्रेक शुरू किया। दो दिन की चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग के बाद टीम 4,350 मीटर की ऊंचाई पर रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची। 10 सितंबर को सुबह चार बजे बेस कैंप से समिट पुश शुरू हुआ। करीब आठ घंटे 30 मिनट की कठिन चढ़ाई में टीम ने लगभग 1,300 मीटर की ऊंचाई हासिल की और दोपहर 12:30 बजे 5,826 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंची। रास्ते में खड़ी बर्फ, चट्टानी हिस्से और कठिन खुले सेक्शन थे। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की कमी और शारीरिक थकान ने चुनौती बढ़ाई, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान मिले प्रोत्साहन को पूर्वा ने अपने अभियान की ऊर्जा बनाया और लगातार नए लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं। पीक्स एंड प्लास्टिक से स्वच्छ हिमालय का संदेश, अब मिशन एवरेस्ट पूर्वा ने अपने अभियान को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ पहल के जरिए वह पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रति जागरूकता और जिम्मेदार पर्वतारोहण का संदेश दे रही हैं। उनका कहना है कि हिमालय की चोटियों को फतह करना जितना गौरवपूर्ण है, उतना ही जरूरी उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित रखना भी है। रुद्रगैरा पर तिरंगा फहराने के बाद अब पूर्वा की नजर 8,848.86 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर है। उनका लक्ष्य एवरेस्ट पर भारतीय तिरंगा फहराने के साथ महिला सशक्तीकरण, युवा प्रेरणा और स्वच्छ हिमालय का संदेश पहुंचाना है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कवि सम्मेलन से लखनऊ विवि की वॉल पेंटिंग तक, कई शहरों में पहुंचा अभियान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देने और माफिया राज व भय की संस्कृति के खिलाफ सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे रंग दे बसंती अभियान का कारवां लगातार बढ़ रहा है। अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित कर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में लखनऊ के राजेंद्र नगर स्थित नवयुग कन्या डिग्री कॉलेज में रंग दे बसंती टीम ने छात्राओं से संवाद किया। कार्यक्रम में छात्राओं को शिक्षा के साथ नवाचार और एआई आधारित शिक्षा के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही बदलते दौर में सोशल मीडिया की उपयोगिता, उसके सकारात्मक प्रयोग और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए इसके इस्तेमाल को लेकर छात्राओं से संवाद किया गया। इस दौरान छात्राओं ने क्विज प्रतियोगिता, टैलेंट क्रिएशन समेत विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कॉलेज की प्राचार्य मंजुला उपाध्याय ने कहा कि रंग दे बसंती जैसे प्लेटफॉर्म छात्रों के लिए उपयोगी साबित होंगे। ऐसे मंचों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा को निखारने और उसे सामने लाने का अवसर मिल रहा है। कार्यक्रम में छात्राओं ने रैंप वॉक, सिंगिंग, डिबेट और काव्य पाठ जैसी क्रिएटिव गतिविधियों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं का रंग दे बसंती टीम की ओर से उत्साहवर्धन किया गया। मानवी राजपूत, आमना असद, रौशनी चौधरी, वर्तिका, शगुन और कुलेष्ठा को प्रोत्साहन स्वरूप ट्रॉफी प्रदान की गई। रंग दे बसंती के प्रदेश संयोजक ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से योग्य छात्र-छात्राओं का चयन किया जा रहा है। चयनित विद्यार्थियों को शैक्षिक गतिविधियों के साथ-साथ नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने में सहायता देने के लिए 15 हजार रुपये की आर्थिक मदद भी दी जा रही है। इसके लिए प्रदेश के सभी जनपदों में फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। आवेदन फॉर्म रंग दे बसंती के इंस्टाग्राम पेज और वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं। अभियान के तहत टीम प्रदेश के अनेक जनपदों में कार्यक्रम आयोजित कर तेजी से छात्र-छात्राओं तक अपनी पहुंच बना रही है। इसके तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कवि सम्मेलन, लखनऊ विश्वविद्यालय में वॉल पेंटिंग और मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज में कॉमिक बुक का विमोचन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा चुके हैं।

रायगढ़ में कल से शुरू होगा 41वां अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह, सांस्कृतिक रंगों से सजेगा मंच

रायगढ़. कला और संस्कृति की नगरी रायगढ़ में 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह का भव्य आयोजन कल से शुरू होगा। रामलीला मैदान में आयोजित होने वाला यह समारोह 23 सितंबर तक चलेगा। हर शाम 6 बजे से देश-प्रदेश के नामचीन कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। समारोह की शुरुआत पद्मश्री डॉ. उषा बारले की प्रस्तुति से होगी। इसके अलावा पद्मश्री से सम्मानित कलाकारों के साथ इंडियन आइडल फेम कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। समारोह के दौरान संगीत, नृत्य और लोककला की विविध प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। चक्रधर समारोह का भव्य समापन कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू की सुरमयी प्रस्तुतियों के साथ होगा। आयोजन की खास बात यह भी है कि स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध कलाकारों के साथ एक ही मंच साझा करने का अवसर मिलेगा। आयोजकों के अनुसार, चक्रधर समारोह रायगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देश और दुनिया तक पहुंचाने वाला प्रमुख आयोजन है। इस बार भी बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।

BRICS में ग्लोबल साउथ की बढ़ी आवाज, PM मोदी बोले- समाधान उनके लिए नहीं, उनके साथ मिलकर बनाएं

नई दिल्ली विविधता और सहयोग को सेलिब्रेट करते हुए ब्रिक्स समिट पूरी हुई। इस बार ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत ने की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि BRICS में उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभव का सम्मान होता है और समाधान उनके लिए नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं। टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर ये बोले पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि BRICS की शक्ति हमारी विविधता और सहयोग में है। ब्रिक्स के पार्टनर देश और आउटरीच के लिए आमंत्रित विशेष प्रतिनिधियों के साथ एक सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स का वेपनाइजेशन हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। 'कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। चुनौतियों को समय रहते पहचानना, उनके लिए तैयार रहना और तुरंत कार्रवाई करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज विश्व में तनावों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लोगों के जीवन पर इसका बहुत नकारात्मक असर प्रभाव भी हो रहा है और व्यापक प्रभाव भी हो रहा है। पीएम मोदी का सबको साथ लेकर चलने पर जोर पीएम ने कहा कि महामारियों, क्लाइमेट डिजास्टर और सप्लाई चेन में गतिरोध ने दिखाया है कि आज की इंटरकनेक्टेड दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसलिए हमने ब्रिक्स समूह में कई कदम उठाए हैं। मोदी ने कहा कि टेक्नॉलजी और क्रिटिकल मिनरल्स का वेपनाइजेशन हमारी साझा प्रगति में बाधा बन सकता है। इसलिए हमने टेक्नॉलजी को अपनाने में सबको साथ लेकर चलने पर जोर दिया है। मित्रता, सहभागिता और सहयोग… ब्रिक्स समिट का ऐसे हुआ समापन उन्होंने कहा कि भारत ने ब्रिक्स के मंच से मित्रता, सहभागिता और सहयोग को आगे बढ़ाया है। हमारी कोशिश है कि ब्रिक्स सहयोग सिर्फ सरकारों तक सीमित ना रहे। हमारे उद्यमी, किसान, रिसर्चर, महिलाएं, युवा इसके सक्रिय भागीदार बनें। पीएम मोदी ने कहा कि हमारा मानना है कि BRICS में विकसित सल्यूशन का लाभ सिर्फ ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इन्हें ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप अपनाने की जरूरत है।

फर्जी पासपोर्ट कांड में बड़ा खुलासा, भोपाल-डबरा से 70 से अधिक पासपोर्ट बने; 15 अफसर जांच के घेरे में

ग्वालियर/भोपाल. मध्य प्रदेश में जाली दस्तावेज से बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनाने वाले नेटवर्क की कारगुजारियों ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस मामले की जांच कर रही राज्य एसटीएफ ने अब तक जिन चार लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें से नागपुर से पकड़े गए एक आरोपित का पासपोर्ट गुजरात में कच्छ जिले के मथल गांव के पते पर बना पाया गया। कच्छ के पास पाकिस्तान बार्डर लगता है, इसलिए एसटीएफ ने इस आरोपित जाय चौधरी बरूआ से गहन पूछताछ कर रही है। बौद्ध विहार के पते पर बना प्रियान राय का पासपोर्ट वहीं महाराष्ट्र के उल्लासनगर से पकड़े गए प्रियान राय का पासपोर्ट ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध विहार के पते पर बना है। अब एसटीएफ के राडार पर सरकारी विभागों का वह सिस्टम है, जो सत्यापन से लेकर दस्तावेज बनाने वाली प्रक्रिया में शामिल है। यह वही दस्तावेज हैं, जिनके जरिये पासपोर्ट बने हैं। अब तक पुलिस और दूसरे विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर 15 लोगों के नाम सूची में हैं। इसमें ग्वालियर के डबरा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी विनायक शुक्ला, एचसीएम भूपेंद्र गुर्जर सहित अन्य पुलिसकर्मी व पासपोर्ट सेवा केंद्र के कर्मचारी भी हैं। एसटीएफ ने की डबरा के पते पर बने पासपोर्टों की पड़ताल बता दें कि अभी तक मध्य प्रदेश के दतिया के डबरा स्थित बौद्ध मठ के पते पर 17, भोपाल के अन्ना नगर स्थित बौद्ध मठ के पते पर 40, बैतूल से 11, छिंदवाड़ा एवं पांढुर्णा जिले से एक-एक फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का मामला सामने आया है। एसटीएफ ने अभी डबरा के पते पर बने पासपोर्टों की पड़ताल की है। इसमें सामने आया था कि सभी के फर्जी तरीके से आधार कार्ड आरोपित रियाल चौधरी ने बनवाए थे। वह असम के कामरूप जिले का रहने वाला है। अन्य जिलों से बने पासपोर्ट में भी उसकी भूमिका हो सकती है। मामले में अभी तक चार आरोपितों की गिरफ्तारी की गई है। एसटीएफ की जांच के दायरे में प्रदेश के पांच जिले ग्वालियर, भोपाल, पांणूर्ना, छिंदवाड़ा, बैतूल के अलावा दूसरे जिले भी हैं। यहां बौद्ध विहार व आंबेडकर पार्क के पते पर कितने ऐसे लोगों के पासपोर्ट बने जो कुछ समय पहले ही यहां आए थे। इन सभी के दस्तावेज, पासपोर्ट जांच के दायरे में हैं। 200 तक पहुंच सकती है, पासपोर्ट की संख्या जांच अधिकारियों को आशंका है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर बने पासपोर्टों की संख्या 200 तक पहुंच सकती है। अभी अन्य पासपोर्ट की जांच जारी है, जो इन्हीं पते पर बने हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में अब तक ऐसे 70 फर्जी पासपोर्ट की पुष्टि हो चुकी है, जबकि अभी 100 से ज्यादा पासपोर्ट और हैं, जिनकी जांच चल रही है। यह भी संदिग्ध हैं। सत्यापन कर्मचारियों की सूची तैयार – नागपुर से पकड़े गए बांग्लादेशी का पासपोर्ट गुजरात के कच्छ के पते पर बना था। वहां भी एक टीम भेजी जाएगी। सत्यापन प्रक्रिया में शामिल पुलिस अधिकारी, पुलिसकर्मी एवं दूसरे विभागों के सरकारी कर्मचारियों की सूची तैयार की है। – राजेश सिंह भदौरिया, एसपी, एसटीएफ।

योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ से 5,123 छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूली शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से भी जोड़ा जाएगा। योगी सरकार की पहल के तहत ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के माध्यम से बांदा मंडल के सात आवासीय सर्वोदय विद्यालयों में अध्ययनरत 5,123 विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना की तैयारियां पूरी की हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ ऐसा कौशल उपलब्ध कराना है, जिससे भविष्य में उनके लिए नौकरी और स्वरोजगार के विकल्प बढ़ सकें। 7 विद्यालयों के छात्रों को मिलेगा लाभ समाज कल्याण विभाग की ओर से बांदा मंडल में 7 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें बांदा के दो, चित्रकूट के तीन तथा हमीरपुर और महोबा में एक-एक विद्यालय शामिल हैं। इन आवासीय विद्यालयों में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति वर्ग के गरीब और मेधावी विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। अब कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को उनकी नियमित पढ़ाई के साथ कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। रुचि के अनुसार ट्रेड, प्रैक्टिकल पर जोर प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत विद्यार्थियों की रुचि और उपलब्ध ट्रेड के आधार पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन से छह महीने की अवधि वाले सर्टिफिकेट कोर्स संचालित होंगे। अपैरल, आईटी-आईटीईएस, रिटेल मैनेजमेंट, ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा। विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में दो दिन प्रैक्टिकल क्लास भी आयोजित की जाएगी, जिससे वे सीखे हुए कौशल का व्यावहारिक इस्तेमाल कर सकें। विद्यालय परिसर में ही प्रशिक्षण, योगी सरकार उठाएगी खर्च विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के लिए किसी दूसरे स्थान पर नहीं जाना पड़ेगा। संबंधित विद्यालय परिसरों में ही प्रशिक्षकों की तैनाती कर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी। योजना के तहत प्रशिक्षण का पूरा खर्च योगी सरकार वहन करेगी, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया जाएगा। सफल विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) का संयुक्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जो देशभर में मान्य होगा। रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार होंगे विद्यार्थी इस पहल का फोकस विद्यार्थियों को केवल किसी ट्रेड का प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य की रोजगार जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। कौशल हासिल करने के बाद विद्यार्थी निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशने के साथ अपनी रुचि के अनुसार स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगे। समाज कल्याण विभाग के अनुसार, जल्द ही विद्यालयवार विद्यार्थियों का पंजीकरण शुरू कराया जाएगा। इसके बाद रुचि के आधार पर ट्रेड आवंटित किए जाएंगे। प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उपस्थिति और पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रत्येक विद्यालय में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा।