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यूपी सरकार सख्त: 30 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग अनिवार्य, तभी जारी होगा लोन

लखनऊ मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत अब किसी अभ्यर्थी को लोन आनलाइन प्रशिक्षण के बाद ही मिलेगा। यह राशि बैंक को प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र मिलने के बाद जारी करेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए नियमों में बदलाव कर दिया है। योजना के तहत किसी युवा उद्यमी को अब लोन स्वीकृत होने के बाद चुनिंदा तीन संस्थानों से 30 घंटे का प्रशिक्षण सत्र पूरा करना अनिवार्य होगा। विशेषज्ञों की खास ट्रेनिंग के बाद प्रमाणपत्र आनलाइन ही बैंक को प्राप्त हो जाएगा, जिसके मिलने पर बैंक लोन राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर कर देगा। कहीं कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए विभाग ने फेस रिक्ग्नीशन प्रणाली अपनाई है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत बैंकों के बड़ी संख्या में आवेदनों को निरस्त किए जाने और युवाओं को अलग-अलग सेक्टर में बेहतर प्रशिक्षण के लिए प्रणाली में बड़ा सुधार किया गया है। सीएम युवा योजना के तहत बिना बैंक गारंटी पांच लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन हासिल करने में युवाओं को कोई कठिनाई न हो और कहीं कोई तकनीकी बाधा न आए, इसके लिए बड़ी पहल की गई है। योजना के तहत 28 अप्रैल तक लगभग 530487 आवेदन आए थे, जिनमें 448577 आवेदनों को बैंक को भेजा गया। इनमें बैंक ने करीब 180756 आवेदनों को स्वीकृति दी और 168516 आवेदनों के तहत 5913.13 करोड़ रुपये का लोन वितरित किया गया। लगभग 2.67 लाख आवेदनों को बैंक के स्तर से स्वीकृति न मिल पाने पर चिंता जताई गई थी। बैंक अधिकारियों ने आवेदनों में प्रोजेक्ट रिपोर्ट व अन्य तकनीकी खामियां बताई थीं। मिशन निदेशक के विजयेन्द्र पांडियन ने आवश्यक बदलाव कराकर एक मई से नई व्यवस्था लागू कराई है। एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित प्रशिक्षण सीएम युवा योजना के आवेदकों को प्रशिक्षण के लिए समाधान समिति, यूपीआईकान (यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड) और उद्यमिता विकास संस्थान को चुना गया है। तीनों संस्थानों को 25-25 जिले प्रदान किए गए हैं। बैंक से लोन स्वीकृत होने के बाद आवेदकों की उनके चुने हुए सेक्टर के अनुरूप पांच दिनों में 30 घंटे की आनलाइन ट्रेनिंग कराई जा रही है। अंतिम दिन लाइव सत्र में विशेषज्ञ भी जुड़े हैं, जो आवेदकों के प्रश्नों का समाधान भी करते हैं। सीएम युवा के नोडल अधिकारी सर्वेश्वर शुक्ला के अनुसार बैंक जिस सेक्टर या कारोबार के लिए लोन स्वीकृत करता है, उसके लिए विशेषज्ञों से खास ट्रेनिंग का माड्यूल एनसीवीटी के पाठ्यक्रम पर आधारित है। पंजीकरण से पहले 30 मिनट का वीडियो देखना अनिवार्य पोर्टल पर पंजीकरण के लिए भी काउंसलिंग सत्र के तहत आधे घंटे का प्रारंभिक वीडियो देखना अनिवार्य कर दिया गया है। पंजीकरण के लिए आवेदक को पहले उसके चुने गए उद्यम की बारीकियों व बैंक से लोन लेने के सेक्टर की जरूरी जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी उपलब्ध करा रहा है। मानक विहीन लैब व प्रशिक्षण देने वाली 400 कंपनियां हटाई गईं लखनऊ। यूपी में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने में गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को हटा दिया गया है। लैब व प्रशिक्षण कार्यक्रम दोनों मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे। ऐसे में उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से इस बार बड़ी कार्रवाई की है। गुणवत्तापूर्ण ढंग से प्रशिक्षण दिलाने के सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से जिलों में युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों का चयन किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान मिशन की ओर से टीमें भेजकर मानकों की जांच कराई जाती है। जांच में 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियां ऐसी पाईं गईं जिनके यहां लैब में प्रशिक्षण देने के पर्याप्त संसाधन तक नहीं थे। यही नहीं मनमाने ढंग से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा था और सरकार से इसकी एवज में धन लिया जा रहा था। मिशन निदेशक पुलकित खरे की ओर से सत्र 2026-27 से कौशल प्रशिक्षण को लेकर पर्याप्त सख्ती की जा रही है। जिसका नतीजा है कि मानकों की जांच सख्ती से कर गड़बड़ी व लापरवाही करने वाली प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। करीब 900 से अधिक कंपनियों को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए चयनित किया जा चुका है और आगे मांग के अनुसार प्रशिक्षण लक्ष्य दिए जाएंगे। अच्छा कार्य करने पर टॉपअप की सुविधा भी है, यानी उन्हें और युवाओं को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य दिया जाएगा। कौशल दृष्टि पोर्टल से प्रशिक्षण की निगरानी की जा रही है। जिस पर जियो टैगिंग के साथ प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रशिक्षण करते युवाओं की फोटो अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी। फिलहाल अब गड़बड़ी नहीं चलेगी।

टीम इंडिया की बादशाहत कायम, लेकिन न्यूजीलैंड सिर्फ 5 अंक पीछे

नई दिल्ली इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की ODI रैकिंग में भारतीय टीम ने एक बार फिर अपनी बादशाहत कायम रखी है. वार्षिक अपडेट के बाद भी भारतीय टीम दुनिया की नंबर-1 ODI टीम बनी हुई है, लेकिन इस बार उसकी बढ़त थोड़ी कम हो गई है. दूसरे स्थान पर मौजूद न्यूजीलैंड अब भारत से सिर्फ 5 रेटिंग अंक पीछे है, जिससे आने वाले महीनों में नंबर-1 की जंग और रोमांचक हो सकती है. ताजा अपडेट के बाद भारतीय टीम के पास 118 रेटिंग अंक हैं. हालांकि टीम इंडिया को एक रेटिंग पॉइंट का नुकसान हुआ है. वहीं दूसरे स्थान पर काबिज न्यूजीलैंड के 113 अंक हैं. जबकि वर्ल्ड चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया 109 अंकों के साथ तीसरे पायदान पर कायम है. उधर साउथ अफ्रीका ने ओडीआई रैंकिंग में शानदार छलांग लगाते हुए पाकिस्तान को पीछे छोड़ दिया है. साउथ अफ्रीका अब 102 अंकों के साथ चौथे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पाकिस्तान 98 अंकों के साथ पांचवें नंबर पर खिसक गया. श्रीलंका 96 अंकों के साथ छठे, अफगानिस्तान (93 अंक) सातवें, इंग्लैड (89 अंक) आठवें, बांग्लादेश (84 अंक) नौवें और वेस्टइंडीज (74 अंक) दसवें नंबर पर है. वर्ल्ड कप के लिहाज से अहम है ये रैंकिंग यह रैंकिंग अपडेट सिर्फ नंबरों का खेल नहीं है, बल्कि आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड 2027 के सीधे क्वालिफिकेशन से भी जुड़ा हुआ है. 31 मार्च 2027 तक ओडीआई रैंकिंग में टॉप-8 में रहने वाली टीमें सीधे आगामी वर्ल्ड कप में जगह बनाएंगी. मेजबानों साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे पहले ही डायरेक्ट एंट्री पा चुके हैं. ऐसे में अगर साउथ अफ्रीका टॉप-8 में बना रहता है, तो नौवें स्थान की टीम को भी सीधा वर्ल्ड कप टिकट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी. ताजा रैंकिंग में आयरलैंड ने जिम्बाब्वे को पीछे छोड़ 11वां स्थान हासिल किया. उधर संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) 13वें नंबर पर पहुंच गया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कनाडा को पीछे छोड़ 19वां स्थान हासिल किया. भले ही टीम इंडिया नंबर-1 बनी हुई है, लेकिन न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया तेजी से अंतर कम कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले ODI मुकाबले भारत के लिए बेहद अहम होने वाले हैं, क्योंकि छोटी सी चूक भी टीम इंडिया से नंबर-1 का ताज छीन सकती है.

महिला स्व-सहायता समूहों की सफलता: सीताफल से बढ़ी आमदनी

सफलता की कहानी सीताफल उत्पादन एवं प्रसंस्करण से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक स्थिति में सुधार सिवनी जिला आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरा भोपाल  वर्तमान में मांगलिक आयोजनों, विशेषकर विवाह समारोहों में सीताफल से निर्मित व्यंजनों, जैसे सीताफल रबड़ी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। इस बढ़ती मांग की पूर्ति के लिये ऑफ-सीज़न में भी सीताफल पल्प का प्रसंस्करण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के सिवनी जिला में उत्पादित सीताफल ने स्थानीय स्तर पर महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन का प्रभावी माध्यम स्थापित किया है। पूर्व में आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में जीवन यापन कर रहीं महिलाओं की आय एवं जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आया है। आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में पहल सिवनी जिले के वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले सीताफल के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं विपणन का कार्य वर्तमान में स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित किया जा रहा है। छपारा विकासखंड के अंतर्गत खेरमटाकोल (भूतबंधानी) स्थित महादेव ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती अभिलाषा ने बताया कि समूह से जुड़ने के पश्चात महिलाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध हुआ है। वे सीताफल की पैकिंग एवं विपणन के माध्यम से वार्षिक रूप से उल्लेखनीय आय अर्जित कर रही हैं। उत्पादों का विपणन स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राज्य के प्रमुख शहरों एवं छत्तीसगढ़ तक किया जा रहा है। सिवनी जिले में उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता एवं स्वाद के कारण इसकी मांग राष्ट्रीय स्तर, विशेषकर महानगरों में भी बढ़ रही है। वन क्षेत्रों में सीताफल पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव का कार्य भी महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है। आय के स्थायी स्रोत का सृजन बरोड़ा सिवनी विकासखंड के मां दुर्गा महिला आजीविका ग्राम संगठन की अध्यक्ष श्रीमती रामप्यारी ने बताया कि सीताफल आधारित गतिविधियों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है तथा वे प्रतिवर्ष एक से डेढ़ लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। रोजगार सृजन एवं कौशल विकास आजीविका मिशन के अंतर्गत छपारा विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रारंभिक चरण में 200 से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला। समूहों को विपणन, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग के माध्यम से उत्पादों को अन्य राज्यों तक सफलतापूर्वक भेजा जा रहा है। जिला परियोजना प्रबंधक श्री संजय रस्तोगी ने बताया कि सिवनी का सीताफल प्राकृतिक रूप से अत्यंत स्वादिष्ट एवं मीठा होता है। इस उत्पाद को “एक जिला एक उत्पाद” योजना में भी शामिल किया गया है, जिससे इसकी ब्रांड पहचान सुदृढ़ हुई है। सीताफल पल्प प्रसंस्करण की व्यवस्था बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सीताफल के गूदे (पल्प) का प्रसंस्करण एवं संरक्षण किया जा रहा है। जिले में स्थापित दो प्रसंस्करण इकाइयों में पल्प को निम्न तापमान पर संरक्षित कर वर्षभर उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। इससे बड़े आयोजनों एवं बाजार की मांग के अनुरूप निरंतर आपूर्ति संभव हो पाती है। आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर सिवनी एसआरएलएम भोपाल के राज्य परियोजना प्रबंधक (कृषि) श्री मनीष पंवार ने बताया कि सिवनी जिले की महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही हैं। अनुकूल जलवायु के कारण यहां उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता उत्कृष्ट है, जिससे इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। सिवनी जिला वर्तमान में आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।  

IPL 2026: अक्षर-मिलर की फिफ्टी से दिल्ली कैपिटल्स ने पंजाब से छीनी जीत

धर्मशाला  पंजाब किंग्स को आईपीएल 2026 के 55वें मैच में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 3 विकेट से हार मिली। शुरुआत 7 मैचों में अजेय रहने के बाद श्रेयस अय्यर की टीम की यह लगातार चौथी हार है। हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में टॉस हारने के बाद पहले खेलते हुए पंजाब ने 5 विकेट पर 210 रन बनाए। दिल्ली कैपिटल्स ने 19 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। यह धर्मशाला के मैदान पर सबसे बड़ा रनचेज भी है। 11 मैचों में 13 पॉइंट के सात पंजाब टेबल में चौथे नंबर पर है। 12 मैचों में 10 पॉइंट के साथ दिल्ली 7वें नंबर पर आ गई है। पावरप्ले में ही पंजाब ने 72 रन ठोके प्रियांश आर्य ने प्रभसिमरन सिंह के साथ मिलकर टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। इन सलामी बल्लेबाजों ने 41 गेंदों में 78 रन की साझेदारी की। प्रभसिमरन 15 गेंदों में 18 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद प्रियांश आर्य ने 33 गेंदों में 6 छक्कों और 2 चौकों के साथ 56 रन बनाकर आउट हुए। पंजाब किंग्स ने 97 के स्कोर तक अपने दोनों सलामी बल्लेबाजों को खो दिया था। कूपर कोनोली ने श्रेयस अय्यर के साथ तीसरे विकेट के लिए 52 गेंदों में 83 रन जोड़े। कूपर कोनोली 27 गेंदों में 38 रन बनाकर पवेलियन लौटे। आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स का सबसे सफल रनचेज    226 बनाम RR, जयपुर, 2026     211 बनाम PBKS, धर्मशाला, 2026     210 बनाम LSG, विशाखपट्टनम, 2025     209 बनाम GL, दिल्ली, 2017     207 बनाम PBKS, जयपुर, 2025 कप्तान श्रेयस अय्यर ने फिफ्टी ठोकी पंजाब ने 19वें ओवर की पहली गेंद पर मार्कस स्टोइनिस और दूसरी पर शशांक सिंह का विकेट खो दिया। इसके बाद बैटिंग करने उतरे सूर्यांश शेडगे ने श्रेयस अय्यर ने छठे विकेट के लिए 10 गेंदों में 23 रन की अटूट साझेदारी करते हुए टीम को 200 के पार पहुंचाया। अय्यर 36 गेंदों में 3 छक्कों और 5 चौकों के साथ 59 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि सूर्यांश ने 8 गेंदों में 2 छक्कों और इतने ही चौकों के साथ 21 रन जोड़े। डीसी की तरफ से मिचेल स्टार्क और माधव तिवारी को 2-2 विकेट हाथ लगे। मुकेश कुमार ने 1 विकेट हासिल किया दिल्ली कैपिटल्स ने पंजाब किंग्स को 3 विकेट से हराया, चेज किया 211 रन का टारगेट अक्षर और मिलर के बल्ले से फिफ्टी निकली दिल्ली कैपिटल्स की शुरुआत खराब रही। इस टीम ने 33 के स्कोर तक अपने 3 विकेट खो दिए थे। अभिषेक पोरेल, केएल राहुल और साहिल परख कोई बड़ा कमाल नहीं कर पाए। यहां से ट्रिस्टन स्टब्स ने कप्तान अक्षर पटेल के साथ चौथे विकेट के लिए 23 गेंदों में 41 रन की साझेदारी करते हुए टीम को संभाला। ट्रिस्टन स्टब्स 17 गेंदों में 12 रन बनाकर आउट हुए, जिसके बाद अक्षर ने डेविड मिलर के साथ पांचवें विकेट के लिए 34 गेंदों में 64 रन जोड़कर टीम को 138 के स्कोर तक पहुंचाया। कप्तान अक्षर 30 गेंदों में 2 छक्कों और 8 चौकों के साथ 56 रन बनाकर आउट हुए। यहां से डेविड मिलर ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 28 गेंदों में 4 छक्कों और 3 चौकों के साथ 51 रन बनाए, जबकि आशुतोष ने 10 गेंदों में 24 रन की तूफानी पारी खेली। विपक्षी खेमे से अर्शदीप सिंह और यश ठाकुर ने 2-2 विकेट हासिल किए। बेन ड्वारशुइस और मार्कस स्टोइनिस ने 1-1 विकेट निकाला।  

एक ही हमले की धमक: लाहौर-इस्लामाबाद-कराची तक मुनीर का कुनबा खतरे में, चीन पर भी दबाव

नई दिल्ली भारत ने पिछले दिनों ओडिशा के तट पर एक विनाशकारी मिसाइल का सफल ट्रायल किया है. इससे पहले डीआरडीओ की तरफ से तीन हजार किलोमीटर से भी ज्‍यादा के क्षेत्र के लिए हवाई कर्फ्यू यानी NOTAM जारी किया था. अब इसको लेकर विस्‍तृत जानकारी सामने आई है. दरअसल, भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने ऐसी मिसाइल का परीक्षण किया है, जो 5000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. खास बात यह है कि इस मिसाइल में ऐसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया गया है, जो एक साथ अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग टार्गेट को एक साथ तबाह करने में सक्षम है. इस मिसाइल की जद में पूरा पाकिस्‍तान है, ज‍बकि उसके यार चीन के कई महत्‍वपूर्ण ठिकाने भी इस मिसाइल की नोंक पर होंगे. इसका मतलब यह हुआ कि इस मिसाइल से लाहौर से लेकर इस्‍लामाबाद, रावलपिंडी, कराची, पेशावर जैसे शहरों को कुछ ही मिनटों में मलबे में तब्‍दील किया जा सकता है।  दरअसल, डीआरडीओ ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल यानी MIRV टेक्‍नोलॉजी से लैस एडवांस अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया है. हालांकि, डीआरडीओ की तरफ से अग्नि मिसाइल के इस वैरिएंट के बारे में कुछ नहीं बताया गया है, लेकिन मुद्दे की बात यह है कि यह मिसाइल MIRV तकनीक से लैस है. MIRV टेक्‍नोलॉजी की मदद से एक ही मिसाइल से कई टार्गेट पर निशाना साधा जा सकता है. इस तकनीक से लैस मिसाइल को इसी वजह से ‘मिसाइल बस’ भी कहा जाता है. भारत ने 8 मई 2026 को ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर सामरिक मोर्चे पर बड़ा संदेश दिया है. इस उपलब्धि के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास लंबी दूरी की MIRV क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं।  हिन्‍द महासागर में बादशाहत! रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 9 मई को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए परीक्षण की सफलता की पुष्टि की. बाद में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि जमीन और समुद्र आधारित कई ट्रैकिंग स्टेशनों से प्राप्त टेलीमेट्री डेटा ने मिसाइल की पूरी ऑपरेशनल ट्रैजेक्टरी को सफल बताया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परीक्षण को भारत की बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा कि देश बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर रहा है. हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि परीक्षण अग्नि-5 का था या अग्नि-6 संस्करण का, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे अग्नि-5 परिवार का एडवांस MIRV अपग्रेड मान रहे हैं, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है. माना जा रहा है कि यह मिसाइल हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग लक्ष्यों को साधने में सक्षम है, जिससे भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और ‘सेकेंड स्ट्राइक’ क्षमता दोनों मजबूत हुई हैं।  MIRV से लैस मिसाइल इस वजह से खास     भारत ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल फ्लाइट ट्रायल किया.     रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल में MIRV (Multiple Independently Targeted Reentry Vehicle) तकनीक का इस्तेमाल किया गया.     इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है.     परीक्षण में मिसाइल ने कई पेलोड को अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया.     सभी लक्ष्यों को हिंद महासागर क्षेत्र में बड़े भौगोलिक दायरे में चुना गया था.     मिसाइल की पूरी उड़ान पर ग्राउंड और जहाज आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से नजर रखी गई.     रक्षा मंत्रालय ने कहा कि लॉन्च से लेकर सभी पेलोड के लक्ष्य पर पहुंचने तक मिशन सफल रहा.     इस परीक्षण के साथ भारत ने फिर साबित किया कि वह एक मिसाइल से कई रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है.     मिसाइल का विकास DRDO की लैब्स ने देश की विभिन्न इंडस्ट्रीज के सहयोग से किया है.     परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी मौजूद रहे.     इससे पहले 11 मार्च 2024 को भारत ने पहली बार स्वदेशी अग्नि-5 मिसाइल का MIRV तकनीक के साथ सफल परीक्षण किया था.     हालांकि सरकार ने मिसाइल की आधिकारिक रेंज नहीं बताई, लेकिन NOTMAR नोटिस के आधार पर इसकी मारक क्षमता करीब 3,600 किलोमीटर मानी जा रही है. MIRV टेक्‍नोलॉजी के क्‍या फायदे? MIRV तकनीक रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल जहां एक वारहेड ले जाती है, वहीं MIRV तकनीक वाली मिसाइल एक साथ कई वारहेड लेकर अलग-अलग दिशाओं में हमला कर सकती है. इसमें डिकॉय और पेनिट्रेशन एड्स का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेदना आसान हो जाता है. यही वजह है कि अमेरिका, रूस और चीन जैसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने इस तकनीक को अपनी रणनीतिक क्षमता का अहम हिस्सा बनाया हुआ है. अब भारत भी इस श्रेणी में मजबूती से शामिल होता दिखाई दे रहा है. यह परीक्षण मुख्य रूप से चीन को रणनीतिक संदेश देने वाला है. हाल के वर्षों में चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम में तेजी लाई है. शिनजियांग क्षेत्र में मिसाइल साइलो निर्माण, DF-41 जैसी MIRV मिसाइलों की तैनाती, हाइपरसोनिक हथियारों का विकास और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं. ऐसे में भारत का यह परीक्षण सामरिक संतुलन कायम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. MIRV तकनीक आखिर होती क्या है? MIRV यानी Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle ऐसी मिसाइल तकनीक है, जिसमें एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई परमाणु वारहेड लेकर जाती है. अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद ये वारहेड अलग-अलग दिशाओं में जाकर अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं. यानी एक मिसाइल से कई ठिकानों पर हमला संभव हो जाता है. भारत के हालिया परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत क्या रही? भारत ने उन्नत अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए MIRV तकनीक का सफल परीक्षण किया है. इस परीक्षण ने दिखाया कि भारत अब लंबी दूरी तक कई लक्ष्यों पर एक साथ सटीक हमला करने की क्षमता हासिल कर चुका है. इसे भारत की सामरिक ताकत में बड़ा इजाफा माना जा रहा है. चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में … Read more

नर्सरी से लाने के बाद सूखने लगती है तुलसी? जानें एक्सपर्ट के बताए रिपोटिंग टिप्स और काले कीड़ों का रामबाण इलाज

लोग शिकायत करते हैं कि नर्सरी से लाने के बाद हरा-भरा तुलसी का पौधा सूखने लगता है या उसमें काले कीड़े लग जाते हैं। ऐसे में गार्डनिंग एक्सपर्ट ने तुलसी को सही तरीके से उगाने और उसे लंबे समय तक हरा-भरा रखने के कुछ खास सीक्रेट्स बताए हैं। जो आपके काम आएंगे। अक्सर लोगों का सवाल होता है कि नर्सरी से लाया हुआ हरा-भरा तुलसी का पौधा घर आते ही कुछ दिनों में सूख जाता है। अगर आप भी इस समस्या का सामना करते हैं तो यह जानकारी आपके काम आएगी। दरअसल, पौधे को लगाने के गलत तरीके और वातावरण में अचानक बदलाव के कारण वह शॉक में चला जाता है। एवर ग्रीन गार्डन की एक्सपर्ट ने तुलसी को हरा-भरा रखने और उसे काले कीड़ों से बचाने के कुछ खास सीक्रेट्स शेयर किए हैं। सभी जानते हैं कि तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में न केवल पूजनीय है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी बेमिसाल हैं। अब अगर आप पौधे की अच्छी ग्रोथ देखना चाहते हैं तो सबसे पहले उगाने का सही तरीका जानें। जब आप नर्सरी से पौधा लाते हैं, तो वह वहां के वातावरण का आदी होता है। अगर आप दोपहर की तेज धूप में पौधा लाए हैं, तो उसे तुरंत दूसरे गमले में न लगाएं। सबसे पहले उस पर थोड़ा सा पानी छिड़कें और उसे घर के वातावरण में सेट होने के लिए एक-दो दिन का समय दें। तुरंत मिट्टी बदलने से पौधे की जड़ें कमजोर हो सकती हैं। सही गमला और मिट्टी का चुनाव तुलसी के लिए 6 से 8 इंच का गमला सबसे अच्छा होता है। ध्यान रहे कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर हो। मिट्टी तैयार करते समय 60% गार्डन सॉइल, 20% कोकोपीट और 20% वर्मीकंपोस्ट का मिश्रण बनाएं। कोकोपीट मिट्टी में नमी बनाए रखता है और वर्मीकंपोस्ट पौधे को जरूरी पोषण देता है। पौधा लगाने का सही तरीका गमले को पहले 3 से 4 इंच तैयार मिट्टी से भरें। अब तुलसी के पौधे को बीच में रखें और चारों तरफ से मिट्टी भरकर हल्के हाथों से दबाएं। गमले को ऊपर तक न भरें, बल्कि ऊपर से 2 इंच खाली रहने दें ताकि पानी और खाद देने की जगह बनी रहे। मिट्टी को दबाना इसलिए जरूरी है ताकि जड़ों के पास हवा के बुलबुले न रहें। एप्सम सॉल्ट और ह्मयूमिक एसिड पौधा लगाने के तुरंत बाद आधा चम्मच एप्सम सॉल्ट और आधा चम्मच ह्यूमिक एसिड डालें। एप्सम सॉल्ट पौधे को रिपोटिंग शॉक से बचाता है और पत्तियों को हरा रखता है, जबकि ह्यूमिक एसिड जड़ों के विकास में मदद करता है। ध्यान रहे कि इस प्रक्रिया को हर महीने केवल एक बार ही दोहराना है। पानी देने का नियम और सही जगह पौधा लगाने के बाद उसे भरपूर पानी दें। शुरुआत में इसे सेमी-शेड वाली जगह पर रखें, जहां सीधी तेज धूप न आती हो। दोबारा पानी तभी दें जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी नजर आए। तुलसी की जड़ों में बहुत ज्यादा पानी जमा होने से वे सड़ने लगती हैं, जिसे 'रूट रॉट' कहते हैं। काले कीड़ों से छुटकारा पाने का उपाय अगर तुलसी पर काले कीड़े लग गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आधा चम्मच हल्दी और थोड़ा सा डिशवॉश लिक्विड पानी में मिलाकर स्प्रे बोतल में भर लें। इसका छिड़काव पौधे पर करें। हल्दी एंटी-बैक्टीरियल होती है और कीड़ों को जड़ से खत्म कर देती है। छिड़काव के बाद अगले 24 घंटों तक पौधे पर सादा पानी न डालें।

उज्जैन जिले में जल संरक्षण और जनजागरूकता पर आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन

जल गंगा संवर्धन अभियान उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं जनजागरूकता के लिए आयोजित हुई विभिन्न प्रतियोगिताएं उज्जैन उज्जैन जिले में जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन के उद्देश्य से “जल गंगा संवर्धन अभियान 2026” का वृहद स्तर पर संचालन किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के मार्गदर्शन में जिले के शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों द्वारा विभिन्न जनजागरूकता एवं सामाजिक गतिविधियों का आयोजन कर विद्यार्थियों एवं आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान से जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा भू-जल संवर्धन के प्रति सकारात्मक संदेश प्रसारित किया जा रहा है। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय के नेतृत्व में “जल गंगा संवर्धन अभियान-2026” के अंतर्गत उज्जैन जिले के 15 शासकीय एवं 07 अशासकीय महाविद्यालयों में विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों में निबंध, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, भाषण प्रतियोगिता, व्याख्यान तथा रैली शामिल थीं। इन कार्यक्रमों में 1866 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अभियान अंतर्गत विद्यार्थियों एवं महाविद्यालयों द्वारा मानव श्रृंखला, रंगोली, वृक्षारोपण, तालाबों की सफाई, पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम तथा जल स्रोतों के संरक्षण जैसे रचनात्मक एवं सामाजिक कार्य भी किए गए। इसके माध्यम से जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। उज्जैन जिले के 13 महाविद्यालयों में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है। यह भू-जल स्तर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अतिरिक्त जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिले के 17 महाविद्यालयों द्वारा कार्य योजना तैयार की गई है, जिसके तहत 1086 वृक्षारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना से पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन को बढ़ावा दिया जाएगा। जल गंगा संवर्धन योजना के अंतर्गत आयोजित रैलियों में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का पुरजोर प्रयास किया।  

डोरेमॉन के नोबिता का असली शहर जापान में मिला, फैंस ने की भावनाओं की झलक

टोक्यो   आप सभी अपने घर में कभी न कभी डोरेमॉन कार्टून तो देखा ही होगा। वही डोरेमॉन जो अपने गैजेट्स के लिए काफी फेमस है और उनसे अपने दोस्त नोबिता की मदद करता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है जिसमें डोरेमॉन के असली शहर को जिसमें स्कूल और बिल्डिंगों को हूबहू वैसा ही दिखाया गया है जैसा वे कार्टून की काल्पनिक दुनिया में हैं। एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर ने सार्थक सचदेवा ने जापान की लगभग 6,000 किलोमीटर की यात्रा करके ये जगह ढूंढ़ी है। वीडियो में जापान के एक शांत आवासीय इलाके की उनकी यात्रा को दिखाया गया है, जो लोकप्रिय कार्टून के नोबिता और डोरेमोन की दुनिया से काफी मिलता-जुलता है।   इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो  इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @sarthaksachdevva नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसमें सार्थक कैमरा अपनी ओर घुमाते हुए उत्साह से कहा कि वह इस घर को देखने के लिए भारत से जापान तक का लंबा सफर तय करके आए हैं। इसके बाद वीडियो में संकरी गलियों, छोटे घरों और शांत सड़कों के मनोरम दृश्य दिखाए गए, जिन्हें देखकर दर्शकों को तुरंत डोरेमॉन के जाने-पहचाने दृश्यों की याद आ गई।मोहल्ले से गुज़रते हुए, सार्थक ने उन बारीकियों की ओर इशारा किया जिन्हें पुराने प्रशंसक तुरंत पहचान गए। एक सड़क की ओर इशारा करते हुए उन्होंने समझाया कि दर्शकों ने नोबिता को श्रृंखला में अनगिनत बार "ठीक इसी सड़क" से स्कूल जाते, दोस्तों से मिलते या खेल के मैदान की ओर भागते हुए देखा है। हूबहू वैस ही दिखा नजारा  मोहल्ले का शांत वातावरण, साफ-सुथरी सड़कें और सादगीपूर्ण घर उस सौम्य, रोजमर्रा की सुंदरता को दर्शाते थे जिसने डोरेमॉन को पीढ़ियों से दर्शकों के लिए इतना सुकून भरा बना दिया था। वीडियो के कई दृश्य कार्टून के दृश्यों से हूबहू मिलते-जुलते थे, जिससे यह दौरा पर्यटन की बजाय बचपन की यादों में खो जाने जैसा महसूस हुआ। वीडियो के कैप्शन में लिखा था, "वास्तविक जीवन में डोरेमोन के ठिकाने।" हालांकि डोरेमॉन की कहानी टोक्यो में घटित होती है, लेकिन कई प्रशंसक इसकी दृश्य शैली को श्रृंखला की निर्माता फुजिको एफ. फुजियो से जुड़े वास्तविक जीवन के स्थानों से जोड़ते हैं, जिनका जन्म ताकाओका में हुआ था। यूजर्स को भी पसंद आया वीडियो  यह वीडियो स्कूल के बाद डोरेमॉन देखते हुए बड़े हुए लोगों के बीच तेज़ी से ऑनलाइन वायरल हो गया। कई दर्शकों ने माना कि मोहल्ले को असल ज़िंदगी में देखकर वे भावुक हो गए, और कई लोगों ने इसे बचपन का सपना सच होने जैसा बताया। कई लोगों ने कहा कि यह क्लिप उन्हें डोरेमोन के गैजेट्स, नोबिता के कारनामों और उस दुनिया की सादगी भरे एहसास की याद दिलाती है जो आज भी सालों बाद भी बेहद जानी-पहचानी लगती है। एक यूजर ने सिर्फ "रोंगटे खड़े हो गए" लिखा, जबकि दूसरे ने कहा, "सुनहरे दिन।" एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, "डोरेमॉन से जुड़ी हमारी बचपन की भावनाएं," जबकि चौथे व्यक्ति ने कहा, "इस वीडियो ने मेरा दिन बना दिया।"

QR कोड अनिवार्य! Google ने वेबसाइट एक्सेस में किया नया नियम लागू

नई दिल्ली इंटरनेट इस्तेमाल करते समय आपने कई बार “I’m Not a Robot” वाला Captcha जरूर देखा होगा। यह सिस्टम वेबसाइट्स को बॉट्स और फर्जी ट्रैफिक से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब Google इस पुराने सिस्टम को बदलने की तैयारी में है। गूगल एक नया QR Code बेस्ड ह्यूमन वेरिफिकेशन सिस्टम टेस्ट कर रही है, जिसमें यूजर्स को वेबसाइट इस्तेमाल करने से पहले अपने फोन को लिंक करना पड़ सकता है। इस नए सिस्टम में यूजर को वेबसाइट पर दिख रहे QR Code को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद फोन के जरिए यह पुष्टि की जाएगी कि वेबसाइट इस्तेमाल करने वाला इंसान है या कोई बॉट। आज के समय में AI और ऑटोमेटेड बॉट्स पहले से ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं। यही वजह है कि Google अब नया तरीका तलाश रहा है जिससे असली यूजर्स और बॉट्स के बीच फर्क करना आसान हो सके। फिलहाल यह फीचर शुरुआती चरण में बताया जा रहा है और Google ने आधिकारिक तौर पर इसकी पूरी जानकारी शेयर नहीं की है। आने वाले समय में कंपनी इसे कुछ वेबसाइट्स और सेवाओं पर टेस्ट कर सकती है। अगर यह फीचर सफल रहता है, तो इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका आने वाले वर्षों में काफी बदल सकता है। Google का नया QR Code Verification सिस्टम गूगल ऐसा सिस्टम विकसित कर रहा है जिसमें वेबसाइट खोलने पर यूजर को QR Code दिखाई देगा। यूजर को यह QR Code अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद फोन के जरिए वेबसाइट को यह सिग्नल मिलेगा कि सामने असली इंसान है, कोई ऑटोमेटेड बॉट नहीं। यह सिस्टम मौजूदा Captcha की जगह ले सकता है। अभी ज्यादातर वेबसाइट्स पर तस्वीर पहचानना, ट्रैफिक लाइट चुनना या टेक्स्ट टाइप करना पड़ता है। लेकिन नए सिस्टम में यह प्रक्रिया काफी अलग हो सकती है। Google क्यों बदलना चाहता है Google Captcha सिस्टम गूगल लंबे समय से reCAPTCHA सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। शुरुआत में यह काफी असरदार माना जाता था, लेकिन अब AI तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि कई बॉट्स Captcha टेस्ट को आसानी से पास कर लेते हैं। गूगल का मानना है कि फोन लिंक्ड वेरिफिकेशन ज्यादा सुरक्षित हो सकता है क्योंकि इसमें असली डिवाइस और यूजर की पहचान को ट्रैक करना आसान होगा। इससे फर्जी अकाउंट, स्पैम और बॉट एक्टिविटी को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे काम करेगा यह नया फीचर इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक यूजर जब किसी वेबसाइट पर जाएगा तो वहां QR Code दिखाई देगा। इसके बाद यूजर अपने फोन से QR Code स्कैन करेगा। स्कैन करने के बाद फोन एक तरह का डिजिटल सिग्नल वेबसाइट को भेजेगा, जिससे यह पुष्टि होगी कि सामने असली यूजर मौजूद है। प्राइवेसी को लेकर उठ रहे सवाल Google के इस नए सिस्टम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा प्राइवेसी पर हो रही है। कई लोगों का कहना है कि अगर हर वेबसाइट के साथ फोन लिंक किया जाएगा, तो यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी को ज्यादा आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

दुनिया की लग्जरी का जलवा: लेंबॉर्गिनी फेनोमेनो रोडस्टर, 7 सेकेंड में 200 किमी/घंटा, लिमिटेड 15 यूनिट

मुंबई  इटली की दिग्गज सुपरकार निर्माता कंपनी लेंबॉर्गिनी ने अपनी नई और बेहद खास सुपरकार फेनोमेनो रोडस्टर से पर्दा उठा दिया है। यह कार केवल तेज रफ्तार का ही प्रतीक नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक, आक्रामक डिजाइन और सीमित उत्पादन के कारण ऑटोमोबाइल दुनिया की सबसे खास कारों में गिना जा रहा है। कंपनी इस सुपरकार की दुनिया भर में केवल 15 इकाइयां ही तैयार करेगी, जिससे इसकी विशिष्टता और भी बढ़ गई है। लेंबॉर्गिनी लंबे समय से ऐसी कारें बनाने के लिए जानी जाती है जो केवल वाहन नहीं बल्कि प्रदर्शन, तकनीक और विलासिता का प्रतीक होती हैं। फेनोमेनो रोडस्टर भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाती दिखाई देती है। यह कार महज 6.8 सेकेंड में 0 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि इसकी अधिकतम गति 340 किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज्यादा बताई जा रही है। बेहद आक्रामक और आकर्षक डिजाइन नई फेनोमेनो रोडस्टर का डिजाइन पहली नजर में ही लोगों को आकर्षित कर देता है। कंपनी ने इसे ‘ब्लू सेफियस’ रंग में पेश किया है, जिसमें लाल रंग के विशेष एक्सेंट दिए गए हैं। यह रंग संयोजन लेंबॉर्गिनी की ऐतिहासिक कारों और इटली के बोलोग्ना शहर को सम्मान देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कार का अगला हिस्सा बेहद आक्रामक दिखाई देता है। इसमें तीखे कट्स और धारदार रेखाओं का उपयोग किया गया है, जो इसे भविष्य की सुपरकार जैसा रूप देते हैं। आकर्षक एलईडी हेडलाइट्स, चौड़े एयर इनटेक और षट्कोणीय डिजाइन एलिमेंट इसकी स्पोर्टी पहचान को और मजबूत बनाते हैं। कंपनी का दावा है कि इस कार को केवल खूबसूरत बनाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि उच्च गति पर बेहतर संतुलन और दबाव नियंत्रण के लिए एयरोडायनामिक तकनीक का भी विशेष इस्तेमाल किया गया है। इसमें नया फ्लैट विंडशील्ड दिया गया है, जिसके ऊपर लगा स्पॉइलर हवा को केबिन से हटाकर इंजन की ओर मोड़ देता है। इससे इंजन को ठंडा रखने में मदद मिलती है। उच्च गति पर भी शानदार संतुलन फेनोमेनो रोडस्टर के साइड प्रोफाइल में आकर्षक रेखाएं और बड़े एयर इनटेक दिए गए हैं। पीछे की ओर इसका लंबा डिजाइन प्रसिद्ध एसेंजा एससीवी12 की याद दिलाता है। इस सुपरकार में खास तौर पर विकसित किए गए ब्रिजस्टोन पोटेंजा स्पोर्ट सेमी-स्लिक टायर लगाए गए हैं। आगे की तरफ 21 इंच और पीछे 22 इंच के बड़े पहिए दिए गए हैं, जो सड़क पर बेहतर पकड़ सुनिश्चित करते हैं। कार के पिछले हिस्से में वर्टिकल लाल पट्टी, षट्कोणीय एग्जॉस्ट और विशेष एयरो डिफ्यूजर दिया गया है। इसके अलावा इसमें एक्टिव विंग भी लगाया गया है, जो तेज रफ्तार के दौरान अतिरिक्त डाउनफोर्स और स्थिरता प्रदान करता है। यही वजह है कि इतनी तेज गति पर भी यह सुपरकार संतुलन बनाए रखने में सक्षम है। विमान जैसे केबिन का अनुभव फेनोमेनो रोडस्टर का इंटीरियर भी उतना ही शानदार है जितना इसका बाहरी डिजाइन। कंपनी ने इसमें “पायलट जैसा अनुभव” डिजाइन थीम का इस्तेमाल किया है। इसका केबिन लड़ाकू विमान से प्रेरित दिखाई देता है। इसमें विशेष स्विचगियर, कार्बन फाइबर ट्रिम और स्पोर्टी बकेट सीटें दी गई हैं। डैशबोर्ड में त्रिआयामी प्रिंट तकनीक से तैयार एयर वेंट लगाए गए हैं। सीटों पर लाल रंग की कॉन्ट्रास्ट सिलाई की गई है, जो केबिन को और प्रीमियम बनाती है। तकनीक के मामले में भी यह सुपरकार बेहद आधुनिक है। इसमें तीन डिजिटल डिस्प्ले दिए गए हैं, जिनमें चालक के लिए 12.3 इंच का डिजिटल डिस्प्ले, 8.4 इंच का टचस्क्रीन और सहयात्री के लिए अलग स्क्रीन शामिल है। 1080 हॉर्सपावर की जबरदस्त ताकत लेंबॉर्गिनी ने इस सुपरकार में 6.5 लीटर का नैचुरली एस्पिरेटेड वी12 इंजन दिया है। इसके साथ तीन इलेक्ट्रिक मोटर भी जोड़ी गई हैं। यह पूरा सिस्टम मिलकर 1080 हॉर्सपावर की जबरदस्त ताकत उत्पन्न करता है। सुपरकार में 8-स्पीड ड्यूल क्लच गियरबॉक्स दिया गया है, जो बेहद तेज और स्मूद गियर बदलाव सुनिश्चित करता है। इसमें 7 किलोवाट घंटे की बैटरी भी दी गई है, जो इलेक्ट्रिक मोटरों को ऊर्जा प्रदान करती है। इतनी ताकतवर प्रणाली के बावजूद कार का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली है। यह सुपरकार केवल 2.4 सेकेंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि 200 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने में इसे सिर्फ 6.8 सेकेंड का समय लगता है। दुनिया के चुनिंदा लोगों के लिए बनेगी यह सुपरकार फेनोमेनो रोडस्टर का सबसे खास पहलू इसकी सीमित उपलब्धता है। कंपनी केवल 15 इकाइयों का ही निर्माण करेगी। इसका मतलब यह है कि दुनिया भर में केवल चुनिंदा ग्राहकों के पास ही यह सुपरकार देखने को मिलेगी। ऑटोमोबाइल जगत में सीमित संख्या में बनने वाली कारों की मांग हमेशा बेहद अधिक रहती है और समय के साथ उनकी कीमत भी कई गुना बढ़ जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि फेनोमेनो रोडस्टर केवल एक सुपरकार नहीं बल्कि संग्रहणीय विरासत बनने जा रही है। इसकी तकनीक, प्रदर्शन और दुर्लभता इसे आने वाले वर्षों में बेहद खास बना सकती है।