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100 पन्नों की जांच रिपोर्ट के बाद गिरी गाज, धामी सरकार का भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार

उत्तराखंड उत्तराखंड की नौकरशाही में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि एक भूमि खरीद मामले ने प्रशासनिक तंत्र की इतनी बड़ी परतें उधेड़ दी हों. एक आईएएस अधिकारी की बर्खास्तगी की संस्तुति, दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई, कुल 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन और मुकदमे की तलवार. करीब 14 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदने के आरोपों से यह मामला शुरू हुआ था.  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने जिस सख्ती के साथ कार्रवाई की है, उसने सचिवालय से लेकर जिलों तक एक स्पष्ट संदेश पहुंचाया है कि सरकारी धन से जुड़े मामलों में अब लापरवाही भी भारी पड़ सकती है. सबसे बड़ा सवाल: आखिर इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों सरकार ने तत्कालीन नगर आयुक्त और आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी के खिलाफ सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की है. वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पनिशमेंट देने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन सैलरी इनक्रीमेंट रोकने का आदेश दिया गया है. इसके साथ ही 10 अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. कैसे खुली पूरे मामले की परतें अप्रैल 2025 में हरिद्वार नगर निगम द्वारा की गई एक भूमि खरीद अचानक सुर्खियों में आ गई. आरोप लगा कि जिस जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 14 करोड़ रुपये के आसपास थी, उसे करीब 54 करोड़ रुपये में खरीद लिया गया. मामला सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक हलकों तक सवाल उठने लगे. आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च करने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया? क्या जमीन की वास्तविक जरूरत थी? क्या खरीद प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन में सचिव रणवीर चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी. 100 पन्नों की रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार रणवीर चौहान ने हरिद्वार पहुंचकर पूरे मामले की गहन जांच की. फाइलों की पड़ताल हुई, अधिकारियों के बयान लिए गए और भूमि खरीद से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किया गया. लंबी जांच के बाद करीब 100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी गई. इसी रिपोर्ट के आधार पर अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई का फैसला लिया गया. सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. जांच में क्या मिला रिपोर्ट के मुताबिक भूमि खरीद की प्रक्रिया कृषि भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शुरू हुई थी, लेकिन अंतिम खरीद वाणिज्यिक दरों पर की गई. जांच अधिकारियों को यह बिंदु सबसे अधिक संदिग्ध लगा. इसके अलावा भूमि खरीद के लिए जरूरी लैंड कमेटी का गठन नहीं किया गया. सामान्य परिस्थितियों में इतनी बड़ी खरीद से पहले कई स्तरों पर परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया होती है, लेकिन यहां कई महत्वपूर्ण चरण या तो पूरे नहीं किए गए या फिर अत्यधिक जल्दबाजी में निपटा दिए गए. जांच में यह भी सामने आया कि भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़ी धारा-143 की प्रक्रिया असामान्य रूप से तेजी से पूरी की गई. बताया गया कि सामान्य तौर पर समय लेने वाली यह प्रक्रिया महज दो से तीन दिनों के भीतर पूरी हो गई. रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम स्तर पर फाइल को आगे बढ़ाने के लिए स्टेनो से ही राजस्व संबंधी अभिमत तैयार करवाया गया. यदि यह तथ्य अंतिम रूप से सिद्ध होता है तो इसे प्रशासनिक नियमों की गंभीर अनदेखी माना जाएगा. जमीन पर भी उठे सवाल जांच रिपोर्ट में केवल कीमत और प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि भूमि चयन पर भी सवाल उठाए गए हैं. बताया गया कि खरीदी गई जमीन कूड़े के ढेर के पास स्थित थी और उसकी तत्काल आवश्यकता भी स्पष्ट नहीं थी. ऐसे में यह सवाल और बड़ा हो गया कि आखिर उसी भूमि को खरीदने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई. जांच एजेंसियां अब यह भी पड़ताल कर रही हैं कि भूमि चयन के दौरान क्या अन्य विकल्पों पर विचार किया गया था या नहीं. निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक मामला सामने आने के बाद सरकार ने तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह को निलंबित कर दिया था. उस समय भी इस कार्रवाई को अभूतपूर्व माना गया था. लेकिन जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया. अब मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक आईएएस अधिकारी की सेवा समाप्ति की संस्तुति तक पहुंच गया है. अब केंद्र सरकार की भूमिका अहम चूंकि मामला अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों से जुड़ा है, इसलिए अंतिम निर्णय की प्रक्रिया में केंद्र सरकार की भी भूमिका रहेगी. राज्य सरकार ने दोनों आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को प्रस्ताव भेजने का फैसला किया है. इसके बाद केंद्रीय स्तर पर भी मामले की समीक्षा की जाएगी. कुछ बड़े अधिकारियों का कहना है कि राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के खिलाफ घोषित 'जीरो टॉलरेंस' नीति का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है. सरकार का दावा है कि चाहे अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों न हो, यदि सरकारी धन के उपयोग में अनियमितता या नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो कार्रवाई तय है.

IND vs AFG: आखिरी वनडे में कई खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर, टीम इंडिया 3-0 की तलाश में

चेन्नई भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी मुकाबला शनिवार (20 जून) को चेन्नई में है. सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना चुकी भारतीय टीम अब क्लीन स्वीप के इरादे से मैदान पर उतरेगी. हालांकि इस मैच का सबसे बड़ा आकर्षण सिर्फ नतीजा नहीं, बल्कि कुछ खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी होगा, जिनके लिए यह मुकाबला भविष्य तय करने वाला साबित हो सकता है. सबसे ज्यादा निगाहें यशस्वी जायसवाल पर रहेंगी. दिसंबर 2025 के बाद पहली बार वनडे टीम में वापसी करने वाले जायसवाल लखनऊ में खेले गए दूसरे मैच में सिर्फ 4 रन बनाकर आउट हो गए थे. इससे पहले उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ विशाखापत्तनम (वाइजैग) में नाबाद 116 रनों की शानदार पारी खेली थी, लेकिन तब से टीम की तस्वीर काफी बदल चुकी है. ईशान किशन की वापसी ने टॉप ऑर्डर में कंपटीशन और कठ‍िन कर दिया है. किशन ने लखनऊ वनडे में शतक लगाकर अपनी दावेदारी मजबूत कर ली. उनकी मौजूदगी के कारण कप्तान शुभमन गिल को खुद नंबर-3 पर उतरना पड़ा ताकि जायसवाल को ओपनिंग का मौका मिल सके. यदि किशन और श्रेयस अय्यर क्रमशः नंबर-4 और नंबर-5 पर बने रहते हैं तो जायसवाल के लिए टीम में जगह बनाना और मुश्किल हो जाएगा. ऐसे हालात में चेन्नई वनडे उनके लिए बड़ा अवसर है. भारत की इंग्लैंड टूर के लिए वनडे टीम का ऐलान भी जल्द होना है और बीसीसीआई सेलेक्श कमेटी के बॉस अजीत अगरकर की अगुआई वाला पैनल हाल के दिनों में कड़े फैसले लेने के लिए जाना जाता है. ऐसे में एक और नाकामी जायसवाल की मुश्किलें बढ़ा सकती है. केएल राहुल की स्थिति थोड़ी अलग है. लंबे समय बाद श्रेयस अय्यर की वापसी के बाद राहुल को अब अधिकतर नंबर-6 पर बल्लेबाजी करनी पड़ सकती है. वनडे क्रिकेट में नंबर-5 राहुल की सबसे सफल पोजिशन रही है. इस क्रम पर उन्होंने 38 मैचों में 1517 रन बनाए हैं, जिसमें तीन शतक और 10 अर्धशतक हैं. उनका एवरेज भी 63.2 का रहा है. हालांकि नंबर-6 पर उनके आंकड़े उतने प्रभावशाली नहीं हैं. राहुल ने इस स्थान पर 15 मैचों में 332 रन बनाए हैं और सिर्फ एक अर्धशतक लगाया है. लोअर ऑर्डर में बल्लेबाजी करते हुए उन्हें कम ओवर मिलते हैं, इसलिए अब उनके सामने तेजी से रन बनाने और फिनिशर की भूमिका निभाने की चुनौती है. चेन्नई में वह इसी नई भूमिका में खुद को साबित करने की कोशिश करेंगे. क्या हर्ष‍ित का होगा टीम इंड‍िया में कमबैक? बॉल‍िंग ड‍िपार्टमेंट में हर्षित राणा की वापसी चर्चा का विषय है. बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैबिलिटेशन पूरा करने के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया है. ऐसे में संभावना है कि उन्हें अर्शदीप सिंह की जगह प्लेइंग इलेवन में मौका मिल सकता है, जिन्होंने सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबले खेले हैं. हर्षित की मौजूदगी भारत को निचले क्रम में अतिरिक्त बल्लेबाजी विकल्प भी देती है, खासकर तब जब नीतीश कुमार रेड्डी चोट के कारण उपलब्ध नहीं हैं. इसके अलावा टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ता इंग्लैंड दौरे से पहले उनकी मैच फिटनेस और तैयारियों का आकलन भी करना चाहेंगे. गुरनूर बरार ने सीरीज के दोनों मैच खेले हैं और टीम मैनेजमेंट विभिन्न परिस्थितियों में उन्हें और परखना चाह सकता है. इसलिए टीम इंड‍िया के बॉल‍िंग कॉम्ब‍िनेशन में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं. दूसरी ओर अफगानिस्तान के लिए यह दौरा अब तक बेहद निराशाजनक रहा है. टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में टीम इंड‍िया के सामने संघर्ष करती नजर आई है. दोनों वनडे मुकाबलों में भी अफगान टीम न बल्लेबाजी में प्रभाव छोड़ सकी और न ही गेंदबाजी में. हशमतुल्लाह शाहिदी की अगुआई वाली टीम अब आखिरी मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन के साथ दौरे का समापन करना चाहेगी. जीत भले मुश्किल दिख रही हो, लेकिन अफगानिस्तान अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप कड़ी चुनौती देने की कोशिश करेगा. भारतीय टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, ईशान किशन, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बरार, हर्ष दुबे, यशस्वी जायसवाल और हर्षित राणा. अफगानिस्तान टीम: हशमतुल्लाह शाहिदी (कप्तान ), रहमानुल्लाह गुरबाज, इब्राहिम जादरान, सेदिकुल्लाह अतल, दरवेश रसूली, रहमत शाह, इकराम अलीखिल, मोहम्मद नबी, अजमतुल्लाह ओमरजई और राशिद खान. भारत vs अफगान‍िस्तान हेड टू हेड (वनडे) कुल मैच: 6 भारत जीता : 5 टाई: 1 मुकाबला दोपहर 1:30 बजे से शुरू होगा. भारत की नजर सीरीज में 3-0 की जीत दर्ज करने पर होगी, जबकि अफगानिस्तान सम्मान बचाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश करेगा.

तूफान के बीच बड़ा हादसा टला, इंडिगो फ्लाइट पर बिजली गिरने के बाद बदला गया विमान

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से शुक्रवार को अगरतला जाने वाली इंडिगो की एक फ्लाइट एयरपोर्ट पर खड़ी थी. इसी दौरान जबरदस्त तूफान के दौरान बिजली गिरी और फ्लाइट उसकी चपेट में आ गई. सुरक्षा नियमों के तहत यात्रियों को विमान से उतारा गया और नियमों के मुताबिक जरूरी जांच की गई. इसके बाद दूसरे विमान का इंतजाम किया गया. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एहतियातन ग्राउंड पर काम करने वाले दो कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा के लिए ले जाया गया. सूत्रों के मुताबिक, किसी के घायल होने की खबर नहीं है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को कोलकाता एयरपोर्ट पर तूफान के दौरान अगरतला जा रहे इंडिगो के एक विमान पर बिजली गिरी. क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तूफान और बारिश के बीच हुई, जिसके लिए एयरपोर्ट ऑपरेशन्स कंट्रोल सेंटर (AOCC) ने मौसम संबंधी अलर्ट जारी किए थे. उन्होंने बताया कि इस घटना में कोई भी यात्री घायल नहीं हुआ. इंडिगो की फ्लाइट 6E6068 (VT-IPW) एरोब्रिज 56L पर खड़ी थी, तभी सुबह करीब 9:30 बजे उस पर बिजली गिरी. बिजली गिरने से विमान के पावर सिस्टम पर असर पड़ा, जिससे अचानक पावर ऑफ हो गया. अधिकारी ने बताया कि जब बिजली गिरी, तो A320 विमान में 141 यात्री और छह क्रू मेंबर सवार थे. एहतियात के तौर पर एयरलाइन ने यात्रियों को विमान से उतार दिया और बाद में उन्हें A321 विमान (VT-ICD) से रवाना किया गया. यह फ्लाइट असल में सुबह 9.20 बजे रवाना होने वाली थी, लेकिन यात्रियों के साथ दोपहर 12.50 बजे रवाना हुई. इंडिगो के मुताबिक, दो ग्राउंड स्टाफ मामूली रूप से प्रभावित हुए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. अधिकारी ने बताया कि मेडिकल चेकअप के तुरंत बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. कोलकाता और आसपास के जिलों में शुक्रवार सुबह से ही आंधी-तूफान और बारिश हो रही है, जिससे कई इलाकों में जलजमाव हो गया है और ट्रैफिक में रुकावट आने की खबरें आईं.

फीफा वर्ल्ड कप 2026: अमेरिका की लगातार दूसरी जीत, मोरक्को ने भी दर्ज की अहम जीत

 नई दिल्ली  फीफा वर्ल्ड कप-2026 के संयुक्त मेजबान अमेरिका ने ग्रुप-डी के मैच में ऑस्ट्रेलिया को मात देकर नॉकआउट दौर में जगह बना ली है। वहीं, मोरक्को ने ग्रुप-सी के मैच में स्कॉटलैंड को पटखनी देते हुए अगले दौर में जाने की संभावनाओं को मजबूत कर लिया है। अमेरिका नॉकआउट दौर में पहुंचाने वाली दूसरी टीम बन गई है। उससे पहले, एक और संयुक्त मेजबान मैक्सिको ने अगले दौर में जगह बनाई थी। वह ऐसा करने वाली पहली टीम थी। 96 साल बाद हुआ ऐसा अमेरिका की ये इस वर्ल्ड कप में लगातार दूसरी जीत है और इसी के साथ उसने 96 साल का सूखा खत्म किया है। इस वर्ल्ड कप से पहले अमेरिका ने साल 1929 में लगातार दो मैच जीते थे। इस डबल को दोहराने में अमेरिका को 96 साल लग गए। उसने अपने पहले मैच में पैराग्वे को 4-1 से मात दी थी। सीटल स्टेडियम में खेले गए इस मैच में अमेरिका के लिए पहला गोल ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी कैमरन बर्गेस ने किया। उन्होंने गेंद को क्लियर करने के प्रयास में आत्मघाती गोल कर डाला जिससे अमेरिका 11वें मिनट में ही 1-0 से आगे हो गई। पहले हाफ के खत्म होने से दो मिनट पहले यानी 43वें मिनट में एलेक्स फ्रीमैन ने अमेरिका के लिए दूसरा गोल कर दिया। दूसरे हाफ में कोई गोल हो नहीं सका और अमेरिका ने ये मैच जीतते हुए शान से नॉकआउट दौर में जगह बनाई। मोरक्को ने भी जीता मैच वहीं मोरक्को ने भी स्कॉटलैंड के खिलाफ शुरुआती बढ़त ले ली थी जिसे कायम रखते हुए जीत हासिल की। मोरक्को के लिए इस्माइल साल्बारी ने डेढ़ मिनट में गोल करते हुए अपनी टीम को बढ़त दिलाई और फिर इसे कायम रखते हुए स्कॉटलैंड को पटखनी दी। ब्राहिम डिएज ने स्कॉटलैंड को डिफेंस को भेदते हुए इस्लमाइल तक शानदार पास दिया। इसके बाद इस्माइल ने एक झन्नटेदार किक से गेंद को नेट में डाल अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया। इसी स्कोरलाइन से मोरक्को ने जीत हासिल की और अगले दौर में जाने की उम्मीदों को पुख्ता किया।  

नेमार के बिना भी चमका ब्राजील, हैती को हराकर विश्व कप में खोला जीत का खाता

 नई दिल्ली  मोरक्को के खिलाफ अपने पहले मैच में 1-1 से ड्रॉ खेलने पर मजबूर होने वाली ब्राजील ने शनिवार को फीफा वर्ल्ड कप-2026 में अपनी पहली जीत हासिल कर ली है। ग्रुप-सी के मैच में ब्राजील ने हैती को 3-0 से मात देकर अपना खाता खोला। पहले मैच में ड्रॉ खेलने के बाद ब्राजील को इस मैच में जीत की सख्त जरूरत थी और उसने इसी तरह का खेल दिखाते हुए तीन अंक लिए जिससे अब उसके कुल चार अंक हो गए हैं और वह मोरक्को की बराबरी पर है जिसने स्कॉटलैंड को मात दी है। शुरू से दिखाया दबदबा हैती की ये लगातार दूसरी हार है और वह अगले दौर की रेस से लगभग बाहर हो गई है। अपने स्टार खिलाड़ी नेमार के बिना उतरी ब्राजील ने शुरू से ही इस मैच में अपना दबदबा दिखाया। 23वें मिनट में उसने अपना पहला गोल किया। उसके लिए ये गोल माथेयास कुनहो ने किया। माथेयास यहीं नहीं रुके। उन्होंने 36वें मिनट में एक और गोल कर दिया और अपनी टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी। पहले हाफ का अंत ब्राजील के पक्ष में 2-0 से होता दिख रहा था, लेकिन इस हाफ के अतिरिक्त समय में विनिसियस जूनियर ने लुकास पाक्वेटा के पास पर शानदार गोल कर स्कोर 3-0 कर दिया। दूसरे हाफ में नहीं हो सका गोल हैती के लिए वापसी काफी मुश्किल थी, लेकिन उसके पास पूरा दूसरा हाफ था। हालांकि, ब्राजील की दीवार को भेदना उसके लिए आसान नहीं रहा। इस हाफ में उसके लिए उपलब्धि यही रही कि उसने और कोई गोल नहीं होने दिया। ब्राजील ने काफी कोशिश की, लेकिन दूसरे हाफ में वह हैती के डिफेंस को चकमा नहीं दे सकी। हालांकि, उसके पास जीत के लिए पर्याप्त स्कोर था जो उसके काम आया और ब्राजील ने इस टूर्नामेंट की अपनी पहली जीत हासिल की।  

दो रेड कार्ड पड़े भारी, नौ खिलाड़ियों वाली कतर पर कनाडा की बड़ी जीत

 नई दिल्ली  फीफा विश्व कप 2026 के ग्रुप मैच में दो-दो लाल कार्ड खाने वाली कतर को मेजबान कनाडा ने 6-0 से रौंद दिया। मेजबानों के लिए स्ट्राइकर जोनाथन डेविड ने हैटट्रिक जमाई जबकि काएल लैरिन और नेथन सलिबा ने एक-एक गोल किया। मैच का छठा गोल मोहम्मद मनाइ ने 75वें मिनट में अपने ही गोल पोस्ट में मार दिया। मैच की शुरुआत लैरिन के खूबसूरत गोल से हुई। मैच के 16वें मिनट में बॉक्स के बाएं तरफ से आई गेंद पर जमाए करारे शॉट को कतर के गोलकीपर ने रोक लिया लेकिन वह गेंद पर काबू नहीं पा सके और वह छिटककर लैरिन के पैरों में आ गिरी जिन्होंने एकदम करीब से इसे गोल में पहुंचा दिया। कतर की मुश्किलें बढ़ीं मैच के 29वें मिनट में डेविड ने अपना पहला गोल दागा जब उन्होंने दूर से जमाए एक शॉट को कतर के डिफेंडर से लगकर छिटकने के बाद दमदार शॉट के जरिए गोल में पहुंचाया। दो-तीन मिनट के बाद ही कतर की मुसीबतें बढ़ गईं जब मैच के 33वें मिनट में होमाम अहमद को रेफरी ने रेड कार्ड दिखा दिया। पहले हाफ के अतिरिक्त समय (45+3) में अपना दूसरा और मैच का तीसरा गोल किया। इस गोल में भी डेविड को भाग्य का साथ मिला। बॉक्स के बाएं तरफ से उछली गेंद पर लगे करारे हेडर को कतर के गोलकीपर ने रोक लिया, लेकिन गेंद फिर से डेविड के पास जा गिरी जिन्होंने एकदम नजदीक से कोई गलती नहीं की। पहला हाफ खत्म हुआ तो कनाडा 3-0 से आगे थी। दूसरे हाफ में कनाडा का जलवा दूसरे हाफ की शुरुआत कतर के असिम मदिबो के भयंकर फाउल से हुई। उन्होंने कनाडा के इस्माइल कोने को पीछे से टैकल करके गिरा दिया। रेफरी ने मदिबो को तुरंत रेड कार्ड दिखाकर बाहर भेज दिया। कोने की चोट बहुत गंभीर थी उन्हें भी स्ट्रेचर पर लादकर मैदान से बाहर ले जाया गया। मैच के 53वें मिनट में हुई इस घटना के कुछ देर बाद, 64वें मिनट में सलिबा ने बेहतरीन फ्री किक के जरिए कनाडा की बढ़त 4-0 की कर दी। सिर्फ नौ खिलाड़ियों के साथ खेल रही कतर की मुश्किलें खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थीं। मनाइ ने 75वें मिनट में कनाडा का एक शॉट गोल से दूर भेजने की जगह पूरी ताकत से गोल के अंदर मार दिया। डेविड ने दूसरे हाफ के अतिरिक्त समय (90+2) में अपनी हैटट्रिक पूरी करते हुए कनाडा को 6-0 से जीत दिला दी।

क्या तेजस MK2 बदल देगा हवाई युद्ध का खेल? F-35 और Su-57 की जरूरत पर उठे सवाल

बेंगलुरु   दशकों पहले जिस देश के पास जितनी मजबूत आर्मी यानी थलसेना होती थी, उसे उतना पावरफुल माना जाता था. फिर हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम हमले के बाद कॉम्‍बैट फील्‍ड में एयरफोर्स की धमाकेदार एंट्री हुई. आज 21वीं सदी में दुनिया दो भीषण सशस्‍त्र संघर्ष का साक्षी बनी है – रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान जंग. इन दोनों युद्ध में एक बात कॉमन है – एरियल अटैक यानी हवाई हमले. इन संघर्षों में पैदल सेना यानी आर्मी का न के बराबर यूज किया गया. हवाई हमले प्रमुख रहे. फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों ने प्रतिद्वंद्वी देशों की हालत खराब करके रख दी. इसके दो परिणाम सामने आए हैं – पहला फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन सिस्‍टम डेवलप करने वाले प्रोजेक्‍ट्स का रफ्तार मिली है. दूसरा, अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस एयर डिफेंस सिस्‍टम विकसित करने पर जोर दिया जाने लगा है. भारत का मिशन सुदर्शन चक्र परियोजना नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम का हिस्‍सा है. इसके अलावा देसी टेक्‍नोलॉजी के दम पर फाइटर जेट डेवलप करने की प्रक्रिया को भी रफ्तार मिली है. इसी क्रम में भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है. तेजस फाइटर जेट के MK2 वेरिएंट Mk1A की तुलना में काफी कम रडार क्रॉस सेक्‍शन (RCS) हासिल करने में सफल रहा है।   इसका मतलब यह हुआ कि तेजस MK2 मॉडर्न रडार सिस्‍टम को चकमा दे सकता है. साथ ही THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम को धता बताने से महज कुछ कदम ही दूर है. इस खासियत के चलते तेजस MK2 चौथी और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के बीच का ब्रिज भी माना जा रहा है. साथ ही इसकी स्‍पीड राफेल फाइटर जेट जितनी होने वाली है।  भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मिली है. एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा विकसित किए जा रहे तेजस MK2 फाइटर जेट (मीडियम वेट फाइटर) में रडार से बचने की क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण सुधार किया गया है. परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, तेजस MK2 का फ्रंटल रडार क्रॉस सेक्शन (आरसीएस) मौजूदा तेजस MK-1A की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत कम होगा. इसका अर्थ है कि नए विमान की रडार पर दिखाई देने की संभावना काफी कम हो जाएगी, जिससे युद्धक्षेत्र में दुश्मन को चकमा देने और सर्वाइवल की क्षमता बढ़ेगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, ADA के परियोजना निदेशक ने बताया कि तेजस MK2 का फ्रंटल आरसीएस तेजस MK-1A का लगभग एक चौथाई होगा. स्वतंत्र आकलनों के अनुसार, साफ कॉन्फिगरेशन (बिना बाहरी हथियारों और अतिरिक्त ईंधन टैंकों के) में इसका फ्रंटल आरसीएस 0.1 से 0.2 वर्ग मीटर के बीच हो सकता है. यह आंकड़ा आधुनिक 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की श्रेणी में काफी प्रभावशाली माना जाता है।  RCS में कमी लाने वाली प्रमुख खासियतें     एडवांस शेपिंग और एज अलाइनमेंट (किनारों का विशेष डिजाइन), जिससे रडार तरंगें अपने स्रोत की ओर वापस परावर्तित यानी रिफ्लेक्‍ट होने के बजाय दूसरी दिशा में मुड़ जाती हैं।      S-डक्ट (S-Duct) या ट्विस्टेड एयर इंटेक, जो इंजन के कंप्रेसर ब्लेड्स को छिपाते हैं. कंप्रेसर ब्लेड्स किसी भी लड़ाकू विमान में रडार के लिए सबसे बड़े परावर्तक (रिफ्लेक्टर) माने जाते हैं।      विमान के पंखों, फ्यूजलाज (मुख्य ढांचे), कैनार्ड्स और अन्य सतहों में 90 प्रतिशत से अधिक कंपोजिट सामग्री का उपयोग, जो धातु की तुलना में रडार ऊर्जा को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित करती है।      स्वदेशी रडार एब्जॉर्बेंट मैटेरियल (RAM) कोटिंग, जिसे एएमसीए (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के तहत विकसित तकनीकों के आधार पर तैयार किया गया है।      सतहों के बीच अधिक चिकने और निर्बाध संक्रमण (स्मूथ सरफेस ट्रांजिशन) तथा बाहरी उभारों और गैप्स की संख्या में कमी, जिससे रडार पर विमान की पहचान और भी कठिन हो जाती है।  मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी के साथ बड़ा आकार दिलचस्प बात यह है कि तेजस MK2 फाइटर जेट आकार में अपने पूर्ववर्ती एमके-1ए से बड़ा है. इसमें लंबा फ्यूजलेज, क्लोज कपल्ड कैनार्ड और अधिक ईंधन तथा हथियार ले जाने की क्षमता होगी. सामान्य तौर पर विमान का आकार बढ़ने से उसकी रडार पहचान भी बढ़ जाती है, लेकिन डिजाइनरों ने एडवांस एयरोडायनामिक डिजाइन, स्मूथ ट्रांजिशन और व्यापक रूप से कंपोजिट सामग्री के इस्तेमाल के जरिए इसकी रडार पहचान को उल्लेखनीय रूप से कम करने में सफलता हासिल की है. तेजस एमके-1ए पहले से ही अपनी श्रेणी के विमानों में अपेक्षाकृत कम आरसीएस के लिए जाना जाता है. इसका अनुमानित फ्रंटल आरसीएस लगभग 0.5 वर्ग मीटर या उससे कम माना जाता है. अब इसमें चार गुना तक कमी लाकर तेजस MK2 को लो विजिबिलिटी वाले उन विमानों की श्रेणी में पहुंचाने का प्रयास किया गया है, जिनकी तुलना अक्सर महंगे और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों से की जाती है।  रडार को चकमा देने की क्षमता रडार से कम दिखाई देने की यह क्षमता विमान को दुश्मन के रडार द्वारा देर से पकड़े जाने में मदद करेगी. इससे विशेष रूप से बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) एरियल वॉर में इंडियन एयरफोर्स को सामरिक बढ़त मिल सकती है. हालांकि, विमान को पूरी तरह हथियारों और ईंधन टैंकों से लैस करने के बाद भी कम आरसीएस बनाए रखना सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती बनी हुई है. बाहरी हथियार, पॉड और अतिरिक्त टैंक रडार सिग्नेचर को बढ़ा देते हैं. इसी कारण डिजाइनर एडवांस रडार और अन्य तकनीकों पर काम कर रहे हैं।  भारत के एरियल पावर को नई ऊंचाई रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इन तकनीकी सुधारों के बावजूद विमान के विकास और वायुसेना में शामिल किए जाने की समयसीमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए. भारतीय वायुसेना को अपनी भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजस MK2 की आवश्यकता है, खासकर तब तक जब तक एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) परियोजना पूरी तरह मैच्‍योर नहीं हो जाती. GE F414 इंजन, ‘उत्तम’ एईएसए रडार और अन्य आधुनिक सिस्‍टम्‍स के साथ तेजस MK2 भारतीय वायुसेना के लिए एक शक्तिशाली लड़ाकू प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि कम रडार पहचान, एडवांस सेंसर, अधिक हथियार क्षमता और संभावित सुपरक्रूज क्षमता से यह विमान भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारत की ताकत को नई ऊंचाई देगा। 

Jio का नया AI असिस्टेंट कमाल करेगा, कॉल के दौरान मीटिंग रिकॉर्ड और फूड ऑर्डर भी होगा आसान

नई दिल्ली भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में डेटा और कॉलिंग की परिभाषा बदलने के बाद अब रिलायंस जियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ताकत को सीधे आम आदमी की रोजमर्रा की फोन कॉल्स से जोड़ने जा रहा है. कंपनी इस नए एआई टूल को इस साल के अंत तक देश भर में रोलआउट करने की योजना पर काम कर रही है, जो हर एक जियो यूजर के लिए पूरी तरह उपलब्ध होगा. इस सर्विस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से ‘मेड इन इंडिया’ और भारतीय परिवेश के अनुकूल है. यह असिस्टेंट देश की सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करेगा, जिससे ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक के आम उपभोक्ताओं के लिए फोन पर बात करने और अपने काम निपटाने का तरीका पूरी तरह से बदलने वाला है।  जियो कॉल एजेंट एक तरह का पर्सनल एआई दरबान (AI Concierge) है जो आपकी नॉर्मल वॉयस कॉल्स के भीतर ही मौजूद रहेगा. इसके इस्तेमाल के लिए किसी स्मार्टफोन में किसी थर्ड-पार्टी ऐप को इंस्टॉल करने या किसी अतिरिक्त सेटिंग को ऑन करने की कोई झंझट नहीं होगी. जब आप किसी से फोन पर बात कर रहे होंगे, तो आपको बस अपनी आवाज में “हे जियो” (Hey Jio) कहना होगा. यह कमांड सुनते ही जियो का नेटवर्क-बेस्ड एआई असिस्टेंट आपकी कॉल में एक मददगार की तरह शामिल हो जाएगा. इसके बाद यह कॉल पर हो रही बातचीत को लाइव सुनने और समझने लगेगा. सुरक्षा और प्राइवेसी के लिहाज से यह बेहद जरूरी फीचर है कि यह एआई केवल यूजर की स्पष्ट सहमति और कमांड मिलने के बाद ही कॉल में शामिल होगा, जिससे डेटा सिक्योरिटी से जुड़ा कोई खतरा नहीं रहेगा।  कॉन्फ्रेंस कॉल में 10 लोगों की आवाज पहचानेगा एआई आकाश अंबानी के अनुसार, इस एआई एजेंट की क्षमताएं बेहद आधुनिक हैं. यह किसी भी चालू कॉल के दौरान कही गई बातों को रियल-टाइम में लिखित रूप में (Transcribe) बदल सकता है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अगर आप एक कॉन्फ्रेंस कॉल पर हैं, तो यह एआई एक साथ 10 अलग-अलग लोगों की अनूठी आवाजों को पहचान सकता है और यह भी रिकॉर्ड रख सकता है कि किस व्यक्ति ने क्या बात कही. बातचीत खत्म होने के बाद, यह जियो कॉल एजेंट पूरी कॉल का एक सटीक सारांश (Summary) तैयार करेगा. इसके साथ ही मीटिंग में तय हुए जरूरी काम (Action Items) और जरूरी रिमाइंडर्स की एक लिस्ट बनाकर कॉल में शामिल सभी सदस्यों के साथ तुरंत शेयर कर देगा, ताकि किसी को अलग से नोट्स बनाने की जरूरत न पड़े।  आम आदमी के एक्सपीरियंस को कैसे बनाएगा खास? यह एआई असिस्टेंट केवल ऑफिस की मीटिंग्स या नोट्स बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद आसान और स्मार्ट बना देगा. लाइव कॉल के दौरान ही यूजर इस एआई एजेंट को सीधे निर्देश देकर कई तरह के टास्क पूरे करवा सकेंगे।      कैब और फूड बुकिंग: कॉल पर बात करते-करते ही आप एआई से कहकर अपने लिए खाना ऑर्डर कर सकते हैं या कहीं जाने के लिए कैब बुक कर सकते हैं।      टेबल और मीटिंग शेड्यूलिंग: किसी रेस्टोरेंट में टेबल रिजर्व करनी हो या दोस्तों-सहकर्मियों के साथ मीटिंग का समय तय करना हो, एआई कॉल के बैकग्राउंड में ही यह काम संभाल लेगा।      भाषा की दीवार होगी खत्म: सभी भारतीय भाषाओं के सपोर्ट के कारण, यदि कोई व्यक्ति अपनी क्षेत्रीय भाषा में भी निर्देश देगा, तो यह एआई उसे बखूबी समझकर टास्क पूरा करेगा।  जियो का यह कदम भारत में एआई तकनीक के लोकतंत्रीकरण (Democratization) की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, जो महंगे एआई फीचर्स को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के देश के 50 करोड़ से ज्यादा आम स्मार्टफोन और फीचर फोन यूजर्स की पहुंच में ला देगा। 

WhatsApp यूजर्स के लिए नया सब्सक्रिप्शन प्लान, ₹79 प्रति माह में मिलेगा प्रीमियम अनुभव

 नई दिल्ली WhatsApp अब तक पूरी तरह फ्री ऐप रहा है, लेकिन अब इसमें पहली बार एक पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल आ गया है. कंपनी ने भारत में WhatsApp Plus नाम से नया प्लान रोलआउट करना शुरू किया है, जो Android और iOS दोनों यूजर्स के लिए है।  इस नए प्लान की कीमत भारत में 79 रुपये प्रति महीने रखी गई है. हालांकि शुरुआत में यूजर्स को पहला महीना फ्री ट्रायल के तौर पर मिल रहा है. यानी आप पहले इसे इस्तेमाल करके देख सकते हैं और उसके बाद तय कर सकते हैं कि यह आपके लिए जरूरी है या नहीं।  WhatsApp Plus को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यह कोई बड़ा बदलाव नहीं लाता, बल्कि यह एक तरह का कस्टमाइजेशन पैक है. इसका मतलब यह है कि ऐप के बेसिक फीचर्स जैसे कॉलिंग, स्टेटस, मैसेजिंग और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पहले जैसे ही रहेंगे और सभी यूजर्स के लिए फ्री रहेंगे।  यह सब्सक्रिप्शन सिर्फ उन लोगों के लिए है जो WhatsApp को थोड़ा अलग और पर्सनल तरीके से इस्तेमाल करना चाहते हैं।  इस प्लान के तहत यूजर्स को ऐप के लुक को बदलने का ऑप्शन मिलता है. इसमें करीब 18 नए कलर थीम्स दिए गए हैं, जिनमें अलग-अलग स्टाइल और कलर कॉम्बिनेशन शामिल हैं।  इसके अलावा ऐप का आइकन भी बदला जा सकता है, जिसके लिए 14 नए डिजाइन दिए गए हैं. यानी WhatsApp अब पहले जैसा दिखे, यह जरूरी नहीं है, आप इसे अपनी पसंद के हिसाब से बदल सकते हैं।  सिर्फ लुक ही नहीं, कुछ छोटे लेकिन काम के फीचर्स भी इसमें जोड़े गए हैं. जैसे यूजर्स को एक्सक्लूसिव रिंगटोन मिलती हैं, जो आम यूजर्स के पास नहीं होंगी. इसके साथ ही नए स्टिकर पैक भी दिए जाते हैं. एक और बदलाव यह है कि अब आप अपनी चैट लिस्ट में 20 तक चैट्स को पिन कर सकते हैं, जो पहले लिमिटेड थी।  चैट को मैनेज करने के लिए भी कुछ एडिशनल कंट्रोल दिए गए हैं. यूजर्स अपनी चैट लिस्ट को अपने हिसाब से कस्टमाइज कर सकते हैं, जिससे ऐप का इस्तेमाल थोड़ा ज्यादा आसान और पर्सनल हो जाता है।  अगर सब्सक्राइब करने की बात करें तो प्रोसेस आसान है. WhatsApp की सेटिंग्स में जाकर Subscriptions सेक्शन में WhatsApp Plus का ऑप्शन मिलेगा. वहां से पेमेंट करके इसे एक्टिव किया जा सकता है. पेमेंट Google Play Store के जरिए प्रोसेस होता है और एक्टिवेशन के बाद नोटिफिकेशन भी मिलता है।  हालांकि यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह फीचर अभी सभी यूजर्स तक नहीं पहुंचा है. अगर आपको Subscriptions में WhatsApp Plus का ऑप्शन नहीं दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि यह अभी आपके अकाउंट के लिए रोलआउट नहीं हुआ है. ऐसे में कुछ दिन इंतजार करना होगा।  अब सवाल यही है कि क्या WhatsApp Plus लेना चाहिए या नहीं. इसका जवाब पूरी तरह यूजर पर निर्भर करता है. अगर आप WhatsApp को सिर्फ मैसेजिंग के लिए इस्तेमाल करते हैं और आपको उसका मौजूदा लुक और फीचर्स ठीक लगते हैं, तो यह प्लान आपके लिए जरूरी नहीं है। 

COVID-19 की उत्पत्ति पर नई बहस, चीन की लैब और अमेरिकी फंडिंग को लेकर सामने आए चौंकाने वाले दावे

बीजिंग /न्यूयॉर्क पूरी दुनिया को झकझोर देने वाली कोरोना महामारी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. कुछ दिनों पहले अमेरिकी खुफिया विभाग की निदेश का पद छोड़ने का ऐलान करने वाली तुलसी गबार्ड नेकोरोना वायरस को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के चीफ मेडिकल एडवाइजर एंथोनी फुसी ने चीन स्थित वुहान के उस लैब को फंडिंग की थी, जहां से कोरोना महामारी फैली थी।  प्रतिबंधित दस्तावेज हुए सार्वजनिक अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने हाल ही में अमेरिकी की ओर से फंड किए गए बायोलैब्स से संबंधित कई दस्तावेज को सार्वजनिक कर दिया.  उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के पूर्व निदेशक एंथनी फौसी ने कोरोना महामारी की शुरुआत पर खुफिया आकलन को प्रभावित किया और बाद में संसद के सामने कसम खाकर ऐसे कनेक्शन को खारिज किया था।  राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के दफ्तर (ओडीएनआई) ने इस दस्तावेज को जारी किया. गबार्ड का यह कदम ट्रंप प्रशासन के उस प्रयास में एक बड़ा कदम है, जिसमें महामारी की उत्पत्ति की फिर से समीक्षा करने और वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान अमेरिकी सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिकों और खुफिया अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की बात कही गई है।  गबार्ड के अनुसार, नए जारी किए गए बातचीत और दस्तावेजों से पता चलता है कि जब वायरस नैचुरली निकला या चीन के वुहान की लैब से, इसपर बहस तेज हुई तो कैसे फौसी ने राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के निदेशक के तौर पर काम करते हुए खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की।  बाइडेन के अधिकारी पर तुलसी गबार्ड का बड़ा आरोप गबार्ड ने कहा, 'कोविड-19 महामारी की वजह से हमारे लाखों साथी, अमेरिकियों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को बहुत मुश्किल भरे दौर से गुजरना पड़ा. सालों के झूठ, सेंसरशिप और छिपाने के बाद, अमेरिकी लोग पारदर्शिता, सच्चाई और जवाबदेही के हकदार हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. फौसी जैसे राजनीतिक स्वार्थी नेताओं ने अपने गलत कामों और सत्ता के दुरुपयोग को छुपाया, खुफिया जानकारी में हेरफेर किया, कांग्रेस से झूठ बोला और देश को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सूचानाओं तक निर्वाचित राष्ट्रपति की पहुंच सीमित करके उनकी छवि को कमजोर किया।  ओडीएनआई ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पारदर्शिता संबंधी निर्देश के तहत उसने एक वर्ष तक चली गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की समीक्षा प्रक्रिया संचालित की. इस दौरान अनियमितताओं का खुलासा करने वाले अधिकारियों की गवाही भी एकत्र की गई. इन अधिकारियों ने आरोप लगाया कि वायरस की उत्पत्ति को लेकर आधिकारिक आकलनों पर सवाल उठाने के कारण उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई।  ओडीएनआई ने दावा किया कि फौसी के खुफिया अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध थे, जिससे वह कोविड-19 की शुरुआत के बारे में चर्चा में अहम भूमिका निभा पाए. इसमें आरोप लगाया गया कि फौसी ने खुफिया एजेंसियों से सलाह लेने वाले विशेषज्ञों के बारे में सुझाव दिए और ऐसे आकलन बनाने में मदद की जिन्हें बाद में वैज्ञानिक सहमति के तौर पर सबके सामने पेश किया गया।  बाइडेन सरकार ने की थी समीक्षा बैठक जुलाई 2021 के एक इंटेलिजेंस कम्युनिटी ईमेल में कहा गया था कि अधिकारी फौसी के सुझावों पर आगे बढ़ना चाहते थे क्योंकि उन्हें एक एसएमई के ​​तौर पर देखा जाता था, जिसके पास मौजूदा और ऐतिहासिक रिसर्च के बारे में बहुत जानकारी है और जो शायद ज्यादातर लोगों से बेहतर जानता है कि असली कोरोना वायरस विशेषज्ञ कौन हैं।  तत्कालीन बाइडेन सरकार ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर 90 दिनों की समीक्षा बैठक की थी. इसे लेकर दस्तावेज में बताया गया है कि 2021 में खुफिया अधिकारी ने 90-दिनों की समीक्षा के दौरान फौसी की तरफ से रिकमेंड किए गए वैज्ञानिक तक पहुंचने को लेकर चर्चा कर रहे थे. आंतरिक पत्राचार में उन्हें एक सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट बताया गया था, जिनकी रिकमेंडेशन्स को समीक्षा प्रक्रिया के लिए जरूरी माना गया था।  फौसी ने 2024 में कोरोना वायरस महामारी पर हाउस सिलेक्ट सबकमेटी के सामने अपनी गवाही में वायरल रिसर्च के बारे में इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ बातचीत की जानकारी से इनकार किया. रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्यूमेंट्स में इंटेलिजेंस अधिकारियों और कोविड-की उत्पत्ति की जांच के बीच कई बातचीत दिखाई गई हैं. उस समय कुछ सरकारी कम्युनिकेशन ने इस दावे को खारिज कर दिया था कि वायरस को लैब में बनाया गया था, जबकि दूसरों ने लैबोरेटरी एक्सीडेंट सिनेरियो और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की क्षमताओं की जांच की।  वुहान लैब को लेकर बड़ा खुलासा लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी की ओर से मई 2020 में तैयार किए गए एक आकलन में यह निष्कर्ष निकाला गया कि वुहान में लेबोरेटरी में बदले गए कोरोना वायरस के गलती से फैलने के लिए हालात मौजूद थे और लेबोरेटरी और प्राकृतिक उत्पत्ति की परिकल्पनाओं को बराबर महत्व दिया गया. ओडीएनआई रिलीज में अनियमितताओं का खुलासा करने वाले अधिकारियों के आरोप भी शामिल हैं कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने लैब-लीक हाइपोथीसिस का समर्थन किया, उन्हें परेशानी झेलना पड़ी, किनारे कर दिया गया या अलग राय रखने से रोका गया।  तुलसी गबार्ड ने कहा कि इनमें से कई शिकायतों को आगे की समीक्षा के लिए इंटेलिजेंस कम्युनिटी इंस्पेक्टर जनरल के पास भेज दिया गया है. कोविड-19 की शुरुआत महामारी के सबसे विवादित मुद्दों में से एक है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ​​लंबे समय से बंटी हुई हैं, कुछ का मानना ​​है कि यह जानवरों से प्राकृतिक रूप से फैला है और कुछ लैब से जुड़ी घटना को ज्यादा संभावित वजह मानते हैं।