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शिक्षक नियुक्ति विवाद में बड़ा अपडेट, हाई कोर्ट ने JSSC को विषयवार-कोटिवार मेरिट लिस्ट देने का दिया निर्देश

रांची झारखंड हाई कोर्ट द्वारा गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर शनिवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कमेटी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनाई गई विषयवार, कोटिवार संशोधित राज्य मेधा सूची प्रस्तुत करे। राज्य सरकार की ओर से माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जेएसएससी द्वारा सरकार को उपलब्ध कराई गई अनुशंसा के आधार पर की गई नियुक्तियों के संदर्भ में शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, तान्या सिंह, राजेश कुमार एवं अन्य ने पक्ष रखा। बता दें कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की ओर से शिक्षक नियुक्ति में हुई गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। वर्ष 2016 में जेएसएससी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें नियुक्ति जिलावार मेधा सूची और राज्यस्तरीय मेधा सूची के आधार पर की गई है। एक ही नियुक्ति परीक्षा में दो तरह की मेधा सूची होने से योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हो गए हैं। इसकी जांच के लिए हाई कोर्ट ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। सामुदायिक स्वास्थ्य कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों को राहत हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सामुदायिक स्वास्थ्य के स्नातक विज्ञान कोर्स उत्तीर्ण अभ्यर्थियों सुनील कुमार एवं अन्य को राहत मिली है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सामुदायिक स्वास्थ्य के स्नातक विज्ञान कोर्स में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार के वर्ष 2019 के गजट नोटिफिकेशन के आधार पर इन्हें 4200 का ग्रेड पे उसी तिथि से दें, जिस तिथि से उन्होंने इस परीक्षा को पास किया है। प्रार्थियों की ओर अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने संकल्प जारी कर सामुदायिक स्वास्थ्य में स्नातक विज्ञान डिग्री लेने के बाद अभ्यार्थियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सहायक पद पर नियुक्त कर उन्हें 4200 का ग्रेड पे देने का निर्णय लिया है। इनकी नियुक्ति के लिए सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य सहायक नियुक्ति एवं सेवाशर्त नियमावली, 2025 गठित की है, लेकिन उक्त डिग्री लेने के बाद भी इन्हें 4200 का ग्रेड पे नहीं दिया गया और इनकी नियुक्ति न कर उन्हें संविदा पर रखा गया है। सरकार के वर्ष 2019 संकल्प के तहत इनकी नियुक्ति नहीं की गई।

गीता और तीन बेटियों की हत्या से दहला जयपुर, सिर पर ईंट से वार कर मौत के घाट उतारने का खुलासा

 जयपुर कालवाड़ रोड स्थित गोविंद वाटिका में हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा है। एक साथ बेटी गीता और तीन नातिनों नंदिनी, राधिका व गिरिशा उर्फ गोरी की अर्थियां उठती देख गुजरात से जयपुर पहुंची गीता की मां केतकी बेन का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटी और तीन नातिनों के शव देखकर उनकी चीख निकल पड़ी। वह बार-बार यही कहती रहीं कि राहुल ने मेरा पूरा परिवार उजाड़ दिया। केतकी बेन ने बताया कि वह घर पर टीवी देख रही थीं। इसी दौरान खबर के जरिए उन्हें बेटी गीता और तीन नातिनों की हत्या की जानकारी मिली। घटना की सूचना मिलते ही वह जयपुर पहुंचीं। पीहर पक्ष लगातार राहुल के भाई और अन्य परिजनों से आरोपी को पुलिस के सामने पेश करवाने की मांग करता रहा। सिर में गंभीर चोट से हुई चारों की मौत पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गीता और उसकी तीन बेटियों की मौत का कारण सिर में गंभीर चोट लगना सामने आया है। चारों के सिर पर सीमेंट की ईंट से वार किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब हत्या के पीछे की वजह और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। 23 साल पहले हुई थी गीता की शादी परिजन गीता के ससुराल में प्रताड़ित किए जाने के आरोप भी लगा रहे हैं। करीब 23 साल पहले शादी के बंधन में बंधी गीता की इस तरह हत्या से पीहर पक्ष सदमे में है। परिवार की चार जिंदगियां एक ही झटके में खत्म होने से हर आंख नम है। परिजनों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर हत्या की असली वजह सामने लाने की मांग की है। वहीं पड़ोसियों का कहना है कि परिवार यहां करीब सात साल से रह रहा था। इस दौरान कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि घर में मारपीट या किसी तरह का बड़ा गृहक्लेश चल रहा हो। ऐसे में चार हत्याओं की घटना ने आसपास रहने वाले लोगों को भी स्तब्ध कर दिया है। 10 सितंबर को हुई थी मां से आखिरी बातचीत गीता के भाई सतीश ने बताया कि 10 सितंबर को नंदिनी ने वीडियो कॉल किया था। हालांकि उस समय ज्यादा बातचीत नहीं हो सकी। नंदिनी ने कुछ देर बाद बात करने की बात कहकर फोन काट दिया। इसके बाद गीता ने भी अपनी मां केतकी बेन को वीडियो कॉल किया था। गीता ने मां से कहा था कि वह खाना खाने के बाद दोबारा फोन करेगी। लेकिन इसके बाद न तो गीता का फोन आया और न ही नंदिनी का। परिजनों के मुताबिक ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। गीता जब भी खाली होती थी, अपनी मां से जरूर बात करती थी। मां को क्या पता था कि बेटी का यह वादा उनकी आखिरी बातचीत बन जाएगा। चार हत्याओं के पीछे आखिर क्या थी वजह? गीता और उसकी तीन बेटियों की हत्या के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर राहुल ने ऐसा कदम क्यों उठाया? परिजन इस बात को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं कि चार लोगों की हत्या के बाद घर में मौजूद उसके पिता को क्यों छोड़ दिया गया। मां केतकी बेन बेटी और तीन नातिनों को खोने के बाद बार-बार फफक पड़ती हैं। भाइयों और अन्य परिजनों की मांग है कि पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच करे और यह सामने लाए कि आखिर इस खौफनाक वारदात के पीछे क्या वजह थी।

चूल्हे-चौके से लाइब्रेरी तक पहुंचीं बिहार की महिलाएं, बनीं ‘डिजिटल एडुप्रेन्योर’; 61% छात्राएं उठा रहीं लाभ

पटना कल तक जो महिलाएं घर की चारदीवारी, चूल्हे-चौके और सामाजिक बंदिशों में कैद थीं, जिन्हें आर्थिक तंगी और रूढ़िवादी सोच के कारण कभी पढ़ाई का अवसर नहीं मिला। आज वही महिलाएं ग्रामीण बिहार में बदलाव की नई इबारत लिख रही हैं। बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग की जीविका योजना के तहत संचालित जीविका-दीदी की लाइब्रेरी सशक्त माध्यम बन चुकी है। राज्य में संकुल स्तरीय संघ (सीएलएफ) के माध्यम से 118 जीविका-दीदी की लाइब्रेरी(सामुदायिक पुस्तकालय सह करियर विकास केंद्र) का सफल संचालन हो रहा है। 1 लाख से अधिक युवा एवं क‍िशोर जुड़े इनसे अब तक 1 लाख से अधिक किशोर एवं युवा जुड़ चुके हैं। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, ये लाइब्रेरी सप्ताह के सातों दिन सुबह 9.30 से शाम 5.00 बजे तक खुलते हैं। प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन औसतन 50 से 70 शिक्षार्थी पहुंचते हैं। इन शिक्षार्थियों में 61 फीसदी लड़कियां हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्यभर में रोजाना करीब 5,000 से 7,000 बच्चे लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ते हैं। इसमें एक बड़ी संख्या दीदियों की बच्चों की भी है जो आज इस सुविधा के बदौलत खुद का भविष्य संवार रहे हैं। पुस्तकालयों में शांत वातावरण के साथ कंप्यूटर, टैबलेट, हाई-स्पीड इंटरनेट, किताबें, समाचार पत्र और आनलाइन पठन-पाठन की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लाइब्रेरी में बढ़ने के लिए आने वाले बच्चों में कई ऐसे हैं जिन्होंने पूर्व में अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। आज उन्हें एनआईओएस, बीबीओएसइ और इग्नू जैसे संस्थानों में नामांकन कराकर मुख्यधारा में लाया जा रहा है। साथ ही, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन, ऑनलाइन आवेदन में सहायता और विशेषज्ञों द्वारा करियर काउंसिलिंग व मेंटरिंग दी जा रही है। दहलीज लांघकर विद्या-दीदी बनीं डिजिटल एडुप्रेन्योर ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समस्याओं और संसाधनों के अभाव में जो महिलाएं कभी घर से निकलने में भी झिझकती थीं, आज वे इन सेंटरों का पूर्ण स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन खुद संभाल रही हैं। प्रत्येक केंद्र पर एक प्रशिक्षित सामुदायिक पेशेवर विद्या-दीदी (डिजिटल एडुप्रेन्योर) के रूप में तैनात हैं। वे दैनिक संचालन से लेकर बच्चों को डिजिटल सेवाएं देने तक की कमान संभाल रही हैं। आर्थिक तंगी से मुक्ति और बढ़ता सामाजिक मान-सम्मान विद्या-दीदी और लाइब्रेरी मैनेजर के रूप में काम करके हजारों महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार का जीवन स्तर सुधरा है, बल्कि घर और समाज के फैसलों में भी उनकी बात को सम्मान मिल रहा है। पढ़ाई और डिजिटल हुनर से जुड़कर दीदियों ने साबित किया है कि दिया है कि अगर सही अवसर मिले तो ग्रामीण भारत की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है।     जीविका-दीदी की लाइब्रेरी केवल किताबों का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी उन बहनों के आत्मसम्मान और सफलता की कहानी है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों को हराकर नया इतिहास रचा है। राज्य में संचालित 118 पुस्तकालयों के माध्यम से आज 1 लाख से अधिक युवाओं और 61 फीसदी बेटियों को अपने ही गांव में डिजिटल शिक्षा और करियर मार्गदर्शन मिल रहा है। हमारी विद्या-दीदियां आज गांव-गांव में ज्ञान का दीप जलाकर ग्रामीण बिहार को आत्मनिर्भर बना रही हैं।     श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग।  

पीछे से टक्कर को लेकर हाई कोर्ट का अहम फैसला, बीमा कंपनी की अपील हुई खारिज

चंडीगढ़. सड़क हादसे में आगे चल रहे वाहन से पीछे से टक्कर होने मात्र के आधार पर पीछे चल रहे वाहन के चालक को लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट करते हुए बीमा कंपनी की तीनों अपीलें खारिज कर दी हैं। अदालत ने कहा कि सह-दोषिता यानी कार चालक की भी लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी उस पक्ष की है, जो इसका आरोप लगा रहा है। केवल पीछे से टक्कर को आधार बनाकर यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। मामला 29 मार्च 2009 को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। हादसे में सुखविंदर सिंह और प्रेमचंद की मृत्यु हो गई थी, जबकि सुब्बा सिंह घायल हुए थे। तीनों एक मारुति कार से गांव थेह बुटाना से लुधियाना जा रहे थे। समराला चौक के पास आगे चल रहे ट्रक के चालक बलजिंदर सिंह ने कथित तौर पर बिना संकेत दिए बीच सड़क अचानक ब्रेक लगा दिए, जिसके कारण कार ट्रक से जा टकराई। सह-दोषिता का दावा हाई कोर्ट में खारिज बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि कार ट्रक से पीछे से टकराई थी, इसलिए कार चालक सुखविंदर सिंह की भी सह-दोषिता थी। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी ने न तो अधिकरण के समक्ष सुखविंदर सिंह की सह-दोषिता की कोई विशिष्ट दलील रखी और न ही इस संबंध में कोई मुद्दा तय कराने का प्रयास किया। वहीं ट्रक चालक खुद गवाही देने के लिए अदालत में पेश नहीं हुआ और यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उसने अचानक ब्रेक क्यों लगाए थे या पीछे आ रहे यातायात को कोई संकेत दिया था या नहीं। हाई कोर्ट से पीड़ित परिवारों को राहत अदालत ने सुखविंदर सिंह की मृत्यु के मामले में कुल मुआवजा 9.96 लाख रुपये निर्धारित किया। पहले अधिकरण ने 5.81 लाख रुपये दिए थे। इस तरह स्वजन को अतिरिक्त 4.16 लाख रुपये मिलेंगे। 24 वर्षीय सुखविंदर के मामले में भविष्य की संभावनाओं के लिए 40 प्रतिशत वृद्धि और 18 का गुणक लागू किया गया। वहीं 27 वर्षीय प्रेमचंद की मृत्यु के मामले में कुल मुआवजा 11.97 लाख रुपये तय किया गया। पहले मिले 6.09 लाख रुपये के अतिरिक्त अब 5.89 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें पत्नी, तीन नाबालिग बच्चों और माता-पिता को वैधानिक अधिकारों के अनुसार मुआवजा दिया गया है। पीड़ित को मिलेगा 15 हजार अतिरिक्त सुब्बा सिंह के मामले में स्थायी दिव्यांगता का प्रमाण प्रस्तुत नहीं होने के कारण भविष्य की आय में नुकसान का मुआवजा नहीं दिया गया। हालांकि चोटों की गंभीरता को देखते हुए कुल मुआवजा 60 हजार से बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया गया। उन्हें 15 हजार रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। तीनों मामलों में बढ़ा हुआ मुआवजा बीमा कंपनी और वाहन चालक-सह-मालिक संयुक्त रूप से देंगे। इस राशि पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

CG में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, आज कई ट्रेनें रद्द; यार्ड रीमॉडलिंग के चलते लिया फैसला

रायपुर. छत्तीसगढ़ में तीज पर्व पर मायके जाने की तैयारी कर रही महिलाओं और दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में उरकुरा स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग का काम किया जाएगा। इसके चलते 13 और 14 सितंबर को रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, गेवरा रोड और इतवारी के बीच चलने वाली 10 ट्रेनें रद्द रहेंगी। वहीं 2 मेमू ट्रेनों का परिचालन बिलासपुर तक सीमित रहेगा। रेलवे के मुताबिक, यह काम उरकुरा-रायपुर स्टोर डिपो के बीच दोहरीकरण परियोजना के तहत उरकुरा स्टेशन के यार्ड रीमॉडलिंग के लिए किया जा रहा है। यात्रियों के लिए जरूरी बात तीजा पर्व के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार मायके आने-जाने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में दोनों दिन यात्रा से पहले ट्रेन नंबर जरूर चेक कर लें। रद्द ट्रेन से यात्रा की योजना है तो वैकल्पिक ट्रेन या बस की व्यवस्था पहले कर लेना बेहतर होगा। आज रद्द रहने वाली ट्रेनें – आज रायपुर-बिलासपुर मेमू 68728 का परिचालन रहेगा रद्द आज बिलासपुर-गेवरा रोड मेमू 68734 नहीं चलेगी आज गेवरा रोड-बिलासपुर मेमू 68733 रहेगी रद्द आज बिलासपुर-रायपुर मेमू 68719 का परिचालन रद्द आज कोरबा-रायपुर पैसेंजर 58203 नहीं चलेगी आज रायपुर-इतवारी पैसेंजर 58206 का परिचालन रद्द आज रायपुर-गेवरा रोड मेमू 68746 रहेगी रद्द कल रद्द रहने वाली ट्रेनें – कल रायपुर-कोरबा पैसेंजर 58204 रहेगी रद्द कल इतवारी-रायपुर पैसेंजर 58206 भी रहेगी रद्द कल कोरबा-रायपुर मेमू 68745 का परिचालन रद्द रहेगा

शी जिनपिंग ने BRICS में रखा चीन का 5 सूत्रीय एजेंडा, AI से लेकर व्यापार और आधुनिक कारखानों पर जोर

नई दिल्ली चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान दुनिया में बराबरी की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि बिना नियमों वाली दुनिया उस चौराहे जैसी है, जहां यातायात संकेत नहीं हों। ऐसी जगह अराजकता होना तय है। जिनपिंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम सभी देशों को मिलकर बनाने चाहिए। ताकतवर देश जो चाहे, वही सही है, यह सोच अब नहीं चल सकती। ग्लोबल साउथ के देशों को मिलकर अंतरराष्ट्रीय कानून का बचाव करना चाहिए। सभी देशों की बराबरी, दूसरे देशों के अंदरूनी मामलों में दखल न देना और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने जैसे नियमों का पालन जरूरी है। साथ ही कानून और अंतरराष्ट्रीय नियम सभी पर एक जैसे लागू होने चाहिए। इसमें दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। शी जिनपिंग ने कहा कि बड़े काम करने के लिए लोगों को सबसे पहले रखना जरूरी है। ग्लोबल साउथ के देशों को आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास करना चाहिए और साल 2030 तक तय विकास लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि चीन ने 5 साल पहले ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव शुरू किया था। इसके तहत दूसरे देशों के साथ मिलकर 2 हजार से ज्यादा परियोजनाएं पूरी की गई हैं। 2 लाख से अधिक लोगों को ट्रेनिंग भी दी गई है। इसका फायदा 120 से ज्यादा देशों के लोगों को मिला है। चीन दुनिया के लिए अपने दरवाजे और ज्यादा खोल रहा है। राजनयिक संबंध रखने वाले अफ्रीका के सभी 53 देशों को चीन ने बिना टैरिफ वाली सुविधा दी है। ब्रिक्स के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने होंगे। उन्होंने उद्योग और सामान पहुंचाने की चेन को मजबूत रखने और आपसी फायदे वाले खुले सहयोग की बात कही। शी जिनपिंग ने कहा कि नई तकनीक, पारंपरिक उद्योगों के सुधार और नए क्षेत्रों में मिलकर काम करने की जरूरत है। चीन ने 5 नई पहल का रखा प्रस्ताव चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 5 नई पहल का प्रस्ताव रखा। पहली पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खुले और सभी के लिए उपलब्ध ढांचे की है। चीन ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा समूह बनाने, बड़े भाषा मॉडल पर सहयोग बढ़ाने, ट्रेनिंग और एक्सपर्ट बैठकों का आयोजन करने को तैयार है। व्यापार को आसान बनाना दूसरी पहल व्यापार और निवेश को आसान बनाने की है। चीन ने ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत देश आपस में नीतियों का तालमेल बढ़ा सकेंगे। चीन अगले साल सेवाओं के व्यापार पर ब्रिक्स मंच भी आयोजित करेगा। तीसरी पहल डिजिटल उद्योगों में सहयोग की है, जिसके लिए एक साझा क्लाउड मंच बनाने का प्रस्ताव है। आधुनिक कारखाने बनाना चौथी पहल समझदार मशीनों और कारखानों से जुड़ी है। चीन ब्रिक्स देशों को आधुनिक कारखाने बनाने और साझा मानक तैयार करने में मदद देगा। पांचवीं पहल विज्ञान और तकनीक से जुड़े हुनरमंद लोगों को तैयार करने की है। इसके लिए ब्रिक्स इंजीनियरों का साझा समूह बनाने और युवाओं के लिए विज्ञान-तकनीक नवाचार कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है।

निगार सुल्ताना पर हो सकता है एक्शन? BCB ने बताया कब होगा कप्तानी पर फैसला

नई दिल्ली भारत के खिलाफ विमेंस एशिया कप 2026 के सेमीफाइनल में बांग्लादेशी कप्तान निगार सुल्ताना सुर्खियों में रही थीं. निगार ने टॉस के समय भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर से हाथ नहीं मिलाया था. अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की ओर से इस मामले पर सफाई दी गई है. बीसीबी की महिला समिति के चेयरमैन रफीकुल इस्लाम बाबू के मुताबिक यह निगार सुल्ताना का निजी फैसला था और बीसीबी का इस निर्णय में कोई रोल नहीं था. बाबू कहते हैं, 'बेशक, यह उनका अपना फैसला था. हमारा मानना है कि खेल दुनिया को एक साथ लाता है. हम सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि सभी देशों के साथ दोस्ताना संबंध चाहते हैं. इसलिए उन्होंने जो किया, वह पूरी तरह उनका निजी फैसला था.' भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में बांग्लादेश के सामने 150 रनों का लक्ष्य रखा था. इसके जवाब में बांग्लादेश की टीम 7 विकेट पर 109 रन ही बना सकी और उसे 40 रनों से हार का सामना करना पड़ा. अब बांग्लादेशी टीम का अगला बड़ा लक्ष्य एशियन गेम्स 2026 है. बोर्ड ने इसी प्रतियोगिता के बाद टीम और कप्तानी को लेकर आगे की तस्वीर स्पष्ट करने के संकेत दिए हैं. क्या निगार पर एक्शन लेगा BCB? रफीकुल इस्लाम बाबू ने बताया कि निगार सुल्ताना के खिलाफ कदाचार से जुड़ी शिकायतें बोर्ड तक पहुंची हैं. हालांकि फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. बोर्ड पहले एशियन गेम्स में टीम के प्रदर्शन का आकलन करेगा और उसके बाद निगार की कप्तानी समेत दूसरे मामलों पर चर्चा होगी. रफीकुल इस्लाम बाबू ने कहा कि बांग्लादेशी टीम के प्रदर्शन और शिकायतों से जुड़े पूरे मामले पर बोर्ड अध्यक्ष के साथ चर्चा हो चुकी है. एशियन गेम्स 2026 के खत्म होने के बाद यह तय किया जाएगा कि आगे क्या कदम उठाया जाना चाहिए. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड अपनी विमेंस टीम के प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है. रफीकुल इस्लाम बाबू ने माना कि बांग्लादेशी टीम को बड़ी टीमों के खिलाफ जीत हासिल करने में परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि विश्व कप में भी बांग्लादेश ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन छोटी गलतियों की वजह से टीम को हार झेलनी पड़ी. बोर्ड अब बांग्लादेशी टीम को ज्यादा मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने पर काम कर रहा है. एशियन गेम्स के बाद टीम के प्रदर्शन, निगार सुल्ताना के खिलाफ मिली शिकायतों और कप्तानी को लेकर फैसला लिया जाएगा.

BRICS में अमेरिका की नीतियों पर निशाना, फिर भी भारत का रुख संतुलित; क्या बदली विदेश नीति?

नई दिल्ली 8वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में 11 सदस्य देशों की सर्वसम्मति से जारी "नई दिल्ली घोषणापत्र" के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। अमेरिका की तरफ से लगाए जा रहे प्रतिबंधों, टैरिफ युद्ध और मध्य-पूर्व संकट पर जिस कड़े लहजे में घोषणापत्र तैयार किया गया है, उससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत अपनी पारंपरिक गुटनिरपेक्ष और संतुलित विदेश नीति से हटकर पश्चिमी विरोधी खेमे की ओर झुक रहा है? विदेश मामलों के विशेषज्ञों और रिपोर्टों का विश्लेषण यह साफ करता है कि यह भारत का कोई "नीतिगत बदलाव" नहीं, बल्कि ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत की जटिल 'बैलेंसिंग एक्ट' (संतुलन बनाने की कला) की एक बड़ी सफलता है। अमेरिका और ईरान का नाम नहीं, लेकिन इजरायल पर सीधा निशाना घोषणापत्र में भाषा के इस्तेमाल और कूटनीतिक शब्दों का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। एकतरफा प्रतिबंध: घोषणापत्र में लिखा, "हम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ एकतरफा प्रतिबंधों और सेकेंडरी सैंक्शंस की निंदा करते हैं, जो गरीबों को प्रभावित करते हैं।" इसमें अमेरिका का नाम नहीं लिया गया, लेकिन रूस और ईरान को सीधा कूटनीतिक राहत और समर्थन मिला। परमाणु ठिकानों पर हमले: घोषणापत्र में लिखा, "IAEA की देखरेख वाले शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों और असैन्य बुनियादी ढांचों पर हमलों पर गंभीर चिंता।" यहां भी अमेरिका, इजरायल या ईरान किसी का नाम नहीं, लेकिन तेहरान (ईरान) के उस तर्क को समर्थन मिला कि उनके परमाणु केंद्रों पर हमले अवैध हैं। लेबनान और इजराइल: घोषणापत्र में लिखा, "हम इजरायल से अपील करते हैं कि वह लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करे और अपनी कब्जाधारी सेना को लेबनानी क्षेत्र से पूरी तरह हटाए।" इसमें इजरायल का स्पष्ट रूप से नाम लिया गया और UN प्रस्ताव 1701 का पालन करने को कहा गया। ट्रंप 2.0 का दबाव और भारत का अपना रुख यह घोषणापत्र ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में टैरिफ और रूसी तेल खरीद को लेकर पहले से ही खिंचाव देखा जा रहा है। ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को "अमेरिका विरोधी" करार देते हुए डॉलर को कमजोर करने या इस गुट से जुड़ने वाले देशों पर 10% से लेकर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है। भारत ने रूसी तेल पर अमेरिका की आपत्तियों और अतिरिक्त टैरिफ को "अनुचित और तर्कहीन" करार दिया है। हालांकि, ब्रिक्स घोषणापत्र में अमेरिकी नीतियों की आलोचना के बावजूद, भारत ने संवाद और कूटनीति का रास्ता खुला रखा है। क्या भारत चीन-रूस के करीब जा रहा है? नई दिल्ली घोषणापत्र के बाद भारत के कूटनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों में दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। विशेषज्ञ कहते हैं, "भारत का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स को ऐसा मंच बनने से रोकना होना चाहिए जिसका इस्तेमाल चीन अपनी महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षाओं के लिए करे।" अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला का कहना है, "भारत का भविष्य पश्चिम (अमेरिका और यूरोप) का वैश्विक साझेदार बनने में है। अगर भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते नहीं करता है, तो इससे किसे फायदा होगा, यह सोचने की जरूरत है।" यह 'शिफ्ट' नहीं, भारत की कूटनीतिक महारत है 11 ऐसे देशों, जिनमें ईरान-UAE या चीन-भारत जैसे विरोधी हित वाले देश शामिल हैं, को एक साझा बयान पर दस्तखत कराना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के इतर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात में स्पष्ट किया कि भारत मध्य-पूर्व में संवाद, कूटनीति और जहाजों की सुरक्षा चाहता है। भारत आज भी रूस, यूक्रेन, अमेरिका, इजराइल और ईरान- सभी विरोधी खेमों से एक साथ संवाद बनाए रखने की अपनी अद्वितीय क्षमता को साबित कर रहा है।

राजस्थान में BJP का मेगा जनसंपर्क अभियान, 1 महीने तक 13 प्रकल्पों से घर-घर पहुंचेगा मोदी का संदेश

जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और राजनीति में 25 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय जनता पार्टी राजस्थान में एक बड़ा और व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है। 17 सितंबर से शुरू होकर पूरे 1 महीने तक चलने वाले इस विशेष कार्यक्रम को 'सेवा संकल्प अभियान-जन सेवा ही प्रभु सेवा' नाम दिया गया है। इस अभियान के जरिए बीजेपी कार्यकर्ता केंद्र सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और पीएम मोदी के 25 वर्षों के समर्पित राजनीतिक सफर को प्रदेश के हर पोलिंग बूथ और आम जनता के घरों तक पहुंचाएंगे। इस राज्य स्तरीय अभियान की रूपरेखा और रणनीतिक तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में शनिवार को एक उच्चस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस 2 घंटे तक चली मैराथन कार्यशाला में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और अभियान की क्षेत्रीय प्रभारी व राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2.5 दशकों की राजनीतिक यात्रा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण भाव को जन-जन तक ले जाना हर बीजेपी कार्यकर्ता का दायित्व है। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि देश में बीते वर्षों में आए बुनियादी बदलावों और कल्याणकारी योजनाओं की सही जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंचना बेहद जरूरी है। अभियान के तहत पूरे राजस्थान में 13 अलग-अलग प्रकल्पों के माध्यम से सांस्कृतिक, सामाजिक और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार ने कार्यशाला के दौरान 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित होने वाले 13 विशेष प्रकल्पों की विस्तृत जानकारी साझा की। 1. आशीर्वाद का दीया: 17 सितंबर 2026 की शाम ठीक 7 बजे प्रदेशभर में कार्यकर्ता और आम नागरिक अपने-अपने घरों में दीप प्रज्ज्वलन करेंगे। 2. सपनों का भारत-सेवा चित्र: स्कूली बच्चों और युवाओं के बीच देश के विकास और भावी भारत से जुड़े रचनात्मक चित्रकला और निबंध कार्यक्रम आयोजित होंगे। 3. नमो सेवा गाथा-सेवा स्मरण: राजस्थान के प्रमुख चौराहों और कस्बों में नुक्कड़ नाटकों के जरिए पीएम मोदी की 25 साल की राजनीतिक यात्रा और सेवा कार्यों को दर्शाया जाएगा। 4. आंगन का उत्सव: राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर कार्यकर्ताओं और पोषण सखियों के साथ विशेष संवाद व सम्मान कार्यक्रम आयोजित होंगे। 5. कहानी बदलाव की: देश और राजस्थान में हुए ढांचागत व सामाजिक बदलावों को ऑडियो-वीडियो और प्रस्तुतियों के जरिए जनता के सामने रखा जाएगा। 6. सेवा ज्योति यात्रा: प्रदेश के विभिन्न जिलों और ग्रामीण आंचलों में जन जागरूकता और सेवा संदेश के साथ यात्राएं निकाली जाएंगी। 7. वडनगर से वाराणसी सेवा यात्रा: पीएम मोदी के जन्मस्थान वडनगर और संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जुड़ाव को दर्शाते हुए पवित्र नदियों के जल से हाटकेश्वर महादेव और काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक किया जाएगा। 8. सेवा मेरा योगदान: आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को सीधे सामाजिक और स्वच्छता अभियानों से जोड़ने के लिए यह सहभागिता कार्यक्रम चलेगा। 9. सेवा सेतु अभियान: समाज के वंचित वर्गों और सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने का काम किया जाएगा। 10. सेवा के रंग-राष्ट्र के संग: युवाओं और स्थानीय कलाकारों के साथ राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत सांस्कृतिक व कलात्मक प्रस्तुतियां होंगी। 11. जन सेवा महाकुंभ: जिला और मंडल स्तर पर स्वास्थ्य जांच शिविर और जन कल्याणकारी मेलों का आयोजन किया जाएगा। 12. रक्तदान महादान: प्रदेश के सभी जिलों में बड़े पैमाने पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। 13. विकसित भारत संकल्प यात्रा: विकसित भारत 2047 के संकल्प और केंद्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं का घर-घर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

बठिंडा के करनदीप का कमाल, 17,618 फीट की ऊंचाई पर 20 घंटे में पूरी की 122 किमी दौड़

बठिंडा. हौसले के आगे ऊंचे पहाड़ भी छोटे पड़ जाते हैं। बठिंडा के करनदीप मोंगा ने लद्दाख की बेहद कठिन परिस्थितियों के बीच आयोजित सिल्क रूट अल्ट्रा चैलेंज में हिस्सा लेकर शहर का नाम रोशन किया है। करनदीप ने नुब्रा वैली से शुरू होकर खारदुंगला पास होते हुए लेह तक की 122 किलोमीटर लंबी दूरी 20 घंटे 36 मिनट और 4 सेकेंड में पूरी की। इस दौरान उन्होंने करीब 17,618 फीट की ऊंचाई पर दौड़ लगाकर अपनी फिटनेस, सहनशक्ति और मजबूत इरादों का परिचय दिया। लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों में आयोजित यह अल्ट्रा चैलेंज सामान्य दौड़ से बिल्कुल अलग चुनौती पेश करता है। प्रतिभागियों को लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ बेहद ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, ठंड, तेज हवाओं और कठिन पहाड़ी रास्तों का सामना करना पड़ता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में 122 किलोमीटर की दौड़ पूरी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। नुब्रा से खारदुंगला के रास्ते पहुंचे लेह करनदीप की दौड़ नुब्रा वैली से शुरू हुई। यहां से उन्होंने लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी मार्गों पर दौड़ते हुए खारदुंगला पास की ओर सफर किया। रास्ते में जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती गई, वैसे-वैसे शरीर पर दबाव भी बढ़ता गया। इसके बावजूद उन्होंने अपनी गति और हौसले को बनाए रखा। खारदुंगला के ऊंचे क्षेत्र से गुजरने के बाद उन्होंने लेह की तरफ दौड़ जारी रखी और आखिरकार 122 किलोमीटर का सफर 20 घंटे 36 मिनट 4 सेकेंड में पूरा कर लिया। 17,618 फीट पर दौड़ना आसान नहीं क चंद कांसल ने कहा कि इतनी अधिक ऊंचाई पर दौड़ लगाना प्रतिभागियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। समुद्र तल की तुलना में यहां ऑक्सीजन काफी कम होती है। ऐसे में लंबे समय तक दौड़ने के लिए शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी होती है। करनदीप ने इन मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी मंजिल हासिल की। बठिंडा के लोगों ने दी बधाई करनदीप मोंगा की इस उपलब्धि की जानकारी मिलने के बाद बठिंडा में खेल प्रेमियों और उनके परिचितों में खुशी का माहौल है। शहरवासियों का कहना है कि लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में 122 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन पूरी कर करनदीप ने न केवल अपनी व्यक्तिगत क्षमता साबित की, बल्कि बठिंडा का नाम भी गौरवान्वित किया है। उनकी यह उपलब्धि शहर के युवाओं को फिटनेस और साहसिक खेलों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।