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जनगणना को लेकर प्रशासन अलर्ट, बलिया में घर-घर पहुंचेंगी गणना टीमें

 बलिया  आठवीं जनगणना को लेकर तहसील प्रशासन तैयारियों के दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं अधूरी नजर आ रही हैं। 22 मई से मकान गणना कार्य शुरू होना है, जबकि बड़ी संख्या में प्रगणकों और सुपरवाइजरों को अब तक जरूरी जनगणना किट नहीं मिल सकी है। इससे अभियान की शुरुआत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जनगणना प्रक्रिया में सबसे पहले “नजरी नक्शा” तैयार किया जाएगा। इसके तहत मोहल्लों, गलियों और मकानों का चिन्हांकन कर प्रारूप बनाया जाएगा। इसके बाद मकानों की गणना और डाटा संग्रहण का कार्य होगा। कर्मचारियों का कहना है कि बिना पूरी किट के फील्ड कार्य प्रभावित हो सकता है। तहसील क्षेत्र में 799 प्रगणक और 138 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। प्रगणकों को वाटर रेजिस्टेंट बैग, राइटिंग बोर्ड, नोटपैड, पेन, मार्कर व आई-कार्ड पाउच सहित 10 प्रकार की सामग्री उपलब्ध कराई जानी है। प्रभारी तहसीलदार देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि किट लखनऊ से डाक के जरिए भेजी जा रही है। कुछ किट पहुंच चुकी हैं और उनका वितरण शुरू कराया जाएगा।

जमीन अधिग्रहण पर बिहार सरकार की राहत, जरूरतमंद परिवारों को चार गुना तक मिलेगा भुगतान

सोनपुर. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को कहा कि यदि किसी की जमीन टाउनशिप के लिए अधिग्रहित होती है और संबंधित परिवार किसी परेशानी में है या घर में बेटी की शादी के लिए जमीन बेचने की जरूरत हो, तो वह जिलाधिकारी को आवेदन देगा। जांच के बाद संबंधित व्यक्ति को जमीन के बदले चार गुना मुआवजा दिया जाएगा, जो सीधे उनके खाते में भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री सोनपुर प्रखंड की डुमरी बुजुर्ग पंचायत में सबका सम्मान-जीवन आसान कार्यक्रम के तहत आयोजित सहयोग शिविर को संबोधित कर रहे थे।  30 दिनों के भीतर समस्या का समाधान उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह के प्रथम और तृतीय मंगलवार को बिहार के सभी जिलों में पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाए जाएंगे। 30 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने सहयोग पोर्टल एवं हेल्पलाइन नंबर 1100 भी शुरू किया है, जिसके माध्यम से लोग अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। आवेदन मिलने के 10 दिन बाद संबंधित अधिकारी को पहला नोटिस, 20वें दिन दूसरा और 25वें दिन तीसरा नोटिस जारी किया जाएगा। 30 दिनों के भीतर समाधान नहीं होने पर संबंधित अधिकारी स्वत: निलंबित माने जाएंगे।  नोएडा की तर्ज पर सोनपुर का विकास विकास योजनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सोनपुर को गोद लिया है। यहां ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई टाउनशिप और हरिहरनाथ कारिडोर परियोजना प्रस्तावित है। सोनपुर को नोएडा की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सेतु और जेपी सेतु के समानांतर नए पुलों का निर्माण हो रहा है। अगले माह कच्ची दरगाह-बिदुपुर तक पुल चालू हो जाएगा। सोनपुर में गंगा-अंबिका पथ का निर्माण कराया जाएगा।  बिहार में बढ़ेंगे उद्योग-धंधे मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योग-धंधों का विस्तार किया जाएगा, ताकि रोजगार के लिए लोगों को बाहर न जाना पड़े। उन्होंने महिला सशक्तीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं 20 हजार करोड़ रुपये का कारोबार कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों से बिहार में बिजली, पानी और सड़क की समस्या का समाधान हुआ है। अब लक्ष्य बिहार को विकास की पहली पंक्ति में खड़ा करना है। कार्यक्रम में महाराजगंज सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विधायक विनय कुमार सिंह, कृष्ण कुमार मंटू, जनक सिंह, मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह, रंधीर सिंह, छोटी कुमारी तथा एमएलसी सच्चिदानंद राय व भाजपा नेता उदय कुमार सिंह ने मंच पर मुख्यमंत्री को सम्मानित किया। समस्याओं का समाधान सीधे प्रशासन से प्राप्त करें सोनपुर विधायक विनय कुमार सिंह ने सम्राट सरकार के जनहित को लेकर शुरू किए गए सहयोग शिविर में लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में भाग लेकर अपनी समस्याओं का समाधान सीधे प्रशासन से प्राप्त करें और सरकार के इस पहल का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोनपुर के धरती से सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद एवं विश्वास के निर्माण का इस शिविर से शुभारंभ किया है। जिससे मै और सोनपुर की समस्त जनता की तरफ से मुख्यमंत्री को बहुत धन्यवाद व आभार व्यक्त करता हूं। विधायक सिंह ने कहा कि सम्राट सरकार ने लोक शिकायतों पर संवेदनशीलता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस शिविर के माध्यम से सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद एवं विश्वास का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि सोनपुर का विकास सम्राट सरकार की प्राथमिकता में है। इस दौरान तरैया विधायक जनक सिंह, अमनौर विधायक कृष्ण कुमार ऊर्फ मंटू सिंह, छपरा विधायक प्रतिनिधि धर्मेंद्र कुमार समेत दर्जनों एनडीए कार्यकर्ता उपस्थित थे।

नवजोत कौर की संत रामपाल से मुलाकात चर्चा में, बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल

अमृतसर. पंजाब कांग्रेस की पूर्व प्रदेश प्रधान और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू की सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल से मुलाकात के बाद पंजाब की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद रामपाल से लगातार विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की मुलाकातें सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में अब नवजोत कौर सिद्धू भी आश्रम पहुंचीं। यह मुलाकात उस समय चर्चा में आई जब रामपाल के आधिकारिक सामाजिक माध्यम चैनल ‘स्प्रीचुअल लीडर संत रामपाल जी’ पर दोनों की बातचीत का वीडियो साझा किया गया। करीब दो मिनट चार सेकेंड के इस वीडियो में नवजोत कौर सिद्धू और रामपाल के बीच बातचीत दिखाई गई है। वीडियो में डॉ. नवजोत कौर सिद्धू अपना परिचय देते हुए कहती हैं कि वह पटियाला से आई हैं। वह बाहर आ गए, नहीं तो उन्हें जेल जाकर मिलना पड़ता। लेकिन भगवान ने उनकी सुन ली और उन्हें बाहर बुला लिया। इस पर रामपाल मुस्कराते हुए कहते हैं कि लोगों की दुआएं उन्हें बाहर ले आईं। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की सेवा केवल राजनीति से ही नहीं बल्कि धर्मनीति से भी की जा सकती है और समाज को अपनी नीति सुधारने की जरूरत है। मुलाकात के दौरान नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि वह रामपाल से भक्ति लेने आई हैं। इस पर रामपाल ने कहा कि भक्ति और सेवा सबसे ऊपर हैं तथा मनुष्य की सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। सेवा करना चाहती हैं नवजोत कौर नवजोत कौर ने जवाब देते हुए कहा कि वह यही दोनों बातें सीखने आई हैं और बाकी सब चीजें उसके बाद की हैं। बातचीत के दौरान नवजोत कौर ने यह भी कहा कि वह राजनीति से ज्यादा धर्म के माध्यम से देश की सेवा करना चाहती हैं। इस पर रामपाल ने कहा कि पुराने समय में राजा धर्मनीति से शासन करते थे और जनता की सेवा करते थे, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब समाज के प्रभावशाली लोग आश्रम में आते हैं तो उनका मनोबल बढ़ता है। पहले भी पहुंची थी सतलोक आश्रम गौरतलब है कि डॉ. नवजोत कौर सिद्धू करीब तीन महीने पहले भी फतेहगढ़ साहिब स्थित सतलोक आश्रम पहुंची थीं। उस दौरान उन्होंने कहा था कि यदि राजनीतिक लोग दूर हो जाएं तो संत समाज ही धरती को संभाल सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि वर्तमान राजनीति में लोग अपनी पहचान भूल चुके हैं।

Census को लेकर सख्ती, सही जवाब देना होगा अनिवार्य; घर के नंबर हटाने पर कार्रवाई

दुर्ग. आगामी जनगणना के सुचारू संचालन के लिए प्रगणकों और नागरिकों के लिए अनिवार्य गाइडलाइंस जारी की हैं। जिसके अनुसार सभी नागरिक प्रगणक द्वारा पूछे गए वैधानिक प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए बाध्य हैं। यही नहीं अगर कोई व्यक्ति मकान पर लिखे नंबर को मिटाया या नुकसान पहुंचाता है तो उस पर 1000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग की अधिसूचना के परिपालन में जिला प्रशासन ने गाइडलाइंस जारी की गई है. इसमें बड़ी बात यह है कि सभी नागरिक प्रगणक द्वारा पूछे गए वैधानिक प्रश्नों का सही उत्तर देने के लिए बाध्य हैं। हालांकि, स्थानीय सामाजिक परंपराओं का सम्मान करते हुए किसी भी महिला को उसके पति/ मृत पति का नाम या किसी भी नागरिक को अपने परिवार के सदस्यों का नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। नागरिकों को अपने घरों में प्रगणकों को युक्तियुक्त प्रवेश देने और मकानों पर जनगणना के लिए आवश्यक नंबर या चिन्ह लगाने की अनुमति देनी होगी। प्रगणकों को भी नागरिकों के साथ शालीन व्यवहार करने और घरेलू रूढ़ियों का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए है। प्रगणकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे वैधानिक सीमा में रहकर केवल केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में निर्दिष्ट और निर्धारित प्रश्नों को ही पूछें तथा नागरिकों से अनावश्यक या अतिरिक्त पूछताछ न करें। साथ ही, अपने कर्तव्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या इंकार करने पर प्रगणकों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है, उत्तर देने से इनकार करता है, या मकानों पर लिखे गए नंबरों को मिटाता / नुकसान पहुंचाता है, तो उस पर 1,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। जनगणना कार्य में बाधा डालने या कार्यालय में अनधिकृत प्रवेश करने पर 1,000 रु. जुर्माने के साथ अधिकतम 3 वर्ष तक की जेल का भी प्रावधान है। जनता के भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया गया है कि जनगणना में प्राप्त किये गए आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। इन्हें किसी भी दीवानी या आपराधिक मामले में कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। ज्ञात हो कि जनगणना के आंकड़ों का प्राथमिक उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सटीक नीति निर्धारण, लोक प्रशासन और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन व आरक्षण के लिए किया जाता है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय कार्य में सही जानकारी देकर सहयोग करने की अपील की है।

महिला स्व-सहायता समूहों ने बदली गांवों की तस्वीर, आत्मनिर्भरता और पोषण का बन रहीं नया आधार

विशेष लेख आत्मनिर्भरता, पोषण और बदलाव की नई पहचान बनीं महिला स्व-सहायता समूह रायपुर छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति को एक साथ जोड़ते हुए राज्य सरकार ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता की नई रोशनी जगाई है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) के निर्माण एवं वितरण का दायित्व महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपकर सरकार ने महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी का अवसर भी प्रदान किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रारंभ की गई यह पहल राज्य में महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में उभर रही है। पहले जहां पूरक पोषण आहार निर्माण का कार्य बाहरी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता था, वहीं अब यह जिम्मेदारी गांव की महिलाओं ने संभाल ली है, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हुआ है और महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रही है। राज्य सरकार ने प्रथम चरण में रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलें में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया है। इन छह जिलें के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण एवं वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन समूहों के माध्यम से हजारों महिलाओं को रोजगार मिली है और वे अब संगठित रूप से उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण का कार्य संभाल रही हैं। प्रदेश का पहला रेडी-टू-ईट उत्पादन रायगढ़ जिले में प्रारंभ हुआ, जिसने पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। कोरबा जिले में 10, रायगढ़ में 10, सूरजपुर एवं बलौदाबाजार-भाटापारा में 7-7, बस्तर में 6 तथा दंतेवाड़ा में 2 महिला स्व-सहायता समूह इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण पूरक पोषण आहार पहुंचाया जा रहा है। इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे महिलाओं की भूमिका केवल श्रमिक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा भी बनी हैं। उत्पादन इकाइयों में कार्यरत महिलाओं को मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, भंडारण वितरण और लेखा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित इन इकाइयों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। सूरजपुर जिले में संचालित रेडी-टू-ईट निर्माण संयंत्र इस बदलाव की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंडों में संचालित संयंत्रों में महिलाएं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार कर रही हैं। इन खाद्य पदार्थों में विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलिक एसिड जैसे आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इन संयंत्रों में कार्यरत महिलाएं अब केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां नहीं निभा रहीं, बल्कि जिले के पोषण अभियान में महत्वपूर्ण भागीदार बन चुकी हैं। सूरजपुर जिले में निर्माण के साथ-साथ वितरण की जिम्मेदारी भी महिला समूहों को सौंपी गई है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं आजीविका से जुड़ सकी हैं। लगभग 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने के कार्य में सक्रिय रूप से लगी हुई हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस पहल को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और बच्चों के बेहतर पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि यह योजना महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दरअसल, यह पहल केवल पोषण आहार निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की एक सशक्त कहानी भी है, जिन महिलाओं की पहचान कभी केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थी, वे आज उत्पादन इकाइयों का संचालन कर रही हैं। समूहों का नेतृत्व कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं। नियमित आय ने उनके जीवन में स्थिरता लाई है, आत्मविश्वास बढ़ाया है और समाज में उनकी भागीदारी को मजबूत किया है। छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित यह मॉडल “पोषण के साथ सशक्तिकरण” की अवधारणा को वास्तविक रूप दे रहा है। यह पहल साबित कर रही है कि जब महिलाओं को अवसर और विश्वास मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन को बदलती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास की दिशा भी तय करती हैं। • डॉ. दानेश्वरी संभाकर • उप संचालक (जनसंपर्क)

गिरते रुपये पर सरकार का बड़ा प्लान, विदेशी आयात घटाने की रणनीति पर काम तेज

नई दिल्ली भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 96.5 पर बंद हुआ, जबकि  यह 96.34 पर था. इस गिरते हुए रुपया को संभालने के लिए पिछले महीने ही आरबीआई ने कई अहम कदम उठाए थे. लेकिन इससे भी कुछ खास असर पड़ता हुआ नजर नहीं आया।  अब सरकार देश के बढ़ते इंपोर्ट बिल को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गैर-जरूरी(non essential) सामानों के इंपोर्ट की समीक्षा कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, जिन सामानों में भारत की विदेशों पर निर्भरता कम है, उनके आयात पर ज्यादा चार्ज या कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  पेमेंट बैलेंस पर दबाव इस मुद्दे पर अगले हफ्ते पश्चिम एशिया संकट को लेकर होने वाली मंत्रालय की बैठक में चर्चा हो सकती है. भारत का ट्रेड डेफिसिट अप्रैल में बढ़कर 28.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो मार्च में 20.7 अरब डॉलर था. इससे देश के पेमेंट बैलेंस पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि विदेशी निवेश में कमी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बाहर जाने जैसी चुनौतियां भी सामने हैं।  इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि अगर आयात पर कोई रोक या अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो उसे बहुत सोच-समझकर लागू किया जाएगा, ताकि जरूरी सप्लाई चेन और उद्योगों पर कोई बड़ा असर न पड़े।  रुपये की स्थिति सुधारने के लिए सरकार का कदम अगले हफ्ते होने वाली बैठक में सरकार गैर-जरूरी सामानों(non essential items) के आयात को कम करने, रुपये की स्थिति सुधारने और अर्थव्यवस्था को गति देने के उपायों पर चर्चा करेगी. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ऐसे कदमों पर विचार कर रही है जिससे देश का इंपोर्ट बिल कम हो और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिले।  इस बैठक में वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम मंत्रालयों के अधिकारी शामिल होंगे. साथ ही रेवेन्यू बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए तुरंत लागू किए जा सकने वाले उपायों पर भी चर्चा की जाएगी।  इंपोर्टेड सामानों नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी सरकार का मानना है कि कई ऐसे सामान विदेशों से इंपोर्ट किए जा रहे हैं, जिन्हें भारत में ही बनाया जा सकता है. इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. अधिकारियों ने कहा कि सरकार उद्योगों से बातचीत कर रही है ताकि गैर-जरूरी आयात कम हो सके. जरूरत पड़ने पर कुछ सामानों पर इंपोर्ट बिल बढ़ाया जा सकता है या नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  सोने के आयात पर सरकार का फैसला हाल ही में सरकार ने सोने के आयात को कम करने के लिए कस्टम ड्यूटी बढ़ाई थी और कुछ नियम भी लागू किए थे. सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिसमें 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत सेस शामिल है. सरकार का मानना है कि इससे गोल्ड इंपोर्ट कम होगा, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और देश का बढ़ता इंपोर्ट बिल नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।  अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में उठाए जाने वाले कदम पूरी योजना और संतुलन के साथ होंगे, ताकि जरूरी सामानों और मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर असर न पड़े. इसका मकसद रुपये को मजबूती देना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।  सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन सामानों की लिस्ट मांगी है जिनके आयात को सीमित किया जा सकता है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कारोबारियों से कहा है कि जिन चीजों का उत्पादन भारत में हो सकता है, उन्हें विदेशों से मंगाने से बचना चाहिए. उनका कहना है कि कई सस्ते आयातित सामान की क्वालिटी भी अच्छी नहीं होती, इसलिए देश में निर्माण बढ़ाना जरूरी है। 

पाकिस्तान को 2-0 से हराकर बांग्लादेश ने लगाई लंबी छलांग, WTC रैंकिंग में टीम इंडिया को पीछे छोड़ा

 नई दिल्ली टीम इंडिया को वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) 2025-27 की अंक तालिका में बड़ा नुकसान हुआ है. बांग्लादेश राष्ट्रीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-0 से हराकर अंक तालिका में भारत को पीछे छोड़ दिया है. ताजा रैंकिंग में बांग्लादेश पांचवें और भारत छठे स्थान पर पहुंच गया है।  बांग्लादेश ने पहले टेस्ट में पाकिस्तान को 104 रनों से हराया था. इसके बाद दूसरे टेस्ट में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 78 रनों से जीत दर्ज की और सीरीज पर 2-0 से कब्जा कर लिया. इस जीत के साथ बांग्लादेश के चार टेस्ट मैचों में दो जीत, एक हार और एक ड्रॉ के बाद 58.33 प्रतिशत अंक हो गए हैं।  वहीं, भारत राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खाते में 9 टेस्ट मैचों के बाद 48.15 प्रतिशत अंक हैं. भारतीय टीम ने अब तक चार मुकाबले जीते हैं, चार में हार मिली है, जबकि एक टेस्ट ड्रॉ रहा है. शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम ने इस साल अभी तक कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है।  भारत ने डब्ल्यूटीसी के पहले दो संस्करणों के फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन मौजूदा चक्र में टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. भारत को घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ 0-2 से टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी. इसके अलावा इंग्लैंड दौरे पर भी टीम को दो हार मिली थीं, हालांकि पांच मैचों की सीरीज 2-2 से बराबरी पर खत्म हुई थी।  अब एशियाई टीमों में भारत सिर्फ पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम से ऊपर है. हालांकि टीम इंडिया के पास वापसी का मौका रहेगा. भारत 6 जून से अफगानिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच खेलेगा, लेकिन यह मुकाबला डब्ल्यूटीसी चक्र का हिस्सा नहीं होगा।  इसके बाद भारतीय टीम इस साल श्रीलंका और न्यूजीलैंड के दौरे पर दो-दो टेस्ट मैच खेलेगी. वहीं 2027 में घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के खिलाफ अहम टेस्ट सीरीज खेली जाएगी।  दूसरी ओर, पाकिस्तान राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की स्थिति और खराब हो गई है. पाकिस्तान ने मौजूदा डब्ल्यूटीसी चक्र में चार टेस्ट मैचों में सिर्फ एक जीत हासिल की है और टीम आठवें स्थान पर बनी हुई है. दूसरे टेस्ट में पाकिस्तान 437 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 358 रनों पर ऑलआउट हो गया।  डब्ल्यूटीसी अंक तालिका में फिलहाल ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर कायम है. ऑस्ट्रेलिया ने 8 टेस्ट मैचों में 7 जीत दर्ज की हैं और उसके 87.50 प्रतिशत अंक हैं. दूसरे स्थान पर न्यूजीलैंड, तीसरे पर साउथ अफ्रीका और चौथे नंबर पर श्रीलंका मौजूद है।  आइए समझाते हैं की PCT निकालते कैसे हैं अभी बांग्लादेश के 4 मैच में 28 अंक है.  PCT = (टीम द्वारा प्राप्त अंक / टीम द्वारा प्राप्त किए जा सकने वाले अधिकतम अंक) × 100 ऐसे में 4  टेस्ट × 12 अंक = 48 संभावित अंक अब PCT निकालते हैं: PCT = (28 / 48) × 100 = 58.33% इसलिए बांग्लादेश का PCT = 58.33% है  वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) में पॉइंट्स और रैंकिंग कैसे तय होती है? – जीत पर टीम को 12 अंक मिलते हैं – मैच टाई होने पर 6 अंक दिए जाते हैं – ड्रॉ मुकाबले पर 4 अंक मिलते हैं – टीमों की रैंकिंग जीत प्रतिशत (PCT) के आधार पर तय की जाती है – अंक तालिका की टॉप-2 टीमें 2027 WTC फाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगी – स्लो ओवर रेट की स्थिति में टीमों के अंक काटे भी जा सकते हैं अपडेटेड वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) पॉइंट्स टेबल स्थान            टीम    मैच जीत  हार     ड्रॉ  कटे अंक अंक     PCT 1    ऑस्ट्रेलिया     8   7    1 0 0 84  87.50 2    न्यूजीलैंड     3   2    0 1 0 28 77.78 3 साउथ अफ्रीका      4   3    1 0 0 36  75.00 4     श्रीलंका     2   1    0 1 0 16 66.67 5    बांग्लादेश     4   2    1 1 0 28 58.33 6      भारत        9   4    4 1 0 52  48.15 7     इंग्लैंड    10   3    6 1 2 38 31.67 8   पाकिस्तान      4   1    3 0 8 4   8.33 9    वेस्टइंडीज     8   0    7 1 0 4 4.17     

काल भैरव मंदिर में शुरू हुई पेड VIP दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालुओं को मिलेगी अलग सुविधा

उज्जैन  मध्यप्रदेश के उज्जैन में राजाधिराज महाकाल के कोतवाल बाबा कालभैरव मंदिर में अब प्रोटोकॉल दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 500 रुपए शुल्क चुकाना होगा। नई व्यवस्था बुधवार 20 मई से लागू की जा रही है। शुल्क जमा करने वाले श्रद्धालुओं को विशेष व्यवस्था के तहत गर्भगृह तक ले जाया जाएगा, जहां वे पुजारी के माध्यम से बाबा कालभैरव को मदिरा का भोग अर्पित कर दर्शन कर सकेंगे। 500 रुपये बाबा कालभैरव के VIP दर्शन मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं को 500 रुपए की अधिकृत रसीद दी जाएगी। इसके बाद उन्हें सामान्य कतार से अलग गर्भगृह तक पहुंचाया जाएगा। श्रद्धालु अपने साथ लाई मदिरा पुजारी को सौंपेंगे और उनके सामने ही बाबा को भोग लगाया जाएगा। यह शुल्क महाकाल के विभिन्न दर्शन शुल्क के मुकाबले दोगुना है। प्रतिदिन पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु कालभैरव मंदिर में प्रतिदिन करीब 50 से 60 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं पर्व और त्योहारों पर यह संख्या एक लाख से अधिक हो जाती है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और प्रोटोकॉल दर्शन की मांग को देखते हुए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। महाकाल मंदिर की तर्ज पर शुरू हुई व्यवस्था महाकाल मंदिर में पहले से ही विभिन्न दर्शन और आरती व्यवस्थाएं सशुल्क संचालित हैं। भस्म आरती में प्रवेश के लिए प्रति श्रद्धालु 200 रुपए शुल्क लिया जाता है। वहीं संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए ऑनलाइन शुल्क निर्धारित है। शीघ्र दर्शन व्यवस्था भी 250 रुपए में उपलब्ध है। इसी तर्ज पर अब कालभैरव मंदिर में भी प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा लागू की गई है, हालांकि शुल्क दोगुना रखा गया है। सीमित संख्या में रहेगी शुरुआत प्रोटोकॉल से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल सीमित संख्या में यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर आगे इसकी समीक्षा कर व्यवस्था को और सुचारू बनाने पर निर्णय लिया जाएगा। संध्या मार्कण्डेय, प्रशासक, कालभैरव मंदिर बाहरी तत्वों पर कसेगी लगाम फिलहाल वीआइपी प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था लागू की है। यह इसलिए किया जा रहा है, ताकि बाहरी तत्वों के चुंगल में फंसकर ये श्रद्धालु वैसे ही रुपए देकर गर्भगृह तक पहुंच रहे थे, तो यह राशि इस तरह से अब मंदिर की आय का स्रोत बनेगी। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था नि:शुल्क है। एलएन गर्ग, एसडीएम

बिहार में गंगा दशहरा पर नई धार्मिक पहल, अब रोज मंदिरों में गूंजेगी गंगा आरती

पटना. राज्य में गंगा तट पर स्थित बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद से संबद्ध सभी मठ-मंदिरों में अब प्रतिदिन गंगा आरती होगी। इसको लेकर धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन की ओर से सभी मठ-मंदिरों के महंत, न्यासधारी, न्यास समिति के सदस्यों एवं प्रबंधकों को पत्र भेजा जा रहा है। रणवीर नंदन ने बताया कि मां गंगा के अवतरण दिवस गंगा दशहरा पर 25 मई से भव्य गंगा आरती की शुरुआत की जाएगी। राज्य में पटना, बक्सर, आरा, छपरा, फतुहां, बख्तियारपुर, मुंगेर, भागलपुर और वैशाली समेत गंगा तट से जुड़े सभी क्षेत्रों के मठ-मंदिरों में आरती की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।  कहा कि इस आयोजन के माध्यम से अविरल गंगा, स्वच्छ गंगा, स्वस्थ गंगा और स्वस्थ बिहार का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही गंगा की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे। मंदिरों को भेजी जाएगी चिट्ठी – भागलपुर जिला: श्री अजगैबी नाथ मंदिर सुलतानगंज, श्री बुढ़ानाथ मंदिर, श्री राधाकृष्ण मंदिर गोलाघाट, श्री बटेश्वर स्थान कहलगांव, श्री रामजानकी त्रिमुहान कहलगांव। मुंगेर जिला: श्री जगरनाथ मंदिर कष्टहरणी घाट मुगेर, श्री राम मंदिर कष्टहरणी घाट, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर कष्टहरणी घाट, श्री रामजानकी मंदिर सोझी घाट, श्री रामाजनकी मंदिर बेलवाघाट बक्सर जिला: श्री विश्वामित्र आश्रम बड़ी मठिया रामरेखा घाट, श्री रामेश्वरनाथ महादेव मंदिर रामरेखा घाट, श्री चरित्रवन मंदिर बक्सर। पटना: श्री काली स्थान, सती स्थान, श्री शंकर स्थान बांसघाट, श्री विष्णु भगवान मंदिर सुमति पथ रानी घाट महेन्द्रु, श्री भगवती सीता मंदिर सीता घाट, श्री जल गोविंद स्थान कछुआरा, श्री मौनी बाबा का आश्रम गाढ़ोचक कृपाल टोला फतुहां, श्रीराम जानकी ठाकुरबाड़ी फतुहां, श्री गंगा मंदिर रिकाबगंज मालसलामी पटना सिटी।

पुलिस और गैंगस्टर गठजोड़ का बड़ा खुलासा, पूर्व DSP ने लॉरेंस बिश्नोई को भेजा खास तोहफा

चंडीगढ़. गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े विवादित टीवी इंटरव्यू मामले की जांच के बीच पंजाब पुलिस और गैंगस्टर नेटवर्क की कथित सांठगांठ को लेकर एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच में सामने आया है कि जिस समय लारेंस के इंटरव्यू प्रकरण की जांच चल रही थी, उसी दौरान पंजाब पुलिस के एक डीएसपी ने उसके जन्मदिन पर अहमदाबाद की साबरमती जेल में खास तोहफा भिजवाया। इस दावे ने पुलिस महकमे में हलचल बढ़ा दी है और एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या कुछ पुलिस अधिकारी गैंगस्टरों के साथ सीधे संपर्क में थे। सूत्रों के अनुसार, मामला पंजाब पुलिस के पूर्व डीएसपी गुरशेर सिंह संधू से जुड़ा है। वही गुरशेर सिंह संधू, जिन्हें लारेंस बिश्नोई के विवादित इंटरव्यू में कथित मदद देने के आरोप में पहले ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। पूछताछ रिपोर्ट में क्या दावा? अब एक पूछताछ रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फरवरी 2024 में उन्होंने लारेंस के लिए जन्मदिन का तोहफा भेजा था। इसमें टोपियां, मुरब्बे का डिब्बा और कुछ अन्य सामान शामिल बताया गया है, जिसे उसके करीबी के माध्यम से साबरमती जेल तक पहुंचाया गया। यह खुलासा बिश्नोई गिरोह के सदस्य रहे राजवीर सिंह उर्फ रवि राजगढ़ के बयान में हुआ है। जुलाई 2025 में आर्म्स एक्ट के मामले में गिरफ्तार राजवीर ने पूछताछ के दौरान बताया कि 10 फरवरी 2024 को उसे लॉरेंस बिश्नोई का फोन आया था। फोन पर उसे निर्देश दिया गया कि वह मोहाली के फेज-7 स्थित डीएसपी कार्यालय से कुछ सामान ले और अगले दिन 11 फरवरी को, जो लारेंस का जन्मदिन था, अहमदाबाद पहुंचा दे। इसके बाद वह कार्यालय गया, जहां से उसे सामान सौंपा गया। अगले दिन वह एक अन्य साथी सुपिंदर सिंह के साथ हवाई जहाज से अहमदाबाद पहुंचा और साबरमती जेल में यह सामान लारेंस तक पहुंचाया। विवादित इंटरव्यू को लेकर दर्ज हुई थी FIR पूछताछ रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब लॉरेंस के विवादित इंटरव्यू को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर एफआईआर दर्ज हो चुकी थी और मामला स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के पास था। ऐसे में जांच के दौरान ही एक पुलिस अधिकारी द्वारा गैंगस्टर को उपहार भेजे जाने का दावा पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पुलिस महकमे के भीतर कुछ अधिकारी गैंगस्टरों को विशेष सुविधा और संरक्षण मुहैया करा रहे थे। गौरतलब है कि सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद लारेंस बिश्नोई के लगातार दो टीवी इंटरव्यू सामने आए थे। इन इंटरव्यू ने देशभर में सनसनी मचा दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद गठित एसआईटी ने जांच में पाया था कि सितंबर 2022 में खरड़ सीआईए कार्यालय में यह इंटरव्यू रिकॉर्ड किए गए थे। लॉरेंस डीएसपी गुरशेर सिंह संधू की हिरासत में था उस दौरान लॉरेंस डीएसपी गुरशेर सिंह संधू की हिरासत में था। जांच में यह भी सामने आया था कि सीआईए कार्यालय को अस्थायी स्टूडियो की तरह तैयार किया गया था। इस मामले में अक्टूबर 2024 में दो डीएसपी समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। बाद में 2025 की शुरुआत में गुरशेर सिंह संधू को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। बताया जा रहा है कि वह तब से फरार है। अब नए खुलासे के बाद जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल में जुट सकती हैं कि क्या यह सिर्फ उपहार भेजने तक सीमित मामला था या पुलिस और गैंगस्टर नेटवर्क के बीच संपर्क की कड़ियां इससे कहीं ज्यादा गहरी थीं।