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‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के बाघा उर्फ तन्मय वेकारिया शूटिंग के दौरान हुए भावुक

सिटकॉम शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में तन्मय वेकारिया बाघा का रोल प्ले करते हैं. बीते कुछ दिन उनके लिए अच्छे नहीं थे. क्योंकि हाल ही में एक्टर ने अपनी मां को खोया है. शूटिंग के वक्त उन्हें मां की याद आ गई. जिसकी वजह से वो सीन के बीच इमोशनल हो गए. तन्मय फूट-फूटकर रोने लगे. उन्हें यूं इमोशनल देख मेकर्स ने थोड़ी देर के लिए शूटिंग रोकी. तन्मय क्यों हुए इमोशनल? सूत्रों के मुताबिक, सेट पर बाघा को यूं रोते हुए देखकर पूरे कास्ट एंड क्रू की आंखें नम हो गई थीं. ईटाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से बताया कि तन्मय वेकारिया सीन के बीच इमोशनल हो गए थे. वो बाघा-बावरी लव स्टोरी से जुड़ा सीन कर रहे थे. इस लव ट्रैक को ऑडियंस काफी पसंद कर रही है. जैसे ही कैमरा रोल हुआ, तन्मय को अपनी मां की याद आ गई. तन्मय की जिंदगी में उनकी मां सबसे बड़ी प्रेरणा थीं. वो बेटे को बाघा के रोल में बहुत पसंद करती थीं. सीन के दौरान जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके प्रति दर्शकों का प्यार देखने के लिए अब उनकी मां कभी मौजूद नहीं रहेंगी, ये सोचकर वो रोने लगे. तन्मय अपने इमोशंस को काबू नहीं कर पाए. उनकी हालत देखकर शूटिंग रोकी गई. सेट पर हंसता-खुशी का माहौल एकदम से गम में बदल गया था. प्रोड्यूसर असित मोदी, डायरेक्टर्स और क्रू मेंबर्स तुरंत बाघा के पास गए और उन्हें कंसोल करने लगे. असित कुमार मोदी एक्टर के मुश्किल दिनों में हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं. उन्होंने तन्मय को कहा- मां का प्यार बेशकीमती होता है. भले ही वो फिजीकल फॉर्म में तुम्हारे साथ नहीं हैं. लेकिन वो जहां भी होंगी तुम पर उन्हें गर्व होगा. उनका आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा. तन्मय ने बताया कैसे उनकी मां उनके एपिसोड ऑनएयर होने का इंतजार करती थीं. बावरी और नट्टू काका ने भी तन्मय को संभाला. थोड़ी देर बाद माहौल लाइट हुआ. दोबारा से शूटिंग शुरू की गई.

रात के अंधेरे में चल रहा था रेत का कारोबार, विधायक ने मौके पर पहुंचकर खोली पोल

बीजापुर. मिनगाछल नदी में चल रहे रेत के अवैध कारोबार की जानकारी लगते ही बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी मौके पर पहुंचे. रेत उत्खनन में लगी मशीनों को बंद कराकर विभागीय अधिकारी व नैमेड थाना प्रभारी को मौके पर बुलाकर जब्ती करवाई, साथ ही आगे की कार्रवाई के लिए निर्देशित किया. विधायक विक्रम मंडावी की कार्रवाई के बाद अब लोग सवाल कर रहे हैं कि कैसे प्रशासन की नाक के नीचे रात के अंधेरे में देर रात तक रेत का अवैध कारोबार चल रहा था? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों के संलिप्तता के बिना यह कार्य संभव है? क्या सरकार के किसी नेता के संरक्षण में यह बड़ा खेल चल रहा है? क्या मामले की प्रशासन जांच कर संलिप्त अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई करेगा? या यह पहले की ही तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा. कार्रवाई के दौरान नदी क्षेत्र से टिप्पर, ट्रैक्टर, जेसीबी और अन्य भारी मशीनें जब्त की गईं। जबकि कुछ वाहन चालक और खनन से जुड़े लोग मौके से भागने में सफल रहे। विधायक ने अधिकारियों को अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अवैध खनन पर सख्त रुख उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध रेत खनन को लेकर प्रशासन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जब्त वाहनों और मशीनों पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

कुपोषण के खिलाफ बड़ा अभियान, मुनगा को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी, मंत्री राजवाड़े का संदेश

‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’ बनेगा जनआंदोलन महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने जनप्रतिनिधियों से किया व्यापक पौधरोपण का आह्वान रायपुर प्रदेश में कुपोषण की समस्या के समाधान और जनस्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने ‘‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’’ के रोपण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों, ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों से वर्षा ऋतु के दौरान बड़े पैमाने पर मुनगा (सहजन) का पौधरोपण कर ‘‘घर-घर मुनगा, हर घर सुपोषण’’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने इस संबंध में जारी अपने पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश को सुपोषित बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों एवं हितग्राहियों के घरों में ‘‘सुपोषण वृक्ष–मुनगा’’ लगाने की परिकल्पना की गई है। उन्होंने बताया कि मुनगा एक अत्यंत पौष्टिक एवं बहुउपयोगी पौधा है, जिसके पत्ते, फलियां और अन्य भाग पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन ‘ए’ और विटामिन ‘सी’ सहित अनेक आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने के कारण इसे ‘‘मदर ट्री’’ के नाम से भी जाना जाता है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुनगा का नियमित सेवन बच्चों, महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने में सहायक है। यह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ-साथ एनीमिया जैसी समस्याओं की रोकथाम में भी मददगार सिद्ध होता है। श्रीमती राजवाड़े ने सभी जनप्रतिनिधियों से वर्षा ऋतु में जल स्रोतों के आसपास, ग्राम पंचायत परिसरों, सार्वजनिक स्थलों तथा हितग्राहियों के घरों में मुनगा पौधों का रोपण सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।  उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से संचालित यह अभियान प्रदेश में सुपोषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा तथा लोगों में पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक बनेगा। उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर ‘‘सुपोषित छत्तीसगढ़’’ के निर्माण में योगदान देने की अपील की है।

राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश: विकास और संस्कृति के संतुलन से ही बनेगा सशक्त भारत

विकास और संस्कृति का संतुलन ही सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता की मार्गदर्शक सेवा और अध्यात्म के संगम से ही समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बैतूल में "आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज के सशक्तिकरण"कार्यक्रम को किया संबोधित बैतूल राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होना चाहिए। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति में आत्म विश्वास, आत्म सम्मान, जागरूकता और दायित्व बोध का विकास हो। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज आत्म सम्मान के साथ जीवन जीने वाला समाज है और उसकी यही विशेषता उसे विशिष्ट बनाती है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्ति का अनुभव कराती है तथा सकारात्मक सोच को जीवन के उच्च आदर्शों से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु बैतूल में आयोजित “आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन को संबोधित कर रही थी। विकास और संस्कृति का संतुलन ही किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की आधारशिला होता है। शाश्वत विकास वही है जो हमारी जड़ों को मजबूत बनाते हुए भविष्य की संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करे। राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति तभी संभव है जब देश का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ जाएंगी। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत सुरक्षित और अक्षुण्ण रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के सम्मेलन जनजातीय समाज के आध्यात्मिक उत्थान, सामाजिक जागरूकता और समग्र विकास के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।    राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मध्यप्रदेश शासन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा जनजातीय कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में इस बीमारी की संभावना अधिक पायी जाती है और इसके उन्मूलन के लिए प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से जनजातीय समाज का स्वास्थ्य स्तर और बेहतर होगा। राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मू ने कहा कि मध्यप्रदेश का बैतूल जिला अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक चेतना के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है। यहां के जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। सामूहिकता, सहयोग, सरलता, ईमानदारी और आध्यात्मिकता जैसे उच्च जीवन मूल्यों का जीवंत स्वरूप बैतूल की जनजातीय संस्कृति में दिखाई देता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण के लक्ष्य पर केंद्रित इस महासम्मेलन में शामिल होकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए ब्रह्मकुमारी संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल बैतूल या मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु विश्वास व्यक्त किया कि महासम्मेलन में तैयार होने वाली कार्य योजनाएं जनजातीय समाज को राष्ट्र की प्रगति का सशक्त भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।   राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि ब्रह्मकुमारी संस्थान ने मातृशक्ति को केंद्र में रखकर अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है। संस्थान की आंतरिक शुचिता, मानवीय गरिमा, सेवा भावना तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में आंतरिक शुचिता और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज में समतापरक आचरण, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भावना विकसित होती है। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव, संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आयोजनों की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ जाती है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय की जीवन शैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिक मूल्यों और प्रकृति के निकट रही है। जनजातीय समाज, जिसे आदिवासी समाज भी कहा जाता है, सृष्टि के आरंभ से ही धरती के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन व्यतीत करता आया है। यह समाज सुख, शांति, आनंद और प्रेम के साथ जीवन बिताना जानता है तथा हिंसा से दूर रहता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति ही नहीं, बल्कि पंचतत्वों—धरती, आकाश, वायु, जल, सूर्य और चंद्रमा—को पूजनीय मानता है। इनके लिए किसी विशेष मंदिर या पूजा स्थल की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि पूरी प्रकृति ही उनके लिए आराधना का केंद्र है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि धरती, जल और वायु के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जनजातीय समाज प्रकृति को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसका संरक्षण करता है। वे धरती को क्षति नहीं पहुंचाते, जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करते और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग भी आवश्यकता के अनुसार करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज किसी भी संसाधन के उपयोग से पहले प्रकृति को नमन करता है, यही कारण है कि उनकी जीवनशैली पर्यावरण संरक्षण का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत करती है। आज जब पेड़-पौधों, नदियों और समुद्रों के संरक्षण की आवश्यकता पूरी दुनिया महसूस कर रही है, तब जनजातीय समाज की जीवन पद्धति मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकती है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु द्वारा कलश एवं ध्वज को ब्रह्मकुमारी बहनों को प्रदान कर अध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण महासम्मेलन का शुभारंभ किया। महासम्मेलन में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु और राज्यपाल मंगुभाई पटेल सहित अन्य अतिथियों का राजयोगिनी मंजू दीदी द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।  राष्ट्रपति श्रीमति मुर्मु ने महासम्मेलन परिसर में बैतूल जिले की सांस्कृतिक झलक और विकास योजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने जनजातीय समाज द्वारा प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की सराहना की। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और विदेशी कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग भूमि की उर्वरता को नष्ट कर रहा है तथा इसके कारण अनेक प्रकार की बीमारियां भी बढ़ रही हैं। प्राकृतिक खेती भारत की मूल परंपरा रही है और आज देश पुनः उसी दिशा में लौट रहा है। प्राकृतिक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए … Read more

सटीक जांच रिपोर्ट ही बेहतर इलाज की बुनियाद: विशेषज्ञों ने गुणवत्ता प्रक्रिया पर दिया प्रशिक्षण

पटना पटना आईजीआईएमएस के बायोकेमिस्ट्री विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों को प्रयोगशाला की गुणवत्ता और मानक प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई. कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) बिंदे कुमार, प्रो. (डॉ.) प्रीत पाल सिंह और प्रो. (डॉ.) ललित मोहन ने किया. सटीक जांच रिपोर्ट को बताया बेहतर इलाज का आधार उद्घाटन संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में सटीक जांच रिपोर्ट ही सही निदान और प्रभावी उपचार का आधार होती है. उन्होंने कहा कि जीसीएलपी के सिद्धांतों का पालन केवल प्रयोगशालाओं की आवश्यकता नहीं, बल्कि मरीजों के हित और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है. गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. रवि शेखर ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लैब प्रक्रियाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि सैंपल संग्रह, परीक्षण, रिकॉर्ड संधारण और गुणवत्ता नियंत्रण की सही व्यवस्था से जांच परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ती है. विशेषज्ञों ने साझा किए तकनीकी अनुभव कार्यशाला में प्रो. (डॉ.) शैलेश कुमार, प्रो. (डॉ.) अंजू सिंह, प्रो. (डॉ.) जीउतराम केसरी, एडिशनल प्रोफेसर डॉ. प्रीतम प्रकाश, डॉ. श्वेता कुमारी, डॉ. सौरभ कुमार तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अर्चना भारती ने जीसीएलपी के विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिए. विशेषज्ञों ने क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम, इंटरनल एवं एक्सटर्नल क्वालिटी कंट्रोल, बायोसेफ्टी, सैंपल मैनेजमेंट, डॉक्यूमेंटेशन और डेटा इंटीग्रिटी जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी. गुणवत्तापूर्ण जांच से बेहतर होंगे स्वास्थ्य परिणाम वक्ताओं ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण जांच रिपोर्ट बेहतर इलाज की बुनियाद होती है. यदि प्रयोगशाला जांच वैज्ञानिक मानकों और गुणवत्ता प्रक्रियाओं के अनुरूप हो तो चिकित्सक अधिक सटीक निदान कर सकते हैं. इससे उपचार संबंधी निर्णय बेहतर होते हैं और मरीजों की सुरक्षा व स्वास्थ्य परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार आता है.

बयान बदलने के लिए पैसों का प्रलोभन देने का आरोप, मुकेश चंद्राकर केस में नया मोड़

बीजापुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के चर्चित पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड मामले में गवाहों को प्रभावित करने और उनके बयान बदलवाने के प्रयास का मामला सामने आया है। इस संबंध में पत्रकार चेतन कापेवार एवं पवन दुर्गम ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मामले के प्रमुख गवाहों को धनराशि एवं अन्य प्रकार के प्रलोभन देकर उनके बयान बदलवाने का प्रयास किया जा रहा है। आवेदन के अनुसार बीजापुर निवासी सुनील मर्सकोले ने पत्रकार चेतन कोपवार से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क कर मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर के पक्ष में बयान देने के एवज में एक लाख रुपये का प्रलोभन दिया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बातचीत के दौरान पत्रकार पवन दुर्गम का नाम भी लिया गया और यह बताया गया कि उनसे भी इस संबंध में चर्चा की गई है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पवन दुर्गम का बयान पहले ही देवाड़ा न्यायालय में दर्ज हो चुका है, जो मुकेश चंद्राकर के पक्ष और आरोपियों के खिलाफ है। पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि गवाहों को अलग-अलग धनराशि देकर बयान बदलवाने की कोशिश न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और निष्पक्ष जांच में बाधा उत्पन्न करने का गंभीर प्रयास है। उन्होंने कहा कि गवाहों पर दबाव, धमकी या प्रलोभन देना कानूनन अपराध है। इससे न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता प्रभावित होती है। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी : एसपी शिकायतकर्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने और प्रकरण के प्रमुख गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि वे बिना किसी भय, दबाव या प्रलोभन के न्यायालय एवं जांच एजेंसियों के समक्ष अपना पक्ष स्वतंत्र रूप से रख सकें। इस मामले में एसपी डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। जानिए पूरा मामला एक जनवरी 2025 को मुकेश चंद्राकर अपने घर से निकले थे और फिर लापता हो गए। परिवार ने उनके गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी। 3 जनवरी को उनकी लाश एक बंद पड़े सेप्टिक टैंक से मिली थी। पुलिस ने हत्याकांड के मास्टरमाइंड सड़क ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। इस हत्याकांड में सुरेश के साथ रितेश चंद्राकर, दिनेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके का नाम भी शामिल है। इन चारों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया था। मुकेश चंद्राकर की हत्या की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी ने अपनी चार्जशीट में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर सहित 4 लोगों को आरोपी बनाया था। साथ ही 70 लोगों को इस मामले में गवाह बनाया गया। एसआईटी की जांच में सामने आया था कि आरोपी सुरेश चंद्राकर उसके सड़क निर्माण के काम में भ्रष्टाचार उजागर करने वाली खबरों से काफी नाराज था। मुकेश ने सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की खबरें दिखाई थी। इसके बाद उसने हत्या की पूरी प्लानिंग की। उसके घटना से कुछ दिन पहले ही अपने बैंक खाते से बड़ी रकम भी निकाली थी। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था। 5 जनवरी को आरोपी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। उसका भाई और सुपरवाइजर भी गिरफ्तार हुआ था।

आस्था और टेक्नोलॉजी का संगम: अयोध्या में बनेगा दुनिया का पहला रामायण वैक्स म्यूजियम

लखनऊ राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद, अयोध्या एक और खास चीज तैयार हो गई है। ये शहर में आस्था, कला और पर्यटन का संगम है। ये होगा दुनिया का पहला रामायण-थीम वाला वैक्स म्यूजियम। म्यूजियम अब बनकर तैयार हो चुका है। सीएम योगी कल अपने अयोध्या दौरे पर इसका उद्घाटन करेंगे। यह म्यूज़ियम आने वालों को सीधे त्रेता युग या रामायण काल में ले जाने का वादा करता है। इसे आस्था के केंद्र और पर्यटकों के लिए एक बड़े आकर्षण के तौर पर देखा जा रहा है। यह पौराणिक कथाओं, टेक्नोलॉजी और कलाकारी का मेल दिखाते हुए एक अनोखा अनुभव देगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 जून को अयोध्या पहुंचकर नगर निगम की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं रामायण वैक्स म्यूजियम और अयोध्या धाम के नए जोनल कार्यालय का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वैक्स म्यूजियम परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित भी करेंगे। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रामायण वैक्स म्यूजियम अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा। म्यूजियम में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान जी, ऋषि वशिष्ठ, रावण, मेघनाथ और जटायु सहित रामायण के 25 से अधिक प्रमुख पात्रों की जीवंत मोम प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। उद्घाटन के बाद इसे आम पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। टिकट दरों और समय-सारिणी की घोषणा भी लोकार्पण के बाद की जाएगी। मुख्यमंत्री इसी दौरान मोहबरा बाजार क्षेत्र में 10.19 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए जोनल कार्यालय का भी उद्घाटन करेंगे। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यालय के शुरू होने से अयोध्या धाम क्षेत्र के नागरिकों को नगर निगम से संबंधित विभिन्न सेवाएं और सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार सुबह महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी और नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश पांडे ने बताया कि निरीक्षण के दौरान राम कथा पार्क के निकट स्थित हेलीपैड स्थल पर घास की सफाई तथा खुले केबलों को भूमिगत करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा अधिकारियों ने ऋषिदेव जैन मंदिर और मनीरामदास की छावनी का निरीक्षण कर सफाई और सौंदर्यीकरण कार्यों की समीक्षा की। महापौर ने दोनों स्थलों को विशेष रूप से सजाने-संवारने के निर्देश दिए। नगर आयुक्त ने कार्यक्रम स्थलों पर पेयजल, स्वच्छता, चूना और ब्लीचिंग का छिड़काव, एंटी-लार्वा दवा के प्रयोग, फॉगिंग तथा धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी के छिड़काव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अपने इस दौरे के दौरान अयोध्या की कई अन्य विकास परियोजनाओं का भी लोकार्पण कर सकते हैं। निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त डॉ. नागेंद्र नाथ, भारत भार्गव, मुख्य महाप्रबंधक जलकल सौरभ श्रीवास्तव, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राममणि शुक्ल, अधिशासी अभियंता दीपांकर सिंह तथा सहायक अभियंता राजपति यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

अच्छे लोग हमेशा नहीं जीतते”: चाणक्य नीति में सफलता की कड़वी सच्चाई

 आपने अनगिनत बार सुना होगा कि अच्छे बनो, सबका भला सोचो, धैर्य रखो. लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि अच्छे लोग सिर्फ कहानियों की किताबों में जीतते हैं, असल जिंदगी में नहीं. यह बात आपको अभी गलत लग रही होगी, लेकिन यही वह सच है जिससे कोई बच नहीं सकता है. दुनिया में वही लोग आगे बढ़ते हैं, जो समय के साथ अपनी सोच और नीति बदलना जानते हैं. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर सच्ची सफलता चाहिए, तो सिर्फ अच्छाई नहीं, नीति भी सीखनी पड़ेगी. यानी जरूरत पड़ने पर बुरा बनने का साहस भी रखना होगा, वरना दुनिया आपको कुचलकर आगे बढ़ जाएगी. अच्छाई कब बन जाती है कमजोरी? यह दुनिया मासूमों की नहीं, समझदारों की है. यहां अच्छाई को अक्सर कमजोरी, डर और इस्तेमाल करने लायक स्वभाव समझ लिया जाता है. लोग आपकी शांति को आपकी सीमा समझ लेते हैं. आपके त्याग को मूर्खता कह देते हैं. आपकी चुप्पी को आपकी हार मान लेते हैं लेकिन चाणक्य कहते हैं कि, 'जो समय की चाल नहीं समझता, उसका अच्छा चरित्र भी उसे नहीं बचा सकता.' चाणक्य का सूत्र आचार्य चाणक्य कहते हैं कि, 'अगर हर कोई आपसे खुश है, तो समझिए आपने कहीं न कहीं खुद से गद्दारी की है.' सबको खुश रखना सफलता नहीं है. असली जीत तब है जब आप सही के लिए अकेले खड़े हो सकें. तीन गुण जो हर व्यक्ति में जरूरी हैं लोमड़ी जैसी चालाकी- ताकि कोई आपकी मासूमियत का फायदा न उठा सके. कौवे जैसी बुद्धि- कब बोलना है और कब चुप रहना है. शेर जैसी निडरता- जरूरत पड़े तो दहाड़ सको. चाणक्य की सबसे बड़ी सीख अगर आप सांप हैं, तो जहर मत फैलाइए, लेकिन इतना जरूर दिखाइए कि आपके पास जहर है. यानी कि शांत रहिए, लेकिन कमजोर मत दिखिए, माफ कीजिए, लेकिन भूलिए मत, कम बोलिए, लेकिन सटीक बोलिए. श्रीकृष्ण से सीख जरा सोचिए कि श्रीकृष्ण अच्छे थे या बुरे? क्योंकि उन्होंने छल भी किया, रणनीति भी बनाई. लेकिन धर्म की रक्षा के लिए. वहीं दुर्योधन ने भी वही किया, लेकिन अपने अहंकार के लिए. दोनों की नीयत में फर्क था. इसलिए श्रीकृष्ण पूजे जाते हैं और दुर्योधन नकारे गए. असली समस्या क्या है? अच्छे लोग एक मानसिक जाल में फंस जाते हैं वे सबकी मदद करते हैं. खुद को पीछे रखते हैं और अंत में सबसे ज्यादा थके और टूटे हुए होते हैं. क्योंकि दुनिया आपकी अच्छाई नहीं, आपकी उपलब्धता देखती है. चाणक्य का गुरु मंत्र – लोगों के शब्द नहीं, उनकी नीयत पढ़ो. – जितना मीठा कोई बोले, उतना सतर्क रहो. – दूसरों की चाल समझो, अपनी चाल मत खोलो. – माफ करो, लेकिन सबक मत भूलो. – खुद को इतना मजबूत बनाओ कि कोई आपको तोड़ न सके.

पुलिस हिरासत से भागा आरोपी सैफ मांडर में पकड़ा गया, फिर फायरिंग के बाद मुठभेड़ में पैर में लगी गोली

 रांची आरएसएस कार्यालय पर बम से हमले के मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपित अमन और सैफ से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें हाजत में बंद कर दिया था। इसी दौरान आरोपित सैफ पुलिस को चकमा देकर हाजत से फरार हो गया और मांडर की ओर भाग निकला। सूचना मिलते ही पुलिस ने उसका पीछा शुरू किया और मांडर टोल गेट के पास उसे पकड़ लिया। पुलिस सैफ को वापस रांची ला रही थी। इसी दौरान रास्ते में पुलिस की गाड़ी खराब हो गई। पुलिस के अनुसार मौके का फायदा उठाकर सैफ ने एक जवान की पिस्टल छीन ली और दोबारा भागने का प्रयास किया। इस दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग भी कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जिससे सैफ के पैर में गोली लग गई। इसके बाद पुलिस ने उसे फिर से दबोच लिया। घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दुबई में काम करते हैं अमन और सैफ पुलिस का कहना है कि सैफ और अमन दोनों दुबई में काम करते थे। वहीं काम करने के दौरान उनका संपर्क कथित तौर पर आतंकी संगठनों से हुआ था। दोनों करीब एक माह पहले भारत लौटे थे। आरएसएस कार्यालय पर हमला किस उद्देश्य से किया गया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपितों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और जल्द ही मामले में बड़ा खुलासा किया जाएगा।

अब बिना निगरानी नहीं मिलेगी कफ सिरप, हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला

अंबाला. खांसी की सीरप अब सिर्फ एक सामान्य दवा नहीं, बल्कि निगरानी के दायरे में आने वाला उत्पाद बन गई है। केंद्र सरकार ने ड्रग्स नियमों में अहम बदलाव करते हुए उन प्रावधानों में संशोधन कर दिया है, जिनके तहत कुछ सीरप को विशेष छूट प्राप्त थी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 9 जून 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के बाद अब कफ सीरप और अन्य सीरप आधारित दवाओं की बिक्री, भंडारण और नियामकीय निगरानी पहले से अधिक सख्त कर दी गई है। दरअसल, केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स-1945 के शेड्यूल-के में संशोधन करते हुए सीरियल नंबर-13 के अंतर्गत आइटम नंबर-7 से सीरप शब्द को हटा दिया है। यह बदलाव सुनने में छोटा लग सकता है, लेकिन इसका असर दवा कारोबार, मेडिकल स्टोरों और उपभोक्ताओं तक दिखाई देगा। हरियाणा में भी जारी किए निर्देश विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में कफ सीरप के दुरुपयोग और नशे के लिए इस्तेमाल की घटनाएं बढ़ी हैं। कई राज्यों में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मामलों में कार्रवाई भी की है। ऐसे में सरकार ने नियामकीय ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हरियाणा में भी इस अधिसूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। राज्य औषधि नियंत्रक रिपन मेहता ने सभी अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अनुसूचित दवाओं की बिक्री केवल वैध चिकित्सकीय पर्ची के आधार पर सुनिश्चित की जाए। नियमों के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बिक्री रिकॉर्ड, प्रिस्क्रिप्शन सत्यापन और स्टॉक प्रबंधन को लेकर रहना होगा अधिक सतर्क इस बदलाव का सीधा असर मेडिकल स्टोर संचालकों पर पड़ सकता है। अब उन्हें दवा बिक्री के रिकार्ड, प्रिस्क्रिप्शन सत्यापन और स्टॉक प्रबंधन को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा। वहीं उपभोक्ताओं को भी कुछ सीरप खरीदने के लिए चिकित्सकीय सलाह और पर्ची की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि अधिसूचना में किसी विशेष ब्रांड या उत्पाद का नाम नहीं दिया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि सरकार सीरप आधारित दवाओं की निगरानी को और कड़ा करना चाहती है यानी अब मेडिकल स्टोर पर जाकर एक कफ सीरप दे दो कहना पहले जितना आसान नहीं रह सकता। अधिकारियों को निर्देश जारी किए – ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम के तहत अनुसूचित दवाइयां बिना चिकित्सक के वैध प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेची जा सकती। कफ सीरप से संबंधित हाल ही में जारी अधिसूचना के मद्देनजर विशेष सतर्कता बरतने के सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। – रिपन मेहता, राज्य औषधि नियंत्रक, हरियाणा।