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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान: बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर नहीं रखा जा सकता

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट के इस्तेमाल को हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार बताया है. कोर्ट ने कहा है कि यह अधिकार बच्चों को भी हासिल है. उन्हें इससे पूरी तरह वंचित करना गलत होगा. बेंच ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं. बच्चों को दोनों का अधिकार है।  सोशल मीडिया और दूसरी ऑनलाइन सेवाओं पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर चिंता जताने वाली एक याचिका पर आदेश देते हुए कोर्ट ने यह बातें कहीं हैं. जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने इस तरह की सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने की व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया है।  इंटरनेट का इस्तेमाल भी मौलिक अधिकार फैसले में जजों ने माना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत इंटरनेट का इस्तेमाल भी एक मौलिक अधिकार है. बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना उनकी सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का समाधान नहीं हो सकता. इंटरनेट पर बच्चों के लिए कई खतरे हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की नाकामी है. इसे लेकर कदम उठाए जाने चाहिए।  सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अगर बच्चों के इंटरनेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया तो इसके बुरे परिणाम हो सकते हैं. प्रतिबंध के बावजूद बच्चे इंटरनेट इस्तेमाल कर सकते हैं और ऐसे अनियंत्रित प्लेटफॉर्म पर जा सकते हैं, जहां उनके लिए खतरा ज्यादा हो. प्रतिबंध के चलते बच्चे ऑनलाइन धमकी या शोषण के बारे में माता-पिता या भरोसेमंद लोगों को बताने से भी डर सकते हैं।  बेंच ने कहा कि इंटरनेट विचारों, रचनात्मक अभिव्यक्ति और जानकारी का बड़ा माध्यम है. दूरदराज के इलाकों में रहने वाले कई बच्चों के लिए यह सीखने और जानकारी हासिल करने का एकमात्र साधन हो सकता है. विशेष जरूरतों वाले बच्चों को भी इंटरनेट के जरिए अपने जैसे दूसरे लोगों से जुड़ने का अवसर मिलता है।  शिकायत पर 24 घंटे में देना होगा रेफरेंस नंबर सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी वेबसाइट और ऐप पर शिकायत अधिकारी की जानकारी और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों के लिए अलग शिकायत विकल्प देना होगा। हर शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर रेफरेंस नंबर देना होगा। प्रशिक्षित अधिकारी शिकायत की जांच करेंगे और फैसले के साथ उसका कारण भी बताएंगे। कोर्ट ने केंद्र से आईटी नियमों में जरूरी बदलाव करने को कहा है। नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर जुर्माने पर विचार कोर्ट ने आईटी कानून और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने की व्यवस्था पर विचार करने को कहा है। जुर्माना तय करते समय उल्लंघन की गंभीरता, अवधि, बार-बार हुई चूक और कंपनी के आकार और कारोबार को ध्यान में रखने का सुझाव दिया गया है। पेड और सब्सक्रिप्शन वाली सेवाओं की भी जांच होगी, ताकि इनके जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट न फैलाया जाए। सरकार से ऐसी सामग्री से हुई कमाई जब्त करने के विकल्प पर भी विचार करने को कहा गया है। स्कूली पढ़ाई में शामिल होगी ऑनलाइन सुरक्षा कोर्ट ने बच्चों को ऑनलाइन खतरे पहचानना, निजी जानकारी सुरक्षित रखना और गलत व्यवहार की शिकायत करना सिखाने पर जोर दिया है। उम्र के हिसाब से सहमति, सुरक्षित-असुरक्षित स्पर्श और ऑनलाइन शोषण जैसे विषय पढ़ाए जाने चाहिए। NCERT और राज्य शैक्षिक संस्थाओं को विशेषज्ञों की मदद से पढ़ाई की सामग्री तैयार करने को कहा गया है। डिजिटल सुरक्षा और उम्र के अनुसार यौन शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र सरकार को 10 दिसंबर तक देनी होगी रिपोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश लागू करने के लिए जरूरी दिशानिर्देश और प्रक्रियाएं तैयार करनी होंगी। जरूरत के मुताबिक आईटी कानून और नियमों में बदलाव भी करने होंगे। सरकार को हलफनामा देकर निर्देशों पर हुई प्रगति की जानकारी देनी है। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को होगी। डेटाबेस में असली फोटो-वीडियो नहीं, उनकी डिजिटल पहचान होगी जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने निर्देश दिया कि डेटाबेस में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े प्रमाणित कंटेंट की डिजिटल पहचान यानी हैश और उन वेबसाइटों के लिंक रखे जाएंगे, जहां यह सामग्री मौजूद है। इसे मौजूदा सहयोग पोर्टल पर या अलग से बनाया जा सकता है।     तीन विशेषज्ञ करेंगे जांच: किसी सामग्री को डेटाबेस में दर्ज करने से पहले उसकी जांच होगी। कम से कम तीन प्रशिक्षित विशेषज्ञ स्वतंत्र रूप से तय करेंगे कि वह बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी है या नहीं। शुरुआती जांच में सॉफ्टवेयर की मदद ली जा सकती है।     गलत जानकारी हटाने की व्यवस्था: जांच का रिकॉर्ड रखा जाएगा। डेटाबेस तक किसने पहुंच बनाई, इसकी जानकारी भी दर्ज होगी और समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट किया जाएगा। गलत तरीके से दर्ज सामग्री को हटाने और इसकी शिकायत करने की व्यवस्था भी बनानी होगी।     एक प्लेटफॉर्म से हटाया कंटेंट दूसरे पर भी पहचाना जाएगा: सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामग्री का मिलान डेटाबेस से कर सकेंगी। इससे वही कंटेंट दोबारा अपलोड होने पर भी पहचाना जा सकेगा। कंटेंट हटाने के बाद कंपनियां पुलिस को रिपोर्ट करेंगी कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU), स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को देनी होगी। इसके लिए तीन स्थितियों में अलग समयसीमा तय की गई है।     कंपनी को अपनी जांच में कंटेंट मिले: अज्ञात स्रोत का ऐसा कंटेंट हटाने पर दो घंटे के भीतर रिपोर्ट देनी होगी।     शिकायत के बाद कंटेंट हटाया जाए: शिकायत का निपटारा होने के तुरंत बाद रिपोर्ट देनी होगी। किसी भी स्थिति में इसमें दो घंटे से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए।     डेटाबेस से मिलान होने पर कंटेंट हटे: राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज सामग्री से मिलान के कारण हटाए गए कंटेंट की जानकारी संबंधित प्राधिकरण को हर सप्ताह एक साथ देनी होगी। कोर्ट ने 2020 और 2025 के फैसले का किया जिक्र इस फैसले में कोर्ट ने 2020 के 'अनुराधा भसीन' और 2025 के 'प्रज्ञा प्रसून' फैसलों का भी ज़िक्र किया है. कोर्ट ने कहा कि इन फैसलों में इंटरनेट के इस्तेमाल से अभिव्यक्ति की आजादी और डिजिटल … Read more

बस्तर के विकास पर अमित शाह का जोर, नक्सलवाद के बाद अब इन चुनौतियों पर रहेगा फोकस

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म हो गया है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर को लेकर नया प्लान बनाया है। अमित शाह ने कहा कि सरकार नक्सलवाद के शेष निशानों को खत्म करने और बस्तर को एक शांतिपूर्ण तथा समृद्ध क्षेत्र के रूप में बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ का आयोजन किया गया था। गुरुवार को दिव्यांग के लिए सहायक उपकरणों के वितरण समारोह को अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केवल नक्सलवाद के खत्म होने से “पांच दशकों की पीड़ा” नहीं मिटेगी। पीड़ा का दूर करना सरकार की जिम्मेदारी अमित शाह ने कहा नक्सलवाद को खत्म करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पांच दशकों में इसके कारण लोगों को जो पीड़ा झेलनी पड़ी है, उसे दूर करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। इसका सबसे अधिक असर क्षेत्र के गरीब आदिवासी समुदायों पर पड़ा है। शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने बस्तर के गरीब आदिवासी समुदायों को बहुत अधिक पीड़ा पहुंचाई है। उन्होंने कहा, “हमें इस पीड़ा से मिले घावों को भरना होगा, पीड़ितों को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने में मदद करनी होगी, और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे गरिमा और सम्मान के साथ जी सकें।” ‘नियाद नेल्लनार’ योजना के तहत बस्तर में बुनियादी ढांचे के विस्तार और जरूरी सेवाएं पहुंचाने के लिए काफी प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा, “बस्तर क्षेत्र के पारंपरिक आदिवासी नेतृत्व ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है।” पुनर्वास के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए नक्सलियों के पुनर्वास और प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि 7,328 ऐसे लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए जिनके पास खाते नहीं थे जबकि 1,620 लोगों को इनाम की राशि दी गई। उन्होंने कहा कि 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई, 455 लोगों को रोजगार मिला और 129 लोगों को जमीन आवंटित की गई। पीएम आवास का मिला लाभ इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4014 लाभार्थियों को घर मिले हैं, और 2308 से अधिक आदिवासी लोगों ने कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त किया है। 6,763 नए राशन कार्ड जारी किए गए हैं, 2,808 परिवारों को मुफ्त बिजली दी गई है, और 372 नयी सड़क परियोजनाओं पर काम शुरू हो गया है। 670 छोटे पुलों का निर्माण कार्य चल रहा है, 48,526 लोगों को आधार कार्ड जारी किए गए हैं, और 44 ग्राम पंचायतों को ‘इलवाड पंचायत पुरस्कार’ के तहत मान्यता दी गई है। सुरक्षा शिविरों को बदला जा रहा है गृह मंत्री ने बताया कि 500 ​​से अधिक सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 200 से ज्यादा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ में बदल दिया जाएगा। जिन स्थानों पर कभी हमारे सुरक्षाकर्मी आपकी रक्षा के लिए बैठते थे, अब वहीं भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारी विकसित बस्तर की नींव रखेंगे। ये सार्वजनिक सेवा केंद्र सरकार को विकसित बस्तर के अपने दृष्टिकोण को साकार करने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों से बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी जरूरतों, युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों तथा आदिवासी समुदायों की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

चोट के बाद नीरज चोपड़ा ने दिया बड़ा अपडेट, 2027 में वापसी को लेकर बताया पूरा प्लान

 नई दिल्ली भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने अपने कमबैक को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट नीरज ने बताया कि टखने की चोट से अब वह काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं और अगले साल यानी 2027 में दमदार वापसी करना चाहते हैं. उनका लक्ष्य अगले सीजन में फिर से अपने प्रदर्शन का स्तर ऊंचा करना है।  नीरज को अगस्त में ट्रेनिंग के दौरान टखने में लिगामेंट टियर (Ankle Ligament Tear) हुआ था. इस चोट के कारण उन्हें 2026 एशियन गेम्स और डायमंड लीग फाइनल से बाहर होना पड़ा. इससे पहले उन्होंने जुसाने डायमंड लीग में 88.05 मीटर का थ्रो किया था और दूसरे स्थान पर रहे थे।  मुंबई में 2026 ऑडी Q3 की लॉन्चिंग के दौरान नीरज ने अपनी रिकवरी पर बात की. उन्होंने कहा- बिल्कुल, ओलंपिक अभी कुछ समय दूर हैं, क्योंकि ये 2028 में होने हैं. जैसा कि आप जानते हैं, मुझे चोट लगी थी और अब मैं वापसी की तैयारी कर रहा हूं. मेरा चोटिल टखना अब काफी बेहतर महसूस कर रहा है और रिकवरी भी अच्छी चल रही है।  नीरज ने आगे कहा- फिलहाल मेरा मुख्य फोकस अगले साल दमदार वापसी करने और उन प्रदर्शनों को हासिल करने पर है, जो मैं अब तक नहीं कर पाया हूं।  यशवीर और रोहित के प्रदर्शन से खुश नीरज एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा नहीं ले पाने के बावजूद नीरज को भारतीय जैवलिन थ्रोअर के प्रदर्शन से खुशी मिली. नागोया में हुए इन खेलों में यशवीर सिंह ने सिल्वर और रोहित यादव ने ब्रॉन्ज मेडल जीता. यशवीर ने 85.72 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया, जबकि रोहित का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 84.35 मीटर रहा. श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 88.55 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता।  2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में नीरज ने 88.88 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड जीता था, जबकि किशोर जेना ने 87.54 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर अपने नाम किया था. उस समय भारत ने इस स्पर्धा में गोल्ड और सिल्वर दोनों मेडल जीते थे. 2026 में नीरज और किशोर, दोनों के नहीं खेलने के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने दो मेडल जीतने का सिलसिला जारी रखा।  नीरज ने कहा- मुझे लगता है कि सिर्फ यशवीर ही नहीं, रोहित ने भी शानदार प्रदर्शन किया. पिछले खेलों में हमने दो मेडल जीते थे, एक गोल्ड और एक सिल्वर. इस बार किशोर और मेरे नहीं खेलने के बावजूद हम दो मेडल जीतने में सफल रहे।  उन्होंने आगे कहा- इन नए और युवा खिलाड़ियों का उभरना भारत के लिए बहुत सकारात्मक संकेत है. यह दिखाता है कि हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं. मैं बस उनसे यही कहना चाहूंगा कि अपना ध्यान रखें, चोट से बचें और अपने गेम को इंजॉय करें। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विजयवाड़ा में उद्योगपतियों और निवेशकों से की चर्चा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में निवेश के नए अवसरों और औद्योगिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में प्रमुख उद्योगपतियों एवं निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठकों के दौरान निवेशकों और उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश की व्यापक संभावनाओं, अनुकूल औद्योगिक वातावरण तथा उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न उद्योग मित्र नीतियों की जानकारी साझा की।  

भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड डील का असर, शराब और कीवी समेत कई आयातित उत्पादों पर घटेगा टैक्स

नई दिल्‍ली भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड डील का ऐलान पहले ही किया जा चुका है, लेकिन अभी तक भातर की ओर से किन-किन वस्‍तुओं पर कितना टैक्‍स छूट होगा, इसके बारे में नोटिफाई जारी नहीं किया गया था. हालांकि, अब भारत ने न्यूजीलैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत आयातित वस्तुओं पर सीमा शुल्क में पहली छूट की घोषणा कर दी है।  इस ऐलान के साथ ही शराब, मनुका शहद, कीवी फल और भेड़ के मांस सहित अन्य उत्पादों पर रियायती दरें 20 अक्टूबर से लागू हो रही हैं. वित्त मंत्रालय की 16 अक्टूबर के नोटिफ‍िकेशन में कुछ खास वस्तुओं के लिए संशोधित मूल सीमा शुल्क और टैक्‍स रेट तय कर दी गई हैं. ये छूट नोटिफिकेशन में लिस्‍टेड उत्पादों, तय दरों और शर्तों के अधीन लागू होती हैं।   भेड़ का मांस पर कोई शुल्‍क नहीं लगता  नोटिफिकेशन के अनुसार, टैरिफ के तहत आने वाले ताजे, ठंडे और जमे हुए भेड़ के मांस पर शून्‍य टैरिफ, एग्रीकल्‍चर इंफ्रा एंड डेवलप टैक्‍स (AIDC) और हेल्‍थ टैक्‍स लगेगा. 2.50 डॉलर प्रति किलोग्राम या उससे अधिक कीमत के पात्र कीवी फलों के आयात पर 15% की दर से टैक्‍स लगेगा. यह छूट लागू उत्पाद क्‍लारिफिकेशन और आयात के लिए तय शर्तों के अधीन है. कई मछलियों पर टैक्‍स 25.71 फीसदी का लागू होगा, ज‍बकि एआईडीसी और स्वास्थ्य उपकर शून्य होंगे।  हालांकि, लागू दर विभिन्न शुल्क श्रेणियों में भिन्न होती है, इसलिए उपलब्ध छूट आयातित उत्पाद के क्‍लियरिफिकेशन पर निर्भर करेगी. इस नोटिफिकेशन में आयात शुल्क को पूरी तरह से हटाने के बजाय कुछ खास टैरिफ और उपकरों से राहत दी गई है. आयातकों को हर खेप पर लागू दर जानने के लिए संबंधित टैरिफ की जांच करनी होगी।  चुनिंदा उत्‍पादों को ही छूट  इस नोटिफिकेशन में टैरिफ रेट कोटा का भी प्रावधान है, जिसके तहत चुनिंदा उत्‍पादों को ही भारत में रियायती दरों पर एंट्री की अनुमति दी गई है. आयातकों को खास प्रोडक्‍ट्स की जरूरतों को पूरा करना होगा और छूट के लिए पात्र होने के लिए न्‍यूजीलैंड बेसिक का प्रमाण पेश करना होगा. ये उपाय संवेदनशील क्षेत्रों के लिए छूट बरकरार रखते हुए चुनिंदा न्यूजीलैंड आयातों तक सीमित पहुंच प्रदान करते हैं. डेयरी उत्पाद और प्रमुख कृषि उत्पाद रियायतों से बाहर रहेंगे।  सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 25(1) के तहत राजस्व विभाग द्वारा जारी 16 अक्टूबर की अधिसूचना में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तहत सीमा शुल्क रियायतों के पहले सेट के लिए लागू दरें और शर्तें निर्धारित की गई हैं। 

तीन साल पहले मुंबई में हुआ था चार्टर विमान हादसा, अजित पवार प्लेन क्रैश से क्या है कनेक्शन?

 मुंबई सितंबर 2023 में मुंबई एयरपोर्ट पर हुए वीएसआर चार्टर फ्लाइट क्रैश लैंडिंग मामले में एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी AAIB ने अपनी फाइनल रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अनस्टेबलाइज़्ड अप्रोच के कारण क्रैश लैंडिंग हुई, VSR विमान के रनवे पर फिसलने के बाद दो क्रू मेंबर और 6 यात्रियों को गंभीर चोटें आईं. AAIB की अंतिम रिपोर्ट में बताया गया है कि फ़्लाइंग क्रू ने SOP का पालन नहीं किया और VSR एयरलाइंस ने आंतरिक ऑडिट ठीक से नहीं किए. इसी कंपनी का लियरजेट बारामती में क्रैश हो गया था, जिसमें महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार और अन्य लोगों की मौत हो गई थी।  AAIB ने बताया 14 सितंबर 2023 को एक नॉन-शेड्यूल पैसेंजर फ्लाइट विशाखापत्तनम से मुंबई आई थी. विशाखापत्तनम से टेक-ऑफ सामान्य था और उड़ान के दौरान कोई समस्या नहीं हुई. इसके बाद विमान को रनवे 27 पर लैंड करने की मंज़ूरी दी गई. लैंडिंग के समय मुंबई एयरपोर्ट पर भारी बारिश के कारण विजिबिलिटी कम हो गई थी। अप्रोच के दौरान, विमान स्थिर नहीं था और शुरू में रनवे के बाईं ओर हट गया और उसके बाद लगातार रनवे 27 के दाईं ओर ड्रिफ्ट होता चला गया. ऑटोपायलट के डिस्कनेक्ट होने के लगभग 40 सेकंड बाद, कॉकपिट में स्टिक शेकर अलर्ट बजा और साथ ही स्टॉल की चेतावनी भी मिली।  इसके बाद, EGPWS चेतावनियां मिलीं और विमान टैक्सीवे W और टैक्सीवे N के इंटरसेक्शन के किनारे पर क्रैश लैंड हुआ. इसके बाद विमान फिसला और टैक्सीवे U और टैक्सीवे N के इंटरसेक्शन के पास एक कच्ची जगह (स्टैंड C80 के पास) में रुका. क्रैश के बाद आग लग गई और दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाई।  विमान में सवार सभी लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन उन्हें टक्कर के कारण कई चोटें आईं और उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।  दुर्घटना का संभावित कारण फ़्लाइट क्रू का खराब मौसम की स्थिति में भी अन-स्टेबलाइज़्ड अप्रोच जारी रखने का फैसला और विमान को गलत तरीके से संभालना बताया जा रहा है, जिसके कारण कम ऊंचाई पर  एरोडायनामिक स्टॉल हुआ और विमान उससे उबर नहीं पाया।   

CMRL-Exalogic भुगतान मामले में बढ़ी हलचल, पूर्व मुख्यमंत्री विजयन से पूछताछ करेगी ED

तिरुवनंतपुरम केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता पिनराई विजयन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विजयन को CMRL-Exalogic मामले में समन जारी कर 23 अक्टूबर को पेश होने के लिए कहा है. इसके साथ ही एजेंसी ने उनसे देश-विदेश में मौजूद बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, चल-अचल संपत्तियों और निवेश का पूरा ब्योरा मांगा है. ईडी ने विजयन से उनके परिवार और उनसे जुड़ी संस्थाओं के वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी देने को कहा है।  सभी बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट की जानकारी मांगी प्रवर्तन निदेशालय ने CMRL-Exalogic मामले में पिनराई विजयन को जारी समन में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए हैं. एजेंसी ने उनसे भारत और विदेशों में उनके तथा उनसे जुड़ी संस्थाओं के सभी बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट की जानकारी मांगी है।  इसके अलावा ईडी ने विजयन और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर देश-विदेश में मौजूद चल और अचल संपत्तियों का ब्योरा भी तलब किया है. इनमें बैंक लॉकर से संबंधित जानकारी और दस्तावेज भी शामिल हैं।  2016 से 2026 तक के ITR भी मांगे ईडी ने पिनराई विजयन से वित्त वर्ष 2016 से 2026 तक दाखिल किए गए आयकर रिटर्न (ITR) की प्रतियां भी मांगी हैं. इसके जरिए एजेंसी उनके वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करना चाहती है।  समन में विजयन और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़ी उन सभी संस्थाओं की जानकारी भी मांगी गई है, जो भारत या विदेश में मौजूद हैं. साथ ही इन संस्थाओं में किए गए निवेश का ब्योरा भी पेश करने को कहा गया है।  CMRL और शशिधर कर्था से मिले पैसों का ब्योरा तलब प्रवर्तन निदेशालय ने विजयन से उन सभी धनराशियों की जानकारी देने को कहा है, जो उन्हें, उनके परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़े किसी व्यक्ति को CMRL, शशिधर कर्था या इस कंपनी से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त हुई हों।  ईडी ने विजयन को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 की धारा 50 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए भी बुलाया है. इस मामले में विजयन को 23 अक्टूबर को एजेंसी के सामने पेश होना है. ईडी CMRL-Exalogic मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।  सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली तत्काल राहत इससे पहले शुक्रवार को पिनराई विजयन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. उन्होंने CMRL-Exalogic मामले में विजिलेंस की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया।  चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बागची की बेंच के सामने विजयन की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि 82 वर्षीय नेता पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है. विजयन के वकील ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था. उन्होंने दलील दी कि हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने जनहित याचिका जैसी कार्यवाही के दौरान यह आदेश पारित किया था।  इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दशहरा अवकाश के दौरान जजों की उपलब्धता के आधार पर विशेष बेंच गठित करने की संभावना पर विचार किया जाएगा. अगर ऐसा संभव नहीं हुआ तो मामले को 26 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा. दशहरा अवकाश के बाद सुप्रीम कोर्ट में नियमित कामकाज 26 अक्टूबर से शुरू होगा।  हाईकोर्ट ने दिया था FIR दर्ज करने का आदेश दरअसल, केरल हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने 9 अक्टूबर को राज्य के विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (VACB) को आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था. हाईकोर्ट का यह आदेश ईडी की ओर से पुलिस को भेजी गई रिपोर्ट के बाद आया था. ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत की गई जांच और तलाशी के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी।  क्या है CMRL-Exalogic मामला? यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और उससे जुड़ी एक कंपनी की ओर से Exalogic Solutions को किए गए भुगतान से संबंधित है. ईडी का आरोप है कि CMRL ने आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं की फीस के नाम पर Exalogic Solutions को गलत तरीके से 2.78 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे।  एजेंसी इस भुगतान से जुड़े वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही है. इसी सिलसिले में अब पिनराई विजयन को समन जारी कर 23 अक्टूबर को पेश होने के लिए कहा गया है। 

‘चक दे इंडिया’ समेत दो फिल्मों को किया था रिजेक्ट, नेहा धूपिया ने सालों बाद किया खुलासा

मुंबई  बॉलीवुड में कई बार एक्टर्स ऐसी फिल्मों को ठुकरा देते हैं, जो आगे चलकर खूब सफलता हासिल करती हैं. हालांकि, बाद में उन्हें अपने इस फैसले का मलाल होता है. एक्ट्रेस नेहा धूपिया के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. एक्ट्रेस ने खुलासा किया कि उन्हें शाहरुख खान की सुपरहिट फिल्म 'चक दे इंडिया' में काम करने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया. इसके अलावा नेहा को वेब सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' का भी ऑफर मिला था. आज नेहा को इन दोनों बड़े प्रोजेक्ट्स को मिस करने का अफसोस है।  हाल ही में नेहा धूपिया ने एक चैट शो के दौरान इस बात का खुलासा किया कि उनके करियर में कुछ अच्छे मौके भी छूट गए. उन्होंने बताया कि कुछ फैसलों को लेकर जब वह आज सोचती हैं, तो उन्हें लगता है कि शायद उन्होंने बड़े अवसर खो दिए।  दो बड़े प्रोजेक्ट्स को ठुकराने का है अफसोस नेहा ने कहा, 'कभी-कभी जब आप उन मौकों के बारे में सोचते हैं, जिन्हें आपने कभी ठुकराया था, तब इस बात का एहसास होता है कि आप क्या कुछ खो चुके हैं. 'चक दे इंडिया' और 'ऑपरेशन सफेद सागर' ऐसे ही दो मौके थे, जिन्हें लेकर मुझे मलाल है. मैं हमेशा से एक अच्छी स्पोर्ट्स फिल्म और मिलिट्री फिल्म करना चाहती थी, लेकिन ये दोनों बड़े अवसर मेरे हाथ से निकल गए।  'चक दे इंडिया' साल 2007 में रिलीज हुई थी, जिसे यश राज फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया था. इस स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म को दर्शकों का खूब प्यार मिला था. फिल्म में शाहरुख खान ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान कबीर खान का किरदार निभाया था, जो बाद में देश की महिला हॉकी टीम का कोच बनता है. वह टीम को जीत दिलाने के लिए खूब जद्दोजहद करता है. फिल्म में शाहरुख खान के साथ विद्या मालवडे, शिल्पा शुक्ला, सागरिका घाटगे और चित्राशी रावत जैसे कलाकार नजर आए थे।  नेहा को 'ऑपरेशन सफेद सागर' को ठुकराने का भी मलाल है. नेहा ने नेटफ्लिक्स की इस वेब सीरीज का ऑफर भी ठुकरा दिया था. यह वेब सीरीज इसी साल रिलीज हुई थी, जिसे दर्शकों ने खूब प्यार दिया. यह सीरीज साल 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना की भूमिका से प्रेरित है. इसमें सिद्धार्थ, जिम्मी शेरगिल, अभय वर्मा, दीया मिर्जा और आदिल हुसैन समेत कई अन्य एक्टर्स मुख्य भूमिकाओं में हैं।  नेहा का वर्कफ्रंट अगर नेहा के वर्कफ्रंट की बात करें, तो उन्होंने साल 2003 में फिल्म 'कयामत: सिटी अंडर थ्रेट' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. इसके बाद वह 'जूली', 'क्या कूल हैं हम', 'सिंह इज किंग' और 'तुम्हारी सुलु' जैसी फिल्मों में नजर आईं. फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने कई टीवी शोज और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी काम किया है. नेहा ने मई 2026 में अपने पति अंगद बेदी के साथ यूट्यूब पर चैट शो 'डबल डेट' शुरू किया। 

भारत की इकोनॉमी को लेकर IMF का बड़ा अनुमान, 2026 में 7% ग्रोथ की उम्मीद

 नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है और अब इसके एक और बड़ी छलांग लगाने की उम्मीद है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा अनुमान के मुताबिक, भारत 2027 में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगी ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद IMF को भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार मजबूत रहने का अनुमान है।  IMF ने 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है. यह अनुमान एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं पर जारी उसकी ताजा रिपोर्ट में दिया गया है. हालांकि, भारत के चौथे स्थान पर पहुंचने का अनुमान अभी भविष्य की संभावना है. इसकी वास्तविक तस्वीर आने वाले वर्षों में आर्थिक वृद्धि और अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार पर निर्भर करेगी।  दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अमेरिका पहले, चीन दूसरे और जर्मनी तीसरे स्थान पर हैं. भारतीय अर्थव्यवस्था के लगातार बढ़ते आकार और जापान की धीमी आर्थिक वृद्धि दर को देखते हुए आईएमएफ ने 2027 में चौथे स्थान पर बदलाव की संभावना जताई है. भारत 2027 में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. इस बदलाव का मतलब सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था की रैंकिंग में एक पायदान ऊपर जाना नहीं होगा. यह दुनिया की आर्थिक गतिविधियों में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दिखाएगा।  बड़ी अर्थव्यवस्था होने से वैश्विक निवेश, व्यापार और आर्थिक फैसलों में किसी देश का महत्व बढ़ सकता है. हालांकि, अर्थव्यवस्था का कुल आकार और आम लोगों की प्रति व्यक्ति आय अलग-अलग पैमाने हैं. इसलिए ऊंची रैंकिंग को सीधे तौर पर हर नागरिक की आय या जीवन स्तर में सुधार के बराबर नहीं माना जा सकता।  जापान की अर्थव्यवस्था के सामने क्या चुनौतियां? आकार के लिहाज से भारत के दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना के पीछे जापान की धीमी आर्थिक वृद्धि अहम वजह है. IMF के अनुमान के मुताबिक, जापान की अर्थव्यवस्था 2026 में महज 0.7% की वार्षिक दर से बढ़ सकती है. जापान लंबे समय तक कीमतों में गिरावट यानी डिफ्लेशन की समस्या से जूझता रहा, लेकिन 2022 से वहां उपभोक्ता कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।  ऊर्जा की महंगी कीमतों ने भी जापान पर दबाव बढ़ाया है. ईरान से जुड़े युद्ध और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के कारण ऊर्जा की लागत बढ़ने की आशंका बनी हुई है. इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले येन के कमजोर होने के कारण जापान के लिए आयात महंगा पड़ रहा है. जापान की उम्रदराज होती आबादी भी उसके सामने बड़ी चुनौती है, क्योंकि इससे कामकाजी लोगों की उपलब्धता और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।  AI में निवेश से जापान को फायदा, लेकिन सीमित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बढ़ता निवेश जापान की अर्थव्यवस्था को कुछ सहारा दे रहा है. IMF के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्ण श्रीनिवासन ने जापान में इस क्षेत्र में निवेश का जिक्र किया. हालांकि, उनके मुताबिक, जापान को AI निवेश से मिलने वाला फायदा एशिया की कुछ दूसरी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सीमित है. AI और नई तकनीक में निवेश आने वाले वर्षों में देशों की उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकता है. भारत के लिए भी तकनीक, डिजिटल सेवाओं और घरेलू मांग की मजबूती आर्थिक विस्तार के अहम कारक हो सकते हैं।  भारत के GDP कैलकुलेशन में बदलाव भारत के जीपीडी कैलकुलेशन मेथाडोलॉजी में बदलाव का IMF ने स्वागत किया है. कृष्ण श्रीनिवासन ने इसे सकारात्मक बदलाव बताते हुए मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन (MOSPI) के प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि किए गए बदलाव IMF के स्टेटिस्टिक्स डिपार्टमेंट की सलाह के अनुरूप हैं. GDP किसी देश में एक निश्चित अवधि के दौरान तैयार होने वाली वस्तुओं और सेवाओं के कुल आर्थिक मूल्य को मापती है।  अब 2027 के अनुमान पर रहेगी नजर IMF का अनुमान भारत के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है, लेकिन जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य अभी हासिल नहीं हुआ है. इसके लिए भारत की वृद्धि दर मजबूत बने रहना और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का अनुकूल होना जरूरी होगा. आने वाले समय में दो बातें खास तौर पर अहम रहेंगी. पहली, भारत अपनी आर्थिक वृद्धि की रफ्तार कितनी कायम रख पाता है. दूसरी, GDP की नई गणना पद्धति के तहत जारी आंकड़े अर्थव्यवस्था की स्थिति को कितनी स्पष्टता से दिखाते हैं. इन्हीं के आधार पर यह तय होगा कि 2027 में भारत वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में जापान से आगे निकल पाता है या नहीं। 

CG में कैबिनेट विस्तार की तैयारी? हर संभाग से एक मंत्री बनाने की चर्चा

रायपुर छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर से मंत्रिमंडल के विस्तार की अटकलें लग रही है। दावा किया जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दौरे के बाद फेरबदल की स्थिति साफ हो जाएगी। पिछले सात-आठ महीनों से रायपुर से लेकर दिल्ली तक इस तरह की अटकलें रुक-रुक कर सामने आती रही हैं। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में फेरबदल के पीछे मुख्य रूप से क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को साधना है। फेरबदल में हर संभाग से एक मंत्री बनाने की अटकलें लग रही हैं। सरगुजा संभाग से कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव या फेरबदल की चर्चाएं सबसे आगे हैं। वहीं, आदिवासी बहुल बस्तर संभाग से दो नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है। सियासी अटकलें तेज सूत्रों के अनुसार, बिलासपुर और अन्य मैदानी संभागों में भी क्षेत्रीय व सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों को मौका मिलने और कुछ मौजूदा मंत्रियों की विदाई या विभागों की अदला-बदली की अटकलें बाजार में गर्म हैं। केंद्र में इस बात पर भी जोर है कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल को बेहतर करने के लिए कुछ पुराने और अनुभवी चेहरों की दोबारा वापसी हो सकती है। संघ पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेताओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट बनी हुई है। इसके साथ ही कुछ नए विधायकों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने की बातें कही जा रही हैं। हालांकि, ये तमाम बातें फिलहाल राजनीतिक सूत्रों, अंदरखाने की चर्चाओं और कयासों पर ही आधारित हैं। आधिकारिक तौर पर इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई है। चार नेताओं के नाम की चर्चा इन तमाम चर्चाओं के बीच संभावित चेहरों और नामों को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। जानकारों के अनुसार, जिन चार नए और संभावित चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की अटकलें लगाई जा रही हैं, वे अलग-अलग संभागों से आते हैं। इसके साथ ही, पूर्व मंत्री और अनुभवी नेताओं को मौका दिने की बात कही जा रही है। 25 अक्टूबर को पहुंचेंगी स्मृति ईरानी भाजपा की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी का 25 अक्टूबर से दो दिवसीय दौरान प्रस्तावित है। स्मृति ईरानी के दौरे से पहले कैबिनेट में फेरबदल की चर्चा को अहम माना जा रहा है। स्मृति ईरानी अपने छत्तीसगढ़ दौरे में राजधानी रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, पार्टी पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ मैराथन बैठकें करेंगी।