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अब मोबाइल पर मिलेगी सरकारी बस की लाइव लोकेशन, बीएसआरटीसी ला रहा नया ऐप

पटना बिहार में रोजाना सरकारी बसों से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) एक बड़ी सुविधा शुरू करने जा रहा है। अब यात्रियों को अपनी बस के लिए घंटों बस स्टैंड पर इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि ट्रेनों की तरह ही अब सरकारी बसों की भी पूरी जानकारी एक क्लिक पर मोबाइल पर मिलेगी। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन निगम आगामी 15 अगस्त को 'वेयर इज माय बस' नामक एक बेहद खास मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रहा है। इस ऐप के जरिए यात्री घर बैठे ही बस की लाइव लोकेशन, उसके आने का अनुमानित समय, रूट, किराया और स्टॉपेज की सटीक जानकारी आसानी से देख सकेंगे। ऑनलाइन टिकट और किराए की मिलेगी पूरी जानकारी इस नए डिजिटल सिस्टम के शुरू होने से अब यात्रियों को पूछताछ काउंटर या बस डिपो के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं होगी। इस ऐप के जरिए लोग 24 घंटे कभी भी ऑनलाइन टिकट बुक कर सकेंगे और डिजिटल भुगतान भी कर पाएंगे। यह सुविधा विशेष रूप से बिहार से बाहर रहने वाले उन प्रवासियों के लिए वरदान साबित होगी, जो छठ, दीपावली, दुर्गापूजा और होली जैसे बड़े त्योहारों पर अपने घर लौटना चाहते हैं। जिन शहरों में भी बीएसआरटीसी की बसें चलती हैं, वहां से पटना या राज्य के अन्य किसी भी हिस्से के लिए यात्री आसानी से एडवांस बुकिंग कर अपनी यात्रा को सुरक्षित बना सकेंगे। ऐप संचालन के लिए जल्द जारी होगा टेंडर राजधानी पटना सहित पूरे राज्य में यातायात व्यवस्था को सुधारने और जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए भी इस ऐप में कड़े नियम जोड़े गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन निगम जल्द ही सभी प्रमुख बस स्टॉप और पड़ावों को बेहतर बनाकर उन्हें मार्क करेगा, ताकि ड्राइवर हर कहीं बस न रोककर सिर्फ निर्धारित स्टॉपेज पर ही बसें खड़ी करें। ऐप के सुचारू संचालन के लिए विभाग द्वारा जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर एक बेस्ट एजेंसी का चयन किया जाएगा। इस ऐप की मुख्य खूबियों में मैप पर बस की वर्तमान स्थिति देखना, बस स्टॉप तक पहुंचने का समय जानना और राज्यभर में चल रही सभी बसों का आधिकारिक किराया सूची देखना शामिल रहेगा।

Punjab News: होशियारपुर में ड्रग तस्करी से जुड़ी अवैध संपत्ति ध्वस्त, आरोपी दंपती पर प्रशासन की कार्रवाई

होशियारपुर. होशियारपुर के सरहाला कलां गांव में पंचायत जमीन पर बने अवैध ढांचे को नशा विरोधी अभियान के तहत गिरा दिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ढांचा पंचायत की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाया गया था। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम के तहत दर्ज कई मामलों में नामजद हैं। पुलिस के मुताबिक, दंपती पर कुल 14 मामले दर्ज हैं, जिनमें से कुछ मामलों में उन्हें दोषी भी ठहराया जा चुका है, जबकि कई मामले अभी अदालत में विचाराधीन हैं। फिलहाल दोनों आरोपी जेल में बंद हैं। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात पुलिस ने दावा किया है कि यह संपत्ति नशा तस्करी से अर्जित धन के जरिए बनाई गई थी। इसी आधार पर प्रशासन ने अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की। कार्रवाई से पहले गांव में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी भी प्रकार के विरोध या कानून व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई राज्य सरकार के “नशे के खिलाफ युद्ध” अभियान का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि नशा तस्करी से जुड़ी अवैध संपत्तियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी ऐसे मामलों की पुष्टि होगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी। मई महीने में 95 मामले दर्ज जिले में नेशनल नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन पोर्टल (एनकॉर्ड) के तहत नशों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में बताया गया कि मई माह में 95 मामले दर्ज कर 123 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 878 ग्राम हेरोइन, 26 किलो से अधिक चूरा-पोस्त, एक हजार से अधिक नशीले कैप्सूल और 15,100 रुपये की ड्रग मनी बरामद की। अधिकारियों ने नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती, जागरूकता अभियान और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई पर भी चर्चा की। बैठक में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए गए।

सरकारी स्कूल में जाम छलकाते मिला शिक्षक, कवर्धा में वीडियो वायरल; DEO बोले- होगी जांच

कवर्धा. कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. सुदूर वनांचल ग्राम तेलियापानी लेदरा के शासकीय स्कूल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. स्कूल में पदस्थ शिक्षक को शराब सेवन करते पकड़ा गया है.   जानकारी के अनुसार, यह घटना स्कूल समय के दौरान की बताई जा रही है. एक शिक्षक स्कूल के कमरे में शराब का सेवन नजर आए. कमरे में दो शराब की बोतलें और खाने के पैकेट भी मिले. मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी एफ.आर. वर्मा ने संबंधित प्रधान पाठक से प्रतिवेदन तलब किया है. उनका कहना है कि वीडियो की जांच कराई जाएगी. घटना कब की है, शराब सेवन कहां हुआ है, इसकी पुष्टि के लिए जांच की जाएगी. जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. बिलासपुर में भी शराबी शिक्षक पकड़ाया – बिलासपुर में मस्तूरी विकासखंड के मचहा जनपद प्राथमिक शाला में विगत महीनों टीचर संतोष केवट स्कूल में दिनदहाड़े शराब पीता नजर आया. स्कूल संचालन के दौरान शिक्षक ने महिला प्रधान पाठक तुलसी गणेश चौहान के सामने बैठकर शराब पी थी. उसे निलंबित कर दिया गया था. आरोपी टीचर मूंछों पर ताव देकर धौंस भी दे रहा है कि जाओ कलेक्टर को बता दो, मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता है. ये पूरा मामला बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड के एक शासकीय स्कूल का है. शिक्षा विभाग ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया है. जिला शिक्षा अधिकारी ने खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि वो अब इस मामले में आपराधिक मामला दर्ज कर उक्त शिक्षक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें. जैसे ही डीईओ के सामने यह वीडियो आया. उन्होंने एक्शन लेते हुए शराबी शिक्षक को निलंबित कर दिया.

India-Japan Summit: 1 जुलाई को भारत दौरे पर आएंगी जापानी प्रधानमंत्री, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई मजबूती

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जापान की पीएम साने ताकाइची तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचेंगी. पीएम ताकाइची 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होंगी. यह उनका पहला भारत दौरा है. प्रधानमंत्री ताकाइची 1-3 जुलाई, 2026 तक नई दिल्ली के आधिकारिक दौरे पर रहेंगी. यह समिट दोनों पक्षों को द्विपक्षीय सहयोग के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा करने और मजबूत करने के साथ-साथ परस्पर हितों के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर देगा।  यह प्रधानमंत्री ताकाइची का भारत का पहला आधिकारिक दौरा होगा. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी अगस्त 2025 में जापान के दौरे पर पहुंचे थे, जहां वे 15वें भारत-जापान सालाना समिट में शामिल हुए. यह भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में टोक्यो में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ भारत-जापान आर्थिक मंच कार्यक्रम के दौरान शीर्ष उद्योग जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी पर प्रकाश डाला और द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के लिए पांच-पॉइंट रोडमैप पेश किया।  प्रधानमंत्री मोदी ने कहा अभी भारत-जापान बिजनेस फोरम की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई. इसमें कंपनियों के बीच हुई बिजनेस डील का विस्तार से वर्णन दिया गया है. इस प्रगति के लिए मैं आप सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं. दो दिवसीय जापान दौरे पर पीएम मोदी ने प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नुकागा फुकुशिरो और जापानी सांसदों के एक समूह के साथ एक बैठक की. इस दौरान भारत और जापान के बीच मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों पर चर्चा हुई. इसके अलावा, उन्होंने टोक्यो में जापान के 16 प्रांतों के राज्यपालों से मुलाकात की थी. प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने से संबंधित कई समझौते पर मुहर लगी।  ताकाइची का पहला भारत दौरा यह प्रधानमंत्री ताकाइची का भारत का पहला आधिकारिक दौरा होगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दौरा अगस्त 2025 में 15वें भारत-जापान सालाना शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी के टोक्यो दौरे के बाद हो रहा है। यह दौरा भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और बढ़ाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पीएम मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ मियागी प्रांत के सेंडाई शहर का दौरा किया था. इस दौरान दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रॉन मियागी लिमिटेड (टीईएल मियागी) का दौरा किया. कारखाने में उन्हें टीईएल की वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भूमिका, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और भारत के साथ वर्तमान व भविष्य के सहयोग के बारे में जानकारी दी गई थी।  इस दौरे से दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर निर्माण, टेस्टिंग और सप्लाई चेन में सहयोग के अवसरों की व्यावहारिक समझ बनी. प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भारत के उभरते सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और जापान की उन्नत तकनीक के बीच सामंजस्य के तौर पर रेखांकित किया गया।  दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में सहयोग गहन करने, जापान-भारत सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन साझेदारी के लिए सहमति को आगे बढ़ाने और भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धा व आर्थिक सुरक्षा वार्ता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई. इस दौरान मजबूत, लचीली और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन विकसित करने के साझा लक्ष्य पर भी जोर दिया गया। 

Bihar Politics: राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर बड़ा अपडेट, CCTV हटे; बंगला खाली करने की अंतिम चेतावनी

पटना  बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास से शुक्रवार को सीसीटीवी कैमरे हटा दिए गए। लालू परिवार के द्वारा धीरे-धीरे यह बंगला खाली किया जा रहा है। इससे पहले भी पिकअप आदि गाड़ियों में भरकर सामान यहां से निकाल कर दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आखिरी मोहलत मिली हुई है। 22 जून को उन्हें नोटिस देकर एक सप्ताह के भीतर आवास खाली करने को कहा गया था। यह बंगला सम्राट कैबिनेट में मंत्री नंदकिशोर राम को पिछले महीने ही आवंटित कर दिया गया था। भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से 39 हार्डिंग रोड पर दूसरा सरकारी आवास आवंटित किया है। हालांकि, कई बार उन्हें नोटिस मिलने के बावजूद उन्होंने अपना मौजूदा आवास खाली नहीं किया था। विभाग की ओर से उन्हें 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करने के लिए कई बार नोटिस दे चुकी है। इसी महीने दो बार उन्हें रिमाइंडर दिया जा चुका है। 7 दिन में बंगला खाली करना होगा राबड़ी देवी को भवन निर्माण विभाग ने ताजा नोटिस 22 जून को जारी किया। इसमें 7 दिन के भीतर बंगला खाली करने को कहा गया। भवन निर्माण विभाग ने यह भी कहा कि अगर इस अवधि में आवास खाली नहीं किया गया, तो कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसे सम्राट सरकार का लालू परिवार को आखिरी अल्टीमेटम माना जा रहा है। नए आवास में लालू के लिए मांगी गईं सुविधाएं इसी महीने 9 जून को भी भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को बंगला खाली करने का नोटिस दिया था। उस समय उन्होंने विभाग को पक्ष लिखकर नए आवास में उनके पति एवं आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए रैंप, लिफ्ट और आउटहाउस का निर्माण करने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद विभाग ने 39 हार्डिंग रोड बंगला में निर्माण कार्य शुरू कर दिया। उस आवास का रंग-रौगन भी किया गया है। राबड़ी आवास से सामान की शिफ्टिंग इसी बीच, राबड़ी आवास से सामान की शिफ्टिंग भी शुरू कर दी गई। पिछले दिनों पिकअप में लोड होकर सामान 10 सर्कुलर रोड से निकले थे और उन्हें राबड़ी देवी के छोटे बेटे एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर पहुंचाया गया था। इससे पहले भी कुछ सामान उनके निजी मकानों में शिफ्ट किए जा चुके हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी महीने लालू परिवार द्वारा 10 सर्कुलर रोड आवास खाली कर दिया जाएगा।

बिहार को अर्बन चैलेंज फंड में 2,900 करोड़, नगर निकाय करेंगे एमओयू

पटना बिहार के शहरों को सुंदर, आधुनिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने केंद्र सरकार के 'अर्बन चैलेंज फंड' (यूसीएफ) मिशन में भागीदारी को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस खास मिशन के तहत अब बिहार के संबंधित नगर निकाय सीधे केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के साथ एमओयू कर सकेंगे। सरकार के इस कदम से बिहार के शहरी इलाकों में बुनियादी ढांचे का विकास करने, कमाई के नए जरिए ढूंढने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने में बहुत बड़ी मदद मिलने वाली है। बिहार के हिस्से आए 2,900 करोड़ रुपए इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड मिशन के लिए देशभर के शहरों को चमकाने के लिए एक लाख करोड़ रुपए की सहायता का प्रावधान किया है, जिसमें से बिहार के लिए पूरे 2,900 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। इस फंड से होने वाले कामों का पूरा पैसा सरकार अकेले नहीं देगी। किसी भी प्रोजेक्ट की कुल लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, जो कुल मिलाकर 50 फीसदी होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि आधी रकम तो सरकार दे देगी, लेकिन बाकी बची हुई आधी (50 प्रतिशत) राशि संबंधित नगर निकायों को ऋण, बॉन्ड अथवा अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से खुद ही जुटानी होगी। लोन दिलाने के लिए हुडको को बनाया गया पार्टनर नगर निकायों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने और इस आधी रकम को जुटाने में सहायता के लिए भारत सरकार ने 'हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' (HUDCO) को नामित किया है, जिससे चयनित परियोजनाओं के लिए आसानी से लोन उपलब्ध कराया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन के तहत सिर्फ उन्हीं परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो नगर निकायों के लिए लंबे समय तक राजस्व का मजबूत स्रोत बन सकें। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से बिहार के नगर निकाय आत्मनिर्भर और वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनेंगे, जिससे राज्य के शहरों में योजनाबद्ध और टिकाऊ विकास को एक नई गति मिलेगी।

Operation Sindoor: सरकार ने पहली बार जारी किए 6 शहीद जवानों के नाम, वॉर मेमोरियल पर मिली अमर पहचान

 नई दिल्ली भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह जवान अब औपचारिक रूप से देश के सामने आए हैं. सरकार ने पहली बार इन शहीदों के नाम सार्वजनिक किए हैं. इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट पर रोल ऑफ ऑनर में शामिल किया गया है. युद्ध स्मारक की वॉल 3डी पर 2025 सेक्शन में अंकित किया गया है।  यह पहली बार है जब सरकार ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ चलाए गए क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन सिंदूर में हुई मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है. इससे पहले सरकार ने इन शहीदों की पहचान सार्वजनिक नहीं की थी, हालांकि मीडिया और सोशल मीडिया पर कई रिपोर्ट्स और अटकलें चल रही थीं।  मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान चलाया था. इसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. यह चार दिनों तक चला. इसका मकसद सीमा पार से आने वाले आतंकवाद को कुचलना और भारत की सुरक्षा को मजबूत करना था. इस दौरान भारतीय सेना, वायुसेना और अन्य बलों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।  अब तक सरकार ने ऑपरेशन के दौरान हुई सैन्य क्षति के बारे में विस्तार से नहीं बताया था. लेकिन राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर इन छह नामों को शामिल करना सरकार की ओर से पहली आधिकारिक स्वीकृति मानी जा रही है कि ऑपरेशन में भारतीय बलों को नुकसान हुआ था।  राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंकित छह शहीद सैनिकों और एयर वारियर्स के नाम इस प्रकार हैं…     सूबेदार मेजर पवन कुमार – हेडक्वार्टर 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड       राइफलमैन सुनील कुमार, वीर चक्र – 4 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री       लांस नायक दिनेश कुमार – 5 फील्ड रेजिमेंट       एविएशन टेक्नीशियन मूड मुरलीनायक – 851 लाइट रेजिमेंट       हवलदार सुनील कुमार सिंह – 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी       सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, वायु मेडल – 39 विंग इनमें दो सैनिकों को वीरता के लिए सम्मानित किया गया था – राइफलमैन सुनील कुमार को वीर चक्र और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को वायु मेडल मिला था।  राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का महत्व राष्ट्रीय युद्ध स्मारक इंडिया गेट के पास है. यहां देश के सभी शहीद सैनिकों के नाम दीवारों पर अमर कर दिए जाते हैं. हर साल नए शहीदों के नाम संबंधित वर्ष के सेक्शन में जोड़े जाते हैं. इन छह नामों को 2025 सेक्शन में शामिल किया गया है।  रोल ऑफ ऑनर में नाम दर्ज होना सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह देश के लिए इन वीरों के सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देने का तरीका है. परिवारों, साथी सैनिकों और पूरे देश के लिए यह भावनात्मक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. अब इन शहीदों को आधिकारिक रूप से फॉलेन हीरोज कहा जा रहा है।  सरकार की चुप्पी और अब खुलासा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई दिनों तक दोनों तरफ से तनाव रहा. भारत ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया, जबकि पाकिस्तान ने भी कुछ दावे किए. लेकिन भारत सरकार ने शुरुआत से ही सैन्य हताहतों की संख्या या नामों पर चुप्पी साध रखी थी. सुरक्षा कारणों और रणनीतिक वजहों से यह गोपनीयता बरती गई थी।  अब नाम जारी करने को विशेषज्ञ सकारात्मक कदम मान रहे हैं. इससे परिवारों को न्याय मिला है. देश के लोग अपने शहीदों को सलाम कर सकते हैं. ये छह जवान देश की रक्षा करते हुए अपनी जान न्योछावर कर गए. सूबेदार मेजर पवन कुमार जैसे अनुभवी जवान ब्रिगेड की अगुवाई करते थे।  राइफलमैन सुनील कुमार जैसे युवा सिपाही सीमा पर तैनात थे. एविएशन टेक्नीशियन और सार्जेंट जैसे एयर वारियर्स ने हवाई समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हर शहीद के परिवार में अब दर्द है, लेकिन गर्व भी है. पूरे देश को इन वीरों पर गर्व है. इनके बलिदान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय सशस्त्र बल आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग हैं। 

Bihar Teacher Transfer Policy में बड़ा बदलाव, महिलाओं और बीमार शिक्षकों को राहत

पटना  Bihar Teachers: शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के स्थानांतरण की जो नई नियमावली तैयार की है उसमें 40 से अधिक उम्र की मह‍िला श‍िक्ष‍िकाओं का विशेष ध्‍यान रखा गया है। इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर किसी अविवाहित महिला शिक्षक की उम्र 40 वर्ष से अधिक है तो स्थानांतरण में उनकी पसंद को वरीयता दी जाएगी। अगर कोई महिला शिक्षक विधिक रूप से अलग रह रहीं तो उन्हें भी स्थानांतरण में वरीयता मिलेगी। नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन विद्यालयों में स्वीकृत शिक्षक की संख्या चार से कम है , वहां वरीयता श्रेणी के शिक्षकों के पदस्थापन पर विचार नहीं किया जाएगा। बीमारी और दिव्यांगता में इस तरह वरीयता बीमारी और दिव्यांगता के तहत शिक्षकों को स्थानांतरण में किस तरह से अधिमानता मिलेगी इसका भी विशेष रूप से स्थानांतरण की नई नियमावली में जिक्र किया गया है। वरीयता श्रेणी के तहत कैंसर रोग से ग्रस्त शिक्षक, ओपन हार्ट सर्जरी, एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट अंग प्रत्यारोपण के मामले में 20 प्रतिशत स्वयं, 10 प्रतिशत पत्नी के मामले में तथा 10 प्रतिशत की वरीयता संबंधित शिक्षक के 18 वर्ष से कम उम्र के आश्रित के संदर्भ में दी जाएगी। इसी तरह की वरीयता एकल किडनी, किडनी ट्रांसप्लांट, व डायलिसिस के मामले में दी जाएगी। ब्रेन ट्यूमर, न्यूरो सर्जरी, बोन टीबी व अन्य अन्य गंभीर टीबी के साथ-साथ पक्षाघात पीड़ित शिक्षकों को भी स्थानांतरण में वरीयता मिलेगी। दिव्यांगता के संदर्भ में यह प्रावधान किया गया है कि 80 से 100 प्रतिशत तक की दिव्यांगता जिसमें दृष्टि, अस्थि अथवा श्रवण बाधा शामिल है, से प्रभावित शिक्षकों को स्थानांतरण में वरीयता दी जाएगी। बीमारी और दिव्यांगता श्रेणी के तहत आए आवेदन की जांच के लिए शिक्षा विभाग के स्तर चिकित्सा बोर्ड का गठन किया जाएगा। यदि कोई शिक्षक वरीयता श्रेणी के तहत आवेदन करता है पर उनका स्थानांतरण नहीं होता है तो वह अगले स्थानांतरण चक्र में वरीयता श्रेणी के तहत स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेगा। वरीयता का दावा गलत होने पर वैधानिक कार्रवाई अगर किसी शिक्षक की वरीयता का दावा गलत निकलता है तो संबंधित जिले के जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर से उसकी जांच कराई जाएगी। संबंधित शिक्षक को अपना स्पष्टीकरण दिए जाने को ले सात दिन का समय दिया जाएगा। यदि दावा गलत निकलता है तो संबंधित शिक्षक पर अनुशासनिक के साथ-साथ वैधानिक कार्रवाई भी होगी। वहीं राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार तथा राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों को भी स्थानांतरण में क्रमश: 10 व पांच प्रतिशत वरीयता दिए जाने का प्राविधान किया गया है।

मरीज की मौत के बाद फोर्टिस अस्पताल में अनियमितताओं की जांच, सीसीटीवी फुटेज से खुलासा

नई दिल्ली  मरीजों के इलाज में कथित लापरवाही और विभिन्न अनियमितताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के खिलाफ जांच के आदेश दिए है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभागों की संयुक्त टीम ने गुरुवार को अस्पताल का निरीक्षण किया, जिसमें कड़े अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। सीएम ने जन सुनवाई के दौरान मिली एक शिकायत के बाद जांच का आदेश दिया था। दरअसल मुख्यमंत्री जनसेवा सदन में सुनवाई के दौरान एक परिवार ने मुख्यमंत्री को शिकायत की थी कि शालीमार बाग क्षेत्र में उनके बेटे को चाकू मारकर घायल कर दिया गया था। उनके बेटे को फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने उसका इलाज करने से पहले उनसे पैसे की मांग की। जिसके चलते सही समय पर इलाज न मिलने के कारण उनके बेटे की मौत हो गई। सीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम की निगरानी में जांच के आदेश दिए थे। कई विभागों ने अस्पताल में की जांच सेंट्रल नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के डीएम एस एस परिहार की निगरानी में स्वास्थ्य, नगर निगम, अग्निशमन व अन्य विभागों ने अस्पताल की जांच की। टीम ने अस्पताल में मरीजों के उपचार, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतों के आधार पर अस्पताल के विभिन्न विभागों और रिकॉर्ड की पड़ताल की। अस्पताल में नियमों का उल्लंघन प्रारंभिक जांच में कई खामियां और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले सामने आए है। इस दौरान बिल्डिंग बायलॉज का दुरुपयोग, अवैध निर्माण, आग बुझाने के सिस्टम में गड़बड़ी, बेसमेंट का मिसयूज और चिकित्सीय नियमों के लिए बनाई गई एसओपी में भी गंभीर लापरवाही पाई गई। टीम ने की इमरजेंसी विभाग की जांच टीम ने सीसीटीवी फुटेज की जांच कर पाया कि जो युवक चाकू लगने से मारा गया था, वह खुद चलकर इमरजेंसी में पहुंचा था। इससे पता चलता है कि अगर उसका सही समय पर इलाज होता तो उसकी जान बच जाती। टीम ने इमरजेंसी विभाग के रिकॉर्ड की भी जांच की है। डीएम के अनुसार इन अनियमितताओं व मरीजों के इलाज में बरती गई लापरवाही को ध्यान में रखते हुए अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया है। जांच की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अस्पताल ने क्या कहा? इस बीच अस्पताल ने बयान जारी कर कहा कि फोर्टिस मरीजों की देखभाल के सर्वोच्च मानकों, चिकित्सीय उत्कृष्टता और सभी नियामकीय प्रावधानों के पालन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जैसे ही मामले का औपचारिक विवरण हमारे साथ साझा किया जाएगा, हम उसकी समीक्षा करेंगे और संबंधित अधिकारियों को पूरा सहयोग देंगे। मरीजों की सुरक्षा और उनका स्वास्थ्य हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।  

पुलिस महकमे में प्रमोशन की लहर: 1997–2000 बैच के PPS अफसरों को IPS बनने की हरी झंडी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक पुलिस अधिकारियों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश के दो दर्जन से अधिक पीपीएस अधिकारी के प्रमोशन को मंजूरी मिल गई है। ये सभी पुलिस अफसर जल्द ही आईपीएस बनेंगे। नई दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग में गुरुवार को पीपीएस अधिकारियों के प्रमोशन के लिए डीपीसी की बैठक हुई। बैठक में वर्ष 1997,1998,1999 और 2000 बैच के अफसरों की पदोन्नति को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद यूपी पुलिस के इन पीपीएस अफसरों में खुशी की लहर में है। आपको बता दें कि नई दिल्ली स्थित यूपीएससी ऑफिस में गुरुवार को पुलिस की हाई लेवल मीटिंग हुई। विभागीय डीपीसी की एक बैठक हुई। बताया जा रहा है कि इसमें डीजीपी राजीव कृष्ण भी पर मौजूद थे। बैठक में कुल 30 पीपीएस अधिकारियों को आईपीएस कैडर में प्रमोट करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। अब इसके बाद राज्य सरकार के नोटिफिकेशन का इंतजार है। इसके बाद ये सभी अधिकारी आईपीएस हो जाएंगे। इस सूची में इन अफसरों के नाम इस लिस्ट में यूपी पुलिस के कई दिग्गज और तेजतर्रार अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें सुरेश चंद्र रावत, शोएब इकबाल, राहुल मिठास, आलोक कुमार शर्मा, राजकुमार-प्रथम, महेश सिंह अत्री, विनीत भटनागर, जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, शशि शेखर सिंह, कुलदीप सिंह-प्रथम, ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद, हरेंद्र प्रताप यादव, वंश राज सिंह यादव, डॉ. कृष्णा गोपाल, मधुबन कुमार सिंह कपिल देव सिंह, बलवंत कुमार चौधरी, राहुल श्रीवास्तव, राजेश कुमार पांडे-प्रथम, प्रीति बाला गुप्ता, विकास चंद्र त्रिपाठी, पूर्णेन्दु सिंह, हरेंद्र कुमार, मार्तंड प्रकाश सिंह, अभय नाथ त्रिपाठी, पवित्र मोहन त्रिपाठी, देवेश कुमार शर्मा, प्रशांत कुमार प्रसाद, डा. अरविंद कुमार व सिद्धार्थ वर्मा प्रमुख हैं। 53 पीसीएस अधिकारियों का बढ़ा ग्रेड पे उधर, उत्तर प्रदेश के 53 पीसीएस अफसराें के लिए भी अच्छी खबर है। योगी सरकार ने इन अफसरों को बड़ी खुशखबरी दी है। प्रदेश के 53 पीसीएस अधिकारियों को 5 साल की सेवा पूरी होने के बाद 5400 ग्रेड पे से 6600 ग्रेड पे दिया गया है। इन अधिकारियों को 1 जून बढ़े हुए ग्रेड पे का लाभ मिलेगा। ये अधिकारी मौजूदा समय में एसडीएम के पद पर तैनात है।