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छत्तीसगढ़ के पर्यटन और संस्कृति को मिलेगी नई पहचान, इवेंट मैनेजर्स से अरुण साव की अपील

छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने आगे आएं इवेंट मैनेजर्स : उप मुख्यमंत्री अरुण साव 'छत्तीसगढ़ में इवेंट मैनेजमेंट और पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं' 'इकॉन-2026' में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री रायपुर. उप मुख्यमंत्री अरुण साव आज रायपुर में आयोजित 'इकॉन-2026' इवेंट एंड एंटरटेनमेंट कॉन्क्लेव में शामिल हुए। उन्होंने देशभर से आए इवेंट मैनेजर्स का स्वागत करते हुए कहा कि इवेंट मैनेजमेंट आज एक बड़े उद्योग के रूप में उभर रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों में अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश की नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। छत्तीसगढ़ मैरिज डेस्टिनेशन के रूप में भी तेजी से उभर रहा है। इवेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के प्रयासों से प्रदेश को बड़ा लाभ मिल सकता है। साव ने देश के विभिन्न प्रदेशों से आए मेहमानों से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग स्थानों की यात्रा करें और यहां की संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यटन की संभावनाओं से परिचित हों। छत्तीसगढ़ में बहुत कुछ है, जिसे देश-दुनिया तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कॉन्क्लेव में सभी एक-दूसरे के अनुभव साझा करें और नए अवसरों पर मिलकर काम करें। इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में नवाचार से प्रदेश में पर्यटन एवं आर्थिक विकास में मदद मिलेगी। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में जला ‘आशीर्वाद का दीया’, बच्चों ने PM मोदी के दीर्घायु जीवन की कामना की

‘ आशीर्वाद का दीया’ से रोशन हुआ सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, बच्चों और परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घायु जीवन की कामना की  रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस एवं सार्वजनिक जीवन में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में दीर्घ सेवा के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प’ कार्यक्रम की कड़ी में नया रायपुर स्थित सत्य साईं संजीवनी सेंटर फॉर चाइल्ड हार्ट केयर में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अस्पताल परिसर को बड़ी संख्या में दीपों से सजाया गया। उपचाररत बच्चों, उनके परिजनों एवं उपस्थित नागरिकों ने दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की। सत्य साईं संजीवनी अस्पताल जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को पूर्णतः निःशुल्क बाल हृदय चिकित्सा एवं सर्जरी उपलब्ध कराने वाला प्रमुख संस्थान है। नया रायपुर में इसकी यात्रा वर्ष 2012 में प्रारंभ हुई और फरवरी 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी परिसर में ‘सौभाग्यम’ का उद्घाटन किया था।  ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान के अंतर्गत देश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों के साथ-साथ नागरिकों द्वारा अपने घरों में भी दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं व्यक्त की जा रही हैं। नया रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में अंजय शुक्ला, उपाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड (राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त), मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के प्रभारी के रूप में अभिषेक धनगर उपस्थित रहे। अस्पताल से जुड़े लोगों, बच्चों एवं उनके परिजनों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष भावनात्मक स्वरूप प्रदान किया। दीपों से जगमगाते अस्पताल परिसर में सामूहिक दीप प्रज्वलन के माध्यम से सेवा, सद्भावना और शुभकामना का संदेश दिया गया।

गोल्फ के ग्लोबल मैप पर उभर रहा नवा रायपुर, विश्वस्तरीय सुविधाओं से बनी नई पहचान

गोल्फ के ग्लोबल मैप पर उभर रहा नवा रायपुर, विश्वस्तरीय सुविधाएं बन रहीं पहचान : अरुण साव डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन में खलिन एच. जोशी बने विजेता, उप मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को किया पुरस्कृत रायपुर नवा रायपुर अब केवल आधुनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन गोल्फ टूर्नामेंट-2026 के पुरस्कार वितरण समारोह में उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने कहा कि नवा रायपुर का वर्ल्ड क्लास फेयरवे गोल्फ एंड कंट्री क्लब छत्तीसगढ़ में गोल्फ के बढ़ते आकर्षण और विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं की पहचान बन रहा है। साव ने प्रतियोगिता के विजेता खलिन एच. जोशी सहित उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किए और सभी प्रतिभागियों को शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।  उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि प्रदेश में इस तरह के बड़े और अंतरराष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंटों का आयोजन यहां की खेल संभावनाओं को नई दिशा देता है। ऐसे आयोजन छत्तीसगढ़ की गोल्फ प्रतिभाओं के लिए बड़े मंच का काम करते हैं। देश-दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों की मौजूदगी में होने वाली प्रतियोगिताओं से स्थानीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलता है और उन्हें अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की प्रेरणा मिलती है। साव ने डीपी वर्ल्ड नवा रायपुर ओपन के सफल आयोजन के लिए पीजीटीआई अध्यक्ष कपिल देव और उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख खेल आयोजनों के मानचित्र पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छत्तीसगढ़ में खेलों के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर मंच देने के ऐसे प्रयास लगातार जारी रहेंगे। प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना का विस्तार कर खिलाड़ियों के लिए ऐसे अवसर तैयार किए जाएंगे, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखारकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर सकें।

UP में चकबंदी पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 6 जिलों के 13 गांव प्रक्रिया से बाहर; किसानों को राहत

चकबंदी को लेकर योगी सरकार ने दिखाई तेजी, 13 गांव प्रक्रिया से नियमानुसार अलग  जमीन से जुड़े मामलों का समयबद्ध निस्तारण होने से किसानों को मिली बड़ी राहत लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में लंबित चकबंदी प्रक्रिया को जल्द पूरा कराने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। इसका उद्देश्य किसानों को सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ उनकी जमीन से जुड़े मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना है। चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद के निर्देश पर छह जिलों के 13 गांवों को जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है। इनमें मैनपुरी का भांती गांव 35 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया में था। बदायूं का सिरतौल गांव 14 वर्ष, उन्नाव के दरौली, पीखी, सर्लीद और निहालपुर व लखनऊ के शिवपुरी गांव 12 वर्ष से प्रक्रिया में थे। बरेली का कादरगंज 10 वर्ष से चकबंदी प्रक्रिया में लंबित था। इसके अलावा बिजनौर के हसनअलीपुर व बैबलवाला और बदायूं के बक्सेना व इमलिया गांवों को भी प्रक्रिया से अलग किया गया है। इन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया आगे बढ़ने में विभिन्न कारणों से दिक्कत आ रही थी। इनमें गांवों का विकास योजना में आना, नदी के कटान से प्रभावित होना, चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम होना, औद्योगिक विकास क्षेत्र में शामिल होना जैसे अन्य कारण शामिल हैं। वहीं, मुजफ्फरनगर के पीपलशाह गांव में 16 वर्षों से लंबित चकबंदी प्रक्रिया को काफी प्रयासों के बाद जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत पूरा कर लिया गया है। इससे लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए खुल रहे नए अवसर, विकास को मिल रही रफ्तार: मुख्यमंत्री साय

विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है छत्तीसगढ़, निवेश के लिए है असीम संभावनाएं – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और अनछुए पर्यटन स्थलों से दुनिया को परिचित कराने की है जरूरत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव 2026 में हुए शामिल रायपुर,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश को 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दिया है। एक ऐसा भारत जिसकी ओर दुनिया चुनौतियों के समाधान की उम्मीद से देख रही है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में हमारा छत्तीसगढ़ राज्य अहम भूमिका निभाने में सक्षम है। हमारे पास देश की तरक्की को गति देने वाले सभी जरूरी संसाधन हैं। उच्च गुणवत्ता के बहुमूल्य खनिज,बिजली के साथ ही हमारे पास स्किल्ड वर्क फोर्स है।  उक्त बातें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर में आयोजित इकोनामिक टाइम्स द्वारा आयोजित विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव 2026 में कही। उन्होंने बताया विकसित भारत 2047 के अनुरूप ही हमने विकसित छत्तीसगढ़ 2047 बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहे है। हमनें इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विजन डॉक्यूमेंट 2047 तैयार किए है जिसके अनुरूप हमारी सरकार समयबद्ध रूप से मिशन मोड में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा विकसित भारत की भव्य इमारत स्टील से तैयार होगी। छत्तीसगढ़ अभी देश का 20 प्रतिशत स्टील उत्पादित करता है। चिनाब नदी पर बना देश का सबसे ऊंचा पुल छत्तीसगढ़ के फौलादी स्टील से तैयार हुआ है।  माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्टील निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार नीतिगत प्रयास कर रहे हैं। हमने प्रदेश में स्टील के उत्पादन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 45 मिलियन टन करने का रखा है। विकसित भारत के ग्रोथ इंजन को पावर चाहिए। छत्तीसगढ़ देश के 20 प्रतिशत कोयले का उत्पादन करता है। हम 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं। हमने एनर्जी समिट किया,जिसमें साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आये, जिन पर काम हो रहा है। कुछ ही वर्षों में 60 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा आज छत्तीसगढ़ का कोर सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। इसके पीछे बड़ी वजह हमारी नई औद्योगिक नीति है। हमने निवेश पर आकर्षक सब्सिडी दी है। कोई अपना उद्यम लगाना चाहे तो उनके लिए अनेक तरह के प्रोत्साहन हैं। पूंजी निवेश पर सब्सिडी है, ब्याज पर सब्सिडी है, कोई टेक्नालाजी खरीदना चाहे तो उस पर सब्सिडी है। स्टांप ड्यूटी में छूट है। हमनें खासकर पावर,आईटी, स्टील, टेक्सटाइल,फार्मा, फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर को विशेष प्रोत्साहित कर रहे है। नई उद्योग नीति के तहत अब तक हमें 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। आज हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में नक्सल मुक्त भारत का स्वप्न साकार हुआ है। छत्तीसगढ़ के बस्तर ने लंबे समय तक माओवाद का दंश झेला, लेकिन अब यह क्षेत्र इको टूरिज्म के लिए नया डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और अद्भुत जैव विविधता से भरपूर बस्तर में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की पहचान उसकी वास्तविक खूबसूरती और सांस्कृतिक समृद्धि के अनुरूप नहीं बन पाई। अब परिस्थितियां तेजी से बदली हैं और बस्तर शांति, विश्वास, विकास और पर्यटन की नई पहचान के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है। बस्तर की इस बदलती तस्वीर को देश-दुनिया तक पहुंचाने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि बीते चार दशकों में बस्तर का नाम राष्ट्रीय मीडिया में अधिकांशतः नक्सलवाद और हिंसा से जुड़ी घटनाओं के संदर्भ में सामने आता रहा। इससे बस्तर की वास्तविक पहचान कहीं पीछे छूट गई। अब नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता और क्षेत्र में स्थापित हो रहे शांति के वातावरण ने बस्तर के विकास के लिए नए द्वार खोले हैं। सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा आप सभी बस्तर की वास्तविक खूबसूरती और वहां हो रहे बदलावों से परिचित हैं। राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से जब बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य, संस्कृति और पर्यटन स्थलों की सकारात्मक कहानियां देश के सामने आएंगी तो लोगों की बस्तर के प्रति धारणा भी बदलेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर को अब नक्सलवाद नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और विकास के लिए जाना जाए – यह हम सभी का प्रयास होना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पर्यटन केवल किसी क्षेत्र की पहचान को विस्तार देने का माध्यम नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी बड़ा आधार है। बस्तर में पर्यटन बढ़ने से होटल, होम-स्टे, परिवहन, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, गाइड सेवा सहित अनेक क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। बस्तर के हस्तशिल्प, वनोपज और स्थानीय उत्पादों को भी पर्यटन के माध्यम से बड़ा बाजार मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में शांति और विकास को स्थायी स्वरूप देने के साथ पर्यटन की संभावनाओं को भी विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि देश-दुनिया से पर्यटक निर्भय होकर बस्तर आएं, यहां की प्राकृतिक सुंदरता और विशिष्ट संस्कृति को करीब से देखें तथा एक नए और बदलते बस्तर का अनुभव लेकर लौटें। छत्तीसगढ़ मध्य भारत में हमारी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, 3500 किलोमीटर से अधिक फैले हमारे राष्ट्रीय राजमार्ग और देश के सबसे तेजी से विकसित होते रेल नेटवर्क के चलते छत्तीसगढ़ पर अब सबकी नजर है। लाजिस्टिक के लिए हमारा प्रदेश बहुत उपयुक्त है। यहां से देश के हर कोने में आपूर्ति सबसे आसान है। हमने लाजिस्टिक नीति भी तैयार की है मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सार्वजनिक सेवा के 25 वर्षों की यात्रा सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और राष्ट्र निर्माण को समर्पित रही है। इस अवधि में देश ने विकास और जनकल्याण के अनेक क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन देखा है। गरीबों के पक्के आवास से लेकर स्वच्छ पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता, वित्तीय समावेशन और बुनियादी अधोसंरचना तक जनकल्याणकारी योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने का कार्य किया है। इस अवसर पर इस अवसर … Read more

ऋषिगालव महाविद्यालय में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता व्याख्यान, पूर्व एनसीसी कैडेट के लेफ्टिनेंट बनने पर भव्य स्वागत

मुरैना  ऋषिगालव महाविद्यालय में शुक्रवार को टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुरैना स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य अधिकारी अवधेश शर्मा (District Coordinator TB PMDT), योगेंद्र सिंह कुशवाहा (incharge sts tu morena) एवं Govind senthiya (District Coordinator Hindustan wellness ngo ) ने विद्यार्थियों को टीबी रोग के लक्षण, बचाव, जांच एवं उपचार के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से टीबी के प्रति स्वयं जागरूक होने के साथ-साथ समाज में भी जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य आई. ए. गौरी, एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट मुश्ताक अली, प्रोफेसर डॉ. पी. के. चतुर्वेदी, चीफ ऑफिसर प्रदीप शर्मा एवं केयरटेकर अजय कुमार राजपूत और लगभग 150 से अधिक एनसीसी कैडेट उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित एवं लीड करने के लिए 8 एमपी बटालियन एनसीसी के कमान अधिकारी कर्नल सुमित दुआ के आदेश अनुसार  ग्वालियर से हवलदार प्रभु सिंह एवं हवलदार चिरेंद्र सिंह मुरैना पहुंचे। हवलदार प्रभु सिंह ने बताया कि वह अभी मुरैना शहर में दो दिन रहेंगे और एनसीसी कैडेट के साथ और अपनी टीम के साथ मुरैना शहर के हर एक ब्लॉक में घर-घर जाकर टीबी मुक्त भारत अभियान चलाएंगे।  इसके पश्चात महाविद्यालय के लिए गौरव का क्षण उस समय आया, जब महाविद्यालय के पूर्व एनसीसी कैडेट सीनियर अंडर ऑफिसर शिवकुमार सिकरवार लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार कॉलेज पहुंचे। उनके आगमन पर महाविद्यालय परिवार एवं एनसीसी कैडेटों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य आई. ए. गौरी, प्रोफेसर डॉ. पी. के. चतुर्वेदी एवं एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट मुश्ताक अली ने उनका स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर एनसीसी से जुड़े कैडेटों एवं विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। वक्ताओं ने कहा कि किसी पूर्व एनसीसी कैडेट का लेफ्टिनेंट बनकर अपने महाविद्यालय में लौटना वर्तमान कैडेटों के लिए प्रेरणा का विषय है। यह उपलब्धि युवाओं को अनुशासन, नेतृत्व, समर्पण और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती है। महाविद्यालय में आयोजित दोनों कार्यक्रमों में एनसीसी एवं महाविद्यालय परिवार की सक्रिय सहभागिता रही।

प्रेग्नेंसी में उल्टी से इतना डर लगा कि महिला ने लिया अबॉर्शन का फैसला, बताई पूरी कहानी

लंदन  प्रेग्नेंसी की खबर सुनकर ज्यादातर कपल्स खुश होते हैं. लंबे समय से बच्चे का इंतजार कर रहे हों तो यह पल उनके लिए और भी खास होता है. लेकिन ब्रिटेन की ब्रायोनी ट्वाइडल के लिए प्रेग्नेंट होना खुशी के बजाय डर और घबराहट लेकर आया. वजह थी उनकी उल्टी से जुड़ी ऐसी फोबिया, जिससे वह करीब 25 साल से जूझ रही थीं।  द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रायोनी को उल्टी से इतना ज्यादा डर लगता था कि किसी दूसरे व्यक्ति को उल्टी करते देखकर उन्हें पैनिक अटैक तक आ जाता था. प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में लगातार जी मिचलाने की समस्या ने उनके पुराने डर को फिर से बुरी तरह बढ़ा दिया. हालात यहां तक पहुंच गए कि उन्हें अपनी जिंदगी खत्म करने जैसे ख्याल आने लगे।  आखिरकार, प्रेग्नेंसी के आठवें हफ्ते में उन्होंने अबोर्शन कराने का फैसला किया. यह फैसला उनके और उनके पति दोनों के लिए बेहद मुश्किल था, क्योंकि वे इस बच्चे को चाहते थे. करीब दो साल बाद ब्रायोनी ने अपनी कहानी इसलिए साझा की है, ताकि ऐसी ही परेशानी से जूझ रही दूसरी महिलाएं खुद को अकेला न समझें।  बचपन से ही था उल्टी का डर ब्रायोनी बताती हैं कि उन्हें ठीक से याद नहीं कि उल्टी से डर कब शुरू हुआ. लेकिन आठ साल की उम्र की एक घटना उन्हें आज भी याद है. वह अपनी मां की कार की पिछली सीट पर बैठी थीं, तभी उनके एक दोस्त ने उनके सामने उल्टी कर दी।  इसके बाद परिवार के साथ सफर के दौरान उनके भाई को होने वाली ट्रैवल सिकनेस ने भी इस डर को और बढ़ाया. धीरे-धीरे उल्टी से बचना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया. वह थीम पार्क जाने से बचती थीं और शराब पीने से भी परहेज करती थीं, ताकि उन्हें खुद उल्टी न हो. अगर किसी सोशल इवेंट में जाने से पहले उन्हें पता चल जाता कि वहां किसी को हाल ही में नोरोवायरस हुआ था, तो वह कार्यक्रम में जाना ही छोड़ देती थीं. ब्रायोनी को सिर्फ दूसरे लोगों के उल्टी करने से ही डर नहीं लगता था, बल्कि खुद बीमार होकर उल्टी करने का भी उन्हें बहुत डर था।  क्या है इमेटोफोबिया? उल्टी के इस असामान्य और बेहद तेज डर को इमेटोफोबिया कहा जाता है. ब्रायोनी के मुताबिक, उन्हें लंबे समय तक लगता था कि शायद वह अकेली हैं जिन्हें इस तरह का डर है।  बाद में जब उन्हें इसके बारे में पता चला तो उन्हें मालूम हुआ कि वह अकेली नहीं हैं. उनके मुताबिक, अनुमान है कि करीब 2 से 7 फीसदी लोगों को किसी न किसी स्तर पर इमेटोफोबिया हो सकता है. इनमें महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा बताई जाती है और यह डर अक्सर बचपन के आसपास शुरू हो जाता है।  ब्रायोनी ने इस डर को काबू करने की कोशिश भी की. करीब 20 की उम्र के आखिरी वर्षों में उन्होंने NHS के जरिए CBT यानी कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी ली. थेरेपी के दौरान उन्हें धीरे-धीरे उस चीज का सामना कराया गया जिससे वह सबसे ज्यादा डरती थीं।  शुरुआत में उन्हें एक रोलरकोस्टर पर उल्टी करती लड़की का वीडियो दिखाया गया. वीडियो देखते हुए वह रोने लगीं और उन्हें पैनिक अटैक आया. लेकिन उन्होंने वही वीडियो बार-बार देखा और धीरे-धीरे उनका डर कम होने लगा. इसके बाद उन्हें एक कार में बैठकर उल्टी जैसी दिखने वाली चीज के साथ अपने डर का सामना करने की एक्सरसाइज भी कराई गई।  जनवरी 2024 में शादी के करीब दो साल बाद ब्रायोनी को लगा कि अब वह मानसिक रूप से बच्चे के लिए तैयार हैं. उन्होंने और उनके पति ने परिवार बढ़ाने की कोशिश शुरू की।  लेकिन इसी दौरान उनकी जिंदगी में कई परेशानियां भी आईं. मार्च में उन्हें पता चला कि उनके पिता को आंत का कैंसर है और उनकी दादी को ब्रेस्ट कैंसर है।  इसी दौरान उनके पति एक वीकेंड पर दोस्तों के साथ बाहर गए हुए थे और ब्रायोनी को नोरोवायरस हो गया. वह परिवार के दूसरे लोगों को संक्रमित नहीं करना चाहती थीं, इसलिए अकेले ही बीमारी से जूझने की कोशिश करती रहीं. लेकिन करीब 24 घंटे बाद उन्होंने अपने पति से घर लौटने को कहा।  बचपन के बाद पहली बार उन्हें इतनी ज्यादा उल्टी हुई कि वह खुद को रोक नहीं पाईं. करीब पांच बार उन्हें उल्टी हुई. लेकिन इस बार उन्हें कुछ अलग महसूस हो रहा था. उल्टी और मितली की समस्या जैसे खत्म ही नहीं हो रही थी. तभी उन्हें पता चला कि उनका पीरियड करीब दो हफ्ते लेट है. वह प्रेग्नेंट थीं।  ब्रायोनी ने जैसे ही परिवार को प्रेग्नेंसी की खबर दी, सभी बहुत खुश हुए. परिवार पहले ही कई मुश्किलों से गुजर रहा था और ब्रायोनी चाहती थीं कि यह खबर सबके लिए खुशी लेकर आए. लेकिन उनके मन में कुछ और ही चल रहा था।  उन्हें डर था कि प्रेग्नेंसी के साथ होने वाली मॉर्निंग सिकनेस कहीं उनके पुराने इमेटोफोबिया को फिर से न जगा दे. उन्होंने लगातार जी मिचलाने से बचने के लिए रात के दो बजे तक बैगल्स और अंगूर खाने जैसी चीजें भी आजमाईं. उल्टी भले ही नहीं हो रही थी, लेकिन लगातार तेज मितली उन्हें परेशान कर रही थी।  प्रेग्नेंसी के सातवें हफ्ते में उनकी हालत इतनी खराब हो गई कि वह डॉक्टर के पास पहुंचीं. वह मदद चाहती थीं, लेकिन उनके मुताबिक उन्हें उस समय एंटी-सिकनेस दवा नहीं दी गई और अदरक आजमाने की सलाह दी गई. ब्रायोनी के लिए यह काफी निराशाजनक था।  लगातार डर, मितली और नींद की कमी ने उनकी मानसिक हालत को और खराब कर दिया. ब्रायोनी बताती हैं कि उन्हें लगने लगा था कि वह अब आगे नहीं चल पाएंगी. उनके पति ने भी महसूस किया कि उनकी हालत गंभीर होती जा रही है. उन्होंने क्राइसिस हेल्पलाइन से संपर्क किया, लेकिन उन्हें लगा कि वहां मौजूद लोग इमेटोफोबिया और उनकी स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं पा रहे थे।  तभी उनके पति ने उनसे कहा कि उन्हें इस प्रेग्नेंसी को जारी रखने के लिए खुद को मजबूर करने की जरूरत नहीं है. उनका कहना था कि ब्रायोनी की सुरक्षा सबसे पहले है. अबोर्शन का विकल्प सामने रखना बच्चे को लेकर कोई दबाव नहीं था, बल्कि उनकी … Read more

ईरान में फिर शुरू हुआ परमाणु सेंटर का निर्माण, इजरायली हमले के बाद तीसरी बार हो रही मरम्मत

तेहरान  ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में स्थित तालेगान-2 लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय केंद्र रहा है. पश्चिमी खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, यह जगह ईरान के पुराने अमाड परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हुई थी. वहां उच्च विस्फोटक परीक्षण किए जाने के आरोप लगे थे, जो परमाणु हथियार के डिजाइन से संबंधित हो सकते थे।  ईरान हमेशा से इन आरोपों से इनकार करता आया है. कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. इस स्थल की भूमिगत कक्ष और संरचनाएं विशेषज्ञों के लिए संदेह का विषय बनी रहीं. पारचिन परिसर स्वयं सैन्य गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां कोई भी गतिविधि तुरंत नजर में आ जाती है।  अक्टूबर 2024 और मार्च 2026 में इजरायली हमलों ने तालेगान-2 स्थल को भारी नुकसान पहुंचाया. इन हमलों में ऊपर की संरचनाएं नष्ट हो गईं और भूमिगत कक्ष में छेद हो गए. यह पहली बार नहीं था जब यह जगह निशाने पर आई. विशेषज्ञों के अनुसार यह विनाश और फिर से निर्माण का तीसरा चक्र है।  हर बार हमले के बाद ईरान ने स्थल को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है. मार्च 2026 के हमले के बाद जून में मरम्मत का काम शुरू हुआ. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान अब सिर्फ मरम्मत नहीं कर रहा, बल्कि अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी जोड़ रहा है।   इनमें विस्फोट से बचाव के लिए विशेष सुरक्षा परतें, कंक्रीट के एप्रन और छेदों पर ढक्कन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. ये कदम दर्शाते हैं कि ईरान इस स्थल को लंबे समय तक चालू रखना चाहता है और भविष्य के संभावित हमलों से बचाने की तैयारी कर रहा है।  फिर से निर्माण की तेजी और सुरक्षा उपायों का महत्व जून से शुरू हुए मरम्मत कार्य में तेजी देखी जा रही है. भूमिगत कक्ष के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ढकने और मजबूत करने का काम चल रहा है. कंक्रीट की परतें और सुरक्षात्मक ढांचे जोड़ने से यह साफ है कि ईरान सिर्फ पुरानी स्थिति बहाल नहीं कर रहा, बल्कि स्थल को और मजबूत बना रहा है।  इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी जैसे संगठनों ने इस पैटर्न को गहरी चिंता का विषय बताया है. उनका कहना है कि बार-बार विनाश के बावजूद स्थल को फिर से खड़ा करना सामान्य सैन्य गतिविधि से ज्यादा गंभीर संकेत दे सकता है. हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों से यह तय नहीं किया जा सकता कि वर्तमान काम किसी परमाणु संबंधित गतिविधि से जुड़ा है या नहीं. केवल संरचनात्मक बदलाव ही नजर आ रहे हैं. ईरान का पक्ष है कि ये सब सामान्य रक्षात्मक मरम्मत हैं और उसके परमाणु प्रयास शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं।  यह घटना ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहसों को फिर से ताजा कर देती है. आईएईए लगातार ईरान से ज्यादा पारदर्शिता की मांग करता रहा है. पश्चिमी देश और इजरायल मानते हैं कि अतीत में उच्च विस्फोटक परीक्षणों का मकसद परमाणु हथियार की क्षमता विकसित करना था।  ईरान इन आरोपों को राजनीतिक दबाव बताता है. बार-बार हमले और पुनर्निर्माण का सिलसिला क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है. अगर यह स्थल वाकई किसी संवेदनशील गतिविधि के लिए इस्तेमाल होता रहा हो, तो उसकी बहाली से परमाणु अप्रसार के प्रयासों पर असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ, अगर यह सिर्फ सैन्य विस्फोटक परीक्षण स्थल है, तो भी इसकी सुरक्षा बढ़ाया जाना ईरान की रक्षात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।   वैश्विक स्तर पर यह घटना तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देश आईएईए की रिपोर्टों पर नजर रखे हुए हैं. ईरान अगर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ाने को तैयार नहीं होता, तो प्रतिबंधों या अन्य दबाव बढ़ने की आशंका बनी रहती है. साथ ही, बार-बार होने वाले हमले मध्य पूर्व में संघर्ष को नया रूप भी दे सकते हैं।  आगे की निगरानी तालेगान-2 स्थल का तेजी से पुनर्निर्माण ईरान की दृढ़ता को दिखाता है कि वह बाहरी हमलों के बावजूद अपनी सैन्य सुविधाओं को बनाए रखना चाहता है. सुरक्षा उपायों का विस्तार इस बात का संकेत है कि भविष्य के खतरों को लेकर तैयारी की जा रही है. विशेषज्ञों की चिंता जायज है क्योंकि इतिहास में यह जगह संदेह के घेरे में रही है. फिर भी, वर्तमान तस्वीरों से परमाणु गतिविधि की पुष्टि नहीं होती।  आने वाले महीनों में सैटेलाइट निगरानी, आईएईए की जांच और कूटनीतिक विकास तय करेंगे कि यह पुनर्निर्माण कितना सामान्य है या कितना चिंताजनक. फिलहाल यह घटना ईरान-इजरायल तनाव और परमाणु मुद्दे की जटिलता को एक बार फिर रेखांकित करती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहकर तथ्यों पर आधारित प्रतिक्रिया देनी होगी ताकि तनाव और न बढ़े। 

हाइड्रोजन ट्रेन में नहीं मिल रहे यात्री, रेलवे ने लिया बड़ा फैसला; दिल्ली तक बढ़ाया जा सकता है रूट

जींद/सोनीपत जिस ट्रेन में एक साथ 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं, उसमें पूरे रास्ते कभी 40 तो कभी 60 यात्री ही बैठे हों. देश की इकलौती हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन फिलहाल कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखा रही है. हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चल रही इस ट्रेन में यात्रियों की संख्या इतनी कम रह रही है कि रेलवे को इसके रूट को एक्सटेंड करना पड़ रहा है. अब भारतीय रेल हाइड्रोजन ट्रेन में यात्री की संख्या बढ़ाने के लिए इसे दिल्ली तक ले आने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, इसके रास्ते में कुछ तकनीकी और संचालन से जुड़ी चुनौतियां भी हैं।  यह हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत सेक्शन पर चल रही है. अधिकारियों के मुताबिक, 2,600 यात्रियों की क्षमता वाली इस ट्रेन में जींद से सोनीपत तक के पूरे सफर में आमतौर पर सिर्फ 40 से 60 यात्री ही मिलते हैं. कम यात्रियों की वजह से ट्रेन रोज सिर्फ एक आने-जाने का फेरा लगा रही है. शुरुआती योजना के मुताबिक इसे जींद और सोनीपत के बीच रोज दो फेरे लगाने थे. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, नॉर्दर्न रेलवे पिछले करीब दो महीनों से इस ट्रेन का संचालन कर रहा है. ट्रेन के संचालन और नई तकनीक पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भी लगातार काम कर रही है।  दिल्ली तक क्यों बढ़ाना चाहता है रेलवे? कम फुटफॉल को देखते हुए रेलवे अब इस ट्रेन को दिल्ली के आजादपुर स्टेशन तक ले जाने के विकल्प पर काम कर रहा है. आजादपुर दिल्ली का प्रमुख थोक फल और सब्जी बाजार है. रेलवे का मानना है कि अगर ट्रेन दिल्ली तक पहुंचती है तो यात्रियों के लिए इसका इस्तेमाल ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है. स्थानीय लोग भी लंबे समय से ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल रेलवे इस विस्तार से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रहा है. अंतिम फैसला सुरक्षा, तकनीकी जरूरतों और संचालन की व्यवहारिकता को देखने के बाद लिया जाएगा।  17 जुलाई को शुरू हुई थी हाइड्रोजन ट्रेन भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत 17 जुलाई को हुई थी. यह ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी है. इसे रेलवे की क्लीन और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी की दिशा में एक अहम कदम बताया गया था. हाइड्रोजन ट्रेन में डीजल इंजन की तरह सीधे डीजल का इस्तेमाल नहीं होता. इसमें हाइड्रोजन से बिजली बनाई जाती है, जो ट्रेन को चलाने के लिए इस्तेमाल होती है. इसी वजह से इसे कम प्रदूषण वाली रेल तकनीक के तौर पर देखा जाता है. रेलवे के मुताबिक, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो हाइड्रोजन बेस्ड रेल ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।  इस रूट पर कम यात्रियों की समस्या नई नहीं है. रेलवे कर्मचारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन से पहले इसी रूट पर चलने वाली डेमू ट्रेन में भी यात्रियों की संख्या काफी कम रहती थी. फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन के अलावा इस रूट पर 3 दूसरी डेमू ट्रेनें भी चल रही हैं. लेकिन इनमें भी बहुत ज्यादा भीड़ नहीं होती. रेलवे से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि जींद और सोनीपत के बीच रोजाना दफ्तर जाने वाले यात्रियों और विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या कम है. यही वजह है कि ट्रेनों को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे हैं।  ट्रेन को दिल्ली तक ले जाने में क्या है परेशानी हाइड्रोजन ट्रेन का रूट दिल्ली तक बढ़ाने का विचार आसान जरूर लगता है, लेकिन रेलवे के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं. यह हाइड्रोजन ट्रेन 10 कोच की है और इसमें करीब 2,600 यात्रियों के बैठने की क्षमता है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली से चलने वाली ट्रेनों में ज्यादा यात्रियों को ले जाने के लिए आमतौर पर 18-20 या उससे ज्यादा कोच की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा दिल्ली के व्यस्त रेल नेटवर्क में पहले से ही ट्रेनों की आवाजाही काफी ज्यादा है. ऐसे में नई ट्रेन के लिए ट्रैक की उपलब्धता और समय तय करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।  एक टैंक में 250-300 किमी तक चलती है ट्रेन ईंधन के मामले में फिलहाल बड़ी समस्या नहीं बताई जा रही है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन एक बार टैंक पूरी तरह भरने के बाद करीब 250 से 300 किलोमीटर तक चल सकती है. दिल्ली और जींद के बीच दूरी करीब 130 किलोमीटर है. यानी दूरी के हिसाब से ट्रेन एक टैंक में यह सफर कर सकती है. हालांकि, अभी ट्रेन में हाइड्रोजन भरने की सुविधा सिर्फ जींद में है. ऐसे में दिल्ली तक सेवा बढ़ाने पर ईंधन भरने की व्यवस्था और ट्रेन के संचालन की योजना को भी ध्यान में रखना होगा।  पानीपत-सफीदों रूट का विकल्प भी सुझाया स्थानीय लोगों के बीच ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने की मांग है, लेकिन अगर दिल्ली रूट में संचालन संबंधी दिक्कतें आती हैं तो एक दूसरा विकल्प भी सुझाया गया है. स्थानीय यात्रियों का कहना है कि ट्रेन को सोनीपत से पानीपत और फिर सफीदों होते हुए जींद तक चलाया जा सकता है. इससे एक सर्किट तैयार हो जाएगा. पानीपत एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस रूट से रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है और ट्रेन का इस्तेमाल भी बेहतर हो सकता है. इस प्रस्ताव के मुताबिक ट्रेन जींद से चलकर सोनीपत, पानीपत और सफीदों होते हुए वापस जींद पहुंच सकती है. इस तरह करीब 180 किलोमीटर का एक सर्किट बन सकता है।  सुरक्षा के लिहाज से अभी कोई जल्दबाजी नहीं रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन ट्रेन नई तकनीक पर आधारित है, इसलिए इसके विस्तार को लेकर जल्दबाजी नहीं की जाएगी. विशेषज्ञों की टीम ट्रेन के मौजूदा संचालन के साथ-साथ दिल्ली तक विस्तार के लिए किए जा रहे ट्रायल और तकनीकी पहलुओं पर नजर रख रही है. रेलवे के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है. यानी फिलहाल रेलवे के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 2,600 सीटों वाली ट्रेन में 40-60 यात्री क्यों मिल रहे हैं, बल्कि यह भी है कि ज्यादा यात्रियों तक पहुंचने के लिए इसका रूट कैसे बदला जाए. दिल्ली तक विस्तार एक विकल्प है, जबकि पानीपत-सफीदों वाला सर्किट दूसरा रास्ता हो सकता है. अंतिम … Read more

द्वारका एक्सप्रेसवे से सोहना हाईवे तक बनेगा एलिवेटेड रोड, SPR पर ट्रैफिक होगा आसान

गुरुग्राम गुरुग्राम में सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर) पर एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। इस एलिवेटेड रोड के निर्माण से द्वारका एक्सप्रेसवे और गुरुग्राम-सोहना हाईवे आपस में जुड़ जाएंगे। इससे दिल्ली से मुंबई आवागमन आसान हो जाएगा। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की ओर से इसके लिए अगले सप्ताह तक टेंडर जारी कर दिए जाने की उम्मीद है। जीएमडीए ने पिछले महीने करीब 775 करोड़ रुपये के टेंडर दस्तावेज बनाकर हरियाणा सरकार को भेजे थे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तरफ से गठित इंफ्रास्ट्रक्चर एवं इंजीनियरिंग कमेटी इन टेंडर दस्तावेजों की जांच कर रही है। उम्मीद है कि तीन से चार दिन के अंदर इन दस्तावेज को मंजूरी मिल जाएगी। इसके तुरंत बाद जीएमडीए की तरफ से इस एलिवेटेड रोड के निर्माण के टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। मार्च में जारी हुए टेंडर को डीपीआर में कमी की वजह से इस टेंडर को रद्द कर दिया था। टेंडर आवंटन के 30 महीने के अंदर यह परियोजना पूरी होगी। चार लेन ­का बनेगा एलिवेटेड रोड द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे से गुरुग्राम-सोहना हाईवे की तरफ चार-चार लेन का एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। एलिवेटेड रोड के नीचे एसपीआर पर तीन-तीन लेन की मुख्य सड़क और दो-दो लेन की सर्विस रोड तैयार होगी। क्लोवरलीफ भी बनेगा एलिवेटेड रोड को गुरुग्राम-सोहना हाईवे के एलिवेटेड रोड से जोड़ने के लिए वाटिका चौक पर क्लोवरलीफ तैयार किया जाएगा। अगले दो सप्ताह के अंदर एस्टीमेट बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद टेंडर दस्तावेज को मंजूरी के लिए हरियाणा सरकार के पास भेजा जाएगा। गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड की डीपीआर बन रही गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड को गुरुग्राम-सोहना हाईवे से जोड़ने के लिए गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड पर भी एलिवेटेड रोड के निर्माण की योजना है। जीएमडीए ने डीपीआर तैयार करने के लिए एक कंपनी को टेंडर आवंटित किया है। अगले दो माह में डीपीआर तैयार हो जाएगी, जिसे मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाएगा। प्रवीण चौधरी, मुख्य अभियंता, जीएमडीए, ''एसपीआर पर एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए टेंडर दस्तावेज तैयार हैं। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। अगले सप्ताह में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। ‘’ गुरुग्राम में हरित क्षेत्र का होगा रखरखाव इसके साथ ही जीएमडीए ने गुरुग्राम में बख्तावर चौक से लेकर सुभाष चौक तक मुख्य सड़क के दोनों तरफ हरित क्षेत्र के रखरखाव की योजना बनाई है। इसके तहत करीब तीन करोड़ रुपये की लागत आएगी। अगले महीने में इस योजना के तहत टेंडर जारी हो जाएगा। ठेकेदार को चार महीने के अंदर काम पूरा करना होगा। 12 महीने तक देखरेख की जिम्मेदारी ठेकेदार की रहेगी।