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झारखंड के छात्रों के लिए बड़ा बदलाव, फिजिकल एजुकेशन में लागू होंगी NCERT की पुस्तकें

रांची. राज्य सरकार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा कक्षा तीन से आठ के लिए तैयार शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण विषय पर तैयार नई पाठ्यपुस्तकों को लागू कर सकती है। हाल ही में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह की अध्यक्षता में झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) की बैठक में इस पर चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की अनुशंसा के अनुरूप एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू की जाए या झारखंड के लिए राज्य स्तर पर नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की जाएं। इस पर सचिव ने जेसीईआरटी को एनसीईआरटी द्वारा तैयार पुस्तकों की समीक्षा कर एक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि उसपर अंतिम निर्णय लिया जा सके। कक्षा नौ से 12वीं के लिए भी तय हुआ कि एनसीईआरटी द्वारा तैयार की जानेवाली पुस्तकों की समीक्षा के बाद ही उस पर निर्णय लिया जाएगा। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में स्कूलों में शारीरिक शिक्षा एवं कल्याण (फिजिकल एजुकेशन एंड वेल-बीईंग) की पढ़ाई पर जोर दिया गया है। एनसीईआरटी द्वारा तैयार पाठ्य-पुस्तकों में फिजिकल फिटनेस, खेल, स्वास्थ्य जागरुकता, इमोशनल बैलेंस, टीम स्पिरिट और ज़िम्मेदार लाइफ स्टाइल के ज़रिए बच्चों के समग्र विकास पर जोर दिया गया है। बताते चलें कि राज्य के सरकारी स्कूलों में जेसीईआरटी द्वारा कक्षा एक से आठ तक के लिए तैयार पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं। नौवीं से 12वीं कक्षाओं के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं। राज्य सरकार एनसीईआरटी से कापी राइट लेकर पुस्तकों का प्रकाशन कराती है। राज्य में अभी तक शारीरिक शिक्षा के लिए अपनी पुस्तकें तैयार नहीं की गई हैं। यदि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग एनसीईआरटी की शारीरिक शिक्षा की पुस्तकों को लागूनहीं कर स्वयं पुस्तकें तैयार करने का निर्णय लिया जाता है तो इसकी जिम्मेदारी जेसीईआरटी को दी जाएगी।

कोटा को मिली 100 इलेक्ट्रिक बसों की सौगात, 250 युवाओं को मिलेगा रोजगार

कोटा शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। आने वाले कुछ दिनों में कोटा की सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती नजर आएंगी। प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत शहर को कुल 100 ई-बसें मिलने जा रही हैं, जिनकी पहली खेप जुलाई के पहले सप्ताह तक कोटा पहुंचने की संभावना है। इन बसों के शुरू होने से न सिर्फ शहर के लोगों का सफर आसान होगा, बल्कि नगर निगम सीमा में शामिल हुए दूरदराज के ग्रामीण इलाकों के हजारों लोगों को भी पहली बार नियमित और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। शहर के साथ गांव भी होंगे सीधे जुड़े अब तक शहर से दूर बसे कई गांवों के लोगों को निजी वाहनों या महंगे साधनों पर निर्भर रहना पड़ता था। नई ई-बस सेवा इस तस्वीर को बदलने जा रही है। नगर निगम और कोटा बस सर्विसेज लिमिटेड ने ऐसे 20 रूट तय किए हैं, जिनके जरिए शहर के साथ-साथ निगम सीमा में शामिल ग्रामीण क्षेत्रों को भी जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और मरीजों को रोजाना आने-जाने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 20 रूट पर चलेगी नई इलेक्ट्रिक बस सेवा योजना के तहत रेलवे स्टेशन से बंधा धर्मपुरा, मुकुन्दरा विहार और कोलीपुरा गांव तक बसें संचालित होंगी। न्यू बस स्टैंड से बोराबास, एरोड्राम, डीसीएम, भामाशाह मंडी और कॉमर्स कॉलेज तक कनेक्टिविटी मिलेगी। एरोड्राम से रानपुर, सोगरिया, धनेश्वर और दरा जंक्शन, रायपुरा से भदाना और सोगरिया स्टेशन, झालीपुरा से अरण्डखेड़ा, बड़गांव से सीमलिया, चंद्रेसल से आरके पुरम, सोगरिया स्टेशन से अनंतपुरा, बड़ तिराहे से शंभुपुरा एयरपोर्ट, नयापुरा से तालेड़ा और रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म नंबर-4 से जीएडी सर्किल तक के रूट भी इस योजना में शामिल किए गए हैं। 100 बसों में 95 होंगी 9 मीटर लंबी कोटा को मिलने वाली 100 ई-बसों में अधिकांश 9 मीटर लंबी होंगी, जबकि पांच बसें 12 मीटर श्रेणी की रहेंगी। इन बसों को यात्रियों की संख्या और विभिन्न मार्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सभी बसें आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देंगी। सुभाष नगर में तैयार हुआ चार्जिंग स्टेशन बसों के संचालन से पहले जरूरी तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। सुभाष नगर में बस स्टॉप और चार्जिंग स्टेशन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार बसों की देखरेख, मरम्मत और ड्राइवर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बस सप्लाई करने वाली कंपनी के पास रहेगी। इससे संचालन व्यवस्था को बेहतर और नियमित बनाए रखने में मदद मिलेगी। 250 लोगों को मिलेगा रोजगार ई-बस परियोजना केवल परिवहन व्यवस्था ही नहीं बदलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी लेकर आएगी। स्थानीय स्तर पर कंडक्टर, लिपिकीय स्टाफ और अन्य कर्मचारियों सहित करीब 250 लोगों की नियुक्ति संविदा फर्म के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए टेंडर जुलाई के पहले सप्ताह में खोले जाने की तैयारी है। इतना होगा बस का किराया नगर निगम ने यात्रियों को राहत देने के लिए किराया भी किफायती रखा है। पहले तीन किलोमीटर तक का किराया 10 रुपये होगा। तीन से छह किलोमीटर तक 15 रुपये, छह से दस किलोमीटर तक 20 रुपये और अधिकतम किराया 60 रुपये निर्धारित किया गया है। इससे आम लोगों को कम खर्च में सुरक्षित और सुविधाजनक सफर का विकल्प मिलेगा। बदलेगी शहर की परिवहन व्यवस्था ई-बसों के संचालन के साथ कोटा में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश करेगी। प्रदूषण कम करने, ट्रैफिक का दबाव घटाने और शहर के साथ ग्रामीण इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी देने की दिशा में यह योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि सब कुछ तय समय के अनुसार हुआ तो जुलाई के पहले सप्ताह से कोटा के लोग आधुनिक, स्वच्छ और सुविधाजनक ई-बस सेवा का लाभ उठाना शुरू कर देंगे।

राशन कार्डधारकों के लिए जरूरी अपडेट, नया सदस्य जोड़ने से पहले करानी होगी e-KYC

रांची झारखंड में राशन कार्ड में नया नाम जोड़ने के लिए पहले ई-केवाईसी कराना अब अनिवार्य होगा। राशन वितरण व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी राशन कार्डधारियों के लिए ई-केवाईसी की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है। लाभार्थियों का ई-केवाईसी किए बिना अब राशन कार्ड में किसी भी नए सदस्य का नाम नहीं जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही राशन कार्ड में दर्ज परिवार के सभी सदस्यों का ई-केवाईसी नि:शुल्क कराया जा रहा है। ई-केवाईसी का मुख्य उद्देश्य रांची जिला प्रशासन के अनुसार, ई-केवाईसी का उद्देश्य लाभार्थियों का सत्यापन करना, अपात्र और फर्जी कार्डधारियों की पहचान करना तथा खाद्यान्न वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना है। इसके माध्यम से वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा सकेगा। खाद्य आपूर्ति विभाग ने सभी जिला पदाधारियों को दिशा-निर्देश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में ई-केवाईसी के बिना नया नाम जोड़ने की कार्यवाही नहीं की जाए। खाद्य आपूर्ति विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से अपात्र लोगों को लाभ लेने से रोका जा सकेगा और पात्र लाभुकों को समय पर राशन उपलब्ध होगा। ई-केवाईसी की लगातार निगरानी खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने विभाग ने कहा है कि ई-केवाईसी अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए जन वितरण प्रणाली दुकानदारों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। ई-केवाईसी नहीं कराने वाले लाभुकों को भविष्य में राशन प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। ई-केवाईसी जल्द पूरा करने की अपील जिला प्रशासन ने बताया कि लाभुक अपने नजदीकी जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान पर आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। अधिकारियों ने सभी कार्डधारियों से अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य का ई-केवाईसी जल्द पूरा कराने की अपील की है।

Punjab News: तरनतारन में नकली नशा मुक्ति केंद्र पर छापा, फर्जी डॉक्टर बनकर मरीज किए गए भर्ती

तरनतारन. तरनतारन में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक कथित अवैध नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़ किया गया है। आरोप है कि केंद्र संचालक खुद को डॉक्टर बताकर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे और नशा छुड़ाने के नाम पर उन्हें गैरकानूनी तरीके से केंद्र में बंधक बनाकर रखा गया था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने सात लोगों को वहां से मुक्त कराया। मामले में दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिनमें से एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरे की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। थाना सिटी तरनतारन के प्रभारी निरीक्षक परमजीत सिंह विरदी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि शहर में एक नशा मुक्ति केंद्र बिना वैधानिक अनुमति के संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ संयुक्त रूप से छापा मारा गया। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। डॉक्टर बता कर रहे थे उपचार पुलिस के अनुसार, अमृतसर निवासी सरबजीत सिंह और राणा प्रताप सिंह इस केंद्र का संचालन कर रहे थे। दोनों पर आरोप है कि वे स्वयं को डॉक्टर बताकर लोगों को उपचार का भरोसा देते थे। इसके बाद नशे की लत से जूझ रहे लोगों को केंद्र में रखकर उनका गैरकानूनी तरीके से इलाज किया जाता था। पुलिस का दावा है कि केंद्र में मौजूद लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाकर रखा गया था। छापेमारी के दौरान केंद्र से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इन सभी को तत्काल गांव ठरू स्थित सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां अब उनका चिकित्सकीय उपचार और देखभाल की जा रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की शुरू पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, गैरकानूनी तरीके से लोगों को बंधक बनाकर रखने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। कार्रवाई के दौरान राणा प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि दूसरे आरोपित सरबजीत सिंह की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। थाना प्रभारी परमजीत सिंह विरदी ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि केंद्र कितने समय से संचालित किया जा रहा था, यहां अब तक कितने लोगों का इलाज किया गया और क्या इसके लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं।

सरकारी स्कूलों के होनहार छात्रों के लिए खुशखबरी, शिक्षा निदेशालय ने मांगी मेरिट सूची

हिसार  सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले अनुसूचित वर्ग के होनहारों के लिए खुशखबरी है। जिन विद्यार्थियों ने वार्षिक परीक्षा में 90 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए तो उन्हें वन टाइम छात्रवृति दी जाएगी। इसके लिए शिक्षा निदेशालय ने पत्र जारी कर उपरोक्त कक्षा के होनहारों की सूची मांगी है। जिले स्तर पर डीईओ कार्यालय में डिटेल भेजी जाएगी। जिसके बाद रिपोर्ट को शिक्षा निदेशालय भेज दिया जाएगा। इससे पहले निदेशालय ने डीईओ को आदेश दिए है कि वे संबंधित कक्षा के होनहारों के बैंक की कापी की जांच कर सत्यापित करें। यह पूरी प्रक्रिया 30 जून तक पूरी करनी होगी।बता दें कि सरकार की ओर से अनुसूचित वर्ग के विद्यार्थियों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने के लिए वन टाइम छात्रवृति शुरू की गई है। 12 कॉलम पर स्कूल मुखिया देंगे होनहारों की जानकारी स्कूल मुखिया को 12 कालम पर होनहारों को जानकारी देनी होगी। जिनमें विद्यार्थी का नाम, लड़का-लड़की, कक्षा, स्कूल का नाम, एसआरएन नंबर, जिला का नाम, राज्य का नाम, देश, बैंक का नाम, आईएफएससी कोड, खाता नंबर, आधार नंबर व मोबाइल नंबर शामिल है। जिनमें कक्षा इंचार्ज बच्चे की पूरी डिटेल उपरोक्त कालम अनुसार भरेंगे। जिसके बाद कक्षा प्रभारी अपनी रिपोर्ट संबंधित स्कूल मुखिया को देंगे। जिसके बाद रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजी जाएगी। छात्रवृति देने के ये है फायदें     स्लम एरिया में अनुसूचित वर्ग से संबंध रखने वाले अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। उनको छात्रवृति देकर हौंसलावर्धन होता है     अनुसूचित वर्ग के विद्यार्थियों के ड्रापआउट की संभावना अधिक रहती है।     उपरोक्त वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृति से एक तो आर्थिक मदद मिलती है। साथ ही प्रोत्साहन राशि से वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।     शिक्षा निदेशालय से हमें पत्र मिला है। जिसमें हमसे सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले अनुसूचित वर्ग के होनहार जिन्होंने 90 प्रतिशत व इससे अधिक अंक प्राप्त किए है तो उन्हें वन टाइम छात्रवृति मिलेगी। जिससे उन्हें आर्थिक मदद भी मिलेगी। साथ ही पढ़ाई में प्रोत्साहन भी मिलेगा। -रामरतन, जिला शिक्षा अधिकारी, हिसार।  

Mamata Banerjee का बागियों पर बड़ा हमला, बोलीं- पार्टी से विश्वासघात कभी माफ नहीं होगा

कलकत्ता तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को खरी-खरी सुनाई है. उत्तर कोलकाता जिला तृणमूल कांग्रेस की वर्चुअल मीटिंग में ममता ने पार्टी छोड़कर जाने वालों और दल बदलने वाले विधायकों-सांसदों और पार्षदों को 'गद्दार' करार दिया है. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने किसी नेता को पहचान और सम्मान दिया, मुश्किल समय में उसे छोड़ देना वैसा ही है जैसे कोई अपनी बीमार मां का साथ छोड़ दे।  ममता बनर्जी ने कहा, 'जिस मां ने आपको पूरी जिंदगी पाला-पोसा, जब वही मां बीमार पड़ जाए तो उसकी सेवा करने से इनकार कर देना सबसे बड़ा विश्वासघात है. गद्दारों के लिए कोई माफी नहीं है. आज वे खुद को बचा सकते हैं, लेकिन आने वाले समय में जनता भी उनसे हिसाब मांगेगी और पार्टी के कार्यकर्ता भी।  मौजूद राजनीतिक माहौल डर और आर्थिक संकट से भरा बैठक की शुरुआत में कार्यकर्ताओं का अभिवादन करते हुए ममता ने मौजूदा राजनीतिक माहौल को डर और आर्थिक संकट से भरा बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार लगातार विपक्ष को निशाना बना रही है. उन्होंने कहा, 'हर तरफ दमन का माहौल है. एक के बाद एक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. लोग डर के कारण आत्महत्या तक करने को मजबूर हो रहे हैं. फुटपाथ दुकानदारों की दुकानें तोड़ी जा रही हैं. कई लोगों की नौकरियां चली गई हैं और उनके सपने टूट रहे हैं।  ममता ने दावा किया कि इस संकट का सामना केवल एकजुट तृणमूल कांग्रेस ही कर सकती है. उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा पैदा किए गए इस माहौल में पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, बीएलओ और जमीनी कैडर ने अपनी जान जोखिम में डालकर संघर्ष किया है. 'आज जो लोग सत्ता में हैं, उनकी सफलता के पीछे हमारे कार्यकर्ताओं का खून-पसीना और बलिदान है।  पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य टीएमसी प्रमुख ने दल-बदलने वाले नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अपने खिलाफ चल रहे मामलों और परिवार की संपत्ति बचाने के लिए भाजपा का दामन थाम रहे हैं. उन्होंने कहा, 'कुछ लोग सिर्फ खुद और अपने परिवार को बचाने के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं. उनमें धैर्य नहीं है. जिनके खिलाफ हम लड़ते रहे, उन्हीं के साथ जाकर खड़े हो गए. अगर वे सीधे भाजपा में चले जाते तो हमें इतनी आपत्ति नहीं होती, लेकिन पार्टी के साथ विश्वासघात करना अक्षम्य है।  उन्होंने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जो दावा करते हैं कि उन्होंने कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए पार्टी छोड़ी. ममता ने कहा, 'वे कहते हैं कि कार्यकर्ताओं को बचाने के लिए गए हैं, लेकिन अपने ही इलाके में एंट्री नहीं कर पा रहे. वे कार्यकर्ताओं को नहीं, बल्कि अपनी दौलत बचाने गए हैं. क्या वे आपका पैसा वापस लाएंगे? नहीं. उन्होंने धर्म, सांप्रदायिक सौहार्द और मूल्यों तक का सौदा कर दिया है और अब अहंकार के साथ घूम रहे हैं।  ममता बनर्जी ने बागियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी जिन लोगों में समझ बाकी है, वे वापस लौट आएं. उन्होंने कहा, 'जो लोग सोच रहे हैं कि वे इस रास्ते पर चलकर बच जाएंगे, वे अंत में कहीं के नहीं रहेंगे. न इधर के रहेंगे, न उधर के।  जमीनी कार्यकर्ताओं को बताया महत्वपूर्ण अपने भाषण में ममता ने बार-बार पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, 'कार्यकर्ता नेता बनाते हैं और नेता कार्यकर्ताओं को तैयार करते हैं. मैं हर दिन अपने कार्यकर्ताओं से मिलती हूं और वे मजबूती से हमारे साथ खड़े हैं.' उन्होंने आरोप लगाया कि जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी, वे कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान से लाभ उठाकर आज व्यक्तिगत हितों के लिए दल बदल रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमने खून बहाया, संघर्ष किया. जो कठिन समय में हमारे साथ नहीं रहे, अगर वे पार्टी नहीं छोड़ते तो भाजपा हमारे कार्यकर्ताओं पर इतना अत्याचार करने की हिम्मत नहीं करती।  ममता ने पुलिस और मीडिया पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में पुलिस का ऐसा रूप पहले कभी नहीं देखा.'क्या पुलिस का काम लोगों से कहना है कि गाड़ी लेकर आए हैं, बैठो और उस शैतान के पास चले जाओ? पुलिस का कर्तव्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन जो कुछ हो रहा है, वह पूरी तरह गैरकानूनी है।  उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को सभाओं और रैलियों की अनुमति नहीं दी जा रही है और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा, "यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रखने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. क्या भाजपा का मतलब 'वन पार्टी, वन नेशन' है? हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।  ममता बनर्जी ने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि विश्वासघात की वजह से उन्होंने अपने दो भाइयों से संबंध तोड़ लिए थे, लेकिन उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा. उन्होंने कहा कि अभिषेक को लगातार सीआईडी, ईडी और सीबीआई के समन मिलते रहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. "मैं एयरपोर्ट जाती हूं तो भी उन्हें पहले से पता चल जाता है कि मैं कहां जा रही हूं।  भाषण के अंत में ममता बनर्जी ने 21 जुलाई को होने वाली टीएमसी की शहीद दिवस रैली को सफल बनाने की अपील की. उन्होंने कहा, 'इस रैली का आयोजन आसान नहीं होता, इसमें बहुत मेहनत और संघर्ष लगता है. लेकिन अगर सिर्फ पांच कार्यकर्ता भी आएंगे, तब भी हम यह सभा करेंगे. हमने कभी किसी से एक पैसा नहीं लिया. 21 जुलाई के बाद सभी लोग एकजुट होकर आगे बढ़ें।  उन्होंने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे 'संविधान हत्या दिवस' का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि 'आज संविधान और कानून का राज कहां है? लोग पुलिस के जरिए डराए और धमकाए जा रहे हैं. ऐसे समय में केवल जनता और हमारे कार्यकर्ता ही एकजुट होकर इसका मुकाबला कर सकते हैं।  ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेता भाजपा में शामिल हुए हैं और पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है. … Read more

मोदी कैबिनेट विस्तार में पंजाब को मिल सकती है बड़ी हिस्सेदारी, राघव चड्ढा, LPU चांसलर और चुघ रेस में

 चंडीगढ़  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल फेरबदल में पंजाब की लॉटरी लग सकती है। पंजाब में विधानसभा चुनाव बेहद निकट हैं। ये अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित हैं लेकिन इनके जल्दी भी होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। आम आदमी पार्टी शासित पंजाब से अभी केंद्रीय मंत्रिमंडल में सिर्फ रवनीत सिंह बिट्टू हैं। वे केंद्रीय राज्य मंत्री हैं। सियासी हलकों में चर्चा है कि मिशन पंजाब में जुटी बीजेपी राज्य को अधिक प्रतिनिधित्व दे सकती है। रवनीत सिंह बिट्टू की जगह पर किसी नए चेहरे को मौका मिल सकता है। सूत्रों का दावा है कि पंजाब को दो से तीन मंत्री मिल सकते हैं।हालांकि इस दौड़ में अमृतसर के रहने वाले व हाल ही में बिट्‌टू की जगह राज्यसभा भेजे तरूण चुघ भी शामिल हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक संडे या मंडे को केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है। चर्चा है कि इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरूवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले, जिसमें उन्हें इसके बारे में सुझाव दिया गया है। हालांकि अभी मंत्रीपद वाले नए चेहरों को लेकर कोई औपचारिक पुष्टि या सूचना नहीं है। 2014 के बाद से सिर्फ तीन मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में पंजाब की प्रतिनिधित्व कम रहा है। 2014 के बाद शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री बनी थीं। उन्होंने 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा केंद्र में बीजेपी के सोम प्रकाश मंत्री बने थे। वह 2019 से 2024 तक रहे। इसके बाद रवनीत सिंह बिट्टू बने थे। पंजाब की क्या है सियासी ताकत:     पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। विधानसभा में बीजेपी के दो MLA हैं।     पंजाब में लोकसभा की कुल सीटें 13 हैं। बीजेपी के पास कोई सीट नहीं है।     पंजाब में राज्यसभा की कुल सीटें सात हैं। इनमें छह बीजेपी के पास हैं। AAP के 7 सांसद तोड़ने में चड्‌ढा की अहम भूमिका राघव चड्‌ढा 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने पार्टी की जीत के लिए ऑन ग्राउंड भी वर्किंग की। चुनाव के बाद पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीती। सरकार बनी और भगवंत मान मुख्यमंत्री बन गए। जिसके बाद शुरुआती 2 साल तक राघव चड्‌ढा को पंजाब में सुपर CM की तरह माना गया। हालांकि इसके बाद उनके पार्टी से रिश्ते बिगड़ने लगे। जब आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को शराब के केस में जेल हुई तो चड्‌ढा तब यूके में थे। इसके बाद वह वापस लौटे तो बगावत कर दी और AAP के 7 सांसद तोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। राघव चड्‌ढा को मंत्री बनाने से भाजपा को पंजाब में क्या फायदा भाजपा को पंजाब में मीडिया नैरेटिव के लिए एक बड़ा चेहरा मिल सकता है। राघव चड्‌ढा AAP की कोर टीम में रह चुके हैं। ऐसे में भाजपा से मंत्रीपद मिलने के बाद चड्‌ढा 2027 के चुनाव में एग्रेसिव ढंग से काम करेंगे। ऐसे में AAP के खिलाफ वह नैरेटिव खड़ा कर सकते हैं। इसके अलावा चड्‌ढा शहरी क्षेत्र में अपना असर दिखा सकते हैं, खास तौर पर लुधियाना और जालंधर जैसे इंडस्ट्रियल शहरों में, जहां वे कारोबारियों और केंद्र के बीच पुल का काम कर सकते हैं। AAP को इससे क्या नुकसान होगा? राघव चड्‌ढा केंद्र में मंत्री बने तो AAP को मनोवैज्ञानिक के साथ संगठनात्मक झटका लग सकता है। 2022 में AAP के लिए चड्‌ढा ने वोट मांगे। अब वही AAP की बुराई करेंगे तो वोटर के मन में सत्ताधारी पार्टी आप के प्रति सवाल खड़े होंगे। वहीं राघव चड्‌ढा भाजपा में बड़ी भूमिका में आए तो AAP में उनसे जुड़े नेता भी उनके साथ जा सकते हैं। खास तौर पर अगर AAP किसी MLA या हारे उम्मीदवार का टिकट काटे या किसी दावेदार को टिकट न दे तो ऐसी सूरत में वह चड्‌ढा के साथ जा सकते हैं। आप के दो पूर्व नेता हैं रेस में पश्चिम बंगाल की जीत के बाद पंजाब को गंभीरता से ले रही बीजेपी राज्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल में अधिक तवज्जो दे सकती है। चर्चा है कि पंजाब में AAP छोड़कर आए नेताओं को इनाम मिल सकता है। इनमें सेलिब्रेटी फेस राघव चड्ढा का नाम सबसे आगे है। उनके साथ अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी) का भी नाम चल रहा है। चर्चा है कि दोनों में किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ है। रवनीत बिट्टू को बीजेपी चुनावों में झोंकना चाहती है। उनकी जगह पर हाल ही में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने तरुण चुघ को लाया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कद्दावर नेता चुघ पंजाब चुनाव में पार्टी को मजबूती देंगे। वह पंजाब से ही आते हैं।  

रायपुर में आधुनिक ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण ले रहीं महिलाएं

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में जशपुर जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाएं नई पहचान बना रही हैं। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत जिले की चयनित महिलाएं इन दिनों रायपुर स्थित आईटीएम विश्वविद्यालय में ड्रोन संचालन एवं रिमोट पायलटिंग का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। यह प्रशिक्षण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने के साथ उन्हें कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं देने के लिए दक्ष बन रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन दीदियों को ड्रोन की तकनीकी संरचना, सुरक्षित उड़ान संचालन, रिमोट पायलटिंग, फसलों में उर्वरक एवं कीटनाशकों का वैज्ञानिक छिड़काव, ड्रोन के रखरखाव तथा कृषि क्षेत्र में उसके व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये ड्रोन दीदियां जशपुर जिले के किसानों को ड्रोन के माध्यम से नैनो उर्वरक, कीटनाशक एवं अन्य कृषि कार्यों की सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे कृषि कार्य कम समय में, कम लागत पर और अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। साथ ही वैज्ञानिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान प्रशिक्षण के लिए रवाना हो रही ड्रोन दीदियों की बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इससे पूर्व 17 अप्रैल 2026 को रणजीता स्टेडियम में आयोजित 'लखपति दीदी' कार्यक्रम के दौरान ड्रोन दीदी एवं उन्नत सॉयल टेस्टिंग मशीन भी प्रदान की गई थी। उप संचालक कृषि, जशपुर के अनुसार प्रशिक्षण के बाद ड्रोन दीदियां जिले के विभिन्न विकासखंडों में किसानों को तकनीक आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराएंगी। इससे खेती में समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग का विश्वास है कि यह पहल जशपुर में तकनीक आधारित कृषि को नई गति देने के साथ महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक सशक्तता और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बेंगलुरु की पहल: 59 भाषाओं में किताब पढ़कर सुनाने वाला AI स्मार्ट चश्मा तैयार

 बोकारो Blind Vision Foundation Bangalore की ओर से दृष्टिबाधित बच्चों की सुविधा के लिए स्मार्ट विजन चश्मा बनाया गया है। एआई व मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित यह चश्मा बच्चों की शिक्षा में सहयोग करेगा। वह बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी सहित 59 भारतीय भाषाओं में लिखित पुस्तकों को पढ़ कर सुनाएगा। उन्हें न केवल पाठ्य पुस्तकों, बल्कि जनरल नालेज की भी जानकारी देगा। यह चश्मा बच्चों को रास्ते में आने वाली बाधा, वाहन आदि की भी जानकारी देगा। साथ ही उनके स्वजनों को उनके सही लोकेशन की भी जानकारी उपलब्ध कराएगा। यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों का सहारा बनेगा। उनके जीवन की राह को आसान करेगा। इसके माध्यम से बच्चे न केवल बेहतर तरीके से शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे, अपितु जीवन की राह पर मजबूती से आगे कदम बढ़ा सकेंगे। ऐसे काम करता है स्मार्ट विजन चश्मा ब्लाइंड विजन फाउंडेशन बेंगलुरु के प्रोजेक्ट मैनेजर राहुल ने कहा कि इस चश्मा के बीच में कैमरा लगा रहता है। चश्मा में सेंसर, बजर, बैटरी, फ्लैश लाइट, स्पीकर आदि लगा रहता है। स्मार्ट फोन में इससे संबंधित एप्लीकेशन डाउनलोड किया जाता है। इसमें लगे कैमरे व सेंसर उपयोगकर्ता के परिवेश को स्कैन करते हैं और एआई तकनीक के माध्यम से उसे आडियो (आवाज) के रूप में बदलकर बताते हैं। चश्मे में लगा फ्रंट कैमरा उपयोगकर्ता के सामने की तस्वीर खींचता है, जबकि लिडार सेंसर आसपास की दूरी और बाधाओं का पता लगाते हैं। कैप्चर की गई छवियों और डेटा को एआई माडल द्वारा प्रोसेस किया जाता है। यह बाब्जेक्ट्स (कुर्सी, मेज आदि) लोगों के चेहरों और लिखित शब्दों को पहचानता है। चश्मे में लग बजर सक्रिय हो जाता है। स्पीकर से बीप की आवाज आने लगती है। उपयोगकर्ता को बताया जाता हैं कि उनके सामने दीवार, गड्ढ़ा, वाहन आदि हैं। वे किसी किताब के लिखे हुए शब्दों को पढ़कर सुनाते हैं। जैसे ही दृष्टिबाधित विद्यार्थी चश्मे के आगे पुस्तक को रखते हैं, वैसे ही चश्मे में लगा कैमरा उसकी तस्वीर खींच लेता है। इसके बाद एआई तकनीक के माध्यम से उसे आडियो के रूप में बदल देता है। स्पीकर के जरिए उपयोगकर्ता को पुस्तक में लिखे शब्द सुनाए जाते हैं। वह इस डाटा को सुरक्षित रख सकता है। इसके माध्यम से परीक्षा की तैयारी कर सकता है। यह चश्मा भारत सहित विभिन्न देशों की करेंसी की भी पहचान करता है। बच्चों को जनरल नालेज से संबंधित जानकारी देता है। इसमें इमरजेंसी मोड होता है, जो उपयोगकर्ता का फोटो व लाइव लोकेशन स्वजनों को वाट्स एप पर उपलब्ध कराता है। साथ ही मोबाइल फोन से उनके लोकेशन की जानकारी देता है। उपयोगकर्ता अपनी पसंद के गाने भी सुन सकते हैं। यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक है। कहा कि कारपोरेट सीएसआर के सहयोग से यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों को निश्शुल्क उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। आशा लता केंद्र के निदेशक भवानी शंकर जायसवाल व प्राचार्य प्रमोद दुबे ने कहा कि इस चश्मा से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा। इसके सहारे बच्चे न केवल बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकेंगे, बल्कि बेहतर तरीके से रोजमर्रा के काम कर सकेंगे।

उत्तर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री प्रक्रिया बदली, रिश्तों के प्रमाण के लिए अब अलग दस्तावेज जरूरी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री वगैरह में आधार कार्ड को सिर्फ पहचान और पते का दस्तावेज माना जाएगा। उस पर दर्ज माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य संबंधों की जानकारी को रिश्ते का प्रमाण नहीं माना जाएगा। यूपी में संपत्तियों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब रजिस्ट्री कार्यालयों में आधार कार्ड को केवल पहचान और पते के प्रमाण के रूप में ही स्वीकार किया जाएगा। आधार कार्ड पर लिखी माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य पारिवारिक संबंधों की जानकारी को कानूनी रूप से रिश्ते का प्रमाण नहीं माना जाएगा। इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने सभी रजिस्ट्री कार्यालयों के लिए नया आदेश जारी कर दिया है। रिश्ते साबित करने के लिए दूसरे कागज देने होंगे। आदेश के अनुसार, जहां भी किसी आवेदन, योजना और विलेख में पारिवारिक संबंध का सत्यापन आवश्यक होगा, वहां आवेदकों को वैध सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। रिश्ते की पुष्टि के लिए जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकारी संबंधी अभिलेख या सरकार द्वारा मान्य अन्य दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। अब तक कई मामलों में संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान लोग आधार कार्ड पर दर्ज पारिवारिक जानकारी के आधार पर रिश्तों का सत्यापन करवा लेते थे। खास तौर पर विरासत, उत्तराधिकार या पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण के मामलों में आधार कार्ड का उपयोग किया जाता था। आगे से आधार कार्ड दिखाकर ऐसा करना बंद हो जाएगा। आधार कार्ड सिर्फ पहचान और पते का दस्तावेज महानिरीक्षक निबंधन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड केवल किसी व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण है, न कि पारिवारिक संबंधों का। इसी स्पष्टीकरण के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। रजिस्ट्री से पहले तैयार कराने होंगे दस्तावेज नए नियम के लागू होने के बाद संपत्ति खरीदारों, विक्रेताओं और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में शामिल लोगों को रजिस्ट्री से पहले अपने संबंधों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने होंगे। यदि किसी मामले में पारिवारिक संबंध साबित करना आवश्यक होगा, तो केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं माना जाएगा। निबंधन विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और गलत दस्तावेजों या रिश्तों के आधार पर होने वाले विवादों पर भी अंकुश लगेगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि रजिस्ट्री कराने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। अब फैमिली प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में इन नियमों का पालन किया जाएगा।