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आंधी-तूफान से थमा जनजीवन, फतेहाबाद में भारी तबाही, कई इलाकों में ब्लैकआउट

हिसार. हरियाणा में मौसम ने अचानक रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। भीषण गर्मी और तपती लू के बीच प्रदेश के कई जिलों में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आंधी और तेज वर्षा से फतेहाबाद सहित राज्य के कई हिस्सों में सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और दुकानों के टीन शेड व होर्डिंग्स उखड़ गए, जिससे गुरुग्राम सहित कई इलाकों में ब्लैकआउट है। हांसी में करीब एक घंटे तक चली तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के ऊपर चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार से 13 जून तक पूरे प्रदेश में भारी वर्षा, गरज-चमक और ओलावृष्टि का ‘आरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वीरवार सुबह से ही मौसम के मिजाज बदले-बदले नजर आए। सरकार की ओर से मोबाइल पर इमरजेंसी अलर्ट जारी मौसम के इस रूप को देख हरियाणा सरकार व आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (चेतावनी संदेश) भेजा। इस संदेश में पंचकूला, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और पानीपत जिलों के निवासियों को घरों में रहने और तेज तूफान व ओलावृष्टि के प्रति सावधान रहने की सलाह दी है। प्रारंभिक सुस्ती के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। गति में तेजी आई है, लेकिन बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है। जून में अभी तक देश में औसतन 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस स्थिति को अलनीनो से जोड़कर देखा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रहा है। यूपी और बिहार में कई लोगों की मौत पश्चिम विक्षोभ से उत्तर भारत में वीरवार को अचानक मौसम ने करवट ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज आंधी-पानी और वज्रपात से 16 लोगों की मौत हो गई। जिनमें बिहार में 10 लोगों की जान गई, जबकि एक ही परिवार के चार लोगों समेत 10 झुलस गए। वहीं, कई जगह वर्षा से जलभराव हुआ।

आग की लपटों से दहला जालंधर, गोदाम में लगी भीषण आग, समय रहते पाया गया काबू

जालंधर. जालंधर के जेपी नगर क्षेत्र में मंगलवार देर रात उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब एक गोदाम में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में आसमान में धुएं के घने गुबार दिखाई देने लगे। आग की लपटें और धुआं दूर-दूर तक नजर आने से आसपास के लोगों में दहशत फैल गई और कई परिवार एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के समय तेज हवाएं चल रही थीं, जिसके कारण आग ने तेजी से विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते गोदाम के भीतर रखा सामान आग की चपेट में आने लगा। स्थिति को गंभीर होता देख स्थानीय लोगों ने तुरंत दमकल विभाग और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। दमकल कर्मियों ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का अभियान शुरू कर दिया। आग की तीव्रता को देखते हुए विभाग ने अतिरिक्त संसाधनों का भी इस्तेमाल किया। एक घंटे बाद आग पर पाया गया काबू करीब एक घंटे की लगातार मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। समय रहते आग पर नियंत्रण मिलने से आसपास के मकानों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचने से बचा लिया गया। दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही सबसे पहले सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी गई। किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए बिजली विभाग से संपर्क कर संबंधित क्षेत्र की बिजली सप्लाई तत्काल बंद करवाई गई। इससे करंट लगने या शार्ट सर्किट से आग और फैलने जैसी आशंकाओं को रोका जा सका। जांच के दौरान पता चला कि जिस भवन में आग लगी थी, वहां कोई परिवार नहीं रहता था। भवन का इस्तेमाल गोदाम के रूप में किया जा रहा था। राहत की बात यह रही कि आग लगने के समय अंदर कोई मौजूद नहीं था। इसी कारण किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। शार्ट सर्किट माना जा रहा आग का कारण हालांकि आग से गोदाम के अंदर रखे सामान को नुकसान पहुंचने की आशंका है, लेकिन नुकसान का सही आकलन अभी नहीं किया जा सका है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शार्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि अधिकारी सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रहे हैं। फिलहाल आग पूरी तरह बुझा दी गई है और संबंधित विभाग घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटे हुए हैं। स्थानीय लोगों ने भी समय पर पहुंचकर राहत कार्य करने के लिए दमकल विभाग की सराहना की है।

मेक्सिको की जीत में 17 वर्षीय मोरा का इतिहास रचने वाला डेब्यू, 96 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

 नई दिल्‍ली  मेक्सिको ने फीफा वर्ल्‍ड कप 2026 में अपने अभियान की विजयी शुरुआत की। मेक्सिको ने साउथ अफ्रीका को 2-0 से मात दी। हालांकि, सबसे ज्‍यादा चर्चा एक 17 साल का खिलाड़ी गिलबर्टो मोरा बटोर ले गया। गिलबर्टो मोरा ने मैदान पर उतरते ही इतिहास के पन्‍नों को पलट दिया और वर्ल्‍ड कप मैच खेलने वाले सबसे युवा मेक्सिकन फुटबॉलर बन गए। इसी के साथ मोरा ने 96 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। मोरा मैच के 65वें मिनट में मैदान पर उतरे। तब मेक्सिको की टीम 1-0 से आगे थी। दो मिनट बाद ही जेमिनेज के गोल के दम पर मेक्सिको ने अपनी बढ़त 2-0 कर ली। यही मैच का निर्णायक स्‍कोर भी साबित हुआ। मोरा से पहले 1930 में मेनुअल रोसास ने मेक्सिको के लिए सबसे युवा डेब्‍यूटेंट की भूमिका निभाई थी। वर्ल्‍ड कप में डेब्‍यू करने वाले मेक्सिको के सबसे युवा खिलाड़ी गिलबर्टो मोरा – 17 साल, 240 दिन (बनाम साउथ अफ्रीका, 2026) मेनुअल रोसास – 18 साल, 134 दिन (बनाम फ्रांस 1930) अलफ्रडो टोरेस – 19 साल, 16 दिन (बनाम ऑस्‍ट्रिया 1954) रउल अरेलानो – 19 साल, 108 दिन (बनाम फ्रांस 1954) आंद्रेस गार्डाडो – 19 साल, 269 दिन (बनाम ईरान, 2006) ह्युगो सांचेज – 19 साल, 326 दिन (बनाम ट्यूनीशिया, 1978) कौन हैं गिलबर्टो मोरा? मोरा ने बहुत जल्‍द अपनी चमक बिखेरी। चियापास में जन्‍में मिडफील्‍डर को क्‍लब तिजुआना यूथ एकेडमी से पहचान मिली। उन्‍होंने बहुत जल्‍द पहली टीम में अपनी जगह पक्‍की की। 17 साल की उम्र में मोरा के पास 50 से ज्‍यादा सीनियर मैच खेलने का अनुभव हासिल है। मोरा की लगातार तरक्‍की से कोच जेवियर एगुएरे प्रभावित हुए और उन्‍हें वर्ल्‍ड कप स्‍क्‍वाड में शामिल किया। मोरा ने 2025 में अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर अपनी धाक दिखाई और मेक्सिको सीनियर नेशनल टीम में डेब्‍यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने। मोरा को फीफा ने टूर्नामेंट में सबसे शानदार युवाओं में से एक करार दिया।

हौसलों की उड़ान: संघर्षों से लड़कर बनीं ‘लखपति दीदी’ कांति साहू, अब चार सफल कारोबार की मालिक

हौसलों की उड़ान: संघर्षों को मात देकर 'लखपति दीदी' बनीं कांति साहू दोना-पत्तल से कारोबार शुरू कर चार व्यवसायों का कर रही हैं सफल संचालन गांव की महिलाओं के लिए पेश की मिसाल रायपुर, स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर श्लखपति दीदीश् बन रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। ऐसी कई महिलाओं ने प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं और छोटी पूंजी की मदद से  स्वरोजगार अपनाकर अपनी तकदीर बदली है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत चल रहा लखपति दीदी अभियान छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहा है। इसका सबसे सटीक और जीवंत उदाहरण बनी हैं बैकुण्ठपुर विकासखंड के ग्राम तलवापारा की रहने वाली श्रीमती कांति साहू। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच कांति ने न सिर्फ अपनी किस्मत बदली, बल्कि आज वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। समूह से जुड़ाव और 4 लाख की वित्तीय मदद          एक सामान्य कृषक परिवार से ताल्लुक रखने वाली कांति साहू हमेशा से खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहती थीं, लेकिन पूंजी के अभाव में उनका यह सपना दबा हुआ था। करीब तीन साल पहले वह गांव की महिलाओं के साथ मिलकर शारदा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह में आने के बाद उन्हें बचत और व्यावसायिक बारीकियों की समझ मिली। इसके बाद बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज, एसवीईपी योजना और मुद्रा ऋण के माध्यम से उन्हें करीब 4 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस पूंजी ने उनके सपनों को पंख दे दिए। एक नहीं, शुरू किए कई व्यवसाय          कांति दीदी ने जोखिम उठाते हुए किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय विविधता को चुना। उन्होंने एक साथ कई आजीविका गतिविधियों की शुरुआत की। दोना-पत्तल निर्माण इकाई, धान कृषि बीज केंद्र, मैचिंग सेंटर (कपड़ा व्यवसाय), सिलाई केंद्र, पति का मिला मजबूत साथ कांति साहू बताती हैं कि इस पूरे सफर में उनके पति महेन्द्र साहू हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। शुरुआती चुनौतियों को मात देने में पति-पत्नी की साझा मेहनत और समर्पण का बड़ा योगदान रहा। सालाना आय 3 लाख के पार           आज कांति साहू के सभी व्यवसाय सफलतापूर्वक चल रहे हैं। वर्तमान में इन व्यवसायों से हर महीने 1 से 1.5 लाख रुपये तक का टर्नओवर (कारोबार) हो रहा है, जिसमें से वे 30 से 35 हजार रुपये का शुद्ध मासिक लाभ कमा रही हैं। इस तरह उनकी वार्षिक शुद्ध आय 3 लाख रुपये से अधिक हो गई है, जिससे उन्होंने आधिकारिक तौर पर श्लखपति दीदीश् की श्रेणी में अपनी जगह बना ली है। महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल           आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ ही कांति का सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे न केवल अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर रही हैं, बल्कि गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रही हैं। कांति साहू की यह सफलता साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और अवसर मिले, तो वे समाज में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम कर सकती हैं।

मनरेगा साइट पर गिरी बिजली, कांकेर में 2 मजदूरों की दर्दनाक मौत, 5 की हालत बिगड़ी

भानुप्रतापपुर/कांकेर. कांकेर जिले के अंतागढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कलगांव में आकाशीय बिजली गिरने से मनरेगा में काम कर रहे दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं 5 मजदूर घायल हो गए. घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. जानकारी के अनुसार, गांव में मनरेगा योजना के तहत चल रहे तालाब निर्माण कार्य में लगभग 50 मजदूर लगे हुए थे. इस दौरान अचानक मौसम में बदलाव हुआ और बारिश होने लगी. मजूदरों ने पानी से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे. इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने से पेड़ के नीचे खड़े उपसरपंच धनराज पटेल के साथ एक अन्य मजदूर की मौके पर मौत हो गई. वहीं हादसे में पांच मजदूर घायल हो गए, जिनमें 3 महिला और 2 पुरुष शामिल हैं. घायल मजदूरों को उपचार के लिए अंतागढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है. सुबह-सुबह हुई इस घटना ने पूरे जिले के झकझोर दिया है. घटना के संबंध में कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने बताया कि मौके पर भेजे गए अधिकारी स्थिति का जायजा ले रहे हैं. घायल के उचित इलाज की व्यवस्था की है. हमने एंबुलेंस को रवाना कर दिया है. इसके साथ डॉक्टर्स को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि घायलों का बेहतर उपचार किया जाए.

बरेली में स्वच्छता नियम होंगे सख्त, खुले में कूड़ा फेंकने पर कटेगा बिजली-पानी कनेक्शन

लखनऊ पूरे देश में स्वच्छता को अभियान बनाया गया है और लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकारें कूड़ा निस्तारण और साफ-सफाई का अभियान भी चला रही हैं। शहर-शहर को सफाई की रैंकिंग से जोड़ा गया है। इसके बाद भी मुहिम रंग नहीं लाने पर अब सख्ती होने जा रही है। बरेली शहर में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत अब खुले में कूड़ा फेंकने, सार्वजनिक स्थानों पर मलबा डालने या गीले-सूखे कचरे का अलग-अलग निस्तारण नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ अब बिजली और पानी का कनेक्शन तक काटा जाएगा। सूखा-गीला कूड़ा एक साथ होने पर चालान नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि शासन के निर्देशों के तहत प्रत्येक घर और संस्थान को गीला, सूखा, सैनिटरी तथा विशेष श्रेणी के कचरे (ई-वेस्ट) को अलग-अलग रखना अनिवार्य होगा। जांच के दौरान कचरा मिश्रित मिलने पर चालान की कार्रवाई की जाएगी। वहीं होटल, अस्पताल, मॉल और बड़ी आवासीय सोसायटियों को अपने परिसर में ही कचरे का निस्तारण करना होगा। शहर को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए कचरे के स्रोत पर ही पृथक्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया आसान होगी और लैंडफिल पर भार कम पड़ेगा। अधिकारियों ने नागरिकों से नियमों का पालन करने और स्वच्छता अभियान में सहयोग देने की अपील की है। कूड़ा निस्तारण मशीनों का इंस्टॉलेशन शुरू वहीं, शहर में कूड़ा निस्तारण की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सथरापुर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। नगर निगम ने प्लांट के संचालन के लिए तैयारियां और तेज कर दी हैं। मशीनों का इंस्टॉलेशन शुरू हो चुका है और तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्लांट के शुरू होते ही प्रतिदिन करीब 500 मीट्रिक टन कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सकेगा। सीएम योगी दे सकते हैं सौगात नगर निगम अधिकारियों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के संभावित दौरे के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सौगात शहरवासियों को मिल सकती है। पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी का कहना है कि प्लांट संचालन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए इंदौर और गुजरात के शहरों में संचालित कचरा प्रबंधन मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। वहां की प्रोसेसिंग प्रणाली, तकनीकी व्यवस्था और संचालन प्रक्रिया से जुड़ी रिपोर्टें भी मंगाई जा रही हैं, ताकि बरेली में आधुनिक और प्रभावी व्यवस्था लागू की जा सके स्वच्छ शहर की दिशा में बड़ा कदम प्लांट संचालित होने पर शहर में कूड़े के ढेर और डंपिंग की समस्या में काफी कमी आएगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा।नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि प्लांट शुरू होने के बाद शहर में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण से प्रदूषण कम होगा और स्वच्छ शहर की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

अरुण साव के निर्देश पर ठेकेदार को नोटिस, निरीक्षण में धीमी प्रगति मिलने पर जताई नाराजगी

उप मुख्यमंत्री अरुण साव के निर्देश पर ठेकेदार को नोटिस जारी, निरीक्षण के दौरान काम की धीमी प्रगति पर जताई थी नाराजगी साव ने 6 जून को किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन पर बन रहे ओवरब्रिज की देखी थी प्रगति, लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को लगाई थी फटकार रायपुर.  उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। उप मुख्यमंत्री साव ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान 6 जून को राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण किया था। उन्होंने निरीक्षण के दौरान काम के पिछड़ने एवं लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने अनुबंध के अनुसार कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर गहरी नाराजगी जताते हुए ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। बस्तर जिले में केशलूर के पास 69 करोड़ 36 लाख रुपए की लागत से इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ने निर्माण एजेंसी मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को जारी नोटिस में कहा है कि साइट उपलब्ध होने के बावजूद मैन-पॉवर, मटेरियल और मशीनरी की खराब व्यवस्था के कारण अलग-अलग चरणों में निर्माण के समयबद्ध लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सका है। कार्यस्थल पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे है और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद काम की गति असंतोषजनक है। विभाग ने ठेकेदार को जारी नोटिस में कहा है कि उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री द्वारा विगत 6 जून को साइट के निरीक्षण के दौरान काम की बेहद धीमी प्रगति पर गंभीर चिंता जताई गई थी। उन्होंने अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार ठेकेदार के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य अभियंता ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर तुरंत पर्याप्त मैन-पॉवर, मशीनरी, सामग्री और अन्य जरूरी संसाधन जुटाकर काम में तेजी लाने तथा प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए तय लक्ष्यों को हासिल करने सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। काम की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार नहीं पाए जाने पर विभाग द्वारा अनुबंध के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रोजगार मांगने नहीं, रोजगार देने की ओर बढ़ रहे पंजाब के युवा; सरकार दे रही पूरा सहयोग : भगवंत मान

चंडीगढ़  वर्तमान समय में पंजाब नवीन विचारों, विशिष्ट सोच और उद्यमी युवाओं द्वारा लीक से हटकर पहलकदमियां करने के कारण विकास की नई कहानी रच रहा है, जिसकी वजह से राज्य देश भर में सबसे पसंदीदा स्टार्टअप स्थल के रूप में उभर रहा है जहां युवा अपने विचारों को व्यवसाय और रोजगार के अवसरों में बदल रहे हैं। इस सोच की पैरवी करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज 31 स्टार्टअप्स और उनके संस्थापकों को 1.07 करोड़ रुपए की सीड ग्रांट वितरित की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सफल उद्यमियों की अगली पीढ़ी न सिर्फ पंजाब से आए बल्कि पंजाब में अपनी कंपनियां भी स्थापित करे, जिससे राज्य के अंदर ही नौकरियों और कमाई के अवसर पैदा हों। स्टार्टअप को पंजाब के भविष्य के आर्थिक विकास का मुख्य स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है कि किसी भी शानदार उद्यम को वित्तीय सहायता की कमी के कारण छोड़ा न जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पंजाब स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ के तहत सीड ग्रांट को 3 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया है, जिसमें 7 स्टार्टअप्स को 5-5 लाख रुपये और 24 स्टार्टअप्स को 3-3 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये उद्यम रोजगार के हजारों अवसर पैदा करेंगे और युवाओं में नौकरियों की तलाश में विदेश जाने के रुझान को कम करने में मदद करेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि मुफ्त बिजली, किसानों को दिन में बिजली सप्लाई और कई अन्य सुधारों जैसी पहलकदमियों से यह पता चलता है कि कैसे नए विचार लोगों को सीधा लाभ पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमिता और नवाचार में मिल रहे भरपूर समर्थन के साथ पंजाब, भारत का स्टार्टअप हब बनने के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप्स को सीड ग्रांट वितरित करने संबंधी समारोह के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज पंजाब के उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, खासकर हमारे युवा उद्यमियों के लिए जो नए विचारों के साथ अपना कारोबारी सफर शुरू कर रहे हैं। 31 स्टार्टअप्स को 1.07 करोड़ रुपए की सीड ग्रांट दी जा रही है। 7 स्टार्टअप्स को 5-5 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है, जबकि 24 स्टार्टअप्स को 3-3 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है। ये युवा उद्यमी अपने विचारों के माध्यम से सपनों को साकार कर रहे हैं और वे इस सहयोग के हकदार हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आम आदमी पार्टी (आप) खुद एक ऐसे विचार से पैदा हुई थी जब देश में परिवारवाद की राजनीति का दबदबा था और आम आदमी को अनदेखा कर दिया गया था। कई पहलुओं से ‘आप’ एक स्टार्टअप भी थी जिसने झाड़ू के अपने प्रतीक के साथ राजनीतिक व्यवस्था को साफ किया। 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजाब के लोगों ने 7 पूर्व मुख्यमंत्रियों और उनके परिवारों को बाहर का रास्ता दिखाया और ईमानदार सरकार को मौका दिया। उस फैसले ने पंजाब को बदल दिया है और इसे देश का एक अग्रणी राज्य बना दिया है। पंजाबियों की उद्यमी भावना को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाबी अपनी मेहनत, जज्बे और उद्यम के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। उसी भावना से प्रेरित होकर हमारे युवा नए उद्यम शुरू कर रहे हैं और नए अवसर पैदा कर रहे हैं। वे सिर्फ कारोबार नहीं चला रहे, वे पंजाब के भविष्य को नया रूप दे रहे हैं। पंजाबी मूल के सफल उद्यमियों के उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और दुनिया भर में बहुत सी सफल कंपनियां पंजाबियों द्वारा स्थापित या सह-स्थापित की गई हैं। जोमैटो, ओला और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां इसकी उदाहरण हैं कि कैसे पंजाबियों ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। पंजाब हमेशा उद्यमियों की धरती रहा है। पंजाबी जहां भी जाते हैं, वे कारोबार स्थापित करते हैं, रोजगार पैदा करते हैं और अपनी अलग छाप छोड़ते हैं। हमारा लक्ष्य है कि सफल संस्थापकों की अगली पीढ़ी न सिर्फ पंजाब से आए बल्कि पंजाब में अपनी कंपनियां भी स्थापित करे। इनोवेशन इको-सिस्टम (नवीनतम प्रणाली) की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीड मनी ( स्टार्टअप के लिए सहायता राशि) प्रदान करने का उद्देश्य स्टार्टअप्स पर आने वाले शुरुआती बोझ को कम करना और उन्हें अपने विचारों को हकीकत में बदलने तथा आगे बढ़ने का भरोसा देना है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को नवाचार के केंद्र बनना चाहिए जहां विचार क्लासरूम से परे उत्पाद, सेवाएं, कंपनियां और समाधान की नींव बनते हैं। अपने विदेशी दौरों को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दक्षिण कोरिया के पैंगयो टेक्नो वैली और नीदरलैंड्स के वर्ल्ड हॉर्टी सेंटर में उन्होंने देखा कि कैसे एक योजनाबद्ध इनोवेशन इको-सिस्टम पूरे क्षेत्र को बदल सकता है। इस मॉडल से पता लगता है कि जब इको-सिस्टम को सही ढंग से डिज़ाइन किया जाता है तो विचार विश्व स्तरीय कंपनियों की नींव बन सकते हैं। इसी तरह नीदरलैंड्स में वर्ल्ड हॉर्टी सेंटर के अपने दौरे के दौरान मैंने देखा कि कैसे इनोवेशन नई तकनीकों की टेस्टिंग, लागूकरण और व्यावसायीकरण के माध्यम से खेतीबाड़ी और बागबानी को बदल सकती है। पंजाब की कृषि क्षमता के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में भविष्य का विकास उच्च-मूल्य वाली खेतीबाड़ी, एग्री-टेक, फूड प्रोसेसिंग, सुरक्षित खेती, कोल्ड चेन और एग्री-लॉजिस्टिक्स के माध्यम से होना चाहिए। हमारे किसान हमेशा प्रगतिशील रहे हैं और पंजाब सरकार उन्हें आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और नए कारोबारी मॉडलों तक पहुंच प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये स्टार्टअप्स रोजगार के अवसर पैदा करके और युवाओं में भरोसा बहाल करके पंजाब में सार्थक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हर उद्यमी पंजाब का ब्रांड एंबेसडर बने। आप जहां भी जाएं, पंजाब का नाम रोशन करें और दुनिया को बताएं कि पंजाब नवाचार के लिए तैयार है, पंजाब स्टार्टअप के लिए तैयार है और पंजाब भविष्य के लिए तैयार है। पंजाब सरकार की ओर से पूर्ण समर्थन का भरोसा देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह … Read more

PM मोदी का नया सियासी वार! कांग्रेस ग्रोथ रेट का जिक्र कर विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली एनडीए की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला. पीएम मोदी ने कहा कि जिस धीमी विकास दर को दशकों तक ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ कहा गया, उसे वास्तव में ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ कहा जाना चाहिए था, क्योंकि उस दौर की नीतियों, शासन शैली और आर्थिक फैसलों के लिए कांग्रेस जिम्मेदार थी, न कि देश की संस्कृति या बहुसंख्यक समाज. पीएम मोदी ने जो बातें कहीं हैं, वो कांग्रेस के ल‍िए मुसीबत के बीज की तरह हैं. क्‍योंक‍ि बीजेपी अब इस शब्‍द को लोगों के बीच ले जाएगी, उन्‍हें बताएगी क‍ि कांग्रेस राज में क‍िस तरह ह‍िन्‍दुओं के माथे पर कलंक मढ़ा गया।  पीएम मोदी ने कहा, NDA के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता ये भी है कि देश कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ है. कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था. देश को यही एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है, भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है और बड़ी ही चतुराई से धीमी विकास को एक नाम दिया था, ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ यानी कार्यशैली कांग्रेस की, दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया. जबकि असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था कांग्रेस ग्रोथ रेट।  ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर समझाया पीएम मोदी ने कहा- सवाल ये है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? ये ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर है. एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी. आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है. एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी. आज की व्यवस्था कहती है, काम अभी होगा, समय पर होगा और बड़े पैमाने पर होगा. इसलिए 2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, ये उस भारत की कहानी है, जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना तय किया है।  कहां से आया ये शब्‍द ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द मुख्य रूप से 1950 से 1980 के दशक के बीच भारत की औसत आर्थिक विकास दर के लिए इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में भारत की जीडीपी वृद्धि दर करीब 3 से 3.5 प्रतिशत के आसपास रहती थी. जबकि आबादी तेजी से बढ़ रही थी. नतीजा यह हुआ कि प्रति व्यक्ति आय में बहुत सीमित बढ़ोतरी हुई. कहते हैं क‍ि इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले भारतीय अर्थशास्त्री राज कृष्‍णा ने किया था. उनका मकसद धीमी आर्थिक वृद्धि को व्यंग्यात्मक ढंग से बताना था. बाद में नेताओं ने इसका इस्‍तेमाल करना शुरू कर द‍िया, ज‍िसका ज‍िक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क‍िया।  पीएम मोदी ने इसे ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ क्यों कहा? प्रधानमंत्री मोदी का तर्क है कि धीमी विकास दर के लिए भारत की सभ्यता, संस्कृति या समाज को जिम्मेदार ठहराना गलत था. उनके मुताबिक उस समय देश में जिस तरह की आर्थिक नीतियां लागू थीं, वे कांग्रेस सरकारों द्वारा बनाई गई थीं. स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक भारत में लाइसेंस-परमिट राज, सरकारी नियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था और सीमित निजी निवेश का मॉडल लागू रहा. उद्योग लगाने से लेकर उत्पादन बढ़ाने तक लगभग हर काम के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत पड़ती थी. पीएम मोदी का कहना है कि विकास की धीमी गति की वजह यही नीतियां थीं. इसलिए उस दौर को हिंदू ग्रोथ रेट कहने के बजाय कांग्रेस ग्रोथ रेट कहना अधिक उचित होगा।  अटल सरकार का जिक्र क्यों किया? अपने भाषण में मोदी ने कहा कि देश ने पहली बार तेज विकास की झलक तब देखी जब अटल जी की सरकार आई. अटल सरकार के दौर में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना, ग्रामीण सड़क योजना, दूरसंचार क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे पर बड़े निवेश जैसे कदम उठाए गए थे. बीजेपी लंबे समय से दावा करती रही है कि आर्थिक सुधारों को गति देने और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव मजबूत करने में अटल सरकार की बड़ी भूमिका रही. मोदी ने इसी संदर्भ में अटल सरकार को तेज विकास का शुरुआती मॉडल बताया। 

मौसम का रौद्र रूप, कई जिलों में पेड़-बिजली खंभे गिरे, ब्लैकआउट जैसे हालात

हिसार  हरियाणा में मौसम ने अचानक रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। भीषण गर्मी और तपती लू के बीच प्रदेश के कई जिलों में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आंधी और तेज वर्षा से फतेहाबाद सहित राज्य के कई हिस्सों में सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और दुकानों के टीन शेड व होर्डिंग्स उखड़ गए, जिससे गुरुग्राम सहित कई इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई है। हांसी में करीब एक घंटे तक चली तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के ऊपर चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार से 13 जून तक पूरे प्रदेश में भारी वर्षा, गरज-चमक और ओलावृष्टि का ‘आरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वीरवार सुबह से ही मौसम के मिजाज बदले-बदले नजर आए। सरकार की ओर से मोबाइल पर इमरजेंसी अलर्ट जारी मौसम के इस रूप को देख हरियाणा सरकार व आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (चेतावनी संदेश) भेजा। इस संदेश में पंचकूला, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और पानीपत जिलों के निवासियों को घरों में रहने और तेज तूफान व ओलावृष्टि के प्रति सावधान रहने की सलाह दी है। प्रारंभिक सुस्ती के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। गति में तेजी आई है, लेकिन बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है। जून में अभी तक देश में औसतन 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस स्थिति को अलनीनो से जोड़कर देखा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रहा है। यूपी और बिहार में कई लोगों की मौत पश्चिम विक्षोभ से उत्तर भारत में वीरवार को अचानक मौसम ने करवट ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज आंधी-पानी और वज्रपात से 16 लोगों की मौत हो गई। जिनमें बिहार में 10 लोगों की जान गई, जबकि एक ही परिवार के चार लोगों समेत 10 झुलस गए। वहीं, कई जगह वर्षा से जलभराव हुआ।