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UP Politics: ब्रजेश पाठक ने सपा-कांग्रेस से पूछा ‘बाबरी मस्जिद चंदे का हिसाब’, सियासत गरमाई

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राम मंदिर चंदा मामले से जुड़ा विवाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की एक साजिश का हिस्सा है. उन्होंने सवाल किया कि बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा किए गए चंदे का क्या हुआ, इस पर किसी ने सवाल क्यों नहीं उठाया।  ब्रजेश पाठक ने कहा, 'बाबरी मस्जिद के लिए भी चंदा इकट्ठा किया गया था. कोई नहीं पूछ रहा है कि उस पैसे का क्या हुआ. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति कर रही हैं और मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए सनातन धर्म पर हमला कर रही हैं।  उनके ये बयान अयोध्या पुलिस द्वारा राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में FIR दर्ज करने के एक दिन बाद आए हैं. यह FIR एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की सिफारिशों के आधार पर दर्ज की गई थी, जिसके बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।  विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों को बचाया जा रहा है।  विपक्ष के इस आरोप पर कि केवल जूनियर कर्मचारियों पर केस दर्ज किया गया है, पाठक ने कहा कि पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी और BJP सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाती है।  न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ब्रजेश पाठक ने कहा कि पत्रकारों को विपक्षी नेताओं से बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा किए गए फंड के बारे में सवाल पूछना चाहिए और आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तुष्टिकरण की राजनीति कर रही हैं।  उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीमावर्ती जिलों में चल रहे अवैध मदरसों को टेरर फंडिंग मिल रही थी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ऐसे संस्थानों की जांच की, अवैध गतिविधियों को बंद कराया और जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा। 

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: ‘दूध का दूध, पानी का पानी होगा’, CM योगी ने SIT रिपोर्ट पर दिया बड़ा बयान

देवरिया पिछले कुछ दिनों से राम मंदिर चंदा चोरी का मामला सुर्खियों में है. कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और एसआईटी जांच जारी है. इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि रामभक्तों की अग्निपरीक्षा मत न ली जाए, अगर सबूत है, तो एसआईटो को सबूत दिया जाए. अयोध्या हमारी आस्था का प्रतीक है।  यूपी के देवरिया में जनता को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, "एसआईटी की रिपोर्ट आते ही एक्शन लिया गया. दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा. आरोप लगाने वालों की मंशा ठीक नहीं है।  मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की कामयाबियों का जिक्र करते हुए कहा, "हमें इस बात को ध्यान रखना होगा, जितनी अच्छी कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, विकास उतनी ही तेज गति के साथ आगे बढ़ेगा. विकास के लिए चाहिए कि अच्छी रोड हो, रेल की बेहतरीन व्यवस्था हो, स्किल मेनपॉवर हो और जल संसाधन हो, तो दुनिया की ताकत बनने में देर नहीं लगेगी।  'जो खिलवाड़ करेगा…' सीएम योगी ने कहा, "जनआस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं है. सनातन के साथ जो भी खिलवाड़ करेगा उसका भुक्तभोगी होगा. किसी को छूट नहीं दी जा सकती. ये जो लोग आज आक्षेप कर रहे हैं, उठाने का कुंठित प्रयास कर रहे हैं, इनकी मंशा अच्छी नहीं है. ये वे लोग हैं, जो भगवान राम को नकार चुके थे. भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा कर चुके थे. एक पक्ष उसमें है, जो कहता था कि राम हुए ही नहीं, यानी अयोध्या को भी ये नकारना चाहते थे।  उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या के बारे में हमने कहा था SIT गठित की गई है. SIT की रिपोर्ट आने के साथ ही हमारी कारवाई भी शुरू हो जाएगी और आपने देखा होगा कि SIT की रिपोर्ट आयी, तुरंत कार्रवाई शुरू हो गई. जन आस्था के साथ जो खिलवाड़ करेगा, उसके साथ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करेंगे।  'बड़ी-बड़ी चट्टानों को पलटने की ताकत… सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे पास सब कुछ मौजूद है, दुनिया के अंदर सबसे युवा ताकत किसी के पास है, तो उत्तर प्रदेश के पास है. हमारी युवा शक्ति प्रतिभावान और ऊर्जावान है. हम बड़ी-बड़ी चट्टानों को पलटने की ताकत रखते हैं और यूपी के विकास के लिए कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का काम करते हैं।  उन्होंने आगे कहा कि हम युवाओं को रोजगार देने का काम कर रहे हैं, हमने 9 लाख नौजवानों को नौकरी दी है. सुरक्षा का बेहतरीन माहौल पैदा करते हुए, जीरो टॉलरेंस नीति लागू की गई है।  'सुरक्षा और विश्वास का वातावरण…' योगी आदित्यनाथ ने कहा, "प्रदेश को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने माफियाग्रस्त बना दिया था. मुझे याद है 2016 में यहीं मदनपुर थाने में कैसे असलहे लूट ले गए थे और एक थाने को आग लगा दी गई थी. आज मुहर्रम है, कहीं किसी का पता नहीं है. कोई अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन नहीं कर सकता है. कोई सड़कों पर गुंडागर्दी नहीं कर सकता है. उत्सवपूर्ण माहौल में कोई उपद्रव नहीं कर सकता है, और अगर करेगा तो सात पीढ़ियों तक भुगतेगा. यह सुरक्षा और विश्वास का वातावरण बनाया है।  उन्होंने आगे कहा कि देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर में निवेश आ रहे हैं, उद्यम लग रहे हैं. हमारे नौजवानों को नौकरी मिल रही है, रोजगार मिल रहे हैं. युवा अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का लाभ अपने क्षेत्र को दे रहा है। 

विधानसभा चुनाव से पहले यूपी भाजपा में बड़ा फेरबदल, नई कार्यकारिणी में कई नए चेहरे शामिल

 लखनऊ  विधानसभा चुनाव से पहले कील कांटे दुरुस्त करने में जुटी भाजपा ने बड़े बदलावों के साथ प्रदेश इकाई घोषित कर दी है। चुनावी वर्ष को देखते हुए पिछली बार की तुलना में इस बार 64 सदस्यीय बड़ी टीम बनाई गई है। आठ महामंत्री, 19 उपाध्यक्ष, 19 मंत्री, छह क्षेत्रीय अध्यक्ष व छह मोर्चों के अध्यक्ष बनाए गए हैं। कई दिग्गजों सहित आधे पदाधिकारियों को संगठन से मुक्त कर नए चेहरों पर भरोसा किया गया है। जातीय समीकरणों का ध्यान देते हुए पिछड़े और अनुसूचित समाज को विशेष वरीयता दी गई है। छह में चार क्षेत्रीय अध्यक्ष ओबीसी समाज से हैं। महामंत्रियों की संख्या सात से बढ़ाकर आठ की गई है, वहीं 16 की जगह अब 19 उपाध्यक्ष होंगे। कई नए और चौंकाने वाले नाम शामिल किए गए हैं। पूर्व मंत्री सुरेश राणा और नवाब सिंह नागर को भी संगठन में बड़ा दायित्व दिया गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह की जगह नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर उन्हें राजनीतिक पारी शुरू करने का अवसर दिया गया। भाजपा ने इसमें क्षेत्रीय से ज्यादा जातीय संतुलन पर फोकस किया है। जातीय समीकरणों के पैमाने पर देखें तो 27 सामान्य चेहरों में 12 ब्राह्मण, सात क्षत्रिय, चार भूमिहार, दो वैश्य व एक-एक कायस्थ और त्यागी हैं। किस वर्ग को मिला कितना अवसर? समाज में सबसे बड़ा करीब 55 प्रतिशत समूह ओबीसी का माना जाता है, जिनको सबसे ज्यादा 29 पदों पर भागीदारी दी गई है। इसमें सर्वाधिक तीन जाट, दो-दो यादव, कुर्मी, पाल, गुर्जर व लोधी को स्थान दिया गया है। साथ ही एक-एक पद पर कुशवाहा, मौर्य, बिंद, शिवहरे, विश्वकर्मा, निषाद, गिरी, राजभर, सैंथवार, सैनी, चौरसिया, तेली, कलार व लोनिया चौहान को अवसर दिया गया है। अनुसूचित वर्ग में पासी को सबसे ज्यादा तीन पद दिए गए हैं, जबकि कोरी, वाल्मीकि, जाटव व एसटी के रूप में गोंड को भी अवसर दिया गया है। वहीं, 64 में 13 पदों पर महिलाओं को दायित्व दिया गया है, जो पार्टी के संकल्प 33 प्रतिशत की तुलना में कमतर प्रतिनिधित्व है। यूजीसी नियमों से उपजे आक्रोश से लेकर कई अन्य विषयों पर ब्राह्मणों में असंतोष उभरा था, जिसको साधने के लिए प्रदेश इकाई में उन्हें विशेष वरीयता दी गई है। अभिजात मिश्रा को जहां महामंत्री बनाया गया, वहीं बृज बहादुर, अर्चना मिश्रा, शंकर गिरी, अंकुर शर्मा, यतेंद्र शर्मा, रजनी पांडे के अलावा अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में अवधेश द्विवेदी को अवसर दिया गया, वहीं कार्यालय मंत्री व सह मंत्री और अन्य भूमिकाओं में कई ब्राह्मणों को समायोजित किया गया। आठ से तीन महामंत्री अभिजात, उपेंद्र रावत व शंकर लोधी अवध क्षेत्र के हैं, जबकि पश्चिम क्षेत्र से कोई चेहरा महामंत्री नहीं बनाया गया। धार्मिक व राजनीतिक केंद्र के रूप में उभरे ब्रज क्षेत्र से रामप्रताप सिंह व राजेश चौधरी को महामंत्री बनाने के साथ ही सबसे ज्यादा नौ पदाधिकारियों को स्थान दिया गया है। पश्चिम क्षेत्र से दिग्गज क्षत्रिय चेहरा सुरेश राणा को हरियाणा व बंगाल चुनाव में बेहतर जिम्मेदारी निभाने का फायदा मिला और उनकी उपाध्यक्ष पद पर लंबे समय बाद वापसी हुई। दिल्ली आइआइटी से पढ़े लिखे और पश्चिम क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल को युवा जाट नेता के रूप में दोबारा उपाध्यक्ष बनाया गया है। प्रदेश संगठन में लंबे समय तक पदाधिकारी व कई जिलों में चुनावी जमीन बनाने में भूमिका निभाने वाले मेरठ के जाट चेहरे देवेंद्र सिंह को किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया गया है। सत्यपाल सैनी के रूप में पश्चिम में बड़े जातीय समूह में संदेश देने का प्रयास किया गया है। मथुरा में मांट के विधायक जाट चेहरा राजेश चौधरी को प्रदेश महामंत्री जैसा अहम पद दिया गया है। जाट समाज को गुर्जरों से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला। पिछली टीम में सुरेंद्र नागर के रूप में गुर्जर चेहरे को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय मंत्री बना दिया गया। इस बार महामेधा नागर को मंत्री बनाया गया है। हालांकि, पश्चिम क्षेत्र की कमान नवाब सिंह नागर को देकर पार्टी ने बड़ा दांव चला है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह के मिलनसार व्यवहार व उनकी जमीनी पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उपाध्यक्ष बनाया है। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के छह माह बाद गठित हुई कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दिसंबर में कार्यभार संभाला। तब से ही नई प्रदेश इकाई बनाने की चर्चा चल पड़ी, लेकिन संगठन छह माह बाद ही बन सका। प्रदेश इकाई में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल, सुभाष यदुवंश, अनूप गुप्ता, अमरपाल मौर्य, त्रियंबक त्रिपाठी, अंजुला महौर, विजय बहादुर पाठक, संतोष सिंह, कांता कर्दम, डा.चंद्रमोहन, सुनीता दयाल, सलिल विश्नोई, मीना चौबे समेत दर्जनभर नामों को स्थान नहीं मिला। रदेश उपाध्यक्ष के रूप में सुरेश राणा, सत्यपाल सैनी, ब्रज बहादुर, डा.धर्मेंद्र सिंह, मोहित बेनीवाल, देवेश कोरी, प्रियंका रावत, दुर्विजय शाक्य, रमेश सिंह, नीरज सिंह, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल, शंकर गिरी, कामेश्वर सिंह, डा.कृतिका अग्रवाल, सुरेश मौर्य, राजेश यादव, कृष्ण बिहारी राय और आलोक गुप्ता को अवसर दिया गया है। मंत्री पद के लिए विजय शिवहरे, बसंत त्यागी, शिवभूषण सिंह, सहजानंद राय, अंकुर शर्मा, अनिल यादव, अवधेश श्रीवास्तव, विजय राजभर, प्रमेन्द्र जांगड़ा, किरण लोधी निषाद, राकेश बिंद मंत्री, संचिता सिंह चौहान (लुनिया), रजनी पांडेय, राहुल वाल्मीकि, महामेधा नागर दीपमाला संतोषी, सुहासिनी जायसवाल, यतेंद्र शर्मा व आकांक्षा सोनकर के नाम पर मुहर लगी है। भारत दीक्षित कार्यालय मंत्री व अतुल अवस्थी व लक्ष्मण सिंह कार्यालय सह-मंत्री होंगे। दिनेश प्रताप सिंह मुख्य प्रवक्ता बनाए गए हैं, जबकि मनीष दीक्षित प्रदेश मीडिया संयोजक बने रहेंगे। हिमांशु राज पंडित को प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है। सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष बदले कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल को पिछड़ा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उनकी जगह क्षेत्रीय महामंत्री रहे रामकिशोर साहू को क्षेत्रीय अध्यक्ष की कमान दी गई। ब्रज के क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्गविजय शाक्य को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, उनकी जगह बरेली के पूर्व जिलाध्यक्ष पूरण लाल लोधी क्षेत्रीय अध्यक्ष होंगे। पश्चिम के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेंद्र शिशौदिया किसी इकाई में जगह नहीं बना सके। उनकी जगह गुर्जर चेहरा व दो बार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे नवाब सिंह नागर क्षेत्रीय अध्यक्ष बने हैं। अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलेश मिश्र प्रदेश इकाई से लेकर … Read more

Mysaa: रश्मिका मंदाना की फिल्म से निधि सिंह का फर्स्ट लुक आया सामने, कैरेक्टर पोस्टर वायरल

मुंबई  पैन-इंडिया स्टार रश्मिका मंदाना की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मैसा' से अभिनेत्री निधि सिंह का नया कैरेक्टर पोस्टर रिलीज किया गया है। मेकर्स ने निधि सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनका यह पोस्टर रिलीज करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।पोस्टर में निधि सिंह का गुस्से से भरा और निडर अंदाज नजर आ रहा है। पोस्टर साझा करते हुए मेकर्स ने लिखा, "हर आत्मा का जन्म कोमल होने के लिए नहीं होता। कुछ का निर्माण संघर्षों को सहने के लिए किया जाता है। टीम #मैसा की तरफ से बेहद प्रतिभाशाली निधि सिंह को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं। शूटिंग जारी है। इस 2026 में सिनेमाघरों में।" 'मैसा' में रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में उनका अब तक का सबसे अलग और दमदार अवतार देखने को मिलेगा। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों के बीच खासा उत्साह है। अनफॉर्मूला फिल्म्स के बैनर तले निर्मित और रवींद्र पुल्ले के निर्देशन में बन रही 'मैसा' आदिवासी क्षेत्रों की पृष्ठभूमि पर आधारित एक इमोशनल एक्शन थ्रिलर फिल्म है। फिल्म की शूटिंग जारी है और इसके वर्ष 2026 में सिनेमाघरों में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने की संभावना है।

MP Transco की बड़ी राहत: पेंशनर्स और कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ्य योजना से जुड़ने का फिर मिला मौका

भोपाल मध्यप्रदेश शासन के उपक्रम म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा संचालित अंशदायी कैशलेस स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत अब तक शामिल होने से वंचित रह गए कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों को योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए एक और अवसर प्रदान किया गया है। एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता मानव संसाधन एवं प्रशासन श्री धीरेंद्र सिंह ने बताया कि पात्र कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों से 25 जून से 20 जुलाई 2026 तक पुनः आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से स्वीकार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि जो पात्र हितग्राही वर्तमान में योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं और अब इसमें शामिल होना चाहते हैं, उन्हें योजना के प्रारंभ होने की तिथि से अब तक देय सभी अंशदान किस्तों का भुगतान एकमुश्त करना होगा। योजना के अन्य सभी नियम एवं शर्तें यथावत रहेंगी। एमपी ट्रांसको प्रबंधन ने पात्र कार्मिकों, पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों से निर्धारित अवधि में आवेदन प्रस्तुत कर इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का लाभ लेने का आग्रह किया है।  

श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद बैठक, 12 प्रस्तावों पर लगी मुहर

कुरुक्षेत्र  श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में शुक्रवार को कुलपति प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान की अध्यक्षता में अकादमिक परिषद (एकेडमिक काउंसिल) की 10वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में कुलसचिव डा. कृष्ण कांत गुप्ता ने परिषद के समक्ष 12 प्वाइंट रखे, जिन पर विस्तार से चर्चा के बाद बहुमत से पास कर दिए गए। बैठक में पिछली बैठक की कार्रवाई की पुष्टि, एक्शन टेकन रिपोर्ट, गृहिणियों के लिए तीन माह के स्वास्थ्य एवं योग पाठ्यक्रम को अनुमोदन दिया गया। वहीं बेचलर इन नेचुरोपैथी एंड योग एवं डिप्लोमा इन नेचुरोपैथी एंड योग के पाठ्यक्रम तैयार करके उन्हें हरियाणा सरकार के पास भेजकर कालेजों में शुरू करने बारे भी चर्चा हुई। वहीं बीएससी इन योगा को अगले वर्ष आयुर्वेदिक अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान में आरंभ करने का अनुमोदन भी दिया गया। बीएएमएस के नए परीक्षा पैटर्न, डी-फार्मेसी (आयुर्वेद) एवं पंचकर्म सहायक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के संशोधित सिलेबस को शुरू करने बारे अनुमोदन दी गई। बोर्ड आफ होम्योपैथी के डायरेक्टर की डिमांड पर हरियाणा में होम्योपैथिक फार्मेसी डिप्लोमा के पाठ्यक्रम एवं मानकों का मसौदा तैयार किया जाएगा इस प्वाइंट को भी सरकार के पास अनुमति के लिए भेजा जाएगा। विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए एमओयू, विश्वविद्यालय के कुलगीत, संशोधित विजन और मिशन सहित अन्य प्रस्तावों पर विचार-विमर्श कर उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रशासनिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। बीएससी इन योग जल्द शुरू होगा विश्वविद्यालय में कुलपति प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि विश्वविद्यालय के स्वस्थवृत्त विभाग की ओर से गृहिणियों के लिए तीन माह का स्वास्थ्य एवं योग पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। प्रतिदिन दो घंटे की कक्षाओं के माध्यम से गृहिणियों को आयुर्वेद, संतुलित आहार-विहार, योग एवं स्वस्थ जीवनशैली की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आयुष विभाग, हरियाणा की मांग पर प्राकृतिक चिकित्सा का नया पाठ्यक्रम भी तैयार किया जा रहा है और विश्वविद्यालय में जल्द ही बीएससी इन योग पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया जाएगा।  शिक्षक परिषद के समक्ष रखें सुझाव, आयोग को भेजेंगे : कुलपति कुलपति ने कहा कि बीएएमएस का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआइएसएम) द्वारा निर्धारित किया जाता है, लेकिन यदि शिक्षकों को उसमें किसी प्रकार के सुधार की आवश्यकता महसूस होती है तो वे अपने सुझाव अकादमिक परिषद के समक्ष रखें, ताकि उन्हें संबंधित आयोग तक भेजा जा सके। उन्होंने बताया कि डी-फार्मेसी (आयुर्वेद) के पाठ्यक्रम में भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं, जिन्हें स्वीकृति मिलने के बाद लागू किया जाएगा। इसके अलावा बोर्ड आफ होम्योपैथी द्वारा प्रस्तावित होम्योपैथिक फार्मेसी डिप्लोमा के पाठ्यक्रम एवं मानकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जिसे अंतिम रूप देकर सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) की भी समीक्षा की गई। कुलपति ने कहा कि इन एमओयू के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव के बेहतर अवसर उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को नई दिशा मिल रही है। परिषद की बैठक में डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर रणधीर सिंह, प्रोफेसर आशीष मेहता, परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर हेतल दावे, हरियाणा के राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य कुवि के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुखबीर लाल, प्रोफेसर जितेश पंडा, उप कुलसचिव अतुल गोयल, प्रोफेसर सतीश वत्स, प्रोफेसर आशु, प्रोफेसर अमित कटारिया, प्रोफेसर रविराज मौजूद रहे।

एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी प्रमाणपत्रों पर कार्रवाई के आदेश, मतदाता सूची सुधार पर जोर

 रांची राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर को लेकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश सभी जिलों के उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एसआइआर की प्रक्रिया में कई प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता मतदाताओं को हो सकती है। पाकुड़ एवं गढ़वा जिले में ऐसे मामलों की सूचना विभिन्न माध्यमों से आई है। इसलिए ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध कानून की संगत धाराओं के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी कहा है कि एसआइआर के दौरान जितने भी दस्तावेज जमा किए जाएंगे, उनका सत्यापन का दायित्व जिला निर्वाचन पदाधिकारी का है। इसलिए एसआइआर के लिए कोई भी नागरिक फर्जी अनधिकृत दस्तावेज न बनवाए और न ही ऐसा प्रयास किसी के द्वारा किया जाए। उन्होंने इसका पूर्णरूप से प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यमों से करने को कहा है। साथ ही ऐसे मामलों में उपायुक्तों को पूर्ण सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने राजनीतिक दलों से की सहयोग की अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर उत्पन्न होनेवाली शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई विभिन्न पृच्छाओं और शंकाओं का समाधान पीपीटी के माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि एसआइआर का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर की चरणबद्ध विस्तृत कार्ययोजना और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश को साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण एवं मुद्रण का कार्य 29 जून तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 30 जून से 29 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर भ्रमण कर गणना प्रपत्र भरने का का कार्य किया जाएगा। मतदान केंद्रों का युक्तीकरण 29 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पांच अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन होगा, जिस पर चार सितंबर तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। दावों और आपत्तियों के निष्पादन के बाद सात अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। उनके अनुसार, 30 जून से शुरू होने वाले गणना चरण के दौरान बीएलओ अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर नागरिकों को आंशिक रूप से पहले से भरा हुआ गणना प्रपत्र दो प्रतियों में वितरित करेंगे। यदि कोई घर बंद मिलता है, तो बीएलओ को प्रपत्र इकट्ठा करने के लिए कम से कम तीन बार जाना होगा। इस चरण के शुरुआती दिनों में मतदान केंद्रों पर कोई कैंप नहीं लगेगा, बल्कि यह सेवा पूरी तरह घर-घर जाकर दी जाएगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि मतदाताओं से दस्तावेजों की आवश्यकता को कम करने के लिए ''सेल्फ'' या ''पैरेंटल'' मैपिंग की जा रही है। यदि किसी मतदाता का नाम पिछले एसआइआर रोल में दर्ज है, तो उसे किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और सिविल व सैन्य क्षेत्र के सभी वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान पहले से कर प्राथमिकता के आधार पर उनकी गणना की जाएगी। मैपिंग के दौरान सामने आने वाली 15 प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए बीएलओ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

ग्रामीण विकास को मिलेगी रफ्तार: जिला परिषद अध्यक्ष ने कई योजनाओं की रखी आधारशिला

खरसावां झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने शुक्रवार को अलग-अलग पंचायतों में करीब 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाली विकास योजनाओं का शिलान्यास किया. इस दौरान उनके साथ जिला परिषद सदस्य काली चरण बानरा और सावित्री बानरा भी मौजूद रहे. जनप्रतिनिधियों ने शिलापट्ट का अनावरण और नारियल फोड़कर योजनाओं की शुरुआत की. इन योजनाओं की हुई शुरुआत शिलान्यास के तहत लाखनडीह और बाडामशाल में जलमीनार, मोहनबेड़ा और छोटा आमदा में पीसीसी सड़क, तेलाईडीह और सिंगाडीह में नहाने के घाट और पदमपुर में नाली निर्माण काम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और विकास कार्यों के लिए जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया. इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार उनकी प्राथमिकता है. पेयजल, सड़क, जल निकासी एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि सभी विकास कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराया जाएगा जिससे कि ग्रामीणों को इसका सीधा फायदा मिल सके. समय पर कार्य पूरा नहीं करने वाले संवेदकों पर होगी कार्रवाई : सोनाराम बोदरा सोनाराम बोदरा ने स्पष्ट कहा कि विकास योजनाओं को पूरा करने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि सभी संवेदकों (ठेकेदारों) को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूरा करना होगा. समय पर काम पूरा नहीं करने वाले संवेदकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को भी योजनाओं की नियमित निगरानी करने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनी और संबंधित अधिकारियों को जरूरी पहल करने का निर्देश देने की बात कही. मौके पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे.

High Court Verdict: प्रोजेक्ट बंद होने पर संविदा वैज्ञानिक को नहीं मिली राहत, सेवा बहाली की याचिका खारिज

चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब स्टेट काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलॉजी में कार्यरत संविदा वैज्ञानिक दिव्या कौशिक को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी  अपील   खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस परियोजना के लिए उनकी नियुक्ति की गई थी, वह 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है और ऐसी स्थिति में संविदा सेवा को जारी रखने का कोई आधार नहीं बनता। जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने यह फैसला उस अपील पर सुनाया, जिसमें एकल पीठ द्वारा पारित 23 मार्च और 6 अप्रैल 2026 के अंतरिम आदेशों को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि मूल  याचिका अभी भी एकल पीठ के समक्ष लंबित है और अपील केवल अंतरिम आदेशों के खिलाफ दायर की गई है, इसलिए हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। 2011 में जॉइन की थी सेवा याचिकाकर्ता दिव्या कौशिक की ओर से कहा गया कि उन्हें वर्ष 2011 में पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर (पीआईसी) में वैज्ञानिक के पद पर संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था और समय-समय पर उनका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। उन्होंने  याचिका में उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके पद को समाप्त कर दिया गया था। एकल पीठ ने 16 जुलाई 2024 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में परिषद की ओर से दायर आवेदन पर एकल पीठ ने 23 मार्च 2026 को आदेश में संशोधन करते हुए कहा था कि यदि परियोजना 31 मार्च 2026 के बाद भी बढ़ाई जाती है तो यथास्थिति का आदेश जारी रहेगा, अन्यथा परिषद उस आदेश से बाध्य नहीं होगी। इस आदेश को वापस लेने की मांग भी 6 अप्रैल 2026 को खारिज कर दी गई थी। 5 वर्षों के लिए थी परियोजना सुनवाई के दौरान परिषद की ओर से अदालत को बताया गया कि 'पेटेंट इनफार्मेशन सेंटर' परियोजना पांच वर्ष की अवधि के लिए थी और यह 31 मार्च 2026 को पूरी हो चुकी है। इसलिए परियोजना के साथ सह-समाप्त (को-टर्मिनस) संविदा नियुक्ति भी स्वत  समाप्त हो गई। परिषद ने यह भी बताया कि नियुक्ति पत्र में स्पष्ट शर्त थी कि परियोजना की अवधि समाप्त होने पर अनुबंध समाप्त माना जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ द्वारा पारित आदेश न तो अवैध हैं और न ही उनमें किसी प्रकार की त्रुटि है। चूंकि परियोजना का विस्तार नहीं हुआ और वह पूर्ण हो चुकी है, इसलिए संविदा कर्मचारी की सेवा जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बचता। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने अपील खारिज कर दी

हरियाणा में HTET परीक्षा को लेकर तैयारी तेज, 4-5 जुलाई के एग्जाम से पहले अधिकारियों को सख्त आदेश

भिवानी. हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी द्वारा आगामी 4 व 5 जुलाई, 2026 को आयोजित होने वाली हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के सुव्यवस्थित व नकल विहीन संचालन हेतु बोर्ड मुख्यालय भिवानी पर जिला शिक्षा अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ ने की। धूपड़ ने बताया कि इस परीक्षा में प्रदेशभर में 2 लाख 33 हजार 294 अभ्यर्थी 383 परीक्षा केंद्रों पर प्रविष्ट होंगे। आगामी 4 जुलाई को सायंकालीन सत्र में लेवल-3 की परीक्षा होगी, जिसमें 73,091 अभ्यर्थी तथा 5 जुलाई को प्रातःकालीन सत्र में लेवल-2 की परीक्षा में 1, 19, 141 अभ्यर्थी एवं सायंकालीन सत्र में लैवल-1 की परीक्षा में 41,062 अभ्यर्थी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा के अभ्यर्थी वीरवार सायं से बोर्ड की आधिकारिक वैबसाइट के माध्यम से अपने आवंटित परीक्षा-शहर की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि परीक्षा हेतु प्रवेश-पत्र बाद में जारी किए जाएंगे। बोर्ड अध्यक्ष ने वीडियो कांफ्रैंस के माध्यम से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को संबोधित करते हुए एचटेट परीक्षा-2025 के सुसंचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। परीक्षा केंद्रों की निरीक्षण व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है। नकल व अन्य अनियमितताओं पर सख्ती से रोक लगाने के लिए प्रभावशाली उडनदस्तों की नियुक्ति की जा रही है। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर बोर्ड की ओर से एक-एक अधिकारी/कर्मचारी/प्रतिनिधि तथा जिला प्रशासन की ओर से भी एक-एक प्रशासनिक/राजपत्रित अधिकारी की नियुक्ति की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी 3 से 5 जुलाई तक कंट्रोल रूम स्थापित करेंगे उन्होंने कहा कि सभी जिला शिक्षा अधिकारी 3 से 5 जुलाई, 2026 तक अपने कार्यालय में एक-एक कंट्रोल रूम स्थापित करेंगे। इस कंट्रोल रूम पर जिला शिक्षा अधिकारी अपने कार्यालय के 1 अधिकारी, 2 सहायक/लिपिक तथा 1 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को नियुक्त करेंगे। कंट्रोल रूम पर नियुक्त अधिकारी बोर्ड मुख्यालय पर स्थापित कंट्रोल रूम से सीधा संपर्क बनाए रखेंगे। नेत्रहीन/अशक्त अभ्यर्थियों को 50 मिनट अतिरिक्त समय मिलेगी बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि नेत्रहीन/अशक्त अभ्यर्थियों को 20 मिनट प्रति घंटा के हिसाब से कुल 50 मिनट अतिरिक्त समय दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिला अभ्यर्थियों को मंगलसूत्र पहनने, बिंदी व सिंदूर लगाने की ही छूट होगी। अन्य किसी प्रकार के आभूषण जैसे अंगूठी, चैन, बालियां इत्यादि ले जाने की स्वीकृति नहीं होगी। सिख अभ्यर्थियों को धार्मिक आस्था के चिन्ह की अनुमति होगी। उन्होंने बताया कि सभी उड़नदस्ते / ऑब्जर्वर द्वारा समय-समय पर जैमर, बायोमैट्रिक डाटा कैप्चरिंग, वीडियोग्राफी, सी.सी.टी.वी. कैमरों को चैक करना अति आवश्यक है कि वह भलीभांति कार्य कर रहे हैं। बिना पहचान-पत्र प्रवेश नहीं उन्होंने बताया कि परीक्षा केंद्र में बिना पहचान-पत्र किसी भी अधिकारी/कर्मचारी का प्रवेश नहीं होगा। फर्म की ओर से नियुक्त कर्मचारी जैसे कैमरा-मैन, बायोमैट्रिक-मैन, सी.सी.टी.वी. इत्यादि के लिए भी फोटोयुक्त पहचान-पत्र पहनना अनिवार्य है। परीक्षा के दौरान यदि किसी परीक्षा केंद्र पर कोई अप्रिय घटना घटित होती है तो उसकी सूचना भी अविलंब बोर्ड मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष पर हैल्पलाइन नं 01664-254302, 254304, 254601, 254604 तथा व्हाट्सअप नबर 8816840349 पर दी जानी है।