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उज्जैन महाकाल मंदिर का 10.27 करोड़ रुपये से होगा जीर्णोद्धार, शिखर की मरम्मत पर फोकस

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर से लेकर नागचंद्रेश्वर मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर के क्रैक, टूटी जालियों को चूना, गुड़ और लाख से सुधारा जाएगा। मंदिर परिसर सहित अन्य मंदिरों का जीर्णोद्धार 10.27 करोड़ रुपए में किया जाएगा। केंद्रीय भवन शोध संस्थान (सीबीआरआई) के मार्गदर्शन में यह काम उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) करेगा। इसके लिए मचान बना दिया है। यूडीए के इंजीनियर के अनुसार यह काम महाशिवरात्रि से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। सीबीआरआई की टीम हर माह में दो बार जीर्णोद्धार की मॉनिटरिंग करने आएगी। इन मंदिरों का भी करेंगे जीर्णोद्धार : महाकालेश्वर मंदिर परिसर के मंदिरों में वृद्धकालेश्वर मंदिर, अनादि कल्पेश्वर मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर, कालेश्वर मंदिर, चिंतामणि गणेश मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोवर्धन मंदिर, केदारेश्वर मंदिर, भीमाशंकर मंदिर, पाताल महादेव मंदिर, त्र्यंबकेश्वर मंदिर, कोटि तीर्थ कुंड का जीर्णोद्धार किया जाएगा। मूल संरचना को नुकसान पहुंचाए बिना करेंगे काम जीर्णोद्धार के अंतर्गत मूल प्राचीन संरचना को नुकसान पहुंचाए बिना ठीक वैसा ही काम करवाया जाएगा। यूडीए के इंजीनियर शैलेंद्र जैन के अनुसार इसके लिए चूना, गुड़, लाख का उपयोग किया जाएगा। जो जैसा है, उसे वैसा ही रखा जाएगा। शिखर से लेकर भू-तल तक जहां भी क्रैक हो गए हैं, जालियां टूट गई हैं, खंभे को नुकसान पहुंचा है, पानी रिसता है तो उसे उसी विधि से सुधारा जाएगा, जैसा मंदिर के निर्माण में किया गया था। इसमें सीमेंट, सरिए का उपयोग नहीं किया जाएगा। देसी चीजों का कमाल श्रीमहाकालेश्वर मंदिर से रामघाट जाने को पुरातन स्वरूप में बने प्राचीन महाकाल द्वार का जीर्णोंद्धार चंदेरी और ललितपुर के कारीगर चूना, गुड़, मैथी, गूगल और उड़द के पानी से कर रहे हैं। क्योंकि उनका कहना है पुरात्व के काम में सीमेंट का उपयोग प्रतिबंधित रहता है। सीमेंट से ज्यादा चूने की गई चुनाई ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद रहती है। सीमेंट की मजूबती 80 वर्षो तक रहती है लेकिन चूना, गुड़, मैथी, गूगल और उड़द के पानी की तकनीक से 1000 वर्ष तक मजबूती बनी रहेगी। 2.12 करोड़ में होगा काम महाकाल थाने के पास बना ये गेट महाकाल मंदिर से करीब 100 मीटर दूर है. इस द्वार के रास्ते रामघाट सीधे पहुंचा जा सकता है. पिछले कुछ वर्षों से यह रास्ता द्वार जीर्णशीर्ण होने से बंद था. उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी ने महाकाल मंदिर परिसर विस्तार परियोजना शुरू की है. इस पर कुल 700 करोड़ रुपये की लागत आएगी. गेट का जीर्णोद्धार भी इसी के अंतर्गत हो रहा है. इस साल के अंत तक काम पूरा हो जाएगा. प्रोजेक्ट की लागत 2.12 करोड़ रुपये है।  ये जोड़ एक हजार साल नहीं टूटेगा गेट का जीर्णोद्धार करने चंदेरी से कारीगर आए हैं. ऐसे ही एक मिस्त्री अनोखीलाल ने बताया कि पुरातत्व के काम में सीमेंट के उपयोग की मनाही रहती है. क्योंकि सीमेंट से किया गया काम ज्यादा से ज्यादा 100 साल तक ही टिकता है. लेकिन चूने से हुआ काम 1000 वर्ष से ज्यादा रहती है. मैं भी 10 साल से यही काम कर रहा हूं. ग्वालियर के मोती महल, गुजरी महल, चाचोड़ा, कटनी, विजय राघौगढ़ के कई किले-मंदिरों सहित राजस्थान में भी कई जगह काम किया है. अब महाकाल मंदिर के द्वार का जीर्णोंद्वार का काम करना किस्मत की बात है. अन्य कारीगर रामगोपाल अहिरवार और ललितपुर से आए वृंदावन अहिरवार ने बताया कि छत, दीवारों को अधिक मजबूती देने के लिए चूने का जो चमत्कारी मटेरियल तैयार होता है, उसमें गुड़, मैथी, गूगल, बिल्व पत्र के फल, उड़द का पानी, ईट का चूरा, रेत, चुना मिलाया जाता है।  चुनाई के लिए मटेरियल तैयार होने में 15 से 17 दिन का वक्त लगता है. इस मटेरियल से तैयार इमारत सालों-साल मजबूती के साथ टिकी रहती है. इस मटेरियल से तैयार भवन पूरी तरह वातानुकुलित और पर्यावरण के अनुकूल हैं. सीमेंट से बने मकान की तुलना में इसका तापमान चार से पांच डिग्री कम रहता है। 

EPS-95 पेंशन में बढ़ोतरी की उम्मीद, अगले महीने EPFO की बैठक में हो सकता है फैसला

नई दिल्‍ली देश के लाखों ईपीएस पेशनर्स की एक बड़ी मांग अगले महीने पूरी हो सकती है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) न्यूनतम मासिक पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये कर सकता है. बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की 240वीं बैठक 19 नवंबर को गुजरात के गिर में हो सकती है. इस बैठक में कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन बढ़ाने पर विचार हो सकता है।  केंद्र सरकार ने सितंबर 2014 में ईपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह निर्धारित की थी. पिछले एक दशक में देश में महंगाई कई गुना बढ़ चुका है. इसी वजह से पेंशनभोगी संगठन और ट्रेड यूनियन लगातार न्‍यूनतम पेंशन में इजाफा करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि 1,000 रुपये की मामूली रकम आज के दौर में दवाइयों और बुनियादी जरूरतों के लिए नाकाफी है. यूनियनें मासिक न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपये करने के साथ-साथ इस पर महंगाई भत्ता (DA) जोड़ने की भी मांग कर रही हैं।  न्‍यूनतम वेतन में हो चुका है इजाफा इस बार न्यूनतम पेंशन में इजाफे की संभावना इसलिए भी मजबूत है, क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में ईपीएफओ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये मासिक कर दिया था. कुछ समय पहले ही केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने भी संकेत दिए थे कि सरकार नियमों की समीक्षा कर पेंशन बढ़ाने की मांग पर सकारात्मक रुख अपना रही है।  19 नवंबर को होगी बैठक 19 नंवबर को होने वाली यह बैठक इसलिए भी खास मानी है क्योंकि दिल्ली के ईस्ट किदवई नगर स्थित ईपीएफओ मुख्यालय से बाहर निकलकर बोर्ड कई वर्षों बाद किसी अन्य राज्य में बैठक करने जा रहा है. अब सबकी निगाहें 19 नवंबर की इसी निर्णायक बैठक पर टिकी हैं। 

सोयाबीन और SMP पाउडर से बनाया जा रहा था पनीर, दिल्ली-NCR तक फैला नेटवर्क

 अलवर राजस्थान के मेवात इलाके में स्वास्थ्य और कानून के साथ खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस ने एक बहुत बड़ा एक्शन लिया है. डीग जिले में पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों ने दो अलग-अलग जगहों पर छापेमारी करते हुए 1800 किलो मिलावटी और जहरीला पनीर जप्त किया है. हैरान करने वाली बात यह है कि यह नकली पनीर असली दूध के बजाय सोयाबीन, पामोलीन ऑयल, एसएमपी (स्कॉम्ड मिल्क पाउडर) और मशीन क्लीन पाउडर को मिलाकर तैयार किया जा रहा था, जिसे तुरंत मौके पर नष्ट करवा दिया गया।  पुलिस अधीक्षक (SP) शरण गोपीनाथ के निर्देशन में यह पूरी कार्रवाई अंजाम दी गई. पुलिस को सूचना मिली थी कि मेवात क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिलावटी पनीर तैयार कर बाहर राज्यों में भेजा जा रहा है।  गांव जाजमका में कार्रवाई पुलिस ने शरीफ के मकान में संचालित मकसूद की डेयरी पर छापा मारा. यहां सोयाबीन और पामोलीन से नकली पनीर बनाया जा रहा था. पुलिस को देखकर कई लोग भाग खड़े हुए, लेकिन मौके से मुनीम साहिल पुत्र इस्लाम, निवासी गढ़ी झील पट्टी को गिरफ्तार कर लिया गया. इस प्लांट से 1600 किलो मिलावटी पनीर जप्त कर मौके पर ही नष्ट कराया गया।  मांची के जंगल में कार्रवाई दूसरी कार्रवाई मांची के जंगल में अयूब और मुफीद की डेयरी पर की गई, जहां पिकअप गाड़ी और टीनशेड के प्लांट में पनीर तैयार हो रहा था. पुलिस ने आरोपी अल्ली उर्फ अलीजान को दबोच लिया. यहां से 200 किलो पनीर, 18 कट्टे एसएमपी पाउडर, रिफाइंड पामोलीन ऑयल, सोयाबीन ऑयल और मशीन क्लीन पाउडर के साथ पिकअप वाहन को जप्त किया गया।  दिल्ली-NCR, यूपी और हरियाणा में होती थी सप्लाई पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया कि यह जहरीला पनीर हर दो-तीन दिन में तैयार कर दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहरों के बाजारों में बेचा जाता था।  स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यह सामान्य पनीर नहीं बल्कि एक तरह का जहर है, जिसके सेवन से लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।  फिलहाल पुलिस ने दोनों कारखानों को सील कर दिया है और फरार चल रहे मुख्य सरगनाओं मकसूद, साद, अयूब, मुफीद और उनके साथियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। 

यूपी PET परीक्षा को लेकर अलर्ट, सुरक्षा से ट्रैफिक तक पुख्ता इंतजाम के आदेश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (UP PET) 2026 को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. राज्य के सीएम योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं. परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने की उम्मीद है. सुरक्षा, यातायात और परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परीक्षा के दौरान किसी भी अभ्यर्थी को केंद्र तक पहुंचने में परेशानी न हो और परीक्षा सुचारु तरीके से संपन्न कराई जाए।  25 और 30 अक्टूबर के साथ 1 नवंबर को होगी परीक्षा UP PET 2026 का आयोजन आज 25 अक्टूबर, 30 अक्टूबर और 1 नवंबर को किया जाएगा. परीक्षा के लिए 35,41,297 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है. परीक्षा का आयोजन दो शिफ्ट में किया जाएगा. पहली शिफ्ट सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी. परीक्षा प्रदेश के 60 जिलों में 1,372 केंद्रों पर आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है।  सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर खास जोर इस दौरान छात्रों को किसी तरह की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए परीक्षा केंद्रों के साथ रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और प्रमुख मार्गों पर भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में यातायात सुचारु रखने और जरूरत के मुताबिक पुलिस बल तैनात करने को कहा गया है. परीक्षा केंद्रों और कोषागारों में लगे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया है।  दूसरे जिलों से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी इंतजाम परीक्षा देने के लिए दूसरे जिलों से आने वाले उम्मीदवारों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बसों और ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर है. रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और अन्य प्रमुख स्थानों पर जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं. महिला अभ्यर्थियों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा. प्रशासन को निर्देश है कि परीक्षा के दौरान सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाए। 

LAC पर स्थिति नियंत्रण में, अरुणाचल के सीमावर्ती इलाकों में सेना की लगातार मौजूदगी

 नई दिल्ली अरुणाचल प्रदेश के ताकसिंग सर्कल में स्थित असफिला और लोंगजू इलाके, भारत और चीन के बीच 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) को लेकर अलग-अलग धारणाओं के कारण संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन डिफेंस सोर्सेज के मुताबिक, जमीनी स्तर पर स्थिति स्थिर है और इसे सख्ती से संभाला जा रहा है।  ऐतिहासिक रूप से विवादित माने जाने वाले इन इलाकों में समय-समय पर तनाव की स्थिति बनती है क्योंकि दोनों तरफ से नियमित गश्त के दौरान अक्सर आमना-सामना हो जाता है. सुरक्षा माहौल में आमना-सामना होना एक आम बात हो गई हैं।  सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के सैनिकों के बीच किसी भी हिंसक झड़प की खबर नहीं है, जो यह दिखाता है कि ग्राउंड कमांडर्स पूरी तरह संयम और ऑपरेशनल कंट्रोल बनाए हुए हैं।  फेस-ऑफ की स्थितियों को फ्लैग मीटिंग्स और हॉटलाइन कम्युनिकेशन जैसे मिलिट्री-टू-मिलिट्री मैकेनिज्म के जरिए संभाला जा रहा है, ताकि लोकल स्तर पर तनाव को तुरंत कम किया जा सके।  इसके साथ ही, पूर्वोत्तर में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कॉर्प्स कमांडर-लेवल की बातचीत भी सफलतापूर्वक आयोजित की गई है. यह कदम बॉर्डर पर शांति बनाए रखने के लिए संस्थागत, हाई-लेवल संवाद की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।  अधिकारियों ने बताया, हालांकि ऑपरेशनल गतिरोध तत्काल चुनौतियां पेश करते हैं, लेकिन विवादित क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने से अक्सर दोनों देश बातचीत की मेज पर अधिक सार्थक रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित होते हैं, जिससे समय के साथ सीमा मुद्दों पर बेहतर सहमति की दिशा में गति मिल सकती है।  इन दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार मौजूदगी सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दे रही है. ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित रहे इन इलाकों में ऑल-वेदर रोड, ब्रिज, टेलीकम्युनिकेशन और नागरिक सुविधाएं जैसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया जा रहा है।  बेहतर कनेक्टिविटी से भविष्य में कंट्रोल्ड बॉर्डर ट्रेड, लोगों के बीच आपसी संपर्क और लोकल इकोनॉमिक आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खुल रहे हैं।  यह क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से भी बेहद अहम है, जिसमें बौद्ध धर्म के पवित्र तीर्थ स्थल शामिल हैं, जैसे कि ऐतिहासिक 'त्सारी तीर्थ यात्रा सर्किट', जो सीमा के दोनों ओर रहने वाले समुदायों के लिए पवित्र है. सूत्रों ने कहा कि दीर्घकालिक स्थिरता से सीमा-पार तीर्थ यात्रा की सुविधा मिल सकती है।  वहीं सीमावर्ती इलाकों में सशस्त्र बलों की मौजूदगी से हेल्थकेयर कैंप, इमरजेंसी इवैक्यूएशन, स्कूल निर्माण और रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे रिमोट ट्राइबल कम्युनिटीज को नेशनल मेनस्ट्रीम से जोड़ने में बड़ी मदद मिल रही है।  इस बीच, ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में जुलाई से चीनी पीएलए सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है. उन्होंने राजस्थान के अलवर में बताया कि असफिला जैसे इलाकों में चीनी सैनिकों ने भारत की समझ वाली एलएसी से महज छह-सात किलोमीटर दूर तंबू लगा रखे हैं। 

दिल्ली-NCR में परिवहन का बड़ा विस्तार, मेट्रो-नमो भारत नेटवर्क से बदलेगी तस्वीर

नई दिल्ली  राजधानी की सड़कों पर हर दिन लगने वाले जाम से आम जनता को राहत दिलाने की तैयारी है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर मास्टर प्लान-2047 को लेकर बैठक की है. इस बैठक में राजधानी के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह बदलने का खाका खींचा गया. योजना के तहत दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क को 416 किलोमीटर से बढ़ाकर 695 किलोमीटर करने का प्रस्ताव रखा गया है. इसके साथ ही पूरे एनसीआर में नमो भारत ट्रेनों का दायरा 383 किलोमीटर तक फैलाने की तैयारी है. इस योजना का मकसद निजी गाडियों पर निर्भरता कम करके पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत बनाना है. बैठक में ट्रैफिक कंट्रोल, नई सड़कों के निर्माण, पार्किंग व्यवस्था और साइकिल चालकों की सुविधा पर भी विस्तृत चर्चा हुई. योजना जमीन पर उतरने के बाद दिल्ली वालों का सफर बेहद आसान हो जाएगा।  मेट्रो और नमो भारत के विस्तार से कैसे बदलेगा सफर? मास्टर प्लान-2047 में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को शहर के कोने-कोने तक पहुंचाने की रणनीति तैयार की गई है।      मौजूदा समय में दिल्ली में 416 किलोमीटर लंबा मेट्रो नेटवर्क काम कर रहा है. नए प्रस्ताव के अनुसार इसे बढ़ाकर 695 किलोमीटर किया जाएगा।      रीजनल कनेक्टिविटी को रफ्तार देने के लिए नमो भारत ट्रेन के नेटवर्क को 82 किलोमीटर से बढ़ाकर 383 किलोमीटर करने का लक्ष्य तय हुआ है।      यात्रियों की सहूलियत के लिए कश्मीरी गेट, आनंद विहार और सराय काले खां को मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा।  इन हब पर बस, मेट्रो और ट्रेन की कनेक्टिविटी एक ही जगह मिलेगी. इससे यात्रियों को एक साधन से दूसरे साधन में जाने के लिए धक्के नहीं खाने पड़ेंगे।  सड़कों पर जाम रोकने के लिए किन तकनीकों का होगा इस्तेमाल? राजधानी के व्यस्त चौराहों से जाम हटाने के लिए आधुनिक तकनीक और नए सड़क नेटवर्क का सहारा लिया जाएगा. योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई आधारित ट्रैफिक सिग्नल और पार्किंग मैनेजमेंट लागू करने की बात कही गई है. ट्रैफिक की अड़चनों को खत्म करने के लिए नए अंडरपास, एलिवेटेड कॉरिडोर और मिसिंग लिंक वाली सड़कों को आपस में जोड़ा जाएगा।  इसके साथ ही ज्यादा भीड़भाड़ वाले इलाकों के लिए अलग से पार्किंग प्लान तैयार होगा. पार्किंग के नियमों को सख्त और पारदर्शी बनाया जाएगा ताकि गाड़ियां सड़कों पर खड़ी न हों. प्रदूषण कम करने के लिए क्लीन फ्यूल वाले वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी।  पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों को क्या सुविधाएं मिलेंगी? मास्टर प्लान में गैर-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट यानी पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों पर विशेष ध्यान दिया गया है. इसके लिए शहर भर में करीब 200 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड साइकिल ट्रैक बनाए जाएंगे. फुटपाथों के डिजाइन में सुधार करके उन्हें दिव्यांगजनों के चलने लायक बनाया जाएगा. पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़कों की बनावट में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।  शहर के पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम की निगरानी के लिए यूनिफाइड मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी यानी उमटा के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है. डीडीए तीन महीने तक अलग-अलग विभागों और जनता से सुझाव लेकर इस मास्टर प्लान को अंतिम रूप देगा। 

हाई कोर्ट का फैसला: विवाहेतर संबंध मात्र से पति को क्रूरता का दोषी नहीं माना जा सकता

 चेन्नई  मद्रास हाई कोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और कानूनी प्रावधानों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पति का किसी अन्य महिला के साथ संबंध होना ही पत्नी के प्रति क्रूरता का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति सुंदर मोहन की पीठ ने कहा कि आईपीसी की धारा 498ए और वर्तमान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 एवं 86 के तहत अपराध सिद्ध करने के लिए अभियोजन पक्ष को केवल विवाहेतर संबंधों से आगे बढ़कर ठोस साक्ष्य पेश करने होंगे। सुप्रीम कोर्ट की नजीर का उल्लेख अदालत ने अपने इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय ‘पिनाकिन महीपतराय रावल बनाम गुजरात राज्य’ का हवाला दिया। इसके साथ ही पीठ ने मृतका के भाई द्वारा निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपील को निरस्त कर दिया। क्या था पूरा मामला? इस केस में एक महिला ने अपने डेढ़ वर्षीय शिशु के साथ जान दे दी थी। मृतका के परिजनों का आरोप था कि पति के अन्य महिला से संबंध और दहेज उत्पीड़न के कारण उसने यह कदम उठाया। हालांकि, अप्रैल 2018 में महिला के दहेज प्रताड़ना और अवैध संबंधों के आरोपों में पर्याप्त आधार न पाकर कोर्ट ने पति को दोषमुक्त कर दिया था। निचली अदालत ने पाया कि क्रूरता साबित करने के लिए अभियोजन के पास आवश्यक साक्ष्य नहीं थे। हाईकोर्ट ने बरकरार रखा फैसला राज्य सरकार द्वारा इस फैसले को चुनौती न दिए जाने पर मृतका के भाई ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की समीक्षा करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के स्वतंत्र मूल्यांकन से यह स्पष्ट है कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को सिद्ध करने में विफल रहा। अदालत ने पुनः रेखांकित किया कि बिना किसी अतिरिक्त साक्ष्य या उत्पीड़न के सीधे प्रमाण के, केवल किसी अन्य महिला से संबंध होने के आधार पर पति को पत्नी के प्रति क्रूरता का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बाबा कालभैरव और काशी विश्वनाथ के दरबार में लगाई हाजिरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा कालभैरव और बाबा विश्वनाथ का किया दर्शन-पूजन विधि-विधान से काशी के कोतवाल की पूजा-अर्चना कर उतारी आरती, भोले बाबा का जलाभिषेक कर लोक कल्याण की कामना की   वाराणसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेअपने वाराणसी दौरे के दौरान  मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने सबसे पहले काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आरती उतारी। इसके बाद मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ का दर्शन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंदिर के गर्भगृह में बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया और षोडशोपचार पूजन किया। इस दौरान उन्होंने लोक कल्याण और जनमानस के सुख-समृद्धि की कामना की। काशी के दोनों प्रमुख मंदिरों में मुख्यमंत्री ने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की।