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14 सितंबर को बैंक रहेंगे बंद! गणेश चतुर्थी पर इन शहरों में नहीं खुलेगी SBI-PNB समेत बैंकों की शाखा

नई दिल्ली कल सोमवार को बैंक बंद रहने वाले हैं। अगर आप कल 14 सितंबर को बैंक ब्रांच जाकरअपना काम निपटाने का प्लान कर रहे हैं तो पहले जान लीजिए कि आपके राज्य में बैंक खुले हैं या नहीं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कैलेंडर के मुताबिक कल सोमवार को बैंक कई राज्यों में बंद रहने वाले हैं। यहां जानिये कल किन राज्यों में और क्यों बैंक बंद रहने वाले हैं। कल सोमवार 14 सितंबर को क्यों बंद रहेंगे बैंक? कल सोमवार 14 सितंबर को बैंक गणेश चतुर्थी के कारण बंद रहेंगे। बैंक बेलापुर, महाराष्ट्र, कर्नाटक,ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गोवा, तेलांगना जैसे राज्यों में बंद रहने वाले हैं। यहां सभी सरकारी और प्राइवेट सेक्टर बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा, एक्सिस, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई जैसे तमाम बैंकों की ब्रांच नहीं खुलेंगी। बैंक गणेश चतुर्थी, गणेश पूजा, वरसिद्धि विनायक व्रत, विनायकर चतुर्थी और हरतालिका तीज के कारण बंद होंगे। इनके अलावा देश के बाकि सभी राज्यों में बैंक खुले रहेंगे। गणेश चतुर्थी, गणेश पूजा, वरसिद्धि विनायक व्रत और विनायकर चतुर्थी क्यों मनाते हैं? गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख हिंदू त्योहार है। इस दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उन्हें मोदक, दूर्वा और फूल अर्पित करते हैं और सुख-समृद्धि, बुद्धि तथा विघ्नों से मुक्ति की कामना करते हैं। महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में यह त्योहार उत्साह से मनाया जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता और शुभता का देवता माना जाता है। वरसिद्धि विनायक व्रत भी भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। दक्षिण भारत के कई हिस्सों में इस व्रत को रखा जात है। विनायकर चतुर्थी तमिलनाडु में भगवान गणेश की आराधना को कहा जाता है। हरतालिका तीज क्यों मनाते हैं? हरतालिका तीज महिलाओं का प्रमुख व्रत और त्योहार है, जो भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित महिलाएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना करती हैं। माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह की कथा इस व्रत से जुड़ी है। देश के बाकी राज्यों में खुली रहेंगी बैंक ब्रांच? महाराष्ट्र, कर्नाटक,ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गोवा, तेलांगना को छोड़कर बैंक देश के बाकी सभी राज्यों मे खुले रहेंगे। वहां, बैंकों में सामान्य तरीके से काम होगा। सितंबर में कब-कब बंद रहेंगे बैंक? 13 सितंबर – रविवार 14 सितंबर – गणेश चतुर्थी यानी गणेश पूजा के कारण बेलापुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, नागपुर, पणजी और विजयवाड़ा समेत कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे। 15 सितंबर – संवत्सरी, नुआखाई, गणेश चतुर्थी का दूसरा दिन रहेगा जिसके कारण अहमदाबाद, भुवनेश्वर और गोवा में बैंक बंद रहेंगे। 20 सितंबर – रविवार 21 सितंबर – श्रीमंत शंकरदेव जन्मोत्सव और श्री नारायण गुरु समाधि के कारण भुवनेश्वर और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे। 22 सितंबर – करमा पूजा के कारण रांची में बैंक बंद रहने वाले हैं। 23 सितंबर – महाराजा हरि सिंह जी के जन्मदिन के कारण जम्मू और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे। 25 सितंबर – इंद्रजात्रा के कारण गंगटोक में बैंक बंद रहने वाले हैं। 26 सितंबर – चौथे शनिवार के कारण बैंक बंद रहेंगे। 27 सितंबर – रविवार

नीम करोली बाबा के 5 चमत्कार, भक्त आज भी मानते हैं दिव्य शक्तियों का प्रमाण

 उत्तराखंड की पावन वादियों में स्थित कैंची धाम के गुरु, परम सिद्ध संत नीम करोली बाबा का जीवन अलौकिक सिद्धियों और असीम करुणा का सजीव उदाहरण है. करोड़ों श्रद्धालु उन्हें कलयुग में भगवान हनुमान जी का साक्षात अवतार मानते हैं. बाबा जी का जीवन किसी आडंबर से दूर, अत्यंत सरल और सहज था कि वे बस एक कंबल ओढ़कर बैठते थे, लेकिन उनके दर पर आने वाला कोई भी भक्त कभी खाली हाथ वापस नहीं गया. उनके जीवनकाल में ऐसे अनगिनत प्रसंग घटे, जहां प्रकृति के नियम भी उनके तपोबल के आगे नतमस्तक हो गए. आइए जानते हैं नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़े 5 ऐसे अलौकिक चमत्कार, जो आज भी श्रद्धालुओं के मन में उनके प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास जगाते हैं. नदी के पानी का शुद्ध देसी घी में बदलना कैंची धाम आश्रम के निर्माण के शुरुआती दिनों में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण अचानक पूरियाँ तलने के लिए देसी घी खत्म हो गया. सेवक घबरा गए और उन्होंने तुरंत बाबा जी को जाकर यह बात बताई. बाबा जी ने शांत भाव से कहा, "घबराओ मत, पास बहती नदी से दो बाल्टी पानी भरकर ले आओ." सेवक दौड़े-दौड़े गए और नदी से पानी भरकर ले आए. जब बाबा जी के आदेश पर उस पानी को पूरियां तलने वाली गर्म कड़ाही में डाला गया, तो कड़ाही में गिरते ही वह पानी दिव्य सुगंध वाले शुद्ध देसी घी में परिवर्तित हो गया. उस घी से पूरे भंडारे की पूरियाँ तली गईं और अगले दिन बाबा जी के कहने पर बाजार से उतना ही देसी घी खरीदकर वापस नदी में प्रवाहित कर दिया गया. खारे पानी को गंगाजल की तरह मीठा बनाना एक बार बाबा जी के आश्रम के समीप स्थित पानी का एकमात्र प्राकृतिक स्रोत पूरी तरह खारा हो गया. उसका पानी इतना कसैला था कि पीने या भोजन बनाने योग्य नहीं बचा था. स्थानीय लोग और आश्रम के भक्त इस समस्या से काफी चिंतित थे. जब यह बात बाबा जी के संज्ञान में आई, तो वे स्वयं उस जल स्रोत के पास गए. उन्होंने अत्यंत भाव से उसमें थोड़ा सा चरणामृत मिलाया और भगवान का ध्यान करते हुए मंत्रोच्चार किया. इसके बाद जैसे ही लोगों ने उस पानी को पिया, तो वे आश्चर्यचकित रह गए—वह खारा पानी न केवल पूरी तरह मीठा और सुपाच्य हो चुका था, बल्कि उसमें गंगाजल जैसी दिव्यता और ताजगी आ गई थी. भक्त की जानलेवा बीमारी को अपने शरीर पर लेना नीम करोली बाबा अपने भक्तों से मां की तरह प्रेम करते थे. जब भी उनका कोई प्रिय भक्त किसी असाध्य, जानलेवा बीमारी या असहनीय पीड़ा से ग्रस्त होता था, तो बाबा जी की करुणा उमड़ पड़ती थी. वे अपने तपोबल से भक्त के प्रारब्ध और बीमारी के कष्ट को स्वयं अपने शरीर पर धारण कर लेते थे. ऐसे कई अवसर आए जब भक्त तो रातों-रात पूरी तरह स्वस्थ होकर उठ खड़ा होता था, लेकिन दूसरी ओर बाबा जी स्वयं अपने कंबल के भीतर दर्द से कराहते नजर आते थे. वे भक्त के कष्टों को मुस्कुराते हुए अपने शरीर पर झेल लेते थे ताकि उनके बच्चों को कोई आंच न आए. कड़ाके की बर्फीली ठंड में नदी में समाधि उत्तराखंड की हाड़-कांपने वाली सर्दियों में, जहां आम इंसान कई परतों वाले गर्म कपड़ों में भी ठिठुरने लगता है, बाबा जी केवल एक सूती धोती और कंबल में रहते थे. कई बार भीषण बर्फ़ीली रात में बाबा जी ठंडे बर्फीले पानी की नदी में उतर जाते थे और घंटों जल-समाधि में लीन रहते थे. जब वे जल-समाधि पूरी करके बाहर निकलते, तो उनके शरीर पर ठंड का नामोनिशान तक नहीं होता था. उनका शरीर ऐसे दमकता था मानो वे किसी सामान्य तापमान में बैठकर आए हों. उनकी यह योग-साधना उनके उच्चकोटि के सिद्ध योगी होने का प्रत्यक्ष प्रमाण थी. भक्त को नया जीवनदान देना बाबा जी के दरबार में भक्ति की कोई सीमा नहीं थी और न ही उनके आशीर्वाद की. उनके कई भक्तों के जीवन में ऐसे क्षण आए जब गंभीर बीमारियों या दुर्घटनाओं के कारण डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे और डॉक्टरों के अनुसार मृत्यु निश्चित थी. ऐसे समय में भक्तों के परिजनों ने केवल बाबा जी का ध्यान किया या उनका छुआ हुआ 'आरोग्य प्रसाद' (या चरणामृत) मरीज को दिया. बाबा जी के एक अभयदान और संकल्प से काल को भी पीछे हटना पड़ा. यमराज के द्वार तक पहुंच चुके मरीज चमत्कारिक रूप से पूरी तरह ठीक हो गए और डॉक्टरों के लिए यह बात हमेशा एक अनसुलझा रहस्य बनी रही.

हरतालिका तीज पर भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना अधूरा रह सकता है व्रत

हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, तभी से इस व्रत की परंपरा चली आ रही है. इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने और किसी भी तरह के दोष से बचने के लिए शास्त्र सम्मत नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. इस बार हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाई जाएगी.  आइए जानते हैं कि हरतालिका तीज के दिन कौन से काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए: 1. अन्न और जल का सेवन न करें (निर्जला नियम) हरतालिका तीज का व्रत मुख्य रूप से निर्जला (बिना पानी के) रखा जाता है. एक बार व्रत का संकल्प लेने के बाद दिनभर जल या अन्न ग्रहण करना वर्जित माना जाता है. हालांकि, यदि स्वास्थ्य अधिक खराब हो या गर्भवती महिलाएं हों, तो वे डॉक्टर या किसी योग्य आचार्य की सलाह से फलाहार का विकल्प चुन सकती हैं, लेकिन सामान्य स्थिति में अन्न-जल का त्याग ही नियम है.   2. दिन में सोना वर्जित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज के दिन दिन में सोने से बचना चाहिए.  इस पूरे दिन और रात के समय भगवान शिव और माता पार्वती के भजन-कीर्तन व जागरण का विधान है. मान्यता है कि इस दिन व्रत के दौरान सोने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है.   3. काले या सफेद वस्त्र पहनने से बचें पूजा के दौरान और पूरे दिन वस्त्रों के चयन में सावधानी रखनी चाहिए.  इस दिन काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचना शुभ माना जाता है. तीज के पावन पर्व पर हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनना सबसे उत्तम और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना गया है. इसके साथ ही सुहाग की सभी वस्तुएं पूरी निष्ठा के साथ मां पार्वती को अर्पित करें.   4. क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूरी व्रत के दिन मन, वाणी और कर्म से पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है.  किसी पर भी गुस्सा न करें, अपशब्द न बोलें. घर में वाद-विवाद की स्थिति से दूर रहें.  इस दिन पूरी तरह से सात्विक आचरण करते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए.   5. कथा सुनना न भूलें हरतालिका तीज की पूजा बिना कथा सुने अधूरी मानी जाती है.  इसलिए पूजा के दौरान हरतालिका तीज की व्रत कथा का पाठ अवश्य करें या सुनें, जिससे व्रत का पूरा पुण्य प्राप्त हो सके. 

अमित मजीठिया ने खोले बॉलीवुड और क्रिकेट जगत के राज, पॉडकास्ट में किए कई बड़े दावे

क्रिकेट एनालिस्ट और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर अमित मजीठिया ने अपनी जिंदगी के कई ऐसे राज खोले, जो शायद किसी को नहीं मालूम होंगे. बॉलीवुड की पार्टियां, क्रिकेटर्स की महफिलें और सट्टेबाजी के खेल से जुड़े राज. उन्होंने बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों से अपनी दोस्ती, एक्ट्रेस के साथ रिश्ते, क्रिकेटर्स से मुलाकात और मैच फिक्सिंग को लेकर भी खुलकर बात की. अमित मजीठिया ने खोले राज एजाज खान के पॉडकास्ट में अमित मजीठिया ने खुद पर लगे आरोपों पर बात की. एजाज ने पूछा कि आपको लगता है कि आपका नाम कई बॉलीवुड शख्सियत के साथ जुड़ा हुआ है, खास कर लड़कियों के साथ. मेरी रिसर्च बताती हैं कि आपके आसपास कोई ना कोई बॉलीवुड हीरोइन रहती ही है. आप उन्हें महंगे गिफ्ट और रॉयल ट्रीटमेंट देते हैं. इस पर अमित ने इन बातों से इनकार किया. उन्होंने कहा, ''बॉलीवुड में मेरी जान पहचान है, लेकिन मैंने महंगे गिफ्ट नहीं दिए.'' उनके मुताबिक कई एक्ट्रेसेस उनके दोस्तों के जन्मदिन या उनके अपने जन्मदिन पर आती थीं. इसके अलावा किसी सेलिब्रिटी के किसी शो के सिलसिले से आने पर पार्टी के बाद मुलाकात हो जाती है. अमित ने बिना नाम लिए हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए. उन्होंने कहा, -बॉलीवुड एक्ट्रेसेस मेरे यहां बुर्का पहनकर बैठती हैं. मिस वर्ल्ड, मिस यूनिवर्स जो भी हैं आप समझ गये होंगे मैं  किसकी बात कर रहा हूं. उनसे पूछा गया कि क्या उनका कभी किसी एक्ट्रेस के साथ अफेयर रहा है, तो अमित ने कहा- ना ना कभी नहीं, दोस्ती तो खैर बहुतों से रही. उन्होंने कहा कि जब भी कोई बॉलीवुड सेलिब्रिटी आते हैं और दूसरे दिन फ्री रहते हैं, तो मेरी गाड़ी मांगते है. मेरा टूरिज्म का भी काम है, तो कई सेलिब्रिटी आते है. मेरी कार ले जाते हैं, ऐसे में उस तरह से भी मेरे कनेक्शन बन जाते हैं. पॉडकास्ट में बातचीत सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रही. अमित से पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी मैच फिक्सिंग की है या किसी क्रिकेटर से इनसाइड इंफॉर्मेशन लेकर मैच का रुख बदलने की कोशिश की है. उन्होंने कहा- मैच फिक्सिंग मैंने डायरेक्टली ना कभी की है और ना ही किसी क्रिकेटर को अप्रोच किया है. ये मेरे रूल बुक में नहीं है. ऐसा नहीं है कि मैं कर नहीं सकता. मैं चाहता तो आसानी से कर सकती था. मेरे कितने सारे क्रिकेटर दोस्त हैं, जो मेरे क्लब पर आते थे हुक्का पीने, मुजरा देखने. लेकिन वो बोलते थे क्लब को दो घंटे के लिए बंद कर दो कोई कॉमन पब्लिक नहीं आनी चाहिए. अमित ने कहा कि उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वो अपने रेगुलर ग्राहकों को सिर्फ किसी सेलिब्रिटी या क्रिकेटर के लिए रोकना नहीं चाहते थे. क्यों गए थे दुबई? अमित ने दुबई जाने की वजह भी बताई. उन्होंने कहा- जब मैं दुबई गया वो नोटबंदी का दूसरा दिन था. तब भारत में ऑनलाइन बेटिंग पैदा ही नहीं हुई थी, क्योंकि पैदा करने वाला मैं हूं. जब नोटबंदी हुई थी तब में एनालिटिक्स नहीं था तब टिप्पर था. अमित ने दुबई की बार डांसर पर  भी बात की. उन्होंने कहा मेरे क्लब मैं सनी लिओनी, उनके पति डेनियल और फिल्म फेयर के मालिक रिजवान साजन बैठे थे. सामने की टेबल पर मैं और मेरी पत्नी बैठे थे. मैं उस वक्त ये सोच रहा था कि मैं इस वक्त एक ऐसी औरत के साथ बैठा हूं, जो आप भी जानते हैं कि पॉर्न स्टार रह चुकीं हैं. अब चाहे वो आइंटम नंबर कर रहीं हो, चाहे हीरोइन हो, पॉर्न स्टार से तो हमारी बार की लड़कियां अच्छी हैं, तो हम उनके साथ बैठकर क्यों नहीं खा सकते. अमित का दावा है कि ना सिर्फ बॉलीवुड बल्कि पंजाबी हीरोइन भी उनके यहां आती हैं. उन्होंने कहा- पंजाबी मूवी की बड़ी-बड़ी हीरोइन, हीरो, बड़े नेता और पुलिस वाले मेरे क्लब में आते थे और डांस देखकर चले जाते हैं. ये लोग बिल भी नहीं देते हैं.  

26 सितंबर को बनेगा लक्ष्मी नारायण राजयोग, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

 सितंबर के आखिरी सप्ताह में ग्रहों की स्थिति में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. 26 सितंबर 2026 को बुध कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे. यहां शुक्र पहले से मौजूद होंगे. ऐसे में तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण होगा. ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है, जबकि शुक्र धन, सुख-सुविधा, प्रेम और भौतिक समृद्धि से जुड़े हैं.  इसलिए इन दोनों ग्रहों का संयोग आर्थिक और करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. क्या है लक्ष्मी नारायण राजयोग? ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कुंडली में बुध और शुक्र की शुभ स्थिति से लक्ष्मी नारायण योग बनता है. इसे धन, वैभव, बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता और सुख-सुविधाओं से जोड़कर देखा जाता है. गोचर के दौरान जब दोनों ग्रह एक राशि में आते हैं, तो उसका प्रभाव अलग-अलग राशियों पर उनके भाव और ग्रह स्थिति के अनुसार पड़ सकता है. इस बार यह योग तुला राशि में बनने जा रहा है. कुछ ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इसका प्रभाव कई राशियों के लिए करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक रह सकता है. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग शिक्षा, करियर और आर्थिक मामलों में लाभकारी रह सकता है. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है. कारोबार में भी लाभ के नए रास्ते खुल सकते हैं. आय के अतिरिक्त स्रोत बनने की संभावना है. तुला राशि यह योग तुला राशि में ही बनने जा रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए इसका महत्व बढ़ जाता है. आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में निखार आ सकता है. कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत हो सकती है. व्यापार करने वालों को नए अवसर और लाभ मिल सकते हैं. पार्टनरशिप से जुड़े कामों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है. धनु राशि धनु राशि वालों के लिए लक्ष्मी नारायण राजयोग आय के लिहाज से अच्छा रह सकता है. कमाई के नए साधन बनने की संभावना है. प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ सकता है, जिसका फायदा भविष्य में मिल सकता है. लंबे समय से अटकी आर्थिक योजनाओं को गति मिल सकती है. मकर राशि मकर राशि वालों के करियर के लिए यह समय महत्वपूर्ण हो सकता है.  नौकरी में प्रमोशन, वेतन वृद्धि या नई नौकरी का प्रस्ताव मिलने के योग बन सकते हैं.  कारोबारियों को रुकी हुई योजनाओं में गति मिल सकती है.

9 अक्टूबर को बदलेगी शनि की चाल, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनि देव को सबसे महत्वपूर्ण और धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है. जब भी शनि अपनी चाल या नक्षत्र में बदलाव करते हैं, तो इसका सीधा असर देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जीवन पर लंबे समय तक बना रहता है. पंचांग गणना के अनुसार, कर्मफलदाता शनि देव 9 अक्टूबर 2026 को शाम 7:28 बजे अपनी चाल बदलते हुए अपने ही नक्षत्र उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में इसे बेहद खास गोचर माना जा रहा है, क्योंकि जब ग्रह अपने ही नक्षत्र में संचरण करता है, तो उसके शुभ प्रभाव कई गुना बढ़ जाते हैं. इस समय शनि वक्री अवस्था में रहेंगे.  यह स्थिति 8 फरवरी 2027 तक बनी रहेगी. शनि के इस नक्षत्र परिवर्तन से कुछ चुनिंदा राशियों के भाग्य के द्वार खुलने वाले हैं. इन्हें करियर-कारोबार में बंपर लाभ मिलने के योग हैं. आइए जानते हैं वे कौन सी भाग्यशाली राशियां हैं जिन्हें इस गोचर से जबरदस्त फायदा होगा. 1. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा. नक्षत्र प्रभाव और तिथि: 9 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस गोचर के प्रभाव से आपके लंबे समय से अटके हुए काम गति पकड़ेंगे. आर्थिक लाभ: अटके हुए धन की वापसी होगी. आय के नए स्रोत खुलेंगे. व्यापार और नौकरी: बिजनेस में कोई बड़ी डील फाइनल हो सकती है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या मनचाहा ट्रांसफर मिलने के मजबूत योग हैं. मान-सम्मान: समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी. प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनेंगे. 2. तुला राशि (Libra) तुला राशि में शनि देव को बहुत मजबूत स्थिति (उच्च) का माना गया है, ऐसे में यह गोचर इस राशि के लिए बेहद मंगलकारी रहेगा. नक्षत्र प्रभाव और तिथि: 9 अक्टूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच का यह कालखंड तुला राशि वालों के लिए आर्थिक मोर्चे पर राहत लेकर आएगा. प्रॉपर्टी और वाहन सुख: भूमि, भवन या नया वाहन खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है. पैतृक संपत्ति से भी लाभ मिलने के योग हैं. करियर में प्रगति: कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी. सीनियर्स आपके काम की सराहना करेंगे. पुराने कर्जों से मुक्ति मिलने के रास्ते खुलेंगे. पारिवारिक जीवन: जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर होंगे.  घर-परिवार में कोई मांगलिक कार्य संपन्न हो सकता है. 3. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर इस गोचर का विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा. नक्षत्र प्रभाव और तिथि: 9 अक्टूबर से उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में शनि का संचरण मकर राशि वालों के जीवन में स्थायित्व और सफलता लेकर आएगा. करियर में स्थिरता: नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में स्थिरता मिलेगी.  पदोन्नति या वेतन वृद्धि के प्रबल अवसर बनेंगे. आर्थिक उन्नति: व्यापार में नए रास्ते खुलेंगे. वित्तीय स्थिति सुधरेगी. मेहनत के दम पर आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल रहेंगे. 4. कुंभ राशि (Aquarius) कुंभ राशि के जातकों के लिए भी शनि का यह नक्षत्र गोचर बेहद महत्वपूर्ण और लाभकारी साबित होने वाला है. नक्षत्र प्रभाव और तिथि: 9 अक्टूबर को होने वाले इस गोचर से लेकर फरवरी 2027 तक कुंभ राशि वालों के अटके हुए कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे. धन संचय और बचत: आप अपने धन की बचत करने में सफल रहेंगे. बैंक बैलेंस में वृद्धि होगी. करियर में उछाल: नौकरी में चल रही अनबन समाप्त होगी. ऑफिस में आपकी निर्णय क्षमता और कार्यशैली की प्रशंसा होगी, जिससे बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. आर्थिक निवेश: यदि आप शेयर मार्केट, प्रॉपर्टी या किसी नए वेंचर में निवेश करना चाहते हैं, तो यह अवधि बेहद लाभदायक साबित हो सकती है.

हरियाणा ने रचा रक्तदान का नया रिकॉर्ड, 92% हुआ स्वैच्छिक रक्तदान; 163 ब्लड सेंटर सक्रिय

चंडीगढ़ रक्तदान में हरियाणवी सबसे आगे हैं। प्रति दस लाख आबादी पर रक्तदान के मामले में हरियाणा लगातार तीसरे साल देश में प्रथम स्थान पर आया है। केंद्र सरकार की ओर से हरियाणा को आगामी एक अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल काालेज में आयोजित राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। ई-रक्तकोष पोर्टल पर दर्ज सत्यापित वार्षिक रक्तदान आंकड़ों के आधार पर मिली उपलब्धि प्रदेश की बड़े पैमाने पर जनभागीदारी के साथ-साथ मजबूत रक्त आधान बुनियादी ढांचे, डिजिटल एकीकरण, बेहतर चिकित्सकीय सुरक्षा और मरीजों को मुफ्त जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध कराने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 5.89 लाख यूनिट रक्त एकत्र किया गया और 8,189 रक्तदान शिविर आयोजित किए गए। इससे पहले प्रदेश को वर्ष 2024 और 2025 में भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ था। ब्लड सेंटरों की संख्या 146 से बढ़कर 163 स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि चरखी दादरी जिला नागरिक अस्पताल में ब्लड सेंटर को लाइसेंस मिलने के साथ अब प्रदेश के 22 जिलों में कम से कम एक कार्यशील लाइसेंस प्राप्त सरकारी ब्लड सेंटर उपलब्ध हो गया है। ब्लड सेंटरों की संख्या 146 से बढ़कर 163 हो गई है। वर्तमान में यहां 34 सरकारी और 129 निजी ब्लड सेंटर हैं, जबकि 150 ब्लड सेंटर (92 प्रतिशत) ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा से लैस हैं। इससे मरीजों के लिए विशेष रक्त अवयवों की उपलब्धता मजबूत हुई है। राज्य में स्वैच्छिक रक्तदान की दर 79 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है। यह उपलब्धि ब्लड सेंटरों के साथ सीधे आनलाइन समीक्षा और संचालन संबंधी समस्याओं के समन्वित समाधान के बाद हासिल हुई है। इस प्रगति से हरियाणा 95 प्रतिशत के राष्ट्रीय मानक के और करीब पहुंच गया है। यह जीवनरक्षक अभियान में बढ़ती जनभागीदारी और यह सुनिश्चित करने के राज्य के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है कि स्वैच्छिक, बिना पारिश्रमिक वाले रक्तदान पर अधिक निर्भरता हो। 89 ब्लड सेंटर आभा सिस्टम से एकीकृत हरियाणा ने अपनी रक्त आधान सेवाओं को डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ एकीकृत करने में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। नए आभा-आधारित डोनर रजिस्ट्रेशन फीचर की शुरुआत के बाद दो महीने के भीतर 89 ब्लड सेंटर आभा सिस्टम से एकीकृत हो गए हैं। यह सुविधा राष्ट्रीय ई-रक्तकोष पोर्टल पर शुरू की गई है। इस समय 134 ब्लड सेंटर ई-रक्तकोष प्लेटफार्म पर लाइव जानकारी सक्रिय रूप से अपडेट कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता मजबूत हो रही है, रियल-टाइम निगरानी में सुधार हो रहा है और रक्त की उपलब्धता तथा सेवाओं के प्रदर्शन की बेहतर जानकारी मिल रही है। रक्त की कम बर्बादी हरियाणा ने महत्वपूर्ण चिकित्सकीय सुरक्षा संकेतकों पर भी बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया है। कुल 1305 हाई-रिस्क रिएक्टिव डोनर्स में से 1255 यानी 96.17 प्रतिशत को सफलतापूर्वक ट्रैक किया गया और उपयुक्त स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ा गया, जो 85 प्रतिशत के मानक से अधिक है। रक्त की बर्बादी भी नियंत्रण में रही है। डिस्कार्ड दर 2.69 प्रतिशत दर्ज की गई, जो चार प्रतिशत के मानक से कम है। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त और रक्त अवयव मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। सरकारी संस्थानों में पात्र बीपीएल और डेंगू मरीजों को फ्री सिंगल डोनर प्लेटलेट्स भी उपलब्ध कराए जाते हैं। थैलेसीमिया, हीमोफीलिया और सिकल सेल एनीमिया जैसे विकारों से पीड़ित उन मरीजों को भी सहायता प्रदान करता है, जिन्हें बार-बार और आजीवन उपचार की आवश्यकता होती है। वर्तमान में जिला नागरिक अस्पतालों में 1443 थैलेसीमिया मरीज और 1018 हीमोफीलिया मरीज पंजीकृत हैं। इन्हें मुफ्त आयरन केलेशन दवाएं और एंटी-हीमोफीलिया फैक्टर्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। एक दिन में 10 हजार 183 लोगों ने किया रक्तदान बड़े पैमाने पर जनसक्रियता ने हरियाणा की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले साल पांच मई को प्रदेशभर में आयोजित रक्तदान अभियान के दौरान एक ही दिन में 10 हजार 183 नागरिकों ने रक्तदान किया। आसपरेशन सिंदूर के दौरान युवाओं ने 51 रक्तदान शिविरों के माध्यम से 2374 यूनिट रक्त एकत्र किया।  

झारखंड के 7 जिलों में आधे से ज्यादा छोटे प्रतिष्ठान, गिरिडीह सबसे आगे; पाकुड़ में महिला उद्यमिता मजबूत

रांची  अनिगमित (अनइनकॉरपोरेटेड) गैर कृषि क्षेत्र राज्य भर में रोजगार, आजीविका तथा आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देता है। झारखंड में गिरिडीह जिला ऐसा है, जहां राज्य में सबसे अधिक अनिगमित गैर कृषि क्षेत्र के प्रतिष्ठान कार्यरत हैं। यहां के इन प्रतिष्ठानों से 3.20 लाख कामगार जुड़े हैं। राज्य के कुल अनिगमित प्रतिष्ठानों में 10.70 प्रतिशत प्रतिष्ठान इस जिला में हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा पहली बार अनिगमित गैर कृषि क्षेत्र पर किए गए जिला स्तरीय आकलन में यह तथ्य सामने आया है। गुरुवार को जारी रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि राज्य के टॉप सात जिले ऐसे हैं, जहां राज्य के 50 प्रतिशत से अधिक ऐसे छोटे प्रतिष्ठान कार्यरत हैं। वहीं, 10 टॉप जिलों में 65 प्रतिशत से अधिक प्रतिष्ठान कार्य कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में पाकुड़ जिला ऐसा है, जहां सबसे अधिक प्रतिष्ठान महिलाओं के नेतृत्व में संचालित हैं। इतना ही नहीं, यहां सबसे अधिक महिला कामगार भी कार्यरत हैं। पिछड़ा जिला होने के बाद भी अधिक प्रतिष्ठानों में यह राज्य में सातवें स्थान पर है। दूसरी तरफ, रामगढ़ जिले के प्रतिष्ठानों में सबसे अधिक वैसे कामगार कार्यरत हैं, जो किसी न किसी एजेंसी से हायर किए गए हैं। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि आधे से अधिक प्रतिष्ठान सात जिलों में केंद्रित हैं। रिपोर्ट में महिला उद्यमिता और कार्यबल में उनकी भागीदारी में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भिन्नताओं पर प्रकाश डाला गया है। कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी जिलों के अनुसार काफी भिन्न-भिन्न है। महिला श्रमिकों की सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले शीर्ष तीन जिले पाकुड़, साहिबगंज और पश्चिमी सिंहभूम में स्थित हैं। झारखंड के टॉप टेन जिले जहां अधिक अनिगमित प्रतिष्ठान हैं-     गिरिडीह : 2,26,339     धनबाद : 2,18,121     बोकारो : 1,52,123     पलामू : 1,35,295     रांची : 1,29,972     पूर्वी सिंहभूम : 1,14,650     पाकुड़ : 1,10,144     हजारीबाग : 1,06,857     देवघर : 97,763     गढ़वा : 91,553 महिला नेतृत्व वाले सबसे अधिक प्रतिष्ठान वाले टाप तीन जिले (आंकड़े प्रतिशत में)     पाकुड़ : 56.26     साहिबगंज : 41.70     गढ़वा : 37.20 अधिक महिला कामगार वाले प्रतिष्ठान में टाप तीन जिले (आंकड़े प्रतिशत में)     पाकुड़ : 55.30     साहिबगंज : 43.35     पश्चिमी सिंहभूम : 38.35  

घर बैठे मिल रही सरकारी सेवाएं: बिहार के RTPS पोर्टल पर 39 लाख से अधिक आवेदनों का हुआ निष्पादन

पटना  बिहार में आरटीपीएस यानी लोक सेवाओं का अधिकार पोर्टल सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के साथ जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी जरूरी सेवाओं के लिए लोगों को अब कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है। पंचायती राज विभाग के अनुसार, अक्टूबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच सिर्फ पंचायत स्तर पर आरटीपीएस पोर्टल के जरिए 39 लाख 78 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 39 लाख 32 हजार से अधिक आवेदनों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया जा चुका है। 39 लाख से ज्यादा आवेदनों का निपटारा, डिजिटल व्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार आंकड़ों के मुताबिक बड़ी संख्या में आवेदनों का समय पर निपटारा किया गया है। इससे पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता और डिजिटल व्यवस्था की पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है। आरटीपीएस पोर्टल के जरिए नागरिक महत्वपूर्ण प्रमाणपत्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद उसकी स्थिति भी ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है और उपलब्ध होने पर प्रमाणपत्र डाउनलोड किया जा सकता है। निपटारे में मधुबनी सबसे आगे, 3.22 लाख से ज्यादा आवेदन हुए निष्पादित आवेदनों के निष्पादन के मामले में मधुबनी की पंचायतें पूरे बिहार में अव्वल रही हैं। जिले की 386 पंचायतों में दो वर्षों के दौरान 3 लाख 24 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए इनमें से 3 लाख 22 हजार से अधिक आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है। इस प्रदर्शन के साथ मधुबनी पंचायत स्तर पर आरटीपीएस आवेदनों के निष्पादन में राज्य में सबसे आगे है। सिवान दूसरे नंबर पर, करीब 3 लाख आवेदनों का हुआ निपटारा टॉप-5 जिलों की सूची में सिवान दूसरे स्थान पर है। यहां की पंचायतों में दो वर्षों के दौरान 2 लाख 97 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2 लाख 95 हजार से अधिक का निष्पादन किया जा चुका है। वहीं सीतामढ़ी तीसरे स्थान पर है। जिले में 1 लाख 99 हजार से अधिक आवेदन आए, जिनमें से 1 लाख 97 हजार से ज्यादा आवेदन निपटाए जा चुके हैं। सारण और पश्चिम चंपारण भी टॉप-5 में, जानिए कितना हुआ काम आरटीपीएस आवेदनों के निपटारे के मामले में सारण चौथे स्थान पर है। यहां करीब 1 लाख 87 हजार आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1 लाख 84 हजार का निपटारा किया जा चुका है। वहीं पश्चिम चंपारण पांचवें स्थान पर है। जिले में करीब 1 लाख 53 हजार आवेदन आए और इनमें से 1 लाख 52 हजार आवेदनों का निष्पादन हो चुका है। RTPS पोर्टल पर 64 सेवाएं, घर बैठे ट्रैक कर सकते हैं आवेदन आरटीपीएस पोर्टल पर नागरिकों के लिए कुल 64 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध हैं। इनमें जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदक अपने लॉग-इन के माध्यम से आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। प्रमाणपत्र तैयार होने के बाद उसे ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध है। सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ी, दफ्तरों के चक्कर से राहत आरटीपीएस की ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से नागरिकों तक पहुंचाना है। पंचायत स्तर पर लाखों आवेदनों का ऑनलाइन निष्पादन इस डिजिटल व्यवस्था की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।  

जमीन-जायदाद के मामलों में बड़ा बदलाव, धारा 116 पोर्टल से ऑनलाइन होगा भूमि बंटवारा

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जमीन, नामांतरण (म्यूटेशन या दाखिल-खारिज ), पैमाइश, बंटवारे और अन्य राजस्व मामलों का निस्तारण तय समय पर होगा। राजस्व परिषद डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन से लेकर निस्तारण तक की प्रक्रिया को ट्रैक करने की व्यवस्था की है। योगी सरकार ने शुक्रवार को धारा 116 पोर्टल, ईडब्ल्यूएस पोर्टल और सरलीकृत खतौनी का शुभारंभ किया है। इस अवसर पर ट्रेनी पीसीएस अधिकारी भी मौजूद रहे। राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि तीन नए पोर्टल से लोगों को राजस्व से जुड़ी सेवाओं के लिए अनावश्यक भागदौड़ और कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करने पर जोर दिया गया है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत भूमि विभाजन से जुड़े मामलों के लिए नया पोर्टल शुरू किया गया है। अब सह-खातेदार भूमि बंटवारे के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे लोगों को विभाजन का वाद दाखिल करने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। आवेदन के बाद नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया भी डिजिटल होगी। लेखपाल की रिपोर्ट भी पोर्टल पर उपलब्ध होगी। पोर्टल में जीआईएस टेक्नोलॉजी की सुविधा जोड़ी गई है। इससे भूमि की वास्तविक भौगोलिक स्थिति देख सकेंगे। धारा 116 के तहत सह-खातेदार द्वारा होल्डिंग के विभाजन का वाद किया जा सकता है। ऐसे मामलों में खतौनी, संबंधित अभिलेख और भूमि के नक्शे की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद नया डिजिटल सिस्टम इन सभी प्रक्रियाओं को तकनीक के माध्यम से अधिक सरल और पारदर्शी बनाने में मदद करेगा। इससे भूमि विभाजन से जुड़े मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाण पत्र के लिए ईडब्ल्यूएस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। लेखपाल और तहसीलदार रिपोर्ट ऑनलाइन भेजेंगे। आवेदन किस स्तर पर है और उसकी प्रगति क्या है, इसकी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज और मॉनिटर की जा सकेगी। लोगों को अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी सरलीकृत खतौनी में भूमि का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे जमीन के क्षेत्रफल की जानकारी अधिक सटीक तरीके से उपलब्ध होगी। विशेष रूप से छोटे भूखंडों और भूमि से जुड़े मामलों में इससे लोगों को अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा खतौनी में अभिलेखागार से संबंधित पुराने आदेशों और पुराने बंधक आदेशों की जानकारी भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे नागरिकों और राजस्व अधिकारियों को जमीन के पुराने स्वामित्व रिकॉर्ड और उससे जुड़े आदेशों को समझने में सुविधा होगी।