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मोहन भागवत का तीन दिवसीय जबलपुर दौरा, कॉलेज के युवाओं और RSS पदाधिकारियों से करेंगे चर्चा

 जबलपुर युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और उनसे सीधे संवाद करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत मध्य प्रदेश के जबलपुर पहुंचेंगे. उनका यह दौरा 24 अक्टूबर से शुरू होकर तीन दिन चलेगा. इस दौरान भागवत कॉलेज में पढ़ने वाले युवा स्वयंसेवकों से मुलाकात करेंगे. 25 अक्टूबर को होने वाले एक विशेष शिविर में उनका संबोधन भी प्रस्तावित है.इसके अलावा वे स्थानीय पदाधिकारियों और प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ बैठकें करेंगे।  RSS के महाकौशल प्रांत के प्रचार प्रमुख विनोद कुमार ने शनिवार को एक न्यूज एजेंसी को इसकी जानकारी दी. मोहन भागवत 25 अक्टूबर को महाकौशल प्रांत के Gen-Z स्वयंसेवकों के शिविर में शामिल होंगे. यहां वे कॉलेज में पढ़ने वाले स्वयंसेवकों से बातचीत करेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे।  हालांकि, इस संवाद में किन मुद्दों पर चर्चा होगी, इसे लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. भागवत के कार्यक्रम में संगठन के स्थानीय पदाधिकारियों और प्रांतीय कार्यकारिणी की टीमों के साथ बैठकें भी शामिल हैं. इन बैठकों में संगठन से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी।  38 जिलों तक फैला है महाकौशल प्रांत RSS का महाकौशल प्रांत संगठन के मध्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इसमें मध्य प्रदेश के 38  जिले शामिल हैं. जबलपुर, सागर और रीवा यहां के संभागीय मुख्यालय हैं. इस लिहाज से जबलपुर का दौरा संघ के लिए क्षेत्रीय स्तर पर भी अहम है।  युवा स्वयंसेवकों के शिविर में भागवत की मौजूदगी ऐसे समय में हो रही है, जब संगठन इस क्षेत्र में युवाओं से संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रहा है. अब देखना यह होगा कि 25 अक्टूबर को होने वाले शिविर में भागवत युवाओं से किन मुद्दों पर बात करते हैं और उनके संबोधन में किन विषयों पर जोर रहता है। 

अरुंधति को बचपन में सीएम योगी के वीडियो से मिली सीख

योगी आदित्यनाथ को बड़ा भाई मानती हैं अरुंधति, विवाह पर आशीर्वाद का आग्रह दिसंबर में होनी है शादी,  मुख्यमंत्री के शुभकामना संदेश को भी बताया अनमोल लखनऊ कभी अपनी आंखों में आने वाले आंसुओं को कमजोरी समझने वाली केरल की अरुंधति के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक सीख जिंदगी का नजरिया बदलने वाली बन गई। बचपन में योगी के एक वीडियो से उन्होंने समझा कि भावुक होना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं को स्वीकार करने का साहस है। वर्षों बाद भी यह सीख उनके जीवन का हिस्सा बनी हुई है। अब जब अरुंधति विवाह कर अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही हैं, तो उन्होंने अपने प्रेरणास्रोत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हाथ से लिखकर दो पेज का पत्र भेजा है और विवाह में शामिल होकर नवदंपती को आशीर्वाद देने का आग्रह किया है। पत्र में शादी का न्योता है, पर उससे भी ज्यादा है- सीएम के प्रति कृतज्ञता का भाव। जब आंसुओं को कमजोरी मानने लगी थीं अरुंधति अरुंधति ने सीएम योगी को भेजे अपने पत्र में बचपन की उस मनःस्थिति को साझा किया है, जब छोटी-छोटी बातों पर भावुक होकर रो पड़ना उन्हें खुद अपनी कमजोरी लगने लगा था। उनके कुछ दोस्त उन्हें समझाते थे कि मजबूत बनने के लिए भावनाओं पर काबू रखना जरूरी है। धीरे-धीरे उनके मन में भी यह सवाल घर करने लगा कि क्या आसानी से रो पड़ने वाला व्यक्ति कभी मजबूत बन सकता है? क्या अपनी भावनाएं जाहिर करना शर्मिंदगी की बात है? इसी दौरान उनके चचेरे भाई ने उन्हें योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो दिखाया। वीडियो में योगी काफी भावुक थे। चचेरे भाई ने समझाया कि योगी जैसा बनो, भावुक होते हुए भी अत्यंत मजबूत। इससे अरुंधति को एक नई दृष्टि मिली। उन्हें यह समझने में मदद मिली कि आंसू किसी व्यक्ति की कमजोरी का प्रमाण नहीं होते। इस अनुभव ने उनके भीतर चल रहे द्वंद्व को बदलने में अहम भूमिका निभाई। जिस भावुकता को वह अपनी कमी मानने लगी थीं, उसे अब वह अपनी सहज मानवीय संवेदना के रूप में देखने लगीं। योगी की सीख से समझा, मजबूत होने का असली अर्थ अरुंधति के लिए इस अनुभव का महत्व केवल उस पल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने समझा कि मजबूत होने का अर्थ हर परिस्थिति में भावनाओं को छिपाना नहीं, बल्कि मुश्किलों का सामना करते हुए खुद पर भरोसा बनाए रखना है। गिरने के बाद दोबारा खड़े होना, चुनौतियों के बीच आगे बढ़ना और अपनी जिम्मेदारियों को निभाना ही वास्तविक साहस है। अरुंधति ने पत्र में लिखा है-‘ जब भी मैं खुद पर संदेह करती हूं,  आपसे मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।‘ अरुंधती का योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान उनकी सार्वजनिक भूमिका से भी जुड़ा है। उनके लिए उनकी यात्रा मेहनत, दृढ़ निश्चय और निरंतर प्रयास का संदेश देती है। इस तरह बचपन में देखे गए एक वीडियो से मिली सीख अरुंधती के लिए आत्मविश्वास का ऐसा आधार बन गई, जिसे वह आज भी अपने जीवन में महसूस करती हैं। जीवन के सबसे खास मौके पर याद आए प्रेरणास्रोत अरुंधति और राहुल का विवाह 20 दिसंबर 2026 में केरल के अलुवा स्थित ग्रीन पार्क कन्वेंशन सेंटर में होना है। जीवन के इस खास अवसर पर अरुंधति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है। लिखा है-‘ मेरे लिए आप एक नेता से कहीं बढ़कर हैं। मैंने आपको हमेशा एक बड़े भाई की तरह देखा है, जिसकी यात्रा ने मुझे हिम्मत और प्रेरणा दी है।‘अरुंधति ने पत्र में मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं का उल्लेख करते हुए यह भी लिखा है कि यदि उनके लिए समारोह में पहुंचना संभव न हो, तो उनका शुभकामना संदेश और आशीर्वाद भी उनके लिए बेहद अनमोल होगा। उन्होंने इस बात के लिए आभार जताया कि सीएम योगी की एक सीख ने उन्हें अपनी भावनाओं को कमजोरी मानने के बजाय स्वीकार करना सिखाया।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना से आकाश जायसवाल को मिला स्वरोजगार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विगत दिनों उमरिया जिले के गुरूवाही ग्राम में आयोजित लाडली बहना कार्यक्रम में आकाश जायसवाल को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना अंतर्गत राइस मिल स्थापना की स्वीकृति के बाद प्रमाण पत्र प्रदान किया। शासन की योजनाएं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उद्यानिकी विभाग अंतर्गत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना से लाभान्वित ग्राम बचहा, विकासखंड मानपुर निवासी आकाश जायसवाल इसका उदाहरण हैं। आकाश जायसवाल पिता श्री सुरेश जायसवाल ने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने नौकरी की जगह स्वरोजगार को प्राथमिकता देते हुए राइस मिल स्थापित करने की योजना बनाई। इसके लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना में आकाश को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की इंदवार शाखा से 29 लाख 89 हजार 296 रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसके साथ ही उन्हें 35 प्रतिशत अनुदान के प्रावधान के अंतर्गत लगभग 10 लाख रुपये की सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इससे उन्हें अपना उद्यम स्थापित करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। आकाश जायसवाल के पिता टेंट व्यवसाय करते हैं। आकाश का मानना है कि शासन की इस योजना से उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिला है। उनका प्रयास है कि राइस मिल के माध्यम से व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा सकें।  

तकनीक से सुगम होगा न्याय, विधि से सुनिश्चित होगी निष्पक्षता; दुर्ग कोर्ट में विधिक संगोष्ठी आयोजित

रायपुर : तकनीक से सुगम न्याय, विधि से सुनिश्चित निष्पक्षता: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर विधिक संगोष्ठी एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी आयोजित तकनीक से सुगम न्याय, विधि से सुनिश्चित निष्पक्षता: दुर्ग जिला न्यायालय में ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ पर विधिक संगोष्ठी एवं डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी आयोजित रायपुर  न्याय की राह में दूरियाँ कम हो रही हैं और तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को नए आयाम दे रही है। अब ऑडियो-वीडियो माध्यमों से साक्ष्य दर्ज करने से लेकर डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को समझने तक, न्याय व्यवस्था में तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में तकनीक का उपयोग केवल सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि विधिसम्मत, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना भी आवश्यक है।        इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग में 16 अक्टूबर को “ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही एवं न्याय श्रुति नियम, 2025 का विधिक एवं व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर विधिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में न्यायिक कार्यवाही के आधुनिक स्वरूप, साक्ष्य की प्रक्रिया और तकनीकी साधनों के विधिसम्मत उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के साथ ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसने आयोजन को व्यावहारिक और ज्ञानवर्धक स्वरूप प्रदान किया। ’न्यायालय की सीमाओं से परे साक्ष्य, लेकिन विधि के दायरे में’      प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर तथा प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, दुर्ग श्रीमती सुमन एक्का की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित संगोष्ठी में द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री प्रशांत पराशर ने ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रमुख प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का अभिभाषण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग कु. दीपांशी जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी में इस बात पर बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक न्यायिक कार्यवाही को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाने में सहायक हो सकती है, लेकिन इसका प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब विधिक प्रावधानों का पालन करते हुए साक्ष्य की विश्वसनीयता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। ’ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों की प्रदर्शनी : तकनीक को समझने का व्यावहारिक माध्यम’       संगोष्ठी का एक महत्वपूर्ण आकर्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आयोजित ई-साक्ष्य की प्रक्रिया एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी का उद्देश्य डिजिटल साक्ष्यों की प्रक्रिया, उनके महत्व और न्यायिक कार्यवाही में उनकी प्रासंगिकता के प्रति समझ विकसित करना था। इस पहल ने संगोष्ठी की विषयवस्तु को व्यावहारिक आयाम प्रदान किया। जहाँ संगोष्ठी में नियमों और प्रक्रियाओं की विधिक व्याख्या की गई, वहीं प्रदर्शनी के माध्यम से ई-साक्ष्य एवं डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित जानकारी को एक अलग और सहज स्वरूप में प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार न्यायिक तकनीक से जुड़े विषयों को केवल सैद्धांतिक चर्चा तक सीमित न रखते हुए, उन्हें प्रत्यक्ष जानकारी और जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया। ’विधिक जागरूकता में नवाचार: रंगोली ने भी बढ़ाई आयोजन की गरिमा’      कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा आकर्षक रंगोली का निर्माण कराया गया। रंगोली ने आयोजन को रचनात्मक स्वरूप प्रदान करने के साथ उसकी शोभा भी बढ़ाई। विधिक संगोष्ठी, डिजिटल साक्ष्य प्रदर्शनी और कलात्मक प्रस्तुति का यह समन्वय दर्शाता है कि विधिक जागरूकता को प्रभावी बनाने के लिए पारंपरिक और आधुनिक, दोनों प्रकार के माध्यम उपयोगी हो सकते हैं। ’न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक और संस्थागत समन्वय पर जोर’      कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण के अतिरिक्त उप संचालक अभियोजन श्री भीम सिंह राजपूत, दुर्ग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, सचिव श्री रविशंकर सिंह तथा जेल अधीक्षक श्री मनीष संभाकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच समन्वय और साझा समझ के महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, अभियोजन पक्ष तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को ‘न्याय श्रुति नियम, 2025’ के प्रावधानों और ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्यायिक कार्यवाही के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में संवेदनशील शासन, पारदर्शी व्यवस्था और जनभागीदारी से मजबूत हो रहा जनता का विश्वास

रायपुर  लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता का विश्वास है और सुशासन उस विश्वास को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम। जब शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, समस्याओं का समयबद्ध समाधान होता है और आम नागरिक को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए अनावश्यक भटकना नहीं पड़ता, तभी सुशासन की अवधारणा सार्थक होती है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में इसी भावना के अनुरूप संवेदनशील, पारदर्शी और जनोन्मुखी प्रशासन को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास‘ के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। शासन की कार्यप्रणाली को अधिक सरल, सुलभ और जवाबदेह बनाने के प्रयासों से प्रशासन और आम नागरिकों के बीच संवाद तथा विश्वास का नया वातावरण विकसित हो रहा है। सुशासन की पहली शर्त है कि आम नागरिक की बात सुनी जाए और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी पहल हो। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने जनसमस्याओं के निराकरण को शासन की प्राथमिकताओं में स्थान दिया है। नागरिकों को अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे शासन-प्रशासन के समक्ष रखने का अवसर मिल रहा है। जिला और विकासखंड स्तर पर आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर भी प्रशासन को नागरिकों के निकट लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। इन शिविरों में विभिन्न विभागों की सेवाओं और योजनाओं की जानकारी देने के साथ पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने तथा प्राप्त आवेदनों के निराकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। डिजिटल सुशासन से आसान हो रही शासकीय सेवाएं बदलते समय में तकनीक सुशासन का सशक्त आधार बनकर उभरी है। छत्तीसगढ़ में डिजिटल माध्यमों से शासकीय सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सेवा सेतु पोर्टल और डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न विभागों की सेवाओं के लिए आवेदन करने और प्रक्रियाओं की जानकारी प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों के लिए शासकीय सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने में सहायता मिल रही है। डिजिटल व्यवस्थाओं का महत्व केवल ऑनलाइन आवेदन तक सीमित नहीं है। इनका उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, अनावश्यक विलंब कम करना और नागरिकों को सेवाओं की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराना भी है। तकनीक आधारित प्रशासन से शासन और जनता के बीच विश्वास का संबंध और अधिक मजबूत करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वाेच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, श्रमिकों और जनजातीय समुदायों के कल्याण को विशेष प्राथमिकता दे रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह सहायता घरेलू आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटी बचत जैसे कार्यों में महिलाओं के लिए उपयोगी साबित हो रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर का सपना साकार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। किसानों के लिए संचालित योजनाएं, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका से जुड़ी पहलें भी नागरिकों के जीवन में आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा का आधार बन रही हैं। इन योजनाओं की वास्तविक सफलता उन परिवारों के जीवन में दिखाई देती है, जिन्हें शासन की सहायता से अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। शिकायत निवारण से जवाबदेह प्रशासन की ओर सुशासन का अर्थ केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और उनका समाधान सुनिश्चित करना भी है। इसी दिशा में सीएम हेल्पलाइन 1076 नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने और उसके निराकरण की स्थिति जानने का माध्यम उपलब्ध कराती है। नगरीय क्षेत्रों में निदान-1100 के माध्यम से साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान की व्यवस्था विकसित की गई है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य शिकायत निवारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। जब नागरिक अपनी समस्या दर्ज कराने के साथ उसकी प्रगति भी जान सकते हैं, तब प्रशासन के प्रति उनका भरोसा मजबूत होता है। गांव से शहर तक विकास, हर वर्ग के कल्याण का प्रयास छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में निवास करती है। इसलिए सुशासन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार दूरस्थ अंचलों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पहुंच है। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण विकास, जनजातीय कल्याण, महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से विकास को अधिक समावेशी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा जैसे अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार तथा स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण का महत्व और भी बढ़ जाता है। सुशासन की वास्तविक पहचान तब बनती है, जब दूरस्थ गांव में रहने वाले नागरिक को भी वही सम्मान, सुविधा और अवसर प्राप्त हों, जो शहरों में उपलब्ध हैं। जनभागीदारी से मजबूत होता सुशासन का संकल्प प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित सेवा संकल्प अभियान ने जनसेवा और जनभागीदारी की भावना को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया। अभियान के अंतर्गत सेवा सेतु, सेवा की कहानी, सेवा मेरा योगदान और सुशासन सेवा संवाद जैसी पहलों ने नागरिकों को शासन की सेवाओं, जनकल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का संदेश दिया। सुशासन केवल सरकार और प्रशासन के प्रयासों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से भी मजबूत होता है। नागरिकों के सुझाव, सामाजिक सहयोग और जनहित के कार्यों में भागीदारी विकास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाते हैं। सुशासन का वास्तविक अर्थ है हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन को जनसेवा, संवेदनशीलता और जवाबदेही से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। योजनाओं की प्रभावशीलता, शिकायतों का समयबद्ध समाधान और नागरिकों की संतुष्टि ही इन प्रयासों की वास्तविक कसौटी होगी। सुशासन का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें गरीब को सम्मान, किसान को संबल, महिलाओं को सुरक्षा, युवाओं को अवसर और … Read more

वीज़ा संबंधी प्रामाणिक जानकारी के लिए सरकारी अथवा दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट का करें उपयोग

भोपाल विदेश मंत्रालय भारत सरकार द्वारा एडवाइजरी जारी कर विदेशों में रोज़गार और निवास वीज़ा दिलाने के नाम पर सोशल मीडिया पर सक्रिय फ़र्ज़ी वीज़ा एवं माइग्रेशन एजेंसियों से नागरिकों को पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई है। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास और दुबई एवं उत्तरी अमीरात स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास (कॉन्सुलेट जनरल) को भारतीय नागरिकों से ऐसी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें भारत से बाहर (संयुक्त अरब अमीरात सहित) संचालित निजी एजेंसियों द्वारा धोखाधड़ी किए जाने के मामले सामने आए हैं। यह एजेंसियाँ सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन देकर विभिन्न देशों में नौकरी या निवास वीज़ा दिलाने का झूठा दावा करती हैं। आवेदकों से भारी शुल्क वसूलने के बाद न तो कोई वीज़ा या सेवा प्रदान की जाती है और न ही धनराशि लौटाई जाती है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल सोशल मीडिया विज्ञापनों के आधार पर कोई निर्णय न लें और भारत के बाहर से कार्य कर रही निजी एजेंसियों पर बिना गहन जाँच-पड़ताल के भरोसा न करें। नागरिकों को परामर्श दिया गया है कि वे जिस देश में जाने की योजना बना रहे हैं, भारत स्थित उस देश के दूतावास अथवा वाणिज्य दूतावास से वीज़ा की आवश्यक औपचारिकताओं, आवेदन प्रक्रिया और वैध तरीकों की सीधे पुष्टि करें। किसी भी एजेंसी द्वारा वीज़ा दिलाने के मात्र वादे के आधार पर कोई भुगतान न किया जाए, क्योंकि वीज़ा जारी करने का संपूर्ण अधिकार केवल संबंधित देश की सरकार का होता है और कोई भी एजेंसी इसकी गारंटी नहीं दे सकती। वीज़ा से संबंधित प्रामाणिक और अद्यतन जानकारी के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय हमेशा संबंधित देश की सरकारी अथवा दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।  

सरगुजा के बच्चों में भी देश में पहचान बनाने की प्रतिभा: मंत्री राजेश अग्रवाल

प्रतिभा बड़े शहरों की मोहताज नहीं, सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो सरगुजा का बच्चा भी देश में बना सकता है अपनी अलग पहचान: मंत्री राजेश अग्रवाल मंत्री राजेश अग्रवाल ने सरगुजा जिले के 35 शासकीय स्कूलों में नीट एवं जेईई की निःशुल्क लाइव ऑनलाइन कोचिंग का किया शुभारंभ सरगुजा के 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक मिलेगी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण कोचिंग आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, विशेषज्ञ शिक्षकों और एआई आधारित तकनीक से संवरेंगे विद्यार्थियों के सपने रायपुर  सरगुजा जिले के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के डॉक्टर और इंजीनियर बनने के सपनों को साकार करने की दिशा में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल की गई है। अब जिले के शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नीट एवं जेईई जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों की ओर रुख करने की आवश्यकता कम होगी। उन्हें अपने विद्यालयों में ही आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम, विषय विशेषज्ञ शिक्षकों और नवीनतम डिजिटल तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण कोचिंग की सुविधा मिलेगी। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने शनिवार को जिला कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में सरगुजा जिले के 35 शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में नीट एवं जेईई की निःशुल्क लाइव ऑनलाइन कोचिंग का शुभारंभ किया। जिला खनिज संस्थान न्यास एवं स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना से लगभग 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा। यह पहल विशेष रूप से उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, जो आर्थिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग प्राप्त नहीं कर पाते। अब सरगुजा के विद्यार्थियों को अपने ही विद्यालय में राष्ट्रीय स्तर के शिक्षकों से पढ़ने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्राप्त होगा। यह केवल कोचिंग की शुरुआत नहीं, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है: मंत्री अग्रवाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि सरगुजा के हजारों बच्चों के सपनों को नई उड़ान देने का संकल्प है। शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिससे समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारा जा सकता है। हमारा प्रयास है कि सरगुजा का कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल संसाधनों और आर्थिक परिस्थितियों के अभाव में अपने सपनों से वंचित न रहे। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को नीट और जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन एवं गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। इस पहल से विद्यार्थियों को विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आने वाली आर्थिक एवं शैक्षणिक कठिनाइयों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और कठिन परिश्रम करने का हौसला हो तो सरगुजा का बच्चा भी देश में अपनी अलग पहचान बना सकता है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए समान अवसर और उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। बड़े सपने देखिए, पूरी मेहनत से उन्हें साकार कीजिए और सरगुजा का नाम रोशन कीजिए: मंत्री अग्रवाल मंत्री अग्रवाल ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना, अनुशासन बनाए रखना और निरंतर मेहनत करना आवश्यक है। पढ़ाई के साथ अच्छा व्यवहार और सकारात्मक सोच  सफलता की महत्वपूर्ण आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप बड़े सपने देखिए, उन्हें पूरा करने के लिए पूरी लगन से मेहनत कीजिए और सफलता हासिल कर अपने माता-पिता, विद्यालय, सरगुजा तथा छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कीजिए। उन्होंने विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया कि ऑनलाइन कोचिंग में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई के प्रति जागरूक एवं प्रेरित किया जाए।  35 स्कूलों के 2,120 विद्यार्थियों को मिलेगा दो वर्षों तक विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन परियोजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 एवं 2027-28 के दौरान कक्षा 11वीं विज्ञान संकाय के लगभग 2,120 विद्यार्थियों को दो वर्षों तक लाइव ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। गणित समूह के विद्यार्थी जेईई तथा जीव विज्ञान समूह के विद्यार्थी नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे। कोचिंग का संचालन फिजिक्स वाला लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। जिले के सभी 35 चयनित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में एक साथ लाइव टू-वे इंटरैक्टिव कक्षाएं संचालित होंगी। हिंदी एवं अंग्रेजी के मिश्रित माध्यम में आयोजित होने वाली इन कक्षाओं में विद्यार्थी विषय विशेषज्ञ शिक्षकों से सीधे संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त कर सकेंगे। विद्यार्थियों को लाइव कक्षाओं के साथ रिकॉर्डेड लेक्चर, मोबाइल ऐप, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, क्लास नोट्स, मुद्रित अध्ययन सामग्री, प्रश्न बैंक, ऑनलाइन मॉक टेस्ट और ऑल इंडिया टेस्ट सीरीज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।  एआई तकनीक से होगी विद्यार्थियों की प्रगति की निगरानी, स्मार्ट क्लासरूम में मिलेगी आधुनिक शिक्षा परियोजना की विशेषता यह है कि इसमें विद्यार्थियों की पढ़ाई और प्रदर्शन के आकलन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। एआई आधारित लर्निंग एनालिटिक्स, प्रदर्शन ट्रैकिंग तथा अभिभावक रिपोर्टिंग डैशबोर्ड के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की निगरानी की जाएगी। सभी चयनित विद्यालयों में आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था की गई है। इनमें 75 इंच के 4के इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, कंप्यूटर सिस्टम, वायरलेस माइक्रोफोन, एचडी वेब कैमरा, स्पीकर सिस्टम और कम से कम तीन घंटे के पावर बैकअप की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। कार्यक्रम में सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि कमजोर आर्थिक परिस्थितियों के कारण अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। ऐसे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की यह पहल सराहनीय है। उन्होंने विद्यार्थियों को कड़ी मेहनत और लगन से सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि युवाओं के भविष्य को संवारने की दिशा में यह अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करने का आह्वान किया। राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने कहा कि यह पहल सरगुजा जिले … Read more

निजी निवेश, सार्वजनिक-निजी भागीदारी के सरलीकरण से खुलेंगे आवास विकास के नए अवसर

पोर्टल ugconclave.mp.gov.in पर सहभागिता के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रारंभ भोपाल मध्यप्रदेश में तीव्र गति से हो रहे शहरीकरण को दृष्टिगत रखते हुए नागरिकों की आवासीय आवश्यकताओं की समुचित पूर्ति तथा सर्वसुलभ एवं किफायती आवासों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। आगामी 28 अक्टूबर, 2026 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय 'अर्बन कॉन्क्लेव-2026' का आयोजन किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में शहरी आवास विकास, निजी निवेश की संभावनाओं, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और भविष्य की भावी आवश्यकताओं के अनुरूप शहरों के सुव्यवस्थित नियोजन से जुड़े विभिन्न नीतिगत एवं क्रियान्वयन संबंधी विषयों पर गहन विचार-मंथन किया जाएगा। कॉन्क्लेव से प्रदेश में समावेशी शहरी विकास के नए अवसरों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) एवं निम्न आय वर्ग (एलआईजी) के परिवारों के लिए सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और किफायती आवासों की सुलभता सुनिश्चित करने के सतत् प्रयासों को एक नई दिशा प्राप्त होगी। प्रदेश के नगरों में बढ़ती आवासीय माँग को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रगतिशील एवं नवोन्मेषी विकास मॉडलों को अंगीकार करने पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिससे समाज के प्रत्येक जरूरतमंद वर्ग को उसकी आर्थिक क्षमता के अनुरूप समुचित आवास उपलब्ध कराए जा सकें। इस दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0' के दूरगामी उद्देश्यों के सर्वथा अनुरूप आवासीय सुविधाओं का व्यापक विस्तार, शासकीय भूमि का पारदर्शी एवं प्रभावी उपयोग तथा आधुनिक तकनीक आधारित विकास मॉडलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह अनूठी पहल प्रदेश की दीर्घकालीन आवासीय आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ ही एक सशक्त, समृद्ध एवं सतत शहरी अधोसंरचना के निर्माण में अत्यधिक सहायक सिद्ध होगी। शहरी आवास विकास के लिए पर्याप्त भूमि की सुलभता सुनिश्चित करने तथा किफायती आवास परियोजनाओं को वित्तीय व व्यावहारिक दृष्टि से अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए विकास संबंधी नियमों एवं प्रावधानों में समयानुकूल सुधार किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत फ्लोर एरिया रेशियो में न्यायसंगत वृद्धि, विभिन्न शुल्कों एवं प्रभारों में विशेष रियायत तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित विकास मॉडलों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल वातावरण निर्मित किया जा रहा है। इन दूरदर्शी उपायों से स्थापत्य एवं आवास निर्माण क्षेत्र में निजी पूंजी निवेश की व्यापक संभावनाएं उत्पन्न होंगी। अर्बन कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित निवेशकों, विषय विशेषज्ञों, नगरीय विकास निकायों तथा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता से इस क्षेत्र में नए अवसरों का सूत्रपात होगा। राज्य सरकार द्वारा आवासीय आवश्यकताओं को केवल पारंपरिक निर्माण तक सीमित न रखकर एक समग्र एवं व्यापक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। इसके तहत किफायती किराये के आवासों, औद्योगिक एवं निर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षित आवासीय परिसरों तथा समाज के विभिन्न आय वर्गों की विविध आवश्यकताओं के अनुसार सर्वसुविधायुक्त विकल्पों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसके साथ ही बस्तियों के पुनर्विकास तथा बुनियादी जन-सुविधाओं का विस्तार कर शहरी निवासियों के जीवन स्तर के उन्नयन के ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इससे आजीविका की तलाश में शहरों में आगमन करने वाले श्रमिकों सहित प्रत्येक जरूरतमंद वर्ग को सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवासीय विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे। राज्य स्तरीय अर्बन कॉन्क्लेव शहरी विकास के क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, प्रमुख निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, नवोन्मेषी स्टार्ट-अप्स तथा ऊर्जावान युवाओं को मध्यप्रदेश में सृजित हो रही अपार विकास संभावनाओं से सीधे जुड़ने का एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। कॉनक्लेव में सहभागिता के इच्छुक निवेशक, स्टार्ट-अप्स एवं युवा आधिकारिक पोर्टल https://ugconclave.mp.gov.in/ पर जाकर अपना ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं। राज्य सरकार की इस दूरदर्शी पहल से प्रदेश के शहरों में सतत, समावेशी एवं आधुनिक विकास का नया अध्याय प्रारंभ होगा।  

बिना ठोस टिप्पणी के शिकायतें बंद करने पर कार्रवाई, PWD के 13 अधिकारियों से मांगा जवाब

सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निराकरण को लेकर शासन गंभीर शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर पीडब्लूडी के 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस विभाग ने 15 दिनों में मांगा जवाब   रायपुर नागरिकों द्वारा सीएम हेल्पलाइन-1076 पर दर्ज कराई गई शिकायतों के समाधान को लेकर राज्य शासन बेहद गंभीर है। पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का संबंधित विभागों द्वारा सक्रियता और गंभीरता से निराकरण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान और लापरवाही पर 13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने के कारण लोक निर्माण विभाग द्वारा अधिकारियों के विरुद्ध ये कार्रवाई की गई है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर विगत दो महीनों अगस्त और सितम्बर माह में लोक निर्माण विभाग से संबंधित शिकायतों की समीक्षा में पाया गया कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर शिकायतों को ऐसी टीप के साथ बंद किया गया है, जो शिकायत का समाधान नहीं दर्शाती है। विभाग ने एल-1 स्तर पर शिकायतों के असंतोषप्रद समाधान पर राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग बिलासपुर के अनुविभागीय अधिकारी श्री अतुल राज पेगवार, बेमेतरा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री राजेश कुमार बाजपेयी, पेंड्रा उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी श्री जगदीश प्रसाद, सेतु उप संभाग दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी श्री अशोक कुमार हरियाले और पाटन उप संभाग की अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती सोनल ढालेन्द्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। एल-2 स्तर पर शिकायतों के उचित निराकरण नहीं होने पर विभाग द्वारा बेमेतरा संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री केशव प्रसाद लहरे, कोरबा संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री घासीराम जांगड़े, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर के कार्यपालन अभियंता श्री रोशन कुमार साहू, सारंगढ़ संभाग के कार्यपालन अभियंता श्री प्यारे लाल पैकरा और कांकेर संभाग की कार्यपालन अभियंता श्रीमती प्रज्ञा नंद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।  इसी प्रकार से सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों को एल-3 स्तर पर बिना सारगर्भित टीप के बंद किए जाने पर मंडल क्रमांक-2, रायपुर के अधीक्षण अभियंता श्री डी.के. नेताम, दुर्ग मंडल की अधीक्षण अभियंता श्रीमती अर्पणा चौरपगार तथा राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल बिलासपुर के अधीक्षण अभियंता श्री महादेव लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। राज्य शासन ने इन अधिकारियों को जारी कारण बताओ नोटिस में कहा है कि शिकायत बंद करते समय यह अपेक्षित है कि टीप में स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष, की गई या प्रस्तावित कार्यवाही, उसकी तिथि या समय-सीमा एवं शिकायतकर्ता को दी गई सूचना का स्पष्ट उल्लेख हो। यदि शिकायत अन्य विभाग से संबंधित हो तो उसका कारण सहित उल्लेख हो। ऐसा नहीं पाए जाने पर टीप से नागरिकों की समस्या का निराकरण नहीं हुआ तथा पोर्टल पर निराकरण के आँकड़े भ्रामक हुए।  लोक निर्माण विभाग ने इसे कर्त्तव्य पालन में लापरवाही और पदीय कर्त्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया जाना मानते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों को अपना लिखित प्रतिवाद नोटिस मिलने के 15 दिनों की समयावधि में लोक निर्माण विभाग के सचिव को प्रस्तुत करने कहा गया है। लिखित प्रतिवाद निर्धारित समयावधि में प्राप्त नहीं होने पर अधिकारियों के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान: बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर नहीं रखा जा सकता

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट के इस्तेमाल को हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार बताया है. कोर्ट ने कहा है कि यह अधिकार बच्चों को भी हासिल है. उन्हें इससे पूरी तरह वंचित करना गलत होगा. बेंच ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं. बच्चों को दोनों का अधिकार है।  सोशल मीडिया और दूसरी ऑनलाइन सेवाओं पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर चिंता जताने वाली एक याचिका पर आदेश देते हुए कोर्ट ने यह बातें कहीं हैं. जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने इस तरह की सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने की व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया है।  इंटरनेट का इस्तेमाल भी मौलिक अधिकार फैसले में जजों ने माना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत इंटरनेट का इस्तेमाल भी एक मौलिक अधिकार है. बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना उनकी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं हो सकता. इंटरनेट पर बच्चों के लिए कई खतरे हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की नाकामी है. इसे लेकर कदम उठाए जाने चाहिए।  सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अगर बच्चों के इंटरनेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया तो इसके बुरे परिणाम हो सकते हैं. प्रतिबंध के बावजूद बच्चे इंटरनेट इस्तेमाल कर सकते हैं और ऐसे अनियंत्रित प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं, जहां उनके लिए खतरा ज्यादा हो. प्रतिबंध के चलते बच्चे ऑनलाइन धमकी या शोषण के बारे में माता-पिता या भरोसेमंद लोगों को बताने से भी डर सकते हैं।  बेंच ने कहा कि इंटरनेट विचारों, रचनात्मक अभिव्यक्ति और जानकारी का बड़ा माध्यम है. दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कई बच्चों के लिए यह सीखने और जानकारी हासिल करने का एकमात्र साधन हो सकता है. विशेष जरूरतों वाले बच्चों को भी इंटरनेट के जरिए अपने जैसे दूसरे लोगों से जुड़ने का अवसर मिलता है।  शिकायत पर 24 घंटे में देना होगा रेफरेंस नंबर सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी वेबसाइट और ऐप पर शिकायत अधिकारी की जानकारी और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों के लिए अलग शिकायत विकल्प देना होगा। हर शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर रेफरेंस नंबर देना होगा। प्रशिक्षित अधिकारी शिकायत की जांच करेंगे और फैसले के साथ उसका कारण भी बताएंगे। कोर्ट ने केंद्र से आईटी नियमों में जरूरी बदलाव करने को कहा है। नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर जुर्माने पर विचार कोर्ट ने आईटी कानून और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने की व्यवस्था पर विचार करने को कहा है। जुर्माना तय करते समय उल्लंघन की गंभीरता, अवधि, बार-बार हुई चूक और कंपनी के आकार और कारोबार को ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया है। पेड और सब्सक्रिप्शन वाली सेवाओं की भी जांच होगी, ताकि इनके जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट न फैलाया जाए। सरकार से ऐसी सामग्री से हुई कमाई जब्त करने के विकल्प पर भी विचार करने को कहा गया है। स्कूली पढ़ाई में शामिल होगी ऑनलाइन सुरक्षा कोर्ट ने बच्चों को ऑनलाइन खतरे पहचानना, निजी जानकारी सुरक्षित रखना और गलत व्यवहार की शिकायत करना सिखाने पर जोर दिया है। उम्र के हिसाब से सहमति, सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श और ऑनलाइन शोषण जैसे विषय पढ़ाए जाने चाहिए। NCERT और राज्य शैक्षिक संस्थाओं को विशेषज्ञों की मदद से पढ़ाई की सामग्री तैयार करने को कहा गया है। डिजिटल सुरक्षा और उम्र के अनुसार यौन शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र सरकार को 10 दिसंबर तक देनी होगी रिपोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश लागू करने के लिए जरूरी दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं तैयार करनी होंगी। जरूरत के मुताबिक आईटी कानून और नियमों में बदलाव भी करने होंगे। सरकार को हलफनामा देकर निर्देशों पर हुई प्रगति की जानकारी देनी है। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को होगी। डेटाबेस में असली फोटो-वीडियो नहीं, उनकी डिजिटल पहचान होगी जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने निर्देश दिया कि डेटाबेस में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े प्रमाणित कंटेंट की डिजिटल पहचान यानी हैश और उन वेबसाइटों के लिंक रखे जाएंगे, जहां यह सामग्री मौजूद है। इसे मौजूदा सहयोग पोर्टल पर या अलग से बनाया जा सकता है।     तीन विशेषज्ञ करेंगे जांच: किसी सामग्री को डेटाबेस में दर्ज करने से पहले उसकी जांच होगी। कम से कम तीन प्रशिक्षित विशेषज्ञ स्वतंत्र रूप से तय करेंगे कि वह बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी है या नहीं। शुरुआती जांच में सॉफ्टवेयर की मदद ली जा सकती है।     गलत जानकारी हटाने की व्यवस्था: जांच का रिकॉर्ड रखा जाएगा। डेटाबेस तक किसने पहुंच बनाई, इसकी जानकारी भी दर्ज होगी और समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट किया जाएगा। गलत तरीके से दर्ज सामग्री को हटाने और इसकी शिकायत करने की व्यवस्था भी बनानी होगी।     एक प्लेटफॉर्म से हटाया कंटेंट दूसरे पर भी पहचाना जाएगा: सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री का मिलान डेटाबेस से कर सकेंगी। इससे वही कंटेंट दोबारा अपलोड होने पर भी पहचाना जा सकेगा। कंटेंट हटाने के बाद कंपनियां पुलिस को रिपोर्ट करेंगी कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU), स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को देनी होगी। इसके लिए तीन स्थितियों में अलग समयसीमा तय की गई है।     कंपनी को अपनी जांच में कंटेंट मिले: अज्ञात स्रोत का ऐसा कंटेंट हटाने पर दो घंटे के भीतर रिपोर्ट देनी होगी।     शिकायत के बाद कंटेंट हटाया जाए: शिकायत का निपटारा होने के तुरंत बाद रिपोर्ट देनी होगी। किसी भी स्थिति में इसमें दो घंटे से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए।     डेटाबेस से मिलान होने पर कंटेंट हटे: राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज सामग्री से मिलान के कारण हटाए गए कंटेंट की जानकारी संबंधित प्राधिकरण को हर सप्ताह एक साथ देनी होगी। कोर्ट ने 2020 और 2025 के फैसले का किया जिक्र इस फैसले में कोर्ट ने 2020 के 'अनुराधा भसीन' और 2025 के 'प्रज्ञा प्रसून' फैसलों का भी ज़िक्र किया है. कोर्ट ने कहा कि इन फैसलों में इंटरनेट के इस्तेमाल से अभिव्यक्ति की आजादी और डिजिटल … Read more