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श्रमिक की बहाली का आदेश नहीं माना, ग्वालियर हाई कोर्ट ने मंडी समिति की अपील खारिज की

ग्वालियर  बहाली का आदेश होने के बावजूद श्रमिक को सेवा में वापस नहीं लेने के मामले में कृषि उपज मंडी समिति को अब 6 लाख 44 हजार 137 रुपये का भुगतान करना होगा।मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंडी समिति की रिट अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने 17 सितंबर को कृषि उपज मंडी समिति की अपील पर सुनवाई की। श्रम न्यायालय ने दिया था बहाली का आदेश मामला राकेश सक्सेना से जुड़ा है। श्रम न्यायालय क्रमांक-1, ग्वालियर ने एक फरवरी 2003 को आदेश जारी कर राकेश सक्सेना को बिना पिछले वेतन के सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया था। यह आदेश हाई कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन बरकरार रहा। इसके बावजूद उनकी बहाली नहीं की गई और वे 31 अगस्त 2007 को सेवानिवृत्त हो गए। वेतन के लिए श्रम न्यायालय में दिया आवेदन इसके बाद राकेश सक्सेना ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33-सी(2) के तहत श्रम न्यायालय में आवेदन देकर बहाली के आदेश से सेवानिवृत्ति तक के वेतन की मांग की। उन्होंने इसकी गणना भी प्रस्तुत की। मंडी समिति ने श्रम न्यायालय में लिखित जवाब दिया, लेकिन गणना पर कोई आपत्ति नहीं की। हाई कोर्ट में दी थी चुनौती श्रम न्यायालय ने 6 लाख 44 हजार 137 रुपये भुगतान का आदेश दिया। मंडी समिति ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान उसके अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि गणना पर श्रम न्यायालय में कोई विवाद नहीं किया गया था। अब अलग गणना पत्र के जरिए आपत्ति की जा रही है।  

2027 चुनाव से पहले AAP का बड़ा संगठनात्मक अभियान, पंजाब में घर-घर पहुंचेगी पार्टी

चंडीगढ़  पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अब सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में किए गए कामों और योजनाओं को लेकर सीधे लोगों के बीच जाने की तैयारी में है। इसके तहत 20 सितंबर से प्रदेशभर में बड़े स्तर पर डोर-टू-डोर अभियान शुरू किया जाएगा। अभियान में पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बड़े नेता भी घर-घर जाकर लोगों से संवाद करेंगे और मान सरकार के कामकाज की जानकारी देंगे। आप नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि पार्टी पंजाब के लोगों के बीच जाकर सरकार के कामों को रखेगी। उन्होंने दावा किया कि भगवंत मान सरकार ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में लोगों से किए गए वादों और गारंटियों को पूरा किया है। नशे के खिलाफ कई काम किए: सिसोदिया उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने मान सरकार पर भरोसा जताया है और सरकार के कामों से लोग खुश हैं। सिसोदिया ने कहा कि पंजाब की जवानी को बचाने के लिए सरकार ने नशे के खिलाफ कई स्तर पर काम किया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। सिसोदिया ने पिछली सरकारों पर पंजाब में नशा फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि आप सरकार का फोकस युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने पर है। शिक्षा को भी बनाया जाएगा मुद्दा उन्होंने कहा कि सरकार के कामों को लेकर केवल राजनीतिक मंचों पर चर्चा करने के बजाय अब पार्टी कार्यकर्ता सीधे लोगों के घरों तक पहुंचेंगे। इस दौरान नौजवानों, व्यापारियों, महिलाओं और अन्य वर्गों से बातचीत की जाएगी। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि इन वर्गों में सरकार के कामकाज को लेकर संतुष्टि है। सिसोदिया ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों को भी अभियान का प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है। उनके अनुसार सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिलने से माता-पिता में भी संतुष्टि बढ़ी है। 20 सितंबर से होगा अभियान शुरू 20 सितंबर से शुरू होने वाला यह अभियान आप के लिए सरकार के कामों को बूथ और घर-घर स्तर तक पहुंचाने का माध्यम होगा। पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को इसमें सक्रिय भूमिका निभाने के लिए मैदान में उतारा जाएगा। इसके जरिये पार्टी 2027 के चुनाव से पहले संगठन और सरकार के कामों को लेकर जनता के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की कवायद करेगी।

PM Kisan 24th Installment: ₹2,000 पाने के लिए अभी निपटा लें ये 3 जरूरी काम

 नई दिल्ली आप भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं? अगर चाहते हैं कि ₹2,000 की ये किस्त बिना किसी रुकावट के आपके खाते में पहुंचे, तो सिर्फ तारीख का इंतजार न करें. इसके लिए अभी कुछ जरूरी चीजें चेक कर लें. ई-केवाईसी (e-KYC), जमीन का सत्यापन और आधार से बैंक अकाउंट की लिंकिंग में कोई कमी रह गई तो किस्त अटक सकती है।  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्तें आम तौर पर करीब चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं. 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की गई थी. ऐसे में अगली यानी 24वीं किस्त अक्टूबर में जारी होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, अभी सरकार की ओर से 24वीं किस्त जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।  इसलिए किसानों को आधिकारिक तारीख का इंतजार करने के साथ-साथ अपने रिकॉर्ड भी चेक कर लेने चाहिए. अगर योजना से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं है, तो किस्त के भुगतान में परेशानी हो सकती है।  पहला काम: ई-केवाईसी जरूर करा लें अगर आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, तो इसे जल्द पूरा कर लें. पीएम किसान योजना के लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी जरूरी है. ई-केवाईसी पूरी नहीं होने पर किस्त का भुगतान अटक सकता है. पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए ई-केवाईसी की स्थिति चेक कर सकते हैं. अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में परेशानी हो रही है, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की मदद भी ले सकते हैं।  दूसरा काम: लैंड वेरिफिकेशन चेक करें किस्त के लिए जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का सही होना भी जरूरी है. पीएम किसान के तहत लाभ उन्हीं किसान परिवारों को मिलता है जिनके नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड दर्ज है. इसलिए किसान यह जांच लें कि योजना में दर्ज जमीन की जानकारी सही है या नहीं और जमीन का सत्यापन पूरा हुआ है या नहीं।  अगर जमीन के रिकॉर्ड में नाम, खाता या दूसरी जानकारी को लेकर कोई गड़बड़ी है, तो उसे संबंधित राज्य के राजस्व विभाग या संबंधित अधिकारी के जरिए ठीक कराया जा सकता है. जमीन से जुड़ी जानकारी का सत्यापन पूरा नहीं होने पर भी किस्त प्रभावित हो सकती है।  तीसरा काम: आधार-बैंक खाता लिंकिंग पीएम किसान की रकम सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इसके लिए बैंक खाते का आधार से लिंक यानी आधार सीडेड होना जरूरी है. अगर आपका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है, तो किस्त के भुगतान में दिक्कत आ सकती है. किसान अपने बैंक में जाकर आधार लिंकिंग की स्थिति चेक करा सकते हैं. साथ ही यह भी देख लें कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में दर्ज बैंक खाते की जानकारी सही है या नहीं. खाते में नाम या दूसरे विवरण में गलती होने पर भी भुगतान अटक सकता है।  पैसा नहीं आया तो ऐसे चेक करें स्टेटस अगर 24वीं किस्त जारी होने के बाद आपके खाते में पैसा नहीं आता है, तो सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना लाभार्थी स्टेटस चेक करें. वहां भुगतान की स्थिति और बैंक से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है. किसान यह भी जांच सकते हैं कि उनका नाम बेनिफिशियरी लिस्ट (लाभार्थी सूची) में है या नहीं. अगर कोई जानकारी गलत है या जरूरी प्रक्रिया अधूरी है, तो उसे संबंधित विभाग के जरिए ठीक कराया जा सकता है।  क्या है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि? प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना यानी PM-KISAN फरवरी 2019 में शुरू की गई थी. इस योजना का उद्देश्य पात्र किसान परिवारों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना है. शुरुआत में यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ाकर खेती योग्य जमीन रखने वाले सभी पात्र किसान परिवारों तक किया गया. इसके तहत पात्र किसान परिवार को सालाना ₹6,000 दिए जाते हैं. यह रकम ₹2,000 की तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान परिवार के नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड होना चाहिए और लाभार्थी का सत्यापन राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की ओर से किया जाता है।  कुछ श्रेणियों के लोगों को योजना से बाहर रखा गया है, जैसे कुछ संवैधानिक पदों पर रहने वाले व्यक्ति, सरकारी कर्मचारी और आयकर देने वाले लोग. लाभ लेने के लिए आधार से जुड़ी जानकारी, बैंक खाता, जमीन का रिकॉर्ड और ई-केवाईसी जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. 20 जून 2026 को जारी 23वीं किस्त में 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को करीब ₹18,880 करोड़ की राशि दी गई थी. योजना की शुरुआत से 23 किस्तों में अब तक ₹4.46 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम किसानों को दी जा चुकी है।   

ऑस्कर 2027 में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी ये मराठी थ्रिलर फिल्म, 8.9 रेटिंग ने जीता दिल

मुंबई  फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने उस फिल्म के नाम का ऐलान कर दिया है, जिसे ऑस्कर 2027 के लिए भारत की ओर से भेजा जाएगा। इस बार भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनने की रेस में देशभर की कुल 33 फिल्में शामिल थीं। इन फिल्मों में से FFI ने IMDb पर 8.9 रेटिंग वाली मराठी थ्रिलर फिल्म को चुना है। क्या है इस फिल्म का नाम? शुक्रवार को फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने घोषणा की कि मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधळ’ ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि होगी। संतोष डावखर के निर्देशन में बनी यह फिल्म 99वें अकादमी पुरस्कार (Oscars) में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। क्या है इस फिल्म की कहानी? फिल्म की कहानी एक नवविवाहित जोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है और पूरी कहानी एक ही रात में होने वाले पारंपरिक महाराष्ट्रीयन ‘गोंधळ’ अनुष्ठान के दौरान सामने आती है। शुरुआत में यह रात एक सामान्य धार्मिक आयोजन जैसी लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, रिश्तों से जुड़े पुराने राज, प्यार, जुनून और सत्ता की लड़ाई सामने आने लगती है। गोंधल क्या होता है? महाराष्ट्र में गोंधळ एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान है, जो आमतौर पर देवी-देवताओं की आराधना और उनका आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है। इसमें विशेष तरह के गीत, वाद्ययंत्र, कथाएं और पूजा की रस्में शामिल होती हैं। कई परिवारों में शादी या किसी अन्य शुभ अवसर पर भी गोंधळ कराया जाता है। फिल्म इसी धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को अपनी कहानी का अहम हिस्सा बनाती है। फिल्म की स्टार कास्ट फिल्म के लेखक और निर्देशक संतोष डावखर हैं। इसमें इशिता देशमुख ने सुमन, योगेश सोहनी ने आनंद, किशोर कदम ने भिवाबा, निषाद भोईर ने सर्जेराव और सुरेश विश्वकर्मा ने पाटिल का किरदार निभाया है। फिल्म का संगीत दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने दिया है। मिल चुके हैं कई सारे अवॉर्ड्स ‘गोंधळ’ इससे पहले कई प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में अपनी छाप छोड़ चुकी है। 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) 2025 में संतोष डावखर को फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर का ‘रजत मयूर’ पुरस्कार मिला था। इसके अलावा फिल्म ने बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में FIPRESCI पुरस्कार भी जीता है। पुणे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (PIFF) में भी फिल्म को कई प्रमुख सम्मान मिल चुके हैं। ओटीटी पर देख सकते हैं यह फिल्म? ‘गोंधळ’ साल 2025 में रिलीज हुई थी, लेकिन अभी तक इसे किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं किया गया है। 33 फिल्मों के बीच से हुआ चयन दिलचस्प बात यह है कि ऑस्कर 2027 में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनने की रेस में कुल 33 फिल्में शामिल थीं। इनमें 14 हिंदी फिल्में थीं। इसके अलावा मराठी, तेलुगू और गुजराती की 4-4 फिल्में, तमिल की 3 फिल्में, मलयालम और नागामीज की 1-1 फिल्म और एक साइलेंट (मूक) फिल्म भी इस रेस में शामिल थी। इन सभी को पीछे छोड़ते हुए ‘गोंधळ’ को भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया है।

प्राथमिक शिक्षा से विदेश पढ़ाई तक आर्थिक मदद, 2.24 करोड़ SC छात्रों को मिला छात्रवृत्ति का लाभ

पिछले 12 वर्षों में 2.24 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित प्राथमिक शिक्षा से विदेश अध्ययन तक विद्यार्थियों को मिल रहा आर्थिक सहायता का संबल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च, तकनीकी, व्यावसायिक एवं विदेश अध्ययन तक विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में वर्ष 2014-15 से वर्ष 2025-26 तक अनुसूचित जाति के कुल 2 करोड़ 24 लाख 59 हजार 478 विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। छात्रवृत्ति की राशि डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। राज्य छात्रवृत्ति से 1 करोड़ 40 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला लाभ अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही शिक्षा से जोड़ने और उनकी शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने के लिए राज्य छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2014-15 से अब तक कक्षा पहली से आठवीं तक के 1 करोड़ 40 लाख 41 हजार 131 विद्यार्थियों को 466 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत कक्षा पहली से पांचवीं तक की बालिकाओं को 10 माह की अवधि के लिए 250 रुपये प्रतिमाह, कक्षा छठवीं से आठवीं तक के बालकों को 200 रुपये प्रतिमाह और बालिकाओं को 600 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। यह राशि शत-प्रतिशत राज्य शासन द्वारा वहन की जाती है। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति से 35 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला शैक्षणिक संबल कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों की शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2014-15 से अब तक योजना के अंतर्गत 35 लाख 73 हजार 613 विद्यार्थियों को 993 करोड़ 71 लाख रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई है। योजना के अंतर्गत 2.50 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले पालकों के बालकों को 600 रुपये और बालिकाओं को 1,200 रुपये 10 माह के लिए प्रदान किए जाते हैं। वहीं 2.50 लाख रुपये तक की वार्षिक आय सीमा वाले परिवारों के छात्रावासी विद्यार्थियों को 7 हजार रुपये तथा गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 3 हजार 500 रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। कक्षा 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को 620 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तथा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति समूह-4 संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत अब तक 21 लाख 11 हजार 249 छात्र-छात्राओं को 620 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। केंद्र एवं राज्य शासन के 60:40 अनुपात में संचालित इस योजना के अंतर्गत कक्षा 11वीं-12वीं के गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 2 हजार 500 रुपये और छात्रावासी विद्यार्थियों को 4 हजार रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जा रहा है। उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए 5 हजार 708 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों की उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत महाविद्यालयीन एवं विश्वविद्यालयीन स्तर के 27 लाख 33 हजार 485 छात्र-छात्राओं को 5 हजार 708 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति एवं शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया गया है। समूह-1 में एमबीबीएस, इंजीनियरिंग, एमडी, एमएस, एमबीए, एमसीए, एमफिल, पीएचडी आदि पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क के साथ गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 7 हजार रुपये तथा छात्रावासी विद्यार्थियों को 13 हजार 500 रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। समूह-2 में बी.फार्मा, नर्सिंग, होटल मैनेजमेंट, एमएससी, एमकॉम, एमएड आदि पाठ्यक्रमों के लिए गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 6 हजार 500 रुपये एवं छात्रावासी विद्यार्थियों को 9 हजार 500 रुपये तथा समूह-3 में बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड आदि पाठ्यक्रमों के लिए गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 3 हजार रुपये एवं छात्रावासी विद्यार्थियों को 6 हजार रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। शासकीय शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए शुल्क भुगतान के संबंध में आय सीमा का बंधन समाप्त कर दिया गया है। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति से विद्यार्थियों को मिल रहे उच्च शिक्षा के वैश्विक अवसर अनुसूचित जाति वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ‘विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण करने हेतु छात्रवृत्ति योजना’ संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 50 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। पात्र विद्यार्थियों के पालकों की वार्षिक आय सीमा 8 लाख रुपये तक निर्धारित है। योजना के माध्यम से अब तक 150 से अधिक शोधार्थी एवं विद्यार्थी अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, रूस, स्विट्जरलैंड, पोलैंड, चीन, मलेशिया और सिंगापुर सहित विभिन्न देशों में अध्ययन कर चुके हैं। योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग, प्योर एवं एप्लाइड साइंस, एग्रीकल्चर, मेडिकल, मैनेजमेंट, इंटरनेशनल कॉमर्स, लॉ, फॉरेस्ट्री एवं मानविकी विषयों में अध्ययन के लिए शिक्षण शुल्क, मेडिकल इंश्योरेंस, वीजा शुल्क, निर्वाह भत्ता एवं हवाई यात्रा का किराया राज्य शासन द्वारा वहन किया जाता है।  

पैरासिटामोल 500mg और टेल्मिसार्टन 40mg क्वालिटी टेस्ट में फेल, अस्पतालों ने रोका इस्तेमाल

नागपुर नागपुर में महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की क्वालिटी टेस्ट में दो आम इस्तेमाल होने वाली दवाएं पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की एक दवा फेल हो गई हैं. इसके बाद सरकारी अस्पतालों ने इनको मरीजों को देने पर रोक लगा दी है औरस्टॉक को वापस मंगा लिया है. ये दवाएं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को सप्लाई की गई थीं. इस घटना ने दवाओं की क्वालिटी और उन्हें लेने से पहले टैबलेट की जांच करने की अहमियत को लेकर चिंता बढ़ा दी है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, FDA ने रूटीन टेस्टिंग के दौरान सैंपल लिए थे. टेस्ट के नतीजों के बाद प्रभावित स्टॉक का डिस्ट्रीब्यूशन रोकने और उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए. इन दवाओं में पैरासिटामोल 500 mg और टेल्मिसार्टन 40 mg शामिल थीं, जिसका इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दवाएं इंदौर की एक दवा कंपनी ने बनाई थी।  1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल को FDA से सूचना मिलने के बाद लगभग 1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं. ये टैबलेट जुलाई में सप्लाई की गई थीं और टेस्ट के नतीजे मिलने के बाद अस्पताल ने इनका मरीजों को देने पर रोक लगा दी है. जिन पैरासिटामोल टैबलेट की बात हो रही है, उन्हें 'Parasev 500' के नाम से बेचा गया था और वे बैच नंबर PTTC-108 की थीं. सैंपल के ज़रूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा न उतरने के बाद, एहतियात के तौर पर बाकी स्टॉक वापस मंगा लिया गया. दोनों अस्पतालों ने कुल मिलाकर एक लाख से ज्यादा टैबलेट खरीदी थीं, जबकि अकेले GMCH के पास वापस मंगाए जाने के समय प्रभावित स्टॉक में से लगभग 25,000 टैबलेट मौजूद थीं।  दूसरी दवा टेल्मिसार्टन 40 mg थी, जो आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दी जाती है. प्रभावित बैच की पहचान CHPLT 416 के तौर पर की गई. टैबलेट पर दिखने वाले दागों के अलावा, यह दवा डिसोल्यूशन टेस्ट में भी फेल हो गई. यह जरूरी है क्योंकि दवा के सही ढंग से काम करने के लिए टैबलेट का अपना एक्टिव इंग्रीडिएंट ठीक से रिलीज करना ज़रूरी होता है. अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि वे इसका वितरण रोक दें और वार्ड व फार्मेसी से उपलब्ध स्टॉक वापस मंगा लें.इन दवाओं को खराब क्लालिटी का बताया गया है, हालांकि ये नकली नहीं है।  घटिया और नकली दवा में होता है अंतर घटिया दवा एक असली दवा होती है जो जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरी नहीं उतरती. इसमें दवा के रूप-रंग, असर, शुद्धता, घुलने की क्षमता, स्टेबिलिटी या क्वालिटी से जुड़े दूसरे पैरामीटर्स में कमी हो सकती है,  वहीं, नकली दवा में गलत इंग्रीडिएंट हो सकता है, एक्टिव इंग्रीडिएंट बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकता है, या फिर उसकी पहचान या बनाने वाली कंपनी के बारे में गलत जानकारी हो सकती है। 

भारत-पाक हॉकी मैच के लिए पाकिस्तान ने मांगा न्यूट्रल वेन्यू, भारत ने दिया साफ जवाब

चंडीगढ़  पंजाब में होने वाली एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी को लेकर भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ (पीएचएफ) ने सुरक्षा और दोनों देशों के बीच मौजूदा संवेदनशील परिस्थितियों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट को तटस्थ स्थान पर कराने की मांग की है। पाकिस्तान की ओर से एशियाई हॉकी महासंघ (एएचएफ) के समक्ष यह मांग रखी गई है कि या तो पूरा टूर्नामेंट भारत से बाहर कराया जाए अथवा पाकिस्तान के मुकाबले किसी न्यूट्रल वेन्यू पर करवाए जाएं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ के अंतरिम अध्यक्ष मोहिउद्दीन अहमद वानी ने कहा है कि यह कदम खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा, सम्मान और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि पाकिस्तान ने टूर्नामेंट से हटने की बात नहीं कही है और भारत समेत अन्य टीमों के खिलाफ खेलने की प्रतिबद्धता जताई है। हॉकी इंडिया ने ठुकराई न्यूट्रल वेन्यू की मांग पाकिस्तान की मांग के बाद हॉकी इंडिया ने फिलहाल साफ कर दिया है कि टूर्नामेंट के आयोजन स्थल में कोई बदलाव नहीं होगा। हॉकी इंडिया के महासचिव और एएचएफ के उपाध्यक्ष भोला नाथ सिंह ने कहा कि यदि पाकिस्तान को एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में खेलना है तो उसे भारत आना होगा। जानकारी अनुसार पाकिस्तान के नहीं आने की स्थिति में ओमान या बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर शामिल किया जा सकता है। 1 नवंबर को होना है मुकाबला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन पंजाब में 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होना है। जालंधर में 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक उद्घाटन समारोह और लीग चरण के मुकाबले होंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मोहाली में खेले जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला 1 नवंबर को जालंधर में होना है। पंजाब में लंबे समय बाद भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को लेकर हॉकी प्रेमियों में खासा उत्साह था। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से न्यूट्रल वेन्यू की मांग आने के बाद इस मुकाबले के आयोजन को लेकर स्थिति फिर असमंजस में पहुंच गई है। चार और देश भी उतरेंगे मैदान में टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान के अलावा चीन, जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया की टीमें प्रस्तावित हैं। पाकिस्तान के नहीं खेलने की स्थिति में ओमान और बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर रखा गया है। भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से द्विपक्षीय खेल संबंधों को लेकर अलग स्थिति रही है, हालांकि दोनों देशों की टीमें बहुदेशीय प्रतियोगिताओं में आमने-सामने आती रही हैं। अब सबकी नजर एशियाई हॉकी महासंघ के अगले फैसले पर है कि पाकिस्तान की न्यूट्रल वेन्यू की मांग पर क्या निर्णय होता है और क्या 1 नवंबर को जालंधर में भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को मिलेगा।

शिक्षा में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को मिला बड़ा सहारा, ₹13 हजार करोड़ से ज्यादा राशि स्वीकृत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णयों के फलस्वरूप प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के हर स्तर पर अभूतपूर्व प्रोत्साहन और वित्तीय सहयोग मिल रहा है। पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा से विदेश अध्ययन के लिये छात्रवृत्ति, नि:शुल्क कोचिंग और प्रशिक्षण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में पिछले 15 वर्षों में 13 हजार 156 करोड़ 51 लाख से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई है। योजनाओं से लगभग 5 करोड़ 34 लाख 39 हजार 54 से अधिक विद्यार्थी लाभांवित हुए। प्री एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से शिक्षा का सशक्तिकरण स्कूली स्तर पर ड्रॉप-आउट दर को समाप्त करने और बच्चों की पढ़ाई निरंतर बनाए रखने के लिए संचालित प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक पिछड़ा वर्ग के 4 करोड़ 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों को ₹ 2,535 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा में उत्कृष्ट अंक लाने वाले होनहारों को 'प्रावीण्य (मेधावी) छात्रवृत्ति योजना' के तहत पिछड़ा वर्ग के 2,185 विद्यार्थियों को 1 करोड़ 69 लाख रूपये की राशि दी गई है। उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा में कॉलेज स्तर के छात्रों को राहत देते हुए 'पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना' के तहत वर्ष 2012-13 से 2026-27 के दौरान इसी वर्ग के 84.22 लाख विद्यार्थियों को ₹10,467 करोड़ की राशि से संबल प्रदान किया गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग, प्रोत्साहन और कौशल विकास पिछड़ा वर्ग के युवाओं को प्रशासनिक और प्रतियोगी सेवाओं में सफलता दिलाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2021-22 में प्रारंभ की गई 'सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना' के तहत 11,174 शिक्षित युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 23 करोड़ 9 लाख रूपये के व्यय से निशुल्क कोचिंग दी गई है। इसी प्रकार संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले 3,354 पिछड़ा वर्ग अभ्यर्थियों को 'सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना' के तहत 7 करोड़ 64 लाख रूपये की राशि प्रदान की गई। इसके अलावा वर्ष 2026-27 से युवाओं के सर्वांगीण प्रशिक्षण के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' के अंतर्गत रू 4 करोड़ 83 लाख राशि का व्यय कर 3,827 युवाओं को सफलता पूर्वक प्रशिक्षित किया गया है। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' से वैश्विक पटल पर साकार होते सपने 'पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' में प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वर्ष 2008-09 से लेकर अब तक पिछड़ा वर्ग के कुल 341 विद्यार्थियों को 122 करोड़ 9 लाख रूपये का वित्तीय अनुदान देकर विदेशों में पढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।  

भरतपुर और डीग के 25 निकायों में BJP का निर्विरोध कब्जा, प्रमुख पदों पर प्रत्याशी निर्वाचित

जयपुर  राजस्थान के निकाय चुनाव में पार्षदों के नतीजे आने के बाद अब मेयर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सियों पर तस्वीर तेजी से साफ हो रही है. कई जगह बहुमत का गणित काम कर रहा है तो कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों के रुख ने पूरा खेल बदल दिया है. इसी बीच बीजेपी ने 25 निकायों में अपने चेयरमैन, सभापति और अध्यक्ष निर्विरोध बनवाने में सफलता हासिल की है. इनमें भरतपुर और भीलवाड़ा के नगर निगम भी शामिल हैं।  इन दोनों जगहों का सियासी महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है, जबकि भीलवाड़ा में बीजेपी ने निकाय चुनाव में साफ बहुमत हासिल किया था. भरतपुर में हालांकि कहानी थोड़ी अलग रही. यहां नगर निगम के चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस से ज्यादा सीटें निर्दलीयों ने जीती थीं. इसके बावजूद मेयर चुनाव के लिए खड़ी निर्दलीय प्रत्याशी ने अपना नाम वापस ले लिया और बीजेपी प्रत्याशी अनुराधा सिंह के लिए निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।  भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा, फिर भी बीजेपी का मेयर भरतपुर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं. हालिया निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा 36 वार्डों में जीत दर्ज की. बीजेपी के 20, कांग्रेस के 7, बीएसपी के एक और आरएलपी के एक पार्षद चुनाव जीते थे. यानी संख्या के हिसाब से निर्दलीय सबसे बड़ा समूह बनकर सामने आए थे।  शुरुआत में मेयर पद के लिए निर्दलीय पार्षदों की तरफ थी निगाहें मेयर पद के लिए शुरुआत में मुकाबला बनने की स्थिति थी. बीजेपी ने अनुराधा सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि वार्ड नंबर 17 से निर्दलीय पार्षद विचित्रा सिंह ने भी नामांकन दाखिल किया था. उस समय यह सवाल था कि सबसे ज्यादा निर्दलीय पार्षदों वाले भरतपुर में आखिर मेयर की कुर्सी किसके पास जाएगी. लेकिन 18 सितंबर को तस्वीर बदल गई. निर्दलीय विचित्रा सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके बाद बीजेपी की अनुराधा सिंह के निर्विरोध महापौर चुने जाने का रास्ता साफ हो गया।  सीएम के गृह जिले में बीजेपी के लिए अहम तस्वीर भरतपुर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला माना जाता है. ऐसे में यहां नगर निगम की सत्ता का समीकरण बीजेपी के लिए खास महत्व रखता है. चुनाव परिणाम के बाद हालांकि यहां बीजेपी के सामने सीधा बहुमत नहीं था. निर्दलीयों की संख्या सबसे ज्यादा होने के कारण मेयर चुनाव में उनका समर्थन जरूरी हो गया था. अब निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने के बाद मुकाबला ही खत्म हो गया. बीजेपी प्रत्याशी अनुराधा सिंह का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया।  भीलवाड़ा में भी बीजेपी की जसवंत कंवर निर्विरोध भीलवाड़ा में स्थिति भरतपुर से अलग थी. यहां बीजेपी के पास पहले से ही मजबूत संख्याबल था. 70 वार्ड वाले नगर निगम में बीजेपी ने 45 सीटें जीतीं और स्पष्ट बहुमत हासिल किया. कांग्रेस के खाते में 10 और निर्दलीयों के खाते में 15 सीटें गईं. बीजेपी ने वार्ड नंबर 9 से जीतीं जसवंत कंवर को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया. उन्होंने नामांकन दाखिल किया. शुरुआत में निर्दलीय संतोष कंवर भी मैदान में थीं, लेकिन उन्होंने 17 सितंबर को अपना नाम वापस ले लिया. कांग्रेस ने भी मेयर पद के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा. इसके बाद जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुन ली गईं।  25 निकायों में निर्विरोध अध्यक्ष बनाने का दावा बीजेपी की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक पार्टी ने राजस्थान के 25 निकायों में अपने चेयरमैन, सभापति और अध्यक्ष निर्विरोध बनवाने में सफलता हासिल की है. इसका मतलब यह है कि इन निकायों में मतदान से पहले ही अध्यक्ष पद की तस्वीर साफ हो गई. राजस्थान के 309 शहरी निकायों के चुनाव में बीजेपी 148 निकायों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी, जबकि कांग्रेस 104 निकायों में आगे रही थी।  भरतपुर में बहुमत का गणित नहीं, समर्थन का खेल चला भरतपुर का मामला इस पूरे चुनाव की अलग तस्वीर दिखाता है. यहां बीजेपी के पास 20 पार्षद थे, जबकि निर्दलीयों की संख्या 36 थी. कांग्रेस सिर्फ 7 सीटों पर थी. ऐसे में किसी एक पार्टी के पास अपने दम पर मेयर बनाने की स्थिति नहीं थी. लेकिन मेयर पद पर मुकाबला आखिर मतदान तक पहुंचा ही नहीं. निर्दलीय उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद बीजेपी उम्मीदवार के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा. इस तरह यहां संख्या का खेल समर्थन के खेल में बदल गया।  21 सितंबर को बाकी निकायों की तस्वीर होगी साफ भरतपुर और भीलवाड़ा जैसे नगर निगमों में मतदान से पहले ही तस्वीर साफ होने से पार्टी को राहत मिली है. लेकिन राजस्थान के बाकी निकायों में कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. कहीं बहुमत है, कहीं बागी उम्मीदवार हैं और कहीं निर्दलीय पार्षद पूरे समीकरण की चाबी बने हुए हैं. ऐसे में 21 सितंबर का दिन कई नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के लिए सबसे अहम रहने वाला है। 

भोपाल से इंदौर तक हजारों लोग बनाएंगे ह्यूमन रंगोली, ड्रोन से दर्ज होगा भव्य दृश्य

मध्यप्रदेश में बनेगी ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ की विराट तस्वीर  भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में हजारों नागरिक बनाएंगे ह्यूमन रंगोली ड्रोन कैमरे से दर्ज होगा जनभागीदारी का भव्य दृश्य भोपाल सेवा, सहभागिता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान के अवसर पर 9 और 10 अक्टूबर को विशेष आयोजन किया जाएगा। ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ थीम पर प्रदेश के छह जिलों में बड़े मैदानों पर विशाल ह्यूमन रंगोली बनाई जाएगी। इस अनूठे आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता होगी और मानव रंगोली के माध्यम से सेवा, राष्ट्रभावना, स्थानीय संस्कृति तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जाएगा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में जनभागीदारी को प्रमुख आधार बनाया गया है। हजारों नागरिक एक निर्धारित स्वरूप में एक साथ खड़े होकर ऐसी जीवंत मानव रंगोली का निर्माण करेंगे, जिसे ऊपर से देखने पर एक विशाल चित्र और संदेश के रूप में देखा जा सकेगा। आयोजन के दौरान ड्रोन कैमरों के माध्यम से इस पूरे दृश्य को रिकॉर्ड किया जाएगा। सेवा से राष्ट्र निर्माण तक पहुंचेगा संदेश ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम का उद्देश्य सेवा को केवल एक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है। आयोजन में स्थानीय कला और लोक-संस्कृति को भी स्थान दिया जाएगा। इसके साथ विकसित भारत के संकल्प और देश की प्रगति का संदेश भी मानव रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। स्थानीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का संगम आयोजन में मध्यप्रदेश की स्थानीय कला एवं लोक-संस्कृति को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की योजना है। विशाल मानव रंगोली के निर्माण के दौरान ड्रोन शूटिंग के जरिए ऊपर से पूरे आयोजन की तस्वीर सामने आएगी। इससे अलग-अलग जिलों में होने वाली जनभागीदारी का व्यापक दृश्य तैयार होगा और सेवा संकल्प का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा। ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम के लिए राज्य स्तर पर नोडल अनुसूचित जाति मंत्री श्री नागर सिंह चौहान रहेंगे। राज्य प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जी.वी. रश्मि को दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि जनसंपर्क विभाग और संबंधित छह जिलों का जिला प्रशासन आयोजन में सहयोगी भूमिका निभाएगा।