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रक्षा तकनीक में बड़ा कदम, IIT रोपड़ विकसित करेगा AI टैंक और लेजर ड्रोन-रोधी सिस्टम

चंडीगढ़ भारतीय सेना को आधुनिक और स्वदेशी हथियारों से लैस करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पंजाब स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), रोपड़ ने आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (ATB) से कुल 120 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट हासिल किए हैं। 27वें आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड साइकिल के तहत दिए गए इन प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना के लिए 'स्वायत्त बख्तरबंद वाहन' (Autonomous Armoured Vehicles) और 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' (Directed Energy Weapons) विकसित करना है। यह कदम न केवल सीमा पर सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य की युद्ध तकनीकों में भारत को आत्मनिर्भर भी बनाएगा। बिना इंसानी मदद के चलेंगे बख्तरबंद वाहन इस पहल का पहला प्रमुख हिस्सा अगली पीढ़ी के कॉम्बैट प्लेटफॉर्म यानी स्वायत्त बख्तरबंद वाहनों का विकास है। ये ऐसे वाहन या टैंक होंगे जिन्हें चलाने के लिए इंसानों की कम से कम जरूरत पड़ेगी। आईआईटी रोपड़ के निदेशक राजीव आहूजा के अनुसार, ये सिस्टम नेविगेशन, खतरों की पहचान करने और युद्ध के मैदान में सटीक निर्णय लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे दुश्मन के चुनौतीपूर्ण इलाकों और प्रतिकूल परिस्थितियों में काम कर रहे हमारे सैनिकों के लिए जोखिम काफी कम हो जाएगा। भविष्य की तकनीक: डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) आईआईटी रोपड़ का दूसरा प्रोजेक्ट 'डायरेक्टेड एनर्जी वेपन' के विकास से जुड़ा है। ये हथियार आधुनिक युद्ध क्षेत्र के लिए 'गेम-चेंजर' माने जा रहे हैं। इनमें दुश्मनों के खतरों को बेअसर करने के लिए अत्यधिक केंद्रित विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा बीम का इस्तेमाल किया जाता है। निदेशक आहूजा ने बताया कि एंटी-ड्रोन ऑपरेशन, मिसाइल रक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) अनुप्रयोगों के लिए इन प्रणालियों को आधुनिक युद्ध में बेहद मारक और उपयोगी माना जा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक विकास को मिलेगा बूस्ट भारतीय सेना के सैन्य संचालन निदेशालय ) के तहत काम करने वाला एटीबी (ATB) उभरती तकनीकी आवश्यकताओं की पहचान करता है और उन्नत समाधान देने में सक्षम संस्थानों को महत्वपूर्ण अनुसंधान और विकास कार्य सौंपता है। आईआईटी रोपड़ को ये दोनों प्रोजेक्ट रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, फोटोनिक्स और लेजर तकनीक में उसकी विशेषज्ञता के आधार पर मिले हैं। संस्थान के निदेशक ने इसे सेना द्वारा उनके रिसर्च इकोसिस्टम पर जताए गए भरोसे का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा, "हमारे संकाय और छात्र रक्षा प्रौद्योगिकी डोमेन में कठोर परिश्रम कर रहे हैं। हम इसे राष्ट्रीय सुरक्षा में सीधे योगदान के रूप में देखते हैं और इसे सामरिक रक्षा कार्यक्रमों के लिए आवश्यक अनुशासन के साथ पूरा करेंगे।" इन प्रोजेक्ट्स का असर केवल सेना तक सीमित नहीं रहेगा। आईआईटी रोपड़ के अधिकारियों का कहना है कि इन रक्षा कार्यक्रमों से क्षेत्र में भारी आर्थिक गतिविधियां भी पैदा होंगी। कलपुर्जों के निर्माण और परीक्षण के लिए स्टार्टअप्स, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और उद्योग भागीदारों के साथ सहयोग किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह के बड़े तकनीकी कार्यक्रमों से रिसर्च संस्थानों के आसपास एक 'इनोवेशन इकोसिस्टम' तैयार होता है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और विशेष उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।

महाराष्ट्र TET एग्जाम टला, पेपर लीक की आशंका; वायरल प्रश्नों से हूबहू मैच होने पर बड़ा फैसला

मुंबई  सरकारी नौकरी और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं पर से पेपर लीक का साया हटने का नाम नहीं ले रहा है. अब बेहद चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र से आया है. 28 जून 2026 को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा को अचानक स्थगित कर दिया गया है. महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने भिवंडी में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद यह फैसला लिया है. इस फैसले से राज्य के लाखों उम्मीदवारों में हड़कंप मच गया है, जो इस रविवार को परीक्षा देने की पूरी तैयारी कर चुके थे।  महाराष्ट्र टीईटी (Maha TET 2026) को लेकर छात्रों का गुस्सा और निराशा साफ देखी जा सकती है. भिवंडी में कुछ संदिग्धों के पास से प्रश्नपत्र से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी बरामद हुई थी, जिसके बाद प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना पड़ा. महाराष्ट्री टीईटी परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले इस खुलासे ने परीक्षा कराने वाली सुरक्षा व्यवस्था और एजेंसियों की पोल खोल दी है. .भिवंडी पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को हिरासत में लिया है. परिषद का कहना है कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए इसे टालना बेहद जरूरी था।  भिवंडी में पुलिस की छापेमारी से हुआ खुलासा भिवंडी पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों और प्रश्नपत्र से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक होने की गुप्त सूचना मिली थी. पुलिस ने बिना वक्त गंवाए संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की और वहां से कुछ आपत्तिजनक सामग्री बरामद की. भिवंडी पुलिस के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लग गए, जिसने महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा कराने वाली परिषद के होश उड़ा दिए. इसके तुरंत बाद भिवंडी पुलिस थाने में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।  बरामद दस्तावेज और असली पेपर में निकली समानता शुरुआती जांच में जब पुलिस की तरफ से बरामद की गई सामग्री का मिलान 28 जून को होने वाली असली TET 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्र से किया गया तो अधिकारी हैरान रह गए. बरामद सामग्री और परीक्षा के कुछ प्रश्नों में गजब की समानता पाई गई. इसका साफ मतलब था कि पेपर लीक की पूरी तैयारी हो चुकी थी और कुछ चुनिंदा लोगों तक सवाल पहुंच चुके थे. इस गंभीर गड़बड़ी के सामने आते ही परीक्षा रद्द करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।  पारदर्शिता के लिए टाली परीक्षा महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस रिलीज जारी की. परिषद ने साफ किया कि उनके लिए परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सबसे ऊपर है. अगर इस स्थिति में परीक्षा कराई जाती तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता. इसलिए 28 जून को प्रस्तावित महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा 2026 को फिलहाल रोकने का सख्त फैसला लिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को दागदार होने से बचाया जा सके।  उम्मीदवारों के भविष्य पर सस्पेंस, कब होगी परीक्षा? इस अचानक आए फैसले से उन लाखों उम्मीदवारों को गहरा झटका लगा है जो महीनों से दिन-रात एक करके इस शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. सोशल मीडिया पर छात्र अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. परीक्षा परिषद ने उम्मीदवारों को ढांढस बंधाते हुए कहा है कि इस रैकेट की गहराई से जांच की जा रही है. परीक्षा की नई तारीखों और आगे के शेड्यूल को लेकर जल्द ही परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर नया नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।  दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई परीक्षा परिषद की डिप्टी कमिश्नर प्रिया शिंदे ने बताया कि पुणे परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित यह परीक्षा राज्य के 37 शहरों के 1728 केंद्रों पर होने वाली थी. इसमें करीब 6 लाख 12 हजार 500 उम्मीदवारों को शामिल होना था. लेकिन ठाणे और भिवंडी में पेपर लीक होने के बाद इसे स्थगित करना पड़ा. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में उम्मीदवारों की कोई गलती नहीं है. इसलिए उन्हें दोबारा परीक्षा के लिए न तो रजिस्ट्रेशन कराना होगा और न ही कोई फीस देनी होगी. डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि एक परीक्षा आयोजित करने में करीब 3 हफ्ते लगते हैं. दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।   

रूस में इवानोव की मौत से बढ़ीं अटकलें, पुतिन के भरोसेमंद सहयोगी को लेकर कई सवाल

मॉस्को  कभी रूस के राष्ट्रपति पुतिन के उत्तराधिकारी समझे जाने वाले सर्गेई इवानोव की मृत्यु हो गई है. सर्गेई इवानोव रूस के रक्षा मंत्री रह चुके थे. उन्हें कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था. वे 73 साल के थे।  खास बात यह है कि क्रेमलिन ने बताया कि इवानोव की मौत शुक्रवार को हुई, लेकिन मौत की वजह या अन्य कोई जानकारी नहीं दी. लेकिन क्रेमलिन इसके बारे में कोई डिटेल नहीं दे रहा है. हालांकि पुतिन ने इवानोव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की. रूस समेत सोशल मीडिया में इस बारे में चर्चा हो रही है।  पुतिन ने 2001 में इवानोव को अपना रक्षा मंत्री नियुक्त किया था. इवानोव भी रूस की खुफिया एजेंसी KGB के अधिकारी थे. इवानोव वे 2007 तक इस पद पर रहे और चेचन्या में दूसरे युद्ध के दौरान कामकाज संभाला, जिसमें उस इलाके की अलगाववादी कोशिशों को कुचल दिया गया था।  द सोवियत जेम्स बॉन्ड लेनिनग्राद में जन्मे इवानोव ने KGB में नौकरी की. यहीं पर पुतिन के साथ उनकी दोस्ती हुई. दोनों KGB के लेनिनग्राद डायरेक्टोरेट में साथ काम करते थे. 1998 में जब पुतिन FSB के प्रमुख बने, तो इवानोव उनके डिप्टी बने. पुतिन के राष्ट्रपति बनने के बाद इवानोव ने अहम पद संभाले।  इन पदों में सुरक्षा परिषद सचिव, रक्षा मंत्री, प्रथम उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख शामिल हैं. वे ‘सिलोविकी’ के प्रमुख चेहरे थे. सिलोविकी सुरक्षा एजेंसियों से आए अफसरों के शक्तिशाली समूह को कहा जाता है. एक समय उन्हें पुतिन का संभावित उत्तराधिकारी भी माना जाता था. पुतिन के साथ उनका रिश्ता KGB के दिनों से गहरा और विश्वास-आधारित था. पुतिन उन्हें अपने सबसे करीबी और भरोसेमंद साथियों में गिनते थे. लेकिन जैसा कि राजनीति में होता है जिससे नजदीकी होती है उसी से अविश्वास भी होता है।   इवानोव को रूस के सर्कल में सोवियत जेम्स बॉन्ड कहा जाता था. इवानोव के करियर में हुई तरक्की का काफी हद तक श्रेय पुतिन के साथ उनकी पुरानी दोस्ती को जाता है. दोनों दोस्त पहली बार 1970 के दशक के आखिर में KGB अफसरों के तौर पर मिले थे. दोनों ने सोवियत जासूसी केंद्रों में काम किया. पुतिन पूर्वी जर्मनी में थे और इवानोव की तैनाती फिनलैंड और केन्या में थी।  पत्रकार मिखाइल ज़ीगर ने अपनी किताब 'ऑल द क्रेमलिन मेन्स' में लिखा, "वह एक आदर्श सोवियत जासूस हैं. आप उन्हें भीड़ में अलग से नहीं पहचान सकते, वह 'द मैट्रिक्स' के एजेंट स्मिथ जैसे हैं, नाम में भी और शक्ल में भी. "1990 के दशक में रूस की दो मुख्य खुफिया एजेंसियां FSB (फ़ेडरल सिक्योरिटी सर्विस) और SVR (फ़ॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस) उन्हें पाने के लिए होड़ कर रही थीं।  SVR में इवानोव को यूरोपीय विभाग का पहला डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया और 40 साल की उम्र के शुरुआती दौर में ही वह सबसे कम उम्र के जनरलों में से एक बन गए. लेकिन इस एजेंट को पाने की होड़ में जीत FSB की हुई, जब पुतिन उसके प्रमुख बने. 1998 में उन्होंने इवानोव को अपना डिप्टी नियुक्त किया. जिससे एजेंसी का एनालिटिकल काम मज़बूत हुआ. जब पुतिन प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इवानोव को रूसी सुरक्षा परिषद का प्रमुख नियुक्त किया।  इवानोव पुतिन के उत्तराधिकारियों में से थे जब 2008 में पुतिन ने कार्यकाल की सीमा के कारण पद छोड़ने और प्रधानमंत्री बनने का फ़ैसला किया, तो इवानोव को उनका सबसे संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था.  लेकिन पुतिन ने अपने एक और पुराने सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव को अपनी जगह काम करने के लिए चुना ताकि 2012 में राष्ट्रपति पद पर वापसी कर सकें।  इवानोव की महात्वाकांक्षा और पुतिन का डर कुछ जानकारों का मानना ​​था कि पुतिन ने इवानोव की उम्मीदवारी को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि इवानोव बहुत ज़्यादा महत्वाकांक्षी हैं और उन्हें डर था कि वे राष्ट्रपति पद पर बने रहने की कोशिश कर सकते हैं।  इवानोव 2007 से 2011 तक उप-प्रधानमंत्री के तौर पर पुतिन के साथ रहे और फिर 2011 से 2016 तक क्रेमलिन के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के तौर पर काम किया।  2016 में इवानोव को पर्यावरण संरक्षण और परिवहन के लिए राष्ट्रपति का विशेष दूत नियुक्त किया गया; इस पद का कोई राजनीतिक महत्व नहीं था और इसे ज़्यादातर लोग सम्मानजनक रिटायरमेंट के तौर पर देख रहे थे. उन्होंने इस साल की शुरुआत में यह पद छोड़ दिया।  यूक्रेन में मॉस्को की सैन्य कार्रवाई के जवाब में रूस के अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ इवानोव पर भी अमेरिका और यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं। 

यूरोपियन टूरिस्ट्स के लिए जैसलमेर बना पसंदीदा डेस्टिनेशन, होटल और कारोबारियों में उम्मीद

 जैसलमेर रेगिस्तान की भीषण गर्मी के बीच जैसलमेर एक बार फिर विदेशी पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है. इस ऑफ-सीजन रहने में भी शहर यूरोपियन पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है. 15 जुलाई से पर्यटकों की आवाजाही शुरू होने की संभावना है. यूरोप में समर वेकेशन के चलते फ्रांस, इटली, स्पेन और जर्मनी समेत कई देशों से बड़ी संख्या में लॉन्ग-स्टे टूरिस्ट जैसलमेर पहुंचेंगे. इसे देखते हुए होटल, रिसॉर्ट, ट्रैवल एजेंसियां और टूर ऑपरेटर तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं. भीड़भाड़ के बचने के लिए इन महीनों में आते हैं पर्यटक पर्यटन व्यवसायियों के अनुसार, यूरोपीय पर्यटक भीड़भाड़ वाले पीक सीजन के बजाय जुलाई-अगस्त में जैसलमेर आना पसंद करते हैं. वे यहां की संस्कृति, लोकजीवन, विरासत और रेगिस्तानी परिवेश को करीब से समझने के लिए लंबे समय तक ठहरते हैं. इससे होटल उद्योग के साथ टैक्सी संचालकों, गाइड, हस्तशिल्प कारोबारियों और लोक कलाकारों को भी अच्छा रोजगार मिलता है. टूरिज्म सेक्टर से जुड़े जितेंद्र कुमार होटल कारोबारी जितेंद्र कुमार बिस्सा ने बताया कि जैसलमेर में पर्यटन सीजन की शुरुआत जुलाई से मानी जाती है. 15 जुलाई के बाद यूरोप से पर्यटकों का आगमन बढ़ जाता है और जुलाई से सितंबर तक का समय पर्यटन के लिए काफी महत्वपूर्ण रहता है. उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात सामान्य होने से इस बार पर्यटन कारोबार के बेहतर रहने की उम्मीद है. 'स्लो टूरिज्म' पसंद करते हैं यूरोपीय पर्यटक वहीं, फ्रेंच भाषी पर्यटन व्यवसायी कौशल के मुताबिक, शुरुआती दौर में अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण बुकिंग को लेकर चिंता थी. अब यूरोप से लगातार बुकिंग मिल रही है. यूरोपीय पर्यटक 'स्लो टूरिज्म' को प्राथमिकता देते हैं और जैसलमेर की विरासत व संस्कृति को आराम से अनुभव करना चाहते हैं. टूरिज्म सेक्टर से जुड़े नरेंद्र छंगानी बताते हैं कि इस सीजन में होटलों के किराए अपेक्षाकृत कम रहते हैं. इससे पर्यटक लंबे समय तक रुकते हैं. सितंबर के बाद होटल दरें बढ़ने से पहले उन्हें बेहतर सुविधाएं और विशेष डिस्काउंट का लाभ मिलता है. यूरोप में गर्मियों की छुट्टियां होने के चलते पर्यटक जैसलमेर पहुंचेंगे. ऑफ-सीजन में टूरिज्म से जगी उम्मीद पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी उम्मीद है. उनका मानना है कि अगर हर साल की तरह इस बार भी यूरोपियन पर्यटकों का सिलसिला शुरू होता है तो ऑफ-सीजन में भी जैसलमेर का पर्यटन उद्योग गुलजार रहेगा. भीषण गर्मी के बावजूद स्वर्णनगरी की गलियां एक बार फिर विदेशी मेहमानों की चहल-पहल से आबाद नजर आएंगी.

न्यू बिलिंग सिस्टम लागू होने से डिजिटल बिजली सेवाओं पर अस्थायी रोक, उपभोक्ताओं को राहत भी मिली

 पटना बिहार के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा विभाग की ओर से एक बेहद जरूरी सूचना जारी की गई है। अगर आप भी अपने घर या दुकान का बिजली बिल ऑनलाइन जमा करते हैं या स्मार्ट मीटर रिचार्ज करने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को आज रात से अगले 24 घंटे तक किसी भी प्रकार की ऑनलाइन डिजिटल सेवाएं नहीं मिल सकेंगी। बिजली कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को भविष्य में अधिक सुरक्षित, सुगम और आधुनिक डिजिटल सुविधाएं प्रदान करने के लिए एक न्यू बिलिंग सिस्टम को लागू किया जा रहा है। इसी तकनीकी अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस कार्य के चलते बिजली से जुड़ी तमाम डिजिटल सुविधाओं को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया गया है। शनिवार की रात 8 बजे से 28 जून की रात 8 बजे तक बंद रहेगा पूरा पोर्टल इस तकनीकी बदलाव के कारण राज्य के उत्तर और दक्षिण दोनों बिजली डिस्कॉम के उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। इस वजह से शनिवार की रात 8 बजे से लेकर अगले दिन यानी 28 जून की रात 8 बजे तक बिजली उपभोक्ताओं से संबंधित सभी ऑनलाइन सेवाएं पूरी तरह और अस्थायी रूप से बंद कर दी जाएंगी। इस 24 घंटे की अवधि के दौरान उपभोक्ता न तो आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना नया बिल देख पाएंगे और न ही पुराने बकाए बिल का भुगतान डिजिटल माध्यम से कर सकेंगे। इसके साथ ही नए कनेक्शन के आवेदन या लोड बढ़ाने जैसे ऑनलाइन काम भी इस दौरान पूरी तरह से रुके रहेंगे। रीचार्ज खत्म होने पर भी नहीं कटेगी बत्ती हालांकि, इस तकनीकी शटडाउन के बीच ऊर्जा विभाग ने राज्य के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को एक बहुतबड़ी राहत दी है, जिससे आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मेंटेनेंस अवधि के दौरान यदि किसी स्मार्ट मीटर उपभोक्ता का बैलेंस खत्म हो जाता है और रिचार्ज नहीं हो पाता है, तो भी उस स्थिति में उनके घर या प्रतिष्ठान की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं की जाएगी। यानी बैलेंस शून्य या माइनस में जाने के बावजूद उपभोक्ताओं की बत्ती गुल नहीं होगी। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इस अवधि में धैर्य बनाए रखें, क्योंकि रविवार रात 8 बजे के बाद नई बिलिंग प्रणाली शुरू होते ही सभी सेवाएं पहले से अधिक तेज और बेहतर तरीके से काम करने लगेंगी।

खान सर मामले में नई केस डायरी दाखिल, अदालत ने बहस के लिए दी तारीख

पटना बिहार के हाई-प्रोफाइल मामलों में से एक, खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर और उनके सहकर्मियों से जुड़ी एक बड़ी खबर पटना सिविल कोर्ट से सामने आई है। शनिवार को अदालत में इस मामले को लेकर बेहद सरगर्मी तेज रही। कोर्ट के पिछले आदेश का पालन करते हुए कदमकुआं थाना पुलिस और जांच अधिकारी ने आखिरकार मामले की पूरी तरह से 'अपडेटेड केस डायरी' अदालत के समक्ष सबमिट कर दी है। पुलिस द्वारा नई डायरी पेश किए जाने के बाद अदालत ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका पर अंतिम बहस और अगली सुनवाई के लिए 30 जून मंगलवार की तारीख दी है। अदालत ने केस डायरी का लिया संज्ञान शनिवार को हुई इस विशेष अदालती कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच कानूनी दांव-पेंच देखने को मिले। रौशन आनंद के वकील सत्यम झा ने कोर्ट परिसर में मीडिया से बात करते हुए बताया कि पुलिस द्वारा पहले जमा की गई डायरी अधूरी थी, जो सिर्फ 19 तारीख तक की ही थी। आज पुलिस ने जब नई अपडेटेड डायरी कोर्ट में पेश की, तो उसे रिकॉर्ड पर ले लिया गया। इसके तुरंत बाद रौशन आनंद के पक्ष के वकीलों ने इस नई और विस्तृत डायरी का गहराई से अध्ययन करने के लिए अदालत से कुछ समय की मांग की। अदालत ने इस व्यावहारिक मांग को स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों को डायरी के नए पन्नों को पढ़ने और समझने के लिए तीन दिन का पर्याप्त समय दे दिया है। खान सर को 30 जून तक मिली बड़ी राहत इस सुनवाई के दौरान अदालत ने फैजल खान की गिरफ्तारी पर लगी रोक की अंतरिम सुरक्षा को आगामी 30 जून तक के लिए बरकरार रखा है। खान सर के वरिष्ठ वकील अरविंद कुमार महुआ ने स्पष्ट किया कि कोर्ट में खान सर के साथ-साथ उनके स्टाफ और कलीग्स की एंटिसिपेटरी और रेगुलर बेल दोनों याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। चूंकि शनिवार की सुबह ही पुलिस ने अपडेटेड डायरी सौंपी है, इसलिए अब मंगलवार को इस मामले पर कोर्ट में आमने-सामने बहस होगी।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में सब्सिडी से बढ़ा उत्साह, नए एक्सपोर्टर्स को मौका

 नोएडा ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में आयोजित होने वाले चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2026) में हिस्सा लेने के इच्छुक यूपी के नए निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर है। एक अप्रैल 2022 के बाद कारोबार शुरू करने वाले निर्यातकों को प्रदेश सरकार विशेष सब्सिडी के तहत बेहद रियायती दर पर स्टॉल उपलब्ध कराएगी। इसके तहत उन्हें नौ वर्गमीटर का स्टाल एक लाख रुपए से भी अधिक कीमत के बजाय सिर्फ 17 हजार रुपये में मिलेगा। उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के बाद नए निर्यातकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस व्यवस्था से मुरादाबाद के करीब ढाई सौ नए निर्यातकों को लाभ मिल सकेगा। मुरादाबाद से कई देशों को मेटल के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का एक्सपोर्ट कर रहे निर्यातक मो.नाजिम का कहना है कि नए निर्यातकों को सब्सिडाइज्ड दर पर मात्र 17 हजार रुपये के स्टाल हाल संख्या 14 में उपलब्ध होना उत्साहजनक है। एक निर्यातक अधिकतम दो स्टाल प्राप्त कर सकेगा। इस प्रावधान ने कारोबार को लेकर नए निर्यातकों का हौसला फलक पर पहुंचा दिया है। हाल संख्या 15 में नियमित श्रेणी के निर्यातकों को स्टाल लगाने का मौका मिलेगा, उन्हें सीधे तौर पर सब्सिडी देय नहीं होगी। उन्हें साढ़े सात हजार रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से स्टाल मिल सकेगा। इसे लेकर उद्योग के संयुक्त आयुक्त योगेश कुमार ने बताया कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो हर साल सफलता की नई ऊंचाइयां छू रहा है। नए निर्यातकों को काफी कम कीमत पर स्टाल की उपलब्धता से अपने कारोबार को काफी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। नए निर्यातकों को आगे बढ़ने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा सुनहरा मौका दिया गया है। स्टालों की उपलब्धता होने पर ही एक निर्यातक को दो स्टाल मिल सकेंगे। तीसरे शो ने हजार करोड़ से अधिक का कारोबार दिया पिछले वर्ष प्रदेश सरकार के तत्वावधान में ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा संस्करण आयोजित हुआ था, जिसमें मुरादाबाद के प्रतिभागियों को हाथोंहाथ छह सौ करोड़ से अधिक का कारोबार मिला था। कई निर्यातकों को विदेशी खरीदारों की तरफ से बिजनेस ऑर्डर मिले जिसके चलते मेले की वजह से कारोबार एक हजार करोड़ के पार पहुंच गया। संयुक्त निदेशक उद्योग योगेश कुमार ने बताया कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में कारोबार की संभावनाएं जितनी तेजी से बढ़ी हैं उन्हें देखते हुए इस बार निर्यातकों में प्रतिभाग के लिए काफी ज्यादा मारामारी देखने को मिल सकती है। भाग लेने के इच्छुक निर्यातकों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है।

पाकिस्तान को मेजबानी का फायदा, खराब प्रदर्शन के बावजूद वर्ल्ड कप 2028 में एंट्री पक्की

नई दिल्ली महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 की धूम के बीच अगले संस्करण को लेकर भी बड़ा अपडेट आ गया है। बीते शुक्रवार यानि 26 जून को श्रीलंका बनाम स्कॉटलैंड मुकाबले के बाद उन 9 टीमों के नाम सामने आ गए हैं जिन्होंने साल 2028 में होने वाले टूर्नामेंट में सीधे एंट्री कर ली है। इसमें भारत और पाकिस्तान का नाम भी शामिल है। बता दें कि पाक टीम को मेजबान होने की वजह से महिला टी20 वर्ल्ड कप 2028 में सीधे जगह मिली है। पाकिस्तान को मिला मेजबान होने का फायदा पाकिस्तान का महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। 4 मैच खेलने के बावजूद उनके खाते में एक भी जीत नहीं आई है। महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में कुल 12 टीमों ने हिस्सा लिया है। जिन्हें 6-6 के ग्रुप में बांटा गया है। हर ग्रुप की टॉप-4 टीमों के लिए अगले संस्करण के दरवाजे खुलने हैं। पाकिस्तान फिलहाल अपने ग्रुप में 5वें स्थान की टीम है। लेकिन मेजबान होने के चलते उनकी सीट पक्की है। इन 8 टीमों को मिली जगह ग्रुप-ए में से भारत, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, और दक्षिण अफ्रीका ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में प्रदर्शन के आधार पर अपनी जगह बनाई है। जबकि ग्रुप-बी से इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड और श्रीलंका टॉप-4 में पहुंची हैं। 10वीं टीम का फैसला 6 जुलाई तक आईसीसी की रैंकिंग का आधार पर किया जाएगा। आयरलैंड फिलहाल इस रेस में सबसे आगे मानी जा सकती है। 201 रेटिंग पॉइंट्स के साथ यह टीम 9वें पायदान पर काबिज है। स्कॉटलैंड ने गंवाया मौका श्रीलंका को मात देकर स्कॉटलैंड के पास महिला टी20 वर्ल्ड कप 2028 में सीधे क्वालीफाई करने का सुनहरा मौका था। जिसको उन्होंने अपनी गलती से गंवा दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए स्कॉटलैंड ने 152 रन का लक्ष्य दिया था। जिसका पीछा करते हुए लंकाई टीम ने 118 के स्कोर पर 6 विकेट गंवा दिए थे। इस मौके पर स्कॉटलैंड की जीत तय मानी जा रही थी। लेकिन फिर आखिरी 3 ओवर में खेल का पासा पलटा। श्रीलंका ने धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए 1 गेंद और 3 विकेट शेष रहते जीत अपने नाम कर ली।  

दोबारा घर बसाने का सपना पड़ा महंगा, सागर में शादी के 3 दिन बाद दुल्हन नकदी-जेवर लेकर गायब

सागर/ जैसीनगर  जैसीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम महुआखेड़ा पेगवार में शादी के तीसरे ही दिन दुल्हन घर से 30 हजार रुपये नकद व जेवर लेकर भाग गई। पीड़ित की शिकायत पर जैसीनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार महुआखेड़ा पेगवार निवासी 36 वर्षीय नोनीराम पटेल ने बताया कि पत्नी के निधन के बाद वह दोबारा विवाह करना चाहते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से हुई, जिसने छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के लोरमी निवासी रुक्मणी चतुर्वेदी से विवाह कराने का भरोसा दिलाया। महिला को विधवा बताकर की ठगी पुलिस के अनुसार पीड़ित को बताया गया कि रुक्मणी के पति की भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो चुकी है। रिश्ता तय कराने के एवज में रामनारायण दुबे को एक लाख 20 हजार रुपये दिए गए। नोनीराम के अनुसार ने बताया कि 19 जून को सागर में दोनों की कोर्ट मैरिज और अगले दिन मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ। विवाह के दौरान रुक्मणी के साथ ओडिशा निवासी अरविंद विभार भी मौजूद था, जिसे उसने अपना जीजा बताया था। सुबह नींद खुली तो महिला फरार हो चुकी थी नोनीराम ने बताया कि 21 जून की रात रुक्मणी घर की अलमारी से 30 हजार रुपये नकद, करीब आधा किलो चांदी की करधोनी, लगभग 250 ग्राम चांदी की पायल और एक मंगलसूत्र लेकर फरार हो गई। सुबह परिवार की नींद खुली तो वह घर में नहीं मिली। तलाश के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि देर रात एक कार गांव में आई थी और उसमें सवार युवक घर का पता पूछ रहा था। फोटो दिखाने पर ग्रामीणों ने उसकी पहचान शादी में आए अरविंद विभार के रूप में की। बिचौलिए से की जा रही पूछताछ पीड़ित ने जैसीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शुक्रवार को वह दोबारा थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने बताया कि मामले में रिश्ता तय कराने वाले कंदेला निवासी रामनारायण दुबे से पूछताछ की जा रही है। वहीं फरार महिला और उसके सहयोगी की तलाश जारी है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।  

प्रियदर्शन की फिल्म ‘हैवान’ का ऐलान, अक्षय कुमार–सैफ अली खान की जोड़ी 11 सितंबर 2026 को मचाएगी धमाल

प्रियदर्शन की अपकमिंग क्राइम थ्रिलर फिल्म हैवाल की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। फिल्म के लिए फैंस को 11 सितंबर, 2026 तक का इंतजार करना होगा। हैवान में एक बार फिर अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी दमदार वापसी करेगी। फिल्म को लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। फिल्म के प्रोडक्शन हाउस ने अपने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक पोस्टर शेयर करते हुए रिलीज डेट का ऐलान किया है। कब रिलीज होगी अक्षय कुमार की हैवान? केवीएन प्रोडक्शन ने हैवान को प्रोड्यूस किया है। जो पोस्टर शेयर किया गया है उसपर लिखा है- सिनेमाघरों में 11 सितंबर, 2026 को। 60 ब्लॉकबस्टर्स , एक मास्टर स्टोरीटेलर। फिल्म बाय प्रियदर्शन- हैवान। हैवान पोस्टर पर बड़े-बड़े लाल रंग के अक्षरों से लिखा गया है। हैवान की रिलीज डेट के ऐलान पर क्या बोले सोशल मीडिया यूजर्स इस पोस्टर के साथ कैप्शन लिखा गया है – एक ऑब्सेशन। एक अटूट लगन। एक ऐसी तारीख जो आप याद रखना चाहेंगे। हैवान- प्रियदर्शन की फिल्म जिसमें सैफ अली खान और अक्षय कुमार नजर आएंगे। सिनेमाघरों में 11 सितंबर, 2026 को। अपने कैलेंडर में तारीख मार्क कर लीजिए। इस पोस्टर पर तमाम लोगों के कमेंट्स आए हैं। एक ने लिखा- खिलाड़ी कुमार। अब इंतजार नहीं होता। एक ने लिखा- ये फिल्म अच्छी होगी। एक ने लिखा जेलर 2 से होगी क्लैश। बहुत सारे यूजर्स ने पोस्ट पर हार्ट और फायर इमोजी बनाकर रिएक्ट किया है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी सैफ अली खान की कर्तव्य सैफ अली खान की बात करें तो हाल ही में उनकी फिल्म कर्तव्य नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। सैफ अली खान की कर्तव्य एक क्राइम थ्रिलर फिल्म है। इस फिल्म में जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी विलेन के रोल में नजर आए हैं। सैफ अली खान ये क्राइम थ्रिलर लोगों पर अपना कमाल दिखा पाने से चूक गई है। अक्षय कुमार की वेलकम टू द जंगल का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन अक्षय कुमार की बात करें तो उनकी फिल्म वेलकम बैक टू द जंगल 26 जून को ही सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। वेलकम बैक टू जंगल एक मल्टी-स्टारर फिल्म है। फिल्म लोगों को पसंद भी आ रही है। सोशल मीडिया पर फिल्म को पॉजिटिव रिव्यूज मिले हैं। बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म का असर देखने को मिला है। sacnilk.com के मुताबिक, अक्षय कुमार की फिल्म ने अब तक (27 जून, दोपहर 2 बजे) 22.48 करोड़ की कमाई कर ली है। अक्षय कुमार की वेलकम बैक टू द जंगल अहमद खान ने डायरेक्ट की है।