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प्रधानमंत्री मोदी स्वदेशी के हैं ब्रांड एम्बेसडर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

हमने हर काल में आई चुनौतियों का सामना स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की ताकत से किया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री  मोदी स्वदेशी के हैं ब्रांड एम्बेसडर स्वावलंबन और स्वदेशी के बीज से ही आत्मनिर्भरता का बनेगा वटवृक्ष मुख्यमंत्री ने त्यौहारी सीजन में प्रदेशवासियों को स्वदेशी वस्तुएं खरीदने के लिए किया प्रेरित स्वदेशी अभियान की सफलता के लिए समाज की सक्रिय सहभागिता आवश्यक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वदेशी जागरण सप्ताह का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वदेशी जनजागरण रैली में हुए शामिल पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती से महात्मा गांधी की जयंती तक चलेगा स्वदेशी जागरण सप्ताह रवीन्द्र भवन में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वदेशी की ताकत से ही हमारी संस्कृति, हजारों हजार साल से अपने गौरव-गरिमा और समृद्धता के साथ विद्यमान है। हर युग और हर काल में आई चुनौतियों का हमने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की ताकत से ही सामना किया है। महात्मा गांधी ने स्वदेशी के बल पर ही देश को आजादी दिलाई थी। उन्होंने ने जन-जन को विदेशी वस्तुओं को त्यागने और विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के लिए प्रेरित किया। अपनी माटी, अपने देश और स्वदेशी व्यवस्था के प्रति हम सबके मन में सम्मान होना चाहिए। महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में बहुत समानता थी। महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय संस्कृति की लंबी विचार प्रक्रिया के संवाहक हैं। दोनों का ही विचार था कि स्वावलंबन और स्वदेशी के बीज से ही आत्मनिर्भरता का वटवृक्ष बनेगा और भारत, विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय की जंयती के अवसर पर मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद और स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राज्य स्तरीय स्वदेशी जागरण सप्ताह के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलाचरण के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैली में पैदल मार्च कर स्वदेशी अपनाने के लिए जन-जन को किया प्रेरित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ भारती, महात्मा गांधी और पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर गायत्री परिवार, ब्रह्म कुमारी संगठन, पंतजलि समूह और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने स्वदेशी के प्रति अपनी प्रतिबद्धिता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्वदेशी संकल्प समर्थन-पत्र सौंपे। कार्यक्रम में स्वदेशी पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वदेशी जागरण सप्ताह के शुभारंभ अवसर पर निकाली गई रैली में मानस भवन से पैदल मार्च करते हुए शामिल हुए। रैली के माध्यम से उद्योग जगत, व्यापारी बन्धुओं, दुकानदारों, विक्रेताओं, छात्र-छात्राओं और समस्त समाज के सदस्यों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। रैली स्वदेशी पर केंद्रित नारों के माध्यम से जन-जागरण करती हुई रवीन्द्र भवन पहुंची। भोपाल, बैतूल, शिवपुरी और उज्जैन में लगेंगे स्वदेशी मेले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वदेशी जागरण सप्ताह में स्वदेशी वस्तुओं का प्रचार-प्रसार करने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में स्वदेशी जागरण सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। यह महाअभियान प्रदेश के 313 विकासखंडों में पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती 25 सितम्बर से महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर तक चलेगा। प्रसन्नता का विषय है कि आगामी माहों में भोपाल, बैतूल, शिवपुरी और उज्जैन में स्वदेशी मेले आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी स्वदेशी के सबसे बड़े ब्रांड एम्बेसडर हैं। उनके मार्गदर्शन में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। आत्मनिर्भर बनते भारत की विकास यात्रा का मार्ग स्वदेशी से ही खुलता है। किसानों और कारीगरों के परिश्रम का सम्मान जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी मिट्टी, अपनी भूमि के प्रति विश्वास के भाव से ही हम अपने जीवन को सफल और धन्य कर सकते हैं। किसान मिट्टी में श्रम से ही अपने अन्न के भंडार भरते हैं। लघु उद्योग चलाने और उसमें काम करने वाले कारीगर के भी स्वावलंबन के मार्ग पर चलते हैं, उनके परिश्रम का सम्मान आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवरात्रि, दशहरा और दीपावली के त्योहारी सीजन में प्रदेशवासियों को स्वदेशी वस्तुएं खरीदने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अभियान की सफलता समाज के सहयोग के बिना मंजिल तक नहीं पहुंच सकती है। दीपक और उसकी बाती के लिए जिस प्रकार ऑक्सीजन जरूरी है, उसी प्रकार स्वदेशी जैसे अभियान की सफलता के लिए समाज की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद के उपाध्यक्ष  मोहन नागर, स्वर्णिम भारत वर्ष फाउण्डेशन, अखिल भारतीय सह प्रमुख स्वदेशी मेला, स्वाबलंबी भारत अभियान और सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मध्यप्रदेश के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।  

बेटियों को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम, लाडो लक्ष्मी ऐप से सीधे खाते में आएंगे ₹2100

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने आज पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना (DDLLYP) का मोबाइल एप लॉन्च किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे महिलाओं के लिए ऐतिहासिक पहल बताया। हरियाणा की लाखों महिलाओं के लिए आज 25 सितंबर का दिन काफी खास है। दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना (DDLLY) का मोबाइल एप लॉन्‍च हो गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पंचकूला से इस योजना के मोबाइल एप को लॉन्‍च कर द‍िया है। इसके साथ ही पात्र महिलाओं के खाते में 2100 रुपये आने का रास्ता साफ हो गया है। 1 नवंबर से खाते में पैसा आना शुरू हो जाएगा। इस योजना के लिए फॉर्म कैसे भरा जाएगा? मोबाइल से कैसे रजिस्ट्रेशन होगा? सीएम ने बताया कि एप लॉन्च होते ही 50 हजार महिलाओं ने इसे डाउनलोड कर लिया और 8 हजार महिलाओं ने पंजीकरण करवा लिया। उन्होंने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सहज बनाने के लिए दो टोल-फ्री नंबर भी जारी किए, ताकि हरियाणा की कोई भी महिला योजना का लाभ लेने में अड़चन न महसूस करे। इस योजना के लिए राज्य सरकार ने 5,000 करोड़ रुपए का बजट रखा है और पहले फेज में 21 लाख महिलाओं को लाभ दिया जाएगा। हर पात्र महिला को सीधे उनके बैंक खाते में हर महीने 2,100 रुपए दिए जाएंगे। CM ने अपने संबोधन में कहीं 5 बड़ी बातें….     सीएम ने एप को बताया ऐतिहासिक: सीएम नायब सिंह ने लाडो लक्ष्मी एप को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह एप योजना को पारदर्शी ढंग से लागू करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने इसे महिलाओं के लिए आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया।     लॉन्च होते ही 50 हजार डाउनलोड, 8 हजार रजिस्ट्रेशन: सैनी ने कहा कि जैसे ही एप लॉन्च हुआ, प्रदेश में 50 हजार महिलाओं ने इसे डाउनलोड कर लिया और 8 हजार महिलाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया। उन्होंने इस तेजी को प्रदेश की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का संकेत बताया।     टोल-फ्री नंबर महिलाओं के लिए मददगार: सीएम ने पंजीकरण में किसी भी दिक्कत को दूर करने के लिए दो टोल-फ्री नंबर 01724880500 और 18001802231 जारी किए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हरियाणा की किसी भी महिला को फॉर्म अप्लाई करने में कोई बाधा न आए।     पहले फेज में 21 लाख महिलाएं, कुल बजट 5,000 करोड़: सैनी ने कहा कि इस योजना के पहले फेज में 21 लाख महिलाओं को लाभ मिलेगा। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपए का बजट रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार में जितनी भी महिलाएं हों, सभी इसका लाभ ले सकेंगी।     851 करोड़ की नई योजनाओं और अस्पतालों का उद्घाटन: मुख्यमंत्री ने बताया कि आज 851 करोड़ रुपए की योजनाओं का उद्घाटन किया गया। उन्होंने 10 नए अस्पतालों का उद्घाटन भी किया और बताया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत गंभीर बीमारियों का इलाज 5 लाख रुपए तक फ्री है। सरकार ने 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए भी फ्री चिकित्सा सेवा लागू की है। लाडो लक्ष्मी योजना का विस्तार कब होगा लाडो लक्ष्मी योजना के पहले चरण में वो महिलाएं फॉर्म भर सकती हैं, जिनके परिवार की सालाना आय 1 लाख रुपये या उससे कम है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 21 लाख महिलाओं को पहले चरण में 2100 रुपये मिलेंगे। माना जा रहा है कि दूसरे चरण में 1.80 लाख रुपये सालाना आय वाले परिवारों को शामिल किया जा सकेगा। तीसरे चरण में 3 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों की महिलाओं को शामिल किया जा सकेगा। हालांकि तीसरे चरण के लिए 2028-29 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। लाडो लक्ष्मी योजना क्या है दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस योजना का मोबाइल एप लॉन्च कर दिया है। यह योजना क्या है, इसके लिए क्या पात्रता है, इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप 'दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना' पर क्लिक कर सकते हैं। लाडो लक्ष्मी योजना: अविवाहित महिलाओं को चाहिए ये कागज लाडो लक्ष्मी योजना हरियाणा की पात्रता की बात करें तो इस योजना के तहत अविवाहित और विवाहित दोनों महिलाएं आवेदन कर सकती हैं। लाडो लक्ष्मी योजना हरियाणा आवेदन के लिए मोबाइल में एप डाउनलोड करना होगा। अगर आप अविवाहित महिला हैं तो आपको कुछ कागजों की जरूरत होगी, इन्हें नोट कर लें.. आधार कार्ड और उससे जुड़ा मोबाइल नंबर परिवार के सभी सदस्यों के आधार नंबर बिजली कनेक्शन/मीटर नंबर हरियाणा कौशल विकास पंजीकरण नंबर (अगर है तो)अगर घर में किसी के पास वाहन है तो उसका पंजीकरण नंबर महिला के नाम से सक्रिय बैंक खाता नंबर और IFSC Code लाडो लक्ष्मी योजना: मोबाइल से ऐसे करें रजिस्ट्रेशन सबसे पहले अपने मोबाइल में लाडो लक्ष्मी योजना का एप डाउनलोड करें अपना मोबाइल नंबर भरें और OTP से वेरिफिकेशन करें अब जिस महिला के नाम से फॉर्म भरना है, उसका पूरा विवरण दर्ज करें इसके बाद लाभार्थी महिला के घर का पूरा पता भरें फिर लाभार्थी महिला के परिवार के सभी सदस्यों की जानकारी भरें अगले चरण में परिवार की सालाना आय का पूरा विवरण दें अब अपने बैंक खाते की पूरी जानकारी भरें, जिसमें IFSC Code हो आखिरी में मोबाइल कैमरे से लाइव फोटो क्लिक करें। लाडो लक्ष्मी योजना: मोबाइल से ऐसे करें रजिस्ट्रेशन लाडो लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन सिर्फ मोबाइल एप से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साफ कर दिया है कि 2100 रुपये वाली लाडो लक्ष्मी योजना के लिए आवेदन सिर्फ मोबाइल एप से ही होगा। इसके लिए सरल सेंटर या सीएससी जाने की कोई जरूरत नहीं है। न ही किसी अनजान लिंक पर क्लिक करें। लाडो लक्ष्मी योजना का हेल्पलाइन नंबर लाडो लक्ष्मी योजना का मोबाइल एप लॉन्च कर दिया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 2100 रुपये वाली योजना के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। यह टोल फ्री नंबर हैं: 0172-880500 1800-180-2231 मोबाइल एप लॉन्च होते ही 50000 से ज्यादा डाउनलोड मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में मंच से बताया कि लाडो लक्ष्मी योजना का मोबाइल एप लॉन्च होते ही 50 हजार से … Read more

रेल लॉन्चर से अग्नि-प्राइम का पहला परीक्षण सफल, भारत की मारक क्षमता को नई उड़ान

नईदिल्ली  भारत ने एक बड़ा कदम उठाया है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने इंटरमीडिएट रेंज अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण किया. यह नई पीढ़ी की मिसाइल रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर से छोड़ी गई. परीक्षण पूरी तरह सफल रहा. यह पहली बार है जब खास डिजाइन वाली रेल लॉन्चर से मिसाइल दागी गई. इससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास 'कैनिस्टराइज्ड' लॉन्च सिस्टम है, जो रेल नेटवर्क पर चलते हुए मिसाइल छोड़ सकता है.      मिसाइल के सफल टेस्ट की डिटेल्स पर नजर डालें तो यह लॉन्च विशेष रूप से डिजाइन किए गए रेल-बेस्ड मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से किया गया. इस सिस्टम की खासियत है कि यह बिना किसी पूर्व शर्त के देश के रेल नेटवर्क पर कहीं भी मूवमेंट कर सकता है. इससे लॉन्च में कम समय लगता है और दुश्मन की नजर से बचाव आसान होता है. डीआरडीओ यानी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन, स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड (एसएफसी) और सशस्त्र बलों की टीम ने इस परीक्षण को अंजाम दिया है. हालांकि, परीक्षण का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन यह रेल नेटवर्क की मोबिलिटी पर फोकस करता है, जो युद्धकाल में मिसाइल की सरवाइवेबिलिटी बढ़ाता है. क्या है अग्नि प्राइम मिसाइल की खासियत अग्नि प्राइम मिसाइल की विशेषताएं इसे और भी खास बनाती हैं. यह इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है. यह 2000 किलोमीटर तक के टारगेट को हिट कर सकती है. इसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी शामिल हैं. मसलन बेहतर एक्यूरेसी, कैनिस्टराइज्ड कॉन्फिगरेशन और फास्ट ऑपरेशनल रेडीनेस. यह अग्नि सीरीज की नई पीढ़ी की मिसाइल है, जो पुरानी अग्नि-1 और अग्नि-2 को रिप्लेस करने के लिए डिजाइन की गई है. कैनिस्टराइज्ड सिस्टम से मिसाइल को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और लॉन्च के लिए तैयार रखा जा सकता है, जो इसे रोड-मोबाइल, सबमरीन-लॉन्च और साइलो-बेस्ड सिस्टम्स के साथ कंप्लीमेंट करता है. इसकी हाई मोबिलिटी और लो विजिबिलिटी दुश्मन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होगी. अब सवाल है कि आखिर यह टेस्ट क्यों खास है? सबसे बड़ा कमाल यह है कि भारत ने पहली बार रेल से मिसाइल लॉन्च की क्षमता हासिल की है. यह दुनियाभर में अपने आप में दुर्लभ कारनामा है. रेल नेटवर्क की विशालता का फायदा उठाते हुए यह सिस्टम मिसाइल को तेजी से डिप्लॉय करने की अनुमति देता है. इससे स्ट्रैटेजिक सरप्राइज एलिमेंट बढ़ता है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन से जुड़ा है, क्योंकि पूरा सिस्टम स्वदेशी रूप से विकसित है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के लिए सिग्नल है, जहां बॉर्डर टेंशन के बीच भारत अपनी मिसाइल क्षमताओं को मजबूत कर रहा है. रेल-बेस्ड लॉन्च से न्यूक्लियर डिटरेंस गेम चेंजर साबित होगा, क्योंकि यह दुश्मन की सैटेलाइट मॉनिटरिंग से बचाव प्रदान करता है. यह टेस्ट इसलिए भी खास है क्योंकि ट्रेन से मिसाइल दागी जाएगी और फिर आगे बढ़ जाएगी. इससे दुश्मन ट्रैक नहीं कर पाएगा. राजनाथ सिंह ने क्या कहा? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘भारत ने इंटरमीडिएट रेंज अग्नि प्राइम मिसाइल का सफल लॉन्च रेल-बेस्ड मोबाइल लॉन्चर सिस्टम से किया है. यह नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल 2000 किमी तक की रेंज कवर करती है और विभिन्न एडवांस्ड फीचर्स से लैस है. उन्होंने डीआरडीओ, एसएफसी और सशस्त्र बलों को बधाई दी, साथ ही कहा कि यह भारत को रेल नेटवर्क से कैनिस्टराइज्ड लॉन्च सिस्टम विकसित करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल करता है. यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इस तरह से देखा जाए तो यह परीक्षण भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी में मील का पत्थर है. अग्नि-प्राइम क्या है? नई पीढ़ी की सुपर मिसाइल अग्नि-प्राइम अग्नि सीरीज की सबसे आधुनिक मिसाइल है. यह इंटरमीडिएट रेंज (मध्यम दूरी) वाली है, जो 2000 किलोमीटर तक निशाना साध सकती है. इसमें कई एडवांस्ड फीचर्स हैं…     सटीक निशाना: उन्नत नेविगेशन सिस्टम से दुश्मन के ठिकाने को सटीक मार सकती है.     तेज रिएक्शन: छोटे समय में लॉन्च हो सकती है, भले ही कम दिखाई दे.     मजबूत डिजाइन: कैनिस्टर (बंद बॉक्स) में रखी जाती है, जो इसे बारिश, धूल या गर्मी से बचाता है. यह मिसाइल भारत की स्ट्रेटेजिक फोर्सेस कमांड (एसएफसी) के लिए बनी है. परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया. रेल लॉन्चर की खासियत: कहीं भी, कभी भी हमला इस परीक्षण की सबसे बड़ी बात रेल आधारित मोबाइल लॉन्चर है. यह खास डिजाइन वाला सिस्टम है, जो…     रेल नेटवर्क पर बिना किसी तैयारी के चल सकता है.     क्रॉस कंट्री मोबिलिटी देता है, यानी जंगल, पहाड़ या मैदान में आसानी से ले जाया जा सकता है.     कम समय में लॉन्च: रुकते ही मिसाइल दाग सकता है.     कम विजिबिलिटी में काम: धुंध या रात में भी सुरक्षित. पहले मिसाइलें फिक्स्ड साइट्स से दागी जाती थीं, लेकिन यह लॉन्चर दुश्मन को चकमा दे सकता है. रेल पर चलते हुए लॉन्च करने की क्षमता से भारत की मिसाइल ताकत कई गुना बढ़ गई. परीक्षण की सफलता: भारत का गौरव डीआरडीओ, एसएफसी और भारतीय सेनाओं ने मिलकर यह परीक्षण किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी. उन्होंने कहा कि अग्नि-प्राइम के सफल टेस्ट से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिनके पास रेल नेटवर्क पर चलते हुए कैनिस्टर लॉन्च सिस्टम है. यह परीक्षण भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' योजना का हिस्सा है. अग्नि सीरीज की यह छठी मिसाइल है, जो पहले से ही सेना में तैनात हैं. क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षण?     रणनीतिक ताकत: दुश्मन को कहीं भी, कभी भी जवाब देने की क्षमता.     सुरक्षा बढ़ेगी: सीमाओं पर तेज रिएक्शन, घुसपैठ रोकेगी.     वैश्विक स्तर: अमेरिका, रूस जैसे देशों के साथ भारत की बराबरी.     भविष्य: अग्नि-प्राइम को जल्द सेना में शामिल किया जाएगा.  

योगी सरकार के नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को दी नई ऊंचाई

मिशन शक्ति-5  नीलम गुप्ता ने सैनिटरी पैड उद्यम से लिखी स्वावलंबन की कहानी  योगी सरकार के नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को दी नई ऊंचाई   नीलम ने सैनिटरी नैपकिन यूनिट से ग्रामीण महिलाओं को दिया रोजगार और सम्मान लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं मिशन शक्ति के तहत आज नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की एक मिसाल बनकर उभर रही हैं। इसी के तहत भदोही जनपद में 33 वर्षीय नीलम गुप्ता चुपचाप एक क्रांति की अगुवाई कर रही हैं। एक स्नातक, पूर्व ग्राम प्रधान और एक समर्पित स्वयं सहायता समूह (SHG) ‘प्रगति समूह’ की सदस्य के रूप में, नीलम की यात्रा ग्रामीण महिलाओं की उन उभरती आकांक्षाओं को दर्शाती है, जो अब केवल जीविका के लिए समझौता करने को तैयार नहीं हैं।  वर्ष 2020 में, जब उनके 'प्रगति समूह' में मासिक धर्म स्वास्थ्य और आजीविका के अंतर पर चर्चा हुई, तब नीलम को एक ऐसा रास्ता दिखाई दिया, जो दोनों समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता था। गाँव की अधिकांश महिलाओं के पास न तो सुलभ और किफायती सैनिटरी पैड की पहुँच थी और न ही वे सामाजिक कलंक के चलते उन्हें खरीदने में सहज थीं। साथ ही, सम्मानजनक रोजगार के अवसर भी सीमित थे। नीलम ने सोचा यदि एक उद्यम इन दोनों समस्याओं का हल बन सके तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। नीलम बताती हैं कि उनके लिए उद्यमिता केवल आय का साधन नहीं थी, बल्कि सामाजिक प्रभाव का एक माध्यम थी। आत्मनिर्भर क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) और स्वामी विवेकानंद शिक्षा समिति (SVSS) के सहयोग से डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स की पहल में भाग लेते हुए, महिलाओं द्वारा संचालित सैनिटरी नैपकिन उद्यम 'वंशिका लाइफकेयर' की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्थित एक निर्माता से थोक में सैनिटरी पैड मंगवाए, स्थानीय स्तर पर ब्रांडिंग और पैकेजिंग की व्यवस्था की इस मॉडल ने लागत को कम रखा और संचालन को गाँव के भीतर ही संभव बनाया। हालाँकि, किसी भी प्रथम-पीढ़ी की उद्यमी की तरह, नीलम की राह आसान नहीं रही। कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, ग्राहकों का आधार बनाना हर कदम पर नई चुनौतियाँ थीं। लेकिन हर सहकर्मी प्रशिक्षण, SHG बैठक और एक्सपोज़र विज़िट के साथ नीलम का आत्मविश्वास बढ़ता गया। 2024 तक, उन्होंने बड़ौदा यूपी बैंक से ₹10–12 लाख का ऋण प्राप्त कर लिया था।  SVSS द्वारा समर्थित वित्तीय नेटवर्किंग की मदद से और अपने स्वयं के कार्यबल का निर्माण शुरू किया। नीलम बताती हैं कि आज उनके साथ सात पूर्णकालिक कर्मचारी जुड़ी हैं जिसे वो रोजगार दी हैं। इसके अलावा अधिकतम माँग के समय में दस से अधिक अंशकालिक कर्मचारियों को इससे रोजगार मिलता है। उनकी टीम न केवल पैकेजिंग और वितरण का कार्य करती है, बल्कि मासिक धर्म स्वास्थ्य पर जागरूकता अभियान भी चलाती है। चार महिलाएँ घर-घर जाकर उत्पाद बेचती हैं, दो पुरुष कर्मचारी दुकानों तक आपूर्ति करते हैं और एक समर्पित प्रशिक्षक आस-पास के गाँवों और CLF में स्वास्थ्य सत्र आयोजित करता है। 'वंशिका लाइफकेयर' अब प्रति माह ₹40,000 से ₹60,000 तक का लाभ अर्जित कर रही है और पूरे समुदाय में सकारात्मक बदलाव की लहर फैला रही है। नीलम सिर्फ़ एक व्यवसाय नहीं चला रही हैं बल्कि वे एक सामाजिक व्यवस्था को चुनौती दे रही हैं। उनका कार्य मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं को तोड़ता है, ग्रामीण महिलाओं के लिए गरिमामयी रोजगार के अवसर पैदा करता है और यह दर्शाता है कि "गैर-पारंपरिक" उद्यम कैसा हो सकता है। वे डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स द्वारा "उच्च-विकास वाले जमीनी स्तर की उद्यमी" के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। एक ऐसी महिला जो समुदाय की ज़रूरतों और संरचनात्मक बदलाव के बीच सेतु बनाकर एक स्केलेबल एवं सामाजिक रूप से प्रासंगिक मॉडल चला रही है। उन्होंने अपने पहले ऋण का पुनर्भुगतान समय पर कर लिया है, जिससे उनका CIBIL स्कोर बेहतर हुआ है और अब वे अपने SHG तथा ग्राम संगठन की अन्य महिलाओं को सक्रिय रूप से मार्गदर्शन दे रही हैं। नीलम का अगला लक्ष्य है नवाचार। वे अब उन महिलाओं के लिए पुन: प्रयोज्य सूती पैड्स की एक नई श्रंखला शुरू करने जा रही हैं, जो डिस्पोज़ेबल विकल्प नहीं खरीद सकतीं। साथ ही, वे सरकारी स्कूलों के साथ मिलकर स्वच्छता किट वितरित करने की संभावनाएँ भी तलाश रही हैं।   नीलम आज आज प्रदेश की उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं जो वंचित महिलाओं को सहायता प्राप्तकर्ता से समाधान निर्माता बना रही हैं। वित्तीय पहुँच, कौशल, डिजिटल दृश्यता और बाज़ार संपर्क जब इन्हें सही पारिस्थितिकी तंत्र समर्थन प्राप्त हो, तो नीलम जैसी ग्रामीण महिलाएँ यह सिद्ध करती हैं कि नवाचार केवल महानगरों या इनक्यूबेटरों से नहीं आता। कभी-कभी, यह एक ऐसी महिला से आता है, जिसके पास एक दृढ़ संकल्प, SHG का मज़बूत नेटवर्क और बदलाव का नेतृत्व करने का साहस होता है।

सिंगिंग सेंसेशन रिहाना बनीं तीसरी बार मां, घर आई छोटी राजकुमारी

लंदन   इंटरनेशनल पॉप सिंगर और ग्रैमी अवॉर्ड विनर रिहाना तीसरी बार मां बन गई हैं. सिंगर ने नन्ही राजकुमारी को जन्म दिया है. रिहाना ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए चाहने वालों के साथ गुड न्यूज शेयर की. फैन्स और सेलेब्स उन्हें मां बनने की बधाई दे रहे हैं.  तीसरी बार मां बनीं रिहाना  रिहाना की आवाज का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता है. फैन्स उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर भी एक्साइटेड रहते हैं. अब सिंगर ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए मां बनने की गुड न्यूज शेयर की है. वो और उनके पार्टनर रैपर A$AP Rocky बेटी के पेरेंट बन गए हैं. A$AP Rocky और रिहाना की बेबी गर्ल का नाम रॉकी आयरिश मेयर्स है, जिसका जन्म 13 सितंबर को हुआ.  इंस्टाग्राम पर शेयर की गई तस्वीर में रिहाना अपनी बेटी को गोद में लिए दिख रही हैं. दूसरी तस्वीर में पिंक बॉक्सिंग ग्लव्स नजर आ रहे हैं. इस पोस्ट को सिर्फ दो घंटे में पांच मिलियन से ज्यादा लाइक्स मिल गए हैं. लाइक्स की ये गिनती बढ़ती ही जा रही है, जिससे पता चलता है कि रिहाना के कितने चाहने वाले हैं.  रॉकी का नाम उनके पिता के स्टेज नेम से प्रेरित है. कपल के पहले से दो बेटे हैं – Riot and RZA. रिहाना ने अपनी प्रेग्नेंसी की खबर इस साल मेट गाला में कन्फर्म की थी. मेट गाला में वो बेबी बंप फ्लॉन्ट करते हुए रेड कार्पेट पर पहुंची थीं. उनकी दूसरी प्रेग्नेंसी साल 2023 में सबके सामने आई थी, जब उन्होंने सुपर बाउल हाफटाइम शो में परफॉर्म किया था. अरबपति सिंगर हैं रिहाना  रिहाना का असली नाम रॉबिन फेंटी है. हाल ही में उनके पहले एलब्म ने 20 साल पूरे किए. 2016 के ऐंटी एल्बम के बाद से उन्होंने कोई नया स्टूडियो एल्बम रिलीज नहीं किया है. इसके बजाय उन्होंने अपने बिजनेस पर ध्यान दिया है, जिसमें फेंटी ब्यूटी कॉस्मेटिक लाइन और सैवेज एक्स फेंटी लिंजरी ब्रांड शामिल हैं. फोर्ब्स के मुताबिक, 37 साल की रिहाना की नेटवर्थ एक बिलियन डॉलर से ज्यादा है.  दो बेटों की मां रिहाना को चाहत थी कि उनकी एक बेटी हो और देखिए सिंगर की ये इच्छा भी पूरी हुई. 

अदालत का सख्त फरमान: दरगाहों में CCTV कैमरे का विरोध पड़ेगा भारी

अजमेर अजमेर की विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने का विरोध करने वालों पर अब कानूनी शिकंजा कसेगा। सिविल न्यायाधीश कनिष्ठ खंड एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग (अजमेर पश्चिम) मनमोहन चंदेल ने दरगाह नाजिम को आदेश जारी करते हुए कहा कि परिसर में हर संभावित जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति या समूह इसका विरोध करता है तो उनके खिलाफ कलेक्टर और एसपी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। दरअसल, दरगाह के आस्ताना में खिदमत की बारी को लेकर खादिमों के बीच हुए विवाद के मामले में अदालत ने नाजिम से संबंधित जगह की सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने को कहा था, लेकिन नाजिम ने अदालत को बताया कि उस क्षेत्र में कैमरे नहीं लगे हैं, इसलिए फुटेज उपलब्ध नहीं है। अदालत ने इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए दरगाह में तत्काल कैमरे लगाने के निर्देश जारी किए। अदालत ने नाजिम को यह भी विकल्प दिया कि यदि वे दरगाह कमेटी के खर्चे पर कैमरे लगाना चाहते हैं तो पांच दिन के भीतर कलेक्टर और एसपी को लिखित याचिका देकर उनसे सहयोग मांग सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि कैमरों का संचालन दरगाह कमेटी को नियमानुसार करना होगा। फैसले में अदालत ने कहा कि दरगाह परिसर में कैमरे लगाने का विरोध स्वार्थवश किया जाता है, जबकि भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर सुविधा और सुरक्षा की दृष्टि से कैमरे जरूरी हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में सीसीटीवी फुटेज विवादों के समाधान में बेहद मददगार साबित होते हैं। इसलिए कलेक्टर और एसपी से अपेक्षा की जाती है कि वे दरगाह कमेटी की मदद करें और विरोध करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करें। गौरतलब है कि अजमेर दरगाह में 2007 से सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। फिलहाल परिसर के करीब 75 प्रतिशत हिस्से को 57 कैमरों से कवर किया गया है। लेकिन आस्ताना सहित 25 प्रतिशत एरिया अब भी कैमरों की पहुंच से बाहर हैं। केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों से आस्ताना में भी कैमरे लगाने की कवायद शुरू की थी, मगर दरगाह के एक बड़े पक्ष द्वारा इसका विरोध किया गया। अब अदालत के सख्त रुख के बाद दरगाह परिसर में शेष हिस्सों, विशेषकर आस्ताना में, सीसीटीवी लगाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार भी आगामी 814वें उर्स से पहले दरगाह में सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता करने की दिशा में कदम उठा रही है। अदालत के इस आदेश से स्पष्ट है कि दरगाह परिसर में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना अब टाली नहीं जा सकेगी और विरोध करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बाघ, भालू और तेंदुए के दीदार का मौका: पेंच रिजर्व में प्रवेश शुल्क में 10% बढ़ोतरी

छिंदवाड़ा पेंच टाइगर रिजर्व (Pench Tiger Reserve) के कोर एरिया के तीनों गेट (जमतरा, कर्माझिरी और दूरिया) एक अक्टूबर से खुल जायेंगे। तीन माह बाद पयर्टक सफारी का लुफ्त उठाने के साथ बाघ का दीदार कर सकेंगे। हालांकि इस बार उन्हें दस प्रतिशत अधिक प्रवेश और गाइड की बढ़ी हुई फीस देनी होगी। तीन साल बाद शासन ने पेंच टाइगर रिजर्व में इंट्री फीस और गाइड की फीस बढ़ा दी है। इससे पहले वर्ष 2021 में फीस बढ़ाई गई थी। बता दें कि पेंच टाइगर रिजर्व का मुख्य (कोर) क्षेत्र मानसून सत्र के दौरान एक जुलाई से 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद रहता है। इस अवधि में टाइगर रिजर्व में सड़कों का रखरखाव और संरक्षण कार्य किए जाते हैं। लेकिन पर्यटको को बफर जोन में घूमने का मौका मिलता है। बफर एरिया में जानवरों की चहल-कदमी कम होती है। जबकि कोर जोन में अधिक रहती है। ऐसे में देश विदेश के पर्यटकों को कोर जोन के गेट खुलने का इंतजार रहता है। इसलिए प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व पंच टाइगर रिजर्व देश के बाघों के गढ़ में से एक है। भारत के मध्य में स्थित मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। पार्क में टाइगर, भारतीय तेंदुए भालू बारहसिंगा सहित जीव-जन्तु पाए जाते हैं। रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध नॉवेल जंगल बुकज में दर्शाए गए जंगल को पेंच टाइगर रिजर्व पर आधारित माना गया है। 2640 रुपए इंट्री और 800 रुपए गाइड शुल्क राज्य शासन ने पेंच टाइगर रिजर्व में प्रवेश फीस में वस प्रतिशत की वृद्धि की है। अभी तक कोर एरिया की प्रवेश फीस 2400 रुपए लगती थी, लेकिन एक अक्टूबर से 2640 रुपए भारतीय पर्यटकों से लिया जाएगा। विदेशी पर्यटकों को 4800 की जगह 5280 रुपए देने होंगे। इसके अलावा गाइड शुल्क 480 रुपए की जगह 800 रुपए निर्धारित किया गया है।  क्या है कोर और बफर एरिया हर नेशनल पार्क में कोर और बफर एरिया होता है। यह ऐसा क्षेत्र होता है जहां वन्यप्राणियों के रहने और जीवनशैली के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और भोजन उपलब्ध रहता है। वन क्षेत्र का सर्वाधिक घनत्व भी इसी क्षेत्र में देखने को मिलता है। किसी भी नेशनल पार्क में बीच के इलाके को कोर एरिया कहा जाता है। वहीं, कोर एरिया और करीबी ग्रामीण क्षेत्र के बीच का हिस्सा बफर जोन कहलाता है। इसमें कोर एरिया के मुकाबले जंगल और उसका घनत्व कम होता है।  एक अक्टूबर से पंच टाइगर रिजर्व के व के कोर एरिया के तीनों गेट खुल जाएंगे। पर्यटक सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे। शासन ने प्रवेश फीस में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।- रजनीश सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पंच टाइगर रिजर्व

विवाद निपटारे की दिशा में बड़ा कदम: वित्त मंत्री ने लॉन्च किया GST अपीलेट ट्रिब्यूनल

नई दिल्ली  देशभर में जीएसटी विवादों के निपटारे के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपीलीय अधिकरण (GSTAT) का औपचारिक शुभारंभ नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया. इसके साथ ही करदाताओं को अब एक स्वतंत्र और विशेष मंच मिल गया है, जहां वे अपनी अपील प्रस्तुत कर सकेंगे. जीएसटी विवाद निपटारे के लिए समर्पित मंच जीएसटीएटी की स्थापना से करदाताओं को एकसमान, पारदर्शी और सुलभ अपीलीय प्रक्रिया उपलब्ध होगी. यह संस्था जीएसटी अपीलीय प्राधिकरणों के आदेशों के खिलाफ अंतिम अपील सुनने का काम करेगी. जीएसटीएटी का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा, जबकि देशभर में 45 स्थानों पर 31 राज्य स्तरीय पीठें (बेंच) स्थापित की जाएंगी, ताकि करदाताओं को दूर-दराज़ से आकर अपील दायर न करनी पड़े. स्पष्ट भाषा और डिजिटल सुविधा पर जोर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कार्यक्रम में कहा कि जीएसटीएटी का फोकस स्पष्टता और दक्षता पर रहेगा. फैसले आसान और सरल भाषा में लिखे जाएंगे, फाइलिंग की प्रक्रिया डिजिटल-फर्स्ट होगी और सुनवाई तेज़ी से पूरी की जाएगी. साथ ही ‘ई-कोर्ट्स पोर्टल’ भी लॉन्च किया गया है, जिससे अपीलों को ऑनलाइन दायर और ट्रैक किया जा सकेगा. उन्होंने कहा, “जीएसटी विवादों का समयबद्ध समाधान एमएसएमई और निर्यातकों के लिए नकदी प्रवाह को आसान बनाएगा. सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और जीएसटी को सरलता और Ease of Living के सिद्धांतों पर लगातार विकसित किया जाएगा.” ‘वन नेशन, वन फोरम’ की ओर कदम सीतारमण ने बताया कि जीएसटीएटी वास्तव में 2017 में शुरू हुए “वन नेशन, वन टैक्स, वन मार्केट” को आगे बढ़ाते हुए “वन नेशन, वन फोरम फॉर फेयरनेस एंड सर्टेनिटी” की दिशा में एक बड़ा कदम है. उन्होंने कहा कि यह न केवल कारोबार करने की आसानी (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देगा बल्कि न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा. संरचना और कार्यप्रणाली हर बेंच में दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य होंगे—एक केंद्र से और एक राज्य से. इस तरह प्रत्येक अपील में कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण का संतुलन बना रहेगा. नेताओं और विशेषज्ञों की राय इस मौके पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, “जीएसटी अपीलीय अधिकरण से हम हर करदाता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि आपकी अपील सुनी जाएगी, आपके अधिकार सुरक्षित रहेंगे और न्याय में देरी नहीं होगी. जीएसटी अब केवल गुड एंड सिंपल टैक्स ही नहीं, बल्कि निष्पक्ष और भरोसेमंद कर प्रणाली बनेगा.” जीएसटीएटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा ने कहा कि यह अधिकरण लंबित अपीलों के बोझ को कम करेगा और भविष्य के विवादों के लिए न्यायिक व्याख्या तय करेगा. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग की सराहना की और विश्वास जताया कि यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा. जीएसटीएटी क्यों ज़रूरी? जीएसटीएटी एक सांविधिक निकाय है जो जीएसटी कानूनों के अंतर्गत गठित किया गया है. यह करदाताओं को कर विवादों के समाधान के लिए स्वतंत्र और अंतिम मंच प्रदान करेगा. इसका उद्देश्य न केवल विवाद निपटाना है, बल्कि कारोबारियों और नागरिकों के लिए समय पर, सरल और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित करना भी है.

सोनभद्र में झारखंड का कुख्यात नक्सली दबोचा गया, सुरक्षाबलों से हुई मुठभेड़ में था सक्रिय

रांची उत्तर प्रदेश के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने झारखंड के कुख्यात, 5 लाख रुपये के इनामी नक्सली को सोनभद्र जिले में गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएस ने पांच लाख रुपये के इनामी नक्सली उमेश खरवार उर्फ नगीना उर्फ डॉक्टर को मंगलवार की शाम सोनभद्र जिले में झारखंड की सीमा के नजदीक गिरफ्तार किया। अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने बताया कि विगत 14 सितंबर को पलामू में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में खरवार भी पकड़ा गया था, लेकिन वह किसी तरह बचकर भाग निकला था। उन्होंने बताया कि झारखंड एटीएस को पता लगा था कि खरवार उत्तर प्रदेश में कहीं छुपा है। यह जानकारी उन्होंने उत्तर प्रदेश के एटीएस को दी जिसके आधार पर एटीएस ने मोबाइल सर्विलांस एवं अन्य माध्यमों से जानकारी ली और मंगलवार को सोनभद्र जिले में झारखंड की सीमा पर स्थित गांव से खरवार को गिरफ्तार कर लिया।  

हैंडशेक विवाद पर थरूर का संदेश – ‘शांति के लिए जरूरी है व्यवहार में समझदारी’

 नई दिल्ली एशिया कप के फाइनल में भारत और पाकिस्तान के आमने-सामने होने की संभावना के बीच, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय खिलाड़ियों की ओर से पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ हाथ न मिलाने को लेकर उठे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.  बातचीत में थरूर ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ भावनाएं समझ में आती हैं, लेकिन खेल की भावना को राजनीति और सैन्य संघर्ष से अलग रखना चाहिए. उन्होंने कहा, 'व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि अगर हमें पाकिस्तान के खिलाफ इतना गुस्सा है, तो हमें खेलना ही नहीं चाहिए था. लेकिन अगर हम खेल रहे हैं, तो खेल की भावना के तहत खेलना चाहिए और उनसे हाथ मिलाने चाहिए थे. हमने यह पहले 1999 में भी किया था, जब करगिल युद्ध चल रहा था. उसी दिन जब हमारे सैनिक देश के लिए जान गंवा रहे थे, हम इंग्लैंड में वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ खेल रहे थे. तब भी हमने उनसे हाथ मिलाया था क्योंकि खेल की भावना अलग होती है और इसका देशों या सेनाओं के बीच चल रहे संघर्ष से कोई संबंध नहीं होता. यह मेरी राय है.' 'दोनों पक्षों में दिख रही खेल भावना की कमी' कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाओं से खेल भावना की कमी झलक रही है. उन्होंने कहा, 'अगर पाकिस्तानी टीम ने पहले अपमानित होने के बाद दूसरी बार हमें अपमानित किया, तो यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों में खेल भावना की कमी है.' गौरतलब है कि गुरुवार को भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों साहिबजादा फरहान और हारिस रऊफ के खिलाफ एशिया कप सुपर फोर मुकाबले (21 सितंबर) में उनके अनुचित व्यवहार के लिए आधिकारिक शिकायत दर्ज की. BCCI ने इसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और मैच रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट के पास भेजा. भारतीय टीम ने दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है.