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UP Election 2027: विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज, लखनऊ में जुटेंगे BJP नेता; अमित शाह करेंगे उद्घाटन

लखनऊ उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी कल 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ में दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक करेगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बैठक का उद्घाटन करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समापन करेंगे।  बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के साथ संगठन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की जाएगी. सरकार के कामकाज, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए जनता तक पहुंच बनाने पर भी चर्चा होगी।  2027 चुनाव के लिए तैयार होगा रोडमैप प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में पार्टी के केंद्रीय और प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, विधायक, मंत्री और जिलाध्यक्ष शामिल होंगे. इस दौरान राजनीतिक प्रस्ताव के जरिए सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और संगठन को चुनाव के लिए सक्रिय करने की रणनीति बनाई जाएगी. पार्टी का लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन और सरकार की प्राथमिकताएं तय करना है।   बीजेपी नेता मनीष शुक्ला ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश का चुनाव सामने है, इसलिए चुनाव की दृष्टि से पार्टी और संगठन, सरकार किस तरह से आगे बढ़ेंगे, 2027 में 2017 से बड़ी विजय दर्ज हो, प्रचंड बहुमत से विजय दर्ज हो, इसके लिए भी कार्य योजना बनाई जाएगी।  बीजेपी की बैठक पर सपा ने उठाए सवाल बीजेपी की चुनावी तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (SP) ने बैठक को लेकर निशाना साधा है. सपा का आरोप है कि अगर सरकार ने जनता के लिए काम किया होता, तो उसे इतनी बैठकें करने की जरूरत नहीं पड़ती. सपा ने बीजेपी के खिलाफ जनता में नाराजगी होने का दावा किया है. पार्टी ने कहा कि आगामी चुनाव में पीडीए की सरकार बनेगी।  समाजवादी पार्टी के नेता दीपक रंजन ने कहा कि अब ये कितनी भी बैठकें कर लें, कितनी भी एक्सरसाइज कर लें, अब कुछ होने-वाने वाला नहीं है. जनता बस इनके खिलाफ जो है बटन दबाने का इंतजार कर रही है और PDA की सरकार आने के लिए तैयार है।  एक तरफ जहां बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के जरिए आगामी चुनाव के लिए संगठन और सरकार की प्राथमिकताएं तय करने की तैयारी में है. वहीं, समाजवादी पार्टी ने सरकार के कामकाज और जनता की नाराजगी को मुद्दा बनाया है।   

MP में विंटर शेड्यूल लागू, इंदौर से देश के 17 शहरों के लिए सीधी फ्लाइट; जानें पूरा अपडेट

इंदौर  देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट से 25 अक्टूबर से विंटर शेड्यूल लागू हो गया है। इसके तहत इंदौर से देश के 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 17 शहरों के लिए 42 नियमित सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं। नए शेड्यूल में दिल्ली सबसे व्यस्त रूट बना हुआ है, जहां से रोजाना 9 उड़ानों का संचालन हो रहा है। वहीं मुंबई के लिए 8 उड़ानें उपलब्ध हैं। इन उड़ानों के जरिए प्रतिदिन औसतन 11 हजार यात्री हवाई सफर कर रहे हैं। इंदौर एयरपोर्ट से विंटर सीजन से जबलपुर जैसे शहर से हवाई कनेक्टिविटी टूटी है, तो वहीं जोधपुर और अहमदाबाद के लिए नई उड़ानें शुरू हुई हैं। विंटर शेड्यूल 30 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में मौजूदा उड़ानों के साथ कुछ नई उड़ानें शुरू होने की भी संभावना है। इसमें गोंदिया, बैंकाक सहित अन्य उड़ानें शुरू होंगी। हालांकि प्रस्तावित उड़ानों का संचालन एयरलाइंस द्वारा बुकिंग शुरू होने पर निर्भर करेगा। बड़े शहरों के लिए सीधी कनेक्टिविटी इंदौर से दिल्ली और मुंबई के अलावा बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, जयपुर, चंडीगढ़ और लखनऊ सहित 17 शहरों के लिए हवाई कनेक्टिविटी उपलब्ध है। बेंगलुरु रूट पर रोजाना 4 उड़ानें संचालित हो रही हैं। वहीं हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों के लिए भी नियमित उड़ानों की सुविधा मिल रही है। इससे कारोबार, नौकरी और पर्यटन के सिलसिले में यात्रा करने वाले यात्रियों को सुविधा मिल रही है। दिसंबर से बैंकाक उड़ान पर नजर इंदौर से वर्तमान में यूएई के अबू धाबी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालित हो रही है। वहीं दो दिसंबर से बैंकाक के लिए दूसरी अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू होने का शेड्यूल प्रस्तावित है। हालांकि एयरलाइंस ने फिलहाल इसकी बुकिंग शुरू नहीं की है। ऐसे में उड़ान का संचालन शुरू होने को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। कोच्चि के लिए कनेक्टिंग उड़ान की सुविधा विंटर शेड्यूल में इंदौर से मुंबई और पुणे के रास्ते कोच्चि जाने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिल रही है। इस कनेक्टिंग उड़ान में यात्रियों को विमान बदलने की जरूरत नहीं है। निर्धारित ठहराव के बाद वही विमान कोच्चि तक यात्रा पूरी करेगा। इसके अलावा अबू धाबी की अंतरराष्ट्रीय उड़ान का समय भी बदला गया है। पहले रात में संचालित होने वाली यह उड़ान अब दिन में संचालित हो रही है।

सितंबर में EV मार्केट पर टाटा का दबदबा, Punch EV ने मारी बाजी; महिंद्रा और MG की गाड़ियों की भी धूम

मुंबई  सितंबर 2026 में देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कार का खिताब Tata Punch EV के नाम रहा. AutoPunditz के अनुसार, कंपनी ने इस महीने डीलरशिप पर इसकी 4,702 यूनिट्स भेजीं. हालांकि, दूसरे नंबर पर रही Mahindra XEV 9S इससे ज्यादा पीछे नहीं थी. Mahindra ने सितंबर में इस इलेक्ट्रिक SUV की 4,636 यूनिट्स डीलरशिप पर भेजीं. यानी दोनों के बीच सिर्फ 66 यूनिट्स का अंतर रहा. खास बात यह है कि कीमत और साइज में बड़ा अंतर होने के बावजूद दोनों के बीच बिक्री की टक्कर काफी करीबी रही।  EV मार्केट में Punch EV और Mahindra XEV 9S का जलवा Tata Punch EV की बिक्री में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला. सितंबर 2025 में इसकी 1,223 यूनिट्स ही डीलरशिप पर भेजी गई थीं, जबकि सितंबर 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 4,702 यूनिट्स पर पहुंच गया. यानी सालाना आधार पर इसकी बिक्री में 284% की बढ़ोतरी हुई. इस महीने देश में कुल 35,256 इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल्स डीलरशिप पर भेजे गए, जिनमें Punch EV की हिस्सेदारी करीब 13.3% रही. वहीं, महंगी इलेक्ट्रिक SUV होने के बावजूद Mahindra XEV 9S ने भी कुल बिक्री में लगभग 13.1% का योगदान दिया।  भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है और बीते सितंबर के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि फेस्टिवल सीजन में ईवी सेल्स रेकॉर्ड ऊंचाई पर जा सकती है। अब बीते सितंबर 2026 की मॉडल-वाइज रजिस्ट्रेशन डेटा देखें तो टाटा मोटर्स ने इलेक्ट्रिक 4-व्हीलर सेगमेंट में अपनी मजबूत पैठ को बरकरार रखा है और टॉप 8 की लिस्ट में अपने 5 प्रमुख मॉडल शामिल हैं। पंच ईवी पिछले महीने सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कार रही। वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपने नए बॉर्न-इलेक्ट्रिक एसयूवी पोर्टफोलियो के साथ मार्केट में जबरदस्त हलचल पैदा की है। इसके अलावा जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर का भी दबदबा कायम है। आइए, सितंबर 2026 की टॉप 8 सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कारों की परफॉर्मेंस पर नजर डालते हैं। टाटा पंच ईवी- 4702 यूनिट्स सितंबर 2026 की सेल्स रिपोर्ट में टाटा पंच ईवी (Tata Punch EV) देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कार बनकर उभरी है। पिछले महीने इसकी कुल 4,702 यूनिट बिकी। अपनी कॉम्पैक्ट एसयूवी स्टाइलिंग, बेहतरीन ग्राउंड क्लीयरेंस, किफायती कीमत और प्रैक्टिकल रेंज के कारण यह भारतीय शहरी और सेमी-अर्बन परिवारों की पहली पसंद बनी हुई है। महिंद्रा एक्सईवी 9एस- 4636 यूनिट्स महिंद्रा की नई 3-रो इलेक्ट्रिक एसयूवी XEV 9S भारतीय बाजार में लगातार धमाकेदार प्रदर्शन कर रही है। सितंबर 2026 में 4636 यूनिट्स की बिक्री के साथ यह कार सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। प्रीमियम फीचर्स, लग्जरी केबिन और दमदार ऑल-इलेक्ट्रिक परफॉर्मेंस की वजह से बड़ी फैमिली के बीच इसकी मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है। टाटा नेक्सॉन ईवी- 3926 यूनिट्स भारतीय बाजार में शुरुआत से ही इलेक्ट्रिक कार सेगमेंट में ग्राहकों की फेवरेट रही टाटा नेक्सॉन ईवी (Tata Nexon EV) लगातार पॉपुलर मॉडल्स में बनी हुई है। सितंबर 2026 में इसके 3,926 यूनिट्स रजिस्टर्ड किए गए। अडवांस्ड सेफ्टी फीचर्स, बेहतरीन ड्राइविंग डायनैमिक्स और ब्रैंड के प्रति ग्राहकों के भरोसे ने इसे तीसरे पायदान पर कायम रखा है। एमजी विंडसर ईवी- 3300 यूनिट्स जेएसडब्ल्यू एमजी एमजी मोटर की बिजनेस-क्लास आराम देने वाली विंडसर ईवी (MG Windsor EV) ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। सितंबर 2026 के दौरान इसके कुल 3,300 यूनिट्स की बिक्री दर्ज हुई। एयरो लाउंज सीट्स, 15.6-इंच का विशाल टचस्क्रीन और अर्बन मोबिलिटी के लिए बेस्ट केबिन स्पेस इसे एक बेहद लोकप्रिय क्रॉसओवर ईवी बनाता है। महिंद्रा एक्सईवी 9ई- 1975 यूनिट्स महिंद्रा की स्पोर्टी और फ्यूचरिस्टिक कूपे-एसयूवी XEV 9e ने भी सेल्स चार्ट में अपनी जगह मजबूत की है। सितंबर महीने में इसके कुल 1,975 यूनिट्स का रजिस्ट्रेशन हुआ। अपनी स्पोर्टी बॉडी लाइन्स, हाई-टेक इन्फोटेनमेंट सेटअप और हाई-परफॉर्मेंस इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन की वजह से यह युवा कार खरीदारों को खासा आकर्षित कर रही है। टाटा सिएरा ईवी- 1908 यूनिट्स आइकॉनिक नाम की इलेक्ट्रिक अवतार में वापसी के साथ ही टाटा सिएरा ईवी (Tata Sierra EV) ने भारतीय ग्राहकों का दिल जीत लिया है। सितंबर 2026 में इस प्रीमियम इलेक्ट्रिक एसयूवी को 1,908 बायर्स मिले। नियो-रेट्रो डिजाइन, बड़े ग्लास एरिया और अत्याधुनिक इंटीरियर केबिन के साथ यह ईवी सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ रही है। टाटा कर्व ईवी- 1536 यूनिट्स टाटा मोटर्स की स्टाइलिश कूपे-एसयूवी कर्व ईवी (Tata Curvv EV) सितंबर महीने में 1,536 यूनिट्स की बिक्री हासिल कर 7वें पायदान पर रही। अपनी खास कूपे रूफलाइन, सेगमेंट-फर्स्ट फीचर्स और बड़े बैटरी पैक ऑप्शन की बदौलत यह मिडसाइज ईवी सेगमेंट में एक खास पहचान बना चुकी है। टाटा हैरियर ईवी- 1452 यूनिट्स टाटा मोटर्स की फ्लैगशिप ऑल-व्हील ड्राइव (AWD) इलेक्ट्रिक एसयूवी हैरियर ईवी (Tata Harrier EV) ने बीते सितंबर महीने में 1452 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की। पावरफुल डुअल-मोटर सेटअप, मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर और ऑफ-रोड क्षमताओं से लैस यह गाड़ी प्रीमियम ईवी खरीदारों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए बेस्ट ऑप्शन साबित हो रही है।  

भारत के मिसाइल रेंज पर जापान की नजर, टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल और हमलावर ड्रोन के परीक्षण की तैयारी

 नई दिल्ली जापान अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए भारत के मिसाइल परीक्षण स्थलों का उपयोग करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (GSDF) के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मसायोशी अराई ने बताया कि जापानी अधिकारी भारत भेजे गए थे. उनका उद्देश्य यह पता लगाना था कि टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का पूरा परीक्षण कैसे किया जा सकता है।  इस मिसाइल की रेंज करीब एक हजार किलोमीटर है, जिसे जापान के घरेलू स्थलों पर पूरी तरह इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है. अधिकारी इस महीने की शुरुआत में भारत गए और लगभग एक सप्ताह तक कई स्थलों का निरीक्षण किया. साथ ही छोटे हमलावर ड्रोन के परीक्षण की संभावना पर भी चर्चा हुई।  टाइप-25 मिसाइल और घरेलू सीमाएं टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइल जापान की समुद्री रक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसकी लंबी रेंज का पूरा फायदा उठाने के लिए बड़े और सुरक्षित परीक्षण क्षेत्र की जरूरत होती है. जापान के अपने क्षेत्र में इतनी लंबी दूरी का सुरक्षित परीक्षण मुश्किल है क्योंकि आबादी घनी है और सुरक्षा संबंधी कई नियम लागू होते हैं।  जनरल अराई ने स्पष्ट कहा कि घरेलू प्रशिक्षण वातावरण को सुरक्षित करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर विदेश में प्रशिक्षण स्थलों का उपयोग करने के तरीके भी खोजे जा रहे हैं. भारत के विशाल और अपेक्षाकृत कम आबादी वाले मिसाइल रेंज इस जरूरत को पूरा कर सकते हैं. इससे जापान को वास्तविक परिस्थितियों में मिसाइल का परीक्षण करने का मौका मिलेगा।  छोटे हमलावर ड्रोन और शील्ड प्रणाली जापान केवल बड़ी मिसाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह सस्ते और बड़ी संख्या में इस्तेमाल होने वाले बिना चालक वाले हवाई, सतह और पानी के नीचे के वाहनों पर आधारित एक बहुस्तरीय तटीय रक्षा प्रणाली बना रहा है. इसे सिंक्रोनाइज्ड, हाइब्रिड, इंटीग्रेटेड एंड एनहांस्ड लिटोरल डिफेंस या शील्ड प्रणाली कहा जाता है।  इसमें टोही और हमले दोनों तरह के ड्रोन शामिल होंगे. ये ड्रोन दुश्मन की रेंज से बाहर से हमला करने वाली स्टैंडऑफ मिसाइलों के साथ मिलकर काम करेंगे. हालांकि जापान के अंदर छोटे हमलावर ड्रोन का प्रशिक्षण कई समस्याओं से घिरा है. रेडियो फ्रीक्वेंसी के इस्तेमाल से नागरिक टेलीविजन और स्मार्टफोन प्रभावित हो सकते हैं।  सुरक्षा चिंताएं भी हैं और स्थानीय सरकारों से समन्वय जरूरी है. इसलिए अधिकारी घरेलू समाधान के साथ-साथ विदेश में उपयुक्त स्थलों की तलाश कर रहे हैं. भारत के रेंज इन चुनौतियों को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं क्योंकि वहां बड़े क्षेत्र उपलब्ध हैं. परीक्षण नियमों में अधिक लचीलापन हो सकता है।  ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग और क्षेत्रीय संदर्भ भारत के अलावा जापान ऑस्ट्रेलिया के मिसाइल परीक्षण स्थलों पर भी नजर रखे हुए है. अगस्त में जापानी रक्षा मंत्री शिन्जिरो कोइजुमी और ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष रिचर्ड मार्ल्स ने बैठक में बताया कि दोनों देश जापान को ऑस्ट्रेलियाई रेंजों तक बेहतर पहुंच देने की दिशा में काम कर रहे हैं. जापान ने 2023 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया में सैन्य अभ्यास के दौरान एंटी-शिप मिसाइल दागी थी और पिछले साल भी अधिक जटिल लॉन्च किया।  कोइजुमी ने कहा कि अगर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज हाइपरसोनिक जैसी स्टैंडऑफ मिसाइलों का परीक्षण ऑस्ट्रेलिया में कर सकें तो यह ऐतिहासिक विकास होगा. मार्ल्स ने अगले दशक में कई मिसाइल क्षमताओं के लिए उन्नत व्यवस्था पर चर्चा का जिक्र किया।  ये कदम क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति से जुड़े हैं. चीन की सैन्य गतिविधियों और उत्तर कोरिया के बढ़ते मिसाइल शस्त्रागार के बीच जापान अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना चाहता है. लंबी दूरी की मिसाइलें और ड्रोन सिस्टम जापान के परिधि क्षेत्र की रक्षा के लिए जरूरी माने जा रहे हैं. भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदार देशों के साथ सहयोग से जापान को परीक्षण सुविधाएं मिलेंगी जो घरेलू सीमाओं के कारण उपलब्ध नहीं हैं।  यह विकास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को दर्शाता है. जापान अपनी रक्षा नीति में बदलाव ला रहा है और साझेदार देशों के संसाधनों का उपयोग कर रहा है. भारत के लिए यह सैन्य तकनीकी सहयोग का अवसर हो सकता है. दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध पहले से मजबूत हो रहे हैं. अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो जापान अपनी नई मिसाइलें और ड्रोन सिस्टम अधिक प्रभावी ढंग से विकसित कर सकेगा।  साथ ही क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी. अंतिम फैसला आने वाले समय में स्पष्ट होगा. सुरक्षा, तकनीकी समन्वय और द्विपक्षीय समझौते इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे. कुल मिलाकर जापान की यह पहल उसकी रक्षा तैयारियों को नई दिशा दे रही है. भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ सहयोग से वह लंबी दूरी के हथियारों और आधुनिक ड्रोन प्रणालियों का बेहतर परीक्षण कर सकेगा, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। 

उत्तर प्रदेश और पंजाब चुनाव पर RSS का फोकस, इंदौर में रणनीति को लेकर जुटेंगे संघ के पदाधिकारी

इंदौर  अगले साल की शुरुआत में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है. संघ का मुख्य ध्यान उत्तर प्रदेश और पंजाब पर है। सूत्रों के अनुसार, इन दोनों राज्यों को लेकर पिछले कुछ महीनों से तैयारियां चल रही हैं. नवंबर के पहले हफ्ते में इंदौर में होने वाली आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में कई अहम मुद्दों पर बात होगी. इनमें एसआईआर को लेकर विपक्ष के अभियान, ड्रग्स, देश विरोधी ताकतों और देश में अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।  आरएसएस सूत्रों के अनुसार, एसआईआर के मुद्दे का जमीन पर कोई खास असर नहीं है और यह आम लोगों का मुद्दा नहीं है. संघ के एक नेता के अनुसार, 13 करोड़ लोगों के नाम कटने की बात कही जा रही है, लेकिन इससे केवल तीन करोड़ लोग ही प्रभावित हुए हैं. बाकी नाम उन लोगों के हैं जिनका या तो पता बदल गया है या फिर जिनकी मौत हो चुकी है।  जिन तीन करोड़ लोगों पर इसका असर पड़ा है, उन्हें भी फिर से वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने का मौका दिया जा रहा है. नेता के मुताबिक, अगर विपक्ष एसआईआर का मुद्दा उत्तर प्रदेश में उठाता है, तो इससे उसी का नुकसान होगा. ठीक वैसे ही जैसे बिहार में महागठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा था, क्योंकि इस वजह से दूसरे मुद्दों से ध्यान भटक गया था।  संघ नेताओं के अनुसार, उत्तर प्रदेश में संगठन की स्थिति काफी मजबूत है. अपने शताब्दी वर्ष में संघ ने देश के इस सबसे बड़े राज्य में ज़मीनी पकड़ मजबूत की है और शाखाओं की संख्या बढ़ाई है. राज्य में बीजेपी की सरकार होने का भी फायदा मिला है. इसीलिए आरएसएस पूरी ताकत लगाकर बीजेपी की हैट्रिक के अभियान में जुटेगा।  वहीं पंजाब में भी गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय लोगों से भी संपर्क बढ़ाया गया है. पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या पर भी संघ का खास फोकस है. इंदौर की बैठक में इस मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा होगी।  इंदौर की कार्यकारी मंडल की बैठक में देश के अंदरूनी मामलों में विदेशी दखल और ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट जैसे समसामयिक विषयों पर भी बात की जाएगी. दो और तीन नवंबर को होने वाली यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है। 

ब्रिटिश हिंदू संगठन INSIGHT UK की रिपोर्ट में दावा, पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी के अनुपात में आई भारी गिरावट

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की स्थिति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में है। ब्रिटेन स्थित प्रवासी संगठन INSIGHT UK ने ब्रिटिश संसद में एक रिपोर्ट पेश कर पाकिस्तान में हिंदुओं के कथित धार्मिक उत्पीड़न, संपत्ति पर कब्जे, जबरन धर्म परिवर्तन और महिलाओं के अपहरण जैसे गंभीर मुद्दे उठाए हैं। रिपोर्ट में ब्रिटिश सरकार (British Government) से पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में अल्पसंख्यकों (Minority) की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की गई है। INSIGHT UK की यह रिपोर्ट पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता (Religious Freedom) और अल्पसंख्यकों के अधिकारों (Rights of Minorities) को लेकर कई सवाल खड़े करती है।  पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी कितनी घटी? रिपोर्ट के मुताबिक, 1941 की जनगणना में उस क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी लगभग 14.6 प्रतिशत थी, जो बाद में पश्चिमी पाकिस्तान बना। आज पाकिस्तान में हिंदुओं की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से कम बताई जाती है। इस बदलाव के पीछे 1947 का विभाजन (Partition of India and Pakistan), बड़े पैमाने पर पलायन, समय-समय पर हुई सांप्रदायिक हिंसा (Religious Violence) और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों जैसे कई ऐतिहासिक कारण रहे हैं। रिपोर्ट का आरोप है कि हिंदू परिवारों को हिंसा और भेदभाव के कारण अपनी जमीन तथा घर छोड़ने पड़े। इसमें पुश्तैनी संपत्तियों से बेदखली की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। 15 प्रतिशत से 2 प्रतिशत रह गए हिंदू रिपोर्ट की शुरुआत एक ऐसे आंकड़े से होती है जो उत्पीड़न की पूरी कहानी बयां कर देता है. 1941 की भारत की जनगणना के अनुसार, उस इलाके में, जो बाद में 'पश्चिम पाकिस्तान' बना, हिंदुओं की आबादी 14.6 प्रतिशत थी. बंटवारे के बाद, यह संख्या तेजी से गिर गई. आज, पाकिस्तान की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से भी कम है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि सात दशकों तक लगातार हुई इतनी बड़ी गिरावट, इस्लामाबाद के उस दावे पर सवाल खड़े करती है जिसमें वह कहता है कि वह अपने अल्पसंख्यकों की रक्षा करता है. इन आंकड़ों के पीछे हिंसा और आर्थिक रूप से घोंटने का एक लंबा इतिहास छिपा है।  रिपोर्ट में बताया गया है कि 1947 के दंगों के बाद से ही इस समुदाय को समय-समय पर हिंसा की लहरों का सामना करना पड़ा है. हजारों हिंदू परिवारों को वहां से भागना पड़ा या विस्थापित होना पड़ा. उन्हें 'एनिमी प्रॉपर्टी लॉ' (शत्रु संपत्ति कानून) जैसे कठोर कानूनों के जरिए उनकी पुश्तैनी जमीन और खेतों से बेदखल कर दिया गया. इस कदम ने पूरे समुदाय को गरीबी और हमेशा के लिए विस्थापन की स्थिति में धकेल दिया।  कानून भी उत्पीड़न का जरिया रिपोर्ट का तर्क है कि यह उत्पीड़न केवल सड़कों पर ही नहीं होता, बल्कि पाकिस्तान के कानूनों में भी दर्ज है. वहां के संविधान के अनुच्छेद 41 और 91 के अनुसार, केवल एक मुस्लिम ही राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री बन सकता है. 2019 में लाए गए एक सुधार विधेयक को रोके जाने के बाद, यह प्रावधान आज भी बिना किसी चुनौती के कायम है।  हर पाकिस्तानी को अपने पासपोर्ट पर अपना धर्म बताना अनिवार्य है. यहां तक कि राजधानी इस्लामाबाद में भी कोई चालू हिंदू मंदिर नहीं है. आधिकारिक अनुमति मिलने के बावजूद, इस्लामी समूहों के हिंसक विरोध के कारण 2020 में पहले मंदिर का निर्माण रोक दिया गया था, जो आज तक पूरा नहीं हो सका है।  इस रिपोर्ट का सबसे भयावह हिस्सा महिलाओं और लड़कियों की दुर्दशा के बारे में है. पाकिस्तान में हर साल लगभग एक हजार या उससे अधिक हिंदू और ईसाई महिलाओं और लड़कियों का अपहरण कर लिया जाता है, उन्हें जबरन इस्लाम कबूल कराया जाता है और अपहरणकर्ताओं से शादी करने के लिए मजबूर किया जाता है. मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार इस तरह की घटनाओं को दर्ज किया है. इनमें से ज्यादातर पीड़ित गरीब परिवारों की नाबालिग लड़कियां होती हैं, जिनकी न्याय तक कोई पहुंच नहीं है।  ब्रिटिश सरकार से रखी यह मांग रिपोर्ट के अंत में, UK सरकार के सामने पांच अहम मांगें रखी गई हैं. इनमें शामिल हैं कि UK-पाकिस्तान के बीच होने वाली हर बातचीत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को एक अनिवार्य शर्त बनाया जाए; मंदिरों की सुरक्षा और मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए समयबद्ध कदम उठाया जाए; पाकिस्तान को दी जाने वाली ब्रिटिश सहायता को मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार से जोड़ा जाए और अल्पसंख्यक अधिकार समूहों के लिए अलग से फंड सुरक्षित की जाए. इसके साथ ही इस्लामाबाद स्थित ब्रिटिश उच्चायोग में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए दो पद आरक्षित करना ताकि बिना किसी रुकावट या फिल्टर के अत्याचारों की रिपोर्ट मिल सके. इतना ही नहीं मांग है कि हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों और अन्य अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर हर छह महीने में एक आधिकारिक रिपोर्ट प्रकाशित करने को कहा जाए और जबरन धर्म परिवर्तन तथा धार्मिक उत्पीड़न के शिकार लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय बने।  रिपोर्ट में विदेश सचिव, धार्मिक स्वतंत्रता या आस्था के मामलों में प्रधानमंत्री के विशेष दूत और हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) मामलों के मंत्री से कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है. इसमें जोर देकर कहा गया है कि धार्मिक स्वतंत्रता एक मानवाधिकार है, और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, गरिमा तथा उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।  पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद पर शर्त लगाने की मांग INSIGHT UK ने ब्रिटिश सरकार से मांग की है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली कुछ आर्थिक मदद को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में सुधार से जोड़ा जाए. संगठन ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने वाले संगठनों के लिए आर्थिक मदद अलग रखने की भी मांग की है।  रिपोर्ट में हर छह महीने में अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति का आधिकारिक आकलन करने और उत्पीड़न का सामना करने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए शरण लेने के रास्ते उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।  रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश हिंदुओं से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाला संसदीय समूह इन चिंताओं को ब्रिटेन की सरकार के सामने उठाने पर विचार कर रहा है. इसके लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर बैठक की मांग करने का विकल्प भी चर्चा में है. समूह में पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद कम करने के सवाल पर भी चर्चा हुई है. इस रिपोर्ट में पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की स्थिति की अधिक निगरानी करने … Read more

तिलक वर्मा का नया बैटिंग प्लान तैयार, अब पहली गेंद से करेंगे अटैक; जरूरत पड़ने पर सिंगल-डबल से संभालेंगे पारी

ऑकलैंड भारतीय टी20 टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा का बल्लेबाजी क्रम बदलने के साथ अंदाज भी बदला है. पहले नंबर-3 पर उतरने वाले तिलक अब नंबर-5 या नंबर-6 पर बल्लेबाजी कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस बदलाव ने उनकी सोच में थोड़ा फर्क लाया है. अब वह पहली गेंद से ही बाउंड्री लगाने का मौका तलाशते हैं, हालांकि इसके लिए गेंद का हिट करने लायक होना जरूरी है।  तिलक ने न्यूजीलैंड के खिलाफ चौथे टी20 इंटरनेशनल से पहले ऑकलैंड में यह बात कही. पिछले 12 महीनों में उन्होंने रन चेज के दौरान अपनी बल्लेबाजी से खास पहचान बनाई है. न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में भी उन्होंने नीतीश रेड्डी के साथ मिलकर मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. भारतीय टीम पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर चुकी है।  'पहली गेंद से बाउंड्री का मौका तलाशता हूं' तिलक ने कहा- मेरे पास पहले से ही पावर गेम था. मैंने नंबर-3 पर भी रन बनाए हैं. अब नंबर-5 या नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए मैं पहली ही गेंद पर बाउंड्री लगाने के बारे में सोचता हूं, लेकिन तभी जब गेंद हिट करने लायक हो।  उन्होंने आगे कहा- अगर ऐसा मौका नहीं मिलता, तो मेरा ध्यान मैच को आखिरी ओवरों तक ले जाने पर रहता है. मैं थोड़ा समय लेता हूं. शुरुआत में सिंगल और डबल लेने, गैप तलाशने और चौके या दो रन जुटाने पर ध्यान देता हूं।  डेथ ओवर्स में गेंदबाजों पर बनाते हैं प्रेशर  रन चेज के दौरान तिलक सिर्फ अपने शॉट्स पर ही नहीं, बल्कि गेंदबाजों की मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देते हैं. उनका मानना है कि आखिरी ओवरों में बल्लेबाज के मुकाबले गेंदबाज पर ज्यादा दबाव होता है।  नीतीश रेड्डी से त‍िलक वर्मा की क्या बात हुई थी? हेगले ओवल में न्यूजीलैंड के खिलाफ टारगेट का पीछा करते हुए नीतीश रेड्डी के साथ अपनी पार्टनरश‍िप को याद करते हुए तिलक ने बताया कि उन्होंने अपने साथी बल्लेबाज से क्या कहा था।  उन्होंने कहा- मैंने नीतीश से कहा था कि अगर हम यहां से मैच निकाल लेते हैं, तो बहुत मजा आएगा. बस क्रीज पर टिके रहो, मैच को आखिरी तक ले चलो और फिर देखते हैं कि क्या होता है।  भारत की नजरें 5-0 के क्लीन स्वीप पर भारतीय टीम सीरीज अपने नाम कर चुकी है, लेकिन तिलक की नजरें अब बाकी दोनों मुकाबले जीतकर क्लीन स्वीप करने पर हैं. उन्होंने कहा कि टीम इसे 5-0 से जीतने के शानदार मौके के तौर पर देख रही है। 

Delhi Airport पर यात्रियों को बड़ी राहत, अब ₹10 की चाय और ₹20 में नाश्ता; जानें लोकेशन

नई दिल्ली दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अब यात्रियों को चाय-कॉफी और नाश्ते के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होगी. एयरपोर्ट पर आमतौर पर महंगे मिलने वाले खाने-पीने के सामान के बीच अब यात्रियों को सिर्फ 10 रुपये में चाय और 20 रुपये में नाश्ता मिल सकता है. इसके लिए एयरपोर्ट पर UDAN Yatri Café की शुरुआत की गई है. यह पहल हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को सस्ती और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।  दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 के चेक-इन एरिया में शुरू किए गए उड़ान यात्री कैफे में यात्रियों को कम कीमत पर रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें मिलेंगी, यहां चाय की कीमत 10 रुपये रखी गई है, जबकि कॉफी सिर्फ 20 रुपये में मिल सकती है. इसके अलावा पैकेटबंद पीने का पानी 10 रुपये और दिन का खास स्नैक या मिठाई 20 रुपये में उपलब्ध है।  स्नैक्स में उपलब्धता के आधार पर समोसा, कचौरी, पैटीज और वड़ा पाव जैसे विकल्प मिल सकते हैं. इससे उन यात्रियों को राहत मिल सकती है, जिन्हें एयरपोर्ट पर खाने-पीने की चीजें सामान्य बाजार के मुकाबले महंगी लगती हैं।  सिक्योरिटी चेक के बाद नहीं मिलेगी यह सुविधा अगर आप फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंच रहे हैं, तो इस कैफे की लोकेशन जानना जरूरी है. उड़ान यात्री कैफे टर्मिनल-3 के चेक-इन एरिया में है, न कि सिक्योरिटी जांच के बाद यात्रियों के बैठने वाले डिपार्चर एरिया में, इसलिए सिक्योरिटी चेक पूरा करने के बाद सस्ती चाय या नाश्ता खरीदने की योजना बना रहे यात्रियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।  नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से सिक्योरिटी जांच के बाद भी ऐसे कैफे शुरू करने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, इसका विस्तार एयरपोर्ट पर उपलब्ध जगह, संचालन और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं पर निर्भर करेगा।  देश के दूसरे एयरपोर्ट पर भी मिल रही सस्ती चाय-नाश्ते की सुविधा उड़ान यात्री पहल का उद्देश्य हवाई यात्रियों को कम कीमत पर बुनियादी खानपान की सुविधा उपलब्ध कराना है. मई 2026 तक यह पहल देश के 25 एयरपोर्ट तक पहुंच चुकी थी, इनमें मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के एयरपोर्ट के साथ कई छोटे शहरों के एयरपोर्ट भी शामिल हैं।  दिल्ली एयरपोर्ट पर इस सुविधा की शुरुआत से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर उन लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकती है, जो परिवार के साथ यात्रा करते हैं या फ्लाइट से पहले चाय, कॉफी और हल्का नाश्ता करना चाहते हैं। 

राधिका आप्टे बोलीं- काम के नाम पर सौदेबाजी नहीं चलेगी, एक्शन सीन के लिए रखी गई थीं ऐसी शर्तें

मुंबई  बॉलीवुड एक्ट्रेस राधिका आप्टे हमेशा से काफी बोल्ड और बेबाक रही हैं. फिल्म इंडस्ट्री में अपने अनुभवों को लेकर वो हमेशा खुलकर बात करती हैं. हाल ही में अपने आने वाले शो 'अक्का'  के प्रमोशन के दौरान, राधिका ने एक बार फिर एक फिल्म में काम करने के अपने खराब एक्सपीरियंस पर बात की।  'न्यूज 18' संग इंटरव्यू में राधिका ने एक एक्शन फिल्म में काम करने के दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि उन्हें इनरवियर में शूट करने के लिए कहा गया था. उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की मांगों के खिलाफ आवाज उठाने पर इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर्स को नौकरी से निकाल दिया जाता है।  इनरवियर में एक्शन सीन की हुई डिमांड इस बारे में बात करते हुए राधिका आप्टे ने एक फिल्म की शूटिंग का किस्सा सुनाया, जहां उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वो इनरवियर में कुछ एक्शन सीक्वेंस करें. राधिका बोलीं- उन्होंने मुझसे कहा था- क्या आप बिना ब्रा के शर्ट पहन सकती हैं और बटन खुले रख सकती हैं? इसपर मैंने उनसे कहा था कि थोड़ा फिजिक्स के बारे में तो सोचों।  राधिका ने कहा कि फिल्मों में एक्शन सीन करते समय भी एक्ट्रेसेस से ये उम्मीद की जाती है कि वो दर्शकों को लुभाएं. इस बारे में बात करते हुए राधिका बोलीं- मेरी सोच थोड़ी अलग है. जब मैं कोई रोल साइन करती हूं, तो मुझे बहुत साफ-साफ बता दीजिए कि इस किरदार को लेकर आपकी सोच क्या है. मुझे सीन से दो दिन पहले यह मत बताइए, क्योंकि असली दिक्कत वहीं आती है।  'मेरा यही कहना है कि अगर आपने कोई ऐसा किरदार लिखा है, जो फिल्म में ज्यादातर बिना कपड़ों के रहता है, चाहे आपकी वजह जो भी हो, तो मैं यह जानकर ही साइन करूंगी कि मुझे क्या करना है. लेकिन अगर आप सीन से दो दिन पहले मुझसे इस बात पर सौदेबाजी करते हैं और ऐसे कपड़े पहनने के लिए दबाव बनाते हैं, तो यह बहुत ही मुश्किल हो जाता है।  राधिका ने आगे बताया कि जब उनके साथ ऐसा कुछ हुआ तो वो बात पूरे दो हफ्तों तक चलती रही. एक्ट्रेस बोलीं- वो मुझसे पूछते रहे- क्या आप यह हिस्सा दिखाएंगी? क्या आपको वो दिखाना चाहिए? यह पूरी तरह से मानसिक रूप से परेशान करने वाला था. यह सच में बहुत निराश करने वाला होता है।  इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर पर भी दबाव राधिका आप्टे ने ये भी बताया कि सेट पर इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर भी होते हैं, जो न्यूडिटी और इंटीमेसी वाले सीन्स के लिए नियमों का पालन करते हैं. राधिका ने बताया कि जब प्रोड्यूसर्स ऐसी डिमांड करते हैं, तो वो काफी परेशान हो जाते हैं।  एक्ट्रेस ने इस बारे में बात करते हुए कहा- आप न्यूडिटी दिखाना चाहते हैं, तो ठीक है, लेकिन मुझे शुरुआत से ही बताएं कि आप क्या चाहते हैं.आखिरी समय में ऐसे सरप्राइज क्यों मिलते हैं? यह बहुत कमाल की बात है कि अब हमारे पास इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर हैं, लेकिन उन्हें भी प्रोड्यूसर्स ही काम पर रखते हैं।  'मैंने देखा है कि जब इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर एक्टर्स की साइड लेते हैं तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है. यह कोई आसान सिचुएशन नहीं है. हालांकि, उनकी मौजूदगी से बहुत फर्क पड़ा है, लेकिन इससे हमें प्रोटेक्शन नहीं मिली है, क्योंकि या तो उन्हें निकाल दिया जाता है या वो मजबूरी में अपने सुर बदल लेते हैं, या फिर वो अड़े रहते हैं और फिर भी कुछ नहीं होता. आपको वैसे ही परेशान किया जाता है. एक्टर्स अपनी पसंद का कोई इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर नहीं रख सकते।  किस बात का है डर? हालांकि, राधिका ने यह भी साफ किया कि इंडस्ट्री में आमतौर पर ऐसा नहीं होता है. वो बोलीं- ज्यादातर लोग ऐसे नहीं होते. 10 में से सिर्फ एक सेट पर ऐसा हुआ था. 9 सेट ऐसे हैं, जो पूरे सम्मान के साथ मेरा बहुत अच्छा ख्याल रखते हैं. लेकिन वो एक सेट वाला वाकया फिर भी हो जाता है. दिक्कत यह है कि आप इसके बारे में खुलकर बात भी नहीं कर पाते. मैं आज भी आपको उस फिल्म या प्रोजेक्ट का नाम नहीं बता पा रही हूं. घर वापस जाकर मुझे लगता है कि मैं कब खुलकर अपनी बात कह पाऊंगी? यही असली मसला है और मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं है। 

CG Dhan Kharidi: किसानों को ₹3100 प्रति क्विंटल मिलेंगे दाम, 360 नए खरीदी केंद्र भी खुलेंगे; टोकन प्रक्रिया जानें

रायपुर  छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की आधिकारिक घोषणा हो गई है। मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में 15 नवंबर से धान खरीदी पर मुहर लगी है। धान खरीदी की घोषणा के साथ ही किसानों के चेहरे पर खुशी आ गई है। किसान लंबे समय से धान खरीदी के तारीख की इंतजार कर रहे थे। वहीं, दूसरी तरफ सरकार ने भी धान खरीदी की तैयारी तेज कर दी है। इस बार भी किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी होगी। 360 नए धान खरीदी केंद्र मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस वर्ष 15 नवंबर से धान खरीदी प्रारंभ हो रही है। राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए धान खरीदी व्यवस्था को और सुगम बनाने के लिए 360 नए धान खरीदी केंद्र खोलने का निर्णय लिया है। नए केंद्र खुलने से किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और खरीदी केंद्रों पर दबाव भी कम होगा। इससे किसानों के समय और श्रम की बचत होगी तथा धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनेगी। अधिकारियों को निर्देश मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र किसान सुविधाजनक तरीके से अपनी उपज बेच सके। टोकन के लिए लंबी लाइन नहीं खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों को धान बेचने के लिए टोकन प्राप्त करने हेतु सोसायटियों में लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ेगा। राज्य सरकार द्वारा किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है। किसान अपनी सुविधा के अनुसार एप के माध्यम से घर बैठे धान विक्रय के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे। फोन में कर सकते हैं डाउनलोड खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा संचालित ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसके माध्यम से किसान 24×7 ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था से किसानों के समय और श्रम की बचत होने के साथ ही धान खरीदी की प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित होगी। किस किसान को कितने टोकन धान विक्रय के लिए किसानों की जोत के अनुसार टोकन की संख्या निर्धारित की गई है। दो एकड़ तक के लघु एवं सीमांत किसानों को एक टोकन मिलेगा। दो एकड़ से अधिक और 10 एकड़ तक के किसानों को अधिकतम दो टोकन तथा 10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसानों को अधिकतम तीन टोकन प्राप्त करने की सुविधा होगी। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी पिछले वर्ष की तरह टोकन में धान की मात्रा दर्ज करने की सुविधा रहेगी। किसान अपनी आवश्यकता और उपलब्धता के अनुसार मात्रा दर्ज कर टोकन प्राप्त कर सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि यदि किसान किसी टोकन पर अपनी पूरी पात्र मात्रा का धान नहीं बेचता है, तो उसकी शेष पात्रता समाप्त नहीं होगी। वह पात्रतानुसार शेष मात्रा का धान दूसरे अथवा तीसरे टोकन के माध्यम से बेच सकेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को धान विक्रय के लिए अधिक सुविधा और विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बार-बार सोसायटियों के चक्कर न लगाने पड़ें और वे अपनी सुविधा के अनुसार टोकन प्राप्त कर सुगमता से धान का विक्रय कर सकें।