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कानपुर के घाटमपुर में बनेगा टेक्सटाइल मशीनरी पार्क, हजारों रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद

 लखनऊ  खादी एवं वस्त्र उद्योग विभाग ने कानपुर के घाटमपुर में एक हजार एकड़ भूमि पर टेक्सटाइल मशीनरी पार्क की स्थापना की तैयारी शुरू कर दी है। इस संदर्भ में विभाग की तरफ से जल्द ही सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। घाटमपुर में गन्ना विभाग की एक हजार एकड़ भूमि बेकार पड़ी है। वस्त्र उद्योग विभाग की कोशिश है कि इस भूमि पर टेक्सटाइल उद्योग के लिए मशीनों का निर्माण करने वाली इकाईयों की ही स्थापना की जाए। राज्य में टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ में एक हजार एकड़ भूमि पर पीएम मित्र वस्त्र पार्क सहित संत कबीर के नाम पर विभिन्न जिलों में 10 वस्त्र पार्कों की स्थापना की जा रही है। इन पार्कों की स्थापना के बाद राज्य के टेक्सटाइल एवं परिधान उद्योग की तस्वीर बदल जाएगी। टेक्निकल टेक्सटाइल की मशीनों को किया जाएगा आयात राज्य में टेक्सटाइल उद्योग सैकड़ों वर्ष पुराना है, लेकिन आज भी कई इकाइयों में पारंपरिक मशीनों से ही टेक्सटाइल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। हालांकि बड़ी इकाइयों में टेक्सटाइल उत्पादों को तैयार करने के लिए चीन, ताइवान, जर्मनी, वियतनाम व दक्षिण कोरिया से सर्कुलर निटिंग मशीन, फ्लैट निटिंग मशीन सहित टेक्निकल टेक्सटाइल की मशीनों का आयात किया जाता है। कानपुर में टेक्सटाइल मशीनरी उद्योग की स्थापना के बाद उद्योगपतियों को करीब 30 से 40 प्रतिशत तक की कम कीमत पर मशीनें उपलब्ध होंगी। इस पार्क का उद्देश्य टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। इससे आयातित मशीनों का निर्माण स्थानीय स्तर पर किया जाएगा। साथ ही स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में वस्त्र, परिधान व हस्तशिल्प का कुल निर्यात लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का था। उत्तर प्रदेश देश में टेक्सटाइल उत्पादों का चौथा बड़ा निर्यातक राज्य है। गौतम बुद्ध नगर वस्त्र निर्यात में देश में दूसरे स्थान पर है। वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान का कहना है कि सरकार राज्य में टेक्सटाइल को हर प्रकार से बढ़ावा दे रही है।इसी सिलसिले में कानपुर में इस पार्क की स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं।  

हरियाणा के शहरों को मिलेगी ट्रैफिक से राहत: हिसार, कुरुक्षेत्र, जींद समेत 5 बाईपास को मंजूरी

चंडीगढ़  हरियाणा में एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों एवं कस्बों के बाहर रिंग रोड और नेशनल हाईवे बनाए जाएंगे। हिसार बाईपास, कुरुक्षेत्र बाईपास, नारनौल सिटी बाईपास, जींद बाईपास तथा सोहना-पलवल बाईपास के निर्माण कार्य को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वीकृति दे दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग से शहरी क्षेत्र में भीड़भाड कम करने के लिए शनिवार को मास्टर प्लान के तहत एडाप्शन आफ फाइनेंशियल माडल फार स्टेट कंट्रीब्यूशन को लेकर आयोजित बैठक में यह निर्णय लिए गए। लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा के साथ अधिकारियों की बैठक ले रहे मुख्यमंत्री ने बताया कि हिसार बाईपास हिसार-राजगढ रोड एनएच 52 से हिसार देहली रोड तथा हिसार कैथल रोड से जोड़ने का कार्य करेगा। केंद्र सरकार के अनुसार तैयार होगी पॉलिसी इसी प्रकार कुरुक्षेत्र लाडवा बाईपास की भी डीपीआर तैयार कर ली गई है। जल्द ही इस परियोजना पर भी कार्य आरंभ किया जाएगा। मास्टर प्लान के तहत बाह्य रिंग रोड़ एवं नेशनल हाईवे बनाने के लिए केंद्र सरकार के अनुसार पालिसी तैयार की जाएगी, ताकि शहरों एवं कस्बों में ट्रैफिक के दबाव कम करने के लिए बनाई जाने वाली सड़कों को अमलीजामा पहनाया जा सके। बैठक में केंद्र सरकार के लागत शेयर के लिए वित्त विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा शहरी स्थानीय निकाय के अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया। नारनौल सिटी बाईपास बनाया जाएगा। लगभग 11 किलोमीटर लंबे इस बाईपास को स्टेट हाईवे एनएच 148बी से जोड़ा जाएगा। 9700 करोड़ रुपये की लागत आएगी जींद के दूसरी तरफ बाह्य रिंग रोड एवं बाईपास एनएच 352 चार मार्गीय सड़क का निर्माण किया जाएगा। एनएच 919 से पलवल सोहना बाइपास को भी री-डिजाइन कर निर्माण किया जाएगा। यह चार मार्गीय सड़क मार्ग लगभग 24 किलोमीटर लंबा होगा। इन परियोजनाओं पर लगभग 9700 करोड़ रुपये की लागत आएगी। डीएनडी-फरीदाबाद-बल्लभगढ बाईपास केएमपी लिंक से देहली मुंबई एक्सप्रेस वे ग्रीनफिल्ड कनेक्टिविटी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए भी तैयार किया जाएगा। इसके अलावा करनाल रिंग रोड के लिए भी भूमि शेयर जमा करवा दिया गया है। अंबाला शहर एवं अंबाला कैंट को जोड़ने के लिए रिंग रोड का कार्य निर्माणाधीन है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। अतिरिक्त कार्य को भी मंजूरी बैठक में रेवाड़ी भटिंडा रेलवे लाइन पर सिरसा में सिविल स्टेशन रोड पर रेलवे अंडर ब्रिज के निर्माण तथा कनीना-महेंद्रगढ़ रोड से अनावास, ढाणी राजावास स्कूल से बलाना, खातोद से बुडीन, निम्भेड़ा और बलैचा के लिए लिंक रोड, महेंद्रगढ़ बुचौली रोड, नांगवास से अटेली सड़क के अतिरिक्त कार्य को भी मंजूरी प्रदान की गई।  

NIA का हाफिज सईद पर शिकंजा, आतंकी गतिविधियों में भूमिका सामने आने के बाद फिर जारी हुआ वारंट

नईदिल्ली  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (ANI) ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी हाफिज सईद के खिलाफ एक और कामयाबी मिली है। स्पेशल कोर्ट ने हाफिज के खिलाफ एक गैर जमानती वारंट जारी किया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि भारत का सबसे वॉन्टेड आतंकी और लश्कर का संस्थापक पाकिस्तान में है। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी समूहों को हथियार, फंडिंग और निर्देश देने से जुड़े एक मामले में लश्कर चीफ के खिलाफ दो महीने में दूसरा गैर जमानती वारंट हासिल किया गया है। स्पेशल कोर्ट एनआईए की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 75 के तहत लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और घोषित आतंकवादी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी। याचिका में पाकिस्तान के पंजाब के सरगोधा के रहने वाले हाफिज सईद को फरार आरोपी बताया गया। नकीब भट की गिरफ्तारी से हुआ था खुलासा आपको बता दें कि श्रीनगर में चेकिंग के दौरान मोहम्मद नकीब भट की गिरफ्तारी हुई थी। उसके पास से चीन में बना ग्रेनेड और 15 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। जकूरा पुलिस स्टेशन में UAPA, आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद हुई जांच में एक आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की छापेमारी में लश्कर और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े कई और आतंकवादियों और दो पाकिस्तानी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई। NIA ने कहा कि जांच के दौरान हाफिज सईद की भूमिका सामने आई। गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी आतंकवादी उससे जुड़े पाए गए। NIA ने कोर्ट को बताया, "सईद पाकिस्तान से काम कर रहा है और कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकवादियों को हथियार, पैसे और निर्देश दे रहा है। जानकारी मिली है कि आतंकवादी अभी पाकिस्तान में है और कानून की पकड़ से बचने के लिए जान-बूझकर अपनी गिरफ्तारी से बच रहा है।" जज ने सुनाया फैसला एनआईए की दलील सुनने के बाद NIA एक्ट के तहत स्पेशल जज प्रेम सागर ने 8 सितंबर को कहा कि जांच के दौरान हाफिज सईद की भूमिका सामने आई है और वह आतंकवादी गतिविधियों में शामिल है। वह फरार है और जांच एजेंसी उसे सामान्य तरीके से पेश करने में कामयाब नहीं हो पाई है, इसलिए हाफिज सईद के खिलाफ एक सामान्य गैर जमानती वारंट जारी किया गया।

इशिता दत्ता का बड़ा खुलासा, प्रेग्नेंसी के दौरान की ‘घमासान’ की शूटिंग; डिलीवरी के बाद शुरू की ‘दृश्यम 3’

मुंबई  इशिता दत्ता के लिए सितंबर और अक्टूबर का महीना बहुत ही खास होने जा रहा है. क्योंकि उनकी फिल्म घमासान 11 सितंबर को ओट प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) पर रिलीज होने जा रही है. दूसरी तरफ उनकी मच अवेटेड फिल्म दृश्यम 3 भी आने वाली 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. बीते दिनों इस फिल्म दृश्यम 3 का ट्रेलर लॉन्च हुआ, जिसमें फिल्म की लगभग सारी कास्ट मौजूद रही. लेकिन फिल्म की शूटिंग के चलते इशिता दत्ता ट्रेलर लॉन्च में नहीं पहुंच पाईं।  फिल्म दृश्यम 3 के ट्रेलर को दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं और फिल्म के रिलीज का इंतजार काफी बेसब्री से कर रहे हैं. जब से इस फिल्म का फर्स्ट लुक दर्शकों के सामने आया था. फैंस फिल्म को देखने के लिए काफी बेताब हैं. हाल ही में फिल्म की एक्ट्रेस इशिता दत्ता ने फिल्म घमासान को लेकर एनडीटीवी से बात की, जहां उन्होंने अपने किरदार और फिल्म को लेकर काफी राज खोले।  तिग्मांशु धूलिया के साथ जब एक्ट्रेस इशिता दत्ता से पूछा गया कि फिल्म घामासान में दर्शकों को क्या दिखने वाला है और आपका किरदार कैसा होगा? इस बात पर एक्ट्रेस ने कहा कि, "फिल्म घमासान बहुत ही इंटेंस प्रोजेक्ट है. इस फिल्म में बदला, लड़ाई-झगड़ा, गैंग ये सब कुछ देखने के लिए मिलेगा. फिल्म को हमने चित्रकूट में शूट किया. इसके अलावा आसपास के जंगलों में भी शूट किया है. जब हम शूट करने जाते थे तो हमको लगता था कि हम किस दुनिया में आ गए हैं. वो सब आपको स्क्रीन पर भी नजर आएगा. फिल्म में अरशद वारसी और बाकी जो डकैतों का गैंग नजर आएगा, उसको देखकर आप डर जाएंगे।  उन्होंने आगे कहा, "मैं काफी खुश थी जब मेरे पास कॉल आया और बताया कि मुझे तिग्मांशु धूलिया के साथ काम करने के लिए मिलेगा. मुझे स्क्रिप्ट सुनने की जरूरत भी नहीं थी. मैंने इस प्रोजेक्ट को हाल ही में हां कह दिया. एक्ट्रेस ने आगे कहा कि शुरुआत में एक सीन था, जिसमें मैं एक फॉरेस्ट ऑफिसर के किरदार में नजर आने वाली थी. क्योंकि वह सीन फिल्म से हटा दिया था. क्योंकि जो मेरा कैरेक्टर है, वह उस किरदार से बिल्कुल भी मैच नहीं हो रहा था. फिल्म में मेरा जो थोड़ा बहुत एक्शन सीन थे, वो फिल्म में नहीं है. मैं सिर्फ एक पत्नी के किरदार में दिखूंगी।  पत्नी या बहन का किरदार जब इशिता दत्ता से पूछा गया कि आपको ज्यादातर फिल्मों में किसी की पत्नी या बहन का का केरैक्टर ही क्यों मिलता है? इस बात पर एक्ट्रेस ने कहा कि मैं भी यही जानना चाहती हूं कि मुझे ऐसे ही किरदार क्यों मिलते हैं. मैं भी कॉमेडी और एक्शन जैसे किरदार करना चाहती हूं. मैं नेगेटिव किरदार भी करना चाहती हूं. मेरे पास घमासान का एक बहुत पुराना किस्सा है।  फिल्म दो-तीन साल पहले शूट हुई थी. उस वक्त में गर्भवती थी. मेरा पहला बच्चा होने वाला था. जिस वक्त हम चित्रकूट में शूट कर रहे थे, उस वक्त में 6 मंथ प्रेग्नेंट थी. फिल्म की टीम काफी केयरिंग थी. उन्होंने मेरे लिए काफी कुछ चेंज किया. मेरे फिल्म के जो पोर्शन थे, वो ज्यादातर लखनऊ में शूट हुए. जिससे मैं कंफर्ट में रहूं. फिल्म की टीम ने मेरे लिए बहुत एडजस्ट किया. फिल्म में भी आपको मैं दुपट्टे में नजर आऊंगी।  जब मैं दृश्यम 3 की शूटिंग करने वाली थी. उस वक्त मेरे दूसरे बच्चे का जन्म हुआ. मैं उस समय काफी टेंशन में थी, क्योंकि मुझे फिल्म में बहुत ही यंग दिखाना था और मैं प्रेग्नेंट होने की वजह से काफी ओवरवेट हो गई थी. मैं इतना कह सकती हूं कि मेरे दोनों बेटे घमासान और दृश्यम 3 के शूट के समय ही इस दुनिया में आए थे।   

अमेरिका में सरकारी नौकरी और ट्रंप की वफादारी का सवाल, कोर्ट ने ‘लॉयल्टी टेस्ट’ पर लगाई रोक

वाशिंगटन अमेरिका में सरकारी नौकरी के लिए राजनीतिक वफादारी साबित नहीं करनी होगी. बोस्टन की अदालत ने डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के उस नियम पर रोक लगा दी है, जिसमें आवेदकों से उनकी सोच पूछी जा रही थी. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी उम्मीदवार से उसकी राजनीतिक राय जानने का सरकार को कोई हक नहीं है।  यह मामला उन सरकारी नौकरियों से जुड़ा है, जिन्हें राजनीतिक पद नहीं माना जाता. इसके बावजूद आवेदकों से पूछा जा रहा था कि वे ट्रंप की नीतियों और उनके कार्यकारी आदेशों को आगे बढ़ाने में किस तरह मदद करेंगे. कर्मचारी संगठनों ने इसे राजनीतिक सोच जानने वाला सवाल बताया था. उनका कहना था कि सरकारी नौकरी पाने के लिए किसी उम्मीदवार से राजनीतिक निष्ठा साबित करने को नहीं कहा जा सकता।  न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, बोस्टन की संघीय अदालत के जज जॉर्ज ओ'टूल ने तीन कर्मचारी यूनियनों का पक्ष माना. इन संगठनों ने पिछले साल ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशासन ऐसे सवाल को सरकारी नौकरी के आवेदन में जारी नहीं रख सकेगा।  ट्रंप के आदेश के बाद शुरू हुआ था सवाल मामला दरअसल ट्रंप प्रशासन के एक कार्यकारी आदेश से जुड़ा है. इसी आदेश को लागू करने के लिए सरकारी नौकरी के आवेदन में 'लॉयल्टी' से जुड़ा सवाल शामिल किया गया था. आवेदकों से एक तरह का जवाब मांगा जा रहा था कि वे ट्रंप की नीतियों को आगे बढ़ाने में किस तरह मदद करेंगे. सरकार के स्तर पर यह प्रक्रिया सरकारी कर्मचारियों की भूमिका से जुड़ी बताई गई थी. मगर कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध किया. उनका तर्क था कि जिन नौकरियों का काम राजनीतिक दल या किसी नेता के प्रति वफादारी से तय नहीं होता, वहां उम्मीदवार की राजनीतिक सोच जानना सही नहीं है।  जज बोले- राजनीतिक सोच पूछने की जरूरत नहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक, जज जॉर्ज ओ'टूल ने अपने फैसले में कहा कि सरकार के पास आवेदकों की राजनीतिक मान्यताओं के बारे में इस तरह की जानकारी मांगने का कोई वैध हित नहीं है. यानी सिर्फ सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति से यह जानना जरूरी नहीं है कि वह किसी राष्ट्रपति की राजनीतिक नीतियों के बारे में क्या सोचता है।  इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की भर्ती प्रक्रिया को बड़ा झटका लगा है. कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, देशभर में 70 हजार से ज्यादा संघीय सरकारी नौकरियों के विज्ञापनों में यह सवाल शामिल किया गया था।  तीन कर्मचारी संगठनों ने किया था मुकदमा तीन सरकारी कर्मचारी यूनियनों ने पिछले साल इस व्यवस्था को कोर्ट में चुनौती दी थी. उनका कहना था कि सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों को अपनी योग्यता के आधार पर चुना जाना चाहिए, न कि उनकी राजनीतिक सोच के आधार पर।  अब अदालत के आदेश के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए सरकारी नौकरियों के आवेदकों से इस तरह की 'लॉयल्टी' जानकारी मांगना रोक दिया गया है. मामला सिर्फ एक सवाल का नहीं है. इसके जरिए यह बहस भी सामने आई है कि सरकारी नौकरी में उम्मीदवार की योग्यता देखी जाए या उसकी राजनीतिक सोच। 

भारत में धमाका करने की तैयारी में VinFast, 10 लाख से कम कीमत में आएंगी दो नई कारें

 नई दिल्ली विनफास्ट (VinFast) भारतीय बाजार में अपनी स्ट्रैटजी को बदलती दिख रही है. रिपोर्ट्स की मानें, तो वियतनाम की इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी दो नई कारों को तैयार कर रही है. इन दोनों कारों को भारतीय बाजार के लिए खास तौर पर तैयार किया जा रहा है, जिसकी कीमत काफी कंपटीटिव होने वाली है।  ब्रांड इन दोनों में से एक कार को 12000 डॉलर (लगभग 10 लाख रुपये) से कम कीमत पर लॉन्च कर सकता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की दो अपकमिंग ईवी का कोडनेम वीएफ एक्स और वीएफ वाई है. इनकी प्लानिंग अभी शुरुआती चरण में है।  क्या है कंपनी का प्लान?  विनफास्ट ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. इन मॉडल्स को लेकर कंपनी अपना प्लान प्रोडक्शन तक पहुंचने पर बदल सकती है. ये कदम कंपनी की पहले की प्लानिंग से अलग है. पहले कंपनी भारत में वीएफ 3, वीएफ 6 और वीएफ 7 मॉडल का लोकली प्रोडक्शन करने वाली थी।   अब कंपनी ने इंटरनेशन मॉडल्स के भारत में प्रोडक्शन प्लान्स को कैंसिल कर दिया है. भारत में ये कंपनी फिलहाल वीएफ 6 और वीएफ 7 को बेचती है. ये दोनों ही कारें सीकेडी (CKF) रूट के जरिए भारत में आती है. इनकी असेंबली तमिलनाडु प्लांट में होती है।  नए मॉडल्स को कंपनी लोकली भारत की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार करेगी. इन्हें तैयार करते हुए कीतमों का भी ध्यान रखा जाएगा. कंपनी ने इसके लिए भारतीय कंपोनेंट सप्लायर्स से बातचीत भी शुरू कर दी है. इसका टार्गेट भारत में इस कार को आसानी से बनाना है. इसकी मदद से कंपनी हायर लोकलाइजेशन को बढ़ा पाएगी और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को कंट्रोल में भी रख पाएगी।    कितनी हो सकती है कीमत? अपकमिंग मॉडल्स में से वीएफ एक्स काफी महत्वपूर्ण है. रिपोर्ट्स की मानें, तो विनफास्ट (VinFast) इस कार की कीमत को 12 हजार डॉलर से कम रखना चाहती है. यानी ये भारतीय बाजार में 10 हजार रुपये से कम बजट में आएगी. साइज के मामले में ये कार वीएफ 3 और वीएफ 6 के बीच आएगी।  ये एक कॉम्पैक्ट कार होगी जिसमें वीएफ 3 के मुकाबले ज्यादा इंटीरियर स्पेस मिलेगा. अगर कंपनी ने 10 लाख रुपये से कम के बजट में इस कार को लॉन्च किया, तो इसका सीधा मुकाबला टाटा मोटर्स से होगा. टाटा मोटर्स इस वक्त भारतीय बाजार में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें बेच रही है. खासकर 10 लाख रुपये के बजट में टाटा का दबदबा है। 

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! 8वां वेतन आयोग इस स्कीम में कर सकता है बदलाव, जानें असर

नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गठित आठवां वेतन आयोग मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन' (MACP) स्कीम की समीक्षा कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस योजना में बदलाव की मांग की गई है। अब वेतन आयोग इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रहा है। क्या है मामला? मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA), सर्वे ऑफ इंडिया ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि MACP के तहत फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (वित्तीय लाभ) केवल अगले पे मैट्रिक्स लेवल पर नहीं, बल्कि कर्मचारी के अगले प्रमोशनल पद के पे लेवल के हिसाब से दिया जाना चाहिए। MSA ने यह भी कहा कि अपग्रेडेशन की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जानी चाहिए, जो नौकरी के 8, 15, 22, 28 और 32 साल पूरे होने पर मिलें। MSA के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत MACP में असल 'प्रमोशनल हायरार्की' के अगले वेतनमान के बजाय 'पे मैट्रिक्स' में अगला लेवल दिया जाता है। इसके अलावा, फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO) ने 6, 12, 18, 24 और 30 वर्षों में पांच बार प्रमोशन का प्रस्ताव रखा। FNPO ने एक और अहम बदलाव की मांग की है। संगठन के मुताबिक अगर कोई कर्मचारी किसी प्रमोशन को स्वीकार नहीं करता है, तो उसके MACP लाभ को रोका या टाला नहीं जाना चाहिए। यानी MACP का लाभ प्रमोशन से अलग रखा जाना चाहिए। उदाहरण से समझें मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कर्मचारी लेवल-7 पर है और उसका अगला प्रमोशनल पद लेवल-10 का है, तो मौजूदा व्यवस्था में उसे MACP के तहत केवल लेवल-8 मिल सकता है। इससे वास्तविक प्रमोशन और वित्तीय लाभ के बीच बड़ा अंतर पैदा हो जाता है। एसोसिएशन ने कहा कि इससे कर्मचारियों का मनोबल गिरा है। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहाँ ज्यादा जिम्मेदारियों (जैसे ऑफिस सुपरिटेंडेंट) पर प्रमोट किए गए जूनियर स्टाफ लेवल 6 में ही बने रहते हैं जबकि उनके जूनियर, जिन्हें प्रमोशन नहीं मिला, उन्हें MACP के तहत लेवल 7 मिल जाता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय परिषद-जेसीएम स्टाफ साइड ने मांग की है कि प्रमोशन क्रम में MACP प्रोवाइड किया जाए, जिसका समर्थन कई अन्य यूनियनों ने भी किया है। रेलवे वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति ने 10 साल के अंतराल के मानवीय नुकसान को उजागर करते हुए कहा कि फाइनेंशियल अपग्रेडेशन के बीच 10 साल का लंबा अंतराल लंबे समय तक गतिरोध का कारण बनता है, खासकर उन कैडरों में जहां प्रमोशन के पद सीमित हैं। बता दें कि पिछले साल आठवें वेतन आयोग का गठन हुआ था। वेतन आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की डेडलाइन मिली हुई है।

राजस्थान में किडनी मरीजों को बड़ी राहत, मुफ्त डायलिसिस योजना के तहत पूरे हुए 1.17 लाख से अधिक सेशन

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश में किडनी रोगियों को आसानी से और निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में अब तक 16,003 मरीजों को कुल 1,17,258 डायलिसिस सेशन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन सेवाओं के तहत मरीजों को उपलब्ध कराई गई उपचार सुविधा का कुल अनुमानित मूल्य करीब 21.11 करोड़ रुपए है। प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 35 जिला चिकित्सालयों में 149 डायलिसिस मशीनें संचालित हैं। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त 2026 तक प्रदेश में 4,265 मरीजों को 31,675 डायलिसिस सेशन की निःशुल्क सुविधा दी जा चुकी है। इनमें प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के तहत 35 केंद्रों पर 3,489 मरीजों के 25,860 सेशन तथा बजट घोषणा के तहत चिन्हित चिकित्सा संस्थानों में 776 मरीजों के 5,815 सेशन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 11,738 मरीजों को 85,583 डायलिसिस सेशन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई गई। इनमें प्रधानमंत्री नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम के 35 केंद्रों पर 8,507 मरीजों के 65,148 सेशन तथा बजट घोषणा के तहत चिन्हित चिकित्सा संस्थानों में 3,198 मरीजों के 19,187 सेशन शामिल हैं। राठौड़ ने कहा कि राज्य बजट घोषणा वर्ष 2022-23 की अनुपालना में प्रदेश के 182 चिकित्सा संस्थानों में हीमोडायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। इनमें से 102 चिकित्सा संस्थानों में सुविधा उपलब्ध है। शेष संस्थानों में चिकित्सकों एवं कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा 30 सितम्बर 2026 तक सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि सरकारी व्यवस्था के साथ सीएसआर के माध्यम से भी निःशुल्क डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिला चिकित्सालय नदबई (भरतपुर) एवं उपजिला चिकित्सालय सिवाना (बालोतरा) में हंस फाउंडेशन, गुरुग्राम के सहयोग से यह सुविधा संचालित है। सिवाना में 3 मशीनों के माध्यम से 12 मरीजों के 575 सेशन तथा नदबई में 3 मशीनों के माध्यम से 21 मरीजों के 673 सेशन आयोजित किए गए हैं। राठौड़ ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों को उपचार के लिए दूर नहीं जाना पड़े। इसी उद्देश्य से जिला चिकित्सालयों के साथ अन्य चिकित्सा संस्थानों में भी डायलिसिस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। भविष्य में सीएचसी स्तर तक डायलिसिस सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डायलिसिस किडनी रोगियों के लिए नियमित और जीवनरक्षक उपचार है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर, उनके नजदीक ही पूरी तरह निःशुल्क डायलिसिस सुविधा मिले। सरकारी व्यवस्था के साथ निजी जनसहभागिता और सीएसआर के सहयोग से इन सेवाओं को लगातार और मजबूत किया जा रहा है।

लाल सागर में हूतियों की बढ़त से बढ़ा Bab-el-Mandeb पर खतरा, भारत के Oil Trade पर पड़ेगा बड़ा असर

 नई दिल्‍ली दुनिया भर में एनर्जी का संकट बढ़ता ही जा रहा है, क्‍योंकि होर्मुज पहले से ही प्रभावित है और अब सऊदी अरब ने इराकी क्षेत्र से किए गए कई ड्रोन हमलों के बाद अपनी कच्चे तेल की पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है. इसके साथ यमन के लाल सागर तट पर 18 घंटे तक चले भीषण हमले में हूती विद्रोही बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर कंट्रोल करने के कगार पर पहुंच चुके हैं।  ये तीनों रास्‍ते दुनिया की तेल सप्‍लाई के लिए काफी महत्‍वपूर्ण माने जाते हैं. स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का 20 फीसदी तेल आयात करता था, जबकि सऊदी अरब के पाइपलाइन से हर दिन 40 से 50 लाख बैरल तेल सप्‍लाई होती थी. वहीं बाब अल-मंडेब से भी दुनिया के कुल समुद्री तेल और गैस व्यापार का लगभग 5% से 12% हिस्सा यानी 4 से 5 मिलियन बैरल हर दिन तेल सप्‍लाई होता है।  इसका मतलब है कि इन तीनों रास्‍ते से करीब 30 फीसदी सप्‍लाई प्रभावित होगी, क्‍योंकि होर्मुज और बाब अल मंडेब के बाद ईरान तेल सप्‍लाई को अपने तरीके से चला सकता है और वह मिडिल ईस्‍ट से आने वाले तेल-गैस को रोक सकता है।  भारत के ऑयल ट्रेड पर बढ़ेगा खतरा भारत से  3,000 किलोमीटर दूर मौजूद बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पर अगर हूतियों का पूरी तरह कंट्रोल हो जाता है, तो इसका सीधा असर भारत के तेल आयात, यूरोप को होने वाले एक्सपोर्ट और सामान की ढुलाई पर पड़ सकता है।  बाब-अल-मंदेब लाल सागर और गल्फ ऑफ एडन को जोड़ने वाला करीब 29 किलोमीटर चौड़ा समुद्री रास्ता है. यह रास्ता सुएज नहर के जरिए यूरोप को हिंद महासागर और एशिया से जोड़ता है. भारत के लिए यह रास्ता इसलिए अहम है क्योंकि कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के साथ-साथ दवाइयां, मशीनरी, टेक्सटाइल और दूसरे सामान भी इसी रूट से यूरोप पहुंचते हैं।  कैसे बढ़ा हूतियों का कंट्रोल? हूती संगठन अंसार अल्लाह ने 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा करने के बाद देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में अपना कंट्रोल मजबूत किया. लाल सागर का बड़ा हिस्सा भी उनके प्रभाव में आया. 2015 में सऊदी अरब की अगुवाई में हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई हुई, लेकिन उन्हें पूरी तरह पीछे नहीं हटाया जा सका।  अब हूतियों के पास बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन और दूसरे आधुनिक हथियार हैं. ताजा घटनाक्रम में स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने करीब 18 घंटे में यमन के लाल सागर तट पर तेजी से बढ़त बनाई।  रॉयटर्स के मुताबिक हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा किया और हनिश द्वीपों की ओर बढ़े. एपी ने मायून यानी पेरिम द्वीप पर हूतियों के कब्जे की खबर दी. फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक हूती जूकर और हनिश द्वीपों तक भी पहुंचे हैं. हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने कहा कि उन्होंने बाब-अल-मंदेब पर कंट्रोल कर लिया है. हालांकि ईरान ने हूतियों को ताजा मदद देने और ईरानी अधिकारियों को यमन भेजने की खबरों का खंडन किया है।  रास्ता बंद हुआ तो भारत पर क्या असर? अगर बाब-अल-मंदेब से जहाजों का आना-जाना मुश्किल होता है तो शिपिंग और इंश्योरेंस का खर्च तेजी से बढ़ सकता है. 2023 के आखिर में हूती हमलों के बाद करीब 2,000 जहाजों ने सुएज नहर से बचते हुए अफ्रीका के दक्षिणी छोर यानी केप ऑफ गुड होप का रास्ता अपनाया था. इससे भारत आने वाले सामान की सप्लाई में देरी हुई।  भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता तेल की कीमतों को लेकर है. बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले कच्चे तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की मात्रा 2023 में करीब 9.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन थी, जो 2025 की पहली छमाही में घटकर करीब 4.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गई. हूतियों की ताजा बढ़त की खबर के बाद ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया और बाद में करीब 99 डॉलर के आसपास रहा. भारत रूस जैसे दूसरे स्रोतों से तेल खरीद सकता है, लेकिन वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने का असर भारत पर भी पड़ेगा।  एक्सपोर्ट पर भी पड़ेगा असर भारत के लिए दूसरी बड़ी चिंता यूरोप को होने वाला एक्सपोर्ट है. अगर जहाजों को अफ्रीका के चारों तरफ जाना पड़ा तो मुंबई से रॉटरडैम की दूरी करीब 15,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 23,000 किलोमीटर हो सकती है. इससे ईंधन, बीमा और माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और भारतीय सामान यूरोप में महंगा हो सकता है।  ऐसे में 3,000 किलोमीटर दूर यमन में बाब-अल-मंदेब पर बढ़ता हूती कंट्रोल भारत के लिए सिर्फ पश्चिम एशिया का संकट नहीं है. इसका असर तेल की कीमत, शिपिंग खर्च और यूरोप के साथ भारत के कारोबार पर पड़ सकता है. होर्मुज स्ट्रेट पर पहले से दबाव के बीच बाब-अल-मंदेब का संकट भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और एक्सपोर्ट, दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनौती बन सकता है।  ये तीनों रास्‍ते पूरी तरह बंद हुए तो कितना बड़ा संकट?  अब अगर इन तीनों रास्‍तों को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है तो दुनिया की लगभग 30 फीसदी सप्‍लाई पूरी तरह ठप हो जाएगी. इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि यूरोप, भारत और चीन जैसे देशों को जाने वाली एनर्जी सप्‍लाई ज्‍यादा प्रभावित हो जाएंगी और अगर ये लंबे समय तक बंद रहता है तो दुनिया भर को एक भारी संकट का सामना करना पड़ सकता है।  जैसे पेट्रोल-डीजल और एलपीजी के दाम तेजी से बढ़ेंगे. सप्‍लाई चेन प्रभावित होने से अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों से आने वाली चीजें काफी महंगी हो जाएंगी, भारत से इन देशों को निर्यात भी प्रभावित होगा. कच्‍चा माल महंगा होने से प्रोडक्‍ट्स की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिससे बाजार में खरीदारी कम होगी और महंगाई के कारण इकोनॉमी प्रभावित होगी।  शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहेगा. जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी. कंपनियों की कमाई भी तेजी से घट सकती है, जिससे इनके शेयरों पर असर होगा. ऐसे में भारत से लेकर ग्‍लोबल लेवल पर बाजारों में मंदी की स्थिति आ सकती है. आइए समझते हैं कौन सा रास्‍ता कितना अहमियत रखता है…  सऊदी पाइपलाइन का रास्‍ता सबसे पहले सऊदी अरब का तेल, उसके पूर्वी क्षेत्र से होते हुए Arabian Peninsula के अंदर से पश्चिम की ओर Yanbu Port की ओर जाता है, फिर यहां से लाल सागर में जाकर मिलता है और वहां … Read more

गधों की वजह से बदली रेगिस्तान की तस्वीर, 44 साल में बंजर जमीन पर फिर लौटी हरियाली

यरुशलम गधों को लेकर जितनी तरह का कहावतें प्रचलित हैं उनसे लगता है कि यह दुनिया के बहुत ही सुस्त और अनुपयोगी जीव है। हालांकि गधे हमेशा से ही इंसानों के लिए उपयोगी रहे हैं। बोझा ढोने के लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी गधों के अंदर अद्वितीय क्षमता होती है। सबसे बड़ी बात यह ऐसा जीव है जिसमें खूब सहनशक्ति और धैर्य होता है। रेमन क्रेटर के रेगिस्तान में तो 28 जंगली गधों ने ऐसा कमाल किया कि रेत में भी हलियाली लौट आई। आज यहां 500 से 600 गधे कुलाचे भर रहे हैं। जरूरत के हिसाब से गधों का शरीर भी परिवर्तित हो गया। आज ये गधे देखने मे छोटे-छोटे घोड़ों की तरह नजर आते हैं। ईरान से मंगवाए गए गधे लगभग 44 साल पहले इजरायल ने नेगेव रेगिस्तान में ईरानी और अफ्रीकी नस्ल के जंगली गधों को छोड़ा था। दरअसल 20 शताब्दी में शिकार की वजह से यहां गधों की संख्या लगभग खत्म हो गई थी। ईरान और इजरायल में अब भले ही दुश्मनी हो लेकिन उस समय इजरायल ने पर्यावरण बचाने के लिए तत्कालीन शाह मोहम्मद रजा पहलवी से बात की। 1968 में ईरान से 28 गधे भेजे गए। इन्हें पहले योतवाता वाइल्डलाइफ रिजर्व में लाया गया और कुछ दिन यहां रखा गया। 1982 में 28 गधे सूखे रेगिस्तान में छोड़ दिए गए। आज इस इलाके के नक्शा बदल चुका है। यहां कई तरह की वनस्पतियां विकसित होने लगी हैं। वहीं गधे भी इस माहौल में अच्छी तरह सर्वाइव कर गए। इजरायली अधइकारियों का कहना था कि इस इलाके में गधों को छोड़ने से एक तो इस प्रजाति की सुरक्षा होगी दूसरा रेगिस्तान में फिर से जीवन लौट आएगा। जिन दो नस्लों को यहां छोड़ा गया था, दोनों ही खत्म होने की कगार पर थीं। ईरान में इस्लामिक क्रांति के दौरान इजरायल के साथ संबंध अच्छे थे। इसीदौरान शाह ने इजरायल को गधे गिफ्ट किए थे। इन्हें हवाई जहाज से इजरायल लाया गया था। इसके बाद कुछ गधे इथियोपिया से मंगवाए गए। जब इन्हें रामोन क्रेटर में छोड़ा गया तो यहीं उनका पसंदीदा अड्डा बन गया। गधों ने यहां भयंकर गर्मी और शुष्क जलवायु का सामना किया। इन गधों के आकार में परिवर्तन हो गया और ये छोटे-छोटे घोड़े जैसे दिखने लगे। गधे अब सुस्त जीव नहीं बल्कि 70 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ने वाले घोड़ बन गए थे। अब ये यहां 45 डिग्री के तापमान में भी सर्वाइव कर लेते हैं और बिना पानी के भी कई दिनों तक रह सकते हैं। इसके अलावा इन गधों को अब गड्ढा खोदने की कला भी आ गई है। गड्ढे में पानी भर जाता है तो दूसरे जीव भी पानी पीते हैं। इसके अलावा गड्ढे के आसपास हरियाली भी हो जाती है।