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Haryana RTE News: 1107 निजी स्कूल हुए ब्लैकलिस्ट, नियमों के उल्लंघन पर सरकार का बड़ा एक्शन

हिसार. शिक्षा निदेशालय की बार-बार चेतावनी देने के बावजूद आखिरकार 22 जिलों के 1107 निजी स्कूलों पर गाज गिर चुकी है। मुख्यमंत्री के आदेश पर उपरोक्त स्कूलों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। साथ ही दाखिले करने की पावर भी छीन ली गई है। खास बात है कि मुख्यमंत्री ने उपरोक्त ब्लैक लिस्ट में शामिल निजी स्कूलों पर ताला जड़ने के आदेश भी जारी कर दिए हैं। कारण यह है कि प्रदेश के 1107 निजी स्कूल मान्यता से संबंधित दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। निदेशालय की बार-बार चेतावनी के बावजूद आरटीई के तहत नियमों को पालन नहीं किया, जिस पर निदेशालय ने उपरोक्त कार्रवाई कर दी है। कैथल, गुरुग्राम व हिसार में सर्वाधिक अवैध स्कूल होंगे बंद शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी रिपोर्ट में सर्वाधिक कैथल में 162, गुरुग्राम में 99 व हिसार में 98 निजी स्कूलों पर कार्रवाई की गई है। सबसे कम फतेहाबाद में है जहां 10 निजी स्कूलों पर कार्रवाई की गई है। शिक्षा मंत्री के गृह जिला पानीपत में 92 निजी स्कूल अवैध चल रहे हैं, जिसे बंद करने के आदेश जारी हो चुके हैं। ब्लैक लिस्ट होने वाले निजी स्कूलों का ब्योरा जिला     ब्लैक लिस्ट संख्या कैथल     162 गुरुग्राम     99 हिसार     98 पानीपत     92 भिवानी     76 फरीदाबाद     70 जींद     67 रोहतक     63 करनाल     57 यमुनानगर     51 सोनीपत     45 महेंद्रगढ़     33 पलवल     30 झज्जर     28 चरखी दादरी     23 कुरुक्षेत्र     22 अंबाला     20 रेवाड़ी     16 सिरसा     16 नूंह मेवात     15 पंचकूला     14 फतेहाबाद     10 कुल योग     1107 413 निजी स्कूलों को दिया था मौका, मानक अधूरे मिले प्रदेश में 413 निजी स्कूलों को मर्सी चांस दिया गया था, जो मानकों को पूरा करने का दावा कर रहे थे। लेकिन मान्यता से संबंधित दस्तावेज मांगे तो संतोषजनक जवाब न मिलने पर इन स्कूलों पर भी कार्रवाई की गई है। तीन साल से अवैध स्कूल शिक्षा निदेशालय की आंखों में धूल झोंक कर रहे हैं। मौलिक शिक्षा निदेशक मनिता मलिक ने कहा कि हमने प्रदेश के 1107 निजी स्कूलों को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। सर्वाधिक कैथल में 162, गुरुग्राम में 99 व हिसार में 98 निजी स्कूलों पर कार्रवाई की गई है। अब अगली प्रक्रिया में इन स्कूलों पर ताला जड़ा जाएगा।

अब चैट खोले बिना पता चलेगा कौन है ऑनलाइन, WhatsApp ला रहा नया ग्रीन डॉट फीचर

WhatsApp ने हाल ही में यूजरनेम फीचर का ऐलान किया था. तब से अब तक ये फीचर विवादों में बना हुआ है और रोल आउट नहीं हुआ है. बहरहाल, अब एक और फीचर आ रहा है जो काफी यूजर्स को पसंद भी आएगा. वॉट्सऐप के इस अपकमिंग फीचर मदद से यूजर्स को यह जानने के लिए चैट खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि सामने वाला ऑनलाइन है या नहीं. वॉट्सऐप अब कॉन्टैक्ट की प्रोफाइल फोटो पर एक छोटा ग्रीन डॉट दिखाने की तैयारी कर रहा है. यह डॉट इस बात का साइन होगा कि वह यूजर उस समय वॉट्सऐप इस्तेमाल कर रहा है. फिलहाल यह फीचर एंड्रॉयड और आईफोन दोनों के बीटा वर्जन में कुछ चुनिंदा यूजर्स के लिए जारी किया गया है. वॉट्सऐप के नए अपडेट में जब आप किसी कॉन्टैक्ट की चैट इनफो स्क्रीन खोलेंगे, तो अगर वह यूजर ऑनलाइन होगा तो उसकी प्रोफाइल फोटो पर हरे रंग का छोटा डॉट दिखाई देगा. जैसे ही वह वॉट्सऐप से बाहर जाएगा, यह डॉट अपने आप गायब हो जाएगा. अभी तक वॉट्सऐप में किसी के ऑनलाइन होने की जानकारी सिर्फ Online लिखकर दिखाई जाती थी. इसके लिए चैट खोलनी पड़ती थी. अब कंपनी इस टेक्स्ट की जगह ग्रीन डॉट देने जा रही है, जिससे एक नजर में ही पता चल जाएगा कि सामने वाला एक्टिव है या नहीं. कंपनी का मानना है कि इससे यूजर्स का एक्स्पीरिएंस पहले से बेहतर होगा. हालांकि यह फीचर सभी लोगों के लिए नहीं दिखेगा. अगर किसी यूजर ने अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स में ऑनलाइन छिपा रखा है, तो उसके प्रोफाइल पर ग्रीन डॉट दिखाई नहीं देगा. वॉट्सऐप ने इस फीचर को मौजूदा प्राइवेसी सेटिंग्स के साथ ही जोड़ा है. अगर आपने किसी को अपना ऑनलाइन स्टेटस देखने की अनुमति नहीं दी है, तो यह नया साइन भी दिखाई नहीं देगा. फिलहाल ग्रीन डॉट सिर्फ चैट इनफो स्क्रीन तक सीमित है. यह अभी चैट लिस्ट या होम स्क्रीन पर नहीं दिखता. लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक वॉट्सऐप फ्यूचर में इसे ऐप के दूसरे हिस्सों में भी ला सकता है, ताकि ऑनलाइन कॉन्टैक्ट को पहचानना और आसान हो जाए. गौरतलब है कि ये फीचर फेसबुक मैसेंजर, टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड और कई दूसरे मैसेजिंग ऐप्स में पहले से मौजूद है. फिलहाल ये फीचर बीटा टेस्टिंग फेज में है. इसलिए ये कह पाना कि ये लॉन्च कब होगा मुश्किल है. कई बार कंपनी बीटा टेस्टिंग के बाद कभी फीचर लॉन्च ही नहीं करती है. देखना दिलचस्प होगा कि ये फीचर कंपनी कब ऑफिशियली रोलआउट करती है.

Punjab-Haryana High Court: 25 साल पुराने केस में आरोपी को नाबालिग माना, सजा को लेकर सुनाया अहम फैसला

चंडीगढ़. पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने दुष्कर्म मामले में दोषी को बड़ी राहत देते हुए उसकी सजा घटाकर पहले से भुगती गई अवधि तक सीमित कर दी है। अदालत ने कहा कि आरोपित वारदात के समय किशोर था। ऐसे में दोषसिद्धि बरकरार रहेगी, लेकिन सजा तय करते समय उसकी उम्र और मामले की विशेष परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मामला हरियाणा के यमुनानगर का है। वर्ष 1999 में दर्ज इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी शिव कुमार को दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। आरोपित ने फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। अपील की सुनवाई के दौरान उसकी आयु का परीक्षण कराया गया, जिसमें सामने आया कि घटना के समय वह किशोर था। हाईकोर्ट ने कहा कि यौन अपराध गंभीर हैं और दोषसिद्धि में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। हालांकि सजा तय करते समय अपराध के साथ-साथ आरोपित की उम्र, सुधार की संभावना और बीते लंबे समय जैसे पहलुओं पर भी विचार करना आवश्यक है।

तिजोरी के ऊपर भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना घर की बरकत हो सकती है कम

वास्तु शास्त्र में घर की अलमारी या तिजोरी को सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना गया है, क्योंकि यहीं पर धन की देवी मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर का वास होता है.  तिजोरी की दिशा से लेकर उसके आस-पास रखी हर चीज हमारे आर्थिक जीवन को सीधे प्रभावित करती है. वास्तु विज्ञान के अनुसार, कई बार लोग अनजाने में तिजोरी या लॉकर के ऊपर कुछ ऐसी भारी-भरकम चीजें रख देते हैं, जिससे वहां की सकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह दब जाती है. इसका नतीजा यह होता है कि घर में पैसा टिकना बंद हो जाता है और व्यक्ति कर्ज के बोझ तले दब जाता है. यदि आप भी चाहते हैं कि आपके घर में बरकत बनी रहे, तो तिजोरी के ऊपर से इन चीजों को तुरंत हटा दें: 1. लोहे के भारी औजार या कबाड़ अक्सर लोग अलमारी या तिजोरी के ऊपर खाली जगह देखकर वहां घर का पुराना कबाड़, लोहे के औजार, या फालतू सामान रख देते हैं.  वास्तु के अनुसार, तिजोरी के ऊपर भारी कबाड़ रखना सबसे बड़ा दोष है. यह धन के प्रवाह (Money Flow) को रोकता है और घर में कंगाली को न्योता देता है. 2. भारी सूटकेस या बक्से यात्रा के काम आने वाले भारी सूटकेस या बक्से अक्सर अलमारी के ऊपर रख दिए जाते हैं.  अगर आपकी तिजोरी भी उसी अलमारी के भीतर है, तो उसके ठीक ऊपर इतना वजन डालना वास्तु के लिहाज से बेहद अशुभ है.  ऐसा करने से व्यापार और नौकरी में तरक्की के अवसर दब जाते हैं. 3. दवाइयां और मेडिकल पर्चे कुछ लोग सहूलियत के लिए अलमारी या तिजोरी के ऊपर अपनी रोज की दवाइयां रख देते हैं.  वास्तु शास्त्र कहता है कि धन रखने के स्थान पर या उसके ठीक ऊपर दवाइयां रखने से घर का पैसा बीमारियों और कोर्ट-कचहरी के मामलों में पानी की तरह बहने लगता है. 4. जूते-चप्पल या गंदे कपड़े तिजोरी को साक्षात लक्ष्मी का रूप माना जाता है. इसके ऊपर या इसके आस-पास गंदे कपड़े, पुराने जूते-चप्पल रखना सीधे तौर पर मां लक्ष्मी का अनादर है.  इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) बढ़ती है और बना बनाया काम भी बिगड़ने लगता है. 5. बंद घड़ियां या इलेक्ट्रॉनिक सामान खराब पड़े चार्जर, पुरानी बंद घड़ियां या कोई भी ठप पड़ा इलेक्ट्रॉनिक सामान तिजोरी के ऊपर रखने से राहु दोष पैदा होता है. यह स्थिति अचानक होने वाले आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव की वजह बनती है. तिजोरी को कैसे रखें कि बढ़े धन? वास्तु के अनुसार, तिजोरी या अलमारी का ऊपरी हिस्सा हमेशा साफ-सुथरा और खाली होना चाहिए.  तिजोरी के ऊपर कोई भी भारी वजन न रखें, ताकि वहां सकारात्मक ऊर्जा खुलकर घूम सके. इसके अलावा, तिजोरी के अंदर एक छोटा सा दर्पण (Mirror) इस तरह लगाएं कि तिजोरी खुलते ही धन का प्रतिबिंब उसमें दिखे. इससे धन दोगुना तेजी से बढ़ता है.  

CG Transfer News: 19 राज्य प्रशासनिक सेवा अफसरों का ट्रांसफर, इंद्रजीत बर्मन को मिली स्वास्थ्य संचालक की जिम्मेदारी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का तबादला किया गया है. सामान्य प्रशासन विभाग ने 19 अधिकारियों के ताबदले का आदेश जारी किया है. इस फेरबदल में नगर निगमों के आयुक्तों सहित विभिन्न विभागों में पदस्थ अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है. जारी आदेश के अनुसार अरुण कुमार वर्मा को नगर निगम धमतरी का आयुक्त बनाया गया है. वहीं शशांक पांडे को अतिरिक्त प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके अलावा जी. आर. मरकाम को नगर निगम राजनांदगांव का आयुक्त, विजेंद्र सिंह को नगर निगम चिरमिरी का आयुक्त और इंद्रजीत बर्मन को संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें में अपर संचालक नियुक्त किया गया है. जिला पंचायतों और नगर निगमों में भी बदलाव इसके अलावा नयनतारा सिंह तोमर को अपर संचालक, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय, प्रमाकर पाण्डेय को संयुक्त संचालक, खेल एवं युवा कल्याण, अभिषेक कुमार गुप्ता को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी और विनय कुमार पोयाम को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जांजगीर चांपा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। योगेंद्र श्रीवास्तव को जिला पंचायत कोरिया का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह ट्रांसफर आदेश जारी किया है। अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव अरुण कुमार वर्मा: नगर निगम धमतरी का आयुक्त शशांक पांडे: अतिरिक्त प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन जी. आर. मरकाम: नगर निगम राजनांदगांव का आयुक्त विजेंद्र सिंह: नगर निगम चिरमिरी का आयुक्त इंद्रजीत बर्मन: संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें में अपर संचालक राजीव कुमार पाण्डेय : अपर संचालक, उच्च शिक्षा संचालनालय भारती चन्द्राकर: अतिरिक्त प्रबंध संचालक, मार्कफेड दिनेश कुमार नागा: छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड में महाप्रबंधक नयनतारा सिंह तोमर: अपर संचालक, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय प्रमाकर पाण्डेय: संयुक्त संचालक, खेल एवं युवा कल्याण अभिषेक कुमार गुप्ता: मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी विनय कुमार पोयाम: मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जांजगीर चांपा योगेंद्र श्रीवास्तव: जिला पंचायत कोरिया का मुख्य कार्यपालन अधिकारी

Punjab Congress Crisis: बघेल की दोटूक- प्रधान नहीं बदलेगा, चन्नी गुट ने फिर किया बैठक का बहिष्कार; हाईकमान से मुलाकात की तैयारी

लुधियाना पंजाब कांग्रेस में बगावत जारी है। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बदलने की जिद पर अड़े हैं। इस विवाद को सुलझाने के लिए पंजाब प्रभारी एवं पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने बैठकों का दौर शुरू कर दिया मगर चन्नी पहले हाईकमान से मिलना चाहते हैं। लिहाजा मंगलवार को उन्होंने बघेल की बैठक से दूरी बनाई रखी। उनके समर्थक विधायक, पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक भी प्रदेश प्रभारी की बैठक में नहीं गए। पार्टी सूत्र बताते हैं कि चन्नी दिल्ली से लौट आए हैं और वे मंगलवार को चंडीगढ़ में ही रहे मगर बघेल से मिलने नहीं पहुंचे। उनके समर्थकों ने यही बताया कि चन्नी जरूरी काम के चलते दो दिन बाद बघेल से मिलेंगे। उधर, सूत्र बताते हैं कि मंगलवार शाम को कांग्रेसी नेता राहुल गांधी की टीम ने पूर्व सीएम चन्नी से संपर्क साधा है। उनकी मुलाकात जल्द राहुल गांधी से हो सकती है जबकि प्रियंका गांधी की ओर से भेजी गई टीम चन्नी से मिलकर जा चुकी है। हालांकि इस मुलाकात के बाद से पूर्व सीएम चन्नी और उनके समर्थक फिलहाल शांत हैं मगर पंजाब कांग्रेस में जिस तरह से अंदरूनी हालात चल रहे हैं, उस देखते हुए हाईकमान को पार्टी में टूट का डर सता रहा है। चन्नी के एक समर्थक विधायक ने बताया कि मोरिंडा में हुई बैठक में सभी नेताओं ने पूर्व सीएम चन्नी को इस मसले पर हाईकमान से बात करने के लिए अधिकृत किया था, इसलिए सभी नेता चाहते हैं कि प्रदेश प्रभारी से पहले पूर्व सीएम चन्नी राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के समक्ष पंजाब के नाराज नेताओं की बात रखें। उनके अनुसार अधिकतर नेता वड़िंग का नेतृत्व स्वीकार नहीं कर रहे हैं। एक कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष, छह जिला प्रधान नहीं पहुंचे मंगलवार को बघेल ने बैठकों का दौर शुरू कर दिया जोकि देर शाम तक जारी रहा। पहले प्रदेश प्रभारी बघेल ने नवनियुक्त प्रदेश कार्यवाहक प्रधानों सुखजिंदर सिंह डैनी, राजकुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को बुलाया था मगर गिलिजियां नहीं पहुंचे। इसी तरह उन्होंने सभी जिला प्रधानों को भी बैठक के लिए बुलाया था, उसमें भी छह जिलाध्यक्ष नहीं पहुंचे।  इससे पहले बघेल ने कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा, चुनाव घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह, चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता राणा केपी सिंह, चुनाव प्रचार समिति के सह अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैहरा, घोषणा पत्र समिति के सह-अध्यक्ष हरदयाल कंबोज, चुनाव प्रबंधन समिति के सह अध्यक्ष कुलजीत नागरा, ब्रह्म मोहिंद्रा, बलबीर सिंह सिद्धू, शमशेर सिंह दूलों सहित अन्य नेताओं के साथ बैठक की। नेताओं, कार्यकर्ताओं में एकजुटता   पंजाब प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं में एकजुटता है और सभी मिलकर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जल्द जुटेंगे। जिनके जो गिले-शिकवे हैं, वे जल्द दूर कर लिए जाएंगे। वे एक-एक कर सभी नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। बघेल ने कहा कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में उद्देश्य और मिशन को लेकर पूरी एकजुटता है। बघेल ने कहा, बैठक में चुनाव को लेकर संगठन की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।  बदलाव न होने के संकेत पर बढ़ी नाराजगी बघेल ने पंजाब कांग्रेस मुख्यालय में जिलाध्यक्षों की बैठक के दौरान मौजूदा नेतृत्व में बदलाव न होने के संकेत दिए। जिसके बाद पूर्व सीएम चन्नी के समर्थक और नाराज हो गए हैं। उनका कहना है कि अधिकतर नेता यही मांग कर रहे हैं कि मौजूदा नेतृत्व बदला जाए, यदि ऐसा नहीं होता तो नाराजगी और बढ़ेगी। चन्नी गुट ने आरोप लगाया है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं ने हाईकमान को गुमराह कर ऐसी नियुक्तियां करवाई हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस पर कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष राज कुमार वेरका ने कहा, बघेल सभी से मुलाकात कर रहे हैं, फिर भी यदि कुछ नेताओं को लगता है कि फिर भी अपनी बात हाईकमान के सामने ही रखनी है, तो भी कोई बात नहीं। उनके अनुसार जल्द सारा विवाद सुलझ जाएगा।  चन्नी को मनाने के बघेल के 3 दांव फेल:-     बाजवा के जरिए कोशिश, बात नहीं बनी: चंडीगढ़ पहुंचते ही भूपेश बघेल ने सबसे पहले नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा से मुलाकात की। माना गया कि बाजवा के जरिए चन्नी और उनके समर्थकों तक संदेश पहुंचाया जाएगा। बाजवा ने मीडिया में भी विवाद सुलझने की बात कही, लेकिन चन्नी गुट अपने रुख पर कायम रहा।     वेरका ने भी की पहल, फिर भी नहीं हुई मुलाकात: इसके बाद कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार वेरका ने भी चन्नी से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि बघेल से मिलने से पहले वेरका ने चन्नी के साथ बंद कमरे में चर्चा की। राजनीतिक हलकों में इसे दोनों पक्षों के बीच संवाद की कोशिश माना गया, लेकिन इसके बाद भी चन्नी गुट का कोई नेता बघेल से मिलने नहीं पहुंचा।     चाय पर बुलाने का ऑफर, वह भी बेकार: इस बीच प्रभारी भूपेश बघेल ने मीडिया से यह संदेश भी दिया कि "अगर कोई मुझे चाय पर बुलाएगा तो मैं जरूर जाऊंगा।" इसके बावजूद दौरे के दूसरे दिन भी चन्नी गुट ने दूरी बनाए रखी। नए कार्यकारी अध्यक्षों की जिम्मेदारियां तय…     सुखविंदर सिंह डैनी: AICC सचिव सूरज ठाकुर के साथ मिलकर काम करेंगे। वह उन्हीं विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारी होंगे जहां वर्तमान में ठाकुर प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं, साथ ही उनके पास वही अग्रिम संगठन और विभाग भी होंगे। इनके पास 42 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी है।     संगत सिंह गिलजियां: वह AICC सचिव रवींद्र दलवी के साथ मिलकर काम करेंगे। वह उन्हीं विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारी होंगे जहां वर्तमान में दलवी प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं, साथ ही उनके पास वही अग्रिम संगठन और विभाग भी होंगे। 45 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी रहेगी।     राजकुमार वेरका: वह AICC सचिव हिना कावरे के साथ मिलकर काम करेंगे। वह उन्हीं विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारी होंगे जहां वर्तमान में हिना कावरे प्रभारी के रूप में कार्य कर रही हैं, साथ ही उनके पास वही अग्रिम संगठन और विभाग भी होंगे। 30 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी रहेगी। 2 दिन… मीटिंग पर मीटिंग, … Read more

कश्मीर में लश्कर कमांडर जाकिर गनई का एनकाउंटर, 5 दिन बाद ऑपरेशन सफल; पुलिस का सख्त संदेश

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी इलाके में सुरक्षा बलों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकवादी जाकिर गनई (Zakir Ganai) को मार गिराया है। यह आतंकवादी पिछले पांच दिनों से सुरक्षा बलों के कड़े चक्रव्यूह में फंसा हुआ था। सुरक्षा बलों ने सैदपोरा इलाके के मुठभेड़ स्थल से आतंकी का शव बरामद कर लिया है। इसके साथ ही मौके से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी जब्त किया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस सफलता की जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, 'तुम भाग तो सकते हो, लेकिन छिप नहीं सकते! SOG शोपियां ने राष्ट्रीय राइफल और सीआरपीएफ के साथ मिलकर चलाए एक जॉइंट ऑपरेशन में लश्कर के एक आतंकवादी को मार गिराया।' आपको बता दें कि यह पूरा ऑपरेशन पांच दिन पहले शुरू हुआ था। सुरक्षा बलों के निगरानी कैमरों ने इस इलाके के एक घने बाग में दो संदिग्ध आतंकवादियों की हलचल को रिकॉर्ड किया था। इसके तुरंत बाद ये आतंकवादी सुरक्षा बलों के रडार पर आ गए। CCTV में कैद हुए थे आतंकी सुरक्षाबलों को इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जाकिर गनई और उसके सहयोगी लतीफ भट (Latief Bhat) की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिली थी। ये दोनों सैदपोरा के छन्नापोरा इलाके में घूमते हुए सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में कैद हो गए थे। आतंकियों की लाइव लोकेशन मिलते ही बिना वक्त गंवाए सेना और पुलिस ने संयुक्त रूप से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और एक बड़ा सर्च ऑपरेशन लॉन्च किया। विक्टर फोर्स के चक्रव्यूह में फंसे आतंकी इस ऑपरेशन का नेतृत्व भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से किया। आतंकवादियों को भागने का कोई मौका न मिले इसके लिए सेना की विशिष्ट काउंटर इंसर्जेंसी यूनिट विक्टर फोर्स (Victor Force) को मैदान में उतारा गया। विक्टर फोर्स के जवानों ने भागने के सभी संभावित रास्तों को पूरी तरह से सील कर दिया। ऑपरेशन पांच दिनों तक खिंच गया, इसलिए रात के अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकियों के भागने के प्रयास को विफल करने के लिए पूरे इलाके को फ्लड लाइट्स से रोशन किया गया था। हर पल निगरानी की जा रही थी। जैसे ही सुरक्षा बल बाग के भीतर आतंकियों के बिल्कुल करीब पहुंचे खुद को घिरा देख आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई। इस आमने-सामने की भीषण मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया।

सीएम नायब सैनी बोले, हरियाणा में मजबूत खेल संस्कृति बनाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है

पंचकूला  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं है, बल्कि ऐसी सशक्त खेल संस्कृति का निर्माण करना है, जहां प्रतिभा को अवसर मिले. परिश्रम को सम्मान मिले और प्रत्येक युवा को अपने सपनों को साकार करने का भरोसा हो. उन्होंने कहा कि "सरकार केवल पुरस्कार प्रदान नहीं कर रही, बल्कि विकसित भारत के लिए खेल शक्ति की मजबूत नींव तैयार कर रही है." मुख्यमंत्री ने खेल क्षेत्र के लिए यह सभी बातें उस समय कही, जब वह सेक्टर 1 के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, पंचकूला के ऑडिटोरियम में राज्य के उत्कृष्ट खिलाड़ियों के सम्मान में आयोजित नकद पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम भी उपस्थित रहे. 20.59 करोड़ की इनाम राशि से सम्मान मुख्यमंत्री ने राज्य के अंर्तराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले व प्रतिभागिता करने वाले 198 खिलाड़ियों को 20.59 करोड़ रुपये की नकद इनाम राशि देकर सम्मानित किया. इसमें विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं के 117 खिलाड़ियों को 13.75 करोड़ रुपये, पैरा एशियन खेल 2022 के 3 खिलाड़ियों को 2.32 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय स्तर के 78 खिलाड़ियों को 4.52 करोड़ रुपये की ईनाम राशि शामिल है. उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 12 वर्षों में प्रदेश के 16 हजार 984 खिलाड़ियों को 709 करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि दी गई है. वर्तमान राशि जोड़कर यह लगभग 730 करोड़ रुपये है. मुख्यमंत्री ने सम्मानित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि "पदक जीतने का क्षण भले ही कुछ मिनटों का होता है लेकिन उस क्षण तक पहुंचने की यात्रा वर्षों की तपस्या से होकर गुजरती है." हरियाणा में खेल संस्कृति मजबूत करने पर जोर चुनौतियां विजेता बनने की निशानी: मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश की मिट्टी ने ऐसे खिलाड़ी पैदा किए हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया को सिखाया कि हालात चाहे कितने भी कठिन हों, यदि इरादे बुलंद हों तो इतिहास बदला जा सकता है. उन्होंने फलाईंग सिख, मिल्खा सिंह, मुरलीकांत पेटकर और मैरी काॅम का उदाहरण देते हुए कहा कि "इन तीनों की जीवन-यात्रा एक ही बात सिखाती है कि चुनौतियां हर किसी के जीवन में आती हैं लेकिन विजेता वही बनता है जो चुनौतियों के सामने झुकता नहीं लड़ता है." सीएम ने कहा कि "उन्हें गर्व है कि हरियाणा ने हमेशा देश को ऐसे खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने भारत का सिर दुनिया के सामने ऊंचा किया है. देश की आबादी में हरियाणा का हिस्सा भले ही लगभग दो प्रतिशत हो लेकिन भारत के लिए जीते गए पदकों में हरियाणा का योगदान एक-तिहाई से भी अधिक है. पेरिस ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स हों या कॉमनवेल्थ गेम्स, हर मंच पर हरियाणा के खिलाड़ियों ने भारत का गौरव बढ़ाया है. उन्होंने उपस्थित खिलाड़ियों से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप वर्ष 2028, 2032 और 2036 के ओलंपिक खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ी वही होंगे. एआई से खिलाड़ियों की फिटनेस मुख्यमंत्री ने कहा कि "वर्तमान में दुनिया एआई के युग में प्रवेश कर रही है, जिससे खेल भी इससे अछूता नहीं है. आज एआई खिलाड़ियों की फिटनेस का विश्लेषण कर रही है, चोट की संभावना का पहले से अनुमान लगा रही है, विपक्षी टीम की रणनीति समझने में मदद कर रही है और प्रशिक्षण को अधिक वैज्ञानिक बना रही है." उन्होंने कहा कि एआई गति माप सकती है, हृदय गति बता सकती है, तकनीक का विश्लेषण कर सकती है लेकिन जुनून और देशभक्ति को नहीं समझ सकती. एआई कभी उस भावना को नहीं बता सकती, जो तिरंगा कंधों पर लेकर विजय मंच पर खड़े खिलाड़ी की आंखों में दिखाई देती है. मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से कहा कि "तकनीक का उपयोग अवश्य करें लेकिन भीतर के इंसान को जीवित रखें, क्योंकि भविष्य उन्हीं का होगा, जो तकनीक और मानवीय मूल्यों, दोनों को साथ लेकर चलेंगे." 260 खिलाड़ियों को नौकरियां और खेल ग्रेडेशन प्रदेश में खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से उठाए गए विभिन्न महत्वपूर्ण कदमों बारे मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा उत्कृष्ट खिलाड़ी भर्ती नियमों के तहत 260 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां दी गई हैं. हाल ही में खेल ग्रेडेशन नीति में संशोधन किया है, जिससे अब हरियाणा स्टेट गेम्स के खिलाड़ियों को भी खेल ग्रेडेशन का लाभ मिलेगा. इसके अलावा अवार्ड विजेता खिलाड़ियों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की है, जिसके तहत खेलरत्न, द्रोणाचार्य, अर्जुन, ध्यानचंद और तेनजिंग नोर्गे विजेताओं को प्रतिमाह 20 हजार रुपये, और भीम अवॉर्ड विजेताओं को प्रतिमाह 5 हजार रुपये का मानदेय मिल रहा है. 2 हजार खेल नर्सरी और मासिक मानदेय मुख्यमंत्री ने कहा कि "हर चैंपियन की शुरुआत गांव की मिट्टी और स्कूल के मैदान से होती है. इसके मद्देनजर प्रदेश सरकार ने 2 हजार खेल नर्सरियां खोली हैं, जिनमें 8 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों को 1500 से 2 हजार रुपये मासिक छात्रवृत्ति दी है, और 25 आवासीय खेल अकादमियों में 500 रुपये प्रतिदिन डाइट मनी दी जा रही है. खेल बुनियादी ढांचे पर 12 वर्षों में 1100 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और खेल विभाग का बजट 2013-14 के 163 करोड़ रुपये से बढ़कर आज 668 करोड़ 42 लाख रुपये है." उन्होंने कहा कि "पंचकूला के ताऊ देवीलाल खेल परिसर में 10 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर भारत का पहला ए-स्टार वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किया गया है." 'हरियाणा खेलों के हब के रूप में उभरा ह इस अवसर पर खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने कहा कि "मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा खेलों के हब के रूप में उभरा है. बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, ताकि खिलाड़ी कड़ी मेहनत कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश-प्रदेश का नाम रोशन कर सकें. मिशन 2036 का लक्ष्य खेल मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मिशन-2036 शुरू किया गया है, जिसके तहत हरियाणा ने 36 पदक जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके मद्देनजर खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं. लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से खेल स्टेडियमों के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को सुदृढ़ किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आज हरियाणा की खेल नीति की पूरे देश में सराहना हो … Read more

हाईकोर्ट की 31 जुलाई समयसीमा पर संकट, राजस्थान में चुनाव टलने के संकेत तेज

जयपुर  राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव तय समय पर कराना अब संभव नहीं लग रहा। राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से 31 जुलाई तक चुनाव कराने की समय-सीमा में अब सिर्फ 25 दिन बाकी है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार को साफ बता दिया है कि आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी चुनाव कराने के लिए कम से कम 90 दिन चाहिए। यानी, कोर्ट की मौजूदा समय-सीमा में चुनाव कराना लगभग असंभव है। दिलचस्प यह भी है कि इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश का भी पालन नहीं हो पाया था और अब दूसरी बार अदालत की तय समय-सीमा पर संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, कांग्रेस विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका के बाद सरकार और आयोग दोनों सक्रिय हो गए हैं और हाईकोर्ट से समय-सीमा बढ़ाने की रणनीति पर मंथन शुरू हो गया है। 14 अगस्त तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजारः पंचायती राज विभाग ने निर्वाचन आयोग को बताया है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अपनी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट 14 अगस्त तक सौंप सकता है। इसके बाद विभाग 31 अगस्त तक सभी वर्गों का आरक्षण तय करने की तैयारी में है। आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा। दो चरण में निकाय, चार चरण में पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि आरक्षण निर्धारण पूरा होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकेगा। आयोग के अनुसार पंचायत चुनाव में करीब 50 दिन और नगरीय निकाय चुनाव में 40 दिन लगेंगे। नगरीय निकाय चुनाव 2 चरणों में और पंचायत चुनाव 4 चरणों में कराए जाएंगे। आयोग का तर्क है कि नई पंचायत समितियों, ग्राम पंचायतों और वार्डों की संख्या बढ़ने से चुनावी प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि 31 जुलाई की समय-सीमा का पालन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिख रहा। ऐसे में हाईकोर्ट में समय सीमा बढ़ाने के लिए आवेदन करने की जरूरत है। मंगलवार को स्वायत्त शासन विभाग और विधि विभाग के अधिकारियों ने इसी मुद्दे पर बैठक कर अदालत में सरकार का पक्ष रखने की रणनीति पर चर्चा की।

उत्तर प्रदेश में लागू होगा नया ओएसएच कोड, दुकानों और प्रतिष्ठानों के नियम बदलेंगे जल्द

लखनऊ यूपी में छह दशक से अधिक पुराना दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम (शॉप एक्ट) जल्द खत्म हो जाएगा। इसका स्थान व्यवसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य (ओएसएच) कोड लेगा। इस बदलाव का असर प्रदेश के लाखों दुकान, प्रतिष्ठान, ऑफिस, होटल, रेस्टोरेंट आदि पर पड़ेगा। इन सभी को नये ओएसएच कोड के तहत पंजीकरण कराना होगा। इसमें 10 कर्मचारियों वाले वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए श्रम विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। अभी शॉप एक्ट संशोधन के तहत 20 से कम कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों को पंजीकरण से छूट थी। प्रदेश में शॉप एक्ट 1962 से लागू है। इसके तहत पहले ऐसे सभी दुकानों व प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य था, जहां कोई भी कर्मचारी काम करता हो। इसी साल दो जनवरी को एक्ट में संशोधन को मंजूरी देते हुए एक से 19 कर्मियों वाले प्रतिष्ठानों को श्रम विभाग में पंजीकरण से मुक्त कर दिया गया था। राज्य सरकार ने 20 या उससे अधिक कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों के लिए ही पंजीकरण की अनिवार्यता को मंजूरी दी थी। अब देश में नई श्रम संहिताएं लागू हो गई हैं। राज्यों को भी इन्हें लागू करना है। विरोधाभासी परिस्थिति के चलते फैसला नये ओएसएच कोड और शॉप एक्ट संशोधन के बाद मौजूदा व्यवस्था में पंजीकरण की शर्तों को लेकर विरोधाभासी स्थितियां हैं। फिलवक्त 20 से कम कर्मियों पर पंजीकरण की छूट है, मगर ओएसएच एक्ट में 10 कर्मी वाले प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य है। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यापारी को दोहरा पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में शॉप एक्ट को खत्म करने का फैसला किया गया है। श्रमायुक्त कार्यालय ने इस संबंध में प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया है। इसकी स्वीकृति होते ही प्रदेश में शॉप एक्ट खत्म हो जाएगा। महिला मजदूरों के बच्चों की देखरेख होगी लखनऊ (शैलेंद्र श्रीवास्तव)। वीबी जीरामजी योजना में काम करने वाली महिला मजदूरों को अब अपने छोटे बच्चों की देखभाल के लिए किसी के सहारे नहीं छोड़ना पड़ेगा। अब वे अपने बच्चों को कार्यस्थल पर लेकर आ सकेंगी और वहीं पर उनके देखभाल की सुविधा होगी। यह व्यवस्था न्यूनतम पांच साल से कम पांच बच्चों के होने पर की जाएगी। महिला मजदूरों में ही किसी को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी और उसके एवज में उसे पूरी दिहाड़ दी जाएगी। वीबी जीरामजी योजना में इसका प्रावधान कर दिया गया है। यूपी में मनरेगा के स्थान पर वीबी जीरामजी योजना शुरू की गई है। गांवों में अभी तक सबसे बड़ी समस्या महिला मजदूरों को लेकर हो रही थी। इसीलिए वीबी जीरामजी में यह सुविधा दी गई है कि पांच साल से छोटे बच्चों को कार्यस्थल पर ही देखभाल की सुविधा होगी। इसके लिए पांच बच्चे होने अनिवार्य होगा। इसमें बच्चों के पीने के लिए साफ पानी व मामूली उपचार के सामान रखे जाएंगे।